Monday, 16 May 2022

सत्यसत्य पराजित होये कबउं न,असत्य के माथे न मौउर बन्हाई।।राज खुले मथुरा अरु काशी क सूरज के बदरी का छिपाई

सत्यसत्य पराजित होये कबउं न,असत्य के माथे न मौउर बन्हाई।।
राज खुले मथुरा अरु काशी क सूरज के बदरी का छिपाई ,।।
बन्द करा कबले करबा तहखाना से बाहर आये सच्चाई।।
मंदिर दिव्य गिरीश बने,फिर मस्जिद तोरि के देब गिराई।।

सूरज के जुगुनू कहबा,तरई कहबा पुनवासी क चंदा।।
का हठि फाने हया हठि  छाड़ि द,देश से द्रोह ई काम हउ गंदा।।
खंडित मूरति गर्भगृहे में देखात न बा कस रे मतिमंदा।।
देखा गिरीश बरैइ धुरिया कैइ, ज़ेवरी बैरी मचाइ छछन्दा।।

काशी अयोध्या भला मथुरा, कस मंन्दिर आधे में मस्जिद छाये।।
खंडित मूरति बोलत बाटैइ, कारन कौन सटैइ के बनाये।।
काल के गाल समाई गयें, इतिहास कवउं न गिरीश भुलाये।।
छिने रहा तलवार के बूते, सबूत तोहंई इतिहास देखाये।।

राष्ट्रपिता अउ चचा नेहरू मिलि बोयेन कांट गड़ैइ दिन राती।।
आँखि खुलि रहिगा सच देखिके पीटत बायेंन आपन छाती।
 पोष कबउं मनिहैंइ न गिरीश सचेत रहा डसिहैइ गउघाती।।
 मन्दिर मोर बतावत आपन बाबर औरंगजेब  क नाती।।

दाल गले न मिंयाँ सच मानिल, काहिके आगि लगावत बाया।।
राम से द्रोह किहा जिनि भूलि के,पाप कपारे चढ़ावत बाया।।
सांची कहिता कलंक हया, देशवा कैइ मान घटावत बाया।।
ऐसी क तैसी ओवैसी तोहार, गिरीश के पाठ पढ़ावत बाया।। पराजित होये कबउं न,असत्य के माथे न मौउर बन्हाई।।
राज खुले मथुरा अरु काशी क सूरज के बदरी का छिपाई ,।।
बन्द करा कबले करबा तहखाना से बाहर आये सच्चाई।।
मंदिर दिव्य गिरीश बने,फिर मस्जिद तोरि के देब गिराई।।

सूरज के जुगुनू कहबा,तरई कहबा पुनवासी क चंदा।।
का हठि फाने हया हठि  छाड़ि द,देश से द्रोह ई काम हउ गंदा।।
खंडित मूरति गर्भगृहे में देखात न बा कस रे मतिमंदा।।
देखा गिरीश बरैइ धुरिया कैइ, ज़ेवरी बैरी मचाइ छछन्दा।।

काशी अयोध्या भला मथुरा, कस मंन्दिर आधे में मस्जिद छाये।।
खंडित मूरति बोलत बाटैइ, कारन कौन सटैइ के बनाये।।
काल के गाल समाई गयें, इतिहास कवउं न गिरीश भुलाये।।
छिने रहा तलवार के बूते, सबूत तोहंई इतिहास देखाये।।

राष्ट्रपिता अउ चचा नेहरू मिलि बोयेन कांट गड़ैइ दिन राती।।
आँखि खुलि रहिगा सच देखिके पीटत बायेंन आपन छाती।
 पोष कबउं मनिहैंइ न गिरीश सचेत रहा डसिहैइ गउघाती।।
 मन्दिर मोर बतावत आपन बाबर औरंगजेब  क नाती।।

दाल गले न मिंयाँ सच मानिल, काहिके आगि लगावत बाया।।
राम से द्रोह किहा जिनि भूलि के,पाप कपारे चढ़ावत बाया।।
सांची कहिता कलंक हया, देशवा कैइ मान घटावत बाया।।
ऐसी क तैसी ओवैसी तोहार, गिरीश के पाठ पढ़ावत बाया।।

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