सार्वजनिक सच को स्वीकार करके आधा तीतर आधा बटेर देसी कुतिया मराठी बोल वाली चीज छोड़कर ही देश का विकास हो सकता है इसके लिए दो चीज अति आवश्यक हैं
जो काम 200 वर्ष में अंग्रेज और 1000 वर्ष में मुसलमान और 5000 वर्ष में यवन हूण मंगल तुर्क और अन्य विदेशी आक्रांता नहीं कर सके वह काम 80 वर्ष में ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने कर दिखाया
संपूर्ण खंडित भारत में क्रिसमस नई अंग्रेजी वर्ष और अंग्रेजी भाषा की पूर्ण रूप से स्वीकार्यता देखते हुए क्रिसमस को राष्ट्रीय पर्व अंग्रेजी को राष्ट्रीय भाषा और अंग्रेजी वर्ष को नया भारतीय वर्ष स्वीकार करके इसका विधेयक लोकसभा में पारित कर देना चाहिए जो ऐसे भी हो चुका है
दूसरा सत्ता पक्ष औरविपक्ष की इच्छा अनुसार देश की सभी भाषाओं और हिंदी भाषा को बोलने से पूर्ण प्रतिबंध लगा देना चाहिए सनातन धर्म और अन्य धर्म पर भी पूरी तरह रोक लग जानी चाहिए और जितने सनातन धर्म त्यौहार धर्मस्थल हैं उन सबको समाप्त कर देना चाहिए जो धीरे-धीरे अपने आप सत्ता पक्ष और विपक्ष मिलकर समाप्त कर रहे हैं
क्योंकि सभी राजनेताओं का वर्ग बड़े-बड़े अधिकारी और धनवान कर्मचारी धन कुबेर ठाकुर ब्राह्मण लाला बनिया पहले ही इन सबको स्वीकार कर चुके हैं और अब बचे हुए लोग बहुत तेजी से इसको अपना रहे हैं संपूर्ण देश में क्रिसमस मनाया जाता है नया अंग्रेजी वर्ष झूम कर मनाया जाता है और अंग्रेजी भाषा तो पहले ही देश की राष्ट्रीय भाषा संविधान में घोषित ही है ऊपर से भारत राष्ट्रमंडल का गुलाम देश अभी तक है उसे बाहर नहीं निकला है।
व्यर्थ में देश की जनता को मूर्ख बनाने का कोई लाभ नहीं है जितने जल्दी सच स्वीकार कर लीजिए उतना ही अच्छा है आज देश में केवल इसलिए लोग अपनी भाषण और हिंदी बोलते हैं कि जीवन भर अंग्रेजी सीखने के बाद भी वह लोग ठीक से अंग्रेजी बोल पढ़ लिख और समझ नहीं पाते हैं अन्य कोई कारण नहीं है
यदि किसी को मेरी इन बातों में कोई वास्तविक आपत्ति हो तो साहस करें और सामने आए अन्यथा इस पोस्ट को लगातार आगे बढ़ते जाएं जिससे सरकार का असली चेहरा सामने आए और यह सभी हो जाए डॉ दिलीप कुमार सिंह
Christmas must be declared India's national festival new English air must be declared India's new year and English language must be declared national language of India that is not Bharat by the ruling party and opposite parties which they already have done
Everybody is celebrating Christmas specially Sanatan hinduoj everybody celebrating new English year and everybody is wasting their valuable money to learning the English language without English language nothing is possible in India
If anybody is not agree with me tell me why when everybody already have done this and accepted this facts especially the people related to rashtriy swayamsevak Sangh that is known as RSS bhai Bhajpa that is known as BJP and other. Sa Sanatan security and people dr Dileep Kumar Singh
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