Showing posts with label #औरंगजेब को जिंदा फिर. Show all posts
Showing posts with label #औरंगजेब को जिंदा फिर. Show all posts

Friday, 2 January 2026

विधर्मी शैतान नर पिशाच और राक्षसों और उनके समर्थक भारतीय लोगों का मायाजाल और गद्दारी देखो वह औरंगजेब को जिंदा फिर और यह जीत को शैतान कहते हैं लेकिन कौन क्या है इस लेख को पढ़कर समझ जाइए

: विधर्मी शैतान नर पिशाच और राक्षसों और उनके समर्थक भारतीय लोगों का मायाजाल और गद्दारी देखो वह औरंगजेब को जिंदा फिर और यह जीत को शैतान कहते हैं लेकिन कौन क्या है इस लेख को पढ़कर समझ जाइए 
लेखक डा दिलीप सिंह जौनपुर


जंजीरों में कैद करके ज़ैनब को 750 किमी दूर कुफा (इराक) से दमास्कस (सीरिया) ले जाया गया।☠️

ये लंबी यात्रा जंजीरों में कैद बच्चों और महिलाओं पर बहुत भारी पड़ी और कई ने सर्दियों में तड़पकर दम तोड़ दिया। दमास्कस में पहुँचने के बाद उन्हें 72 घंटों तक बाज़ार के चौराहे पर खड़ा रखा गया।

उस समय जंग जीतने वाली फौज हारने वाली फौज के लोगों का कटा हुआ सिर साथ लेकर जाती थी और अपनी जीत का जश्न मनाती थी। इस पूरे सफर में जैनब के साथ उसके भाई हुसैन और अब्बास का कटा हुए सिर साथ लाया गया था।

बाद में यजीद से ज़ैनब ने माँग की थी की उन्हें शहीदों के सिर लौटा दिए जाएं और उन्हें एक घर दिया जाए जहाँ वो मातम मना सकें।।मोहम्मद साहब के गुजर जाने के तीन महीने में ही उनकी बेटी फातिमा की घर में घुसकर निर्मम हत्या कर दी गई थी।

उनके दामाद अली को रमजान में नमाज पढ़ते हुए मारा गया। बड़े नवासे को जहर दिया गया और छोटे नवासे को कर्बला के मैदान में तीन दिन तक भूख और प्यास से तड़पाने के बाद शहीद कर दिया गया।

जैनब मोहम्मद साहब की नवासी थी जो जंजीरों में कैद नए खलिफा यजीद के सामने खड़ी थी। कमाल की बात ये थी जब ये सब हो रहा था उस समय ना अमेरिका बना था, ना इजरायल था, ना हथियार बेचने वाली कंपनियाँ थी और जो ये सब कर रहे थे वो भी कोई गैर नहीं थे।

ये जौहर करती औरतें, तबाह होते विजननगर और देवगिरी, लाशों की बेकद्री, कटे हुए सिरों के पिरामिड ये सब तो भारत में बाद में आया। इस मानसिकता का सबसे पहला पीड़ित मोहम्मद साहब का परिवार ही बना। उधर कर्बला के मैदान में 70 का सामना हजारों से था, इधर चमकौर के युद्ध में 40 का 10 हजार से।

उधर मोहम्मद साहब का परिवार था, इधर गुरू गोविंद सिंह का। उधर शहीद हुसैन का कटा शीश उनकी चार साल की बेटी को खाने की थाल में सजा कर दिया गया, इधर दारा का कटा शीश शाहजहां को खाने की थाल में दिया गया। उधर जैनब यजीद से अपने भाईयों का कटा हुआ शीश माँग रही थी ताकि उनका मातम मनाया जा सके, इधर सोनीपत का कुशाल सिंह दहिया गुरू तेगबहादुर के शीश को ससम्मान वापस आनंदपुर साहिब भेजने के लिए अपना सिर काटकर मुगल सेना को सौंप रहे थे।

उधर शहीद हुसैन की छोटी बेटी को तड़पाया गया, इधर गुरू गोविंद सिंह के छोटे बच्चों को जिंदा दीवार में चूनवा दिया गया। उधर जैनब को कुफा (इराक) से दमास्कस ले जाया गया, इधर बंदा वीर बैरागी को जोकर बनाकर हाथी में लादकर लाहौर से दिल्ली लाया गया, जहाँ उनके मुँह में उनके तीन साल के बच्चे का माँस डाला गया। उधर कर्बला शहीदों के शवों की बेकद्री की गई, इधर गुरू गोविंद सिंह के बच्चों को दाह संस्कार के लिए जमीन सोने के सिक्के लगाकर बेची गई। जो जहालत 7वीं शताब्दी में अरब में थी…

वो 17वी शताब्दी में भारत में भी साफ दिख रही थी। फिर भी यजीद तो शैतान था और औरंगजेब जिंदा पीर।

No2 
*: एक चीज का चमत्कार मैंने देखा जितने लोगों ने क्रिसमस और नया अंग्रेजी वर्ष मनाया उन सबके एक सप्ताह में गाड़ी और बंगले हो गए बैंक खातों में करोड़ों रुपए आ गए वह एकदम स्वस्थ हो गए और उनके घर चहल-पहल मच गई और अंग्रेजी पढ़ने लिखने बोलने में वह शेक्सपियर से भी आगे निकल गए जितने लोग अफ्रीका के पहले नीग्रो से भी कल थे वह भी गोरे अंग्रेज हो गए फेयर एंड लवली फेल हो गई शायद इसीलिए लोग विशेष कर सनातनी लोग हैप्पी न्यू इंग्लिश ईयर और मैरी क्रिसमस मना कर धन्य हो जाते हैं ‌ हम जैसे तन मन धन से सनातनी लोग जैसे के तैसे रह गए डॉ दिलीप कुमार सिंह