Thursday, 4 June 2026

देश के मौसम की व्यापक भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 5 जून से लेकर 20 जून तक महाराष्ट्र मध्य प्रदेश उड़ीसा आंध्र प्रदेश बिहार झारखंड उत्तर प्रदेशपं

देश के मौसम की व्यापक भविष्यवाणी  -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 5 जून से लेकर 20 जून तक महाराष्ट्र मध्य प्रदेश उड़ीसा आंध्र प्रदेश बिहार झारखंड उत्तर प्रदेशपंजाब हरियाणा दिल्ली बेहद गर्म और पसीने से भरा रहेगा जब की 4 जून को दूसरी बार मानसून केरल में प्रवेश करेगा और केरल कर्नाटक गोवा तमिलनाडु में पांच जून तक फैल जाएगा 10 जून तक या महाराष्ट्र ‌ आंध्र प्रदेश उड़ीसा बंगाल सिक्किम नेपाल भूटान अरुणाचल प्रदेश असम मिजोरम त्रिपुरा मेघालय मणिपुर में फैल जाएगा 

15 जून तक यह गुजरात और मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के दक्षिणी भागों में पहुंच जाएगा ‌ जबकि 20 जून तक इसके दक्षिणी और पूर्वी उत्तर प्रदेश बिहार और दक्षिणी पूर्वी राजस्थान में पहुंचने की संभावनाएं हैं 25 जून तक यह दिल्ली और उत्तराखंड में पहुंच जाएगा 30 जून तक इसके संपूर्ण भारत में पहुंचकर फैल जाने की आशा है 


जौनपुर और आसपास भी है 18 से 21 जून के आसपास पहुंच रहा है तब तक भयंकर गर्मी कितना और प्रचंड अल्ट्रावायलेट किरणें बहुत ही भीषण रूप में रहेंगे इस कालखंड में कुछ आंधी तूफान वज्र पर बिजली की गरज और चमक के साथ होने वाली वर्षा जो दो बार संभव है कुछ राहत देगी बाकी समय भीषण और प्रचंड रहेगा ‌ लोग गर्मी से पागल हो जाएंगे जिसकी वजह है कि 40 से 43 डिग्री सेल्सियस का तापमान वास्तविक रूप में 47 से 51 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाएगा 18 जून के आसपास इसमें राहत की संभावना है 

इस बार का मानसून अनिश्चित अनियमित विलंबित और बीच-बीच में टूटने वाला रहेगा जिससे बार-बार सूखा और काल की स्थितियां पैदा होगी खेती किसानी बागवानी इत्यादि करने वालों को इसका ध्यान रखना होगा ‌ इसके साथ-साथ अचानक ही एक ही साथ भयानक वर्षा होने से भी भयंकर स्थितियां पैदा होगी वर्ष का समय कम लेकिन तीव्रता बहुत अधिक रहेगी अधिकांश वर्षा झंझा झकोर घन गर्जन वज्रपात वारिदमाला बिजली ‌‌ की गरज और चमक तथा भयानक वज्रपात के साथ होगा धन-धन और पशुओं के भीषण हानि होगी कुल मिलाकर अभी 10 दिनों तक भयानक गर्मी उमस पसीना झेलने को विवश रहना पड़ेगा हवा लगातार बदलती रहेगी और हवा की गति धीमी होने से गर्मी पसीना और भी अधिक होगा 

इन सभी का कारण वर्षा और हरियाली का पेड़ पौधों का लगातार भयानक रूप से घटते चले जाना सीमेंट कंक्रीट और पत्थर के जंगल और पक्की फर्श का लगातार विस्तार होना वातावरण में प्रदूषण गंदगी और विकिरण के कारण प्रचंड पराबैंगनी किरणों का निर्माण ओजोन की परत में छेद और संतुलन सूर्य में होने वाली बहुत ही भयानक परमाणु नाभिकीय अभिक्रियाएं और उत्सर्जित होने वाला विकिरण हिमालय का अमीर और तिब्बत के पत्थर तथा ध्रुव प्रदेशों में बर्फ और ग्लेशियर की कमी जगह-जगह रेडियो और मोबाइल के टावर जल स्रोतों का लगातार घटना और धरती की नमी का काम होना तथा भूमध्य सागर और विषुवत प्रदेशों में जलवायु में असंतुलन ‌ इसका प्रमुख कारण है प्राकृतिक संसाधनों का दोहन पत्थर और पर्वतों का वनस्पति और पेड़ पौधों से विहीन हो जाना जैसी परिस्थितियों प्रकृति को पूरी तरह से बदलकर उग्र और भयानक बना रहे हैं और यह सब कुछ आज की पढ़ी-लिखी वैज्ञानिक पीढ़ी का कमाल है यदि कुछ बहुत ही बड़ा कार्य इन सबको रोकने के लिए नहीं किया गया तो भयानक विनाश प्रचंड चक्रवात और तूफान ज्वालामुखी विस्फोट सुनामी लहरों और भूकंप मानव सभ्यता को तहस-नहस कर देंगे

Wednesday, 3 June 2026

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के दत्तोपंत ठेंगड़ी विधि संस्थान के अंतिम वर्ष के छात्रों की इंटर्नशिप अर्थात प्रशिक्षण जनपद न्यायाधीश सुशील कुमार शशि के निर्देशन और सचिव पूर्ण कालिक सुशील कुमार सिंह की देखरेख में प्रारंभ हुआ

आज वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के दत्तोपंत ठेंगड़ी विधि संस्थान के अंतिम वर्ष के छात्रों की इंटर्नशिप अर्थात प्रशिक्षण जनपद न्यायाधीश सुशील कुमार शशि के निर्देशन और सचिव पूर्ण कालिक सुशील कुमार सिंह की देखरेख में प्रारंभ हुआ 
इन छात्रों को वैदिक सहायता प्रतिरक्षा विभाग के मुख्य ‌ विधिक प्रतिरक्षा सलाहकार ‌ अनिल कुमार सिंह उपमुख्य प्रतिरक्षा सलाहकार डॉ दिलीप कुमार सिंह और सहायक विधिक प्रतिरक्षा सलाहकार प्रकाश तिवारी और अनुराग चौधरी के द्वारा एक महीने तक चलने वाले प्रशिक्षण हेतु प्रशिक्षण का शुभारंभ किया गया जिसमें विधि व्यवसाय और न्यायालय परिसर के बारे में विस्तार से बताया गया 
और उनको विधि व्यवसाय पूरा करने के बारे में और उसके बाद विस्तृत आयाम का विवेचन करते हुए विधि व्यवसाय के ‌ द्वारा विधिक सलाहकार अभियोजन अधिकारी न्यायाधीश कंपनी और अन्य ‌ क्षेत्र के बारे में बताया गया

विश्व का सबसे डरावना प्राणी सांप- डॉ दिलीप कुमार सिंह

विश्व का सबसे डरावना प्राणी सांप- डॉ दिलीप कुमार सिंह
सांप विश्व का एक ऐसा भयानक डरावना प्राणी है जिसका नाम सुनकर ही पूरे शरीर में भय की एक लहर दौड़ जाती है। यद्यपि संसार में एक से बढ़कर एक जीव जंतु और डरावनी चीज हैं जिनका नाम सुनकर शरीर में सिहरन दौड़ जाती है जैसे भूत-प्रेत पिशाच चुड़ैल डायन शैतान शेर भेड़िया लकड़बग्घा बिच्छू लेकिन इन सभी से डरावना और घातक प्राणी मानव जाति के लिए सर्प ही है। सांप पूरी दुनिया में अंटार्कटिका और न्यूजीलैंड को छोड़कर हर जगह पाए जाते हैं यह पानी और जमीन में पेड़ों पर जंगल और गुफाओं में निवास करते हैं और हर एक वातावरण के प्रति स्वयं को अनुकूलित कर लिया है इसलिए यह सृष्टि के सबसे सफल प्राणियों में से एक है ।

पूरी दुनिया में सांपों की 3900 के लगभग प्रजातियां पाई जाती हैं जिसमें 20% विषैली और 80% विषहीन होती हैं इसी तरह भारत में भी 69 प्रजातियां सांप की पाई जाती हैं जिसमें 29 समुद्र में और 40 जमीन पर मिलती हैं और इसमें से केवल 10% सांप विषैले और जानलेवा होते हैं पूरी दुनिया में सांपों की अधिकांश प्रजातियां जहरीली नहीं होती हैं

सांप के पैर नहीं होते यह सरीसृप अर्थात रेंग कर चलने वाले प्राणियों में से आते हैं इनके पैर की जगह शल्क होते हैं जिनकी सहायता से वे चलते हैं इनके बाहरी कान नहीं होते लेकिन आंतरिक कान होते हैं जिनमें हड्डियों की सहायता से जमीन से आने वाली आवाज को सुनते हैं इसके अलावा मस्तिष्क की विशेष ग्रहण की सहायता से हवा से आई हुई आवाजों को भी पकड़ लेते हैं इनकी श्वांस नली में एक फेफड़ा होता है और यह हर वर्ष अपना केंचुल उतारने रहते हैं जिसे कायांतरण या नवीनीकरण कहते हैं इनके नीचे का जबड़ा बहुत ही लचीला होता है जिसकी सहायता से अपने से बड़े शिकार को भी निगल जाते हैं सभी सांप मांसाहारी होते हैं यह विषैले और विषहीन दोनों प्रकार के होते हैं जो घात लगाकर या पीछा करके अपने शिकार को पकड़ते हैं।

सांप एक शीत रुधिर का प्राणी होता है अर्थात इसका शरीर अपने को मनुष्य की तरह वातावरण के अनुकूल नहीं कर सकता इसीलिए जाड़ों में बिल के अंदर चले जाते हैं और गर्मियों में बाहर आ जाते हैं जिससे उनका शरीर सर्दी गर्मी के प्रति अनुकूलित रहे इनका हृदय तीन खानों में विभक्त रहता है इनका पाचन तंत्र बहुत ही विकसित और संतुलित रहता है आंखों में पलक नहीं होता है इनके तेज और खोखले दांत होते हैं तो केवल खांच या अर्धचंद्र की तरह दो निशान पड़ते हैं जबकि विषहीन सांप के काटने पर छोटे-छोटे कई निशान पड़ जाते हैं सभी परिवार के साथ लंबे समय तक कभी-कभी 6 महीने से एक वर्ष तक बिना खाए पिए रह सकते हैं इसलिए महीने में एक बार भोजन उनके लिए पर्याप्त होता है। 

गर्मी और वर्षा ऋतु में सभी सांप बहुत ही भयानक और उत्तेजित रहते हैं और इसी समय में सबसे अधिक लोगों को काटते हैं जाड़े में वह लगभग निष्क्रिय रहते हैं क्योंकि ठंड में स्वयं को अनुकूलित न कर पाने के कारण धरती के अंदर या बिल में छुप जाते हैं वर्षा काल में सांपों का प्रजनन काल भी होता है इसलिए उस समय यह बहुत ही उग्र और भयानक होते हैं उसे समय उनसे बचना चाहिए। इस समय सांप क्रोध में काटते हैं और पूरा जहर शरीर में छोड़ देते हैं जिससे व्यक्तियों के मरने की संभावनाएं बहुत अधिक बढ़ जाती हैं इसके अलावा वर्षा काल में हर जगह पानी भर जाने से अपने शिकार को पकड़ने के लिए वह प्राय घर गांव बस्ती में आ जाते हैं इसलिए भी वर्षा काल में सांपों की घटनाएं काटने की बहुत अधिक हो जाती हैं। इसलिए हमेशा जूते चप्पल पहन कर टॉर्च लेकर लाठी के साथ निकालनाचाहिए।

दुनिया में सभी रंग रूप के सांप पाए जाते हैं लाल पीला काला सफेद नीला हीरे जैसा सोने जैसा होते हैं।सबसे छोटा सांप 10 सेंटीमीटर का थ्रेड नाग होता है जबकि सबसे बड़ा 10 मीटर का अफ्रीकी अजगर होता है किंग कोबरा भी काफी लंबा सांप होता है जो 18 से 20 फीट लंबा हो सकता है प्रमुख विषैले सांपों में नाग काला नाग भूरा नाग करैत वाइपर रसल वाइपर सा स्किल्ड वाइपर नागराज या किंग कोबरा बांस पिट वाईपर मांबा ब्लैक मांबा टाइपेन प्रमुख है जबकि विषहीन आंखों में अजगर ओलिव कीलबैक चेकर्ड कील बैक बेडडोम डोड़हा अषढ़िया धामिन घोड़ा पछाड़ जैसे सांप प्रमुख है। अजगर और अमेज़न नदी में पाए जाने वाले सांप सबसे लंबे होते हैं।

सांप का जहर दो प्रकार का होता है एक हीमोटोक्सिन और दूसरा न्यूरोटोक्सीन हीमोटोएक्सइन में बेहोशी और लकवा जैसी चीज हो जाती हैं जबकि न्यूरोटोक्सीन में खून का जाम जाना अंदर खून का रक्त स्राव होना जैसी घटनाएं होती हैं सांप अंडे और बच्चे दोनों देते हैं यह बहुत अद्भुत प्राणी है जो आदिकाल से लोगों के लिए  भय और जिज्ञासा का कारण बने हुए हैं माना जाता है कि जब हलाहल विष का पान भगवान शिव कर रहे थे तब उसे जहर की कुछ बूंदे धरती पर गिरी और उसको पीने वाले सांप और अन्य प्राणी विषैले हो गए थे सांप का जहर इतना घातक होता है की एक सांप सैकड़ो लोगों को मार सकता है सबसे अधिक जहर नागराज अर्थात किंग कोबरा में होता है और सबसे कम टाइपेन और करेत जैसे सांपों में होता है लेकिन जिस सांप में जितना ही काम जहर होता है वह उतना ही अधिक भयानक और घातक होता है।

 प्राचीन काल में नाग और सांप जातियां रहा करती थी और नाग कन्याएं भी होती थी याद रहे सांप या नाग नहीं होते थे बल्कि इनके बीच रहने वाले जो इनके विशेषज्ञ होते थे और सांपों से संबंधित झाड़ फूंक और उनके जहर से संबंधित काम करते थे उन्हें सांप और नाग जातियां कहा जाता था और वह सर्प और नाग बाहुल्य क्षेत्र में रहा करते थे नाग और सांपों की बहुत सी जातियां हुआ करती थी प्राचीन भारत के प्रसिद्ध और चर्चित नागों में वासुकी कर्कोटक र
तक्षक कुलक पद्म महापद्म शंखचूण धर्म चक्र अश्व सेन शेषनाग जैसे प्रसिद्ध नाग सरदार थे तो वहीं प्रमुख नाग कन्याओं में उलूपी कद्रू  अहिलवती सुलोचना मनसा जया विषहर शामिलबारी देव दोतली नागकन्याएं प्रमुख थी भगवान शिव की पंच नागकन्याएं थीं और उन्हीं पंच कन्याएं जो श्रावण महीने की शुक्ल पक्ष पंचमी को हुई थी के नाम पर नाग पंचमी आज भी मनाई जाती है कद्रू से नाग और क्रोधवशा से सांपों की प्रजातियां उत्पन्न हुई।

यह तो है नाग और सांप प्रजातियों की बात अब सीधे आते हैं कि सांपों से बचने के लिए क्या किया जाए इसके लिए कुछ ऐसे पेड़ पौधे जड़ी बूटियां जैसे सर्प बूटी सर्पगंधा हैं जिनको लगाने पर सांप भाग जाते हैं है घर में प्रवेश नहीं करती मिट्टी का तेल का प्रयोग करने पर भी सांप और जहरीले जीव जंतु घर में प्रवेश नहीं करते अंधेरी और नम जगह घर में नहीं होनी चाहिए क्योंकि सांप गर्मी में वहीं पर छुप जाते हैं जैसे अंधेरा कोना भूसा और खरपतवार जैसे स्थान उपली रखने का स्थान यहां बहुत सावधानी रखना चाहिए हमेशा नाजा नाम की होम्योपैथिक दवा घर में रखना चाहिए।

 अगर सांप काट ले तो बिल्कुल घबराए ने पहले देख की विषैला सांप हैं या विषहीन बिना समय गंवाएं सबसे पास के सुविधाओं वाले अस्पताल में जाएं ध्यान रहे जितना ही शांत रहेंगे और स्थिर रहेंगे सांप का विष उतना ही कम चढ़ेगा और अगर तेजी से भागेंगे घबरा जाएंगे तो रक्त संचार बहुत तेज हो जाएगा जिसके साथ सांप का विष भी शरीर में तेजी से  चढ़ेगा।पहले का मरीज को सोने न दें और तुरंत विषरोधी इंजेक्शन दिलाए जब तक डॉक्टर के यहां न पहुंचे तब तक घाव को साबुन से साफ करें घाव के ऊपर पट्टी बांधना घी पिलाना भी लाभदायक होता है 000 नंबर पर डायल करने से भी सेवाएं मिलती हैं 

अगर किसी ऐसे स्थान पर हैं जहां कोई भी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है तो झार फूंक देसी जड़ी बूटियां का और घी तथा काली मिर्च का नीम की पत्ती का और इस तरह किसी भी अन्य उपाय का प्रयोग कर सकते हैं अगर मुंह में कोई घाव न हो तो उसको चूस कर निकल भी सकते हैं लेकिन इसमें बहुत सावधानी आवश्यक है ।इससे व्यक्ति को मनोवैज्ञानिक मनोबल भी मिलता है अधिकांश बार सांप हल्के से काटते हैं जिससे व्यक्ति मरता नहीं है इन सब बातों का ध्यान रखना चाहिए नहीं तो कई बार घबरा कर व्यक्ति विषहीन सांप के काटने से भी मर जाते हैं।

सांपों के बारे में कुछ सच्चाई और किंवदंती जान लेना भी आवश्यक है जैसे कि क्या सचमुच नाग कन्या होती है विज्ञान इसको नहीं मानता लेकिन सच यही है कि नागकन्या होती हैं जैसे कि अर्जुन ने उलूपी नाम की नाग कन्या और घटोत्कच ने अहिल्यावती नाम की नाग कन्या से विवाह किया था अगला प्रश्न है क्या नागों में मणि होती है इस पर भी विज्ञान सही उत्तर नहीं देता है लेकिन सही उत्तर यही है कि नागों में मणि होती है जो हल्के नीले श्वेत रंग की चमकदार होती है मैंने स्वयं दो बार बांदा के जंगलों में और एक बार जौनपुर में नाग की मणि देखी है लेकिन लाखों नागों में किसी एक में नागमणि होती है जो बहुत अधिक आयु के हो जाते हैं ।

नागमणि बहुत अधिक शक्तिशाली और धन संपदा देने वाला होता है अगला प्रश्न है क्या सांप बदला लेते हैं विज्ञान इसके बारे में नकारात्मक उत्तर देता है लेकिन यह सच है कि अनेक प्रत्यक्ष प्रमाण है कि नाग बदला लेते हैं मैं खुद एक बार गांव में नाग मारा था तो उसकी नागिन कई दिनों तक मेरे पीछे पड़ी रही और एक बार पेड़ से कूद कर मेरे ऊपर आक्रमण कर दिया लेकिन मेरे पीछे चल रहे हैं लोगों के चिल्लाने पर मैं बच गया और उसे मार डाला अगला प्रश्न है क्या सचमुच मंत्र शक्ति और जड़ी बूटियां से सांप का भी सुधर जाता है इसका उत्तर निश्चित रूप से हां में है लेकिन सच्ची जानकारी होना चाहिए 

एक प्रश्न यह भी है कि अगर सांप से आमना सामना हो तो उसको मार दें या छोड़ दें मेरा मानना है कि सांप साक्षात काल के स्वरूप हैं और दुश्मन या काल को कभी भी छोड़ना नहीं चाहिए और मार देना चाहिए हां अगर फण वाले नाग अर्थात कोबरा है तो उसको छोड़ा जा सकता है अगला प्रश्न है क्या राजा जन्मेजय आस्तिक मुनि और कश्यप का नाम लेने से सांप भाग जाते हैं तो इसका उत्तर है बिल्कुल ।इसको करके आप देख सकते हैं इन तीनों का नाम लेकर अगर नाग को भागने को कहते हैं तो वह भाग जाता है कारण चाहे जो हो 

वैसे एक बात जान लीजिए सांप साक्षात काल के रूप हैं इसलिए जिसका काल आ जाता है उसी को यह काटते हैं इसीलिए महाकाल भगवान शिव ने इन्हें अपना आभूषण बना रखा है नाग  अर्थात कोबरा जल्दी बिना गलती के किसी को नहीं काटते और काटने के पहले फुफकार कर चेतावनी देते हैं लेकिन वाइपर करेत और रसल वाइपर कहीं भी किसी को भी बिना गलती के भी काट लेते हैं और कोई चेतावनी भी नहीं देते हैं। 

एक बात और है कि सभी सर्प प्रजातियां सारे संसार के विष को हवा के द्वारा सोचती रहती हैं और संसार विषैला होने से बचा रहता है इसके अलावा खेती बागवानी और मनुष्य के तमाम शत्रुओं को मार कर खा जाती हैं नहीं तो अन्य जानवर जैसे चूहे इत्यादि बेकाबू हो जाते हैं अगर विषैले सांप ने काट लिया है तो नीम की पत्ती कड़वी नहीं लगती और व्यक्ति दांत से जौ का दाना तोड़ नहीं पता यह पक्की पहचान है सभी सांपों को जहर भगवान ने उनकी सुरक्षा के लिए दिया है अन्यथा कब के वे समाप्त हो गए होते। दुनिया में कुछ ऐसे भी सांप होते हैं जो पेड़ों से छलांग दूर-दूर तक लगाते हैं तो लगता है कि वह उड़ रहे हैं सांप की आंखों में लगातार नहीं देखना चाहिए वरना व्यक्ति सम्मोहित हो जाता है ।
नाग पंचमी को विधि विधान से जो पूजा की जाती है उसके द्वारा एक विचित्र सुगंध उत्पन्न होती है जिसकी सुगंध से सभी जहरीली सांप प्रजातियां घर और समाज से दूर खेतों और जंगलों में भाग जाती है यही नाग पंचमी की पूजा का महत्व है

किस प्रकार सर्प प्रजाति ने संपूर्ण दुनिया पर अपना अधिकार जमा रखा है और प्रकृति में अपने को बखूबी सुंदर ढंग से जल थल जंगली पेड़ पौधे हर जगह के लिए अनुकूलित कर लिया है यह विश्व का सबसे आश्चर्यजनक प्राणी भी है वहीं यह दुनिया का सबसे भयंकर प्राणी भी है जिसका प्रमाण यह है कि अचानक सांप के आगे आ जाने से व्यक्ति हक्का-बक्का हो जाता है मैंने तो अपने जीवन में सैकड़ो विषैले सांपों को मारा है सांप को मारने का सबसे अच्छा तरीका उसके सिर पर प्रहार करना होता है अगर हल्का तेज प्रहार भी सिर पर पड़ गया तो सांप बेहोश हो जाता है या मर जाता है अगर आप तेज दौड़ते हैं तो कोई सांप आपको पकड़ नहीं पाएगा क्योंकि सांप के अधिकतम गति 15 से 25 किलोमीटर प्रति घंटा होती है और संकट पड़ने पर कोई भी व्यक्ति 30 से 35 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से भाग लेता है इस प्रकार सांप दुनिया का सबसे अद्भुत और डरावना जीव है।

नेपाल के बीरगंज से नाबालिग लड़की लापता, सूचना देने वाले को मिलेगा 1 लाख रुपये का पुरस्कार

नेपाल के बीरगंज से नाबालिग लड़की लापता, सूचना देने वाले को मिलेगा 1 लाख रुपये का पुरस्कार
नेपाल के जिला पर्सा अंतर्गत बीरगंज निवासी नाबालिग लड़की सिद्धि मिश्रा दिनांक 29 अप्रैल 2026 से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता है। परिजनों द्वारा काफी खोजबीन एवं प्रयास किए जाने के बावजूद अब तक लड़की का कोई सुराग नहीं मिल पाया है, जिससे परिवार बेहद चिंतित एवं परेशान है।

मामले को गंभीरता से लेते हुए इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा द्वारा लड़की की सुरक्षित बरामदगी अथवा सही सूचना देने वाले व्यक्ति को ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) का पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।

उन्होंने आमजन से अपील की है कि यदि किसी भी व्यक्ति को सिद्धि मिश्रा के संबंध में कोई जानकारी प्राप्त होती है अथवा कहीं दिखाई देती है, तो तत्काल नीचे दिए गए नंबर पर संपर्क करें।
लोगों से इस सूचना को अधिक से अधिक साझा करने की अपील की गई है, ताकि नाबालिग लड़की जल्द से जल्द सुरक्षित अपने परिवार तक पहुँच सके।

हम आपको बताते चलें इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा एक बहुत ही कर्तव्य निष्ठ अधिकारी है और हमेशा अपने कार्य को पूरी निष्ठा और लगन के साथ  करते हैं और यही कारण है कि आज तक उन्होंने अपनी  टीम के साथ बहुत सारे बच्चों को रेस्क्यू किया है । वास्तव मे इंस्पेक्टर शर्मा जैसे अधिकारी विभाग की अमूल्य संपत्ति है। क्योंकि पुलिस सेवा के साथ-साथ मानवता की सच्ची सेवा भी कर रहे हैं इंस्पेक्टर शर्मा।

संपर्क सूत्र:
इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा
मोबाइल / WhatsApp: +91-8853703761
इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा

Sunday, 31 May 2026

मशीयत रोशनी नविता सिमरन का स्पोर्ट्स कॉलेज के फाइनल ट्रायल के लिए चयन*

*मशीयत  रोशनी  नविता  सिमरन का स्पोर्ट्स कॉलेज के फाइनल ट्रायल के लिए चयन* 
क्रीड़ा अधिकारी संतोष कुमार 
मशीयत फातिमा 
रोशनी 
सिमरन 
नविता 
कोच फरहत अली खान

स्पोर्ट्स स्टेडियम रामपुर यूपी की चौदह आयु वर्ग हॉकी बालिकाओं का स्पोर्ट्स कॉलेज का फाइनल ट्रायल के लिए चयन हुआ। फाइनल ट्रायल तीन चार जून को स्पोर्ट्स कॉलेज गोरखपुर में होगा।
मुरादाबाद मंडल स्तर पर हुए चयन में फिजिकल और स्किल में किया टॉप 
चारों बालिकाएँ आइडेंटिटी एजुकेशनल एकेडमी बग़ी की छात्राएं हैं।
क्रीड़ा अधिकारी संतोष कुमार की देखरेख में हॉकी प्रशिक्षक फ़रहत अली खान से प्रशिक्षण ले रही है।
बालिकाएँ बहुत निर्धन परिवार से हैं।
रोशनी राजपूत तेरह वर्ष के पिता किसान हैं जबकी नविता राजपूत तेरह वर्ष के पिता आरा मशीन पर काम करते हैं सिमरन राजपूत दस वर्ष के पिता मजदूरी और मशीयत फातिमा ग्यारह वर्ष के पिता अंशकालिक मानदेय हॉकी प्रशिक्षक हैं।
सभी बालिकाओं का मिशन देश के लिए खेलना है और ओलिंपिक और विश्व स्तर पर गोल्ड मेडल लाना है।
फरहत अली खान ने बताया की उनके पास चालीस खिलाड़ी अभ्यास करते हैं जिनमें चौदह वर्ष आयु वर्ग की अठाईस बालिकाएँ है जो रोज़ दो घंटे सुबह और दो घंटे शाम प्रेक्टिस करती हैं।
फ़रहत अली खान ने कहा यह बालिकाएं एक दिन देश के लिए ज़रूर खेलेंगी ये इनका हाकी के प्रती अभ्यास शौक़ और जुनून बताता है ।
 यह मेरा विश्वास ही नहीं भगवान पर भरोसा भी है।मै अभ्यास के साथ उपरवाले ऊपर वाले से प्रार्थना है।
क्रीड़ा अधिकारी भी इनके खेल और अभ्यास से पूरी तरह संतुष्ट हैं और पूरी सुविधाएं देते हैं।

Friday, 29 May 2026

जब आतंक इस्लाम का नाम ओढ़ लेता है: शास्त्रीय विद्वत्ता वास्तव में क्या कहती है?*

*जब आतंक इस्लाम का नाम ओढ़ लेता है: शास्त्रीय विद्वत्ता वास्तव में क्या कहती है?*

माली में जिहादी समूहों द्वारा किए गए हमलों ने एक बार फिर एक असहज सवाल को सतह पर ला दिया है। क्या इस्लाम के नाम पर किए गए हिंसा के ये कृत्य, किसी भी तरह से उस शिक्षा के अनुरूप हैं जो इस्लाम वास्तव में देता है? इसका उत्तर—जो एक हज़ार से अधिक वर्षों के इस्लामी न्यायशास्त्र और पैगंबर की परंपरा से लिया गया है—स्पष्ट रूप से 'नहीं' है। JNIM, अल-कायदा और ISIS जैसे समूह मुसलमानों को यह विश्वास दिलाना चाहते हैं कि वे एक धर्मयुद्ध लड़ रहे हैं। लेकिन जब उनके कार्यों को कुरान, सुन्नत और महान शास्त्रीय विद्वानों के लेखों की कसौटी पर कसा जाता है, तो जो सामने आता है वह 'जिहाद' नहीं है। यह जिहाद का एक घिनौना विकृत रूप है।
इस्लामी युद्ध में नागरिकों—जिनमें महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और निहत्थे लोग शामिल हैं—की हत्या करना स्पष्ट रूप से वर्जित है। यह कोई आधुनिक पुनर्व्याख्या नहीं है। यह एक स्थापित शास्त्रीय कानून है। पैगंबर ने बार-बार अपने कमांडरों को निर्देश दिया कि वे उन लोगों को न मारें जिनके हाथों में हथियार न हों। अल-नवावी और इब्न कय्यिम जैसे विद्वानों ने इन नियमों को विस्तार से लिपिबद्ध किया है। शास्त्रीय इस्लामी कानून घरों को नष्ट करने, फसलों और संपत्ति को जलाने, और आम लोगों के बीच जान-बूझकर डर फैलाने पर भी रोक लगाता है। स्वयं कुरान भी संयम बरतने का आदेश देता है। सूरह अल-बकरा (2:190) विश्वासियों को निर्देश देता है कि वे युद्ध के दौरान भी सीमाओं का उल्लंघन न करें। सूरह अल-मुमताहना (60:8) आदेश देता है कि शत्रुओं के साथ भी निष्पक्षता से व्यवहार किया जाए, बशर्ते उन्होंने हथियार न उठाए हों। ये कोई गौण आयतें नहीं हैं। ये संघर्ष से संबंधित इस्लामी कानून की नैतिक रीढ़ हैं।
शास्त्रीय विद्वानों ने 'खवारिज' नामक एक खतरनाक संप्रदाय की पहचान की थी; ये ऐसे समूह थे जिन्होंने साथी मुसलमानों को 'धर्मत्यागी' घोषित करने और उसी आधार पर उनकी हत्या करने का जिम्मा खुद उठा लिया था। पैगंबर ने उनके आगमन के प्रति आगाह किया था। उन्होंने उन्हें ऐसे लोगों के रूप में वर्णित किया था जो कुरान का पाठ तो करेंगे, लेकिन जिनका ईमान उनके गले से नीचे नहीं उतरेगा। JNIM, ISIS और उनके सहयोगी ठीक इसी कार्यप्रणाली का पालन करते हैं। 'तकफीर' के सिद्धांत के माध्यम से—जिसमें वे आम मुसलमानों, विद्वानों, सैनिकों और नागरिकों को 'काफ़िर' (अविश्वासी) घोषित कर देते हैं और उन्हें मृत्यु का पात्र मानते हैं—वे ठीक उसी पैटर्न को दोहराते हैं जिसे इस्लामी विद्वत्ता ने चौदह शताब्दियों से लगातार निंदित किया है। उनका नाम या लेबल भले ही अलग हो, लेकिन उनका भटकाव (विचलन) बिल्कुल एक जैसा है।
शास्त्रीय इस्लामी न्यायशास्त्र में, सशस्त्र जिहाद कभी भी कोई 'स्वतंत्र' (freelance) या मनमानी करने वाला उपक्रम नहीं रहा है। यह विचार कि कोई भी व्यक्ति या छोटा-सा गुट युद्ध की घोषणा कर सकता है, सोशल मीडिया के ज़रिए लड़ाकों की भर्ती कर सकता है, और धर्म के नाम पर हत्याएँ शुरू कर सकता है—इस्लामी परंपरा में इसका कोई आधार नहीं है। इस्लाम शांति समझौतों को भी असाधारण महत्व देता है। संधियाँ, युद्धविराम और कूटनीतिक व्यवस्थाएँ इस्लामी चिंतन में कमज़ोरी के संकेत नहीं हैं। वे दायित्व हैं। पैगंबर ने स्वयं हुदैबिया की संधि में कठिन शर्तें स्वीकार की थीं, क्योंकि वे समझते थे कि जीवन और समुदाय की रक्षा युद्ध के मैदान की शान से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
इन गुटों को खत्म करने के लिए यह समझना ज़रूरी है कि वे भर्ती कैसे करते हैं। वे धार्मिक तर्कों से सफल नहीं होते। बल्कि, वे गरीबी, राजनीतिक हताशा, पहचान का संकट, नैतिक तनाव, अशिक्षा आदि जैसी वास्तविक पीड़ाओं का फायदा उठाकर सफल होते हैं। वे हिंसा को एक धार्मिक कर्तव्य के रूप में पेश करते हैं, जबकि बदले में किसी उद्देश्य या इनाम का वादा करते हैं। उन युवा पुरुषों से, जिन्होंने कभी कोई धार्मिक ग्रंथ नहीं पढ़ा है, कहा जाता है कि उनकी शिकायतें धार्मिक प्रकृति की हैं और हिंसा ही उनका एकमात्र समाधान है। मुस्लिम समुदायों, विद्वानों और नागरिक समाज को इस हेरफेर का पर्दाफाश करना चाहिए।
धार्मिक विद्वान, शिक्षक और सामुदायिक नेता, जिनकी जड़ें प्रामाणिक ज्ञान में गहरी जमी हैं, इस क्षेत्र में सबसे विश्वसनीय आवाज़ें हैं। उनका अधिकार उस भरोसे से आता है जो समुदाय उन लोगों पर करते हैं, जिन्होंने वास्तव में इस परंपरा का अध्ययन किया है। इस्लाम के नाम पर, चाहे मुसलमानों के खिलाफ हो या गैर-मुसलमानों के खिलाफ, की गई हिंसा शहादत नहीं है। यह जिहाद नहीं है। उसी परंपरा के अनुसार, जिसका प्रतिनिधित्व करने का दावा ये गुट करते हैं, यह एक गंभीर और दंडनीय भटकाव है। विद्वान यह जानते थे। ग्रंथ स्पष्ट हैं। अब हमारा काम यह सुनिश्चित करना है कि यह स्पष्टता हर उस कोने तक पहुँचे, जहाँ संदेह और निराशा को विनाश में बदला जा रहा है।
फ़रहत अली खान 
एम ए गोल्ड मेडलिस्ट

अंतरराष्ट्रीय एवरेस्ट दिवस******************

अंतरराष्ट्रीय एवरेस्ट दिवस
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माउंट एवरेस्ट दिवस हर साल 29 मई को मनाया जाता है। यह तारीख पर्वतारोहियों सर एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे शेरपा को सम्मानित करने के लिए चुनी गई थी, जिन्होंने 1953 में इसी दिन पर्वत पर चढ़ाई की थी। माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करना एक ऐसी उपलब्धि है जिसका सपना बहुत से लोग देखते हैं, लेकिन कुछ ही लोग इसे हासिल कर पाते हैं। दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत पर चढ़ाई करना जानलेवा जोखिमों से भरा होता है। इसके लिए बेहतरीन शारीरिक क्षमता की आवश्यकता होती है। जो पर्वतारोही इस शिखर तक पहुंचते हैं, वे आमतौर पर सबसे ऊंचे पर्वत पर चढ़ाई करने से पहले कई वर्षों तक प्रशिक्षण लेते हैं। एक कुशल पर्वतारोही को शिखर तक पहुंचने में लगभग दो महीने लग सकते हैं।

माउंट एवरेस्ट दिवस का इतिहास
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माउंट एवरेस्ट समुद्र तल से सबसे ऊँचा पर्वत है। यह हिमालय की महालंगुर हिमालय उप-श्रृंखला में स्थित है। इसकी ऊँचाई लगभग 29,000 फीट है। कई पर्वतारोही, जिनमें अत्यधिक अनुभवी पर्वतारोही भी शामिल हैं, इस पर्वत की ओर आकर्षित होते हैं। पर्वत पर चढ़ने के दो मार्ग हैं। पहला मानक मार्ग है जो नेपाल के दक्षिण-पूर्व से शिखर तक पहुँचता है। दूसरा मार्ग तिब्बत के उत्तर से शिखर तक पहुँचता है। पर्वत पर चढ़ने के लिए उत्कृष्ट तकनीकी कौशल की आवश्यकता होती है। इसमें ऊँचाई पर होने वाली बीमारी, खराब मौसम, तेज़ हवाएँ और हिमस्खलन तथा खुंबू हिमपात जैसे गंभीर जोखिम भी शामिल हैं। कुछ पर्वतारोहियों ने चढ़ाई का प्रयास किया है लेकिन वे वापस नहीं लौट पाए।

माउंट एवरेस्ट दिवस उन साहसी पर्वतारोहियों को सम्मानित करने का अवसर है जो विशाल एवरेस्ट पर चढ़ाई का प्रयास करते हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ संकल्प से कुछ भी संभव है। यह दिवस वीरता और सहनशक्ति का प्रतीक है। माउंट एवरेस्ट जैसी खतरनाक चढ़ाई शुरू करने के लिए बहुत साहस की आवश्यकता होती है। विश्वभर के लोग इससे प्रेरित होकर और अधिक जोखिम उठाने और अपने सपनों को साकार करने के लिए आगे बढ़ सकते हैं। यह दिवस लोगों को दिखाता है कि वे अपने जीवन में आने वाली किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं। यह दिवस इस प्राकृतिक चमत्कार के बारे में जागरूकता बढ़ाता है। इससे अंततः पर्वत के संरक्षण में सहायता मिलती है। पर्यावरण के प्राकृतिक खजानों का संरक्षण हमारे समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण है।

एवरेस्ट का महत्व
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8,848 मीटर (29,029 फीट) की ऊंचाई वाला माउंट एवरेस्ट पृथ्वी का सबसे ऊंचा पर्वत है। पृथ्वी के सबसे ऊंचे पर्वत के रूप में, यह मानव कल्पना को मोहित करता है, मानव साहस को चुनौती देता है और दृढ़ संकल्प की परीक्षा लेता है। एवरेस्ट अन्वेषण की खोज, व्यक्तिगत सीमाओं की खोज और साहसिक भावना का प्रतीक है जो मानवता को असाधारण उपलब्धियां हासिल करने के लिए प्रेरित करती है।

एवरेस्ट सबसे ऊँचा पर्वत है
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एवरेस्ट को सर्वोच्च पर्वत के रूप में मान्यता 19वीं शताब्दी के मध्य में मिली। 1856 में, भारत के महान त्रिकोणमितीय सर्वेक्षण ने इसकी ऊँचाई निर्धारित की और इसे शिखर XV नाम दिया। बाद में, 1865 में, भारत के पूर्व सर्वेयर जनरल सर जॉर्ज एवरेस्ट के सम्मान में इस शिखर का आधिकारिक नाम माउंट एवरेस्ट रखा गया। इस खोज ने भूगोल और अन्वेषण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।

राजेन्द्र गुप्ता,
ज्योतिषी और हस्तरेखाविद
मो. 9116089175
नोट- अगर आप अपना भविष्य जानना चाहते हैं तो ऊपर दिए गए मोबाइल नंबर पर कॉल करके या व्हाट्स एप पर मैसेज भेजकर पहले शर्तें जान लेवें, इसी के बाद अपनी बर्थ डिटेल और हैंडप्रिंट्स भेजें।