Monday, 16 February 2026

दीवानी न्यायालय जौनपुर में महाशक्तिशाली बम की फैल गई भगदड़ सड़कों पर पैर रखने की जगह नहीं बची हाहाकार मचा देखो विस्फोट होता है कि आजमगढ़ की तरह केवल अफवाह ही निकलती है जौनपुर: .

ख़बर सूत्रों से::;दीवानी न्यायालय जौनपुर में महाशक्तिशाली बम की फैल गई भगदड़ सड़कों पर पैर रखने की जगह नहीं बची हाहाकार मचा देखो विस्फोट होता है कि आजमगढ़ की तरह केवल अफवाह ही निकलती है      परिसर में अफरा तफरी का माहौल 
 जौनपुर: .                सूचना की कॉपी 
        सोर्स  : डिफेंस काउंसिल डा दिलीप सिंह 
जौनपुर कचहरी और पुलिस लाइन को बम से उड़ाने की धमकी

जौनपुर: दिवानी कचहरी और पुलिस लाइन को बम से उड़ाने की धमकी भरा एक ई-मेल मंगलवार की सुबह पुलिस अधीक्षक के सरकारी ई-मेल पर आते ही हड़कंप मच गया। तत्काल पुलिस की अलग अलग टीमों ने कचहरी पहुंचकर सघन जांच अभियान शुरू कर दिया। बार एसोसिएशन के सहयोग से कचहरी को खाली कराया जा रहा है। पुलिस और बार के पदाधिकारियों ने सभी से अपील किया कि कचहरी को जितना जल्दी हो परिसर को खाली कर दें।  जिस समय धमकी भरा ई-मेल आया उस समय कचहरी में करीब 5 से 8 हजार लोगों की भीड़ थी।  अचानक बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल प्राप्त होते ही हड़कंप की स्थिति मन गई। लोग अचानक जब कचहरी से बाहर निकले तो बाहर गांधी तिराहे तक भीषण जाम लग गया। पुलिस लाइन में भी आंतरिक दस्ते की टीम ने सघन जांच अभियान शुरू किया। एसएसपी कुंवर अनुपम सिंह ने बताया कि ई-मेल मिलने के बाद जांच की जा रही है। अभी तक कुछ मिला नहीं है।

 भारत का कोई सबसे चालाक व्यक्ति भी किसी अन्य देश की सीमा पार नहीं कर सकता है यहां सैना पुलिस बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स और ‌ सात स्तरीयगुप्तचर तंत्र के रहते हुए भी 100/1000/ 100000 लाख नहीं करोड़ों की संख्या में ‌ बांग्लादेशी रोहिंग्या आतंकी घुस बैठिए पाकिस्तान और तमाम मुस्लिम देशों को लोग  ‌ एक अंदामाद की तरह नहीं डरता से भाई रोक-टोक आ रहे हैं ‌ 1947 से यही कम चल रहा है सरकार कोई हो प्रधानमंत्री कोई हो लेकिन लाल बहादुर शास्त्री को छोड़कर इनका अवैध घुसपैठ कभी नहीं रुक सबसे अधिक मोदी जी के शासनकाल में आए हैं और इनकी संख्या 20 करोड़ हो गई है किसी भी सुरक्षा तंत्र या एजेंसी का अब कोई मतलब नहीं रह गया है जब जहां चाहेंगे आतंकी वही विस्फोट करके उड़ा देंगे इसके पहले भी अनगिनत हमले हुए हैं कुछ नहीं कर पाए लोग आखिर भारत में ही क्यों ‌ दूसरे देश में घुसते ही तुरंत गोली मार दिया जाता है और यहां कबाब बिरयानी खिलाकर 20 से 30 साल तक उसका परीक्षण किया जाता है।दुनिया का हर व्यक्ति घुस जाता है एक ही अर्थ हो सकता है या तो सरकार ऐसा चाहती होगी या तो सारे तंत्र बिक चुके हैं।

‌‌ और यह भी निश्चित है कि कहीं ना कहीं ऐसा कांड होगा क्योंकि शैतान सारे देश में फैल चुके हैं और 2047 तक अपना लक्ष्य पाने के लिए हर रास्ता अपनाने को तैयार हैं जब सब लोग निश्चित हो जाएंगे तब यह कांड होगा और जहां कह रहे हैं वहां नहीं होगा इस देश की हालत इतनी खराब है कि थाने में घुसकर भी पूरे थाने को बम से उड़ाया जा सकता है बाकी की बात ही छोड़ दीजिए सबसे सुरक्षित सैन्य विभाग में पुलवामा जैसा कांड हो सकता है तो पूरा देश असुरक्षित ही है आप स्वयं सुरक्षित रहें तभी सुरक्षित रह पाएंगे‌ इसमें कहीं ना कहीं योगी जी के विरुद्ध भी षड्यंत्र और साजिश गहरा है

आज वर्ष का प्रथम सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है लेकिन भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए भारत में ग्रहण और उसके सूतक का कोई प्रभाव नहीं होगा इसलिए आज भारतीय पंचांगों में इस ग्रहण की कोई परिचर्चा नहीं की गई है

आज वर्ष का प्रथम सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है लेकिन भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए भारत में ग्रहण और उसके सूतक का कोई प्रभाव नहीं होगा इसलिए आज भारतीय पंचांगों में इस ग्रहण की कोई परिचर्चा नहीं की गई है 

यह ग्रहण अंटार्कटिका ऑस्ट्रेलिया और दक्षिणी अमेरिका तथा आसपास के कुछ भागों में दिखाई देगा भारतीय समय के अनुसार या 3:26 मिनट दोपहर के बाद से प्रारंभ होगा और रात में 7:58 तक चलेगा और 5:37 पर इसका चरम उत्कर्ष होगा 

हमारे केंद्र ने इस ग्रहण का इसलिए वर्णन नहीं किया कि इसका भारत में ना तो कोई असर होगा और ना कहीं से दिखाई देगा 

फिर भी यदि कोई सावधानी करना चाहे तो खाने-पीने की सामानों में तुलसी के पत्ते एवं दूब घास डालकर आराम से बिना किसी दुविधा के अपना कार्य रोज की तरह करते रहें 

इस ग्रहण का प्रभाव भारत पर कुछ विशेष नहीं पड़ेगा लेकिन इतना अवश्य है कि इसका प्रभाव अमेरिका ऑस्ट्रेलिया दक्षिण पूर्वी एशिया चीन और अरब देशों पर भीषण रूप से पड़ेगा जिसके कारण हिंसा मार्केट अचानक भयानक युद्ध समुद्र में उथल-पुथल सुनामी लहरें ज्वालामुखी विस्फोट एवं कुछ मध्यम तेज भूकंप एक सप्ताह के अंदर इन क्षेत्रों में एवं आसपास आ सकते हैं कभी-कभी इसके प्रभाव से दूरस्थ भागों में भी ऐसी घटनाएं हो सकती हैं रोग बीमारियों का प्रभाव भी उपयुक्त क्षेत्र में अधिक होगा-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं दीर्घकालिक ‌ विज्ञान अनुसंधान केंद्रजौनपुर

Sunday, 15 February 2026

हक से नतीजों तक: MGNREGA को VBGRAM-G से बदलने का मामला*

*हक से नतीजों तक: MGNREGA को VBGRAM-G से बदलने का मामला* 

पब्लिक पॉलिसी को नतीजों से आंका जाना चाहिए, न कि भावना, पुरानी यादों या राजनीतिक निशानियों से। MGNREGA को रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण एक्ट, 2025 के लिए विकसित भारत गारंटी से बदलने पर उम्मीद के मुताबिक विरोध शुरू हो गया है। आलोचकों का कहना है कि नया कानून अधिकारों को कमजोर करता है, राज्यों पर बोझ डालता है, ताकत को सेंट्रलाइज़ करता है और महात्मा गांधी की विरासत को मिटा देता है। हालांकि, ये आपत्तियां असल पॉलिसी डिज़ाइन के बजाय राजनीतिक सोच के बारे में ज़्यादा बताती हैं।

यह मुख्य दावा कि VB GRAM G अधिकारों पर आधारित फ्रेमवर्क को खत्म करता है, इस गलत सोच पर आधारित है कि कानूनी हक अपने आप ताकत में बदल जाता है। MGNREGA के साथ दो दशकों का अनुभव इस सोच की सीमाएं दिखाता है। लगातार वेतन में देरी, मांग पूरी न होना, खराब क्वालिटी की संपत्ति बनाना और असमान तरीके से लागू करना, उस अधिकार को लगातार खोखला कर रहा है जिसे न्यायसंगत माना जाना चाहिए था।  एक अधिकार जो समय पर, बड़े पैमाने पर और लगातार नहीं दिया जा सकता, वह असल में अधिकार के तौर पर काम करना बंद कर देता है। VB GRAM G रोज़गार में मदद देने की राज्य की ज़िम्मेदारी को वापस नहीं लेता है। यह टाइमलाइन लागू करके, फंडिंग को नतीजों से जोड़कर और जवाबदेही को इंस्टीट्यूशनल बनाकर उस ज़िम्मेदारी को फिर से बनाता है। यह कमज़ोरी नहीं है। यह सुधार है।

असल में, नया एक्ट भारत की विकास की सोच में एक ज़रूरी बदलाव को दिखाता है। MGNREGA को बहुत ज़्यादा ग्रामीण संकट के समय में राहत देने के तरीके के तौर पर डिज़ाइन किया गया था। संकट में रोज़गार को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक स्थायी हिस्सा मानने से ठहराव के सामान्य होने का खतरा है। VB GRAM G साफ़ तौर पर शॉर्ट टर्म रोज़गार को रोज़ी-रोटी बनाने, स्किलिंग और प्रोडक्टिव एसेट बनाने से जोड़ता है। काम के दिनों की गिनती से लेकर सस्टेनेबल आजीविका बनाने तक का बदलाव एक बुनियादी सच्चाई को पहचानता है। इज़्ज़त सिर्फ़ से नहीं मिलती रोज़गार से नहीं, बल्कि इनकम में स्थिरता, प्रोडक्टिविटी और ऊपर की ओर बढ़ने की संभावना से आती है। एक वेलफेयर सिस्टम जो समय के साथ नहीं बदलता, वह गरीबी खत्म करने के बजाय निर्भरता को और मज़बूत करता है।

राज्यों पर बढ़ते वित्तीय बोझ की चिंताएं भी जांच करने पर खत्म हो जाती हैं।

पहले के फ्रेमवर्क के तहत, राज्यों को केंद्रीय फंड मिलने में देरी, बिना प्लान वाली देनदारियों और पिछली लागत शेयरिंग विवादों के कारण अक्सर अनिश्चितता का सामना करना पड़ता था।

VB GRAM G स्पष्ट वित्तीय भूमिकाएं, मध्यम अवधि की प्लानिंग और नतीजों से जुड़ी फंडिंग लाता है। अनुमान लगाना ही असली वित्तीय संघवाद की नींव है। राज्यों को आग बुझाने के बजाय प्लान बनाने की क्षमता मिलती है। इससे प्रशासनिक स्वायत्तता कमज़ोर होने के बजाय मज़बूत होती है।

इसी तरह, अत्यधिक केंद्रीकरण के आरोप राष्ट्रीय मानक तय करने को माइक्रोमैनेजमेंट के साथ मिला देते हैं। इतने बड़े कार्यक्रम में, पारदर्शिता, पात्रता और निगरानी के लिए एक जैसे बेंचमार्क ज़रूरी हैं। स्थानीय संस्थाएं काम की पहचान करना, प्रोजेक्ट को लागू करना और डिलीवरी की निगरानी करना जारी रखती हैं। जो बदला है, वह है परफॉर्मेंस और जवाबदेही पर ज़ोर। बिना निगरानी के विकेंद्रीकरण से ऐतिहासिक रूप से मज़दूरों से ज़्यादा बिचौलियों को फायदा हुआ है। VB GRAM G उस संरचनात्मक कमी को ठीक करने की कोशिश करता है।

सबसे भावनात्मक आलोचना कानून से महात्मा गांधी का नाम हटाने से जुड़ी है। यह तर्क असलियत की जगह प्रतीकों को रखता है। गांधी के आर्थिक दर्शन ने उत्पादक श्रम, आत्मनिर्भरता, विकेंद्रीकृत विकास और नैतिक ज़िम्मेदारी पर ज़ोर दिया। सिस्टम की अक्षमता को बर्दाश्त करते हुए उनका नाम बनाए रखना उस विरासत का सम्मान नहीं है। एक कार्यक्रम जो टिकाऊ सामुदायिक संपत्तियों, स्थानीय उद्यम और आजीविका की स्थिरता पर केंद्रित है, वह गांधीवादी सिद्धांतों के कहीं ज़्यादा करीब है, बजाय इसके कि जो जीवनयापन के काम को अपने आप में एक लक्ष्य मानता है।

सुधार से स्वाभाविक रूप से विरोध होता है, खासकर जब यह पुरानी राजनीतिक कहानियों को बाधित करता है। लेकिन सामाजिक नीति समय के साथ स्थिर नहीं रह सकती। भारत की जनसंख्या का दबाव, वित्तीय मजबूरियां और विकास की महत्वाकांक्षाएं इसकी मांग करती हैं। ऐसे साधन जो मापने योग्य नतीजे देते हैं। VB GRAM G ग्रामीण रोज़गार नीति को इनपुट-आधारित अधिकार से आउटकम-आधारित गारंटी की ओर ले जाने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास है। इस बदलाव के लिए सतर्कता, सुधार और अनुशासित कार्यान्वयन की ज़रूरत होगी। लेकिन सुधार का पूरी तरह से विरोध करना ज़्यादा बड़ी विफलता होगी।

नीति निर्माताओं के सामने असली विकल्प करुणा और दक्षता, या अधिकारों और सुधार के बीच नहीं है। यह एक ऐसी कल्याणकारी व्यवस्था के बीच है जो बदलती वास्तविकताओं के अनुकूल हो और दूसरी जो अपनी सीमाओं के सामने आने के बहुत बाद भी पुरानी व्यवस्थाओं से चिपकी रहे। VB GRAM G सोच में एक विकास का संकेत देता है। यह सार्वजनिक खर्च को स्थायी ग्रामीण समृद्धि में बदलना चाहता है। यही महत्वाकांक्षा, न कि राजनीतिक पुरानी यादें, राष्ट्रीय बहस को परिभाषित करनी चाहिए।

लेखक के बारे में: निर्वा मेहता एक राजनीतिक विश्लेषक और स्तंभकार हैं जो सार्वजनिक नीति, शासन और राष्ट्रीय सुरक्षा पर लिखती हैं। उनका काम भारत और उससे बाहर सत्ता संरचनाओं, राज्य के व्यवहार और नीतिगत विकल्पों के दीर्घकालिक परिणामों पर केंद्रित है। फरहत अली खान 
एम ए गोल्ड मेडलिस्ट

Saturday, 14 February 2026

12 फरवरी से 25 फरवरी तक मौसम की भविष्यवाणी

12 फरवरी से 25 फरवरी तक मौसम की भविष्यवाणी 

आज जौनपुर और आसपास अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस रहेगा सुबह बहुत ठंडी और गलन रहेगी दिन में सुहावना मौसम रहेगा 15 फरवरी तक इसी तरह मौसम बना रहेगा वायु गुणवत्ता सूचकांक 100 से 200 के बीच पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 5 से 7 वायु की दिशा पश्चिम और गति 11 से 20 किलोमीटर प्रति घंटा बहुत तेज होगी प्रदूषण और जहरीली हवा की मात्रा भयानक रहेगी सापेक्षिक आर्द्रता 50% से 80% के बीच रहेगी 

कल के मौसम के बारे में आकलन है कि अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगी वायु गुणवत्ता सूचकांक 100 से 200 के बीच ही रहेगा पराबैंगनी किरणों की तीव्रता भी और अन्य चीजें भी कल जैसी रहेंगी 

हिमालय के पर्वतों पर उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर हिमाचल प्रदेश नेपाल भूटान सिक्किम अरुणाचल प्रदेश में बर्फबारी के कारण उसका असर ठंड और गलन के रूप में उत्तर के मैदान में भी पड़ेगा मध्य और दक्षिण भारत में गर्मी तेजी से बढ़ेगी 

अभी जौनपुर और आसपास तथा उत्तरी भारत में वर्षा की संभावना 25 फरवरी तक बहुत ही काम है इसलिए किसानों को चाहिए तत्काल सिंचाई कर दें फरवरी के अंत और मार्च के प्रथम सप्ताह में एक बार मौसम में फिर से परिवर्तन और बादल तथा बूंदाबांदी की संभावना बन रही है 

कुल मिलाकर 15 मार्च तक अंतिम रूप से ठंड गलन और शीत का मौसम पूरी तरह समाप्त हो जाएगा ‌ इसके बाद गर्मी तेजी से बढ़ेगी जो मार्च के अंदर तक बहुत ही तेज और उग्र हो जाएगी फरवरी की तरह मार्च महीने में भी काफी परिवर्तन और झंझावात का योग बन रहा है उत्तरी और पश्चिमी उत्तरी मध्य और दक्षिणी भारत हर जगह गर्मी फैल जाएगी 

जहां तक विश्व के मौसम की बात है तो अमेरिका कनाडा ग्रीनलैंड यूरोप रूस चीन कोरिया जापान मंगोलिया और उत्तरी अरब प्रायद्वीप में बर्फबारी जारी रहेगी और ठंड का असर बढ़ता रहेगा 

फरवरी के अंतिम और मार्च के प्रथम 15 दिनों में विश्व में विशेष कर दक्षिण पूर्वी एशिया दक्षिणी अमेरिका अब प्रायद्वीप ईरान भारत पाकिस्तान जापान अफगानिस्तान नेपाल में कई स्थानों पर हाल के माध्यम और कुछ भयानक भूकंप आने की प्रबल संभावना है रूस का पूर्वी इलाका भी इसकी चपेट में आएगा 

अमेरिका यूरोप और उत्तरी एशिया में भयानक बवंडर प्रचंड बर्फ के तूफान और कुछ वहां चक्रवातों का जन्म होगा अटलांटिक और प्रशांत महासागर इसके केंद्र बिंदु में रहेंगे-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर

Friday, 13 February 2026

जनपद न्यायालय जौनपुर के जनपद न्यायाधीश सुशील कुमार शशि के नेतृत्व और सचिन सिविल जज सुशील कुमार सिंह की देखरेख में एक विधिक जागरूकता साक्षरता शिविर का आयोजन

‌‌ आज जनपद न्यायालय जौनपुर के जनपद न्यायाधीश सुशील कुमार शशि के नेतृत्व और सचिन सिविल जज सुशील कुमार सिंह की देखरेख में एक विधिक जागरूकता साक्षरता शिविर का आयोजन
जिला महिला चिकित्सालय जौनपुर में आयोजित किया गया ‌ इसमें सुशील कुमार सिंह सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल जनपद न्यायालय जौनपुर देवेंद्र कुमार यादव काउंसलर परिवार न्यायालय सीमा सिंह काउंसलर जिला चिकित्सालय जौनपुर देवव्रत यादव श्रम आयुक्त चिकित्सा अधीक्षक और उपमुख्यमंत्री चिकित्सा अधीक्षक श्रम प्रवर्तन अधिकारी एवं चिकित्सालय के डॉक्टर नर्स एवं अन्य कर्मचारी गण उपस्थित रहे 

इस विषय में कन्या भ्रूण हत्या एवं घटना हुआ लिंग अनुपात पर सिविल जज सचिव सुशील कुमार सिंह ने लिंग अनुपात सुधारने पर जोर दिया और बताया कि इसके उल्लंघन पर 3 से 5 वर्ष की सजा एवं 10000 से लेकर उससे अधिक का अर्थ दंड देने के साथ ही ऐसे प्रयोगशाला क्लिनिक और पैथोलॉजी का रजिस्ट्रेशन हमेशा के लिए निरस्त किया जा सकता है उन्होंने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा इस विषय में हर संभव सहायता देने की बातकही ।

डॉ दिलीप कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल ने कहा कि भारत में कभी महिला और पुरुष में कोई भेदभाव नहीं रहा इसलिए यहां नारी को ‌ पुरुष से छोटा या बड़ा नहीं कह कर उसे अर्धांगिनी कहा गया और देवों के देव महादेव का एक नाम अर्धनारीश्वर भी है यहां की संस्कृत में नारियों की पूजा होती है और यह देश गार्गी मैत्री आपला घोषा  विश्वावारा सीता अनसूया सावित्री पार्वती कल्पना चावला सुनीता विलियम्स बछेंद्री पाल मेरी काम पीटी उषा साइना नेहवाल का देश है उन्होंने कहा कि इस विषय पर नारियों को आगे आकर जन जागरूकता फैलानी होगी ‌।‌ जब नारी के अश्रु गिरे तो देश उजड़ वह जाए जब नारी खिलखिला उठे मधुमय वसंत छा जाए। ‌ उन्होंने कहा कि घटाताइलिंग अनुपात और स्त्रियों की संख्या देश में अराजकता अपराध और यौन अपराधों को जन्म दे रहे हैं।
इसी क्रम में देवेंद्र कुमार यादव ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और उसके द्वारा दी जा रही सहायता के बारे में विस्तार से बताया श्रम आयुक्त देवव्रत यादव ने नई नारियों को दी जाने वाली सरकारी सुविधाओं की विस्तार से चर्चा किया उपमुख्यमंत्री चिकित्सा अधीक्षक ने कन्या भ्रूण हत्या और घटते लिंगानुपात पर विस्तार से जानकारी दिया और धन्यवाद मुख्य चिकित्सा अधीक्षक द्वारा दिया गया संचालन काउंसलर सीमा सिंह के द्वारा किया गया।

महाशिवरात्रि पर बनने वाले राजयोग और पूजा पाठ विधान -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

महाशिवरात्रि पर बनने वाले राजयोग और पूजा पाठ विधान -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 
इस बार महाशिवरात्रि 15 फरवरी को रविवार के दिन पड़ रहा है उसे दिन उत्तराखंड नक्षत्र वनिज और शकुनी करण और चंद्रमा मकर राशि में रहेगा इसलिए सर्वार्थ सिद्ध योग बन रहा है पंचग्रही योग भी बन रहा है क्योंकि सूर्य चंद्र बुध शुक्र राहु एक साथ कुंभ राशि में रहेंगे इस बार बुध आदित्य योग लक्ष्मी नारायण धन और शुक्र आदित्य राज्यों बन रहा है ‌ फाल्गुन माह की चतुर्दशी तिथि बहुत विशेष होती है।

 इस दिन पूजा का समय रात्रि में 11:49 से रात्रि में 12:40 तक रहेगा इस दिन भगवान शिव माता पार्वती का पूजा पाठ और रुद्राभिषेक करने से मां और आत्म शांति होती है और कार्य पूरे होते हैं भगवान शिव और माता पार्वती ही अनंत कोटि ब्रह्मांडों के निर्माता है और उन्हें में समग्र विश्व समाया हुआ है इस दिन पूजा पाठ करने से अनिष्ट ग्रहों की शांति भी होती है और मृत्यु का भय तथा कालसर्प दोष दूर होते हैं पूजा पाठ करते समय अपना नाम पिता का नाम और गोत्र बोलने पर पूजा और प्रभावी हो जाते हैं शिवरात्रि के दिन प्रथम पहर में अर्थात सुबह 6 से 9 बजे एक बार पूजा पाठ करना विशेष फलदाई होता है।


हिमवान पर्वत जो हिमालय में स्थित है वहीं पर माता पार्वती का जन्म हुआ था इसीलिए उन्हें पर्वत पुत्री पार्वती कहा जाता है‌ भगवती पार्वती की मां मैना देवी और पिता हिमवान थे जो सती के रूप में पुनर्जन्म ली थी ऐसा माना जाता है कि रुद्रप्रयाग में त्रियुगीनारायण गांव में गंगा और मंदाकिनी नदी के संगम पर भगवान से और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था इसलिए यहां पर शिव पार्वती और भगवान नारायण की पूजा होती है यह बसंत की ऋतु होती है और मौसम बहुत ही शानदार रहता है वैसे तो भगवान शिव केवल नाम लेने से ही प्रसन्न हो जाते हैं बशर्ते मन और आत्मा शुद्ध हो यदि उन्हें अर्पित करना चाहे तो जल से रुद्राभिषेक कर सकते हैं जल के अलावा दूध दही मक्खन शहर घी से भी रुद्राभिषेक किया जाता है बेलपत्र बेल के फल भांग और धतूरा जैसे फल और श्वेत पुष्प तथा माता पार्वती के लिए लाल या पीले रंग के पुष्प चढ़ाना फलदाई होता है

Thursday, 12 February 2026

संपूर्ण सृष्टि में सबसे अद्भुतआदि देव भगवान शिव और महाशिवरात्रि -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विद ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक

संपूर्ण सृष्टि में सबसे अद्भुतआदि देव  भगवान शिव और महाशिवरात्रि -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विद ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक 

देवों के देव आदि देव भगवान शिव और उनकी शक्ति स्वरूपा देवी पार्वती शिवा सृष्टि का मूल है सृष्टि के प्रथम और अंतिम ईश्वरीय तत्व और ईश्वर हैं उनसे ही सारी सृष्टि का निर्माण हुआ है विश्व के हर धर्म सभ्यता और संस्कृति में एक समान रूप से वंदनीय हैं चाहे वह प्राचीन अमेरिका यूनान मिश्र भारत अरब की सभ्यता हो या आधुनिक काल की कोई भी सभ्यता हर जगह भूत भावन अघोरेईश्वर विश्व के कल्याणकारी जो स्वयं ही कल्याण के मूर्तिमान स्वरूप आशुतोष भगवान भोलेनाथ की जय जयकार हो रही है भगवान भोलेनाथ परम अद्भुत चिंतन और कल्पना से परे और देवी सती के साथ मिलकर अर्धनारीश्वर सृष्टि के अंतिम रहस्य हैं।

वैसे तो भगवान शिव और भगवती पार्वती को समझ पाना किसी भी जड़ चेतन या मानव के बस के कल्पना के परे की बात है फिर भी जो कुछ स्वरूप स्वयं भगवान शिव और माता पार्वती ने स्वयं बताया है या जो कुछ अन्य देवी देवताओं और महान शिव भक्तों के द्वारा वर्णित किया गया है उसके अनुसार भगवान शिव का मनमोहक स्वरूप इतना अदभुत है कि जिसको देखकर सृष्टि का जड़ चेतन ही नहीं देवी देवता ही नहीं स्वयं माता पार्वती भगवान गणेश और भगवान विष्णु भी सम्मोहित हो गए थे मोहिनी के रूप को धारण करते हुए भगवान श्री हरि विष्णु और बारात के समय असली स्वरूप में आने पर देवी पार्वती सहित समस्त उपस्थित लोग और परिजन विस्मय विमुग्ध हो गए थे इसीलिए भगवान भोलेनाथ शमशान में या कैलाश पर्वत पर अपने सबसे वीभत्स या अघोरी स्वरूप में रहते हैं सफेद कपूर जैसा गौर वर्ण शरीर पर मसान की भस्म लपेटे हुए अद्भुत लालिमा लिए हुए पैर शरीर पर बाघंबर हृदय में पार्वती मां सर पर गंगा देवी माथे पर जटा जूट और उसमें सुशोभित चंद्रमा गले में पूरे विश्व को भस्म कर देने वाला कालकूट हलाहल विष मस्तक पर सुशोभित तीन नेत्र एक हाथ में त्रिशूल और उसमें बंधा हुआ डमरू दूसरे हाथ में अभय दान की मुद्रा जिसमें समस्त अस्त्र-शस्त्र दिव्यास्त्र और संपूर्ण शास्त्र छिपे हुए होते हैं बगल में बैठे हुए नंदीश्वर और चारों ओर भूत प्रेत पिशाच डाकिनी शाकिनी महाकाली देवी और भैरव जी तथा बाल गणेश और स्वामी कार्तिक देव चारों तरफ हिममंडित पर्वत के उत्तम शिखर और कैलाश का वह शिखर जिस पर आज तक कोई भी चढ़ नहीं सका है और बगल में बिल्कुल स्वच्छ अमृत जैसी नीले हरे रंग की मानसरोवर झील और चारों ओर अद्भुत ओमकार का स्वर अद्भुत परम शांति और भगवान शिव के बगल में बैठी हुई सृष्टि का निर्माण करने वाले भगवती पार्वती मां सभी को आश्चर्यचकित कर एक परम पावन कैलाश लोक का निर्माण करता है।

यह तो भगवान शिव के धर्म और अध्यात्म का स्वरूप हुआ अब इसको थोड़ा विज्ञान की दृष्टि से देखा जाए भगवान शिव का पैर सदैव बर्फ से ढके हुए कैलाश शिखर पर आता है जो यह प्रदर्शित करता है कि वह बर्फ की तरह कोमल स्वच्छ और किसी भी प्रकार के प्रदूषण से मुक्त हैं शरीर पर बाघंबर इस बात का प्रतीक होता है कि हिंसक से हिंसक जीव जंतु भी उनके लिए वस्त्राभूषण के समान हैं और बाघ का वस्त्र पहन कर व्यक्ति आसानी से साधना में डूब जाता है हृदय में इलेक्ट्रॉन रूपी पार्वती मां सारी सृष्टि को अपने अंदर समाहित किए हुए हैं जो ऋणात्मक अर्थात स्त्री तत्व हैं और जब उसमें प्रोटॉन अर्थात भगवान शिव का मिलन होता है तब एक आदि कण परमाणु का निर्माण होता है और इसके बिना सृष्टि असंभव है गले में हलाहल विष समग्र विश्व की कल्याण कामना को दिखाता है और जिस हलाहल विष की गर्मी को तीनों लोक में कोई सहन नहीं कर सका उसको भगवान शिव ने खेल-खेल में पी लिया था और तीनों लोकों की रक्षा किया था अर्थात विश्व का सृष्टि का कल्याण भगवान शिव का सबसे बड़ा लक्ष्य है

भगवती गंगा देवी के रौद्र स्वरूप को जो धरती को चूर-चूर कर देता उसके अनंत वेग को रोककर भगवान शिव ने गंगा को भागीरथी बनाकर समग्र विश्व में पूजनीय बनाकर उसे देव नदी बना दिया और बताया कि महानता कल्याण में होती है विनाश में नहीं जटा जूट पर सुशोभित चंद्रमा जो अमृत तत्व का भंडार है वह हलाहल विष के तेज को शांत करता रहता है संसार के सभी अस्त्र-शस्त्र और दिव्यास्त्र को अपने अंदर समाहित करने वाला भगवान शिव का पिनाक त्रिशूल जहां एक और इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन और न्यूट्रॉन तो दूसरी तरफ अल्फा बीटा गामा किरणों को दिखाता है। 

और उसमें लेजर क्वाजार और एक्स किरणें इतनी भयंकर मात्रा में उपस्थित होती है कि एक दो आकाशगंगा नहीं अरबों विश्व समुदाय और अरबों कृष्ण नक्षत्र अर्थात ब्लैक होल को पल मात्र में भस्म किया जा सकता है डमडम निनाद का प्रतीक डमरू समस्त विद्या और ध्वनि ऊर्जा का प्रतीक है और ध्वनि से ही संपूर्ण विद्या ज्ञान विज्ञान कला साहित्य प्रकट होता है किसी डमरू को 14 बार बजा कर भगवान शिव ने महान पाणिनि को 14 सूत्रों का उपदेश दिया जिससे संपूर्ण संस्कृत भाषा का निर्माण हुआ और कालांतर में इसी संस्कृत भाषा से दुनिया की अनगिनत भाषाएं देश काल बोली और परिस्थितियों के अनुक्रम में उत्पन्न हुई।

भगवान शिव के बगल स्थित नंदीश्वर बैल स्वरूप में सारे विश्व और कृषि कार्यों के प्रतीक हैं जो उसे गाय के पुत्र स्वरूप उत्पन्न होते हैं जो मानव श्रेष्ठ की दूसरी मां कही जाती है और जिसका दूध अमृत माना जाता है और जो हर व्यक्ति के लिए कल्याणकारी है भूत प्रेत और उनके गण यह दिखाते हैं कि  सृष्टि में कोई भी चीज भयंकर नहीं है भयंकर से भयंकर वस्तु भी सृष्टि और मानव के लिए कल्याणकारी है गले में लिपटा भयंकर नाग भी इस बात को दिखाता है की अपनी शक्ति प्रेम और ऊर्जा से विश्व के सबसे खतरनाक जीव नाग को भी वश में किया जा सकता है और परम भयंकर नग धारण करना भगवान शिव के बस की ही बात है चाहे मसान हो चाहे कैलाश पर्वत का क्षेत्र हो वहां पर अपूर्व शांति और असली जीवन का तत्व छिपा रहता है और यहीं पर आकर मनुष्य को अपूर्व शांति और सही जीवन का बोध होता है शरीर पर लपेटा हुआ भस्म यह दिखाता है कि अंत में मानव जीव जंतु जड़ चेतन ही नहीं संपूर्ण सृष्टि आकाशगंगा परम विश्व ब्लैक होल में और ब्लैक होल महाकाली में और महाकाली अंत में शिव में विलीन हो जाती हैं इस प्रकार भगवान शिव का स्वरूप परम कल्याणकारी चिंतन मनन कल्पना के परे हैं।

भगवान भोलेनाथ शिव को और उनकी परमप्रिया अर्धांगिनी देवी सती को समझ पाना मन बुद्धि कल्पना के परे हैं अपने भक्तों की रक्षा के लिए काल से नहीं साक्षात महाकाल से भी लड़कर मार्कंडेय ऋषि जैसे अबोध बालक को अमरत्व प्रदान करने वाले भस्मासुर जैसे लोगों को अपने ही विनाश का वरदान देने वाले जालंधर जैसे त्रिलोक विजेता का वध करने वाले रावण को सोने की लंका प्रदान करने वाले और कैलाश पर्वत उठाने का प्रयास करने पर उसे कुचल देने वाले अपने भक्तों की रक्षा के लिए भगवान श्री राम श्री कृष्ण और भगवान श्री राम और श्री हरिविष्णु से भी लड़ने वाले कठोरता की मूर्ति बनकर जहां 87000 वर्षों तक भगवती सती का त्याग कर दिया  और कामदेव को भस्म कर दिया वहीं पर कोमलता की मूर्ति माता सती के अपने पिता के यज्ञ की अग्नि में सती हो जाने पर वीरभद्र और महाकाली को उत्पन्न कर सभी दुष्ट और दक्ष के विनाश का कारण बनने वाले हनुमान को अभय दान देने वाले सत्यम शिवम सुंदरम के साक्षात स्वरूप विश्व की प्रथम और अंतिम अंतरिक्ष नगरी तारकापुरी को नष्ट कर तारकासुर का संघार करने वाले अनंत वेग के स्वामी और समस्त ब्रह्मांड और ब्लैक होल सहित सब कुछ निगल जाने को तैयार माता महाकाली के पैर के नीचे आकर उनका क्रोध शांत करने वाले भगवान शिव की महिमा अनंत है ।

जिसका बखान वेदों से लेकर शिव पुराण और सभी धर्म और साहित्य काव्य जगत में आज भी गुंजित हो रहा है उनकी महिमा एक छोटे से लेख में सीमित नहीं जा सकती है भगवान शिव की कृपा और उनके आशीर्वाद से ही इस लेख का निर्माण हो सका है अभी तक जो कुछ भी विज्ञान और मनुष्य को टेक्नोलॉजी के सहारे ज्ञात है तो उसके अनुसार हमारी अपनी आकाशगंगा में पांच खरब सूर्य हैं ऐसी 1000 खरब आकाशगंगाए खोजी जा चुकी हैं और इन सभी आकाशगंगाओं का समूह परम विश्व अर्थात यूनिवर्स होता है और अभी तक 100 अरब यूनिवर्स खोजे जा चुके हैं और यह केवल देखे जा सकने वाले ब्रह्मांड का 10% भाग है और इन सभी को पलक झपकते ही भगवान शिव अपने डमरू के निनाद से और त्रिशूल से नष्ट कर देते हैं उनका रौद्र और भीषण रूप देखकर समस्त जड़ चेतन भयानक डर से कांप उठते है ग्रह नक्षत्र चूर-चूर हो जाते हैं आकाशगंगा बिखर जाती हैं परम विश्व और प्रति परम विश्व टूट कर महाकृष्ण विवर में और महा कृष्ण विवर महाकाली में समाहित हो जाता है द्रव्य प्रति द्रव्य ऊर्जा प्रति ऊर्जा श्वेत और श्याम ऊर्जा श्वेत और श्याम परम कृष्ण नक्षत्र  सब कुछ भगवान शिव अपने एक अंगूठे में धारण कर लेते हैं ऐसे भगवान शिव भोलेनाथ को नमन है।

 महाशिवरात्रि संपूर्ण पृथ्वी पर एक अत्यंत विशेष दिन होता है जो शिव भक्तों का सबसे प्रमुख दिन होता है इसी दिन भगवान शिव लेजर किरणों अनंत आकाशगंगाओं का तेज प्रकट करते हुए लिंग के रूप में पैदा हुए थे और ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु ने उस लिंग की पूजा किया था इसी दिन भगवती पार्वती का भगवान भोलेनाथ से विवाह हुआ था इसीलिए प्रत्येक जगह शिव बारात का आयोजन किया जाता है महाशिवरात्रि की रात अत्यंत ही फलदाई होती है लेकिन उसके लिए आपको अलग से कुछ करने की आवश्यकता नहीं संपूर्ण श्रद्धा विश्वास के साथ भगवान शिव भगवती पार्वती की मन वचन कर्म से आराधना करें तो भी वही फल मिलता है जो निराहार व्रत रखने वाले को मिलता है भगवान शिव सत्य शिव सुंदर तत्व के प्रतीक हैं और निश्चल भक्त लोगों को बहुत आसानी से प्राप्त हो जाते हैं भगवान शिव बेल के पेड़ से जुड़े हुए हैं यही उनके निवास है इसलिए इनको बेलपत्र अत्यंत प्रिय है वैसे भी तीन या उससे अधिक पत्तों वाले पेड़ शिवजी को बहुत ज्यादा पसंद है जो कि विश्व की तीनों शक्तियों धन ऋण और उदासीन तत्व का प्रतीक है।

इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी के दिन पड़ रही है क्योंकि इसी दिन फाल्गुन मास की चतुर्दशी तिथि पड़ रही है और निशीथपूजा रात में 12 बज का 9 मिनट से 12:59 तक है और व्रत का पारण सूर्योदय के तत्काल बाद किया जाएगा भगवान शिव को शुद्ध और स्वच्छ चित्त से भविष्य में कोई पाप और गलत कामना न करने की प्रतिज्ञा करते हुए बेल का पत्र बेर का फल अबीर धतूरे का फल मदार का फूल श्वेत रंग की मिठाई श्वेत वस्त्र श्वेत पुष्प जैसी चीजों का अर्पण करना चाहिए इसके साथ-साथ माता पार्वती का पूजन आवश्यक है जिसके लिए आप हल्के गुलाबी या हल्के रंगों का वस्त्र फूल मिठाई इत्यादि का प्रयोग कर सकते हैं कुछ भक्त निराहार रहकर शिवजी की पूजा आराधना करते हैं तो अधिकांश लोग दूध फल सूखा मेवा खाते हुए भगवान शिव की अर्चना करते हैं लेकिन भगवान शिव को इन सब से कोई अंतर नहीं पड़ता है जो लोग निराहार नहीं रह सकते हैं या बालक वृद्ध हैं या रोगी हैं वह फलाहार दुग्धाहार कर सकते हैं सच्चे मन वचन कर्म से महाशिवरात्रि का व्रत करने वाले न केवल भगवान शिव भगवती पार्वती की कृपा आशीर्वाद प्राप्त करते हैं बल्कि जन्म मरण के चक्र से छोड़कर मोक्ष को प्राप्त करते हैं।