Friday, 13 February 2026

जनपद न्यायालय जौनपुर के जनपद न्यायाधीश सुशील कुमार शशि के नेतृत्व और सचिन सिविल जज सुशील कुमार सिंह की देखरेख में एक विधिक जागरूकता साक्षरता शिविर का आयोजन

‌‌ आज जनपद न्यायालय जौनपुर के जनपद न्यायाधीश सुशील कुमार शशि के नेतृत्व और सचिन सिविल जज सुशील कुमार सिंह की देखरेख में एक विधिक जागरूकता साक्षरता शिविर का आयोजन
जिला महिला चिकित्सालय जौनपुर में आयोजित किया गया ‌ इसमें सुशील कुमार सिंह सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल जनपद न्यायालय जौनपुर देवेंद्र कुमार यादव काउंसलर परिवार न्यायालय सीमा सिंह काउंसलर जिला चिकित्सालय जौनपुर देवव्रत यादव श्रम आयुक्त चिकित्सा अधीक्षक और उपमुख्यमंत्री चिकित्सा अधीक्षक श्रम प्रवर्तन अधिकारी एवं चिकित्सालय के डॉक्टर नर्स एवं अन्य कर्मचारी गण उपस्थित रहे 

इस विषय में कन्या भ्रूण हत्या एवं घटना हुआ लिंग अनुपात पर सिविल जज सचिव सुशील कुमार सिंह ने लिंग अनुपात सुधारने पर जोर दिया और बताया कि इसके उल्लंघन पर 3 से 5 वर्ष की सजा एवं 10000 से लेकर उससे अधिक का अर्थ दंड देने के साथ ही ऐसे प्रयोगशाला क्लिनिक और पैथोलॉजी का रजिस्ट्रेशन हमेशा के लिए निरस्त किया जा सकता है उन्होंने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा इस विषय में हर संभव सहायता देने की बातकही ।

डॉ दिलीप कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल ने कहा कि भारत में कभी महिला और पुरुष में कोई भेदभाव नहीं रहा इसलिए यहां नारी को ‌ पुरुष से छोटा या बड़ा नहीं कह कर उसे अर्धांगिनी कहा गया और देवों के देव महादेव का एक नाम अर्धनारीश्वर भी है यहां की संस्कृत में नारियों की पूजा होती है और यह देश गार्गी मैत्री आपला घोषा  विश्वावारा सीता अनसूया सावित्री पार्वती कल्पना चावला सुनीता विलियम्स बछेंद्री पाल मेरी काम पीटी उषा साइना नेहवाल का देश है उन्होंने कहा कि इस विषय पर नारियों को आगे आकर जन जागरूकता फैलानी होगी ‌।‌ जब नारी के अश्रु गिरे तो देश उजड़ वह जाए जब नारी खिलखिला उठे मधुमय वसंत छा जाए। ‌ उन्होंने कहा कि घटाताइलिंग अनुपात और स्त्रियों की संख्या देश में अराजकता अपराध और यौन अपराधों को जन्म दे रहे हैं।
इसी क्रम में देवेंद्र कुमार यादव ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और उसके द्वारा दी जा रही सहायता के बारे में विस्तार से बताया श्रम आयुक्त देवव्रत यादव ने नई नारियों को दी जाने वाली सरकारी सुविधाओं की विस्तार से चर्चा किया उपमुख्यमंत्री चिकित्सा अधीक्षक ने कन्या भ्रूण हत्या और घटते लिंगानुपात पर विस्तार से जानकारी दिया और धन्यवाद मुख्य चिकित्सा अधीक्षक द्वारा दिया गया संचालन काउंसलर सीमा सिंह के द्वारा किया गया।

महाशिवरात्रि पर बनने वाले राजयोग और पूजा पाठ विधान -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

महाशिवरात्रि पर बनने वाले राजयोग और पूजा पाठ विधान -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 
इस बार महाशिवरात्रि 15 फरवरी को रविवार के दिन पड़ रहा है उसे दिन उत्तराखंड नक्षत्र वनिज और शकुनी करण और चंद्रमा मकर राशि में रहेगा इसलिए सर्वार्थ सिद्ध योग बन रहा है पंचग्रही योग भी बन रहा है क्योंकि सूर्य चंद्र बुध शुक्र राहु एक साथ कुंभ राशि में रहेंगे इस बार बुध आदित्य योग लक्ष्मी नारायण धन और शुक्र आदित्य राज्यों बन रहा है ‌ फाल्गुन माह की चतुर्दशी तिथि बहुत विशेष होती है।

 इस दिन पूजा का समय रात्रि में 11:49 से रात्रि में 12:40 तक रहेगा इस दिन भगवान शिव माता पार्वती का पूजा पाठ और रुद्राभिषेक करने से मां और आत्म शांति होती है और कार्य पूरे होते हैं भगवान शिव और माता पार्वती ही अनंत कोटि ब्रह्मांडों के निर्माता है और उन्हें में समग्र विश्व समाया हुआ है इस दिन पूजा पाठ करने से अनिष्ट ग्रहों की शांति भी होती है और मृत्यु का भय तथा कालसर्प दोष दूर होते हैं पूजा पाठ करते समय अपना नाम पिता का नाम और गोत्र बोलने पर पूजा और प्रभावी हो जाते हैं शिवरात्रि के दिन प्रथम पहर में अर्थात सुबह 6 से 9 बजे एक बार पूजा पाठ करना विशेष फलदाई होता है।


हिमवान पर्वत जो हिमालय में स्थित है वहीं पर माता पार्वती का जन्म हुआ था इसीलिए उन्हें पर्वत पुत्री पार्वती कहा जाता है‌ भगवती पार्वती की मां मैना देवी और पिता हिमवान थे जो सती के रूप में पुनर्जन्म ली थी ऐसा माना जाता है कि रुद्रप्रयाग में त्रियुगीनारायण गांव में गंगा और मंदाकिनी नदी के संगम पर भगवान से और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था इसलिए यहां पर शिव पार्वती और भगवान नारायण की पूजा होती है यह बसंत की ऋतु होती है और मौसम बहुत ही शानदार रहता है वैसे तो भगवान शिव केवल नाम लेने से ही प्रसन्न हो जाते हैं बशर्ते मन और आत्मा शुद्ध हो यदि उन्हें अर्पित करना चाहे तो जल से रुद्राभिषेक कर सकते हैं जल के अलावा दूध दही मक्खन शहर घी से भी रुद्राभिषेक किया जाता है बेलपत्र बेल के फल भांग और धतूरा जैसे फल और श्वेत पुष्प तथा माता पार्वती के लिए लाल या पीले रंग के पुष्प चढ़ाना फलदाई होता है

Thursday, 12 February 2026

संपूर्ण सृष्टि में सबसे अद्भुतआदि देव भगवान शिव और महाशिवरात्रि -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विद ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक

संपूर्ण सृष्टि में सबसे अद्भुतआदि देव  भगवान शिव और महाशिवरात्रि -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विद ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक 

देवों के देव आदि देव भगवान शिव और उनकी शक्ति स्वरूपा देवी पार्वती शिवा सृष्टि का मूल है सृष्टि के प्रथम और अंतिम ईश्वरीय तत्व और ईश्वर हैं उनसे ही सारी सृष्टि का निर्माण हुआ है विश्व के हर धर्म सभ्यता और संस्कृति में एक समान रूप से वंदनीय हैं चाहे वह प्राचीन अमेरिका यूनान मिश्र भारत अरब की सभ्यता हो या आधुनिक काल की कोई भी सभ्यता हर जगह भूत भावन अघोरेईश्वर विश्व के कल्याणकारी जो स्वयं ही कल्याण के मूर्तिमान स्वरूप आशुतोष भगवान भोलेनाथ की जय जयकार हो रही है भगवान भोलेनाथ परम अद्भुत चिंतन और कल्पना से परे और देवी सती के साथ मिलकर अर्धनारीश्वर सृष्टि के अंतिम रहस्य हैं।

वैसे तो भगवान शिव और भगवती पार्वती को समझ पाना किसी भी जड़ चेतन या मानव के बस के कल्पना के परे की बात है फिर भी जो कुछ स्वरूप स्वयं भगवान शिव और माता पार्वती ने स्वयं बताया है या जो कुछ अन्य देवी देवताओं और महान शिव भक्तों के द्वारा वर्णित किया गया है उसके अनुसार भगवान शिव का मनमोहक स्वरूप इतना अदभुत है कि जिसको देखकर सृष्टि का जड़ चेतन ही नहीं देवी देवता ही नहीं स्वयं माता पार्वती भगवान गणेश और भगवान विष्णु भी सम्मोहित हो गए थे मोहिनी के रूप को धारण करते हुए भगवान श्री हरि विष्णु और बारात के समय असली स्वरूप में आने पर देवी पार्वती सहित समस्त उपस्थित लोग और परिजन विस्मय विमुग्ध हो गए थे इसीलिए भगवान भोलेनाथ शमशान में या कैलाश पर्वत पर अपने सबसे वीभत्स या अघोरी स्वरूप में रहते हैं सफेद कपूर जैसा गौर वर्ण शरीर पर मसान की भस्म लपेटे हुए अद्भुत लालिमा लिए हुए पैर शरीर पर बाघंबर हृदय में पार्वती मां सर पर गंगा देवी माथे पर जटा जूट और उसमें सुशोभित चंद्रमा गले में पूरे विश्व को भस्म कर देने वाला कालकूट हलाहल विष मस्तक पर सुशोभित तीन नेत्र एक हाथ में त्रिशूल और उसमें बंधा हुआ डमरू दूसरे हाथ में अभय दान की मुद्रा जिसमें समस्त अस्त्र-शस्त्र दिव्यास्त्र और संपूर्ण शास्त्र छिपे हुए होते हैं बगल में बैठे हुए नंदीश्वर और चारों ओर भूत प्रेत पिशाच डाकिनी शाकिनी महाकाली देवी और भैरव जी तथा बाल गणेश और स्वामी कार्तिक देव चारों तरफ हिममंडित पर्वत के उत्तम शिखर और कैलाश का वह शिखर जिस पर आज तक कोई भी चढ़ नहीं सका है और बगल में बिल्कुल स्वच्छ अमृत जैसी नीले हरे रंग की मानसरोवर झील और चारों ओर अद्भुत ओमकार का स्वर अद्भुत परम शांति और भगवान शिव के बगल में बैठी हुई सृष्टि का निर्माण करने वाले भगवती पार्वती मां सभी को आश्चर्यचकित कर एक परम पावन कैलाश लोक का निर्माण करता है।

यह तो भगवान शिव के धर्म और अध्यात्म का स्वरूप हुआ अब इसको थोड़ा विज्ञान की दृष्टि से देखा जाए भगवान शिव का पैर सदैव बर्फ से ढके हुए कैलाश शिखर पर आता है जो यह प्रदर्शित करता है कि वह बर्फ की तरह कोमल स्वच्छ और किसी भी प्रकार के प्रदूषण से मुक्त हैं शरीर पर बाघंबर इस बात का प्रतीक होता है कि हिंसक से हिंसक जीव जंतु भी उनके लिए वस्त्राभूषण के समान हैं और बाघ का वस्त्र पहन कर व्यक्ति आसानी से साधना में डूब जाता है हृदय में इलेक्ट्रॉन रूपी पार्वती मां सारी सृष्टि को अपने अंदर समाहित किए हुए हैं जो ऋणात्मक अर्थात स्त्री तत्व हैं और जब उसमें प्रोटॉन अर्थात भगवान शिव का मिलन होता है तब एक आदि कण परमाणु का निर्माण होता है और इसके बिना सृष्टि असंभव है गले में हलाहल विष समग्र विश्व की कल्याण कामना को दिखाता है और जिस हलाहल विष की गर्मी को तीनों लोक में कोई सहन नहीं कर सका उसको भगवान शिव ने खेल-खेल में पी लिया था और तीनों लोकों की रक्षा किया था अर्थात विश्व का सृष्टि का कल्याण भगवान शिव का सबसे बड़ा लक्ष्य है

भगवती गंगा देवी के रौद्र स्वरूप को जो धरती को चूर-चूर कर देता उसके अनंत वेग को रोककर भगवान शिव ने गंगा को भागीरथी बनाकर समग्र विश्व में पूजनीय बनाकर उसे देव नदी बना दिया और बताया कि महानता कल्याण में होती है विनाश में नहीं जटा जूट पर सुशोभित चंद्रमा जो अमृत तत्व का भंडार है वह हलाहल विष के तेज को शांत करता रहता है संसार के सभी अस्त्र-शस्त्र और दिव्यास्त्र को अपने अंदर समाहित करने वाला भगवान शिव का पिनाक त्रिशूल जहां एक और इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन और न्यूट्रॉन तो दूसरी तरफ अल्फा बीटा गामा किरणों को दिखाता है। 

और उसमें लेजर क्वाजार और एक्स किरणें इतनी भयंकर मात्रा में उपस्थित होती है कि एक दो आकाशगंगा नहीं अरबों विश्व समुदाय और अरबों कृष्ण नक्षत्र अर्थात ब्लैक होल को पल मात्र में भस्म किया जा सकता है डमडम निनाद का प्रतीक डमरू समस्त विद्या और ध्वनि ऊर्जा का प्रतीक है और ध्वनि से ही संपूर्ण विद्या ज्ञान विज्ञान कला साहित्य प्रकट होता है किसी डमरू को 14 बार बजा कर भगवान शिव ने महान पाणिनि को 14 सूत्रों का उपदेश दिया जिससे संपूर्ण संस्कृत भाषा का निर्माण हुआ और कालांतर में इसी संस्कृत भाषा से दुनिया की अनगिनत भाषाएं देश काल बोली और परिस्थितियों के अनुक्रम में उत्पन्न हुई।

भगवान शिव के बगल स्थित नंदीश्वर बैल स्वरूप में सारे विश्व और कृषि कार्यों के प्रतीक हैं जो उसे गाय के पुत्र स्वरूप उत्पन्न होते हैं जो मानव श्रेष्ठ की दूसरी मां कही जाती है और जिसका दूध अमृत माना जाता है और जो हर व्यक्ति के लिए कल्याणकारी है भूत प्रेत और उनके गण यह दिखाते हैं कि  सृष्टि में कोई भी चीज भयंकर नहीं है भयंकर से भयंकर वस्तु भी सृष्टि और मानव के लिए कल्याणकारी है गले में लिपटा भयंकर नाग भी इस बात को दिखाता है की अपनी शक्ति प्रेम और ऊर्जा से विश्व के सबसे खतरनाक जीव नाग को भी वश में किया जा सकता है और परम भयंकर नग धारण करना भगवान शिव के बस की ही बात है चाहे मसान हो चाहे कैलाश पर्वत का क्षेत्र हो वहां पर अपूर्व शांति और असली जीवन का तत्व छिपा रहता है और यहीं पर आकर मनुष्य को अपूर्व शांति और सही जीवन का बोध होता है शरीर पर लपेटा हुआ भस्म यह दिखाता है कि अंत में मानव जीव जंतु जड़ चेतन ही नहीं संपूर्ण सृष्टि आकाशगंगा परम विश्व ब्लैक होल में और ब्लैक होल महाकाली में और महाकाली अंत में शिव में विलीन हो जाती हैं इस प्रकार भगवान शिव का स्वरूप परम कल्याणकारी चिंतन मनन कल्पना के परे हैं।

भगवान भोलेनाथ शिव को और उनकी परमप्रिया अर्धांगिनी देवी सती को समझ पाना मन बुद्धि कल्पना के परे हैं अपने भक्तों की रक्षा के लिए काल से नहीं साक्षात महाकाल से भी लड़कर मार्कंडेय ऋषि जैसे अबोध बालक को अमरत्व प्रदान करने वाले भस्मासुर जैसे लोगों को अपने ही विनाश का वरदान देने वाले जालंधर जैसे त्रिलोक विजेता का वध करने वाले रावण को सोने की लंका प्रदान करने वाले और कैलाश पर्वत उठाने का प्रयास करने पर उसे कुचल देने वाले अपने भक्तों की रक्षा के लिए भगवान श्री राम श्री कृष्ण और भगवान श्री राम और श्री हरिविष्णु से भी लड़ने वाले कठोरता की मूर्ति बनकर जहां 87000 वर्षों तक भगवती सती का त्याग कर दिया  और कामदेव को भस्म कर दिया वहीं पर कोमलता की मूर्ति माता सती के अपने पिता के यज्ञ की अग्नि में सती हो जाने पर वीरभद्र और महाकाली को उत्पन्न कर सभी दुष्ट और दक्ष के विनाश का कारण बनने वाले हनुमान को अभय दान देने वाले सत्यम शिवम सुंदरम के साक्षात स्वरूप विश्व की प्रथम और अंतिम अंतरिक्ष नगरी तारकापुरी को नष्ट कर तारकासुर का संघार करने वाले अनंत वेग के स्वामी और समस्त ब्रह्मांड और ब्लैक होल सहित सब कुछ निगल जाने को तैयार माता महाकाली के पैर के नीचे आकर उनका क्रोध शांत करने वाले भगवान शिव की महिमा अनंत है ।

जिसका बखान वेदों से लेकर शिव पुराण और सभी धर्म और साहित्य काव्य जगत में आज भी गुंजित हो रहा है उनकी महिमा एक छोटे से लेख में सीमित नहीं जा सकती है भगवान शिव की कृपा और उनके आशीर्वाद से ही इस लेख का निर्माण हो सका है अभी तक जो कुछ भी विज्ञान और मनुष्य को टेक्नोलॉजी के सहारे ज्ञात है तो उसके अनुसार हमारी अपनी आकाशगंगा में पांच खरब सूर्य हैं ऐसी 1000 खरब आकाशगंगाए खोजी जा चुकी हैं और इन सभी आकाशगंगाओं का समूह परम विश्व अर्थात यूनिवर्स होता है और अभी तक 100 अरब यूनिवर्स खोजे जा चुके हैं और यह केवल देखे जा सकने वाले ब्रह्मांड का 10% भाग है और इन सभी को पलक झपकते ही भगवान शिव अपने डमरू के निनाद से और त्रिशूल से नष्ट कर देते हैं उनका रौद्र और भीषण रूप देखकर समस्त जड़ चेतन भयानक डर से कांप उठते है ग्रह नक्षत्र चूर-चूर हो जाते हैं आकाशगंगा बिखर जाती हैं परम विश्व और प्रति परम विश्व टूट कर महाकृष्ण विवर में और महा कृष्ण विवर महाकाली में समाहित हो जाता है द्रव्य प्रति द्रव्य ऊर्जा प्रति ऊर्जा श्वेत और श्याम ऊर्जा श्वेत और श्याम परम कृष्ण नक्षत्र  सब कुछ भगवान शिव अपने एक अंगूठे में धारण कर लेते हैं ऐसे भगवान शिव भोलेनाथ को नमन है।

 महाशिवरात्रि संपूर्ण पृथ्वी पर एक अत्यंत विशेष दिन होता है जो शिव भक्तों का सबसे प्रमुख दिन होता है इसी दिन भगवान शिव लेजर किरणों अनंत आकाशगंगाओं का तेज प्रकट करते हुए लिंग के रूप में पैदा हुए थे और ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु ने उस लिंग की पूजा किया था इसी दिन भगवती पार्वती का भगवान भोलेनाथ से विवाह हुआ था इसीलिए प्रत्येक जगह शिव बारात का आयोजन किया जाता है महाशिवरात्रि की रात अत्यंत ही फलदाई होती है लेकिन उसके लिए आपको अलग से कुछ करने की आवश्यकता नहीं संपूर्ण श्रद्धा विश्वास के साथ भगवान शिव भगवती पार्वती की मन वचन कर्म से आराधना करें तो भी वही फल मिलता है जो निराहार व्रत रखने वाले को मिलता है भगवान शिव सत्य शिव सुंदर तत्व के प्रतीक हैं और निश्चल भक्त लोगों को बहुत आसानी से प्राप्त हो जाते हैं भगवान शिव बेल के पेड़ से जुड़े हुए हैं यही उनके निवास है इसलिए इनको बेलपत्र अत्यंत प्रिय है वैसे भी तीन या उससे अधिक पत्तों वाले पेड़ शिवजी को बहुत ज्यादा पसंद है जो कि विश्व की तीनों शक्तियों धन ऋण और उदासीन तत्व का प्रतीक है।

इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी के दिन पड़ रही है क्योंकि इसी दिन फाल्गुन मास की चतुर्दशी तिथि पड़ रही है और निशीथपूजा रात में 12 बज का 9 मिनट से 12:59 तक है और व्रत का पारण सूर्योदय के तत्काल बाद किया जाएगा भगवान शिव को शुद्ध और स्वच्छ चित्त से भविष्य में कोई पाप और गलत कामना न करने की प्रतिज्ञा करते हुए बेल का पत्र बेर का फल अबीर धतूरे का फल मदार का फूल श्वेत रंग की मिठाई श्वेत वस्त्र श्वेत पुष्प जैसी चीजों का अर्पण करना चाहिए इसके साथ-साथ माता पार्वती का पूजन आवश्यक है जिसके लिए आप हल्के गुलाबी या हल्के रंगों का वस्त्र फूल मिठाई इत्यादि का प्रयोग कर सकते हैं कुछ भक्त निराहार रहकर शिवजी की पूजा आराधना करते हैं तो अधिकांश लोग दूध फल सूखा मेवा खाते हुए भगवान शिव की अर्चना करते हैं लेकिन भगवान शिव को इन सब से कोई अंतर नहीं पड़ता है जो लोग निराहार नहीं रह सकते हैं या बालक वृद्ध हैं या रोगी हैं वह फलाहार दुग्धाहार कर सकते हैं सच्चे मन वचन कर्म से महाशिवरात्रि का व्रत करने वाले न केवल भगवान शिव भगवती पार्वती की कृपा आशीर्वाद प्राप्त करते हैं बल्कि जन्म मरण के चक्र से छोड़कर मोक्ष को प्राप्त करते हैं।

युवा और डिजिटल दुनिया की चुनौतियां

युवा और डिजिटल दुनिया की चुनौतियां
युवा किसी भी देश और राष्ट्र की असली पूंजी होते हैं। राष्ट्र की प्रगति और उज्ज्वल भविष्य युवाओं की सोच और उनके विकास पर निर्भर करता है। आधुनिक तकनीक की बदौलत आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां ज्ञान प्राप्ति के साधन और कौशल विकास के अपार अवसर पैदा हुए हैं, वहीं व्यक्तित्व निर्माण और नैतिक मूल्यों के पतन का खतरा भी मंडरा रहा है। आज के युवाओं ने डिजिटल दुनिया में खुद को इतना डुबो लिया है कि उन्हें अपने व्यक्तित्व को निखारने पर ध्यान देने की जरूरत भी महसूस नहीं होती। नतीजा यह है कि हमारे युवा डिजिटल दुनिया के नकारात्मक प्रभावों से बेखबर होकर इसके 'साइड इफेक्ट्स' को नजरअंदाज कर रहे हैं, जिसका असर न केवल उनके निजी जीवन पर दिख रहा है बल्कि समाज भी इन प्रभावों से सुरक्षित नहीं है।
आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया और इंटरनेट केवल सूचना, संपर्क और मनोरंजन के साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि ये लोगों को गलत जानकारी और भ्रामक विचारों की ओर धकेलने के लिए भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं। युवा, जो तकनीकी रूप से तो दक्ष हैं लेकिन अनुभव और नैतिक समझ के मामले में अभी नए हैं, अक्सर ऑनलाइन सामग्री के प्रभाव में आ जाते हैं। उनकी ऊर्जा और जोश की भावनात्मक संवेदनशीलता उन्हें और अधिक प्रभावित करती है। इस उम्र में युवा सामाजिक व्यवस्था, अन्य धर्मों और न्याय के मुद्दों के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं, और यही भावनात्मक तीव्रता उन्हें "गलत या भ्रामक संदेशों" का शिकार बना सकती है—खासकर तब जब ये संदेश हिंसा या तोड़-मरोड़ कर पेश किए गए सिद्धांतों का समर्थन करते हों। इसलिए सोशल मीडिया का उपयोग करते समय सावधानी अनिवार्य है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के 'एल्गोरिदम' यह सुनिश्चित करते हैं कि यूजर को वही सामग्री बार-बार दिखाई जाए जिसे उसने पहले देखा, लाइक किया या फॉलो किया हो। इस प्रक्रिया के दौरान यूजर के 'फीड' में उसी तरह की भ्रामक या पक्षपातपूर्ण जानकारी आने लगती है, जिससे यह आभास होता है कि उसके विचार और भावनाएं ही सार्वभौमिक सत्य हैं। समय के साथ युवा अनजाने में खुद को इनसे जोड़ लेते हैं। कभी उन्हें महसूस होता है कि उनका जीवन निरर्थक है, जिससे उनके मन पर निराशा छाने लगती है। कभी उन्हें लगता है कि वे "अलग" या "पीड़ित" हैं, तो यह अहसास उन्हें आक्रामकता या हानिकारक कदमों को सही ठहराने का आधार बन जाता है। कभी उन्हें लगता है कि जो कुछ वे देख रहे हैं वही असली दुनिया है, जिससे उनकी संबद्धता और गहरी हो जाती है। इसके प्रभाव में वे किसी भी नकारात्मक या कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित होकर ऐसा कदम उठा लेते हैं जिसका असर न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन पर, बल्कि उनके परिवार और समाज पर भी पड़ता है, जिसकी भरपाई संभव नहीं होती।
इस 'एल्गोरिद्मिक' प्रभाव को आमतौर पर "फिल्टर बबल" कहा जाता है, जो व्यक्ति को उसके पहले से मौजूद विश्वासों तक सीमित कर देता है और वैकल्पिक दृष्टिकोणों को छिपा देता है। परिणामस्वरूप, युवा यह मानने लगते हैं कि भ्रामक नैरेटिव ही वास्तविकता है। इस संदर्भ में कुरान हमें स्पष्ट मार्गदर्शन देता है: "ऐ ईमान वालों! किसी भी खबर को बिना जांच-पड़ताल के न मानो और जब तक तुम्हें प्रमाण न मिले, किसी पर विश्वास न करो।" (सूरह अल-हुजरात, 49:6)। यह आयत युवाओं को संदेश देती है कि किसी भी ऑनलाइन जानकारी पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें।
कुछ ऑनलाइन पेज, चैनल और वेबसाइटें विशेष रूप से युवाओं को भ्रामक संदेशों के जरिए प्रभावित करने की रणनीति अपनाते हैं। ये प्लेटफॉर्म न केवल कट्टरपंथी विचार पेश करते हैं, बल्कि युवाओं में यह धारणा भी पैदा करते हैं कि समाज उन्हें नहीं समझता। उदाहरण के तौर पर, कुछ सोशल मीडिया अकाउंट युवाओं को बताते हैं कि दूसरों के त्योहारों में शामिल होना या विभिन्न समुदायों से संपर्क रखना गलत है। इस तरह युवा धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों और सामाजिक समरसता के बुनियादी मूल्यों से दूर हो जाते हैं।
अक्सर ये समूह युवाओं के मनोविज्ञान का फायदा उठाते हैं और उन्हें महसूस कराते हैं कि उनके साथ अन्याय हो रहा है और उन्हें इसके खिलाफ "अपने हक" के लिए लड़ना चाहिए। सोशल मीडिया एल्गोरिदम इस संदेश को बार-बार दिखाते हैं, जिससे भावुक या अकेलेपन का शिकार युवा इसे गंभीरता से लेने लगते हैं। भारत में ऐसी घटनाएं तुलनात्मक रूप से कम हैं, क्योंकि यहां का पारिवारिक ढांचा काफी मजबूत है जो युवाओं को ऐसे नकारात्मक रुझानों से बचाने में मददगार होता है। इसके अलावा, कुछ समूह व्यक्तिगत संदेशों, गेम्स और क्विज़ के माध्यम से युवाओं की पहचान करते हैं और धीरे-धीरे अपनी सोच उन पर थोपने की कोशिश करते हैं।
युवाओं के लिए इन समस्याओं का समाधान केवल पाबंदी नहीं है, बल्कि उन्हें विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी प्राप्त करने के लिए मार्गदर्शन देना जरूरी है। युवाओं को चाहिए कि वे राष्ट्रीय मुख्यधारा के मीडिया, प्रतिष्ठित पत्रकारों, विश्वविद्यालय की पुस्तकों और प्रमाणित शोध पत्रिकाओं से तथ्य प्राप्त करें और अपने शिक्षकों या अभिभावकों से मार्गदर्शन लेते रहें। इससे वे न केवल भ्रामक सामग्री से सुरक्षित रहेंगे, बल्कि अपने विचारों को लोकतांत्रिक और नैतिक आधार पर विकसित कर सकेंगे। युवाओं को यह समझना चाहिए कि एल्गोरिदम उनके दृष्टिकोण को सीमित कर सकते हैं, इसलिए किसी भी संदेश को बिना शोध के स्वीकार न करें।
इस प्रक्रिया में दोस्तों, परिवार और शिक्षकों के साथ संवाद करना आवश्यक है। किसी भी संदिग्ध या परेशान करने वाली सामग्री को साझा करने के बजाय अनुभवी लोगों से सलाह लें। अपनी भावनात्मक प्रतिक्रिया पर गौर करें कि क्या कोई सामग्री आपको डरा रही है या "तत्काल प्रतिक्रिया" के लिए उकसा रही है। यदि ऐसा है, तो रुकें, सोचें और लाइक या शेयर करने से पहले उसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं पर विचार करें। कुरान भी हमें ज्ञान के महत्व की याद दिलाता है: "अल्लाह ने इंसान को ज्ञान दिया, और जो सही ज्ञान (हिदायत) प्राप्त करता है, वह पथभ्रष्टता से सुरक्षित रहता है।" (सूरह ताहा, 20:123)।
सामूहिक स्तर पर, समाज और शैक्षणिक संस्थान डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षित कर सकते हैं। यदि युवा यह समझ जाएं कि उनकी सोच किस तरह प्रभावित हो रही है और सोशल मीडिया उनकी मानसिक सेहत पर कैसे असर डाल रहा है, तो वे अधिक सुरक्षित रह सकेंगे। ऑनलाइन भ्रामक सूचनाओं से निपटना केवल तकनीकी समाधान तक सीमित नहीं है; यह नैतिक शिक्षा, धार्मिक समझ और सामाजिक सहयोग का मिश्रण है। युवाओं को यह समझना होगा कि आज के डिजिटल युग में असत्यापित सामग्री का प्रसार न केवल भ्रामक है, बल्कि इसका बिना सोचे-समझे उपयोग इस्लामी शिक्षाओं के विरुद्ध और लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक सद्भाव तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता के लिए भी खतरा है।
फरहत अली खान 
एम ए गोल्ड मेडलिस्ट

Wednesday, 11 February 2026

ज्योतिष के दर्पण में ईरान इजरायल का भयानक युद्ध-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

ज्योतिष के दर्पण में ईरान इजरायल का भयानक युद्ध-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 

अभी कुछ महीने पहले ईरान और इजराइल में भयानक युद्ध हुआ जिसमें इजरायल की तरफ अमेरिका और उसके मित्र देश थे जबकि ईरान का समर्थन करने वाले तुर्की मुस्लिम देश एवं चीन तथा रूस थे जिसमें दोनों देशों का भीषण विनाश हुआ उसे समय भी हमारे अल्का शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र ने बिल्कुल स्पष्ट भविष्यवाणी किया था कि यह युद्ध जल्दी ही समाप्त हो जाएगा और किसी बड़े युद्ध का कारण नहीं बनेगा और वैसा ही हुआ‌ और दोनों देश भयानक विनाश के पहले ही पीछे हट गए और एक अल्पकालिक अघोषित समझौता अमेरिका के दबाव में हो गया ।

इस समय अमेरिका निर्विवाद रूप से विश्व की सबसे बड़ी महाशक्ति है वैसे तो 1945 से लेकर आज तक अमेरिका को कोई भी चुनौती नहीं दे सका है ‌ जिसका सबसे बड़ा कारण है कि अमेरिका एक तो सबसे अधिक धन संपन्न देश है जो सबसे बड़ी अर्थशक्ति खेल शक्ति है और सैन्य शक्ति है दूसरी तरफ वह संपूर्ण दुनिया से बिल्कुल अलग अलग है और उसके शत्रु देश उसे इतनी अधिक दूर हैं कि वह लगभग पूरी तरह सुरक्षित है और आकार में भी इतना बड़ा है कि उसको इसराइल क्यूबा या कोरिया की तरह मिट जाने का खतरा नहीं है ।

‌ इसके अतिरिक्त अमेरिका जल थल नभ में अत्यंत शक्तिशाली है थोड़ी बहुत बराबरी रूस और चीन उसकी कर सकते हैं लेकिन अधिक नहीं उत्तर कोरिया ने निश्चित रूप से प्रक्षेपास्त्र के निर्माण में और परमाणु बम बनाने में बहुत अधिक उन्नत किया है लेकिन वह इतना छोटा है कि अमेरिका के दो हाइड्रोजन बम ही उसका नाम नक्शे से मिट जाएगा इसलिए फिलहाल अमेरिका को बहुत अधिक खतरा नहीं है मध्य पूर्व के दो दर्जन देशों में अमेरिका का सैनिक अड्डा है ‌ पाकिस्तान सीधे-सीधे अमेरिका के कब्जे में है जहां सैकड़ों परमाणु बम अमेरिका ने रखे हुए हैं ‌ अमेरिका के बी-52 बमबर्षकों का कोई जवाब भी नहीं है।इसके अतिरिक्त इसराइल इसका प्रमुख शक्ति केंद्र है हिंद महासागर के डिगो गार्सिया में अमेरिका का बहुत ही शक्तिशाली नौसैनिक अड्डा है और जापान अमेरिका द्वारा पोषित देश है जहां अमेरिकी सेना जापान की रक्षा करती है इस परिप्रेक्ष्य में भारत का कहीं कोई महत्व ही नहीं है और ना दुनिया में कोई भारत की राय विश्व शांति के लिए लेता ही है।


फरवरी मार्च से लेकर जून जुलाई के बीच ज्योतिष के दर्पण में एक बहुत ही भयानक और विनाशकारी युद्ध ईरान और अरब देशों तथा इजरायल के बीच होता हुआ दिखाई पड़ रहा है जिसमें ईरान का भयानक विध्वंस होना निश्चित है प्रारंभिक सको के बाद इजरायल संभल जाएगा और अमेरिका तथा उसके मित्र देशों की मदद से ईरान पीछे हटेगा और उसकी सीधे सहायता देने वाला कोई भी देश आगे खड़ा नहीं होगा ऐसा ज्योतिष और ज्योतिर्विविज्ञान के दर्पण में बिल्कुल स्पष्ट दिखाई दे रहा है ।

आने वाले समय में फरवरी से लेकर जून जुलाई तक पूरी दुनिया के लिए बहुत ही भयानक विनाशकारी और युद्ध के उन्माद वाला है इस कालखंड में भारत को भी पड़ोसी देशों से युद्ध लड़ना पड़ सकता है बांग्लादेश में भारत विरोधी सरकार का चुना जाना निश्चित है ‌ सबसे अधिक नाजुक स्थिति इस समय पूरी दुनिया में इजरायल भारत क्यूबा और कोरिया की है और युद्ध काल में भारत का साथ देने वाला कोई नहीं मिलने वाला है।।

ज्योतिष के दर्पण में ईरान और इजरायल इजरायल और अब देश बेर और केला के समान है जिनका एक साथ रह पाना संभव है‌। कुछ समय की शांति भले हो लेकिन यह देश एक साथ इस तरह नहीं रह सकते जैसे भारत और पाकिस्तान तथा बांग्लादेश का एक साथ अधिक दिनों तक रह पाना संभव है या तो पाकिस्तान बांग्लादेश को मिटना होगा या फिर भारत को बर्बाद होना निश्चित है‌ पाकिस्तान से भी भयानक और विनाशकारी खतरा बांग्लादेश भारत के लिए होगा ऐसा में कई बार कह चुका हूं और उसमें चीन और अमेरिका बहुत बड़ा खेल खेल रहे हैं और भारतीय नेतृत्व इससे अनजान है। वास्तव में अमेरिका इजरायल और उसके मित्र देशों की जासूसी संस्थाएं हर देश की इतनी जानकारी रखती हैं जितना उसे देश का नेतृत्व खुद नहीं रखता है यही वजह है कि इन देशों को दुनिया की एक-एक चीज  ‌ पता रहती है।

ज्योतिष के दर्पण में ऐसा प्रतीत होता है कि प्रारंभ में इजरायल अमेरिका के उकसावे में आकर इसराइल और उसके तथा अमेरिका के समुद्री बेड़े पर प्रक्षेपास्त्रों से सामूहिक हमला करेगा और जवाबी आक्रमण में ईरान का बहुत भारी विध्वंस होगा लड़ाई भयानक रूप ले लेगी और ईरान अकेला पड़ जाएगा यह एक ऐसा युद्ध है जिसमें 1945 के बाद पहली बार परमाणु हाइड्रोजन जैव और रासायनिक बमों का इस्तेमाल होता हुआ दिखाई पड़ रहा है हो सकता है कि अभी यह युद्ध चल जाए लेकिन 1 वर्ष के भीतर ऐसा अवश्य ही होगा इजरायल की वायु सेना और परमाणु केंद्र पूरी तरह से नष्ट हो जाएंगे और इजराइल का क्षेत्रफल बहुत अधिक विस्तृत हो जाएगा ईरान का कई टुकड़ों में विभाजन भी उसी तरह अमेरिका द्वारा होगा जैसे ब्रिटेन ने भारत के 11 टुकड़े कर डाले हैं इस युद्ध से संपूर्ण विश्व प्रभावित होगा इसके अतिरिक्त यूरोप में गृह युद्ध आतंकवाद के भीषण हमले भारत चीन भारत पाकिस्तान और कोरिया में भी युद्ध की स्थितियां बनेंगी भविष्य में ग्रीनलैंड अमेरिका के द्वारा और आस्ट्रेलिया चीन के द्वारा कब्जा किया जाना निश्चित है।


इस प्रकार अंत में इतना लगभग निश्चित हो रहा है कि अब से लेकर जुलाई के अंदर कभी भी ईरान और इजरायल का युद्ध प्रारंभ होगा जो विश्व में कई युद्ध और लड़ाइयां का कारण बनेगा जिसके कारण विश्व में महंगाई और बेरोजगारी और भी भीषण हो जाएगी और युद्ध की एक श्रृंखला प्रारंभ होगी जिसमें कई अनजाने अनदेखे अस्त्र शस्त्रों का प्रयोग किया जाएगा और धरती पर व्यापक तबाही मचेगी।‌ इस्लामी संगठन बनाने का प्रयास सफल होगा और अरब देशों में व्यापक फूट पड़ जाएगी

Sunday, 8 February 2026

‌ मृत्यु भोज का विरोध विदेशी षड्यंत्र का परिणाम है -डॉ दिलीप कुमार सिंह

‌ मृत्यु भोज का विरोध विदेशी षड्यंत्र का परिणाम है -डॉ दिलीप कुमार सिंह 
गद्दार और देशद्रोही तथा विदेशी लोगों से पैसा लेकर ऐसा कह रहा है। ‌ वरना यह और इसके जैसे धर्म गुरु संत महंत आचार्य महात्मा दहेज प्रथा का समाज में फैले हुए धन के असमान वितरण का बहुत महंगे और ऊंचे होटल में आयोजित होने वाले विवाह और मांगलिक समारोह का पैसा लेकर धर्म कथा और राम कथा कहने वाले लोगों का विदेशी परिधान और डीजे आर्केस्ट्रा फिल्मी और भोजपुरी गंदे गानों पर होने वाले विवाह और मंगल समारोह का समाचार पत्र और टेलीविजन चैनल और सोशल मीडिया पर आने वाले अश्लील कामसूत्र और एवं शक्ति वर्धक विज्ञाप और गंदे विज्ञापनों का विरोध करते ‌ और इन्हीं लोगों के कारण सनातन धर्म के देवी देवताओं धर्म कर्म की हंसी पूरी दुनिया में उड़ाई जाती है क्योंकि यह नकली साधु संत है जिनके पास ब्रह्मचर्य तपस्या और सदाचार जैसा कुछ भी नहीं है।

मृत्यु भोज खाने से लोगों की ऊर्जा इसलिए नष्ट होती है क्योंकि वह मरे हुए व्यक्ति का थोड़ा बहुत पाप अपने ऊपर लेते हैं इससे उसे व्यक्ति के पापों का बोझ कम हो जाता है और नरक की आग से छुटकारा मिल जाता है ।

रसमलाई रबड़ी काजू किशमिश बादाम शिलाजीत केसर और यौन शक्ति वर्धक दवाई का सेवन करके एक कुंतल की दें और गाल गुलाबी नैन शराबी वाले ऐसे ही साधु संत सनातन धर्म को बर्बाद कर रहे हैं और इनको पड़ा गठबंधन का पूरा सहयोग भी मिलता है ।

जब मूर्ख लोगों के हाथ में व्याख्या पड़ जाती है तो ऐसे ही अर्थ का अनर्थ हो जाता है मृत्यु भोज संस्कार इसलिए बनाया गया है कि किसी के मर जाने पर इसी बहाने लोग एकत्र होते हैं मृतक परिवार के सुख-दुख में सहभागिता करते हैं और उसे लगता है कि वह दुनिया में अकेला नहीं है उसके अपने बहुत से लोग हैं जैसे आप किसी विपत्ति में पड़ जाते हैं तो डूबते को तिनके का सहारा मिल जाता है ।

यहां एक बात बता देना चाहते हैं कि प्राचीन काल से लेकर अभी 50 वर्ष पहले तक किसी की मृत्यु हो जाने पर लोग अपना सहयोग करते थे और कुछ भी खाते पीते नहीं थे दास संस्कार हो जाने पर लोग गुड़ खाकर पानी पीकर घर चले जाते थे और आज के लोग मरे हुए परिवार से रसमलाई और खोवा छेना  ‌ उच्चतम श्रेणी की मदिरा और यौन शक्तिवर्धकदवाएं लेते हैं तब ऐसे मोटे ताजे संत कुछ नहीं कहते ।

मैं इन मोटे ताजे संत ‌ महात्मा बुद्धिजीवी धर्मगुरु ‌ जो हजारों लोगों का भजन रोज का जाते हैं और एक से पांच कुंतल देने वाले नैन शराबी गाल गुलाबी हैं और उनके समर्थक लोगों विदेशी गद्दारों और इनका पालन पोषण करने वाले देश के छिपे देशद्रोहियों से पूछना चाहता हूं कि किसी भी विवाह में केवल दो संस्कार होते हैं पहले सप्तपदी और दूसरा सिंदूरदान है ।बाकी  वर यात्रा जिसको आर्केस्ट्रा डीजे कोट पैंट सूट बूट शर्ट टाइ असली नाच गाने नग्न और अर्धनग्न होकर सड़कों पर गंदे भद्दे अश्लील दो अर्थी मैथुनिक फिल्मी और भोजपुरी गीत गाने का नियम किस वेद पुराण रामायण महाभारत महाकाव्य धर्म ग्रंथ जातक जैन कथाओं में या गुरु नानक देव के ग में लिखा हुआ है । इसका यह लोग कभी विरोध क्यों नहीं करते रात्र में होने वाले विवाह संस्कार का विरोध क्यों नहीं करते।


एक बार और बता देना चाहते हैं कि यदि क्षत्रिय और ब्राह्मण सचमुच सुधर जाएंगे तो यह सब करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी जब वह खुद ही गिर गए हैं तो दूसरों को अपने से ऊंचा समझ रहे हैं और इसीलिए समाज नष्ट और बर्बाद हो रहा है क्योंकि जब ब्राह्मण रूपी समाज का मस्तिष्क और ‌ सबको शरण देखकर रक्षा करने वाली क्षत्रिय रूपी भुजा समाप्त हो जाएगी तो यह सारा धन दौलत गाड़ी बंगला कर घर की सुंदर स्त्रियां बच्चे सब विदेशी विधर्मी शैतान कब्जा कर लेंगे ‌ 58 मुस्लिम देश संपूर्ण यूरोप और अमेरिका कश्मीर बंगाल केरल बांग्लादेश पाकिस्तान अफ़गानिस्तान का हाल देख रहे हो फिर भी समझ में नहीं आ रहा है उसे पर यह लोग कुछ नहीं बोल रहे हैं जबकि चाहते तो एक करोड़ की संख्या के 1 से 5 कुंतल वाले लोग इन सभी शैतानों का सफाया कर देते इसीलिए ‌ मृत्यु भोज और अन्य चीजों के बहाने इन संत महंतों को आगे करके शंकराचार्य की तरह सनातन धर्म को नष्ट और बर्बाद किया जा रहा है ।


इन लोगों से पूछो कि इन्हें तो जंगल में आश्रम कुटी बनाकर धर्म कर्म करके सत्य धर्म का प्रचार करना चाहिए फिर यह चार्टर्ड हवाई जहाज और रेल के सबसे ऊंचे दर्जे में सबसे कुछ श्रेणी का भोजन किस लिए करते हैं ‌ क्यों बड़े-बड़े लोगों के यहां पंचमकार का सेवन करते हैं और तामसी भोजन का सेवन करके रक्षा बनाकर लोगों को देवता बनने का उपदेश देते हैं बड़े-बड़े हमारे योग और धर्म के आचार्य सब कुछ विदेशी ढंग का यहां तक की शौचालय भी विदेशी ढंग का प्रयोग करके सबको स्वदेशी का भाषण देते हैं ।क्या हमारे ऋषि मुनि तपस्वी विश्वामित्र ब्रह्म ऋषि जैसे लोग राज पाठ में सूरज सुंदरी में डूब कर सत्य और धर्म का प्रचार करते थे ।

एक बात और बता दे आज बंदर के हाथ में छुरा और पागल के हाथ में स्टेनगन देकर देश धर्म को और भारत को बचाने का जिम्मा ऐसे लोगों को दिया जा रहा है जो खुद ही इसको बर्बाद कर देंगे मैं जो भी कहता हूं सत्य धर्म और अपने सनातन ग्रंथो को प्रामाणिक रूप में ‌ अध्ययन करके कहता हूं अब इस एक कुंतल की तोंद वाले गाल गुलाबी नैन शराबी लोगों के समर्थन में और मुझे बताएं कि इसमें एक भी शब्द क्या गलत कहा गया है 

**दुनिया भर को इस्लाम बनाओ** वैदिक सूत्र से लिया गया है जिसमें कहा गया है **समस्त विश्व को आर्य बनाओ** वास्तव में जितने भी हमारे युद्ध हुए हैं वह सभी अरब और यूरोप के राक्षसी शैतानी शक्तियों से हुए हैं चाहे वह विश्वामित्र और वशिष्ठ के समय दश राजाओं का युद्ध हो चाहे रावण का युद्ध हो याद रखें रावण लंका का नहीं था वह भी अब देश का ही था चाहे सिकंदर का चाहे अन्य जंगली शैतानी जातियों का आक्रमण रहा हो ।

इसलिए इन सब के चक्कर में पड़कर वाद विवाद करने की आवश्यकता नहीं है नए बने हुए बौद्ध लोग भी यही करते हैं बस केवल थोड़ा सा रूप बदल दिया गया है और बाकी लोग भी यही करते हैं जो संस्कार सनातन धर्म के है वही क्रिश्चियन और यहूदी करते हैं और वही मुस्लिम भी करते हैं जो कार्य बनारस में और गया में पिंडदान का होता है वही मक्का मदीना में हज की यात्रा करते समय भी किया जाता है इसमें बहुत कुछ देशकाल और परिस्थितियों का भी अंतर होता है ।


बर्फ वाले प्रदेशों में और रेगिस्तान में जहां लकड़ी उपलब्ध नहीं थी जहां पानी उपलब्ध नहीं था वहां लकड़ी और पानी बचाने के लिए अनेक नियम बनाए गए थे जैसे की लाशों को दफन कर देना वहां जनसंख्या भी बहुत कम थी एवं ऐसे बर्तनों का आविष्कार करना जिससे पानी कम से कम खर्च हो भारत में हर चीज की प्रचुरता थी इसलिए यहां पर हर कार्य स्नान करने के बाद का नियम बनाया गया यहां जलवायु भी अच्छी और गर्म है ‌ वहां जंगली असभ्य म्लेच्छ ‌ जैसी अपराधी प्रकृति की भारत से निकल गई जातियों का निवास है जहां स्त्रियों की कमी है इसलिए एक स्त्री सेकंड लोगों का काम चला सकती है लूटमार ही इनका धंधा था क्योंकि वहां पहले कुछ होता नहीं था भारत में ऐसी चीज बनाने की क्या आवश्यकता है।

चलते-चलते एक बात बता दे यदि ब्राह्मण क्षत्रिय लाला और बनिया वर्ग अभी भी सुधर जाएं और सफल जाएं तो किसी भी सरकारी नियम की सहायता की उनको आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी मैं तो कहता हूं सारी नौकरी सारे पद और सारी सी अनुसूचित जाति जनजाति और पिछड़ी जातियों का बना दो और 5 साल में देखो क्या से क्या हो जाता है जिस तरह बिना देश के इसराइल महाशक्ति बन गया। नहीं तो गुजराती मारवाड़ी ‌ पंजाबी सिंधी लोग कितने ऐसे हैं जो नौकरी करते हैं और पूरी दुनिया में इनका राज है यहूदी लोगों को भी देख सकते हैं दुनिया में सबसे कम है और सबसे अधिक इन्हीं का दबदबा कायम है 58 मुस्लिम देश इनका कुछ नहीं उखाड़ सकते।

 वैसे ही यदि जाग सके तो क्षत्रिय ब्राह्मण वैश्य और लाला लोग आज भी 10 वर्ष में पूरी दुनिया में अपना साम्राज्य खड़ा कर सकते हैं लेकिन यह पतित हो गए हैं और योग्यता बढ़ाने की जगह आरक्षण जैसी चीजों का व्यर्थ में विरोध करके अपनी ऊर्जा समाप्त कर रहे हैं ‌ इससे अच्छा होता कि सारा समय अपने योग्यता और प्रतिभा बढ़ाने में करते दुनिया भर के दरवाजे खुले हैं लेकिन दुर्भाग्य से अभी पंचमकार वाली मैथुनी संस्कृत के जाल में और सूरज सुंदरी में डूब रहे हैं

चलते चलते आपको बता दे की देवताओं को संविधान नियम विधान और कानून की आवश्यकता नहीं है और राक्षसों के लिए शैतानों के लिए कानून बनाना व्यर्थ है क्योंकि वह उसका पालन ही नहीं करेंगे सारे नियम कानून मनुष्य अर्थात मनु की संतानों के लिए बने हैं इसलिए अन्य धर्म के लोगों को मानव समझने की भूल मत करो यह चलते फिरते विषैला सांप हैं जो कहीं भी आपको डंस कर खत्म कर देंगे एपस्टीन फाइल्स को ‌ देख लो जो लोग मनु की संतान अर्थात मानव नहीं है वह कैसी शैतानी हरकतें कर रहे हैं यही इनके सभ्यता की चरम उन्नति का फल है जिसमें सनातन धर्म को छोड़कर बाकी सारे धर्म शामिल हैं और सनातन धर्म का अर्थ है वह सारे लोग जो क्रिश्चियन मुस्लिम और यहूदी नहीं है इसमें हिंदू सिख जैन बौद्ध आस्तिक नास्तिक चार्वाक जंगली गुफा वाशी वनवासी सब शामिल है-डॉ दिलीप कुमार सिंह

Friday, 6 February 2026

*संघ प्रमुख मोहन भागवत जी के खिलाड़ी संवाद गोष्ठी में शामिल होंगे खेल गुरु फरहत अली खान*

*संघ प्रमुख मोहन भागवत जी के खिलाड़ी संवाद गोष्ठी में शामिल होंगे खेल गुरु फरहत अली खान* 
क्रीड़ा भारती द्वारा 20 फरवरी को मेरठ में आयोजित खेल संवाद में रामपुर से संघ के द्वारा फरहत अली खान को निमंत्रण भेजकर आमंत्रित किया गया है।
फ़रहत अली खान ने कहा के यह उनके जीवन में निमंत्रण ही नहीं बल्कि उपलब्धि है।
जब राष्ट्र को समर्पित संस्थाएं समाज के साथ साथ खेलों पर भी ध्यान केंद्रित करेंगी तब भारत को खेल महाशक्ति बनने से कोई नहीं रोक सकता।
देश की खेलनीति के अनुसार 2036 का ओलंपिक जो भारत आयोजित कर सकता है योजना बनाई जा रही है ऐसी जानकारी मिल रही है।
 इस होने वाले ओलिंपिक में हमारा देश खेलने ही नहीं बल्कि हर खेल स्पर्धा में गोल्ड जीतकर ही दिखाएगा ऐसी आशा ही नहीं विश्वास है। 
उन्होंने कहा खेल जुनून ही विजय बनाता किसी भी महान खिलाड़ी की गाथा पढ़ लो।
खेल में शोक,मेहनत, अभ्यास,जुनून, खेल से इश्क,अनुशासन, देश प्रेम और ईमानदार गुरु की ज़रूरत होती है।
पहले आलस,लालच और समस्याओं से जीतना सीखो , जिले से लेकर विश्व स्तर और ओलिंपिक का पदक आपके गले की शान बनने के इंतजार में है।
आज ही और अभी से देश के हर खिलाड़ी को यह सोच बनाने की जरूरत है हम नौकरी पाने के लिए नहीं ,
देश के तिरंगे की शान और सम्मान के लिए खेल रहे हैं यह विश्वसनीय सोच जो खिलाड़ी को हमेशा के लिए देश की शान बना देती है।
उन्होंने आर एस एस द्वारा भेजे गए आमंत्रण का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया है।