Wednesday, 12 August 2026

स्वतंत्रता के श्वेत श्याम बिंदु -डॉ दिलीप कुमार सिंह

स्वतंत्रता के श्वेत श्याम बिंदु -डॉ दिलीप कुमार सिंह 
15 अगस्त 1947 को 190 वर्ष के शासन के बाद और करोड़ों लोगों के बलिदान के फल स्वरुप देश को विभाजित स्वतंत्रता प्राप्त हुई जिसमें भारत ने पाकिस्तान अफ़गानिस्तान तिब्बत नेपाल भूटान म्यांमार श्रीलंका मालदीव बांग्लादेश जैसे अपने भूभाग खो दिए ।बाद में अरुणाचल प्रदेश और कश्मीर का काफी भाग चीन और पाकिस्तान ने कब्जा कर लिया और स्वतंत्रता प्राप्ति के 78 वर्ष बीत गए आज हम अपनी आजादी मनाने जा रहे हैं तो गंभीर आत्मवलोकन और निष्पक्ष विवेचना करनी है कि इन वर्षों में हमने लोकतांत्रिक भारत में क्या खोया और क्या पाया है ।

इतना तो निश्चित है कि 1947 में भारत की स्थिति बहुत ही दयनीय और शोचनीय थी क्योंकि भारत लगातार सिकंदर के आक्रमण से लेकर 800 वर्षों तक तुर्क मुगलों द्वारा और 190 वर्ष अंग्रेजों के द्वारा लूटा गया था देश का सब कुछ लूट कर बाहर चला गया था केवल गिनती के राजनेताओं बड़े अधिकारियों और दलाल लोगों और सेठ साहूकारों उद्योगपतियों के पास ही धन बचा था देश की 99% जनता नंगी भूखी थी सोने की चिड़िया कहां जाने वाला भारत बिल्कुल कंगाल हो चुका था इसी बीच पाकिस्तान से बिगड़े संबंध के कारण 1948 में पाकिस्तान से युद्ध भी लड़ना पड़ा उधर गांधी जी द्वारा भी काफी धन दौलत जबरदस्ती पाकिस्तान को दिला देने से स्थिति और भी भयानक हो गई थी देश की इच्छा और जनमत के विरुद्ध सरदार पटेल की जगह नेहरू को जबरदस्ती प्रधानमंत्री बनाए जाने से और लॉर्ड माउंटबेटन के आजादी के बाद भी वायसराय बने रहने से देश की स्थितियां और भी दयनीय हो गई थी ।

कालांतर में धीरे-धीरे देश का विकास शुरू हुआ उद्योग धंधे और नदियों पर बांध बनने से और परमाणु रिएक्टर स्थापित होने से आर्थिक स्थिति में सुधार होना शुरू हुआ लेकिन नेहरू की अति महत्वाकांक्षा और राजनीतिक एवं कूटनीतिक विफलता के कारण और डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद से उनका पूरी तरह मतभेद होने के कारण सारी प्रगति बेमानी हो गई। विश्व मंच पर नेहरू की भीषण असफलता के बीच चीन ने भारत पर भीषण आक्रमण किया और उसे बुरी तरह पराजित किया और लाखों वर्ग किलोमीटर भूभाग छीन लिया तिब्बत के दलाई लामा को सक्षम न होते हुए भी जबरदस्ती शरण देने और तिब्बत को चीन के अधिकार में मान लेने और भारत का वीटो पावर चीन को सौंप देने से इतना गहरा झटका लगा जिससे भारत अभी भी उबर नहीं पाया और इसी भीषण अपमान के चलते नेहरू का देहासान भी हो गया।

नेहरू की नीतियां पूरे विश्व के लिए और भारत के लिए बहुत ही मूर्खतापूर्ण थी कैलाश मानसरोवर जैसे पवित्र स्थान अक्साई चीन भारत के कब्जे से निकल जाने से और गिलगित-बाल्टिस्तान मुजफ्फराबाद पाकिस्तान के जीत लेने से भारत जो रुस से लगभग सटा हुआ था अब रूस से बहुत दूर हो गया और उस पर पाकिस्तान और चीन का नियंत्रण हो गया भारत रत्न स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री जी ने देश को काफी हद तक संभाला लेकिन बहुत बड़े विश्वास घात और षड्यंत्र के चलते विदेशी इशारों पर उन्हें ताशकंद में समझौता के कालखंड में मार दिया गया और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की तरह आज तक उनका रहस्य जस का तस बना हुआ है ।

इसके बाद इंदिरा गांधी की विवादास्पद नीतियां लोकतंत्र का काला अध्याय आपातकाल लागू हुआ न्यायपालिका की दुर्गति हुई देश के मुकदमे करोड़ की संख्या में पहुंच गए जबरदस्ती नसबंदी सनातनी लोगों की खोज खोज कर कराने विरोध करने वाले सभी नेताओं को जेलों में ठूंस दिया गया।चारों ओर हाहाकार मच गया इसके बाद मिली-जुली सरकारों का दौर चला फिर कांग्रेस और भाजपा के बीच रास्साकशी और नूराकुश्ती होते-होते 2014 में पहली बार मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी जो आज भी चल रही है फिर भी देश में कोई बहुत कुछ उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ ।

फिर भी कुछ क्षेत्रों में भारत में विश्व स्तरीय प्रगति किया जिसमें परमाणु भौतिकी रक्षा अनुसंधान विमान क्षेत्र और अंतरिक्ष विज्ञान कृषि और दुग्ध क्रांति मछली पालन रेल सड़क बिजली जैसे भाग आते हैं कृषि उत्पादन में भी अभूतपूर्व वृद्धि हुई और भारत चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा खाद्यान्न उत्पादक देश है ।दुग्ध क्रांति के फल स्वरुप भारत दूध में पहला और चीनी उत्पादन में भी पहला स्थान रखता है इसके अलावा धान गेहूं पटसन और जूट लोहा इस्पात जैसे क्षेत्रों में भी अभूतपूर्व प्रगति हुई लेकिन इस कालखंड में फिर से सियाचिन ,1999 का भारत-पाकिस्तान का युद्ध कारगिल और गलवान घाटी एवं कश्मीर पर आतंकवादियों के लगातार आक्रमण से देश को भारी क्षति हुई जिसका असर यहां की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा । सबको विश्वास था कि ऑपरेशन सिंदूर में मोदी जी जबरदस्ती पाकिस्तान द्वारा अधिकृत कश्मीर भारत में मिला लेंगे लेकिन ऐसा भी नहीं हो पाया। 

इसके अलावा खेलों में भारत की स्थिति बहुत ही खराब रही भारत कभी भी ओलंपिक खेलों में सर्वश्रेष्ठ 30 स्थान तक भी नहीं पहुंच सका जबकि चीन जैसे स्थान जो 1948 तक भारत से बहुत पीछे थे 1970 के दशक से अभूतपूर्व प्रगति करते हुए अर्थ वित्त खेल सहित हर क्षेत्र में आज पहले स्थान पर पहुंच गए भारत कभी भी ओलंपिक खेलों में एक से अधिक स्वर्ण पदक एक साथ नहीं जीत पाया इससे अधिक दुर्भाग्य और क्या हो सकता है कुछ भारतीय खिलाड़ियों ने व्यक्तिगत स्तर पर कालखंड में पूरे विश्व में अपना जादू बिखेरा और सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बने । इसमें सुनील माइकल फरेरा पंकज आडवाणी गावस्कर सचिन तेंदुलकर कपिल देव रोहित शर्मा विराट कोहली कुंवर दिग्विजय सिंह बाबू अशोक कुमार विश्वनाथन आनंद साइना नेहवाल पीवी सिंधु मैरी कॉम अभिनव बिंद्रा नीरज चोपड़ा सुशील कुमार जैसे गिने चुने नाम शामिल हैं और सबसे दुखद बात यह कि आज तक भारत को ओलंपिक खेलों के आयोजन करने योग्य भी नहीं समझा गया।

भारत की सरकार और बुद्धिजीवी लोगों तथा तमाम मीडिया के लोगों को बातों को बढ़ा चढ़ा कर कहने की आदत पड़ गई है जैसे अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत ने अभूतपूर्व प्रगति किया है लेकिन आज भी वह अमेरिका चीन और रूस से बहुत पीछे है यह तीनों देश अपने-अपने अंतरिक्ष स्टेशन बना चुके हैं चांद पर पहुंच चुके हैं जब भारत अपना मानव चंद्रमा पर उतार देगा तब वह 1969 में अमेरिका की बराबरी करेगा इस सच को छिपा कर भारत के चंद्रयान मिशन को बहुत बढ़ा चढ़ा कर दिखाया जाता है फिर भी चंद्रयान और मंगल अभियान उच्च कोटि के अभियान रहे लेकिन अभी भारत को इस क्षेत्र में बहुत कुछ करना है और कर भी सकता है लेकिन अपेक्षित सरकारी दिशा निर्देश और सहायता नहीं मिल पाने से अभी यह अभियान अपने शैशवावस्था में है।

आज 78 वर्षों में भी देश भ्रष्टाचार बेरोजगारी महंगाई सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों तथा सरकारी तंत्रों की संवेदनहीनता लालफीताशाही भ्रष्टाचार और घूसखोरी से बुरी तरह जूझ रहा है देश का अपार काला धन और करोड़ों घुसपैठिए देश की अर्थव्यवस्था खोखला करने के लिए काफी है बढ़ती हुई जनसंख्या विशेष कर मुस्लिम जनसंख्या देश की सारी प्रगति और उपलब्धियां को फीका करके उसे धरातल पर ला देती है ।यदि 5 करोड़ के लिए 10 वर्षों में सुविधाएं जुटाई जाती हैं तो 10 करोड लोग पैदा हो जाते हैं इसलिए सब कुछ और भी विकट और भयानक हो जाता है निश्चित रूप से बिजली पानी और सड़क क्षेत्र में बहुत अधिक प्रगति हुई है लेकिन बिजली चोरी और सड़क पर भीषण दुर्घटनाएं जाम और अतिक्रमण और धर्म स्थलों का अवैध निर्माण बड़े-बड़े लोगों का कब्जा बहुत ही भीषण चिंता का विषय है रेल हवाई जहाज और सड़क दुर्घटनाओं में भारत के सबसे अधिक लोग मरते हैं यही हाल रोग बीमारियों के और सांपों के काटे जाने को लेकर भी हैं अधिकांश धर्म गुरु और धर्मस्थल लूटपाट बेईमानी शोषण और चोरी के केंद्र बन गए हैं ।

लोकतंत्र का सजग प्रहरी प्रेस मीडिया बहुत लाचार और विवश है कुछ गिने चुने सरकारी सुविधा प्राप्त प्रिंट इलेक्ट्रानिक मीडिया को छोड़ दिया जाए तो बाकी स्थितियां बहुत ही खराब है मध्यम और जनपद स्तर के समाचार पत्रों को बहुत अधिक संघर्ष करना पड़ता है और सच छापने की बहुत भारी कीमत उनको चुकानी पड़ती है विज्ञापन और सुविधाओं के लिए सरकार पर निर्भर यह तंत्र चाहकर भी सरकार की और अधिकारियों की आलोचना और बुराई एक सीमित दायरे से अधिक जाकर नहीं कर सकता है फिर भी जान पर खेल कर से सामने लाने वाले पत्रकारों ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की गरिमा को कायम रखा है और इसे देश का चौथा स्तंभ बिल्कुल सही कहा जाता है लेकिन इनको ना तो सरकार सहायता और सुरक्षा देता है और न जानता ही इसलिए जाकर भी बहुत कुछ नहीं कर सकते हैं। 

पुलिस की हालत तो इतनी खराब है की अधिकांश भारतीयों का विश्वास ही पुलिस से उठ चुका है और रात में कोई अपनी महिलाओं लड़कियों को थाने में भेजने के पहले हजार बार सोचता है न्यायपालिका की स्थिति भी बहुत खराब है 5 करोड़ से अधिक मुकदमे लंबित है जो स्थिति को भयानक रूप में प्रदर्शित करते हैं अगर 100 वर्ष इसी गति से सब कुछ चलता रहे तो भी मुकदमों का निस्तारण नहीं हो पाएगा लगभग हर सरकारी विभागों की यही हालत है कहीं भी पत्रावली बिना लेनदेन के आगे नहीं बढ़ती है लगभग हर सरकारी विभाग और संस्थान का यही हाल है सांसद और विधानसभा में दो तिहाई दिन केवल शोरगुल और टीका टिप्पणी में ही चले जाते हैं दूसरों को यह क्या उपदेश देंगे चुनाव लड़ने की ना कोई योग्यता है न मानदंड और ना शिक्षा ही उनके लिए उपयोगी अर्हता मानी गई है दल बदल विधायक अर्थ हैं हो गया है और अधिकांश संख्या में सांसद विधायक गंभीर प्रकृति के मुकदमों में लिप्त पाए गए हैं और उन्हें चुनने वाली जनता क्या समझ कर चुनती है यह समझ के बाहर है 

कुछ चीजों को बहुत बड़ा चढ़ा कर कहा जाता है जैसे कि भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है बात बिल्कुल सही है लेकिन यह भी देखना होगा कि विश्व की सर्वश्रेष्ठ 10 अर्थव्यवस्था में तीसरे स्थान से लेकर दसवें स्थान तक की अर्थव्यवस्था में बहुत मामूली अंतर है उसमें भी तीसरे चौथे पांचवें और छठे स्थान में नाम मात्र का अंतर है अगर भारत तीसरे स्थान पर भी पहुंच जाता है तो इसमें कोई बहुत बड़ी आश्चर्य की बात नहीं है क्योंकि कोई भी सरकार रहेगी तीसरे स्थान तक भारत का 5 वर्ष में पहुंच जाना निश्चित है ।लेकिन भारत की असली अर्थव्यवस्था की तुलना चीन और अमेरिका से है जो भारत से चार से लेकर 6 गुना अधिक है तब समझ में आता है कि अभी हम बहुत पीछे हैं

 भारतीय राजनेता इतने चालाक है कि वह हमेशा पाकिस्तान से तुलना करके भारत की श्रेष्ठता दिखाते हैं बगल में  स्थित चीन की कभी तुलना नहीं करते हैं जो भारत के लिए असली और सबसे बड़ा खतरा है किसी भी जगह चले जाइए सब जगह भ्रष्टाचार बेईमानी लूट घूसखोरी भ्रष्टाचार का अड्डा है चाहे पुलिस हो रेल विभाग हो परिवहन विभाग हो रजिस्ट्री विभाग हो बिजली विभाग हो हर जगह यही हालत है देश के लोगों को गलत दिशा में मोडा जा रहा है सरकार समर्थक लोग चीन और अमेरिका के सामानों का बहिष्कार करने की बात करते हैं जबकि उनके घर लगभग सारे सामान चीन और अमेरिका द्वारा बने हैं यह कभी नहीं प्रयास किया जाता कि हम चीन अमेरिका से अच्छे सामान उनसे सस्ती दर पर बनाने का प्रयास करें राजनेताओं ने सारी सुविधाएं अपने लिए मिली मार नूरा कुश्ती के तहत कर लिया है और एक साथ कई जगह से लड़कर कहीं ना कहीं से जीत ही जाते हैं नीचे से ऊंची प्रतियोगिताओं से आने वाले पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी अंगूठा छाप सांसद विधायक के आगे कुछ नहीं है उच्च और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया तो बहुत ही घटिया और खराब है। बिना किसी परीक्षा प्रतियोगिता के सीधे उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में जज बनने वाला व्यक्ति कितना उच्च स्तर का काम कर सकता है। 

देश का हाथ पैर सीना काटकर पाकिस्तान बांग्लादेश कश्मीर अफगानिस्तान तिब्बत लंका म्यांमार मालदीव्स को बांटकर यह आशा बनी थी कि भारत एक सनातनी देश होगा जिसमें हिंदी हिंदू हिंदुस्तान और राम राज्य का बोलबाला रहेगा और कम से कम दुनिया में एक जगह तो सनातनी अर्थात गैर मुस्लिम गैर क्रिश्चियन गैर ईसाई सुरक्षित और अपने अनुसार जीवन जीते रहेंगे लेकिन वह भी आकाश कुसुम और मुंगेरीलाल का हसीन सपना बनकर रह गया है आज हिंदी और प्रदेश की भाषाएं लोग इसीलिए बोलते हैं कि जीवन भर कोशिश करके भी वे अंग्रेजी पढ़ लिख समझ और बोल नहीं सकते वे अपने भाषा प्रेम के कारण ऐसा नहीं करते हैं बल्कि विवश होकर ऐसा करते हैं सरकार कोई भी हो हर सरकार अंग्रेजी भाषा और अंग्रेजी रहन-सहन अंग्रेजी सभ्यता और अंग्रेजी प्रोटोकॉल को पूरे देश में जबरदस्ती लागू करती चली जा रही है और तमाम बहाना बनाकर दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे वैज्ञानिक भाषा हिंदी को मिटाने पर डटी हुई है। इसीलिए कहा जाता है कि -

*हमको न निज गौरव तथा निज देश का अभिमान है।

हम नर नहीं है पशु निरा है और मृतक समान हैं।

इस प्रकार निष्पक्ष रूप से यह कहा जा सकता है कि भारत में स्वतंत्रता के बाद  बहुत भारी प्रगति किया है लेकिनअगर रूस इसराइल चीन जर्मनी ईरान  और अमेरिका से तुलना करके देखा जाए तो हम अर्थव्यवस्था खेल अंतरिक्ष शक्ति में उनसे बहुत-बहुत पीछे हैं इसी प्रकार प्रति व्यक्ति आमदनी में भारत विश्व के 100 सर्वश्रेष्ठ देशों में भी नहीं है न्याय व्यवस्था बिजली पानी सड़क की उत्तम व्यवस्था और रेलगाड़िया की रफ्तार प्रेस की स्वतंत्रता के मायने में भी भारत की स्थिति बहुत शोचनीय है विश्व में कूटनीति और राजनीति के क्षेत्र में भी भारत बहुत पीछे है इसी तरह उच्चतर शोध अच्छे विश्वविद्यालय अच्छे समाचार पत्रों के मायनों में भी भारत की स्थिति बहुत ही खराब है

गंदगी प्रदूषण और हरियाली को लेकर तो भारत की स्थिति चिंता से भी चिंतनीय है स्थितियां इतनी खराब है कि लोगों की यात्रा के लिए आरक्षित टिकट का मिल पाना गंगा स्नान के बराबर है यही देश की वास्तविक स्थिति है और ट्रेनों में यात्रा करने वाले कोई भी सुरक्षित नहीं है जंजीर से बांधकर रखा गया शौचालय का मग्गा इसका प्रमाण है फिर भी देश आगे बढ़ रहा है अगर कोई सच्चा राष्ट्रभक्त व्यक्ति आ जाएगा तो उसी दिन से भारत बिल्कुल सही दिशा में सोने की चिड़िया और जगतगुरु हो सकता है। अभी तक तो लाल बहादुर शास्त्री जी को केंद्र में और कल्याण सिंह को राज्य में छोड़कर कोई महापुरुष उस कुर्सी को ठोकर मारने वाला नहीं आया लेकिन वर्तमान में यदि योगी जी प्रधानमंत्री बन जाते हैं और हेमंत विश्व शर्मा पुष्कर धामी शिवराज सिंह चौहान जैसे कुछ नेता आशा की किरण जागते हैं लेकिन अभी फिलहाल ऐसे योग्य महान मानव की प्रतीक्षा की जा रही है भगवान श्री राम से चलकर हर राजनेता गांधी पर आकर अटक जाता है और वहीं पर देश भटक जाता है।

Monday, 10 August 2026

मौसम की भविष्यवाणी आज जौनपुर और आसपास और उत्तर भारत के अधिकांश सिस्टम में भयंकर गर्मी उमस और पसीना से लोग बेहाल हो जाएंगे दोपहर के बाद कई स्थानों पर बूंदाबांदी और हल्की वर्षा होगी

मौसम की भविष्यवाणी आज जौनपुर और आसपास और उत्तर भारत के अधिकांश सिस्टम में भयंकर गर्मी उमस और पसीना से लोग बेहाल हो जाएंगे दोपहर के बाद कई स्थानों पर बूंदाबांदी और हल्की वर्षा होगी

जौनपुर और आसपास आज का अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस रहेगा लेकिन इसका प्रभाव 43 डिग्री जैसा होने से लोग पागल हो जाएंगे न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रहेगा लेकिन इसका असर भी 30 डिग्री सेल्सियस के बराबर होगा


कल के मौसम के बारे में अनुमान है कि अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस होता और इसका असर 44 डिग्री और 30 डिग्री सेल्सियस होने से और भी बुरी स्थिति पैदा होगी। सुबह से ही भयानक पसीना और उमस शाम तक चलता रहेगा और इसी बीच बिजली विभाग वाले भी अपना कमल हमेशा की तरह अवश्य दिखा देंगे 

इस बीच वायु गुणवत्ता सूचकांक 40 से 70 के बीच सापेक्षिक आर्द्रता 40 से 90% के बीच हवा की दिशा दक्षिण पूर्वी पूर्वी और गति 5 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा के बीच और पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 7 से 9 के बीच बहुत भयानक रहेगी

इस बीच देश दुनिया के बारे में हमारे केंद्र की सभी भविष्यवाणी पूरी तरह सही हुई जौनपुर उत्तर प्रदेश और संपूर्ण भारत में केवल 60 से 70% मानसूनी वर्षा होने की तीन बार अकाल और अकाल सूखा जैसी स्थितियां पढ़ने की बात सही हो रही है दक्षिण अमेरिका हवाई द्वीप और जापान कोरिया चीन दक्षिणी पूर्वी एशिया में भयानक भूकंप और महा चक्रवात आने की बात भी बिल्कुल सही सिद्ध हुई।

30 जुलाई से 7 अगस्त तक लगातार वर्षा और बीच में दो-तीन दिन भारी वर्षा होने की बात पूरी तरह सही हुई 8 अगस्त से 15 अगस्त तक गर्मी उमस और पसीना भयंकर होने बूदाबादी हल्की वर्षा होने की बात भी पूरी तरह सही हो रही है


सुख का एक और चक्कर संपूर्ण भारत में प्रारंभ होने जा रहा है और 20 अगस्त के आसपास भारत की जलवायु और परिस्थितियों एक बार फिर से बदल जाएंगी जिसमें दो-चार दिन आगे पीछे हो सकता है

दिन महीने साल भर फालतू और निठल्ले घूमने वाले लोगों के लिए विवाह और मांगलिक कार्यों का निमंत्रण पत्र बांटना इतना जटिल लगता है कि वह उसे सोशल मीडिया पर भेजने लगते हैं जबकि निमंत्रण पत्र घर-घर जाकर देने से आपसी संबंध और खून के रिश्ते मजबूत होते हैं जितनी कम की चीज हैं वह सभी खत्म करके आज का मनुष्य अपना सारा समय मोबाइल और मीडिया पर दे रहा है।

दिन महीने साल भर फालतू और निठल्ले घूमने वाले लोगों के लिए विवाह और मांगलिक कार्यों का निमंत्रण पत्र बांटना इतना जटिल लगता है कि वह उसे सोशल मीडिया पर भेजने लगते हैं जबकि निमंत्रण पत्र घर-घर जाकर देने से आपसी संबंध और खून के रिश्ते मजबूत होते हैं जितनी कम की चीज हैं वह सभी खत्म करके आज का मनुष्य अपना सारा समय मोबाइल और मीडिया पर दे रहा है। 

इस बारे में एक बहुत सुंदर लेकिन असली कहानी सुना रहा हूं एक बार एक निमंत्रण पत्र व्हाट्सएप पर आया और उन्होंने लिखा कि अत्यधिक व्यस्त होने के कारण मैं आपको व्हाट्सएप पर ही निमंत्रण दे रहा हूं कृपया आने की कृपा कीजिएगा पानी वाला भी अत्यधिक चालक और इस जैसा मक्कार था उसने भी ₹2000 के नोट की फोटो कॉपी कर दिया और बोला प्रिय महोदय मैं अत्यधिक व्यस्त हूं और ए नहीं सकता इसलिए ₹2000 निमंत्रण भेज रहा हूं कृपया स्वीकार कर लेना यह आज की सबसे भयानक सच्चाई है और आज वर्ष में एक या दो वर्ष भी कहीं कोई आता जाता नहीं है 


और हालात तो यह है कि घर की महिलाओं और छोटे बच्चों को कोई पहचानता भी नहीं बस केवल नए विवाह में दामाद 2-4 साल आते हैं वह भी संबंध बना रहा तो यह पढ़ा लिखा वैज्ञानिक व्यक्ति नाली और गटर में क्यों कूद रहा है समझ के बाहर है 

और क्यों स्वास्थ्यवर्धक चीज दूध भी दही हरी सब्जियां समय के फल फूल छोड़कर कुरकुरे धकाधक चटपटे फटाफट चाऊमीन मैगी बर्गर हैमबर्गर सड़े गले बिस्कुट और पाव रोटी नकली मक्खन लगा अशुद्ध आटे से बना रोटी और प्लास्टिक के लंबे चावल क्यों खा रहा है और रोगी होकर डॉक्टर के यहां क्यों जा रहा है बाहर का जहरीला तेल खाकर हार्ट अटैक का शिकार क्यों हो रहा है


 क्या सचमुच मनुष्य पढ़ा लिखा शब्द है या जंगल युग में जाकर जंगली लोगों से भी अधिक मूर्ख बनता चला जा रहा है जो फोटो स्त्री पुरुष मोबाइल में देखते हैं उसकी जिंदा फोटो पति-पत्नी और बच्चों के रूप में उपस्थित हैं लेकिन उनको उसमें रुचि नहीं है और दुनिया भर के अश्लील पूर्ण और गंदे वीडियो और चित्रों में ही रुचि है 


नई पीढ़ी पर माता-पिता ध्यान नहीं देते क्योंकि उनके यहां जाने का कम मौका मिलता है और मौका मिलता है तो एक-दो दिन में चले आते हैं उन्हें क्या मालूम कि उनका लौंडा बीयर और शराब पी रहा है या तो  गलत लड़कियों के साथ संबंध बनाकर रखा है या कृत्रिम और अप्राकृतिक संबंध बनाकर अपना जीवन नर्क कर चुका है मेरी बातों पर विश्वास ना हो तो पढ़ रहे और नौकरी कर रहे अपने लड़के लड़कियों की गहराई से जांच करो और 90% से अधिक बात सही ना हो तो मुझे फोन करके बोलो कि मैं गलत कह रहा हूं

बहुत से लोग सच्चाई नहीं जानते बहुत से लोग सच्चाई देखते और जानते हैं लेकिन लिखने की हिम्मत नहीं होती ऐसे लोगों का देश समाज और धर्म तथा घर परिवार के लिए कोई मूल्य नहीं होता जो सच्चाई देखे उसे लिखे पड़े और गलत काम रोकने का प्रयास करें वही स्त्री पुरुष देश समाज धर्म के काम आता है एक और दुखद और भयानक सच्चाई आप सबको बताना चाहता हूं कि भारत में ज्यादातर लड़के लड़कियों का यौन शोषण उनके अपने निकट के लोग ही करते हैं प्रारंभ में लोग ध्यान नहीं देते और जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती है तब हाहाकार मच जाता है यदि आपके घर का कोई भी बच्चा या बच्ची किसी के बहुत अधिक नजदीक है और कोई व्यक्ति बार-बार उसके साथ आता जाता है या घर आता है तो उसे पर बहुत ही सतर्क निगाह रखें सब कुछ समझ में आ जाएगा इसी का फल है कि लोग मानी और मौसी तक से विवाह कर ले रहे हैं 

 आप मुंगेरीलाल के हसीन सपने देख रहे हैं बच्चों को लेकर और बच्चे हवा हवाई मार्ग से आकाश की यात्रा पर उड़ रहे हैं। 

जैसे विनाश करने वाला हमेशा विनाश करता है वैसे हम जैसे निर्माण करने वाले सदैव प्रयास करते हैं की मानवता और सच्चाई सदाचार आचार विचार और अच्छाई बची रहे । यदि 200 साल में हमारे साथ करोड़ बलिदानी अन्य लोगों की तरह यही सोचते कि हमें अपना जान देश की स्वतंत्रता के लिए देने की क्या आवश्यकता है तो आज भी हम अंग्रेजों के गुलाम होते। 


स्थितियां इतनी खराब हो चुकी हैं कि यदि बच्चों के हाथ में मोबाइल है और आप जरूरी बात किसी से करना चाहते हैं तो बच्चे बार-बार फोन काट देते हैं और कुछ चालक बच्चे तो आपका फोन ही ब्लॉक कर देते हैं इस बुरी स्थिति और क्या होगी 😔 


और आप सोचते हैं की कमी नई पीढ़ी के लड़के लड़कियों की है तो आप गलत हैं गलती आपकी है और बच्चों को दोषी बना रहे हो संसार में कोई ऐसा बच्चा नहीं है जो मोबाइल या कागज से खेले यह जिसके साथ खेलने वाला स्त्री या पुरुष उपस्थित है - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक

देश के सामने सबसे गंभीर प्रश्न परीक्षाओं की शुचिता और नकल

 देश के सामने सबसे गंभीर प्रश्न परीक्षाओं की शुचिता और नकल
  जिन परीक्षाओं से देश बनता है चपरासी से लेकर सबसे बड़े अधिकारी बनते हैं वह सभी परीक्षाएं स्वयं ही पूरी तरह से दूषित हो चुकी हैं और उन्हें दूषित करने वाला कोई अन्य नहीं उसमें बैठे जिम्मेदार नेता अधिकारी और सरकार है जब देश में 95% अपात्र और कुपात्र जबरदस्ती चुने जाएंगे तो देश का कल्याण कैसे होगा और मजे की बात यह है कि आजकल अपने को सही दिखाने के लिए परीक्षाएं इस प्रकार से ली जाते हैं मानो कहीं युद्ध चल रहा है परीक्षा के बहाने सनातन धर्म का घनघोर अपमान किया जाता है लड़कों के जूते चप्पल की जांच होती है मोजे उतार लिए जाते हैं और यहां तक की रक्षा सूत्र भी काट दिया जाता है कुर्ता  कुर्ता पजामा कैंची से काटना पड़ता है और लड़कियों के नाक कान के आभूषण घड़ी अंगूठी और मंगलसूत्र तक उतार लिए जाते हैं इसके बाद भी भयंकर पैमाने पर नकल होकर इस सारे तंत्र को खुद ही नंगा कर देते हैं और आश्चर्य है कि इसके बाद भी लोग परीक्षा देते हैं विरोध नहीं करते हैं भला मंगलसूत्र से नल का क्या संबंध हो सकता है और रक्षा सूत्र किस प्रकार नकल में सहायक हो सकता है वही मुस्लिम महिलाएं नकाब हिजाब बुर्का नहीं उतरती हैं और परीक्षा ही छोड़ देती हैं या बिना उतारे ही परीक्षा देती हैं । 

जबकि असली समस्या बच्चों की नहीं है बल्कि ऊपर बैठे लोगों की है चारों तरफ कक्ष निरीक्षक लगे हैं सीसीटीवी कैमरा लगा है दरवाजे पर सघन जांच होती है इसके पश्चात बिना ऊपर बैठे सबसे बड़े लोगों के इशारे पर किसी भी परीक्षा में नकल होना पूरी तरह से संभव है इसलिए सारे देशवासी आगे आकर इस परीक्षा प्रणाली का विरोध करें पहले ऐसा कुछ नहीं होता था तब नकल बिल्कुल नहीं होती थी और आज सब कुछ दिखावा के लिए हो रहा है। 

सच यही है कि कोई भी पद निकलता है भर्ती होती है तो पहले ही धन कुबेर माफिया राजनेता अधिकारी और अन्य सक्षम तंत्र अपने-अपने हिस्से का बंदर बांट करके नियुक्तियां कर लेते हैं और सब कुछ दिखावा हो जाता है इतना ही नहीं हमारे आपके बीच रहने वाले निहायत ही अयोग्य और सामान्य दर्जे के छात्र जज कलेक्टर कप्तान और बड़े-बड़े पदों पर सुशोभित हो जाते हैं विश्वास ना हो तो इनका संपूर्ण बायोडाटा आप खुद ही जांच कर लीजिए। दिन-रात पढ़कर शरीर स्वस्थ पैसा सब कुछ लुटा देने वाला अंत में अपने को लुटा पिटा ठगा महसूस करता है लेकिन वातावरण इस तरह बना दिया गया है कि सक्षम और मेधावी प्रतिभाशाली छात्र-छात्राएं अपने को ही गलत समझने लगते हैं और निराशा में अनेक आत्महत्या जैसा घातक कदम उठा लेते हैं। 

यही कारण है कि देश का सारा तंत्र पूरी तरह से भ्रष्ट हो चुका है और इसमें सुधार की कोई भी संभावना नहीं है जितने संसाधन हैं जितने पद हैं और जितनी चीज हैं उसमें 95 प्रतिशत इन्हीं लोगों का कब्जा हो चुका है पांच प्रतिशत प्रखर मेधावी लोगों को डर के कारण चुन लिया जाता है जिससे इस परीक्षा व्यवस्था की पोल पट्टी ना खुल जाए फिर भी कभी-कभी जब रिट याचिका न्यायालय में दाखिल होती है तो सब के सब नंगे हो जाते हैं अभी नीट में हुई परीक्षा और 1990 में भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा इसका उदाहरण है एक बात और बता दे जब उपयुक्त लोगों के बच्चे उचित अनुपात में नहीं चुने जाते तो जानबूझकर प्रश्न पत्र आउट होने और नकल का नाटक फैलाया जाता है और यही लोग याचिका दाखिल करते हैं और जब उनके लोग समायोजित हो जाते हैं तो सब कुछ ठीक हो जाता है आप सब कुछ देख सकते हैं लेकिन भारत में बोल नहीं सकते व्यवस्था पर प्रश्न नहीं उठा सकते और प्रश्न उठाने वाला ही अंत में शिकार बन जाता है और जेल में चला जाता है इसका एक उदाहरण है हर नगर गली मोहल्ला अतिक्रमण से बुरी तरह से प्रभावित है और सड़के जाम हैं लेकिन इसको करने वाले पुलिस और प्रशासन  राजनेता है दिन-रात सड़कों पर देखते समय क्या उनकी आंखें बंद हो जाती हैं बिल्कुल नहीं रात को वसूली होती है और पैसा हर जगह बंट जाता है इसलिए जाम और अतिक्रमण कभी समाप्त नहीं हो सकता और परीक्षा व्यवस्था भी शुद्ध होना असंभव है
[8/10, 7:11 AM] Dileep Singh Rajput Jounpur: दिन महीने साल भर फालतू और निठल्ले घूमने वाले लोगों के लिए विवाह और मांगलिक कार्यों का निमंत्रण पत्र बांटना इतना जटिल लगता है कि वह उसे सोशल मीडिया पर भेजने लगते हैं जबकि निमंत्रण पत्र घर-घर जाकर देने से आपसी संबंध और खून के रिश्ते मजबूत होते हैं जितनी कम की चीज हैं वह सभी खत्म करके आज का मनुष्य अपना सारा समय मोबाइल और मीडिया पर दे रहा है। 

इस बारे में एक बहुत सुंदर लेकिन असली कहानी सुना रहा हूं एक बार एक निमंत्रण पत्र व्हाट्सएप पर आया और उन्होंने लिखा कि अत्यधिक व्यस्त होने के कारण मैं आपको व्हाट्सएप पर ही निमंत्रण दे रहा हूं कृपया आने की कृपा कीजिएगा पानी वाला भी अत्यधिक चालक और इस जैसा मक्कार था उसने भी ₹2000 के नोट की फोटो कॉपी कर दिया और बोला प्रिय महोदय मैं अत्यधिक व्यस्त हूं और ए नहीं सकता इसलिए ₹2000 निमंत्रण भेज रहा हूं कृपया स्वीकार कर लेना यह आज की सबसे भयानक सच्चाई है और आज वर्ष में एक या दो वर्ष भी कहीं कोई आता जाता नहीं है 


और हालात तो यह है कि घर की महिलाओं और छोटे बच्चों को कोई पहचानता भी नहीं बस केवल नए विवाह में दामाद 2-4 साल आते हैं वह भी संबंध बना रहा तो यह पढ़ा लिखा वैज्ञानिक व्यक्ति नाली और गटर में क्यों कूद रहा है समझ के बाहर है 

और क्यों स्वास्थ्यवर्धक चीज दूध भी दही हरी सब्जियां समय के फल फूल छोड़कर कुरकुरे धकाधक चटपटे फटाफट चाऊमीन मैगी बर्गर हैमबर्गर सड़े गले बिस्कुट और पाव रोटी नकली मक्खन लगा अशुद्ध आटे से बना रोटी और प्लास्टिक के लंबे चावल क्यों खा रहा है और रोगी होकर डॉक्टर के यहां क्यों जा रहा है बाहर का जहरीला तेल खाकर हार्ट अटैक का शिकार क्यों हो रहा है


 क्या सचमुच मनुष्य पढ़ा लिखा शब्द है या जंगल युग में जाकर जंगली लोगों से भी अधिक मूर्ख बनता चला जा रहा है जो फोटो स्त्री पुरुष मोबाइल में देखते हैं उसकी जिंदा फोटो पति-पत्नी और बच्चों के रूप में उपस्थित हैं लेकिन उनको उसमें रुचि नहीं है और दुनिया भर के अश्लील पूर्ण और गंदे वीडियो और चित्रों में ही रुचि है 


नई पीढ़ी पर माता-पिता ध्यान नहीं देते क्योंकि उनके यहां जाने का कम मौका मिलता है और मौका मिलता है तो एक-दो दिन में चले आते हैं उन्हें क्या मालूम कि उनका लौंडा बीयर और शराब पी रहा है या तो  गलत लड़कियों के साथ संबंध बनाकर रखा है या कृत्रिम और अप्राकृतिक संबंध बनाकर अपना जीवन नर्क कर चुका है मेरी बातों पर विश्वास ना हो तो पढ़ रहे और नौकरी कर रहे अपने लड़के लड़कियों की गहराई से जांच करो और 90% से अधिक बात सही ना हो तो मुझे फोन करके बोलो कि मैं गलत कह रहा हूं

बहुत से लोग सच्चाई नहीं जानते बहुत से लोग सच्चाई देखते और जानते हैं लेकिन लिखने की हिम्मत नहीं होती ऐसे लोगों का देश समाज और धर्म तथा घर परिवार के लिए कोई मूल्य नहीं होता जो सच्चाई देखे उसे लिखे पड़े और गलत काम रोकने का प्रयास करें वही स्त्री पुरुष देश समाज धर्म के काम आता है एक और दुखद और भयानक सच्चाई आप सबको बताना चाहता हूं कि भारत में ज्यादातर लड़के लड़कियों का यौन शोषण उनके अपने निकट के लोग ही करते हैं प्रारंभ में लोग ध्यान नहीं देते और जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती है तब हाहाकार मच जाता है यदि आपके घर का कोई भी बच्चा या बच्ची किसी के बहुत अधिक नजदीक है और कोई व्यक्ति बार-बार उसके साथ आता जाता है या घर आता है तो उसे पर बहुत ही सतर्क निगाह रखें सब कुछ समझ में आ जाएगा इसी का फल है कि लोग मानी और मौसी तक से विवाह कर ले रहे हैं 

 आप मुंगेरीलाल के हसीन सपने देख रहे हैं बच्चों को लेकर और बच्चे हवा हवाई मार्ग से आकाश की यात्रा पर उड़ रहे हैं। 

जैसे विनाश करने वाला हमेशा विनाश करता है वैसे हम जैसे निर्माण करने वाले सदैव प्रयास करते हैं की मानवता और सच्चाई सदाचार आचार विचार और अच्छाई बची रहे । यदि 200 साल में हमारे साथ करोड़ बलिदानी अन्य लोगों की तरह यही सोचते कि हमें अपना जान देश की स्वतंत्रता के लिए देने की क्या आवश्यकता है तो आज भी हम अंग्रेजों के गुलाम होते। 


स्थितियां इतनी खराब हो चुकी हैं कि यदि बच्चों के हाथ में मोबाइल है और आप जरूरी बात किसी से करना चाहते हैं तो बच्चे बार-बार फोन काट देते हैं और कुछ चालक बच्चे तो आपका फोन ही ब्लॉक कर देते हैं इस बुरी स्थिति और क्या होगी 😔 


और आप सोचते हैं की कमी नई पीढ़ी के लड़के लड़कियों की है तो आप गलत हैं गलती आपकी है और बच्चों को दोषी बना रहे हो संसार में कोई ऐसा बच्चा नहीं है जो मोबाइल या कागज से खेले यह जिसके साथ खेलने वाला स्त्री या पुरुष उपस्थित है - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक

श्रीमद् भागवत गीता का वास्तविक संदेश*

*श्रीमद् भागवत गीता का वास्तविक संदेश*

 इतनी व्याख्या श्रीमद् भागवत गीता की कथा कथित विद्वानों ने किया है देश-विदेश के झुंडन सम्मिलित हैं लेकिन गीता का असली संदेश कोई भी जान नहीं पाया।

गीता का सबसे बड़ा संदेश यही था कि किसी भी धर्म समाज और परिवार के लिए वर्णसंकरता अर्थात दोगलापन सबसे बड़ा अभिशाप है और यही संसार का सबसे बड़ा सच है जब तक यह शुद्ध रहता है तब तक धर्म समाज घर भी शुद्ध रहता है।

मुझे आश्चर्य है कि आखिर आज तक इतने बड़े-बड़े विद्वान इस संदेश को खुद नहीं समझ पाए और लंबी चौड़ी व्याख्या दुनिया की सभी भाषाओं में कर दिया किसी भी प्रश्न का उत्तर उसी पुस्तक में होता है जो पुस्तक लिखी जाती है अपने मन का उत्तर ठीक नहीं है।


गीता का सबसे बड़ा संदेश प्रश्न और समस्या एक ही थी जो अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण से पूछा था और भगवान श्री कृष्ण भी उसका उत्तर नहीं दे पाए थे क्योंकि उनको धरती पर कलयुग को ले आना था। 

अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण से कहा है प्रभु महाभारत के इस धरती आकाश पाताल व्यापी ब्रह्मांड युद्ध में बड़ी संख्या में पुरुष मारे जाएंगे इससे स्त्रियां अकेली रह जाएंगे और उनके अंदर व्यवहार होगा और समाज में दोगले वर्ण शंकर लोग पैदा होंगे और धर्म सदाचार नियम व्यवस्था सब कुछ नष्ट भ्रष्ट हो जाएगी जिसका उत्तर भगवान श्री कृष्ण के पास भी नहीं था। 

अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण का सम्मान करने के लिए महा भयानक युद्ध लड़ तो लिया लेकिन उन्हें का कहना सही हुआ 65 करोड़ पुरुष मारे गए और पूरे भूमंडल में स्त्रियां पुरुषों के अभाव में स्वच्छंद और दुराचारी हो गईं नतीजा हुआ ऐसे वर्णशंकर दोगली पीढ़ी पैदा हुई जिससे महाभारत काल के बाद दुनिया तहस-नस हो गई और दुनिया में राक्षसी शैतानी सभ्यताओं का जन्म हुआ महाभारत के युद्ध के पहले कोई सनातन धर्म के अलावा अन्य धर्म नहीं था।

इस महा भयानक ब्रह्मांड व्यापी युद्ध के बाद 65 करोड़ पुरुष मारे गए और क्रिश्चियन इस्लामिक  यहूदी और पारसी तथा चीन के ताओ शिंतोधर्म का उदय हुआ और दुनिया भर में शक मलिक्छ हूणकिरात तुर्क मुसलमान किरात कबीला के लोग छा गए नकली धर्म गुरु लोगों ने नकली धर्म की स्थापना की है और आज इन्हीं नकली लोगों का बोलबाला है दुष्ट आधार में शैतान स्त्री पुरुष धन-धन संपत्ति आभूषण पद प्रतिष्ठा से भरे पड़े हैं और सच्चे सदाचारी स्त्री पुरुष किसी तरह अपने मान सम्मान को बचाकर जी रहे हैं। 


 एक बात और आपको बता दें कि वर्णशंकर और तो गाली संतान चाहे पेड़ पौधों की हो या गाय भैंस जानवरों किया मनुष्यों की वह बहुत तेज होते हैं लेकिन बहुत ही विनाशकारी धर्म मर्यादा सभ्यता से बिल्कुल रहित होते हैं क्योंकि उनका जन्म ही आचरण के विरुद्ध होता है इनका रहन-सहन खान पान इतना ऊंचा होता है कि सब कुछ नष्ट भ्रष्ट कर देते हैं उदाहरण के लिए जर्सी गाय या वर्णशंकर कुत्तों को ले लीजिए देश के 99% लोगों की औकात ही नहीं कि इनका खान पान वहन कर सके और कुछ समय बाद एक दो पीढ़ी के अंतर से बर्बाद हो जाते हैं यही बात देसी आम और कलमी आम के लिए भी सच है देसी आम सैकड़ो साल तक रहता है और पीढ़ी दर पीढ़ी वैसा ही रहता है जबकि कलमी आम का बीज आप लगा दे तो वह कलमी नहीं रह जाता है। इन्हीं सब कारण से आज पुरुष स्त्रियों को संतुष्ट करने योग्य और बच्चा पैदा करने लायक नहीं रहे और दूसरों के वीर्य से आईवीएफ से पैदा हुए बच्चे क्या करेंगे आप सभी जानते हैं ।


इसी तरह दोगली प्रजाति की मछलियां बाकी मछलियों को खा जाती है और आज स्वादिष्ट और पौष्टिक मछलियां कहीं पाई ही नहीं जाती हैं देसी गाय का घी अमृत होता है जबकि जर्सी गाय का घी बस नाम को भी होता है और उसके बछड़े किसी काम के नहीं होते यही गीता का सार है की अपना धर्म सर्वश्रेष्ठ होता है और दूसरे का धर्म भयानक होता है और वर्णसंकर्ता अर्थात दोगलापन दुनिया का सबसे बड़ा अभिशाप होता है जिसको आज तक लोग समझ नहीं पाए हैं इसीलिए आज नौकरी से प्रशासन और राजनीति व्यापार से लेकर खेल हर जगह वर्णशंकर दोगले लोगों का राज है बाकी आप स्वयं जांच करके देख सकते हैं जब तक डंकल का बीज नहीं आया था तब तक भारत में सब कुछ ठीक था और आज क्या स्थिति है लोग केवल पेट भरने के लिए खा रहे हैं और किसी भी अन्य में दूध में फल फूल वनस्पतियों में कोई स्वाद नहीं है। 

इसी बात को सनातन धर्म के रक्षक विश्व के महानतम कवियों में से एक तुलसीदास जी ने भी लिखा है

मारग सो सो जाकहं जो भावा।

 पंडित सोइ जो गाल बजावा।

 जो बहू झूठ मसखरी जाना ।
कलयुग सो गुणवंत बखाना।
 सौभागिनी विभूषण हीना।
 विधवन के श्रृंगार नवीना।
 जाकर नख सिख जटा विशाला।

 सो प्रसिद्ध तापस कालिकाला।
 नारि मरी घर संपत्ति नाशी।
 मूड़ मुडाइ भये सन्यासी।
 जो नहीं देखा नहीं सुना जो मनहूं न समाय।
 सो सब देखिए कल युगहिं कुछ भी कहा न जाए। 

इस प्रकार अंत में श्रीमद् भागवत के दो सबसे प्रमुख संदेश निकलकर सामने आते हैं पहले वर्ण सनकर्ता किसी भी देश समाज धर्म परिवार का सबसे बड़ा अभिशाप है और दूसरा स्वधर्म पर मर मिटना सबसे महान कार्य हैं और दूसरे का धर्म अपना लेना सबसे भयानक अभिशाप है बाकी संदेश सनातन धर्म की हर पुस्तकों में है लेकिन ऐसा संदेश कहीं नहीं है - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक

मौसम की भविष्यवाणी जौनपुर जनपद और आसपास के जनपदों में आज का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहेगा लेकिन इसका वास्तविक अनुभव 38 डिग्री सेल्सियस और 30 डिग्री सेल्सियस जैसा रहेगा अर्थात गर्मी उमस बहुत अधिक रहेगी

मौसम की भविष्यवाणी जौनपुर जनपद और आसपास के जनपदों में आज का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहेगा लेकिन इसका वास्तविक अनुभव 38 डिग्री सेल्सियस और 30 डिग्री सेल्सियस जैसा रहेगा अर्थात गर्मी उमस बहुत अधिक रहेगी
जौनपुर और आसपास आज अधिकतर खुला मौसम धूप बीच बीच में बादल और हल्की वर्षा होने का आकलन किया जा रहा है मौसम साफ और स्वच्छ रहेगा रात में तेज वर्षा हो सकती है कल अच्छी वर्षा  के योग हैं 

कल के बारे में हमारे अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र का आकलन है कि कल का अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहेगा जिसका अनुभव 38 और 29 डिग्री सेल्सियस के बराबर होगा कल जौनपुर और आसपास के सभी जनपदों में मावध्यम से भारी और कहीं-कहीं बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है 

 इस बीच वायु गुणवत्ता सूचकांक लगातार 40 से 60 के बीच पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 5 से 7 के बीच प्रदूषण की स्थिति बहुत अच्छी हवा की दिशा पूर्वी दक्षिणी पूर्वी और परिवर्तित होती रहेगी और वेग 5 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा होगा सापेक्षिक आद्रता 65 से 99 परीक्षित के बीच रहेगी

जहां तक पूरे देश के मौसम की बात है तो हमारे केंद्र की भविष्यवाणी यहां भी 100 में 100% खरी उतरी। 30 जुलाई से 7 अगस्त तक पूरे देश में लगातार घनघोर मूसलाधार और कहीं-कहीं हल्की मध्यम वर्षा होने की भविष्यवाणी सही हुई और आज भी पूरे देश में अटक से कटक अरुणाचल से गुजरात नालासोपारा मुंबई से महाराष्ट्र और केरल भलस्वा डेयरी गुरु नानक देव कॉलोनी दिल्ली नोएडा और आसपास हिमालय के पहाड़ी क्षेत्र से लेकर पथरी भागों तक सामान्य मध्यम वर्षा लेकिन उड़ीसा क्षेत्र पूर्वोत्तर भारत केरलम और कर्नाटक और राजस्थान हिमालय के पर्वतीय क्षेत्र और उत्तर प्रदेश बिहार मध्य प्रदेश के कुछ भागों में भारी से बहुत भारी और कहीं-कहीं भयंकर वर्षा होगी

वर्षा का अगला चक्र 8 से 15 अगस्त तक रहेगा इस काल में धूप छांव गर्मी के साथ वर्षा जारी रहेगी लेकिन यह हल्की वर्षा मध्यम वर्षा और कुछ ही स्थान पर भारी वर्षा होगी इस कालखंड में मानसूनी घाटा 90% तक पूरा हो जाएगा लेकिन इसके बाद फिर से यह घाटा बढेगा और मानसून की विदाई के बाद 15 अक्टूबर को अंतिम स्थिति होगी कि देश में औसत वर्षा 90% होगी जो काफी कमजोर मानी जाती है लेकिन खतरा नहीं होता है पिछले वर्ष देश में 105 प्रतिशत से अधिक वर्षा हुई थी

मुंबई क्षेत्र में पिछले बार 5000 म वर्षा के सापेक्ष इस बार केवल 2000 से 3000 मिलीमीटर वर्ष का ही अनुमान है देश के अधिकांश भागों में यही स्थिति रहेगी कहीं भी सामान्य से अधिक वर्षा की संभावना नहीं दिखाई दे रहे हैं। 

सरकारी और बड़े-बड़े प्राइवेट मौसम विभाग जो यूरोप अमेरिका से समर्थित और उन पर आधारित हैं कि गलत भविष्यवाणी और उनके भ्रामक आंकड़ों से बचने के लिए संपूर्ण देश की सही-सही भविष्यवाणी हर सप्ताह हमारे केंद्र द्वारा की जाती है जिसमें आंधी तूफान वर्षा भूस्खलन जल प्लावन चक्रवात गर्मी सर्दी तापमान सापेक्षिक आर्द्रता प्रत्येक चीजों का बहुत गहराई से ध्यान रखा जाता है इसीलिए यह विश्व की सबसे मानक और प्रामाणिक आकलन और भविष्यवाणी हो गई है इसमें देश-विदेश के सभी चीजों का आकलन समय-समय पर किया जाता रहा है 49 वर्षों से 99 % की चमत्कारिक सच्चाई के साथ यह एक मानक संस्थान बन चुका है डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक 70 177 13978

Wednesday, 5 August 2026

हिरोशिमा और नागासाकी की प्रलयंकारी विभीषिका- डॉ दिलीप कुमार सिंह

हिरोशिमा और नागासाकी की प्रलयंकारी विभीषिका- डॉ दिलीप कुमार सिंह 

अगस्त और 9 अगस्त का दिन मानव इतिहास में अक्षरों में लिखा जाएगा किसी दिन संयुक्त राज्य अमेरिका ने इन दोनों स्थानों पर लिटिल बॉय और फेटमैन नाम का परमाणु बम गिरकर 2 लाख से अधिक लोगों की हत्या कर दिया था जो निर्दोष थी और लाखों लाख लोग बुरी तरह से परमाणु बम की भीषण गर्मी शाक वेव और रेडिएशन से बुरी तरह से झुलस कर घायल हो गए थे यह दृश्य हमें महाभारत काल में प्रयोग किए गए ब्रह्मास्त्र और नारायण अस्त्र की याद दिला देता है जिसमें थोड़ी ही देर में दो अक्षौहिणी पांडव सेना जलकर राख हो गई थी।

द्वितीय विश्व युद्ध में एक समय ऐसा आया जब ऐसा प्रतीत हुआ कि जर्मनी और जापान सारी दुनिया पर विजय प्राप्त कर लेंगे और उनके आगे कोई ठहर नहीं पाएगा इन दोनों देशों ने आधी दुनिया पर अपना अधिकार कर लिया था जिसमें संपूर्ण यूरोप संपूर्ण चीन दक्षिण पूर्वी एशिया और आधा अफ्रीका सम्मिलित था लेकिन इस समय जर्मनी ने अपने मित्र देश रूस के साथ ऐसा विश्वासघात किया जिससे पूरा पासा ही पलट गया विद्युत गति से लड़ने वाले हिटलर की सेना ने अपने मित्र रूस पर आक्रमण कर दिया और आधा रूस जीते हुए मास्को के एकदम पास तक पहुंच गए लेकिन परमवीर रूसी सैनिकों ने करोड़ों की संख्या में अपना बलिदान देकर न केवल मास्को की रक्षा किया बल्कि महा भयंकर ठंड में फंसे हुए जर्मन सैनिकों को बुरी तरह हराया और इस तरह उन्होंने जर्मनी की अजेय मानी जाने वाली सेना को बुरी तरह से कुचल कर जर्मनी और बर्लिन पर अधिकार कर लिया और हिटलर को आत्महत्या कर लेनी पड़ी।

लेकिन जापान उस समय भी अजय रहकर बड़ी तेजी से चीन दक्षिण पूर्वी एशिया अंडमान निकोबार में अधिकतर करते हुए असम तक पहुंच गया था दुनिया में सबसे बहादुर जापानी सैनिक भारत पर भी कब्जा कर लेते लेकिन इसी बीच जापान ने भी वही भयंकर भूल किया जो जर्मनी ने सोवियत संघ के साथ किया था जापान ने अभी तक युद्ध में तटस्थ रहे संयुक्त राज्य अमेरिका के पर्ल हार्बर द्वीप पर भीषण आक्रमण करके उनके हजारों सैनिकों और पूरी जल सेना को डुबा दिया और इसके बाद अमेरिका पूरी शक्ति से युद्ध में शामिल हुआ और लाखों सैनिकों का बलिदान देकर उसने जापान को बुरी तरह हरण शुरू किया और 1945 तक आते-आते जापान बहुत थोड़े क्षेत्र में सिमट कर रह गया लेकिन वह हार मानने को तैयार नहीं था 

जर्मनी ने भी परमाणु बम का निर्माण ऑटो हान और स्ट्रांसमैन के नेतृत्व में कर लिया था लेकिन ब्रिटेन और यूरोपीय देशों के गुप्तचरों ने उसको नष्ट कर दिया और बड़ी संख्या में परमाणु वैज्ञानिक पकड़ कर अमेरिका ले गए जिन्होंने आइंस्टीन के सिद्धांत पर चलते हुए इटली के वैज्ञानिक के नेतृत्व में अमेरिका में परमाणु बम बनकर 1945 में उसका परीक्षण शुरू कर दिया था और अंत में निश्चय हुआ कि दो बने हुए परमाणु बम को जापान को हराने के लिए प्रयोग किया जाए 

इसके पहले दुनिया परमाणु बमों की शक्ति से पूरी तरह अनभिज्ञ थी स्वयं अमेरिका को भी विश्वास नहीं था यह इतना अधिक भयानक सिद्ध होगा 6 अगस्त के दिन सुबह 8:15 पर लिटिल बॉय नाम का परमाणु बम हिरोशिमा पर गिराया गया जापान के पास उसे समय खनिज तेल नहीं था अन्यथा वह अमेरिका के इस विमान को हवा में ही मार  गिरा देता

जापान की तरह से कोई प्रतिरोध ना होने पर विमान के चालकों को हिरोशिमा के केंद्र में बम गिराने का सुनहरा अवसर मिल गया और विमान से गिरने के बाद जो प्रचंड विस्फोट हुआ और उससे कुकुरमुत्ता के आकार के भयंकर काले बादल हुए जो आसमान में सैकड़ो किलोमीटर की ऊंचाई पर छा गए ऊंचाई पर उड़ा रहा जहाज भी शाक वेब से बुरी तरह हिल गया बम के भीषण धमाके उससे उत्पन्न भयंकर ध्वनि तरंगों ने पल भर में एक लाख से अधिक लोगों को मार दिया लोग जलकर कंकाल हो गए इसके बाद भयानक बादल से रेडियो एक्टिव तत्वों की भीषण वर्षा हुई और सब कुछ स्वभाव हो गया कई किलोमीटर तक मकान ध्वस्त हो गए और सब कुछ रख के मलबे में बदलकर रह गया 7000 डिग्री सेल्सियस के उत्पन्न भीषण ताप से ऐसा लगा जैसे धरती में ही सूरज उतर आया हो 

इतने नुकसान के बाद भी जापानी सैनिक हार मानने को तैयार नहीं थे इसलिए 9 अगस्त को दूसरा परमाणु बम गिराया गया पहले इसे दूसरे शहर पर गिराया जाना था लेकिन भयंकर बादल होने के कारण इसको नागासाकी पर गिराया गया और इसका परिणाम हिरोशिमा से भी भयानक हुआ फैट ब्वॉय नमक इस परमाणु अस्त्र से पूरा नगर खंडहर में परिवर्तित हो गया लोग जिंदा ही जलकर बाप बन गए मकान गिर गए भयानक काली रेडियोएक्टिव तत्वों की वर्षा से सब कुछ तहस-नहस हो गया यह जंतु वनस्पति सब कुछ स्वभाव हो गई और अब जापान बुरी तरह डर गया था और हिल गया था इसलिए उसने अमेरिका के आगे आत्म समर्पण कर दिया तब से आज तक जापान अमेरिका के अधीन है 

इसके बाद से दुनिया में एक परमाणु प्रतिस्पर्धा प्रारंभ हुई अमेरिका के बाद ग्रेट ब्रिटेन और फिर 1974 में भारत ने परमाणु बम का निर्माण कर लिया और आज इस दौड़ में पाकिस्तान उत्तर कोरिया इजरायल और ईरान भी शामिल हो गया नागासाकी और हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बमों की शक्ति 15 किलो टन के बराबर की लेकिन आज भयानक जैव रासायनिक परमाणु हाइड्रोजन बमों की क्षमता कई हजार किलो टन के बराबर हो गईहै 1961 में सोवियत संघ के द्वारा आज तक का सबसे भयानक परमाणु विस्फोट किया गया जिसे जार बम कहा जाता है जो नागासाकी और हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से 33000 गुना शक्तिशाली है सीधा सा अर्थ है अगर इसे किसी बड़े से बड़े शहर पर गिराया जाए तो 100 वर्ग किलोमीटर में सब कुछ खंडहर बन जाएगा 

1945 से लेकर आज तक 2000 से अधिक भयानक परमाणु बम का परीक्षण हो चुका है सबसे अधिक परमाणु अस्त्र सोवियत संघ के पास और उसके बाद अमेरिका चीन फ्रांस ग्रेट ब्रिटेन भारत इसराइल पाकिस्तान कोरिया के पास है माना जाता है कि अगर एक बार परमाणु युद्ध छिड़ जाएगा तो धरती पर कुछ नहीं बचेगा और अगला युद्ध ईंट पत्थर और धनुष बाण से लड़ा जाएगा 

नागासाकी और हिरोशिमा पर गिराए गए बम के अलावा आज तक कहीं भी इन परमाणु अस्त्रों का प्रयोग नहीं हुआ है अभी रूस यूक्रेन और इजरायल ईरान युद्ध में ऐसी परिस्थितियां बन गई थी लेकिन सौभाग्य बस ऐसा नहीं हो पाया नागासाकी और हिरोशिमा पर परमाणु बम का इतना भयानक असर पड़ा कि आने वाली पीढ़ियां विकलांग पैदा हो रही है और जीव जंतु वनस्पति में भी काफी परिवर्तन आ चुका है ऐसा ही प्रभाव अश्वत्थामा के द्वारा चलाए गए ब्रह्मास्त्र और नारायण अस्त्र से हुआ था जो राजस्थान के रेगिस्तान में गिरा और जिसके कारण राजस्थान रेत के समुद्र में बदल गया और हड़प्पा मोहनजोदड़ो की सभ्यता नष्ट हो गई थीअमेरिका द्वारा किया गया निर्दोष नागरिकों का नरसंहार किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है यह ठीक वैसा ही है जैसे कश्मीर के निर्दोष सनातनी लोगों का नरसंहार आतंकवादियों द्वारा किया गया और आश्चर्य है कि अमेरिका दुनिया में मानवता का ठेकेदार और अगुवा बनता है

वर्तमान समय में संपूर्ण दुनिया जैव रासायनिक परमाणु हाइड्रोजन बमों की भयंकर भट्टी के ऊपर खड़ा हुआ है जिसमें किसी भी समय महा विस्फोट हो सकता है और सारी दुनिया कभी भी नष्ट हो सकती है इसलिए दो स्थितियां हो सकती हैं पहले दुनिया के हर देश के पास परमाणु नाभिकीय अस्त्र-शस्त्र हों और दूसरी हर प्रकार के परमाणु अस्त्रों को नष्ट कर दिया जाए और वर्तमान में फिलहाल एक भी पूरी होती नहीं दिखाई दे रही है