Wednesday, 24 June 2026

एक शांतिपूर्ण और मज़बूत समाज बनाना: एक्सट्रीमिज़्म की चुनौतियों से निपटना:*

*एक शांतिपूर्ण और मज़बूत समाज बनाना: एक्सट्रीमिज़्म की चुनौतियों से निपटना:*

तेज़ी से हो रहे सामाजिक बदलाव, टेक्नोलॉजी में तरक्की और दुनिया भर में बढ़ते आपसी जुड़ाव के दौर में, एक्सट्रीमिज़्म की चुनौती शांति, सुरक्षा और सामाजिक मेलजोल के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक बनकर उभरी है। भारत, अपने धर्मों, भाषाओं, संस्कृतियों और जातीय समुदायों की बहुत ज़्यादा विविधता के साथ, लंबे समय से यह मानता रहा है कि एक्सट्रीमिज़्म का मुकाबला सिर्फ़ कानून लागू करने और सुरक्षा उपायों से नहीं किया जा सकता। लगातार सफलता उन अंदरूनी वजहों को दूर करने में है जो एक्सट्रीमिस्ट विचारधाराओं को असर और पकड़ बनाने देती हैं। दुनिया भर के अनुभवों ने दिखाया है कि एक्सट्रीमिज़्म को सिर्फ़ रिएक्टिव उपायों से खत्म नहीं किया जा सकता। जबकि सिक्योरिटी ऑपरेशन एक्सट्रीमिस्ट नेटवर्क को रोक सकते हैं और तुरंत खतरों को रोक सकते हैं, एक पूरी तरह से रिएक्शनरी तरीका कभी-कभी अकेलेपन और अविश्वास की भावनाओं को गहरा कर सकता है, जिससे शायद और ज़्यादा रेडिकलाइज़ेशन हो सकता है। इसके उलट, रोकने की स्ट्रेटेजी ऐसी सामाजिक स्थितियाँ बनाने पर फोकस करती हैं जिनमें एक्सट्रीमिस्ट विचारधाराएँ जड़ें जमाने के लिए संघर्ष करती हैं। शिक्षा, जागरूकता, आर्थिक मौके, सबको शामिल करना और कम्युनिटी से जुड़ना एक ऐसा माहौल बनाने में मदद करता है जो रेडिकल बातों का विरोध करता है। जब युवाओं को अच्छी शिक्षा, अच्छा रोज़गार और अपनेपन की गहरी भावना मिलती है, तो उनके ऐसे ग्रुप्स की तरफ़ आकर्षित होने की संभावना कम होती है जो नफ़रत, हिंसा या बंटवारे को बढ़ावा देते हैं। हमेशा रहने वाली शांति सिर्फ़ ताकत से नहीं मिल सकती; इसे सोशल इन्वेस्टमेंट, सबको साथ लेकर चलने वाले शासन और नागरिकों को मज़बूत बनाकर ही पाया जा सकता है। रोकथाम न सिर्फ़ ज़्यादा असरदार है, बल्कि लंबे समय में ज़्यादा किफ़ायती और टिकाऊ भी है।
एक्सट्रीमिज़्म के ख़िलाफ़ ढाल के तौर पर सबको साथ लेकर चलने वाला विकास: एक्सट्रीमिस्ट सोच अक्सर सामाजिक शिकायतों, आर्थिक असमानताओं और अलग-थलग किए जाने और अलग-थलग किए जाने की सोच का फ़ायदा उठाती है। जो समुदाय खुद को नज़रअंदाज़ या नुकसान में महसूस करते हैं, वे उन बातों के शिकार हो सकते हैं जो टकराव या हिंसा के ज़रिए मज़बूती का वादा करती हैं। इसलिए, सबको साथ लेकर चलने वाला विकास एक्सट्रीमिज़्म का मुकाबला करने की कोशिशों का एक ज़रूरी हिस्सा है। हर नागरिक को, चाहे उसका सामाजिक, धार्मिक, भाषाई या क्षेत्रीय बैकग्राउंड कुछ भी हो, तरक्की और तरक्की के मौके मिलने चाहिए। आर्थिक रूप से शामिल करना, पढ़ाई-लिखाई में आसानी, हेल्थकेयर सर्विस और सोशल वेलफ़ेयर प्रोग्राम उन हालात को कम करने में मदद करते हैं जिनका एक्सट्रीमिस्ट ग्रुप फ़ायदा उठाना चाहते हैं। सामाजिक एकता को बढ़ावा देना भी उतना ही ज़रूरी है। डायवर्सिटी हमेशा से भारत की सबसे बड़ी ताकतों में से एक रही है। अलग-अलग संस्कृतियों के बीच बातचीत, आपसी सम्मान और साझा नागरिक मूल्यों को बढ़ावा देने से समुदायों के बीच रिश्ते मज़बूत होते हैं और बांटने वाली विचारधाराओं का आकर्षण कम होता है। जब नागरिक एक-दूसरे को एक आम राष्ट्रीय प्रोजेक्ट में पार्टनर के तौर पर देखते हैं, तो नफ़रत फैलाने और ध्रुवीकरण की कोशिशें बहुत कम असरदार हो जाती हैं।
नेशनल सिक्योरिटी के एक पिलर के तौर पर कम्युनिटी की भागीदारी: नेशनल सिक्योरिटी अब सिर्फ़ सरकार और सिक्योरिटी एजेंसियों की ज़िम्मेदारी नहीं है। आज की सिक्योरिटी चुनौतियों के लिए समुदायों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी की ज़रूरत है। स्थानीय समुदाय अक्सर कट्टरता, सामाजिक तनाव या कमज़ोर लोगों को प्रभावित करने के लिए चरमपंथी ग्रुप्स की कोशिशों के संकेतों को सबसे पहले पहचानते हैं। कम्युनिटी लीडर, शिक्षक, धार्मिक विद्वान, सिविल सोसाइटी संगठन, युवा ग्रुप और परिवार सभी शांति को बढ़ावा देने और चरमपंथी विचारों को फैलने से रोकने में अहम भूमिका निभाते हैं। उनका ज़मीनी ज्ञान और भरोसा उन्हें शुरुआती स्टेज में चिंताओं को पहचानने और अच्छे विकल्प देने में असरदार पार्टनर बनाता है।
भारत का डेमोक्रेटिक ढांचा नागरिकों को शासन और सामाजिक विकास में भाग लेने के मौके देता है। इन भागीदारी वाले तरीकों को मज़बूत करने से नागरिकों में मालिकाना हक और ज़िम्मेदारी की भावना को बढ़ावा मिलता है। जब लोगों को लगता है कि उन्हें सुना जा रहा है, उनका सम्मान किया जा रहा है और फ़ैसले लेने की प्रक्रिया में उन्हें शामिल किया जा रहा है, तो उनके सामाजिक स्थिरता और राष्ट्रीय एकता में अच्छा योगदान देने की संभावना ज़्यादा होती है। समुदाय-आधारित तरीके गलत जानकारी और कट्टरपंथी प्रोपेगैंडा का मुकाबला करने में भी मदद करते हैं। भरोसेमंद स्थानीय आवाज़ें झूठी बातों को चुनौती दे सकती हैं, आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा दे सकती हैं और सहनशीलता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के मूल्यों को मज़बूत कर सकती हैं।
नागरिकों और संस्थाओं के बीच भरोसा: कट्टरपंथ के ख़िलाफ़ सबसे असरदार सुरक्षा उपायों में से एक नागरिकों और सार्वजनिक संस्थाओं के बीच मज़बूत रिश्ता है। भरोसा सहयोग को बढ़ावा देता है और सहयोग सुरक्षा को बढ़ाता है। जब नागरिकों को सार्वजनिक संस्थाओं पर भरोसा होता है, तो उनके सरकारी पहलों में अच्छे से शामिल होने, संभावित खतरों की रिपोर्ट करने और शांति और व्यवस्था बनाए रखने की कोशिशों का समर्थन करने की संभावना ज़्यादा होती है। इस भरोसे को बनाने के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता की ज़रूरत होती है। सार्वजनिक संस्थाओं को नागरिकों की ज़रूरतों के प्रति जवाबदेह रहना चाहिए और न्याय और समान व्यवहार के प्रति प्रतिबद्धता दिखानी चाहिए। अधिकारियों और समुदायों के बीच खुली बातचीत ग़लतफ़हमियों को कम करने में मदद करती है और अलग-थलग किए जाने या अलग-थलग किए जाने की भावनाओं को रोकती है। नाराज़गी या असंतोष को जड़ जमाने से रोकना ज़रूरी है। सकारात्मक जुड़ाव कई तरह से हो सकता है, जैसे कम्युनिटी आउटरीच प्रोग्राम, लोगों से बातचीत, युवाओं को शामिल करने की पहल और मिलकर समस्याओं को सुलझाने की कोशिशें। इस तरह के मेल-जोल से संस्थाओं का मानवीय चेहरा सामने आता है और आपसी सम्मान बढ़ता है। इनसे ऐसे रास्ते भी बनते हैं जिनसे शिकायतों को शांति से सुलझाया जा सके, ताकि वे बड़े झगड़ों या टकराव का रूप न ले लें।
चरमपंथ का मुकाबला करना सिर्फ़ सुरक्षा की चुनौती नहीं है; यह असल में एक सामाजिक चुनौती है। सबसे टिकाऊ समाधान तब निकलते हैं जब सरकारें, समुदाय, शिक्षण संस्थान, सिविल सोसाइटी संगठन और नागरिक शांति, न्याय और विकास के साझा लक्ष्य के लिए मिलकर काम करते हैं। भारत की ताकत उसकी विविधतापूर्ण परंपराओं, लोकतांत्रिक संस्थाओं और समावेशी विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता में है। प्रतिक्रिया देने के बजाय रोकथाम को प्राथमिकता देकर, समान अवसर को बढ़ावा देकर, सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करके और नागरिकों व संस्थाओं के बीच भरोसा मजबूत करके, भारत एक ऐसा समाज बना सकता है जो चरमपंथ का मजबूती से सामना करे और आपसी सद्भाव के लिए प्रतिबद्ध हो।
एक मजबूत और टिकाऊ समाज वह है जिसमें हर नागरिक को अहमियत महसूस हो, हर समुदाय को देश की तरक्की में अपनी भागीदारी दिखे और हर व्यक्ति की देश के भविष्य में हिस्सेदारी हो। ऐसा समाज न सिर्फ़ चरमपंथ का विरोध करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी शांति, सुरक्षा और समृद्धि की नींव भी रखता है।
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फ़रहत अली खान 
एम ए गोल्ड मेडलिस्ट

Sunday, 21 June 2026

मंदिर में दान की चोरी की खबर आई तो कुछ लोग हैरान हो गए। मानो चोर ने सीधे भगवान के घर में हाथ डाल दिया हो। लेकिन सच पूछिए तो हैरानी चोरी पर नहीं, हैरानी इस बात पर होनी चाहिए कि अब भी लोग हैरान हो रहे हैं।

मंदिर में दान की चोरी की खबर आई तो कुछ लोग हैरान हो गए। मानो चोर ने सीधे भगवान के घर में हाथ डाल दिया हो। लेकिन सच पूछिए तो हैरानी चोरी पर नहीं, हैरानी इस बात पर होनी चाहिए कि अब भी लोग हैरान हो रहे हैं।
हम बड़ा दिलचस्प समाज हैं। भगवान को सर्वशक्तिमान भी मानते हैं और उनके घर पर सीसीटीवी, ताले, गार्ड और ऑडिट भी लगाते हैं। यानी श्रद्धा भी पूरी और अविश्वास भी पूरा।
कहते हैं लोग भगवान से डरते हैं। अगर ऐसा होता तो दानपात्र पर ताला नहीं, फूल-माला लगी होती। सच तो यह है कि इंसान भगवान से कम, थाना-पुलिस और कोर्ट-कचहरी से ज्यादा डरता है। जहां एफआईआर का खतरा हो, वहां चरित्र जाग जाता है। जहां सिर्फ भगवान देख रहे हों, वहां आदमी अपने असली रूप में आ जाता है।
मजेदार बात यह है कि चोरी करने वाला भी शायद पूजा-पाठ करता होगा। सुबह आरती, शाम भजन, और बीच में अवसर मिले तो भगवान की गुल्लक पर भी हाथ साफ। हमारे यहां पाप करने और क्षमा मांगने के बीच का अंतराल कई बार चाय के एक कप से भी कम होता है।
धर्म के बाजार में सबसे ज्यादा बिकने वाली चीज़ "भय" है। बचपन से बताया जाता है कि भगवान सब देख रहा है। लेकिन जैसे ही नोटों से भरा दानपात्र सामने आता है, आदमी को भरोसा हो जाता है कि आज शायद भगवान कहीं और देखने में व्यस्त हैं।
असल में भगवान से लोग डरते नहीं, भगवान का नाम लेकर दूसरों को डराते हैं। खुद पर बात आए तो पूरा दर्शन बदल जाता है। यही कारण है कि मंदिरों में दान बढ़ता जाता है और ताले भी मोटे होते जाते हैं। श्रद्धा और सुरक्षा, दोनों साथ-साथ बढ़ रही हैं और शायद यही इस घटनाओं का सबसे बड़ा व्यंग्य है। जिस भगवान के भरोसे लोग अपनी जिंदगी छोड़ देते हैं, उसी भगवान के पैसे की सुरक्षा के लिए उन्हें इंसानों पर भरोसा नहीं होता।

Saturday, 20 June 2026

अंत में वही हुआ जो पिछले 49 साल से होता चला आ रहा है मानसून वर्षा और मौसम की हमारे केंद्र की भविष्यवाणी पूरी तरह सही हुई

अंत में वही हुआ जो पिछले 49 साल से होता चला आ रहा है मानसून वर्षा और मौसम की हमारे केंद्र की भविष्यवाणी पूरी तरह सही हुई 

जनवरी से अब तक 17 बार लिखकर पोस्ट किया जा चुका है और सैकड़ो समाचार पत्र पत्रिकाओं और चैनलों में भी छप चुका है कि इस वर्ष मानसून विलंबित अनियंत्रित और बहुत कमजोर होगा इस वर्ष वर्ष भी बहुत कम होगी और अकाल और सुख या अकाल सूखा जैसी स्थितियां पड़ने से कोई रोक नहीं सकता।

जबकि आज के 15 दिन पहले तक अप्रैल और मैं के सारे मौसम विभाग और प्राइवेट मौसम विभाग जैसे स्काई में स्काई भेजें और समाचार पत्र और विश्वविद्यालय ओके तथा कथित विद्वानों को देख लीजिए सभी ने समय पर मानसून आने और सामान्य से अधिक वर्षा होने की कई कई बार भविष्यवाणी किया है 

इस समय संपूर्ण देश से मानसून और मानसूनी बादल गायब हो जब केरल में मानसून 15 म ई को आया तो उसे किसी ने नहीं माना और 25 म ई तक बरस कर चला गया। अब सभी हमारे हमारी भविष्यवाणी मान लिया है कि मानसून अनियमित है विलंबित है और कम वर्षा करेगा और 25 जून तक इसके कहीं से आने की आशा नहीं है इसी तरह 15 से 25 जून तक महा भयंकर प्रलयंकारी गर्मी उमस पड़ने की हमारे केंद्र की भविष्यवाणी भी सही हुई।

यह सब लिखने और कहने का अर्थ केवल इतना ही है कि सही जानकारी सबको मिले तब सावधान रहें खेती किसानी बागवानी जिस हद तक संभव हो बचा सके और कोई अर्थ नहीं है अभी तीन-चार दिन तक शरीर जलाने वाली गर्मी उमस और पसीना झेलने को तैयार रहे जल्दी ही एक चेक करवाती वर्षा आंधी तूफान के साथ और उसके बाद वर्ष कुछ दिन तो राहत और ठंड प्रदान कर ही देगी 


लेकिन फिर से यही कहना चाहूंगा कि वर्षा के बीच-बीच में कुछ अच्छे सुहावना दिन छोड़कर 25 अक्टूबर तक भीषण गर्मी उमस और पसीना चलने के लिए अपने को तैयार कर लीजिए साथ ही साथ कमजोर मानसून और अकाल तथा सूखा ‌ जैसी स्थितियां के लिए भी तैयार रहें -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक

चरम सीमा तक पहुंच चुकी भी भयंकर प्रलयंकारी गर्मी उमश और पसीना के बीच ‌

चरम सीमा तक पहुंच चुकी भी भयंकर प्रलयंकारी गर्मी उमश और पसीना के बीच ‌ केरल कर्नाटक गोवा तमिलनाडु आंध्र प्रदेश उड़ीसा महाराष्ट्र मुंबई पूना थाने नवी मुंबई नालासोपारा मध्य प्रदेश के दक्षिणी पूर्वी भागों झारखंड बिहार अंडमान निकोबार लक्षद्वीप बंगाल और उत्तर पूर्वी भारतवासियों के लिए प्रसन्नता की बात यह है कि कल से वहां एक सप्ताह तक लगातार हल्की सामान्य और इसके बाद भीषण वर्षा होगी जिससे उनको पूरी तरह से गर्मी और पसीने से मुक्ति मिल जाएगी 

लेकिन जौनपुर और उत्तर भारत में स्थित लोगों मध्य प्रदेश राजस्थान गुजरात दिल्ली नोएडा पंजाब हरियाणा उत्तराखंड जम्मू कश्मीर हिमाचल प्रदेश के लोगों को अभी चार-पांच दिन तक भी भयंकर प्रचंड गर्मी उमस और पसीने में नहाना पड़ेगा एक दो बार इस बीच उनका झंझावात आंधी तूफान के कारण होने वाली वर्षा से अल्पकालिक राहत और प्रसन्नता मिल सकती है-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

योग विज्ञान और योग दिवस-डॉ दिलीप कुमार सिंह

योग विज्ञान और योग दिवस-डॉ दिलीप कुमार सिंह 
योग भारत की विश्व को एक एक अद्भुत और अनुपम देन है जो आज संपूर्ण विश्व में फैल गया है इसका सर्वप्रथम उल्लेख विश्व के सबसे प्राचीनतम पवित्र ग्रंथ ऋग्वेद में किया गया है ‌ प्रत्येक भारती ग्रंथ और महाकाव्य और साहित्य में योग व्यायाम का वर्णन आवश्यक है रामायण महाभारत जैन और बौद्ध ग्रंथ उपनिषद ब्राह्मण आदरणीय और पुराण में इसका वर्णन है विश्व काव्य कामायनी में भी इसका भावपूर्ण वर्णन है। स्वामी विवेकानंद स्वामी रामतीर्थ महेश योगी धीरेंद्र ब्रह्मचारी आचार्य रजनीश ओशो रामदेव जैसे लोगों ने इसके प्रचार प्रसार में पूरे विश्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है इसका मुख्य और वैज्ञानिक स्रोत और ग्रंथ पतंजलि द्वारा किया गया है। 

योग का शाब्दिक अर्थ जोड़ना है यह हमको स्वास्थ्य से आत्मा को परमात्मा से जोड़कर गहरी ज्ञान की अंतिम अवस्था में एक बिंदु पर केंद्रित करें ईश्वर का दर्शन करता है एवं नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्यान और समाधि इसकी आठ सदस्य आए हैं जिनको अष्टांग योग कहा जाता है आजकल इसके आसान अधिक प्रचलित हैं जबकि इसका अंतिम लक्ष्य ध्यान करके स्वयं को जानकारी ईश्वर का दर्शन प्राप्त करके मोक्ष को पाना है इसकी उपयोगिता और विश्व में प्रसार को देखते हुए 14 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा इसको मान्यता दी गई और 21 जून को योग दिवस घोषित किया गया ध्यान रहे की 21 जून को उत्तरी गोलार्ध में सबसे बड़ा दिन और सबसे छोटी रात होती है। 


योग धीरे-धीरे प्राप्त किया जाता है इसमें वह वस्तुओं से धीरे-धीरे ध्यान हटाकर पीएम के बाद नियम अर्थात अनुशासन इत्यादि को ग्रहण करते हुए प्राणायाम अर्थात सांस को अंदर बाहर ले जाने पर नियंत्रण करना होता है और प्रत्याहार में इस पर पूर्ण नियंत्रण करके गहरी ज्ञान की अवस्था में सभी बाहरी चीजों से मन को हटाते हुए अपने चरित्र को एक निश्चित धरना बिंदु पर केंद्रित करके गहन समाधि की अवस्था प्राप्त करके कुंडलिनी शक्ति जागृत करते हुए सहस्त्रार चक्र से झरने वाले अमृत की बूंद का पान करते हुए दिव्य निनाद अर्थात  रसपान किया जाता है।

योग बहुत ही व्यापक है यह आत्मा को परमात्मा से मिलना है व्यक्ति को विभिन्न आसनों के द्वारा शक्तिशाली और स्वस्थ बनाकर उसके जीवन के लक्ष्य की ओर ले जाता है और**जीवेत ‌ शरदं शतं **की सार्थकता स्वीकार करताहै।

‌**योग कर्मसु कौशलम्** ‌ अर्थात कार्य की सर्वोच्च कुशलता को ही योग कहा जाता है यह मानवता को विकसित करके प्रकृति की शक्तियों से साक्षात्कार करते हुए मानव को शक्तिशाली बन कर उसको सृजनात्मक बनता है जबकि पाश्चात्य और अब देश शक्ति और हिंसा को सर्वोच्च मन कर विनाश लीला प्रस्तुत करते हैं और दुनिया को विनाश के कगार पर ले जाते हैं अब यूरोप अमेरिका के अलावा अरब के अधिकांश मुस्लिम देशों ने भी योग को न केवल मान्यता दिया है अपितु इसको अपना लिया है। 

योग का प्रचार प्रसार और विज्ञापन करके अरबों रुपए फूंकने से अच्छा है ‌ कि इस पर धरातल से काम करते हुए लोगों को इसका महत्व समझाते हुए व्यक्ति को कर्म योगी बनाया जाए योग केवल आसान व्यायाम ही नहीं है इसमें कर्म योग भक्ति योग ज्ञान योग सहित सभी योग आ जाते हैं और योग स्वयं भगवान शिव के द्वारा पैदा हुआ है इसलिए वह भी उनका एक रूप है इसलिए विश्व योग दिवस पर विश्व के सभी लोगों को यह संकल्प लेना चाहिए कि वह कोई भी एक योग्य की प्रक्रिया अपना कर स्वस्थ बनाकर स्वयं को जानते हुए ईश्वरी सत्ता की तरफ बढ़ते हुए मोक्ष अर्थात मुक्ति को प्राप्त करेंगे।

Thursday, 18 June 2026

मौसम की भविष्यवाणी - डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 7017713978

मौसम की भविष्यवाणी - डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 7017713978

15 जून से 25 जून तक आसमान से बरसेगी आज सभी दिशाएं हो जाएगी लाल, धरती बन जाएगी तपती हुई भट्टी ,उमस और पसीने से हो जाएंगे लोग बेहाल  ‌‌ एसी कूलर सब कुछ फेल हो जाएगा।केवल हमारे केंद्र की भविष्यवाणी सही होगी बाकी सभी सरकारी और प्राइवेट मौसम विभाग हर वर्ष की तरह इस बार भी मुंह की खाएंगे, अल नीनो और विभिन्न प्रभावों से मानसून रहेगा बहुत कमजोर 25 अक्टूबर तक पड़ेगी घनघोर गर्मी ‌ इसका प्रभाव केवल जौनपुर और जौनपुर के आसपास के जनपदों पूर्वांचल उत्तर प्रदेश में ही नहीं अपितु जम्मू कश्मीर से लेकर केरल कन्याकुमारी गुजरात राजस्थान से लेकर अरुणाचल प्रदेश उड़ीसा हर जगह पड़ेगा शरीर की क्षमता आधी होजाएगी।

इसी बीच हवाओं की दिशा पश्चिम गति 10 से 20 किलोमीटर प्रति घंटा होगी मानसून और मानसून बादलों का दूर-दूर तक कोई नामोनिशान नहीं है जैसा कि हमारे केंद्र द्वारा बार-बार दर्जनों बार कहा गया इस वर्ष का मानसून अनिश्चित अनियमित और विलंबित रहेगा। सूखा और सूखे जैसी स्थितियां पड़ना निश्चित है ‌ क्योंकि मानसून बहुत पहले ही आकर केरल कर्नाटक तक सीमित रहकर 15 म ई से 25 म ई तक समाप्त हो चुका है दूसरा चक्र 4 जून को आया वह बहुत कमजोर था ‌ इस बीच संपूर्ण भारत में अधिकांश स्थानों का तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस अधिकतम और 25 से 35 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम रहेगा जो अत्यंत ही भयानक स्थिति है। ‌ 10 जून से 20 जून तक मानसून स्थिर हो जाएगा और आगे नहीं बढ़ेगा 25 जून से ही है सक्रिय होगा वह भी बहुत तेज नहीं होगा।

प्रदूषण की मात्रा अत्यधिक रहेगी पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 5 से 7 और वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 के आसपास रहेगी इसलिए गर्मी उमस और जलन ‌‌ भी भयंकर प्रलयंकर गर्मीसे अभी ‌ कम से कम एक सप्ताह तक मुक्ति मिलने की संभावना नहीं है वर्षा की दूर-दूर संभावना नहीं है अचानक परिवर्तन के फलस्वरूप कहीं-कहीं तेज हवा बूंदाबादी हो सकती है उसकी भी अधिक संभावना नहीं है।‌ 15 जून से 25 जून के बीच केवल एक बार आंधी तूफान वर्षा चमक गरज और वज्रपात का योग है जिससे थोड़ी सी राहत मिल जाएगी।

जौनपुर और आसपास ही नहीं पूरे देश की यही स्थिति है दो-तीन दिन केरल कर्नाटक और आसपास वर्षा करने के बाद मानसूनी बादल पूरे भारत से अदृश्य हो चुके हैं अब तक मानसून महाराष्ट्र गुजरात मध्य प्रदेश झारखंड बिहार तक पहुंच जाना चाहिए था क्योंकि जौनपुर और उत्तर प्रदेश में 19 -21 जून तक पहुंच जाता है इस बार इसके 27 से 30 जून के बीच आने की संभावना बन रही है‌ इसीलिए हमारे केंद्र द्वारा कृषि बागवानी से संबंधित लोगों को बार-बार सुझाव चेतावनी दिया गया था कि इस वर्ष सूखे वाले फसलों की तैयारी कर ले और 25 अक्टूबर तक प्रचंड गर्मी उमस पसीना झेलने के लिए तैयार रहे -

दिनों दिन इस प्रकार का प्राकृतिक प्रकोप सूखा अकाल महामारी वर्षा बाढ़ अति वृष्टि जैसी स्थितियां बढ़ती जाएंगे ‌ मनुष्य के द्वारा भयानक प्रदूषण और प्रकृति पर्यावरण के साथ किया गया खिलवाड़ अब खुलकर सामने आने लगा है भारत ही नहीं यह पूरी दुनिया को भीषण रूप से प्रभावित करके तरस-नस कर देगा अमेरिका यूरोप में भी पड़ेगी भीषण गर्मी और हजारों लोग मारे जाएंगे।

और बड़े-बड़े वैज्ञानिक मौसम विज्ञानी और पश्चिमी विद्वान और उनकी नकल करके दुनिया भर के विद्वान जो नौटंकी वाले कारण बता रहे हैं उनमें से एक भी कारण नहीं है प्रकृति और पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ के कारण ही ऐसी स्थितियां उत्पन्न हुई है ‌ इसमें से मुख्य हैं वनों और हरियाली का लगातार गायब होना नए पेड़ पौधे ‌ पृथ्वी पर लगाने कीजगह भाषणों कागजों और विज्ञापन में लगाना पौधों का पैसा जेब में रख लेना प्रकृति और पर्यावरण में भयंकर प्रदूषण पैदा करना प्लास्टिक पूरा कचरा इलेक्ट्रॉनिक कचरा रेडिएशन वाला कचरा जल और वायु को गंदा करना सीमेंट कंक्रीट और पत्थर के जंगल पैदा करना जमीन का लगातार मिट्टी की जगह सीमेंट कंक्रीट और पत्थरों से ढकते चले जाना और उद्योग धंधों का लगातार बिना नियंत्रण के बढ़ते चले जाना ‌ इसके मुख्य कारण हैं 

इसके अलावा समुद्र में फैल रहा भीषण प्रदूषण मनुष्य की जनसंख्या का हिसाब बढ़ाना लगातार युद्ध परमाणु परीक्षण और परमाणु केंटो में विस्फोट साबुन डिटर्जेंट पाउडर फ्रिज रेफ्रिजरेटर और बिजली के चूल्हा का भीषण प्रयोग लकड़ी ऊपरी और प्राकृतिक चीजों का लगातार प्रयोग घटना जल के स्रोत कुएं  ‌ तालाब झील पोखर झरने बावली इत्यादि की जगह घर-घर जेट पंप और सबमर्सिबल लगाकर धरती को जल रहित बनाना जैसे आत्मघाती प्रवृत्तियां मानव सभ्यता को विनाश की ओर ले जा रहे हैं और इस वर्ष तो भयंकर अल-नीनो ने इन सबको और भी अधिक बढ़ा दिया है ऊपर से सूर्य में हो रही प्रचंड नाभिकीय क्रियाएं और प्रचंड विस्फोट धरती को और भी गरम और असंतुलित कर रहे हैं।

आज एक विवेक साक्षरता जागरण तस्वीर का आयोजन सिकरारा ब्लॉक में ‌ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर के तत्व अवधान में जनपद न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुशील कुमार शशि के निर्देशन में और सचिव पूर्ण कालिक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुशील कुमार सिंह के देखरेख में किया गया ‌ इस अवसर पर सुशील कुमार सिंह सचिन डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल ‌ खंड विकास अधिकारी पवन कुमार और ऑडियो पंचायत कृष्ण कुमार मिश्रा काउंसलर देवेंद्र कुमार यादव एवं प्राधिकरण के डाटा एंट्री ऑपरेटर सुनील कुमार मौर्य राकेश कुमार यादव और बड़ी संख्या में विकासखंड के कर्मचारी अधिकारी और जनता उपस्थित रहे।

आज एक विवेक साक्षरता जागरण तस्वीर का आयोजन सिकरारा ब्लॉक में ‌ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर के तत्व अवधान में जनपद न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुशील कुमार शशि के निर्देशन में और सचिव पूर्ण कालिक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुशील कुमार सिंह के देखरेख में किया गया ‌ इस अवसर पर सुशील कुमार सिंह सचिन डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल ‌ खंड विकास अधिकारी पवन कुमार और ऑडियो पंचायत कृष्ण कुमार मिश्रा काउंसलर देवेंद्र कुमार यादव एवं प्राधिकरण के डाटा एंट्री ऑपरेटर सुनील कुमार मौर्य राकेश कुमार यादव और बड़ी संख्या में विकासखंड के कर्मचारी अधिकारी और जनता उपस्थित रहे।

इस अवसर पर सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण  ‌ सुशील कुमार सिंह  द्वारा विकसित भारत के संकल्प को पूर्ण करने के लिए और सभी तक न्याय पहुंचने के लिए प्राधिकरण की सहायता लेने का आवाहन किया और कहा कि अंतिम व्यक्ति तक सुविधा और न्याय पहुंचना चाहिए जिसके लिए वैकल्पिक न्याय प्रणाली का जिला प्रदेश और देश स्तर पर विकास किया गया है। देश को आगे बढ़ाने के लिए अंतिम व्यक्ति तक सुविधा पहुंचना और उसको न्याय मिलना आवश्यक है
इसी क्रम में उप मुख्य प्रतिरक्षा सलाहकार डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह विकासखंड अधिकारी पवन कुमार एडीओ कृष्ण कुमार मिश्रा ‌ काउंसलर देवेंद्र कुमार यादव के द्वारा ‌ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं ब्लॉक के द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं का विस्तार से वर्णन करते हुए जन सामान्य को इन सभी सुविधाओं का लाभ लेने और उसकी प्रक्रिया जानने के लिए विस्तार से समझाया गया।

वक्ताओं द्वारा बताया गया कि गरीब कमजोर अनुसूचित जाति जनजाति और पिछड़ी जाति के लोग तथा महिलाएं और लड़कियां चाहे धनी हो या निर्धन प्राधिकरण में फौजदारी और दीवानी के अधिवक्ता मुफ्त में प्राप्त कर सकते हैं इसके अलावा प्राधिकरण तेजाब पीड़ित दुष्कर्म पीड़ित और अन्य पीड़ा और प्रताड़ना वाले लोगों को त्वरित न्याय दिलाता है इस संगोष्ठी का संचालन डॉ दिलीप कुमार सिंह के द्वारा और आभार ज्ञापन खंड विकास अधिकारी पवन कुमार द्वारा किया गया