Sunday, 8 February 2026

‌ मृत्यु भोज का विरोध विदेशी षड्यंत्र का परिणाम है -डॉ दिलीप कुमार सिंह

‌ मृत्यु भोज का विरोध विदेशी षड्यंत्र का परिणाम है -डॉ दिलीप कुमार सिंह 
गद्दार और देशद्रोही तथा विदेशी लोगों से पैसा लेकर ऐसा कह रहा है। ‌ वरना यह और इसके जैसे धर्म गुरु संत महंत आचार्य महात्मा दहेज प्रथा का समाज में फैले हुए धन के असमान वितरण का बहुत महंगे और ऊंचे होटल में आयोजित होने वाले विवाह और मांगलिक समारोह का पैसा लेकर धर्म कथा और राम कथा कहने वाले लोगों का विदेशी परिधान और डीजे आर्केस्ट्रा फिल्मी और भोजपुरी गंदे गानों पर होने वाले विवाह और मंगल समारोह का समाचार पत्र और टेलीविजन चैनल और सोशल मीडिया पर आने वाले अश्लील कामसूत्र और एवं शक्ति वर्धक विज्ञाप और गंदे विज्ञापनों का विरोध करते ‌ और इन्हीं लोगों के कारण सनातन धर्म के देवी देवताओं धर्म कर्म की हंसी पूरी दुनिया में उड़ाई जाती है क्योंकि यह नकली साधु संत है जिनके पास ब्रह्मचर्य तपस्या और सदाचार जैसा कुछ भी नहीं है।

मृत्यु भोज खाने से लोगों की ऊर्जा इसलिए नष्ट होती है क्योंकि वह मरे हुए व्यक्ति का थोड़ा बहुत पाप अपने ऊपर लेते हैं इससे उसे व्यक्ति के पापों का बोझ कम हो जाता है और नरक की आग से छुटकारा मिल जाता है ।

रसमलाई रबड़ी काजू किशमिश बादाम शिलाजीत केसर और यौन शक्ति वर्धक दवाई का सेवन करके एक कुंतल की दें और गाल गुलाबी नैन शराबी वाले ऐसे ही साधु संत सनातन धर्म को बर्बाद कर रहे हैं और इनको पड़ा गठबंधन का पूरा सहयोग भी मिलता है ।

जब मूर्ख लोगों के हाथ में व्याख्या पड़ जाती है तो ऐसे ही अर्थ का अनर्थ हो जाता है मृत्यु भोज संस्कार इसलिए बनाया गया है कि किसी के मर जाने पर इसी बहाने लोग एकत्र होते हैं मृतक परिवार के सुख-दुख में सहभागिता करते हैं और उसे लगता है कि वह दुनिया में अकेला नहीं है उसके अपने बहुत से लोग हैं जैसे आप किसी विपत्ति में पड़ जाते हैं तो डूबते को तिनके का सहारा मिल जाता है ।

यहां एक बात बता देना चाहते हैं कि प्राचीन काल से लेकर अभी 50 वर्ष पहले तक किसी की मृत्यु हो जाने पर लोग अपना सहयोग करते थे और कुछ भी खाते पीते नहीं थे दास संस्कार हो जाने पर लोग गुड़ खाकर पानी पीकर घर चले जाते थे और आज के लोग मरे हुए परिवार से रसमलाई और खोवा छेना  ‌ उच्चतम श्रेणी की मदिरा और यौन शक्तिवर्धकदवाएं लेते हैं तब ऐसे मोटे ताजे संत कुछ नहीं कहते ।

मैं इन मोटे ताजे संत ‌ महात्मा बुद्धिजीवी धर्मगुरु ‌ जो हजारों लोगों का भजन रोज का जाते हैं और एक से पांच कुंतल देने वाले नैन शराबी गाल गुलाबी हैं और उनके समर्थक लोगों विदेशी गद्दारों और इनका पालन पोषण करने वाले देश के छिपे देशद्रोहियों से पूछना चाहता हूं कि किसी भी विवाह में केवल दो संस्कार होते हैं पहले सप्तपदी और दूसरा सिंदूरदान है ।बाकी  वर यात्रा जिसको आर्केस्ट्रा डीजे कोट पैंट सूट बूट शर्ट टाइ असली नाच गाने नग्न और अर्धनग्न होकर सड़कों पर गंदे भद्दे अश्लील दो अर्थी मैथुनिक फिल्मी और भोजपुरी गीत गाने का नियम किस वेद पुराण रामायण महाभारत महाकाव्य धर्म ग्रंथ जातक जैन कथाओं में या गुरु नानक देव के ग में लिखा हुआ है । इसका यह लोग कभी विरोध क्यों नहीं करते रात्र में होने वाले विवाह संस्कार का विरोध क्यों नहीं करते।


एक बार और बता देना चाहते हैं कि यदि क्षत्रिय और ब्राह्मण सचमुच सुधर जाएंगे तो यह सब करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी जब वह खुद ही गिर गए हैं तो दूसरों को अपने से ऊंचा समझ रहे हैं और इसीलिए समाज नष्ट और बर्बाद हो रहा है क्योंकि जब ब्राह्मण रूपी समाज का मस्तिष्क और ‌ सबको शरण देखकर रक्षा करने वाली क्षत्रिय रूपी भुजा समाप्त हो जाएगी तो यह सारा धन दौलत गाड़ी बंगला कर घर की सुंदर स्त्रियां बच्चे सब विदेशी विधर्मी शैतान कब्जा कर लेंगे ‌ 58 मुस्लिम देश संपूर्ण यूरोप और अमेरिका कश्मीर बंगाल केरल बांग्लादेश पाकिस्तान अफ़गानिस्तान का हाल देख रहे हो फिर भी समझ में नहीं आ रहा है उसे पर यह लोग कुछ नहीं बोल रहे हैं जबकि चाहते तो एक करोड़ की संख्या के 1 से 5 कुंतल वाले लोग इन सभी शैतानों का सफाया कर देते इसीलिए ‌ मृत्यु भोज और अन्य चीजों के बहाने इन संत महंतों को आगे करके शंकराचार्य की तरह सनातन धर्म को नष्ट और बर्बाद किया जा रहा है ।


इन लोगों से पूछो कि इन्हें तो जंगल में आश्रम कुटी बनाकर धर्म कर्म करके सत्य धर्म का प्रचार करना चाहिए फिर यह चार्टर्ड हवाई जहाज और रेल के सबसे ऊंचे दर्जे में सबसे कुछ श्रेणी का भोजन किस लिए करते हैं ‌ क्यों बड़े-बड़े लोगों के यहां पंचमकार का सेवन करते हैं और तामसी भोजन का सेवन करके रक्षा बनाकर लोगों को देवता बनने का उपदेश देते हैं बड़े-बड़े हमारे योग और धर्म के आचार्य सब कुछ विदेशी ढंग का यहां तक की शौचालय भी विदेशी ढंग का प्रयोग करके सबको स्वदेशी का भाषण देते हैं ।क्या हमारे ऋषि मुनि तपस्वी विश्वामित्र ब्रह्म ऋषि जैसे लोग राज पाठ में सूरज सुंदरी में डूब कर सत्य और धर्म का प्रचार करते थे ।

एक बात और बता दे आज बंदर के हाथ में छुरा और पागल के हाथ में स्टेनगन देकर देश धर्म को और भारत को बचाने का जिम्मा ऐसे लोगों को दिया जा रहा है जो खुद ही इसको बर्बाद कर देंगे मैं जो भी कहता हूं सत्य धर्म और अपने सनातन ग्रंथो को प्रामाणिक रूप में ‌ अध्ययन करके कहता हूं अब इस एक कुंतल की तोंद वाले गाल गुलाबी नैन शराबी लोगों के समर्थन में और मुझे बताएं कि इसमें एक भी शब्द क्या गलत कहा गया है 

**दुनिया भर को इस्लाम बनाओ** वैदिक सूत्र से लिया गया है जिसमें कहा गया है **समस्त विश्व को आर्य बनाओ** वास्तव में जितने भी हमारे युद्ध हुए हैं वह सभी अरब और यूरोप के राक्षसी शैतानी शक्तियों से हुए हैं चाहे वह विश्वामित्र और वशिष्ठ के समय दश राजाओं का युद्ध हो चाहे रावण का युद्ध हो याद रखें रावण लंका का नहीं था वह भी अब देश का ही था चाहे सिकंदर का चाहे अन्य जंगली शैतानी जातियों का आक्रमण रहा हो ।

इसलिए इन सब के चक्कर में पड़कर वाद विवाद करने की आवश्यकता नहीं है नए बने हुए बौद्ध लोग भी यही करते हैं बस केवल थोड़ा सा रूप बदल दिया गया है और बाकी लोग भी यही करते हैं जो संस्कार सनातन धर्म के है वही क्रिश्चियन और यहूदी करते हैं और वही मुस्लिम भी करते हैं जो कार्य बनारस में और गया में पिंडदान का होता है वही मक्का मदीना में हज की यात्रा करते समय भी किया जाता है इसमें बहुत कुछ देशकाल और परिस्थितियों का भी अंतर होता है ।


बर्फ वाले प्रदेशों में और रेगिस्तान में जहां लकड़ी उपलब्ध नहीं थी जहां पानी उपलब्ध नहीं था वहां लकड़ी और पानी बचाने के लिए अनेक नियम बनाए गए थे जैसे की लाशों को दफन कर देना वहां जनसंख्या भी बहुत कम थी एवं ऐसे बर्तनों का आविष्कार करना जिससे पानी कम से कम खर्च हो भारत में हर चीज की प्रचुरता थी इसलिए यहां पर हर कार्य स्नान करने के बाद का नियम बनाया गया यहां जलवायु भी अच्छी और गर्म है ‌ वहां जंगली असभ्य म्लेच्छ ‌ जैसी अपराधी प्रकृति की भारत से निकल गई जातियों का निवास है जहां स्त्रियों की कमी है इसलिए एक स्त्री सेकंड लोगों का काम चला सकती है लूटमार ही इनका धंधा था क्योंकि वहां पहले कुछ होता नहीं था भारत में ऐसी चीज बनाने की क्या आवश्यकता है।

चलते-चलते एक बात बता दे यदि ब्राह्मण क्षत्रिय लाला और बनिया वर्ग अभी भी सुधर जाएं और सफल जाएं तो किसी भी सरकारी नियम की सहायता की उनको आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी मैं तो कहता हूं सारी नौकरी सारे पद और सारी सी अनुसूचित जाति जनजाति और पिछड़ी जातियों का बना दो और 5 साल में देखो क्या से क्या हो जाता है जिस तरह बिना देश के इसराइल महाशक्ति बन गया। नहीं तो गुजराती मारवाड़ी ‌ पंजाबी सिंधी लोग कितने ऐसे हैं जो नौकरी करते हैं और पूरी दुनिया में इनका राज है यहूदी लोगों को भी देख सकते हैं दुनिया में सबसे कम है और सबसे अधिक इन्हीं का दबदबा कायम है 58 मुस्लिम देश इनका कुछ नहीं उखाड़ सकते।

 वैसे ही यदि जाग सके तो क्षत्रिय ब्राह्मण वैश्य और लाला लोग आज भी 10 वर्ष में पूरी दुनिया में अपना साम्राज्य खड़ा कर सकते हैं लेकिन यह पतित हो गए हैं और योग्यता बढ़ाने की जगह आरक्षण जैसी चीजों का व्यर्थ में विरोध करके अपनी ऊर्जा समाप्त कर रहे हैं ‌ इससे अच्छा होता कि सारा समय अपने योग्यता और प्रतिभा बढ़ाने में करते दुनिया भर के दरवाजे खुले हैं लेकिन दुर्भाग्य से अभी पंचमकार वाली मैथुनी संस्कृत के जाल में और सूरज सुंदरी में डूब रहे हैं

चलते चलते आपको बता दे की देवताओं को संविधान नियम विधान और कानून की आवश्यकता नहीं है और राक्षसों के लिए शैतानों के लिए कानून बनाना व्यर्थ है क्योंकि वह उसका पालन ही नहीं करेंगे सारे नियम कानून मनुष्य अर्थात मनु की संतानों के लिए बने हैं इसलिए अन्य धर्म के लोगों को मानव समझने की भूल मत करो यह चलते फिरते विषैला सांप हैं जो कहीं भी आपको डंस कर खत्म कर देंगे एपस्टीन फाइल्स को ‌ देख लो जो लोग मनु की संतान अर्थात मानव नहीं है वह कैसी शैतानी हरकतें कर रहे हैं यही इनके सभ्यता की चरम उन्नति का फल है जिसमें सनातन धर्म को छोड़कर बाकी सारे धर्म शामिल हैं और सनातन धर्म का अर्थ है वह सारे लोग जो क्रिश्चियन मुस्लिम और यहूदी नहीं है इसमें हिंदू सिख जैन बौद्ध आस्तिक नास्तिक चार्वाक जंगली गुफा वाशी वनवासी सब शामिल है-डॉ दिलीप कुमार सिंह

Friday, 6 February 2026

*संघ प्रमुख मोहन भागवत जी के खिलाड़ी संवाद गोष्ठी में शामिल होंगे खेल गुरु फरहत अली खान*

*संघ प्रमुख मोहन भागवत जी के खिलाड़ी संवाद गोष्ठी में शामिल होंगे खेल गुरु फरहत अली खान* 
क्रीड़ा भारती द्वारा 20 फरवरी को मेरठ में आयोजित खेल संवाद में रामपुर से संघ के द्वारा फरहत अली खान को निमंत्रण भेजकर आमंत्रित किया गया है।
फ़रहत अली खान ने कहा के यह उनके जीवन में निमंत्रण ही नहीं बल्कि उपलब्धि है।
जब राष्ट्र को समर्पित संस्थाएं समाज के साथ साथ खेलों पर भी ध्यान केंद्रित करेंगी तब भारत को खेल महाशक्ति बनने से कोई नहीं रोक सकता।
देश की खेलनीति के अनुसार 2036 का ओलंपिक जो भारत आयोजित कर सकता है योजना बनाई जा रही है ऐसी जानकारी मिल रही है।
 इस होने वाले ओलिंपिक में हमारा देश खेलने ही नहीं बल्कि हर खेल स्पर्धा में गोल्ड जीतकर ही दिखाएगा ऐसी आशा ही नहीं विश्वास है। 
उन्होंने कहा खेल जुनून ही विजय बनाता किसी भी महान खिलाड़ी की गाथा पढ़ लो।
खेल में शोक,मेहनत, अभ्यास,जुनून, खेल से इश्क,अनुशासन, देश प्रेम और ईमानदार गुरु की ज़रूरत होती है।
पहले आलस,लालच और समस्याओं से जीतना सीखो , जिले से लेकर विश्व स्तर और ओलिंपिक का पदक आपके गले की शान बनने के इंतजार में है।
आज ही और अभी से देश के हर खिलाड़ी को यह सोच बनाने की जरूरत है हम नौकरी पाने के लिए नहीं ,
देश के तिरंगे की शान और सम्मान के लिए खेल रहे हैं यह विश्वसनीय सोच जो खिलाड़ी को हमेशा के लिए देश की शान बना देती है।
उन्होंने आर एस एस द्वारा भेजे गए आमंत्रण का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया है।

मड़ियाहूं में विधिक साक्षात है जागरूकता शिविर का किया गया आयोजन

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर के तत्वावधान में जनपद न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ‌ सुशील कुमार शशि जौनपुर के निर्देशन और सचिव सुशील कुमार सिंह की देखरेख में एक विधिक साक्षरता जागरूकता  सेमिनार का आयोजन ‌‌ तहसील सभागार मड़ियाहूं जनपद जौनपुर में आयोजित किया गया ‌ इस सेमिनार में  ‌ सचिव सुशील कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह  ‌ तहसीलदार मडियाहू राकेश कुमार प्राधिकरण के सुनील कुमार मौर्य डाटा एंट्री ऑपरेटर शिव शंकर सिंह और सुभाष यादव पीएलबी और राकेश कुमार यादव उपस्थित रहे ।
 वक्ताओं के क्रम में सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ‌ सुशील कुमार सिंह जौनपुर ‌ के द्वारा  ‌ बच्ची देवी बना स्टेट के बारे में माननीय उच्च और उच्चतम न्यायालय के दिशा निर्देशों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यों को विस्तार से समझाया गया और बताया । कन्या भ्रूण हत्या एवं महिला सशक्तिकरण के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा की महिलाएं जागरूक होगी तो देश भी जागरूक होगा ‌उन्होंने लोगों से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सहायता लेने के लिए भी प्रेरित किया।‌ उन्होंने कहा कि समाज और देश की आवश्यकता अनुसार विधियो में परिवर्तन और संशोधन होता रहता है। इसके अतिरिक्त बच्चों के अधिकार और स्थाई लोक अदालत के बारे में भी विस्तार से जानकारी देते हुए इस संबंध के टोल फ्री नंबर को याद रखने की बात कही गयी। उनके द्वारा बताया गया कि व्यक्तिगत बंदी की सामाजिक आर्थिक रिपोर्ट आ जाने के बाद संबंधित न्यायालय को तत्काल बंदी के जमानत प्रक्रिया को मानवीय एवं संवैधानिक अनुक्रम में त्वरित गति से किया जाना आवश्यकहै।‌ उन्होंने 14 मार्च को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक विवादों को सुलह समझौते द्वारा निश्चित करने पर बल दिया और कहा कि यह एक अस्थाई समाधान है और इसमें कोर्ट फीस भी वापस हो जाती है ।

डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल डॉ दिलीप कुमार सिंह के द्वारा ‌ महिलाओं और बच्चों के अधिकार के बारे में महिला सशक्तिकरण के बारे में बताया गया की प्राचीन काल में भारत में महिला और पुरुष में कोई भी विभेद नहीं था ‌ स्त्री और बालकों को विधान और संविधान में संपूर्ण सुरक्षा दी गई है किसी महिला को पुलिस सूर्यास्त के बाद गिरफ्तार नहीं कर सकती 14 वर्ष से कम बालकों को खतरनाक कामों में लगाया नहीं जा सकता है ‌ समान काम के लिए महिलाएं समान वेतन पाने और मातृत्व अवकाश की हकदार हैं।और उन्हें प्राधिकरण से भी हर संभव सहायता दी जाती है और उन्होंने कहा कि यदि नारियां संकल्प कर ले तो दहेज इत्यादि प्रथम अपने आप समाप्त हो जाएगी। ‌ बच्ची देवी बनाम स्टेट में माननीय सर्वोच्च और उच्च न्यायालय के द्वारा दिशा निर्देश दिए गए हैं कि यदि मुकदमे में 7 वर्ष या उससे कम की सजा है तो पुलिस सामान्य रूप से ऐसे लोगों को गिरफ्तार नहीं करेगी और चार्जशीट प्रस्तुत होने पर उन्हें व्यक्तिगत बंधपत्र या एकल जमानत पर छोड़े जाने का प्रावधान के बारे में व्यापक दिशा निर्देश  हैं जमानत एवं स्वतंत्रता हर व्यक्ति का अधिकार है और उन्हें अकारण जेल में बंद नहीं रखना चाहिए जमानत की प्रक्रियाओं को सरल और मानवीय होना अत्यंत आवश्यक है । सत्येंद्र अंटील ‌ मुशीर आलम जैसे मामलों के दिशा निर्देश का पालन किया जाना आवश्यक हैदेश प्रेम अनुशासन बच्चों को समय का सदुपयोग करने‌ और मोबाइल की अश्लीलता से बचकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया‌ साथ ही साथ कहा की 100, 112, 1098,333 101 जैसे आवश्यक नंबर सबको याद रखना चाहिए।

‌ तहसीलदार मडियाहू राकेश कुमार के द्वारा शासन और प्रशासन की महिलाओं और बच्चों के बारे में दिए जा रहे सहायता और सुविधाओं का विस्तार से उल्लेख किया और बताया कि प्रशासन प्राधिकरण के दिशा निर्देशों के अनुक्रम में संपूर्ण सहयोग देने को तात्पर्य है इसी क्रम में ‌ थाना प्रभारी मडि़याहूं के द्वारा भी बच्चों और महिलाओं के बारे में पुलिस के द्वारा दी गई सहायता और सुविधाओं के बारे में जानकारी दी गई

Sunday, 1 February 2026

भारतीय मुसलमान: स्टेकहोल्डर, बाहरी नहीं*

*भारतीय मुसलमान: स्टेकहोल्डर, बाहरी नहीं*

नागरिकता कोई तोहफ़ा नहीं है जो ज़्यादातर लोग किसी माइनॉरिटी को देते हैं, बल्कि यह पहचान और अपनेपन से जुड़ा एक अंदरूनी दावा है। भारतीय मुसलमानों के लिए, यह दावा सिर्फ़ कानूनी नहीं है - यह पुरखों का, सांस्कृतिक और बहुत इमोशनल है। भारतीय मुसलमानों को स्टेकहोल्डर कहना उस लगातार चलने वाली कहानी को चुनौती देना है जो उन्हें या तो बाहरी या इतिहास का हमेशा शिकार बताती है। कोई भी लेबल उस समुदाय की ज़िंदादिली के साथ न्याय नहीं करता जो एक हज़ार साल से ज़्यादा समय से इस ज़मीन की सीमाओं के अंदर रहा है और जिसने सक्रिय रूप से इसकी आत्मा को आकार दिया है। भारत के मुसलमानों के लिए गणतंत्र के बराबर नागरिक बनने का सफ़र कोई पैसिव नहीं था। यह एक सोच-समझकर, मुश्किल से लिया गया फ़ैसला था। जब 1947 में सबकॉन्टिनेंट का बँटवारा हुआ, तो लाखों लोगों ने यहीं रहने का फ़ैसला किया, क्योंकि उन्हें पक्का यकीन था कि उनकी किस्मत एक सेक्युलर भारत के कई लोगों वाले नज़रिए से जुड़ी है।
मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने लोगों को याद दिलाया कि दिल्ली के पत्थर और गंगा का पानी उनके पुरखों के पसीने और खून के गवाह हैं। उनके शब्द सिर्फ़ शांति से साथ रहने की अपील नहीं थे - उन्होंने देश के होने और पॉलिटिकल प्रोसेस में बराबर हिस्सेदारी और मालिकाना हक पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि हज़ार साल की मिली-जुली ज़िंदगी ने हिंदुओं और मुसलमानों को एक ही देश, एक कौम-ए-वाहिद में मिला दिया है, जहाँ एक का योगदान दूसरे से अलग नहीं था।
मालिकाना हक की यह भावना एक ऐसे इतिहास में निहित है जो आज की बांटने वाली बातों की छोटी-छोटी बातों से कहीं आगे है। अंग्रेजों के आने से बहुत पहले, इंडो-इस्लामिक कल्चर ने सबकॉन्टिनेंट में सोशल लाइफ में क्रांति ला दी थी, जिसमें साइंस और एस्थेटिक्स भी शामिल थे। दिल्ली सल्तनत और मुगलों के एडमिनिस्ट्रेटिव सुधारों - शेर शाह सूरी के लैंड रेवेन्यू सिस्टम से लेकर फतवा-ए-आलमगिरी लीगल फ्रेमवर्क तक - ने मॉडर्न इंडियन स्टेट की नींव रखी। साइंस और टेक्नोलॉजी में भी, योगदान उतने ही ज़रूरी थे। कागज़ बनाने की शुरुआत करने और मिडिल एज की ऑब्ज़र्वेटरी में एस्ट्रोलैब को बेहतर बनाने से लेकर टीपू सुल्तान की मशहूर रॉकेटरी (जिसे ब्रिटिश मिलिट्री ने भी अपनी रॉकेटरी से बेहतर माना था) तक, इंडियन मुसलमान इनोवेशन के पायनियर थे। आजकल की कहानी अक्सर इन स्ट्रक्चरल योगदानों को छोड़ देती है, और विक्टिमहुड पर फोकस करना पसंद करती है। असली सोशियो-पॉलिटिकल चुनौतियों पर आधारित होने के बावजूद, यह तरीका अक्सर कम्युनिटी की प्रोएक्टिव एजेंसी, साइंटिफिक सख्ती और क्रिटिकल सोच को नज़रअंदाज़ करता है। स्टेकहोल्डर होने का मतलब है शिकायत से आगे बढ़ना और अपनी सही जगह पर ज़ोर देना। यह बात भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सबसे ज़्यादा दिखी। 1857 के ज़बरदस्त विद्रोह से, जहाँ बहादुर शाह ज़फ़र एकजुट भारतीय विरोध के सिंबॉलिक हेड बने, अशफ़ाक़उल्ला खान के क्रांतिकारी जोश तक, जो आज़ाद भारत का सपना देखते हुए फांसी पर चढ़ गए - मुस्लिम भागीदारी ज़रूरी थी। इंडियन नेशनल कांग्रेस के तीसरे प्रेसिडेंट बदरुद्दीन तैयबजी ने ज़ोर दिया कि भारतीय मुसलमानों को नेशनल मूवमेंट में एक अलग एंटिटी के तौर पर नहीं, बल्कि भारतीय बॉडी पॉलिटिक्स के ज़रूरी हिस्सों के तौर पर हिस्सा लेना चाहिए। आज़ादी के बाद के दौर में, यह विरासत लड़ाई के मैदान से लैब, कोर्टरूम और बाज़ार में बदल गई। डॉ. ज़ाकिर हुसैन और मौलाना आज़ाद जैसे लोगों ने सिर्फ़ लीडरशिप ही नहीं की - उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया और इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (IITs) जैसे इंस्टीट्यूशन बनाए, जिससे यह पक्का हुआ कि नए बने रिपब्लिक के पास बने रहने के लिए इंटेलेक्चुअल इंफ्रास्ट्रक्चर हो। साइंस में, डॉ. APJ अब्दुल कलाम की बड़ी मौजूदगी ने यह याद दिलाया कि भारतीय स्ट्रेटेजिक और साइंटिफिक सोच के सबसे ऊंचे लेवल को मुस्लिम दिमागों ने बनाया था। आज, यह भावना ग्लोबल कॉर्पोरेशन्स के बोर्डरूम और भारतीय स्टार्टअप्स के हब में भी जारी है। फार्मास्यूटिकल्स में हबील खोराकीवाला के वॉकहार्ट से लेकर डिजिटल मीडिया में अज़हर इकबाल के इनशॉर्ट्स तक, कम्युनिटी का एंटरप्रेन्योरियल फुटप्रिंट बढ़ रहा है, जिसे एक ऐसी पीढ़ी चला रही है जो सिर्फ़ लिमिटेशन से डिफाइन होने से इनकार करती है।
अलग-थलग करने वाली बातों और सिस्टमिक चुनौतियों से बढ़ रहा अलगाव का मौजूदा माहौल, बिना किसी शक के घेराबंदी की भावना पैदा करता है। हालांकि, ज़मीन पर पहले से ही एक काउंटर-नैरेटिव लिखा जा रहा है, अक्सर ऐसी जगहों पर जहां उम्मीद नहीं थी। उत्तर प्रदेश, हैदराबाद और केरल के बीचों-बीच एक इनोवेशन क्रांति हो रही है, जहाँ युवा मुस्लिम महिलाएँ पारंपरिक शिक्षा से AI और कोडिंग में करियर बना रही हैं। यह भारतीय मुस्लिम स्टेकहोल्डर का नया चेहरा है - जो धार्मिक पहचान को प्रोफेशनल एक्सीलेंस के साथ बैलेंस करता है, उन्हें विरोधाभासी नहीं मानता। वे राज्य के उन्हें ऊपर उठाने का इंतज़ार नहीं कर रहे हैं। वे शिक्षा और माइक्रोफाइनेंस का सेल्फ-सस्टेनिंग इकोसिस्टम बना रहे हैं, संवैधानिक देशभक्ति के ज़रिए अपनी एजेंसी वापस पा रहे हैं।
भारतीय मुसलमानों को विक्टिम के नज़रिए से देखना उनके मज़बूत इतिहास को नकारना है। उदाहरण के लिए, पसमांदा आंदोलन समुदाय के अंदर ही एक डेमोक्रेटाइज़ेशन को दिखाता है, क्योंकि समाज के हाशिए पर रहने वाले लोग स्टेकहोल्डर पाई में अपना हिस्सा माँग रहे हैं। यह अंदरूनी मंथन एक हेल्दी, एक ऐसा समुदाय जो लगातार विकसित हो रहा है और लोकतांत्रिक ढांचे के भीतर अपने अधिकारों और शक्ति के बारे में ज़्यादा जागरूक हो रहा है। वे अब सिर्फ़ वोट बैंक नहीं हैं जिन्हें मैनेज किया जा सके, बल्कि एक ऐसी नागरिक शक्ति हैं जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। समानता के लिए उनका संघर्ष बाहरी होने का संकेत नहीं है - यह हितधारक होने का सबसे बड़ा सबूत है।
भारत का भविष्य उसके अलग-अलग समुदायों के बीच ज़ीरो-सम गेम नहीं है। यह एक सहयोगी प्रोजेक्ट है जहाँ भारतीय मुसलमान भारतीय लोकतंत्र से अलग नहीं हैं - वे इसके निर्माताओं में से हैं। अलगाव की पुरानी कहानियों से आगे बढ़कर और देश की सामाजिक-आर्थिक प्रगति में सक्रिय भूमिका निभाकर, यह समुदाय यह सुनिश्चित कर सकता है कि उसका योगदान हमेशा की तरह ज़रूरी और लगातार बना रहे। भारतीय मुसलमान भारत की बहुलता की आत्मा हैं। उनके बिना, भारत की कहानी अधूरी है।
फ़रहत अली खान 
एम ए गोल्ड मेडलिस्ट

Friday, 30 January 2026

आने वाले समय की कुछ महान भविष्यवाणियों -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

आने वाले समय की कुछ महान भविष्यवाणियों -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 

हमारे अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान केंद्र की गहन गणनाओं और आकलन के आधार पर कुछ बहुत बड़ी घटनाएं निम्नलिखित हैं 

आने वाले समय में अमेरिका और ईरान में भयानक युद्ध होते-होते बच जाएगा फिर भी ईरान का बहुत अधिक नुकसान होगा और उसके पक्ष में खड़ा होने वाला कोई नहीं दिखेगा ना अरब देश ना चीन और नहीं रूस 
‌ लंबे समय तक शांत रहने के बाद एक बार फिर सूर्य में प्रचंड विस्फोट होंगे और भयानक सौर ज्वाला है उत्पन्न होंगे जिसका धरती पर भयानक असर पड़ेगा ‌ जल थल और नभ में ‌ भयानक दुर्घटनाएं होंगे और सभी धर्म के धर्म गुरु लोग और बड़े-बड़े लोगों के संबंध का पर्दाफाश होगा और पता लगेगा कि यह वास्तव में कोई महान संत नहीं है बल्कि बड़े लोगों के हाथ के खिलौने हैं। 

एक सप्ताह के अंदर ही उत्तरी अमेरिका के भयंकर बर्फीले महा चक्रवात अमेरिका में हाहाकार मचा देंगे जिससे अमेरिका बर्फ की सफेद चादर से ढक जाएगा और खेत खलिहान समुद्र नदी घर मकान सभी बर्फ से जाम जाएंगे यह एक महान बर्फीले बम के विस्फोट जैसा होगा और लगभग यही दृश्य यूरोप सोवियत रूस चीन मंगोलिया कोरिया जापान हिमालय क्षेत्र और अब के कुछ भागों में भी होगा 

एक सप्ताह के अंदर भयंकर आग लगने की ‌ बड़ी-बड़ी घटनाएं भारत सहित पूरी दुनिया में होगी लेकिन सबसे बड़ी अग्नि की दुर्घटना इंडोनेशिया ‌ में घटित होगी 

भारत को सत्ता पक्ष और विपक्षी दलों की मिली मर और नूरा कुश्ती के चलते अनेक भयानक स्थितियों से गुजरना होगा जिसमें सनातन धर्म के आपस में लड़ने और बन जाने का भयंकर खतराउत्पन्न होगा लेकिन ‌ धर्मगुरु लोगों न्यायालय के हस्तक्षेप और समझदार सनातनी लोगों के कारण जातियों के आपस में लड़ने का खतरा टल जाएगा 

फरवरी के प्रथम सप्ताह में जौनपुर सहित उत्तर भारत में भयंकर मौसम संबंधित उथल-पुथल होगी और ‌ अनेकस्थान पर झंझा झकोर घन गर्जन वज्रपात वारिदमाला बिजली की चमक और गरज ‌ और तेज हवाओं से भारत का अधिकांश भाग प्रभावित होगा हल्के मध्यम विनाशकारी भूकंप भी भारत सहित दुनिया में आएंगे 

आने वाले समय में अमेरिका का एक छत्र राज होगा और भारत को ट्रंप और अमेरिका के विरोध की बहुत बड़ी कीमत चुकानी होगी भारत में अभी आगे कई बड़े-बड़े राजनेताओं के दुर्घटनाओं में और अन्य चीजों में मारे जाने का स्पष्ट योग है शीर्ष राज नेताओं की लोकप्रियता धूल में मिल जाएगी और उनकी असलियत भी उजागर हो जाएगी ।

महंगाई बेरोजगारी भ्रष्टाचार अपराध एवं अपराध लाल फीता शाही संवेदनहीनता घूसखोरी रोकने में असफल होने पर सरकार और सरकारी तंत्र ज्ञान बांटने के लिए अनेक अनावश्यक नियम कानून और विधेयक लाएंगे और जनता का ध्यान बांटने और उन्हें आपस में लड़ने में सफल भी रहेंगे सोना 2 लाख और चांदी 4 लाख के ऊपर हो जाएगी।

खेलों के क्षेत्र में भारत क्रिकेट को छोड़कर बाकी खेलों में और भी नीचे चला जाएगा और विश्व तथा ओलंपिक स्तर की इक्का दुक्का प्रतियोगिताओं को छोड़कर सब में भारत बहुत बुरी तरह से और भी नीचे जाएगा।


भारत और यूरोपीय संघ का व्यापार समझौता सफल नहीं हो पाएगा अनेक अड़चनों के बाद भारत को इसमें भीषण नुकसान होगा और अंत में यह समझौता समाप्त हो जाएगा ‌ सरकार और न्यायपालिका अपने अधिकारियों कर्मचारियों को सोशल मीडिया से दूर रखने के लिए कठोर कदम उठाएगी।

बहुत जल्दी खाद्य पदार्थ पेय तैल और ठंडे पेयपदार्थ और दावों के जहरीले राज का पर्दाफाश होगा और तब भारत सहित पूरी दुनिया को यह जानकर गहरा धक्का लगेगा कि छोटे-मोटे तो दूर बड़े से बड़े प्रमाणित सामग्री भी जहर और मिलावट से भरी हुई है और शरीर में 90% रोग बीमारियों का कारण यही खाद्य और पेय पदार्थ तथा कोल्ड ड्रिंक और उसमें मिलाया जाने वाले जहरीले पदार्थ और नकली पदार्थ हैं 

विमान और अन्य दुर्घटनाओं में धर्मगुरु लोगों के आंदोलन में बड़े-बड़े सौदों के लेनदेन में सरकारी विभागों और संस्थानों में इतने बड़े-बड़े रहस्य खुलेंगे और लेनदेन का पर्दाफाश होगा और उसके पीछे छिपे घड़ियाल ऐसे ऐसे होंगे कि लोगों को विश्वास नहीं होगा और भी बहुत कुछ घटना वाला है बहुत जल्दी आने वाले एक महीने में बस आराम से देखते रहिए और लगातार नियंत्रण से बाहर होने वाली महंगाई बेरोजगारी भ्रष्टाचार घूसखोरी संवेदनहीनता और लाल फीता शाही का आनंद उठाते रहिए

यूपी पेरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन के जिला सचिव बने फ़रहत अली खान*

*यूपी पेरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन के जिला सचिव बने फ़रहत अली खान* 
उत्तर प्रदेश पेरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन ने खेलो को समर्पित फ़रहत अली खान को जिला सचिव नियुक्त किया है।
नियुक्ति के बाद फ़रहत अली खान ने कहा के अब दिव्यांग जन भी खेल प्रतिभाएं रामपुर के मैदानों में खेलती नज़र आएंगी।
पेरा स्पोर्ट्स प्रतियोगिताएं मार्च के अंतिम सप्ताह में आयोजित किए जाएंगे। 
यह खेल ओपन महिला एवम पुरुष और स्कूल स्तर के होंगे।
अब सामान्य ओलिंपिक में मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों की भांति नौकरियां और करोड़ों रुपए के पुरस्कार दिए जाते हैं।
रामपुर के पैरा खिलाड़ियों को अतिशीघ्र प्रशिक्षण देकर प्रदेश, देश और विश्व स्तर पर प्रदर्शन कराने योग्य बनाया जाएगा।
फ़रहत अली खान यूपी पेरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन का आभार सहित धन्यवाद किया।

Thursday, 29 January 2026

आज पूर्व सचिव अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री प्रशांत कुमार सिंह सर का उनके प्रमोशन पर विदाई समारोह आयोजित किया गया

आज पूर्व सचिव अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री प्रशांत कुमार सिंह सर का उनके प्रमोशन पर विदाई समारोह आयोजित किया गया 
और नवागत सचिव श्री सुशील कुमार सिंह के आगमन पर उनका स्वागत डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल अनिल कुमार सिंह के डिफेंस काउंसिल ‌ प्रकाशतिवारी और अनुराग चौधरी असिस्टेंट डिफेंस काउंसिल ‌ जनपद न्यायालय जौनपुर एवं देवेंद्र कुमार यादव काउंसलर परिवार न्यायालय मृदुल कुमार यादव अधिवक्ता बृजेश कुमार सुनील कुमार मौर्य सुनील कुमार शिव शंकर सिंह राकेश कुमार यादव राजेश कुमार यादव अरविंद चौबे स्टेनो रूबी सिंह ‌ एवं अन्य कर्मचारियों के द्वारा किया गया। ‌‌ प्रोन्नति प्राप्त सचिन सर प्रशांत कुमार सिंह को पुष्प गुच्छ माला और शाल देकर सम्मानित किया गयाइस अवसर पर डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह के द्वारा स्वागत भाषण और विदाई गीत प्रस्तुत किया गया।