Friday, 26 June 2026

किसी भी मंदिर और तीर्थ स्थान में घूमने अवश्य जाओ क्योंकि इससे सारे देश की जनता उनकी प्रथम परंपरा की जानकारी और मिलने जुलने तथा देश के हर भाग से जुड़ने और उसकी जानकारी मिलती है लेकिन

किसी भी मंदिर और तीर्थ स्थान में घूमने अवश्य जाओ क्योंकि इससे सारे देश की जनता उनकी प्रथम परंपरा की जानकारी और मिलने जुलने तथा देश के हर भाग से जुड़ने और उसकी जानकारी मिलती है लेकिन 
एक भी पैसा मंदिर में दान मत करो ना तो गहना आभूषण या कोई अन्य कीमती चीज चढ़ाव यदि ऐसा किया तो उसे पुजारी पांडे और वहां रहने वाले दलाल बड़े-बड़े अधिकारी और सरकारी तंत्र के राजनेता मानस मंदिर महिला मिथुन में फूंक देंगे बचा हुआ धन और पैसा विदेशी लूट ले जाएंगे जैसा की ढाई हजार  साल से हो रहा है।

इसका परिणाम होगा कि केवल असली और सच्चे भक्त जो रुखा सुखा खाकर या भूखे पेट रहकर ईश्वर की सेवा कर सकते हैं वही रहेंगे बाकी पुलिस और प्रशासन सरकार के अधिकारी और अति विशिष्ट लोग पुजारी पढ़ने और उनसे जुड़े दलाल और चमचे कुछ दिन बाद भाग खड़े होंगे क्योंकि इनका ध्यान ईश्वर सेवा में नहीं बल्कि रूपए पैसे और सोने चांदी में रहता है और यही देश के विनाश का कारण बनता है यदि देश में मंदिर और धर्म स्थान पर चढ़ने वाले पैसों का उपयोग सनातन धर्म के विकास और शिक्षा दीक्षा पर कल कारखाने पर खर्च हो तो सारी भेजो बेरोजगारी दूर हो जाएगी ।

यह हखल केवल अयोध्या का नहीं है तिरुपति बालाजी से लेकर किसी भी मंदिर का वैष्णो मां का मंदिर हो या कामाख्या मंदिर हो मैहर देवी विंध्याचल धाम या फिर द्वारिका धाम हो असली भगवान के भक्ति दर्द ठोके कहते हैं और सुबह से शाम तक कतर में खड़े रहते हैं जबकि चोर बेईमान धोखेबाज जनता का खून चूसने वाले राजनेता अधिकारी पुजारी पांडे तत्काल ही विशिष्ट कतर से निकाल कर सीधे-सीधे दर्शन करते हैं और भोग लगाकर पैसा बताकर निकल जाते हैं ।

यदि आपको दान पुण्य की इच्छा ही है तो वहां से दर्शन करके अपने गांव आओ वहां पर लोगों को भोज दो गांव में एकता बढ़ेगी और लोग आपकी प्रशंसा भी करेंगे ईश्वर की भक्ति भी बढ़ेगी और हर व्यक्ति लौट कर अपने गांव में भोज भंडारा करेगा इससे सनातन धर्म का विकास होगा। 

इसके अतिरिक्त आप गरीब कन्याओं का विवाह मेधावी छात्रों की सहायता असहाय लोगों की सेवा करो घर में अपने माता-पिता की सेवा करो बड़ों का आदर सम्मान करो यही सच्ची ईश्वर भक्ति है आपने आज से 100 वर्ष पहले किसी को कोई गहना कपड़ा आभूषण चढ़ाते देखा है। क्या भगवान श्री राम देश में मंदिरों में जाकर रूपए पैसे गहने चढ़ाते थे गोस्वामी जी ने लिखा है ।

प्रातः काल उठि के रघुनाथा
 मात पिता गुरु नावहिं माथा। 

एहि से अधिक धर्म नहीं दूजा।
 सादर सास ससुर पद पूजा ।

लेकिन एक तरफ आज की पीढ़ी रहती है हम पढ़े-लिखे बुद्धिमान है दूसरे तरफ महिलाएं अपने पति की सेवा करना पाप समझती हैं और बड़े-बड़े मगरमच्छ घड़ियाल रूपी पापी संत महंत लोगों की चरण वंदना करके उनकी हर प्रकार से सेवा करती है ऐसी महिलाओं को क्या प्राप्त होगा आप समझ सकते हैं ।

इस तरह पुरुष लोग भी इतने गिरे हो चुके हैं कि अपनी पत्नियों को छोड़कर दुनिया भर की औरतों को खोजते हुए नरक में जाते हैं जैसा कि अभी आपने देखा होगा की मां बाप को धोखा देने वाले अपने पति को किस तरह पत्नी ने खाई में धकेल कर मार दिया ।

इसके अलावा भी यदि आपको सेवा करनी है तो मंदिर बनवा दीजिए पानी का पंप लगवा दीजिए ठहरने के लिए यात्री साल बनवा दीजिए सड़क बनवाइए यह सच्ची ईश्वर भक्ति है। 

वरना आपका खून पसीने की गाड़ी कमाई यही धर्म गुरु जो पांच कुंतल से भी भारी होते हैं राजनेताओं माफिया धन कुबेर और उद्योगपति लोगों के साथ बड़े अधिकारी से सांठगांठ करके ईश्वर के नाम का भजन कीर्तन करते हुए डकार जाएंगे और आपको पता भी नहीं लगेगा। 

अयोध्या में जो कुछ हुआ वह भगवान की इच्छा से हुआ उन्होंने दिखा दिया यह धर्म गुरु पुजारी पांडे उनके चेले दलाल बड़े-बड़े अधिकारी बड़े-बड़े राजनेता धन कुबेर माफिया वास्तव में कितने गिरे हुए हैं इसलिए अब भी समझ जाओ और संभल जाओ बाकी तो कुछ कहने की आवश्यकता ही नहीं है। 

यदि दुनिया भर का टोटका ना हो तो कोई विशिष्ट कतर नहीं लगेगी हर व्यक्ति आराम से दर्शन करेगा और चला जाएगा व्यापार नहीं होगा आज भी जहां पर इस प्रकार के महंत और मठाधीश नहीं है वहां लोगों को बिना रोक-टोक दर्शन मिलता है और वही सच्ची सेवा और श्रद्धा है खुद हमारे गांव में हमारे पूर्वजों के द्वारा 500 वर्ष पहले बनाया गया बाबा गंगा दास का अद्भुत आश्रम और बावड़ी है जहां पर दान कुछ नहीं देना पड़ता है उल्टे प्रसाद भी मिलता है ।

तो मंदिर ऐसा होना चाहिए जो जिसका एक-एक पैसा देश और धर्म में अपने सनातन के विकास में लगे वहां रहने वाले साधु संत केवल अपने रहने खाने के लिए पैसे का उपयोग ले सकते हैं ना की चोरी करने के लिए दुराचार करने के लिए मोटे-मोटे सोने की सिकड़ी पहनने के लिए और भोग विलास के लिए और यही हो रहा है और भीड़ में यह पुजारी पंडित क्या-क्या करते हैं कुछ कहने सुनने और लिखने लायक भी नहीं है और विरोध करने पर यह पुजारी पांडे जो वास्तव में गुंडे और चरित्रहीन व्यक्ति हैं एक साथ होकर मारपीट करने लगते हैं जैसा की तमाम वीडियो में आया है यह सबसे अधिक चौकियां जौनपुर में होता है और हर जगह होता है।

याद रखो ईश्वर हर एक जगह है और मंदिर आश्रम धर्मस्थल सनातन धर्म के विकास आपस में मेलजोल और देश को जानने के लिए बनाया गया है आभूषण गाना पैसे चढ़ाने के लिए नहीं एक बार गहराई से सोच कर देखो आप हर जगह स्वयं देवी देवताओं से मांगने जाते हो अपनी इच्छाओं को पूरा करने जाते हो तो क्या भगवान को तुम खुद दे सकते हो जो उन्हें पैसे और गहने देते हो और अगर इतना सक्षम हो तो फिर वहां जाते क्यों हो -डॉ दिलीप कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल

Thursday, 25 June 2026

मौसम की भविष्यवाणी आज से बदल जाएगा जौनपुर और आसपास तथा पूर्वांचल का मौसम और कल तक उत्तर प्रदेश में अधिकांश जगहों का मौसम बदल जाएगा ।

मौसम की भविष्यवाणी आज से बदल जाएगा जौनपुर और आसपास तथा पूर्वांचल का मौसम और कल तक उत्तर प्रदेश में अधिकांश जगहों का मौसम बदल जाएगा ।
लगातार 25 दिनों की अग्निवर्षा और बीच में केवल तीन अच्छे वर्षा वाले दिन और दिल दहला देने वाला पसीने से नहला देने वाला मौसम अब धीरे-धीरे वर्षा वाले मौसम में बदल जाएगा 

आज जौनपुर और आसपास तथा पूर्वांचल और अनेक स्थानों पर सुबह से ही घने काले कपासी बादल छा जाएंगे और दोपहर से संध्या तक जौनपुर सहित कई स्थानों में हल्की वर्षा होने की संभावना है ।

25 जून तक महा भयंकर प्रलयंकारी गर्मी उमस और पसीना होने की और सुख मौसम रहने की हमारे केंद्र की भविष्यवाणी ईश्वर की कृपा से एक-एक अक्षर सही हुई इतना ही नहीं जापान और दक्षिणी अमेरिका में महा भयंकर भूकंप से हजारों के करने और लाखों के घायल होने और भयंकर विनाश की भविष्यवाणी भी चमत्कारिक रूप से सत्य हुई ‌ अभी भारत चीन ईरान तुर्की दक्षिण पूर्व एशिया जापान फिलीपींस अमेरिका और हवाई द्वीप को तथा यूरोप के कुछ भागों सहित अनेक स्थानों में भूकंप ज्वालामुखी विस्फोट और समुद्र में सुनामी लहरों और आंधी तूफान चक्रवात प्रबल रूप से आने की एक सप्ताह में संभावना बनी हुई है ‌

अब महा भयंकर प्रलयंकारी गर्मी का यह केंद्र भारत और दक्षिण पूर्वी एशिया से खिसक कर अब देश यूरोप और मेक्सिको की तरफ चल जाएगा जहां इंग्लैंड फ्रांस पुर्तगाल इटली सहित पूरा यूरोप भैया ने गर्मी से हाहाकार कर उठेगा महा का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस पार हो जाएगा लंदन भी जिसका तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से ऊपर नहीं जाता वहां 35 डिग्री सेल्सियस के साथ लोग त्राहि-त्राहि कर उठेंगे

आज का अधिकतम तापमान भी कल के 43 डिग्री सेल्सियस की जगह 39 डिग्री सेल्सियस और 35 डिग्री न्यूनतम की जगह 32 डिग्री सेल्सियस अधिकतम रहेगा‌ वायु गुणवत्ता सूचकांक 5080 हवा की दिशा पहले उत्तरी पूर्वी फिर पूर्वी और गति 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी जबकि आज दोपहर से शाम के बीच हल्की वर्षा होने की प्रबल संभावना है सापेक्षिक आद्रता न्यूनतम 25 अधिकतम 90% रहेगी जबकि दिन की अवधि 13 घंटे 50 मिनट और रात की और ही 10 घंटे 10 मिनट रहेगी धीरे-धीरे रात बड़ी होने लगेगी और दिन छोटा हो जाएगा 

कल भी हल्की वर्षा होने की पूरी संभावना बनी हुई है अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 29 डिग्री सेल्सियस होने की आशा है मां की स्थितियां आज की तरह रहेंगे 30 जून तक तीन बार वर्षा होगी जिसमें एक बार भारी से बहुत भारी वर्षा होना संभव है और यह चमक गरज वज्रपात के बीच होगी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक

: 25 जून तक भयंकर और प्रचंड गर्मी उमस पसीना ने सबका जीना बेहाल कर दिया जैसा कि हमारे केंद्र ने कहा था

: 25 जून तक भयंकर और प्रचंड गर्मी उमस पसीना ने सबका जीना बेहाल कर दिया जैसा कि हमारे केंद्र ने कहा था 15 जून से प्रारंभ हुई गर्मी ने है हैक कर मचा दिया और हल्की बूंदा वाली के अलावा मानसून का नामोनिशान नहीं है यह बार-बार चेतावनी दी गई थी कि इस बार का मानसून केवल जौनपुर और जौनपुर के आसपास ही नहीं संपूर्ण भारत में अनिश्चित अनियमित विलंबित और पिछले साल से बहुत कम होगा 

बाकी सरकारी और गैर सरकारी मौसम विज्ञानी तो कुछ और ही हवा हवाई बातें और सामान्य मानसून आने की समय घोषणा कर रहे थे अब आगे क्या होने वाला है लिए इसके बारे में प्रामाणिक रूप से बताते हैं 

25 जून के बाद हमारी अत्यंत ही सूक्ष्म और गहन गणना के अनुसार 26 से लेकर 30 जून के बीच दो हल्की और एक भारी वर्षा जौनपुर और आसपास के जनपदों और दूर-दूर तक होने की पूरी संभावना बन चुकी है बाकी मौसम विज्ञानी क्या कहते हैं उसको मैं नहीं जानता लेकिन ईश्वर की कृपा रही तो 26 जून से 30 जून 2026 तक खेती किसानी बागवानी के लिए काम भर की वर्षा और बहुत ही प्रचंड भयानक और प्रलयंकारी गर्मी उमस पसीना में निश्चित रूप से राहत प्राप्त होगी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक ‌ दिनांक 24 जून 2026 समय रात 10:18 मोबाइल नंबर 70 177 13978
[6/25, 8:12 AM] Dileep Singh Rajput Jounpur: मौसम की भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह 

आज का अधिकतम तापमान 40 डिग्री और न्यूनतम 31 डिग्री सेल्सियस होगा लेकिन उसके अनुभूति 43 डिग्री सेल्सियस और 35 डिग्री सेल्सियस के बराबर होने से बहुत ही भयानक उमस और पसीने वाला दिन सिद्ध होगा 

वायु गुणवत्ता सूचकांक 100 के आसपास पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 9 के कारण बहुत ही खतरनाक और हवा की दिशा पश्चिम और गति 10 से 20 किलोमीटर प्रति घंटा होगी 

कल अधिकतम तापमान 41 और न्यूनतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस होगा लेकिन इसकी अनुभूति 44 और 35 डिग्री सेल्सियस के बराबर होगी जो और भी खतरनाक होगा तेज हवाएं आंधी तूफान आने की संभावना बन रही है।


26 से 30 के बीच कभी भी आंधी तूफान तेज हवाओं के बीच वर्षा होने की प्रबल संभावना बन गई है और ऐसी संभावना है कि 27 से मौसम परिवर्तन हो जाएगा

जौनपुर उत्तर प्रदेश भारत और विश्व का 25 जून से 5 जुलाई तक मौसम की भविष्यवाणी डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष

जौनपुर उत्तर प्रदेश भारत और विश्व का 25 जून से 5 जुलाई तक मौसम की भविष्यवाणी डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष 
जौनपुर और जौनपुर के आसपास के जनपदों में 25 जून से 27 जून तक भयंकर गर्मी उमस और पसीने के बीच 26 जून की रात और 27 जून के दिन से मौसम बदल जाने और बादलों के गिरने बूंदाबांदी सहित हल्की वर्षा के योग हैं जबकि इसके पहले 15 जून से 25 जून तक घनघोर गर्मी वर्षा और उमश की भविष्यवाणी पूरी तरह से सिद्ध हो चुकी है ‌ 28 जून से 5 जुलाई के बीच तीन बार हल्के और चार बार सामान्य से मध्यम और तेज वर्षा होने की प्रबल संभावना है 28 जून से तापमान में सुधार होना शुरू हो जाएगा।

जहां तक उत्तर प्रदेश की बात है तो यहां 25 से 27 तक वाराणसी के दक्षिण से गाजीपुर आजमगढ़ बलिया गोरखपुर देवरिया और आसपास हल्की सामान्य वर्षा कहीं-कहीं तेज वर्षा तेज हवाओं के साथ होगी 28 जून से 5 जुलाई तक भारी वर्षा होने की प्रबल संभावना है इस कालखंड में जौनपुर और उत्तर प्रदेश में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 से 100 के बीच हवाओं की दिशा पश्चिम उत्तर पूर्वी कहीं-कहीं दक्षिणी और एक बार बहुत तेज आंधी तूफान वज्रपात वर्ष की संभावना है पहले अधिकतम तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस और बाद में 35 से 40 डिग्री सेल्सियस रहेगा न्यूनतम तापमान भी पहले 30 से 35 और फिर ‌ घटकर 25 से 30 डिग्री सेल्सियस रह जाएगा 

जहां तक देश के मौसम की बात है तो उत्तर प्रदेश जौनपुर की तरह यहां भी मानसून और मानसून की वर्षा 10 दिन विलंबित कमजोर अनिश्चित और अनियमित चल रहा है केरल कर्नाटक तमिलनाडु महाराष्ट्र गोवा पांडिचेरी अंडमान निकोबार गोवा दमन दीव आंध्र प्रदेश उड़ीसा झारखंड बंगाल बिहार नेपाल भूटान बांग्लादेश सिक्किम अरुणाचल प्रदेश असम मेघालय मणिपुर त्रिपुरा मिजोरम में 25 जून से 5 जुलाई तक अधिकांश भारी से बहुत भारी और कहीं-कहीं मूसलाधार वर्षा विद्युत की गलत चमक और तेज हवा आंधी तूफान के साथ होगी यहां पर मौसम भी ठंडा और सुहावना हो जाएगा 

बचे हुए मध्य उत्तर और पश्चिम उत्तर भारत में गुजरात मध्य प्रदेश दक्षिण पूर्वी राजस्थान में मानसून 25 से 30 जून के बीच प्रवेश करेगा और हल्की सामान्य वर्ष बाद में कुछ अच्छी तेज वर्षा होगी जबकि दिल्ली पंजाब हरियाणा राजस्थान के उत्तर पश्चिमी भागों जम्मू कश्मीर लेह लद्दाख में मानसून 5 जुलाई के बाद प्रवेश करेगा इसलिए इस कालखंड में आंधी तूफान और तेज हवाओं के साथ होने वाली वर्षा के अतिरिक्त मौसम सूखा रहेगा 

अब विश्व के मौसम पर आते हैं यूरोप में उत्तरी अफ्रीका में अरब देशों में विश्वत रेखा प्रदेशों में मेक्सिको और दक्षिण पूर्व एशिया में इस कालखंड में घनघोर गर्मी पड़ेगी सबसे अधिक भयानक गर्मी यूरोप में पड़ेगी जहां इटली फ्रांस स्पेन सहित कुछ देशों में तापमान 100 वर्ष का कीर्तिमान तोड़ते हुए 45 डिग्री सेल्सियस को पार करने का और अनेक लोग गर्मी से मर जाएंगे 

अफ्रीका के दक्षिण भाग दक्षिण अमेरिका ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड और अंटार्कटिका में भयंकर ठंडी का मौसम रहेगा और यहां अधिकतर सूखा मौसम रहेगा लेकिन कुछ स्थानों पर वर्षा आंधी तूफान और भयानक भूकंप आ सकते हैं ‌ 25 जून से 27 जून के बीच ज्योतिष और पंचांग के अनुसार दक्षिण अमेरिका के उत्तरी भागों में महा भयंकर भूकंप आने से हजारों लोग मारे जाएंगे और लाखों लोग घायल हो जाएंगे ऐसा अभूतपूर्व दृश्य बड़ा ही दुखद होगा 

बाकी बचे हुए सोवियत संघ चीन जापान कोरिया और उत्तरी अमेरिका में मौसम अधिक गर्म रहेगा ना अधिक ठंडा रहेगा लेकिन यह भूभाग भी ज्वालामुखी भूकंप और आंधी तूफान चक्रवात टॉरनेडो हरि केन की चपेट में रहेगा और यहां भी बड़े पैमाने पर धन-जन की हानि होगी 

ऐसा प्रतीत होता है कि 25 से 27 जून पूरी दुनिया के लिए अभूतपूर्व संकट वाला रहेगा भारत चीन मैक्सिको ईरान अलास्का दक्षिण पूर्वी एशिया में भी दक्षिणी अमेरिका की तरफ भूकंप आएंगे लेकिन जहां दक्षिण अमेरिका में रिएक्टर पर 7 से 8 का भूकंप आएगा वहीं पर भारत और अन्य देशों में इसकी तीव्रता 5 से 7 के बीच रहेगी दक्षिण अमेरिका के किनारे के भागों में सुनामी लहरें भी उठ सकती हैं कुल मिलाकर 25 जून से 5 जुलाई का कालखंड पूरी दुनिया के लिए अत्यंत ही भयानक गरम और हाहाकार मचाने वाला होगा

Wednesday, 24 June 2026

एक शांतिपूर्ण और मज़बूत समाज बनाना: एक्सट्रीमिज़्म की चुनौतियों से निपटना:*

*एक शांतिपूर्ण और मज़बूत समाज बनाना: एक्सट्रीमिज़्म की चुनौतियों से निपटना:*

तेज़ी से हो रहे सामाजिक बदलाव, टेक्नोलॉजी में तरक्की और दुनिया भर में बढ़ते आपसी जुड़ाव के दौर में, एक्सट्रीमिज़्म की चुनौती शांति, सुरक्षा और सामाजिक मेलजोल के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक बनकर उभरी है। भारत, अपने धर्मों, भाषाओं, संस्कृतियों और जातीय समुदायों की बहुत ज़्यादा विविधता के साथ, लंबे समय से यह मानता रहा है कि एक्सट्रीमिज़्म का मुकाबला सिर्फ़ कानून लागू करने और सुरक्षा उपायों से नहीं किया जा सकता। लगातार सफलता उन अंदरूनी वजहों को दूर करने में है जो एक्सट्रीमिस्ट विचारधाराओं को असर और पकड़ बनाने देती हैं। दुनिया भर के अनुभवों ने दिखाया है कि एक्सट्रीमिज़्म को सिर्फ़ रिएक्टिव उपायों से खत्म नहीं किया जा सकता। जबकि सिक्योरिटी ऑपरेशन एक्सट्रीमिस्ट नेटवर्क को रोक सकते हैं और तुरंत खतरों को रोक सकते हैं, एक पूरी तरह से रिएक्शनरी तरीका कभी-कभी अकेलेपन और अविश्वास की भावनाओं को गहरा कर सकता है, जिससे शायद और ज़्यादा रेडिकलाइज़ेशन हो सकता है। इसके उलट, रोकने की स्ट्रेटेजी ऐसी सामाजिक स्थितियाँ बनाने पर फोकस करती हैं जिनमें एक्सट्रीमिस्ट विचारधाराएँ जड़ें जमाने के लिए संघर्ष करती हैं। शिक्षा, जागरूकता, आर्थिक मौके, सबको शामिल करना और कम्युनिटी से जुड़ना एक ऐसा माहौल बनाने में मदद करता है जो रेडिकल बातों का विरोध करता है। जब युवाओं को अच्छी शिक्षा, अच्छा रोज़गार और अपनेपन की गहरी भावना मिलती है, तो उनके ऐसे ग्रुप्स की तरफ़ आकर्षित होने की संभावना कम होती है जो नफ़रत, हिंसा या बंटवारे को बढ़ावा देते हैं। हमेशा रहने वाली शांति सिर्फ़ ताकत से नहीं मिल सकती; इसे सोशल इन्वेस्टमेंट, सबको साथ लेकर चलने वाले शासन और नागरिकों को मज़बूत बनाकर ही पाया जा सकता है। रोकथाम न सिर्फ़ ज़्यादा असरदार है, बल्कि लंबे समय में ज़्यादा किफ़ायती और टिकाऊ भी है।
एक्सट्रीमिज़्म के ख़िलाफ़ ढाल के तौर पर सबको साथ लेकर चलने वाला विकास: एक्सट्रीमिस्ट सोच अक्सर सामाजिक शिकायतों, आर्थिक असमानताओं और अलग-थलग किए जाने और अलग-थलग किए जाने की सोच का फ़ायदा उठाती है। जो समुदाय खुद को नज़रअंदाज़ या नुकसान में महसूस करते हैं, वे उन बातों के शिकार हो सकते हैं जो टकराव या हिंसा के ज़रिए मज़बूती का वादा करती हैं। इसलिए, सबको साथ लेकर चलने वाला विकास एक्सट्रीमिज़्म का मुकाबला करने की कोशिशों का एक ज़रूरी हिस्सा है। हर नागरिक को, चाहे उसका सामाजिक, धार्मिक, भाषाई या क्षेत्रीय बैकग्राउंड कुछ भी हो, तरक्की और तरक्की के मौके मिलने चाहिए। आर्थिक रूप से शामिल करना, पढ़ाई-लिखाई में आसानी, हेल्थकेयर सर्विस और सोशल वेलफ़ेयर प्रोग्राम उन हालात को कम करने में मदद करते हैं जिनका एक्सट्रीमिस्ट ग्रुप फ़ायदा उठाना चाहते हैं। सामाजिक एकता को बढ़ावा देना भी उतना ही ज़रूरी है। डायवर्सिटी हमेशा से भारत की सबसे बड़ी ताकतों में से एक रही है। अलग-अलग संस्कृतियों के बीच बातचीत, आपसी सम्मान और साझा नागरिक मूल्यों को बढ़ावा देने से समुदायों के बीच रिश्ते मज़बूत होते हैं और बांटने वाली विचारधाराओं का आकर्षण कम होता है। जब नागरिक एक-दूसरे को एक आम राष्ट्रीय प्रोजेक्ट में पार्टनर के तौर पर देखते हैं, तो नफ़रत फैलाने और ध्रुवीकरण की कोशिशें बहुत कम असरदार हो जाती हैं।
नेशनल सिक्योरिटी के एक पिलर के तौर पर कम्युनिटी की भागीदारी: नेशनल सिक्योरिटी अब सिर्फ़ सरकार और सिक्योरिटी एजेंसियों की ज़िम्मेदारी नहीं है। आज की सिक्योरिटी चुनौतियों के लिए समुदायों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी की ज़रूरत है। स्थानीय समुदाय अक्सर कट्टरता, सामाजिक तनाव या कमज़ोर लोगों को प्रभावित करने के लिए चरमपंथी ग्रुप्स की कोशिशों के संकेतों को सबसे पहले पहचानते हैं। कम्युनिटी लीडर, शिक्षक, धार्मिक विद्वान, सिविल सोसाइटी संगठन, युवा ग्रुप और परिवार सभी शांति को बढ़ावा देने और चरमपंथी विचारों को फैलने से रोकने में अहम भूमिका निभाते हैं। उनका ज़मीनी ज्ञान और भरोसा उन्हें शुरुआती स्टेज में चिंताओं को पहचानने और अच्छे विकल्प देने में असरदार पार्टनर बनाता है।
भारत का डेमोक्रेटिक ढांचा नागरिकों को शासन और सामाजिक विकास में भाग लेने के मौके देता है। इन भागीदारी वाले तरीकों को मज़बूत करने से नागरिकों में मालिकाना हक और ज़िम्मेदारी की भावना को बढ़ावा मिलता है। जब लोगों को लगता है कि उन्हें सुना जा रहा है, उनका सम्मान किया जा रहा है और फ़ैसले लेने की प्रक्रिया में उन्हें शामिल किया जा रहा है, तो उनके सामाजिक स्थिरता और राष्ट्रीय एकता में अच्छा योगदान देने की संभावना ज़्यादा होती है। समुदाय-आधारित तरीके गलत जानकारी और कट्टरपंथी प्रोपेगैंडा का मुकाबला करने में भी मदद करते हैं। भरोसेमंद स्थानीय आवाज़ें झूठी बातों को चुनौती दे सकती हैं, आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा दे सकती हैं और सहनशीलता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के मूल्यों को मज़बूत कर सकती हैं।
नागरिकों और संस्थाओं के बीच भरोसा: कट्टरपंथ के ख़िलाफ़ सबसे असरदार सुरक्षा उपायों में से एक नागरिकों और सार्वजनिक संस्थाओं के बीच मज़बूत रिश्ता है। भरोसा सहयोग को बढ़ावा देता है और सहयोग सुरक्षा को बढ़ाता है। जब नागरिकों को सार्वजनिक संस्थाओं पर भरोसा होता है, तो उनके सरकारी पहलों में अच्छे से शामिल होने, संभावित खतरों की रिपोर्ट करने और शांति और व्यवस्था बनाए रखने की कोशिशों का समर्थन करने की संभावना ज़्यादा होती है। इस भरोसे को बनाने के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता की ज़रूरत होती है। सार्वजनिक संस्थाओं को नागरिकों की ज़रूरतों के प्रति जवाबदेह रहना चाहिए और न्याय और समान व्यवहार के प्रति प्रतिबद्धता दिखानी चाहिए। अधिकारियों और समुदायों के बीच खुली बातचीत ग़लतफ़हमियों को कम करने में मदद करती है और अलग-थलग किए जाने या अलग-थलग किए जाने की भावनाओं को रोकती है। नाराज़गी या असंतोष को जड़ जमाने से रोकना ज़रूरी है। सकारात्मक जुड़ाव कई तरह से हो सकता है, जैसे कम्युनिटी आउटरीच प्रोग्राम, लोगों से बातचीत, युवाओं को शामिल करने की पहल और मिलकर समस्याओं को सुलझाने की कोशिशें। इस तरह के मेल-जोल से संस्थाओं का मानवीय चेहरा सामने आता है और आपसी सम्मान बढ़ता है। इनसे ऐसे रास्ते भी बनते हैं जिनसे शिकायतों को शांति से सुलझाया जा सके, ताकि वे बड़े झगड़ों या टकराव का रूप न ले लें।
चरमपंथ का मुकाबला करना सिर्फ़ सुरक्षा की चुनौती नहीं है; यह असल में एक सामाजिक चुनौती है। सबसे टिकाऊ समाधान तब निकलते हैं जब सरकारें, समुदाय, शिक्षण संस्थान, सिविल सोसाइटी संगठन और नागरिक शांति, न्याय और विकास के साझा लक्ष्य के लिए मिलकर काम करते हैं। भारत की ताकत उसकी विविधतापूर्ण परंपराओं, लोकतांत्रिक संस्थाओं और समावेशी विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता में है। प्रतिक्रिया देने के बजाय रोकथाम को प्राथमिकता देकर, समान अवसर को बढ़ावा देकर, सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करके और नागरिकों व संस्थाओं के बीच भरोसा मजबूत करके, भारत एक ऐसा समाज बना सकता है जो चरमपंथ का मजबूती से सामना करे और आपसी सद्भाव के लिए प्रतिबद्ध हो।
एक मजबूत और टिकाऊ समाज वह है जिसमें हर नागरिक को अहमियत महसूस हो, हर समुदाय को देश की तरक्की में अपनी भागीदारी दिखे और हर व्यक्ति की देश के भविष्य में हिस्सेदारी हो। ऐसा समाज न सिर्फ़ चरमपंथ का विरोध करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी शांति, सुरक्षा और समृद्धि की नींव भी रखता है।
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फ़रहत अली खान 
एम ए गोल्ड मेडलिस्ट

Sunday, 21 June 2026

मंदिर में दान की चोरी की खबर आई तो कुछ लोग हैरान हो गए। मानो चोर ने सीधे भगवान के घर में हाथ डाल दिया हो। लेकिन सच पूछिए तो हैरानी चोरी पर नहीं, हैरानी इस बात पर होनी चाहिए कि अब भी लोग हैरान हो रहे हैं।

मंदिर में दान की चोरी की खबर आई तो कुछ लोग हैरान हो गए। मानो चोर ने सीधे भगवान के घर में हाथ डाल दिया हो। लेकिन सच पूछिए तो हैरानी चोरी पर नहीं, हैरानी इस बात पर होनी चाहिए कि अब भी लोग हैरान हो रहे हैं।
हम बड़ा दिलचस्प समाज हैं। भगवान को सर्वशक्तिमान भी मानते हैं और उनके घर पर सीसीटीवी, ताले, गार्ड और ऑडिट भी लगाते हैं। यानी श्रद्धा भी पूरी और अविश्वास भी पूरा।
कहते हैं लोग भगवान से डरते हैं। अगर ऐसा होता तो दानपात्र पर ताला नहीं, फूल-माला लगी होती। सच तो यह है कि इंसान भगवान से कम, थाना-पुलिस और कोर्ट-कचहरी से ज्यादा डरता है। जहां एफआईआर का खतरा हो, वहां चरित्र जाग जाता है। जहां सिर्फ भगवान देख रहे हों, वहां आदमी अपने असली रूप में आ जाता है।
मजेदार बात यह है कि चोरी करने वाला भी शायद पूजा-पाठ करता होगा। सुबह आरती, शाम भजन, और बीच में अवसर मिले तो भगवान की गुल्लक पर भी हाथ साफ। हमारे यहां पाप करने और क्षमा मांगने के बीच का अंतराल कई बार चाय के एक कप से भी कम होता है।
धर्म के बाजार में सबसे ज्यादा बिकने वाली चीज़ "भय" है। बचपन से बताया जाता है कि भगवान सब देख रहा है। लेकिन जैसे ही नोटों से भरा दानपात्र सामने आता है, आदमी को भरोसा हो जाता है कि आज शायद भगवान कहीं और देखने में व्यस्त हैं।
असल में भगवान से लोग डरते नहीं, भगवान का नाम लेकर दूसरों को डराते हैं। खुद पर बात आए तो पूरा दर्शन बदल जाता है। यही कारण है कि मंदिरों में दान बढ़ता जाता है और ताले भी मोटे होते जाते हैं। श्रद्धा और सुरक्षा, दोनों साथ-साथ बढ़ रही हैं और शायद यही इस घटनाओं का सबसे बड़ा व्यंग्य है। जिस भगवान के भरोसे लोग अपनी जिंदगी छोड़ देते हैं, उसी भगवान के पैसे की सुरक्षा के लिए उन्हें इंसानों पर भरोसा नहीं होता।

Saturday, 20 June 2026

अंत में वही हुआ जो पिछले 49 साल से होता चला आ रहा है मानसून वर्षा और मौसम की हमारे केंद्र की भविष्यवाणी पूरी तरह सही हुई

अंत में वही हुआ जो पिछले 49 साल से होता चला आ रहा है मानसून वर्षा और मौसम की हमारे केंद्र की भविष्यवाणी पूरी तरह सही हुई 

जनवरी से अब तक 17 बार लिखकर पोस्ट किया जा चुका है और सैकड़ो समाचार पत्र पत्रिकाओं और चैनलों में भी छप चुका है कि इस वर्ष मानसून विलंबित अनियंत्रित और बहुत कमजोर होगा इस वर्ष वर्ष भी बहुत कम होगी और अकाल और सुख या अकाल सूखा जैसी स्थितियां पड़ने से कोई रोक नहीं सकता।

जबकि आज के 15 दिन पहले तक अप्रैल और मैं के सारे मौसम विभाग और प्राइवेट मौसम विभाग जैसे स्काई में स्काई भेजें और समाचार पत्र और विश्वविद्यालय ओके तथा कथित विद्वानों को देख लीजिए सभी ने समय पर मानसून आने और सामान्य से अधिक वर्षा होने की कई कई बार भविष्यवाणी किया है 

इस समय संपूर्ण देश से मानसून और मानसूनी बादल गायब हो जब केरल में मानसून 15 म ई को आया तो उसे किसी ने नहीं माना और 25 म ई तक बरस कर चला गया। अब सभी हमारे हमारी भविष्यवाणी मान लिया है कि मानसून अनियमित है विलंबित है और कम वर्षा करेगा और 25 जून तक इसके कहीं से आने की आशा नहीं है इसी तरह 15 से 25 जून तक महा भयंकर प्रलयंकारी गर्मी उमस पड़ने की हमारे केंद्र की भविष्यवाणी भी सही हुई।

यह सब लिखने और कहने का अर्थ केवल इतना ही है कि सही जानकारी सबको मिले तब सावधान रहें खेती किसानी बागवानी जिस हद तक संभव हो बचा सके और कोई अर्थ नहीं है अभी तीन-चार दिन तक शरीर जलाने वाली गर्मी उमस और पसीना झेलने को तैयार रहे जल्दी ही एक चेक करवाती वर्षा आंधी तूफान के साथ और उसके बाद वर्ष कुछ दिन तो राहत और ठंड प्रदान कर ही देगी 


लेकिन फिर से यही कहना चाहूंगा कि वर्षा के बीच-बीच में कुछ अच्छे सुहावना दिन छोड़कर 25 अक्टूबर तक भीषण गर्मी उमस और पसीना चलने के लिए अपने को तैयार कर लीजिए साथ ही साथ कमजोर मानसून और अकाल तथा सूखा ‌ जैसी स्थितियां के लिए भी तैयार रहें -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक