: भगवान श्रीराम एवं श्री रामनवमी का महापर्व -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि
भगवान श्री राम का जन्म त्रेता युग में पुनर्वसु नक्षत्र चतुर्थ चरण और कर्क लग्न में हुआ था चैत्र का महीना था और मंगलवार का दिन बसंत की ऋतु थी ऐसे ही समय में भगवान श्री राम ने धरती पर श्री हरि विष्णु के अंश रूप में अवतार लिया और माता कौशल्या को चकित और थकित देखकर उन्होंने बाल रूप में आकर रोना शुरू कर दिया। उनके जन्म के समय लग्न भाव में चंद्रमा और बृहस्पति जबकि तृतीय पराक्रम के भाव में राहु चतुर्थ सुख और माता के भाव में शनि सातवें पत्नी के भाव में मंगल नवम भाग्य के भाव में शुक्र और केतु कर्म के भाव दशम में सूर्य और एकादश लाभ के स्थान पर बुध विराजमान थे उसे समय सारी प्रकृति वातावरण और तीनों लोक प्रफुल्लित थे इसलिए कहा गया है -
**भगवान राम के जन्मदिवस के पावनतम शुभ अवसर
शीतल मंद सुगंध पवन लेकर बसंत ऋतु आई है**
भगवान श्री राम के धरती पर जन्म लेने के कारण -
भगवान श्री राम साक्षात श्री हरि विष्णु के अवतार थे उनका धरती पर अवतरण "बहुत कारणों से हुआ जिसमें विश्व मोहिनी को लेकर नारद जी का श्राप विश्व विख्यात है !इसके अलावा मनु और शतरूपा की महा प्रचंड तपस्या राजा प्रताप भानु को ब्राह्मणों के द्वारा श्राप और जय विजय उनके सर्वप्रिय द्वारपाल को सनकादि ऋषियों द्वारा दिया गया श्राप और धरती की आर्त पीड़ा आततायी दुराचारी रावण का अत्याचार इसके और कछुए की कथा प्रमुख कारण है श्री लक्ष्मण आदि शेषनाग के और भगवती सीता स्वयं साक्षात श्री लक्ष्मी जी का अवतार थीं। भरत और शत्रुघ्न उनके आयुध और शंख और चक्र।थे तथा बंदर भालू के रूप में उत्पन्न हुए हनुमान सुग्रीव नल नील जांबवान इत्यादि देवताओं के अंश थे इन सभी का उद्देश्य धरती पर राक्षसों के विनाश और रावण वध के साथ पूरा हो गया था।
श्री राम का व्यक्तित्व और उनकी संक्षिप्त कथा -
भगवान श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम समस्त लोकों में परम पूज्य *न भूतो ना भविष्यति *की कल्पना को साकार करते हैं उनका राम राज्य आज भी संपूर्ण सृष्टि का शासन का सबसे बड़ा मानदंड माना जाता है मांगे बारिधि देहिं जल रामचंद्र के राज ।अपने परिवार सभी भाइयों प्रजा और मित्रों तथा भगवती सीता को वह अपने प्राण से भी अधिक प्रिय मानते थे लेकिन धर्म सत्य के लिए किसी को छोड़ने में एक पल भी नहीं लगाया और राक्षसों के द्वारा पीड़ित और प्रताड़ित दंडकारण्य के ऋषि मुनियों की पीड़ा देखकर उन्होंने धरती को निश्चित करने का प्रण ले लिया-
निशिचर हीन करहुं मही भुज उठाइ प्रण कीन्ह
सकल मुनिन के आश्रमन
जाइ जाइ सुख दीन्ह!
उनका हर रूप दिव्य कल्पना के परे और अद्भुत अनुपम असाधारण वर्णन से परे हैं बाल्यकाल से ही परम बुद्धिमान होना किशोरावस्था में भाई लक्ष्मण के साथ ताड़का सुबाहु मारीच जैसे महामायावी राक्षसों का संघार और समुद्र के किनारे फेंक देना तीनों लोकों से त्यागी गई अहिल्या को जीवन दान देना शिव जी के महा प्रलयंकारी पिनाक धनुष को तोड़ देना परशुराम को पराजित करना निषाद राज केवट के साथ आत्मीय प्रेम शबरी के झूठे बेर खाना परम सती अनसूया और अत्री के आश्रम में जाना भारद्वाज से भेंट करना चित्रकूट और पंचवटी में निवास कर वहां को स्वर्ग बना देना पशु पक्षियों और जटायु तक को अपना बना लेना सीता हरण के बाद मनुष्य की तरह करुण विलाप करना गिद्धराज जटायु को परम गति देना माता सती को उनके कर्तव्य का बोध कराना परम तेजस्वी अगस्त्य ऋषि और ब्रह्म ऋषि विश्वामित्र से ब्रह्मांड को विनाश करने वाले दिव्यास्त्र का प्राप्त करना वैष्णो माता को कलयुग में मिलने का वरदान देना फिर बंदर भालू की सेना एकत्र करके परम तेजस्वी ब्रह्म ऋषि अगस्त्य की सहायता से तीनों लोकों के विजेता रावण को समुद्र पर पुल बांधकर मारना और लंका का राज्य बिना किसी संकोच के विभीषण को सौंप देना वापस आते समय परम सखा केवट राज से मिलना और हनुमान जी को अयोध्या भेज कर भरत को जीवित रखना अश्वमेध यज्ञ करना सीता जी के वनवास के बाद परम उदासीन होकर भी सारे काम को पूरी तन्मयता से करना और अंत में सीता जी के पृथ्वी में समाहित हो जाने के बाद सभी भाइयों और प्रजा के साथ परम पवित्र सरयू नदी में स्नान के साथ अपने विष्णु लोक में प्रवेश करना या उनकी संक्षेप में महा गाथा है
जो लंका शिव रावणहिं हर्ष सहित अति दीन्ह ।
सो लंका विभीषणहिं सकुच सहित प्रभु दीन्ह।
जे न मित्र दुख होहिं दुखारी ;
तिनहीं विलोकित पातक भारी।
श्री रामनवमी और श्री राम की कथा
श्री राम तीनों लोकों में परम पूज्य हैं और उनकी यश गाथा दुनिया की सभी भाषाओं में है भारत की हर भाषाओं में तो राम कथा है ही जिसमें वाल्मीकि माघ और भाष कंबन कृतवास गोस्वामी तुलसीदास केशव जैसे अनगिनत महाकवि विश्व कवि हैं वही इंडोनेशिया थाईलैंड अंग्रेजी फ्रांसीसी रूसी जर्मन अरबी और उर्दू सहित दुनिया की हर भाषाओं में भगवान श्री राम की कथा थोड़े से अंतर के साथ विद्यमान है जिसमें देशकाल परिस्थितियों का भी योग है लेकिन सबका आधार विश्व कवि ब्रह्म ऋषि वाल्मीकि की सात कांड वाली रामायण है जिसमें उन्होंने भगवान श्री राम के बारे में एक ही श्लोक में सब कुछ कह दिया है
** समुद्रे इव गांभीर्ये स्थर्ये
च हिमवान इव।
कालाग्नि समं क्रोधं क्षमया पृथ्वी सम।
इसके अलावा ब्रह्म ऋषि आदि कवि फिर से लिखते हैं-
** इक्ष्वाकु वंश प्रभवो
रामै नाम जनै श्रुत:
नियतात्मा महावीर्यो द्युतिमान धृतिमान वशी।
वाल्मीकि ने अपने रामायण में श्री राम के चरित्र को गहराई से वर्णित किया है जिसमें हर जगह उनके ईश्वरत्व की स्पष्ट झलक मिलती हैं जबकि गोस्वामी जी के श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम के चरम उत्कर्ष हैं।
अन्य प्रमुख बिंदु
महापर्व रामनवमी विश्व भर में मनाई जाती है लेकिन फिर भी रामेश्वरम अयोध्या भद्राचलम सीतामढ़ी जनकपुरी वाराणसी में विशेष रूप से मनाई जाती है उसमें बहुत से लोग संपूर्ण दिन का उपवास करते हैं इसके लिए नियम है या तो आधी रात से लेकर आधी रात तक या फिर आधी रात से दोपहर तक उनका व्रत करना चाहिए। श्री रामनवमी को जगह-जगह अनेक बड़े-बड़े कार्यक्रम होते हैं लेकिन सबसे प्रमुख होता है श्री राम की भव्य शोभायात्रा जिसे झांकी भी कहते हैं जिसमें संपूर्ण रामायण के चरित्र और भगवान श्री राम को साकार किया जाता है यह शोभा यात्रा बहुत ही अद्भुत और अनुपम होती है ।
पूजा पाठ का विधान
पूजा करने के लिए अधिकतर लोग श्री राम लक्ष्मण सीता जी और हनुमान की मूर्तियां चित्र के साथ पूजा पाठ करते हैं लेकिन बहुत से लोग उसमें भगवान श्री राम के संपूर्ण परिवार को सम्मिलित करते हैं दोनों विधान अपने जगह उत्तम है भगवान श्री राम की पूजा श्री राम नवमी के दिन चंदन अक्षत धूप दीप कुमकुम पुष्प और मिष्ठान तथा फल और अन्य सामग्री के साथ किया जाता है इस दिन सुंदर कांड राम रक्षा स्त्रोत या हनुमान चालीसा का पाठ समय और सामर्थ्य के अनुसार किया जाता है और पूजा के पश्चात आरती के बाद प्रसाद वितरण होता है बहुत से लोग भोजन कराते हैं उसके पश्चात दान भी देते हैं ।
रोग और बीमारियों में रामनवमी के दिन किए जाने वाले अचूक उपाय
श्री राम नवमी के दिन कुछ विशेष चौपाई और मंत्र लक्ष्य प्राप्ति और रोग बीमारियों के लिए अचूक होते हैं असाध्य रोग बीमारियों को ठीक करने के लिए श्री हनुमान जी के मंदिर में पूर्ण श्रद्धा विश्वास के साथ भगवान श्री राम भगवती सीता मां का ध्यान करते हुए हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। इसी तरह जिसके संतान न हो उसे नारियल लाल कपड़े में लपेटकर ओम नमः शिवाय महामंत्र 108 बार श्रद्धा विश्वास के साथ पढ़ना चाहिए। इसी प्रकार धन-धन ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए मुख्य द्वार पर गाय के घी या तिल के तेल के 11 दीपक जलाना चाहिए निश्चित रूप से मनोकामना पूरी होती है ।
वर्ष 2026 की रामनवमी
इस वर्ष 2026 ई या विक्रम संवत 2083 में उदया तिथि के अनुसार श्री रामनवमी 27मार्घ को मनाया जाएगी श्री रामनवमी के दिन सुकर्मा योग रवि पुष्य योग सर्वार्थ सिद्धि योग शिववास योग जैसे बहुत महत्वपूर्ण महायोग मिल रहे है। इसका आरंभ कर्क लग्न में पुनर्वसु नक्षत्र चतुर्थ चरण में त्रेता युग में हुआ था जब भगवान श्री राम का बैकुंठ धाम से धरा पर अवतरण हुआ था ।श्री रामनवमी के दिन शुद्ध मन से विधि विधान से पूजा पाठ करने या केवल श्री राम नाम जपने से ही सुख शांति समृद्धि स्वास्थ्य ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है *राम से बड़ा राम का नाम* संसार में प्रसिद्ध है और रामबाण अचूक माना ही जाता है!
उपसंहार
भारत के अनेक महान पर्व और त्योहार और मांगलिक कार्य सीधे-सीधे श्री राम से जुड़े हैं चैत्र मास की बासंतिक नवरात्रि भगवान श्री राम के जन्म से जुड़ी है जबकि आश्विन में भगवान श्री राम का नाम श्रीलंका पर परम अत्याचारी दुराचारी अहंकारी रावण के वध के कारण जुड़ा हुआ है। श्री राम की शक्ति पूजा तो जगत विख्यात है ही उनकी भगवान शिव के प्रति अचल भक्ति भी एक उदाहरण है भगवान श्री राम भगवान शिव की तरह भक्तों को सहज ही प्राप्त हैं और सब का उद्धार करने वाले हैं
**निर्मल मन जो सो मोहि पावा।
मोहि कपट छलछिद्र न भावा।
एक तथ्य यह भी है कि वर्ष 2026 में श्री रामनवमी 27 मार्च को 2027 में 15 अप्रैल को और 2028 में 4 अप्रैल को क्रमशः शुक्र बृहस्पति और मंगलवार को पड़ेगी आता है इस वर्ष 2026 में श्री रामनवमी 27 मार्च को मनाई जाएगी।
उपसंहार
इस प्रकार भगवान श्री राम का चरित्र उनके जन्म के समान ही अनंत कोटी विश्व में व्याप्त है जो कालजयी है अपने मातृभूमि और मां के प्रति उनका अनन्य प्रेम सबके लिए अनुकरणीय है
अपि च स्वर्णमयी लंका लक्ष्मण मे न रोचते
जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।
जन्मभूमि मम परम सुहावन। उत्तर दिशि सरयू बह पावन। यद्यपि सब बैकुंठ बखाना
वेद पुराण विदित जग जाना ।अवधपुरी सम प्रिय नहीं सोऊ। यह प्रसंग जानत कोउ कोऊ।
शिवद्रोही मम दास कहावा सो नर सपनेहु मोहिं न भावा।
भगवान श्री राम समस्त विश्व में रमते हैं और सब का कल्याण करते हैं जो उनके नाम में ही छिपा है जग में सुंदर हैं दो नाम चाहे कृष्ण कहो या राम।
भगवान श्री राम का जीवन चरित्र और उनका कृतित्व इतना व्यापक विराट और अनंत है की जिसका कोई और ओर छोर नहीं है मानव जाति में संपूर्ण सृष्टि में आज तक उनसे महान कोई भी उत्पन्न नहीं हुआ अंत में हम परम पवित्र श्री रामनवमी के अवसर पर केवल इतना ही कहेंगे -
जग में अब तक जो भी आये भगवान राम सर्वोत्तम हैं,
उनका प्यारा न्यारा जीवन आदर्श और अति उत्तम है
आओ हम सब मिलकर भगवान राम का स्मरण करें
उनके जीवन को अपना कर हम मानवता को धन्य करें।