Wednesday, 18 March 2026

नवरात्रि और आपका भोजन -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

नवरात्रि और आपका भोजन -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 
नया भारतीय वर्ष विक्रम संवत 2083 अंग्रेजी महीने के 19 मार्च 2026 के बृहस्पतिवार के दिन से प्रारंभ हो रहा है इसी दिन परम पावन भगवती देवी मां की नवरात्रि भी प्रारंभ हो रही हैं प्रातः काल 6:52 से प्रातः काल 7:53 तक कलश स्थापना और पूजा पाठ का समय रहेगा इसके पश्चात यदि किसी की कलश स्थापना ना हो तो उसके लिए अभिजीत मुहूर्त में यह काम किया जा सकता है जिसका समय 12:05 से 12:53 दोपहर है यह परम पावन नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च 2026 को ‌ शुक्रवार के दिन समाप्त हो रहे हैं और 27 मार्च को ही दिन में 11:00 बजे के बाद व्रत का पारण होगा इसी दिन भगवान श्री राम की श्री रामनवमी भी मनाई जाएगी । इस वर्ष देवी मां का आगमन डोली अर्थात पालकी से और प्रस्थान हाथी से होगा अर्थात आदि नवरात्रि हलचल और उथल-पुथल वाली और अंतिम शानदार और भव्य होगी।

यह दिव्य और भव्य नवरात्रि और पावन नववर्ष ‌ बहुत ही महत्वपूर्ण है यह बहुत ही उथल-पुथल हलचल वाला रहेगा क्योंकि रौद्र नाम का संवत्सर पूरे वर्ष में प्रभावी रहेगा और राजा बृहस्पति और मंत्री मंगल होंगे इसलिए धर्म कर्म आक्रमण और सुरक्षा में संतुलन समन्वय बना रहेगा ‌ यह नवरात्रि आठ दिन की होगी अष्टमी और नवमी दोनों 26 को पड़ रही हैं‌ सरल भाव से देवी जी की केवल स्तुति करते हुए भी  उत्तम फल पाया जा सकता है और उनके किसी एक मंत्र को भी 9 दिन जपा जा सकता है‌ इतना अवश्य है कि व्यक्ति को इन दिनों अपने रहन-सहन और खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए और अच्छे काम करते हुए नैतिक और सदाचारी रहने का प्रयास करना चाहिए तभी राक्षसी और शैतानी शक्तियों का अंत होगा और दिव्य शक्तियों का विकास होगा ।

जटिल और गूढ़ नियम केवल साधु संत महंत लोगों पुजारी और अनुष्ठान करने वाले एवं तंत्र-मंत्र का अनुष्ठान करने वालों पर लागू होता है एक दिन का व्रत आप रख सकते हैं 9 दिन का भी रख सकते हैं देखा केवल यह जाएगा कि आप की भावना कैसी रही है‌ यदि आपने सच्चे मन से नवरात्रि में देवी जी का ध्यान पूजन किया है तो निश्चित रूप से स्वप्न में आपको अच्छी चीजों ‌ चमकदार प्रकाश और देवी मां के दर्शन होते हैं और कुछ लोगों को प्रत्यक्ष भी दर्शन हो सकते हैं और हुए भी हैं छल कपट के भाव से किया गया कोई भी पूजा पाठ अनुष्ठान व्रत और हवन कभी सिद्ध नहीं होता ‌ इसके लिए सरलता सादगी नैतिकता सदाचारी एवं कृतज्ञता का भाव होना चाहिए।

जहां तक 9 दिन के व्रत की बात है तो व्यक्ति को क्या ग्रहण करना चाहिए और क्या नहीं ग्रहण करना चाहिए इस पर ध्यान देना आवश्यक है सामान्य लोगों और गृहस्थी में लगे लोगों के लिए किसी भी नियम की आवश्यकता नहीं है केवल नाम स्मरण करते हुए हर चीज खाते पीते रहे परिश्रम करते रहें लेकिन जो व्रत रख रहे हैं उनको भोजन में सात्विक और हल्की चीजें लेना चाहिए ताकि शरीर नई ऊर्जा स्फूर्ति और उमंग से भर सके और शरीर में खतरनाक रसायन और विषैले तत्व दूर हो सके व्रत पूजा पाठ हवन यज्ञ अनुष्ठान का सबसे बड़ा यही पक्ष है ।

इस समय आप साबूदाना सिंघाड़े का आटा सांवरिया चीनी चावल आलू लौकी शकरकंद अरबी खीर किला सेब पपीता चीकू अनार अंगूर मूंगफली मखाना काजू अखरोट नारियल दूध मट्ठा घर पर विविध रूपों में बनाकर उसका प्रयोग कर सकते हैं जीरा और काली मिर्च का भी प्रयोग आप आराम से कर सकते हैं यद्यपि कुछ लोग इसे दूर रहते हैं लेकिन ऐसी कोई बात नहीं है आप हरी धनिया का प्रयोग कर सकते हैं और अधिक से अधिक रसदार चीजों का सेवन करना चाहिए मूंगफली का सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए क्योंकि यह काफी गरिष्ठ होता है ‌ चीनी और गुड़ से बनी चीजें और उसका रस आप ग्रहण कर सकते हैं चाय भी पी सकते हैं ‌ सेंधा नमक का प्रयोग किया जा सकता है ‌ नारियल का पानी पिया जा सकता है।

जिन चीजों का प्रयोग करने से बचाना है उसमें नमक के प्रयोग में सावधानी रखें गेहूं चावल और अन्नकी चीजें ना खाएं मैदा और बेसन तथा हींग का प्रयोग भी ना करें सरसों का तेल और अनेक अन्य तेल भी आप ग्रहण न करें मेथी दाना खाने से प्याज लहसुन ग्रहण करने से दूर रहे और सबसे बड़ी बात किसी भी प्रकार के नशा का मांस मद्य का मछली का सेवन न करें पराई स्त्री और पराया पुरुष का सेवन इस काल में करने पर सारा व्रत खंडित हो जाता है और महा पाप लगता है।
इस प्रकार दिव्या और भव्य तथा परम पवित्र नवरात्रि में आप धर्म अध्यात्म और भगवती दुर्गा और भगवती पार्वती और अन्य देवी देवताओं का चिंतन करते हुए भोजन सामग्री खाद्य और प्राय सामग्री पर नियंत्रण रखते हुए उनकी 9 शक्तियों का आवाहन अवश्य करते रहे जिस दिन जिस देवी का व्रत हो उसका अलग से आवाहन अवश्य करें पहले दिन देवी शैलपुत्री दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा चौथे दिन देवी कुष्मांडा पांचवें दिन देवी स्कंदमाता छठे दिन देवी कात्यायनी सातवें दिन देवी महाकाल रात्रि आठवें दिन देवी महागौरी और 9वे दिन देवी सिद्धिदात्री का दिन होता है इन सभी का अलग-अलग चिंतन ध्यान और पूजा करने से अलग-अलग प्रकार की शक्ति ऊर्जा एवं सिद्धियां प्राप्त होती

*LPG सप्लाई की स्थिति को समझना: तथ्यों को अफ़वाहों से अलग करना*

*LPG सप्लाई की स्थिति को समझना: तथ्यों को अफ़वाहों से अलग करना*
सप्लाई में रुकावट के दौरान गलत जानकारी अक्सर खुद रुकावट से भी बड़ा संकट पैदा कर सकती है। हाल के हफ़्तों में, LPG की उपलब्धता को लेकर चर्चाएँ सोशल मीडिया पोस्ट की वजह से और बढ़ गई हैं; इन पोस्ट में एजेंसियों पर लगी लंबी कतारें, बंद होते रेस्टोरेंट और ऐसे दावे दिखाए जा रहे हैं कि पूरे देश में LPG की सप्लाई ठप हो रही है। हालाँकि ऐसी तस्वीरें चिंता पैदा कर सकती हैं, लेकिन असलियत वायरल हो रही कहानियों की तुलना में कहीं ज़्यादा पेचीदा और स्थिर है। घरों में LPG की सप्लाई सुरक्षित बनी हुई है, और राष्ट्रीय वितरण प्रणाली लगातार काम कर रही है। इसलिए, घबराहट को दूर करने और लोगों का भरोसा वापस जीतने के लिए, वेरिफ़ाई की गई जानकारी को साफ़ तौर पर बताना बहुत ज़रूरी है।

भारत का LPG वितरण नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े नेटवर्कों में से एक है। यह हज़ारों बॉटलिंग प्लांट, स्टोरेज डिपो, ट्रांसपोर्ट बेड़े और स्थानीय वितरकों पर आधारित है, जो मिलकर यह पक्का करते हैं कि सिलेंडर शहरों, कस्बों और गाँवों में हर घर तक पहुँचें। भले ही लॉजिस्टिक्स में कोई रुकावट आ जाए, इस सिस्टम को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि वह घरेलू उपभोक्ताओं को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता दे। तेल मार्केटिंग कंपनियाँ, वितरक और सरकारी अधिकारी लगातार आपस में तालमेल बिठाकर सप्लाई की आवाजाही पर नज़र रखते हैं और यह पक्का करते हैं कि डिलीवरी बिना किसी रुकावट के होती रहे। यह तालमेल वाला तरीका यह पक्का करने में मदद करता है कि घरों में LPG की उपलब्धता सुरक्षित बनी रहे, भले ही सप्लाई चेन के कुछ हिस्सों पर कुछ समय के लिए दबाव क्यों न पड़ जाए।

लोगों की चिंता का एक बड़ा कारण सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर छोटे वीडियो और पोस्ट का तेज़ी से फैलना है। LPG एजेंसियों पर लगी कतारें दिखाने वाले वीडियो या रेस्टोरेंट के दूसरे ईंधन इस्तेमाल करने की खबरें बिना किसी संदर्भ के बड़े पैमाने पर फैलाई गई हैं। कई मामलों में, ऐसी तस्वीरें पूरे देश में LPG की कमी को नहीं, बल्कि किसी खास इलाके में आई रुकावट या कुछ समय के लिए मची घबराहट में की गई ज़्यादा खरीदारी को दिखाती हैं। जब उपभोक्ता समय से पहले ही सिलेंडर बुक करना शुरू कर देते हैं या ईंधन का स्टॉक जमा करने की कोशिश करते हैं, तो इससे वितरण प्रणालियों पर कुछ समय के लिए दबाव पड़ सकता है, जबकि वे आम तौर पर ठीक से ही काम कर रही होती हैं। बिना वजह की घबराहट से बचने के लिए इस फ़र्क को समझना बहुत ज़रूरी है।

इसलिए, सरकारी अधिकारियों और तेल मार्केटिंग कंपनियों ने घरेलू सप्लाई को प्राथमिकता देने के महत्व पर ज़ोर दिया है। अलग-अलग इलाकों में सिलेंडर की उपलब्धता, टैंकरों की आवाजाही और बॉटलिंग प्लांट के कामकाज पर नज़र रखने के लिए मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। ये सिस्टम सप्लाई चेन के मैनेजरों को रुकावटों की तुरंत पहचान करने और ज़रूरत पड़ने पर सप्लाई को दूसरी जगहों पर भेजने में मदद करते हैं। नेटवर्क पर लगातार नज़र रखकर, अधिकारी किसी खास इलाके में आई रुकावटों पर तुरंत कार्रवाई कर सकते हैं और यह पक्का कर सकते हैं कि घरों में LPG की सप्लाई बिना किसी रुकावट के जारी रहे। पूरे देश में LPG वितरण की मुख्य व्यवस्था लगातार काम कर रही है। बॉटलिंग प्लांट चालू हैं, और पूरे दिन सिलेंडरों को भरा और भेजा जा रहा है। टैंकर रिफाइनरियों से डिपो और प्लांट तक LPG पहुँचाते हैं, जबकि वितरण ट्रक भरे हुए सिलेंडरों को उन एजेंसियों तक ले जाते हैं जो घरेलू उपभोक्ताओं को सेवा देती हैं। सप्लाई चेन के ज़रिए ईंधन की यह लगातार आवाजाही ही हर दिन घरों की रसोई को चालू रखती है। इस लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की मज़बूती का मतलब है कि अस्थायी रुकावटें शायद ही कभी उपलब्धता में पूरी तरह से रुकावट का रूप लेती हैं।

इस स्थिति का एक और महत्वपूर्ण पहलू घरेलू और कमर्शियल LPG सप्लाई के बीच का अंतर है। रेस्टोरेंट, होटल और इंडस्ट्रियल रसोई अक्सर अलग कमर्शियल सिलेंडरों पर निर्भर रहते हैं, जो बाज़ार की स्थितियों या लॉजिस्टिक्स से जुड़ी रुकावटों से अलग तरह से प्रभावित हो सकते हैं। कुछ इलाकों में, कमर्शियल सप्लाई में अस्थायी चुनौतियों के कारण व्यवसायों को कुछ बदलाव करने पड़े हैं, जिसे कभी-कभी बड़े पैमाने पर कमी के सबूत के तौर पर गलत समझा जा सकता है। हालाँकि, घरों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले घरेलू LPG सिलेंडरों को राष्ट्रीय वितरण व्यवस्था के तहत प्राथमिकता के आधार पर सप्लाई मिलती रहती है।

चिंता के बढ़े हुए समय के दौरान स्थिरता बनाए रखने में जनता का सहयोग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब उपभोक्ता घबराकर बुकिंग करने से बचते हैं और सामान्य रिफिल शेड्यूल पर भरोसा करते हैं, तो वितरण नेटवर्क ज़्यादा सुचारू रूप से काम करता है। जमाखोरी या समय से पहले बुकिंग करने से मांग में कृत्रिम रूप से उछाल आ सकता है, जिससे स्थानीय वितरकों और डिलीवरी प्रणालियों पर अनावश्यक दबाव पड़ता है। इसलिए अधिकारी उपभोक्ताओं को शांत रहने और उन स्थापित सप्लाई व्यवस्थाओं पर भरोसा करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, जिन्होंने दशकों से लाखों घरों को भरोसेमंद सेवा दी है।

जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए सही जानकारी का प्रसार भी उतनी ही तेज़ी से होना चाहिए जितनी तेज़ी से गलत जानकारी फैलती है। डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, पारंपरिक मीडिया और आधिकारिक सरकारी चैनलों के माध्यम से संचार का उद्देश्य सप्लाई की स्थितियों के बारे में नियमित अपडेट प्रदान करना है। ये अपडेट उपभोक्ताओं को यह भरोसा दिलाने में मदद करते हैं कि वितरण प्रणालियाँ चालू हैं और अधिकारी स्थिति पर सक्रिय रूप से नज़र रख रहे हैं। जब तथ्यात्मक जानकारी लगातार साझा की जाती है, तो यह उन भ्रामक बातों के प्रभाव को कम करती है जो अक्सर अनिश्चित समय के दौरान फैलती हैं।

भारत के LPG बुनियादी ढांचे की मज़बूती भंडारण सुविधाओं, परिवहन नेटवर्क और अंतिम-मील वितरण प्रणालियों में किए गए दीर्घकालिक निवेश का परिणाम है। पिछले कुछ वर्षों में, इन प्रणालियों को वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में उतार-चढ़ाव, लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियों और मांग में अचानक हुई वृद्धि का सामना करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। हालाँकि अस्थायी रुकावटें आ सकती हैं, लेकिन सप्लाई प्रबंधन का व्यापक ढाँचा यह सुनिश्चित करता है कि आवश्यक घरेलू खपत सुरक्षित रहे। आखिरकार, यह स्थिति इस बात पर ज़ोर देती है कि धारणा और असलियत के बीच फ़र्क करना कितना ज़रूरी है। वायरल होने वाला कंटेंट पूरे देश में संकट का माहौल बना सकता है, भले ही असल में सप्लाई सिस्टम पूरी तरह से स्थिर हो। सही जानकारी पर ध्यान देकर और यह समझकर कि LPG डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क कैसे काम करता है, उपभोक्ता बेवजह की चिंता से बच सकते हैं और सप्लाई के माहौल को संतुलित बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।

घरों में LPG की सप्लाई अभी भी एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बनी हुई है, जिसे सक्रिय लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन, सरकारी निगरानी और व्यवस्थित डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क का पूरा समर्थन हासिल है। जब तक उपभोक्ता सही जानकारी पर भरोसा करेंगे और घबराहट में आकर कोई कदम नहीं उठाएंगे, तब तक यह सिस्टम पूरी कुशलता से काम करता रहेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि हर घर को ज़रूरत के हिसाब से ईंधन मिलता रहे।
फ़रहत अली खान 
एम ए गोल्ड मेडलिस्ट

Tuesday, 17 March 2026

पूरे भारत में मौसम परिवर्तन के बाद अब जौनपुर और आसपास मौसम परिवर्तन की बारी है आज 178 मार्च को सुबह 5:00 से

आज से मौसम में होगा परिवर्तन नवरात्रि में 19 से 21 मार्च के बीच‌ अफगानिस्तान पाकिस्तान से लेकर जम्मू कश्मीर दिल्ली हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड उत्तर प्रदेश नेपाल भूटान सिक्किम अरुणाचल प्रदेश बिहार मध्य प्रदेश बंगाल बांग्लादेश पूर्वोत्तर भारत और जौनपुर और आसपास  झंझा झकोर घन गर्जन वज्रपात वारिदमाला आंखों को चकाचौंध कर देने वाली बिजली की चमक और भयंकर गरज तेज हवाएं और हल्की मध्यम कहीं कहीं तेज वर्षा के संकेत -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 7017713978

पूरे भारत में मौसम परिवर्तन के बाद अब जौनपुर और आसपास मौसम परिवर्तन की बारी है आज 178 मार्च को सुबह 5:00 से 5:00 बजे तक जौनपुर और आसपास काफी घने मध्यम बादल छाए रहेंगे लेकिन वर्षा नहीं होगी अधिकतम तापमान 35 और न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस रहेगा ‌ इस बीच हवा की दिशा दक्षिणी दक्षिणी पूर्वी और गति 15 से 20 किलोमीटर प्रति घंटा होगी प्रदूषण की मात्रा कम होगी और वायु गुणवत्ता सूचकांक 100 से 160 हो जाने से हवा काफी ताजी और स्वच्छ महसूस होगी पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 4-6 रहेगी जो मध्यम है।

कल के मौसम के बारे में अनुमान है कि अधिकतम तापमान 36 और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस रहेगा हवा की दिशा बदलकर पूर्वी उत्तरी पूर्वी हो जाएगी हवा की दिशा तीन-चार दिन लगातार परिवर्तित होती रहेगी बाकी वह गुणवत्ता सूचकांक पराबैंगनी किरणों की तीव्रता प्रदूषण और गंदगी की मात्रा आज की तरह ही विद्यमान रहेगी ‌ तापमान और अन्य दशाएं भी लगभग इसी तरह रहेंगे ।

19 मार्च से मौसम में और भी तेज परिवर्तन होगा और बादलों की आवाजाही बहुत तेज हो जाएगी ‌ इसके बाद 20- 21मार्च के दिन माता रानी का अभिषेक करने के लिए जौनपुर सुल्तानपुर प्रतापगढ़ भदोही सोनभद्र प्रयागराज अयोध्या अंबेडकर नगर आजमगढ़ गाजीपुर और आसपास के जनपदों में कहीं-कहीं बूंदाबादी तो कहीं हल्की मध्यम वर्षा के योग हैं  ‌ कहीं कहीं झंझा झकोर घन गर्जन वज्रपात वारिदमाला आंखों को चकाचौंध कर देने वाली बिजली की भीषण चमक और भयंकर गरज ‌ के साथ तेज से बहुत तेज वर्षा हवाओं और वज्रपात के साथ कहीं-का हैं ओलावृष्टि भी होगी

यह मौसम के परिवर्तन की सारी गतिविधियां पश्चिम के हल्के विक्षोभ के कारण और अरब सागर बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न दबाव और जल की सतह गर्म होने के कारण बन रहे हैं  रौद्र ‌ नाम का नया वर्ष अपना रौद्र रूप पूरे भारत में दिखाएगा। हमारे केंद्र द्वारा पहले भी लिखा गया था कि मार्च बहुत ही परिवर्तित हलचल वाला और बूंदाबांदी वर्षा झंझा झकोर घन गर्जन वज्रपात वारिदमाला आंखों को चकाचौंध कर देने वाली बिजली ‌ की चमक गरज वाला वृष्टि और हिमालय पर्वतीय क्षेत्र में प्रचंड बर्फबारी का होगावाला मौसम रहेगा कहीं-कहीं ओलावृष्टि हो सकती है लेकिन जौनपुर और आसपास ऐसी कोई अधिक संभावना नहीं है।

20 मार्च से तापमान में अचानक बहुत तेज गिरावट आएंगे और यह 36 डिग्री से घटकर 32 डिग्री हो जाएगा और न्यूनतम तापमान भी 22 23 डिग्री से घट कर 17 18 डिग्री तक आ जाएगा और 22 मार्च से मौसम फिर सामान्य हो जाने की आशा है इसके बाद एक सप्ताह से 10 दिन का मौका किसानों को अपने फसल काटने और उसको मड़ाई करने के लिए मिलेगा इस अवसर का लाभ सभी को उठाना चाहिए‌ मार्च के अंतिम भाग और अप्रैल के प्रथम सप्ताह में मौसम में एक बार फिर से परिवर्तन देखने को मिलेगा।

भाजपा अपने मुख्य बिंदु चुनाव की घोषणाएं जिसे मोदी भक्त एजेंडा कहते हैं बखूबी कर रही हैं रामराज समान

भाजपा अपने मुख्य बिंदु चुनाव की घोषणाएं जिसे मोदी भक्त एजेंडा कहते हैं बखूबी कर रही हैं 

रामराज समान नागरिक संहिता महंगाई बेरोजगारी भ्रष्टाचार लाल पिता शाही संवेदनहीनता का खात्मा हिंदी हिंदू हिंदुस्तान भारत पाकिस्तान अधिकृत और चीन अधिकृत भारतीय भू भाग भारत में मिलना यह सभी बातें तो कांग्रेस ‌ की घोषणा पत्र में थी भाजपा ने तो अपने चुनाव में कहा ही था कि सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास और वोट के लिए केवल सनातन का साथ और 2047 में देश को या तो इंग्लैंड को या तो फिर मुसलमान को सौंप देना है इस काम में उनके साथ खरीदे गए चापलूस चाटुकार दलाल चमचे मक्खनबाज और चार सौ बीस ‌ लोग पूरी दक्षता से कर रहे हैं इसीलिए मुलायम को भारत रत्न दिया गया अखिलेश प्रियंका परिवार लाल ममता को अभय दान दिया गया और यूजीसी बिल लाया गया और भी अनेक अच्छे काम किए गए जबरदस्ती पद्मिनी फिल्म दिखाए गए सी लगाकर और अनुसूचित जाति जनजाति विधायक के लिए सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को तुरंत ही बदल गया संसद के द्वारा इस तरह अनेक अनगिनत चीज हैं जो दिखती है कि मोदी सर्वश्रेष्ठ हैं ऊपर से पालघर कंगना राणावत कमलेश तिवारी अश्वनी उपाध्याय बी सिंह जैसे लोगों के कांड किसी को अपने बराबर तो दूर अपने आगे पीछे दाएं बाएं खड़े होने के पहले ही उसको छांट देना यही एकमात्र उपलब्धि है मोदी की अटल बिहारी की तरह

ब्रह्मांड के महानायक ब्रह्म ऋषि विश्वामित्र -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

ब्रह्मांड के महानायक ब्रह्म ऋषि विश्वामित्र -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि
समस्त संसार के सबसे प्रतापी सम्राट और सबसे बड़े ब्रह्म ऋषि विश्वामित्र की जीवन कथा उनके जीवन के समान ही परम अद्भुत और अपने ढंग की पूरे विश्व में अकेली कथा है ।ब्रह्म ऋषि विश्वामित्र कान्यकुब्ज  अर्थात कन्नौज के सम्राट थे उनकी एक और राजधानी गाधिपुर थी जिसको आज गाज़ीपुर कहा जाता है ‌ वह कुश वंश के थे और उनका समय सतयुग के अंत से लेकर द्वापर के बीच तक पाया जाता है वह एक बहुत ही न्याय प्रिय और प्रजा को अपना मानने वाले सबके प्रति समान भाव वाले पूरी पृथ्वी के एकछत्र सम्राट थे उनके पिता का नाम गाधि और मां का नाम सुमति था तथा पत्नी का नाम सत्यवती था। उनके राज्य में प्रजा पूरी तरह प्रसन्न थी और संपूर्ण धरती हरियाली धन-धान्य से आच्छादित थे और चारों ओर शीतल मंद सुगंधित मलय पवन के झोंके बहते रहते थे ।
हजारों वर्षों तक राज करने के बाद एक बार वह सेना सहित संपूर्ण पृथ्वी की परिक्रमा करने ‌‌ और शिकार खेलने निकले और घूमते-घूमते ब्रह्म ऋषि वशिष्ठ के आश्रम में जाकर पहुंचे वहां पर वशिष्ठ ने उनका अपूर्व स्वागत सत्कार किया और कुछ देर रुकने को कहा इस पर विश्वामित्र सोच में पड़ गए कि वह इतने बड़े सेना और दलबल के साथ वहां पर कैसे रुकेंगे। 

लेकिन ब्रह्म ऋषि वशिष्ठ का आग्रह देखकर वह रुक गये और उन्हें यह देखकर बहुत ही आश्चर्य हुआ कि ब्रह्म ऋषि विश्वामित्र की कामधेनु गाय ने पलमात्र में ही उनके लाखों सैनिकों के लिए छह प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन और प्रत्येक चीजें उत्पन्न कर दिया। इस गाय का चमत्कार देखकर विश्वामित्र आश्चर्यचकित हो गए और वह गाय मांगने लगे वशिष्ठ जी ने कहा कि गाय मेरी मां के समान है और वही हमारे संपूर्ण आश्रम और शिष्यों का आधार है इसको छोड़कर आप कुछ भी ले लीजिए‌ लेकिन ब्रह्म ऋषि की बात ना मानकर सम्राट विश्वरथ अर्थात  विश्वामित्र अपने है पर अड़े रहे। और बलपूर्वक सैनिकों को कामधेनु को ले जाने को कहा कामधेनु ने उन सैनिकों को मार गिराया और वशिष्ठ के पास जाकर बोले कि मेरी रक्षा कीजिए ।

वशिष्ठ ने कहा की विश्वामित्र भूमंडल के स्वामी हैं और मैं राजा को श्राप भी नहीं दे सकता और उनके सैनिकों से लड़ भी नहीं सकता इस पर कामधेनु ने अनगिनत शक हूण किरात पहलव‌ ‌ और अन्य विकराल विदेशी सैनिक पैदा किए जिन्हें विश्वमित्र ने पल भर में मार गिराया इस पर उसने भयंकर अस्त्र-शस्त्रों से सज्जित महा पराक्रमी योद्धाओं को उत्पन्न किया और वशिष्ठ के साथ मिलकर विश्वामित्र के 100 में से 99 पुत्रों को और सारी सेना को मार गिराया।

सम्राट विश्वामित्र अपनी दुर्दशा पर अत्यंत लज्जित हुए  ‌ एकमात्र बचे अंतिम पुत्र को संपूर्ण धरती का राज पाट सौंप दिया और उन्होंने कठोर परिश्रम करके भगवान शिव को प्रसन्न करके समस्त दिव्यास्त्र प्राप्त किया और बदला लेने की भावना से फिर वशिष्ठ के आश्रम में आए और अग्नि अस्त्र छोड़कर उनके आश्रम को भस्म कर दिया इस पर वशिष्ठ ने खुद आगे  आकर अपने ब्रह्म दंड की सहायता से विश्वामित्र का सामना किया विश्वामित्र ने भगवान शिव से प्राप्त सभी दिव्यास्त्रों अग्नि वरुण रूद्र इंद्र पाशुपत मोहन गंधर्व जूंभण ‌ दारुण वज्र ब्रह्म पाश नागपाश नाग अस्त्र वरुण पास पिनाक दंड पैशाच क्रंच धर्म चक्र कालचक्र विष्णु चक्र मंथन कराल विद्याधर कालास्त्र सम्मोहन प्रतीप भार्गव ब्रह्मशिर नारायण अस्त्र और ब्रह्मास्त्र के साथ प्रस्वाप्न अस्त्र का प्रयोग किया लेकिन वशिष्ठ के ब्रह्म दंड के आगे वे सब के सब विफल रहे।

इसके बाद इसके बाद विश्वामित्र अत्यंत ही दुखी हुए और उन्होंने कहा धिग बलं क्षत्रिय बलं ब्रह्म तेजो बलो बलं‌ और उन्होंने ब्रह्म ऋषि बनाने के लिए सारा जीवन दांव पर लगा दियाब्रह्म ऋषि बनने के क्रम में उन्होंने उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका ग्रीनलैंड उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव सहित मंगोलिया अरब प्रायद्वीप अफ्रीका हर जगह घनघोर तपस्या किया लेकिन कुछ नहीं मिला इसके बाद देवभूमि में हिमालय पर्वत क्षेत्र में उन्होंने इतना भयंकर और घनघोर तपस्या किया कि इंद्र डर गए और विश्वामित्र की तपस्या भंग करने के लिए मेनका नाम की अप्सरा को भेजा जिसने विश्वामित्र की तपस्या भंग किया और उससे शकुंतला नाम की कन्या हुई जिसके पुत्र भरत के नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ा। काम के वशीभूत होकर तपस्या भंग होने से विश्वामित्र अत्यंत ही दुखी हुए ‌ और उनकी घोर तपस्या से प्राप्त शक्तियां नष्ट हो गई और इस क्रम में उन्होंने एक बार फिर से तपस्या प्रारंभ किया। इसके बाद अपनी पत्नी के साथ विंध्य क्षेत्र पर करके दक्षिण भारत में चले गये और 1000 वर्ष तक घनघोर तपस्या किया और ब्रह्मा जी ने प्रसन्न होकर उनका राजर्षि कहकर संबोधित किया। 

इस पर विश्वामित्र बहुत ही दुखी हुए की चले थे ब्रह्म ऋषि बने और केवल राजर्षि बन पाए इसी बीच उन्होंने तपस्या कर रहे  वशिष्ठ को मारने के लिए सरस्वती का आवाहन किया सरस्वती ने वशिष्ठ को विश्वामित्र के सामने तो लाया लेकिन फिर से किनारे पर प्रवाहित कर दिया और विश्वामित्र ने सरस्वती नदी को श्राप दे दिया ‌ वशिष्ठ के मन में भी विश्वामित्र को जान से मारने की विचारधारा आई लेकिन उन्होंने इस पर नियंत्रण स्थापित कर लिया।

 इसी बीच महाराजा त्रिशंकु  ने सदेह स्वर्ग जाने के लिए वशिष्ठ से प्रार्थना किया लेकिन उन्होंने ठुकरादिया‌ ‌ जब उनके पुत्र से कहा तो उन्होंने क्रोधित होकर उन्हें श्राप दे दिया। जब उन्होंने यह निवेदन विश्वामित्र से किया तो उन्होंने कहा यदि दुराचारी और छल कपट युक्त इंद्र को स्वर्ग का राजा बनाया जा सकता है तो ‌ त्रिशंकु स्वर्ग क्यों नहीं जा सकते यह कहकर उन्होंने दिव्य विमान का निर्माण कर अपने तपोवन से उन्हें स्वर्ग में पहुंचा दिया लेकिन देवताओं ने त्रिशंकु को स्वर्ग से नीचे फेंक दिया लेकिन विश्वामित्र ने उन्हें अपने तपबल से रोक दिया और वह उल्टे रह गए इस पर क्रोधित होकर विश्वामित्र ने अपने तप की शक्ति से प्रति ऊर्जा प्रति ब्रह्मांड प्रतिकण श्याम ऊर्जा  ‌ सप्त ऋषि और 27 नक्षत्र जैसी चीजों से युक्त एक अलग से सृष्टि रची और वहां पर त्रिशंकु को स्थापित कर दिया नर्मदा नदी का जन्म त्रिशंकु से ही हुआ माना जाता है।

अब तक विश्वामित्र की शक्ति इतनी बढ़ चुकी थी की संपूर्ण ब्रह्मांड में उनको चुनौती देने वाला कोई नहीं बचा था अपने को ब्रह्म ऋषि सिद्ध करने के लिए उन्होंने एक महान यज्ञ किया जिसमें वशिष्ठ और उनके पुत्रों को छोड़कर सारी सृष्टि के लोग उपस्थित हुए और वशिष्ठ के पुत्रों को विश्वामित्र ने आवेश में आकर मार दिया इसी बीच उन्होंने हरिश्चंद्र की परीक्षा लेते हुए उनके मृतक पुत्र रोहित को जीवित कर दिया। 

वशिष्ठ और विश्वामित्र के संघर्ष का एक और बड़ा मोड़ भारत के लिए आया जब 10 राजा विश्वामित्र की तरफ से लड़े और सुदास वशिष्ठ की तरफ से अकेले लड़े विश्वामित्र का कथन था यदि सबको चांडाल यवन और मलेक्छ कहकर भारत से निकाल दिया गया तो आगे चलकर वे भारत के लिए खतरा बनेंगे और यही सही हुआ। इन सब के अलावा कुछ अन्य घटनाएं भी हुई ,जब ‌ विश्वामित्र ने सब कुछ त्याग कर सारा ध्यान घनघोर तप पर लगाया और उन्होंने गायत्री मंत्र का आविष्कार किया जिन्हें वेद माता कहते हैं अकेले ही उन्होंने ऋग्वेद कर तृतीय मंडल और उसके 62 सूक्त लिख डाले ‌ इसके अलावा उन्होंने नए-नए ग्रह नक्षत्र की रचना किया और एक अलग अलग से सृष्टि का निर्माण प्रारंभ किया उन्होंने बलि प्रथा को समाप्त करते हुए बालक शुन:शेप की रक्षा किया‌ और किसी भी प्रकार की बाली को यज्ञ के विरुद्ध बताया ।

उन्होंने ही योग विद्या की खोज किया और विश्वरथ सम्राट से विश्वामित्र हो गए जिसका अर्थ ‌‌ संपूर्ण सृष्टि में सभी का मित्र होना है और वास्तव में वह इस योग्य थे मानवता के प्रति समर्पित व्यक्तित्व पूरे श्रेष्ठ में ऐसा अन्य कोई नहीं पाया गया।
हमारे देश का यह दुर्भाग्य रहा है कि जो अति महामानव  थे जो देवताओं से भी योग्य थे उनको भुला दिया गया है ताकि लोग अपने इतिहास को भूल जाएं यही हाल ब्रह्म ऋषि विश्वामित्र को लेकर भी हैं जबकि उनकी शिक्षाओं को हर जगह पढ़ना चाहिए संपूर्ण सृष्टि में वही अकेले ऐसे व्यक्ति हैं जिनके पास ब्रह्म ऋषि ‌ चक्रवर्तीसम्राट और समस्त अस्त्र शस्त्रों का सर्वोच्च ज्ञान हो वह एक ऐसे महान वैज्ञानिक थे जिन्होंने परमाणु हाइड्रोजन  जैव रासायनिक हथियारों का ‌ और माया विद्या का अविष्कार करके हर एक प्रकार के दिव्यास्त्रों का निर्माण किया था।

 वह कुटी में या पेड़ के नीचे बैठकर माला जपने वाले ब्रह्म ऋषि नहीं थे बल्कि सृष्टि को सर्वोच्च बनाने वाले महान महामानव  थे जिन्होंने अपने महान तप शक्ति से देवताओं को पीछे छोड़कर ब्रह्म ऋषि का ‌ परम पद प्राप्त किया भारत भूमि को रावण जैसे राक्षसों से मुक्त करने शिवजी का धनुष तोड़ने में उनकी सबसे बड़ी भूमिका थी जिन्होंने श्री राम और लक्ष्मण को हर प्रकार से शास्त्र और शास्त्र से और ज्ञान से भूख और प्यास से सुरक्षित करके  ‌ बला और अतिबला विद्या सीखकर और हर प्रकार के ज्ञान विज्ञान शास्त्र और शास्त्र तथा दिव्यास्त्रों का ज्ञानदेकरउन्हें विश्व का सर्वश्रेष्ठ महायोद्धा बनाया भूत प्रेत पिशाच और माया अस्त्रों से बचने का उपाय खोजने वाले वे पहले और अंतिम महान वैज्ञानिक थे अभी उनके बारे में जितना ज्ञात है उससे भी अधिक अज्ञात है देश की रक्षा करने वाले सभी लोगों को सुबह उठकर ब्रह्म ऋषि विश्वामित्र का स्मरण करके उनके पद चिह्न पर चलने का प्रयास करना चाहिए। ‌ भगवान श्री राम और लक्ष्मण को जगत विजेता बनने का सौभाग्य प्राप्त उन्होंने अहिल्या का उद्धार कराया और भगवती सीता के विवाह में महत्वपूर्ण भूमिकाओं का निर्माण किया उन्होंने भूख प्यास पर विजय पाने के लिए मंत्रों और रसायनों का निर्माण किया ‌ अहिल्या का उद्धार करना उनकी एक महान उपलब्धि है एक ही यज्ञ करके उत्तर भारत को राक्षसों से मुक्त कर दिया था।

ब्रह्म ऋषि विश्वामित्र कितने महान हो गए थे कि एक बार पूरी धरती पर महान दुर्भिक्ष पड़ा लोग सारे उपाय करके हार गए लेकिन काल दूर नहीं हुआ तब उन्होंने चांडाल बहेलिया के घर रखी हुई कुत्ते की हड्डी खाकर उसकी शक्ति के द्वारा सारी धरती पर वर्षा करा कर सारी धरती हरा-भरा कर दिया था इस प्रकार उनके चरित्र ना भूतों न भविष्यति वाला है और आज तक विश्वामित्र इस सृष्टि में केवल एक ही हुए हैं और आगे भी एक ही रहेंगे‌ आज इस महान संकट काल में पड़े हुए सनातन धर्म और भारत देश को विश्वामित्र के पद चोन पर चलते हुए शास्त्र और शस्त्र दोनों ज्ञान सीख कर देश से हर प्रकार की शैतानी और राक्षसी शक्तियों को समाप्त करना चाहिए

आज से मौसम में होगा परिवर्तन नवरात्र में जौनपुर और आसपास दवा आदि तेज हवाएं और हल्की वर्षा के संकेत -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक

आज से मौसम में होगा परिवर्तन नवरात्र में जौनपुर और आसपास दवा आदि तेज हवाएं और हल्की वर्षा के संकेत -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक 

पूरे भारत में मौसम परिवर्तन के बाद अब जौनपुर और आसपास मौसम परिवर्तन की बारी है आज 17 मार्च को सुबह 5:00 से 5:00 बजे तक जौनपुर और आसपास काफी घने मध्यम बादल छाए रहेंगे लेकिन वर्षा नहीं होगी अधिकतम तापमान 35 और न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस रहेगा ‌ इस बीच हवा की दिशा दक्षिणी दक्षिणी पूर्वी और गति 15 से 20 किलोमीटर प्रति घंटा होगी प्रदूषण की मात्रा कम होगी और वायु गुणवत्ता सूचकांक 100 से 160 हो जाने से हवा काफी ताजी और स्वच्छ महसूस होगी पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 4-6 रहेगी जो मध्यम है।

कल के मौसम के बारे में अनुमान है कि अधिकतम तापमान 36 और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस रहेगा हवा की दिशा बदलकर पूर्वी उत्तरी पूर्वी हो जाएगी हवा की दिशा तीन-चार दिन लगातार परिवर्तित होती रहेगी बाकी वह गुणवत्ता सूचकांक पराबैंगनी किरणों की तीव्रता प्रदूषण और गंदगी की मात्रा आज की तरह ही विद्यमान रहेगी ‌ तापमान और अन्य दशाएं भी लगभग इसी तरह रहेंगे 

19 मार्च से मौसम में और भी तेज परिवर्तन होगा और बादलों की आवाजाही बहुत तेज हो जाएगी ‌ इसके बाद 20 मार्च के दिन माता रानी का अभिषेक करने के लिए जौनपुर सुल्तानपुर प्रतापगढ़ भदोही सोनभद्र प्रयागराज अयोध्या अंबेडकर नगर आजमगढ़ गाजीपुर और आसपास के जनपदों में कहीं-कहीं बूंदाबादी तो कहीं हल्की वर्षा के योग हैं अधिक वर्षा नहीं होने से खेती को नुकसान नहीं करेगा। इतना अवश्य है की जबरदस्त बिजली की चमक गरज झंझा झकोर घन गर्जन वज्रपात वारिदमाला ‌ का दृश्य अनेक स्थानों पर तेज हवाओं के साथ दृश्य मन होगा इससे मौसम में ठंड भी आएगी और मौसम का परिवर्तन भी होगा और मौसम में गंदगी और प्रदूषण की मात्रा कुछ समय के लिए ही सही लेकिन घट जाएगी ‌ कुछ जगह ओलावृष्टि से नुकसान भी हो सकता है

यह मौसम के परिवर्तन की सारी गतिविधियां पश्चिम के हल्के विक्षोभ के कारण और अरब सागर बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न दबाव और जल की सतह गर्म होने के कारण बन रहे हैं हमारे केंद्र द्वारा पहले भी लिखा गया था कि मार्च बहुत ही परिवर्तित हलचल वाला और बूंदाबांदी वर्षा वाला मौसम रहेगा कहानी-कहानी ओलावृष्टि हो सकती है लेकिन जौनपुर और आसपास ऐसी कोई भी संभावना नहीं है।

20 मार्च से तापमान में अचानक बहुत तेज गिरावट आएंगे और यह 36 डिग्री से घटकर 32 डिग्री हो जाएगा और न्यूनतम तापमान भी 22 23 डिग्री से घट कर 17 18 डिग्री तक आ जाएगा और 22 मार्च से मौसम फिर सामान्य हो जाने की आशा है इसके बाद एक सप्ताह से 10 दिन का मौका किसानों को अपने फसल काटने और उसको मड़ाई करने के लिए मिलेगा इस अवसर का लाभ सभी को उठाना चाहिए‌ मार्च के अंतिम भाग और अप्रैल के प्रथम सप्ताह में मौसम में एक बार फिर से परिवर्तन देखने को मिलेगा

Monday, 16 March 2026

आज से मौसम में होगा परिवर्तन नवरात्र में जौनपुर और आसपास दवा आदि तेज हवाएं और हल्की वर्षा के संकेत -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक

आज से मौसम में होगा परिवर्तन नवरात्र में जौनपुर और आसपास दवा आदि तेज हवाएं और हल्की वर्षा के संकेत -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक 

पूरे भारत में मौसम परिवर्तन के बाद अब जौनपुर और आसपास मौसम परिवर्तन की बारी है आज 17 मार्च को सुबह 5:00 से 5:00 बजे तक जौनपुर और आसपास काफी घने मध्यम बादल छाए रहेंगे लेकिन वर्षा नहीं होगी अधिकतम तापमान 35 और न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस रहेगा ‌ इस बीच हवा की दिशा दक्षिणी दक्षिणी पूर्वी और गति 15 से 20 किलोमीटर प्रति घंटा होगी प्रदूषण की मात्रा कम होगी और वायु गुणवत्ता सूचकांक 100 से 160 हो जाने से हवा काफी ताजी और स्वच्छ महसूस होगी पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 4-6 रहेगी जो मध्यम है।


कल के मौसम के बारे में अनुमान है कि अधिकतम तापमान 36 और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस रहेगा हवा की दिशा बदलकर पूर्वी उत्तरी पूर्वी हो जाएगी हवा की दिशा तीन-चार दिन लगातार परिवर्तित होती रहेगी बाकी वह गुणवत्ता सूचकांक पराबैंगनी किरणों की तीव्रता प्रदूषण और गंदगी की मात्रा आज की तरह ही विद्यमान रहेगी ‌ तापमान और अन्य दशाएं भी लगभग इसी तरह रहेंगे 

19 मार्च से मौसम में और भी तेज परिवर्तन होगा और बादलों की आवाजाही बहुत तेज हो जाएगी ‌ इसके बाद 20 मार्च के दिन माता रानी का अभिषेक करने के लिए जौनपुर सुल्तानपुर प्रतापगढ़ भदोही सोनभद्र प्रयागराज अयोध्या अंबेडकर नगर आजमगढ़ गाजीपुर और आसपास के जनपदों में कहीं-कहीं बूंदाबादी तो कहीं हल्की वर्षा के योग हैं अधिक वर्षा नहीं होने से खेती को नुकसान नहीं करेगा। 

यह मौसम के परिवर्तन की सारी गतिविधियां पश्चिम के हल्के विक्षोभ के कारण और अरब सागर बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न दबाव और जल की सतह गर्म होने के कारण बन रहे हैं हमारे केंद्र द्वारा पहले भी लिखा गया था कि मार्च बहुत ही परिवर्तित हलचल वाला और बूंदाबांदी वर्षा वाला मौसम रहेगा कहानी-कहानी ओलावृष्टि हो सकती है लेकिन जौनपुर और आसपास ऐसी कोई भी संभावना नहीं है।

20 मार्च से तापमान में अचानक बहुत तेज गिरावट आएंगे और यह 36 डिग्री से घटकर 32 डिग्री हो जाएगा और न्यूनतम तापमान भी 22 23 डिग्री से घट कर 17 18 डिग्री तक आ जाएगा और 22 मार्च से मौसम फिर सामान्य हो जाने की आशा है इसके बाद एक सप्ताह से 10 दिन का मौका किसानों को अपने फसल काटने और उसको मड़ाई करने के लिए मिलेगा इस अवसर का लाभ सभी को उठाना चाहिए‌ मार्च के अंतिम भाग और अप्रैल के प्रथम सप्ताह में मौसम में एक बार फिर से परिवर्तन देखने को मिलेगा