Thursday, 16 April 2026

देश में अति पिछड़ी मुस्लिम महिलाओं को तैंतीस में से तीन प्रतिशत मिले आरक्षण मुस्लिम महासंघ*

*देश में अति पिछड़ी मुस्लिम महिलाओं को तैंतीस में से तीन प्रतिशत मिले आरक्षण मुस्लिम महासंघ* 
अखिल भारतीय मुस्लिम महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष फ़रहत अली खान ने कहा देश में सबसे ज्यादा दबी कुचली ज़िंदगी गुजार रही हैं मुस्लिम महिलाएं।
अगर मुस्लिम महिलाएं सांसद और विधायक बनकर लोकसभा,राज्य सभा एवं विधानसभा में जाएंगी तभी अपनी समस्याओं को देश के संवैधानिक पटल पर रख सकती हैं।

महिला आरक्षण बिल सराहनीय और स्वागत योग्य बिल है जिसकी समय के अनुसार बहुत आवश्यकता है । 

जहां तक महिला आरक्षण बिल का सवाल है हम सभी देशवासी स्वागत करते हैं।

मगर हम अपने देश के मुखिया से अपना सुझाव निवेदन पूर्वक रख रहे हैं।
तैंतीस प्रतिशत में से कुल तीन प्रतिशत परिसीमन के बाद मुस्लिम महिला को भी आरक्षण दिया जाए

जो समय के अनुसार बहुत ज़रूरी है।
हमारे सुझाव पर गंभीरता से विचार करने की कृपा करें।
फ़रहत अली खान 
राष्ट्रीय अध्यक्ष मुस्लिम महासंघ

Wednesday, 15 April 2026

बर्बरीक दुनिया के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर थे। बर्बरीक के लिए तीन बाण ही काफी थे जिसके बल पर वे कौरवों और पांडवों की पूरी सेना को समाप्त कर सकते थे। युद्ध के मैदान में भीम पौत्र बर्बरीक दोनों खेमों के मध्य बिन्दु एक पीपल के वृक्ष के नीचे खड़े हो गए और यह घोषणा कर डाली कि मैं उस पक्ष की तरफ से लडूंगा जो हार रहा होगा। बर्बरीक की इस घोषणा से कृष्ण चिंतित हो गए।

बर्बरीक दुनिया के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर थे। बर्बरीक के लिए तीन बाण ही काफी थे जिसके बल पर वे कौरवों और पांडवों की पूरी सेना को समाप्त कर सकते थे। युद्ध के मैदान में भीम पौत्र बर्बरीक दोनों खेमों के मध्य बिन्दु एक पीपल के वृक्ष के नीचे खड़े हो गए और यह घोषणा कर डाली कि मैं उस पक्ष की तरफ से लडूंगा जो हार रहा होगा। बर्बरीक की इस घोषणा से कृष्ण चिंतित हो गए।

भीम के पौत्र बर्बरीक के समक्ष जब अर्जुन तथा भगवान श्रीकृष्ण उसकी वीरता का चमत्कार देखने के लिए उपस्थित हुए तब बर्बरीक ने अपनी वीरता का छोटा-सा नमूना मात्र ही दिखाया। कृष्ण ने कहा कि यह जो वृक्ष है ‍इसके सारे पत्तों को एक ही तीर से छेद दो तो मैं मान जाऊंगा। बर्बरीक ने आज्ञा लेकर तीर को वृक्ष की ओर छोड़ दिया।

जब तीर एक-एक कर सारे पत्तों को छेदता जा रहा था उसी दौरान एक पत्ता टूटकर नीचे गिर पड़ा। कृष्ण ने उस पत्ते पर यह सोचकर पैर रखकर उसे छुपा लिया की यह छेद होने से बच जाएगा, लेकिन सभी पत्तों को छेदता हुआ वह तीर कृष्ण के पैरों के पास आकर रुक गया। तब बर्बरीक ने कहा कि प्रभु आपके पैर के नीचे एक पत्ता दबा है कृपया पैर हटा लीजिए, क्योंकि मैंने तीर को सिर्फ पत्तों को छेदने की आज्ञा दे रखी है आपके पैर को छेदने की नहीं।

उसके इस चमत्कार को देखकर कृष्ण चिंतित हो गए। भगवान श्रीकृष्ण यह बात जानते थे कि बर्बरीक प्रतिज्ञावश हारने वाले का साथ देगा। यदि कौरव हारते हुए नजर आए तो फिर पांडवों के लिए संकट खड़ा हो जाएगा और यदि जब पांडव बर्बरीक के सामने हारते नजर आए तो फिर वह पांडवों का साथ देगा। इस तरह वह दोनों ओर की सेना को एक ही तीर से खत्म कर देगा।

तब भगवान श्रीकृष्ण ब्राह्मण का भेष बनाकर सुबह बर्बरीक के शिविर के द्वार पर पहुंच गए और दान मांगने लगे। बर्बरीक ने कहा- मांगो ब्राह्मण! क्या चाहिए? ब्राह्मणरूपी कृष्ण ने कहा कि तुम दे न सकोगे। लेकिन बर्बरीक कृष्ण के जाल में फंस गए और कृष्ण ने उससे उसका शीश मांग लिया।

बर्बरीक द्वारा अपने पितामह पांडवों की विजय हेतु स्वेच्छा के साथ शीशदान कर दिया गया। बर्बरीक के इस बलिदान को देखकर दान के पश्चात श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को कलियुग में स्वयं के नाम से पूजित होने का वर दिया। आज बर्बरीक को खाटू श्याम के नाम से पूजा जाता है। जहां कृष्ण ने उसका शीश रखा था उस स्थान का नाम खाटू है।

अनजाने रहस्य :

1. खाटू श्याम अर्थात मां सैव्यम पराजित:। अर्थात जो हारे हुए और निराश लोगों को संबल प्रदान करता है।

2. खाटू श्याम बाबा दुनिया के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर हैं उनसे बड़े सिर्फ श्रीराम ही माने गए हैं।

3. खाटूश्याम जी का जन्मोत्सव हर साल कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।

4. खाटू का श्याम मंदिर बहुत ही प्राचीन है, लेकिन वर्तमान मं‍दिर की आधारशिला सन 1720 में रखी गई थी। इतिहासकार पंडित झाबरमल्ल शर्मा के मुताबिक सन 1679 में औरंगजेब की सेना ने इस मंदिर को नष्ट कर दिया था। मंदिर की रक्षा के लिए उस समय अनेक राजपूतों ने अपना प्राणोत्सर्ग किया था।

5. खाटू श्‍याम मंदिर परिसर में लगता है बाबा खाटू श्याम का प्रसिद्ध मेला। हिन्दू मास फाल्गुन माह शुक्ल षष्ठी से बारस तक यह मेला चलता है। ग्यारस के दिन मेले का खास दिन रहता है।

6. बर्बरीक देवी के उपासक थे। देवी के वरदान से उसे तीन दिव्य बाण मिले थे जो अपने लक्ष्य को भेदकर वापस उनके पास आ जाते थे। इसकी वजय से बर्बरिक अजेय थे।

7. बर्बरीक अपने पिता घटोत्कच से भी ज्यादा शक्तिशाली और मायावी था।

8. कहते हैं कि जब बर्बरिक से श्रीकृष्ण ने शीश मांगा तो बर्बरिक ने रातभर भजन किया और फाल्गुन शुक्ल द्वादशी को स्नान करके पूजा की और अपने हाथ से अपना शीश काटकर श्रीकृष्ण को दान कर दिया।

9. शीश दान से पहले बर्बरिक ने महाभारत का युद्ध देखने की इच्‍छा जताई तब श्रीकृष्‍ण ने उनके शीश को एक ऊंचे स्थान पर स्थापित करके उन्हें अवलोकन की दृष्टि प्रदान की।

10. युद्ध समाप्ति के बाद जब पांडव विजयश्री का श्रेय देने के लिए वाद विवाद कर रहे थे तब श्रीकृष्ण कहा कि इसका निर्णय तो बर्बरिक का शीश ही कर सकता है। तब बर्बरिक ने कहा कि युद्ध में दोनों ओर श्रीकृष्ण का ही सुदर्शन चल रहा था और द्रौपदी महाकाली बन रक्तपान कर रही थी।

11. अंत में श्रीकृष्ण ने वरदान दिया की कलियुग में मेरे नाम से तुम्हें पूजा जाएगा और तुम्हारे स्मरण मात्र से ही भक्तों का कल्याण होगा।

जय श्री श्याम ,जय खाटूश्याम जी बाबा 🚩🙏🏻

सनातन धर्म एक ऐसा प्राचीनतम ब्रह्मांड व्यापी धर्म है जिसमें वह सब कुछ है जिसको अन्य कहीं नहीं पाया जा सकता ।

एक बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति 

सनातन धर्म एक ऐसा प्राचीनतम ब्रह्मांड व्यापी धर्म है जिसमें वह सब कुछ है जिसको अन्य कहीं नहीं पाया जा सकता ।
दुनिया में कोई भी वस्तु एक जैसी नहीं है दो सगे भाई बहन भी नहीं इसलिए दुनिया की कोई भी वस्तु पूरे वास्तु के समान नहीं हो सकते ।

लेकिन हमारे ‌ देश के बिके बुद्धिजीवी और मकर राजनेता विदेशी हाथों में खेलते हुए दुनिया भर का नकली उच्च नीच और असमानता जैसा जहर वह दिए और सनातन धर्म चिन्ह भिन्न होने लगा ‌

यहां तक की सनातन धर्म को सुधार करने के लिए जो ईश्वरीय महामानव अवतार के रूप में आए जैसे भगवान बुद्ध महावीर स्वामी गुरु नानक देव चार्वाक इनके पथ को अलग धर्म का नाम देकर आदिवासी वनवासी जंगल वासी और असभ्य कबीलाई लोगों को सनातन धर्म से अलग घोषित कर इसको दुनिया में केवल अब से इंडोनेशिया मलेशिया और कजाकिस्तान से श्रीलंका में और बाद में केवल भारत में सीमित कर दिया गया। 

इस अंधकार में भारत लगभग 1000 वर्ष पड़ा रहा लेकिन यहां के बड़े-बड़े ऋषि मुनि जिसमें सभी वर्ण और जातियों के लोग शामिल थे उन्होंने सनातन धर्म की पहचान मिटने नहीं दिया ।

यदि आपके पद प्रतिष्ठा तन संपत्ति है तो घर और बाहर का हर व्यक्ति आपका मान सम्मान करेगा और याद नहीं है तो अपनी जात बिरादरी तो छोड़ो घर के लोग ही आपको उठकर बाहर फेंक देंगे ।

ऐसे में दुनिया भर की गलत धारणा सनातन धर्म के बारे में फैलाई गईं जबकि यहां कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार से आस्तिक या नास्तिक रूप से आराम से रहते हुए सारा जीवन अपने ढंग से जी सकता है बशर्ते कि वह अन्य के जीवन में हस्तक्षेप ना करें ।

जो सनातन धर्म मिलेच शैतान विधर्मी लोगों को भी अपने बीच जीने का अवसर देता है वह अपने ही सनातनी भाइयों के बीच उच्च नीच का भेद कैसे कर सकता है यही समझाने की बात है लेकिन हर जाति के मठाधीश और स्वयंभू नेता अपने घर परिवार साथ वीडियो को मालामाल करने के लिए अपने जाति वालों को इसे समझना नहीं दे रहे हैं और अधिकांश धर्म गुरु संत महंत पुजारी पांडे कथावाचक सरकार सरकारी तंत्र धन कुबेर लोगों और विदेशी हाथों में बिक चुके हैं इसलिए सच समझने में लोगों को परेशानी हो रही है ।‌ इसमें से अधिकांश सरकार के पालतू और विदेशी लोगों के द्वारा खरीदे गए लोग हैं जो संस्कृत हिंदी की जगह अंग्रेजी बोलकर देश में पापा मम्मी डैडी हाय हेलो खाना मुबारक शुक्रिया गुड मॉर्निंग शादी शहर जैसी चीज फैलाना चाहते हैं।


आप सनातनी हो चाहे जो हो जिस जाति के हो लेकिन इतना याद रखो कि जिस दिन‌ मलिक्छ विधर्मी शैतान राक्षस काटना शुरु करेंगे जैसे कि वह उत्तरी दक्षिणी अमेरिका यूरोप अरब प्रायद्वीप अफगानिस्तान पाकिस्तान बांग्लादेश कश्मीर में कटे हैं उसे दिन या नहीं पूछेंगे कि तुम स्वर्ण हो छतरी हो ब्राह्मण हो श्रीवास्तव हो हरिजन हो या मौर्य हो या कुछ भी हो घास भूसा गाजर मूली साग भाजी की तरह एक तरफ से काट डालेंगे ।

धीरे-धीरे अब बात लोग समझ रहे हैं लेकिन अभी भी कुछ उनके नेता यह समझना नहीं दे रहे हैं जो इनके किसी काम के नहीं है इसी तरह जितने समाज है उनके अध्यक्ष उनकी सीन सब की सब फालतू हैं धीरे-धीरे सब लोग सनातन धर्म में आ रहे हैं क्योंकि वह जान चुके हैं कि यह नेता कल को क्रिश्चियन या फिर मुस्लिम हो जाएंगे और हम मझधार में फंस जाएंगे ।

जल्दी ही आप देखेंगे कि इन सब की दुकान बंद हो जाएगी सारे उच्च और निम्न वर्ग के लोग एक होकर अपने सनातन धर्म का पालन करेंगे और एक साथ मिलकर इन सभी लोगों को इस तरह मिटा देंगे जैसे कभी वीर शिवाजी महाराणा प्रताप सुहेलदेव हमीर राजा की तरह देश की हर जाति वर्ण की जनता ने विदेशी शैतानों म्लैच्छों का समूल नाश किया था ।

यह समय आ चुका है जल्दी ही धीरे-धीरे यह सबको दिखाने लगेगा इतना सब समझ चुके हैं कि एक  मां के दो सगे बेटे जो एक कलेक्टर और एक चपरासी है एक समान मान सम्मान इज्जत नहीं पा सकते तो बाकी की बात ही क्या है भगवान राम और कृष्णा शबरी और विदुर का झूठा खा सकते हैं लेकिन किसी भी अनुसूचित जाति जनजाति पिछड़े वर्ग के किसी नेता ने अपने ही  जाति वर्ग के किसी व्यक्ति के घर उसकी झूठी खाली और झूठा भोजन खाया है क्या बस इतना ही समझना है और पूरी दुनिया यह सुन ले 

जूनागढ़ टूटा किंतु खड़ा गिरनार है होते ही रहेंगे सिंह यहां की गुफाओं में।

हमारा दुर्भाग्य केवल यही है कि हमने धोखा अपनों से खाया अपनों से हार गए दुनिया में यह दम नहीं था जो भी सनातनी कट्टर अगुवा बनकर आता है वह अंत में गांधी और फिर विदेशी हाथों में बिका सिद्ध हो जाता है। ‌ और तब काला धन भ्रष्टाचार भूख महंगाई बेरोजगारी घूसखोरी चीन पाकिस्तान द्वारा छीना गया भूभाग हिंदी भाषा राम राज्य स्वदेशी हिंदी हिंदू हिंदुस्तान सब कुछ खो जाता है इन गद्दार और देशद्रोही लोगों के कारण।

हमें तो अपनों ने लूटा गैरों में कहां दम था हमारी किश्ती वहीं टूटी जहां पानी कम था लेकिन 

यदा यदा ही धर्मस्य वाली कहावत अंत में सही सिद्ध होगी -डॉ दिलीप कुमार सिंह

Monday, 13 April 2026

परम पवित्र शीतला चौकिया धाम को अपवित्र कर रहे हैं यहां के भ्रष्ट घूसखोर और दुराचारी पंडे पुरोहित -डॉ दिलीप कुमार सिंह

परम पवित्र शीतला चौकिया धाम को अपवित्र कर रहे हैं यहां के भ्रष्ट घूसखोर और दुराचारी पंडे पुरोहित -डॉ दिलीप कुमार सिंह 
जौनपुर में माता शीतला देवी का परम पवित्र चौकिया धाम है जिसमें लोगों की अटूट आस्था और विश्वास है और बहुत दूर-दूर से लोग दर्शन करने यहां आते हैं पर्व त्यौहार और नवरात्रि एवं अन्य मंगल शुभ अवसर पर यहां बहुत लंबी चौड़ी भीड़ होती है लेकिन यहां की सड़क और गलियों को कब्जा करके इतना तंग और शंकर बना दिया गया है कि लोग 1 किलोमीटर पहले से ही पैदल चलने को विवश होते हैं मैंने चौकिया के पांडे पुरोहितों को कई बार मना किया कि अपनी गंदगी दुराचार घूसखोरी भ्रष्टाचार और जबरदस्ती वसूली की आदत छोड़कर सदाचारी पवित्र होकर कम करो लेकिन जब 25 वर्षों के प्रयास के बाद भी यह नहीं सुधरे तब यह नंगा सच इन लोगों की काली करतूत का लिखना पड़ रहा है और बड़े दुर्भाग्य की बात है कि यही सच भारत के अधिकांश धर्म स्थान और मंदिरों तथा शक्तिपीठों का है जिसके कारण सनातन धर्म से लोगों की आस्था बहुत तेजी से घट रही है और लोग क्रिश्चियन मुस्लिम या नए बौद्ध इत्यादि बना रहे हैं 

अभी भी कर या पांच प्रतिशत पांडे पुरोहित पुजारी ठीक-ठाक और अच्छे चरित्र के हैं जैसे कि चौकिया मंदिर के पीछे तालाब पर स्थित भैरव बाबा का मंदिर है जिसके दोनों पुजारी बहुत ही लोकप्रिय व्यावहारिक और अच्छे चरित्र के हैं ना कभी जबरदस्ती पैसा वसूलते हैं और ना अति विशिष्ट कतार में पैसा लेकर लोगों को अंदर जाने देते हैं और बहुत ही सौम्य तथा मृदु व्यवहार भी करते हैं ‌ लेकिन शीतला चौकिया मंदिर की बात कितनी अधिक गंदी हो चुकी है कि यदि आप सभी इस पर अपने विचार व्यक्त नहीं करेंगे और इस पोस्ट को लाइक कमेंट शेयर करके अधिक से अधिक प्रसारित नहीं करेंगे तो यह लोग सुधरने वाले नहीं है। 

चौकिया सहित सभी तीर्थ स्थान का यही हाल है कि एक साधारण कतर भक्तों की लगती है और एक वीआईपी कतर पैसे और पद प्रतिष्ठा को लेकर बनाई जाती है जिसमें ढेर सारा पैसा पुरोहित और वहां ड्यूटी देने वाले पुलिस और दलालों की सहायता से वसूल लिया जाता है और यह लोग मिलकर के मिली मर नूरा कुश्ती करके लाइन को और लंबी करते हैं जिससे कतार में खड़े हुए परिवार के लोग बच्चे लोग या जिन्हें तुरंत दर्शन की आदत होती है बगल होकर इन पुजारी पांडे पुरोहित लोगों से संपर्क करते हैं और यह लोग पीछे के दरवाजे से उनका प्रवेश कर देते हैं इस कारण से भीड़ इतनी हो जाती है कि लोगों की सांस फूलने लगती है कई लोग चौकिया में गिरकर बेहोश हो चुके हैं और कई लोग मर भी चुके हैं जिनको बड़ी चतुराई से पुलिस की सहायता से छिपा दिया गया है क्योंकि अंदर जगह नहीं है और गर्मी के मौसम में वहां पर 5 मिनट खड़े रहना अपनी मृत्यु को दावत देना है जब घंटे से कतार में खड़ा व्यक्ति देखा है कि उसके आगे पैसे देकर लोग आ जाते हैं तो वह बहुत क्रोधित और उत्तेजित हो जाता है और इसीलिए बर्दाश्त से बाहर हो जाने पर पांडा पुरोहित और पुलिस वालों से मारपीट चौकिया में होती रहती है अन्य स्थानों का भी लगभग यही हाल है। 

मैं सनातनी जनता से अनुरोध करूंगा कि यदि ईश्वर के घर पर भी यह हाल है और मंदिरों में भी लोग एक समान नहीं है तो ऐसी जगह जाने का दर्शन पूजन करने का क्या लाभ है ऐसी जगह जाना ही नहीं चाहिए चार या पांच प्रतिशत लोग आज भी शीतला चौकिया में ऐसे पंडित पुरोहित और पुजारी हैं जो बहुत अच्छे स्वभाव के और सदाचारी हैं लेकिन बाकी सब के सब महाभ्ष्ट घूसखोर और चरित्रहीन कुकर्मी हैं ‌ इनमें से अधिकांश तो विभिन्न प्रकार का नशा और मदिरापान करते हैं और मुफ्त में तीर्थ यात्रियों का हराम का पैसा खाकर इतने मोटे ताजे हो जाते हैं कि पुलिस की लाठी टूट सकती है लेकिन इन्हें चोट लगने का कोई प्रश्न नहीं होता यह लोग गाल गुलाबी नैन शराबी और हराम का खाकर गर्मी से भरपूर होकर विभिन्न प्रकार के कुकर्म में भी करते हैं।

और सबसे बड़ी बात इसमें जो रसिक रंगीन स्वभाव के पंड व पूरोहित पुजारी और पुलिस वाले होते हैं वह मंदिर के गर्भ गृह से लेकर निकास स्थान तक खड़े रहते हैं और महिलाओं को बड़े-बड़े ढंग से उनके संवेदनशील स्थानों को पकड़ कर बाहर भीतर करते रहते हैं यदि कोई विरोध करने का साहस करता है तो सभी लोग एक होकर उस पर टूट पड़ते हैं और पुलिस चुपचाप तमाशा देखती रहती हैं लेकिन यदि कोई बड़े पद प्रतिष्ठा वाला व्यक्ति गलती से सामान्य लोगों की कतार में खड़ा है या कोई इन जैसे दुष्ट पंडे पुरोहित पुजारी से जबर  व्यक्ति होता है तब यह इनको मार मार कर कचूमर निकाल देता है और वहां भगदड़ मच जाती है।

पहले यहां केवल शीतल जी की मूर्ति ही थी लेकिन बाद में इन भ्रष्ट पंडा व पुरोहित पुजारी और दलाल लोगों ने मिलकर इसके हर कोने पर एक दर्जन से अधिक मूर्तियां बनाकर छोटे-छोटे मंदिर बना दिए हैं जहां पर खड़े हुए सबसे भ्रष्ट और चरित्रहीन मोटे ताजे लोग जबरदस्ती टीका लगाकर और पूजा करा कर लोगों से पैसा वसूली करते हैं और न देने पर गंदी गालियां भी बकते हैं यह लोग इतने बेहद निर्लज्ज बेशर्म है कि इनको लात घूंसा और गालियां खाने का भी कोई डर या भय नहीं है बस इन्हें पैसा चाहिए किसी भी कीमत पर चाहिए जिसके लिए यह कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। पुलिस प्रशासन का इन्हें कोई भी डर नहीं है क्योंकि वह लोग भी इनके लूट में शामिल होते हैं और पहुंचने पर दर्शन विशिष्ट ढंग से करा दिया जाता है। इनकी गंदगी इतनी अधिक है कि सब कुछ लिखना भी बहुत कठिन है इनमें से अधिकांश लोग गांजा भांग शराब नशे का सेवन करके कुकर्म करते हैं इसीलिए चौकिया के आसपास बसे हुए पांडव पुरोहित उनसे मिले पुलिस और दलाल के घर में ज्यादातर लोग अपंग और अपाहिज अंधे लंगड़े लूले पैदा होते हैं किसी के घर जाकर आप देख सकते हैं तब भी यह लोग अपने को सुधार कर पवित्र और ईश्वर भक्त नहीं बनते हैं।

दर्शन करने वाले जनता विशेष कर स्त्रियां भी कम नहीं होती हैं जब तक वह एक दर्जन देवी देवताओं के आगे मत्था ना टेक लें और सबको पैसा ना दे दें सब पर फूल माला ना चढ़ा ले तब तक उन्हें संतुष्टि ही नहीं होती है यह तो ऐसी ही बात है कि कामधेनु गाय को पाने के बाद बकरी और छेड़ी को दुहना होता है। औरतों की ऐसी मूर्खता और अंधविश्वास का लाभ है चरित्रह दुराचारी गंदे स्वभाव के पंडे पुजारी वसूलकर अशोक खैरात और राम रहीम जैसा कांड कर जाते हैं और लोक लाज के नाच उसको लोग प्रदर्शित नहीं करते हैं। 

यदि आप लोग शीतला चौकिया दर्शन करने गए हैं तो मेरी लिखी हुई बातें एक-एक अक्षर आपको सही लगेगी और यदि नहीं गए हैं तो विश्वास करना कठिन होगा की धर्म स्थान पर क्या सच में जितने गंदे दुश्चरित्र रसिक रंगीन और निर्लज्ज लोग पंडा पुरोहित पुजारी बनकर ऐसा कांड करते हैं और भी ऐसी बहुत सी चीज हैं जो लिखने लायक भी नहीं है ।

अंत में मैं आप सभी से शासन प्रशासन और पुलिस से कहना चाहूंगा की इस पर तुरंत ध्यान देते हुए ऐसे पंडित पुरोहित पुजारी लोगों पर लगाम लगाइए और आप सबसे निवेदन है कि वहां केवल दर्शन करें फूल माला पैसा कुछ भी ना चढ़ाएं क्योंकि वहां आप ईश्वर और माता शीतला देवी का दर्शन करने जाते हैं फूल माला पैसा चढ़ाने नहीं जाते हैं यदि आपको पैसा सोना चांदी या अन्य सामान देना ही है तो शीतला माता को मत दो जिनके पास संपूर्ण ब्रह्मांड की संपत्ति है और जिसे मांगने आप जाते हो बल्कि यह धन और पैसा अपने समाज और धर्म के अच्छे लोगों की पढ़ाई लिखाई और उनकी उन्नत के काम में लगा दो तो विश्वास रखो या पंडे पुरोहित पुजारी दलाल और ड्यूटी देने वाले पुलिसकर्मी अपने आप सुधर जाएंगे नहीं तो यह चरित्रहीन गंदे और रसिक रंगीन स्वभाव के एक कुंतल से दो कुंतल भर वाले हरामखोर लोग इसी तरह अपनी गंदी हरकत करते हुए जनता को लूटते रहेंगे और धीरे-धीरे सारे हिंदू तीर्थ और धर्म स्थान कलंकित हो जाएंगे और लोग वहां जाना छोड़ देंगे मैंने जो भी बात लिखा है उसे पर निष्पक्ष राय दीजिए कि क्या इसमें से एक भी बात गलत है ‌ महिलाओं से भी निवेदन है कि यदि वे दर्शन करने जाती हैं और यह पांडे पुरोहित पुलिस वाले या मा उपस्थित  लंपट कामुक छिनरे कुपंथी दुराचारी और मैथुनिक ‌ पंडित पुरोहित पुजारी पुलिस वाले या उनके सहयोगी आपको गलत ढंग से छूते हैं या अश्लील हरकत करते हैं तो पहले जूते चप्पल से उनकी धुनाई करें और तुरंत 1098 1090 पर फोन करके पुलिस बुलाकर इनको उनके हवाले कर दे या फिर 15100 नंबर पर डायल करें ऐसा करने पड़े लोग कुछ दिन बस सुधर जाएंगे और शीतला माता चौकिया की पवित्रता विद्यमान रहेगी - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि
[4/1, 10:15 PM] +91 94511 61205: Sahi baat kaha hai ap ne

Sunday, 12 April 2026

राजपूत और शराब *मुगल बादशाह का दिल्ली में दरबार लगा था और हिंदुस्तान के दूर दूर के राजा महाराजा दरबार में हाजिर थे। उसी दौरान मुगल बादशाह ने एक(मजाक) दम्भोक्ति की है कोई हमसे बहादुर इस दुनिया में है?

*राजपूत और शराब*
मुगल बादशाह का दिल्ली में दरबार लगा था और हिंदुस्तान के दूर दूर के राजा महाराजा दरबार में हाजिर थे। उसी दौरान मुगल बादशाह ने एक(मजाक) दम्भोक्ति की है कोई हमसे बहादुर इस दुनिया में है?

सभा में सन्नाटा सा पसर गया, एक बार फिर वही दोहराया गया! तीसरी बार फिर उसने ख़ुशी से चिल्ला कर कहता कोई है हमसे बहादुर जो हिंदुस्तान पर सल्तनत कायम कर सके?

सभा की खामोशी तोड़ती एक बुलन्द शेर सी दहाड़ गूंजी तो सबका ध्यान उस शख्स की ओर गया। वो जोधपुर के महाराजा राव रिड़मल राठौड़ थे। रिड़मल जी राठौड़ ने कहा, मुग़लों में बहादुरी नहीँ कुटिलता है। सबसे बहादुर तो राजपूत है दुनियाँ में। मुगलो ने राजपूतो को आपस में लड़वा कर हिंदुस्तान पर राज किया।

कभी सिसोदिया राणा वंश को कछवाह जयपुर से तो कभी राठोड़ो को दूसरे राजपूतो से। बादशाह का मुँह देखने लायक था ,ऐसा लगा जैसे किसी ने चोरी करते रंगे हाथो पकड़ लिया हो।

बातें मत करो राव उदाहरण दो वीरता का।

रिड़मल राठौड़ ने कहा क्या किसी कौम में देखा है किसी को सिर कटने के बाद भी लड़ते हुए??

बादशाह बोला ये तो सुनी हुई बात है देखा तो नही, रिड़मल राठौड़ बोले इतिहास उठाकर देख लो कितने वीरो की कहानिया है सिर कटने के बाद भी लडऩे की।

बादशाह हंसा और दरबार में बैठे कवियों की ओर देखकर बोला इतिहास लिखने वाले तो मंगते होते है। मैं भी सौ मुगलों के नाम लिखवा दूँ इसमें क्या? मुझे तो जिन्दा ऐसा राजपूत बताओ जो कहे कि मेरा सिर काट दो मैं फिर भी लड़ूंगा।

राव रिड़मल राठौड़ निरुत्तर हो गए और गहरे सोच में डूब गए। रात को सोचते सोचते अचानक उनको रोहणी ठिकाने के जागीरदार का ख्याल आया। उसी रात रोहणी ठिकाना (जोकि जोधपुर रियासत जेतारण कस्बे में थी) में दो घुड़सवार बुजुर्ग जागीरदार के पोल पर पहुंचे और मिलने की इजाजत मांगी। ठाकुर साहब काफी वृद्ध अवस्था में थे फिर भी उठ कर मेहमान की आवभगत के लिए बाहर पोल पर आये।

घुड़सवारों ने प्रणाम किया और वृद्ध ठाकुर की आँखों में चमक सी उभरी और मुस्कराते हुए बोले, जोधपुर महाराज आपको मैंने गोद में खिलाया है और अस्त्र शस्त्र की शिक्षा दी है। इस तरह भेष बदलने पर भी मैं आपको आवाज से पहचान गया हूँ। हुकम आप अंदर पधारो। मैं आपकी रियासत का छोटा सा जागीरदार, आपने मुझे ही बुलवा लिया होता। राव रिड़मल राठौड़ ने उनको झुककर प्रणाम किया और बोले एक समस्या है, और बादशाह के दरबार की पूरी कहानी सुना दी।

अब आप ही बताये कि जीवित योद्धा का कैसे पता चले कि ये लड़ाई में सिर कटने के बाद भी लड़ेगा?

रोहणी जागीदार बोले, बस इतनी सी बात। मेरे दोनों बच्चे सिर कटने के बाद भी लड़ेंगे और आप दोनों को ले जाओ दिल्ली दरबार में ये आपकी और राजपूती की लाज जरूर रखेंगे।

राव रिड़मल राठौड़ को घोर आश्चर्य हुआ कि एक पिता को कितना विश्वास है अपने बच्चों पर। मान गए राजपूती धर्म को। सुबह जल्दी दोनों बच्चे अपने अपने घोड़ो के साथ तैयार थे!

उसी समय ठाकुर साहब ने कहा, महाराज थोडा रुकिए। मैं एक बार इनकी माँ से भी कुछ चर्चा कर लूँ इस बारे में। राव रिड़मल राठौड़ ने सोचा आखिर पिता का हृदय है, कैसे मानेगा, अपने दोनों जवान बच्चो के सिर कटवाने को? एक बार रिड़मल जी ने सोचा की मुझे दोनों बच्चो को यही छोड़कर चले जाना चाहिए।

ठाकुर साहब ने ठकुरानी जी को कहा, आपके दोनों बच्चो को दिल्ली मुगल बादशाह के दरबार में भेज रहा हूँ सिर कटवाने को ,दोनों में से कौन सा सिर कटने के बाद भी लड़ सकता है? आप माँ हो आपको ज्यादा पता होगा।

ठकुरानी जी ने कहा, बड़ा लड़का तो किले और किले के बाहर तक भी लड़ लेगा पर छोटा केवल पर कोटे में ही लड़ सकता है क्योंकि पैदा होते ही इसको मेरा दूध नही मिला था। लड़ दोनों ही सकते हैं, आप निश्चिंत होकर भेज दो।

दिल्ली के दरबार में आज कुछ विशेष भीड़ थी और हजारो लोग इस दृश्य को देखने जमा थे। बड़े लड़के को मैदान में लाया गया और मुगल बादशाह ने जल्लादो को आदेश दिया कि इसकी गर्दन उड़ा दो। तभी बीकानेर महाराजा बोले ये क्या तमाशा है? राजपूती इतनी भी सस्ती नही हुई है , लड़ाई का मौका दो और फिर देखो कौन बहादुर है? बादशाह ने खुद के सबसे मजबूत और कुशल योद्धा बुलाये और कहा ये जो घुड़सवार मैदान में खड़ा है उसका सिर काट दो। 20 घुड़सवारों को दल रोहणी ठाकुर के बड़े लड़के का सिर उतारने को लपका और देखते ही देखते उन 20 घुड़सवारों की लाशें मैदान में बिछ गयी। दूसरा दस्ता आगे बढ़ा और उसका भी वही हाल हुआ, मुगलो में घबराहट और झुरझुरी फैल गयी। इसी तरह बादशाह के 500 सबसे ख़ास योद्धाओ की लाशें मैदान में पड़ी थी और उस वीर राजपूत योद्धा के तलवार की खरोंच भी नही आई। ये देख कर मुगल सेनापति ने कहा पाँच सौ मुगल बीबियाँ विधवा कर दी, आपकी इस परीक्षा ने। अब और मत कीजिये हजुर, इस काफिऱ को गोली मरवाईए। हजुर, तलवार से ये नही मरेगा।

कुटिलता और मक्कारी से भरे मुगलों ने उस वीर के सिर में गोलियां मार दीं। सिर के परखच्चे उड़ चुके थे पर धड़ ने तलवार की मजबूती कम नही करी और मुगलों का कत्लेआम खतरनाक रूप से चलते रहा। बादशाह ने छोटे भाई को अपने पास निहत्थे बैठा रखा था, ये सोच कर कि ये बड़ा यदि बहादुर निकला तो इस छोटे को कोई जागीर दे कर अपनी सेना में भर्ती कर लूंगा लेकिन जब छोटे ने ये अंन्याय देखा तो उसने झपटकर बादशाह की तलवार निकाल ली। उसी समय बादशाह के अंगरक्षकों ने उनकी गर्दन काट दी फिर भी धड़ तलवार चलाता गया और अंगरक्षकों समेत मुगलो का काल बन गया।

बादशाह भाग कर कमरे में छुप गया और बाहर मैदान में बड़े भाई और अंदर परकोटे में छोटे भाई का पराक्रम देखते ही बनता था। हजारो की संख्या में मुगल हताहत हो चुके थे और आगे का कुछ पता नही था। बादशाह ने चिल्ला कर कहा, अरे कोई रोको इनको।

राजा के दरबार का एक मौलवी आगे आया और बोला इन पर शराब छिड़क दो। राजपूत का इष्ट कमजोर करना हो तो शराब का उपयोग करो। दोनों भाइयो पर शराब छिड़की गयी ऐसा करते ही दोनों के शरीर ठन्डे पड़ गए।

मौलवी ने बादशाह को कहा, हजुर ये लडऩे वाला इनका शरीर नही बल्कि इनकी कुलदेवी है। ये राजपूत शराब से दूर रहते है और अपने धर्म और इष्ट को मजबूत रखते है। यदि मुगलो को हिन्दुस्तान पर शासन करना है तो इनका इष्ट और धर्म भ्रष्ट करो और इनमें दारु शराब की लत लगाओ। यदि मुगलों में ये कमियां हटा दें तो मुगल भी मजबूत बन जाएंगे। उसके बाद से ही राजपूतो में मुगलो ने शराब का प्रचलन चलाया और धीरे धीरे राजपूत शराब में डूबते गए। दूसरी ओर मुगलों ने मुसलमानों को कसम खिलवाई की शराब पीने के बाद नमाज नही पढ़ी जा सकती। इसलिए इससे दूर रहें।

क्या गाय धरती गायत्री मंत्र गीता और गंगा नदी मां है -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

क्या गाय धरती गायत्री मंत्र गीता और गंगा नदी मां है -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 

गलत व्याख्या करके धर्म गुरु पंडा पुरोहित पुजारी ‌ आधे अधूरे ज्ञान के सन्यासी कथावाचक संत महंत सनातन धर्म को घोर संकट में डाल देते हैं गाय और धरती ‌ गंगा गीता गायत्री मां नहीं है मां जैसी हैं।‌ इतना ही नहीं अनाथ बच्चों का पालन पोषण करने वाली मां से बड़ी मानी जाती है यशोदा मां और हलीमा जैसे अनगिनत उदाहरण पड़े हुए हैं।

जिस तरह बालक को दूध पिलाने वाली दाई या धाय दूसरी मां के समान समझी जाती है इस तरह गाय का दूध बिल्कुल माता जैसा होता है इसके गोबर में गंध नहीं होती ‌ इसका प्रयोग लिपाई पुताई सहित हर काम में होता है परमाणु और हाइड्रोजन बम के विकिरण को रोकने वाली एकमात्र धरती पर यही वस्तु है और कोई भी पशु गाय के जितना पवित्र और उपयोगी नहीं है इसीलिए हमारे ऋषि मुनियों ने इसको बिल्कुल माता जैसी कहा ‌ गाय का हर चीज अमृत और दवा जैसा है गाय के मूत्र का पान करने वाले जो लोग हैं वह हमेशा स्वस्थ निरोग रहते हैं और सबसे महंगी दवाई भी गाय के मूत्र को मिलाकर बनती हैं।


इसी तरह धरती को मां इसीलिए कहा गया कि जिस तरह मां आज जीवन बच्चे का पालन पोषण करती है उसका मल मूत्र उठाती है फिर भी उससे घृणा नहीं करती धरती मां पर ही व्यक्ति का सारा जीवन बिताता है उसी पर वह मल मूत्र करता है थूकता है फिर भी वह आजीवन हर व्यक्ति का पालन ‌ पोषण बिना भेदभाव करती है यहां तक की मृत्यु के बाद भी व्यक्ति को विश्राम धरती की गोद में ही मिलता है ‌ जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी। 

इसी तरह गंगा को मां इसीलिए कहा जाता है कि वह मां के समान हर प्राणियों का उद्धार करने वाली और सारे पापी लोगों के पाप का हरण करने वाली है विज्ञान का सत्य है कि गंगाजल की तरह आज भी कोई जल पूरी दुनिया में नहीं होता किसी भी नदी का जल गंगा और नर्मदा को छोड़कर एक सप्ताह से अधिक रखने पर वह गंदा और विषैला हो जाता है ‌ गंगा का पानी बिल्कुल अमृत जैसा बहुत ही शीतल और स्वास्थ्यवर्धक होता है क्रिश्चियन और तुर्क मुस्लिम भी इसके जल का उपयोग करते थे।इसलिए गंगा को गंगा मां जैसा कहते हैं ।

इसी तरह गीता को भी भारत में उच्च स्थान प्राप्त है क्योंकि यह हमारा निर्देश सही मार्ग पर चलने को करती है ‌ इस तरह मां अपने बच्चों को सही रास्ते पर चलकर सर्वोच्च स्थान प्राप्त करना सिखाती है वैसे ही गीता में दिए गए दिशा निर्देश हमें सारे कर्म करते हुए अंत में मुक्ति या मोक्ष का मार्ग दिखाते हैं जहां सभी लोग एक जैसे समभाव वाले होते हैं इसलिए गीत धार्मिक ग्रंथ होने के साथ-साथ एक आध्यात्मिक मां के समान है ।

वेद मंत्र गायत्री को भी मां के समान कहा जाता है इसलिए गायत्री मंत्र ‌ सर्व सिद्ध कहा जाता है क्योंकि गायत्री मंत्र संपूर्ण वसुधा के हर प्राणी का कल्याण करने वाला है और इसको कोई भी पढ़ सकता है ‌ इसके मंत्र में अपूर्व और अद्भुत शक्ति होती है जिसका निर्माण ब्रह्म ऋषि विश्वामित्र ने किया और आज तक अवतार को छोड़ दिया जाए तो वह सबसे बड़े ब्रह्म ऋषि और सबसे बड़े अतिरथी योद्धा हैं।

जो सनातनी होकर भी विधर्मी लोगों के वीर्य से पैदा होकर छिपे हुए वर्ण शंकर और दोगले हैं जो विदेशी एजेंट है जो सनातन धर्म को खोखला कर रहे हैं जो सनातनी होकर भी काले अंग्रेज और मैकाले के मानस पुत्र तथा विदेशीकृत दास बनते हैं वही उपयुक्त चीजों पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं। 

वरना यह वैज्ञानिक धार्मिक और आध्यात्मिक सत्य है कि गंगा गीता गायत्री वसुधा और गाएं मां नहीं बल्कि मन से बढ़कर है मां का तो स्वार्थ होता है पुत्र से लेकिन इन चीजों का स्वार्थ किसी से कुछ भी नहीं होता। धन्य हैं भारतीय ऋषि मुनि और हमारे धर्म ग्रंथ जिन्होंने कहा कि जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी यह इसलिए लिखना पड़ा की तमाम दुष्ट विधर्मी और सनातन धर्म के भटके हुए लोग बार-बार इस तरह के प्रश्न पूछ कर हमारे सभी धर्म गुरु लोगों को निरुत्तर कर देते थे जो रसमलाई बैकुंठ भोग शिलाजीत वियाग्रा और लिबिडेक्स जैसी चीजें खाकर दुष्कर्म करते हुए जेल में जाकर सनातन धर्म को गहरा आघात पहुंचाते हैं ।‌ आप सोच लो यदि ईश्वर के धर्म स्थान पर भी विशिष्ट और अति विशिष्ट कतार लगाकर सामान्य ज्ञान को घंटा धूप में खड़ा रखकर ऐसे धनी लोग राजनेता अधिकारी लोगों को सीधे दर्शन कराया जाता है जो पाप अन्य अत्याचार के पुतले हैं तो लोगों की आस्था कैसे भगवान में जागेगी सबसे अधिक दुष्ट चौकिया धाम के पंडित पुजारी हैं जो निहायत लंपट कामुक छिनरा कुपंथी दुराचारी और मैथुनिक रावण ‌ जैसे होकर धर्मस्थल की मर्यादा को भंग करते हैं लगभग 97 से 99% पुजारी पांडे पूरे भारत में ऐसे ही हैं।

इसीलिए मैंने बार-बार 35 वर्ष से कहा कि जो खुद को संत महंत सन्यासी मठाधीश पुजारी पांडा पुरोहित बनाएं उसका बंध्याकरण कर दो असली होगा तो नागा साधु की तरह खुद ही अपने को बधिया कर लेगा नकली होगा तो मठ मंदिर धर्म स्थान छोड़कर भाग खड़ा होगा । इसीलिए आज तक लाखों करोड़ों वर्ष के इतिहास में नागा साधु संत होकर कोई आप नहीं लगा है।


जनता भी मूर्ख है वह कीचड़ की जगह संगमरमर के तालाब में कमल खोजती है और गाड़ी बंगला हवाई जहाज सारी सुख सुविधाओं वाले चमत्कारी ढोंगी हिंदू मुस्लिम ‌ क्रिश्चियन यहूदी सिख या बुद्ध धर्म गुरुओं ‌ पुजारी संत महंत कथा वाचक उपदेश पुरोहित पंडा साधु संत की शरण में जाकर हल होकर चली जाती है जिनके पास न ज्ञान है ना सदाचार है ना नैतिकता है इसमें एक दो प्रतिशत धर्म गुरु छोड़कर लगभग सभी धर्मगुरु शामिल है मेरी समझ से कीनाराम बाबा के अनुयाई अघोर पंथ के लोग और अड़गड़ानंद जी को छोड़कर बाकी सब के सब ढोंगी दुष्कर्म और भौतिक सुख सुविधाओं में लिप्त रहने वाले हैं इसके अलावा लाखों संत महात्मा हैं लेकिन वह अज्ञात जगह पर तब साधना करके भारत देश और सनातन धर्म को बचा रहे हैं ।

आसाराम संत रामपाल राम रहीम म***** मौलवी पादरी विश्व अशोक खैरात जैसे आजकल के भौतिक सुख सुविधा वाले 99 परीक्षित साधु संत महात्मा महाराज नेताओं और बड़े-बड़े धन कुबेर लोगों के बने होते हैं जो अपने काले धन को इनके माध्यम से सफेद करके पंच मकार का भोग उनके आश्रम में जाकर करके चले आते हैं और जब बड़े-बड़े अधिकारी राजनेता सांसद विधायक मंत्री प्रधानमंत्री राष्ट्रपति और धन कुबेर लोगों का भेद खुलने लगता है तो या तो इस बाबा को जेल में डाल देते हैं या ऐसे बाबो को दुनिया से ही विदा कर देते हैं 

गलत चीज का अंत हमेशा गलत ही होता है सच्चा साधु संत महात्मा धर्मगुरु पुरोहित कथा वाचक उपयुक्त लोगों से दूर रहकर की जनता की भलाई करते हुए साधना करता है और उसी के लिए गंगा गीता गायत्री गए सब मां जैसी होती हैं 

इसलिए है भारत की सनातन जनता गलत रास्ते पर मत जाओ अपने धर्म ग्रंथ पढ़ो उसमें सब कुछ दिया है साधु संत महात्मा सन्यासी पुरोहित पंडा में आज एक प्रेषित सही बच्चे हैं सोच समझकर इनके पास जाओ 

इतना आवश्यक कहना चाहूंगा कि उपर्युक्त सभी हमारी मां के समान है लेकिन देश का कोई पीता नहीं हो सकता है यदि राष्ट्रपिता जैसा कोई हो सकता है तो वह केवल भगवान श्री रामकृष्ण नानक महावीर भगवान बुद्ध जैसे लोग भर सकते हैं गांधी जैसा व्यक्ति राष्ट्रपति पिता होने को तो छोड़ दो एक सामान्य व्यक्ति भी होने योग्य नहीं है 

इसलिए निश्चित रूप से बिना किसी संदेह के गए धरती गंगा गीता और गायत्री मां के समान होने के कारण माही हैं जो हमारे धर्म ग्रंथो में और वैज्ञानिक ग और दर्शन में लिख दिया गया वह संसार में कोई नहीं काट सकता है जबकि अन्य धर्म के लोग अपने धर्म को आंख मुड़ कर मानते हैं जबकि उनका धर्म पूरी तरह गलत सदाचार हिंद मानवता के विरुद्ध हिंसा और हत्याओं से भरा हुआ है जिसमें धरती को चपटी बताया गया है चंद्रमा के दो टुकड़े करना बताने से लेकर सूर्य को कीचड़ में डूबना और अनगिनत सत्य बात बताई गई है इसलिए अपने सनातन धर्म को आप मानकर सरकारी राजनीति में नवोदयते हुए जितने भी धरती पर गैर मुस्लिम गैर ईसाई गैर यहूदी है सबको सनातन धर्म में लाने का प्रयास कीजिए ‌ क्योंकि यह सभी सनातन ही हैं वैसे क्रिश्चियन यहूदी और मुस्लिम भी सनातन धर्म से ही परिवर्तित हुए हैं।तभी धरती पर शांति होगी समृद्धि होगी स्वस्थ लोग होंगे और राम राज्य कायम होकर सनातन धर्म पूरी दुनिया में फैल जाएगा

Saturday, 11 April 2026

क्या होता है चपरासी का पद

क्या होता है चपरासी का पद

चपरासी शब्द सुना है आपने? जो पुराने लोग होंगे उन्होंने जरूर सुना होगा। #चपरासी का क्या मतलब होता है । आप सोच रहे होंगे कि आज अचानक मैंने ये बिंदु क्यों उठाया। तो दिल थाम के बैठिए कि ये चपरासी की कहानी क्या गुल खिलाने वाली है।

तो पहले बता दूँ कि चपरासी शब्द बना चपरास से बना है जिसकी उत्पत्ति तुर्की मूल की है और जिसके मायने होते हैं धातु का बिल्ला।

चपरास' असल में धातु (पीतल या तांबा) की एक तख्ती या बिल्ला होता था। पुराने समय में राजाओं, नवाबों और फिर ब्रिटिश काल के दौरान सरकारी अधिकारियों के संदेशवाहकों या अर्दली के पास यह बिल्ला होता था।

यह चपरास आमतौर पर एक चमड़े के पट्टे पर लगा होता था, जिसे कंधे से कमर तक तिरछा पहना जाता था। इस धातु की पट्टी पर उस विभाग या अधिकारी का नाम या पद गुदा होता था, जिसका वह व्यक्ति प्रतिनिधित्व करता था।

स्वतंत्रता के बाद में भी सरकारी कार्यालयों में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी को चपरासी ही कहा जाता था। लेकिन समय के साथ ऐसा महसूस किया जाने लगा कि ये शब्द #गुलामी का प्रतीक है और इसलिए इसे हटा कर ‘कार्यालय सहायक’ कहा जाने लगा।

इसी तरह बहुत से ऐसे शब्दों को जो व्यक्ति की गरिमा को कम करते थे उन्हें हटाया गया। जैसे घरों में काम करने वाले लोगों को ‘हाउस हेल्प’ कहा जाने लगा। इसी प्रकार विकलांग को ‘ दिव्यांग’, पागल को ‘ मानसिक अस्वस्थ’, भंगी को ‘ सफ़ाई मित्र ‘, मेहतर को ‘ पर्यावरण सहायक ‘, नौकर को ‘ डोमेस्टिक हेल्प ‘ कहा जाने लगा है। यहाँ तक कि वेश्या के लिए ‘ सेक्स वर्कर ‘ शब्द का प्रयोग किया जाने लगा है।

शब्दों का यह बदलाव केवल 'नाम बदलना' नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि समाज अब काम के आधार पर व्यक्ति की गरिमा को नहीं आंकना चाहता। भाषा का यह परिमार्जन हमें अधिक सभ्य और संवेदनशील बनाता है।

एक ओर हम व्यक्ति की गरिमा के सम्मान के लिए इतने बदलाव कर रहे हैं दूसरी ओर राजनीति में ठीक इसके उलट हो रहा है। अभी कल मैं संसद में नेता विपक्ष का आसाम की किसी चुनावी सभा का वीडियो देख रहा था। उस वीडियो में वो असम के मुख्यमंत्री के लिए जिस तरह की भाषा का प्रयोग कर रहे थे किसी सड़क झाप टपोरी से भी बदतर थी।

अभी आप में से बहुत लोग ये कहेंगे कि भाजपा मे भी लोग ऐसी भाषा का प्रयोग करते हैं आपको केवल राहुल जी ही क्यों दिखते हैं। मोदी नहीं दिखते? दिखते हैं, लेकिन मोदी कभी इस तरह नहीं बोलते कि राहुल ऐसा करता है या वैसा करता है। राहुल जी उम्र में लगभग बीस साल छोटे हैं फिर भी मोदी जी ऐसे नहीं बोलते। दूसरी बात राहुल जी कांग्रेस के सबसे बड़े नेता हैं, #संसद में #नेताविपक्ष हैं और उनसे ये उम्मीद की जाएगी कि वो भाषा में संयम रखें और किसी भी व्यक्ति की गरिमा को नीचा न दिखायें। 

जब वो एक राज्य के चुने हुए #मुख्यमंत्री के प्रति ऐसे शब्दों का प्रयोग करते हैं तो वो अपनी पार्टी के नेताओं के साथ कैसे पेश आते होंगे ये सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।