मौसम की भविष्यवाणी - डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 7017713978
15 जून से 25 जून तक आसमान से बरसेगी आज सभी दिशाएं हो जाएगी लाल धरती बन जाएगी तपती हुई भट्टी उमस और पसीने से हो जाएंगे लोग बेहाल केवल हमारे केंद्र की भविष्यवाणी सही होनी बाकी सभी सरकारी और प्राइवेट मौसम विभाग हर वर्ष की तरह इस बार भी मुंह की खाएंगे अल नीनो और विभिन्न प्रभावों से मानसून रहेगा बहुत कमजोर 25 अक्टूबर तक पड़ेगी घनघोर गर्मी इसका प्रभाव केवल जोधपुर और जौनपुर के आसपास के जनपदों पूर्वांचल उत्तर प्रदेश में ही नहीं अपितु जम्मू कश्मीर से लेकर केरल कन्याकुमारी गुजरात राजस्थान से लेकर अरुणाचल प्रदेश उड़ीसा हर जगह पड़ेगा शरीर की क्षमता आधी होजाएगी।
इसी बीच हवाओं की दिशा पश्चिम गति 10 से 20 किलोमीटर प्रति घंटा होगी मानसून और मानसून बादलों का दूर-दूर तक कोई नामोनिशान नहीं है जैसा कि हमारे केंद्र द्वारा बार-बार दर्जनों बार कहा गया इस वर्ष का मानसून अनिश्चित अनियमित और विलंबित रहेगा। सूखा और सूखे जैसी स्थितियां पड़ना निश्चित है क्योंकि मानसून बहुत पहले ही आकर केरल कर्नाटक तक सीमित रहकर 15 म ई से 25 म ई तक समाप्त हो चुका है दूसरा चक्र 4 जून को आया वह बहुत कमजोर था इस बीच संपूर्ण भारत में अधिकांश स्थानों का तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस अधिकतम और 25 से 35 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम रहेगा जो अत्यंत ही भयानक स्थिति है।
प्रदूषण की मात्रा अत्यधिक रहेगी पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 5 से 7 और वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 के आसपास रहेगी इसलिए गर्मी उमस और जलन भी भयंकर प्रलयंकर गर्मीसे अभी कम से कम एक सप्ताह तक मुक्ति मिलने की संभावना नहीं है वर्षा की दूर-दूर संभावना नहीं है अचानक परिवर्तन के फलस्वरूप कहीं-कहीं तेज हवा बूंदाबादी हो सकती है उसकी भी अधिक संभावना नहीं है। 15 जून से 25 जून के बीच केवल एक बार आंधी तूफान वर्षा चमक गरज और वज्रपात का योग है जिससे थोड़ी सी राहत मिल जाएगी।
जौनपुर और आसपास ही नहीं पूरे देश की यही स्थिति है दो-तीन दिन केरल कर्नाटक और आसपास वर्षा करने के बाद मानसूनी बादल पूरे भारत से अदृश्य हो चुके हैं अब तक मानसून महाराष्ट्र गुजरात मध्य प्रदेश झारखंड बिहार तक पहुंच जाना चाहिए था क्योंकि जौनपुर और उत्तर प्रदेश में 19 -21 जून तक पहुंच जाता है इस बार इसके 27 से 30 जून के बीच आने की संभावना बन रही है इसीलिए हमारे केंद्र द्वारा कृषि बागवानी से संबंधित लोगों को बार-बार सुझाव चेतावनी दिया गया था कि इस वर्ष सूखे वाले फसलों की तैयारी कर ले और 25 अक्टूबर तक प्रचंड गर्मी उमस पसीना झेलने के लिए तैयार रहे -
दिनों दिन इस प्रकार का प्राकृतिक प्रकोप सूखा अकाल महामारी वर्षा बाढ़ अति वृष्टि जैसी स्थितियां बढ़ती जाएंगे मनुष्य के द्वारा भयानक प्रदूषण और प्रकृति पर्यावरण के साथ किया गया खिलवाड़ अब खुलकर सामने आने लगा है भारत ही नहीं यह पूरी दुनिया को भीषण रूप से प्रभावित करके तरस-नस कर देगा अमेरिका यूरोप में भी पड़ेगी भीषण गर्मी और हजारों लोग मारे जाएंगे।
और बड़े-बड़े वैज्ञानिक मौसम विज्ञानी और पश्चिमी विद्वान और उनकी नकल करके दुनिया भर के विद्वान जो नौटंकी वाले कारण बता रहे हैं उनमें से एक भी कारण नहीं है प्रकृति और पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ के कारण ही ऐसी स्थितियां उत्पन्न हुई है इसमें से मुख्य हैं वनों और हरियाली का लगातार गायब होना नए पेड़ पौधे पृथ्वी पर लगाने कीजगह भाषणों कागजों और विज्ञापन में लगाना पौधों का पैसा जेब में रख लेना प्रकृति और पर्यावरण में भयंकर प्रदूषण पैदा करना प्लास्टिक पूरा कचरा इलेक्ट्रॉनिक कचरा रेडिएशन वाला कचरा जल और वायु को गंदा करना सीमेंट कंक्रीट और पत्थर के जंगल पैदा करना जमीन का लगातार मिट्टी की जगह सीमेंट कंक्रीट और पत्थरों से ढकते चले जाना और उद्योग धंधों का लगातार बिना नियंत्रण के बढ़ते चले जाना इसके मुख्य कारण हैं
इसके अलावा समुद्र में फैल रहा भीषण प्रदूषण मनुष्य की जनसंख्या का हिसाब बढ़ाना लगातार युद्ध परमाणु परीक्षण और परमाणु केंटो में विस्फोट साबुन डिटर्जेंट पाउडर फ्रिज रेफ्रिजरेटर और बिजली के चूल्हा का भीषण प्रयोग लकड़ी ऊपरी और प्राकृतिक चीजों का लगातार प्रयोग घटना जल के स्रोत कुएं तालाब झील पोखर झरने बावली इत्यादि की जगह घर-घर जेट पंप और सबमर्सिबल लगाकर धरती को जल रहित बनाना जैसे आत्मघाती प्रवृत्तियां मानव सभ्यता को विनाश की ओर ले जा रहे हैं और इस वर्ष तो भयंकर अल-नीनो ने इन सबको और भी अधिक बढ़ा दिया है ऊपर से सूर्य में हो रही प्रचंड नाभिकीय क्रियाएं और प्रचंड विस्फोट धरती को और भी गरम और असंतुलित कर रहे हैं।