देश में कितना भयानक परिवर्तन आ रहा है एक झलक मिलते हैं लोग कहीं जाते हैं यदि छोटा भी पुरस्कार सम्मान ही स्मृति चिन्ह पाए जाते हैं या फूल माला से उन्हें सम्मानित किया जाता है तो अपने साथ अपने फोटोग्राफर लेकर चलते हैं और उसको खूब बढ़ा चढ़ा कर इस तरह से उच्च प्रदर्शन अर्थात हाईलाइट करते हैं मानो उन्हें भारत रत्न और संयुक्त राष्ट्र संघ का पुरस्कार और नोबेल पुरस्कार मिल गया है । और बहुत बाद में मुझे पता चला की बड़े-बड़े नेता नेती और अन्य लोग अपने चापलूसों की फौज भी ताली बजाने के लिए साथ लेकर जाते हैं इसलिए जब यह 10 20 50 100 लोग ताली पीटते हैं तो बाकी को भी पीटना पड़ता है।
एक हम लोगों का समय था 1971 से लेकर आज तक जनपद अस्त्र से लेकर प्रदेश देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार स्मृति चिन्ह सम्मान पत्र प्रमाण पत्र एवं अनगिनत विजेता वैजयंती अर्थात ट्रॉफी इतना प्राप्त किया जिसको 1 दिन में कोई गिन नहीं सकता । एक बात और है कि मैं बहुत पहले से ही शायद 1990 से ऐसी जगह पर जाना छोड़ दिया था जहां छोड़ डकैत बलात्कारी दुष्कर्म धन माफिया और गबन करने वाले जनता का धन चूसने वाले भ्रष्ट और घूसखोरी लोग अध्यक्ष मुख्य अतिथियों संचालक नियुक्त होते हैं क्योंकि वहां जनक खुद को अपमानित करने के बराबर है यह ऐसा न करता तो आज एक कमरा भरकर केवल पुरस्कार प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह से भरा होता।
यह पुरस्कार स्मृति चिन्ह ट्रॉफी सम्मान पत्र और प्रमाण पत्र दर्जन या सौ नहीं बल्कि हजारों की संख्या में है और आश्चर्य की बात है कि हजारों में से मैंने एक भी छायाचित्र किसी से कहकर नहीं खिंचवाया कुछ असली शुभचिंतक लोगों ने खींच कर भेज दिया वहीं पड़े हुए हैं यदि मैं ऐसा करता तो आज मेरे घर में इन सबको रखने की जगह नहीं होती आज भी नहीं है । इतना अवश्य है कि हमारे 99% सहयोगी साथी और विभाग में साथ का काम करने वाले लोगों ने और ऊपर से शुभचिंतक बनने का ढोंग करने वालों ने कभी भी एक भी छायाचित्र या वीडियो बनाकर मुझे आज तक नहीं भेजा है।
यही कारण है कि आज 1 वर्ष में एक जिले में हजारों लोग अचानक बड़ी तेजी से ऊपर उठते हैं या यूं कहिए कि ऊपर उठाए जाते हैं और अगले वर्ष उनका नाम और निशान नहीं रहता इसलिए बाद कम कीजिए पुरस्कार इसमें चिन्ह तो नश्वर है बहुत जल्दी समाप्त हो जाएंगे यदि चाहते हो दुनिया तुम्हें याद करे तो तुम दुनिया के ऊपर दया करो यदि चाहते हो कि तुमको लाभ हो तो सब का भला करो याद रखो ।
अनगिनत राही गये इस राह से उनका पता क्या।
पर गए कुछ छोड़ ईश्वर अपने पैरों की निशानी।
यही हाल भारत के हर क्षेत्र का है लाल बहादुर शास्त्री को छोड़कर आज तक कोई भी प्रधानमंत्री ऐसा नहीं हुआ जिसको याद किया जा सके जो भारत भक्ति सनातन भक्त हो इसी तरह डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को छोड़कर कोई भी सनातन भक्त भारत भक्ति राष्ट्रपति नहीं हुआ इसलिए किसी का नाम याद नहीं किया जाता ।
अच्छे लोगों का नाम धीरे-धीरे फैलता है और मरने के बाद पूरी दुनिया में छा जाता है जबकि जबरदस्ती चमचों के सहारे पाए हुए लोग अधिक स्थाई नहीं रहते यही हाल संत महंत धर्म गुरु मताधिक और उपदेश तथा वाचन का है जो अंदर से बिल्कुल काले और अधिकांश दुष्कर्म होते हैं और पड़कर जेल जाते हैं अपना नुकसान तो करते ही हैं इससे देश कलंकित होता है और धर्म का सम्मान घटना है जितने भी धर्मगुरु हैं यह सभी इसी श्रेणी के हैं इसमें अपवाद केवल बाबा कीनाराम भगवान अवधूत राम और अघोर पंथ के अनुयाई और चुनार के पीठाधीश्वर कहे जा सकते हैं जिनका मुख्यालय शक्तेशगढ़ में है । वैसे तो और भी बहुत है लेकिन धन कुबेर राजनेताओं और अपराधियों का संरक्षण न देने के कारण इनका नाम प्रचारित प्रसारित नहीं है यही कारण है कि मंचों पर अपराधी दुराचारी दुष्कर्म बलात्कारी और पानी की तरह पैसा बहाने वाले जब सादा जीवन उच्च विचार और सदाचार का उपदेश देते हैं तो जनता को यही लगता है कि इनको जूता चप्पल निकाल कर मर जाए।
यही कारण है कि जौनपुर के 99% लोग 10 साल पहले के किसी भी प्रख्यात विभूति का नाम पूछने पर नहीं बता सकते हैं वास्तव में यदि देखा जाए तो राजनेता धर्म गुरु कथावाचक माफिया आवर्धन कुबेर एक दूसरे की मदद करते हुए उनका महिमा मंडल करके मान सम्मान प्राप्त करते हैं जिसके वह पात्र नहीं होते हैं इसलिए एक दूसरे के सहयोग से सभी फलते फूलते रहते हैं और विधान संविधान के समानांतर गुंडा माफिया नक्सलवाद का राज चलता रहता है।
इस देश में सबसे कठिन काम है सच को उजागर करना और सही बात करना क्योंकि ऐसा करने पर सबसे पहले आपके अपने लोग फिर बाहरी लोग फिर मठाधीश और राजनेता और धन कुबेर माफिया सभी क्रोधित हो जाते हैं और यही कारण है आपने देखा कि यदि पश्चिम के एपस्टीन फाइल्स की तरह भारत में ऐसी कोई फाइल बनाई जाए तो 99% राजनेता धर्मगुरु कथा वाचक माफिया और धन कुबेर और बड़े-बड़े अधिकारी पश्चिम फाइल की जद में आएंगे लेकिन जो भी इसको खोलना है या तो मार दिया जाता है या ब्लैकमेल किया जाता है या फिर साम दाम दंड भेद से पटा लिया जाता है जैसे इस समय कई लोगों ने बड़े-बड़े नेताओं की पोल खोलने का प्रयास किया लेकिन प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने डर के कारण नहीं छापा क्योंकि यह इतने बड़े घड़ियाल के बारे में है जो सबको निगल जाएंगे तो अपने साथ अपने फोटोग्राफर लेकर चलते हैं और उसको खूब बढ़ा चढ़ा कर इस तरह से उच्च प्रदर्शन अर्थात हाईलाइट करते हैं मानो उन्हें भारत रत्न और संयुक्त राष्ट्र संघ का पुरस्कार और नोबेल पुरस्कार मिल गया है । और बहुत बाद में मुझे पता चला की बड़े-बड़े नेता नेती और अन्य लोग अपने चापलूसों की फौज भी ताली बजाने के लिए साथ लेकर जाते हैं इसलिए जब यह 10 20 50 100 लोग ताली पीटते हैं तो बाकी को भी पीटना पड़ता है।
एक हम लोगों का समय था 1971 से लेकर आज तक जनपद अस्त्र से लेकर प्रदेश देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार स्मृति चिन्ह सम्मान पत्र प्रमाण पत्र एवं अनगिनत विजेता वैजयंती अर्थात ट्रॉफी इतना प्राप्त किया जिसको 1 दिन में कोई गिन नहीं सकता । एक बात और है कि मैं बहुत पहले से ही शायद 1990 से ऐसी जगह पर जाना छोड़ दिया था जहां छोड़ डकैत बलात्कारी दुष्कर्म धन माफिया और गबन करने वाले जनता का धन चूसने वाले भ्रष्ट और घूसखोरी लोग अध्यक्ष मुख्य अतिथियों संचालक नियुक्त होते हैं क्योंकि वहां जनक खुद को अपमानित करने के बराबर है यह ऐसा न करता तो आज एक कमरा भरकर केवल पुरस्कार प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह से भरा होता।
यह पुरस्कार स्मृति चिन्ह ट्रॉफी सम्मान पत्र और प्रमाण पत्र दर्जन या सौ नहीं बल्कि हजारों की संख्या में है और आश्चर्य की बात है कि हजारों में से मैंने एक भी छायाचित्र किसी से कहकर नहीं खिंचवाया कुछ असली शुभचिंतक लोगों ने खींच कर भेज दिया वहीं पड़े हुए हैं यदि मैं ऐसा करता तो आज मेरे घर में इन सबको रखने की जगह नहीं होती आज भी नहीं है । इतना अवश्य है कि हमारे 99% सहयोगी साथी और विभाग में साथ का काम करने वाले लोगों ने और ऊपर से शुभचिंतक बनने का ढोंग करने वालों ने कभी भी एक भी छायाचित्र या वीडियो बनाकर मुझे आज तक नहीं भेजा है।
यही कारण है कि आज 1 वर्ष में एक जिले में हजारों लोग अचानक बड़ी तेजी से ऊपर उठते हैं या यूं कहिए कि ऊपर उठाए जाते हैं और अगले वर्ष उनका नाम और निशान नहीं रहता इसलिए बाद कम कीजिए पुरस्कार इसमें चिन्ह तो नश्वर है बहुत जल्दी समाप्त हो जाएंगे यदि चाहते हो दुनिया तुम्हें याद करे तो तुम दुनिया के ऊपर दया करो यदि चाहते हो कि तुमको लाभ हो तो सब का भला करो याद रखो ।
अनगिनत राही गये इस राह से उनका पता क्या।
पर गए कुछ छोड़ ईश्वर अपने पैरों की निशानी।
यही हाल भारत के हर क्षेत्र का है लाल बहादुर शास्त्री को छोड़कर आज तक कोई भी प्रधानमंत्री ऐसा नहीं हुआ जिसको याद किया जा सके जो भारत भक्ति सनातन भक्त हो इसी तरह डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को छोड़कर कोई भी सनातन भक्त भारत भक्ति राष्ट्रपति नहीं हुआ इसलिए किसी का नाम याद नहीं किया जाता ।
अच्छे लोगों का नाम धीरे-धीरे फैलता है और मरने के बाद पूरी दुनिया में छा जाता है जबकि जबरदस्ती चमचों के सहारे पाए हुए लोग अधिक स्थाई नहीं रहते यही हाल संत महंत धर्म गुरु मताधिक और उपदेश तथा वाचन का है जो अंदर से बिल्कुल काले और अधिकांश दुष्कर्म होते हैं और पड़कर जेल जाते हैं अपना नुकसान तो करते ही हैं इससे देश कलंकित होता है और धर्म का सम्मान घटना है जितने भी धर्मगुरु हैं यह सभी इसी श्रेणी के हैं इसमें अपवाद केवल बाबा कीनाराम भगवान अवधूत राम और अघोर पंथ के अनुयाई और चुनार के पीठाधीश्वर कहे जा सकते हैं जिनका मुख्यालय शक्तेशगढ़ में है । वैसे तो और भी बहुत है लेकिन धन कुबेर राजनेताओं और अपराधियों का संरक्षण न देने के कारण इनका नाम प्रचारित प्रसारित नहीं है यही कारण है कि मंचों पर अपराधी दुराचारी दुष्कर्म बलात्कारी और पानी की तरह पैसा बहाने वाले जब सादा जीवन उच्च विचार और सदाचार का उपदेश देते हैं तो जनता को यही लगता है कि इनको जूता चप्पल निकाल कर मर जाए।
यही कारण है कि जौनपुर के 99% लोग 10 साल पहले के किसी भी प्रख्यात विभूति का नाम पूछने पर नहीं बता सकते हैं वास्तव में यदि देखा जाए तो राजनेता धर्म गुरु कथावाचक माफिया आवर्धन कुबेर एक दूसरे की मदद करते हुए उनका महिमा मंडल करके मान सम्मान प्राप्त करते हैं जिसके वह पात्र नहीं होते हैं इसलिए एक दूसरे के सहयोग से सभी फलते फूलते रहते हैं और विधान संविधान के समानांतर गुंडा माफिया नक्सलवाद का राज चलता रहता है।
इस देश में सबसे कठिन काम है सच को उजागर करना और सही बात करना क्योंकि ऐसा करने पर सबसे पहले आपके अपने लोग फिर बाहरी लोग फिर मठाधीश और राजनेता और धन कुबेर माफिया सभी क्रोधित हो जाते हैं और यही कारण है आपने देखा कि यदि पश्चिम के एपस्टीन फाइल्स की तरह भारत में ऐसी कोई फाइल बनाई जाए तो 99% राजनेता धर्मगुरु कथा वाचक माफिया और धन कुबेर और बड़े-बड़े अधिकारी पश्चिम फाइल की जद में आएंगे लेकिन जो भी इसको खोलना है या तो मार दिया जाता है या ब्लैकमेल किया जाता है या फिर साम दाम दंड भेद से पटा लिया जाता है जैसे इस समय कई लोगों ने बड़े-बड़े नेताओं की पोल खोलने का प्रयास किया लेकिन प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने डर के कारण नहीं छापा क्योंकि यह इतने बड़े घड़ियाल के बारे में है जो सबको निगल जाएंगे