Saturday, 14 March 2026

पैसा कर सिफारिश उपहार और यो उपहार देखकर गलत ढंग से प्राप्त किए गए सम्मान पुरस्कार पर प्रतिष्ठा और किसी भी अन्य चीज का कोई मूल्य नहीं होता है

 पैसा कर सिफारिश उपहार और यो उपहार देखकर गलत ढंग से प्राप्त किए गए सम्मान पुरस्कार पर प्रतिष्ठा और किसी भी अन्य चीज का कोई मूल्य नहीं होता है 

क्योंकि उसको पाने वाला खुद ही समझता है कि उसको दिया गया पदपुरस्कार गलत है और वह उसके योग्य नहीं है‌ गलत ढंग से नियुक्त हुआ नीरज कलेक्टर कप्तान कोई भी कर्मचारी स्वयं को अन्य के सामने हीन महसूस करता है।

ऐसा करने से खुद उसका तो लाभ हो जाता है लेकिन देश समाज सरकार का भीषण नुकसान होता है और देश हर क्षेत्र में नीचे गिरने लगता है उसकी कोई समस्या हल नहीं होती खेल राजनीति प्रशासन न्यायपालिका और पुलिस विभाग में भयंकर गिरावट आ जाती है और ऐसे नियुक्त लोग केवल घूसखोरी भ्रष्टाचार लाल पिता शाही और संवेदनहीनता के साथ-साथ दुराचार खुलकर करते हैं 


भारत में 90 से 99 प्रतिशत उपहार सम्मान पद इत्यादि इसी दूसरे रास्ते से प्राप्त किए गए हैं इसलिए फिलहाल यहां किसी क्षेत्र में सुधार होने की कोई ऐसा नहीं है हमारे आपके बीच से जो लोग आगे बढ़े हैं हम लोग अच्छी तरह जानते हैं कि वह कितने योग्य हैं उनके सामने हाथ जोड़कर मजबूरी में या औपचारिकता में नमस्ते भले करने लेकिन डरात्मा में सम्मान पैदा नहीं होता। 

प्रिंट इलेक्ट्रानिक मीडिया सोशल मीडिया टीवी चैनल और रेडियो के उद्भाशक लोगों से लेकर हर जगह है एक समस्या का हल करते-करते वह समस्या दुर्घटना में बदल जाती है 

केवल एक उदाहरण बता रहा हूं जौनपुर सहित सारे भारत में ठेला खोमचा गुमटी रेहड़ी ‌ सहित स्थानीय दुकानदार जमकर अतिक्रमण करके पूरे नगर को जाम कर देते हैं और देखने वाले दिन रात उसे देखते हैं नेता शासन प्रशासन पुलिस बुद्धिजीवी मीडिया के लोग लेकिन देखकर भी अनदेखा कर देते हैं कुछ तो जानते हैं कि लिखने पढ़ने से कुछ नहीं होगा और जिसको करना है उनके हम महीने में अप्रत्यक्ष दिन कुत्ते का कौरा पहुंच जाता है 

इस देश को आग लग गई देश केचिराग से 

जब कोई आग लगाए तो सावन उसे बुझाने सावन ही आग लगाए उसे कौन बुझाए 

इस देश को देश के गद्दारों ने लूटा यही गम था देश की कष्टि वही जो भी जहां पानी कम था 

इसलिए कहना पड़ता है हमको नेज गौरव तथा निस देश का अभिमान है हम न नहीं है पशु निरा है और मृतक सम्मान है।


अनिल पेट में दाने वस्त्र हैं गेहू पर धागे यदि हमने यह नहीं लुटाए तो हम राज निपटअब आगे 

इससे अधिक लिखने की कोई आवश्यकता नहीं है वैसे भी भारत में दीपक तले अंधेरा घर का जोगी जोगड़ा आज गांव का सिद्ध और घर की मुर्गी दाल बराबर होती है 

कुलकर्णी कर यही है कि जब तक उपयुक्त व्यवस्था चलती रहेगी कुछ नहीं होगा किसी भी धर्म के धर्म गुरु आचार्य संत महंत कथा वाचक बुद्धिजीवी सिर्फ पटक कर मर जाए लेकिन जब तक उसे धर्म की स्त्रियां और लड़कियां नहीं आगे आएंगे धर्म का पतन कोई नहीं रोक सकता यदिकाका जी आप रोक सकते हैं तो रोक कर दिखा दीजिए।
[3/14, 7:36 AM] Dileep Singh Rajput Jounpur: ‌ विद्वान काका जी के हम लोग आभारी हैं जिनके द्वारा निर्मित शब्दों ने नई दिशा दिया है जैसे वाक मैथुन मूत्र पिवक आश्चर्य है कि मोदी जी अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग करते हैं तो क्यों नहीं काका जी को अपने सलाहकार समिति में ले लेते कम से कम ग्रुप को समूह इंडिया को भारत गुड मॉर्निंग को सुप्रभात खाना को भजन मुबारक को  बधाई शुक्रिया को धन्यवाद शादी को विवाह जैसे शब्द तो सिखा ही देंगे और बता देंगे कि हमारे हिंदी शब्द और संस्कृत के शब्द दुनिया में सबसे अधिक उत्तम और वैज्ञानिक है ‌ तब हो सकता है मोदी जी मेक इन इंडिया राइजिंग इंडिया गुड मॉर्निंग बनारस लोकल फार वोकल ‌ केमिकल और एटम जैसे अनगिनत ‌ जबरदस्ती बोल रहे अंग्रेजी शब्द छोड़ द एंड ं
[3/14, 7:36 AM] Dileep Singh Rajput Jounpur: मौसम की भविष्यवाणी आज का अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस के साथ बहुत गर्म होगा न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस रहेगा एक सप्ताह के बाद आज आसमान की धुंध काफी साफ सुथरे हो जाएंगे और हल्के बादल रहेंगे तेज हवाओं के कारण लोगों को परेशानी होगी 

कल के मौसम के बारे में भविष्यवाणी है कि तेज से बहुत तेज हवाएं आंधी तूफान जैसी स्थितियां बनेंगे हवाओं की गति 20 से लेकर 40 या 45 किलोमीटर प्रति घंटे हो सकती है बादल भी रहेंगे लेकिन वर्ष की कोई भी संभावना नहीं है 

इस समय वायु गुणवत्ता सूचकांक काफी अच्छा शौक के आसपास रहेगी जो अभी तक 400 के आसपास चल रहा था पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 5 से 7 और हवा की दिशा आज पश्चिम और कल उत्तर पश्चिमी पूर्वी रहेगी।

भारत के  उत्तरी या और दक्षिणी तथा पूर्वोत्तर भारत में आज कई जगहों पर हल्की-फुल्की बारिश हो सकती है‌ लेकिन जौनपुर का मौसम सूखा और गर्म रहेगा -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

Friday, 13 March 2026

महाशक्ति ‌‌ एवं नारी शक्ति का महापर्व नवरात्रि -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि नवरात्रि का महापर्व और देवी के नौ रूप

महाशक्ति ‌‌ एवं नारी शक्ति का महापर्व नवरात्रि -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 

नवरात्रि का महापर्व और देवी के नौ रूप 

नवरात्रि का महापर्व शक्ति का महापर्व कहा जाता है क्योंकि इन नौ दिनों में मां शक्ति के नौ रूपों की पूजा की जाती है आदि महाशक्ति स्वयं भगवती पार्वती हैं और उनके नौ रूप शैलपुत्री ब्रह्मचारिणी चंद्रघंटा कुष्मांडा स्कंदमाता कात्यायनी कालरात्रि महागौरी और सिद्धिदात्री हैं जिनकी इस नवरात्रि में पूजा अर्चना विधि विधान से की जाती है ध्यान देने योग्य बात यह है कि वर्ष में 9 दिन की नवरात्रि दो बार पड़ती है एक बसंत ऋतु में दूसरी शरद ऋतु में जिसे क्रमशः बासंतिक और शारदीय नवरात्रि कहते हैं बासंतिक नवरात्रि नए भारतीय वर्ष के प्रथम दिन से चैत्र माह के उजले पक्ष के प्रथम दिन से प्रारंभ होता है जबकि शारदीय नवरात्रि क्वार माह के शुक्ल पक्ष से प्रारंभ हो 9 दिन तक चलता है

*कब से कब तक है चैत्र माह का नवरात्रि महापर्व* 

इस वर्ष बासंतिक नवरात्रि चैत्र माह के प्रथम दिन उजाला पक्ष से ‌ 19 मार्च शुरू हो रहा है यह  27  मार्च तक चलेगा और यह सर्वार्थ सिद्धि ‌ नल दंड गजकेसरी अनफा मालवीय पंच  मालव्य महापुरुष पाराशरी वोशी और धन योग अमृत योग जैसे सुंदर योग में शुरू हो रहा है जिसके कारण यह अत्यंत ही महत्वपूर्ण और कल्याणकारी हो गया है सनातन धर्म के अन्य महापर्व की तरह शक्ति का यह महापर्व भी अन्याय पर न्याय की असत्य पर सत्य की और अज्ञान पर ज्ञान की विजय है साथ ही साथ नारी शक्ति को कम आंकने वाले लोगों के लिए यह एक उदाहरण है कि जब कभी नारी अपने सृजनात्मक  या विध्वंसक शक्ति में प्रकट होती है तो उसकी शक्ति के आगे कोई भी नहीं ठहर सकता चाहे वह कितना ही बलशाली हिंसक और राक्षसी पुरुष क्यों न हो

*भगवान श्री राम और शक्ति* 

शक्ति का यह महापर्व नए भारतीय वर्ष के प्रथम दिन से प्रारंभ होता है और श्री रामनवमी के दिन समाप्त हो जाता हैं यह ध्यान देने वाली बात है कि दोनों रामनवमी में भगवान श्री राम अभिन्न रूप से जुड़े हुए हैं बसंत में पढ़ने वाली नवरात्रि उनके जन्म से तो शरद ऋतु में पड़ने वाली नवरात्रि उनके विजय पर्व के साथ अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है और सारा जगत जानता है कि भगवती दुर्गा जी की पूजा करके और भगवान शिव का आशीर्वाद लेकर ही भगवान श्री राम ने तीनों लोकों के विजेता दुर्दांत रावण का वध किया था

नवरात्रि के महापर्व में छिपे हुए वैज्ञानिक और अन्य तथ्य

[3/26, 9:31 PM] Dr  Dileep Kumar singh: चैत्र महीने में पड़ने वाला नवरात्रि इतना महत्वपूर्ण है की देवी दुर्गा माता स्वयं धरती पर 9 दिनों तक आकर अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं और उन्हें सुरक्षा चक्र प्रदान करती है सबसे बड़ा धार्मिक आध्यात्मिक दार्शनिक महत्व इसके वैज्ञानिक पक्ष में छिपा हुआ है चैत्र माह के नौ दिनों तक लोग सात्विक आहार विहार करके तेल मसाले अन्न से दूर रहते हैं तो उनका सारा शरीर पूरी तरह इस प्रकार तरो ताजा होता है जैसे कोई मशीन लगातार चलते-चलते उसकी संपूर्ण मरम्मत करके उसे नया बना दिया जाए ऋतु परिवर्तन गर्मी और जाड़े के संधि काल में पड़ने वाली यह नवरात्रि 9 दिनों तक उचित आहार बिहार पूजा पाठ यज्ञ हवन अनुष्ठान करने से दैहिक दैविक भौतिक तीनों रूपों में चमत्कारिक परिणाम देती है इसमें कोई भी संदेह नहीं है धर्म से जोड़कर जिस प्रकार का संतुलन भोजन और प्रकृति तथा पर्यावरण से हमारे ब्रह्म ऋषि और विद्वानों ने किया वह बड़े से बड़े वैज्ञानिक नियम से भी बड़ा है जहां वैज्ञानिक उन्नति के कारण आज सभी रोगों को जन्म देने वाले फास्ट फूड जंक फूड नकली घी तेल मसाले और कोल्ड ड्रिंक के कारण रोग बीमारियां असाध्य हो गई हैं वही हमारे विज्ञान के रहस्य को समेटे महापर्व मंगल पर्व विवाह समारोह सही ढंग से करने पर पूरे शरीर को रोग मुक्त करके उसे नई ऊर्जा और इस स्फूर्ति से भर देते हैं

कलश (घट) स्थापना और उसकासमय 

धर्म अनुष्ठान पूजा पाठ और कलश स्थापना करने वालों के लिए विशेष रूप से जानना चाहिए कि कलश स्थापना और पूजा पाठ के मुहूर्त के लिए इस बार 19 मार्च को लंबा समय मिल रहा है जो 6:52 से सुबह 7:53 तक रहेगा और अगर अभिजीत मुहूर्त में करना चाहते हैं तो यह 12:05 से 12:53 तक रहेगा ।नवरात्रि का आरंभ नए वर्ष की तरह 19 मार्च को सुबह 6:52 पर हो रहा है । और 27 मार्च को पहला दिन देवी शैल पुत्री का रहेगा इसी तरह से नौ देवियों का 9 दिन पूजा पाठ व्रत अनुष्ठान चलेगा और साथ को नवरात्रि और श्री रामनवमी का समापन हो जाएगा ।

चैत्र नवरात्रि की कथाएं 

चैत्र मास के नवरात्रि मनाने के धार्मिक वैज्ञानिक दार्शनिक आध्यात्मिक कारण के साथ-साथ दो मुख्य कथाएं हैं पहली कथा परम शक्तिशाली सभी देवी देवताओं के लिए अजेय महिषासुर नामक राक्षस को मारने के लिए सभी देवी देवताओं का तेज एक साथ एकत्र हुआ और उनके सभी अस्त्र-शस्त्र एक करके देवी दुर्गा ने 9 दिनों तक घनघोर युद्ध करके महिषासुर राक्षस का वध कर दिया ।दूसरी कथा भगवान श्री राम ने रावण के वध के लिए शक्ति की उपासना किया था और देवी दुर्गा से विजय का वर प्राप्त किया था इसके उपलक्ष्य में भी यह शक्ति का महापर्व मनाया जाता है। इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने संपूर्ण सृष्टि और अनंत ब्रह्मांड का निर्माण किया था।

घट (कलश) स्थापना के नियम 

 कलश या घट स्थापना के लिए बालू बिछाकर उसके ऊपर घट अर्थात कलश रखते हैं उसमें पानी भरकर गंगाजल मिलाकर एक सिक्का चांदी या सफेद रंग का डाल देते हैं फिर कलश के मुंह पर आम के पत्ते के ऊपर नारियल रखा जाता है और कलश को रक्षा से या चुनरी से बांध देते हैं और इसे पूजा स्थान पर देवी दुर्गा के पास रखा जाता है ‌ और ‌ घड़े पर स्वास्तिक का चिह्न भी बनाया जाता हैऔर लोग अपनी शक्ति और सामर्थ्य के अनुसार पूजा पाठ करते हैं कुछ लोग पहले और आठवें दिन तो कुछ लोग पूरे 9 दिन सात्विक रहकर बिना अन्न ग्रहण किये अपने व्रत को पूरा करते हैं ।ध्यान रखने वाली बात यह है कि शुद्ध और सात्विक मन से किया गया एक दिन का पूजा पाठ भी 9 दिन के उपवास से अधिक होता है और उसी का फल प्राप्त होता है। और 9 दिन व्रत रखकर भी जो बुरे कर्म और पापों में लिप्त रहता है उसे फल तो मिलता नहीं ऊपर से उसको दंड भी भोगना पड़ता है प्रत्येक दिन पूजा पाठ के बाद हर देवी का अलग-अलग भोग होता है।

इस बार नौ दिनों का होगा चैत्र का नवरात्रि

इस वर्ष 8 दिन का चैत्र माह का नवरात्रि है और विशेष बातें है कि देवी दुर्गा जी का आगमन डोली (पालकी) पर हो रहा है और प्रस्थान भी हाथी पर हो रहा है जो सनातन धर्म के लिए और भारत देश के लिए बहुत अच्छा है यह स्थिरता शुभ शांति और मांगलिक कार्यों का भी प्रदर्शन है ।इसके साथ ही इस वर्ष नवरात्रि व्रत का पारण भी 27 मार्च 2026को शुक्रवार  के दिन किया जाएगा तिथि के क्षय के कारण इस वर्ष 9 दिन का नवरात्रि मनाया जाएगा विधि विधान और सच्चे मन से 9 दिन माता रानी की पूजा पाठ करने पर व्यक्ति को आत्म साक्षात्कार हो जाता है और कितनों को देवी मां का साक्षात दर्शन भी प्राप्त होता है। पालकी पर आने के कारण पहले चरण बहुत ही हलचल उथल-पुथल और विषम परिस्थिति वाला होगा जबकि हाथी पर जाने के कारण अंतिम चरण बहुत ही अच्छा और भारत के लिए सुख समृद्धि वाला होगा।

‌‌ नवरात्रि के ज्योतिष संबंधित योग 

इस वर्ष बसंत की नवरात्रि में शुक्र उच्च स्थान पर बैठा है जिससे महिलाओं का उत्थान होगा और सद्बुद्धि आएगी बुद्ध ‌ वर्गोत्तम है‌ शनि की महादशा में यह वर्ष प्रारंभ हो रहा है मंगल उच्च भाव में है कालसर्प दोष नए वर्ष में अनुपस्थित है जबकि मंगल के साथ में वर्ष शुरू हो रहा है बृहस्पति राजा है इस प्रकार रौद्र नमक वर्ष अर्थात संवत्सर के कारण साल भर रौद्र रस की प्रधानता रहेगी युद्ध और शीत युद्ध आतंकवाद कई छोटी बड़ी लड़ाई बेहद तेज महंगाई और अपराध के बीच भी भारत प्रगति करेगा और हर क्षेत्र में उपलब्धियां प्राप्त करेगा केंद्र में सत्ता परिवर्तन का योग बनेगा जो एक वर्ष में फली भूत हो जाएगा‌ इस वर्ष नया वर्ष प्रारंभ होने में कई राजयोग हैं जिसमें नल दंड गजकेसरी अनफा मालव्य पंच महापुरुष पाराशरी बोसी और धन राज योग प्रमुख हैं 


पूजा पाठ का विधान 

सामान्य लोगों और गृहस्थ लोगों के लिए जिसमें 99 परीक्षित लोग आते हैं शुद्ध मन से नित्य कर्म करके स्नान ध्यान करते हुए साफ सुथरे कपड़े पहनकर पूजा करना चाहिए देवी पार्वती का ध्यान करते हुए नौ देवियों का अर्थात शैलपुत्री ब्रह्मचारिणी चंद्रघंटा ‌ कुष्मांडा स्कंदमाता ‌ कात्यायनी कालरात्रि महागौरी और सिद्धिदात्री देवी का ध्यान करना चाहिए साफ सुथरी जगह पर लकड़ी का या कोई आसान बेचकर उसे पर लाल कपड़ा रखकर ‌‌ कोई भी देवी का मंत्र पढ़ना चाहिए सबसे पहले संकल्प लेना चाहिए जिसमें हाथ में अक्षत अर्थात बिना टूटा हुआ चावल और जल लेकर अपना नाम पिता का नाम गोत्र दिनांक सहित देवी जी की पूजा करनी चाहिए और आसन पाद्य ‌ अर्थात पैर धोने के लिए जल  अर्घ्य ‌ अर्थात हाथ से जल का दिया जाना आचमन अर्थात मंत्र पढ़कर जल को मुंह से लगाना स्नान अर्थात मूर्ति को गंगाजल मील जल से स्नान करना वस्त्र देवी जी की प्रतिमा या छायाचित्र को अंतर्गत आता है इसके बाद गढ़ में दीप धूप पुष्प और चंदन को जलाना और अर्पण करना होता है फिर नैवेद्य अर्थात भोजन अर्थात प्रसाद को तांबूल के साथ अर्पित करके दक्षिण देकर आरती करते हुए प्रदक्षिणा करना चाहिए

Wednesday, 11 March 2026

‌‌नया भारतीय वर्ष 2083 - डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक ‌ प्रस्तावना

‌‌नया भारतीय वर्ष 2083 - डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक 
‌ प्रस्तावना 

‌‌ नया भारतीय वर्ष विक्रम संवत 2083 ,19 मार्च को सुबह 6:52 से प्रारंभ हो रहा है ग्रह नक्षत्र और कुंडली के अनुसार इस दिन लग्न में सूर्य चंद्रमा शुक्र और शनि मीन राशि में विद्यमान है ‌ बृहस्पति मिथुन राशि में सुख भाव में विद्यमान है और बृहस्पति ही इस वर्ष का राजा है केतु छठे भाव में सिंह राशि में राहु और बुद्ध द्वादश भाव में कुंभ राशि में विद्यमान है।
नया भारतीय वर्ष विक्रम संवत 2083 ,19 मार्च बृहस्पतिवार के दिन से शुभ ग्रह नक्षत्र के संयोग से प्रारंभ होगा इसी दिन से परम पवित्र चैत्र की नवरात्रि भी शुरू होगी जिसे बासंतिक नवरात्रि भी कहते हैं जब भारतीय नया वर्ष शुरू होता है तो संपूर्ण भारत में बड़ा ही पवित्र शुभ और मंगलमय वातावरण होता है वृक्ष नई-नई पत्तियां और कोपलों फल फूलों से लदे रहते हैं फसले पक कर तैयार रहती हैं और चारों ओर कोयल की कूक सुनाई देती है शीतल मंद सुगंधित पवन बहता रहता है और जीवन में उत्साह उमंग अपने चरम शिखर पर होता है और इसके साथ ही साथ चारों ओर प्रसन्नता का वातावरण होता है 

नए वर्ष में पंचांग की स्थिति 

19 मार्च सन 2082 विक्रम संवत चैत्र माह का उजाले पक्ष का पहला दिन बृहस्पतिवार का दिन है इस दिन लग्न भाव में ‌ सूर्य चंद्र शुक्र शनि मीन राशि में है और  ‌ बुद्ध वर्गोत्तम है बृहस्पति चतुर्थ भाव में होकर सुख के घर में और मिथुन राशि में है इसलिए यह वर्ष कन्याओं स्त्रियों के लिए सुखद रहेगा जबकि  शुक्र शनि चंद्र सूर्य चंद्रमा कर्म के भाव में मीन राशि में है यह बहुत लंबे समय के बाद आता है इसलिए इस वर्ष कर्म प्रधान रहेगा ‌ धर्म के भी धूम मचेगी  जबकि बृहस्पति 12 वे अपने घर में मीन राशि में है इसलिए इस वर्ष पूजा पाठ धर्म अनुष्ठान हवन के कामों में बहुत अधिक खर्च होगा । राहुल बुद्ध और मंगल वार में भाव में कुंभ राशि में है जबकि केतु छठे भाव में होकर सिंह राशि में है।शेष घर खाली हैं राहु केतु शुक्र बुध वक्री हैं जो दिखाते हैं कि शत्रु पूरे वर्ष षड्यंत्र करता रहेगा ‌। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खड़ी देश यूरोप और दक्षिणी अमेरिका में भीषण युद्ध और हिंसा होगी  इस वर्ष नल मालव्य पाराशरी ‌ गजकेसरी अनफा ‌ पंच महापुरुष वोशी और धन राज योग होने के कारण धन-धान्य की कमी नहीं होगी। ऐसा मंगल के उच्च भाव में होने से और कालसर्प दोष अनुपस्थित रहने से हो रहा है शनि चंद्रमा मंगल अस्त हैं जबकि शुक्र उच्च भाव में है।

नया भारतीय वर्ष बनाए जाने का कारण और महत्व 

भारत का नया वर्ष बसंत ऋतु में शुरू होता है जिसके अनेक कारण है सबसे पहले और सबसे बड़ा कारण है कि आज के दिन ही हमारे पृथ्वी ग्रह पर लगभग दो अरब वर्ष पूर्ण ब्रह्मा जी द्वारा नई सृष्टि का निर्माण किया गया था ।आज के दिन ही महान सम्राट विक्रमादित्य द्वारा नए विक्रम संवत का प्रारंभ किया गया जिन्होंने भारत की यश पताका का संपूर्ण संसार में फैलाई और जो पूरे संसार के सबसे महान सम्राट और कलयुग के सबसे न्यायप्रिय सम्राट थे । उन्होंने खाड़ी देश और अब तक सनातन धर्म की अस्पत का विस्तार किया था।इस समय बसंत ऋतु भी रहती हैं । फल फूल फसलों का मौसम भी रहता है और नवरात्रि भी ‌ इस दिन से ही ‌ प्रारंभ होता है ।इस महापर्व को गुड़ी पड़वा महाराष्ट्र और आस पास जबकि उगादि आंध्र प्रदेश और कर्नाटक तथा आस पास बैसाखी पंजाब और आस पास बिहू असम और पूर्वोत्तर भारत में कहा जाता है ।

विश्व के मनाए जाने वाले अन्य नव वर्ष 

वैसे तो विश्व में अनेक नए वर्ष होते हैं जैसे क्रिश्चियन और इस्लामी नया वर्ष चीन का नया वर्ष यहूदी लोगों का नया वर्ष लेकिन जो बात भारत के नए वर्ष में है वह कहीं नहीं है क्योंकि इस समय प्रकृति वातावरण जड़ चेतन पेड़ पौधे मनुष्य हर जगह नवीनता रहती है और हर्ष और उल्लास का वातावरण रहता है यह सबसे वैज्ञानिक वर्ष है जो विज्ञान धर्म संस्कृति वातावरण और पर्यावरण पर आधारित होता है ‌ नया भारतीय वर्ष सब कुछ नया-नया कर देता है इस समय सर्दी और गर्मी भी ना अधिक होती है और न कम होती है।‌‌ समस्त पेड़ पौधे जीव जंतु और सौरमंडल में नए जीवन का संचार होता है।‌ इस नए वर्ष में 13 महीने होंगे और 17 में से लेकर 15 जून तक पुरुषोत्तम मास होगा जिसके स्वामी विष्णु होंगे

भारत का नया वर्ष कैसे मनाया जाता है 

इस दिन घरों को और वातावरण को साफ सुथरा किया जाता है सबको बधाई और शुभकामनाएं तथा आशीर्वाद दिया जाता है। हर घर पर केसरिया या भगवा रंग का ध्वज फहराया जाता है घरों को पत्तियों और फूलों से सजाया जाता है विशेष कर आम के पत्तियों से और रंगोली भी बनाई जाती है अनेक प्रकार के धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है सभी संस्थान भी सजाया जाता है और इस दिन विभिन्न प्रकार के कवि सम्मेलन भजन संध्या महा आरती का आयोजन भी होता है इस दिन फल मिठाई और रक्त का दान भी किया जाता है आज के दिन ही पृथ्वी सूर्य का एक चक्कर पूरा कर लेती है इस समय दिन रात ठंडी गर्मी प्रकाश अंधकार सब बराबर होता है जिसके बाद प्रकाश और दिन बड़े होने लगता है ।

नए वर्ष के अधिकारी ग्रह नक्षत्र 

 इस बार के पदाधिकारी राजा बृहस्पति और मंत्री मंगल हैं इस प्रकार दुनिया में ज्ञान प्रकाश और सत्य का प्रभाव अधिक रहेगा स्वामी और सौरमंडल के प्रधान देवता हैं जिसे सारी सृष्टि और सौरमंडल चलता है ‌ मंगल एक क्रूर ग्रह है जिससे युद्ध अराजकता आतंकवाद नरसंहार हिंसा का वातावरण रहेगा ।चैत्र की नवरात्र से प्रारंभ होने वाले इस भारतीय नव वर्ष का नाम रौद्र संवत है। मंगल का गोचर भी बड़े-बड़े परिणाम लाएगा इसके कारण काल महामारी युद्ध विस्फोट भूकंप महामारी नए-नए रोग बीमारियां और अप्रैल में में बहुत बड़ी प्राकृतिक आपदा आने की संभावना बन रही है वर्ष 2082 में ग्रहों का सकारात्मक स्थान रहेगा इस वर्ष सकारात्मक प्रभाव और सही लोगों का प्रभुत्व रहेगा गलत और बुरे लोग मारे जाएंगे या फिर कारागार में जाएंगे ‌ ग्रह गोचर प्रभाव से महिलाएं इस वर्ष बहुत ही उग्र और उन्मादी हो जाएंगी‌ उनके अंदर आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ेगी।

नए भारतीय वर्ष में सूर्य चंद्रमा शुक्र शनि एक साथ मीन राशि में होंगे इसलिए ‌ राजयोगों के साथ मालव्य योग बन रहा है जो शुभ और लाभकारी होता है अमृत सिद्धि  और सर्वार्थ सिद्ध योग भी हैं 60 संवत्सर में से इस बार 54वां संवत्सर है और जिस दिन नए वर्ष की शुरुआत होती है उसे दिन के स्वामी को नए वर्ष का राजा माना जाता है इस वर्ष बृहस्पति को शुरू होने से ‌ देवगुरु बृहस्पति को राजा माना जा रहा है इस वर्ष बुद्ध के कारण औषधि और वनों के क्षेत्र का विस्तार होगा बृहस्पति के प्रभाव से संतुलन रहेगा रोग बीमारियां बढ़ेंगे मंगल शेयर मार्केट ध्वस्त करके फिर से खड़ा करेगा शनि युद्ध और उन्माद तथा विनाशकारी हथियारों का प्रयोग करेगा।

विभिन्न प्रकार की राशियों के लिए मकर राशि वालों को सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है इसके अलावा कर्क राशि मिथुन राशि के लिए भी यह बहुत अच्छा रहेगा साथ ही साथ 29 मार्च को अमावस्या के दिन नए भारतीय वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण लगेगा मेष राशि भी अच्छा जाएगा कुंभ राशि भी अच्छी रहेगी मीन राशि के लिए ना बहुत अच्छा और ना बहुत खराब रहेगा कन्या राशि के लिए भी वर्ष अच्छा रहेगा शेष ग्रहों के लिए मिला-जुला फल इस वर्ष रहेगा कुल मिलाकर जैसे हिंदी दुनिया की अघोषित विश्व भाषा और भारत की अघोषित राष्ट्रभाषा है उसी तरह नया भारतीय वर्ष अघोषित रूप से पूरी दुनिया का नव वर्ष है।

Tuesday, 10 March 2026

ग्लोबल इंटरनेशनल स्कूल ऑल इंडिया सेवन ए साइड महिला हॉकी प्रतियोगिता में करेगी प्रतिभाग*

*ग्लोबल इंटरनेशनल स्कूल ऑल इंडिया सेवन ए साइड महिला हॉकी प्रतियोगिता में करेगी प्रतिभाग*
 
तेरह से पंद्रह मार्च तक आयोजित होने वाली ध्यानचंद सेवन ए साइड महिला आल इंडिया हॉकी प्रतियोगिता मिल्क रामपुर में आयोजित हो रही है जिसमें देश की नामवर टीमें भाग ले रही हैं। जिसमें रामपुर की महिला हॉकी टीम पहली बार भाग ले रही है स्कूल नेशनल हॉकी में ब्रॉन्ज मेडल विजेता मशीयत फातिमा द्वारा  *ग्लोबल इंटरनेशनल स्कूल हॉकी टीम की जर्सी लांज की गई*।
रामपुर हॉकी जानकारों का मानना है कि महिला हॉकी के इतिहास में ग्लोबल इंटरनेशनल स्कूल द्वारा राष्ट्रीय खेल हॉकी के लिए यह सराहनीय कार्य स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाने वाला अध्याय बनेगा।
इस अवसर पर ग्लोबल इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसिपल अतीबा क़मर और स्पोर्ट्स हेड रूखसार ज़फ़र के अतिरिक्त श्रीमती मारिया फरहत जिला उपाध्यक्ष भाजपा महिला मोर्चा, रविश रिज़वान कशिश चौहान रोशनी आंचल शीतल गुंजन माही नविता किरन सिमरन एवम हॉकी प्रशिक्षक फरहत अली खान मौजूद रहे।

Sunday, 8 March 2026

सनातन धर्म की समस्त सृजनात्मक नारी शक्तियों आपको नई पीढ़ी को जागृत करने और सृजन की नई राह देने के लिए अनंत बधाई और शुभकामनाएं लेकिन आपको याद रखनाहोगा

: केवल दिखाने के लिए स्वदेशी और भारतीय और तन मन धन मन वचन कर्म से अंग्रेजी और विदेशी सभ्यता में डूबे हुए भारतीय लोगों का नया वर्ष 19 मार्च 2026 को बृहस्पतिवार के दिन प्रारंभ हो रहा है यह सम्राट विक्रमादित्य के द्वारा चलाए गए विक्रम संवत्सर का 2083 भाग है ‌ सन 2083 विक्रम संवत का नाम रौद्र संवत्सर है इसलिए स्वाभाविक रूप से संपूर्ण वर्ष में रौद्र रस की प्रधानता रहेगी और चारों ओर भी भयंकर कृत्य किए जाएंगे जिसमें युद्ध आतंकवाद अपराध एवं अपराध अन्याय अत्याचार पीड़ा प्रताड़ना सम्मिलित होगा और ऐसे तत्वों का रौद्र संहार भी किया जाएगा! ‌ इसलिए अभी से सभी लोग नया भारतीय वर्ष 2083 मनाया जाना शुरू कर दें और लगातार इसकी बधाई शुभकामनाएं इतना अधिक देखी क्रिश्चियन नया वर्ष इसके आगे डूब जाए-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

 संपूर्ण विश्व का सृजन करने वाली और संपूर्ण सृष्टि को अपनी उंगलियों पर नाचने वाली‌ महिलाओं का आज‌ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है उन सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देते हुए यह कहना चाहूंगा कि विश्व को निर्माण और सृजन सदाचारी शब्द बुद्धि एवं श्रद्धा भक्ति और विश्वास के रास्ते पर आगे ले जाएं विनाश और संघार तो बहुत हो चुका है और बिना महिलाओं के जागृत हुई सृजनात्मक शक्तियां सक्रिय नहीं हो सकती सभी महिलाओं को चाहिए कि वह सृजन की देवी आदि शक्ति भगवती मां पार्वती के रूप में सामने आए और दोस्तों के लिए महाकाली बनाकर उनका रक्त खप्पर में भरकर पान करें तभी यह दुनिया शांति के रास्ते पर चल सकती है-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

हर घर नल और अमृत योजना का ऐसा कबाड़ा हुआ है किसके बारे में भाजपा सरकार और मोदी जी ने बोलना ही छोड़ दिया है 5 वर्ष से चलाई जा रही इस योजना ने नगर के नगर गांव के गांव गधों में परिवर्तित करके रख दिए लेकिन अभी तक इसका कोई भी प्रायोगिक रूप देखने को नहीं मिला

T20 विश्व कप फाइनल की इसके प्रारंभ होने के पहले से आज तक की सभी भविष्यवाणी बिल्कुल सही हुई है और आज एक रोचक रोमांचक मुकाबले में भारत ‌ हार्ट हार्ट एक नया इतिहास विजय होकर चैंपियन बनकर रचेगा लेकिन इसके लिए सभी देशवासियों की प्रार्थना के साथ-साथ ‌ भारतीय दल को बेहद ही खराब क्षेत्ररक्षण और गेंदबाजी को सुधारना होगा और सूर्यकुमार यादव को मनमानी और सूझ-बूझ रहित कप्तानी करने से बचना होगा‌ सेमीफाइनल की तरह ‌ मूर्खता पूर्ण और विवेक हीन कप्तानी करेंगे तो बेड़ा पार ही कर देंगे‌ आज का दिन गुमराह तिलक वर्मा अभिषेक शर्मा एवं वरुण चक्रवर्ती का दिन है
[मौसम की भविष्यवाणी जौनपुर और आसपास आज बहुत ही गहरी धुंध आसमान में और नीचे हल्का कोहरा होने से काफी उमस और गर्मी रहेगी अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस रहेगा ‌ हवा की दिशा दक्षिण पश्चिम और गति 10 किलोमीटर होने से प्रदूषण और गंदगी के मात्रा बहुत अधिक होगी और वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 के पार होगा पराबैंगनी किरणों का स्टार 5 से 7 के बीच और सापेक्षिक आद्रता 40 से 65% के बीच रहेगी 

कल उत्तरी पूर्वी हवा के साथ मौसम बदलने लगेगा और हवा की तेज गति 15 किलोमीटर प्रति घंटा के कारण ढूंढ और कोहरे में कमी होगी वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद खराब 300 के आसपास बना रहेगा जबकि पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 5 से 7 पर स्थिर रहेगी 

गहरी धुंध का स्तर ढाका से लाहौर लखनऊ दिल्ली सहित उत्तर भारत के पूरे मैदान में रहेगा जिसका कारण भयंकर प्रदूषण गंदगी हवा की धीमी गति और पश्चिम एशिया में हो रहे भयानक युद्ध के उड़ते हुए बारूद के कान हैं इसके कारण लोगों को स्वास्थ्य में बहुत अधिक परेशानी होगी और सर्दी जुकाम बुखार शरीर और हड्डी का दर्द आंख की समस्या और मुंह तथा घाटी तथा टांसिल बढ़ने की भीषण समस्याएं गैस और उल्टी दस्त की समस्याएं भी बहुत तेज हो जाएंगे जो पूरे मार्च भर कायम रहेंगी।

दक्षिणी भारत और  पूर्वोत्तर भारत का मौसम अपेक्षाकृत साफ सुथरा कम जहरीला और चटख धूप वाला रहेगा दक्षिण में कुछ क्षेत्र अंडमान निकोबार और लक्ष्यदीप तथा पूर्वोत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर पूरे देश में गम और सूखा मौसम रहेगा -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक
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सरकार और मार्क जुकरबर्ग एवं बुराई के विरुद्ध लिखो तो आपका सोशल मीडिया ब्लॉक हो जाता है और इस सोशल मीडिया पर पूरे स्वतंत्रता और धड़ाधड़ने से ब्लू फिल्में पोर्न फिल्में गंदी-गंदी अश्लील सामग्री एवं विज्ञापन और कुकर्म के किस्से बिना चाहे आपकी स्क्रीन पर आते रहते हैं जिसे आपके घर परिवार के बच्चे से लेकर बुद्ध तक देखते हैं सुबह से शाम तक जो व्यक्ति यह सब चीज देखेंगे उसका शरीर अपराध यह अपराध हिंसा अशांति नास्तिकता से क्यों नहीं भरेगा और वह क्यों नहीं शैतान का रूप ले लेगा कितना ही लिखते पढ़ते रहो कोई असर होने वाला नहीं है जितने भी नकली और फर्जी समाचार विज्ञापन और गंदगी आती है क्या वह बिना सोशल मीडिया के स्वामियों की आज्ञा की आ सकती हैं।

 बैंक में कोई भी धोखाधड़ी बिना बैंक वालों के और सेवा में कोई भी धोखाधड़ी बिना सुना के लोगों को विश्वास घटे हुए कैसे मिलती है क्या आपने किसी ऐसे व्यक्ति का खाता हक होते हुए देखा है जिसके खाते में ₹100 से कम है यदि जानते हैं तो बताएं सब कुछ शीशे की तरह साफ है भारत में 99% अपराध पुलिस विभाग की मिली भगत से होते हैं और सारा जहर सरकारी तंत्र के इशारों पर नकली और मिलावटी खुलकर बिकता है यह सब ना कोई लिखने वाला है और ना लिखने वालों की खैर है इसलिए प्रेम से जहर खाऊ आनंद मनाओ और जीते जागते शैतान बन जाओ और एक से बढ़करएक एपस्टीन फाइल्स ‌ का निर्माण करके पूरी दुनिया के 90% प्रधानमंत्री राष्ट्रपति धर्म कुबेर बढ़िया अधिकारियों दलालों और माफिया लोगों को ब्लैकमेल करके दुनिया अपने हिसाब से चलाओ -डॉ दिलीप कुमार सिंह

 सनातन धर्म की समस्त सृजनात्मक नारी शक्तियों आपको नई पीढ़ी को जागृत करने और सृजन की नई राह देने के लिए अनंत बधाई और शुभकामनाएं लेकिन आपको याद रखनाहोगा 

क्यों दिशा में राक्षसी सी खाड़ी ब्रह्मास्त्र लेकर 

 रुद्र गायब हैं सभी रुद्रास्त्र लेकर।

 विष्णु भी गायब सुदर्शन चक्र लेकर।।

कृष्ण गायब हैं सभी दिव्यास्त्र लेकर।

राम भी गायब ‌‌ सकल अध्यात्म लेकर।

देश का बचना कठिन है धर्म बचना अति कठिन है।

देश बच सकता अभी भी यदि खड़ी हो जाए महिलाएं प्रकृति की शक्ति लेकर

‌ जब कभी भी सृष्टि होती थी विखंडित हर जगह पर नारियां खड़ी होती कभी दुर्गा कभी काली ‌ कभी परमाणु बनकर 
 -डॉ दिलीप कुमार सिंह श्रीमती पद्मा सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर

Saturday, 7 March 2026

अनंत ब्रह्मांड में हमारी धरती के एक कण से भी छोटी है -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

अनंत ब्रह्मांड में हमारी धरती के एक कण से भी छोटी है -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 
क्या कभी आपने इस अनंत ब्रह्मांड के बारे में सोचा है कि यह कितने दूर तक फैला हुआ और कितना बड़ा है हमारी धरती के 99% लोग तो सारा जीवन निहित सोचते हुए अनंत ब्रह्मांड में विलीन हो जाते हैं कि हमारी धरती बहुत ही विराट है ‌ उनका सोचना गलत भी नहीं है क्योंकि जीवन भर यात्रा करने वाला व्यक्ति यदि 100 वर्ष जीवित रहे तो भी धरती के एक प्रतिशत भाग से अधिक को नहीं देख और घूम पता है और धर्म दर्शन विज्ञान अध्यात्म एवं सारी प्रगति के बावजूद भी आज सागर महासागर का 95 प्रतिशत और धरती का 50% भाग पूरी तरह अज्ञात अनजान है लेकिन ब्रह्मांड के आगे यह धरती कुछ भी नहीं है तो एक छोटे से उदाहरण से आपको समझते हैं कि अभी तक का ज्ञात ब्राह्मण कितना विराट है।

आप सब की सुविधा के लिए हम अनंत ब्रह्मांड और पृथ्वी को मटर के एक दाने के बराबर मानकर शुरू करते हैं यदि पृथ्वी को मटर का एक दाना माना जाए तो हमारा विराट सूर्य ऐसे 13 लाख मटर के दाने के बराबर है और सौरमंडल जो दो प्रकाश वर्ष में फैला है ऐसे मटर के दाने 13 लाख महा शंख ‌ में ‌ 21 शून्य बढ़ाने के बाद जो संख्या आती है उतना बड़ा तो केवल अपना सौरमंडल है।‌ अब आपको लग रहा है कि हमारा सौरमंडल तो बहुत अधिक व्यापक और विराट है लेकिन अनंत ब्रह्मांड के आगे कुछ भी नहीं है क्योंकि वास्तव में सौरमंडल का और अनंत अंतरिक्ष का 99% भाग पूरी तरह से खाली और शून्य है और यह अभी तक सारी सभ्यता के ज्ञात ब्रह्मांड का वर्णन हो रहा है 


दो प्रकाश वर्ष में फैला हुआ हमारा सूर्य और सौरमंडल हमारी अपनी आकाशगंगा के आगे कुछ नहीं है जिसको एक लाख प्रकाश वर्ष में फैला हुआ माना जाता है अर्थात हमारे सूर्य जैसे 50000 से 1 लाख सौरमंडल हमारी अपनी ही आकाशगंगा में है और ऐसा माना जाता है कि इसमें दो खरब सूर्य से भी अधिक तर विद्यमान है ‌ हमारा यह सौरमंडल इस आकाश गंगा के आगे मटर के दाने से भी छोटा पड़ जाता है फिर धरती का इसमें कौन सा अस्तित्व बचेगा यदि सूर्य को मटर का एक दान मान लें तो धरती इस आकाश गंगा में मटर के दाने से 13 लाख गुना  छोटी होगी अब एक मटर का 13 लाख टुकड़ा करके आप खुद समझ लीजिए कि इस आकाशगंगा में आपकी धरती कहां है और फिर हमारा आपका उसमें क्या अस्तित्व है जो धरती के आगे रेत के एक कड़क से भी छोटी हैं।


हमारी सभ्यता की सारी कल्पना गणित के अंकों का खेल और कल्पना अपनी आकाशगंगा के आगे समाप्त हो जाती हैं क्योंकि यदि हम एक सेकंड में 3 लाख किलोमीटर लगातार चलते रहें ‌ तो हम 1 लाख वर्ष में अपनी आकाशगंगा में पहुंच पाएंगे और अभी मनुष्य के द्वारा सबसे तेज चलने वाला बनाया गया अंतरिक्ष या न केवल 100 किलोमीटर प्रति सेकंड के वेग से चल सकता है ऐसे में किसी मनुष्य के द्वारा निर्मित यह से आकाशगंगा पार करने में हमको 3 लाख करोड़ वर्ष लग जाएंगे 

अब आपको यह समझ में आ रहा होगा कि अपनी आकाशगंगा जिससे मंदाकिनी कहा जाता है जिसका वर्णन हमारे वेद पुराण में है यह बहुत विराट और कल्पना से परे हैं लेकिन अभी तो आपने कुछ भी नहीं देखा है कि यह हमारा ब्रह्मांड कितना अनंत असीम अदभुत आश्चर्यजनक और अतल हैं इसकी लंबाई चौड़ाई गहराई ऊंचाई में सारा मानव का पैमाना डूब जाता है। क्योंकि अपनी आकाशगंगा जैसी 500 अब आकाशगंगाए अपने दृश्य मन ब्रह्मांड में 14 अब प्रकाश वर्ष में खोजी जा चुकी है 

जहां सूर्य के मुकाबले हमारी धरती एक मटर के दाने के बराबर है और सूर्य आकाश गंगा में एक मटर के दाने के बराबर है तो अपनी विराट 2 खरब ‌ सौरमंडल से युक्त अपनी आकाशगंगा इस अनंत ब्रह्मांड में स्वयं अन्य आकाशगंगाओं के मुकाबले मटर के एक दाने के बराबर है 


इसीलिए हमारे वैदिक ऋषि मुनियों से लेकर महाकाव्य लिखने वाले वाल्मीकि वेदव्यास संत महंत ब्रह्म ऋषि दार्शनिक और विद्वान तथा वैज्ञानिक इस ब्रह्मांड को अनंत और नेति नेति कहते हैं जिसका कोई भी अंत या आदि नहीं है और ऐसे 500 खराब आकाशगंगाएं ईश्वर के एक रूम में निवास करती हैं गोस्वामी तुलसीदास जी ने वेदव्यास जी ने और वाल्मीकि ने ईश्वर के विराट रूप का वर्णन करते हुए लिखा है रोम रोम प्रति राजत कोटि-कोटि ब्रह्मांड ‌ अर्थात भगवान श्री हरि विष्णु के एक रूम में करोड़ों ब्रह्मांड का निवास है और अब ईश्वर तथा ब्रह्मांड के भारतीय ऋषि मुनियों के द्वारा प्रतिपादित इस सिद्धांत को आधुनिक क्वांटम विज्ञान मान चुका है। 


अब जाकर वैज्ञानिकों ने भारत के प्राचीन ज्ञान विज्ञान पर मोहर लगा दिया है और कहा है कि हम संपूर्ण ब्रह्मांड का केवल पांच प्रतिशत भाग देख सकते हैं क्योंकि बाकी 95% भाग श्वेत ऊर्जा और श्वेत ब्रह्मांड श्वेत पदार्थ के अलावा ‌ श्याम ऊर्जा और श्याम पदार्थ का बना है अंग्रेजी भाषा में इसको हम डार्क एनर्जी डार्क मैटर कहते हैं और यह संपूर्ण ब्रह्मांड का 95% भाग है अब आप कल्पना कर सकते हैं कि संपूर्ण ज्ञात ब्रह्मांड जिनकी संख्या 500 खरब मानी जाती है इस डार्क एनर्जी और डार्क मैटर में खुद मटर के एक दाने के बराबर है और यह समग्र अनंत ब्रह्मांड जो अभी तक हमें ज्ञात है ईश्वर के एक रोम के एक करोड़ भाग के बराबर है।


और बात इतनी पर ही नहीं रख रही है हमारा अपना ब्रह्मांड और सारे ब्रह्मांड लगातार फैल रहे हैं हमारे पुराण वेद और उपनिषद में लिखा है कि प्रारंभ में ईश्वर एक था उसने मन में इच्छा प्रकट किया कि मैं बहुत सा हो जाऊं** एकोअहं बहुस्याम**और उसके बाद एक प्रचंड महा विस्फोट कल्पना और सोच से परे हुआ और अनंत को ब्रह्मांडों का निर्माण हुआ जो आधुनिकतम विज्ञान की बिग बैंग थ्योरी अर्थात महा विस्फोट सिद्धांत के समान है और मेरा तो यह मानना है कि पश्चिम के वैज्ञानिकों ने यह सब वेद पुराण गीता रामायण महाभारत और भागवत पढ़कर ही निकला है जैसे आइंस्टीन का सापेक्षता का सिद्धांत डॉ सत्येंद्र नाथ बोस और गीता की सहायता से लिखा गया और हमारे ब्रह्मास्त्र के द्वारा और अन्य दिव्य अस्त्र शस्त्रों के द्वारा छोटे पैमाने वाले परमाणु हाइड्रोजन और न्यूट्रॉन बमों का आविष्कार किया गया वैसा ही सब कुछ पश्चिमी ज्ञान विज्ञान वाले हमारे ग्रंथो का अध्ययन करके कर रहे हैं।


पृथ्वी सूर्य आकाश गंगा और आकाशगंगाओं के करोड़ों समूह को देखकर अब आप सो चुके कि यह तो मन वचन कल्पना से परे है और फिर आपने अनंत कोटि ब्रह्मांड और श्वेत श्याम ऊर्जा और श्वेत श्याम पदार्थ के बारे में पढ़ा तो घनघोर आश्चर्य में डूब गए लेकिन यह अनंत ब्रह्मांड स्वयं में अनंत और कल्पना से परे आश्चर्य का स्वयं केंद्र है इस अनंत ब्रह्मांड में वह सब कुछ है जो देखा सोचा जा सकता है और जिसकी कल्पना हो सकती है यहां पर पदार्थ और प्रति पदार्थ हैं ऊर्जा और प्रति ऊर्जा है श्वेत विवर और श्याम विवाह हैं ग्रह नक्षत्र तारे आकाशगंगा हैं अनंत धूल और ऊर्जा के बदले हैं अनंत गति से चल रहे तारे और बहने वाली प्रचंड हवा है कहानी सोने चांदी के ग्रह नक्षत्र तारे हैं तो कहीं हीरे मोतियों के तो कहीं पर धरती से अर्बन गुना अधिक जल वाले ग्रह नक्षत्र विद्यमान है इतना ही नहीं हमारे सूर्य से अर्बन गुना बड़े और चमकदार तथा अब गुना छोटे सूर्य विद्यमान है अपनी एक लाख प्रकाश वर्ष में फैली हुई आकाशगंगा से भी करोडो गुना बढ़िया आकाशगंगाए और इससे भी करोडो गुना छोटी आकाशगंगाए हैं यदि अधिक अधिक सोचना चाहिए तो हमारे मस्तिष्क में स्वयं ही विस्फोट हो जाएगा जो इस माह विस्फोट का अंग हो जाएगा।


और अभी तो आपने कुछ भी नहीं जाना है यदि आप सोचते हैं कि प्रकाश सब जगह एक जैसा चलता है तो यह भी आपकी भूल है जहां भयंकर द्रव्यमान होता है वहां प्रकाश धीमा हो जाता है और जहां कम द्रव्यमान होता है वहां यह तीव्र हो जाता है और निर्वात में अपने अधिकतम गति प्राप्त कर लेता है और कृष्ण नक्षत्र अर्थात ब्लैक होल में इसकी गति शून्य हो जाती है और सभी ऊर्जा पदार्थ की तरह यह भी ब्लैक होल में समा जाता है इसी तरह दिन मिनट घंटे भी हर ग्रह नक्षत्र पर एक समान नहीं होते हैं यदि हम मंगल ग्रह पर चले जाएं तो वहां का 2 वर्ष धरती के एक वर्ष के बराबर होगा इसी तरह यदि हम यम ग्रह पर जो नर्क है और यमलोक है जहां करने के बाद हमारी आत्मा जाती है वहां पर चले जाएं तो हमारा 1 वर्ष 500 वर्ष के बराबर हो जाएगा इसका अतिरिक्त ऐसे ऐसे ग्रह नक्षत्र तारे और आकाशगंगा हैं जहां पर एक वर्ष धरती के लाखों करोड़ों वर्ष के बराबर होता है और एक दिन एक वर्ष से भी बड़ा होता है 


जो कुछ भी हमारे वेद पुराण उपनिषद रामायण महाभारत और सिख जैन बौद्ध सनातन पंथ में लिखा है सब सही है तीव्र वेग से चलने वाली जो आत्माएं अपने सत्कर्म और प्रकाश की गति के कारण वाइजर और पायनियर यह की तरह सूर्य की सीमा पार कर लेती हैं वे स्वर्ग लोक और उसके आगे ब्रह्म लोक शिवलोक और महा विष्णु लोक पर जाती हैं जहां पर यह समस्त ब्रह्मांड प्रति ब्रह्मांड श्वेत विवर श्याम विवाह ऊर्जा और प्रति ऊर्जा समाप्त हो जाता है उसके शीर्ष पर महाशिवरात्रि द्वीप है जिसमें भगवान श्री हरि विष्णु योग माया दूसरों के साथ निवास करते हैं और जहां पर भूख प्यास नहीं लगती और सभी आत्माएं सूर्य के समान चमकती हुई निवास करती हैं यह सब बातें कल्पना नहीं सच्चाई है और ऐसा हमने सभी भारतीय धर्म ग्रंथो का गहन और सूक्ष्म अध्ययन करके लिखा है यदि आप पढ़ाना चाहे तो उससे अधिक आनंददायक और ज्ञानदायक कोई भी वस्तु धरती पर नहीं मिलेगी 


देशकाल और समय और ब्रह्मांड के अनंत होने का प्रमाण भी हमारे धर्म ग्रंथो में कई बार मिलता है जब राजा रहे रंवतक अपनी पुत्री रेवती के साथ ब्रह्म लोक में उसके योग्य वरदान प्राप्त करने के लिए गए तब ब्रह्मा के केवल कुछ घड़ी बीते और तब तक धरती पर लाखों वर्ष बीत गए थे सतयुक्त रहता बीत चुका था द्वापर चल रहा था तब ब्रह्मा जी ने उन्हें सब कुछ समझते हुए वापस आकर बलराम से रेवती के विवाह करने को कहा ‌ इसी तरह जब हनुमान जी श्री राम की अंगूठी लेने पाताल लोक में गए तब वहां पर श्री राम की अंगूठी का पहाड़ बना हुआ था देशकाल और युग कितने बीत गए कुछ पता नहीं था ऐसे ही जब ब्रह्मा जी भगवान श्री कृष्ण से मिलने आए और कहा कि मैं ब्रह्मा हूं तो भगवान श्री कृष्ण ने उनसे कहा कि आप किस लोक के ब्रह्म हैं तबब्रह्मा को ‌ आभास हुआ की अनगिनत समानांतर ब्रह्मांड में अनगिनत ब्रह्मलोक हैं 

ऐसा दृश्य श्री कृष्ण भगवान ने अनंत विराट रूप में माता यशोदा माता कौशल्या महाभारत युद्ध में अर्जुन और दुर्योधन की सभा में भी दिखाया था जिसमें कल्पना से परे अनगिनत ब्रह्मांड एक ही समय में गतिमान दिखाई दिए और ऐसा ही दृश्य काग भूसुंडी को भगवान श्री राम ने दिखाया था जब रोटी ‌ चीन के लिए बालक समझकर का भूसुंडी भगवान श्री राम के विराट मुंह में प्रवेश कर गए थे इस तरह देशकाल समय की 64 विमाएं भारत ने खोज लिया था जबकि आधुनिक विज्ञान केवल 11 विमाएं ही खोज सका है। ‌ इसी तरह सनातन धर्म और संस्कृति की सभ्यता ने 84 लाख योनियों की धरती पर खोज किया है जबकि विज्ञान अभी मुश्किल से 20 लाख योनियों की खोज कर सकता है हमारे दिव्यास्त्र जिसमें ब्रह्मास्त्र नारायण अस्त्र पाशुपत अस्त्र एवं अस्त्र भार्गव और पर्जन्य तथा वायव्य ‌ सम्मोहन और प्रदीप जैसे महान दिव्या तारा थे जिसे धरती को और पूरी आकाश गंगा को नष्ट किया जा सकता था अभी वैज्ञानिक प्रगति उससे बहुत पीछे है इसीलिए विज्ञान में कभी एक सिद्धांत आता है तो फिर दूसरा और फिर तीसरा आ जाता है क्योंकि सत्य तक वह पहुंच ही नहीं पाते परमाणु सिद्धांत को ही ले लीजिए डाल्टन से लेकर बोर बरी समर फील्ड हाइजेनबर्ग और अब क्वांटम सिद्धांत आया हुआ है और कोई भी ठीक नहीं पाया जबकि भारत के कनाडा का परमाणु सिद्धांत आज भी अटूट है जिसमें उन्होंने झरोखे से आई हुई सूर्य की रोशनी में दिखने वाले सूक्ष्म कणों को 60 बार तोड़ने के बाद मिलने वाले कार्ड को परमाणु कहा था।


इसीलिए कहा गया है हरि अनंत हरि कथा अनंता और जो नहीं देखा नहीं सुना जो मनहू न समाय ‌ वाली बात सही है सूर्य के साथ रथ के घोड़ा का रहस्य आज सबको मालूम हो गया है कि सूर्य से निकलने वाली साथ किरणें ही उनके साथ रथ हैं और सूर्य से ओम की अनंत ध्वनि निकलती है और यह ध्वनि संपूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त है हमारे सौरमंडल से आगे बढ़ने पर विज्ञान का सारा सिद्धांत विफल हो जाता है ‌ हमारे ऋषि मुनि वैज्ञानिक ऐसे विमान अंतरिक्षण बन चुके थे जो अनंत गति को प्राप्त करके अपनी आकाशगंगा को पार कर कुछ ही घंटे में ब्रह्मांड के शीर्ष पर स्थित महाश्वेत द्वीप पर पहुंच जाता था।‌ प्राचीन भारत में विमान अंतरिक्ष यान और ब्रह्मांड यान विद्यमान थे पुष्पक सौभ और अन्य विमान को तो सब लोग जानते हैं। ‌ श्वेत श्याम विवर को लोग जानते थे कृष्ण नक्षत्र अर्थात ब्लैक होल के अंदर से जाते हुए भगवान श्री कृष्णा और अर्जुन का परम वेगशाली रथ अर्थात अंतरिक्ष यान ऐसे घनघोर अंधेरे में डूब गया कि करोड़ सूर्य के सामान प्रकाशित चक्र भी उसमें जलते हुए दिए के समान दिखाई दे रहा था ऐसा महाभारत में बिल्कुल स्पष्ट लिखा गया है और यह कल्पना नहीं है।


अरणोअरणीयान महतोमहीयान ‌ ‌ का महान आश्चर्यजनक और सबसे बड़ा सिद्धांत भारत की ही देन है अर्थात छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा जो कुछ संभव है दिखाया गया है सबसे छोटे में परमाणु के अंतिम रूप की और सबसे बड़े में अनंत ईश्वर की कल्पना की गई है अब आप सोच लीजिए कि यह अनंत ब्रह्मांड जो ईश्वर के एक रोम में स्थित है वह ईश्वर स्वयं में कितना विराट होगा और इतना बड़ा अनंत और विराट ढांचा अपने आप बन जाना किसी भी भौतिक रासायनिक नियम में संभव नहीं है 

इसलिए अपने धर्म दर्शन और अध्यात्म ग्रंथ को पढ़ो उसमें छिपी वैज्ञानिक तथ्य को आप लोग समझो ऐसा कुछ नहीं है जो हमारे संस्कृति सभ्यता और ग में नहीं है लेकिन गूगल या हो इंटरनेट पढ़कर और मोबाइल में व्यस्त समय विताकर हमें कुछ भी प्राप्त होने वाला नहीं है केवल शरीर रोग और बीमारियों से ग्रस्त हो जाएगा और बुद्धि भ्रष्ट हो जाएगी अपनी मौलिक कल्पना ज्ञान को देंगे और छोटे-छोटे काम गुड़ा गणित जोड़ भाग के लिए भी हम मोबाइल पर निर्भर हो जाएंगे 24 घंटे में 2 घंटे से अधिक समय मोबाइल पर देना मूर्खता है इसीलिए महा ब्रह्म ऋषि वेद व्यास जी ने महाभारत को लिखकर व्याख्या करते हुए लिख दिया था जो कुछ इस महाभारत में नहीं है वह ब्रह्मांड में कहीं नहीं है और यही अंतिम सच है ‌ हमारे देश में तो लक्ष्मण श्री राम मांधाता मुझको कुंड रघु अर्जुन भीष्म परशुराम मेघनाथ जैसे परम आधार रति योद्धा थे जिनके पास ब्रह्मांड की समस्त शक्तियां थी और जो चाहते तो समग्र ब्रह्मांड को मिटा सकते थे लेकिन ऐसा किसी ने नहीं किया क्योंकि हमारा देश सृजन का देश है विनाश का देश नहीं और बाकी धर्म और देश विनाश के अग्रदूत हैं जो सारी दुनिया का और अंत में अपना खुद का विनाश कर लेंगे।

Tuesday, 3 March 2026

यदि आप सच्चे सनातनी हिंदू हैं अर्थात दुनिया का कोई भी वह व्यक्ति जो क्रिश्चियन मुसलमान और यहूदी नहीं है इस चित्र पर बहुत गहराई से विचार करें और अपना विचार व्यक्त करें -डॉ दिलीप कुमार सिंह

यदि आप सच्चे सनातनी हिंदू हैं अर्थात दुनिया का कोई भी वह व्यक्ति जो क्रिश्चियन मुसलमान और यहूदी नहीं है इस चित्र पर बहुत गहराई से विचार करें और अपना विचार व्यक्त करें -डॉ दिलीप कुमार सिंह 

चित्र में राधा और कृष्णा जी को होली खेलते दिखाया गया है वह भी पिचकारी के द्वारा और जिस तरह उन्होंने वस्त्र पहने हैं वह कभी भी ना तो उचित है और ना शोभा दे रहा है ।

मैं सारे विद्वानों को चुनौती देता हूं कि वह अकबर के समय के पहले रंग वाली ग़दी होली का यदि एक भी उदाहरण दिखा दें तो मैं उनका मान लूंगा कि वह विद्वान है ।

होली विशुद्ध रूप से वसंत के आगमन का पर्व है यह फसलों का पर्व है उत्साह उमंग का पर्व है सत्य अज्ञान और अंधकार पर सत्य ज्ञान और प्रकाश का पर्व है यह लोगों को नैतिकता और सदाचार सीखने वाला पर्व है चाहे वह भक्त प्रहलाद की कहानी हो या धुंध नामक राक्षसी हो कहीं भी रंग वाला गंदा होली खेलने का वर्णन किसी भी धर्म ग्रंथ वेद पुराण में नहीं हुआ है ।


क्या आपको पता है कि यह सब क्यों हो रहा है यह सब हमारे सनातन धर्म को पूरी तरह मिटाने के लिए हो रहा है क्योंकि स्त्रियों किसी भी धर्म की धुरी होती हैं उदाहरण के लिए मुस्लिम और क्रिश्चियन धर्म को देख लो उनका सारा धर्म वहां की महिलाओं के द्वारा फैल रहा है और लगातार बढ़ रहा है आप सिर पटक कर मर जाओ लेकिन एक मुस्लिम महिला कभी भी नकाब हिजाब बुर्का नहीं छोड़ सकती चाहे भीषण गर्मी के पसीने में वह पूरी तरह से डूब जाए ।


यह 1000 वर्ष से अधिक समय से लगातार चल रहा है और हालत इतनी खराब हो चुकी है कि सारे देवी देवता गंदगी और अश्लीलता का पर्याय बन गए हैं यहां तक की भगवान कृष्ण को चूड़ी बेचने वाला बना दिया गया है जबकि उसे समय चूड़ी होती ही नहीं थी कब सुंदर सुगंधित फूलों की जगह महिलाओं ने सोना चांदी पहनना शुरू कर दिया उनको यह ज्ञान भी नहीं है ।

कब हमारे विवाह संस्कार और मांगलिक कार्य में डीजे आर्केस्ट्रा और गंदे गाने बजाने लगे यह भी लोग समझ नहीं पाए और धीरे-धीरे वही शुभ और मंगल कम तथा विवाह का प्रतीक बन गया और यदि आज पूछो तो सभी यही कहेंगे कि विवाह का अर्थ ही है डीजे आर्केस्ट्रा शराब पीकर गंदगी करना ।

इसी तरह त्यौहार में भी खुलकर मांस मदिरा और गंदगी का सैलाब रहता है जैसे कि आज होली में आप पूरे देश में देख सकते हैं धीरे-धीरे कब हम सभी लोग भोजन को खाना बधाई को शुक्रिया धन्यवाद मुबारक कहने लगे कब हम विवाह को शादी बोलने लगे और कब माता-पिता मम्मी पापा हो गए समझ ही में नहीं आया ।


हालात यहां तक बिगड़ चुकी है कि आज हम शुभ होली शुभ दीपावली की जगह हैप्पी होली कहकर बड़े प्रसन्न हो रहे हैं यही काम कभी वामपंथी और वृंदा करात कहा करते थे की मस्त-मस्त है चाहे गाय काहो चाहे सूअर काहो चाहे बकरी का हो जब उनसे प्रश्न किया गया कि महिला तो महिला है चाहे वह पत्नी हो मां हो बहन हो बेटी हो बहू हो तब से गायब हो गई है ।

ऐसा इसलिए है कि हम अपने धर्म ग्रंथ को पढ़ने नहीं है पढ़ कर समझते नहीं हैं जो नहीं समझना है वही ज्यादा पढ़ते हैं जैसे ढोल गंवार शूद्र पशु नारी यह तो पढ़ेंगे लेकिन क्यों कहा गया और किसने कहा यह कभी नहीं पड़ेंगे इसलिए सच नहीं जान पाते अहिंसा परमो धर्म कह कर गांधी ने देश बर्बाद कर दिया जबकि उसके साथ जुड़ा है धर्म हिंसा तदैव च। 


देश धीरे-धीरे कर बन गया यहां तक अफवाह फैला दी गई की महाभारत पढ़ने वाले घर में रोज लड़ाई झगड़ा होता है जबकि महाभारत और गीता पढ़ने वाले घर में धीर-वीर गंभीर माता-पिता के आज्ञाकारी बालक और बालिका जन्म लेते हैं ।


हमारा देश अहिंसा कैसे मान सकता है जिसके सभी देवी देवता एक से बढ़कर एक भयंकर अस्त्र-शस्त्र और दिव्यास्त्र से सुशोभित हैं कोई भी ऐसा देवी देवता आप नहीं दिखा सकते जिसके हाथों में अस्त्र-शस्त्र ना हो फिर कहां से और कैसे हम कर बन गए और अपने बच्चे बच्चियों को नाच गाना डांस सिखाने लगे जबकि पहलेकी माता ‌ बेटी बहन पत्नी उनको हथियार चलाना और वीर बना सिखाती थी । हमारे परमवीर तो तपस्या में भी अपना अस्त्र-शस्त्र नहीं छोड़ते थे तो अहिंसा इसमें कहां से आ गई अहिंसा शक्तिशाली लोगों का धर्म है कर और कमजोर लोगों का नहीं।

आज अंग्रेजी भाषा और क्रिश्चियन संस्कृति सभ्यता हमारे लिए सम्मान और अनुकरण का प्रतीक चिन्ह बना कर रह गई है हिंदी और अपनी भाषाएं लोग इसलिए बोलते हैं कि जीवन भर पढ़ने के बाद भी धड़ल्ले से अंग्रेजी पढ़ लिख बोल और समझ नहीं पाते अन्यथा कोई भी हिंदी अपनी भाषा बोलना ही बंद कर देगा यह सब पाटन की चरम सीमाएं हैं और अनेक गद्दार चापलूस चापलूस मक्खनबाज दलाल चमचे 420 इस पोस्ट को पढ़कर लाल पीला हरा नीला आग बबूला हो जाए तो क्या कहा जाए

आज से 100 साल पहले हमारे देश की स्त्रियां बिना कलंकित और अपवित्र हुए पूरा जीवन बिता देती थी और आज सब कुछ उपलब्ध होने पर भी क्यों वह कुपन्थी और गंदगी की ओर दौड़ नहीं है इसमें स्त्रियों का दोष नहीं है सारा दोस्त यहां के पुरुष लोगों का है ।


मैं सभी ‌ सच्चे सनातनी स्त्री पुरुषों से आवाहन करूंगा कि इस तरह अपने देश के धाम सदाचार नैतिकता और सच्ची बातों का वर्णन अवश्य करें अन्यथा जो पापी और विधर्मी शैतान चाहते हैं वह अपने कार्य में सफल होंगे ।

जितने भी हमारे खलनायक है उनको महानायक बनाया गया चाहे दुर्योधन हो चाहे कारण हो चाहे रावण हो चाहे जरासंध हो सबसे बड़ा उदाहरण कर्ण का देना चाहता हूं जिसको जबरदस्ती बहुत बड़ा उदार और मानवता का रक्षक कहा जाता है ।

करण जैसा कुटिल ना राधा झूठा मक्कार व्यक्ति कहीं हो ही नहीं सकता उसने साक्षात भगवान परशुराम से झूठ बोलकर दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्राप्त किया द्रोपदी के स्वयंवर में जब वह धनुष बाण नहीं चढ़ा सका तो द्रौपदी को पाने के लिए सारे कुकर्म कर डाला और इतना गंदी बात बोला की वेश्या का धर्म क्या धर्म क्या उसने गाय की हत्या किया यह जानते हुए भी की अभिमन्यु उसका सभा भतीजा है उसने उसका कवच काट डाला पांडव लोग उसके भाई थे उसको मालूम था फिर भी उसने दुर्योधन का साथ दिया ऐसे धार्मिक कर्ण को हम आप नहीं हमारे विदेशी शत्रु विख्यात कर रहे हैं जिससे अर्जुन जैसे महावीर पीछे चले जाएं ।‌ मित्रता का उदाहरण कारण का नाटक था वास्तव में वह अधर्मी था सत्य और धर्म का अनुसरण नहीं करने वाला था।

उसे समय पूरे ब्रह्मांड में दो सबसे सुंदर स्त्रियां थी एक उर्वशी और दूसरी उत्तर जिसमें उत्तर केवल 16 वर्ष की कन्या थी और उर्वशी तो सारे ब्रह्मांड की सर्वश्रेष्ठ सुंदरी थी दोनों से अर्जुन को विवाह करने का सुनहरा अवसर र्मिला लेकिन उन्होंने एक को मां कहा और दूसरी को बेटी क्या आज कोई ऐसा व्यक्ति है जो इस तरह का उदाहरण दे सके आज तो गुरु लोग अपनी शिक्षाओं के साथ ही कुकर्म करते हुए रोज पकड़े जाते हैं ।


कहने का अर्थ यह है कि हम इतने गिर गए हैं की सबसे गिरे हुए विधर्मी सूअर शैतान भी हमको अच्छा लगने लगे हैं उनका सड़ा गला पाव टोस्ट रोटी बिस्किट मुर्गी मुर्गा सेवई हमको अच्छा लगने लगा है जबकि हमारी दादी और अम्मा के समय तक ऐसा था कि मुस्लिम घर का छुआ पानी भी नहीं पीते थे एक बार खुद मेरे सामने पिताजी और माताजी में जमकर झगड़ा हुआ था क्योंकि पड़ोस में रहने वाली एक मुस्लिम महिला थी उसके यहां से सेवई आ गया था इसके लिए पूरा महाभारत मचा और अंत में उसे फेंकना पड़ा था ।


एक और घटना बता रहा हूं एक बार हमारे गांव का एक हरिजन मुकदमा लड़ने आया तब मैं हाई स्कूल में पढ़ रहा था जब मैं उसको भोजन दिया तब उसने हाथ जोड़कर कहा बाबूजी आप किसी चीज में हमें खिला दीजिए लेकिन मुस्लिम के हाथ का छुआ बर्तन हमको मत देना। मैं उनसे कहा हमारे घर में ऐसा कुछ नहीं है हम सारे सनातनी हिंदू लोगों को उसी बर्तन में खिलाते हैं जिसमें खुद खाते हैं लेकिन उसकी पवित्र भावना देखकर मैं समझ गया कि जिसको कुछ मूर्ख इतना अछूत समझते हैं वह हरिजन भी एक मुस्लिम से लाखों गुना अच्छा है आज भी मैं वह घटना नहीं भूल पाया ।

इसलिए है आर्य पुत्रों भारत की महिलाओं लड़के लड़कियों जागो सपने में मत रहो गांधी चीजों से दूर हटो और विदेशी तथा देश के गद्दारों के मिले-जुले प्रयास को समाप्त करो वैसे भी सनातन धर्म कभी समाप्त नहीं होगा एक ही रामकृष्ण गौतम बुद्ध महावीर स्वामी नानक शिवाजी राणा प्रताप मांधाता चाणक्य चंद्रगुप्त पैदा होंगे और सारे विधर्मी शैतानों का जड़ से संघार कर देंगे ।

इसीलिए तो दुनिया में अनगिनत पुल बने और टूट गए लेकिन 1700000 साल पहले भगवान राम का बनाया रामसेतु आज भी जिंदा है जूनागढ़ टूटा किंतु खड़ा गिरनार है होते ही रहेंगे सिंह यहां की गुफाओं में आर्य भूमि अंत में रहेगी आर्य भूमि ही-

जिन विधर्मी म्लेच्छ शैतानों की छाया से भी दूर रहने के लिए हमारे देश की महिलाओं ने लाखों की संख्या में अग्नि में कूद कर जौहर कर लिया आज इस महान गड्ढे और नीच लोगों के साथ हमारे धर्म की लड़कियां औरतें भाग रही है यही दिखता है कि हम पतन की सारी सीमाओं को तोड़कर बहुत अधिक पतित हो चुके हैं‌ हालत इतनी खराब है कि आज होली जैसे महापर्व पर भी दक्षिण भारत के अनेक राज्यों में स्कूल कॉलेज और बड़ी-बड़ी कंपनियां खुली हुई है लेकिन क्या ईद बकरीद और क्रिसमस तथा न्यू इंग्लिश ईयर पर एक भी कंपनी स्कूल कॉलेज खुला रहता है यदि हां तो बता दीजिए