किसी भी मंदिर और तीर्थ स्थान में घूमने अवश्य जाओ क्योंकि इससे सारे देश की जनता उनकी प्रथम परंपरा की जानकारी और मिलने जुलने तथा देश के हर भाग से जुड़ने और उसकी जानकारी मिलती है लेकिन
एक भी पैसा मंदिर में दान मत करो ना तो गहना आभूषण या कोई अन्य कीमती चीज चढ़ाव यदि ऐसा किया तो उसे पुजारी पांडे और वहां रहने वाले दलाल बड़े-बड़े अधिकारी और सरकारी तंत्र के राजनेता मानस मंदिर महिला मिथुन में फूंक देंगे बचा हुआ धन और पैसा विदेशी लूट ले जाएंगे जैसा की ढाई हजार साल से हो रहा है।
इसका परिणाम होगा कि केवल असली और सच्चे भक्त जो रुखा सुखा खाकर या भूखे पेट रहकर ईश्वर की सेवा कर सकते हैं वही रहेंगे बाकी पुलिस और प्रशासन सरकार के अधिकारी और अति विशिष्ट लोग पुजारी पढ़ने और उनसे जुड़े दलाल और चमचे कुछ दिन बाद भाग खड़े होंगे क्योंकि इनका ध्यान ईश्वर सेवा में नहीं बल्कि रूपए पैसे और सोने चांदी में रहता है और यही देश के विनाश का कारण बनता है यदि देश में मंदिर और धर्म स्थान पर चढ़ने वाले पैसों का उपयोग सनातन धर्म के विकास और शिक्षा दीक्षा पर कल कारखाने पर खर्च हो तो सारी भेजो बेरोजगारी दूर हो जाएगी ।
यह हखल केवल अयोध्या का नहीं है तिरुपति बालाजी से लेकर किसी भी मंदिर का वैष्णो मां का मंदिर हो या कामाख्या मंदिर हो मैहर देवी विंध्याचल धाम या फिर द्वारिका धाम हो असली भगवान के भक्ति दर्द ठोके कहते हैं और सुबह से शाम तक कतर में खड़े रहते हैं जबकि चोर बेईमान धोखेबाज जनता का खून चूसने वाले राजनेता अधिकारी पुजारी पांडे तत्काल ही विशिष्ट कतर से निकाल कर सीधे-सीधे दर्शन करते हैं और भोग लगाकर पैसा बताकर निकल जाते हैं ।
यदि आपको दान पुण्य की इच्छा ही है तो वहां से दर्शन करके अपने गांव आओ वहां पर लोगों को भोज दो गांव में एकता बढ़ेगी और लोग आपकी प्रशंसा भी करेंगे ईश्वर की भक्ति भी बढ़ेगी और हर व्यक्ति लौट कर अपने गांव में भोज भंडारा करेगा इससे सनातन धर्म का विकास होगा।
इसके अतिरिक्त आप गरीब कन्याओं का विवाह मेधावी छात्रों की सहायता असहाय लोगों की सेवा करो घर में अपने माता-पिता की सेवा करो बड़ों का आदर सम्मान करो यही सच्ची ईश्वर भक्ति है आपने आज से 100 वर्ष पहले किसी को कोई गहना कपड़ा आभूषण चढ़ाते देखा है। क्या भगवान श्री राम देश में मंदिरों में जाकर रूपए पैसे गहने चढ़ाते थे गोस्वामी जी ने लिखा है ।
प्रातः काल उठि के रघुनाथा
मात पिता गुरु नावहिं माथा।
एहि से अधिक धर्म नहीं दूजा।
सादर सास ससुर पद पूजा ।
लेकिन एक तरफ आज की पीढ़ी रहती है हम पढ़े-लिखे बुद्धिमान है दूसरे तरफ महिलाएं अपने पति की सेवा करना पाप समझती हैं और बड़े-बड़े मगरमच्छ घड़ियाल रूपी पापी संत महंत लोगों की चरण वंदना करके उनकी हर प्रकार से सेवा करती है ऐसी महिलाओं को क्या प्राप्त होगा आप समझ सकते हैं ।
इस तरह पुरुष लोग भी इतने गिरे हो चुके हैं कि अपनी पत्नियों को छोड़कर दुनिया भर की औरतों को खोजते हुए नरक में जाते हैं जैसा कि अभी आपने देखा होगा की मां बाप को धोखा देने वाले अपने पति को किस तरह पत्नी ने खाई में धकेल कर मार दिया ।
इसके अलावा भी यदि आपको सेवा करनी है तो मंदिर बनवा दीजिए पानी का पंप लगवा दीजिए ठहरने के लिए यात्री साल बनवा दीजिए सड़क बनवाइए यह सच्ची ईश्वर भक्ति है।
वरना आपका खून पसीने की गाड़ी कमाई यही धर्म गुरु जो पांच कुंतल से भी भारी होते हैं राजनेताओं माफिया धन कुबेर और उद्योगपति लोगों के साथ बड़े अधिकारी से सांठगांठ करके ईश्वर के नाम का भजन कीर्तन करते हुए डकार जाएंगे और आपको पता भी नहीं लगेगा।
अयोध्या में जो कुछ हुआ वह भगवान की इच्छा से हुआ उन्होंने दिखा दिया यह धर्म गुरु पुजारी पांडे उनके चेले दलाल बड़े-बड़े अधिकारी बड़े-बड़े राजनेता धन कुबेर माफिया वास्तव में कितने गिरे हुए हैं इसलिए अब भी समझ जाओ और संभल जाओ बाकी तो कुछ कहने की आवश्यकता ही नहीं है।
यदि दुनिया भर का टोटका ना हो तो कोई विशिष्ट कतर नहीं लगेगी हर व्यक्ति आराम से दर्शन करेगा और चला जाएगा व्यापार नहीं होगा आज भी जहां पर इस प्रकार के महंत और मठाधीश नहीं है वहां लोगों को बिना रोक-टोक दर्शन मिलता है और वही सच्ची सेवा और श्रद्धा है खुद हमारे गांव में हमारे पूर्वजों के द्वारा 500 वर्ष पहले बनाया गया बाबा गंगा दास का अद्भुत आश्रम और बावड़ी है जहां पर दान कुछ नहीं देना पड़ता है उल्टे प्रसाद भी मिलता है ।
तो मंदिर ऐसा होना चाहिए जो जिसका एक-एक पैसा देश और धर्म में अपने सनातन के विकास में लगे वहां रहने वाले साधु संत केवल अपने रहने खाने के लिए पैसे का उपयोग ले सकते हैं ना की चोरी करने के लिए दुराचार करने के लिए मोटे-मोटे सोने की सिकड़ी पहनने के लिए और भोग विलास के लिए और यही हो रहा है और भीड़ में यह पुजारी पंडित क्या-क्या करते हैं कुछ कहने सुनने और लिखने लायक भी नहीं है और विरोध करने पर यह पुजारी पांडे जो वास्तव में गुंडे और चरित्रहीन व्यक्ति हैं एक साथ होकर मारपीट करने लगते हैं जैसा की तमाम वीडियो में आया है यह सबसे अधिक चौकियां जौनपुर में होता है और हर जगह होता है।
याद रखो ईश्वर हर एक जगह है और मंदिर आश्रम धर्मस्थल सनातन धर्म के विकास आपस में मेलजोल और देश को जानने के लिए बनाया गया है आभूषण गाना पैसे चढ़ाने के लिए नहीं एक बार गहराई से सोच कर देखो आप हर जगह स्वयं देवी देवताओं से मांगने जाते हो अपनी इच्छाओं को पूरा करने जाते हो तो क्या भगवान को तुम खुद दे सकते हो जो उन्हें पैसे और गहने देते हो और अगर इतना सक्षम हो तो फिर वहां जाते क्यों हो -डॉ दिलीप कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल