Monday, 17 August 2026

बुढ़वा मंगल और महावीर हनुमान - डॉ दिलीप कुमार सिंह

बुढ़वा मंगल और महावीर हनुमान - डॉ दिलीप कुमार सिंह 

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हनुमान जी श्री राम और माता सीता के अनन्य भक्त हैं कलयुग में उनसे बड़ा कोई भी नहीं है उन्हें अमर कहा जाता है और सृष्टि के अंत तक श्री राम कथा का प्रचार करने के लिए दुष्टों का संघार करने के लिए और सज्जनों का उद्धार करने के लिए कलयुग में उन्हें विशेष रूप से भगवान श्री राम के द्वारा सहेजा गया है।
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बुढ़वा मंगल की कहानी

बुढ़वा मंगल को बड़ा मंगलवार भी कहते हैं इसकी कथा महाभारत से ली गई है महाबली भीमसेन जिनमें 10000 हाथियों का बल था अपने बल पर बहुत घमंड करते थे और हमेशा उत्पात मचाया करते थे एक बार जब वह बनवास में थे तब हिमालय क्षेत्र में उन्हें एक अद्भुत दिव्य सुगंध की अनुभूति हुई बाद में संत और महात्माओं ने कहा यह तो अद्भुत नीलकमल की सुगंध है जो दूर-दूर तक फैला रहता है द्रोपदी की इच्छा हुई कि इस नीलकमल को धारण करें बस फिर क्या था उन्होंने भीम को कहा और भीम दहाड़ते और गरजते हुए चल पड़े। 


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भीमसेन की दहाड़ से सभी भयभीत हो गए जंगल के शेर चीता बाघ इधर-उधर भागने लगे और हलचल मच गई भीम अपनी गदा जोर-जोर घुमाते हुए नीलकमल की ओर चले जा रहे थे हनुमान जी ने उनको शिक्षा देने और उनके अहंकार को दूर करने के लिए एक वृद्ध बंदर का रूप बनाया और रास्ते में पूछ फैला कर लेट गए थोड़ी ही देर बाद भीम गरजते और दहाड़ते हुए उधर आए और रास्ते पर बंदर की पूंछ देखकर उन्होंने बंदर से अपनी पूंछ हटाने को कहा तब हनुमान रूपी वृद्ध वानर बोला अरे भाई तुम मुझको लांघ कर चले जाओ इस पर भी भीमसेन ने कहा कि किसी को भी लांघ कर जाने का सनातन धर्म में कोई नियम नहीं है इसलिए तुम अपनी पूंछ हटा लो।

हनुमान जी ने कहा ऐसा करो तुम मेरी मूछ हटा दो और चले जाओ क्योंकि मैं तो बुड्ढा हो गया हूं और मुझे उठने बैठने में बहुत परेशानी होती है इस पर भी गर्व से भरकर एक अंगुली से उसकी पुछ उठाकर फेंकने लगे मगर अंगुली में दर्द होने लगा और पूछ जहां की तहां पड़ी रही इस पर उन्होंने एक हाथ से उठाने का प्रयास किया फिर दोनों हाथ से उठाने का प्रयास किया इसके बाद अपनी गदा से हटाने का प्रयास किया लेकिन पसीने पसीने होने पर भी पूंछ हिंली तक नहीं। 

इस पर भीमसेन को बहुत आश्चर्य हुआ 10000 हाथियों का बल रखने वाले भीम एक बंदर की पूंछ नहीं हटा पाए उन्हें अपनी भूल अनुभव हुई और उन्होंने प्रार्थना किया कि हे भगवान आप अपने असली रूप में आ जाइए तब हनुमान अपने विराट असली रूप में आए जो आकाश तक फैले हुए थे भीम ने उनकी पूजा अर्चना किया और हनुमान जी परम प्रसन्न हुए और भीमसेन को अच्छे उपदेश देते हुए अपनी दिव्य शक्तियों को प्रदान किया इसके बाद भीमसेन नीलकमल लेकर द्रौपदी को दे दिए तभी से यह बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल मनाया जाने लगा है। 

इस दिन स्नान करके शुद्ध चित्र से हनुमान जी का ध्यान करना चाहिए उनके मंदिर में जाकर उनसे अपनी मनोकामना कहना चाहिए बेसन के लड्डू सिंदूर और चमेली भी चढ़ा सकते हैं लेकिन ध्यान रखें कि हनुमान जी की पूजा करते समय भगवती सीता और भगवान श्री राम का ध्यान अवश्य करें हनुमान चालीसा का भी पाठ करना चाहिए और हनुमान जी की दिव्या गाथाओं का वर्णन करते हुए रामायण के प्रसंग को भी आपस में कहना और सुनना चाहिए ऐसा करने से हनुमान जी निश्चित प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूरी करते हैं हनुमान जी का ऐसा प्रभाव है कि उनके भक्त को कलयुग का प्रभाव और शनिदेव छू भी नहीं सकते हैं बाकी की बात ही क्या है

नाग पंचमी और सांप प्रजातियां डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह

 नाग पंचमी और सांप प्रजातियां डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह 

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भारत विश्व का सबसे प्राचीन और विश्व व्यापी फैला हुआ देश है और सनातन धर्म सारे संसार का सबसे प्राचीन धर्म है यहां प्रत्येक दिन कोई ना कोई पर्व और उत्सव होता रहता है जिससे जीवन में नीरसता की जगह सरसता फैली रहती है हर एक पर्व उत्सव त्यौहार का अपना एक विशिष्ट महत्व होता है जो मानव जीवन कृषि कार्य धर्म दर्शन अध्यात्म के साथ प्रकृति और पर्यावरण से भी जुड़ा रहता है ऐसा ही एक महान पर्व नाग पंचमी है जो नागों से जुड़ा हुआ है भारत एक ऐसा देश है जहां पर पशु पक्षी ईंट पत्थर आकाश पाताल दिशाओं की ग्राम देवी ग्राम देवता तक की पूजा की जाती है क्योंकि कालांतर में सिद्ध हो गया है कि प्रत्येक वस्तु परमाणु अथवा कोशिका से बनी है और हर एक परमाणु और कोशिका में ईश्वर का ही अंश होता है ।

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नाग पंचमी का महान पर्व सावन महीने के शुक्ल पक्ष में पंचमी के दिन मनाया जाता है जब लोग घर की साफ सफाई करके लीप पोत कर कपड़े पहनकर नाग देवता की पूजा करते हैं और उनका दूध चढ़ाते हैं इस दिन नाग देवता का दर्शन करना शुभ माना जाता है संसार में कोई भी ऐसा धर्म नहीं है जिसके मानने वाले दुनिया में सबसे भयंकर माने जाने वाले नाग और सांपों की पूजा करते हैं जो स्वयं में काल का एक स्वरूप होता है और जिसको देखकर बड़े से बड़े लोगों के मन में भय पैदा हो जाता है और आज इतनी अधिक वैज्ञानिक और चिकित्सा की उन्नति हो जाने के बाद भी प्रतिवर्ष भारत में और दुनिया में सांपों के काटने से लाखों लोग मरते हैं तो प्रश्न उठता है कि आखिर नाग पंचमी का त्यौहार क्यों मनाया गया और इनकी पूजा क्यों की जाती है। 

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सभी प्रकार के सांपों में नाग का विश्व सबसे अधिक विषैला और प्रभावकारी होता है और यह न्यूरोटॉक्सिक होता है नाग अर्थात कोबरा की कई प्रजातियां होती हैं जिसमें शेषनाग सबसे लंबी और घातक प्रजाति है जो हर प्रकार के सांपों को जिंदा ही खा जाता है इसके बाद काला नाग और भूरा नाग होता है और यही सांप की ऐसी प्रजाति है जिसमें बहुत पुराने कुछ नागों में नागमणि पाई जाती है वैसे तो भारत में करैत वाईपर और रसेल वाइपर सांप भी बहुत जहरीले होते हैं लेकिन यह सभी नाग के भय से छिपे रहते हैं। 

वैसे तो कोई भी जहरीला नाग या सांप काट ले तो वर्तमान समय में प्राथमिक चिकित्सा करके अर्थात घाव को साबुन से यह स्वच्छ पानी से अच्छी तरह धोकर उसके ऊपर हल्का दबाव देते हुए पट्टी बांधकर तुरंत ही चिकित्सक के पास जाना चाहिए लेकिन जहां पर चिकित्सा सुविधा न हो या समय बहुत कम हो वहां पर तंत्र-मंत्र जड़ी बूटियां का प्रयोग करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए जिसमें अधिक मात्रा में काली मिर्च और घी को पिलाना नीम की पत्ती खिलाना और कुछ मंत्रों का जाप करना शामिल है ऐसा माना जाता है कि जरत् कारु ऋषि कश्यप ऋषि शंखचूड़ वासुकी का नाम लेने से सांप नहीं काटते हैं और वह रास्ता बदल कर चले जाते हैं और इनका नाम लेने से सांप का विष असर नहीं करता है नाग कुल का भला करने वाले कुछ ऐसे भी वंश हैं जिन पर सांपों के विश्व का असर नहीं पड़ता है यह बात पूरी तरह सच है इसके अलावा **ऊं कुरुकुल्ये हूं फट् स्वाहा**मंत्र का जाप करने से भी सांप के विश्व का असर नहीं होता है 

सांप एक ऐसा प्राणी है जो मनुष्य से सबसे अधिक डरता है इसके अलावा यह नेवला गरुड़ पक्षी बाज प्रजातियां और गिलहरी मोर एवं बिल्ली से भी डरता है नाग पंचमी को जिस प्रकार से पूजा पाठ और सफाई की जाती है और सावन महीने में जिस तरह से महारुद्र अभिषेक किया जाता है उसे सांप मनुष्य का निवास छोड़कर बन बाग खेत और अन्य जगहों पर चले जाते हैं इसीलिए नाग पंचमी त्यौहार मना कर नागों की पूजा की जाती है इसके अलावा यह नाग जाति और मनुष्य जाति के बीच प्राचीन संबंधों का भी स्मरण दिलाता है। नाग एक प्राचीन काल में मानव की जाति थी जो जंगल गुफा कंदराओं में रहते थे और उनका नागों के साथ लंबे समय रहने से उनके बारे में पूरा ज्ञान हो गया था और वह जड़ी बूटियां और सांपों का जहर उतारने और उनको पकड़ने में सिद्धहस्त थे। नागवंश एक प्रसिद्ध राजवंश भी था अर्जुन घटोत्कच सहित अनेक लोगों का नाग कुल में विवाह हुआ था मेघनाथ की पत्नी सुलोचना नागवांश से ही थी इस प्रकार नाग पंचमी को इसलिए भी मनाया जाता है कि धीरे-धीरे नागवंट आर्य वंश में घुल मिल गया था 

सभी प्रकार के जहरीले नागों से मानव जाति को अपार लाभ होता है यह मानव जाति के लिए विनाशकारी चूहे और अनेक जीव जंतुओं को खाकर मानव जाति का असीम कल्याण करते हैं इसके अलावा यह वातावरण में फैले हुए भयंकर विष को धीरे-धीरे पीते रहते हैं इसे जहर पूरी पृथ्वी पर फैल नहीं पाता है। 

जहरीले सांपों से कैंसर इत्यादि की बहुत कीमती दवाएं भी बनती हैं और पूरी दुनिया में सांपों को बड़े चाव से खाया भी जाता है अब रही सांपों के द्वारा मानव को काटने की तो यह स्वाभाविक सी बात है कि अगर सांपों को अपने प्राण संकट में दिखाते हैं तब वह आक्रमण कर देते हैं वैसे सांप का विश्व उनकी सबसे कीमती धरोहर होता है एक बार काट लेने के बाद फिर से जहर बनने में महीनों लग जाते हैं इसलिए सांप जल्दी काटते नहीं और काटते भी हैं तो बहुत ज्यादा विष नहीं उगलते हैं इसके अतिरिक्त सांप भगवान शिव के गले के आभूषण हैं जिनको वह बड़े चाव से अपने गले में पहनते हैं जब उन्होंने हलाहल विष का पान किया था तो उसे कुछ बूंदे धरती पर गिरी और उसी को पीकर सांप बिच्छू और अन्य जीव जहरीले हो गए थे शिव जी का आभूषण होने के कारण और उनके गले की शोभा होने के कारण भी सांपों की पूजा किया जाता है। 

सांप से जुड़ी अनेक कथा कहानी और किंवदन्तियां है लाखों करोड़ों वर्षों से भारतीय जीवन में घुली मिली हैं जिसमें सांपों के द्वारा बदला लेना और कुछ विशेष प्रकार के नागों में नागमणि होना पूरी तरह सत्य है इसके अलावा बहुत भ्रांत धारणाएं भी लोगों के मन में बस गई हैं नाग पंचमी को सांपों के संरक्षण और उनसे सावधान रहने से भी जोड़ कर देखा जाता है क्योंकि वर्षा काल में सांपों के प्रजनन का महीना होता है इसलिए वह बहुत अधिक उग्र होते हैं उनसे बचकर रहना चाहिए और सभी प्राणी एक समान है इस बात की धारणा भी नाग पूजा पूजा दिखती है। 

नाग पंचमी के दिन विधि विधान से नागों की पूजा होती है और उन्हें दूध खीर चढ़ाया जाता है इसके अलावा लोक जीवन में इसे स्थाई बनाने के लिए इस दिन भारत के हर एक गांव शहर गली मोहल्ले में दंगल अर्थात कुश्ती होती है और कूड़ी अर्थात लंबी कूद का आयोजन किया जाता है इसके बाद घरों में भांति-भांति  के सुंदर पकवान बनते हैं इस प्रकार यह महान पर्व शारीरिक स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है नाग पंचमी के दो दिन पहले हरियाली तीज या हरितालिका तीज आती है जिसका अपना विशेष महत्व है यह विशेष रूप से ध्यान देने की बात है कि सावन में चारों तरफ घने पेड़ पौधे हरियाली होने से और पानी भर जाने से सांप उन सब स्थान से मानव निवास की ओर दौड़ते हैं और नाग पंचमी के दिन पूजा से उत्पन्न विभिन्न प्रकार की रासायनिक गंध और सूक्ष्म ऊर्जा नाग और हर प्रकार के सांपों को आवाज से दूर ले जाती है

यही वजह है कि पहले हर तरफ घने जंगल झाड़ झंकाड़ और हरियाली होने के बाद और घनघोर वर्षा होने के बाद भी प्राचीन काल में सांपों के काटने से शायद ही कोई मरा हो अब ज्यादा लोग मर रहे हैं क्योंकि सांप के आवास पर लोग जबरदस्ती कब्जा कर रहे हैं आप आज से 50 वर्ष पहले अपने घर खानदान के लोगों से पता करेंगे तो पता लगेगा कि इतनी भयंकर स्थिति के बाद भी सांप के काटने से बहुत ही कम लोग मरे हैं और नाग तो बिना चेतावनी दिए काटते भी नहीं है सबसे खतरनाक करैत नाम का सांप होता है जो 1 से 2 फीट लंबा काला चित्तीदार होता है और अगर यह सोते समय काट लेता है तो लोग सोते ही रह जाते हैं इसीलिए कहा जाता है कि करैत का काटा हुआ पानी भी नहीं मांगता हैऔर पूजा पाठ भी नहीं करते हैं इसलिए कहा जा सकता है कि नाग पंचमी एक पूर्ण वैज्ञानिक महापर्व है जो प्रकृति पर्यावरण और प्राणी मात्र की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है
[8/17, 1:56 PM] Dr  Dileep Kumar singh: बुढ़वा मंगल और महावीर हनुमान - डॉ दिलीप कुमार सिंह 

हनुमान जी श्री राम राम और माता सीता के अनन्य भक्त हैं कलयुग में उनसे बड़ा कोई भी नहीं है उन्हें अमर कहा जाता है और सृष्टि के अंत तक श्री राम कथा का प्रचार करने के लिए दुष्टों का संघार करने के लिए और सज्जनों का उद्धार करने के लिए कलयुग में उन्हें विशेष रूप से भगवान श्री राम के द्वारा सहेजा गया है
बुढ़वा मंगल की कहानी बुढ़वा मंगल को बड़ा मंगलवार भी कहते हैं इसकी कथा महाभारत से ली गई है महाबली भीमसेन जिनमें 10000 हाथियों का बाल था अपने बल पर बहुत घमंड करते थे और हमेशा उत्पाद मचाया करते थे एक बार जब वह बनवास में थे तब हिमालय क्षेत्र में उन्हें एक अद्भुत दिव्य सुगंध की अनुभूति हुई बाद में संत और महात्माओं ने कहा यह तो अद्भुत नीलकमल की सुगंध है जो दूर-दूर तक फैला रहता है द्रोपदी की इच्छा हुई कि इस नीलकमल को धारण करें बस फिर क्या था उन्होंने भी को कहा और भीम दहाड़ते और गरजते हुए चल पड़े 

भीमसेन की दहाड़ से सभी भयभीत हो गए जंगल के शेर चीता बाघ इधर-उधर भागने लगे और हलचल मच गई भी अपनी गदा जोर-जोर घूमते हुए नीलकमल की ओर चले जा रहे थे हनुमान जी ने उनको शिक्षा देने और उनके अहंकार को दूर करने के लिए एक वृद्ध बंदर का रूप बनाया और रास्ते में पूछ फैला कर लेट गए थोड़ी ही देर बाद भीम भीम गरजते और दहाड़ते हुए उधर आए और रास्ते पर बंदर की पूंछ देखकर उन्होंने बंदर से अपनी पूंछ हटाने को कहा तब हनुमान रूपी वृद्धि वानर बोला अरे भाई तुम मुझको लग कर चले जाओ इस पर भी भीमसेन ने कहा कि किसी को भी लांघ कर जाने का सनातन धर्म में कोई नियम नहीं है इसलिए तुम अपनी पूंछ हटा लो

हनुमान जी ने कहा ऐसा करो तुम मेरी मूछ हटा दो और चले जाओ क्योंकि मैं तो बुड्ढा हो गया हूं और मुझे उठने बैठने में बहुत परेशानी होती है इस पर भी गर्व से भरकर एक अंगुली से उसकी पुछ उठाकर फेंकने लगे मगर अंगुली में दर्द होने लगा और पूछ यहां की कहां पड़ी रही इस पर उन्होंने एक हाथ से उठाने का प्रयास किया फिर दोनों हाथ से उठाने का प्रयास किया इसके बाद अपनी गदा से हटाने का प्रयास किया लेकिन पसीने पसीने होने पर भी पूंछ हिंदी तक नहीं 

इस पर भीमसेन को बहुत आश्चर्य हुआ 10000 हाथियों का बाल रखने वाले भीम एक बंदर की पूछ नहीं हटा पाए उन्हें अपनी भूल अनुभव हुई और उन्होंने प्रार्थना किया कि हे भगवान आप अपने असली रूप में आ जाइए तब हनुमान अपने विराट असली रूप में आए जो आकाश तक फैले हुए थे भी ने उनकी पूजा अर्चना किया और हनुमान जी परम प्रसन्न हुए और भीमसेन को अच्छे उपदेश देते हुए अपनी दिव्य शक्तियों को प्रदान किया इसके बाद भीमसेन नीलकमल लेकर द्रौपदी को दे दिए तभी से यह बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल मनाया जाने लगा है 

इस दिन स्नान करके शुद्ध चित्र से हनुमान जी का ध्यान करना चाहिए उनके मंदिर में जाकर उनसे अपनी मनोकामना कहना चाहिए बेसन के लड्डू सिंदूर और चमेली भी चढ़ा सकते हैं लेकिन ध्यान रखें कि हनुमान जी की पूजा करते समय भगवती सीता और भगवान श्री राम का ध्यान अवश्य करें हनुमान चालीसा का भी पाठ करना चाहिए और हनुमान जी की दिव्या गाथाओं का वर्णन करते हुए रामायण के प्रसंग को भी आपस में कहना और सुनना चाहिए ऐसा करने से हनुमान जी निश्चित प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूरी करते हैं हनुमान जी का ऐसा प्रभाव है कि उनके भक्त को कलयुग का प्रभाव और शनिदेव छू भी नहीं सकते हैं बाकी की बात ही क्या है

Sunday, 16 August 2026

*आने वाला समय कुवांरेपन का युग होगा* एक हालिया अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार अगले छ:वर्षो में विश्व की लगभग 45% लड़कियां अविवाहित रह जाएंगी।

*आने वाला समय कुवांरेपन का युग होगा*
       
     एक हालिया अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार अगले छ:वर्षो में विश्व की लगभग 45% लड़कियां अविवाहित रह जाएंगी।
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यह रिपोर्ट 1 फरवरी 2025 को प्रकाशित लोकमत अखबार में छपी थी, जो मार्गन स्टेनली संस्था द्वारा किए गए एक विस्तृत अध्धयन पर आधारित हैं।।

*सर्वेक्षण में पाये गए प्रमुख कारण:-*

१.आज की लड़कियां उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही है और करियर को प्राथमिकता दे रही हैं।
२.वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है और किसी पर निर्भर रहना नहीं चाहती।
३.उन्हें स्वतंत्रता प्रिय है और वे अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेना चाहती हैं।
४.विवाह, मातृत्व और पारिवारिक बंधनों को वे अक्सर अपनी प्रगति में बाधा मानने लगी हैं।
५.यदि यह प्रवृति बनी रही तो पारंपरिक परिवार प्रणाली और सामाजिक संरचना बिखर सकती हैं।
६.जनसंख्या में गिरावट, कुंवारे लड़को की संख्या में वृद्धि और वृद्धावस्था में अकेलेपन की समस्याएँ सामने आ सकती हैं।
७.प्रश्न यह भी उठता है प्रगति, पद और पैसा किस काम आएंगे, जब जीवन के अंत में साथ देने वाला कोई न होगा?

*कई माता पिता लड़कियों के रिश्ते तो ढूंढ रहे हैं, पर स्वयं लड़की को विवाह में रूचि नहीं होती।जिसके कारण हर रिश्ता नकारा जा रहा है।*
*समाज के एक बड़े वर्ग को इस बदलाव की गंभीरता का अभी मालूम नहीं है,इसलिए यह आवश्यक है कि हम समय रहते चेते।*

*लड़कियों के विवाह के लिए उपयुक्त आयु 23 से 26 वर्ष के बीच हो यदि हो पाएं तो ओर भी जल्दी, इसके लिए सामूहिक स्तर पर जागरूकता ओर पहल जरूरी है।*

*यह विषय किसी के विरोध में नहीं, बल्कि भविष्य की स्थरिता और संतुलन की चिंता के तहत उठाया गया है, समाज, परिवार और व्यक्तिगत जीवन तीनों को संतुलित रखना ही सच्ची प्रगति हैं।*


: *हम सबको इस पर विचार अवश्य करना चाहिए*

   *भविष्य की एक ज्वलंत समस्या*
   
👉🏿   जब बच्चों का विवाह
    20 साल में होता था, तो 
   एक सदी में 5 पीढ़ियाँ होती थीं.

👉🏿 जब बच्चों का विवाह
     25 साल में होता था, तो 
    एक सदी में 4 पीढ़ियाँ होती थीं.

👉🏿 अब बच्चों का विवाह
    30 साल में होता है, तो 
   एक सदी में 3 पीढ़ियाँ होती हैं.

👉🏿  सोचने वाली बात है.
        क्या हमारा समाज 
अगली सदी तक जीवित रहेगा ?
     आज एक अजीब सा 
       अंधेरा फैल रहा है.

🏚️    गली-मोहल्ले वीरान हैं, 
      आस-पास के घर खाली हैं.
आज घरों में बच्चों की आवाज कम 
        पति-पत्नी की आवाज 
         ज्यादा सुनाई देती है.

★  लड़कियाँ 30-35 साल तक 
              कुंवारी हैं.
★  लड़के 35 साल के बाद भी 
         कुँवारें घूम रहे हैं.
★  देर से शादी ...
   फिर सम्बंध विच्छेद (तलाक)

         टूटते परिवार  ...
         दुखी माँ-बाप.
      माता-पिता अकेले..
पूरी पीढ़ी खालीपन अनुभव करती है.

🤷🏻‍♀️   क्या हम इसे 
    "पढ़ा-लिखा समाज" कहें या 
"स्वयं को नुकसान पहुँचाने वाला समाज" 

💁🏻‍♂️  यह तो जनसंख्या कम करने की
           एक खामोश साज़िश है.

★ अगर 50 जोड़ों में 
      सिर्फ़ एक बच्चा हो
      तो अगली पीढ़ी में 
      सिर्फ़ नाममात्र के बच्चे होंगे.

👉  अगर ऐसा ही चलता रहा, 
        तो तीसरी पीढ़ी लगभग 
           गायब हो जाएगी.

👉 मोहल्ले,गलियाँ खाली पड़ी हैं.
         सब लोग रोड़ पर हैं.
        जीवन का आधा समय तो 
          रोड़ पर ही बीत जाता है.

★  गाँव के गाँव खत्म हो रहे हैं.

★ शहरों में ऊँची इमारतें हैं, लेकिन संयुक्त परिवार प्रथा समाप्त हो गयी है.

👉  नई बहुएं
    "सिर्फ़ एक ही बच्चा" चाहती हैं.
    🤷🏻‍♀️  क्या यही समाज है ?
❓ क्या यही हमारे पुरखों की 
             विरासत है ?

👉   सच तो यह है, कि ....
    बच्चे अब प्यार की निशानी नहीं रहे. बल्कि बच्चे पैदा करना ...एक मजबूरी सी है.

⚖️   सबसे बड़ी गलती — 
      लड़की के पिता की है,
        वही पिता जिसने 
     20-22 साल की उम्र में 
             विवाह करके 
          परिवार बसाया था.

अब वही पिता 30 साल की उम्र तक 
     अपनी बेटी का विवाह न करके बहादुरी दिखा रहे हैं.

👉  परिणाम ????

लड़के लड़कियाँ डिप्रेशन में जा रहे हैं.

👉  आज बच्चों का सही समय पर विवाह नहीं हो रहा है, और
 न सही समय पर कोई नौकरी मिल रही है.

👉  समाज धीरे-धीरे 
      समाप्त होता जा रहा है.

👉   इसी कारण बच्चे 
       समाज के साथ नहीं
    अकेले रहना पसंद करते हैं.
         यानी एकल परिवार
  यहाँ तक कि बच्चे भी नहीं चाहिए.

★  देर से शादी करना
★  देर से बच्चा करना, फिर
         एक बच्चे के बाद 
   मेडिकल और लालन-पालन का
             बहाना करना.
💁🏻‍♀️  यह आम बात हो गई है.

   हजारों जवान लड़के लड़किया उम्र के कारण कुंवारे घूम रहे हैं.

      समाज के समझदार लोग 
          चुप्पी साधे हुए हैं

★  विवाह, परिवार, बच्चे – 
इन सब को बोझ समझा जा रहा है.

🎈 विवाह ... कोई दुनियावी बंधन नहीं यह घर परिवार और समाज का स्तम्भ है.

🎈 प्रजाति, सभ्यता और संस्कार कोआगे बढ़ाने का एक तरीका है.

💥 अब हम सब को समझने का समय आ गया है.
🫵   बच्चों को ‘हद से ज्यादा'
      आजादी दे कर हमने उनकी 
             समझ छीन ली.

★ विवाह टलता रहा, और जब हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

        फिर वही अकेलापन

🫵  लड़के लड़कियों के लिए
        विवाह की सही उम्र
🔹  लड़कों के लिए 25 साल से पहले
🔸 लड़कियों की  20 साल से पहले.

🚩 वर्ना इतिहास लिखेगा ...
  “वह हिंदू समाज, जिसने चुपचाप स्वयं को खत्म कर लिया.” 

    सोचो और समझदारी दिखाओ.

        अपने बच्चों का विवाह
           समय पर कीजिये.
🙏

   क्योंकि ... परिवार नहीं बचा, तो समाज को भी देर सवेर  ध्वस्त होते देर नहीं लगनी है.

  यही कारण है ...डेविड सेलबॉर्न, सतीश बंसल और बिल वार्नर जैसे लेखक यह कहने पर मजबूर हो जाते हैं , कि 
       ★   इस्लाम के मज़बूत 
      फैमिली सिस्टम की वजह से  ...
           देर सवेर ... अधिकांश देश भारत में भी हिन्दू परिवार परम्परा का पतन होना प्रारम्भ हो चुका है.

          रक्त के 5 रिश्ते
     समाप्त होने की कगार पर हैं.
       ताऊ, चाचा, बुआ, मामा
        मौसी जैसे रिश्ते
          आने वाले समय में
             देखने-सुनने को
              नहीं मिलने वाले हैं.

      इसे इस तरह  👇🏽
     समझा जा सकता है-

    पुत्र       पुत्री
     2         1        (मौसी X)
     1         2      (चाचा, ताऊ X)
     1         1   (चाचा, ताऊ, मौसी X)
     1         0          X
     0         1          X
  परिणाम
     0         0

       सिंगल चाइल्ड फैमिली को 
    उनका निर्णय तीसरी पीढ़ी याने जिनके आप ... दादा-दादी होंगे बुरी तरह प्रभावित करेगा. जिस दादा को मूल से अधिक ब्याज प्यारा होता है, उसका तो ....मूलधन भी समाप्त हो जाएगा.
     इसके लिए वह स्वयं उत्तरदायी है.

          इसलिए दम्पत्ति को 
      सिंगल चाइल्ड के निर्णय पर गंभीरता से विचार करना होगा.

    यह घटती आबादी के आँकड़े
             बोल रहे हैं.
 यह विश्लेषण सरकारी आँकड़ों के अध्ययन से आ रहा है.

        आपका पौत्र या प्रपौत्र 
               इस संसार में 
           अकेला खड़ा होगा.

       उसे अपने रक्त के रिश्ते की
           आवश्यकता होगी तो 
     इस पूरे ब्रह्मांड में उसका अपना कोई नहीं होगा.

      यह अत्यंत सोचनीय विषय है.

      ये न केवल हमारे बच्चों को
       एकाकी जीवन जीने को 
      मजबूर करेगा बल्कि हमारी 
       हिंदू परिवार सभ्यता को ही नष्ट कर देगा.

 हम जो हिन्दू एकता की बात करते हैं ये तो सभ्यता ही समाप्त हो जाएगी और इन सबके लिए हमारी वर्तमान पीढ़ी उत्तरदायी होगी.

        अगर आप इस विषय को
           गंभीर समझते हैं तो 
     इस समस्या पर विचार करें,

   घर परिवार में, पति पत्नी के बीच, रिश्तेदारों में, दोस्तो में एवं 
     विभिन्न बैठकों एवं आयोजनों में इस विषय पर मंत्रणा करें.

      अपनी सभ्यता, संस्कार औऱ पीढ़ियों को बचाये.

बहुत गंभीर समस्या है.

साभार: सोशल मीडिया

"जय जय सियाराम"
    💐🙏💐🇮🇳

मुझे पता है आपको यह लेख अच्छा लगा है तो कृपया समय निकालकर जरूर विचार-विमर्श करे अपनो से 💐🙏🏻🌹🕉️🌻

Saturday, 15 August 2026

देश की आज़ादी का मूल मंत्र एकता प्रेम और क़ानून का सम्मान राष्ट्रीय अध्यक्ष मुस्लिम महासंघ फ़रहत अली खान*

*देश की आज़ादी का मूल मंत्र एकता प्रेम और क़ानून का सम्मान राष्ट्रीय अध्यक्ष मुस्लिम महासंघ फ़रहत अली खान* 
अस्सी वें यौम ए आज़ादी के मुबारक मौक़े पर मदरसा जमीतुल अंसार नियर थाना गंज में जश्न ने आज़ादी जोश और खरोश से मनाया गया ।
मुस्लिम महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष फ़रहत अली खान ध्वज रोहण किया राष्ट्रगान जोश ओ खरोश के साथ गाया गया।
जहां बच्चों ने देश भक्ति गीत गाये तकरीरे की वही परवेज़ निज़ामी समाज सेवी आज़ाद हिंदुस्तानी एजाज़ क़मर लेखक चिंतकविचारक सैय्यद मज़हर अली मियां मजहरी प्रमुख शायर, डॉ आरिफा खान, आकाशवाणी उद्घोषिका मारिया फ़रहत हसीन जहां ने अपने ओजस्वी विचार रखे।
मुख्य अतिथि मुस्लिम महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष फरहत अली खान ने कहा आज़ादी का मूल मंत्र बुनियादी हक़ीक़त और सच्चाई देश की एकता थी है और हमेशा रहेगी।

आज इसी को हमें अपनाने की जरूरत है।
क़ानून का सम्मान और मौजूदा सरकारों का एहतेराम है।
स्वतंत्रता दिवस की सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर मदरसे के संचालक ओर मुतावल्ली सआदत अली अंसारी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी।
अंत में मदरसे में आयोजित मेघावी छात्रों को मेडल पहनाकर सम्मानित किया।
सभी छात्रों को मिठाई भी तकसीम की गई।
इस अवसर पर मारिया अज़हर फायेजा बुशरा खान ज़ाहिद खान आमिर खान सहित मदरसे के छात्र और अभिभावक उपस्थित रहे।

मौसम संबंधित नवीन भविष्यवाणी हमारे ज्योतिष मौसम और विज्ञान अनुसंधान केंद्र के अनुसार 30 जुलाई से 7 अगस्त

मौसम संबंधित नवीन भविष्यवाणी हमारे ज्योतिष मौसम और विज्ञान अनुसंधान केंद्र के अनुसार 30 जुलाई से 7 अगस्त तक लगातार अच्छी वर्षा होने की भविष्यवाणी बिल्कुल सही हुई 7 से लेकर 12 अगस्त तक सूखे मौसम की भविष्यवाणी भी बिल्कुल सही हुई प्रचंड गर्मी उमस और पसीना की भविष्यवाणी भी बिल्कुल सही हुई 13 अगस्त से 20 अगस्त तक वर्षा की बात भी पूरी तरह सही हो रही है कभी कम कभी हल्की तो कभी बूंदाबादी अभी तक रोज वर्षा हुई है

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आज का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 28 डिग्री सेल्सियस रहेगा जबकि कल का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहेगा।

घनघोर भयंकर गर्मी प्रचंड उमस और पसीना से लोग 11:00 तक बहाल रहेंगे आज 10:00 बजे से मौसम बदलने शुरू होगा और तीन चार बजे के आसपास वर्ष शुरू हो जाएगी जो रात भर चलेगी और आने वाले 5/6 दिनों में ज्यादातर समय मौसम में बरसात का रहेगा मौसम भी ठंडा सुहावना हो जाएगा इस बीच लोगों को भयंकर रूप से हो रही सर्दी खांसी जुखाम बुखार और पेट के रोगों से भी छुटकारा मिलेगा इस समय ठंड वाली चीज फ्रिज में रखी चीज बिल्कुल ना खाएं और हैप्पी बर्थडे केक तो बिल्कुल ना खाएं इसको खाने वाला गारंटी के साथ टाइफाइड रोग और अन्य रोगों का शिकार हो जाता है ।

ताज और नवीन भविष्यवाणी यह है कि आज 15 अगस्त के घनघोर भयंकर गर्मी उमस और पसीने के बाद आधी रात के बाद तीन दिनों तक माध्यम से भरी और कहीं-कहीं बहुत भारी वर्षा जौनपुर सुल्तानपुर प्रतापगढ़ प्रयागराज सोनभद्र मिर्जापुर दीनदयाल नगर वाराणसी गाजीपुर आजमगढ़ अंबेडकर नगर अयोध्या और आसपास होने जा रही है सभी लोगों को आवश्यक सूचना और चेतावनी दी जा रही है इससे मौसम भी अच्छा हो जाएगा और खेती बागवानी भी सुधर जाएगी  - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र दिनांक 15 अगस्त 2026
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नास्तिक होना सिर्फ भगवान को न मानना नहीं है,*

*नास्तिक होना सिर्फ भगवान को न मानना नहीं है,* 

नास्तिक होना मतलब है —
हर बात को समझना,
हर सवाल का उत्तर खोजना,
और अंधविश्वास से ऊपर उठकर
सच्चाई को अपनाना।
नास्तिक वही बनता है
जो डर से नहीं,
सोच से जीता है।
जो पूछता है — क्यों?
जो मानने से पहले समझता है।
जो परंपरा से पहले सत्य को देखता है।
नास्तिक का मतलब नफरत नहीं,
ज्ञान है।
विरोध नहीं,
विवेक है।
अहंकार नहीं,
जागरूकता है।
जो इंसान अपने भीतर झाँकता है,
अपने कर्म को पहचानता है,
और मानवता को धर्म से ऊपर रखता है—
वही सच्चे अर्थ में जागरूक है।
नई खोज, नया विचार,
नई दिशा—
ये सब सवालों से जन्म लेते हैं,
और सवाल वही करता है
जो सोचने की हिम्मत रखता है।
इसलिए नास्तिकता का अर्थ
सिर्फ इंकार नहीं,
बल्कि सत्य की खोज है।
पहले इंसान बनो,
फिर विचार चुनो।
सच्चाई वहीं मिलेगी
जहाँ डर नहीं,
ज्ञान होगा।
— अज्ञात 
*
*अंधविश्वास, रूढ़िवाद व तमाम कुरीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करें और बेहतर समाज बनाने के लिए संघर्ष करें।*

किताब हमारी सबसे अच्छी दोस्त*

*किताब हमारी सबसे अच्छी दोस्त*

किताब,,,,
सिखाती है हमें ज्ञान और विज्ञान, 
समझाती है कारण, बदहाली का, 
सिखाती हैं बनाना हमें संगठन 
सारी जनता की पूर्ण मुक्ति का।
किताब,,,,
देती है गुर, नर-नारी समानता का, 
पढ़ने लिखने की संस्कृति का, 
लघु परिवार की जरूरत का, 
एक बेहतर समाज बनाने का। 
किताब,,,,
देती है मंत्र हम सबको, 
विकास में हिस्सेदारी का, 
समाज के प्रति दायित्व का, 
भाग्यवाद से छुटकारा पाने का।
किताब,,,,
देती है हौंसला हम सबको,
चार दिवारी से बाहर आने का, 
जगाती है इच्छा लोगों में 
पढ़ने की और सीखने की।

किताब,,,,
तोड़ती है क्रूरतम शिकंजा 
पोंगा पंडितों का, जादू टोनों का, 
कर डालती है मोह भंग 
तांत्रिक विज्ञान का, भूत और प्रेत का। 

किताब,,,,
बदलती है सलीका 
प्यार से रहने का और सहने का, 
तोड़ती है पूरा का पूरा शिकंजा 
कुरीतियों का, अज्ञान का, साजिशों का।

किताब,,,,
करती देती है पूरा भंडाफोड़ 
शोषण का, लूट का, हड़पने का, 
देती है मंत्र सारी दुनिया को 
संगठित होने का, नव जन सृजन का।

किताब,,,,
देती है हौंसला लड़ने का,
लूट के किले गिरने का, 
दिखाती है मार्ग हमें 
मुक्ति का, बदलाव का।

किताब,,,,
सिखाती है सलिका हमें 
बेहतर इंसान बनने का,
देती है स्वर हमें आपसी भाईचारे का
संघर्ष का, विद्रोह का, इंकलाब का।

किताब,,,,
लोग धोखा दे सकते हैं 
पर किताबें तो कभी नहीं, 
किताबों को रखिए अपने पास 
किताबें होती हैं सबसे अच्छी दोस्त।

 लेखक अज्ञात