Tuesday, 15 September 2026

देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा- डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

 देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा- डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 

कौन है देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा 

भगवान विश्वकर्मा देव शिल्पी कहे जाते हैं उनके पिता का नाम वास्तुदेव और माता का नाम अंगिरसी था और उनके दादा का नाम धर्म था और उनके परदादा ब्रह्मा जी थे। कहीं-कहीं उन्हें ब्रह्मा और कहीं कहीं शिव का पुत्र भी माना जाता है वेद पुराण और उपनिषदों में इनका व्यापक वर्णन मिलता है यह सतयुग त्रेता और द्वापर युग में विद्यमान थे और इन्हें विश्व का प्रथम अभियंता कहा जाता है सनातन धर्म के पंचांग के अनुसार आश्विन मास की चतुर्दशी को देव शिल्पी विश्वकर्मा का जन्मदिन मनाया जाता है लेकिन इसे बड़ी चालाकी से 17 सितंबर में बदल दिया गया है जो कहीं से भी उचित नहीं है। 

देव शिल्पी विश्वकर्मा के कुछ परम अद्भुत और कल्पना से परे की रचनाएं और निर्माण 

वैसे तो देव शिल्पी विश्वकर्मा ने अनगिनत निर्माण किया और यंत्र विद्या में वास्तु विद्या में अभियांत्रिकी में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया जिसमें से कुछ अद्भुत विचित्र और जादू जैसे रचनाओं के नाम इंद्रपुरी अमरावती जो देवताओं कल्पवृक्ष और कामधेनु गाय से सुशोभित था इंद्र का वज्र कभी भी क्षीण ना होने वाला देवमाता अदिति का कुंडल और समुद्र के बीचों-बीच सोने चांदी से बनी परम अद्भुत द्वारका नगरी कुछ ऐसी अद्भुत रचनाएं हैं इसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता है इसके अलावा तारकासुर के त्रिपुर नगर को भी इन्होंने ही निर्मित किया था। पांडवों का इंद्रप्रस्थ में उनके द्वारा बनाया गया दिव्य सभा भवन और सोने की लंका उनके चरम ज्ञान की यश पताका है।

 कब और क्यों मनाया जाता है देव शिल्पी विश्वकर्मा की जयंती का दिन 

प्राचीन काल से लेकर अभी कुछ समय पहले तक सनातन धर्म के पंचांग और धर्म ग्रंथो के अनुसार देव शिल्पी विश्वकर्मा की जयंती आश्विन माह की चतुर्दशी को मनाई जाती थी लेकिन अचानक की उनका जन्मदिन अर्थात जयंती 17 सितंबर को स्थिर कर दी गई क्यों कर दी गई यह एक रहस्य है क्योंकि यह सनातन धर्म और देव शिल्पी विश्वकर्मा के प्रतिकूल है यह कुछ ऐसा ही है जैसा पहले मकर संक्रांति अर्थात खिचड़ी को 14 जनवरी को स्थिर कर दिया गया था लेकिन अब उसको बदल दिया गया है इस महान पर्व को सृष्टि के प्रथम अभियंता अद्भुत शिल्पकार वास्तु विद्या के परम ज्ञानी और बड़े-बड़े निर्माण कार्यों के करने वाले देव शिल्पी विश्वकर्मा की याद में मनाया जाता है और ईश्वर से 17 सितंबर को बुधवार के दिन मनाया जाना निश्चित हुआ है। 

कैसे मनाई जाती है भगवान विश्वकर्मा की जयंती 

देव शिल्पी विश्वकर्मा की जयंती मनाने के लिए अन्य पर्व त्यौहार की तरह ही हर एक दुकान और निर्माण करने वाली संस्था को सजाया जाता है और हर कोई  सनातनी बिना जाति धर्म के भेदभाव के उस दिन अपने दुकान कल कारखाने फैक्ट्री और संस्थान को सजा कर कल पुर्जे और यंत्रों की पूजा करता है इसके लिए सुबह उठकर स्नान करके एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाते हैं इसके बाद उसको कुमकुम से लाल रंग का स्वास्तिक बनाकर गणेश जी की पूजा करते हैं फिर चौकी पर देव शिल्पी विश्वकर्मा की स्थापना करके विधि विधान से उनकी पूजा करते हैं और अपने कल कारखाने दुकान संस्थान की उन्नति की प्रार्थना करते हैं 

देव शिल्पी विश्वकर्मा के कुछ अद्भुत अद्वितीय और अमर निर्माण कार्य 

विश्वकर्मा ने जो अद्भुत और जादू जैसे निर्माण काम किया वह कोई सोच भी नहीं सकता सबसे पहले काम उन्होंने समुद्र के बीच श्रीलंका में जो पहले सिंहल दीप कहा जाता था सोने की लंका का निर्माण किया और यह इतना अदभुत था की जिसमें पहुंच पाना उसके स्वामी की इच्छा के विरुद्ध असंभव था और अद्भुत बात यह है कि श्रीलंका के तीन तरफ कोई मानव बस्ती थी ही नहीं केवल उत्तर में भारत था और उन्होंने समुद्र पार करते समय शत्रु को पकड़ने के लिए एक अद्भुत जल राक्षसी का निर्माण किया था इसके बाद लंका पहुंच जाने पर भी बहुत ऊंचाई पर कोट और खाई का निर्माण त्रिकूट पर्वत पर किया  था इसको पार करके यदि कोई पहुंच जाता तो उसको सुपर कंप्यूटर और सेंसर लगे हुए परम अद्भुत यंत्रों के साथ लंकिनी नाम की एक रक्षिका को तैनात किया गया था इन सभी को मार कर तब हनुमान जी श्रीलंका में प्रवेश कर पाए थे कालांतर में हनुमान जी के द्वारा श्रीलंका को जला देने पर वह पूरी तरह नष्ट हो गई और आज भी उसके अवशेष मिलते हैं इस लंका का निर्माण देव शिल्पी ने भगवान शिव माता पार्वती के लिए किया था जिस पर पहले कुबेर का अधिकार था बाद में रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करके लंका पर अधिकार कर लिया था 

स्वर्ग नगरी अमरावती का निर्माण 

भगवान विश्वकर्मा ने सौरमंडल और आकाशगंगा के बीच परम अद्भुत देवनगरी अमरावती का निर्माण कार्य किया था जिसमें केवल देवता ही प्रवेश कर सकते थे या देवताओं की सहायता से कोई अन्य उसमें जा सकता था इसमें रहने वालों को भूख प्यास नहीं लगती थी और चारों ओर पारिजात अपराजिता कल्पवृक्ष जैसे अदभुत पेड़ पौधे वृक्ष नदी सरोवर विद्यमान थे और जहां कामधेनु जैसी हर इच्छा को पूरा करने वाली गाय थी कल्पवृक्ष और कामधेनु से जो कुछ मांगा जाता था वह अपने आप पूरा हो जाता था इस अद्भुत नगरी का आकर किसी को मालूम नहीं था जो धरती के साथ आकाशगंगा का चक्कर काटती रहती थे इस अमरावती में देवताओं की कृपा से या भगवान शिव की कृपा से ही कुछ गिने चुने लोग और बहुत शक्तिशाली राक्षस तथा दैत्य प्रवेश कर सकते थे बहुत बार से राक्षसों ने इसे जीता और कालांतर में स्वर्ग कहां चला गया उसका कुछ आता पता नहीं है।

परम अद्भुत इंद्रप्रस्थ और वहां का जादू जैसा सभा भवन 

इसका निर्माण देव शिल्पी विश्वकर्मा ने मय दानव के साथ मिलकर किया था जो राक्षस होने के बावजूद उनका शिष्य था कृष्ण के आवाहन पर इंद्रप्रस्थ नगर का और उसकी सभा भवन का निर्माण हुआ था जो धरती पर अपने ढंग का एकमात्र अद्वितीय नगर और सभा भवन था यह इतना विचित्र था कि दुर्योधन जैसे लोगों को जल के स्थान पर स्थल और स्थल के स्थान पर जल दिखाई देता था जिसमें गिरकर अपमानित दुर्योधन ने अंत में महाभारत युद्ध में सब कुछ नष्ट कर दिया आज उसके कुछ खंडहर बचे हुए मिलते हैं यह अद्भुत नगर विद्युत और सौर ऊर्जा से संचालित था और वहां की हर चीज परम आश्चर्य जनक थी। 

इंद्र का वज्र और अदिति के कवच कुंडल 

देव शिल्पी विश्वकर्मा ने आसमान में चमकने वाली महा भयंकर विद्युत द्वारा इंद्र का वज्र बनाया था जिसमें 100 विचित्र अस्त्र-शस्त्र लगे थे जो प्रकाश की गति से शत्रु पर प्रहार करता था और जिस पर चलाया जाता था उसका अंत निश्चित हो जाता था इसी को पाकर ही इंद्र एक महान और अजेय योद्धा बन गए थे इसके केंद्र भाग में हीरे और सोने से जड़े हुए अल्फा बीटा गामा किरणें निकालने वाले यंत्र थे इसके अतिरिक्त देव माता आदित्य के लिए परम अद्भुत सोने के कुंडल विश्वकर्मा ने बनाए थे जिसकी चमक कभी फीकी नहीं पड़ती थी और जो कभी नष्ट नहीं होता था और इसको पहनने वाले को भूख प्यास नहीं लगती थी वह अजेय होता था ।

परम अद्भुत द्वारका नगरी 

जरासंध कंस कालयवन और उसके भयंकर अनुचरों के बार-बार मथुरा पर आक्रमण करने के कारण श्री कृष्ण को एक सुरक्षित स्थान की खोज करनी पड़ी और संपूर्ण मथुरावासियों को लेकर वे समुद्र में एक द्वीप पर द्वारका पर पहुंचे जहां पर विश्वकर्मा ने एक ऐसी समुद्र नगरी का निर्माण कर दिखाया जो आज तक कोई सोच भी नहीं सकता है शत्रु के द्वारा पूरी तरह से अजेय और जल स्थल नभ से सुरक्षित यह नगरी समुद्र के बीचो-बीच वास्तु और नगर निर्माण का विश्व का सबसे अद्भुत और आश्चर्यजनक नमूना है इस नगरी में भगवान श्री कृष्ण की अनुमति के बिना देवता भी प्रवेश नहीं कर सकते थे और इसको प्रक्षेपास्त्र एवं गामा किरणों से सुरक्षित किया गया था सोने चांदी और रत्नों से बनी यह द्वारका नगरी उस समय धरती की सबसे सुंदर और सुरक्षित नगरी थी।कालांतर में भगवान श्री कृष्ण ने अपने बैकुंठ लोक प्रयाण के पहले अपने सबसे प्रिय अर्जुन को यह सब बातें बता दिया था कि द्वारका उनके महापरिनिर्वाण के बाद समुद्र में डूब जाएगी और अर्जुन सुरक्षित रूप से सबको बचाकर द्वारका से निकाल ले गए और इसके बाद द्वारका नगरी समुद्र में डूब गई जो आज भी समुद्र के नीचे विद्यमान है।

इन सब के अलावा देव शिल्पी विश्वकर्मा ने दुनिया के अधिकांश अस्त्र-शस्त्र और दिव्यास्त्र तथा भयंकर अस्त्र शस्त्रों का निर्माण किया था उन्होंने ही अपने पिता के साथ मिलकर वास्तु और शिल्प कला का विकास किया था आज भी बड़े-बड़े और छोटे घर वास्तुशास्त्र के अनुसार बनाए जाते हैं और आज भी वैसे हथियार आधुनिकतम यंत्र से सज्जित सुपर कंप्यूटर भी नहीं बना सकते जैसा कि उन्होंने बनाया था देव शिल्पी विश्वकर्मा के लिए केवल न भूतो न भविष्यति ही कहा जा सकता है।

Saturday, 12 September 2026

आज आज राष्ट्रीय लोक अदालत के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर में एक विधिक साक्षरता जागरूकता एवं

प्रेस विज्ञप्ति
 आज आज राष्ट्रीय लोक अदालत के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर में एक विधिक साक्षरता जागरूकता एवं सहायता शिविर का आयोजन जनपद न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुशील कुमार शशि की अध्यक्षता और सिविल जज सीनियर डिवीजन सचिव सुशील कुमार सिंह की देखरेख में आयोजित किया गया
 जिसमें गरीब तबके के सैकड़ो लोगों को विधिक साक्षरता जागरूकता के बारे में जानकारी देते हुए उनके आवास शौचालय और जल संबंधित समस्याओं के बारे में आवेदन पत्र उचित कागजात और प्रमाण पत्र के साथ लेकर संबंधित अधिकारियों को कार्यवाही करने के लिए प्रेषित किया गया इस जागरूकता साक्षरता और सहायता शिविर में सिविल जज सीनियर डिवीजन सचिव सुशील कुमार सिंह डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल देवेंद्र कुमार यादव काउंसलर परिवार न्यायालय और मनोज कुमार पाल समन्वयक मानव संसाधन विकास मंत्रालय के द्वारा विधिक साक्षरता जागरूकता और सहायता संबंधित जानकारी दी गई
[9/12, 2:02 PM] Dileep Singh Rajput Jounpur: अध्यक्ष पद पर अवधेश कुमार सिंह और मंत्री पद पर मनीष कुमार सिंह सहित सभी विजयी प्रत्याशियों को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं जब अपने पद के गरिमा भूल कर लोग जातिवाद और गठबंधन के नाम की बात करेंगे तो यही होगा अधिवक्ता एक बुद्धिजीवी वर्ग है इसमें कोई बात फैलाना उचित नहीं है

Friday, 11 September 2026

भगवान गणेश और गणेश चतुर्थी - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

 भगवान गणेश और गणेश चतुर्थी - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 
भगवान गणेश विद्या और बुद्धि के देवता हैं सभी देवताओं में सर्वप्रथम पूज्य हैं क्योंकि उन्होंने सारे विश्व की परिक्रमा करने की जगह अपने माता-पिता की तीन बार परिक्रमा करके स्वयं को सबसे बुद्धिमान और चतुर सिद्ध किया था इसलिए तो पृथ्वी के स्वर्ग हिमालय के बर्फ से ढके हुए कश्मीर से लेकर हरी नीली हिंद महासागर की जल राशि जो समुद्र का स्वर्ग है वर्षा और हरियाली के स्वर्ग असम चेरापूंजी की पहाड़ियों से लेकर शुष्कता वीरानी और वीरता के स्वर्ग तक फैले राजस्थान के कण -कण में भगवान गणेश जी की पूजा होती है और उनकी चतुर्थी भादों महीने के शुक्ल पक्ष चतुर्थी को पूरे देश में मनाई जाती है। 

भगवान गणेश की यश कीर्ति दिगदिगन्त में व्याप्त हैं उनकी सवारी चूहा के आकार वाला दिव्य विमान है जिसकी गति अनंत है उनको लड्डू पीली चीजें और पीली मिठाइयां बहुत प्रिय हैं और उनका दिन बुधवार है एक बार अपने माता-पिता के कहे के अनुसार उन्होंने भगवान परशुराम को भीतर नहीं जाने दिया और उनसे हुए घनघोर रोमांचकारी युद्ध में गणेश जी का एक दांत टूट गया था इसलिए उनको एकदंत कहा गया दूसरी कथा है कि ब्रह्म ऋषि वेदव्यास जी के बोलने पर महाभारत लिखते समय उनकी कलम टूट गई तो उन्होंने अपने दांत को तोड़कर उसी से लिखना प्रारंभ कर दिया था इसी तरह एक बार अपने माता भगवती पार्वती के आदेश के अनुसार वह अपने परम पूज्य पिता आदि देव भगवान शिव से ही भिड़ गए और भगवान ने क्रोध में आकर गणेश जी का सिर काट दिया बाद में पार्वती जी को प्रसन्न करने के लिए गणेश जी को हाथी का सिर लगाकर फिर से जीवित किया गया। रिद्धि और सिद्धि को उनकी पत्नी माना जाता है भगवान गणेश की अनंत कहानी धर्म ग्रंथो में वेद पुराणों में प्रख्यात हैं जब-जब देवताओं पर संकट आया तब तक उन्होंने अपनी बुद्धि बल चातुर्य से उसको हल किया। 

इस वर्ष विश्वविख्यात गणेश चतुर्थी का महापर्व 14 सितंबर सोमवार के दिन सुबह 7 बजकर 6 मिनट से प्रारंभ होगा जो 15 सितंबर को 7ंं ं55 तक रहेगा और अनंत चतुर्दशी के दिन तक 10 दिन तक चलेगा बुधवार के दिन शुरू होने के कारण यह और भी शुभ और प्रभावकारी हो गया है यद्यपि 14 सितंबर को ही चतुर्थी की तिथि दोपहर 11:04 से1. 31 तक मनाई जाएगी और उदया तिथि के अनुसार  भी 14   सितंबर सोमवार के दिन से उनकी पूजा और स्थापना होगी गणेश जी की स्थापना का मुहूर्त  14 सितंबर को सुबह 11:04 से दोपहर 1:31 तक है जो 2 घंटे 29 मिनट का है उनकी मूर्ति स्थापित करके विधि विधान से पूजा करने पर मनोवांछित कामनाएं प्राप्त होती है। 
[8/26, 9:59 PM] Dr  Dileep Kumar singh: भगवान गणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन इस वर्ष 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन बड़ी धूमधाम से किया जाएगा प्रतिमा विसर्जन के लिए तीन समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है पहले सुबह 7:36 से सुबह 9:10 दूसरा दोपहर में 12:19 से शाम को 5:02 और तीसरा रात 6:37 से रात 8:02 तक है इस वर्ष गणेश चतुर्थी के दिन अनेक शुभ मुहूर्त और योग मिल रहे हैं जिसमें शुक्ल योग सर्वार्थ सिद्ध योग रवि योग्य लक्ष्मी नारायण योग बुध आदित्य योग प्रमुख हैं ।

पहले त्यौहार विशेष रूप से महाराष्ट्र और मुंबई में मनाया जाता था लेकिन आज यह पूरे भारत में धूमधाम से मनाया जाता है छठ पर्व की तरह यह भी आज पूरे भारत में मनाया जाता है इस दिन मुंबई में सबसे विशाल झांकी और जुलूस निकलता है जहां करोड़ों की संख्या में लोग सड़कों पर घरों के ऊपर यहां तक की पेड़ पौधों पर भी चढ़कर इस भव्य और विराट जुलूस में शामिल होते हैं और सारा वातावरण **गणपति बप्पा मोरिया अगले बरस तू जल्दी आ** के गगनभेदी नारों से ध्वनित प्रति ध्वनित हो उठता है। अनेक जगह पर दही हांडी और मटकी फोड़ प्रतियोगिताएं भी आयोजित होती हैं। 

अब गणेश जी की पूजा पाठ का विधान भी जान लेना अति आवश्यक है सबसे पहले घर की सफाई इसके बाद शरीर और अंतरात्मा और मन की शुद्धि के साथ गणेश जी की प्रतिमा स्वच्छ चौकी पर स्थापित करें और उन्हें दूध दही मधु शक्कर और घी से अभिषेक करें इसके बाद उन्हें दूब अक्षत पीले फूल लड्डू और दूब चढ़ाकर मन वचन कर्म से उनकी पूजा करें और सदाचारी नैतिक बनने का प्रयास करें शुद्ध मन और स्वस्थ चित्त से इस प्रकार गणेश जी की पूजा पाठ करने से वह निश्चित रूप से आप सभी पर कृपा करेंगे।

Wednesday, 9 September 2026

असली जम्मू कश्मीर का सच - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

असली जम्मू कश्मीर का सच - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 
क्या आप जानते हैं कि जिसे हम जम्मू और कश्मीर कहते हैं वह तो जम्मू कश्मीर का केवल   आभास भर है असली जम्मू और कश्मीर तो पाक अधिकृत पाकिस्तान गिलगित और बालटिस्तान  मुजफ्फराबाद में है जो पूरे कश्मीर का आधा है और असली लद्दाख अक्साई चीन में है जो चीन के जबरन कब्जे में है। 


एक बार मैंने जान को जोखिम में डालकर 
1989 में श्रीनगर से गिलगित बालटिस्तान की यात्रा टैक्सी वाले के रहमों करम पर किया था और मैं सच बता दूं गिलगिट बाल्टिस्तान जैसा सुंदर शहर और सुंदर स्वच्छ नदी शायद ही कहीं देखने को मिले वहां और लगभग पूरे गिलगिट पीओके और बालटिस्तान में प्रकृति की सबसे अनमोल धरोहर स्वच्छ झरने दुनिया के सबसे ऊंचे पहाड़ के टू कंचनजंगा नमचाबारवा के हिम मंडित शैल शिखर  और बर्फबारी का अद्भुत दृश्य पेड़ पौधे और फलों की एक से बढ़कर प्रजातियां  मैं तो बिल्कुल ही विस्मय विमुग्ध हो गया और लगा सचमुच ही धरती का स्वर्ग यही है जिसके आगे भारत में स्थित  श्रीनगर जम्मू कुछ भी नहीं है। 

और 1 सप्ताह की यात्रा में भले ही मुझे जीवन में जरूरत से ज्यादा परिश्रम के पैसे खर्च करने पड़े लेकिन जो कुछ मैंने इन तीन जनपदों में देखा तो मेरा मन हाहाकार और चीत्कार कर पड़ा और रो पड़ा और उस कांग्रेस और नेहरू खानदान के प्रति मेरी इतनी गहरी घृणा हो गई जिसका कोई ओर छोर नहीं है जिसने पृथ्वी के स्वर्ग जन्नत बहिष्ट और न जाने क्या-क्या एक महान षड्यंत्र के तहत मुस्लिम बहुल बनाकर पाकिस्तान को उपहार में परोस दिया क्योंकि जिन्ना उनके सगे भाई जैसे और उनका खानदान मूल रूप से मुस्लिम था। 

मैं आप सभी से निवेदन करूंगा कि अगर ईश्वर आपको मौका दें और जान जोखिम में डाल सकें तो जाकर कम से कम गिलगित नदी और गिलगित शहर और चीन के द्वारा बनाई गई काराकोरम कॉरीडोर जरूर देखें देखना है कब गिलगित बाल्टिस्तान और पीओ के तथा अक्साई चीन के स्वर्ग से भी सुंदर प्रदेश फिर हमारे देश में शामिल होते हैं और हम उसे जाकर देख सकते हैं ।

जिस समय में 1989 में वहां गया था उसमें झील और नदियों का पानी इतना स्वच्छ था कि नीचे का सारा कुछ एकदम साफ-साफ दिखता था और ऑक्सीजन से भरी  ताजी और स्वच्छ हवा जिसकी वायु गुणवत्ता  सूचकांक 0 से 10 के बीच रहता था उसके सुंदरता ही अद्भुत थी और नदी झील तालाब और अन्य पानी इतना मीठा शुद्ध और जीवनदाई था जिसका कोई जोड़ ही नहीं और भोजन सब्जियां फल फूल उनका जो स्वाद था वैसा तो शायद ही कहीं होता होगा इसीलिए यहां के निवासी स्वस्थ गोरे चिट्टे और 100 वर्ष जीने वाले होते हैं   लेकिन किसी भी कीमत पर नेहरू और जिन्ना कि प्रधानमंत्री बनने की सोच अंग्रेजों का षड्यंत्र और गांधी द्वारा नेहरू को हर हाल में प्रधानमंत्री बनाने की जिद से भारत के कई टुकड़े होंगे और असली जम्मू कश्मीर और असली जम्मू कश्मीर सदैव के लिए पाकिस्तान के कब्जे में हो गया 

यदि भारत की जगह छीन रहा होता यह दुनिया का कोई भी बड़ा देश होता तो वह इन क्षेत्रों के अलावा सोवियत संघ से मिलने वाली सीमा का अफगानिस्तान का छोटा सा भूभाग किसी भी कीमत पर लेकर सीधा सोवियत संघ से जुड़ गया होता और भविष्य हमेशा के लिए सुरक्षित हो गया होता लेकिन एक ही रक्त और एक ही डीएनए रिपोर्ट के बावजूद भी अलग-अलग धर्म अपना कर भारत के लोग भारत को बर्बाद करके उसे दुनिया के मानचित्र से गायब करने पर पूरी तरह आमदार हो चुके हैं अफगानिस्तान पाकिस्तान नेपाल भूटान म्यांमार श्रीलंका मालदीव बांग्लादेश जैसे देश 100 वर्ष के अंदर भारत से कट कर अलग हुए हैं और स्थिति आज भी वही है

Saturday, 5 September 2026

मौसम की भविष्यवाणी और आकलन - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर

मौसम की भविष्यवाणी और आकलन  - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर
20 अगस्त से 4 सितंबर तक वर्षा का भीषण चक्र समाप्त हो गया है अब 6 सितंबर से 15 सितंबर तक मौसम की विस्तृत जानकारी हमारे केंद्र के द्वारा दिया जा रहा है 

आज का अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 25 डिग्री सेल्सियस रहेगा जबकि आज सुबह बहुत तेज चटक धूप के बाद हल्के मध्य बादल और दोपहर के बाद और रात में हल्की मध्यम वर्षा का योग और कहीं-कहीं बूंदाबादी जौनपुर जौनपुर से सटे सभी पड़ोसी जिलों और पूर्वांचल में है कुछ स्थानों पर तेज वर्षा भी है लेकिन जौनपुर में नहीं 


कल के बारे में अनुमान है कि अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रहेगा धूप छांव वर्षा बादल हवा का क्रम भी लगा रहेगा। 


 इस बीच हमारे केंद्र की  पहले की भविष्यवाणी के अनुसार 11 सितंबर तक बूंदाबांदी हल्की वर्षा का कर्मचारी रहेगा लेकिन 8 और 9 सितंबर को एक बार फिर से घनघोर वर्षा उपर्युक्त सभी स्थानों में होने की प्रबल संभावना है। 



। इसके बाद 9 10 और 11 सितंबर को गोदाबादी हल्की वर्षा मध्यम वर्षा का योग है इसी बीच वायु गुणवत्ता सूचकांक 20 से लेकर 40 के बीच लगातार बना रहेगा जो पिछले 20 वर्ष में कभी नहीं हुआ था क्योंकि वायु गुणवत्ता सूचकांक हमेशा 50 से ऊपर ही रहता था क्योंकि वायु गुणवत्ता सूचकांक हमेशा 50 से ऊपर ही रहता था। 

हवा की दिशा इस बीच पूर्वी दक्षिणी पूर्वी और परिवर्तित होती रहेगी इस बीच हवा का वेग 10 से 25 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगा और पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 5 से 8 के बीच रहेगी। 

मैंने पहले भी कहा और इस बार भी आज की तिथि में कह रहा हूं कि आदि गंगा गोमती नदी में बाढ़ नहीं आएगी लेकिन हल्की बाढ जैसी स्थिति बनेगी क्योंकि नदी का पानी 20 से 23 फीट के बीच तक जा सकता है अभी यह 19 फीट के लगभग है। 



 इस वर्षा के बाद अर्थात 12 सितंबर के बाद सुबह और रात सुहानी होगी जबकि दिन में एक बार गर्मी बढ़ेगी इस प्रकार आज और कल हल्की वर्षा और 8 9 और 10 को तेज वर्षा का सामना करने को तैयार रहे विशेष करात और 9 सितंबर को भारी वर्षा भी संभव हो सकती है। 


15 सितंबर के बाद पूर्वांचल और भारत के  अधिकांश भागों में सुख का मौसम प्रारंभ हो जाएगा और हल्की ठंड भी धीरे-धीरे प्रारंभ हो जाएगी इस बार ठंड पहले प्रारंभ होने की संभावना है और आशा है 15 अक्टूबर तक इसका असर दिखने लगेगा

क्या आप जानते हैं कि आज तक के सबसे परमवीर का नाम इतिहास में क्यों नहीं आता है और संपूर्ण इतिहास सतयुग द्वापर त्रेता और कलयुग का सबसे महान परमवीर कौन था तो मैं बताता हूं -

क्या आप जानते हैं कि आज तक के सबसे परमवीर का नाम इतिहास में क्यों नहीं आता है और संपूर्ण इतिहास सतयुग द्वापर त्रेता और कलयुग का सबसे महान परमवीर कौन था तो मैं बताता हूं - 

इतना तो आप जानते ही हैं कि लपट दुराचारी छिनरे पापी कामी चोट्टे स्त्री चोर रावण कुंभकरण मेघनाथ और उसकी अपराजिता सेना के कारण तीनों लोक कांप रहे थे उसने हाहाकार कर धरती आकाश पाताल जीत लिया था नवग्रह को अपने बस में कर लिया था ब्रह्मा जी के वरदान और समझने के कारण शनि देव और यमराज ने रावण को जिंदा छोड़ दिया था। 


और सम्राट दशरथ ने भी उसको अभयदान दे दिया था लेकिन इससे रावण का मन बढ़ता गया और भगवान शिव वाली और बाली तथा अनेक अन्य जगहों पर बुरी तरह पराजित होने के बाद भी ब्रह्मा और शिव से मिला वरदान उसे आतंकी शैतान लंपट दुराचारी बनाता गया और उसने अनेक स्त्रियों के साथ जबरदस्ती बलात्कार किया जिससे रंभा और परम साध्वी तपस्विनी ने उसको श्राप दे दिया कि यदि वह किसी स्त्री की इच्छा के विरुद्ध उससे बलात्कार करेगा तो उसके सिर के सौ टुकड़े हो जाएंगे इसके बाद भी वह आतंकी लंपट दुराचारी शैतान नहीं माना और चोरी से साधु का वेष बनाकर भगवती सीता का अपहरण करके जा रहा था उसका पुष्पक विमान तीनों लोक देख रहे थे पेड़ पौधे वृक्ष लताएं जानवर नर नारी यक्ष किन्नर गंधर्व देवता और सीता का विलाप और अर्तनाद सुनकर भी कोई डर के मारे उसके सामने रोकने नहीं आया ।


लेकिन ऐसे में एक परमवीर पक्षी जो बूढ़ा हो गया था और जिसका नाम जटायु था वह एक पहाड़ की तरह रावण के सामने आकर खड़ा हो गया जिसे देखकर रावण भयभीत हो गया और 1 घंटे तक चले इस महायुद्ध में परम प्रतापी जटायु ने रावण को मार मार कर कई बार मूर्छित कर दिया तब उसे पापी ने धोखे से महावीर जटायु के दोनों पंख काट दिए और वह परमवीर पक्षी इस विश्वासघात के कारण घायल होकर धरती पर गिर गया लेकिन जब तक वह जीवित तथा रावण को एक कदम भी आगे नहीं बढ़ने दिया। 

यही कारण था कि उसे भगवती सीता का वरदान प्राप्त हुआ और भगवान श्री राम ने उसका अंतिम संस्कार अपने हाथों से ऐसी जगह पर किया जहां उसे समय तक कोई भी अंतिम संस्कार नहीं हुआ था और अंतिम संस्कार के बाद जटायु को बैकुंठ लोक की प्राप्ति हुई। 

इसलिए आज तक के ज्ञात इतिहास में सबसे वीर साहसी और स्त्रियों का सबसे सच्चा रक्षक परमवीर जटायु ही हुआ  और जटायु की इस परम वीरता के आगे बड़े-बड़े वीर महावीर परमवीर रथी महारथी अतिरथी महायोद्धा देवता दानव मानव और राक्षस गंधर्व किन्नर मनुष्य सबके सब निरुत्तर हैं वैसे आप लोगों का क्या विचार है क्या जटायु जो एक पक्षी था उससे भी बढकर कोई परमवीर नारी रक्षक कोई पैदा हुआ यदि हां तो बताइए  - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

Friday, 4 September 2026

मौसम की भविष्यवाणी - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर( ईश्वर की कृपा से चमत्कार से भारी भविष्यवाणी यूरोप जापान चीन के सुपर कंप्यूटरों को फेल करने वाली पढ़ते रहे 49 सालों की तरह आगे भी)

 मौसम की भविष्यवाणी  - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर( ईश्वर की कृपा से चमत्कार से भारी भविष्यवाणी यूरोप जापान चीन के सुपर कंप्यूटरों को फेल करने वाली पढ़ते रहे 49 सालों की तरह आगे भी) 
20 अगस्त से 31 अगस्त तक और फिर 1 सितंबर से 4 सितंबर तक अंतराल के साथ भारी वर्षा की भविष्यवाणी जौनपुर सहित पूरे देश के लिए हुई सच आगे भी 10 सितंबर तक वर्षा का क्रम जारी रहेगा

आज और कल अर्थात तीन और चार सितंबर को माध्यम से भरी कहानी-कहानी बहुत भारी वर्षा जौनपुर और आसपास के सभी जनपदों अयोध्या प्रयागराज सहित मध्य भारत और देश के अधिकांश भागों में तेज आंधी तूफान बहुत तेज हवाओं बिजली की गलत चमक और झंझा झाकॊर गान गर्जन वारिड माला के साथ जारी रहेगी और भगवान श्री कृष्णा जलाभिषेक करने के बाद 5 सितंबर से वर्षा धीमी होती जाएगी

आज जौनपुर और आसपास के जनपदों का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रहेगा आज 20 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की हवाओं के साथ तेज वर्षा कहीं-कहीं आंधी तूफान का रूप धारण कर लेगी। 

जबकि कल का अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और 27 डिग्री सेल्सियस रहेगा इसी बीच सापेक्षिक आर्द्रता की मात्रा न्यूनतम 85 प्रतिशत और अधिकतम 100% रहेगी हवा की दिशा मुख्य रूप से  पूर्वी उत्तर पूर्वी और वेग 10 से 20 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगा।

वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद अच्छा 20 से लेकर 30 के बीच रहेगा और अल्ट्रावायलेट किरणों की तीव्रता 1 से 2 के बीच रहेगी। दिन भर  हल्की मध्यम कहीं-कहीं तेज और कहीं-कहीं बहुत तेज वर्षा जौनपुर और आसपास के सभी जनपदों में होने की संभावना  है। 

  कल भी अधिकांश स्थानों में बूंदाबांदी और बाकी स्थानों में हल्की मध्यम और कहीं-कहीं तेज वर्षा जारी रहेगी और यह वर्षा से धीरे-धीरे कमजोर होगी और 11 सितंबर तक चलेगी। कल एक सप्ताह बाद सूर्य का दर्शन होने की संभावना बन रही है 

  छिटपुट वर्षा का यह दौर सितंबर के प्रथम स्थान सप्ताह में जारी रह सकता है। बीच-बीच में अच्छी वर्षा भी 11 सितंबर तक होगी इसका कारण यह है कि मानसून एक चक्र के रूप में दिल्ली पंजाब शिमला बरेली नेपाल बिहार बंगाल उड़ीसा मध्य प्रदेश महाराष्ट्र के उत्तरी गुजरात के पश्चिमी भाग और राजस्थान के पूर्वी भागों में घूम घूम कर वर्षा करता रहेगा ।

 इसलिए 11 सितंबर तक इन सभी भागों में और देश के अधिकांश भागों में वर्षा होगी इसके बाद अलनिनो का प्रभाव तेज होगा और 15 सितंबर से वर्षा समाप्त हो जाएगी हल्की-फुल्की वर्षा सितंबर के आखिरी अक्टूबर के प्रथम भाग में हो सकती है 

अभी तक जौनपुर और आसपास के क्षेत्र में 800 मिलीलीटर वर्ष के मुकाबले 700 मिलीमीटर वर्षा हुई है जबकि यहां पर वार्षिक वर्षा का औसत 900 मिमी से 1000 मिली मीटर के बीच होता है पिछले वर्ष यहां पर 1000 मिलीलीटर वर्षा हुई थी

 ऐसी संभावना है कि सितंबर के अंत तक यहां पर 790 मिमी वर्षा हो सकती है और दिसंबर तक वर्षा की यह मात्रा 850 मिलीलीटर तक जा सकती है फिर भी सामान्य वर्षा में 15 % की कमी होना निश्चित है पूरे देश का यही हाल रहेगा केवल एक चौथाई भारत में सामान्य से अधिक वर्षा होगी ।

मानसून के प्रचंड ऊर्जा और वेग पर अल नीनो का प्रभाव 1 अगस्त से 10 सितंबर तक प्रभावहीन होने से ही वर्षा हो रही है इसमें 25 अगस्त से 5 सितंबर तक भारी वर्षा भी सम्मिलित है

 इसके बाद अलनिनो का प्रभाव फिर से बढ़ेगा जिससे 15 सितंबर से वर्षा की स्थितियां बेहद खराब हो सकती हैं और सूखे जैसी स्थिति आ सकती है। 15 सितंबर के बाद अलनीनो फिर से प्रभावी हो जाएगा यह मत हमारे केंद्र द्वारा महीनों पहले बार-बार कही और लिखीगई थी। ।

 इस प्रकार दो सूखे जैसी स्थितियां जून और जुलाई में बीत चुकी हैं तीसरे की जो भविष्यवाणी हमारे केंद्र ने किया था वह सितंबर में आना लगभग निश्चित है लेकिन इसके बाद एक और चक्र संघनन वाष्पन और विक्षोभ से प्रभावित होगा जिससे सितंबर के अंत में वर्षा होने से खेती बागवानी और सभी लोगों को लाभ हो सकता है। 

इसके अलावा 24 अगस्त से 31 अगस्त तक भारी मूसलाधार वर्षा की हमारे केंद्र की भविष्यवाणी एक बार फिर 49 वर्षों की भांति पूरी तरह सत्य हुई अभी गर्मी वर्षा उमस और पसीने से पीछा 15 अक्टूबर के बाद ही पूरी तरह समाप्त होगा इसके साथ ही 7 सितंबर से वर्षा कमजोर पडने की हमारे केंद्र की भविष्यवाणी भी सही होगी और सितंबर के अंत तक मानसून के वापसी की बात भी बिल्कुल सही होगी। 

और इस वर्ष 3 बार सूखा पडने की भविष्यवाणी भी सही होगी जिसमें दो बार पड़ चुका है जून और जुलाई में अगला सितंबर में आने वाला है  और वर्षा भी पिछले वर्ष से 15 से 20% कम होने के बाद बिल्कुल सही होगी सबसे अच्छी बात ही है कि मानसूनी वर्षा का केंद्र मध्य भारत में एक सप्ताह तक चलता रहेगा जिससे कि उत्तर प्रदेश बिहार छत्तीसगढ़ उड़ीसा मध्य प्रदेश राजस्थान के पूर्वी भाग दिल्ली हिमालय के उत्तरी भागों नेपाल और राजस्थान के पूर्वी महाराष्ट्र के उत्तरी और गुजरात के  पूर्वी भागों में मध्यम और तेज वर्षा होगी ।

इन्हीं बातों को तमाम प्रिंट इलेक्ट्रानिक मीडिया नकल करके हमेशा की तरह थोड़ा इधर-उधर बढ़कर छाप देंगे इन सब बातों को आप लोग बाद में पढ़ लीजिएगा कि कैसे चालाकी से दूसरों की चीज को अपना बना लेते हैं और मौसम विभाग जो कमजोर जाडे की बात कह रहा है वह भी उसी तरह पूरी तरह से गलत होगी जैसे कि उसके सामान्य से अधिक वर्षा की भविष्यवाणी पूरी तरह गलत हुई है । 

मानसून 26-31 अगस्त तकउत्तर प्रदेश के पश्चिमी भागों दिल्ली राजस्थान के पूर्वी भागों गुजरात के कुछ भागों महाराष्ट्र के उत्तरी और मध्य प्रदेश तथा उड़ीसा बिहार झारखंड के पश्चिमी भागों में केंद्रित हो जाएगा जहां पर अनेक स्थानों पर मध्यम भारी कहीं-कहीं मूसलाधार वर्षा होगी कितना है वर्षा हो लेकिन संपूर्ण देश में वर्षा का घाटा पूरा नहीं होगा और मैंने पहले भी लिख दिया है कि सितंबर से अल नीनो का प्रभाव तेज होने से वर्षा बहुत ही कमजोर होगी और अगस्त की तरह मानसून का प्रभाव अलनिनो से ऊपर नहीं जा पाएगा इस् काल खंड में चीन ताइवान एवं नेपाल अफगानिस्तान अमेरिका और दक्षिण पूर्वी एशिया में भूकंप ज्वालामुखी विस्फोट सुनामी लहरों और ग्लेशियर विस्फोट तथा जिलों के बह जाने से पहले कल जैसा दृश्य उपस्थित होगा
[8/31, 7:17 PM] Dr  Dileep Kumar singh: जौनपुर में सामान्य रूप से पूरे वर्ष में 900 से 1000 मिली मीटर वर्षा होती है लेकिन पिछले कई वर्षों में यह वर्ष 700 से 800 मिली मीटर हो रही थी लेकिन 2025 में पूरी 1000 मिली मीटर वर्षा हुई थी जहां तक वर्षा के महीना की बात है तो सामान्य रूप से जून में 100 मिली मीटर जुलाई में 250 मिलीमीटर अगस्त में 250 मिलीलीटर और सितंबर में  100 मिली मीटर वर्षा होती है इस प्रकार इन चार महीना में 600 से 700 मिमी औसत वर्षा होती है इस वर्ष जौनपुर में जून में 35 से 50 मिलीमीटर जुलाई में 125 से 135 मिलीलीटर और अगस्त में 255 से 235 म वर्षा हो चुकी है सितंबर में आशा है कि 50 से 70 मिलीमीटर वर्षा होगी इस प्रकार अभी तक जनवरी से 31 अगस्त तक 700 मिमी वर्षा हो चुकी है जबकि जून जुलाई अगस्त में लगभग 550  मिलीमीटर वर्षा हुई है जो 100 एमएल काम है बंगाल की खाड़ी से गुजरने वाला चक्रवात उड़ीसा छत्तीसगढ़ होकर इस समय भुवनेश्वर पटना लखनऊ भोपाल के बीच केंद्रित है इसलिए 2 सितंबर तक इन  भागों में घनघोर वर्षा होना निश्चित है इसके बाद ही 11 सितंबर के आसपास अंतराल देकर वर्ष जारी रहेगी
[9/1, 7:12 AM] Dr  Dileep Kumar singh: पिछले 24 घंटे में अगस्त के अंतिम दिन 100 मिलीमीटर वर्षा में है इस प्रकार अगस्त महीने में 250 मिली मीटर के मुकाबले 255 मिलीलीटर वर्षा हुई है 31 अगस्त और 1 सितंबर को भारी मूसलाधार वर्षा लगातार होगी जबकि 2 सितंबर को हल्की मध्यम तेज वर्षा होगी इसके बाद भी वर्षा का करम 11 सितंबर तक जारी रहेगाP