Sunday, 25 October 2026

भारत में जैसे ही विजयादशमी बीतती है तो दो चीजें एक साथ सत्ता

भारत में जैसे ही विजयादशमी बीतती है तो दो चीजें एक साथ सत्ता पक्ष विपक्ष और उनके समर्थकों खरीदे गए बुद्धिजीवी लोगों के द्वारा सामने लाई जाती है पहले है प्रदूषण और पराली की समस्या और दूसरी है स्वदेशी सामानों की खरीद का निवेदन और उसका प्रचार प्रचार । पहले हम स्वदेशी पर आते हैं सब बड़े-बड़े व्यापारियों के कूड़ा कचरा वाले सामान को बेचने के लिए स्वदेशी का आवाहन करते हैं यह कूड़ा कचरा सामान विदेशी अच्छे सामानों से बहुत महंगा भी होता है और कचरा भी होता है यहां एक प्रश्न है कि राष्ट्रपति प्रधानमंत्री सांसद विधायक और बड़े-बड़े जज कलेक्टर कप्तान धन कुबेर के यहां स्वदेशी सामान का प्रयोग होता है उनके लिए तो शौचालय भी विदेशी होता है और महिला पुरुष भी विदेशी उपयोग में लाए जाते हैं दूसरी बात यदि उन्हें स्वदेशी से इतना ही प्रेम है तो व्यापारियों से निवेदन करें कि वह विदेशी सामान से अच्छा और उसे सस्ता सामान बनाकर बेचें।

 जनता को पागल कुत्ते ने नहीं काटा है कि वह महंगा और गंदा कूडा कचरा सामान प्रधानमंत्री  राष्ट्रपति के कहने विकी मीडिया और बुद्धिजीवी के लिखने और कहने से खरीद लेगी अगर इतना ही स्वदेशी प्रेम है तो सारा स्वदेशी माल खरीद कर घर-घर वैसे ही बांट दो जैसे लैपटॉप स्कूटी इत्यादि मारते हो तीसरी बात प्रधानमंत्री राष्ट्रपति का कोई भी सामान बताओ जो स्वदेशी हो इसी तरह यह लोग देश की जनता को मूर्ख बनाते हैं कभी दिवाली के नाम पर तो कभी होली के नाम पर यह सारा ज्ञान सनातनी धर्म के पर्व त्यौहार पर ही है उडेल देते हैं।

 इसी तरह जब क्रिसमस और नये अंग्रेजी वर्ष पर सारी दुनिया में भयानक आतिशबाजी से प्रदूषण होता है और प्लास्टिक के पौधे ऑक्सीजन देने लगते हैं तब भी यह स्वदेशी नेता मंत्री प्रधानमंत्री डर के मारे चुपचाप रहती हैं और सबसे बड़ी बात जिस वोकल फार लोकल की बात कर रहे हैं वह तो खुद ही अंग्रेजी का शब्द है तीन के तीनों शब्द अंग्रेजी हैं सच्चे देश प्रेमी अवधेश प्रेमी होते तो इसकी जगह स्वदेश निर्मित चीज़ लिखकर अपना स्वदेश प्रेम प्रकट करते। आप खुद अंग्रेजी बोलकर स्वदेशी और हिंदी का प्रचार कर रहे हैं क्या लज्जा शम तक पर रख दिया है ये जनता को इतना मूर्ख समझते हैं कि सोचते जो कहेंगे आंखें मूंद कर जनता इसका पालन करेगी यह हो सकता है कि पैसा पाए लोग और आपसे जुड़े हुए लोग विवश होकर इसका प्रचार करें देसी कुटिया मराठी बोल आधा तीतर आधा बाते इसी को कहते हैं इसी तरह प्रदूषण और गंदगी को दिवाली से जोड़ देते हैं जिससे दुनिया का सबसे बड़ा प्रकाश पर्व अज्ञान पर ज्ञान की असत्य पर सत्य की अंधेरे पर प्रकाश की विजय ना होने पाए और लोग दीपक न जलाएं खुशी ना मनाया आतिशबाजी ना करें। सारा प्रदूषण सारी गंदगी दिवाली पर होता है और सारे पानी की बर्बादी होली में होती है बाकी एक गांव के बराबर अकेले बिजली पानी खर्च करने वाले मंत्री प्रधानमंत्री राष्ट्रपति और सांसद देश की बचत करते हैं ।


यही बात क्रिसमस और नए अंग्रेजी वर्ष नवरोज  ईद बकरीद जैसे त्योहारों पर कोई सत्ता पक्ष का या विपक्ष का नेता बुद्धिजीवी समाचार पत्र मीडिया वाले क्यों नहीं लिखते पढ़ते हैं जब करोड़ पशु गाय भैंस बकरे ऊंट दुंबा बकरीद पर काटे जाते हैं सारी धरती नदिया तालाब सरोवर खून से लाल हो जाते हैं  तो सारी मीडिया सारे बुद्धिजीवी सारे राजनेता सत्ता पक्ष विपक्ष जानवरों पर दया करने वाले संगठन मानवाधिकार आयोग क्यों चुप रहते हैं। 


यदि सनातन धर्म में इस तरह कोई जानवरों को काटने की प्रथम होती तो उसे पर सर्वोच्च न्यायालय से राजनेता सब प्रतिबंध लगाने की बात करते हैं इसलिए मेरा सनातन धर्म के लोगों से निवेदन है कि यदि आप मुसलमान ईसाई और यहूदी नहीं है तो अपने विवेक से अपनी क्षमता से अपने धर्म के अनुसार काम करें इन राजनेताओं के चक्कर में अपना-अपने धर्म और अपने भारत देश का विनाश ना करें

यहां एक गंभीर प्रश्न है जो प्रधानमंत्री राष्ट्रपति और नेता हिंदी संस्कृत में अपना प्रचार और नारा नहीं लिख सकते वह स्वदेशी की बात करते हैं दूसरी बात यदि स्वदेशी सचमुच अच्छा होगा तो क्या उसके लिए प्रचार की और प्रधानमंत्री को आवाहन करने की आवश्यकता पड़ेगी देसी मुर्गा देसी अंडा देसी गाय गाय का भी देसी चूल्हा पर बने सामान गुड़ की बनी चीजे आखिर यही नेता मंत्री सांसद और जनता बिना प्रचार प्रसार के क्यों खरीदनी है सचमुच देश प्रेमी है तो सभी विदेशी सामान पर रोक लगा कर दिखाए देश को नशा मुक्ति प्लास्टिक मुक्त करना चाहते हैं तो इनके कल कारखाने फैक्ट्रियां बंद कर दे जो उनके समर्थक उद्योगपति लगाकर देश को बर्बाद कर रहे हैं इस देश की जनता भी वैसी है बिना कुछ सोचे समझे बिना बुद्धि विवेक लगाए उनकी बात सुनती रहती है 

 कुर्सी प्रेमी और अपनी 100 पीढ़ियां संवारने वाले सत्ता पक्ष और विपक्ष के राजनेताओं ने पहले ही देश को मिली मार नूरा कुश्ती के तहत अफगानिस्तान पाकिस्तान बांग्लादेश नेपाल भूटान में अमर श्रीलंका मालदीप थाईलैंड तिब्बत में 100 साल में ही बांट दिया और एक से बढ़कर एक लोह पुरुष लौह महिला कहने को आए लेकिन एक इंच भी जमीन अपनी वापस नहीं ले पाए यदि बुद्धि विवेक है तो सनातनी लोग समझ जाए कि उनको हर प्रकार से किस तरह सब सरकारें खत्म करने पर उतारू है यह वोट सनातनी लोगों का लेते हैं और विकास विधर्मी का करके उसका विश्वास जीतने का प्रयास करती है। देश की स्वतंत्रता के तथा कथित धोखे के बाद 80 साल से अधिक हो गए इतने युद्ध लड़े गए इतनी सराजिकल स्ट्राइक हुई लेकिन सच्चाई ईमानदारी से सोचो देश को कुछ मिला नहीं लाखों सैनिक मारे गए और महाशंख डॉलर का नुकसान हुआ एक युद्ध बंदी भी वापस नहीं आया 


बस आंखें खोल कर देखो और समझो इसीलिए कहा गया है कि**लखैरो की अंतिम गति राजनीति है**  और अंत में यह बताओ कि कितने प्रधानमंत्री राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति लोकसभा अध्यक्ष सत्ता पक्ष और विपक्ष के बड़े-बड़े नेता सांसद विधायक बड़े-बड़े अधिकारी धन कुबेर और माफिया देश में बनी गाड़ियों पर चलते हैं देश में निर्मित जहाज पर उड़ते हैं देश में बने चश्मा और दवाइयां कपडे इत्र जूते बुलेट प्रूफ़ जैकेट मोबाइल घड़ी और स्वदेशी स्त्री पुरुषों का उपयोग करते हैं देश के अस्पतालों में ही इलाज करते हैं और स्वदेशी चीजों का उपयोग करते हैं कितने लोग स्वदेशी रामराज्य हिंदी हिंदुस्तान के समर्थक हैं और ऐसा कोई एक प्रधानमंत्री बता दो लाल बहादुर शास्त्री को छोड़कर जिसने अखंड भारत और केवल सनातन धर्म के लिए अपना जीवन समर्पित किया हो - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 

न्यूज़ 3
10/25, 3: [10/23, 7:35 AM] बंगाल की खाड़ी में बनेगा भीषण चक्रवात 25 से 31 अक्टूबर के बीच जौनपुर सहित पूरे भारत में होगी वर्षा -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 7017713978
[10/23, 7:57 AM]  विभिन्न प्रकार के मौसम के विरोधी चक्र अल नीनो के प्रभाव अरब सागर और बंगाल की खाड़ी एवं भारत के भूभाग में तापमान का अंतर हिमालय और ध्रुव प्रदेश में शीतल मौसम मिलकर अरब सागर में 24 तारीख को एक चक्रवात केरलम के दक्षिण पश्चिम में पैदा करेंगे जो धीरे-धीरे खिसक कर श्रीलंका होता हुआ तमिलनाडु की तरफ आ जाएगा और इस प्रबल चक्रवाती विक्षोभ से 25 अक्टूबर से 31 अक्टूबर के बीच भारत के अधिकांश भागों में वर्षा होगी जिसमें उत्तर प्रदेश और जौनपुर भी सम्मिलित रहेगा। जौनपुर में इस चक्रवात के पहुंचने की संभावित तिथि 28 अक्टूबर से 31 अक्टूबर के बीच रहेगी और यह लेख मैंने सुबह 23 अक्टूबर को लिखा है ।

24 तारीख को कर्नाटक केरल के तटवर्ती भाग में 25 तारीख को श्रीलंका तमिलनाडु आंध्र प्रदेश में 26 अक्टूबर को उड़ीसा और तेलंगाना तथा दक्षिण के पत्थरों पर 27 को बंगाल बिहार उड़ीसा झारखंड और 28 से 31 तक इसका प्रभाव मध्यम प्रदेश उत्तर प्रदेश जौनपुर और आगे भारत में बढ़ता चला जाएगा यह राजधानी दिल्ली तक प्रभाव डालेगा प्रारंभ में लक्षद्वीप और केरल के आसपास इस समुद्री चक्रवात की गति 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी श्रीलंका और तमिलनाडु के किनारे पहुंचते पहुंचते हैं इसकी गति 100 किलोमीटर और उड़ीसा और आंध्र प्रदेश के तट पर पहुंचते पहुंचते इसकी गति 125 से 175 किलोमीटर के बीच होगी यह भयानक चौथी श्रेणी का महा चक्रवात है। 

 कर्नाटक केरल तमिलनाडु लक्षद्वीप अंडमान निकोबार पांडिचेरी उड़ीसा बंगाल मध्य प्रदेश के पूर्व बिहार के पूर्व झारखंड में मध्यम से भरी कहानी-कहानी बहुत भारी वर्षा और बचे हुए भागों में सामान्य मध्यम और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा इस चक्रवात से हो सकती है। यह कम 25 से 28 अक्टूबर के बीच होगा अपने ढंग का यह अनोखा चक्रवात है जो पैदा होगा अरब सागर में शक्तिशाली बनेगा हिंद महासागर में और भयानक विनाश करेगा बंगाल की खाड़ी के तटवर्ती भागों में और इसका प्रभाव कर्नाटक केरल लक्षद्वीप तमिलनाडु पुडुचेरी आंध्र प्रदेश उड़ीसा तेलंगाना महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के पूर्वी भागों पूर्वोत्तर भारत बंगाल बिहार झारखंड उत्तर प्रदेश और दिल्ली तक होगा। 

जहां तक जौनपुर और उसके आसपास की बात है तो 28 अक्टूबर से मौसम बदलने प्रारंभ होगा 29 और 30 को यहां तेज हवाओं और झंझावात आवाज के साथ वर्षा होने की प्रबल संभावना बन रही है पहली संभावना भारी वर्षा की बन रही है दूसरे संभावना हल्की वर्षा और तेज हवा वाली है अधिक संभावना है की माध्यम से तेज वर्षा चक्रवर्ती तूफानी हवाओं के साथ झंझा झकोर घन गर्जन तड़ित और वज्रपात के साथ होगी। 

अभी तापमान 27 तक लगभग स्थिर रहेगा और हवा पश्चिमी रहेगी उसके बाद उत्तर पूर्वी और फिर पूर्वी हवा में बदल जाएगी इस बीच तापमान 30 से 32 अधिकतम और 18 से 21 न्यूनतम बना रहेगा जो उत्तर भारत में सबसे सुहाना मौसम कहा जाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक भी 200 से 300 के बीच बनी रहेगी और पराबैंगनी किरणों की तीव्रता चार से सात रहेगी हवाओं की दिशा और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा कि यह चक्रवात कितना प्रबल होगा लेकिन यह निश्चित है कि वर्षा तेज हवाएं आंधी तूफान लगभग हर जगह रहेगा हमेशा की तरह सबसे पहले भविष्यवाणी हमारे केंद्र के द्वारा दी जा रही है अभी तक कहीं इसका कोई वर्णन नहीं है। 

अभी कल तिब्बत में भूकंप आने की हमारी भविष्यवाणी बिल्कुल सही हुई थी और एक हफ्ते में आधा दर्जन भूकंप जो हल्के मध्यम होंगे भारत सहित दुनिया के अनेक भागों में आएंगे  ताइवान और क्यूबा में भयानक पांचवीं श्रेणी का महा चक्रवात आएगा यूरोप में चलेगा भीषण गृह युद्ध दंगा फसाद मारकाट और अंत में भी विधर्मी दंगाई पश्चपाद पर आ जाएंगे इसी तरह कल भारत के T20 जीतने की भविष्यवाणी और तीन दो से श्रृंखला निर्णीत की भविष्यवाणी भी सच हो रही है। जो भारत जीतेगा खेलों में बहुत सी चीज सट्टेबाजी के कारण मैं प्रतीक रूप में ही बताता हूं और कभी-कभी जानबूझकर गलत बता देता हूं खेल की दृष्टि से 15 से 21 अक्टूबर तक भारत के लिए बहुत अच्छा रहेगा 

 इस वर्ष 23 सितंबर से ही ठंड का मौसम आने और 30 अक्टूबर से ही ठंड बढ़ने की भविष्यवाणी भी सही हो रही है भयंकर कीर्तिमान बनाने वाले जाड़े की भविष्यवाणी भी निश्चित सही होगी और इस वर्ष का जाड़ा लोग मरते समय तक याद रखेंगे यद्यपि भारत के लोगों को भूलने की बहुत भयानक बीमारी है इसलिए भूल भी सकते हैं 4 साल में कोरोना जैसी नकली महामारी को भी भूल गए।

न्यूज़2

 भगवान श्री परशुराम जी का जीवन चरित्र - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 

परशुराम राजा प्रसेनजित की पुत्री रेणुका और भृगुवंशीयजमदग्नि के पुत्र थे। वे विष्णु के अवतार और शिव के परम भक्त थे। इन्हें शिव से विशेष परशु प्राप्त हुआ था। इनका नाम तो राम था, किन्तु शंकर द्वारा प्रदत्त अमोघ परशु को सदैव धारण किये रहने के कारण ये परशुराम कहलाते थे। परशुराम भगवान विष्णु के दस अवतारों में से छठे अवतार थे, जो वामन एवं रामचन्द्र के मध्य में गिना जाता है। जमदग्नि के पुत्र होने के कारण ये 'जामदग्न्य' भी कहे जाते हैं। इनका जन्म अक्षय तृतीया, (वैशाख शुक्ल तृतीया) को हुआ था। अत: इस दिन व्रत करने और उत्सव मनाने की प्रथा है। परम्परा के अनुसार इन्होंने आततायी क्षत्रियों का अनेक बार विनाश किया। क्षत्रियों के अहंकारपूर्ण दमन से विश्व को मुक्ति दिलाने के लिए इनका जन्म हुआ था।

जन्म कथा

भृगु ने अपने पुत्र के विवाह के विषय में जाना तो बहुत प्रसन्न हुए तथा अपनी पुत्रवधू से वर माँगने को कहा। उनसे सत्यवती ने अपने तथा अपनी माता के लिए पुत्र जन्म की कामना की। भृगु ने उन दोनों को 'चरु' भक्षणार्थ दिये तथा कहा कि ऋतुकाल के उपरान्त स्नान करके सत्यवती गूलर के पेड तथा उसकी माता पीपल के पेड़ का आलिंगन करे तो दोनों को पुत्र प्राप्त होंगे। माँ-बेटी के चरु खाने में उलट-फेर हो गयी। दिव्य दृष्टि से देखकर भृगु पुनः वहाँ पधारे तथा उन्होंन सत्यवती से कहा कि तुम्हारी माता का पुत्र क्षत्रिय होकर भी ब्राह्मणोचित व्यवहार करेगा तथा तुम्हारा बेटा ब्राह्मणोचित होकर भी क्षत्रियोचित आचार-विचार वाला होगा। बहुत अनुनय-विनय करने पर भृगु ने मान लिया कि सत्यवती का बेटा ब्राह्मणोचित रहेगा किंतु पोता क्षत्रियों की तरह कार्य करने वाला होगा।

सत्यवती के पुत्र जमदग्नि मुनि हुए। उन्होंने राजा प्रसेनजित की पुत्री रेणुका से विवाह किया। रेणुका के पाँच पुत्र हुए—

रुमण्वान सुषेण वसु विश्वावसु तथापाँचवें पुत्र का नाम परशुराम था।

वही क्षत्रियोचित आचार-विचार वाला पुत्र था। एक बार सद्यःस्नाता रेणुका राजा चित्ररथ पर मुग्ध हो गयी। उसके आश्रम पहुँचने पर मुनि को दिव्य ज्ञान से समस्त घटना ज्ञात हो गयी। उन्होंने क्रोध के आवेश में बारी-बारी से अपने चार बेटों को माँ की हत्या करने का आदेश दिया। किंतु कोई भी तैयार नहीं हुआ। जमदग्नि ने अपने चारों पुत्रों को जड़बुद्ध होने का शाप दिया। परशुराम ने तुरन्त पिता की आज्ञा का पालन किया। जमदग्नि ने प्रसन्न होकर उसे वर माँगने के लिए कहा। परशुराम ने पहले वर से माँ का पुनर्जीवन माँगा और फिर अपने भाईयों को क्षमा कर देने के लिए कहा। जमदग्नि ऋषि ने परशुराम से कहा कि वो अमर रहेगा। एक दिन जब परशुराम बाहर गये थे तो कार्तवीर्य अर्जुन उनकी कुटिया पर आये। युद्ध के मद में उन्होंने रेणुका का अपमान किया तथा उसके बछड़ों का हरण करक चले गये। गाय रंभाती रह गयी। परशुराम को मालूम पड़ा तो क्रुद्ध होकर उन्होंने सहस्रबाहु हैहयराज को मार डाला। हैहयराज के पुत्र ने आश्रम पर धावा बोला तथा परशुराम की अनुपस्थिति में मुनि जमदग्नि को मार डाला। परशुराम घर पहुँचे तो बहुत दुखी हुए तथा पृथ्वी का क्षत्रियहीन करने का संकल्प किया। अतः परशुराम ने इक्कीस बार पृथ्वी के समस्त पापी क्षत्रियों का संहार किया। समंत पंचक क्षेत्र में पाँच रुधिर के कुंड भर दिये। क्षत्रियों के रुधिर से परशुराम ने अपने पितरों का तर्पण किया। उस समय ऋचीक साक्षात प्रकट हुए तथा उन्होंने परशुराम को ऐसा कार्य करने से रोका। ऋत्विजों को दक्षिणा में पृथ्वी प्रदान की। ब्राह्मणों ने कश्यप की आज्ञा से उस वेदी को खंड-खंड करके बाँट लिया, अतः वे ब्राह्मण जिन्होंने वेदी को परस्पर बाँट लिया

 पिता ने प्रसन्न होकर वर माँगने को कहा तो उन्होंने चार वरदान माँगे-

माँ पुनर्जीवित हो जायँ,उन्हें मरने की स्मृति न रहे,भाई चेतना-युक्त हो जायँ औरमैं परमायु होऊँ।

जमदग्नि ने उन्हें चारों वरदान दे दिये।

क्रोधी स्वभाव

दुर्वासा की भाँति ये भी अपने क्रोधी स्वभाव के लिए विख्यात है। एक बार कार्तवीर्य ने परशुराम की अनुपस्थिति में आश्रम उजाड़ डाला था, जिससे परशुराम ने क्रोधित हो उसकी सहस्त्र भुजाओं को काट डाला। कार्तवीर्य के सम्बन्धियों ने प्रतिशोध की भावना से जमदग्नि का वध कर दिया। इस पर परशुराम ने निरंकुश पापी  राजाओ321 बार पृथ्वी को क्षत्रिय-विहीन कर दिया (हर बार हताहत क्षत्रियों की पत्नियाँ जीवित रहीं और नई पीढ़ी को जन्म दिया) और पाँच झीलों को रक्त से भर दिया। अंत में पितरों की आकाशवाणी सुनकर उन्होंने क्षत्रियों से युद्ध करना छोड़कर तपस्या की ओर ध्यान लगाया। रामावतार मेंरामचन्द्र द्वारा शिव का धनुष तोड़ने पर ये क्रुद्ध होकर आये थे। इन्होंने परीक्षा के लिए उनका धनुष रामचन्द्र को दिया। जब राम ने धनुष चढ़ा दिया तो परशुराम समझ गये कि रामचन्द्र विष्णु के अवतार हैं। इसलिए उनकी वन्दना करके वे तपस्या करने चले गये। 'कहि जय जय रघुकुल केतू। भुगुपति गए बनहि तप हेतु॥' यह वर्णन 'राम चरितमानस', प्रथम सोपान में 267 से 284 दोहे तक मिलता है।

राम के पराक्रम की परीक्षा
राम का पराक्रम सुनकर वे अयोध्या गये। दशरथ ने उनके स्वागतार्थ रामचन्द्र को भेजा। उन्हें देखते ही परशुराम ने उनके पराक्रम की परीक्षा लेनी चाही। अतः उन्हें क्षत्रियसंहारक दिव्य धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाने के लिए कहा। राम के ऐसा कर लेने पर उन्हें धनुष पर एक दिव्य बाण चढ़ाकर दिखाने के लिए कहा। राम ने वह बाण चढ़ाकर परशुराम के तेज़ पर छोड़ दिया। बाण उनके तेज़ को छीनकर पुनः राम के पास लौट आया। राम ने परशुराम को दिव्य दृष्टि दी। जिससे उन्होंने राम के यथार्थ स्वरूप के दर्शन किये। परशुराम एक वर्ष तक लज्जित, तेजहीन तथा अभिमानशून्य होकर तपस्या में लगे रहे। तदनंतर पितरों से प्रेरणा पाकर उन्होंने वधूसर नामक नदी के तीर्थ पर स्नान करके अपना तेज़ पुनः प्राप्त किया।

परशुराम कुंड

असम राज्य की उत्तरी-पूर्वी सीमा में जहाँ ब्रह्मपुत्र नदी भारतमें प्रवेश करती है, वहीं परशुराम कुण्ड है, जहाँ तप करके उन्होंने शिवजी से परशु प्राप्त किया था। वहीं पर उसे विसर्जित भी किया। परशुराम जी भी सात चिरंजीवियों में से एक हैं। इनका पाठ करने से दीर्घायु प्राप्त होती है। परशुराम कुंड नामक तीर्थस्थान में पाँच कुंड बने हुए हैं। परशुराम ने समस्त क्षत्रियों का संहार करके उन कुंडों की स्थापना की थी तथा अपने पितरों से वर प्राप्त किया था कि क्षत्रिय संहार के पाप से मुक्त हो जायेंगे।

रामकथा में परशुराम.

चारों पुत्रों के विवाह के उपरान्त राजा दशरथ अपनी विशाल सेना और पुत्रों के साथ अयोध्या पुरी के लिये चल पड़े। मार्ग में अत्यन्त क्रुद्ध तेजस्वी महात्मा परशुराम मिले। उन्होंने रामसे कहा कि वे उसकी पराक्रम गाथा सुन चुके हैं, पर राम उनके हाथ का धनुष चढ़ाकर दिखाएँ। तदुपरान्त उनके पराक्रम से संतुष्ट होकर वे राम को द्वंद्व युद्ध के लिए आमंत्रित करेंगे। दशरथ अनेक प्रयत्नों के उपरान्त भी ब्राह्मणदेव परशुराम को शान्त नहीं कर पाये। परशुराम ने बतलाया कि 'विश्वकर्मा ने अत्यन्त श्रेष्ठ कोटि के दो धनुषों का निर्माण किया था। उनमें से एक तो देवताओं ने शिव को अर्पित कर दिया था और दूसरा विष्णु को। एक बार देवताओं के यह पूछने पर कि शिव और विष्णु में कौन बलबान है, कौन निर्बल- ब्रह्मा ने मतभेद स्थापित कर दिया। फलस्वरूप विष्णु की धनुष टंकार के सम्मुख शिव धनुष शिथिल पड़ गया था, अतः पराक्रम की वास्तविक परीक्षा इसी धनुष से हो सकती है। शान्त होने पर शिव ने अपना धनुष विदेह वंशज देवरात को और विष्णु ने अपना धनुष भृगुवंशी ऋचीक को धरोहर के रूप में दिया था, जो कि मेरे पास सुरक्षित है।'

राम ने क्रुद्ध होकर उनके हाथ से धनुष बाण लेकर चढ़ा दिया और बोले - 'विष्णुबाण व्यर्थ नहीं जा सकता। अब इसका प्रयोग कहाँ पर किया जाये।' परशुराम का बल तत्काल लुप्त हो गया। उनके कथनानुसार राम ने बाण का प्रयोग परशुराम के तपोबल से जीते हुए अनेक लोकों पर किया, जो कि नष्ट हो गये। परशुराम ने कहा - 'हे राम, आप निश्चय ही साक्षात विष्णु हैं।' तथा परशुराम ने महेन्द्र पर्वत के लिए प्रस्थान किया। राम आदि अयोध्या की ओर बढ़े। उन्होंने यह धनुषवरुण देव को दे दिया। परशुराम की छोड़ी हुई सेना ने भी राम आदि के साथ प्रस्थान किया।

कथा: पिता का आदेश
परशुराम....
नारायण ने ही भृगुवंश में परशुराम रूप में अवतार धारण किया था। उन्होंने जंभासुर का मस्तक विदीर्ण किया। शतदुंदभि को मारा। उन्होंने युद्ध में हैहयराज अर्जुन को मारा तथा केवल धनुष की सहायता से सरस्वती नदी के तट पर हज़ारों ब्राह्मण वेशी क्षत्रियों को मार डाला। एक बारकार्तवीर्य अर्जुन ने बाणों से समुद्र को त्रस्त कर किसी परम वीर के विषय में पूछा। समुद्र ने उसे परशुराम से लड़ने को कहा। परशुराम को उसने अपने व्यवहार से बहुत रुष्ट कर दिया। अतः परशुराम ने उसकी हज़ार भुजाएँ काट डालीं। अनेक क्षत्रिय युद्ध के लिए आ जुटे। परशुराम क्षत्रियों से रुष्ट हो गये, अतः उन्होंने इक्कीस बार पृथ्वी को क्षत्रिय विहीन कर डाला। अंत में पितरों की आकाशवाणी सुनकर उन्होंने क्षत्रियों से युद्ध करना छोड़कर तपस्या की ओर ध्यान लगाया।

वे सौ वर्षों तक सौभ नामक विमान पर बैठे हुए शाल्व से युद्ध करते रहे किंतु गीत गीत गाती हुई नग्निका (कन्या) कुमारियों के मुंह से यह सुनकर कि शाल्व का वध प्रद्युम्न और साँब को साथ लेकर विष्णु करेंगे, उन्हें विश्वास हो गया, अतः वे तभी से वन में जाकर अपने अस्त्र शस्त्र इत्यादि पानी में डुबोकर कृष्णावतार की प्रतीक्षा में तपस्या करने लगे।

परशुराम और यज्ञ

परशुराम ने अपने जीवनकाल में अनेक यज्ञ किए। यज्ञ करने के लिए उन्होंने बत्तीस हाथ ऊँची सोने की वेदी बनवायी थी। महर्षि कश्यप ने दक्षिण में पृथ्वी सहित उस वेदी को ले लिया तथा फिर परशुराम से पृथ्वी छोड़कर चले जाने के लिए कहा। परशुराम ने समुद्र पीछे हटाकर गिरिश्रेष्ठ महेंद्र पर निवास किया।

गाधि और ऋचीक

गाधि नामक महाबली राजा अपने राज्य का परित्याग करके वन में चले गये। वहाँ उनकी एक पुत्री हुई जिसका वरण ऋचीक नामक मुनि ने किया। गाधि ने ऋचीक से कहा कि कन्या की याचना करते हुए उनके कुल में एक सहस्र पांडुबर्णी अश्व, जिनके कान एक ओर से काल हों, शुल्क स्वरूप दिये जाते हैं, अतः वे शर्ते पूरी करें। ऋचीक ने वरुण देवता से उस प्रकार के एक सहस्र घोड़े प्राप्त कर शुल्कस्वरूप प्रदान किये। गाधि की सत्यवती नामक पुत्री का विवाह ऋतीक से हुआ।

कथा: शिव द्वारा दिव्यास्त्र

बड़े होने पर परशुराम ने शिवाराधन किया। उस नियम का पालन करते हुए उन्होंने शिव को प्रसन्न कर लिया। शिव ने उन्हें दैत्यों का हनन करने की आज्ञा दी। परशुराम ने शत्रुओं से युद्ध किया तथा उनका वध किया। किंतु इस प्रक्रिया में परशुराम का शरीर क्षत-विक्षत हो गया। शिव ने प्रसन्न होकर कहा कि शरीर पर जितने प्रहार हुए हैं, उतना ही अधिक देवदत्व उन्हें प्राप्त होगा। वे मानवेतर होते जायेंगे। तदुपरान्त शिव ने परशुराम को अनेक दिव्यास्त्र प्रदान किये, जिनमें से परशुराम ने कर्ण पर प्रसन्न होकर उसे दिव्य धनुर्वेद प्रदान किया।

जमदग्नि ऋषि ने रेणुका के गर्भ से अनेक पुत्र प्राप्त किए। उनमें सबसे छोटे परशुराम थे। उन दिनों हैहयवंश का अधिपति अर्जुन था। उसने विष्णु के अंशावतार दत्तात्रेय के वरदान से एक सहस्र भुजाएँ प्राप्त की थीं। एक बार नर्मदा में स्नान करते हुए मदोन्मत्त हैहयराज ने अपनी बाँहों से नदी का वेग रोक लिया, फलतः उसकी धारा उल्टी बहने लगी, जिससेरावण का शिविर पानी में डूबने लगा। दशानन ने अर्जुन के पास जाकर उसे भला-बुरा कहा तो उसने रावण को पकड़कर कैद कर लिया। पुलस्त्य के कहने पर उसने रावण को मुक्त कर दिया। एक बार वह वन में जमदग्नि के आश्रम पर पहुँचा। जमदग्नि के पास कामधेनु थी। अतः वे अपरिमित वैभव क भोक्ता थे। ऐसा देखकर हैहयराज सहस्र बाहु अर्जुन ने कामधेनु का अपहरण कर लिया। परशुराम ने फरसा उठाकर उसका पीछा किया तथा युद्ध में उसकी समस्त भुजाएँ तथा सिर काट डाले।

तीर्थाटन

उसके दस हज़ार पुत्र भयभीत होकर भाग गये। कामधेनु सहित आश्रम लौटने पर पिता ने उन्हें तीर्थाटन कर अपने पाप धोने के लिए आज्ञा दी क्योंकि उनकी मति में ब्राह्मण का धर्म क्षमादान है। परशुराम ने वैसा ही किया। एक वर्ष तक तीर्थ करके वे वापस आये।  हैहयराज अर्जुन के पुत्र निरंतर बदला लेने का अवसर ढूँढते रहते थे। एक दिन पुत्रों की अनुपस्थिति में उन्होंने ऋषि जमदग्नि का वध कर दिया। परशुराम ने उन सबको मारकर महिष्मती नगरी में उनके कटे सिरों से एक पर्वत का निर्माण किया। उन्होंने अपने पिता को निमित्त बनाकर इक्कीस बार पृथ्वी को क्षत्रियहीन कर दिया। वास्तव में परशुराम श्रीविष्णु के अंशावतार थे, जिन्होंने क्षत्रिय नाश के लिए ही जन्म लिया था। उन्होंने अपने पिता के धड़ को सिर से जोड़कर यजन द्वारा उन्हें स्मृति रूप सकल्पमय शरीर की प्राप्ति करवा दी।

श्रीमद्भागवत महापुराण में वर्णन

रेणुका के गर्भ से जमदग्नि ऋषि के वसुमान आदि कई पुत्र हुए। उनमें सबसे छोटे परशुरामजी थे। उनका यश सारे संसार में प्रसिद्ध है। कहते हैं कि हैहयवंश का अन्त करने के लिये स्वयं भगवान ने की परशुराम के रूप में अंशावतार ग्रहण किया था। उन्होंने इस पृथ्वी को इक्कीस बार क्षत्रियहीन कर दिया। यद्यपि क्षत्रियों ने उनका थोड़ा-सा ही अपराध किया था-फिर भी वे लोग बड़े दुष्ट, ब्राह्मणों के अभक्त, रजोगुणी और विशेष करके तमोगुणी हो रहे थे। यही कारण था कि वेपृथ्वी के भार हो गये थे और इसी के फलस्वरूप भगवान परशुराम ने उनका नाश करके पृथ्वी का भार उतार दिया।

राजा परीक्षित ने पूछा- भगवन! अवश्य ही उस समय के क्षत्रिय विषयलोलुप हो गये थे; परन्तु उन्होंने परशुरामजी का ऐसा कौन-सा अपराध कर दिया, जिसके कारण उन्होंने बार-बार क्षत्रियों के वंश का संहार किया।

श्री शुकदेवजी कहने लगे- परीक्षित! उन दिनों हैहयवंश का अधिपति था अर्जुन। वह एक श्रेष्ठ क्षत्रिय था। उसने अनेकों प्रकार की सेवा-शुश्रूषा करके भगवान नारायण के अंशावतारदत्तात्रेयजी को प्रसन्न कर लिया और उनसे एक हज़ार भुजाएँ तथा कोई भी शत्रु युद्ध में पराजित न कर सके- यह वरदान प्राप्त कर लिया। साथ ही इन्द्रियों का अबाध बल, अतुल सम्पत्ति, तेजस्विता, वीरता, कीर्ति और शारीरिक बल भी उसने उनकी कृपा से प्राप्त कर लिये थे। वह योगेश्वर हो गया था। उसमें ऐसा ऐश्वर्य था कि वह सूक्ष्म-से-सूक्ष्म, स्थूल-से-स्थूल रूप धारण कर लेता। सभी सिद्धियाँ उसे प्राप्त थीं। वह संसार में वायु की तरह सब जगह बेरोक-टोक विचरा करता। एक बार गले में वैजयन्ती माला पहने सहस्त्रबाहु अर्जुन बहुत-सी सुन्दरी स्त्रियों के साथ नर्मदा नदी में जल-विहार कर रहा था। उस समय मदोन्मत्त सहस्त्रबाहु ने अपनी बाँहों से नदी का प्रवाह रोक दिया। दशमुख रावण का शिविर भी वहीं कहीं पास में ही था। नदी की धारा उलटी बहने लगी, जिससे उसका शिविर डूबने लगा। रावण अपने को बहुत बड़ा वीर तो मानता ही था, इसलिये सहस्त्रार्जुन का यह पराक्रम उससे सहन नहीं हुआ। जब रावण सहस्त्रबाहु अर्जुन के पास जाकर बुरा-भला कहने लगा, तब उसने स्त्रियों के सामने ही खेल-खेल में रावण को पकड़ लिया और अपनी राजधानीमाहिष्मती में ले जाकर बंदर के समान कैद कर लिया। पीछेपुलस्त्यजी के कहने से सहस्त्रबाहु ने रावण को छोड़ दिया।

कामधेनु के लिए संघर्ष

एक दिन सहस्त्रबाहु अर्जुन शिकार खेलने के लिये बड़े घोर जंगल में निकल गया था। दैववश वह जमदग्नि मुनि के आश्रम पर जा पहुँचा। परम तपस्वी जमदग्नि मुनि के आश्रम में कामधेनु रहती थी। उसके प्रताप से उन्होंने सेना, मन्त्री और वाहनों के साथ हैहयाधिपति का देखा कि जमदग्नि मुनि का ऐश्वर्य तो मुझसे भी बढ़ा-चढ़ा है। इसलिये उसने उनके स्वागत-सत्कार को कुछ भी आदर न देकर कामधेनु को ही ले लेना चाहा। उसने अभिमानवश जमदग्नि मुनि से माँगा भी नहीं, अपने सेवकों को आज्ञा दी कि कामधेनु को छीन ले चलो। उसकी आज्ञा से उसके सेवक बछड़े के साथ 'बाँ-बाँ' डकराती हुई कामधेनु को बलपूर्वक माहिष्मतीपुरी ले गये। जब वे सब चले गये, तब परशुरामजी आश्रम पर आये और उसकी दुष्टता का वृत्तान्त सुनकर चोट खाये हुए साँप की तरह क्रोध से तिलमिला उठे। वे अपना भयंकर फरसा, तरकस, ढाल एवं धनुष लेकर बड़े वेग से उसके पीछे दौड़े- जैसे कोई किसी से न दबने वाला सिंह हाथी पर टूट पड़े।

सहस्त्रबाहु अर्जुन अभी अपने नगर में प्रवेश कर ही रहा था कि उसने देखा परशुरामजी महाराज बड़े वेग से उसी की ओर झपटे आ रहे हैं। उनकी बड़ी विलक्षण झाँकी थी। वे हाथ में धनुष-बाण और फरसा लिये हुए थे, शरीर पर काला मृगचर्म धारण किये हुए थे और उनकी जटाएँ सूर्य की किरणों के समान चमक रही थीं। उन्हें देखते ही उसने गदा, खड्ग बाण, ऋष्टि, शतघ्नी और शक्ति आदि आयुधों से सुसज्जित एवं हाथी, घोड़े, रथ तथा पदातियों से युक्त अत्यन्त भयंकर सत्रहअक्षौहिणी सेना भेजी। भगवान परशुराम ने बात-की-बात में अकेले ही उस सारी सेना को नष्ट कर दिया। भगवान परशुरामजी की गति मन और वायु के समान थी। बस, वे शत्रु की सेना काटते ही जा रहे थे। जहाँ-जहाँ वे अपने फरसे का प्रहार करते, वहाँ-वहाँ सारथि और वाहनों के साथ बड़े-बड़े वीरों की बाँहें, जाँघें और कंधे कट-कटकर पृथ्वीपर गिरते जाते थे।

सहस्त्रबाहु अर्जुन का वध

हैहयाधिपति अर्जुन ने देखा कि मेरी सेना के सैनिक, उनके धनुष, ध्वजाएँ और ढाल भगवान परशुराम के फरसे और बाणों से कट-कटकर ख़ून से लथपथ रणभूमि में गिर गये हैं, तब उसे बड़ा क्रोध आया और वह स्वयं भिड़ने के लिये आ धमका। उसने एक साथ ही अपनी हज़ार भुजाओं से पाँच सौ धनुषों पर बाण चढ़ाये और परशुरामजी पर छोड़े। परन्तु परशुराम जी तो समस्त शस्त्रधारियों के शिरोमणि ठहरे। उन्होंने अपने एक धनुषपर छोड़े हुए बाणों से ही एक साथ सबको काट डाला। अब हैहयाधिपति अपने हाथों से पहाड़ और पेड़ उखाड़कर बड़े वेग से युद्ध भूमि में परशुरामजी की ओर झपटा। परन्तु परशुरामजी ने अपनी तीखी धारवाले फरसे से बड़ी फुर्ती के साथ उसकी साँपों के समान भुजाओं को काट डाला। जब उसकी बाँहें कट गयीं, तब उन्होंने पहाड़ की चोटी की तरह उसका ऊँचा सिर धड़ से अलग कर दिया। पिता के मर जाने पर उसके दस हज़ार लड़के डरकर भग गये।

प्रायश्चित
परीक्षित! विपक्षी वीरों के नाशक परशुरामजी ने बछड़े के साथ कामधेनु लौटा ली। वह बहुत ही दु:खी हो रही थी। उन्होंने उसे अपने आश्रम पर लाकर पिताजी को सौंप दिया। और माहिष्मती में सहस्त्रबाहु ने तथा उन्होंने जो कुछ किया था, सब अपने पिताजी तथा भाइयों को कह सुनाया। सब कुछ सुनकर जमदग्नि मुनि ने कहा- 'हाय, हाय, परशुराम! तुमने बड़ा पाप किया। राम, राम! तुम बड़े वीर हो; परन्तु सर्वदेवमय नरदेव का तुमने व्यर्थ ही वध किया। बेटा! हमलोग ब्राह्मण हैं। क्षमा के प्रभाव से ही हम संसार में पूजनीय हुए हैं। और तो क्या, सबके दादा ब्रह्माजी भी क्षमा के बल से ही ब्रह्मपद को प्राप्त हुए हैं। ब्राह्मणों की शोभा क्षमा के द्वारा ही सूर्य की प्रभा के समान चमक उठती है। सर्वशक्तिमान भगवान श्रीहरि भी क्षमावानों पर ही शीघ्र प्रसन्न होते हैं। बेटा! सार्वभौम राजा का वध ब्राह्मण की हत्या से भी बढ़कर है। जाओ, भगवान का स्मरण करते हुए तीर्थों का सेवन करके अपने पापों को धो डालो'।

Friday, 23 October 2026

शरद पूर्णिमा और ब्रह्म ऋषि वाल्मीकि- डॉदिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

शरद पूर्णिमा और ब्रह्म ऋषि वाल्मीकि- डॉदिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि
समस्त भूमंडल में भारत सबसे अदभुत अनोखा और सबसे प्राचीन पवित्र देश है इसके उत्तर में हिम मंडित हिमालय और पृथ्वी का स्वर्ग कश्मीर है‌ तो इसके दक्षिण में हरी नीली हिंद महासागर की लहरों से अठखेलियाँ करता समुद्र का स्वर्ग कन्याकुमारी है इसके पश्चिम में दूर-दूर तक फैला हुआ त्याग बलिदान शुष्कता वीरता और वीरानी का स्वर्ग राजस्थान है तो इसके पूर्व में असम चेरापूंजी और अरुणाचल की पहाड़ियां हैं जो वर्षा हरियाली और स्वच्छता का स्वर्ग है ऐसे दिव्य भारतवर्ष में हर महीने कोई ना कोई बड़ा महापर्व त्यौहार उत्सव और प्रत्येक दिन कोई ना कोई व्रत त्योहार कथा पूजन पड़ता ही रहता है जो संपूर्ण संसार में दुर्लभ ही नहीं असंभव है। 

शरद पूर्णिमा अर्थात कोजागरी पूर्णिमा आश्विन माह की पूर्णिमा तिथि को पड़ती है और इस रात की पूर्णिमा सबसे स्वच्छ धवल उज्जवल और शांतिपूर्ण होती है जिसे वैज्ञानिक कारण है धरती के सबसे नजदीक इस समय चंद्रमा होता है और उसकी किरणों से अमृत वर्षा होती है जबकि धार्मिक कारण यह है कि इस दिन व्रत करने से सब मनोकामनाएं पूरी होती हैं जिसमें प्राचीन काल के एक सेठ साहूकार की कथा भी आती है अगला कारण यह है कि इसी दिन ब्रह्म ऋषि वाल्मीकि पैदा हुए थे जो एक दस्यु  थे और श्री राम नाम का जप करते-करते ब्रह्म ऋषि हो गए थे अगला धार्मिक कारण यह है कि इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने बहुत छोटी अवस्था में महारास लीला वृंदावन के मधुबन में किया था जिसमें समग्र ब्रह्मांड आनंद विभोर हो उठा था ‌ और उनकी मुरली की तान से निकलने वाली क्लिम की ध्वनि ने समग्र ब्रह्मांड को झंकृत कर दिया था।

प्रकृति और पर्यावरण से जुड़े इस महान पर्व के दिन ठंडी गर्मी दिन रात बिल्कुल बराबर रहती है और बहुत ही सुंदर स्वच्छ वातावरण धरती आसमान और जल सभी का होता है वर्षा ऋतु बीत जाने से वायुमंडल पूरी तरह स्वच्छ होता है और अत्यंत ही चमकीली चंद्रमा की रश्मि अमृत के साथ धरती पर पड़ती हैं इसीलिए इस दिन स्वादिष्ट खीर पका कर खुले स्थान में ढक कर रखी जाती है और रात भर उसे पर अमृत वर्षा का कुछ अंश मिल जाता है जिसे खाने से शरीर के अनेक रोग बीमारियां और मानसिक तनाव तथा दैहिक दैविक भौतिक ताप मिट जाते हैं यह धार्मिक वैज्ञानिक और आध्यात्मिक सत्य है भारत के हर एक व्रत पर्व उत्सव हवन यज्ञ अनुष्ठान सब धर्म अध्यात्म विज्ञान दर्शन और प्रकृति पर्यावरण से जुड़े हुए हैं इसीलिए भारत की सभ्यता संस्कृति करोड़ों वर्ष चली और आज भी चल रही हैं जबकि धरती की कोई भी सभ्यता 2000 वर्ष से अधिक नहीं चल पाई है और यह संस्कृति सभ्यता आगे भी अनंत काल तक चलती रहेगी क्योंकि कालांतर में पृथ्वी को बचाने और स्वयं मानव जाति के सुरक्षित रखने के लिए अंत में सभी को सनातन धर्म का पालन करना ही होगा ।

ब्रह्म ऋषि वाल्मीकि ब्रह्मा के 10 मानस पुत्रों में थे जिनके बचपन का नाम सत्य प्रकाश शर्मा कहा जाता है कालांतर में इन्होंने डकैती का धंधा अपना लिया था दैव योग से सप्त ऋषियों की दृष्टि इन पर पड़ी और उन्होंने वाल्मीकि के ज्ञान के चक्षु खोल दिए और वाल्मीकि ने उनके पैर पकड़ कर अपनी मुक्ति का मार्ग पूछा तो सप्त ऋषियों ने राम-राम जपने को कहा लेकिन जब वह ऐसा करने में सक्षम नहीं हुए तब उन्हें मरा मरा जपने को कहा और धीरे-धीरे मरा मरा कहते हुए वह राम नाम जपते हुए अपने समय के सबसे विद्वान और महान ब्रह्म ऋषि हो गए‌ और फिर नारद जी के प्रभाव से उन्होंने ऐसी रामायण की रचना की जो सारे संसार में राम कथा का प्रमाणिक स्रोत बन गई और दुनिया की हर भाषा में राम कथा लिखी गई जिसमें वाल्मीकि आदि कवि के नाम से प्रख्यात हुए और सभी ने उन्हें से राम कथा का अंश ग्रहण किया स्वयं गोस्वामी तुलसीदास जी ने उनके प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके वंदना की हैं यह बात और है कि देशकाल के प्रभाव से आज रामचरितमानस दुनिया में सबसे विख्यात पुस्तक हो चुकी है 

 वाल्मीकि के बारे में कहा जाता है 

** उल्टा नाम जपत जग जाना 
वाल्मीकि भए ब्रह्म समाना**

उन्हें आदि कवि इसलिए माना जाता है की वेद उपनिषद को छोड़कर लौकिक भाषा का पहला छंद उन्हींने लिखा था एक बार काम क्रीड़ा करते हुए क्रौंच पक्षी को बहेलिया द्वारा मारे जाते हुए देखकर उन्होंने शोक से विह्वल  होकर ब्रह्मा जी की प्रेरणा से अनायास ही विश्व का पहला श्लोक रच दिया

* मां निषाद प्रतिष्ठांत्वमगम: शाश्वती समा।
* यत्क्रोंच मिथुनादे कमवधी काममोहितं।

अर्थात हे क्रौंच ‌ पक्षी को मारने वाले बहेलिया तू इस धरती पर कभी भी सम्मान नहीं प्राप्त कर सकेगा क्योंकि तुमने काम क्रीड़ा में मगन क्रौंच पक्षी के जोड़े में से एक को मार दिया है ‌ और इतिहास साक्षी है कि तब से आज तक बहेलिया कहीं किसी भी समाज में प्रतिष्ठा को प्राप्त नहीं हो सका है ब्रह्म ऋषि वाल्मीकि उच्च कोटि के महान तपस्वी और ऋषि थे और बहुत ही सादे ढंग से जीवन व्यतीत करते थे उनके आश्रम में हजारों तपस्वी और बटुक रहा करते थे जब सीता मां को वनवास हुआ तो भगवान श्री राम ने सीता मां को धरती पर रखने का सबसे सुरक्षित स्थान वाल्मीकि का आश्रम ही पाया और वाल्मीकि की प्रेरणा और माता सीता के प्रयास से उनके पुत्र लव और कुश तत्कालीन पृथ्वी के सबसे बड़े महान योद्धा हुए जिन्होंने रावण वध करने वाले बड़े-बड़े वीरों हनुमान अंगद सुग्रीव विभीषण जामवंत नल नील  लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न को धराशाई कर दिया था ‌ वाल्मीकि जी इतने शुद्ध निष्कपट और सरल हृदय के थे कि उन्होंने सीता की शुद्धता को स्वयं अपनी शपथ देकर प्रमाणित किया था इसी से उनके महान चरित्र और गुना को समझा जा सकता है 

शरद पूर्णिमा केवल भारत के इतिहास का ही नहीं सारी धरती के इतिहास का सबसे स्वच्छ और शुद्ध दिन होता है और इसी दिन ब्रह्म ऋषि वाल्मीकि के उत्पन्न होने से इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है इस पूर्णिमा का व्रत धाम दर्शन अध्यात्म प्रकृति पर्यावरण से जुदा होने के कारण अद्भुत अद्वितीय है और यह दिखाता है कि भारत के लोग उसे समय प्रकृति पर्यावरण विज्ञान धाम दर्शन में सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर चुके थे जब सारी दुनिया मनुष्य बनने की ओर प्रयास कर रही थी ‌ सतयुग और त्रेता में ब्राह्मणों का काम पठन-पाठन जप तप करना था और क्षत्रियों का काम अपने बाहु बल से देश धर्म सभ्यता संस्कृति और ब्राह्मण सहित वैश्य और शूद्र की रक्षा करके सभ्यता का बचाव करना था वैश्य व्यापार करके देश को धन-धान्य से भर रहे थे तो शूद्र लोग सब की सेवा करते हुए अखंड और विराट भारत का निर्माण करने में योगदान दे रहे थे।

ध्यान रहे यह नियम द्वापर और कलयुग में धीरे-धीरे समाप्त होता गया क्योंकि पाप असत्य अन्याय कलयुग के प्रभाव से लगातार बढ़ता चला जा रहा है ‌ ध्यान रहे यह चारों वर्ण जन्म से नहीं कर्म पर आधारित हैं और इसकी गलत व्याख्या करके वर्तमान में दलित अनुसूचित जाति और जनजाति के नेता स्वयं अनुचित लाभ लेने के लिए अपने वर्ग की जनता को इसकी गलत व्याख्या कर रहे हैं जबकि बिल्कुल स्पष्ट कहा गया है सभी लोग जन्म से शुद्र होते हैं और कर्म सेवा द्विज अर्थात ब्राह्मण और क्षत्रिय होते हैं-
  ** जन्मना जायते शूद्र:कर्मणा द्विज उच्यते**

और यही सत्य है आज भी कम से एक दलित जज कलेक्टर मंत्री सांसद विधायक बन रहा है यही नियम उसे समय भी था यह दर्शन नहीं होता तो तमाम शूद्र और दलित ब्रह्म ऋषि नहीं बन पाते और द्रोणाचार्य भारद्वाज परशुराम जैसे लोग महानतम योद्धा नहीं बन पाते और वाल्मीकि तथा विश्वामित्र जैसे महानतम सम्राट ब्रह्म ऋषि नहीं बन सकते थे रविदास दादू मलूक दास शबरी काग भूसुंडी मतंग  गृत्समद ऋषि जैसे अनगिनत शूद्र कभी भी सम्राट क्षत्रिय और ब्राह्मणों के पूज्य नहीं हो सकते थे त्रेता द्वापर सतयुग में यह सभी लोग ईश्वर तक से सम्मान पाते थे बाकी की बात ही छोड़ दीजिए जबकि आज का एक अनुसूचित जाति जनजाति और दलित जाति का जज कलेक्टर सांसद विधायक मंत्री अपने ही जांच वालों को सामान कुर्सी पर बैठ कर अपने बराबर आधार नहीं कर सकता ना उनके साथ एक थाली में भोजन कर सकता है यही सच है विदेशी प्रभाव में लड़ा कर भारत को पूरी तरह से नष्ट किया जा रहा है

बंगाल की खाड़ी में बनेगा चक्रवात 25 से 31 अक्टूबर के बीच जौनपुर सहित पूरे भारत में होगी वर्षा -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 7017713978

 बंगाल की खाड़ी में बनेगा चक्रवात 25 से 31 अक्टूबर के बीच जौनपुर सहित पूरे भारत में होगी वर्षा -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 7017713978
[10/23, 7:57 AM] Dr  Dileep Kumar singh: विभिन्न प्रकार के मौसम के विरोधी चक्र अल नीनो के प्रभाव अरब सागर और बंगाल की खाड़ी एवं भारत के भूभाग में तापमान का अंतर हिमालय और ध्रुव प्रदेश में शीतल मौसम मिलकर अरब सागर में 24 तारीख को एक चक्रवात केरलम के दक्षिण पश्चिम में पैदा करेंगे जो धीरे-धीरे खिसक कर श्रीलंका होता हुआ तमिलनाडु की तरफ आ जाएगा और इस प्रबल चक्रवाती विक्षोभ से 25 अक्टूबर से 31 अक्टूबर के बीच भारत के अधिकांश भागों में वर्षा होगी जिसमें उत्तर प्रदेश और जौनपुर भी सम्मिलित रहेगा। 

24 तारीख को कर्नाटक केरल के तटवर्ती भाग में 25 तारीख को श्रीलंका तमिलनाडु आंध्र प्रदेश में 26 अक्टूबर को उड़ीसा और तेलंगाना तथा दक्षिण के पत्थरों पर 27 को बंगाल बिहार उड़ीसा झारखंड और 28 से 31 तक इसका प्रभाव मध्यम प्रदेश उत्तर प्रदेश जौनपुर और आगे भारत में बढ़ता चला जाएगा कर्नाटक केरल तमिलनाडु लक्षद्वीप अंडमान निकोबार पांडिचेरी उड़ीसा बंगाल मध्य प्रदेश के पूर्व बिहार के पूर्व झारखंड में मध्यम से भरी कहानी-कहानी बहुत भारी वर्षा और बचे हुए भागों में सामान्य मध्यम और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा इस चक्रवात से हो सकती है। 

अभी तापमान 27 तक लगभग स्थिर रहेगा और हवा पश्चिमी रहेगी उसके बाद उत्तर पूर्वी और फिर पूर्वी हवा में बदल जाएगी इस बीच तापमान 30 से 32 अधिकतम और 18 से 21 न्यूनतम बना रहेगा जो उत्तर भारत में सबसे सुहाना मौसम कहा जाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक भी 200 से 300 के बीच बनी रहेगी और पराबैंगनी किरणों की तीव्रता चार से सात रहेगी हवाओं की दिशा और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा कि यह चक्रवात कितना प्रबल होगा लेकिन यह निश्चित है कि वर्षा तेज हवाएं आंधी तूफान लगभग हर जगह रहेगा हमेशा की तरह सबसे पहले भविष्यवाणी हमारे केंद्र के द्वारा दी जा रही है अभी तक कहीं इसका कोई वर्णन नहीं है। 

अभी कल तिब्बत में भूकंप आने की हमारी भविष्यवाणी बिल्कुल सही हुई थी और एक हफ्ते में आधा दर्जन भूकंप जो हल्के मध्यम होंगे भारत सहित दुनिया के अनेक भागों में आएंगे  ताइवान और क्यूबा में भयानक पांचवीं श्रेणी का महा चक्रवात आएगा यूरोप में चलेगा भीषण गृह युद्ध दंगा फसाद मारकाट और अंत में भी विधर्मी दंगाई पश्चपाद पर आ जाएंगे इसी तरह कल भारत के T20 जीतने की भविष्यवाणी और तीन दो से श्रृंखला निर्णीत की भविष्यवाणी भी सच हो रही है। 

 इस वर्ष 23 सितंबर से ही ठंड का मौसम आने और 30 अक्टूबर से ही ठंड बढ़ने की भविष्यवाणी भी सही हो रही है भयंकर कीर्तिमान बनाने वाले जाड़े की भविष्यवाणी भी निश्चित सही होगी और इस वर्ष का जाड़ा लोग मरते समय तक याद रखेंगे यद्यपि भारत के लोगों को भूलने की बहुत भयानक बीमारी है इसलिए भूल भी सकते हैं 4 साल में कोरोना जैसी नकली महामारी को भी भूल गए।

Thursday, 22 October 2026

सब लोगों के लिए आवश्यक जानकारी के लिए हिंदीवर्ष के महीने

[10/22, 10:30 PM] Dileep Singh Rajput Jounpur: सब लोगों के लिए आवश्यक जानकारी के लिए हिंदीवर्ष के महीने ---
 
*चैत्र महीना पहले आया 
सब फसलों को घर में लाया 
चारों तरफ बसंत है छाया* 

*फिर बैशाख बसंत कहाया 
फल-फूलों से तरु लद आया
शीतल मंद पवन है छाया*

 *गर्मी का है जेठ महीना 
बैठे-बैठे चले पसीना
मुश्किल हो गया सबका जीना* 

*है आषाढ़ की अजब कहानी 
आया बादल बरसा पानी
 चारों तरफ मेघ और पानी* 

*सावन की तो बात निराली 
चारों तरफ बिछी हरियाली 
शिव भक्ति छाई मतवाली*

*भादो मूसलधार बहाता 
खेतों में सब चीज उगाता 
वर्षा और बाढ़ है लाता*

 *क्वार में मच्छर गाते हैं 
घर-घर जूड़ी फैलाते हैं
सर्दी खांसी और ज्वर में
बच्चे बूढ़े तप जाते हैं*

*कार्तिक की तो शोभा 
न्यारी लगती बहुत चांदनी  प्यारी
जाड़े में बसंत ऋतु न्यारी डॉ दिलीप कुमार सिंह*

*अगहन फसली मास कहाता 
ज्वार बाजरा घर में लाता
धन धान्य से घर भर जाता*

*पूस महीना ठंडा भारी 
थर थर कांपे नर अरु नारी
बर्फ सी हवा है हाहाकारी*

*ठंडी हवा माघ में चलती 
पाला पड़ता खेती जलती
शीत की मार झेलनी पड़ती*

*फागुन सबसे पीछे आता
होली का हुल्लड़ दिखलाता
छिनरों और छिनरियों को
यह परम प्रसन्न कर जाता* 

*भारत के हैं यही महीने 
बारी बारी आते हैं 
सुख-समृद्धि हम सब को देकर
सबको खुश कर जाते हैं*

आप सब को यह रोचक जानकारी अवश्य ही अच्छी लगी होगी 
धन्यवाद 

*डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह ज्योतिष  शिरोमणि,  मौसम विद ,न्याय विद ,अंतरिक्ष विज्ञानी एवं दार्शनिक ,एवं ज्योतिष रत्न वास्तु परा अपरा व गूढ़ विद्याओं के  पारंगत परा भौतिकी विद*
[10/22, 10:30 PM] Dileep Singh Rajput Jounpur: एकछोटासागॉव
     जिसमे पीपल की छॉव
गॉव सारा खतम हो गया
     क्या से क्या     हो   गया
सारे रिश्ते  खतम
     आये पैसों पे हम
दिल का रिश्ता खतम हो गया
क्यासेक्याहोगया ?
    कजरी चैता खतम
फागुनी भी खतम
    और दशहरा भी गुम हो गया
क्यासेक्याहोगया ?
भागे हमसब शहर
      खोये पैसो मे हम
सपनों मे ही तो जीवन गया
क्यासेक्याहोगया  ?
ठंडी शीतल बयार
     महक फूलों की हाय
*अपनापन भी गया* 
क्यासेक्याहोगया  ? 
ऊपरी सब खुशी 
   ऊपरी है हंसी
नकली सब कुछ यहॉ
*धर्म सारा  तो बस*
पैसा ही होगया
हाय भारत मेरा
इंडिया  हो गया?
क्यासेक्याहोगया* *डॉ दिलीप कुमार सिंह एम ए टी एच डी हिंदी ज्योतिष और ज्योतिर्विज्ञान*  ? !

Wednesday, 21 October 2026

***देसी कुतिया मराठी बोल**#आधा तीतर आधा बटेर#: मेरा जूता है जापानी ये पतलून इंग्लिश तानी फिर सर पर लाल टोपी रुसी फिर भी दिल है हिंदुस्तानी :

मौसम की भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 
आज का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 19 डिग्री सेल्सियस रहेगा हल्के बादलों के बीच वर्षा की कोई संभावना नहीं है हवा की दिशा उत्तरी पश्चिमी और गति 5 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 से 250 के बीच रहेगा और पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 4 से 7 के बीच रहेगी जबकि सापेक्षिक आर्द्रता 50 से 80% के बीच रहेगी हवा की दिशा उत्तरी पश्चिमी रहेगी जो बाद में पश्चिमी हो जाएगी 

कल के मौसम के बारे में अनुमान है की मौसम धूप युक्त और सुहावना रहेगा अधिकतम तापमान 31 और न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस के साथ काफी सुहाना और ठंडा रहेगा ।रहेगा हल्के बादल भी रहेंगे वर्षा की कोई संभावना नहीं है वायु गुणवत्ता सूचकांक 250 से 300 के बीच बना रहेगा जबकि पराबैंगनी किरणों की तीव्रता भी 4 से 7 के बीच रहेगी

सापेक्षिक आर्द्रता 50 से 50% के बीच 150 से 250 के बीच बना रहेगा जबकि पराबैंगनी किरणों की तीव्रता भी 4 से 7 के बीच रहेगी सापेक्षिक आर्द्रता 50 से 50% के बीच रहेगी जबकि वायु की गति 5 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी इस बीच सूर्योदय सुबह 5:30
पर और सूर्यास्त सायंकाल 6:00 बजे होगा

दक्षिण भारत में अनेक स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होगी बाकी भारत शुष्क रहेगा हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर के बीच केरल के तटों पर एक चक्रवात का जन्म होगा जिसे एक सप्ताह बाद भारत के अधिकांश भागों में फिर वर्षा होगी l
इस प्रकार ईश्वर की कृपा और आप सब की शुभकामनाओं से 50 वर्ष से हमारा अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 99%  सच्चाई की दर से लाखों लाख भविष्यवाणी करता आ रहा है जो समग्र ब्रह्मांड खेल राजनीतिक अर्थ धर्म दर्शन विज्ञान सब के बारे में है

 अभी कल के मैच के ईश्वरीय चमत्कार को छोड़कर ना होने की भविष्यवाणी सही हुई खेल राजनीति की सारी बातें सही हुई 2028 तक योगी जी के प्रधानमंत्री बनने की बात की लोग राह देख रहे हैं अगले वर्ष योगी के है जाने की और अरब देशों के भयानक विनाश की भविष्यवाणी भी सही होगी आजादी के बाद लाल बहादुर शास्त्री को छोड़कर सारे प्रधानमंत्री द्वारा मुस्लिम विकास की भविष्यवाणी भी सच हो गई है कल्याण सिंह लाल बहादुर शास्त्री सुभाष चंद्र बोस भाभा और इन जैसे सच्चे लोगों की हत्या करना या डरा धमका कर शांत करना विदेशी इशारों वाली भविष्यवाणी भी बिल्कुल सही हुई है इस तरह आप जुड़े रहें सत्य चीजें पढ़ते रहें

आज से 5 महीने पहले मैंने एक और भविष्यवाणी किया था कि अक्टूबर 2026 से यूरोप अमेरिका और भारत में बसे मुसलमान हत्या आगजनी लूटपाट कत्लेआम लेआम बलात्कार हिंसा का ऐसा शैतानी राक्षसी खेल खेलेंगे की दुनिया हाहाकार कर उठेगी सबसे ज्यादा प्रचंड प्रहार उन देशों पर होगा जिन्होंने भारत की तरह दया करके मुसलमानों को अपने देश में शरण दिया है इसमें यूरोप अमेरिका भारत फ्रांस जर्मनी अल्बानिया बेल्जियम नीदरलैंड प्रमुख होंगे पूरी दुनिया में एक निर्णायक युद्ध तुर्क मुस्लिम मुसलमान और गैर मुसलमान के बीच में होगा जिसमें मुसलमानों की पराजय और उनका विनाश निश्चित है अब देखना है यह भविष्यवाणी कितना सही होती है दिनांक 15 अक्टूबर 2026
[10/21, 7:41 AM] Dileep Singh Rajput Jounpur: वोकल फार लोकल और स्वदेशी के क्रम में आज से लेकर हमेशा के लिए अनिवार्य नियम संसद से पारित किया जाए की सभी देसी और स्थानीय उत्पादन का प्रयोग करना सभी प्रधानमंत्री राष्ट्रपति मंत्री संसाधन विधायकों और प्रथम ब्रिटिश श्रेणी के अधिकारियों व्यापारियों धन कुबेर लोगों और समस्त सरकारी तंत्रों के लिए अनिवार्य किया जाए और विदेशी सामान खरीदने और उसका उपयोग करने वाले लोगों को आजीवन कारावास से लेकर ॅमृत्यु दंड की सजा का प्रावधान किया जाए और यदि कोई भी दुकानदार व्यापारी कोई भी विदेशी सामान बेचता हुआ मिले तो उसको भी यही सजा दिया जाए इससे एक वर्ष में ही चारों ओर स्वदेशी उत्पादों का बोलबाला हो जाएगा और विदेशी सारे सामान अपने आप समाप्त हो जाएंगे

 तब भी एक बड़ा प्रश्न बचा रहेगा कि विदेशी भाषा और विदेशी नीतियों पर बने नियम कानून का और विदेशी प्रोटोकॉल का क्या होगा और भारत की रक्षा प्रणाली का क्या होगा जो 99% विदेशी आयात पर आधारित है और सभी नकली सनातनी लोगों का राजनेताओं का सांसदों विधायकों मंत्रियों का अधिकारियों का धन कुबेर और माफिया लोगों का धर्म गुरु लोगों का क्या होगा जो घर के अंदर से घर के बाहर 99% विदेशी सामानों का उपयोग सामने और चोरी छुपे करते हैं यहां तक की विदेशी महिलाएं और पुरुष भी उनकी प्राथमिकता होते हैं 

इसलिए आप लोग सरकारी तंत्र के फालतू वाहियात ऊल  जलूल स्वदेशी हिंदी हिंदी हिंदुस्तान रामराज जैसी चीजों पर ध्यान न दीजिए अपने आवश्यकता और समर्थ के अनुसार खरीददारी कीजिए जब चारों तरफ विदेशी शब्दों विदेशी तारों विदेशी विज्ञापनों का बोलबाला है और देश के शीर्ष राजनेता जानबूझकर 50% अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं जैसे गुड मॉर्निंग बनारस पढ़ेगा इंडिया बढ़ेगा इंडिया बोलेगा इंडिया खेलेगा इंडिया अमूल दूध पीता है इंडिया अरे फार्म पर फॉर्म गुड मॉर्निंग गुड इवनिंग तब आम जनता को इस चक्कर में पढडने की आवश्यकता ही नहीं है
[संघ से जुड़ा कोई व्यक्ति बुद्धिजीवी या नेता बताये की राम राज्य हिंदी हिंदू हिंदुस्तान और स्वदेशी के प्रतीक वाले संघ के साथ आर एस एस का पुछल्ला क्यों जुड़ा हुआ है क्यों भारतीय जनता दल की जगह भारतीय जनता पार्टी है और क्यों भारत के सभी पार्टियों दल की जगह पार्टी शब्द का प्रयोग करती है और क्यों न्यासा शब्द की जगह ट्रस्ट को जबरदस्ती चलाया जाता है और न्यास परिषद की जगह श्राइन बोर्ड क्यों लिखा जाता है 

कुल मिलाकर एक बात समझ लो जितने भी सनातनी धर्म संगठन धर्मगुरु संत महंत आचार्य कथावाचक राजनेता प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री राज्यपाल नेता धन कुबेर और माफिया तथा पंचर चाप से लेकर राष्ट्रपति प्रधानमंत्री कार्यालय में काम करने वाले एवं अभिनेता है किसी का भी अंग्रेजी के बिना और काले अंग्रेज बन चलने वाला नहीं है यही भारत का अंतिम सच है क्योंकि यहां का व्यक्ति यह मान ही नहीं सकता कि बिना अंग्रेजी के भारत का विकास हो सकता है बिना अंग्रेजी स्कूल में पढ़े काले अंग्रेज बन अंग्रेजी सभ्यता संस्कृति को अपने अंग्रेजी नए वर्ष को मनाई हैप्पी क्रिसमस कहे भारत में रहकर आगे बढ़ा जा सकता है जब तक यह काला सच सबके दिल के अंदर घर-कर के बैठा रहेगा.

तब तक भारत के सभी राजनेता और भारत की सनातनी जनता सारे राजनीतिक दल और सभी सनातनी संगठन जिसमें प्रमुख है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हंसी का उपवास का अपमान और कलंक का पत्र बना रहेगा बुरा लगे या भला पर अंतिम सच यही है मां और अंतरात्मा से सभी मैकाले के मानस पुत्र विदेशीकृत दास और काले अंग्रेज बनकर रह गए हैं जबकि दुनिया के सारे विकसित देश और विश्व की महान शक्तियां अपने देश की सभ्यता संस्कृति भाषा वेशभूषा के आधार पर ही आगे बढ़ी है और भारत को पांच मेल खिचड़ी साधु कड़ी बनाकर पूरे विश्व में हंसी और अपमान का पत्र बना दिया गया है जिसको कहते हैं **देसी कुतिया मराठी बोल**
#आधा तीतर आधा बटेर#
: मेरा जूता है जापानी ये पतलून इंग्लिश तानी फिर सर पर लाल टोपी रुसी फिर भी दिल है हिंदुस्तानी :

जब यह अधकचरा लोग खत्म होंगे और कोई सच्चा सनातनी स्वदेशी नेता आएगा तभी इसमें सुधार होगा।

वैसे एक बात और याद दिला दूं जो बड़ा करवा नंगा और काला सच है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 90% लोग हिंदी कम अंग्रेजी धुआंधार बोलते हैं मोदी जी की तरह लेकिन पूरी तरह अंग्रेजी बोल नहीं पाते और पूरा अंग्रेजी बोलने पर उन्हें समझने वाला भी कोई नहीं है इन दो कर्म से उन्हें हिंदी और क्षेत्रीय भाषाएं बोलना पड़ता है तो समझ में नहीं आता कि कैसा भारत बना रहे हैं यह लोग 

वैसे अंग्रेजी प्रेमी काले अंग्रेज बने भारत के लोगों को मैं याद दिला दूं कि चीन दुनिया की सबसे बड़ी विश्व शक्ति है खेल सकती है अंतरिक्ष शक्ति है आर्थिक शक्ति है और सैन्य शक्ति है वहां उधर के लोग अंग्रेजी बोलने के लिए लिए जाते हैं यही हाल जापान कोरिया जर्मनी फ्रांस स्पेन पुर्तगाल ब्राज़ील और अब के देश का है जहां कोई अंग्रेजी भाषा नहीं अंग्रेजी संविधान नहीं अंग्रेजी नियम कानून नहीं अंग्रेजी सभ्यता संस्कृति नहीं है क्योंकि भारत के लोग तो यह भी नहीं जानते कि बिना अंग्रेजी बोले ही दुनिया के सारे देश विश्व की शक्ति बने हैं - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

Tuesday, 20 October 2026

विजयदशमी (दशहरा, आयुध-पूजा)

*विजयदशमी (दशहरा, आयुध-पूजा)
विशेष मैं प्रारंभ में ही बता देना चाहता हूं कि सामान्य जनता अस्त्र-शस्त्र हाथ में लेकर केवल इतना ही कहे की है अस्त्र-शस्त्रों के देवता आदि देव भगवान महादेव मैं आपके अस्त्र-शस्त्र धारण करके उनकी पूजा करता हूं और अपने देश और धर्म की सुरक्षा की याचना करता हूं इतना ही शस्त्र पूजा के लिए बहुत है बाकी विधि विधान बड़े और ज्ञानी लोगों के लिए है 
          आश्विन (क्वार) मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजय दशमी या दशहरे के नाम से मनाया जाता है। भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। इसीलिये इस दशमी को विजयादशमी के नाम से जाना जाता है। दशहरा वर्ष की तीन अत्यन्त शुभ तिथियों में से एक है, अन्य दो हैं चैत्र शुक्ल की एवं कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा। इस वर्ष यह शुभ पर्व 20 अक्टूबर मंगलवार के दिन मनाया जाएगा।

इसी दिन लोग नया कार्य प्रारम्भ करते हैं, शस्त्र-पूजा की जाती है। प्राचीन काल में राजा लोग इस दिन विजय की प्रार्थना कर रण-यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे। इस दिन जगह-जगह मेले लगते हैं। रामलीला का आयोजन होता है। रावण का विशाल पुतला बनाकर उसे जलाया जाता है। दशहरा अथवा विजयदशमी भगवान राम की विजय के रूप में मनाया जाए अथवा दुर्गा पूजा के रूप में, दोनों ही रूपों में यह शक्ति-पूजा का पर्व है, शस्त्र पूजन की तिथि है। हर्ष और उल्लास तथा विजय का पर्व है। भारतीय संस्कृति वीरता की पूजक है, शौर्य की उपासक है। व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है। दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों- काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी के परित्याग की सद्प्रेरणा प्रदान करता है।
शस्त्र पूजन विधि एवं मंत्र
सायंकाल में नित्यकर्म से निवृत्त होकर सभी प्रकार के अस्त्र-शस्त्रादि को एकत्र करके हाथ में जलपुष्पादि के साथ अपना नाम, गोत्रादि के साथ संकल्प करें, यथा-''ममक्षेमारोग्य आदि सिद्धयर्थं यात्रायांविजय सिद्धयर्थं गणपतिमातृका श्रीराम, शिवशक्ति व सूर्यादि देवता अपराजिता शमीपूजन-अस्त्र-शस्त्रादि पूजनानि करिष्ये।' 

पुष्पाक्षत लेकर स्वऽस्तिवाचन, गणेश पूजन तथा शक्ति-मंत्र, खड्ग-मंत्र एवं अग्नि यंत्र-मंत्र से पुष्पाक्षत एवं तिलक लगाकर सत्कार पूजन करने के पश्चात् अपराजिता पूजन, भगवान राम, शिव, शक्ति (दुर्गा), गणेश तथा सूर्यादि देवताओं का पूजन करके आयुध-अस्त्र-शस्त्रों (हथियारों) की पूजा इस प्रकार करें- 

शक्ति मंत्र: शक्तिस्त्वं सर्वदेवानां गुहस्य च विशेषत:। 
शक्ति रूपेण देवि त्वं रक्षां कुरु नमोऽस्तुते॥ 

अग्नि यंत्र-मंत्र: अग्निशस्त्र नमोऽस्तुदूरत: शत्रुनाशन। 
शत्रून्दहहि शीघ्रं त्वं शिवं मे कुरु सर्वदा॥

खड्ग मंत्र: इयं येन धृताक्षोणी हतश्च महिषासुर:। 
ममदेहं सदा रक्ष खड्गाय नमोऽस्तुते॥

सभी प्रकार के अस्तशस्त्रो को तिलक लगाकर पुष्प अर्पण कर देवी अपराजिता की आरती करनी चाहिये।

दशहरे का महत्त्व
भारत कृषि प्रधान देश है इसलिए जब किसान अपने खेत में सुनहरी फसल उगाकर अनाज रूपी संपत्ति घर लाता है तो उसके उल्लास और उमंग का पारावार नहीं रहता। इस प्रसन्नता के अवसर पर वह भगवान की कृपा को मानता है और उसे प्रकट करने के लिए वह उसका पूजन करता है। समस्त भारतवर्ष में यह पर्व विभिन्न प्रदेशों में विभिन्न प्रकार से मनाया जाता है। महाराष्ट्र में इस अवसर पर सिलंगण के नाम से सामाजिक महोत्सव के रूप में भी इसको मनाया जाता है। सायंकाल के समय पर सभी ग्रामीणजन सुंदर-सुंदर नव वस्त्रों से सुसज्जित होकर गाँव की सीमा पार कर शमी वृक्ष के पत्तों के रूप में 'स्वर्ण' लूटकर अपने ग्राम में वापस आते हैं। फिर उस स्वर्ण का परस्पर आदान-प्रदान किया जाता है।

विजय पर्व के रूप में दशहरा
दशहरे का उत्सव शक्ति और शक्ति का समन्वय बताने वाला उत्सव है। नवरात्रि के नौ दिन जगदम्बा की उपासना करके शक्तिशाली बना हुआ मनुष्य विजय प्राप्ति के लिए तत्पर रहता है। इस दृष्टि से दशहरे अर्थात विजय के लिए प्रस्थान का उत्सव का उत्सव आवश्यक भी है।

भारतीय संस्कृति सदा से ही वीरता व शौर्य की समर्थक रही है। प्रत्येक व्यक्ति और समाज के रुधिर में वीरता का प्रादुर्भाव हो कारण से ही दशहरे का उत्सव मनाया जाता है। यदि कभी युद्ध अनिवार्य ही हो तब शत्रु के आक्रमण की प्रतीक्षा ना कर उस पर हमला कर उसका पराभव करना ही कुशल राजनीति है। भगवान राम के समय से यह दिन विजय प्रस्थान का प्रतीक निश्चित है। भगवान राम ने रावण से युद्ध हेतु इसी दिन प्रस्थान किया था। मराठा रत्न शिवाजी ने भी औरंगजेब के विरुद्ध इसी दिन प्रस्थान करके हिन्दू धर्म का रक्षण किया था। भारतीय इतिहास में अनेक उदाहरण हैं जब हिन्दू राजा इस दिन विजय-प्रस्थान करते थे।

इस पर्व को भगवती के 'विजया' नाम पर भी 'विजयादशमी' कहते हैं। इस दिन भगवान रामचंद्र चौदह वर्ष का वनवास भोगकर तथा रावण का वध कर अयोध्या पहुँचे थे। इसलिए भी इस पर्व को 'विजयादशमी' कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि आश्विन शुक्ल दशमी को तारा उदय होने के समय 'विजय' नामक मुहूर्त होता है। यह काल सर्वकार्य सिद्धिदायक होता है। इसलिए भी इसे विजयादशमी कहते हैं।

ऐसा माना गया है कि शत्रु पर विजय पाने के लिए इसी समय प्रस्थान करना चाहिए। इस दिन श्रवण नक्षत्र का योग और भी अधिक शुभ माना गया है। युद्ध करने का प्रसंग न होने पर भी इस काल में राजाओं (महत्त्वपूर्ण पदों पर पदासीन लोग) को सीमा का उल्लंघन करना चाहिए। दुर्योधन ने पांडवों को जुए में पराजित करके बारह वर्ष के वनवास के साथ तेरहवें वर्ष में अज्ञातवास की शर्त दी थी। तेरहवें वर्ष यदि उनका पता लग जाता तो उन्हें पुनः बारह वर्ष का वनवास भोगना पड़ता। इसी अज्ञातवास में अर्जुन ने अपना धनुष एक शमी वृक्ष पर रखा था तथा स्वयं वृहन्नला वेश में राजा विराट के यहँ नौकरी कर ली थी। जब गोरक्षा के लिए विराट के पुत्र धृष्टद्युम्न ने अर्जुन को अपने साथ लिया, तब अर्जुन ने शमी वृक्ष पर से अपने हथियार उठाकर शत्रुओं पर विजय प्राप्त की थी। विजयादशमी के दिन भगवान रामचंद्रजी के लंका पर चढ़ाई करने के लिए प्रस्थान करते समय शमी वृक्ष ने भगवान की विजय का उद्घोष किया था। विजयकाल में शमी पूजन इसीलिए होता है।

दशहरे पर करने के कुछ विशेष उपाय

-- दशहरे के द‌िन नीलकंठ पक्षी का दर्शन बहुत ही शुभ होता है। माना जाता है क‌ि इस द‌िन यह पक्षी द‌िखे तो आने वाला साल खुशहाल होता है।

--  दशहरा के द‌िन शमी के वृक्ष की पूजा करें। अगर संभव हो तो इस द‌िन अपने घर में शमी के पेड़ लगाएं और न‌ियम‌ित दीप द‌िखाएं। मान्यता है क‌ि दशहरा के द‌िन कुबेर ने राजा रघु को स्वर्ण मुद्राएं देने के ल‌िए शमी के पत्तों को सोने का बना द‌िया था। तभी से शमी को सोना देने वाला पेड़ माना जाता है।

-- रावण दहन के बाद बची हुई लकड़‌ियां म‌िल जाए तो उसे घर में लाकर कहीं सुरक्ष‌ित रख दें। इससे नकारात्मक शक्‍त‌ियों का घर में प्रवेश नहीं होता है।

-- दशहरे के द‌िन लाल रंग के नए कपड़े या रुमाल से मां दुर्गा के चरणों को पोंछ कर इन्‍हें त‌िजोरी या अलमारी में रख दें। इससे घर में बरकत बनी रहती है।

आप सभीको विजय दशमी की हार्दिक शुभकामनायें

मौसम की भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

मौसम की भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 
आज का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 19 डिग्री सेल्सियस रहेगा हल्के बादलों के बीच वर्षा की कोई संभावना नहीं है हवा की दिशा उत्तरी पश्चिमी और गति 5 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 से 250 के बीच रहेगा और पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 4 से 7 के बीच रहेगी जबकि सापेक्षिक आर्द्रता 50 से 80% के बीच रहेगी हवा की दिशा उत्तरी पश्चिमी रहेगी जो बाद में पश्चिमी हो जाएगी 

कल के मौसम के बारे में अनुमान है की मौसम धूप युक्त और सुहावना रहेगा अधिकतम तापमान 31 और न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस के साथ काफी सुहाना और ठंडा रहेगा ।रहेगा हल्के बादल भी रहेंगे वर्षा की कोई संभावना नहीं है वायु गुणवत्ता सूचकांक 250 से 300 के बीच बना रहेगा जबकि पराबैंगनी किरणों की तीव्रता भी 4 से 7 के बीच रहेगी

सापेक्षिक आर्द्रता 50 से 50% के बीच 150 से 250 के बीच बना रहेगा जबकि पराबैंगनी किरणों की तीव्रता भी 4 से 7 के बीच रहेगी सापेक्षिक आर्द्रता 50 से 50% के बीच रहेगी जबकि वायु की गति 5 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी इस बीच सूर्योदय सुबह 5:30
पर और सूर्यास्त सायंकाल 6:00 बजे होगा

दक्षिण भारत में अनेक स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होगी बाकी भारत शुष्क रहेगा हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर के बीच केरल के तटों पर एक चक्रवात का जन्म होगा जिसे एक सप्ताह बाद भारत के अधिकांश भागों में फिर वर्षा होगी l
इस प्रकार ईश्वर की कृपा और आप सब की शुभकामनाओं से 50 वर्ष से हमारा अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 99%  सच्चाई की दर से लाखों लाख भविष्यवाणी करता आ रहा है जो समग्र ब्रह्मांड खेल राजनीतिक अर्थ धर्म दर्शन विज्ञान सब के बारे में है

 अभी कल के मैच के ईश्वरीय चमत्कार को छोड़कर ना होने की भविष्यवाणी सही हुई खेल राजनीति की सारी बातें सही हुई 2028 तक योगी जी के प्रधानमंत्री बनने की बात की लोग राह देख रहे हैं अगले वर्ष योगी के है जाने की और अरब देशों के भयानक विनाश की भविष्यवाणी भी सही होगी आजादी के बाद लाल बहादुर शास्त्री को छोड़कर सारे प्रधानमंत्री द्वारा मुस्लिम विकास की भविष्यवाणी भी सच हो गई है कल्याण सिंह लाल बहादुर शास्त्री सुभाष चंद्र बोस भाभा और इन जैसे सच्चे लोगों की हत्या करना या डरा धमका कर शांत करना विदेशी इशारों वाली भविष्यवाणी भी बिल्कुल सही हुई है इस तरह आप जुड़े रहें सत्य चीजें पढ़ते रहें

आज से 5 महीने पहले मैंने एक और भविष्यवाणी किया था कि अक्टूबर 2026 से यूरोप अमेरिका और भारत में बसे मुसलमान हत्या आगजनी लूटपाट कत्लेआम लेआम बलात्कार हिंसा का ऐसा शैतानी राक्षसी खेल खेलेंगे की दुनिया हाहाकार कर उठेगी सबसे ज्यादा प्रचंड प्रहार उन देशों पर होगा जिन्होंने भारत की तरह दया करके मुसलमानों को अपने देश में शरण दिया है इसमें यूरोप अमेरिका भारत फ्रांस जर्मनी अल्बानिया बेल्जियम नीदरलैंड प्रमुख होंगे पूरी दुनिया में एक निर्णायक युद्ध तुर्क मुस्लिम मुसलमान और गैर मुसलमान के बीच में होगा जिसमें मुसलमानों की पराजय और उनका विनाश निश्चित है अब देखना है यह भविष्यवाणी कितना सही होती है दिनांक 15 अक्टूबर 2026