Saturday, 28 February 2026

महापर्व होली का संपूर्ण वैज्ञानिक ‌ और धार्मिक विवेचन डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशकप्रस्तावना

: महापर्व होली का संपूर्ण वैज्ञानिक ‌ और धार्मिक विवेचन 
 डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक

प्रस्तावना 

महापर्व होली वैदिक काल से उपनिषद रामायण महाभारत से आज तक भारत के प्राचीनतम महापर्वों  में से एक है भारत के सबसे बड़े महापर्व दीपावली दशहरा रक्षाबंधन और होली में से होली इस समय सर्वाधिक लोकप्रिय महापर्व बन गया है होली का महापर्व हर वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा के दिन पड़ता है इसी दिन होलिका दहन होता है और अगले दिन लोग रंग भरी होली अबीर गुलाल फूलों की ओर भस्म की होली खेलते हैं लेकिन प्राचीन काल में गीले रंग की ‌‌ कीचड़ और डीजल मोबिल और गंदी चीजों तथा गोबर की होली का कहीं कोई अस्तित्व नहीं था।

होली मनाए जाने का कारण 

होली मनाये जाने के विभिन्न कारण है जिसमें पहला कारण है कि भगवान शिव को उनके अखंड समाधि से विचलित करने के कारण कामदेव ने बहुत ही सुंदर कामुक वातावरण पैदा कर अपनी पत्नी रति के साथ शिवजी को समाधि से जागृत कर दिया या और शिवजी ने तीसरा नेत्र खोल कर कामदेव को भस्म कर दिया जिससे पूरे विश्व में हाहाकार मच गया तब उन्होंने बिना शरीर के कामदेव को जीवन प्रदान किया होली मनाए जाने का यह एक प्रमुख कारण है दूसरा कारण है होलिका द्वारा प्रहलाद को जलाकर मारने का प्रयास जिसमें प्रहलाद भगवान श्री हरि विष्णु की कृपा से जीवित बच गए और होलिका भस्म हो गई उसका वरदान भी उसे नहीं बचा पाया इसलिए होली मनाई जाती है।

होली महापर्व से जुड़ी एक कथा ढुंढा नाम की राक्षसी की है जिसे शिवजी ने अमरत्व का वरदान दिया था उसने बच्चों पर भयंकर अत्याचार किया तब सम्राट रघु ने ब्रह्म ऋषि  वशिष्ठ की सलाह पर बच्चों से नाच गाना शोरगुल और हुड़दंग मचाकर लकड़ी उपले इकट्ठा करके उसमें अन्य जड़ी बूटियां डालकर मंत्र पढ़कर उसे जलाने का उपाय बताए जिससे ढुंढा नाम की राक्षसी का विनाश हो गया होली की की वर्तमान प्रथा ‌ और होलिका दहन अधिक से अधिक इसी पर आधारित है।

‌ होली शब्द का अर्थ और इसका ‌ वैज्ञानिक और  मनोवैज्ञानिक  कारण 

प्राचीन होलिका पर्व और वर्तमान स्वरूप वास्तव में होली वास्तव में होलका का शब्द से निकला है होलका का अर्थ कच्चा और आधा पक्का अन्न होता है होलिका दहन में आज भी अन्न को दहन करने की परंपरा तभी से चली आ रही है लेकिन वास्तव में होली का महापर्व ऋतु परिवर्तन का पर्व है जिसमें गर्मी आने वाली होती है और ठंडी विदा होने वाली होती है ऋतु परिवर्तन के संक्रमण काल में जब लोग प्राचीन काल में खाली रहते थे तब होली का पर्व शुरू हुआ इसे प्राचीन काल में अन्न का महापर्व और काम महोत्सव भी कहा जाता था इस समय लोगों का उत्साह उमंग और उत्तेजना चरम पर होती है यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो चुका है और होलिका पर्व के बाद यह तनाव उत्तेजना काफी हद तक दूर हो जाता है मनोवैज्ञानिक रूप से हर व्यक्ति होली में सहभागिता करके काफी हद तक अपने अकेलेपन की भावना से मुक्त हो जाता है उसे लगता है कि उसका भी संसार में कोई है।

‌ रंग वाली होली अकबर के समय से प्रारंभ हुई 

यह असत्य पर सत्य की अंधकार पर प्रकाश की और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक है  होली मनाने के बाद ही अन्न कटना शुरू हो जाता था क्योंकि फसलें तैयार हो जाती हैं 8 दिन का होलाष्टक पूरी तरह आराम करने का आमोद प्रमोद का और उमंग उत्साह का दिन होता है जहां तक होली पर रंग की बात है तो उसमें अबीर गुलाल सूखे रंग का प्रयोग होता था‌ मुझे वातावरण में शुद्ध हो जाता था और वातावरण में पहले हुए विषाणु जीवाणु कीटाणु रोगाणु नष्ट हो जाते थे लेकिन गीले रंग का प्रयोग अकबर के समय में उसकी रंगीन कामुक प्रकृति को पूरा करने के कारण शुरू हुआ मेवाड़ और विजयनगर की राजधानी हंपी में 16वीं शताब्दी के चित्रों में इसका वर्णन मिलता है रीतिकाल में भी रंग वाली होली का वर्णन मिलता है इसके पहले कहीं गीले रंग का वर्णन नहीं मिलता है।

होली पर्व के समय की प्रकृति और वातावरण 

वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो होली का महापर्व बसंत ऋतु में आता है इस समय संपूर्ण वातावरण फल फूल फसलों से भरा होता है और वातावरण में आम के बौर एक बहुत ही तीखी और कामोत्तेजक गंध छोड़ते हैं और सभी पेड़ पौधे पुष्पों से लदे रहते हैं शीतल मंद सुगंधित मलय पर्वत की हवा बहती हैं चारों ओर का वातावरण बहुत ही सुंदर सम्मोहक उत्तेजक होता है। ना अधिक ठंड और ना अधिक गर्म मौसम होता है यह समय प्रकृति प्रजनन और वंश वृद्धि के लिए सर्वोत्तम होता है इसके साथ-साथ चारों तरफ प्रकृति में अद्भुत छटा होती है और फसलों के पक जाने की खुशी भी रहती है होलिका दहन होने के कारण वातावरण में व्याप्त विषाणु कीटाणु रोगाणु जीवाणु नष्ट हो जाते हैं और विभिन्न जड़ी बूटियां और फसलों के आग में जलाने से उत्पन्न सुगंध संपूर्ण वातावरण को संतुलित करके हानिकारक प्रभाव को नष्ट कर देती है और वातावरण में फैले विषैले वातावरण और जहरीले जीव जंतुओं को भी बिलों के अंदर छुप जाने को बाध्य करती हैं इस प्रकार हर महापर्व की तरह होली का महापर्व भी पूरी तरह विज्ञान सम्मत प्रकृति और पर्यावरण पर आधारित है तेल और उबटन (सरसों का बुकवा)लगाने से शरीर की हड्डी नस नाड़ियां सभी स्वस्थ हो जाती हैं।

गीले रंगों का प्रयोग कब से शुरू हुआ 

गहराई से देखने पर पता चलता है कि गीले रंग का प्रयोग मुगलों के काल में शुरू हुआ जिसे अकबर ने खूब फैलाया अकबर का मीना बाजार तो जगत विख्यात है ही बाबर ने इस त्यौहार को मदिरा काम वासना से जोड़कर इस महापर्व को विकृत किया और जनता तथा राजपूतों को मांस मदिरा और नशे का अभ्यस्त कर दिया कालांतर में होली मांस मदिरा जुआ और अश्लीलता का पर्व बन गया और आज तक इसी रूप में चल रहा है इसको गंदा गंदा अश्लील और मैथुनी करने में भोजपुरी फिल्मों और बालीवुड फिल्मों का बड़ा हाथ है और अमिताभ बच्चन पवन सिंह हनी सिंह जैसे रसिक लोगों ने इसको गंदगी के रूप में बदलने में सबसे बड़ा योगदान दिया ।

आज तो लोग कीचड़ तेल मोबाइल यहां तक की मल मूत्र और गंदे चीजों गोबर  इत्यादि फेंक कर होली मनाते हैं और इसके रूप को विकृत और वीभत्स कर दिए हैं रसिक रंगीन मिजाज लोग होली को बिल्कुल नंगा कर दिए हैं और इसमें रसिक रंगीन मिजाज की महिलाएं सबसे आगे हैं जो अपने धर्म से गिरकर अधर्म का कार्य करती हैं भगवान श्री कृष्ण से गीले रंगों को जोड़ना ठीक उसी तरह की मूर्खता है जिस तरह से बौधायन के प्रमेय को पाइथागोरस का प्रमेय कहना । अश्लीलता और विकृत रूप मांस मदिरा का प्रचार प्रसार नशे की चीजें यह सभी समाज के गंदे प्रभावशाली लोगों की देन है होली में ऐसा पहले कुछ नहीं था अब धीरे-धीरे लोगों में चेतना लौट रही है और होली के गंदे काम उत्तेजक और विकृत रूप से लोग दूर है रहे हैं जिस तरह से मुगल काल के पहले राधा का कोई अस्तित्व नहीं है इस तरह होली में रंगों का अस्तित्व ही मुगल काल के पहले नहीं है पहले केवल अबीर गुलाल और सूखे रंग का फूलों प्रयोग होता था यह प्रामाणिक रूप से बिल्कुल सत्य है

होली का वास्तविक स्वरूप 

प्राचीन काल में कहीं भी होली में आज की होली का कोई भी अंश नहीं था पहले लोग अबीर गुलाल हल्दी और फूलों की होली खेलते थे जिससे वातावरण पूरी तरह शुद्ध हो जाता था लोगों में रोग बीमारियां दूर हो जाती थी समाज में सद्भावना और सौभाग्य तथा सदाचार की भावना की वृद्धि होती थी और इससे वातावरण के फैले हुए सूक्ष्म जीवाणु विषाणु रोगाणु नष्ट हो जाते थे और वातावरण सुगंधित हो जाता था अग्नि में दहन करते समय उसमें लकड़ी उपले और विभिन्न प्रकार के जड़ी बूटियां अन्न के जलने से वातावरण सुगंधित और दिव्य हो जाता था मुगलों के आगमन के पहले कहीं भी आज की गंदी-भद्दी अश्लील और मैथुनी होली का कहीं भी वर्णन नहीं है इसको मुगलों ने गंदा रूप दिया फिल्मों ने वीभत्स से बनाया भोजपुरी फिल्मों ने और उसके गायको ने होली को गंदी ब्लू फिल्मों का रूप दे दिया और आज इंटरनेट मीडिया और समाज के गंदे रसिक रंगीन मिजाज के लोगों ने औरतों को अपने जाल में फंसाने का एक साधन बनाकर होली को अश्लीलता और दुराचार से भर दिया है जिसे समाप्त होना अति आवश्यक है यही कारण है कि होलिका दहन से लेकर होली खेलने तक शायद ही कोई ऐसा गांव बचता है जहां मारपीट ना होती हो नशा और मदिरा का प्रयोग भी मुगलों के द्वारा किया गया जिसको आज प्रिंट इलेक्ट्रानिक और सोशल मीडिया ने थोड़ा सा लाभ पाने के लिए जमकर प्रोत्साहित किया है होली का वास्तविक रूप कहीं खो गया है जिसको पुनर्स्थापित करने की बहुत आवश्यकता है।

होलिका दहन की विधि ‌ वर्ष 2026

होलिका दहन में बसंत पंचमी के दिन एक जीवाणु नाशक टहनी सामान्य रूप से रेंड़ के डाली के स्थापना की जाती है होलिका तक वह सूख जाता है और उसके चारों ओर सूखी लकड़ियां पत्ते उपली डालकर उसमें जड़ी बूटियों और अधपके  अन्न की बालियां और अन्य चीजें शुभ मुहूर्त में डालकर अग्नि लगाई जाती हैं और अग्नि से होलिका से संबंधित मंत्र :: ऊं होलिकायै नमः;;भी पढ़े जाते हैं और संकल्प किया जाता है कि ज्ञान प्रकाश और अच्छाई का विस्तार हो अज्ञान का अंधकार का और बुराई का नाश हो ।संपूर्ण गांव ‌ मोहल्ले और कॉलोनी  के लोग एक साथ एकत्र होते हैं जिससे गांव में एकता और बंधुत्व की भावना भी प्रबल होती है और प्रचंड अग्नि की ज्वालाएं और उससे उठते हुए सुगंधि चारों ओर फैल जाती है इसके बाद लोग पके हुए अनाज की बालियां ‌ नारियल जड़ी बूटियां अपने-अपने घरों में लाकर उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं और घर में तेल और उबटन लगाने के बाद उसका बचा हुआ अंश भी होली जलाने पर डाल देते हैं जिससे माना जाता है कि सभी साल भर स्वस्थ रहते हैं

इस वर्ष होलिका दहन कब है और होली कब खेली जाएगी

सभी कारण पर भद्र और चंद्र ग्रहण पर सूतक काल पर उदय तिथि पर और पंचांग के अन्य सभी तत्वों पर विचार विमर्श करने के बाद हमारेअलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर ‌ द्वारा पूरे प्रमाण के साथ यह स्थापित किया जाता है कि इस वर्ष 3 मार्च को सायंकाल 6:48 से रात 8:51 के बीच होलिका दहन किया जाना सबसे उचित होगा अन्य कोई भी विकल्प नहीं है और धूलंडी अर्थात रंगोत्सव अर्थात होली के रंग का त्योहार 4 मार्च को मनाया जाएगा जो प्रतिपदा की तिथि है इसका कारण नीचे दिया जा रहा है 

होलिका दहन के लिए आवश्यक होता है कि पूर्णिमा की तिथि हो यदि उदय तिथि हो तो सबसे अच्छी बात है भद्रा और सूतक की छाया ना हो ‌ सूर्यास्त के बाद का समय अर्थात प्रदोष काल होना चाहिए और चंद्र ग्रहण नहीं पढ़ना चाहिए और यह सभी एक साथ तीन मार्च को प्राप्त हो रहा है 

इस वर्ष होलिका दहन पर भद्रा की छाया है ‌ 2 मार्च को पूर्णिमा की तिथि सायं कल 5:55 से प्रारंभ हो रही है और 3 मार्च को 5:07 पर समाप्त हो रही है इसके अतिरिक्त इस वर्ष पूर्णिमा की तिथि 3 मार्च को ही है क्योंकि चंद्र ग्रहण प्रामाणिक रूप से पूर्णिमा के दिन पड़ता है यह अटल वैज्ञानिक सत्य है ‌ यह चंद्र ग्रहण दोपहर के बाद 3:20 से सायं काल 6: 47 तक रहेगा ‌ इन सब कर्म से अनेक विद्वान और ज्योतिषी 2 मार्च को होलिका दहन आधी रात के बाद 12:50 से दो बजे रात के बीच करने का विचार देते हैं जो भद्रा पुच्छ की दशा है लेकिन यह भी बहुत उचित नहीं है इसलिए इस कालखंड में होलिका दहन नहीं हो सकता और इसका सूतक काल 9 घंटे पहले प्रारंभ होता है इसलिए भी इसके पहले होलिका दहन नहीं होगा इसलिए इस वर्ष 3 मार्च की रात में 6-48 से रात में 8-50 तक होलिका का दहन विधि विधान पूर्वक मंत्रों के उच्चारण के साथ किया जाएगा। मंगलवार का दिन और बसंत की ऋतु होगी।

पूर्णिमा की तिथि 2 मार्च को 5.55 पर लगेगी और 3 मार्च को सायंकाल 5.07 पर समाप्त हो जाएगी इसलिए रंग वाली होली बिना किसी दुविधा के 4 मार्च को खेली जाएगी जिसमें कोई असमंजस की स्थिति नहीं है जबरदस्ती कोई करे तो अलग बात है धुलंडी अर्थात होली खेलना कृष्ण पक्ष प्रथम को होता है और इस प्रकार भी यह 4 मार्च को ही है इसमें कोई भी संदेह की बात नहीं है इतना अवश्य है कि  के बाद ही होली खेलने प्रारंभ किया जाए वह उत्तम रहेगा क्योंकि इस समय से कृष्ण पक्ष प्रारंभ होगा।

होलिका दहन में पूजा पाठ का विधान 

लोक आचार विचार और धर्म ग्रंथो के अनुसार होलिका दहन में**ऊं होलीकायै नमः **का मंत्र पढ़ा जाता है जिसमें गेहूं की बाली और अन्न के दाने कच्चा सूत जड़ी बूटियां नारियल और जल का अर्पण किया जाता है इसके अतिरिक्त दिन में लगाए जाने वाला उबटन का शरीर से गिरा हुआ भाग भी होलिका में जलाया जाता है शांति के साथ भगवान श्री हरि विष्णु और भक्त प्रहलाद और माता लक्ष्मी का ध्यान करना चाहिए कि ‌ और होलिका की परिक्रमा करके भुना हुआ अन्न का दाना लाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करना चाहिएया तो आप अपने इष्ट किसी भी देवी देवता का या श्री हनुमान जी का ध्यान कर सकते हैं यह बात बिल्कुल याद रखें की होली प्रमुख रूप से अन्न का पर्व है या वसंत के आगमन का महापर्व है इसके अतिरिक्त सनातन धर्म के हर महापर्व की तरह यह भी बुराई पर अच्छाई सत्य पर सत्य और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है किसी भी प्रकार का गलत कार्य दुराचार होली की आड़ में गंदे क्रियाकलाप किसी भी प्रकार के मांस मदिरा नशा का सेवन एवं पराई स्त्री पराये पुरुष का सेवन उनका मर्दन होली के सारे अच्छे फल को नष्ट करके पूरे परिवार पर आपदा विपत्ति और अंधकार का साया देता है वैसे कलयुग है जिसका जो मन में आ रहा है वही कर रहा है इसलिए उसका फल भी वैसे ही प्राप्त हो रहा है

Friday, 27 February 2026

दीवानी न्यायालय अधिवक्ता संघ जौनपुर सुभाष चंद्र यादव ‌ द्वारा मध्यस्थता केंद्र के बारे में श्रीमती रजनी सिंह और विजय शंकर श्रीवास्तव द्वारा स्थाई लोक अदालत के बारे उस्मान अली के द्वारा विधियों के में ‌ बताया गया।

राज्य ‌ विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के निर्देशन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में ‌ जनपद नया अध्यक्ष श्री सुशील कुमार शास्त्री के नेतृत्व और सचिव पूर्ण कालिक सिविल जज सुशील कुमार कुमार सिंह के ‌ देख रेख में ‌ आज 1:00 बजे साक्षरता जागरूकता कार्यक्रम लिंग की समानता स्त्री लोक अदालत स्थाई लोक अदालत लिंग चयन और बच्चों के लिंग में गिरावट कन्या भ्रूण हत्या के बारे में ‌‌ मोहम्मद हसन स्नातकोत्तर महाविद्यालय जौनपुर में आयोजित किया गया। इस विधिक साक्षरता जागरूकता शिविर में सिविल जज सीनियर डिवीजन/ सचिव ‌ सुशील कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह प्राचार्य डॉक्टर अब्दुल कादिर ‌ दीवाने अधिवक्ता संघ सुभाष चंद्र यादव विजय शंकर यादव रजनी सिंह आर पी सिंह ‌ सहित अन्य गणमान्यजन   ‌ शिक्षक और शिक्षिकाएं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
[2/26, 12:04 PM] Dileep Singh Rajput Jounpur: कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के वंदना के साथ हुआ और सभी उपस्थित अतिथियों का माल्यार्पण किया गया। महाविद्यालय के छात्र छात्राओं द्वारा स्वागत गीत सरस्वती मां के गीत और अन्य कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए ‌

संबोधित करते हुए सचिव पूर्णकालिक सीनियर डिवीजन‌‌ सुशील कुमार सिंह ने कहा कि चोपराधिकरण वर्तमान समय में अपने कार्य और उद्देश्य के बारे में बहुत व्यापक हो चुका है ‌ इसमें महिलाओं बच्चियों और पीड़ित व्यक्तियों क्तियों को निःशुल्क सहायता प्रदान की जाती है विद्वान और योग्य अधिवक्ता पैनल लायर ‌ परलीगल वॉलिंटियर्स एवं अन्य सदस्य गण विद्यमान है जो प्राधिकरण के साथ मिलकर पूरी तरह से निशुल्क सहायता देने में मदद करते हैं
[2/26, 12:25 PM] Dileep Singh Rajput Jounpur: डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह डिफेंस काउंसिल ‌ जनपद न्यायालय जौनपुर द्वारा बताया गया कि जब देश में मुकदमा की संख्या करोड़ों की संख्या में पर हो गए तब जस्टिस पी एन भगवती और जस्टिस भी कृष्णा अय्यर के नेतृत्व में गंभीर विचार विमर्श के बाद ‌ ‌ विधिक सेवा अधिनियम के अंतर्गत ‌ राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की स्थापना ‌ की गई ।‌‌‌ उसके बाद सफलता से प्रभावित होकर जल्दी है संपूर्ण भारत में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और सभी जिलों में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की स्थापना की गई‌। नियम कानून का उल्लंघन होता है तो सचिव पूर्णकालिक ‌‌ ‌ जनपद के किसी भी‌  अधिकारी को आदेश निर्देश जारी कर सकता है।‌ उन्होंने उपस्थित लोगों से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण स्थाई लोक अदालत और राष्ट्रीय लोक अदालतों से अधिक से अधिक लाभ उठाने का आग्रह किया
 इसी क्रम में अध्यक्ष ‌दीवानी न्यायालय अधिवक्ता संघ जौनपुर सुभाष चंद्र यादव ‌ द्वारा मध्यस्थता केंद्र के बारे में श्रीमती रजनी सिंह और विजय शंकर श्रीवास्तव द्वारा स्थाई लोक अदालत के बारे उस्मान अली के द्वारा विधियों के में ‌ बताया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता और आभार ज्ञापन प्राचार्य डॉ अब्दुल कादिर द्वारा किया गया

Wednesday, 25 February 2026

‌ एक 26 फरवरी से 10 मार्च तक मौसम की भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर

‌ एक 26 फरवरी से 10 मार्च तक मौसम की भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 

‌ आज अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस रहेगा जबकि कल 30 डिग्री सेल्सियस तापमान पर हो जाएगा और न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस रहेगा।कल से बहुत तेजी से बढ़ेगी गर्मी और मार्च के प्रथम सप्ताह में भीषण गर्मी पड़ेगी‌ जौनपुर पूर्वांचल आसपास उत्तर प्रदेश पश्चिम उत्तर मध्य और दक्षिण भारत के अनेक भागों में तापमान अचानक ही उछलकर 35 से 40 डिग्री सेल्सियस के भीषण स्तर पर पहुंच जाएगा 

जबकि इस कालखंड में न्यूनतम तापमान 15 से 17 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहेगा अर्थात सुबह और रात सुहानी होगी बढ़ती हुई प्रचंड अचानक गर्मी का असर हर जीव जंतु मनुष्य और पेड़ पौधों पर पड़ेगा इससे देर से बोई गई फसलों के उत्पादन पर भी असर पड़ेगा ‌ महाराष्ट्र राजस्थान पंजाब हरियाणा मध्य प्रदेश और उड़ीसा तथा दक्षिण के पथरी भागों पर अचानक इस भरी हुई गर्मी के कारण 10 मार्च से 20 मार्च के बीच संपूर्ण भारत में अनेक मौसम के परिवर्तन आंधी तूफान झंझा झकोर घन गर्जन वज्रपात वारिदमाला बिजली की चमक और गरज ‌ के साथ तेज हवाओं या आंधी तूफान का जन्म होगा और गई हुई विक्षोभ बनेंगे। जिसके कारण प्राकृतिक आपदाओं का भी सामना करना होगा भारत के अलावा भूमध्य रेखा से कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच के स्थान में एवं दक्षिण पूर्वी एशिया में भूकंप ज्वालामुखी सुनामी लहरें ‌ और कहीं कहीं भीषण वर्षा भूस्खलन देखने को मिलेगा हिंद महासागर और प्रशांत महासागर तथा अटलांटिक महासागर के कई क्षेत्रों में भीषण समुद्री चक्रवातों के जन्म होने की संभावना प्रतीत हो रही है। 

अचानक एकदम तेजी से बढ़ाने वाली गर्मी का कारण सूर्य के अंदर प्रचंड विस्फोट सौर कलंक और सौर ज्वालाओं का बना है इसमें पृथ्वी पर उत्पन्न भीषण विविध प्रकार के प्रदूषण और जहरीली हवा एवं प्लास्टिक के कूड़ा कचरा का भी बहुत बड़ा हाथ है जिसके कारण उत्पन्न जहरीली हवा अनेक परिवर्तन संपूर्ण दुनिया में करेगी। इस बार की गर्मी 1 मार्च से लेकर 15 अक्टूबर तक चलेगी और 15 अप्रैल से लेकर 15 जून तक पूरे देश में गर्मी अपने चरम शिखर पर होगी उत्तर के मैदाने में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस एवं भारत के कई स्थानों में 49 डिग्री सेल्सियस के बीच अंतर को पार करेगी

होलाष्टक और शुभ तथा मांगलिक कार्य-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि ‌ प्रस्तावना

होलाष्टक और शुभ तथा मांगलिक कार्य-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 
‌ प्रस्तावना 
होलाष्टक एक महत्वपूर्ण कालखंड है होली के 8 दिन पहले शुरू होता है और होलिका दहन के साथ समाप्त हो जाता है जब बसंत रितु चरम पर होती है और शीतल मंद सुगंधित पवन ‌ के झोंके जीवन को नई स्फूर्ति से भर देते हैं और नए जीवन का उत्साह हो जाता है इस कालखंड में होलाष्टक होली का महापर्व और बसंत रितु तथा नया सनातन भारतीय वर्ष परम पावन नवरात्रि और श्री रामनवमी पड़ते हैं जो भारत के लिए एक नवीन चेतना का संचार करते हैं।

किस लिए होलाष्टक का कालखंड पड़ा 

होलाष्टक का कार्य ‌ कालखंड भक्त शिरोमणि प्रहलाद और हिरण्यकश्यप के साथ जुड़ा हुआ है प्रहलाद श्री हरि विष्णु के अनन्य भक्त थे और हिरण्यकश्यप स्वयं को ईश्वर मानता था इसलिए उसने स्वयं को ईश्वर घोषित कर दिया और सारी प्रजा को ईश्वर मानने को बाध्य किया।‌ लेकिन प्रह्लाद ने अपने पिता को बहुत बार समझाया कि श्री हरि विष्णु ही ईश्वर है उन्हीं की पूजा करो क्रोधित होकर पहले तो हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को अपनी बहन को लेकर के साथ जलाने का प्रयास किया इसके बाद पहाड़ से नीचे धकेल दिया फिर हाथी से कुचलकर मारने का प्रयास किया और अनगिनत कष्ट दिए अंत में प्रहलाद को खंभे से बांधकर कहा अपने ईश्वर को बुलाओ अन्यथा तुम्हारा वध कर दूंगा तभी भगवान नरसिंह इस खंबे से निकल पड़े और हिरण्यकश्यप का अपनी जगह पर बैठ कर अपने नाखून से चीर डाला तभी से 8 दिन का होलाष्टक का पर्व ईश्वर भक्ति और प्रहलाद की भक्ति की शक्ति के रूप में मनाया जाता है।

‌ होलाष्टक में क्या-क्या पूरी तरह से वर्जित है 


होलिका दहन से 8 दिन पहले तक सभी प्रकार के शुभ मांगलिक कार्य पूरी तरह से वर्जित किए गए हैं इस कालखंड में गृह प्रवेश करना मना है कोई भी विवाह करना पूरी तरह वर्जित है वहां मकान सहित हर खरीदारी भी पूरी तरह वर्जित है इसके अलावा नया कार्य शुरू करने की भी पूरी तरह माना ही है इस कालखंड में ग्रह नक्षत्र और मौसम के प्रभाव से ‌ धूम धड़ाका हर्षोल्लास गाजा बाजा और संगीत पूरी तरह सेमाना है‌ ऐसा न करने पर आने वाले समय में उसका भीषण परिणाम दिखाई देता है इस बार यह 24 फरवरी से लेकर 3 मार्च होलिका दहन के दिन तकहै। 


होलाष्टक में क्या-क्या करना चाहिए 

प्लास्टिक में भगवान श्री हरि विष्णु माता लक्ष्मी भगवान शिव मां पार्वती बजरंगबली की पूजा उपासना करना चाहिए अपने इष्ट देवी देवता का ध्यान पूजन भी कर सकते हैं इसके अलावा हनुमान जी का नाम लेकर हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ भी करना चाहिए अपना ध्यान भक्ति आराधना में लगाने से इस कालखंड में सत्य की मानसिक अनुभूति होती है और मां को बहुत ही गहरी शांति प्राप्त होती है जीवन को नई दिशा भी मिलती है 

उपसंहार 

यदि सांस्कृतिक और वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो यह कालखंड बहुत ही संक्रमण कालीन होता है इस समय हर्ष और उल्लास का कार्य करने से मन में विरोधी शक्तियां प्रकट हो जाती हैं और शुभ मांगलिक कार्य का अच्छा परिणाम नहीं निकलता है इस कालखंड में होने वाले विवाह वहां खरीददारी इत्यादि भी अंत में बुरा प्रभाव ही देता है यह जाड़े के अंत और गर्मी के प्रारंभ का बसंत ऋतु का मौसम है हमारे प्राचीन ऋषि मुनि और मनुष्यों ने बहुत ही गहन अध्ययन और अनुसंधान करके विभिन्न प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्य तथा व्रत पर्व अनुष्ठान पूजा पाठ यज्ञ हवन का आविष्कार किया है जिसे आज पूरी दुनिया मान रही है लेकिन हम लोग भटक गए हैं यह देखकर बड़ा आश्चर्य हो रहा है कि तमाम लोग विवाह पूजा पाठ अखंड रामायण जैसे कार्य भी इस कालखंड में कर रहे हैं इसका निर्णय व स्वयं करेंगे कि इसका क्या परिणाम होता है।

Monday, 16 February 2026

दीवानी न्यायालय जौनपुर में महाशक्तिशाली बम की फैल गई भगदड़ सड़कों पर पैर रखने की जगह नहीं बची हाहाकार मचा देखो विस्फोट होता है कि आजमगढ़ की तरह केवल अफवाह ही निकलती है जौनपुर: .

ख़बर सूत्रों से::;दीवानी न्यायालय जौनपुर में महाशक्तिशाली बम की फैल गई भगदड़ सड़कों पर पैर रखने की जगह नहीं बची हाहाकार मचा देखो विस्फोट होता है कि आजमगढ़ की तरह केवल अफवाह ही निकलती है      परिसर में अफरा तफरी का माहौल 
 जौनपुर: .                सूचना की कॉपी 
        सोर्स  : डिफेंस काउंसिल डा दिलीप सिंह 
जौनपुर कचहरी और पुलिस लाइन को बम से उड़ाने की धमकी

जौनपुर: दिवानी कचहरी और पुलिस लाइन को बम से उड़ाने की धमकी भरा एक ई-मेल मंगलवार की सुबह पुलिस अधीक्षक के सरकारी ई-मेल पर आते ही हड़कंप मच गया। तत्काल पुलिस की अलग अलग टीमों ने कचहरी पहुंचकर सघन जांच अभियान शुरू कर दिया। बार एसोसिएशन के सहयोग से कचहरी को खाली कराया जा रहा है। पुलिस और बार के पदाधिकारियों ने सभी से अपील किया कि कचहरी को जितना जल्दी हो परिसर को खाली कर दें।  जिस समय धमकी भरा ई-मेल आया उस समय कचहरी में करीब 5 से 8 हजार लोगों की भीड़ थी।  अचानक बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल प्राप्त होते ही हड़कंप की स्थिति मन गई। लोग अचानक जब कचहरी से बाहर निकले तो बाहर गांधी तिराहे तक भीषण जाम लग गया। पुलिस लाइन में भी आंतरिक दस्ते की टीम ने सघन जांच अभियान शुरू किया। एसएसपी कुंवर अनुपम सिंह ने बताया कि ई-मेल मिलने के बाद जांच की जा रही है। अभी तक कुछ मिला नहीं है।

 भारत का कोई सबसे चालाक व्यक्ति भी किसी अन्य देश की सीमा पार नहीं कर सकता है यहां सैना पुलिस बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स और ‌ सात स्तरीयगुप्तचर तंत्र के रहते हुए भी 100/1000/ 100000 लाख नहीं करोड़ों की संख्या में ‌ बांग्लादेशी रोहिंग्या आतंकी घुस बैठिए पाकिस्तान और तमाम मुस्लिम देशों को लोग  ‌ एक अंदामाद की तरह नहीं डरता से भाई रोक-टोक आ रहे हैं ‌ 1947 से यही कम चल रहा है सरकार कोई हो प्रधानमंत्री कोई हो लेकिन लाल बहादुर शास्त्री को छोड़कर इनका अवैध घुसपैठ कभी नहीं रुक सबसे अधिक मोदी जी के शासनकाल में आए हैं और इनकी संख्या 20 करोड़ हो गई है किसी भी सुरक्षा तंत्र या एजेंसी का अब कोई मतलब नहीं रह गया है जब जहां चाहेंगे आतंकी वही विस्फोट करके उड़ा देंगे इसके पहले भी अनगिनत हमले हुए हैं कुछ नहीं कर पाए लोग आखिर भारत में ही क्यों ‌ दूसरे देश में घुसते ही तुरंत गोली मार दिया जाता है और यहां कबाब बिरयानी खिलाकर 20 से 30 साल तक उसका परीक्षण किया जाता है।दुनिया का हर व्यक्ति घुस जाता है एक ही अर्थ हो सकता है या तो सरकार ऐसा चाहती होगी या तो सारे तंत्र बिक चुके हैं।

‌‌ और यह भी निश्चित है कि कहीं ना कहीं ऐसा कांड होगा क्योंकि शैतान सारे देश में फैल चुके हैं और 2047 तक अपना लक्ष्य पाने के लिए हर रास्ता अपनाने को तैयार हैं जब सब लोग निश्चित हो जाएंगे तब यह कांड होगा और जहां कह रहे हैं वहां नहीं होगा इस देश की हालत इतनी खराब है कि थाने में घुसकर भी पूरे थाने को बम से उड़ाया जा सकता है बाकी की बात ही छोड़ दीजिए सबसे सुरक्षित सैन्य विभाग में पुलवामा जैसा कांड हो सकता है तो पूरा देश असुरक्षित ही है आप स्वयं सुरक्षित रहें तभी सुरक्षित रह पाएंगे‌ इसमें कहीं ना कहीं योगी जी के विरुद्ध भी षड्यंत्र और साजिश गहरा है

आज वर्ष का प्रथम सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है लेकिन भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए भारत में ग्रहण और उसके सूतक का कोई प्रभाव नहीं होगा इसलिए आज भारतीय पंचांगों में इस ग्रहण की कोई परिचर्चा नहीं की गई है

आज वर्ष का प्रथम सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है लेकिन भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए भारत में ग्रहण और उसके सूतक का कोई प्रभाव नहीं होगा इसलिए आज भारतीय पंचांगों में इस ग्रहण की कोई परिचर्चा नहीं की गई है 

यह ग्रहण अंटार्कटिका ऑस्ट्रेलिया और दक्षिणी अमेरिका तथा आसपास के कुछ भागों में दिखाई देगा भारतीय समय के अनुसार या 3:26 मिनट दोपहर के बाद से प्रारंभ होगा और रात में 7:58 तक चलेगा और 5:37 पर इसका चरम उत्कर्ष होगा 

हमारे केंद्र ने इस ग्रहण का इसलिए वर्णन नहीं किया कि इसका भारत में ना तो कोई असर होगा और ना कहीं से दिखाई देगा 

फिर भी यदि कोई सावधानी करना चाहे तो खाने-पीने की सामानों में तुलसी के पत्ते एवं दूब घास डालकर आराम से बिना किसी दुविधा के अपना कार्य रोज की तरह करते रहें 

इस ग्रहण का प्रभाव भारत पर कुछ विशेष नहीं पड़ेगा लेकिन इतना अवश्य है कि इसका प्रभाव अमेरिका ऑस्ट्रेलिया दक्षिण पूर्वी एशिया चीन और अरब देशों पर भीषण रूप से पड़ेगा जिसके कारण हिंसा मार्केट अचानक भयानक युद्ध समुद्र में उथल-पुथल सुनामी लहरें ज्वालामुखी विस्फोट एवं कुछ मध्यम तेज भूकंप एक सप्ताह के अंदर इन क्षेत्रों में एवं आसपास आ सकते हैं कभी-कभी इसके प्रभाव से दूरस्थ भागों में भी ऐसी घटनाएं हो सकती हैं रोग बीमारियों का प्रभाव भी उपयुक्त क्षेत्र में अधिक होगा-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं दीर्घकालिक ‌ विज्ञान अनुसंधान केंद्रजौनपुर

Sunday, 15 February 2026

हक से नतीजों तक: MGNREGA को VBGRAM-G से बदलने का मामला*

*हक से नतीजों तक: MGNREGA को VBGRAM-G से बदलने का मामला* 

पब्लिक पॉलिसी को नतीजों से आंका जाना चाहिए, न कि भावना, पुरानी यादों या राजनीतिक निशानियों से। MGNREGA को रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण एक्ट, 2025 के लिए विकसित भारत गारंटी से बदलने पर उम्मीद के मुताबिक विरोध शुरू हो गया है। आलोचकों का कहना है कि नया कानून अधिकारों को कमजोर करता है, राज्यों पर बोझ डालता है, ताकत को सेंट्रलाइज़ करता है और महात्मा गांधी की विरासत को मिटा देता है। हालांकि, ये आपत्तियां असल पॉलिसी डिज़ाइन के बजाय राजनीतिक सोच के बारे में ज़्यादा बताती हैं।

यह मुख्य दावा कि VB GRAM G अधिकारों पर आधारित फ्रेमवर्क को खत्म करता है, इस गलत सोच पर आधारित है कि कानूनी हक अपने आप ताकत में बदल जाता है। MGNREGA के साथ दो दशकों का अनुभव इस सोच की सीमाएं दिखाता है। लगातार वेतन में देरी, मांग पूरी न होना, खराब क्वालिटी की संपत्ति बनाना और असमान तरीके से लागू करना, उस अधिकार को लगातार खोखला कर रहा है जिसे न्यायसंगत माना जाना चाहिए था।  एक अधिकार जो समय पर, बड़े पैमाने पर और लगातार नहीं दिया जा सकता, वह असल में अधिकार के तौर पर काम करना बंद कर देता है। VB GRAM G रोज़गार में मदद देने की राज्य की ज़िम्मेदारी को वापस नहीं लेता है। यह टाइमलाइन लागू करके, फंडिंग को नतीजों से जोड़कर और जवाबदेही को इंस्टीट्यूशनल बनाकर उस ज़िम्मेदारी को फिर से बनाता है। यह कमज़ोरी नहीं है। यह सुधार है।

असल में, नया एक्ट भारत की विकास की सोच में एक ज़रूरी बदलाव को दिखाता है। MGNREGA को बहुत ज़्यादा ग्रामीण संकट के समय में राहत देने के तरीके के तौर पर डिज़ाइन किया गया था। संकट में रोज़गार को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक स्थायी हिस्सा मानने से ठहराव के सामान्य होने का खतरा है। VB GRAM G साफ़ तौर पर शॉर्ट टर्म रोज़गार को रोज़ी-रोटी बनाने, स्किलिंग और प्रोडक्टिव एसेट बनाने से जोड़ता है। काम के दिनों की गिनती से लेकर सस्टेनेबल आजीविका बनाने तक का बदलाव एक बुनियादी सच्चाई को पहचानता है। इज़्ज़त सिर्फ़ से नहीं मिलती रोज़गार से नहीं, बल्कि इनकम में स्थिरता, प्रोडक्टिविटी और ऊपर की ओर बढ़ने की संभावना से आती है। एक वेलफेयर सिस्टम जो समय के साथ नहीं बदलता, वह गरीबी खत्म करने के बजाय निर्भरता को और मज़बूत करता है।

राज्यों पर बढ़ते वित्तीय बोझ की चिंताएं भी जांच करने पर खत्म हो जाती हैं।

पहले के फ्रेमवर्क के तहत, राज्यों को केंद्रीय फंड मिलने में देरी, बिना प्लान वाली देनदारियों और पिछली लागत शेयरिंग विवादों के कारण अक्सर अनिश्चितता का सामना करना पड़ता था।

VB GRAM G स्पष्ट वित्तीय भूमिकाएं, मध्यम अवधि की प्लानिंग और नतीजों से जुड़ी फंडिंग लाता है। अनुमान लगाना ही असली वित्तीय संघवाद की नींव है। राज्यों को आग बुझाने के बजाय प्लान बनाने की क्षमता मिलती है। इससे प्रशासनिक स्वायत्तता कमज़ोर होने के बजाय मज़बूत होती है।

इसी तरह, अत्यधिक केंद्रीकरण के आरोप राष्ट्रीय मानक तय करने को माइक्रोमैनेजमेंट के साथ मिला देते हैं। इतने बड़े कार्यक्रम में, पारदर्शिता, पात्रता और निगरानी के लिए एक जैसे बेंचमार्क ज़रूरी हैं। स्थानीय संस्थाएं काम की पहचान करना, प्रोजेक्ट को लागू करना और डिलीवरी की निगरानी करना जारी रखती हैं। जो बदला है, वह है परफॉर्मेंस और जवाबदेही पर ज़ोर। बिना निगरानी के विकेंद्रीकरण से ऐतिहासिक रूप से मज़दूरों से ज़्यादा बिचौलियों को फायदा हुआ है। VB GRAM G उस संरचनात्मक कमी को ठीक करने की कोशिश करता है।

सबसे भावनात्मक आलोचना कानून से महात्मा गांधी का नाम हटाने से जुड़ी है। यह तर्क असलियत की जगह प्रतीकों को रखता है। गांधी के आर्थिक दर्शन ने उत्पादक श्रम, आत्मनिर्भरता, विकेंद्रीकृत विकास और नैतिक ज़िम्मेदारी पर ज़ोर दिया। सिस्टम की अक्षमता को बर्दाश्त करते हुए उनका नाम बनाए रखना उस विरासत का सम्मान नहीं है। एक कार्यक्रम जो टिकाऊ सामुदायिक संपत्तियों, स्थानीय उद्यम और आजीविका की स्थिरता पर केंद्रित है, वह गांधीवादी सिद्धांतों के कहीं ज़्यादा करीब है, बजाय इसके कि जो जीवनयापन के काम को अपने आप में एक लक्ष्य मानता है।

सुधार से स्वाभाविक रूप से विरोध होता है, खासकर जब यह पुरानी राजनीतिक कहानियों को बाधित करता है। लेकिन सामाजिक नीति समय के साथ स्थिर नहीं रह सकती। भारत की जनसंख्या का दबाव, वित्तीय मजबूरियां और विकास की महत्वाकांक्षाएं इसकी मांग करती हैं। ऐसे साधन जो मापने योग्य नतीजे देते हैं। VB GRAM G ग्रामीण रोज़गार नीति को इनपुट-आधारित अधिकार से आउटकम-आधारित गारंटी की ओर ले जाने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास है। इस बदलाव के लिए सतर्कता, सुधार और अनुशासित कार्यान्वयन की ज़रूरत होगी। लेकिन सुधार का पूरी तरह से विरोध करना ज़्यादा बड़ी विफलता होगी।

नीति निर्माताओं के सामने असली विकल्प करुणा और दक्षता, या अधिकारों और सुधार के बीच नहीं है। यह एक ऐसी कल्याणकारी व्यवस्था के बीच है जो बदलती वास्तविकताओं के अनुकूल हो और दूसरी जो अपनी सीमाओं के सामने आने के बहुत बाद भी पुरानी व्यवस्थाओं से चिपकी रहे। VB GRAM G सोच में एक विकास का संकेत देता है। यह सार्वजनिक खर्च को स्थायी ग्रामीण समृद्धि में बदलना चाहता है। यही महत्वाकांक्षा, न कि राजनीतिक पुरानी यादें, राष्ट्रीय बहस को परिभाषित करनी चाहिए।

लेखक के बारे में: निर्वा मेहता एक राजनीतिक विश्लेषक और स्तंभकार हैं जो सार्वजनिक नीति, शासन और राष्ट्रीय सुरक्षा पर लिखती हैं। उनका काम भारत और उससे बाहर सत्ता संरचनाओं, राज्य के व्यवहार और नीतिगत विकल्पों के दीर्घकालिक परिणामों पर केंद्रित है। फरहत अली खान 
एम ए गोल्ड मेडलिस्ट