Saturday, 7 March 2026

अनंत ब्रह्मांड में हमारी धरती के एक कण से भी छोटी है -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

अनंत ब्रह्मांड में हमारी धरती के एक कण से भी छोटी है -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 
क्या कभी आपने इस अनंत ब्रह्मांड के बारे में सोचा है कि यह कितने दूर तक फैला हुआ और कितना बड़ा है हमारी धरती के 99% लोग तो सारा जीवन निहित सोचते हुए अनंत ब्रह्मांड में विलीन हो जाते हैं कि हमारी धरती बहुत ही विराट है ‌ उनका सोचना गलत भी नहीं है क्योंकि जीवन भर यात्रा करने वाला व्यक्ति यदि 100 वर्ष जीवित रहे तो भी धरती के एक प्रतिशत भाग से अधिक को नहीं देख और घूम पता है और धर्म दर्शन विज्ञान अध्यात्म एवं सारी प्रगति के बावजूद भी आज सागर महासागर का 95 प्रतिशत और धरती का 50% भाग पूरी तरह अज्ञात अनजान है लेकिन ब्रह्मांड के आगे यह धरती कुछ भी नहीं है तो एक छोटे से उदाहरण से आपको समझते हैं कि अभी तक का ज्ञात ब्राह्मण कितना विराट है।

आप सब की सुविधा के लिए हम अनंत ब्रह्मांड और पृथ्वी को मटर के एक दाने के बराबर मानकर शुरू करते हैं यदि पृथ्वी को मटर का एक दाना माना जाए तो हमारा विराट सूर्य ऐसे 13 लाख मटर के दाने के बराबर है और सौरमंडल जो दो प्रकाश वर्ष में फैला है ऐसे मटर के दाने 13 लाख महा शंख ‌ में ‌ 21 शून्य बढ़ाने के बाद जो संख्या आती है उतना बड़ा तो केवल अपना सौरमंडल है।‌ अब आपको लग रहा है कि हमारा सौरमंडल तो बहुत अधिक व्यापक और विराट है लेकिन अनंत ब्रह्मांड के आगे कुछ भी नहीं है क्योंकि वास्तव में सौरमंडल का और अनंत अंतरिक्ष का 99% भाग पूरी तरह से खाली और शून्य है और यह अभी तक सारी सभ्यता के ज्ञात ब्रह्मांड का वर्णन हो रहा है 


दो प्रकाश वर्ष में फैला हुआ हमारा सूर्य और सौरमंडल हमारी अपनी आकाशगंगा के आगे कुछ नहीं है जिसको एक लाख प्रकाश वर्ष में फैला हुआ माना जाता है अर्थात हमारे सूर्य जैसे 50000 से 1 लाख सौरमंडल हमारी अपनी ही आकाशगंगा में है और ऐसा माना जाता है कि इसमें दो खरब सूर्य से भी अधिक तर विद्यमान है ‌ हमारा यह सौरमंडल इस आकाश गंगा के आगे मटर के दाने से भी छोटा पड़ जाता है फिर धरती का इसमें कौन सा अस्तित्व बचेगा यदि सूर्य को मटर का एक दान मान लें तो धरती इस आकाश गंगा में मटर के दाने से 13 लाख गुना  छोटी होगी अब एक मटर का 13 लाख टुकड़ा करके आप खुद समझ लीजिए कि इस आकाशगंगा में आपकी धरती कहां है और फिर हमारा आपका उसमें क्या अस्तित्व है जो धरती के आगे रेत के एक कड़क से भी छोटी हैं।


हमारी सभ्यता की सारी कल्पना गणित के अंकों का खेल और कल्पना अपनी आकाशगंगा के आगे समाप्त हो जाती हैं क्योंकि यदि हम एक सेकंड में 3 लाख किलोमीटर लगातार चलते रहें ‌ तो हम 1 लाख वर्ष में अपनी आकाशगंगा में पहुंच पाएंगे और अभी मनुष्य के द्वारा सबसे तेज चलने वाला बनाया गया अंतरिक्ष या न केवल 100 किलोमीटर प्रति सेकंड के वेग से चल सकता है ऐसे में किसी मनुष्य के द्वारा निर्मित यह से आकाशगंगा पार करने में हमको 3 लाख करोड़ वर्ष लग जाएंगे 

अब आपको यह समझ में आ रहा होगा कि अपनी आकाशगंगा जिससे मंदाकिनी कहा जाता है जिसका वर्णन हमारे वेद पुराण में है यह बहुत विराट और कल्पना से परे हैं लेकिन अभी तो आपने कुछ भी नहीं देखा है कि यह हमारा ब्रह्मांड कितना अनंत असीम अदभुत आश्चर्यजनक और अतल हैं इसकी लंबाई चौड़ाई गहराई ऊंचाई में सारा मानव का पैमाना डूब जाता है। क्योंकि अपनी आकाशगंगा जैसी 500 अब आकाशगंगाए अपने दृश्य मन ब्रह्मांड में 14 अब प्रकाश वर्ष में खोजी जा चुकी है 

जहां सूर्य के मुकाबले हमारी धरती एक मटर के दाने के बराबर है और सूर्य आकाश गंगा में एक मटर के दाने के बराबर है तो अपनी विराट 2 खरब ‌ सौरमंडल से युक्त अपनी आकाशगंगा इस अनंत ब्रह्मांड में स्वयं अन्य आकाशगंगाओं के मुकाबले मटर के एक दाने के बराबर है 


इसीलिए हमारे वैदिक ऋषि मुनियों से लेकर महाकाव्य लिखने वाले वाल्मीकि वेदव्यास संत महंत ब्रह्म ऋषि दार्शनिक और विद्वान तथा वैज्ञानिक इस ब्रह्मांड को अनंत और नेति नेति कहते हैं जिसका कोई भी अंत या आदि नहीं है और ऐसे 500 खराब आकाशगंगाएं ईश्वर के एक रूम में निवास करती हैं गोस्वामी तुलसीदास जी ने वेदव्यास जी ने और वाल्मीकि ने ईश्वर के विराट रूप का वर्णन करते हुए लिखा है रोम रोम प्रति राजत कोटि-कोटि ब्रह्मांड ‌ अर्थात भगवान श्री हरि विष्णु के एक रूम में करोड़ों ब्रह्मांड का निवास है और अब ईश्वर तथा ब्रह्मांड के भारतीय ऋषि मुनियों के द्वारा प्रतिपादित इस सिद्धांत को आधुनिक क्वांटम विज्ञान मान चुका है। 


अब जाकर वैज्ञानिकों ने भारत के प्राचीन ज्ञान विज्ञान पर मोहर लगा दिया है और कहा है कि हम संपूर्ण ब्रह्मांड का केवल पांच प्रतिशत भाग देख सकते हैं क्योंकि बाकी 95% भाग श्वेत ऊर्जा और श्वेत ब्रह्मांड श्वेत पदार्थ के अलावा ‌ श्याम ऊर्जा और श्याम पदार्थ का बना है अंग्रेजी भाषा में इसको हम डार्क एनर्जी डार्क मैटर कहते हैं और यह संपूर्ण ब्रह्मांड का 95% भाग है अब आप कल्पना कर सकते हैं कि संपूर्ण ज्ञात ब्रह्मांड जिनकी संख्या 500 खरब मानी जाती है इस डार्क एनर्जी और डार्क मैटर में खुद मटर के एक दाने के बराबर है और यह समग्र अनंत ब्रह्मांड जो अभी तक हमें ज्ञात है ईश्वर के एक रोम के एक करोड़ भाग के बराबर है।


और बात इतनी पर ही नहीं रख रही है हमारा अपना ब्रह्मांड और सारे ब्रह्मांड लगातार फैल रहे हैं हमारे पुराण वेद और उपनिषद में लिखा है कि प्रारंभ में ईश्वर एक था उसने मन में इच्छा प्रकट किया कि मैं बहुत सा हो जाऊं** एकोअहं बहुस्याम**और उसके बाद एक प्रचंड महा विस्फोट कल्पना और सोच से परे हुआ और अनंत को ब्रह्मांडों का निर्माण हुआ जो आधुनिकतम विज्ञान की बिग बैंग थ्योरी अर्थात महा विस्फोट सिद्धांत के समान है और मेरा तो यह मानना है कि पश्चिम के वैज्ञानिकों ने यह सब वेद पुराण गीता रामायण महाभारत और भागवत पढ़कर ही निकला है जैसे आइंस्टीन का सापेक्षता का सिद्धांत डॉ सत्येंद्र नाथ बोस और गीता की सहायता से लिखा गया और हमारे ब्रह्मास्त्र के द्वारा और अन्य दिव्य अस्त्र शस्त्रों के द्वारा छोटे पैमाने वाले परमाणु हाइड्रोजन और न्यूट्रॉन बमों का आविष्कार किया गया वैसा ही सब कुछ पश्चिमी ज्ञान विज्ञान वाले हमारे ग्रंथो का अध्ययन करके कर रहे हैं।


पृथ्वी सूर्य आकाश गंगा और आकाशगंगाओं के करोड़ों समूह को देखकर अब आप सो चुके कि यह तो मन वचन कल्पना से परे है और फिर आपने अनंत कोटि ब्रह्मांड और श्वेत श्याम ऊर्जा और श्वेत श्याम पदार्थ के बारे में पढ़ा तो घनघोर आश्चर्य में डूब गए लेकिन यह अनंत ब्रह्मांड स्वयं में अनंत और कल्पना से परे आश्चर्य का स्वयं केंद्र है इस अनंत ब्रह्मांड में वह सब कुछ है जो देखा सोचा जा सकता है और जिसकी कल्पना हो सकती है यहां पर पदार्थ और प्रति पदार्थ हैं ऊर्जा और प्रति ऊर्जा है श्वेत विवर और श्याम विवाह हैं ग्रह नक्षत्र तारे आकाशगंगा हैं अनंत धूल और ऊर्जा के बदले हैं अनंत गति से चल रहे तारे और बहने वाली प्रचंड हवा है कहानी सोने चांदी के ग्रह नक्षत्र तारे हैं तो कहीं हीरे मोतियों के तो कहीं पर धरती से अर्बन गुना अधिक जल वाले ग्रह नक्षत्र विद्यमान है इतना ही नहीं हमारे सूर्य से अर्बन गुना बड़े और चमकदार तथा अब गुना छोटे सूर्य विद्यमान है अपनी एक लाख प्रकाश वर्ष में फैली हुई आकाशगंगा से भी करोडो गुना बढ़िया आकाशगंगाए और इससे भी करोडो गुना छोटी आकाशगंगाए हैं यदि अधिक अधिक सोचना चाहिए तो हमारे मस्तिष्क में स्वयं ही विस्फोट हो जाएगा जो इस माह विस्फोट का अंग हो जाएगा।


और अभी तो आपने कुछ भी नहीं जाना है यदि आप सोचते हैं कि प्रकाश सब जगह एक जैसा चलता है तो यह भी आपकी भूल है जहां भयंकर द्रव्यमान होता है वहां प्रकाश धीमा हो जाता है और जहां कम द्रव्यमान होता है वहां यह तीव्र हो जाता है और निर्वात में अपने अधिकतम गति प्राप्त कर लेता है और कृष्ण नक्षत्र अर्थात ब्लैक होल में इसकी गति शून्य हो जाती है और सभी ऊर्जा पदार्थ की तरह यह भी ब्लैक होल में समा जाता है इसी तरह दिन मिनट घंटे भी हर ग्रह नक्षत्र पर एक समान नहीं होते हैं यदि हम मंगल ग्रह पर चले जाएं तो वहां का 2 वर्ष धरती के एक वर्ष के बराबर होगा इसी तरह यदि हम यम ग्रह पर जो नर्क है और यमलोक है जहां करने के बाद हमारी आत्मा जाती है वहां पर चले जाएं तो हमारा 1 वर्ष 500 वर्ष के बराबर हो जाएगा इसका अतिरिक्त ऐसे ऐसे ग्रह नक्षत्र तारे और आकाशगंगा हैं जहां पर एक वर्ष धरती के लाखों करोड़ों वर्ष के बराबर होता है और एक दिन एक वर्ष से भी बड़ा होता है 


जो कुछ भी हमारे वेद पुराण उपनिषद रामायण महाभारत और सिख जैन बौद्ध सनातन पंथ में लिखा है सब सही है तीव्र वेग से चलने वाली जो आत्माएं अपने सत्कर्म और प्रकाश की गति के कारण वाइजर और पायनियर यह की तरह सूर्य की सीमा पार कर लेती हैं वे स्वर्ग लोक और उसके आगे ब्रह्म लोक शिवलोक और महा विष्णु लोक पर जाती हैं जहां पर यह समस्त ब्रह्मांड प्रति ब्रह्मांड श्वेत विवर श्याम विवाह ऊर्जा और प्रति ऊर्जा समाप्त हो जाता है उसके शीर्ष पर महाशिवरात्रि द्वीप है जिसमें भगवान श्री हरि विष्णु योग माया दूसरों के साथ निवास करते हैं और जहां पर भूख प्यास नहीं लगती और सभी आत्माएं सूर्य के समान चमकती हुई निवास करती हैं यह सब बातें कल्पना नहीं सच्चाई है और ऐसा हमने सभी भारतीय धर्म ग्रंथो का गहन और सूक्ष्म अध्ययन करके लिखा है यदि आप पढ़ाना चाहे तो उससे अधिक आनंददायक और ज्ञानदायक कोई भी वस्तु धरती पर नहीं मिलेगी 


देशकाल और समय और ब्रह्मांड के अनंत होने का प्रमाण भी हमारे धर्म ग्रंथो में कई बार मिलता है जब राजा रहे रंवतक अपनी पुत्री रेवती के साथ ब्रह्म लोक में उसके योग्य वरदान प्राप्त करने के लिए गए तब ब्रह्मा के केवल कुछ घड़ी बीते और तब तक धरती पर लाखों वर्ष बीत गए थे सतयुक्त रहता बीत चुका था द्वापर चल रहा था तब ब्रह्मा जी ने उन्हें सब कुछ समझते हुए वापस आकर बलराम से रेवती के विवाह करने को कहा ‌ इसी तरह जब हनुमान जी श्री राम की अंगूठी लेने पाताल लोक में गए तब वहां पर श्री राम की अंगूठी का पहाड़ बना हुआ था देशकाल और युग कितने बीत गए कुछ पता नहीं था ऐसे ही जब ब्रह्मा जी भगवान श्री कृष्ण से मिलने आए और कहा कि मैं ब्रह्मा हूं तो भगवान श्री कृष्ण ने उनसे कहा कि आप किस लोक के ब्रह्म हैं तबब्रह्मा को ‌ आभास हुआ की अनगिनत समानांतर ब्रह्मांड में अनगिनत ब्रह्मलोक हैं 

ऐसा दृश्य श्री कृष्ण भगवान ने अनंत विराट रूप में माता यशोदा माता कौशल्या महाभारत युद्ध में अर्जुन और दुर्योधन की सभा में भी दिखाया था जिसमें कल्पना से परे अनगिनत ब्रह्मांड एक ही समय में गतिमान दिखाई दिए और ऐसा ही दृश्य काग भूसुंडी को भगवान श्री राम ने दिखाया था जब रोटी ‌ चीन के लिए बालक समझकर का भूसुंडी भगवान श्री राम के विराट मुंह में प्रवेश कर गए थे इस तरह देशकाल समय की 64 विमाएं भारत ने खोज लिया था जबकि आधुनिक विज्ञान केवल 11 विमाएं ही खोज सका है। ‌ इसी तरह सनातन धर्म और संस्कृति की सभ्यता ने 84 लाख योनियों की धरती पर खोज किया है जबकि विज्ञान अभी मुश्किल से 20 लाख योनियों की खोज कर सकता है हमारे दिव्यास्त्र जिसमें ब्रह्मास्त्र नारायण अस्त्र पाशुपत अस्त्र एवं अस्त्र भार्गव और पर्जन्य तथा वायव्य ‌ सम्मोहन और प्रदीप जैसे महान दिव्या तारा थे जिसे धरती को और पूरी आकाश गंगा को नष्ट किया जा सकता था अभी वैज्ञानिक प्रगति उससे बहुत पीछे है इसीलिए विज्ञान में कभी एक सिद्धांत आता है तो फिर दूसरा और फिर तीसरा आ जाता है क्योंकि सत्य तक वह पहुंच ही नहीं पाते परमाणु सिद्धांत को ही ले लीजिए डाल्टन से लेकर बोर बरी समर फील्ड हाइजेनबर्ग और अब क्वांटम सिद्धांत आया हुआ है और कोई भी ठीक नहीं पाया जबकि भारत के कनाडा का परमाणु सिद्धांत आज भी अटूट है जिसमें उन्होंने झरोखे से आई हुई सूर्य की रोशनी में दिखने वाले सूक्ष्म कणों को 60 बार तोड़ने के बाद मिलने वाले कार्ड को परमाणु कहा था।


इसीलिए कहा गया है हरि अनंत हरि कथा अनंता और जो नहीं देखा नहीं सुना जो मनहू न समाय ‌ वाली बात सही है सूर्य के साथ रथ के घोड़ा का रहस्य आज सबको मालूम हो गया है कि सूर्य से निकलने वाली साथ किरणें ही उनके साथ रथ हैं और सूर्य से ओम की अनंत ध्वनि निकलती है और यह ध्वनि संपूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त है हमारे सौरमंडल से आगे बढ़ने पर विज्ञान का सारा सिद्धांत विफल हो जाता है ‌ हमारे ऋषि मुनि वैज्ञानिक ऐसे विमान अंतरिक्षण बन चुके थे जो अनंत गति को प्राप्त करके अपनी आकाशगंगा को पार कर कुछ ही घंटे में ब्रह्मांड के शीर्ष पर स्थित महाश्वेत द्वीप पर पहुंच जाता था।‌ प्राचीन भारत में विमान अंतरिक्ष यान और ब्रह्मांड यान विद्यमान थे पुष्पक सौभ और अन्य विमान को तो सब लोग जानते हैं। ‌ श्वेत श्याम विवर को लोग जानते थे कृष्ण नक्षत्र अर्थात ब्लैक होल के अंदर से जाते हुए भगवान श्री कृष्णा और अर्जुन का परम वेगशाली रथ अर्थात अंतरिक्ष यान ऐसे घनघोर अंधेरे में डूब गया कि करोड़ सूर्य के सामान प्रकाशित चक्र भी उसमें जलते हुए दिए के समान दिखाई दे रहा था ऐसा महाभारत में बिल्कुल स्पष्ट लिखा गया है और यह कल्पना नहीं है।


अरणोअरणीयान महतोमहीयान ‌ ‌ का महान आश्चर्यजनक और सबसे बड़ा सिद्धांत भारत की ही देन है अर्थात छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा जो कुछ संभव है दिखाया गया है सबसे छोटे में परमाणु के अंतिम रूप की और सबसे बड़े में अनंत ईश्वर की कल्पना की गई है अब आप सोच लीजिए कि यह अनंत ब्रह्मांड जो ईश्वर के एक रोम में स्थित है वह ईश्वर स्वयं में कितना विराट होगा और इतना बड़ा अनंत और विराट ढांचा अपने आप बन जाना किसी भी भौतिक रासायनिक नियम में संभव नहीं है 

इसलिए अपने धर्म दर्शन और अध्यात्म ग्रंथ को पढ़ो उसमें छिपी वैज्ञानिक तथ्य को आप लोग समझो ऐसा कुछ नहीं है जो हमारे संस्कृति सभ्यता और ग में नहीं है लेकिन गूगल या हो इंटरनेट पढ़कर और मोबाइल में व्यस्त समय विताकर हमें कुछ भी प्राप्त होने वाला नहीं है केवल शरीर रोग और बीमारियों से ग्रस्त हो जाएगा और बुद्धि भ्रष्ट हो जाएगी अपनी मौलिक कल्पना ज्ञान को देंगे और छोटे-छोटे काम गुड़ा गणित जोड़ भाग के लिए भी हम मोबाइल पर निर्भर हो जाएंगे 24 घंटे में 2 घंटे से अधिक समय मोबाइल पर देना मूर्खता है इसीलिए महा ब्रह्म ऋषि वेद व्यास जी ने महाभारत को लिखकर व्याख्या करते हुए लिख दिया था जो कुछ इस महाभारत में नहीं है वह ब्रह्मांड में कहीं नहीं है और यही अंतिम सच है ‌ हमारे देश में तो लक्ष्मण श्री राम मांधाता मुझको कुंड रघु अर्जुन भीष्म परशुराम मेघनाथ जैसे परम आधार रति योद्धा थे जिनके पास ब्रह्मांड की समस्त शक्तियां थी और जो चाहते तो समग्र ब्रह्मांड को मिटा सकते थे लेकिन ऐसा किसी ने नहीं किया क्योंकि हमारा देश सृजन का देश है विनाश का देश नहीं और बाकी धर्म और देश विनाश के अग्रदूत हैं जो सारी दुनिया का और अंत में अपना खुद का विनाश कर लेंगे।

Tuesday, 3 March 2026

यदि आप सच्चे सनातनी हिंदू हैं अर्थात दुनिया का कोई भी वह व्यक्ति जो क्रिश्चियन मुसलमान और यहूदी नहीं है इस चित्र पर बहुत गहराई से विचार करें और अपना विचार व्यक्त करें -डॉ दिलीप कुमार सिंह

यदि आप सच्चे सनातनी हिंदू हैं अर्थात दुनिया का कोई भी वह व्यक्ति जो क्रिश्चियन मुसलमान और यहूदी नहीं है इस चित्र पर बहुत गहराई से विचार करें और अपना विचार व्यक्त करें -डॉ दिलीप कुमार सिंह 

चित्र में राधा और कृष्णा जी को होली खेलते दिखाया गया है वह भी पिचकारी के द्वारा और जिस तरह उन्होंने वस्त्र पहने हैं वह कभी भी ना तो उचित है और ना शोभा दे रहा है ।

मैं सारे विद्वानों को चुनौती देता हूं कि वह अकबर के समय के पहले रंग वाली ग़दी होली का यदि एक भी उदाहरण दिखा दें तो मैं उनका मान लूंगा कि वह विद्वान है ।

होली विशुद्ध रूप से वसंत के आगमन का पर्व है यह फसलों का पर्व है उत्साह उमंग का पर्व है सत्य अज्ञान और अंधकार पर सत्य ज्ञान और प्रकाश का पर्व है यह लोगों को नैतिकता और सदाचार सीखने वाला पर्व है चाहे वह भक्त प्रहलाद की कहानी हो या धुंध नामक राक्षसी हो कहीं भी रंग वाला गंदा होली खेलने का वर्णन किसी भी धर्म ग्रंथ वेद पुराण में नहीं हुआ है ।


क्या आपको पता है कि यह सब क्यों हो रहा है यह सब हमारे सनातन धर्म को पूरी तरह मिटाने के लिए हो रहा है क्योंकि स्त्रियों किसी भी धर्म की धुरी होती हैं उदाहरण के लिए मुस्लिम और क्रिश्चियन धर्म को देख लो उनका सारा धर्म वहां की महिलाओं के द्वारा फैल रहा है और लगातार बढ़ रहा है आप सिर पटक कर मर जाओ लेकिन एक मुस्लिम महिला कभी भी नकाब हिजाब बुर्का नहीं छोड़ सकती चाहे भीषण गर्मी के पसीने में वह पूरी तरह से डूब जाए ।


यह 1000 वर्ष से अधिक समय से लगातार चल रहा है और हालत इतनी खराब हो चुकी है कि सारे देवी देवता गंदगी और अश्लीलता का पर्याय बन गए हैं यहां तक की भगवान कृष्ण को चूड़ी बेचने वाला बना दिया गया है जबकि उसे समय चूड़ी होती ही नहीं थी कब सुंदर सुगंधित फूलों की जगह महिलाओं ने सोना चांदी पहनना शुरू कर दिया उनको यह ज्ञान भी नहीं है ।

कब हमारे विवाह संस्कार और मांगलिक कार्य में डीजे आर्केस्ट्रा और गंदे गाने बजाने लगे यह भी लोग समझ नहीं पाए और धीरे-धीरे वही शुभ और मंगल कम तथा विवाह का प्रतीक बन गया और यदि आज पूछो तो सभी यही कहेंगे कि विवाह का अर्थ ही है डीजे आर्केस्ट्रा शराब पीकर गंदगी करना ।

इसी तरह त्यौहार में भी खुलकर मांस मदिरा और गंदगी का सैलाब रहता है जैसे कि आज होली में आप पूरे देश में देख सकते हैं धीरे-धीरे कब हम सभी लोग भोजन को खाना बधाई को शुक्रिया धन्यवाद मुबारक कहने लगे कब हम विवाह को शादी बोलने लगे और कब माता-पिता मम्मी पापा हो गए समझ ही में नहीं आया ।


हालात यहां तक बिगड़ चुकी है कि आज हम शुभ होली शुभ दीपावली की जगह हैप्पी होली कहकर बड़े प्रसन्न हो रहे हैं यही काम कभी वामपंथी और वृंदा करात कहा करते थे की मस्त-मस्त है चाहे गाय काहो चाहे सूअर काहो चाहे बकरी का हो जब उनसे प्रश्न किया गया कि महिला तो महिला है चाहे वह पत्नी हो मां हो बहन हो बेटी हो बहू हो तब से गायब हो गई है ।

ऐसा इसलिए है कि हम अपने धर्म ग्रंथ को पढ़ने नहीं है पढ़ कर समझते नहीं हैं जो नहीं समझना है वही ज्यादा पढ़ते हैं जैसे ढोल गंवार शूद्र पशु नारी यह तो पढ़ेंगे लेकिन क्यों कहा गया और किसने कहा यह कभी नहीं पड़ेंगे इसलिए सच नहीं जान पाते अहिंसा परमो धर्म कह कर गांधी ने देश बर्बाद कर दिया जबकि उसके साथ जुड़ा है धर्म हिंसा तदैव च। 


देश धीरे-धीरे कर बन गया यहां तक अफवाह फैला दी गई की महाभारत पढ़ने वाले घर में रोज लड़ाई झगड़ा होता है जबकि महाभारत और गीता पढ़ने वाले घर में धीर-वीर गंभीर माता-पिता के आज्ञाकारी बालक और बालिका जन्म लेते हैं ।


हमारा देश अहिंसा कैसे मान सकता है जिसके सभी देवी देवता एक से बढ़कर एक भयंकर अस्त्र-शस्त्र और दिव्यास्त्र से सुशोभित हैं कोई भी ऐसा देवी देवता आप नहीं दिखा सकते जिसके हाथों में अस्त्र-शस्त्र ना हो फिर कहां से और कैसे हम कर बन गए और अपने बच्चे बच्चियों को नाच गाना डांस सिखाने लगे जबकि पहलेकी माता ‌ बेटी बहन पत्नी उनको हथियार चलाना और वीर बना सिखाती थी । हमारे परमवीर तो तपस्या में भी अपना अस्त्र-शस्त्र नहीं छोड़ते थे तो अहिंसा इसमें कहां से आ गई अहिंसा शक्तिशाली लोगों का धर्म है कर और कमजोर लोगों का नहीं।

आज अंग्रेजी भाषा और क्रिश्चियन संस्कृति सभ्यता हमारे लिए सम्मान और अनुकरण का प्रतीक चिन्ह बना कर रह गई है हिंदी और अपनी भाषाएं लोग इसलिए बोलते हैं कि जीवन भर पढ़ने के बाद भी धड़ल्ले से अंग्रेजी पढ़ लिख बोल और समझ नहीं पाते अन्यथा कोई भी हिंदी अपनी भाषा बोलना ही बंद कर देगा यह सब पाटन की चरम सीमाएं हैं और अनेक गद्दार चापलूस चापलूस मक्खनबाज दलाल चमचे 420 इस पोस्ट को पढ़कर लाल पीला हरा नीला आग बबूला हो जाए तो क्या कहा जाए

आज से 100 साल पहले हमारे देश की स्त्रियां बिना कलंकित और अपवित्र हुए पूरा जीवन बिता देती थी और आज सब कुछ उपलब्ध होने पर भी क्यों वह कुपन्थी और गंदगी की ओर दौड़ नहीं है इसमें स्त्रियों का दोष नहीं है सारा दोस्त यहां के पुरुष लोगों का है ।


मैं सभी ‌ सच्चे सनातनी स्त्री पुरुषों से आवाहन करूंगा कि इस तरह अपने देश के धाम सदाचार नैतिकता और सच्ची बातों का वर्णन अवश्य करें अन्यथा जो पापी और विधर्मी शैतान चाहते हैं वह अपने कार्य में सफल होंगे ।

जितने भी हमारे खलनायक है उनको महानायक बनाया गया चाहे दुर्योधन हो चाहे कारण हो चाहे रावण हो चाहे जरासंध हो सबसे बड़ा उदाहरण कर्ण का देना चाहता हूं जिसको जबरदस्ती बहुत बड़ा उदार और मानवता का रक्षक कहा जाता है ।

करण जैसा कुटिल ना राधा झूठा मक्कार व्यक्ति कहीं हो ही नहीं सकता उसने साक्षात भगवान परशुराम से झूठ बोलकर दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्राप्त किया द्रोपदी के स्वयंवर में जब वह धनुष बाण नहीं चढ़ा सका तो द्रौपदी को पाने के लिए सारे कुकर्म कर डाला और इतना गंदी बात बोला की वेश्या का धर्म क्या धर्म क्या उसने गाय की हत्या किया यह जानते हुए भी की अभिमन्यु उसका सभा भतीजा है उसने उसका कवच काट डाला पांडव लोग उसके भाई थे उसको मालूम था फिर भी उसने दुर्योधन का साथ दिया ऐसे धार्मिक कर्ण को हम आप नहीं हमारे विदेशी शत्रु विख्यात कर रहे हैं जिससे अर्जुन जैसे महावीर पीछे चले जाएं ।‌ मित्रता का उदाहरण कारण का नाटक था वास्तव में वह अधर्मी था सत्य और धर्म का अनुसरण नहीं करने वाला था।

उसे समय पूरे ब्रह्मांड में दो सबसे सुंदर स्त्रियां थी एक उर्वशी और दूसरी उत्तर जिसमें उत्तर केवल 16 वर्ष की कन्या थी और उर्वशी तो सारे ब्रह्मांड की सर्वश्रेष्ठ सुंदरी थी दोनों से अर्जुन को विवाह करने का सुनहरा अवसर र्मिला लेकिन उन्होंने एक को मां कहा और दूसरी को बेटी क्या आज कोई ऐसा व्यक्ति है जो इस तरह का उदाहरण दे सके आज तो गुरु लोग अपनी शिक्षाओं के साथ ही कुकर्म करते हुए रोज पकड़े जाते हैं ।


कहने का अर्थ यह है कि हम इतने गिर गए हैं की सबसे गिरे हुए विधर्मी सूअर शैतान भी हमको अच्छा लगने लगे हैं उनका सड़ा गला पाव टोस्ट रोटी बिस्किट मुर्गी मुर्गा सेवई हमको अच्छा लगने लगा है जबकि हमारी दादी और अम्मा के समय तक ऐसा था कि मुस्लिम घर का छुआ पानी भी नहीं पीते थे एक बार खुद मेरे सामने पिताजी और माताजी में जमकर झगड़ा हुआ था क्योंकि पड़ोस में रहने वाली एक मुस्लिम महिला थी उसके यहां से सेवई आ गया था इसके लिए पूरा महाभारत मचा और अंत में उसे फेंकना पड़ा था ।


एक और घटना बता रहा हूं एक बार हमारे गांव का एक हरिजन मुकदमा लड़ने आया तब मैं हाई स्कूल में पढ़ रहा था जब मैं उसको भोजन दिया तब उसने हाथ जोड़कर कहा बाबूजी आप किसी चीज में हमें खिला दीजिए लेकिन मुस्लिम के हाथ का छुआ बर्तन हमको मत देना। मैं उनसे कहा हमारे घर में ऐसा कुछ नहीं है हम सारे सनातनी हिंदू लोगों को उसी बर्तन में खिलाते हैं जिसमें खुद खाते हैं लेकिन उसकी पवित्र भावना देखकर मैं समझ गया कि जिसको कुछ मूर्ख इतना अछूत समझते हैं वह हरिजन भी एक मुस्लिम से लाखों गुना अच्छा है आज भी मैं वह घटना नहीं भूल पाया ।

इसलिए है आर्य पुत्रों भारत की महिलाओं लड़के लड़कियों जागो सपने में मत रहो गांधी चीजों से दूर हटो और विदेशी तथा देश के गद्दारों के मिले-जुले प्रयास को समाप्त करो वैसे भी सनातन धर्म कभी समाप्त नहीं होगा एक ही रामकृष्ण गौतम बुद्ध महावीर स्वामी नानक शिवाजी राणा प्रताप मांधाता चाणक्य चंद्रगुप्त पैदा होंगे और सारे विधर्मी शैतानों का जड़ से संघार कर देंगे ।

इसीलिए तो दुनिया में अनगिनत पुल बने और टूट गए लेकिन 1700000 साल पहले भगवान राम का बनाया रामसेतु आज भी जिंदा है जूनागढ़ टूटा किंतु खड़ा गिरनार है होते ही रहेंगे सिंह यहां की गुफाओं में आर्य भूमि अंत में रहेगी आर्य भूमि ही-

जिन विधर्मी म्लेच्छ शैतानों की छाया से भी दूर रहने के लिए हमारे देश की महिलाओं ने लाखों की संख्या में अग्नि में कूद कर जौहर कर लिया आज इस महान गड्ढे और नीच लोगों के साथ हमारे धर्म की लड़कियां औरतें भाग रही है यही दिखता है कि हम पतन की सारी सीमाओं को तोड़कर बहुत अधिक पतित हो चुके हैं‌ हालत इतनी खराब है कि आज होली जैसे महापर्व पर भी दक्षिण भारत के अनेक राज्यों में स्कूल कॉलेज और बड़ी-बड़ी कंपनियां खुली हुई है लेकिन क्या ईद बकरीद और क्रिसमस तथा न्यू इंग्लिश ईयर पर एक भी कंपनी स्कूल कॉलेज खुला रहता है यदि हां तो बता दीजिए

Sunday, 1 March 2026

फूलों की होली श्रद्धा के साथ साथ प्यार ओ मुहब्बत का पैग़ाम* गत 13 वर्षों से रामपुर के अम्बेडकर पार्क में मुस्लिम महासंघ द्वारा फूलों की होली कार्यक्रम आयोजित हो रहा है ।

*फूलों की होली श्रद्धा के साथ साथ प्यार ओ मुहब्बत का पैग़ाम* 
गत 13 वर्षों से रामपुर के अम्बेडकर पार्क में मुस्लिम महासंघ द्वारा फूलों की होली कार्यक्रम आयोजित हो रहा है । 
राष्ट्र में मुस्लिम समाज में अमीर खुसरो,हज़रत वारिस अली शाह और कई औलिया जो कि सूफी समाज से रंग और होली होती रही है  साथ ही मुस्लिम नवाबों और राजाओं के इतिहास से भी यह पावन पर्व मनाने का इतिहास जुड़ा है।
रामपुर यूपी में भी मुस्लिम महासंघ एवम अन्य सामाजिक तंजीमों के साथ मिलकर होली पर्व का आयोजन श्रद्धा और प्रेम के साथ आयोजित किया जाता है।
होली से पूर्व फूलों की होली में सभी धर्मों के लोग शामिल होते हैं।
रंग गुलाल उड़ा कर एक दूसरे को गले लगा कर बधाई देते हैं।
इस बार रमज़ान के रोज़े रखकर मुस्लिम समाज ने जोश ओ खरोश के साथ होली का पर्व मनाया।
रंग इस बात का प्रमाण है के जब बहुत से रंग पानी में मिल जाते हैं तब एक मुहब्बत का रंग बन जाते हैं।
आज हर भारतवासी को रंगों की भांति राष्ट्र प्रेम के रंग में रंग जाना है। आज यह प्रण लेने की बहुत जरूरत है।
मुस्लिम महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष फ़रहत अली खान ने सभी देशवासियों को होली की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर प्रमुख समाजसेवी मुनीश शर्मा, अवतार सिंह, प्रमोद आहूजा, रवि मेहरा, नदीम खान बाकर खान, रेहान खान एड्वोकेट, एजाज़ कमर, यासीन खान, वाहिद अली, मोहम्मद शकील, मारिया फरहत आरिफा बेगम , मशीअत फातिमा, हसनत फातिमा,कशिश, रविश, रोशनी, आंचल, नविता, माही, गुंजन, किरण आदि और सर्व समाज के सैकड़ों लोग शामिल रहे।

3 मार्च को लगने जा रहा है भयानक चंद्र ग्रहण-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

[3/1, 8:13 PM] Dr  Dileep Kumar singh: 3 मार्च को लगने जा रहा है भयानक चंद्र ग्रहण-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 
चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण अद्भुत खगोलीय दृश्य हैं जो वर्ष में केवल तीन से चार बार लगाते हैं अंग्रेजी वर्ष के 2026 में ‌ भारत में पहला दृश्य मन चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है केवल 17 मिनट तक रहेगा यह 6:46 तक रहेगा और 6:29 से प्रारंभ होगा। इस बार का चंद्र ग्रहण खूनी चंद्र ग्रहण है जिसे अंग्रेजी में ब्लडमून कहा जाता है भारत में तो यह नहीं दिखेगा लेकिन संसार के अनेक देशों में खूनी चंद्र ग्रहण दिखाई देगा।

चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण से 9:00 घंटे पहले लगता है। इसलिए भारत में इसका सूतक 9: 30 से प्रारंभ हो जाएगा‌ लेकिन केवल 17 मिनट के चंद्र ग्रहण के कारण इसके सूतक का कोई विशेष महत्व नही होगा‌ फिर भी सावधानी रखना आवश्यक है विशेष बात यह है कि इस ग्रहण का पंचांग में परीक्षित भाग दिन में लग रहा है। इसलिए भारत में इसका बहुत कम प्रभाव पड़ेगा फिर भी कम से कम 3:00 बजे से लेकर 7:00 बजे तक यदि हो सके तो भोजन इत्यादि से बचकर रहना चाहिए यदि तरल पदार्थ दूध पानी इत्यादि को पीना है तो उसमें तुलसी की पत्तियां या दूब घास डालकर उसका प्रयोग कर सकते हैं।

चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण का सबसे पहले पड़ा भारत में वैदिक काल से ही चल गया था जिस स्थान पर चंद्रमा और सूर्य के बीच में पृथ्वी आती है वह राहु स्थान होता है और चंद्र ग्रहण लगता है इसीलिए कहा गया कि राहु नाम का रक्षा चंद्रमा को ग्रस लेता है‌ इसी तरह जब पृथ्वी और सूर्य के बीच चंद्रमा आता है तो उसे स्थान पर केतुस्थान कहा जाता है और केतु के द्वारा सूर्य को निगलना कहा जाता है।‌ इतिहास का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण महाभारत काल में और सबसे लंबा चंद्र ग्रहण वैदिक काल में हुआ था। 

3 मार्च को लगने वाले पूर्ण चंद्र ग्रहण में चंद्रमा खूनी लाल नारंगी रंग का दिखाने के कारण ही इसको खूनी चंद्रमा या ब्लड मून कहा जाता है इसका सारी दुनिया पर बहुत ही खतरनाक और खूनी असर पड़ता है जिसे दुनिया भर में मार्केट हिंसा आतंकवाद अपराध एवं अपराध और जल संबंधी भीषण दुर्घटनाओं में प्रचंड वृद्धि होती है लोगों का धैर्य एक महीने तक बहुत कम हो जाता है और बात-बात में लोग उत्तेजित हो जाते हैं इस बार के चंद्र ग्रहण का प्रभाव एक सप्ताह पहले से लेकर 1 महीने बाद तक रहेगा अमेरिका ईरान और इजराइल का युद्ध इसी ग्रहण के पूर्व ग्रहण का प्रभाव है आगे भी तमाम देशों में युद्ध और अन्य महान खतरे उत्पन्न होंगे मंगलवार को लगने के कारण या ग्रहण और भी अधिक खूनी हो जाएगा और दुनिया में बहुत बड़ी-बड़ी घटनाएं घटित होगी।

इस बार क्या खूनी चंद्र ग्रहण पश्चिमी भारत को छोड़कर पूरे भारत में दिखाई देगा लेकिन जैसे-जैसे पूर्व और दक्षिण में बढ़ेंगे यह चंद्र ग्रहण और उसका समय बढ़ता जाएगा दक्षिण पूर्वी एशिया प्रशांत महासागर और उसमें स्थित आदमी को में ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के अधिकांश भागों में पूर्ण चंद्र ग्रहण लंबे समय तक दिखाई देगा और इसमें चंद्रमा लाल हल्का नारंगी जैसा दिखाई देगा और जहां जितना ही अधिक समय तक चंद्र ग्रहण होगा वहां उतना ही अधिक दुर्घटना विनाश अपराध युद्ध अपराध एवं अन्य प्रचंड प्राकृतिक दुर्घटनाएं घटित होगी सुनामी लहरे भूकंप पर ज्वालामुखी विस्फोट इस खूनी चंद्र ग्रहण का सीधा-सीधा प्रभाव है अंतरिक्ष में भी उपग्रह और रैकेट में भीषण दुर्घटनाएं हो सकती है दुनिया के कुछ राजनेता मारे जाएंगे तो एक दो देशों में सट्टा का पलट भी होगा भारत के लिए भी या ग्रहण शुभ और लाभकारी नहीं है‌ पूरी दुनिया के लिए पूरा मार्च महीना बहुत ही खतरनाक और उथल-पुथल हलचल और दुर्घटनाओं से भरा रहेगा

Saturday, 28 February 2026

महापर्व होली का संपूर्ण वैज्ञानिक ‌ और धार्मिक विवेचन डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशकप्रस्तावना

: महापर्व होली का संपूर्ण वैज्ञानिक ‌ और धार्मिक विवेचन 
 डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक

प्रस्तावना 

महापर्व होली वैदिक काल से उपनिषद रामायण महाभारत से आज तक भारत के प्राचीनतम महापर्वों  में से एक है भारत के सबसे बड़े महापर्व दीपावली दशहरा रक्षाबंधन और होली में से होली इस समय सर्वाधिक लोकप्रिय महापर्व बन गया है होली का महापर्व हर वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा के दिन पड़ता है इसी दिन होलिका दहन होता है और अगले दिन लोग रंग भरी होली अबीर गुलाल फूलों की ओर भस्म की होली खेलते हैं लेकिन प्राचीन काल में गीले रंग की ‌‌ कीचड़ और डीजल मोबिल और गंदी चीजों तथा गोबर की होली का कहीं कोई अस्तित्व नहीं था।

होली मनाए जाने का कारण 

होली मनाये जाने के विभिन्न कारण है जिसमें पहला कारण है कि भगवान शिव को उनके अखंड समाधि से विचलित करने के कारण कामदेव ने बहुत ही सुंदर कामुक वातावरण पैदा कर अपनी पत्नी रति के साथ शिवजी को समाधि से जागृत कर दिया या और शिवजी ने तीसरा नेत्र खोल कर कामदेव को भस्म कर दिया जिससे पूरे विश्व में हाहाकार मच गया तब उन्होंने बिना शरीर के कामदेव को जीवन प्रदान किया होली मनाए जाने का यह एक प्रमुख कारण है दूसरा कारण है होलिका द्वारा प्रहलाद को जलाकर मारने का प्रयास जिसमें प्रहलाद भगवान श्री हरि विष्णु की कृपा से जीवित बच गए और होलिका भस्म हो गई उसका वरदान भी उसे नहीं बचा पाया इसलिए होली मनाई जाती है।

होली महापर्व से जुड़ी एक कथा ढुंढा नाम की राक्षसी की है जिसे शिवजी ने अमरत्व का वरदान दिया था उसने बच्चों पर भयंकर अत्याचार किया तब सम्राट रघु ने ब्रह्म ऋषि  वशिष्ठ की सलाह पर बच्चों से नाच गाना शोरगुल और हुड़दंग मचाकर लकड़ी उपले इकट्ठा करके उसमें अन्य जड़ी बूटियां डालकर मंत्र पढ़कर उसे जलाने का उपाय बताए जिससे ढुंढा नाम की राक्षसी का विनाश हो गया होली की की वर्तमान प्रथा ‌ और होलिका दहन अधिक से अधिक इसी पर आधारित है।

‌ होली शब्द का अर्थ और इसका ‌ वैज्ञानिक और  मनोवैज्ञानिक  कारण 

प्राचीन होलिका पर्व और वर्तमान स्वरूप वास्तव में होली वास्तव में होलका का शब्द से निकला है होलका का अर्थ कच्चा और आधा पक्का अन्न होता है होलिका दहन में आज भी अन्न को दहन करने की परंपरा तभी से चली आ रही है लेकिन वास्तव में होली का महापर्व ऋतु परिवर्तन का पर्व है जिसमें गर्मी आने वाली होती है और ठंडी विदा होने वाली होती है ऋतु परिवर्तन के संक्रमण काल में जब लोग प्राचीन काल में खाली रहते थे तब होली का पर्व शुरू हुआ इसे प्राचीन काल में अन्न का महापर्व और काम महोत्सव भी कहा जाता था इस समय लोगों का उत्साह उमंग और उत्तेजना चरम पर होती है यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो चुका है और होलिका पर्व के बाद यह तनाव उत्तेजना काफी हद तक दूर हो जाता है मनोवैज्ञानिक रूप से हर व्यक्ति होली में सहभागिता करके काफी हद तक अपने अकेलेपन की भावना से मुक्त हो जाता है उसे लगता है कि उसका भी संसार में कोई है।

‌ रंग वाली होली अकबर के समय से प्रारंभ हुई 

यह असत्य पर सत्य की अंधकार पर प्रकाश की और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक है  होली मनाने के बाद ही अन्न कटना शुरू हो जाता था क्योंकि फसलें तैयार हो जाती हैं 8 दिन का होलाष्टक पूरी तरह आराम करने का आमोद प्रमोद का और उमंग उत्साह का दिन होता है जहां तक होली पर रंग की बात है तो उसमें अबीर गुलाल सूखे रंग का प्रयोग होता था‌ मुझे वातावरण में शुद्ध हो जाता था और वातावरण में पहले हुए विषाणु जीवाणु कीटाणु रोगाणु नष्ट हो जाते थे लेकिन गीले रंग का प्रयोग अकबर के समय में उसकी रंगीन कामुक प्रकृति को पूरा करने के कारण शुरू हुआ मेवाड़ और विजयनगर की राजधानी हंपी में 16वीं शताब्दी के चित्रों में इसका वर्णन मिलता है रीतिकाल में भी रंग वाली होली का वर्णन मिलता है इसके पहले कहीं गीले रंग का वर्णन नहीं मिलता है।

होली पर्व के समय की प्रकृति और वातावरण 

वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो होली का महापर्व बसंत ऋतु में आता है इस समय संपूर्ण वातावरण फल फूल फसलों से भरा होता है और वातावरण में आम के बौर एक बहुत ही तीखी और कामोत्तेजक गंध छोड़ते हैं और सभी पेड़ पौधे पुष्पों से लदे रहते हैं शीतल मंद सुगंधित मलय पर्वत की हवा बहती हैं चारों ओर का वातावरण बहुत ही सुंदर सम्मोहक उत्तेजक होता है। ना अधिक ठंड और ना अधिक गर्म मौसम होता है यह समय प्रकृति प्रजनन और वंश वृद्धि के लिए सर्वोत्तम होता है इसके साथ-साथ चारों तरफ प्रकृति में अद्भुत छटा होती है और फसलों के पक जाने की खुशी भी रहती है होलिका दहन होने के कारण वातावरण में व्याप्त विषाणु कीटाणु रोगाणु जीवाणु नष्ट हो जाते हैं और विभिन्न जड़ी बूटियां और फसलों के आग में जलाने से उत्पन्न सुगंध संपूर्ण वातावरण को संतुलित करके हानिकारक प्रभाव को नष्ट कर देती है और वातावरण में फैले विषैले वातावरण और जहरीले जीव जंतुओं को भी बिलों के अंदर छुप जाने को बाध्य करती हैं इस प्रकार हर महापर्व की तरह होली का महापर्व भी पूरी तरह विज्ञान सम्मत प्रकृति और पर्यावरण पर आधारित है तेल और उबटन (सरसों का बुकवा)लगाने से शरीर की हड्डी नस नाड़ियां सभी स्वस्थ हो जाती हैं।

गीले रंगों का प्रयोग कब से शुरू हुआ 

गहराई से देखने पर पता चलता है कि गीले रंग का प्रयोग मुगलों के काल में शुरू हुआ जिसे अकबर ने खूब फैलाया अकबर का मीना बाजार तो जगत विख्यात है ही बाबर ने इस त्यौहार को मदिरा काम वासना से जोड़कर इस महापर्व को विकृत किया और जनता तथा राजपूतों को मांस मदिरा और नशे का अभ्यस्त कर दिया कालांतर में होली मांस मदिरा जुआ और अश्लीलता का पर्व बन गया और आज तक इसी रूप में चल रहा है इसको गंदा गंदा अश्लील और मैथुनी करने में भोजपुरी फिल्मों और बालीवुड फिल्मों का बड़ा हाथ है और अमिताभ बच्चन पवन सिंह हनी सिंह जैसे रसिक लोगों ने इसको गंदगी के रूप में बदलने में सबसे बड़ा योगदान दिया ।

आज तो लोग कीचड़ तेल मोबाइल यहां तक की मल मूत्र और गंदे चीजों गोबर  इत्यादि फेंक कर होली मनाते हैं और इसके रूप को विकृत और वीभत्स कर दिए हैं रसिक रंगीन मिजाज लोग होली को बिल्कुल नंगा कर दिए हैं और इसमें रसिक रंगीन मिजाज की महिलाएं सबसे आगे हैं जो अपने धर्म से गिरकर अधर्म का कार्य करती हैं भगवान श्री कृष्ण से गीले रंगों को जोड़ना ठीक उसी तरह की मूर्खता है जिस तरह से बौधायन के प्रमेय को पाइथागोरस का प्रमेय कहना । अश्लीलता और विकृत रूप मांस मदिरा का प्रचार प्रसार नशे की चीजें यह सभी समाज के गंदे प्रभावशाली लोगों की देन है होली में ऐसा पहले कुछ नहीं था अब धीरे-धीरे लोगों में चेतना लौट रही है और होली के गंदे काम उत्तेजक और विकृत रूप से लोग दूर है रहे हैं जिस तरह से मुगल काल के पहले राधा का कोई अस्तित्व नहीं है इस तरह होली में रंगों का अस्तित्व ही मुगल काल के पहले नहीं है पहले केवल अबीर गुलाल और सूखे रंग का फूलों प्रयोग होता था यह प्रामाणिक रूप से बिल्कुल सत्य है

होली का वास्तविक स्वरूप 

प्राचीन काल में कहीं भी होली में आज की होली का कोई भी अंश नहीं था पहले लोग अबीर गुलाल हल्दी और फूलों की होली खेलते थे जिससे वातावरण पूरी तरह शुद्ध हो जाता था लोगों में रोग बीमारियां दूर हो जाती थी समाज में सद्भावना और सौभाग्य तथा सदाचार की भावना की वृद्धि होती थी और इससे वातावरण के फैले हुए सूक्ष्म जीवाणु विषाणु रोगाणु नष्ट हो जाते थे और वातावरण सुगंधित हो जाता था अग्नि में दहन करते समय उसमें लकड़ी उपले और विभिन्न प्रकार के जड़ी बूटियां अन्न के जलने से वातावरण सुगंधित और दिव्य हो जाता था मुगलों के आगमन के पहले कहीं भी आज की गंदी-भद्दी अश्लील और मैथुनी होली का कहीं भी वर्णन नहीं है इसको मुगलों ने गंदा रूप दिया फिल्मों ने वीभत्स से बनाया भोजपुरी फिल्मों ने और उसके गायको ने होली को गंदी ब्लू फिल्मों का रूप दे दिया और आज इंटरनेट मीडिया और समाज के गंदे रसिक रंगीन मिजाज के लोगों ने औरतों को अपने जाल में फंसाने का एक साधन बनाकर होली को अश्लीलता और दुराचार से भर दिया है जिसे समाप्त होना अति आवश्यक है यही कारण है कि होलिका दहन से लेकर होली खेलने तक शायद ही कोई ऐसा गांव बचता है जहां मारपीट ना होती हो नशा और मदिरा का प्रयोग भी मुगलों के द्वारा किया गया जिसको आज प्रिंट इलेक्ट्रानिक और सोशल मीडिया ने थोड़ा सा लाभ पाने के लिए जमकर प्रोत्साहित किया है होली का वास्तविक रूप कहीं खो गया है जिसको पुनर्स्थापित करने की बहुत आवश्यकता है।

होलिका दहन की विधि ‌ वर्ष 2026

होलिका दहन में बसंत पंचमी के दिन एक जीवाणु नाशक टहनी सामान्य रूप से रेंड़ के डाली के स्थापना की जाती है होलिका तक वह सूख जाता है और उसके चारों ओर सूखी लकड़ियां पत्ते उपली डालकर उसमें जड़ी बूटियों और अधपके  अन्न की बालियां और अन्य चीजें शुभ मुहूर्त में डालकर अग्नि लगाई जाती हैं और अग्नि से होलिका से संबंधित मंत्र :: ऊं होलिकायै नमः;;भी पढ़े जाते हैं और संकल्प किया जाता है कि ज्ञान प्रकाश और अच्छाई का विस्तार हो अज्ञान का अंधकार का और बुराई का नाश हो ।संपूर्ण गांव ‌ मोहल्ले और कॉलोनी  के लोग एक साथ एकत्र होते हैं जिससे गांव में एकता और बंधुत्व की भावना भी प्रबल होती है और प्रचंड अग्नि की ज्वालाएं और उससे उठते हुए सुगंधि चारों ओर फैल जाती है इसके बाद लोग पके हुए अनाज की बालियां ‌ नारियल जड़ी बूटियां अपने-अपने घरों में लाकर उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं और घर में तेल और उबटन लगाने के बाद उसका बचा हुआ अंश भी होली जलाने पर डाल देते हैं जिससे माना जाता है कि सभी साल भर स्वस्थ रहते हैं

इस वर्ष होलिका दहन कब है और होली कब खेली जाएगी

सभी कारण पर भद्र और चंद्र ग्रहण पर सूतक काल पर उदय तिथि पर और पंचांग के अन्य सभी तत्वों पर विचार विमर्श करने के बाद हमारेअलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर ‌ द्वारा पूरे प्रमाण के साथ यह स्थापित किया जाता है कि इस वर्ष 3 मार्च को सायंकाल 6:48 से रात 8:51 के बीच होलिका दहन किया जाना सबसे उचित होगा अन्य कोई भी विकल्प नहीं है और धूलंडी अर्थात रंगोत्सव अर्थात होली के रंग का त्योहार 4 मार्च को मनाया जाएगा जो प्रतिपदा की तिथि है इसका कारण नीचे दिया जा रहा है 

होलिका दहन के लिए आवश्यक होता है कि पूर्णिमा की तिथि हो यदि उदय तिथि हो तो सबसे अच्छी बात है भद्रा और सूतक की छाया ना हो ‌ सूर्यास्त के बाद का समय अर्थात प्रदोष काल होना चाहिए और चंद्र ग्रहण नहीं पढ़ना चाहिए और यह सभी एक साथ तीन मार्च को प्राप्त हो रहा है 

इस वर्ष होलिका दहन पर भद्रा की छाया है ‌ 2 मार्च को पूर्णिमा की तिथि सायं कल 5:55 से प्रारंभ हो रही है और 3 मार्च को 5:07 पर समाप्त हो रही है इसके अतिरिक्त इस वर्ष पूर्णिमा की तिथि 3 मार्च को ही है क्योंकि चंद्र ग्रहण प्रामाणिक रूप से पूर्णिमा के दिन पड़ता है यह अटल वैज्ञानिक सत्य है ‌ यह चंद्र ग्रहण दोपहर के बाद 3:20 से सायं काल 6: 47 तक रहेगा ‌ इन सब कर्म से अनेक विद्वान और ज्योतिषी 2 मार्च को होलिका दहन आधी रात के बाद 12:50 से दो बजे रात के बीच करने का विचार देते हैं जो भद्रा पुच्छ की दशा है लेकिन यह भी बहुत उचित नहीं है इसलिए इस कालखंड में होलिका दहन नहीं हो सकता और इसका सूतक काल 9 घंटे पहले प्रारंभ होता है इसलिए भी इसके पहले होलिका दहन नहीं होगा इसलिए इस वर्ष 3 मार्च की रात में 6-48 से रात में 8-50 तक होलिका का दहन विधि विधान पूर्वक मंत्रों के उच्चारण के साथ किया जाएगा। मंगलवार का दिन और बसंत की ऋतु होगी।

पूर्णिमा की तिथि 2 मार्च को 5.55 पर लगेगी और 3 मार्च को सायंकाल 5.07 पर समाप्त हो जाएगी इसलिए रंग वाली होली बिना किसी दुविधा के 4 मार्च को खेली जाएगी जिसमें कोई असमंजस की स्थिति नहीं है जबरदस्ती कोई करे तो अलग बात है धुलंडी अर्थात होली खेलना कृष्ण पक्ष प्रथम को होता है और इस प्रकार भी यह 4 मार्च को ही है इसमें कोई भी संदेह की बात नहीं है इतना अवश्य है कि  के बाद ही होली खेलने प्रारंभ किया जाए वह उत्तम रहेगा क्योंकि इस समय से कृष्ण पक्ष प्रारंभ होगा।

होलिका दहन में पूजा पाठ का विधान 

लोक आचार विचार और धर्म ग्रंथो के अनुसार होलिका दहन में**ऊं होलीकायै नमः **का मंत्र पढ़ा जाता है जिसमें गेहूं की बाली और अन्न के दाने कच्चा सूत जड़ी बूटियां नारियल और जल का अर्पण किया जाता है इसके अतिरिक्त दिन में लगाए जाने वाला उबटन का शरीर से गिरा हुआ भाग भी होलिका में जलाया जाता है शांति के साथ भगवान श्री हरि विष्णु और भक्त प्रहलाद और माता लक्ष्मी का ध्यान करना चाहिए कि ‌ और होलिका की परिक्रमा करके भुना हुआ अन्न का दाना लाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करना चाहिएया तो आप अपने इष्ट किसी भी देवी देवता का या श्री हनुमान जी का ध्यान कर सकते हैं यह बात बिल्कुल याद रखें की होली प्रमुख रूप से अन्न का पर्व है या वसंत के आगमन का महापर्व है इसके अतिरिक्त सनातन धर्म के हर महापर्व की तरह यह भी बुराई पर अच्छाई सत्य पर सत्य और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है किसी भी प्रकार का गलत कार्य दुराचार होली की आड़ में गंदे क्रियाकलाप किसी भी प्रकार के मांस मदिरा नशा का सेवन एवं पराई स्त्री पराये पुरुष का सेवन उनका मर्दन होली के सारे अच्छे फल को नष्ट करके पूरे परिवार पर आपदा विपत्ति और अंधकार का साया देता है वैसे कलयुग है जिसका जो मन में आ रहा है वही कर रहा है इसलिए उसका फल भी वैसे ही प्राप्त हो रहा है

Friday, 27 February 2026

दीवानी न्यायालय अधिवक्ता संघ जौनपुर सुभाष चंद्र यादव ‌ द्वारा मध्यस्थता केंद्र के बारे में श्रीमती रजनी सिंह और विजय शंकर श्रीवास्तव द्वारा स्थाई लोक अदालत के बारे उस्मान अली के द्वारा विधियों के में ‌ बताया गया।

राज्य ‌ विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के निर्देशन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में ‌ जनपद नया अध्यक्ष श्री सुशील कुमार शास्त्री के नेतृत्व और सचिव पूर्ण कालिक सिविल जज सुशील कुमार कुमार सिंह के ‌ देख रेख में ‌ आज 1:00 बजे साक्षरता जागरूकता कार्यक्रम लिंग की समानता स्त्री लोक अदालत स्थाई लोक अदालत लिंग चयन और बच्चों के लिंग में गिरावट कन्या भ्रूण हत्या के बारे में ‌‌ मोहम्मद हसन स्नातकोत्तर महाविद्यालय जौनपुर में आयोजित किया गया। इस विधिक साक्षरता जागरूकता शिविर में सिविल जज सीनियर डिवीजन/ सचिव ‌ सुशील कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह प्राचार्य डॉक्टर अब्दुल कादिर ‌ दीवाने अधिवक्ता संघ सुभाष चंद्र यादव विजय शंकर यादव रजनी सिंह आर पी सिंह ‌ सहित अन्य गणमान्यजन   ‌ शिक्षक और शिक्षिकाएं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
[2/26, 12:04 PM] Dileep Singh Rajput Jounpur: कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के वंदना के साथ हुआ और सभी उपस्थित अतिथियों का माल्यार्पण किया गया। महाविद्यालय के छात्र छात्राओं द्वारा स्वागत गीत सरस्वती मां के गीत और अन्य कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए ‌

संबोधित करते हुए सचिव पूर्णकालिक सीनियर डिवीजन‌‌ सुशील कुमार सिंह ने कहा कि चोपराधिकरण वर्तमान समय में अपने कार्य और उद्देश्य के बारे में बहुत व्यापक हो चुका है ‌ इसमें महिलाओं बच्चियों और पीड़ित व्यक्तियों क्तियों को निःशुल्क सहायता प्रदान की जाती है विद्वान और योग्य अधिवक्ता पैनल लायर ‌ परलीगल वॉलिंटियर्स एवं अन्य सदस्य गण विद्यमान है जो प्राधिकरण के साथ मिलकर पूरी तरह से निशुल्क सहायता देने में मदद करते हैं
[2/26, 12:25 PM] Dileep Singh Rajput Jounpur: डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह डिफेंस काउंसिल ‌ जनपद न्यायालय जौनपुर द्वारा बताया गया कि जब देश में मुकदमा की संख्या करोड़ों की संख्या में पर हो गए तब जस्टिस पी एन भगवती और जस्टिस भी कृष्णा अय्यर के नेतृत्व में गंभीर विचार विमर्श के बाद ‌ ‌ विधिक सेवा अधिनियम के अंतर्गत ‌ राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की स्थापना ‌ की गई ।‌‌‌ उसके बाद सफलता से प्रभावित होकर जल्दी है संपूर्ण भारत में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और सभी जिलों में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की स्थापना की गई‌। नियम कानून का उल्लंघन होता है तो सचिव पूर्णकालिक ‌‌ ‌ जनपद के किसी भी‌  अधिकारी को आदेश निर्देश जारी कर सकता है।‌ उन्होंने उपस्थित लोगों से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण स्थाई लोक अदालत और राष्ट्रीय लोक अदालतों से अधिक से अधिक लाभ उठाने का आग्रह किया
 इसी क्रम में अध्यक्ष ‌दीवानी न्यायालय अधिवक्ता संघ जौनपुर सुभाष चंद्र यादव ‌ द्वारा मध्यस्थता केंद्र के बारे में श्रीमती रजनी सिंह और विजय शंकर श्रीवास्तव द्वारा स्थाई लोक अदालत के बारे उस्मान अली के द्वारा विधियों के में ‌ बताया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता और आभार ज्ञापन प्राचार्य डॉ अब्दुल कादिर द्वारा किया गया

Wednesday, 25 February 2026

‌ एक 26 फरवरी से 10 मार्च तक मौसम की भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर

‌ एक 26 फरवरी से 10 मार्च तक मौसम की भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 

‌ आज अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस रहेगा जबकि कल 30 डिग्री सेल्सियस तापमान पर हो जाएगा और न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस रहेगा।कल से बहुत तेजी से बढ़ेगी गर्मी और मार्च के प्रथम सप्ताह में भीषण गर्मी पड़ेगी‌ जौनपुर पूर्वांचल आसपास उत्तर प्रदेश पश्चिम उत्तर मध्य और दक्षिण भारत के अनेक भागों में तापमान अचानक ही उछलकर 35 से 40 डिग्री सेल्सियस के भीषण स्तर पर पहुंच जाएगा 

जबकि इस कालखंड में न्यूनतम तापमान 15 से 17 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहेगा अर्थात सुबह और रात सुहानी होगी बढ़ती हुई प्रचंड अचानक गर्मी का असर हर जीव जंतु मनुष्य और पेड़ पौधों पर पड़ेगा इससे देर से बोई गई फसलों के उत्पादन पर भी असर पड़ेगा ‌ महाराष्ट्र राजस्थान पंजाब हरियाणा मध्य प्रदेश और उड़ीसा तथा दक्षिण के पथरी भागों पर अचानक इस भरी हुई गर्मी के कारण 10 मार्च से 20 मार्च के बीच संपूर्ण भारत में अनेक मौसम के परिवर्तन आंधी तूफान झंझा झकोर घन गर्जन वज्रपात वारिदमाला बिजली की चमक और गरज ‌ के साथ तेज हवाओं या आंधी तूफान का जन्म होगा और गई हुई विक्षोभ बनेंगे। जिसके कारण प्राकृतिक आपदाओं का भी सामना करना होगा भारत के अलावा भूमध्य रेखा से कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच के स्थान में एवं दक्षिण पूर्वी एशिया में भूकंप ज्वालामुखी सुनामी लहरें ‌ और कहीं कहीं भीषण वर्षा भूस्खलन देखने को मिलेगा हिंद महासागर और प्रशांत महासागर तथा अटलांटिक महासागर के कई क्षेत्रों में भीषण समुद्री चक्रवातों के जन्म होने की संभावना प्रतीत हो रही है। 

अचानक एकदम तेजी से बढ़ाने वाली गर्मी का कारण सूर्य के अंदर प्रचंड विस्फोट सौर कलंक और सौर ज्वालाओं का बना है इसमें पृथ्वी पर उत्पन्न भीषण विविध प्रकार के प्रदूषण और जहरीली हवा एवं प्लास्टिक के कूड़ा कचरा का भी बहुत बड़ा हाथ है जिसके कारण उत्पन्न जहरीली हवा अनेक परिवर्तन संपूर्ण दुनिया में करेगी। इस बार की गर्मी 1 मार्च से लेकर 15 अक्टूबर तक चलेगी और 15 अप्रैल से लेकर 15 जून तक पूरे देश में गर्मी अपने चरम शिखर पर होगी उत्तर के मैदाने में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस एवं भारत के कई स्थानों में 49 डिग्री सेल्सियस के बीच अंतर को पार करेगी