Monday, 24 August 2026

आज का अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस रहेगा जबकि कल का अधिकतम तापमान 33 और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहेगा जौनपुर नगर क्षेत्र में हल्की वर्षा बूंदाबांदी और कई पडोसी जिलों में हल्की सामान्य मध्यम वर्षा होने की आशा है कल भी लगभग यही मौसम रहेगा गर्मी उमस पसीना जारी रहेगा की कुछ स्थानों पर अच्छी वर्षा हो सकती है।

आज का अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस रहेगा जबकि कल का अधिकतम तापमान 33 और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहेगा जौनपुर नगर क्षेत्र में हल्की वर्षा बूंदाबांदी और कई पडोसी जिलों में हल्की सामान्य मध्यम वर्षा होने की आशा है कल भी लगभग यही मौसम रहेगा गर्मी उमस पसीना जारी रहेगा की कुछ स्थानों पर अच्छी वर्षा हो सकती है। 
वायु गुणवत्ता सूचकांक 40 से 60 के बीच हवा के दिशा मुख्य रूप से पूर्वी दक्षिणी रहेगी और गति 10 से 20 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी

पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 1 से 3 के बीच रहेगी और प्रदूषण की मात्रा न्यूनतम रहेगी यह मौसम 30 अगस्त के बाद फिर से बदल जाएगा

हमारे केंद्र के द्वारा जनवरी से जून तक 35 बार  लिखित भविष्यवाणी की गई थी केवल काम चलाने लायक वर्षा होगी इसलिए खेती और बागवानी मुख्य रूप से सूखी फसलों वाली करें क्योंकि इस वर्ष पिछले साल के अपेक्षा 70 से 80% वर्षा होगी ।
अभी तक 700 मिली लीटर वर्षा होनी चाहिए थी लेकिन आज तक की वर्षा जोड़ने पर केवल 450 मिलीलीटर  वर्षा जौनपुर में हुई है अभी आशा है कि  30 अगस्त तक वर्षा और होगी  मानसूनी बादलों के संघनन वाष्पन और स्थानीय विक्षोभ के कारण जौनपुर और पड़ोसी जनपद पर केंद्रित होने से लगातार कई दिन  वर्षा की स्थिति बनी है आर्य वर्षा मानव पशु पक्षियों खेती-बाड़ी बागवानी के लिए वरदान है - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि और निदेशकअलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र

Sunday, 23 August 2026

सावन की पूर्णिमा और रक्षाबंधन महापर्व - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

सावन की पूर्णिमा और रक्षाबंधन महापर्व - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 
सावन महीना परम पवित्र होता है पूरे सावन महीने में पर्व और त्योहार सबसे अधिक संख्या में मनाये जाते हैं सर्वप्रथम तो संपूर्ण सावन को भगवान शिव का महीना मानकर उनकी पूजा अर्चना की जाती है इसी महीने में 15 अगस्त का राष्ट्रीय स्वतंत्रता का पर्व मनाया जाता है और इसी महीने की अंतिम दिन परम पवित्र रक्षाबंधन या राखी का महापर्व पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है यह हरियाली का महीना है और सारी धरती हरी भरी रहती है और ऑक्सीजन की प्रचुरता होने से सब कुछ करो ताजा दिखता है हरियाली का तीज का महापर्व भी इसी महीने में मनाया जाता है और पुत्रदा एकादशी भी सावन महीने में ही मनाए जाते हैं सावन की हरियाली देखकर ही कहा गया है -

**सावन की तो बात निराली चारों तरफ बिछी हरियाली**

भारत विश्व का सबसे प्राचीन और सबसे पवित्र देश है जो सतयुग त्रेता द्वापर में दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली देश था और यह हर्षवर्धन के कल तक सारी दुनिया का सिरमौर था इसको सोने की चिड़िया भी कहा जाता था लेकिन लगातार 1000 वर्ष के आक्रमण और लूटपाट पहले मुसलमानों और फिर अंग्रेजों के द्वारा किया गया जिससे यह देश कंगाल और निर्धन हो गया और अनेक व्रत पर्व त्यौहार प्रथम परंपराएं दूषित हो गई फिर भी धीरे-धीरे सारी प्रथम परंपराएं फिर से कायम हो रही है और अब सोशल मीडिया और इंटरनेट का समय हो जाने से भारत के सनातनी लोगों को यह पता चल गया है कि हमारा भोजन वस्त्र रहन-सहन आवास की प्रथा और जीवन प्रणाली तथा भोजन प्रणाली व्रत पर्व त्यौहार दुनिया में सर्वश्रेष्ठ हैं जो प्रकृति और पर्यावरण के साथ समस्त जीवधारियों से तादात्म्य स्थापित करके चलते हैं। 

भारत के हर महीने में अनेक व्रत पर्व त्यौहार पडते हैं लेकिन सबसे प्रमुख पर्व में चार हैं जिसमें रक्षाबंधन ब्राह्मणों का अर्थात पठन-पाठन मंत्र वाचन पूजा पाठ करने वालों का दशहरा या विजयदशमी क्षत्रियों का अर्थात शक्तिशाली अस्त्र विद्या में निपुण देश और जनता की रक्षा करने वालों का दीपावली वैश्यों का अर्थात जो भी देश को धन-धन सुख समृद्धि संपन्नता से भर दे उनका और होली का महापर्व शूद्रों का अर्थात जो सेवा भावना से ओत-प्रोत हों और जो सच्चे मन से सब की सेवा करने वाले हों का त्यौहार है। यह ध्यान देना अति आवश्यक है कि प्राचीन काल में वर्ण व्यवस्था थी जाति प्रथा नहीं थी और किसी भी वर्ण का व्यक्ति संबंधित वर्ण का गुण होने पर उसमें आसानी से स्थान पर जाता था जाति प्रथा मुगल और अंग्रेजों की देन थी लेकिन तब भी सनातनी समाज के द्वारा ऐसा कोई बंधन नहीं था की एक जाति का व्यक्ति दूसरी जाति में नहीं जा सकता था। 

उदाहरण के लिए ब्रह्म ऋषि विश्वामित्र चक्रवर्ती सम्राट विश्व रथ थे लेकिन अपने अपार ज्ञान त्याग तपस्या के कारण व ब्रह्म ऋषि हुए और उन्होंने गेहूं नारियल भैंस गायत्री मंत्र एंटीमैटर एंटी एनर्जी एंटी यूनिवर्स का निर्माण और खोज किया द्रोणाचार्य एक ब्राह्मण होते हुए भी परम अतिरथी योद्धा थे और एकलव्य शूद्र होकर भी महान धनुर्धर था कर्ण सूत पुत्र होकर भी महाभारत के सर्वश्रेष्ठ योद्धाओं में एक था हेमचंद्र हेमू विक्रमादित्य और भामाशाह जैसे लोग वैश्य होकर भी महान योद्धा थे इसी प्रकार लोमश ऋषि काग भूसुंडी सूतजी शौनक जी गृत्समद शबरी मतंग ऋषि दादू रविदास गाडगे जैसे अनगिनत लोग दलित और निम्न जातियों से और वर्ण से होकर भी सर्वश्रेष्ठ ऋषि मुनि तपस्वी सन्यासी थे जिनकी पूजा स्वयं ब्राह्मण और बड़े-बड़े सम्राट भी किया करते थे। 

इस वर्ष सावन महीने में 28 अगस्त के दिन रक्षाबंधन का परम पवित्र महापर्व संपूर्ण भारत में मनाया जाएगा इस दिन घी का दीपक रोली हल्दी कुमकुम अक्षत राखी के साथ सजाकर बहनें अपने भाई लोगों को स्नान ध्यान करके बांधती हैं और निम्नलिखित महा वैदिक मंत्र पढ़ती हैं -
"" येन बद्धो बलिः राजा दानवेन्द्र महाबलो
तेन त्वां प्रतिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल""

यदि कोई स्त्री संस्कृत मंत्र ना पढ़ सके तो केवल इतना हिंदी में कहना चाहिए कि जिस राखी ने परम प्रतापी महाबली राजा बाली को बांध दिया मैं वही रखी तुम्हें बांधती हूं यह तुम्हारी हमेशा रक्षा करें यह मंत्र बोले बिना राखी बांधने का कोई अर्थ नहीं होता है

इसटे बाद उन्हें अच्छा भोजन खिलाती हैं बदले में भाई अपनी सामर्थ्य के अनुसार कुछ ना कुछ प्रदान करते हैं लेकिन सबसे बड़ी बात में अपनी बहन को आजीवन रक्षा करने का वचन देते हैं यह जाति धर्म देश काल की सीमाओं से परे हैं और इसे सनातनी गैर सनातनी क्रिश्चियन मुस्लिम में यहूदी शैतान राक्षस देव जातियां सभी मनाते हैं  ध्यान देने योग्य बात है कि यह केवल भाई बहन का ही महापर्व नहीं है छोटे लोग बड़े और सम्मानित लोगों को अपने पिता और गुरु को और सीमा पर तैनात सैनिकों को भी राखी बांधते हैं यदि किसी का भाई ना हो तो वह ईश्वर को ही अपना भाई मानकर उन्हें राखी समर्पित कर सकती हैं यदि भाई ना आ सके तो उनके नाम से मंत्र पढ़कर पूजा गृह में रखी रखने से भी उसका पूरा फल मिलता है। 

रक्षाबंधन का त्यौहार राखी के दिन अर्थात सावन पूर्णिमा के दिन ही प्रारंभ हुआ था इसके बारे में अनेक सामाजिक धार्मिक आध्यात्मिक दार्शनिक और ऐतिहासिक कथाएं हैं सबसे पहले रक्षाबंधन महापर्व का वर्णन भगवती लक्ष्मी द्वारा बलि को राखी बांधने से प्राप्त होता हैरक्षाबंधन का अगला वर्णन इंद्र की परम सती पत्नी शची के द्वारा इंद्र को राखी बांधने से प्राप्त होता है जब देवराज इंद्र और देवता राक्षसों से हार रहे थे तब देवगुरु बृहस्पति के निर्देश पर मंत्रों से पूरित रेशम के रक्षा को देवी शची ने इंद्र की कलाई पर बांधा था जिससे देवताओं की विजय हुई और राक्षस हार गए द्रौपदी जी के द्वारा भगवान कृष्ण को राखी बांधने का प्रसंग विश्व विख्यात है ही जब शिशुपाल के वध बाद के समय उनकी अंगुली में सुदर्शन चक्र से चोट लग गई तो द्रौपदी ने तत्काल अपनी साड़ी फाड़ कर भगवान कृष्ण को बांध दिया था जिसका मूल्य उन्होंने चीर हरण में चुकाया महाभारत में अनेक लोगों के द्वारा राखी बांधने का वर्णन मिलता है राजा महाराजा सामान्य जनता सभी रक्षाबंधन बड़े ही उत्साह से मनाते हैं इस दिन पुरोहित घर-घर जाकर अपने यजमानों को राखी बंद कर बदले में अन्य धन वस्त्र प्राप्त करते हैं यद्यपि यह प्रथा अब धीरे-धीरे लुप्त हो रही हैं इसी दिन शिष्य अपने गुरुजनों को भी राखी बांधते हैं वैसे रानी करमती द्वारा हुमायूं को राखी बांधने की कथा आती है लेकिन यह सही नहीं है क्योंकि हुमायूं रानी कर्मावती की रक्षा करने के स्थान पर बहादुर शाह से मिल गया और मेवाड़ का बुरी तरह से पतन हो गया और 30000 रानियों को कर्मावती के साथ जौहर करना पड़ा था।

इस वर्ष कब बांधी जाएगी राखी

ज्योतिष और पंचांग के अनुसार इस वर्ष शुक्रवार के दिन 28 अगस्त को सुबह 5:57 से 9:48 तक राखी बांधने का योग है क्योंकि पूर्णिमा तिथि 9:49 पर समाप्त हो जा रहे हैं इसलिए इसी कालखंड में जो लगभग 4 घंटे का है नहा धोकर स्वच्छ वस्त्र पहनकर भाई का मुंह पूर्व की तरफ रखकर थाली में अक्षत रोली रक्षाबंधन मिठाई और पुष्प सजाकर घी का दीपक जलाकर राखी बांधना चाहिए भाई को अपने बहन की आज जीवन रक्षक का वचन देकर आशीर्वाद और शक्ति के अनुसार उपहार देना चाहिए इसके बाद भोजन मिष्ठान ग्रहण करके तभी प्रस्थान करना चाहिए सबसे बड़ी बात इस समय भादरा की छाया भी नहीं रहेगी क्योंकि सूर्योदय के पहले ही भद्रा समाप्त हो रही है इस प्रकार उत्साह से विधि विधान के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाना चाहिए

सत्य ज्ञान और प्रकाश एवं कलयुग का प्रभाव डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह

सत्य ज्ञान और प्रकाश एवं कलयुग का प्रभाव डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह 

कलयुग में सबसे कठिन काम है सच को सबसे बताना और समझना सत्य प्रकाश और ज्ञान से लोग दूर रहना चाहते हैं और सत्य अंधकार और अज्ञान पसंद करते हैं किसी को लाख समझो की असली कमल का फूल तो कीचड़ में ही मिलेगा लेकिन 100 में 99 फिर भी संगमरमर के तालाब में कमल का फूल खोजते फिरते हैं 100 में 99 लोग राजनेता और धर्मगुरु स्वदेशी वेद पुराण महाभारत प्राचीन कथाओं और अपनी भाषा तथा संस्कृत का बखान करके सट्टा का सुख धन वैभव ऐश्वर्य कीर्ति प्राप्त करते हैं लेकिन इसमें 99% राजनेता धर्म गुरु और अधिकारी पूरी तरह अंग्रेजी में रचे बसे होते हैं उनके घर की पढ़ाई लिखाई वेशभूषा भाषा रहन-सहन यहां तक की शौचालय भी पश्चिम के ढंग का ही होता है सबसे अच्छा कपड़ा धोखा देने वाले इस मामले में राजनेता और धर्मगुरु होते हैं जिनमें अधिकांश शिष्य भी विदेशी होते हैं उनके ज्ञान के कारण नहीं उनके पास मौजूद धन संपत्ति और भौतिक संसाधनों के कारण जिसका प्रमुख कारण है कि किसी के पास इतना समय नहीं है कि इन अधिकारियों राजनेताओं और धर्मगुरु लोगों में काम से कम एक के यहां जाकर एक सप्ताह उनके छिपे सच को देखना जो साधु के अंदर एक कालनेमि को छुपाए हुए हैं तामसी और राक्षसी भोजन को चोरी से खाने वाले और ऊपर से सदा जीवन उच्च विचार का उपदेश देने वाले इसी वर्ग के कारण देश अनगिनतबर विदेशी लोगों का गुलाम हुआ है सट्टा सूक्त महाराणा प्रताप शिवाजी हमीर आनंदपाल तोमर आल्हा ऊदल जैसन की नाथ राजा और उनके सैनिक भी ले सकते थे लेकिन लेकिन सच्चे वीर और स्वदेशी सच्चे भारतीय होने के कारण उन्होंने रास्ता नहीं चुना बहुत प्रबल है कलयुग का यह समय इसलिए भगवान श्री कृष्णा के अंतर निहित होने के साथ ही अर्जुन की गांड देव की शक्ति और उनके दिव्यास्त्र और समस्त दिव्य शक्तियां दुर्गम और गूढस्थान में जाकर अंतर ध्यान हो गए
जितने भी आसुरी शक्तियों के लोग हैं उनकी भौतिक खोज और उनके द्वारा कहे गए सच का टीवी द्वारा अखबार द्वारा दिए विज्ञापन का ही लोग बिना दिमाग के प्रचार करें गए और बिना दिमाग वाले उसका इस्तेमाल करेंगे भले ही फेयर एंड लवली से एक भी हब्शी अर्थात नीग्रो गोरा ना हुआ हो। 

इसी प्रकार परखनली से सुख सर्वोच्च उदाहरण महाभारत में कौरव लोगों का जन्म उनका भी से भरे जड़ी बूटियां वाले घड़े में रखकर बिल्कुल स्वस्थ पालन पोषण करना लोगों को कम समझ में आएगा लेकिन पर पुरुष के वीर्य से उत्पन्न आईवीएफ को लोग अपना बच्चा मान लेंगे कुंती को दोष देने वाले नहीं समझ पाएंगे कि उनके अंदर पुरुष या स्त्री होने की शक्ति देवताओं के द्वारा ही प्राप्त होती है अग्नि सब चीजों को जलाती है लेकिन अग्नि को दोष या पाप नहीं लगता इसी तरह दैव शक्तियां पाप और पुणे से परे होती हैं और अपना काम करती हैं। 

 जैव रासायनिक परमाणु नाभिकीय अस्त्र-शस्त्र पर विश्वास करने वाले लोग अपने दिव्यास्त्रों पशुपत ब्रह्म श्री ब्रह्मास्त्र नारायण अस्त्र भार्गव वस्त्र इंद्रायम वरुण कुबेर जैसे दिव्यास्त्रों पर विश्वास नहीं रखते क्योंकि कभी इसको ध्यान से उन्होंने पढ़ा ही नहीं है इतने प्रयास के बाद तब लोगों को पता चला कि बौद्ध धर्म का परम है आज हम पाइथागोरस के नाम से पढ़ते थे और आइंस्टीन का सापेक्षता का सिद्धांत आइंस्टीन बस सिद्धांत के नाम से मशहूर है जिसे डॉक्टर सत्येंद्र नाथ बोस के साथ मिलकर आइंस्टीन ने बनाया था

सत्य ज्ञान और प्रकाश धीरे-धीरे प्रयास से फैलते हैं जबकि अज्ञान अंधकार और असत्य को फैलने के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि यह श्रेष्ठ में चारों ओर छाए हुए हैं तमराज किलविस की तरह ।

 भारत  के ऋषि मुनि और वैज्ञानिकों की खोज इतनी प्रबल है की अनंत काल के थपेड़े भी उसको नहीं मिटा पाए जबकि संसार में कोई मानव कृत रचना 1000 वर्ष से पुरानी नहीं मिलती है द्वारका नगरी हो या समुद्र का सेतु हो हजारों लाखों वर्ष से विदेशी लोगों द्वारा फैलाए गए इस भ्रम को निराकृत कर देते हैं कि हम लोग गाय चराने वाले चरवाहे थे जब तक वास्कोडिगामा भारत नहीं आया तब तक यूरोप के लोग केवल मछुआरे और नाविक थे और जब तक अरब के लोग भारत नहीं आए तब तक वह एक पक्की इमारत भी नहीं बना पाए थे गणित विज्ञान की तो बात ही दूर है। 

इसलिए किसी को उपदेश देना छोड़कर प्राचीन काल के ऋषि मुनि और वैज्ञानिकों तथा मनीषी लोगों और बुद्धिजीवी लोगों की तरह अपना काम करते रहो जब दीपक जलता है तो उसे प्रकाश दिखाना नहीं पड़ता लोग उसका प्रकाश खुद ही देख लेते हैं प्राचीन भारत के किसी भी चिकित्सक को आपने महलों वाला नहीं सुना होगा क्योंकि वह सच्चे मानवता की सेवा करने वाले थे यहां तक की वैद्य धनवंतरी और अश्विनी कुमारो का भी खुद का महल नहीं था। 
 इससे अधिक खारा सच और क्या कहा जा सकता है और जो लोग गलत काम करके धन कमा रहे हैं उनकी भी गलती नहीं है क्योंकि समाज में उन्हें का मान सम्मान होता है जिसके पास शानदार महंगी गाड़ी हो महंगे सामान हो संपत्ति हो बाग बगीचे हो बिल्डिंग हो और खेत बारी हो इसलिए किसी को दे दोष देना ठीक नहीं है किसी को गुड खिलाएंगे और किसी को ₹1000 किलो वाली मिठाई तो स्वाभाविक रूप से वह गुड को हीन भावना से देखेगा जबकि अच्छा से अच्छा मिष्ठान शहद के अलावा इस विश्व में गुड़ से अच्छा बना ही नहीं है रही बात करोड़ों साल पहले सतयुग त्रेता लाखों साल पहले द्वापर पर हम कैसे विश्वास करेंगे जब हनुमान और भीम जैसे लोग पर्वत और बड़ी-बड़ी शिलाएं उठा लेते थे जिसे आज के सुपर क्रेन भी नहीं उठा सकते जबकि हमारे बचपन की हरी भरी धरती 50 साल पहले 15 दिन 20 दिन होने वाली भयंकर वर्षा जाड़े में भयंकर कोहरे में हफ्तो नहीं दिखाई देने वाला सूरज विराट आम जामुन नीम बरगद पीपल के पेड़ 50 साल में ही सपना हो गए हैं और दुनिया भर में ऑक्सीजन की भयानक कमी हो गई है उसे समय लोग लाल पोखर में नहाते कपड़े धोते और बर्तन मारते थे कुएं का पानी पीते थे पूर्ण स्वस्थ रहते थे दही दूध माथा की जगह कोल्ड ड्रिंक और सड़े गले बिस्किट पावर रोटी नकली मक्खन पनीर कुरकुरे धकाधक चटपटे फटाफट चाऊमीन बर्गर मैगी हैमबर्गर खाकर लोग बलशाली भीम जैसे दिख रहे हैं आज का आरोप वाटर पीकर सब लोग रोगी हो गए हैं  बड़े बनाना है कम समय में प्रसिद्ध पानी है और करोडो खरबों का काला धन सफेद करना है  वारा न्यारा करना है तो सरकार से मिल जाओ बड़े-बड़े राजनेताओं और विपक्ष के पास चले जाओ धन कुबेर लोगों की चाटुकारी करो और कुछ दिन के बाद जेल में आनंद मनाओ यही आज के तथाकथित बड़े-बड़े लोगों का असली सच है यह कलयुग है इसलिए कहा गया है - **जो नहीं देखा नहीं सुना जो मन हू ना समाय
 सो सब देखिय कलयुगहिं नहीं कुछ भी कहा न जाए।

उससे भी बड़ी बात है सब कुछ झूठ पर चल रहा है और हम खुले आंखों से झूठ को देख रहे हैं विवश है कुछ कर नहीं पा रहे हैं

**झूठइ लेना झूठइ देना
झूठा के भोजन झूठ चबैना

आज का अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस रहेगा जबकि कल का अधिकतम तापमान 32

आज का अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस रहेगा जबकि कल का अधिकतम तापमान 32 और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहेगा जौनपुर नगर क्षेत्र में हल्की वर्षा बूंदाबांदी और कई पडोसीक्षेत्रों में हल्की सामान्य वर्षा होने के आशा है कल भी लगभग यही मौसम रहेगा गर्मी उमस पसीना जारी रहेगा की कुछ स्थानों पर अच्छी वर्षा हो सकती है 

वायु गुणवत्ता सूचकांक 40 से 60 के बीच हवा के दिशा मुख्य रूप से पूर्वी दक्षिणी रहेगी और गति 10 से 20 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी
पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 1 से 3 के बीच रहेगी और प्रदूषण की मात्रा न्यूनतम रहेगी यह मौसम 12 अगस्त के बाद फिर से बदल जाएगा

हमारे केंद्र के द्वारा जनवरी से जून तक 35 बार  लिखित भविष्यवाणी की गई थी केवल काम चलाने लायक वर्षा होगी इसलिए खेती और बागवानी मुख्य रूप से सूखी फसलों वाली करें क्योंकि इस वर्ष पिछले साल के अपेक्षा 60 से 70% वर्षा होगी ।

अभी तक 700 मिली लीटर व नहीं चाहिए थे लेकिन आज तक की वर्षा जोड़ने पर केवल 400 मिलीलीटर  वर्षा जौनपुर में हुई है अभी आशा है कि 11 ज
अगस्त तक वर्षा और होगी  मानसूनी बादलों के संघनन वाष्पन और स्थानीय विक्षोभ के कारण जौनपुर और पड़ोसी जनपद पर केंद्रित होने से लगातार दिन घंटे वर्ष की स्थिति बनी है - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि और निदेशकअलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र

Saturday, 22 August 2026

जौनपुर सहित भारत और देश दुनिया के मौसम की भविष्यवाणी - डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर

जौनपुर सहित भारत और देश दुनिया के मौसम की भविष्यवाणी - डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर
जौनपुर और आसपास के सभी जनपदों में उसका अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस होता जबकि कल या तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और 27 डिग्री सेल्सियस होगा

धूप छांव और तेज हवाओं के बीच आज और कल जौनपुर और आसपास के जनपदों में बूंदाबांदी हल्की वर्षा और कुछ स्थानों में मध्यम वर्षा होने की प्रबल संभावना है जौनपुर एक बार फिर सबसे कम वर्षा वाला क्षेत्र रहेगा फिर भी दोपहर के बाद और कल इन सभी स्थानों में ठीक-ठाक वर्षा हो सकती है जहां तक भारत की बात है तो देश के अधिकतर भागों में हल्की वर्षा का योग है लेकिन दिल्ली भलस्वा राजस्थान के सटे हुए भागों हिमालय के पर्वतीय क्षेत्र पूर्वोत्तर भारत में कहीं-कहीं भारी वर्षा का योग है बाकी स्थान में हल्की सामान्य वर्षा होगी

बंगाल की खाड़ी में बने तेज विक्षोभ के कारण संपूर्ण भारत में विशेष कर वापी बलसाड नालासोपारा मुंबई पणजी कोचीन त्रिवेंद्रम कन्याकुमारी चेन्नई विशाखापट्टनम पुरी कोलकाता में आंधी जैसी तेज हवाएं चलेंगी और कहीं कहीं झंझावात और तड़ित के साथ भयंकर वर्षा भी होगी यह विक्षोभ आगे बढ़कर कुछ दिनों के बाद अच्छी वर्षा कर सकता है

जहां तक पूरी दुनिया की बात है तो फिलीपींस और जापान के बीच एक चक्रवर्ती दबाव से बहुत तूफानी हवाएं चलेंगे मत जियो में पोलैंड से लेकर फिनलैंड के बीच प्रबल आंधी तूफान काफी नुकसान करेगा जब यूरोप के तटीय भागों में भी आंधी तूफान रहेगा अटलांटिक महासागर में हवाई दीपों के आसपास एक प्रबल चक्रवात उठने की संभावना है और इससे भी तेज चक्रवात दक्षिण अमेरिका के पूर्वी तट पर उत्पन्न होगा जिसमें दवाओं की गति सबसे ऊपर होगी दुनिया क्या अधिकतर भाग तेज आंधी तूफान और तेज हवाओं की चपेट में रहेंगे

इन सब का असर एक तेज भूकंप आने में और एक सुनामी लहर पैदा होने में समाप्त होगा वैसे फिर बता दें कि इस बार भारत में किसी भी हाल में सामान्य औसत मानसूनी वर्षा बहुत कम होगी जौनपुर और उससे लगे हुए क्षेत्र में तो स्थिति और खराब रहेगी यह बनाकर चलें कि जौनपुर और आसपास 70 से 80% वर्षा और पूरे भारत को मिलाकर 80 से 90% मानसूनी वर्षा होगी जो बहुत कम है और यह सूखा की श्रेणी में आता है

Monday, 17 August 2026

बुढ़वा मंगल और महावीर हनुमान - डॉ दिलीप कुमार सिंह

बुढ़वा मंगल और महावीर हनुमान - डॉ दिलीप कुमार सिंह 

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हनुमान जी श्री राम और माता सीता के अनन्य भक्त हैं कलयुग में उनसे बड़ा कोई भी नहीं है उन्हें अमर कहा जाता है और सृष्टि के अंत तक श्री राम कथा का प्रचार करने के लिए दुष्टों का संघार करने के लिए और सज्जनों का उद्धार करने के लिए कलयुग में उन्हें विशेष रूप से भगवान श्री राम के द्वारा सहेजा गया है।
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बुढ़वा मंगल की कहानी

बुढ़वा मंगल को बड़ा मंगलवार भी कहते हैं इसकी कथा महाभारत से ली गई है महाबली भीमसेन जिनमें 10000 हाथियों का बल था अपने बल पर बहुत घमंड करते थे और हमेशा उत्पात मचाया करते थे एक बार जब वह बनवास में थे तब हिमालय क्षेत्र में उन्हें एक अद्भुत दिव्य सुगंध की अनुभूति हुई बाद में संत और महात्माओं ने कहा यह तो अद्भुत नीलकमल की सुगंध है जो दूर-दूर तक फैला रहता है द्रोपदी की इच्छा हुई कि इस नीलकमल को धारण करें बस फिर क्या था उन्होंने भीम को कहा और भीम दहाड़ते और गरजते हुए चल पड़े। 


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भीमसेन की दहाड़ से सभी भयभीत हो गए जंगल के शेर चीता बाघ इधर-उधर भागने लगे और हलचल मच गई भीम अपनी गदा जोर-जोर घुमाते हुए नीलकमल की ओर चले जा रहे थे हनुमान जी ने उनको शिक्षा देने और उनके अहंकार को दूर करने के लिए एक वृद्ध बंदर का रूप बनाया और रास्ते में पूछ फैला कर लेट गए थोड़ी ही देर बाद भीम गरजते और दहाड़ते हुए उधर आए और रास्ते पर बंदर की पूंछ देखकर उन्होंने बंदर से अपनी पूंछ हटाने को कहा तब हनुमान रूपी वृद्ध वानर बोला अरे भाई तुम मुझको लांघ कर चले जाओ इस पर भी भीमसेन ने कहा कि किसी को भी लांघ कर जाने का सनातन धर्म में कोई नियम नहीं है इसलिए तुम अपनी पूंछ हटा लो।

हनुमान जी ने कहा ऐसा करो तुम मेरी मूछ हटा दो और चले जाओ क्योंकि मैं तो बुड्ढा हो गया हूं और मुझे उठने बैठने में बहुत परेशानी होती है इस पर भी गर्व से भरकर एक अंगुली से उसकी पुछ उठाकर फेंकने लगे मगर अंगुली में दर्द होने लगा और पूछ जहां की तहां पड़ी रही इस पर उन्होंने एक हाथ से उठाने का प्रयास किया फिर दोनों हाथ से उठाने का प्रयास किया इसके बाद अपनी गदा से हटाने का प्रयास किया लेकिन पसीने पसीने होने पर भी पूंछ हिंली तक नहीं। 

इस पर भीमसेन को बहुत आश्चर्य हुआ 10000 हाथियों का बल रखने वाले भीम एक बंदर की पूंछ नहीं हटा पाए उन्हें अपनी भूल अनुभव हुई और उन्होंने प्रार्थना किया कि हे भगवान आप अपने असली रूप में आ जाइए तब हनुमान अपने विराट असली रूप में आए जो आकाश तक फैले हुए थे भीम ने उनकी पूजा अर्चना किया और हनुमान जी परम प्रसन्न हुए और भीमसेन को अच्छे उपदेश देते हुए अपनी दिव्य शक्तियों को प्रदान किया इसके बाद भीमसेन नीलकमल लेकर द्रौपदी को दे दिए तभी से यह बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल मनाया जाने लगा है। 

इस दिन स्नान करके शुद्ध चित्र से हनुमान जी का ध्यान करना चाहिए उनके मंदिर में जाकर उनसे अपनी मनोकामना कहना चाहिए बेसन के लड्डू सिंदूर और चमेली भी चढ़ा सकते हैं लेकिन ध्यान रखें कि हनुमान जी की पूजा करते समय भगवती सीता और भगवान श्री राम का ध्यान अवश्य करें हनुमान चालीसा का भी पाठ करना चाहिए और हनुमान जी की दिव्या गाथाओं का वर्णन करते हुए रामायण के प्रसंग को भी आपस में कहना और सुनना चाहिए ऐसा करने से हनुमान जी निश्चित प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूरी करते हैं हनुमान जी का ऐसा प्रभाव है कि उनके भक्त को कलयुग का प्रभाव और शनिदेव छू भी नहीं सकते हैं बाकी की बात ही क्या है

नाग पंचमी और सांप प्रजातियां डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह

 नाग पंचमी और सांप प्रजातियां डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह 

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भारत विश्व का सबसे प्राचीन और विश्व व्यापी फैला हुआ देश है और सनातन धर्म सारे संसार का सबसे प्राचीन धर्म है यहां प्रत्येक दिन कोई ना कोई पर्व और उत्सव होता रहता है जिससे जीवन में नीरसता की जगह सरसता फैली रहती है हर एक पर्व उत्सव त्यौहार का अपना एक विशिष्ट महत्व होता है जो मानव जीवन कृषि कार्य धर्म दर्शन अध्यात्म के साथ प्रकृति और पर्यावरण से भी जुड़ा रहता है ऐसा ही एक महान पर्व नाग पंचमी है जो नागों से जुड़ा हुआ है भारत एक ऐसा देश है जहां पर पशु पक्षी ईंट पत्थर आकाश पाताल दिशाओं की ग्राम देवी ग्राम देवता तक की पूजा की जाती है क्योंकि कालांतर में सिद्ध हो गया है कि प्रत्येक वस्तु परमाणु अथवा कोशिका से बनी है और हर एक परमाणु और कोशिका में ईश्वर का ही अंश होता है ।

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नाग पंचमी का महान पर्व सावन महीने के शुक्ल पक्ष में पंचमी के दिन मनाया जाता है जब लोग घर की साफ सफाई करके लीप पोत कर कपड़े पहनकर नाग देवता की पूजा करते हैं और उनका दूध चढ़ाते हैं इस दिन नाग देवता का दर्शन करना शुभ माना जाता है संसार में कोई भी ऐसा धर्म नहीं है जिसके मानने वाले दुनिया में सबसे भयंकर माने जाने वाले नाग और सांपों की पूजा करते हैं जो स्वयं में काल का एक स्वरूप होता है और जिसको देखकर बड़े से बड़े लोगों के मन में भय पैदा हो जाता है और आज इतनी अधिक वैज्ञानिक और चिकित्सा की उन्नति हो जाने के बाद भी प्रतिवर्ष भारत में और दुनिया में सांपों के काटने से लाखों लोग मरते हैं तो प्रश्न उठता है कि आखिर नाग पंचमी का त्यौहार क्यों मनाया गया और इनकी पूजा क्यों की जाती है। 

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सभी प्रकार के सांपों में नाग का विश्व सबसे अधिक विषैला और प्रभावकारी होता है और यह न्यूरोटॉक्सिक होता है नाग अर्थात कोबरा की कई प्रजातियां होती हैं जिसमें शेषनाग सबसे लंबी और घातक प्रजाति है जो हर प्रकार के सांपों को जिंदा ही खा जाता है इसके बाद काला नाग और भूरा नाग होता है और यही सांप की ऐसी प्रजाति है जिसमें बहुत पुराने कुछ नागों में नागमणि पाई जाती है वैसे तो भारत में करैत वाईपर और रसेल वाइपर सांप भी बहुत जहरीले होते हैं लेकिन यह सभी नाग के भय से छिपे रहते हैं। 

वैसे तो कोई भी जहरीला नाग या सांप काट ले तो वर्तमान समय में प्राथमिक चिकित्सा करके अर्थात घाव को साबुन से यह स्वच्छ पानी से अच्छी तरह धोकर उसके ऊपर हल्का दबाव देते हुए पट्टी बांधकर तुरंत ही चिकित्सक के पास जाना चाहिए लेकिन जहां पर चिकित्सा सुविधा न हो या समय बहुत कम हो वहां पर तंत्र-मंत्र जड़ी बूटियां का प्रयोग करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए जिसमें अधिक मात्रा में काली मिर्च और घी को पिलाना नीम की पत्ती खिलाना और कुछ मंत्रों का जाप करना शामिल है ऐसा माना जाता है कि जरत् कारु ऋषि कश्यप ऋषि शंखचूड़ वासुकी का नाम लेने से सांप नहीं काटते हैं और वह रास्ता बदल कर चले जाते हैं और इनका नाम लेने से सांप का विष असर नहीं करता है नाग कुल का भला करने वाले कुछ ऐसे भी वंश हैं जिन पर सांपों के विश्व का असर नहीं पड़ता है यह बात पूरी तरह सच है इसके अलावा **ऊं कुरुकुल्ये हूं फट् स्वाहा**मंत्र का जाप करने से भी सांप के विश्व का असर नहीं होता है 

सांप एक ऐसा प्राणी है जो मनुष्य से सबसे अधिक डरता है इसके अलावा यह नेवला गरुड़ पक्षी बाज प्रजातियां और गिलहरी मोर एवं बिल्ली से भी डरता है नाग पंचमी को जिस प्रकार से पूजा पाठ और सफाई की जाती है और सावन महीने में जिस तरह से महारुद्र अभिषेक किया जाता है उसे सांप मनुष्य का निवास छोड़कर बन बाग खेत और अन्य जगहों पर चले जाते हैं इसीलिए नाग पंचमी त्यौहार मना कर नागों की पूजा की जाती है इसके अलावा यह नाग जाति और मनुष्य जाति के बीच प्राचीन संबंधों का भी स्मरण दिलाता है। नाग एक प्राचीन काल में मानव की जाति थी जो जंगल गुफा कंदराओं में रहते थे और उनका नागों के साथ लंबे समय रहने से उनके बारे में पूरा ज्ञान हो गया था और वह जड़ी बूटियां और सांपों का जहर उतारने और उनको पकड़ने में सिद्धहस्त थे। नागवंश एक प्रसिद्ध राजवंश भी था अर्जुन घटोत्कच सहित अनेक लोगों का नाग कुल में विवाह हुआ था मेघनाथ की पत्नी सुलोचना नागवांश से ही थी इस प्रकार नाग पंचमी को इसलिए भी मनाया जाता है कि धीरे-धीरे नागवंट आर्य वंश में घुल मिल गया था 

सभी प्रकार के जहरीले नागों से मानव जाति को अपार लाभ होता है यह मानव जाति के लिए विनाशकारी चूहे और अनेक जीव जंतुओं को खाकर मानव जाति का असीम कल्याण करते हैं इसके अलावा यह वातावरण में फैले हुए भयंकर विष को धीरे-धीरे पीते रहते हैं इसे जहर पूरी पृथ्वी पर फैल नहीं पाता है। 

जहरीले सांपों से कैंसर इत्यादि की बहुत कीमती दवाएं भी बनती हैं और पूरी दुनिया में सांपों को बड़े चाव से खाया भी जाता है अब रही सांपों के द्वारा मानव को काटने की तो यह स्वाभाविक सी बात है कि अगर सांपों को अपने प्राण संकट में दिखाते हैं तब वह आक्रमण कर देते हैं वैसे सांप का विश्व उनकी सबसे कीमती धरोहर होता है एक बार काट लेने के बाद फिर से जहर बनने में महीनों लग जाते हैं इसलिए सांप जल्दी काटते नहीं और काटते भी हैं तो बहुत ज्यादा विष नहीं उगलते हैं इसके अतिरिक्त सांप भगवान शिव के गले के आभूषण हैं जिनको वह बड़े चाव से अपने गले में पहनते हैं जब उन्होंने हलाहल विष का पान किया था तो उसे कुछ बूंदे धरती पर गिरी और उसी को पीकर सांप बिच्छू और अन्य जीव जहरीले हो गए थे शिव जी का आभूषण होने के कारण और उनके गले की शोभा होने के कारण भी सांपों की पूजा किया जाता है। 

सांप से जुड़ी अनेक कथा कहानी और किंवदन्तियां है लाखों करोड़ों वर्षों से भारतीय जीवन में घुली मिली हैं जिसमें सांपों के द्वारा बदला लेना और कुछ विशेष प्रकार के नागों में नागमणि होना पूरी तरह सत्य है इसके अलावा बहुत भ्रांत धारणाएं भी लोगों के मन में बस गई हैं नाग पंचमी को सांपों के संरक्षण और उनसे सावधान रहने से भी जोड़ कर देखा जाता है क्योंकि वर्षा काल में सांपों के प्रजनन का महीना होता है इसलिए वह बहुत अधिक उग्र होते हैं उनसे बचकर रहना चाहिए और सभी प्राणी एक समान है इस बात की धारणा भी नाग पूजा पूजा दिखती है। 

नाग पंचमी के दिन विधि विधान से नागों की पूजा होती है और उन्हें दूध खीर चढ़ाया जाता है इसके अलावा लोक जीवन में इसे स्थाई बनाने के लिए इस दिन भारत के हर एक गांव शहर गली मोहल्ले में दंगल अर्थात कुश्ती होती है और कूड़ी अर्थात लंबी कूद का आयोजन किया जाता है इसके बाद घरों में भांति-भांति  के सुंदर पकवान बनते हैं इस प्रकार यह महान पर्व शारीरिक स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है नाग पंचमी के दो दिन पहले हरियाली तीज या हरितालिका तीज आती है जिसका अपना विशेष महत्व है यह विशेष रूप से ध्यान देने की बात है कि सावन में चारों तरफ घने पेड़ पौधे हरियाली होने से और पानी भर जाने से सांप उन सब स्थान से मानव निवास की ओर दौड़ते हैं और नाग पंचमी के दिन पूजा से उत्पन्न विभिन्न प्रकार की रासायनिक गंध और सूक्ष्म ऊर्जा नाग और हर प्रकार के सांपों को आवाज से दूर ले जाती है

यही वजह है कि पहले हर तरफ घने जंगल झाड़ झंकाड़ और हरियाली होने के बाद और घनघोर वर्षा होने के बाद भी प्राचीन काल में सांपों के काटने से शायद ही कोई मरा हो अब ज्यादा लोग मर रहे हैं क्योंकि सांप के आवास पर लोग जबरदस्ती कब्जा कर रहे हैं आप आज से 50 वर्ष पहले अपने घर खानदान के लोगों से पता करेंगे तो पता लगेगा कि इतनी भयंकर स्थिति के बाद भी सांप के काटने से बहुत ही कम लोग मरे हैं और नाग तो बिना चेतावनी दिए काटते भी नहीं है सबसे खतरनाक करैत नाम का सांप होता है जो 1 से 2 फीट लंबा काला चित्तीदार होता है और अगर यह सोते समय काट लेता है तो लोग सोते ही रह जाते हैं इसीलिए कहा जाता है कि करैत का काटा हुआ पानी भी नहीं मांगता हैऔर पूजा पाठ भी नहीं करते हैं इसलिए कहा जा सकता है कि नाग पंचमी एक पूर्ण वैज्ञानिक महापर्व है जो प्रकृति पर्यावरण और प्राणी मात्र की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है
[8/17, 1:56 PM] Dr  Dileep Kumar singh: बुढ़वा मंगल और महावीर हनुमान - डॉ दिलीप कुमार सिंह 

हनुमान जी श्री राम राम और माता सीता के अनन्य भक्त हैं कलयुग में उनसे बड़ा कोई भी नहीं है उन्हें अमर कहा जाता है और सृष्टि के अंत तक श्री राम कथा का प्रचार करने के लिए दुष्टों का संघार करने के लिए और सज्जनों का उद्धार करने के लिए कलयुग में उन्हें विशेष रूप से भगवान श्री राम के द्वारा सहेजा गया है
बुढ़वा मंगल की कहानी बुढ़वा मंगल को बड़ा मंगलवार भी कहते हैं इसकी कथा महाभारत से ली गई है महाबली भीमसेन जिनमें 10000 हाथियों का बाल था अपने बल पर बहुत घमंड करते थे और हमेशा उत्पाद मचाया करते थे एक बार जब वह बनवास में थे तब हिमालय क्षेत्र में उन्हें एक अद्भुत दिव्य सुगंध की अनुभूति हुई बाद में संत और महात्माओं ने कहा यह तो अद्भुत नीलकमल की सुगंध है जो दूर-दूर तक फैला रहता है द्रोपदी की इच्छा हुई कि इस नीलकमल को धारण करें बस फिर क्या था उन्होंने भी को कहा और भीम दहाड़ते और गरजते हुए चल पड़े 

भीमसेन की दहाड़ से सभी भयभीत हो गए जंगल के शेर चीता बाघ इधर-उधर भागने लगे और हलचल मच गई भी अपनी गदा जोर-जोर घूमते हुए नीलकमल की ओर चले जा रहे थे हनुमान जी ने उनको शिक्षा देने और उनके अहंकार को दूर करने के लिए एक वृद्ध बंदर का रूप बनाया और रास्ते में पूछ फैला कर लेट गए थोड़ी ही देर बाद भीम भीम गरजते और दहाड़ते हुए उधर आए और रास्ते पर बंदर की पूंछ देखकर उन्होंने बंदर से अपनी पूंछ हटाने को कहा तब हनुमान रूपी वृद्धि वानर बोला अरे भाई तुम मुझको लग कर चले जाओ इस पर भी भीमसेन ने कहा कि किसी को भी लांघ कर जाने का सनातन धर्म में कोई नियम नहीं है इसलिए तुम अपनी पूंछ हटा लो

हनुमान जी ने कहा ऐसा करो तुम मेरी मूछ हटा दो और चले जाओ क्योंकि मैं तो बुड्ढा हो गया हूं और मुझे उठने बैठने में बहुत परेशानी होती है इस पर भी गर्व से भरकर एक अंगुली से उसकी पुछ उठाकर फेंकने लगे मगर अंगुली में दर्द होने लगा और पूछ यहां की कहां पड़ी रही इस पर उन्होंने एक हाथ से उठाने का प्रयास किया फिर दोनों हाथ से उठाने का प्रयास किया इसके बाद अपनी गदा से हटाने का प्रयास किया लेकिन पसीने पसीने होने पर भी पूंछ हिंदी तक नहीं 

इस पर भीमसेन को बहुत आश्चर्य हुआ 10000 हाथियों का बाल रखने वाले भीम एक बंदर की पूछ नहीं हटा पाए उन्हें अपनी भूल अनुभव हुई और उन्होंने प्रार्थना किया कि हे भगवान आप अपने असली रूप में आ जाइए तब हनुमान अपने विराट असली रूप में आए जो आकाश तक फैले हुए थे भी ने उनकी पूजा अर्चना किया और हनुमान जी परम प्रसन्न हुए और भीमसेन को अच्छे उपदेश देते हुए अपनी दिव्य शक्तियों को प्रदान किया इसके बाद भीमसेन नीलकमल लेकर द्रौपदी को दे दिए तभी से यह बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल मनाया जाने लगा है 

इस दिन स्नान करके शुद्ध चित्र से हनुमान जी का ध्यान करना चाहिए उनके मंदिर में जाकर उनसे अपनी मनोकामना कहना चाहिए बेसन के लड्डू सिंदूर और चमेली भी चढ़ा सकते हैं लेकिन ध्यान रखें कि हनुमान जी की पूजा करते समय भगवती सीता और भगवान श्री राम का ध्यान अवश्य करें हनुमान चालीसा का भी पाठ करना चाहिए और हनुमान जी की दिव्या गाथाओं का वर्णन करते हुए रामायण के प्रसंग को भी आपस में कहना और सुनना चाहिए ऐसा करने से हनुमान जी निश्चित प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूरी करते हैं हनुमान जी का ऐसा प्रभाव है कि उनके भक्त को कलयुग का प्रभाव और शनिदेव छू भी नहीं सकते हैं बाकी की बात ही क्या है