Tuesday, 28 April 2026

सनातन धर्म तंत्र मंत्र मठ मंदिर आश्रम शक्तिपीठ धाम और तीर्थ स्थान का निष्पक्ष मौलिक विवेचन -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक

सनातन धर्म तंत्र मंत्र मठ मंदिर आश्रम शक्तिपीठ धाम और तीर्थ स्थान का निष्पक्ष मौलिक विवेचन -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक 

कालचक्र के प्रभाव और कलयुग के आगमन के कारण आज हर अच्छी चीज बुरी और बुरी चीज अच्छी दिखाई दे रही है तमराज किलविश का साम्राज्य बढ़ रहा है और अंधेरा दिनों दिन उजाले को निकल रहा है सत्य सत्य से हर रहा है सदाचार दुराचार के आगे नतमस्तक है और अज्ञान के आगे ज्ञान हर रहा है तभी तो धर्म ग्रंथो की मौलिक बातों को उल्टा सीधा करके सच को दबाकर सत्य को दिखाई जा रहा है एक प्रसंग में जो आजकल बहुत टीवी चैनल और इंटरनेट पर चल रहा है  ‌ कारण के द्वारा इंद्र की पराजय का है जो कि कभी हुआ ही नहीं था इसलिए आज हम सनातन धर्म ‌ स्थल मठ मंदिर आश्रम धाम शक्तिपीठ और तीर्थ स्थान का बिल्कुल स्पष्ट मौलिक और निष्पक्ष विवेचन करेंगे 

सबसे पहले यह आप सभी निश्चित रूप से जानने की हमारा सनातन धर्म जो मूल रूप से है वह बिल्कुल सत्य ज्ञान और उजाले का प्रतीक है पूरी तरह प्रकृति पर्यावरण विज्ञान धाम दर्शन के अनुकूल है और सारे संसार का हर व्यक्ति इसमें समाहित हो सकता है इसी प्रकार आज के 100 वर्ष पहले तक बने हुए सभी तीर्थ स्थान धाम मठ मंदिर शक्तिपीठ एवं आश्रम बिल्कुल ही सही और सच्चे हैं और यहां पर सकारात्मक ऊर्जा और दिव्य शक्तियों का निवास है ‌ लेकिन आजकल तमाम नकली साइन मंदिर मैहर देवी और वैष्णो माता के मंदिर शीतला धाम ‌ विंध्यवासिनी देवी और तमाम देवी देवताओं भगवान का नकली मंदिर बनाकर विज्ञापन और मीडिया में उसकी जोर-शोर से प्रशंसा करके लूटने का काम किया जा रहा है इससे आपको सावधान रहने की आवश्यकता है। 

यह संसार कर्म स्थल है अपने कर्म का फल सबको भोगना पड़ता है या निश्चित और अटल है यहां तक की देवी देवता और ईश्वर भी यदि धरती पर आ जाते हैं तो उनको भी कम का भोग भोगना पड़ता है भले ही वह भगवान श्री राम श्री कृष्णा अष्ट पशु अप्सराय देवी देवता भगवान श्री कृष्णा महावीर स्वामी भगवान बुद्ध नानक या कोई भी महापुरुष रहे हो उनका इतिहास चरित्र आपको पता है की किस तरह से पूर्व जन्म के कृत्य के कारण भगवान श्री कृष्ण अंत में जरा नाम के ब्याध के द्वारा बैकुंठ धाम गमन किये।

‌ यदि आप 100 वर्ष पहले स्थापित मठ मंदिर शक्तिपीठ धाम धर्म के केंद्र एवं अन्य धार्मिक सांस्कृतिक और दार्शनिक तथा वैज्ञानिक शक्तिपीठों का अध्ययन करेंगे तो पाएंगे कि यह धरती के अति विशिष्ट स्थान है जैसे कि महाकाल उज्जैन जो भारत का केंद्र भाग है और यहां पर जब भी भारत की राजधानी बनी भारत उन्नति के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचा और दिल्ली में जब भी राजधानी बनाई गई देश टुकड़े-टुकड़े होकर बर्बाद हुआ भीषण युद्ध हुए और धन जन संस्कृति सभ्यता एवं प्रकृति पर्यावरण का अभूतपूर्व नुकसान हुआ। 

इतना स्पष्ट जान लीजिए कि जब भगवान श्री कृष्णा पर लोग चले गए उसी दिन से कलयुग धरती पर उतर आया अपने अनुचर और तमराज किलविश के साथ वह धरती पर घूमता रहा लेकिन पांडव श्री कृष्णा और उनके परम शक्तिशाली विश्व विजेता परीक्षित का इतना बड़ा प्रताप था कि उसकी धरती पर कहीं रुकने की जगह नहीं मिल रही थी। सम्राट परीक्षित स्वयं प्रवेश बदलकर संपूर्ण धरती का अवलोकन अपने पवन गति वाले अश्व से किया करते थे। 

एक बार उनके साम्राज्य में एक अद्भुत पाप कर्म घटित हो गया तब उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ कि यह कैसे हुआ इसके बाद जब वह अपने अश्व पर कारण जानने के लिए निकले तब उन्होंने देखा एक भयंकर काला बहुत लंबा चौड़ा पुरुष इस धर्म और पाप का केंद्र है ‌ जो बहुत ही भयंकर था और उसकी आंखें अंगारे बरसा रहे थे।

यह देखकर परम तेजस्वी परीक्षित ने बिना डरे पलक झपकते ही अश्व से कूद कर उसकी गर्दन दबोच कर धरती पर गिरा दिया और पूछा तू कौन है जो सम्राट परीक्षित के राज्य में धर्म और पाप कर्म करने की चेष्टा कर रहा है और इस तरह कुमार स्वरूप गौ माता और उसके बछड़े को पीड़ा दे रहा है मृत्यु के भाई से थर-थर कांपते हुए कलयुग ने कहा है प्रभु यह कलयुग है और हमें साक्षात श्री हरि विष्णु के द्वारा इस युग का प्रधान नियुक्त करके धरती पर पाप अन्याय अत्याचार अधर्म अज्ञान अनाचार दुराचार बढ़ाने के लिए भेजा गया है।

इस पर क्रोध से लाल पीले परीक्षित ने अपनी भयंकर तलवार उसकी गर्दन काटने के लिए उठा लिया तब वह उनके पैरों पर गिरकर शरणागत हो गया और अपने रहने के लिए केवल पांच जगह मांगा तब सम्राट परीक्षित ने उससे कहा तुम हुए के स्थान पर सोने में वेश्याओं के घर जहां पाप कर्म होते हैं और जहां धर्म होता है वहां पर निवास करो इस पर कलयुग तत्काल ही गायब होकर उनके मुकुट में समा गया इसके बाद उन्होंने कलयुग के प्रभाव से तपस्यारत ऋषि के गले में एक मरा हुआ सांप डाल दिया और उसके पुत्र के श्राप देने के कारण तक्षक नाग के काटने के कारण स्वर्ग धाम सिद्धार्थ गए। 

इसलिए आप ‌ मठ मंदिर धर्म स्थान तीर्थ आश्रम हर जगह यात्रा कीजिए लेकिन ध्यान रखें की 95 प्रतिशत से अधिक कलयुग के साधु संत ऋषि मुनि मनुष्य पुरोहित पांडे कथा वाचक धर्म गुरु और इन स्थानों से जुड़े हुए नौकर चाकर सब के सब दुराचारी मानस मंदिर महिला का सेवन करने वाले और पंचमाकर संयुक्त होते हैं सावधानी रखनी आवश्यक है वरना आपका भी शोषण हो जाएगा चौकिया धाम में जाकर आप पुरोहित पंडितों की अश्लीलता पैसों की लालच और महिलाओं के प्रति गंदे व्यवहार को अपनी आंखों से देख सकते हैं।

एक बात और भी कहना चाहता हूं कि कलयुग का प्रभाव स्त्रियों और लड़कियों पर भी है जितने भी कांड हो रहे हैं 99% उनकी सहमति और रजामंदी से हो रहे हैं ‌ लेकिन जब उनका काम हो जाता है कुकर्मे पूरा हो जाता है ‌ या जब संबंधित व्यक्ति से लाभ या पैसा मिलना बंद हो जाता है या जब वह पकड़ी जाती हैं तो सर आप पुरुषों पर लगाकर खुद दूर है जाती हैं इसलिए सभी को सावधानी रखना आवश्यकहै। 

यदि कोई भी महिला किसी साधु संत महात्मा ज्योति धर्मगुरु के पास अपने पति माता-पिता या परिवार की चोरी से आती है कोई भी स्त्री या लड़की विनाशकारी मंत्र या सम्मोहन विद्या सिखाती है कोई भी स्त्री या लड़की अकेले में बार-बार उनसे मिलने जाती है तो वह स्वयं ही उनको गलत काम का आमंत्रण देती है ऐसे में इन वर्ग से जुड़े लोगों को सावधान रहना चाहिए और किसी भी महिला या लड़की को अकेले अपने आश्रम मठ मंदिर में आने नहीं देना चाहिए यदि वे ऐसा करते हैं तो राम रहीम आसाराम बापू संत रामपाल और अशोक खैरात की तरह उनका पतन निश्चित है। 


एक बात और इस समय कलयुग में कम से कम 60 से 90% साधु संत महंत धर्म गुरु मुस्लिम या क्रिश्चियन होते हैं जो सनातन धर्म को भगवा वस्त्र पहनकर बदनाम करते हैं और स्त्रियों लड़कियों का जमकर शोषण करते हैं और पैसा भी वसूली करते हैं धर्म स्थान में टीका लगाने से लेकर फल फूल माला बेचने का अधिकतर काम यही करते हैं जो उसे दूषित करके बेचते हैं ‌ कितने तो पुजारी पांडे मुस्लिम बन गए हैं जिन्हें पहचान पाना बहुत मुश्किल है सलीम वास्तविक जैसे लोगों का उदाहरण अभी-अभी सामने आया है इसलिए पहले जांच परख कर तभी किसी पर विश्वास करना चाहिए 


इस प्रकार यह निष्कर्ष निकलता है कि सनातन धर्म मूल रूप से जो है वह दुनिया का सबसे सुंदर सबसे श्रेष्ठ सबसे उदार सबसे कल्याणकारी सबसे वैज्ञानिक प्रकृति और पर्यावरण के अनुकूल धरती के हर मनुष्य का धर्म है इसी तरह 100 वर्ष पहले बने हुए सारे मठ मंदिर आश्रम धर्म स्थान तीर्थ और सभी धार्मिक केंद्र बिल्कुल सही है जितने नए बने हुए हैं वह सब प्रचार और विज्ञापन के सहारे बने हुए हैं यदि व्यक्ति जांच पर रखकर इस धरती पर रहकर काम करता है तो वह न कभी धोखा खाता है और ना कभी उसको भयादोहन किया जा सकता है

Sunday, 26 April 2026

अप्रैल के अंतिम सप्ताह और मई के प्रथम सप्ताह के मौसम की प्रामाणिक भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर

अप्रैल के अंतिम सप्ताह और मई के प्रथम सप्ताह के मौसम की प्रामाणिक भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 

अप्रैल महीने में 14 अप्रैल से लगातार अग्निवर्ष हो रही है और इस कालखंड में लगातार उच्चतम तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 से 30 डिग्री सेल्सियस बना हुआ है और हवा लगातार पश्चिम और उत्तर पश्चिमी बनी हुई है ‌ सापेक्षिक आर्द्रता के भयंकर रूप से सात प्रतिशत तक गिर जाने से चारों तरफ अग्नि वर्षा और शरीर सुख जाने का मौसम लगातार बना हुआ है अधिकतम आद्रता इस बीच 40 से 50% बनी हुई है हवा की गति लगातार 15 से 25 किलोमीटर प्रति घंटा और हवा के झोंके 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा अंधड़ ‌ और कहीं कहीं आंधी तूफान में बदलते चले जा रहे हैं ‌ अप्रैल महीने में लगभग 100 वर्ष में 45 डिग्री सेल्सियस पर कभी पार नहीं हुआ था लेकिन इस बार कई पारा 45 डिग्री सेल्सियस पार कर चुका है और अभी अप्रैल के अंतिम सप्ताह में इसके 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाने की आशा है।

अब सभी को यह उत्सुकता है की आने वाला अंतिम अप्रैल का सप्ताह कैसा रहेगा सबसे पहले दवाओं की गति देखा जाता है अभी लगातार पश्चिम और उत्तर पश्चिमी हवा 2 दिन तक इसी तरह कायम रहेगी और इसकी गतिविधि 15 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी तापमान 2 दिनों तक चरम पर पहुंच जाने की आशा है विशेष करके 26 और 27 अप्रैल को इसके 46 डिग्री सेल्सियस छू लेने की संभावना है न्यूनतम तापमान भी 30 से 31 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाएगा जिससे सबको बहुत अधिक परेशानी होगी ‌ दो-तीन दिनों के बाद हवा की दिशा उत्तर उत्तर पूर्वी और फिर पूर्वी हो जाएगी कल अर्थात 26 अप्रैल को आंधी तूफान के साथ मध्यम घने बादल होंगे लेकिन वर्षा नहीं होगी‌।

28 से 30 अप्रैल के बीच एक बार फिर से मौसम तेजी से बदल जाएगा जब मध्य घने बादल घने बादलों में परिवर्तित हो जाएंगे और विशेष कर 29 और 30 अप्रैल को हल्की वर्षा गरज चमक और तूफान तथा वज्रपात के साथ जौनपुर ही नहीं दूर-दूर तक होने की आशा बन रही है इन सभी घटनाओं में एक दिन आगे पीछे हो सकता है तो वायु गुणवत्ता सूचकांक लगातार 50 से 100 के बीच अच्छा बना रहेगा पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 8 से 10 के बीच बहुत भयानक रहेगी ‌ इसके बाद 30 अप्रैल से तापमान गिरेगा और इसके अधिकतम तापमान में 10 से 12 डिग्री तक गिरने की संभावना है‌ न्यूनतम तापमान में भी 4 से 6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आएगी और ऐसी संभावना है कि एक में से 7 में के बीच अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 से 25 डिग्री सेल्सियस रहेगा इस प्रकार में का प्रथम सप्ताह अपेक्षाकृत कम गर्म रहेगा और दूसरे सप्ताह से फिर भयंकर गर्मी शुरू हो जाएगी गर्मी का प्रचंड प्रहार मैं और जून में भी आंधी पानी वज्रपात झंझा झकोर घन गर्जन वज्रपात वारिदमाला आंखों को चकाचौंध ‌ कर देने वाली विद्युत के साथ जारी रहेगा मैं और जून में भयंकर चक्रवार्ती आंधी आ सकती है। 

इस प्रकार मौसम का प्रमाणिक वर्णन अप्रैल के अंतिम सप्ताह और मैं के प्रथम सप्ताह के लिए ज्योतिष पंचांग गणित और विज्ञान तथा उपग्रह से प्राप्त आंकड़े और भारत की देसी कहावत और पशु पक्षियों कीट पतंगों  ‌ की चाल और व्यवहार के अध्ययन के बाद 49 वर्षों की तरह आप सभी के जनहित के लिए प्रकाशित किया जा रहा है।

24 से लेकर 27 अप्रैल तक भयंकर गर्मी के जौनपुर और भारत के सारे कीर्तिमान टूटेंगे सभी लोग सावधान रहो हमेशा की तरह 49 वर्षों से लाखों भविष्यवाणियों की तरह यह सुझाव और चेतावनी भी दे रहा हूं

मौसम की भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक  अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 
24 से लेकर 27 अप्रैल तक भयंकर गर्मी के जौनपुर और भारत के सारे कीर्तिमान टूटेंगे सभी लोग सावधान रहो हमेशा की तरह 49 वर्षों से लाखों भविष्यवाणियों की तरह यह सुझाव और चेतावनी भी दे रहा हूं

  प्रचंड हवाओं भीषण गर्मी के साथ आज से ‌‌ बरसेगी आग चलेगी लू अर्थात तापलहर ‌ मच जाएगा हाहाकार ‌ एक सप्ताह तक होगी अग्नि वर्षा तापमान हो जाएगा 45 डिग्री सेल्सियस के पार  बिल्कुल सूखा भयंकर गर्मी तेज हवा वाला मौसम 

आज का अधिकतम तापमान 45  डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के साथ बहुत ही भीषण गर्म होगा और भीषण गर्मी की शुरुआत ‌ आज सुबह से ही हो जाएगी ।‌ दिन तेज चटक शीशे जैसी धूप  हल्के बादल वाला रहेगा।‌‌ सापेक्षिक आर्द्रता 9 प्रतिशत तक गिर जाने और भयंकर गर्मी पैदा करने वाले बादलों के कारण दिन भयंकर गरम और असह्य होगा।‌ अधिकतम सापेक्षिक आर्द्रता भी गिरकर 30% हो जाएगी आज और 3 दिन तक बाहर निकालने योग्य मौसम नहीं रहेगा

कल अधिकतम तापमान 46डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस रहेगा हल्के बादल रहेंगे भयंकर तापलहर  लू के साथ आंधी अंधड़ तूफान  ‌‌तेज हवा  रहेगी और हवा की गति तेज होगी ‌ शरीर को जलाने वाली और सुखा देने वाली गर्मी सबको झुलसा कर रख देगी ‌ चारों हाहाकार मच जाएगा।

इस बीच चार-पांच दिनों तक जौनपुर  सहित संपूर्ण भारत    आंधी तूफान बहुत तेज हवा और अंधड़ ‌ लगातार विद्यमान रहेगा हवा की दिशा पश्चिम और हवा की गति 15 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा होगी सापेक्षिक आद्रता  9% से लेकर 40% के बीच और वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 से लेकर 100 के बीच रहेगा पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 9 से 11 के बीच रहेगी 

हमारे अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर ‌ द्वारा ‌ चेतावनी दी जाती है कि 10 से 15 दिन अर्थात 9 से  27 अप्रैल तक मौसम बिल्कुल साफ और सूखा भयानक रहेगा इसी बीच किसान अपना खेती किसानी का सारा काम समाप्त कर ले इसके बाद मौसम फिर से भयानक रूप से बिगड़ेगा ।‌‌ 27 अप्रैल के आसपास एक दो  दिन आगे पीछे हल्की वर्षा का योग बन रहा है किसान सावधान रहे‌ 27 अप्रैल से  1 मई के बीच कभी भी वर्षा हो सकती है इसके बाद थोड़ा बहुत एक-दो दिन आराम रहेगा।

मौसम आंधी तूफान अंधड़ तेज़ हवा भयंकर गर्मी का यह खेल अप्रैल और मई दोनों महीना में चलता रहेगा और सभी सरकारी गैर सरकारी मौसम विभागों के विपरीत इस बार का मौसम बहुत ही गर्म ‌ औरभयंकर रहेगा और वर्षा भी कम और अनियमित होगी जिससे सूखा जैसी स्थितियां बनेंगी

 कभी बहुत भयानक वर्षा होगी तो कभी बीच-बीच में सूखा रहेगा। दक्षिण भारत के केरल कर्नाटक महाराष्ट्र आंध्र और उड़ीसा के कई भागों में  ‌ पूर्वोत्तर भारत और हिमालय क्षेत्र में  ‌ 20 से 23 अप्रैल के बीच और मध्य प्रदेश के दक्षिण में छिटपुट वर्षा होगी ‌ अप्रैल के बिल्कुल अंतिम भाग में मौसम में परिवर्तन संभव है।

मानसून के केरल में प्रवेश करने की संभावना 29 में से 5 जून के बीच बन रही है संपूर्ण दुनिया में गर्मी बहुत भयंकर रूप से बढ़ेगी। अकाल महामारी फैलने की संभावना है 

मौसम के आकस्मिक परिवर्तन और उतार-चढ़ाव के कारण रोग बीमारियां बहुत तेजी से फैलेंगे और पक्षियों और पशुओं से रोग फैलेगा । 20 से 30 अप्रैल के बीच दुनिया में भयंकर आंधी तूफान भूकंप ज्वालामुखी विस्फोट विशेष कर जापान और दक्षिण पूर्वी एशिया में आने की और भारत में भी आने की संभावना है

इसलिए सभी लोग भयंकर गर्मी के लिए तैयार रहे चार-पांच दिन तक भयानक लू चलने लगेगी और तापमान 44-47 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाएगा‌ उत्तर पश्चिम उत्तर और मध्य भारत गुजरात और महाराष्ट्र उड़ीसा में यह तापमान 47 डिग्री सेल्सियस को भी पार कर जाएगा।
भयंकर गर्मी और प्रचंड आप लहर का कारण 

पहला कारण 

बुद्धिमान मानव जाति के द्वारा पेड़ पौधे हरियाली और जंगल काटकर उसकी जगह सीमेंट कंक्रीट और एक पत्थर के जंगल बढ़ा देना आप सभी को पता है की एक पत्थर सीमेंट और कंक्रीट दिन पर गर्मी शक कर जमीन गर्म करते हैं और रात को वह गर्मी वापस वायुमंडल में छोड़ते हैं जिससे रातें भयंकर गर्म हो रही है पहले ऐसा नहीं होता था रात ठंडी हो जाती थी क्योंकि जमीन कच्ची हरी-भरी पेड़ पौधों और पानी से युक्त होती थी

[4/20, 5:42 PM] Dr  Dileep Kumar singh: दूसरा कारण किसी भी प्रकार के पश्चिमी विक्षोभ का ना बनना और साफ स्वच्छ आसमान 

तीसरा कारण है तेज सूखी हवाओं का चलना और नमी का भयंकर रूप से गिरकर सात  प्रतिशत तक पहुंच जाना

चौथा कारण है जल के स्रोत तालाब कुएं ए बावली का सूख जाना और जमीन की मिट्टी की जगह कंक्रीट और सीमेंट की सड़क ‌ कच्चे मकान और छप्पर की जगह सीमेंट और कंक्रीट के मकान का जाल विछ जाना

और सबसे बड़ा कारण है परम बुद्धिमान मानव जाति के द्वारा भाषणों में और कागजों पर हरियाली और वृक्षारोपण करके तालाब कुआ बावली को केवल भाषण से भर देना मौके पर पूरे जमीन बंजर उसर वृक्ष विभिन्न और जल विहीन होना
 और अंतिम कारण है सूर्य पर उत्पन्न होने वाले प्रचंड विस्फोट के कारण और सौर कलंक जिससे लाखों किलोमीटर लंबी ज्वाला धरती समेत पूरे सौरमंडल तक फैल जाती हैं
[4/20, 5:44 PM] Dr  Dileep Kumar singh: बाकी हरियाली का लगातार पेड़ पौधों के साथ कम होना सीमेंट और कंक्रीट के जंगल का बढ़ना जो ग्रीन हाउस प्रभाव उत्पन्न करताहै

भारत की सभी सनातनी जनता से निवेदन है कि एक साल के लिए सारे तीरथ व्रत मंदिर जाना छोड़कर अपने धर्म के लिए काम करें।

भारत की सभी सनातनी जनता से निवेदन है कि एक साल के लिए सारे तीरथ व्रत मंदिर जाना छोड़कर अपने धर्म के लिए काम करें।

 हराम के पैसे खाकर पुलिस प्रशासन और सरकार जो इनको धूप में 10-10 घंटे खड़ा करती है ‌ गुंडागर्दी करते हैं लूट मार करते हैं और विशिष्ट लोग उनके आगे ही दर्शन करके चले जाते हैं।

 और इन्हीं ‌ करोड़ों श्रद्धालु जनता के के दान दक्षिणा और पैसे के चढ़ाने से 2 से 5 कुंतल तक के साधु संत महंत कथा वाचक गुरु योगाचार्य गाल गुलाबी नैन शराबी हैं और पंचमकार का भोग करते हुए सादा जीवन उच्च विचार को उपदेश देते हैं अपने आप ही जमीन पर आ जाएंगे 

और 1 साल में जब जनता के पैसे भोजन सामग्री सोना चांदी आभूषण समाप्त हो जाएंगे तबऔर गांव-गांव में घूम कर माइक से प्रचार करेंगे की हे सनातनी श्रद्धालु जनता आओ अब हम आपका स्वागत करेंगे और सीधे-सीधे दर्शन दिया जाएगा।

 लेकिन जब इसको मूर्ख सनातनी जनता समझ पाए तब तो 100 साल 200 साल तक यह लोग भोग करते हुए सोना चांदी हीरे मोती जवाहरात मंदिरों में धर्म स्थान पर छिपा कर रखेंगे और एक झटके में बाहर का आक्रमणकारी सब कुछ लूट ले जाएगा ।

कत्लेआम नरसंहार भी होगा वह भी निर्दोष सनातनी जनता का अलग से यदि यह बात आप लोगों को समझ में आ जाए तो ठीक है नहीं आ जाए तो जाकर खुली धूप में बरसते हुए पानी में और कड़कड़ाती ठंड में ठोकर खाईए लाठी गोली खाईए हमारा क्या जाता है ।

जिस तरह तीर्थ स्थान में तीर्थ यात्रियों के साथ बदसलूकी की होती है लाठी चार्ज होता है उसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता और तो और हर कदम पर उनसे लूटमार की जाती है कहीं धर्म के नाम पर तो कहीं गुंडागर्दी करके शीतला चौकिया से लेकर हर धाम में यही हाल है ‌ और हराम का खाकर गर्म हुई या पुजारी पांडा कुछ अपवाद छोड़कर महिलाओं से अश्लीलता और छेड़खानी करने से भी बाज नहीं आते हैं धर्म स्थान में रहते हुए इनका यह हाल है तो यह धर्म की और सनातन जनता की क्या सेवा करेंगे ‌ अभी केदारनाथ में जो भयानक लाठी चार्ज श्रद्धालु तीर्थ यात्रियों पर हुआ वह किसी भी प्रकार से स्वीकार करने योग्य नहीं है-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

Friday, 24 April 2026

अर्जुन और कर्ण दोनों में कौन महान था

अर्जुन और कर्ण दोनों में कौन महान था



-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 

मैं बिल्कुल निष्पक्ष और बिल्कुल सही-सही तथ्य रख रहा हूं मेरे करना आपका काम है की महानतम योद्धा अर्जुन थे या कर्ण था 

पहली बात महानतम व्यक्ति के लिए शांत रहना उत्तेजित न होना और अपनी शक्ति का सही प्रयोग करना चाहिए यह अर्जुन में पूरी तरह से था जबकि कारण में इसका अभाव था वह बहुत हठी दुराग्रही एवं स्वयं को महान समझने वाला व्यक्ति था ‌ जो एक चपरासी होकर कलेक्टर की कुर्सी जबरदस्ती हासिल करना चाहता था वह अभी बिना परीक्षा उत्तीर्ण किए हुए 

यदि अस्त्र शस्त्रों की तुलना किया जाए तो भी अर्जुन करण से बहुत आगे थे सभी दिव्यास्त्र को छोड़ दिया जाए तो अकेले पाशुपत अस्त्र है संपूर्ण सृष्टि के विनाश करने के लिए काफी था करण ने अपने समस्त विनाशकारी अस्त्र-शस्त्रों का प्रयोग कर दिया था लेकिन अर्जुन सक्षम होने पर भी पाशुपत अस्त्र का प्रयोग नहीं किया अन्यथा कारण तुरंत समाप्त हो गया होता।

करण में दया और क्षमता तथा मानव गुना का पूर्ण अभाव था एक महान योद्धा होते हुए भी और दानवीर होते हुए भी उसके यह अवगुण उसको साधारण श्रेणी में खड़ा कर देते हैं लेकिन जो लोग कर्ण की तरह हैं रावण की तरह हैं कंस दुर्योधन जरासंध और कालयवन ‌ जैसे हैं वह लोग हमेशा कारण को बढ़ा चढ़ा कर प्रस्तुत करते हैं जैसे एक मदिरा पीने वाला हमेशा मदिरा को सर्वश्रेष्ठ सिद्ध करता है।

करण के पास जन्म जात अवैध कवच और कुंडल था उसको दान करने के बदले उसने अमोघ वासवी शक्ति इंद्र से मांग लिया जिससे उसकी दानवीरता पर प्रश्न चिन्ह लग गया यदि उसने यह शक्ति ठुकरा दी होती तो निश्चित रूप से उसकी महानता सिद्ध होती‌ दान करते समय भी अर्जुन को महान शत्रु और प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखना और करने की शक्ति प्राप्त करना कहीं से भी उचित और महान नहीं कहा जा सकता है। 

यदि मूल महाभारत को अध्ययन करेंगे तो आपको प्राप्त होगा कि दुर्योधन और शकुनि तथा दुशासन की सभी छल कपट विश्वास घाट की योजनाओं में कर्ण सम्मिलित था‌ चाहे अज्ञातवास हो चाहे उनका जलाकर मारने वाली स्थिति हो या वन में जाकर पांडवों की दुर्दशा देखना हो या फिर दुर्वासा को पांडव लोगों के यहां भेज कर उनको श्राप दिलाना हो या विराटनगर में युद्ध करना हो हर जगह कर्ण उपस्थित था यह दुआ चाहता तो बलराम की तरह अलग भी रह सकता था कम से कम इस अधर्म के युद्ध में तो उसे ऐसा ही करना चाहिए था।

अंग राज कर्ण ने ‌ राजकुमारों की हस्तिनापुर में द्रोणाचार्य द्वारा ली जा रही अस्त्र-शस्त्र परीक्षा में बिना किसी पात्रता और प्रवेश पत्र के जबरदस्ती घुसकर वातावरण में प्रदूषण भरकर तनाव पैदा कर दिया यह तो ऐसा ही दृश्य था कि बिना सिविल सेवा की परीक्षा दिए जबरदस्त की उसके साक्षात्कार में घुस जाना और यह कहना कि मैं इसके सर्वथा योग्य हूं ऐसा ही होता है इतना ही नहीं सारी चेष्टा करके भी वह संध्या काल तक अर्जुन को परास्त नहीं कर पाया था। 

कारण यदि चाहता तो वारणावत में किसी के द्वारा युधिष्ठिर को सूचना देकर उन्हें बचा सकता था जबकि वह जानता था कि पांडव उसके सगे भाई हैं और माता कुंती उसकी सगी मां है फिर भी उसने बढ़ाने का कोई प्रयास नहीं किया ‌ इसी तरह उसने भरी सभा में कल वधू द्रौपदी की रक्षा का प्रयास किस लिए नहीं किया क्योंकि स्वयंवर में वह द्रोपदी का वर्णन नहीं कर पाया था इतने निम्न और घटिया स्तर के व्यक्ति को अर्जुन से तुलना करना पूरी तरह मूर्खता है 

अर्जुन की महानता वर्णन से परे है जब इंद्रलोक में गए तो संपूर्ण ब्रह्मांड की सर्वश्रेष्ठ सुंदरी जिसके लिए बड़े-बड़े ब्रह्म ऋषि लालायित रहते हैं उसे उर्वशी को अर्जुन ने तत्काल ही ठुकरा कर एक ब्रह्मांड का कीर्तिमान स्थापित किया जो कोई सोच भी नहीं सकता इतना ही नहीं उत्तरा की शिक्षा देने वाले अर्जुन से जब कृतज्ञता के रूप में विराट राज ने उत्तर का विवाह अर्जुन से करने को कहा तो अर्जुन स्तब्ध रह गए उन्होंने कहा यह तो मेरी बेटी के समान है और ऐसा करने पर हमेशा के लिए गुरु शिष्य परंपरा कलंकित हो जाएगी यह आज के उन शिक्षक गुरु लोगों के लिए एक सर्वश्रेष्ठ शिक्षा है जो अपने बेटी समान छात्राओं से कुकर्म करते हैं इसके बाद अर्जुन की महानता पर कोई? नहीं रह जाता।‌ उत्तर पूरे विश्व की सर्वश्रेष्ठ सुंदरी योग्य कन्या थी और उर्वशी ने तो बड़े-बड़े ब्रह्म ऋषि और ऋषि मुनि सुर नर मुनि साहब की तपस्या भंग ही कर दिया था‌।

करण को अच्छी तरह मालूम था कि द्रौपदी पांडव अभिमन्यु माता कुंती सब उसके अपने हैं जबकि पांडव पक्ष को अज्ञात नहीं था अन्यथा वे कर्ण को राजा बनाकर स्वयं जंगल में चले गए होते ‌ करण के सामने ही धर्म युद्ध में 16 वर्ष के अभिमन्यु का निर्माण हत्याकांड हुआ और करण ने ही इसमें सबसे प्रमुख भूमिका निभाई अभिमन्यु का कवच कोई नहीं काट सकता था जिसे कर्ण ने काटा था फिर वह कैसे महान हो सकता था 

अर्जुन और पांडव इतने महान थे कि जैसे ही उनको पता लगा कि कर्ण उनके बड़े भाई थे उनके दुख क्रोध और शोक की कोई सीमा ही नहीं रही और युधिष्ठिर ने तो माता कुंती को श्राप दे दिया की है मां आज से स्त्रियों को कोई भी बात उनके हृदय में पच नहीं पाएगी और उन्होंने पूरे सम्मान से कर्ण का अंतिम संस्कार करके उसको जलांजलि दिया था आप स्वयं समझ सकते हैं कि कौन अधिक महान था।

कर्ण ने धोखे और छल कपट से स्वयं भगवान परशुराम से अस्त्र-शस्त्र विद्या सीखी और स्वयं को ब्राह्मण बताया‌ बाद में जब उसका भांडा फूटा तो भगवान परशुराम के क्रोध की कोई सीमा न रही गुरु से छल कपट और झूठ बोलने से बड़ा पाप दुनिया में कोई नहीं हो सकता यह कारण की महानता पर प्रश्न चिन्ह लगता है इसके अतिरिक्त गाय का का वध और ब्राह्मण का श्राप उसको मिला जबकि अर्जुन के साथ ऐसा कुछ नहीं था।‌ अर्जुन नेटवर्क ब्राह्मण पुत्र और गुरु सांदीपनी के लिए साक्षात यमलोक में जाकर यमराज से युद्ध किया और उन्हें परास्त किया था अर्जुन ने स्वयं सृष्टि के आदि देव भगवान शिव को भी युद्ध करके संतुष्ट कर दिया था जबकि कर्ण के साथ ऐसा कुछ नहीं था।

कारण यह जानता था कि भगवान श्री कृष्ण साक्षात भगवान श्री हरि विष्णु के अवतार हैं लेकिन उनके भी शिक्षा का कारण के अभिमानी और मूर्ख हृदय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा वह केवल अंग्रेज बना दिए जाने की कृतज्ञता के कारण पूरी तरह से अधर्मी और अत्याचारी दुर्योधन के साथ बना रहा जबकि कृष्ण ने उसको यह भी बता दिया कि तुम पांडवों के सबसे बड़े भाई हो और कुंती तुम्हारी सगी मां है और यह भी कहा कि कम से कम तुम युद्ध से अलग हो जाओ तो यह संपूर्ण धरती का विनाश करने वाला युद्ध रुक जाएगा परंतु उसने स्वयं भगवान की भी एक नहीं सुनी एक समय तो उसने भगवान श्री कृष्ण से लड़ाई करके उनका चक्र ही जीने का प्रयास किया था इतना दुस्साहसी व्यक्ति महान कैसे हो सकता है।

कर्ण के सामने महाभारत के सारे अधर्म अत्याचार अन्याय घटित हुई लेकिन कभी भी वह धर्म न्याय और सच्चाई के पक्ष में नहीं दिखा‌‌। अर्जुन से प्रतिस्पर्धा करना ठीक था लेकिन उसे अर्जुन के अन्य महान गुणों को भी अपनाना चाहिए था उसकी सारी शक्तियां उनके कवच कुंडल और दिव्यास्त्रों में छिपी हुई थी ‌ जबकि अर्जुन ने अकेले ही दिग्विजय के समय सारी धरती को जीत लिया था। 

अब सीधे-सीधे कारण और अर्जुन की युद्ध संबंधी महानता और अस्त्र-शस्त्र कुशलता पर आ जाते हैं जब त्रिगर्तराज सुशर्मा ने दुर्योधन को बुरी तरह पराजित करके राशियों में बांधकर अपमानित किया तब कर्ण पराजित होकर भाग आया जो काम करने सहित सारी कौरव सुना नहीं कर पाई उसी को अर्जुन ने अकेले बुरी तरह हार कर दुर्योधन सहित सारी कौरव सी को मुक्त किया था अब आप खुद अनुमान लगा लीजिए कि कौन परम अतिरथी योद्धा था।

करण को अर्जुन को करने और हारने के अनेक मौके मिले लेकिन वह कभी भी सफल नहीं हो पाया जबकि उसे समय तक उसके पास सारे दिव्यास्त्र के साथ इंद्र की दी हुई अमोघ शक्ति भी थी और कवच कुंडल भी था जब रंगभूम में कौरव पांडवों की शस्त्र परीक्षा हो रही थी तो कारण जबरदस्ती अर्जुन से युद्ध नियमों को तक पर रखकर किया फिर भी अर्जुन को हरा नहीं पाया 

इसी तरह जब विराटनगर में विराट कौरव सेना महान अतिरथी योद्धाओं द्रोणाचार्य भीष्म पितामह कृपाचार्य कारण दुर्योधन अश्वत्थामा दुशासन के साथ गई थी तब अकेले ही अर्जुन ने संपूर्ण कौरव सी को हराकर विश्व कीर्तिमान स्थापित किया था चाहते तो सबको मार कर उसी दिन संपूर्ण राज्य पथ ले सकते थे लेकिन दया और करुणा से भरे अर्जुन ने छोड़ दिया और उसे दिन एक नहीं दो दो बार कारण को अर्जुन ने बुरी तरह से घायल करके छोड़ दिया चाहते तो उसका उसी दिन अंत कर सकते थे यदि कारण उनकी जगह होता तो अभिमन्यु की तरह अर्जुन को मार देता इससे स्पष्ट है कि करण अर्जुन का वध करने में सक्षम नहीं था 

महाभारत युद्ध में भीष्म पितामह के पराजय के बाद कारण लगातार 7 दिन तक कौरव सेवा में अर्जुन से लड़ता रहा लेकिन अर्जुन को मार नहीं पाया इस बीच अर्जुन ने उसे कई बार पराजित करके भगा दिया था कारण के जीवित रहते ही दुर्योधन के 100 भाई दुशासन शकुनी सहित द्रोणाचार्य और सभी महान योद्धा मारे गए वह किसी को बचा नहीं पाया जब किसी भी तरह वह घटोत्कच से युद्ध में नहीं जीत सका तब उसने अमोघ शक्ति से उसका वध कर दिया इस प्रकार कारण महान नहीं था बल्कि उसके दिव्य अस्त्र-शस्त्र महान थे चक्रव्यूह निर्माण के दिन अभिमन्यु ने उसको दो बार परास्त किया था और उसके देखते-देखते दुर्योधन के पुत्र लक्ष्मण का वध कर दिया था कर्ण कुछ भी नहीं कर सकता था जबकि अर्जुन के सामने उनके एक भी योद्धा का वध कोई भी महारथी योद्धा नहीं कर पाया था सात्यकि को उन्होंने मृत्यु के मुंह से बचाया था।

वास्तव में लोग फिल्म टीवी चैनल सोशल मीडिया और मीडिया तथा धारावाहिक देखकर कारण को बहुत महान समझने की भूल करते हैं इसीलिए उनका यह सोचना है कि कर्ण बहुत महान योद्धा था जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं था ‌ कुछ महा मूर्ख विद्वान तो यहां तक कहते हैं कि अर्जुन ने हत्या कर्ण का  वध किया था जो पूरी तरह से झूठ है‌ मूल महाभारत पढ़ कर देखो जब कर्ण का पहिया रस में धंस गया तब दयालु अर्जुन ने अपना गांडू धनुष रख दिया और श्री कृष्ण के बहुत समझाने पर ही कारण से लड़ने को तैयार हुए और कारण रस का पहिया निकलते हुए भी अर्जुन से लगातार युद्ध करता रहा इस क्रम में उसने ब्रह्मास्त्र सहित अनेक दिव्य अस्त्र शस्त्रों का प्रयोग किया जिसे अर्जुन ने काटकर उसको दबा दिया और जी अंजलि अस्त्र का प्रयोग अर्जुन ने रौद्रास्त्र भर कर किया था उसे अस्त्र का कर्ण के पास कोई भी उत्तर नहीं था इसलिए वह मारा गया।‌ करण इतना बड़ा मूर्ख और अभिमानी था कि रंगभूमि में केवल अर्जुन को पराजित करने के लिए उसने भार्गव अस्त्र का प्रयोग करना चाहा था जो सूर्यास्त होने के कारण नहीं कर पाया यदि अर्जुन ने पाशुपत अस्त्र उठा लिया होता तो कर्ण का वही वध हो गया होता। 

‌‌ अर्जुन के अलावा सात्यकी कर्ण को चार बार अभिमन्यु ने चार बार सुशर्मा ने एक बार भीम ने चार बार और प्रद्युम्न ने एक बार हराया था ‌ और सबसे बड़ी बात है कि हारने के बाद कारण हर बार युद्ध भूमि छोड़कर भाग जाता था इस प्रकार कर्ण के अजेय योद्धा होने का भ्रम अपने आप टूट जाता है वैसे कारण को बेचारा बनाकर अनुचित लाभ लेने के लिए फिल्म और धारावाहिक वालों ने उसको इतना बड़ा चढ़ा कर दिखा दिया है की असली सच ही छप गया है उसे तो झूठ-मूठ में पहाड़ पर चढ़कर इंद्र पर आक्रमण करके इंद्र को परास्त होते हुए दिखाया गया है जो पूरी तरह से सत्य और अनुचित है। वास्तव में कर्ण प्राचीन काल में एक राक्षस था जिसका नाम दंभोद्भव था उसने ब्रह्मा जी से कठिन वरदान प्राप्त किया जिसके कारण भगवान विष्णु को चार बार अवतार लेना पड़ा जिसमें नर नारायण और कृष्ण अर्जुन भी सम्मिलित हैं

उपर्युक्त बिल्कुल सही तथ्य मूल महाभारत से लिए गए हैं अब आप लोग यह चुनने के लिए स्वतंत्र हैं की कर्ण एक महानतम योद्धा था या परमवीर अर्जुन अपने समय के सबसे महान योद्धा थे ‌ एक बात और है कि अर्जुन के पास भगवान शिव का पाशुपत अस्त्र था जो तीनों लोकों को नष्ट कर सकता था परंतु कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अर्जुन ने उसका प्रयोग नहीं किया क्योंकि वह धरती और मानवता को नष्ट नहीं करना चाहते थे ‌ जबकि कारण बहुत ही क्रोधी अहंकार पूर्ण और उतावला होने वाला योद्धा था जिसे हर प्रकार के उपलब्ध है दिव्या स्टारों का प्रयोग कर लिया था -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

धरती पर पतिव्रता धर्म का प्रतिमान स्थापित करने वाली भगवती सीता मां का जन्मदिन (24 अप्रैल वैशाख शुक्ल पक्ष नवमी)-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

धरती पर पतिव्रता धर्म का प्रतिमान स्थापित करने वाली भगवती सीता मां का जन्मदिन (24 अप्रैल वैशाख शुक्ल पक्ष नवमी)-,



डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 

अपने पति का अनुसरण करने के लिए माता और पिता दोनों के राजपाट को छोड़कर जंगल जंगल भटकने वाली और हर कष्ट सहन करने वाली जीवन भर दुख सहन करने वाली भगवती सीता मां का वैशाख महीने की नवमी की तिथि को जयंती मनाई जाती है । त्रेता युग में जब महाराजा जनक के राज में  चारों तरफ महान अकाल और सूखा पड़ा था तब विद्वान और ज्योतिषी लोगों की सलाह पर राजा जनक ने अपनी पत्नी के साथ सोने का हल खेत में चलाया था और वह हल एक घड़े से टकरा गया था।

 जिसको  निकालने पर घड़े से एक अद्भुत अलौकिक कन्या रत्न की प्राप्ति हुई और हल की फॉर से बने सीतों के कारण उनका नाम सीता रखा गया‌ जो बाद में जनक नंदिनी मिथिलेश नंदिनी वैदेही जैसे अनगिनत नामों से विख्यात हुई उनके जन्म लेते ही अर्थात घड़े के मिलते ही आसमान में घनघोर घटाएं छा गई और मूसलाधार वर्षा से सारा अकाल और सूखा मिट गया था।‌ और धरती पर हर दिशा में हरियाली छा गई थी सबसे अद्भुत बातें है कि सर्वप्रथम भगवान श्री राम चैत्र माह की नवमी को पैदा हुए उसके बाद हनुमान जी चैत्र माह की पूर्णिमा और फिर सीता मां भी नवमी तिथि को लेकिन वैशाख माह में पैदा हुई इस प्रकार वह जन्म में भी भगवान श्री राम से छोटी थी।

भगवती सीता के पिता महाराज जनक के भाई सीरध्वज के तीन और पुत्रियां थी । जिनके नाम मांडवी उर्मिला श्रुति कीर्ति थे बचपन में ही सीता जी ने भगवान शिव के उसे प्रचंड धनुष को बगीचे से उठाकर पूजा गृह में रख दिया था जिसको रावण जैसा तथा कथित तीनों लोकों का विजेता भी उठा नहीं पाया था।‌ यह देखकर इस अद्भुत असाधारण करने के लिए जनक जी ने प्रतिज्ञा किया कि इसका विवाह उसी से होगा जो यह धनुष उठाकर उसकी प्रत्यंचा चढ़ा देगा 

सीता जी के बाद होने पर उनका स्वयंवर आयोजित किया गया जिसमें देव दनुज किन्नर नर राक्षस सहित तीनों लोक के महान वीर योद्धा उपस्थित हुए रावण और बाणासुर भी इसमें सम्मिलित थे।‌ लेकिन तीनों लोकों में कोई उसे धनुष को हिला भी नहीं पाया तब भगवान श्री राम जो साक्षात श्री हरि विष्णु के अवतार थे ने धनुष के प्रत्यंचा चढ़कर उसे तोड़ दिया परशुराम का गुरूर चूर-चूर किया और देवी सीता जी के साथ अयोध्या आए इसी क्रम में मांडवी का भरत से ‌ उर्मिला का लक्ष्मण से और श्रुति कीर्ति का शत्रुघ्न से विवाह हुआ।

विवाह के बाद कुछ वर्ष आनंद से बीतने के बाद जब भगवान श्री राम को वनवास हुआ तो भगवती सीता ने राजपाट ससुराल और मायका सब छोड़ और भगवान श्री राम और लक्ष्मण के साथ वन को निकल गई ‌ वहां पर निषाद राज केवट और चित्रकूट में महासती अनसूया और अत्रि ऋषि से मिलकर गहन दंडक वन से होते हुए पंचवटी में चली गई जहां पर हम तेजस्वी मारकंडे और अगस्त ऋषि से उन लोगों को दिशा निर्देश मिले।

कालांतर में खरदूषण भीम के वध और सूर्पनखा की नाक काटने पर ‌ भीषण संग्राम में खरदूषण उसकी सेवा मारी गई तब रावण मरीज की सहायता से साधुवेश धारण कर सीता जी का हरण कर लिया अपार कष्ट और परेशानी जय कर भी माता-पिता अशोक वाटिका में अपने अटल पतिव्रत धर्म पर अधिग रही ‌ और तीनों लोगों के विजेता रावण उनकी सेवा आती कार्य कुंभकरण मेघनाथ के मारे जाने पर लंका विजय के पश्चात अग्नि परीक्षा में अपनी छाया रूपी सीता को जलाकर असली सीता के रूप में श्री राम लक्ष्मण वानर सेवा के साथ निषाद राज से मिलते हुए अयोध्या लौटकर पटरानी बनी 

कालांतर में एक जनता के परिवार के  प्रवाद के कारण भगवान श्री राम की मर्यादा को समझते हुए उन्होंने इससे अच्छा से गर्भवती होने के बाद भी खुद को जंगल में छोड़ने को कहा और ब्रह्म ऋषि वाल्मीकि के आश्रम में रही जहां उनके लव और कुश नाम के दो परम अतिरथी पुत्र पैदा हुए‌ जिन्हें भगवती सीता ने इतना वीर बनाया कि तीनों लोकों की विजेता सी और रावण को मारने वाली राम की सेवा भारत लक्ष्मण शास्त्रों में हनुमान अंगद सुग्रीव विभीषण सभी को इन्होंने परास्त कर दिया 

कालांतर में भगवती सीता अयोध्या आई और भगवान श्री राम ने उनको सादर पत्नी रूप में स्वीकार किया लेकिन अपना बैकुंठ जाने का समय पूरा हुआ जानकर धरती से उत्पन्न सीता माता धरती में समा गई और बैकुंठ में अपना आसन लक्ष्मी के रूप में ग्रहण किया। इसके बाद भगवान श्री राम भी लव और पुष्प को सारा राज पाठ सौंप कर और अमेरिका यूरोप ऑस्ट्रेलिया अफ्रीका लक्ष्मण शत्रुघ्न के पुत्रों को बताकर सारी जनता के साथ सर्दियों में समाहित होकर बैकुंठ लोक चले गए 

भगवती सीता का चरित्र इतना पवित्र और विराट है जिसको लिखने के लिए एक महाकाव्य भी काम हो जाएगा इसलिए वह अनुसूया नर्मदा सती लक्ष्मी और सरस्वती ‌ उर्मिला सुलोचना के समान महा सती मानी जाती हैं ‌ उनका चरित्र रखना केवल अनुकरणीय है बल्कि प्रातः स्मरणीय भी है‌ उनके शराब से शापित होने के कारण अयोध्यावासी कभी विकास नहीं कर पाए और अभिशप्त अयोध्या भी फिर से वह गौरव नहीं प्राप्त कर पाई अयोध्या की रक्षा और उसे पूर्ण बीना से बचने के लिए अमर योद्धा हनुमान जी को नियुक्त करके सब अवतारी लोग अपने-अपने धाम चले गए 

आज के लोग धारावाहिक और चलचित्र देखकर तथा विभिन्न प्रकार के सनातन द्रोही लोगों की रचनाओं को पढ़कर अपने धर्म और देवी देवताओं तथा अवतारी पुरुषों पर जो टिप्पणी करते हैं वह न केवल मोर खाता पूर्ण है बल्कि धर्म विरुद्ध है और विनाश करने वाली है जैसे कुछ लोग भगवान श्री कृष्ण को 1600 रानियां का होना बताते हैं लेकिन उनका मूल पुस्तक में पढ़ने से या भ्रम होता है जब नरकासुर के द्वारा त्याग दी गई रानियां को अपनाने का साहस किसी में नहीं हुआ तब उन्होंने अपने नगर में उन सभी को सम्मान पूर्वक रखा था पहले श्री कृष्ण की तरह एक अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर फिर उसे पर टिकट टिप्पणी करना चाहिए 

इसी तरह भगवान श्री राम पर टीका टिप्पणी करने वाले को पहले भगवान श्री राम बनकर दिखाना चाहिए जो एक बार से ही प्रशांत हिंद अटलांटिक उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव महासागर को सुखा सकते थे जिन्होंने जयंत को एक ही तीर मारा जिसको बचाने पूरे तीनों लोकों में कोई आगे नहीं आया कुंभकरण और रावण जैसे तीनों लोगों के  विजेता को उन्होंने खेल-खेल में मार गिराया। इसीलिए लाखों करोड़ों वर्ष बीत जाने पर भी भगवती सीता और उन जैसे अमर और पवित्र चरित्र के लोग आज भी ‌ अनंत कोटि सूर्य की भांति तीनों लोकों में चमक रहे हैं।

Thursday, 23 April 2026

देश के सभी ‌ दलों चाटुकार उनके के समर्थक लोगों और उनके चापलूस चाटुकार दलाल चमचे मक्खनबाज और 420 ‌ लोगों को एक महीने का मौका देता हूं कि 1947 से एक भी ऐसा प्रधानमंत्री राष्ट्रपति देश के सामने लेकर आए और अपने पार्टी की वास्तविकता दिखाएं-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

जिसे वास्तव में अपने को भारतीय होने का अभिमान हो और जो मन वचन कर्म से देश के लिए समर्पित हो 


जो प्राचीन भारत के गौरव को फिर से स्थापित कर सात महाद्वीप और पांच महासागरों पर सतयुग द्वापर त्रेता की तरह भारत का झंडा लहरा सके 

जो देश में हर प्रकार के मदिरापान नशा और बुरी कृतियों को समाप्त करके देशवासियों में स्वाभिमान और देश प्रेम भर सके 

जिसे देखकर वास्तव में देश की सारी जनता गर्व करें और जो 22 करोड़ विदेशी घुसपैठियों के रूप में भारत में घुस चुके आतंकी रोहिंग्या विदेशी एजेंट बांग्लादेशी पाकिस्तान और गद्दारों को देश से बाहर उनके मूल स्थान पर भेज सके 

जो यूरोप अमेरिका का एजेंट और अरब देशों की कठपुतली ना हो और केवल सनातन धर्म और स्वदेशी का विकास करें 

जिसके दो रूप हाथी के दांत की तरह ना हो और जो अपने चुनावी घोषणा पत्र को वास्तव में लागू करें 


जो ममता बनर्जी लालू मुलायम अखिलेश केजरीवाल तथा इस तरह के अन्य सनातन विरोधी देश विरोधी लोगों को जेल में डाल सके 


जिसे पाकिस्तान के स्वादिष्ट रस भरे आम पसंद ना हो और जो मुस्लिम देशों के हाथों में ना खेलते हो जो ट्रंप की दहाड़ सुनकर डर ना जाए 


जो भारत को सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति खेल शक्ति सैन्य शक्ति अंतरिक्ष शक्ति और सबसे बड़ा देश बना सके 

देश के सभी ‌ दलों चाटुकार  उनके के समर्थक लोगों और उनके चापलूस चाटुकार दलाल चमचे मक्खनबाज और 420 ‌ लोगों को एक महीने का मौका देता हूं कि 1947 से एक भी ऐसा प्रधानमंत्री राष्ट्रपति देश के सामने लेकर आए और अपने पार्टी की वास्तविकता दिखाएं-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि