Saturday, 16 May 2026

अधिक मास मलमास और क्षय मास में अंतरडॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक

अधिक मास मलमास और क्षय मास में अंतर
डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक 
सनातन धर्म एक संपूर्ण वैज्ञानिक धर्म है जो प्रकृति और पर्यावरण के साथ-साथ संपूर्ण ब्रह्मांड से और सृष्टि के निर्माण से जुड़ा हुआ है वर्ष के 12 महीना में कभी-कभी ऐसा भी समय आता है जब एक महीने अधिक हो जाता है अर्थात एक वर्ष 13 महीने का होता है ‌ इसको पुरुषोत्तम मांस और मलमास भी कहा जाता है मालिन होने के कारण इस पूरे महीने में कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं ‌ यह औसत 32.5 महीने के बाद आता है इस वर्ष से 17 में से प्रारंभ हो रहा है और 15 जून को समाप्त हो रहा है इस प्रकार इस वर्ष 13 महीने होंगे जेठ महीना दो बार पड़ेगा

क्षय मास का अर्थ है कम करना ‌ यह अधिक मास का उल्टा होता है अर्थात जब 6 मास लगता है तब 1 वर्ष में 12 महीने की जगह केवल 11 महीने होते हैं ‌ 6 मार्च में सूर्य का संक्रांति एक ही राशि में दो बार होता है ‌ ऐसा क्यों होता है सरल वैज्ञानिक भाषा में हम इसको आपको समझाने का प्रयास कर रहे हैं 

दुनिया के सभी महीने सूर्य और चंद्रमा पर आधारित होते हैं जो पंचांग सौर वर्ष पर आधारित होता है जैसे भारत का पंचांग और अंग्रेजों का अर्थात इसी पंचांग उसमें 365 दिन होते हैं जबकि चंद्र वर्ष में 354 दिन होते हैं इस प्रकार दोनों में 11 दिन का अंतर होता है इसीलिए आपने देखा होगा कि मुस्लिम त्यौहार हर वर्ष में महीना और दिन के साथ बदलते रहते हैं जबकि अन्य धर्म के त्योहारों में ऐसा नहीं होता है 

अब आपको वैज्ञानिक सत्य बताते हैं ‌ धरती सूर्य की एक परिक्रमा 365 दिन 5 घंटे 41 मिनट 52 सेकंड में करते हैं इस प्रकार सौर पंचांग में भी एक वर्ष में 5 घंटे 41 मिनट 52 सेकंड का अंतर आ जाता है इधर भारत का हिंदी महीना 360 दिन का होता है इसलिए इसमें 5 दिन का अंतर हर एक साल में पड़ता है इस प्रकार से हर तीसरे वर्ष अधिक मास या मलमास लगता है जैसे इस वर्ष सन 2026 विक्रम संवत 2083 में हो रहा है ‌ क्योंकि 11 दिन का अंतर 3 वर्ष में 33 दिन हो जाता है 

इधर 5 घंटे 41 मिनट 52 सेकंड का अंतर 1200 वर्ष में 1 महीने का हो जाता है इसके बाद पंचांग में फिर से सुधार करना पड़ता है लेकिन यह एक लंबा समय होता है इसीलिए इस पर बहुत अधिक ध्यान लोगों का नहीं जाता है विद्वान ज्योतिषी वैज्ञानिक और गणितज्ञ हर 1200 वर्षों में इसको सुधार देते हैं इसीलिए भारत की काल गणना बहुत ही सूक्ष्म और सबसे वैज्ञानिक है जिसमें दो अरब वर्ष का संपूर्ण वर्णन एकदम सही-सही बिना किसी त्रुटि के किया गया है।

यही संक्षेप में मलमास क्षय मास अधिक मास का रहस्य है ‌ एक बार और है कि दुनिया के हर पंचांग में वर्ष का अंतर भले हो लेकिन दिन सभी धर्म के और सभ्यता के पंचांग में सात ही होते हैं ‌ सोमवार मंगलवार बुधवार बृहस्पतिवार शुक्रवार शनिवार और रविवार दिन और हिंदी महीने में चैत्र वैशाख जेठ आषाढ़ सावन भादो क्वार कार्तिक अगहन पूस माघ और फागुन है।

अधिक मास में क्या करना चाहिए 

अधिक मास में शुद्ध चित्र और सदाचार से रहना चाहिए दान पुण्य करना चाहिए अपनी-अपने देश और धर्म की रक्षा को छोड़कर हिंसा नहीं करनी चाहिए हर प्रकार के नशे और नशीली चीजों से दूर रहना चाहिए सत्य अज्ञान और अंधकार पर विजय पाने की चेष्टा करनी चाहिए और भगवान विष्णु का पूजा पाठ तुलसी मां की सेवा और तुलसी मां की पूजा करना चाहिए कम से कम एक अच्छी आदत को अपनाना चाहिए और एक बुरी आदत छोड़ देना चाहिए 

अधिक मास में क्या नहीं करना चाहिए 

अधिक मास की अवधि में कोई भी नया कार्य नहीं करना चाहिए कोई शुभ और मांगलिक कार्य भी नहीं करना चाहिए नया मकान भवन वाहन संपत्ति भी नहीं खरीदना चाहिए वहां आभूषण वस्त्र सहित कोई भी अन्य खरीददारी इस महीने में नहीं करना चाहिए नया भवन निर्माण नहीं करना चाहिए पूजा पाठ तो कर सकते हैं लेकिन बड़े-बड़े यज्ञ हवन इत्यादि नहीं करना चाहिए ‌ इस महीने में अपने आप को अधिक से अधिक जानते हुए परम तत्व को समझने की चेष्टा करनी चाहिए

Friday, 15 May 2026

अधिक मास में क्या करना चाहिए

अधिक मास में क्या करना चाहिए 
अधिक मास में शुद्ध चित्र और सदाचार से रहना चाहिए दान पुण्य करना चाहिए अपनी-अपने देश और धर्म की रक्षा को छोड़कर हिंसा नहीं करनी चाहिए हर प्रकार के नशे और नशीली चीजों से दूर रहना चाहिए सत्य अज्ञान और अंधकार पर विजय पाने की चेष्टा करनी चाहिए और भगवान विष्णु का पूजा पाठ तुलसी मां की सेवा और तुलसी मां की पूजा करना चाहिए कम से कम एक अच्छी आदत को अपनाना चाहिए और एक बुरी आदत छोड़ देना चाहिए 

अधिक मास में क्या नहीं करना चाहिए 

अधिक मास की अवधि में कोई भी नया कार्य नहीं करना चाहिए कोई शुभ और मांगलिक कार्य भी नहीं करना चाहिए नया मकान भवन वाहन संपत्ति भी नहीं खरीदना चाहिए वहां आभूषण वस्त्र सहित कोई भी अन्य खरीददारी इस महीने में नहीं करना चाहिए नया भवन निर्माण नहीं करना चाहिए पूजा पाठ तो कर सकते हैं लेकिन बड़े-बड़े यज्ञ हवन इत्यादि नहीं करना चाहिए ‌ इस महीने में अपने आप को अधिक से अधिक जानते हुए परम तत्व को समझने की चेष्टा करनी चाहिए

Wednesday, 13 May 2026

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के आदेश एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के निर्देश पर ...

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के आदेश एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्व वरदान में एक विधिक साक्षरता जागरूकता शिविर का आयोजन जनपद न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर जनक कुमारी इंटरमीडिएट कॉलेज सिविल लाइंस जौनपुर में आयोजित किया गया
 इस अवसर पर सिविल जज सचिव पूर्ण काली के सुशील कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह क्षेत्रीय वन अधिकारी शालिनी चौरसिया ‌ जिला चिकित्सालय की परामर्शदाता सीमा सिंह डाटा परिवार न्यायालय देवेंद्र कुमार यादव प्रधानाचार्य जनक कुमारी इंटर कॉलेज शंकर बहादुर सिंह एवं ‌ पुलिस विभाग के अधिकारी प्राधिकरण के सुनील कुमार मौर्य राकेश कुमार यादव एमपीएलबी शिव शंकर सिंह छात्र-छात्राएं और शिक्षक गण उपस्थित रहे 
विधिक साक्षरता जागरूकता संगोष्ठी को संबोधित करते हुए सचिव पूर्ण कालिक सुशील कुमार सिंह ने प्राधिकरण के कार्य प्राधिकरण के द्वारा दिए जा रही सहायता के बारे में बताते हुए नशा उन्मूलन बच्चों को 18 वर्ष की आयु के बाद ही मोटर वाहन चलाने ड्राइविंग लाइसेंस और इंश्योरेंस बीमा साथ रखने के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि यदि पीड़ित प्रताड़ित लोगों की महिलाओं की लड़कियों की प्रार्थना कहानी सुनी नहीं जाती तो वह वह प्राधिकरण की सहायता ले सकते हैं 

इसी क्रम में डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह शालिनी चौरसिया सीमा सिंह देवेंद्र कुमार यादव के द्वारा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और मध्यस्थता केंद्र फ्रंट ऑफिस लीगल एड डिफेंस सिस्टम ‌ पैनल लाऔर और वॉलिंटियर्स सिस्टम  ‌ प्री लिटिगेशन मुकदमा ‌ जेल विजिटरके बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

सुलहयोग्य कोई भी सिविल क्रिमिनल बैंक बीमा चेक बाउंस किराएदारी बैंक बीमा रिचार्ज मुकदमे मध्यस्थता केंद्र क्या राष्ट्रीय लोक अदालत में सरलता से निस्तारित किए जाते हैं जहां कोर्ट फीस वापस हो जाती है और यह अंतिम निर्णय होता है जिसकी कोई अपील पुनरीक्षण नहीं होता । 

इसके अतिरिक्त लीगल एड डिफेंस सिस्टम के बारे में बताया गया जहां गरीब पीड़ित प्रताड़ित निर्धन और जेल में बंद लोगों को विद्वान अधिवक्तागण के द्वारा निशुल्क सहायता दी जाती है ‌ 15100 101 1098 1912 और 100 जैसे नंबरों को हमेशा याद रखना और आपातकाल में सहायता मांगने के बारे में विस्तार से बताया गया।


इस कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह उपमुख्य  प्रतिरक्षा सलाहकार के द्वारा की गई और आभार प्रधानाचार्य जंग बहादुर सिंह के द्वारा किया गया।

सनातन धर्म का महान हत्यारा सैयद सालार मसूद उपनाम गाजी मियां

सनातन धर्म का महान हत्यारा सैयद सालार मसूद उपनाम गाजी मियां 
*जो भी गैर मुसलमान नीच हत्यारे और दुराचारी गाजी मियां के मेले में शामिल होते हैं चाहे वह मानेछा हो या खेता सराय हो या बहराइच हो उन महामूर्ख लोगों के लिए मैं गाजी मियां का सच्चा ऐतिहासिक तथ्य बताता हूं*

*गाजी मियां का असली नाम सैयद सालार गजनबी था जो शैतान आक्रांता और शूर्पणखा के वंशज महमूद गजनी का भतीजा था उसके पास एक आतताई आतंकवादी सेना थी*

*वह अपने चाचा महमूद गजनवी के अधूरे संकल्प को पूरा करना चाहता था और इसलिए उसने प्रण किया था कि 5000 सनातनी लोगों के धर्म परिवर्तन या हत्या के बाद जलपान और 100000 लोगों की हत्या या धर्म परिवर्तन के बाद में भोजन करूंगा इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उसने अफगानिस्तान से वाराणसी तक विशन लूटमार मचाई*

*हद तो तब हो गई जब उसने जबरदस्ती वाराणसी के तत्कालीन राजा की पुत्री से जबरदस्ती विवाह करने का संदेश राजा के पास भेज दिया डर के मारे कोई प्रतिरोध करने को तैयार नहीं हुआ*

*इसी बीच हुआ राक्षस आतंकी हत्यारा पाकिस्तान पंजाब हरियाणा दिल्ली मथुरा मेरठ को रौंदता हुआ लखनऊ और वाराणसी के पास आ पहुंचा रास्ते में लाखों लोगों का कत्लेआम किया अनगिनत महिलाओं को लूटा भीषण बलात्कार हत्या और लूटपाट से पूरा भारत कांप गया*

*श्रावस्ती के सम्राट वीर सुहेलदेव ने ऐसी विषम परिस्थितियों में उस आतंकी शैतान लुटेरे से लोहा लेने का निश्चय किया और देशभक्त वीर सैनिकों को लेकर सुहेलदेव की सेना से भिड़ गया और पहले ही दिन के भयंकर युद्ध में गजनबी के हजारों सैनिक गाजर मूली की तरह काट डाले गए*

*इस पर उस नाराधम ने अपने आतंकी सैनिकों को भेजकर रात में हजारों गाय चुरा लिया और सेना के आगे खड़ा कर दिया लेकिन परम प्रतापी सुहेलदेव को इसकी सूचना गुप्त चरो से मिल गए और उन्होंने सेना की दो टुकड़ियों बनाई एक को आगे और दूसरे को पीछे खड़ा किया इधर गाजी मियां या सोचकर प्रसन्न था की अब तो सनातनी लोग गायों पर तीर नहीं चलाएंगे और हम आगे बढ़ कर उन्हें आसानी से काट देंगे लेकिन जैसे ही अगले दिन युद्ध शुरू हुआ सुहेलदेव की आधी से अधिक सेना ने इन तुर्कों पर पीछे से भयानक आक्रमण किया और जब तक तुर्क संभाल पाते तब तक हजारों सैनिकों को काटकर गिरा दिया गया इस पर सैयद सालार बौखला कर भागा और वाराणसी जौनपुर होता हुआ मनेछा पहुंचा जहां गाजी मियां की सेना का भयंकर संहार चारों ओर से घेरकर किया गया और इस कार्य में स्थानीय सनातनी लोग शामिल हो गए जिधर भी  गाजी मियां निकलता गांव घर सब लोग गाजी मियां की सेना को काट डालते* 

*सारी सेना के नष्ट हो जाने पर कुछ चुने हुए सैनिकों को लेकर सैयद सालार बहराइच भागा और उस समय प्रसिद्ध मंदिर और उसके पास स्थित लोलार्क कुंड में फिर भयंकर युद्ध हुआ विजय की कोई आसान न देख और अपने सभी सैनिकों के मारे जाने पर गाजी मियां घबराकर लोलार्क कुंड के गहरे पानी में कूद गया लेकिन परम विक्रमशाली सुहेलदेव ने भीम भयंकर लंबा बल्लम मारकर उसके शरीर के आर पार करके उसे उठा लिया और वही दफन कर दिया यही गलती हुई उनसे*

*कालांतर में जब भारत में मुस्लिम राज्य हो गया तो उसे मुस्लिम शासकों ने मजार को पूजा स्थान बनाकर सनातनी लोगों को बाध्य किया कि उसके सामने सिर झुकाये और जत्थे के जत्थे मुसलमान भारत के चारों ओर भेजे जाते  जो लहबर लेकर जाते और जो उनको नीचे झुक कर सलाम नहीं करते उनका सिर काट लेते और महिलाओं को बंदी बना ले जाते इसीलिए जब भी गाजी मियां लहबर लेकर आते थे तो गांव की औरतें डर के कारण नीचे लेट कर उनकी बाकायदा पूजा पाठ करके खूब चढ़ावा देती थी आजाद भारत में कांग्रेस ने सही इतिहास बताने का प्रयास नहीं किया*

*1985 के आसपास भीषण जागृति पैदा हुई और हम लोगों के अथक प्रयासों से गांव-गांव में इन लोगों का आना देशभक्त परमवीर युवकों ने बंद कर दिया और अब कहीं भी गाजी मियां दिखाई नहीं पड़ते फिर भी हजारों लाखों मुर्ख हिंदू अभी भी गाजी मियां के मेले में जाकर अपना सिर झुकाते हैं और भारी-भरकम धनराशि देते हैं दुराचारी औरतें घरवालों को धोखा देकर दुराचार करके आ जाती हैं जैसे शिर्डी के साईं बाबा की असलियत उजागर हो गई वैसे गाजी मियां की असलियत लोग जान गए नतीजा अब केवल नाम मात्र के लोग जाते हैं*

*यही गाजी यही गाजी मियां का असली इतिहास है इसके बाद भी अगर मूर्ख हिंदू स्त्री पुरुष गाजी मियां की पूजा करते हैं या उनके मेले में जाते हैं तो कोई क्या कर सकता है इस सच्चाई को 10 20 50 हजार लाख करोड़ बार नहीं अरबों बार बताया जा चुका है आशा है आप लोग वास्तविक स्थिति समझ गए होंगे* डॉ दिलीप कुमार सिंह

Tuesday, 12 May 2026

इसी को विशुद्ध नौटंकी और जनता के साथ विश्वास घात कहते हैं

कितना बड़ा धोखा देकर कितना बड़ा खेल खेला गया है सरकार और बिजली विभाग के द्वारा उपभोक्ताओं के लिए 

सबसे पहले तो जबरदस्ती सरकार की जिद पूरा करने के लिए सारे पोस्टपेड मी प्रीपेड किए गए और उपभोक्ताओं को अर्बन खरबन रूपों की हानि हुई 

इसी बीच कितने उपभोक्ता बेचारे दौड़ दौड़ कर हर जगह पैसे खर्च किए और कई दिन अंधेरे में रहे कोई शिकायत सुनने वाला नहीं मिला 

इस बारे में मुझे एक उदाहरण रामदायलगंज के नीलू गौड़ का याद आ रहा है जो हर जगह दौड़ा जौनपुर के अधिशासी अभियंता कार्यालय से लेकर मडियाहू के खंड विद्युत अधिकारी सौरभ के पास तक लेकिन उसकी कहीं नहीं सुनी गई और 5000 का बिल अचानक ही बढ़कर ₹50000 कर दिया गया और सभी ने ही कहा कि कुछ नहीं सुनना है पूरा रुपया जमा करो 

ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार और बिजली विभाग मिली मर और नूरा कुश्ती करके जमकर वसूली किया और सारा पैसा शेयर मार्केट में लगा दिए और जब उससे काफी पैसा कमा लिए तब फिर उपभोक्ताओं का प्रीपेड मीटर पोस्ट पेंट कर दिया 


इसी को विशुद्ध नौटंकी और जनता के साथ विश्वास घात कहते हैं सरकार भी मालामाल हो गई और बिजली विभाग भी लेकिन बेचारी जनता कंगाल हो गई और हरामखोरों का एक बार फिर से राज हो गया 

इससे ऊपर से नीचे भ्रष्ट लोगों को कमाई करने में बहुत परेशानी हो रही थी यह दिवस तो में पारदर्शिता के साथ नियम लागू होता तो सबका बहुत अधिक लाभ होता 

ऐसे में सरकार को चाहिए कि पूरे देश में 100 यूनिट बिजली फ्री कर दे क्योंकि देश की 90% जनता 100 यूनिट से कम बिजली का खर्च करती है

सनातन धर्म का महान हत्यारा सैयद सालार मसूद उपनाम गाजी मियां

सनातन धर्म का महान हत्यारा सैयद सालार मसूद उपनाम गाजी मियां 
                       डॉ दिलीप कुमार सिंह


*जो भी गैर मुसलमान नीच हत्यारे और दुराचारी गाजी मियां के मेले में शामिल होते हैं चाहे वह मानेछा हो या खेता सराय हो या बहराइच हो उन महामूर्ख लोगों के लिए मैं गाजी मियां का सच्चा ऐतिहासिक तथ्य बताता हूं*

*गाजी मियां का असली नाम सैयद सालार गजनबी था जो शैतान आक्रांता और शूर्पणखा के वंशज महमूद गजनी का भतीजा था उसके पास एक आतताई आतंकवादी सेना थी*

*वह अपने चाचा महमूद गजनवी के अधूरे संकल्प को पूरा करना चाहता था और इसलिए उसने प्रण किया था कि 5000 सनातनी लोगों के धर्म परिवर्तन या हत्या के बाद जलपान और 100000 लोगों की हत्या या धर्म परिवर्तन के बाद में भोजन करूंगा इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उसने अफगानिस्तान से वाराणसी तक विशन लूटमार मचाई*

*हद तो तब हो गई जब उसने जबरदस्ती वाराणसी के तत्कालीन राजा की पुत्री से जबरदस्ती विवाह करने का संदेश राजा के पास भेज दिया डर के मारे कोई प्रतिरोध करने को तैयार नहीं हुआ*

*इसी बीच हुआ राक्षस आतंकी हत्यारा पाकिस्तान पंजाब हरियाणा दिल्ली मथुरा मेरठ को रौंदता हुआ लखनऊ और वाराणसी के पास आ पहुंचा रास्ते में लाखों लोगों का कत्लेआम किया अनगिनत महिलाओं को लूटा भीषण बलात्कार हत्या और लूटपाट से पूरा भारत कांप गया*

*श्रावस्ती के सम्राट वीर सुहेलदेव ने ऐसी विषम परिस्थितियों में उस आतंकी शैतान लुटेरे से लोहा लेने का निश्चय किया और देशभक्त वीर सैनिकों को लेकर सुहेलदेव की सेना से भिड़ गया और पहले ही दिन के भयंकर युद्ध में गजनबी के हजारों सैनिक गाजर मूली की तरह काट डाले गए*

*इस पर उस नाराधम ने अपने आतंकी सैनिकों को भेजकर रात में हजारों गाय चुरा लिया और सेना के आगे खड़ा कर दिया लेकिन परम प्रतापी सुहेलदेव को इसकी सूचना गुप्त चरो से मिल गए और उन्होंने सेना की दो टुकड़ियों बनाई एक को आगे और दूसरे को पीछे खड़ा किया इधर गाजी मियां या सोचकर प्रसन्न था की अब तो सनातनी लोग गायों पर तीर नहीं चलाएंगे और हम आगे बढ़ कर उन्हें आसानी से काट देंगे लेकिन जैसे ही अगले दिन युद्ध शुरू हुआ सुहेलदेव की आधी से अधिक सेना ने इन तुर्कों पर पीछे से भयानक आक्रमण किया और जब तक तुर्क संभाल पाते तब तक हजारों सैनिकों को काटकर गिरा दिया गया इस पर सैयद सालार बौखला कर भागा और वाराणसी जौनपुर होता हुआ मनेछा पहुंचा जहां गाजी मियां की सेना का भयंकर संहार चारों ओर से घेरकर किया गया और इस कार्य में स्थानीय सनातनी लोग शामिल हो गए जिधर भी  गाजी मियां निकलता गांव घर सब लोग गाजी मियां की सेना को काट डालते* 

*सारी सेना के नष्ट हो जाने पर कुछ चुने हुए सैनिकों को लेकर सैयद सालार बहराइच भागा और उस समय प्रसिद्ध मंदिर और उसके पास स्थित लोलार्क कुंड में फिर भयंकर युद्ध हुआ विजय की कोई आसान न देख और अपने सभी सैनिकों के मारे जाने पर गाजी मियां घबराकर लोलार्क कुंड के गहरे पानी में कूद गया लेकिन परम विक्रमशाली सुहेलदेव ने भीम भयंकर लंबा बल्लम मारकर उसके शरीर के आर पार करके उसे उठा लिया और वही दफन कर दिया यही गलती हुई उनसे*

*कालांतर में जब भारत में मुस्लिम राज्य हो गया तो उसे मुस्लिम शासकों ने मजार को पूजा स्थान बनाकर सनातनी लोगों को बाध्य किया कि उसके सामने सिर झुकाये और जत्थे के जत्थे मुसलमान भारत के चारों ओर भेजे जाते  जो लहबर लेकर जाते और जो उनको नीचे झुक कर सलाम नहीं करते उनका सिर काट लेते और महिलाओं को बंदी बना ले जाते इसीलिए जब भी गाजी मियां लहबर लेकर आते थे तो गांव की औरतें डर के कारण नीचे लेट कर उनकी बाकायदा पूजा पाठ करके खूब चढ़ावा देती थी आजाद भारत में कांग्रेस ने सही इतिहास बताने का प्रयास नहीं किया*

*1985 के आसपास भीषण जागृति पैदा हुई और हम लोगों के अथक प्रयासों से गांव-गांव में इन लोगों का आना देशभक्त परमवीर युवकों ने बंद कर दिया और अब कहीं भी गाजी मियां दिखाई नहीं पड़ते फिर भी हजारों लाखों मुर्ख हिंदू अभी भी गाजी मियां के मेले में जाकर अपना सिर झुकाते हैं और भारी-भरकम धनराशि देते हैं दुराचारी औरतें घरवालों को धोखा देकर दुराचार करके आ जाती हैं जैसे शिर्डी के साईं बाबा की असलियत उजागर हो गई वैसे गाजी मियां की असलियत लोग जान गए नतीजा अब केवल नाम मात्र के लोग जाते हैं*

*यही गाजी यही गाजी मियां का असली इतिहास है इसके बाद भी अगर मूर्ख हिंदू स्त्री पुरुष गाजी मियां की पूजा करते हैं या उनके मेले में जाते हैं तो कोई क्या कर सकता है इस सच्चाई को 10 20 50 हजार लाख करोड़ बार नहीं अरबों बार बताया जा चुका है आशा है आप लोग वास्तविक स्थिति समझ गए होंगे* डॉ दिलीप कुमार सिंह

मस्तिष्कों को सुन कर देने वाले महान सत्य -डा दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

मस्तिष्कों को सुन कर देने वाले महान सत्य-डा दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि
 हुमायूं 1540 में शेरशाह से हार कर ईरान भाग गया और 1555 में वापस आया अकबर का जन्म 1542 में हुआ अमरकोट में बाकी आप खुद समझ लीजिए मैं समझ में आए तो दिमाग पर जोर दीजिए‌ फिर भी ना समझ में आए तो अर्जुन का सबसे बड़ा और गंभीर प्रश्न श्रीमद् भागवत गीता में खोज लीजिए जिसमें उन्होंने भगवान कृष्ण से कहा कि मैं युद्ध किसी डर के कारण या सगे संबंधियों हत्या ‌ से बचने के कारण से नहीं करना चाहता बल्कि इसकी सही वजह है कि मैं केवल इसीलिए इस ब्रह्मांड व्यापी विश्व युद्ध में भाग नहीं लेना चाहता क्योंकि इसमें बहुत बड़ी संख्या में पुरुष मारे जाएंगे जिसके कारण महिलाओं की संख्या पुरुषों से कई गुना बढ़ जाएगी और पूरा विश्व वर्ण शंकर अर्थात दोगला हो जाएगा जो पूरी दुनिया और सृष्टि के लिए एक अभिशाप है 

इसको इस प्रकार भी समझा जा सकता है कि वैज्ञानिक दृष्टि से वर्णन शंकर प्रजातियां बहुत तेज होती हैं और बहुत अधिक उन्नत करती हैं लेकिन दूसरी तीसरी पीढ़ी जाते-जाते यह सब स्वयं भी बर्बाद होते हैं और देश जाति धर्म सब कुछ बर्बाद कर देते हैं यह एक अटल वैज्ञानिक सत्य है जैसे कि अधिक उत्पादन देने वाली प्रजातियों अधिक दूध देने वाली गाय और भैंस बहुत अधिक समय तक उस तरह नहीं रह पाती जर्सी गाय का उदाहरण देखा जा सकता है और सबसे बड़ी बात इनकी लागत इतनी अधिक होती है कि उसे अनुपात में उनका दूध बहुत ही कम होता है और सबसे बड़ी बात वर्णशंकर प्रजातियां की उत्पादकता मात्रा तो अधिक होती है लेकिन स्वास्थ्य वर्धन और पौष्टिकता बहुत ही कम होती है यह सब अकाट्य के वैज्ञानिक सत्य हैं ।

भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को समझाते हुए कहा था कि यदि ऐसा नहीं होगा तो कलयुग धरती पर आएगा कैसे और ईश्वर किया परिकल्पना है कि हर युग को बार बार आना है तब अर्जुन युद्ध करने के लिए तैयार हुए थे और सम्राट परीक्षित ऐसे महान राजा हुए जो कलयुग के सिर पर पैर रखकर स्वर्ग में आए विमान पर चढ़कर चले गए उसके बाद ही कलयुग का धरती पर आगमन संभव हो पाया था ।


कलयुग ने केवल पांच जगह राजा परीक्षित के पैर पकड़कर मांगा था जहां वहां रह सके इस पर राजा ने कहा जहां दुराचार हो जहां मदिरापान हो जहां नशे का वास हो जहां पर सोना हो और जहां परस्पर कलह हो तुमको मैं वहां बस जाने की आज्ञा देता हूं लेकिन वह भूल गए कि उनका मुकुट भी सोने का था बस तत्काल कलयुग को मौका मिला और सबसे पहले उनके सोने के मुकुट में घुस गया ।


सबको अपने भुज के बल से जीत लिया था उनके अंदर पाप बस गया और आगे चलकर गहन तपस्या में लीन ऋषि के गले में मरा हुआ सांप डाल दिया जब उनके पुत्र ने देखा तो शराब दे दिया कि जिस राजा ने ऐसा कर्म किया है उसको आज के सातवें दिन तक्षक नाग काट लेगा और उसकी मृत्यु को कोई बचा नहीं सकता ऐसा कलयुग का प्रभाव है ।


कलयुग से बचने का एक ही उपाय है ईश्वर का नाम और कीर्तन दुराचारी लोगों से दूरी नशापान मदिरापान करने वालों से बहुत अधिक दूरी और वर्ण शंकर प्रजातियों से अत्यधिक दूरी बनाकर रहे और कोई भी उपाय नहीं है क्योंकि चार लाख 32 हजार साल बहुत लंबी अवधि होती है ।

हर युग अपने परवर्ती युग का दुगना होता है कलयुग से दो गुना बड़ा द्वापर द्वापर से दो गुना बड़ा त्रेता और त्रेता से दो गुना बड़ा सतयुग होता है ।

रामायण महाभारत वेद पुराण और अन्य शास्त्रों में लिखा गया है इस सतयुग के मनुष्य 100000 वर्ष जीवित रहते थे उनकी ऊंचाई 32 फिट होती थी त्रेता आते-आते लोग 10000 वर्ष जीवित रहने लगे और उनकी ऊंचाई घटकर केवल 21 फिट रह गए थे द्वापर में मनुष्यों की औसत ऊंचाई 10 से 11 फिट रह गई और जीवनकाल 1000 वर्ष रह गया था कलयुग के लिए कहा गया है कि 5 फीट से  छह फीट लंबी मानव जाति होगी और अधिकतम 100 वर्ष कोई जी पाएगा यह सब वैज्ञानिक सत्य है जिसको जांचों परखा चुका है। 

इसका एक प्रमाण मिलता है जब भगवान श्री कृष्ण ने विश्व के अपराजिता यवन योद्धा जिससे मुस्लिम वंश चला था कालयवन से धरती के भार को मुक्त कराना चाहा जिसको कोई भी पराजित नहीं कर सकता था तब वह छल कपट का प्रयोग करते हुए उसे हिमालय पर्वत स्थित उस गुफा में ले गए जहां  ‌ ईश्वर और देवी देवताओं से वरदान प्राप्त सतयुग में संपूर्ण राक्षसों का विनाश करने वाला देवताओं का रक्षक सम्राट मचकुंद सो रहा था उसे भी का विशाल शरीर पर भगवान कृष्ण ने अपनी चादर फेंक दिया और गुफा में छुप गए कालयवन  जो लगभग 25 फीट लंबा और 10 कुंतल भारी था जब उसने यह देखा तो लात मार कर कहा अरे कर तू कितना देर छुप कर मुझसे रहेगा दौड़ते दौड़ते थक गया तो सो रहा है । या मुझे धोखा देने का प्रयास कर रहा है।

इसके बाद सम्राट मचकुंड उठे और जैसे उन्होंने आंख खोली उस भयंकर अग्नि ज्वाला निकाली और काले वन जलकर राख हो गया तब भगवान श्री कृष्ण के आगे प्रकट हुए और उन्होंने तत्काल पहचान लिया किया कि ‌ श्री कृष्णा भगवान श्री हरि विष्णु के अवतार हैं 

महाभारत और भागवत पुराण के मूल ग्रंथ में लिखा है कि जब सम्राट गुफा से बाहर आए तो अधिकांश पेड़ पौधे उनसे बहुत छोटे थे और मनुष्य तो उनके आगे बहुत ही छोटे दिखाई पड़ते थे आश्चर्यचकित होकर जब भगवान श्री कृष्णा उन्होंने यह सब जानना चाहा तो बोले हे राजन तीन युग बीत चुके और कलयुग आने वाला है इतना सुनने के बाद सम्राट मुचुकुंद विष्णु के धाम में चले गए कोई भी ज्ञान विज्ञान दर्शन शास्त्र और गणित नहीं है जो भारत वालों ने चरम विकास नहीं कर लिया था । और इसीलिए महाभारत काल में दिव्य अस्त्र-सूत्रों के प्रयोग से धरती का बड़ा भाग वीरान हो गया और सैकड़ो करोड़ लोग मारे गए और फिर से सभ्यता विकसित होने में 2000 वर्ष लग गए जिसे अंधकार कल कहा जाता है महाभारत के बाद भारत का इतिहास फिर मौर्य काल के आसपास प्रारंभ होता है।

लोग रामायण महाभारत धारावाहिक फिल्में देखते हैं इसलिए सच नहीं समझ पाते महाभारत में बिल्कुल स्पष्ट लिखा है कि यदि ब्रह्मास्त्र कहीं भी चलाया जाता है तो उसे क्षेत्र की सारी धरती ऊसरबंजर हो जाती है वहां घास का तिनका भी नहीं उग सकता है और 12 वर्ष तक वहां होने वाली सारी संताने पेड़ पौधे सब विकलांग और विषैले होते हैं ‌ नागासाकी हिरोशिमा और चेर्नोबिल का विनाश और परमाणु केदो में रेडिएशन से करने वाले वैज्ञानिक इस बात का जीता जागता प्रमाण है।इस सच को कोई भी पढ़कर जान सकता है ब्रह्मास्त्र की पूरी शक्ति का प्रयोग करने पर यह सारी धरती को नष्ट कर सकता था जबकि नारायण अस्त्र संपूर्ण आकाशगंगा को और भगवान श्री शिव जी का पाशुपतअस्त्र अनंत कोटि ब्रह्मांड को नष्ट कर सकता था।

सर विज्ञान इस सच पर मौन है एक तरफ तो कहते हैं प्रकाश की गति से अधिक कोई चीज नहीं चल सकती लेकिन कोई भी वैज्ञानिक इस महान सत्य को नहीं बता सका कि यदि ब्रह्मांड का जन्म लगभग 14 अरब वर्ष पहले हुआ तो यह 100 अब वर्ष कैसे फैल गया इसका उत्तर किसी गणितज्ञ वैज्ञानिक के पास नहीं इसका अर्थ यह होता है कि ब्रह्मांड का विस्तार प्रकाश की गति से 8 गुना तेजी से हुआ जो असंभव है यदि किसी के पास इसका उत्तर है तो मुझको इसका उत्तर देने की कृपा करें।