Friday, 23 October 2026

शरद पूर्णिमा और ब्रह्म ऋषि वाल्मीकि- डॉदिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

शरद पूर्णिमा और ब्रह्म ऋषि वाल्मीकि- डॉदिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि
समस्त भूमंडल में भारत सबसे अदभुत अनोखा और सबसे प्राचीन पवित्र देश है इसके उत्तर में हिम मंडित हिमालय और पृथ्वी का स्वर्ग कश्मीर है‌ तो इसके दक्षिण में हरी नीली हिंद महासागर की लहरों से अठखेलियाँ करता समुद्र का स्वर्ग कन्याकुमारी है इसके पश्चिम में दूर-दूर तक फैला हुआ त्याग बलिदान शुष्कता वीरता और वीरानी का स्वर्ग राजस्थान है तो इसके पूर्व में असम चेरापूंजी और अरुणाचल की पहाड़ियां हैं जो वर्षा हरियाली और स्वच्छता का स्वर्ग है ऐसे दिव्य भारतवर्ष में हर महीने कोई ना कोई बड़ा महापर्व त्यौहार उत्सव और प्रत्येक दिन कोई ना कोई व्रत त्योहार कथा पूजन पड़ता ही रहता है जो संपूर्ण संसार में दुर्लभ ही नहीं असंभव है। 

शरद पूर्णिमा अर्थात कोजागरी पूर्णिमा आश्विन माह की पूर्णिमा तिथि को पड़ती है और इस रात की पूर्णिमा सबसे स्वच्छ धवल उज्जवल और शांतिपूर्ण होती है जिसे वैज्ञानिक कारण है धरती के सबसे नजदीक इस समय चंद्रमा होता है और उसकी किरणों से अमृत वर्षा होती है जबकि धार्मिक कारण यह है कि इस दिन व्रत करने से सब मनोकामनाएं पूरी होती हैं जिसमें प्राचीन काल के एक सेठ साहूकार की कथा भी आती है अगला कारण यह है कि इसी दिन ब्रह्म ऋषि वाल्मीकि पैदा हुए थे जो एक दस्यु  थे और श्री राम नाम का जप करते-करते ब्रह्म ऋषि हो गए थे अगला धार्मिक कारण यह है कि इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने बहुत छोटी अवस्था में महारास लीला वृंदावन के मधुबन में किया था जिसमें समग्र ब्रह्मांड आनंद विभोर हो उठा था ‌ और उनकी मुरली की तान से निकलने वाली क्लिम की ध्वनि ने समग्र ब्रह्मांड को झंकृत कर दिया था।

प्रकृति और पर्यावरण से जुड़े इस महान पर्व के दिन ठंडी गर्मी दिन रात बिल्कुल बराबर रहती है और बहुत ही सुंदर स्वच्छ वातावरण धरती आसमान और जल सभी का होता है वर्षा ऋतु बीत जाने से वायुमंडल पूरी तरह स्वच्छ होता है और अत्यंत ही चमकीली चंद्रमा की रश्मि अमृत के साथ धरती पर पड़ती हैं इसीलिए इस दिन स्वादिष्ट खीर पका कर खुले स्थान में ढक कर रखी जाती है और रात भर उसे पर अमृत वर्षा का कुछ अंश मिल जाता है जिसे खाने से शरीर के अनेक रोग बीमारियां और मानसिक तनाव तथा दैहिक दैविक भौतिक ताप मिट जाते हैं यह धार्मिक वैज्ञानिक और आध्यात्मिक सत्य है भारत के हर एक व्रत पर्व उत्सव हवन यज्ञ अनुष्ठान सब धर्म अध्यात्म विज्ञान दर्शन और प्रकृति पर्यावरण से जुड़े हुए हैं इसीलिए भारत की सभ्यता संस्कृति करोड़ों वर्ष चली और आज भी चल रही हैं जबकि धरती की कोई भी सभ्यता 2000 वर्ष से अधिक नहीं चल पाई है और यह संस्कृति सभ्यता आगे भी अनंत काल तक चलती रहेगी क्योंकि कालांतर में पृथ्वी को बचाने और स्वयं मानव जाति के सुरक्षित रखने के लिए अंत में सभी को सनातन धर्म का पालन करना ही होगा ।

ब्रह्म ऋषि वाल्मीकि ब्रह्मा के 10 मानस पुत्रों में थे जिनके बचपन का नाम सत्य प्रकाश शर्मा कहा जाता है कालांतर में इन्होंने डकैती का धंधा अपना लिया था दैव योग से सप्त ऋषियों की दृष्टि इन पर पड़ी और उन्होंने वाल्मीकि के ज्ञान के चक्षु खोल दिए और वाल्मीकि ने उनके पैर पकड़ कर अपनी मुक्ति का मार्ग पूछा तो सप्त ऋषियों ने राम-राम जपने को कहा लेकिन जब वह ऐसा करने में सक्षम नहीं हुए तब उन्हें मरा मरा जपने को कहा और धीरे-धीरे मरा मरा कहते हुए वह राम नाम जपते हुए अपने समय के सबसे विद्वान और महान ब्रह्म ऋषि हो गए‌ और फिर नारद जी के प्रभाव से उन्होंने ऐसी रामायण की रचना की जो सारे संसार में राम कथा का प्रमाणिक स्रोत बन गई और दुनिया की हर भाषा में राम कथा लिखी गई जिसमें वाल्मीकि आदि कवि के नाम से प्रख्यात हुए और सभी ने उन्हें से राम कथा का अंश ग्रहण किया स्वयं गोस्वामी तुलसीदास जी ने उनके प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके वंदना की हैं यह बात और है कि देशकाल के प्रभाव से आज रामचरितमानस दुनिया में सबसे विख्यात पुस्तक हो चुकी है 

 वाल्मीकि के बारे में कहा जाता है 

** उल्टा नाम जपत जग जाना 
वाल्मीकि भए ब्रह्म समाना**

उन्हें आदि कवि इसलिए माना जाता है की वेद उपनिषद को छोड़कर लौकिक भाषा का पहला छंद उन्हींने लिखा था एक बार काम क्रीड़ा करते हुए क्रौंच पक्षी को बहेलिया द्वारा मारे जाते हुए देखकर उन्होंने शोक से विह्वल  होकर ब्रह्मा जी की प्रेरणा से अनायास ही विश्व का पहला श्लोक रच दिया

* मां निषाद प्रतिष्ठांत्वमगम: शाश्वती समा।
* यत्क्रोंच मिथुनादे कमवधी काममोहितं।

अर्थात हे क्रौंच ‌ पक्षी को मारने वाले बहेलिया तू इस धरती पर कभी भी सम्मान नहीं प्राप्त कर सकेगा क्योंकि तुमने काम क्रीड़ा में मगन क्रौंच पक्षी के जोड़े में से एक को मार दिया है ‌ और इतिहास साक्षी है कि तब से आज तक बहेलिया कहीं किसी भी समाज में प्रतिष्ठा को प्राप्त नहीं हो सका है ब्रह्म ऋषि वाल्मीकि उच्च कोटि के महान तपस्वी और ऋषि थे और बहुत ही सादे ढंग से जीवन व्यतीत करते थे उनके आश्रम में हजारों तपस्वी और बटुक रहा करते थे जब सीता मां को वनवास हुआ तो भगवान श्री राम ने सीता मां को धरती पर रखने का सबसे सुरक्षित स्थान वाल्मीकि का आश्रम ही पाया और वाल्मीकि की प्रेरणा और माता सीता के प्रयास से उनके पुत्र लव और कुश तत्कालीन पृथ्वी के सबसे बड़े महान योद्धा हुए जिन्होंने रावण वध करने वाले बड़े-बड़े वीरों हनुमान अंगद सुग्रीव विभीषण जामवंत नल नील  लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न को धराशाई कर दिया था ‌ वाल्मीकि जी इतने शुद्ध निष्कपट और सरल हृदय के थे कि उन्होंने सीता की शुद्धता को स्वयं अपनी शपथ देकर प्रमाणित किया था इसी से उनके महान चरित्र और गुना को समझा जा सकता है 

शरद पूर्णिमा केवल भारत के इतिहास का ही नहीं सारी धरती के इतिहास का सबसे स्वच्छ और शुद्ध दिन होता है और इसी दिन ब्रह्म ऋषि वाल्मीकि के उत्पन्न होने से इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है इस पूर्णिमा का व्रत धाम दर्शन अध्यात्म प्रकृति पर्यावरण से जुदा होने के कारण अद्भुत अद्वितीय है और यह दिखाता है कि भारत के लोग उसे समय प्रकृति पर्यावरण विज्ञान धाम दर्शन में सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर चुके थे जब सारी दुनिया मनुष्य बनने की ओर प्रयास कर रही थी ‌ सतयुग और त्रेता में ब्राह्मणों का काम पठन-पाठन जप तप करना था और क्षत्रियों का काम अपने बाहु बल से देश धर्म सभ्यता संस्कृति और ब्राह्मण सहित वैश्य और शूद्र की रक्षा करके सभ्यता का बचाव करना था वैश्य व्यापार करके देश को धन-धान्य से भर रहे थे तो शूद्र लोग सब की सेवा करते हुए अखंड और विराट भारत का निर्माण करने में योगदान दे रहे थे।

ध्यान रहे यह नियम द्वापर और कलयुग में धीरे-धीरे समाप्त होता गया क्योंकि पाप असत्य अन्याय कलयुग के प्रभाव से लगातार बढ़ता चला जा रहा है ‌ ध्यान रहे यह चारों वर्ण जन्म से नहीं कर्म पर आधारित हैं और इसकी गलत व्याख्या करके वर्तमान में दलित अनुसूचित जाति और जनजाति के नेता स्वयं अनुचित लाभ लेने के लिए अपने वर्ग की जनता को इसकी गलत व्याख्या कर रहे हैं जबकि बिल्कुल स्पष्ट कहा गया है सभी लोग जन्म से शुद्र होते हैं और कर्म सेवा द्विज अर्थात ब्राह्मण और क्षत्रिय होते हैं-
  ** जन्मना जायते शूद्र:कर्मणा द्विज उच्यते**

और यही सत्य है आज भी कम से एक दलित जज कलेक्टर मंत्री सांसद विधायक बन रहा है यही नियम उसे समय भी था यह दर्शन नहीं होता तो तमाम शूद्र और दलित ब्रह्म ऋषि नहीं बन पाते और द्रोणाचार्य भारद्वाज परशुराम जैसे लोग महानतम योद्धा नहीं बन पाते और वाल्मीकि तथा विश्वामित्र जैसे महानतम सम्राट ब्रह्म ऋषि नहीं बन सकते थे रविदास दादू मलूक दास शबरी काग भूसुंडी मतंग  गृत्समद ऋषि जैसे अनगिनत शूद्र कभी भी सम्राट क्षत्रिय और ब्राह्मणों के पूज्य नहीं हो सकते थे त्रेता द्वापर सतयुग में यह सभी लोग ईश्वर तक से सम्मान पाते थे बाकी की बात ही छोड़ दीजिए जबकि आज का एक अनुसूचित जाति जनजाति और दलित जाति का जज कलेक्टर सांसद विधायक मंत्री अपने ही जांच वालों को सामान कुर्सी पर बैठ कर अपने बराबर आधार नहीं कर सकता ना उनके साथ एक थाली में भोजन कर सकता है यही सच है विदेशी प्रभाव में लड़ा कर भारत को पूरी तरह से नष्ट किया जा रहा है

बंगाल की खाड़ी में बनेगा चक्रवात 25 से 31 अक्टूबर के बीच जौनपुर सहित पूरे भारत में होगी वर्षा -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 7017713978

 बंगाल की खाड़ी में बनेगा चक्रवात 25 से 31 अक्टूबर के बीच जौनपुर सहित पूरे भारत में होगी वर्षा -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 7017713978
[10/23, 7:57 AM] Dr  Dileep Kumar singh: विभिन्न प्रकार के मौसम के विरोधी चक्र अल नीनो के प्रभाव अरब सागर और बंगाल की खाड़ी एवं भारत के भूभाग में तापमान का अंतर हिमालय और ध्रुव प्रदेश में शीतल मौसम मिलकर अरब सागर में 24 तारीख को एक चक्रवात केरलम के दक्षिण पश्चिम में पैदा करेंगे जो धीरे-धीरे खिसक कर श्रीलंका होता हुआ तमिलनाडु की तरफ आ जाएगा और इस प्रबल चक्रवाती विक्षोभ से 25 अक्टूबर से 31 अक्टूबर के बीच भारत के अधिकांश भागों में वर्षा होगी जिसमें उत्तर प्रदेश और जौनपुर भी सम्मिलित रहेगा। 

24 तारीख को कर्नाटक केरल के तटवर्ती भाग में 25 तारीख को श्रीलंका तमिलनाडु आंध्र प्रदेश में 26 अक्टूबर को उड़ीसा और तेलंगाना तथा दक्षिण के पत्थरों पर 27 को बंगाल बिहार उड़ीसा झारखंड और 28 से 31 तक इसका प्रभाव मध्यम प्रदेश उत्तर प्रदेश जौनपुर और आगे भारत में बढ़ता चला जाएगा कर्नाटक केरल तमिलनाडु लक्षद्वीप अंडमान निकोबार पांडिचेरी उड़ीसा बंगाल मध्य प्रदेश के पूर्व बिहार के पूर्व झारखंड में मध्यम से भरी कहानी-कहानी बहुत भारी वर्षा और बचे हुए भागों में सामान्य मध्यम और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा इस चक्रवात से हो सकती है। 

अभी तापमान 27 तक लगभग स्थिर रहेगा और हवा पश्चिमी रहेगी उसके बाद उत्तर पूर्वी और फिर पूर्वी हवा में बदल जाएगी इस बीच तापमान 30 से 32 अधिकतम और 18 से 21 न्यूनतम बना रहेगा जो उत्तर भारत में सबसे सुहाना मौसम कहा जाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक भी 200 से 300 के बीच बनी रहेगी और पराबैंगनी किरणों की तीव्रता चार से सात रहेगी हवाओं की दिशा और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा कि यह चक्रवात कितना प्रबल होगा लेकिन यह निश्चित है कि वर्षा तेज हवाएं आंधी तूफान लगभग हर जगह रहेगा हमेशा की तरह सबसे पहले भविष्यवाणी हमारे केंद्र के द्वारा दी जा रही है अभी तक कहीं इसका कोई वर्णन नहीं है। 

अभी कल तिब्बत में भूकंप आने की हमारी भविष्यवाणी बिल्कुल सही हुई थी और एक हफ्ते में आधा दर्जन भूकंप जो हल्के मध्यम होंगे भारत सहित दुनिया के अनेक भागों में आएंगे  ताइवान और क्यूबा में भयानक पांचवीं श्रेणी का महा चक्रवात आएगा यूरोप में चलेगा भीषण गृह युद्ध दंगा फसाद मारकाट और अंत में भी विधर्मी दंगाई पश्चपाद पर आ जाएंगे इसी तरह कल भारत के T20 जीतने की भविष्यवाणी और तीन दो से श्रृंखला निर्णीत की भविष्यवाणी भी सच हो रही है। 

 इस वर्ष 23 सितंबर से ही ठंड का मौसम आने और 30 अक्टूबर से ही ठंड बढ़ने की भविष्यवाणी भी सही हो रही है भयंकर कीर्तिमान बनाने वाले जाड़े की भविष्यवाणी भी निश्चित सही होगी और इस वर्ष का जाड़ा लोग मरते समय तक याद रखेंगे यद्यपि भारत के लोगों को भूलने की बहुत भयानक बीमारी है इसलिए भूल भी सकते हैं 4 साल में कोरोना जैसी नकली महामारी को भी भूल गए।

Thursday, 22 October 2026

सब लोगों के लिए आवश्यक जानकारी के लिए हिंदीवर्ष के महीने

[10/22, 10:30 PM] Dileep Singh Rajput Jounpur: सब लोगों के लिए आवश्यक जानकारी के लिए हिंदीवर्ष के महीने ---
 
*चैत्र महीना पहले आया 
सब फसलों को घर में लाया 
चारों तरफ बसंत है छाया* 

*फिर बैशाख बसंत कहाया 
फल-फूलों से तरु लद आया
शीतल मंद पवन है छाया*

 *गर्मी का है जेठ महीना 
बैठे-बैठे चले पसीना
मुश्किल हो गया सबका जीना* 

*है आषाढ़ की अजब कहानी 
आया बादल बरसा पानी
 चारों तरफ मेघ और पानी* 

*सावन की तो बात निराली 
चारों तरफ बिछी हरियाली 
शिव भक्ति छाई मतवाली*

*भादो मूसलधार बहाता 
खेतों में सब चीज उगाता 
वर्षा और बाढ़ है लाता*

 *क्वार में मच्छर गाते हैं 
घर-घर जूड़ी फैलाते हैं
सर्दी खांसी और ज्वर में
बच्चे बूढ़े तप जाते हैं*

*कार्तिक की तो शोभा 
न्यारी लगती बहुत चांदनी  प्यारी
जाड़े में बसंत ऋतु न्यारी डॉ दिलीप कुमार सिंह*

*अगहन फसली मास कहाता 
ज्वार बाजरा घर में लाता
धन धान्य से घर भर जाता*

*पूस महीना ठंडा भारी 
थर थर कांपे नर अरु नारी
बर्फ सी हवा है हाहाकारी*

*ठंडी हवा माघ में चलती 
पाला पड़ता खेती जलती
शीत की मार झेलनी पड़ती*

*फागुन सबसे पीछे आता
होली का हुल्लड़ दिखलाता
छिनरों और छिनरियों को
यह परम प्रसन्न कर जाता* 

*भारत के हैं यही महीने 
बारी बारी आते हैं 
सुख-समृद्धि हम सब को देकर
सबको खुश कर जाते हैं*

आप सब को यह रोचक जानकारी अवश्य ही अच्छी लगी होगी 
धन्यवाद 

*डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह ज्योतिष  शिरोमणि,  मौसम विद ,न्याय विद ,अंतरिक्ष विज्ञानी एवं दार्शनिक ,एवं ज्योतिष रत्न वास्तु परा अपरा व गूढ़ विद्याओं के  पारंगत परा भौतिकी विद*
[10/22, 10:30 PM] Dileep Singh Rajput Jounpur: एकछोटासागॉव
     जिसमे पीपल की छॉव
गॉव सारा खतम हो गया
     क्या से क्या     हो   गया
सारे रिश्ते  खतम
     आये पैसों पे हम
दिल का रिश्ता खतम हो गया
क्यासेक्याहोगया ?
    कजरी चैता खतम
फागुनी भी खतम
    और दशहरा भी गुम हो गया
क्यासेक्याहोगया ?
भागे हमसब शहर
      खोये पैसो मे हम
सपनों मे ही तो जीवन गया
क्यासेक्याहोगया  ?
ठंडी शीतल बयार
     महक फूलों की हाय
*अपनापन भी गया* 
क्यासेक्याहोगया  ? 
ऊपरी सब खुशी 
   ऊपरी है हंसी
नकली सब कुछ यहॉ
*धर्म सारा  तो बस*
पैसा ही होगया
हाय भारत मेरा
इंडिया  हो गया?
क्यासेक्याहोगया* *डॉ दिलीप कुमार सिंह एम ए टी एच डी हिंदी ज्योतिष और ज्योतिर्विज्ञान*  ? !

Wednesday, 21 October 2026

***देसी कुतिया मराठी बोल**#आधा तीतर आधा बटेर#: मेरा जूता है जापानी ये पतलून इंग्लिश तानी फिर सर पर लाल टोपी रुसी फिर भी दिल है हिंदुस्तानी :

मौसम की भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 
आज का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 19 डिग्री सेल्सियस रहेगा हल्के बादलों के बीच वर्षा की कोई संभावना नहीं है हवा की दिशा उत्तरी पश्चिमी और गति 5 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 से 250 के बीच रहेगा और पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 4 से 7 के बीच रहेगी जबकि सापेक्षिक आर्द्रता 50 से 80% के बीच रहेगी हवा की दिशा उत्तरी पश्चिमी रहेगी जो बाद में पश्चिमी हो जाएगी 

कल के मौसम के बारे में अनुमान है की मौसम धूप युक्त और सुहावना रहेगा अधिकतम तापमान 31 और न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस के साथ काफी सुहाना और ठंडा रहेगा ।रहेगा हल्के बादल भी रहेंगे वर्षा की कोई संभावना नहीं है वायु गुणवत्ता सूचकांक 250 से 300 के बीच बना रहेगा जबकि पराबैंगनी किरणों की तीव्रता भी 4 से 7 के बीच रहेगी

सापेक्षिक आर्द्रता 50 से 50% के बीच 150 से 250 के बीच बना रहेगा जबकि पराबैंगनी किरणों की तीव्रता भी 4 से 7 के बीच रहेगी सापेक्षिक आर्द्रता 50 से 50% के बीच रहेगी जबकि वायु की गति 5 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी इस बीच सूर्योदय सुबह 5:30
पर और सूर्यास्त सायंकाल 6:00 बजे होगा

दक्षिण भारत में अनेक स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होगी बाकी भारत शुष्क रहेगा हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर के बीच केरल के तटों पर एक चक्रवात का जन्म होगा जिसे एक सप्ताह बाद भारत के अधिकांश भागों में फिर वर्षा होगी l
इस प्रकार ईश्वर की कृपा और आप सब की शुभकामनाओं से 50 वर्ष से हमारा अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 99%  सच्चाई की दर से लाखों लाख भविष्यवाणी करता आ रहा है जो समग्र ब्रह्मांड खेल राजनीतिक अर्थ धर्म दर्शन विज्ञान सब के बारे में है

 अभी कल के मैच के ईश्वरीय चमत्कार को छोड़कर ना होने की भविष्यवाणी सही हुई खेल राजनीति की सारी बातें सही हुई 2028 तक योगी जी के प्रधानमंत्री बनने की बात की लोग राह देख रहे हैं अगले वर्ष योगी के है जाने की और अरब देशों के भयानक विनाश की भविष्यवाणी भी सही होगी आजादी के बाद लाल बहादुर शास्त्री को छोड़कर सारे प्रधानमंत्री द्वारा मुस्लिम विकास की भविष्यवाणी भी सच हो गई है कल्याण सिंह लाल बहादुर शास्त्री सुभाष चंद्र बोस भाभा और इन जैसे सच्चे लोगों की हत्या करना या डरा धमका कर शांत करना विदेशी इशारों वाली भविष्यवाणी भी बिल्कुल सही हुई है इस तरह आप जुड़े रहें सत्य चीजें पढ़ते रहें

आज से 5 महीने पहले मैंने एक और भविष्यवाणी किया था कि अक्टूबर 2026 से यूरोप अमेरिका और भारत में बसे मुसलमान हत्या आगजनी लूटपाट कत्लेआम लेआम बलात्कार हिंसा का ऐसा शैतानी राक्षसी खेल खेलेंगे की दुनिया हाहाकार कर उठेगी सबसे ज्यादा प्रचंड प्रहार उन देशों पर होगा जिन्होंने भारत की तरह दया करके मुसलमानों को अपने देश में शरण दिया है इसमें यूरोप अमेरिका भारत फ्रांस जर्मनी अल्बानिया बेल्जियम नीदरलैंड प्रमुख होंगे पूरी दुनिया में एक निर्णायक युद्ध तुर्क मुस्लिम मुसलमान और गैर मुसलमान के बीच में होगा जिसमें मुसलमानों की पराजय और उनका विनाश निश्चित है अब देखना है यह भविष्यवाणी कितना सही होती है दिनांक 15 अक्टूबर 2026
[10/21, 7:41 AM] Dileep Singh Rajput Jounpur: वोकल फार लोकल और स्वदेशी के क्रम में आज से लेकर हमेशा के लिए अनिवार्य नियम संसद से पारित किया जाए की सभी देसी और स्थानीय उत्पादन का प्रयोग करना सभी प्रधानमंत्री राष्ट्रपति मंत्री संसाधन विधायकों और प्रथम ब्रिटिश श्रेणी के अधिकारियों व्यापारियों धन कुबेर लोगों और समस्त सरकारी तंत्रों के लिए अनिवार्य किया जाए और विदेशी सामान खरीदने और उसका उपयोग करने वाले लोगों को आजीवन कारावास से लेकर ॅमृत्यु दंड की सजा का प्रावधान किया जाए और यदि कोई भी दुकानदार व्यापारी कोई भी विदेशी सामान बेचता हुआ मिले तो उसको भी यही सजा दिया जाए इससे एक वर्ष में ही चारों ओर स्वदेशी उत्पादों का बोलबाला हो जाएगा और विदेशी सारे सामान अपने आप समाप्त हो जाएंगे

 तब भी एक बड़ा प्रश्न बचा रहेगा कि विदेशी भाषा और विदेशी नीतियों पर बने नियम कानून का और विदेशी प्रोटोकॉल का क्या होगा और भारत की रक्षा प्रणाली का क्या होगा जो 99% विदेशी आयात पर आधारित है और सभी नकली सनातनी लोगों का राजनेताओं का सांसदों विधायकों मंत्रियों का अधिकारियों का धन कुबेर और माफिया लोगों का धर्म गुरु लोगों का क्या होगा जो घर के अंदर से घर के बाहर 99% विदेशी सामानों का उपयोग सामने और चोरी छुपे करते हैं यहां तक की विदेशी महिलाएं और पुरुष भी उनकी प्राथमिकता होते हैं 

इसलिए आप लोग सरकारी तंत्र के फालतू वाहियात ऊल  जलूल स्वदेशी हिंदी हिंदी हिंदुस्तान रामराज जैसी चीजों पर ध्यान न दीजिए अपने आवश्यकता और समर्थ के अनुसार खरीददारी कीजिए जब चारों तरफ विदेशी शब्दों विदेशी तारों विदेशी विज्ञापनों का बोलबाला है और देश के शीर्ष राजनेता जानबूझकर 50% अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं जैसे गुड मॉर्निंग बनारस पढ़ेगा इंडिया बढ़ेगा इंडिया बोलेगा इंडिया खेलेगा इंडिया अमूल दूध पीता है इंडिया अरे फार्म पर फॉर्म गुड मॉर्निंग गुड इवनिंग तब आम जनता को इस चक्कर में पढडने की आवश्यकता ही नहीं है
[संघ से जुड़ा कोई व्यक्ति बुद्धिजीवी या नेता बताये की राम राज्य हिंदी हिंदू हिंदुस्तान और स्वदेशी के प्रतीक वाले संघ के साथ आर एस एस का पुछल्ला क्यों जुड़ा हुआ है क्यों भारतीय जनता दल की जगह भारतीय जनता पार्टी है और क्यों भारत के सभी पार्टियों दल की जगह पार्टी शब्द का प्रयोग करती है और क्यों न्यासा शब्द की जगह ट्रस्ट को जबरदस्ती चलाया जाता है और न्यास परिषद की जगह श्राइन बोर्ड क्यों लिखा जाता है 

कुल मिलाकर एक बात समझ लो जितने भी सनातनी धर्म संगठन धर्मगुरु संत महंत आचार्य कथावाचक राजनेता प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री राज्यपाल नेता धन कुबेर और माफिया तथा पंचर चाप से लेकर राष्ट्रपति प्रधानमंत्री कार्यालय में काम करने वाले एवं अभिनेता है किसी का भी अंग्रेजी के बिना और काले अंग्रेज बन चलने वाला नहीं है यही भारत का अंतिम सच है क्योंकि यहां का व्यक्ति यह मान ही नहीं सकता कि बिना अंग्रेजी के भारत का विकास हो सकता है बिना अंग्रेजी स्कूल में पढ़े काले अंग्रेज बन अंग्रेजी सभ्यता संस्कृति को अपने अंग्रेजी नए वर्ष को मनाई हैप्पी क्रिसमस कहे भारत में रहकर आगे बढ़ा जा सकता है जब तक यह काला सच सबके दिल के अंदर घर-कर के बैठा रहेगा.

तब तक भारत के सभी राजनेता और भारत की सनातनी जनता सारे राजनीतिक दल और सभी सनातनी संगठन जिसमें प्रमुख है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हंसी का उपवास का अपमान और कलंक का पत्र बना रहेगा बुरा लगे या भला पर अंतिम सच यही है मां और अंतरात्मा से सभी मैकाले के मानस पुत्र विदेशीकृत दास और काले अंग्रेज बनकर रह गए हैं जबकि दुनिया के सारे विकसित देश और विश्व की महान शक्तियां अपने देश की सभ्यता संस्कृति भाषा वेशभूषा के आधार पर ही आगे बढ़ी है और भारत को पांच मेल खिचड़ी साधु कड़ी बनाकर पूरे विश्व में हंसी और अपमान का पत्र बना दिया गया है जिसको कहते हैं **देसी कुतिया मराठी बोल**
#आधा तीतर आधा बटेर#
: मेरा जूता है जापानी ये पतलून इंग्लिश तानी फिर सर पर लाल टोपी रुसी फिर भी दिल है हिंदुस्तानी :

जब यह अधकचरा लोग खत्म होंगे और कोई सच्चा सनातनी स्वदेशी नेता आएगा तभी इसमें सुधार होगा।

वैसे एक बात और याद दिला दूं जो बड़ा करवा नंगा और काला सच है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 90% लोग हिंदी कम अंग्रेजी धुआंधार बोलते हैं मोदी जी की तरह लेकिन पूरी तरह अंग्रेजी बोल नहीं पाते और पूरा अंग्रेजी बोलने पर उन्हें समझने वाला भी कोई नहीं है इन दो कर्म से उन्हें हिंदी और क्षेत्रीय भाषाएं बोलना पड़ता है तो समझ में नहीं आता कि कैसा भारत बना रहे हैं यह लोग 

वैसे अंग्रेजी प्रेमी काले अंग्रेज बने भारत के लोगों को मैं याद दिला दूं कि चीन दुनिया की सबसे बड़ी विश्व शक्ति है खेल सकती है अंतरिक्ष शक्ति है आर्थिक शक्ति है और सैन्य शक्ति है वहां उधर के लोग अंग्रेजी बोलने के लिए लिए जाते हैं यही हाल जापान कोरिया जर्मनी फ्रांस स्पेन पुर्तगाल ब्राज़ील और अब के देश का है जहां कोई अंग्रेजी भाषा नहीं अंग्रेजी संविधान नहीं अंग्रेजी नियम कानून नहीं अंग्रेजी सभ्यता संस्कृति नहीं है क्योंकि भारत के लोग तो यह भी नहीं जानते कि बिना अंग्रेजी बोले ही दुनिया के सारे देश विश्व की शक्ति बने हैं - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

Tuesday, 20 October 2026

विजयदशमी (दशहरा, आयुध-पूजा)

*विजयदशमी (दशहरा, आयुध-पूजा)
विशेष मैं प्रारंभ में ही बता देना चाहता हूं कि सामान्य जनता अस्त्र-शस्त्र हाथ में लेकर केवल इतना ही कहे की है अस्त्र-शस्त्रों के देवता आदि देव भगवान महादेव मैं आपके अस्त्र-शस्त्र धारण करके उनकी पूजा करता हूं और अपने देश और धर्म की सुरक्षा की याचना करता हूं इतना ही शस्त्र पूजा के लिए बहुत है बाकी विधि विधान बड़े और ज्ञानी लोगों के लिए है 
          आश्विन (क्वार) मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजय दशमी या दशहरे के नाम से मनाया जाता है। भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। इसीलिये इस दशमी को विजयादशमी के नाम से जाना जाता है। दशहरा वर्ष की तीन अत्यन्त शुभ तिथियों में से एक है, अन्य दो हैं चैत्र शुक्ल की एवं कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा। इस वर्ष यह शुभ पर्व 20 अक्टूबर मंगलवार के दिन मनाया जाएगा।

इसी दिन लोग नया कार्य प्रारम्भ करते हैं, शस्त्र-पूजा की जाती है। प्राचीन काल में राजा लोग इस दिन विजय की प्रार्थना कर रण-यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे। इस दिन जगह-जगह मेले लगते हैं। रामलीला का आयोजन होता है। रावण का विशाल पुतला बनाकर उसे जलाया जाता है। दशहरा अथवा विजयदशमी भगवान राम की विजय के रूप में मनाया जाए अथवा दुर्गा पूजा के रूप में, दोनों ही रूपों में यह शक्ति-पूजा का पर्व है, शस्त्र पूजन की तिथि है। हर्ष और उल्लास तथा विजय का पर्व है। भारतीय संस्कृति वीरता की पूजक है, शौर्य की उपासक है। व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है। दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों- काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी के परित्याग की सद्प्रेरणा प्रदान करता है।
शस्त्र पूजन विधि एवं मंत्र
सायंकाल में नित्यकर्म से निवृत्त होकर सभी प्रकार के अस्त्र-शस्त्रादि को एकत्र करके हाथ में जलपुष्पादि के साथ अपना नाम, गोत्रादि के साथ संकल्प करें, यथा-''ममक्षेमारोग्य आदि सिद्धयर्थं यात्रायांविजय सिद्धयर्थं गणपतिमातृका श्रीराम, शिवशक्ति व सूर्यादि देवता अपराजिता शमीपूजन-अस्त्र-शस्त्रादि पूजनानि करिष्ये।' 

पुष्पाक्षत लेकर स्वऽस्तिवाचन, गणेश पूजन तथा शक्ति-मंत्र, खड्ग-मंत्र एवं अग्नि यंत्र-मंत्र से पुष्पाक्षत एवं तिलक लगाकर सत्कार पूजन करने के पश्चात् अपराजिता पूजन, भगवान राम, शिव, शक्ति (दुर्गा), गणेश तथा सूर्यादि देवताओं का पूजन करके आयुध-अस्त्र-शस्त्रों (हथियारों) की पूजा इस प्रकार करें- 

शक्ति मंत्र: शक्तिस्त्वं सर्वदेवानां गुहस्य च विशेषत:। 
शक्ति रूपेण देवि त्वं रक्षां कुरु नमोऽस्तुते॥ 

अग्नि यंत्र-मंत्र: अग्निशस्त्र नमोऽस्तुदूरत: शत्रुनाशन। 
शत्रून्दहहि शीघ्रं त्वं शिवं मे कुरु सर्वदा॥

खड्ग मंत्र: इयं येन धृताक्षोणी हतश्च महिषासुर:। 
ममदेहं सदा रक्ष खड्गाय नमोऽस्तुते॥

सभी प्रकार के अस्तशस्त्रो को तिलक लगाकर पुष्प अर्पण कर देवी अपराजिता की आरती करनी चाहिये।

दशहरे का महत्त्व
भारत कृषि प्रधान देश है इसलिए जब किसान अपने खेत में सुनहरी फसल उगाकर अनाज रूपी संपत्ति घर लाता है तो उसके उल्लास और उमंग का पारावार नहीं रहता। इस प्रसन्नता के अवसर पर वह भगवान की कृपा को मानता है और उसे प्रकट करने के लिए वह उसका पूजन करता है। समस्त भारतवर्ष में यह पर्व विभिन्न प्रदेशों में विभिन्न प्रकार से मनाया जाता है। महाराष्ट्र में इस अवसर पर सिलंगण के नाम से सामाजिक महोत्सव के रूप में भी इसको मनाया जाता है। सायंकाल के समय पर सभी ग्रामीणजन सुंदर-सुंदर नव वस्त्रों से सुसज्जित होकर गाँव की सीमा पार कर शमी वृक्ष के पत्तों के रूप में 'स्वर्ण' लूटकर अपने ग्राम में वापस आते हैं। फिर उस स्वर्ण का परस्पर आदान-प्रदान किया जाता है।

विजय पर्व के रूप में दशहरा
दशहरे का उत्सव शक्ति और शक्ति का समन्वय बताने वाला उत्सव है। नवरात्रि के नौ दिन जगदम्बा की उपासना करके शक्तिशाली बना हुआ मनुष्य विजय प्राप्ति के लिए तत्पर रहता है। इस दृष्टि से दशहरे अर्थात विजय के लिए प्रस्थान का उत्सव का उत्सव आवश्यक भी है।

भारतीय संस्कृति सदा से ही वीरता व शौर्य की समर्थक रही है। प्रत्येक व्यक्ति और समाज के रुधिर में वीरता का प्रादुर्भाव हो कारण से ही दशहरे का उत्सव मनाया जाता है। यदि कभी युद्ध अनिवार्य ही हो तब शत्रु के आक्रमण की प्रतीक्षा ना कर उस पर हमला कर उसका पराभव करना ही कुशल राजनीति है। भगवान राम के समय से यह दिन विजय प्रस्थान का प्रतीक निश्चित है। भगवान राम ने रावण से युद्ध हेतु इसी दिन प्रस्थान किया था। मराठा रत्न शिवाजी ने भी औरंगजेब के विरुद्ध इसी दिन प्रस्थान करके हिन्दू धर्म का रक्षण किया था। भारतीय इतिहास में अनेक उदाहरण हैं जब हिन्दू राजा इस दिन विजय-प्रस्थान करते थे।

इस पर्व को भगवती के 'विजया' नाम पर भी 'विजयादशमी' कहते हैं। इस दिन भगवान रामचंद्र चौदह वर्ष का वनवास भोगकर तथा रावण का वध कर अयोध्या पहुँचे थे। इसलिए भी इस पर्व को 'विजयादशमी' कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि आश्विन शुक्ल दशमी को तारा उदय होने के समय 'विजय' नामक मुहूर्त होता है। यह काल सर्वकार्य सिद्धिदायक होता है। इसलिए भी इसे विजयादशमी कहते हैं।

ऐसा माना गया है कि शत्रु पर विजय पाने के लिए इसी समय प्रस्थान करना चाहिए। इस दिन श्रवण नक्षत्र का योग और भी अधिक शुभ माना गया है। युद्ध करने का प्रसंग न होने पर भी इस काल में राजाओं (महत्त्वपूर्ण पदों पर पदासीन लोग) को सीमा का उल्लंघन करना चाहिए। दुर्योधन ने पांडवों को जुए में पराजित करके बारह वर्ष के वनवास के साथ तेरहवें वर्ष में अज्ञातवास की शर्त दी थी। तेरहवें वर्ष यदि उनका पता लग जाता तो उन्हें पुनः बारह वर्ष का वनवास भोगना पड़ता। इसी अज्ञातवास में अर्जुन ने अपना धनुष एक शमी वृक्ष पर रखा था तथा स्वयं वृहन्नला वेश में राजा विराट के यहँ नौकरी कर ली थी। जब गोरक्षा के लिए विराट के पुत्र धृष्टद्युम्न ने अर्जुन को अपने साथ लिया, तब अर्जुन ने शमी वृक्ष पर से अपने हथियार उठाकर शत्रुओं पर विजय प्राप्त की थी। विजयादशमी के दिन भगवान रामचंद्रजी के लंका पर चढ़ाई करने के लिए प्रस्थान करते समय शमी वृक्ष ने भगवान की विजय का उद्घोष किया था। विजयकाल में शमी पूजन इसीलिए होता है।

दशहरे पर करने के कुछ विशेष उपाय

-- दशहरे के द‌िन नीलकंठ पक्षी का दर्शन बहुत ही शुभ होता है। माना जाता है क‌ि इस द‌िन यह पक्षी द‌िखे तो आने वाला साल खुशहाल होता है।

--  दशहरा के द‌िन शमी के वृक्ष की पूजा करें। अगर संभव हो तो इस द‌िन अपने घर में शमी के पेड़ लगाएं और न‌ियम‌ित दीप द‌िखाएं। मान्यता है क‌ि दशहरा के द‌िन कुबेर ने राजा रघु को स्वर्ण मुद्राएं देने के ल‌िए शमी के पत्तों को सोने का बना द‌िया था। तभी से शमी को सोना देने वाला पेड़ माना जाता है।

-- रावण दहन के बाद बची हुई लकड़‌ियां म‌िल जाए तो उसे घर में लाकर कहीं सुरक्ष‌ित रख दें। इससे नकारात्मक शक्‍त‌ियों का घर में प्रवेश नहीं होता है।

-- दशहरे के द‌िन लाल रंग के नए कपड़े या रुमाल से मां दुर्गा के चरणों को पोंछ कर इन्‍हें त‌िजोरी या अलमारी में रख दें। इससे घर में बरकत बनी रहती है।

आप सभीको विजय दशमी की हार्दिक शुभकामनायें

मौसम की भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

मौसम की भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 
आज का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 19 डिग्री सेल्सियस रहेगा हल्के बादलों के बीच वर्षा की कोई संभावना नहीं है हवा की दिशा उत्तरी पश्चिमी और गति 5 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 से 250 के बीच रहेगा और पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 4 से 7 के बीच रहेगी जबकि सापेक्षिक आर्द्रता 50 से 80% के बीच रहेगी हवा की दिशा उत्तरी पश्चिमी रहेगी जो बाद में पश्चिमी हो जाएगी 

कल के मौसम के बारे में अनुमान है की मौसम धूप युक्त और सुहावना रहेगा अधिकतम तापमान 31 और न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस के साथ काफी सुहाना और ठंडा रहेगा ।रहेगा हल्के बादल भी रहेंगे वर्षा की कोई संभावना नहीं है वायु गुणवत्ता सूचकांक 250 से 300 के बीच बना रहेगा जबकि पराबैंगनी किरणों की तीव्रता भी 4 से 7 के बीच रहेगी

सापेक्षिक आर्द्रता 50 से 50% के बीच 150 से 250 के बीच बना रहेगा जबकि पराबैंगनी किरणों की तीव्रता भी 4 से 7 के बीच रहेगी सापेक्षिक आर्द्रता 50 से 50% के बीच रहेगी जबकि वायु की गति 5 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी इस बीच सूर्योदय सुबह 5:30
पर और सूर्यास्त सायंकाल 6:00 बजे होगा

दक्षिण भारत में अनेक स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होगी बाकी भारत शुष्क रहेगा हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर के बीच केरल के तटों पर एक चक्रवात का जन्म होगा जिसे एक सप्ताह बाद भारत के अधिकांश भागों में फिर वर्षा होगी l
इस प्रकार ईश्वर की कृपा और आप सब की शुभकामनाओं से 50 वर्ष से हमारा अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 99%  सच्चाई की दर से लाखों लाख भविष्यवाणी करता आ रहा है जो समग्र ब्रह्मांड खेल राजनीतिक अर्थ धर्म दर्शन विज्ञान सब के बारे में है

 अभी कल के मैच के ईश्वरीय चमत्कार को छोड़कर ना होने की भविष्यवाणी सही हुई खेल राजनीति की सारी बातें सही हुई 2028 तक योगी जी के प्रधानमंत्री बनने की बात की लोग राह देख रहे हैं अगले वर्ष योगी के है जाने की और अरब देशों के भयानक विनाश की भविष्यवाणी भी सही होगी आजादी के बाद लाल बहादुर शास्त्री को छोड़कर सारे प्रधानमंत्री द्वारा मुस्लिम विकास की भविष्यवाणी भी सच हो गई है कल्याण सिंह लाल बहादुर शास्त्री सुभाष चंद्र बोस भाभा और इन जैसे सच्चे लोगों की हत्या करना या डरा धमका कर शांत करना विदेशी इशारों वाली भविष्यवाणी भी बिल्कुल सही हुई है इस तरह आप जुड़े रहें सत्य चीजें पढ़ते रहें

आज से 5 महीने पहले मैंने एक और भविष्यवाणी किया था कि अक्टूबर 2026 से यूरोप अमेरिका और भारत में बसे मुसलमान हत्या आगजनी लूटपाट कत्लेआम लेआम बलात्कार हिंसा का ऐसा शैतानी राक्षसी खेल खेलेंगे की दुनिया हाहाकार कर उठेगी सबसे ज्यादा प्रचंड प्रहार उन देशों पर होगा जिन्होंने भारत की तरह दया करके मुसलमानों को अपने देश में शरण दिया है इसमें यूरोप अमेरिका भारत फ्रांस जर्मनी अल्बानिया बेल्जियम नीदरलैंड प्रमुख होंगे पूरी दुनिया में एक निर्णायक युद्ध तुर्क मुस्लिम मुसलमान और गैर मुसलमान के बीच में होगा जिसमें मुसलमानों की पराजय और उनका विनाश निश्चित है अब देखना है यह भविष्यवाणी कितना सही होती है दिनांक 15 अक्टूबर 2026

Monday, 19 October 2026

एक बहुत ही खतरनाक षड्यंत्र जो देश की आजादी के समय से ही चल रहा है ‌ ‌

एक बहुत ही खतरनाक षड्यंत्र जो देश की आजादी के समय से ही चल रहा है ‌ ‌
आपने ध्यान दिया होगा कि जैसे ही दीपावली एकादशी नानक जयंती कार्तिक पूर्णिमा आती है 

वैसे ही एक सप्ताह पहले से पूरे देश में विशेष कर दिल्ली में भयानक प्रदूषण की चर्चा अचानक ही समाचार पत्र पत्रिकाएं बुद्धिजीवी लोग और न्यायपालिका के लोग  और सारी सरकार और उसका तंत्र विदेशी हाथों में बिककर करने लगते हैं 

फिर अचानक एक याचिका डाली जाती है और तुरंत आदेश हो जाता है कि इस साल प्रदूषण को रोकने के लिए पटाखे पूरी तरह से प्रतिबंधित होंगे 

और जब यही पटाखे ईद बकरीद वारावफात क्रिसमस और नए अंग्रेजी वर्ष में दीपावली से 100 गुना अधिक पूरी दुनिया में छोड़े जाते हैं तब कहीं कोई प्रदूषण नहीं फैलता है 

दूसरी नौटंकी पराली जलाने को लेकर हैं जबकि अब इस‌ पराली का कोई नामोनिशान नहीं है ।

हर वर्ष ऐसा ही होता है जैसे ही दीपावली आती है दुनिया भर की नौटंकी शुरू हो जाती है और सरकार भी इस काम में खूब सहयोग न्यायपालिका का करती है 

मजे की बात यह है कि हर बार की तरह इस बार भी आज दिनांक 20 अक्टूबर तक पूरे भारत के किसी भी समाचार पत्र पत्रिका सोशल मीडिया में इस भयानक विषैले प्रदूषण का कहीं कोई जिक्र नहीं है। 


जबकि जौनपुर मुंबई कानपुर सहित भारत के लगभग सभी नगरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 के आसपास हैं जब दीपावली एकादशी और कार्तिक पूर्णिमा और नानक जी की जयंती आ जाएगी तब सनातन धर्म को उत्साह उल्लास से पर्व मनाने से रोकने के लिए सारा ज्ञान उदल दिया जाएगा पानी बचाने का ज्ञान ईद बकरीद 12 वफात गुड फ्राइडे न्यू इंग्लिश ईयर और क्रिसमस पर नहीं बघारा जाता है इसी तरह जानवरों की दया वाला पाठ बकरीद पर नहीं बघारा जाता जब करोड़ों पशु एक ही झटके मेंअल्लाह को प्यारी है कुर्बानी के नाम पर और गटक लिए जाते हैं हलाल कर दिए जाते हैं जब नवरोज में और बड़ी प्रतियोगिताओं में रंग और शराब उड़ेली जाती है तब भी भारत का सारा सरकारी तंत्र और प्रिंट इलेक्ट्रानिक मीडिया विदेशी इशारों पर एकदम चुप रहती है सबको केवल पैसा चाहिए। 


डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि