Tuesday, 16 June 2026

मौसम की भविष्यवाणी - डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 7017713978

मौसम की भविष्यवाणी - डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 7017713978

15 जून से 25 जून तक आसमान से बरसेगी आज सभी दिशाएं हो जाएगी लाल धरती बन जाएगी तपती हुई भट्टी उमस और पसीने से हो जाएंगे लोग बेहाल केवल हमारे केंद्र की भविष्यवाणी सही होनी बाकी सभी सरकारी और प्राइवेट मौसम विभाग हर वर्ष की तरह इस बार भी मुंह की खाएंगे अल नीनो और विभिन्न प्रभावों से मानसून रहेगा बहुत कमजोर 25 अक्टूबर तक पड़ेगी घनघोर गर्मी ‌ इसका प्रभाव केवल जोधपुर और जौनपुर के आसपास के जनपदों पूर्वांचल उत्तर प्रदेश में ही नहीं अपितु जम्मू कश्मीर से लेकर केरल कन्याकुमारी गुजरात राजस्थान से लेकर अरुणाचल प्रदेश उड़ीसा हर जगह पड़ेगा शरीर की क्षमता आधी होजाएगी।

इसी बीच हवाओं की दिशा पश्चिम गति 10 से 20 किलोमीटर प्रति घंटा होगी मानसून और मानसून बादलों का दूर-दूर तक कोई नामोनिशान नहीं है जैसा कि हमारे केंद्र द्वारा बार-बार दर्जनों बार कहा गया इस वर्ष का मानसून अनिश्चित अनियमित और विलंबित रहेगा। सूखा और सूखे जैसी स्थितियां पड़ना निश्चित है ‌ क्योंकि मानसून बहुत पहले ही आकर केरल कर्नाटक तक सीमित रहकर 15 म ई से 25 म ई तक समाप्त हो चुका है दूसरा चक्र 4 जून को आया वह बहुत कमजोर था ‌ इस बीच संपूर्ण भारत में अधिकांश स्थानों का तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस अधिकतम और 25 से 35 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम रहेगा जो अत्यंत ही भयानक स्थिति है।

प्रदूषण की मात्रा अत्यधिक रहेगी पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 5 से 7 और वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 के आसपास रहेगी इसलिए गर्मी उमस और जलन ‌‌ भी भयंकर प्रलयंकर गर्मीसे अभी ‌ कम से कम एक सप्ताह तक मुक्ति मिलने की संभावना नहीं है वर्षा की दूर-दूर संभावना नहीं है अचानक परिवर्तन के फलस्वरूप कहीं-कहीं तेज हवा बूंदाबादी हो सकती है उसकी भी अधिक संभावना नहीं है।‌ 15 जून से 25 जून के बीच केवल एक बार आंधी तूफान वर्षा चमक गरज और वज्रपात का योग है जिससे थोड़ी सी राहत मिल जाएगी।

जौनपुर और आसपास ही नहीं पूरे देश की यही स्थिति है दो-तीन दिन केरल कर्नाटक और आसपास वर्षा करने के बाद मानसूनी बादल पूरे भारत से अदृश्य हो चुके हैं अब तक मानसून महाराष्ट्र गुजरात मध्य प्रदेश झारखंड बिहार तक पहुंच जाना चाहिए था क्योंकि जौनपुर और उत्तर प्रदेश में 19 -21 जून तक पहुंच जाता है इस बार इसके 27 से 30 जून के बीच आने की संभावना बन रही है‌ इसीलिए हमारे केंद्र द्वारा कृषि बागवानी से संबंधित लोगों को बार-बार सुझाव चेतावनी दिया गया था कि इस वर्ष सूखे वाले फसलों की तैयारी कर ले और 25 अक्टूबर तक प्रचंड गर्मी उमस पसीना झेलने के लिए तैयार रहे -

दिनों दिन इस प्रकार का प्राकृतिक प्रकोप सूखा अकाल महामारी वर्षा बाढ़ अति वृष्टि जैसी स्थितियां बढ़ती जाएंगे ‌ मनुष्य के द्वारा भयानक प्रदूषण और प्रकृति पर्यावरण के साथ किया गया खिलवाड़ अब खुलकर सामने आने लगा है भारत ही नहीं यह पूरी दुनिया को भीषण रूप से प्रभावित करके तरस-नस कर देगा अमेरिका यूरोप में भी पड़ेगी भीषण गर्मी और हजारों लोग मारे जाएंगे।

और बड़े-बड़े वैज्ञानिक मौसम विज्ञानी और पश्चिमी विद्वान और उनकी नकल करके दुनिया भर के विद्वान जो नौटंकी वाले कारण बता रहे हैं उनमें से एक भी कारण नहीं है प्रकृति और पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ के कारण ही ऐसी स्थितियां उत्पन्न हुई है ‌ इसमें से मुख्य हैं वनों और हरियाली का लगातार गायब होना नए पेड़ पौधे ‌ पृथ्वी पर लगाने कीजगह भाषणों कागजों और विज्ञापन में लगाना पौधों का पैसा जेब में रख लेना प्रकृति और पर्यावरण में भयंकर प्रदूषण पैदा करना प्लास्टिक पूरा कचरा इलेक्ट्रॉनिक कचरा रेडिएशन वाला कचरा जल और वायु को गंदा करना सीमेंट कंक्रीट और पत्थर के जंगल पैदा करना जमीन का लगातार मिट्टी की जगह सीमेंट कंक्रीट और पत्थरों से ढकते चले जाना और उद्योग धंधों का लगातार बिना नियंत्रण के बढ़ते चले जाना ‌ इसके मुख्य कारण हैं 

इसके अलावा समुद्र में फैल रहा भीषण प्रदूषण मनुष्य की जनसंख्या का हिसाब बढ़ाना लगातार युद्ध परमाणु परीक्षण और परमाणु केंटो में विस्फोट साबुन डिटर्जेंट पाउडर फ्रिज रेफ्रिजरेटर और बिजली के चूल्हा का भीषण प्रयोग लकड़ी ऊपरी और प्राकृतिक चीजों का लगातार प्रयोग घटना जल के स्रोत कुएं  ‌ तालाब झील पोखर झरने बावली इत्यादि की जगह घर-घर जेट पंप और सबमर्सिबल लगाकर धरती को जल रहित बनाना जैसे आत्मघाती प्रवृत्तियां मानव सभ्यता को विनाश की ओर ले जा रहे हैं और इस वर्ष तो भयंकर अल-नीनो ने इन सबको और भी अधिक बढ़ा दिया है ऊपर से सूर्य में हो रही प्रचंड नाभिकीय क्रियाएं और प्रचंड विस्फोट धरती को और भी गरम और असंतुलित कर रहे हैं।

Monday, 15 June 2026

धार्मिक पहचान और देश के जुड़ाव में बैलेंस* :*भारत का आगे का रास्ता*

*धार्मिक पहचान और देश के जुड़ाव में बैलेंस* :
*भारत का आगे का रास्ता*

भारत कभी भी एक जैसी सभ्यता नहीं रहा है। यह एक ऐसी ज़मीन है जहाँ सदियों से अनगिनत धर्म, भाषाएँ, रीति-रिवाज और परंपराएँ एक साथ रही हैं और इसने एक अनोखी सभ्यता की सोच बनाई है जो अलग-थलग करने के बजाय सबको साथ लेकर चलने पर आधारित है। सम्राट अशोक की पुरानी शिक्षाओं से, जिन्होंने कलिंग युद्ध के बाद सभी पंथों का सम्मान करने की वकालत की थी, कबीर और गुरु नानक जैसे संतों की सबको साथ लेकर चलने वाली आध्यात्मिक परंपराओं तक, भारत का इतिहास आस्था और सबकी एकता के बीच लगातार बातचीत को दिखाता है। भारत का आइडिया कभी भी धार्मिक पहचान को मिटाने के लिए नहीं था; बल्कि, इसने एक साझा राष्ट्रीय सोच के अंदर अलग-अलग तरह की चीज़ों में तालमेल बिठाने की कोशिश की।
हालांकि, आज के समय में, धर्म और राष्ट्रवाद से जुड़े सवाल बहुत ज़्यादा सेंसिटिव हो गए हैं। पब्लिक बातचीत अक्सर राजनीतिक बयानबाजी, गलत जानकारी और सोशल मीडिया की कहानियों से बंट जाती है, जो धार्मिक पहचान और देश के प्रति वफादारी को एक-दूसरे के उलट दिखाने की कोशिश करती हैं। ऐसी जोड़ियां उस नींव को ही कमज़ोर कर देती हैं जिस पर आज का भारत बना है। बी. आर. अंबेडकर जैसे दूर की सोचने वालों की लीडरशिप में बने भारतीय संविधान ने जानबूझकर एक राष्ट्र के विचार को खारिज कर दिया और इसके बजाय हर नागरिक को देश के डेमोक्रेटिक ढांचे में बराबर का हिस्सा बने रहते हुए धर्म को मानने, मानने और फैलाने की आज़ादी की गारंटी दी। आज भारत के सामने चुनौती धर्म और राष्ट्र के बीच चुनने की नहीं है, बल्कि यह पक्का करना है कि दोनों एक साथ रहें जिससे सामाजिक मेलजोल, संवैधानिक नैतिकता और राष्ट्रीय एकता मज़बूत हो। भारत की मिली-जुली संस्कृति ठीक यही रास्ता दिखाती है। राष्ट्र के बारे में भारत की समझ ऐतिहासिक रूप से दुनिया के कई हिस्सों में देखी जाने वाली पहचान की सख्त सोच से अलग रही है। भारतीय सभ्यता सांस्कृतिक लेन-देन, माइग्रेशन और आध्यात्मिक मेलजोल से विकसित हुई। पुराने व्यापार के रास्ते यहूदियों, ईसाइयों और पारसियों को कई आधुनिक राष्ट्र-राज्यों के बनने से बहुत पहले भारतीय तटों पर लाए थे। ज़ुल्म के बजाय, इन समुदायों को अपनापन और सुरक्षा मिली। इस्लाम के आने से आर्किटेक्चर, संगीत, साहित्य, भाषा और आध्यात्मिकता के ज़रिए भारत का सांस्कृतिक माहौल और बेहतर हुआ। उत्तर भारत में गंगा-जमुनी तहज़ीब का आना परंपराओं के इस मेल का प्रतीक था, जहाँ अलग-अलग धर्मों के लोग एक-दूसरे की सामाजिक और सांस्कृतिक ज़िंदगी में हिस्सा लेते थे।
भक्ति और सूफ़ी आंदोलनों ने मिलकर रहने की इस भावना को बढ़ावा देने में एक बड़ा रोल निभाया। मोइनुद्दीन चिश्ती, निज़ामुद्दीन औलिया और कबीर जैसे संतों ने कट्टर सांप्रदायिक सीमाओं से परे दया, विनम्रता और भक्ति का उपदेश दिया। उनकी शिक्षाएँ आम भारतीयों के दिलों में उतर गईं क्योंकि उन्होंने बंटवारे के बजाय इंसानियत पर ज़ोर दिया। आज़ादी की लड़ाई के दौरान भी, अलग-अलग धार्मिक बैकग्राउंड के नेता कॉलोनियलिज़्म के खिलाफ़ एक साथ खड़े थे। महात्मा गांधी ने बार-बार कहा कि धर्म को नैतिक आचरण को गाइड करना चाहिए, न कि नफ़रत को बढ़ावा देना चाहिए। इसी तरह, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद जैसे नेताओं ने तर्क दिया कि गहरा मुस्लिम होना और गहरा भारतीय होना एक-दूसरे से अलग पहचान नहीं बल्कि एक-दूसरे को पूरा करने वाली पहचान हैं।
आज़ाद भारत ने संवैधानिक सुरक्षा उपायों के ज़रिए इस नज़रिए को संस्थागत बनाया। संविधान के आर्टिकल 25 से 28 धर्म की आज़ादी की गारंटी देते हैं, जिससे हर नागरिक आज़ादी से अपने धर्म को मान सकता है और उसका पालन कर सकता है। साथ ही, आर्टिकल 14, 15 और 16 कानून के सामने बराबरी पक्का करते हैं और धर्म, जाति, लिंग या जन्म की जगह के आधार पर भेदभाव पर रोक लगाते हैं। इस तरह संविधान एक बैलेंस बनाता है जहाँ धार्मिक पहचान का सम्मान किया जाता है, लेकिन नागरिकता ही आम तौर पर जोड़ने वाली ताकत बनी रहती है। खास बात यह है कि आर्टिकल 32 के तहत संवैधानिक उपाय नागरिकों को यह अधिकार देते हैं कि जब भी बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो वे सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं, जिससे संवैधानिक सुरक्षा सिर्फ़ सिंबॉलिक नहीं बल्कि लागू करने लायक बन जाती है।
फिर भी, सिर्फ़ संवैधानिक गारंटी काफ़ी नहीं हैं जब तक कि समाज मिलकर भरोसा और हमदर्दी न बढ़ाए। आज का भारत डिजिटल गलत जानकारी, चुनिंदा ऐतिहासिक मतलब और राजनीतिक ध्रुवीकरण से बढ़ते सांप्रदायिक शक की चुनौती का सामना कर रहा है। धार्मिक पहचान का इस्तेमाल कभी-कभी चुनावी फ़ायदे के लिए किया जाता है, जिससे नागरिकों को देश की तरक्की में बराबर का हिस्सा मानने के बजाय सांप्रदायिक कैटेगरी में डाल दिया जाता है। ऐसी आदतें उस सामाजिक ताने-बाने के लिए खतरा हैं जिसने ऐतिहासिक रूप से भारत को अलग-थलग करने वाले समाजों से अलग रखा है।
साथ ही, ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं जो भारत के मिले-जुले कल्चर को पक्का करते रहते हैं। पूरे देश में, हिंदू ईद मनाते हैं, मुसलमान गुरुपर्व पर लंगर बांटते हैं, सिख मुश्किल समय में मंदिरों और मस्जिदों की रक्षा करते हैं, और ईसाई धर्म की परवाह किए बिना लोगों की सेवा करने वाले एजुकेशनल और हेल्थकेयर इंस्टीट्यूशन चलाते हैं। प्राकृतिक आपदाओं और देश की इमरजेंसी के दौरान, आम भारतीय बार-बार दिखाते हैं कि दया धर्म की सीमाओं से परे होती है। भारतीय सेना भी विविधता में एकता का एक मज़बूत उदाहरण बनी हुई है, जो  यहाँ विभिन्न धर्मों के सैनिक एक ही तिरंगे की रक्षा समान निष्ठा के साथ करते हैं।
विशेष रूप से भारतीय मुसलमानों के लिए, राष्ट्रीय पहचान से जुड़ी बहस अक्सर कड़ी जाँच-पड़ताल के घेरे में आ जाती है। हालाँकि, भारतीय इतिहास स्वयं ही विभाजनकारी बातों का करारा जवाब देता है। मौलाना आज़ाद और अशफ़ाक उल्ला खान जैसे स्वतंत्रता सेनानियों से लेकर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे वैज्ञानिकों तक, भारतीय मुसलमानों ने राष्ट्र-निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है। शिक्षा, रक्षा, विज्ञान, कला और लोक सेवा के क्षेत्रों में उनकी भागीदारी राष्ट्र के साथ उनके अटूट बंधन को दर्शाती है। भारत में देशभक्ति का अर्थ कभी भी अपनी धार्मिक पहचान को त्यागना नहीं रहा है; बल्कि, इसका अर्थ है संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक सौहार्द और सामूहिक प्रगति के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखना।
भारत की असली ताकत उसकी इस क्षमता में निहित है कि वह एक ही समय में अनेक पहचानों को अपने भीतर समेटे रहता है। कोई भी व्यक्ति एक ही समय में गर्व से धार्मिक और गर्व से भारतीय हो सकता है। संविधान नागरिकों से यह अपेक्षा नहीं करता कि वे अपनी आस्थाओं को मिटा दें; बल्कि वह उनसे न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों को बनाए रखने का आह्वान करता है। ये मूल्य किसी भी आस्था के विरोधी नहीं हैं। वास्तव में, अधिकांश धार्मिक परंपराएँ करुणा, ईमानदारी और सह-अस्तित्व जैसे सिद्धांतों का ही समर्थन करती हैं—ऐसे सिद्धांत जो लोकतंत्र को कमज़ोर करने के बजाय उसे और अधिक सुदृढ़ बनाते हैं।
भारत का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि वह अपनी धार्मिक पहचान और राष्ट्रीय पहचान के बीच के उस नाज़ुक, किंतु अत्यंत शक्तिशाली संतुलन को किस प्रकार बनाए रखता है। देश की गौरवशाली सभ्यता का इतिहास इस बात का साक्षी है कि विविधता कभी भी उसकी कमज़ोरी नहीं रही; बल्कि यह सदैव उसकी सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी है। ऐसे बहुलवादी समाज पर एकरूपता थोपने के किसी भी प्रयास से भारत की मूल भावना को ही आघात पहुँचने का खतरा उत्पन्न हो जाता है। राष्ट्रीय एकता की नींव भय अथवा संदेह पर नहीं रखी जा सकती; बल्कि इसका उद्भव तो आपसी सम्मान, संवैधानिक आस्था और सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना से ही संभव है।
भारतीय संविधान इस सह-अस्तित्व के लिए एक वैधानिक ढाँचा प्रदान करता है, किंतु इसे निरंतर बनाए रखने के लिए नागरिकों में नैतिक साहस, नेताओं में बौद्धिक ईमानदारी और विभिन्न संस्थाओं में संवेदनशीलता का होना नितांत आवश्यक है। विद्यालयों, विभिन्न मीडिया मंचों, धार्मिक गुरुओं और नागरिक समाज से जुड़े संगठनों को चाहिए कि वे विभाजनकारी प्रवृत्तियों को बढ़ावा देने के बजाय आपसी संवाद को प्रोत्साहित करने के लिए एकजुट होकर कार्य करें। आज की सबसे बड़ी आवश्यकता यह नहीं है कि हम 'प्रतिस्पर्धी राष्ट्रवाद' की होड़ में शामिल हों, बल्कि आवश्यकता इस बात की है कि हम संवैधानिक मूल्यों में गहरी आस्था रखने वाले 'करुणापूर्ण नागरिक' बनें।
भारत की वह 'समन्वयवादी संस्कृति'—जो सदियों के सह-अस्तित्व से आकार पाती रही है—आज भी उसकी सबसे मूल्यवान धरोहर बनी हुई है। आज के इस दौर में, जब संपूर्ण विश्व में ध्रुवीकरण की प्रवृत्तियाँ हावी होती जा रही हैं, भारत एक ऐसे आदर्श के रूप में अपनी पहचान बनाए रख सकता है, जहाँ आस्था और राष्ट्रभक्ति एक-दूसरे से टकराते नहीं, बल्कि पूर्ण सौहार्द के साथ सह-अस्तित्व में रहते हैं। सच्चे अर्थों में 'भारतीय' होने का तात्पर्य अपनी धार्मिक पहचान को नकारना नहीं है, बल्कि उस विराट विचार को सहर्ष अंगीकार करना है कि गहन विविधता के मध्य भी एकता को स्थापित करना पूर्णतः संभव है।

फ़रहत अली खान 
एम ए गोल्ड मेडलिस्ट

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर के तत्व अवधान में जनपद न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर सुशील

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर के तत्व अवधान में जनपद न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर सुशील कुमार शशि के नेतृत्व में आज एक विधिक क साक्षरता जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया गया ‌ इस संगोष्ठी में सचिव पूर्ण काली के सुशील कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह नायब तहसीलदार ‌ शीतला प्रसाद सिंह लालचंद गौतम एडवोकेट अध्यक्ष तहसील  अधिवक्ता समिति राजीव कुमार सिंह एडवोकेट महामंत्री‌ प्राधिकरण के सुनील कुमार मौर्य भारत यादव एडवोकेट ‌ कुंवर आजाद सिंह ‌ चंद्रशेखर आजाद एवं बड़ी संख्या में विद्वान अधिवक्तागण वादकारीगण और संभ्रांत बुजुर्ग ‌ महिलाएं पैरालीगल वॉलिंटियर्सएवं अन्य लोग उपस्थित रहे।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए सुशील कुमार सिंह सिविल जज सीनियर डिवीजन सचिव द्वारा वृद्धों के महत्व और उनको प्राप्त अधिकारों का विस्तार से विवेचन करते हुए बताया कि उन्हें विधान और संविधान में हर जगह वरीयता दी गई है अटल और इंदिरा पेंशन योजना रेल यात्रा में उनको दी जाने वाली छूट और सुविधाएं भरण पोषण के अधिकार दवा चिकित्सा में उन्हें प्राप्त अधिकार के बारे में बताते हुए बच्ची देवी बनाम स्टेट में प्रतिपादित सिद्धांतों का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि यदि पुलिस द्वारा विवेचना के दौरान गिरफ्तार नहीं किया जाता है तो चार्ज शीट प्रस्तुत होने के बाद 7 वर्ष तक के मामलों में द्वारा जमानत दे दी जाएगी‌ और अभियुक्त को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा ‌ यदि अभियुक्त जेल में बंद है तो उसे एक निश्चित समय सीमा दी जाएगी जिससे वह अपने जमानतदार प्रस्तुत कर सकें इसके लिए अभियुक्त की आर्थिक सामाजिक रिपोर्ट आना आवश्यक है उन्होंने समाज में वृद्ध लोगों की गिरती स्थिति के बारे में भी सचेत किया। उन्होंने बताया कि द्वारा दुष्कर्म और तेजाब पीड़ित महिलाओं और अन्य मामलों में सहायता राशि प्रदान करने में मदद की जाती है‌‌‌ उन्होंने बताया कि पिछली लोक अदालत में 57000 मुकदमेनिस्तारित किए गए ।

इस विधिक साक्षरता जागरूकता ‌ सेमिनार का संचालन करते हुए डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह ने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जहां के बच्चे सुबह उठकर माता-पिता और गुरु तथा वृद्धों का पैर छूते थे आज स्थितियां कितनी भयानक हो चुकी है जिसके लिए जागरूकता हर स्तर पर फैलाया जाने की आवश्यकता है ‌ उन्होंने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और तहसील विधिक सेवा प्राधिकरण का विस्तार से चर्चा करते हुए बताया यदि अनुसूचित जाति जनजाति पिछड़ी जाति के लोग हैं जेल में बंद लोग हैं महिलाएं हैं या कोई भी ऐसा व्यक्ति जो प्राकृतिक आपदा का शिकार है उसे प्राधिकरण के द्वारा बिल्कुल मुफ्त में सिविल और क्रिमिनल मामलों में हर प्रकार की सहायता और अधिवक्ता उपलब्ध कराए जाएंगे राष्ट्रीय लोक अदालत और सुलह समझौता केंद्र के द्वारा अधिक से अधिक मामले निस्तारित किए जाने की प्रक्रिया का वर्णन किया और कहा कि प्राधिकरण में जनपद के किसी भी प्रकार का शिकायती पत्र संबंधित अधिकारी के विरुद्ध प्रस्तुत किया जा सकता है उन्होंने पैरालीगल वॉलिंटियर्स एवं फ्रंट ऑफिस के बारे में भी विस्तार से बताते  हुए कहा कि वृद्ध स्त्री पुरुष समाज की अनमोल धरोहर हैं कल सभी लोगों को वृद्ध होना है जैसा करेंगे वैसा उनके आगे भी आएगा।

इसी क्रम में एडवोकेट भारत यादव अध्यक्ष लालचंद गौतम एडवोकेट महामंत्री राजीव कुमार सिंह एवं नायब तहसीलदार शीतला प्रसाद सिंह के द्वारा अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा गया कि वृद्ध लोगों की समझ में सेवा करने चाहिए और उनके विधिक अधिकारों के बारे में बताते हुए उन्हें हर प्रकार से सहयोग देना चाहिए और बच्ची देवी बना स्टेट में प्रतिपादित सिद्धांतों का प्रचार प्रसार करते हुए उसका अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिये।

Saturday, 13 June 2026

परीक्षाओं की तानाशाही और निरंकुश्ता परीक्षा देने वाले छात्र-छात्राओं के लिए अभिशाप बनी -डॉ दिलीप कुमार सिंह

‌‌ परीक्षाओं की तानाशाही और निरंकुश्ता परीक्षा देने वाले छात्र-छात्राओं के लिए अभिशाप बनी -डॉ दिलीप कुमार सिंह 

अद्भुत सरकार है और अद्भुत है उसका परीक्षा तंत्र हर बार हर परीक्षा में या तो प्रश्न पत्र आउट हो जाते हैं या लीक हो जाते हैं या कुछ न कुछ तकनीकी कमी के कारण लाखों लाख छात्रों की परीक्षा एक झटके में रद्द हो जाती है और हर एक छात्रा का हजारों रुपए पानी में डूब जाता है ।

इसके अलावा भारत की परीक्षाएं भी धन्य है जो सीधे-सीधे सनातन धर्म पर प्रहार हैं यह देखकर बहुत ही अपमानित महसूस किया जाता है कि इस परीक्षा में सनातनी महिलाओं के हार मंगलसूत्र नाक और कान में पहनने वाले आभूषण यहां तक की पैरों में पहनने वाली पायल और मीना तक निकाल लिया जाता है क्या सचमुच पागल हो गया है हमारा परीक्षा तंत्र इन चीजों से परीक्षा में भला क्या खतरा हो सकता है समझ के बाहर है ।‌ तुम्हें जब नाका भेजो बुर्का की बात आती है तो सारा तंत्र प्रशासन और न्यायपालिका भी चुप हो जाती है।


जहां तक घड़ी और किसी डिजिटल उपकरण को ले जाना है वहां तक तो कुछ बात समझ में भी आती है लेकिन ऐसा सिस्टम क्यों नहीं विकसित करते हैं की छात्राओं के प्रवेश करते समय ही ऐसी मशीन लगा दीजिए जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए लेकिन ऐसा कुछ नहीं होने वाला है ‌ हम लोग तो इतनी परीक्षा दे डाले नल का नामोनिशान नहीं कभी कुछ भी ऐसा नहीं देखने को मिला जैसा आजकल नंगा नाच हो रहा है ‌ कहावत है कि चोर को सब चोर और बेईमान को सब बेईमान‌ दुराचारी को सब दुराचारी ही दिखते हैं।

एक खेल और खेलते हैं हमारे परीक्षा से जुड़े हुए तथाकथित युग पुरुष लोग‌ परीक्षाओं को इतना दूर-दूर कर देते हैं की बस ट्रेन सड़क सब कुछ जाम हो जाता है और अधिकांश परीक्षार्थियों के लिए अपने परीक्षा केंद्र पर पहुंचना बहुत टेढ़ी खीर हो जाती है जिस देश में छल कपट विश्वासघात बेईमानी चोरी घूसखोरी भ्रष्टाचार रग रग में भरा हो वहां पर कुछ भी सफल होने वाला नहीं है हर साल लगभग सभी परीक्षाओं में परीक्षा रद्द होती है बेईमानी होती है भ्रष्टाचार होता है सब कुछ जानकार भी लोग चुपचाप रहते हैं और सफल हो जाने वाले तीस मार खान तुर्रम खान बन जाते हैं ।

यदि सचमुच लोगों में नैतिकता और सदाचार होती तो हर एक विद्यालय में एक परीक्षा आयोजित होती जिसमें प्रारंभिक परीक्षा ले ली जाती यदि विद्यालय का तंत्र ईमानदार है तो एक निश्चित अंक पाने वाले छात्रों को ही मुख्य परीक्षा में स्थानिक स्कूल कॉलेज से परीक्षा लेकर भेजा जा सकता है इससे 90% भीड़ अपने आप समाप्त हो जाएगी और सही और योग्य छात्र छात्राएं आराम से मुख्य परीक्षा देने जाएंगे लेकिन ऐसी कुछ भी चीज करना इन लोगों के बस की बाहर की बात है क्योंकि इसमें भी 95% लोग वही होते हैं जो स्वयं ही छल कपट चोरी बेईमानी पैसों के बल पर नियुक्त हो जाते हैं ।

सुना तो यहां तक गया है कि जब राजनेताओं बड़े-बड़े अधिकारियों माफिया धन कुबेर और दलालों के बच्चे नियत अनुपात में चुने नहीं जाते तो जानबूझकर परीक्षा में प्रश्न पत्र आउट कर दिया जाता है या लीक हो जाता है या परीक्षा होने के बाद भी इन्हीं लोगों में से कोई न्यायालय में चला जाता है और सब कुछ तभी ठीक होता है जब उनके छात्रों का बच्चों का समायोजन हो जाता है 

‌ परीक्षा दे रहे छात्र-छात्राओं को कितना परेशानी कष्ट होता है यह वही जानते हैं या उनके साथ जाने वाले अभिभावक लोग जानते हैं मोटी रकम लेने के बाद भी अधिकांश विद्यालय में परीक्षा सेंटरों पर पानी तक की व्यवस्था नहीं रहती है अनेक स्थानों में तो बिना पंखे की ही परीक्षा आयोजित होती है इसके अलावा परीक्षा के दिन परीक्षा टेंपो वाहन चालक यहां तक की पानी बेचने वाले और जलपान नाश्ता वाले भी खुले आम लूट करते हैं₹10 की चीज ₹20 से ₹50 तक और ₹10 के भाड़े की जगह ₹100 वसूले जाते हैं और उनके साथ गए अभिभावक लोगों को बैठने की भी कोई जगह नहीं दी जाती है बरसात धूप या फिर ठंड में कांपते हुए समय बिताना उनकी मजबूरी है परीक्षा समाप्त होने के बाद इतना जाम और हाहाकार मचता है कि लोगों को वापस घर पहुंचना कठिन हो जाता है इसमें सबसे ज्यादा परेशानी स्त्रियों और लड़कियों को होती है और उनके घर सुरक्षित पहुंचना भी एक चमत्कार होता है।

ईश्वर ही जाने क्या-क्या खेल हो रहा है इस देश में और इस देश को बना पाना बचा पाना संभव नहीं रह गया है पैसा पे हुए चल दलाल और चमचे गुणगान करते हैं असली सच पुलिस छिपा देती है सब कुछ लिप पोर्ट कर साफ कर दिया जाता है और पता चलता है कि कल पान बीड़ी सुरती खाने वाले मदिरा पीने वाले लोग बड़े-बड़े पदों पर चुन लिए जाते हैं और उनके साथी सहयोगी यहां तक की शिक्षक भी मुंह फाड़ कर देखते रह जाते हैं विश्वास ना हो तो देख लीजिए देश के 90% से अधिक लोग ऊंचे पदों पर द्वितीय या तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण है और इसी कारण से तुलसीदास जी ने मंत्र के मुंह से कहां डाला की कोई भी राजा बने हमको कोई हानि नहीं है इसीलिए भारत की जनता एन देशभक्त हो पाती है और नाराज भक्त हो पाती है और यह लंबा खेल नीचे से ऊपर तक चलता रहता है आठवां वेतन प्राप्त लोगों को 95% लोगों की दुख पीड़ा कष्ट महंगाई बेरोजगारी भ्रष्टाचार से क्या लेना देना है वह भी राजनेताओं की तरह सरपट को गाना और घास को गेहूं बोलते रहेंगे

धार्मिक पहचान और देश के जुड़ाव में बैलेंस* :*भारत का आगे का रास्ता*

Friday, 12 June 2026

डॉ. मन्नान ज़ैदी के नेतृत्व में मानव सेवा का महाअभियान, समाजसेवियों का हुआ भव्य सम्मान!

डॉ. मन्नान ज़ैदी के नेतृत्व में मानव सेवा का महाअभियान, समाजसेवियों का हुआ भव्य सम्मान!
     ( सब हेडलाइन)
वरिष्ठ पत्रकार डॉ. उस्मान ज़ैदी के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ गरिमामयी समारोह, शेखचिल्ली की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
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स्योहारा। मानव सेवा, सामाजिक जागरूकता और जनकल्याण के उद्देश्य को लेकर कार्यरत नयी लहर फाउंडेशन द्वारा एक भव्य सम्मान समारोह एवं सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. मन्नान ज़ैदी ने किया, जबकि कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के रूप में प्रसिद्ध कॉमेडी कलाकार शेखचिल्ली अपनी टीम के साथ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में समाज सेवा, रक्तदान, स्वास्थ्य सहायता तथा जरूरतमंद लोगों की मदद के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले समाजसेवियों को नयी लहर फाउंडेशन की ओर से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सभी सम्मानित अतिथियों को शील्ड भेंट कर उनके कार्यों की सराहना की गई।प्रसिद्ध हास्य कलाकार शेखचिल्ली ने अपनी मनोरंजक प्रस्तुतियों से उपस्थित जनसमूह को खूब हँसाया। उनकी प्रस्तुतियों के दौरान पूरा सभागार तालियों और ठहाकों से गूंज उठा। शेखचिल्ली की टीम से रुखसाना, जाहिद, कैफ, अजय, बंटी एवं रिफाकत विशेष रूप से मौजूद रहे।
कार्यक्रम में Arshee,Blood ,Help ,Seva ,की ओर से हाफ़िज़ अथर हुसैन, महबूब शेख, नदीम अख्तर, शमीम अहमद सहित अनेक समाजसेवियों ने सहभागिता कर समाजहित के कार्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
इस अवसर पर नयी लहर फाउंडेशन की टीम के सक्रिय सदस्य जुबैर ज़ैदी, डॉ. रईस अहमद, फैज़ान, नूर चौधरी, फरमान चौधरी, वकार चौधरी, मोहम्मद ज़ैद, रचना देवी एवं दीक्षित सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे और कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।समारोह का आयोजन वरिष्ठ पत्रकार डॉ. उस्मान ज़ैदी के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। अपने संबोधन में डॉ. मन्नान ज़ैदी ने कहा कि नयी लहर फाउंडेशन लगातार स्वास्थ्य, शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य कर रही है। संस्था जरूरतमंद एवं असहाय लोगों को निःशुल्क चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ गंभीर बीमारियों के उपचार एवं ऑपरेशन में भी सहयोग प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि समाज सेवा केवल एक कार्य नहीं, बल्कि मानवता के प्रति हमारी जिम्मेदारी है।डॉ. मन्नान ज़ैदी ने समाजहित में कार्य करने वाले सभी लोगों का सम्मान करते हुए कहा कि ऐसे समर्पित व्यक्तित्व समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।उन्होंने भविष्य में भी जनकल्याण एवं मानव सेवा से जुड़े कार्यक्रमों को निरंतर जारी रखने का संकल्प दोहराया।कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों, समाजसेवियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया गया। नयी लहर फाउंडेशन ने समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुँचाने के अपने संकल्प को दोहराते हुए मानव सेवा के इस मिशन को और अधिक व्यापक बनाने की घोषणा की। वरिष्ठ पत्रकार डॉ. उस्मान ज़ैदी जब समाज में संवेदनशील लोग आगे बढ़कर जरूरतमंदों का हाथ थामते हैं, तभी मानवता का वास्तविक स्वरूप दिखाई देता है। नयी लहर फाउंडेशन द्वारा किया गया यह आयोजन केवल सम्मान समारोह नहीं, बल्कि समाज सेवा और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का एक प्रेरणादायक अभियान है। ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नई ऊर्जा पैदा करते हैं।"डॉ. मन्नान ज़ैदी (संस्थापक, नयी लहर फाउंडेशन)हमारा उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज में सेवा, सहयोग और भाईचारे की भावना को मजबूत करना है। नयी लहर फाउंडेशन शिक्षा, स्वास्थ्य और मानव सेवा के क्षेत्र में निरंतर कार्य करती रहेगी तथा जरूरतमंद लोगों तक हर संभव मदद पहुँचाने का प्रयास जारी रखेगी।"
       ---बॉक्स में ---
"सम्मान, सेवा और संवेदनशीलता का संगम बना नयी लहर फाउंडेशन का भव्य समारोह"
"डॉ. मन्नान ज़ैदी के नेतृत्व में मानवता को मिला नया आयाम"
"शेखचिल्ली की हास्य प्रस्तुति और समाजसेवियों के सम्मान ने जीता सभी का दिल"
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Wednesday, 10 June 2026

कश्मीर के हिन्दू राज्य का इतिहास -डॉ दिलीप कुमार सिंह

कश्मीर के हिन्दू राज्य का इतिहास -डॉ दिलीप कुमार सिंह 
कश्मीर दो शब्दों से मिलकर बना है  क: +समीर जिसका अर्थ है जल और वायु अर्थात संपूर्ण धरती पर कश्मीर की हवा और पानी सबसे शुद्ध ताजी और स्फूर्ति दायक थी ऐसा इसलिए था कि हिमालय पर्वत पर बर्फ से ढके शिखरों से आने वाला पानी तमाम खनिज पदार्थ और जड़ी बूटियों से मिलकर अमृत के समान स्वास्थ्यवर्धक हो जाता था और वही हाल वहां की हवा का भी रहता था शुभ्र स्वच्छ बर्फ को छूकर बहती हवा केसर जड़ी बूटियों और तमाम औषधियों से संयुक्त होकर अत्यंत सुगंधित ऑक्सीजन से ओतप्रोत हो जाती थी।

इस प्रदेश की स्थापना परम प्रतापी ब्रह्मा के पुत्र कश्यप ब्रह्म ऋषि ने किया था और उन्हीं के नाम पर कैस्पियन सागर का नाम भी पड़ा जिसको पहले कश्यप सागर कहा करते थे और उसकी खोज सर्वप्रथम फौजी स्वभाव वाले कश्यप जी ने ही किया था कश्मीर एक विशाल राज्य था जिसकी सीमाएं वर्तमान में अफगानिस्तान कजाकिस्तान कैलाश मानसरोवर से होती हुई आधे पंजाब और हिमाचल प्रदेश तक फैली हुई थी और इसका क्षेत्रफल लगभग 1500000 वर्ग किलोमीटर में था सतयुग त्रेता और द्वापर युग में बड़े-बड़े ब्रह्म ऋषि संत महात्मा और दार्शनिक लोगों की तपस्थली थी और यहां पर अनेकानेक राजसूय यज्ञ हुए भगवान श्री राम के और युधिष्ठिर के छोड़े गए अश्व भी वहां गए जहां पर उस समय के राजाओं से उनका घनघोर युद्ध हुआ था महा योद्धा किरात यहीं के निवासी थे जिनके वेश में अर्जुन से भगवान शिव ने स्वयं घनघोर युद्ध किया था

आज जो कश्मीर भारत में है और जिस कश्मीर की बात हम करते हैं वह धरती का स्वर्ग कहा जाने वाला कश्मीर नहीं है वह असली कश्मीर का केवल एक चौथाई है असली कश्मीर तो पाकिस्तान आजाद कश्मीर मुजफ्फराबाद में है दुनिया की सबसे सुंदर जड़ी बूटियां सबसे स्वच्छ ताजा पानी और स्वास्थ्यवर्धक फल फूल मिलते हैं और यहां रहने वाले लोग आराम से 100 वर्ष तक जीते हैं 1988 89 में मुझे ईश्वर की कृपा से आजाद कश्मीर एक सप्ताह जाने का मौका प्राप्त हुआ और वहां की असाधारण अद्भुत और कल्पना से परे ‌ का सौंदर्य देखकर हो गया था उसके बाद कश्मीर में भयानक याद पहले और सब कुछ तहस हो गया‌ बचा हुआ कश्मीर तो केवल कहने के लिए है और श्रीनगर तक के भूभाग ही धरती का स्वर्ग कहे जाने योग्य है।

कश्मीर और भारत दोनों के इतिहास की सही और प्रामाणिक जानकारी अत्यंत आवश्यक है।प्राचीन काल में भारत का क्षेत्रफल मुख्य भूभाग का लगभग 25000000 और किलोमीटर था और है आधे अरब प्रायद्वीप पूरे ईरान कैस्पियन सागर से होता हुआ अरब और उससे अलग हुए मुस्लिम गणराज्य और एक तिहाई चीन संपूर्ण तिब्बत को लेते हुए म्यांमार थाईलैंड लाओस वियतनाम सिंगापुर मलेशिया इंडोनेशिया श्रीलंका तक फैला हुआ था इसके अलावा अमेरिका और यूरोप ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका अंटार्कटिका उस समय जंगली राज थे और वहां भी भारत का शासन था धीरे धीरे सम्राट जन्मेजय के बाद भारत की सीमाएं सिकुड़ना आरंभ हुई और अंतिम बार चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के समय में भारत का राज्य मक्का मदीना और तुर्की तक फैला हुआ था कश्मीर सदैव से भारत का सबसे बड़ा और ‌ सबसे सबसे सुंदर और पवित्र राज्य था।

अखंड कश्मीर से ही उत्तर भारत के सभी प्रमुख नदियां जैसे सिंधु ब्रह्मपुत्र झेलम रवि व्यास सतलज चिनाव ‌ निकलते हैं जो सदैव अपनी से भारी जड़ी बूटियां से युक्त स्वच्छ और ताजी होती है‌ संसार की सबसे ऊंची 20 चोटियों में से 15 तो केवल कश्मीर में ही हैं

पहले का विराट कश्मीर तक फैला हुआ था जिसमें कैलाश मानसरोवर यक्ष गंधर्व और देवता लोक था।यहीं पर ऋषि मुनि तपस्या करते थे और अनंत ब्रह्मांड के रहस्य खोज लेते थे यहीं से सुमेरु का शिखर दिखाई देता था और यही से स्वर्ग का रास्ता जाता था यहां पर सिद्ध योगी तपस्वी रहते हैं जो हजारों लाखों वर्ष के हैं डॉ दिलीप कुमार सिंह

भगवती पार्वती ने यही के हिमवान शिखर पर दक्ष के पुत्री के रूप में जन्म लिया और अपने प्रदेशों के अपमान होने पर खुद को यज्ञ में स्वागत कर दिया और प्रजापति दक्ष का यज्ञ विध्वंस हो गया था।कश्मीर का इतिहास अत्यंत गौरवशाली था लेकिन धीरे-धीरे उसे वामपंथी और कांग्रेसी इतिहासकारों ने विदेशी साजिश के तहत धूल धूल सहित कर दिया और यहां तक कह दिया कि परम पवित्र दिव्य अमरनाथ की गुफा एक मुस्लिम गडरिया खोजी थी जो पूरी तरह झूठी बात है जब पांडव लोग हिमालय पर चढ़ते हुए स्वर्गारोहण किए थे उस समय दिया गुफा विद्यमान थी या ज्ञान विज्ञान कला कौशल धर्म-दर्शन और वेद पुराण स्मृतियों का मुख्य ‌ केंद्र यहीं पर था यहीं पर अर्जुन दिग्विजय करते हुए आए थे और यहां से आगे उत्तरी ध्रुव तक गए थे

कल्हण के राजतरंगिणी से ज्ञात होता है। अशोक के पुत्र जालौक को कश्मीर में हिन्दू सभ्यता के प्रसार का श्रेय है ‌‌। कनिष्क के समय  कश्मीर कुण्डल वन के नाम से जाना गया। कश्मीर में कार्कोटवंश उत्पलवंश लोहारवंश के शासकों ने शासन किया। कार्कोट वंश में क्रमशः दुर्लभवर्धन चन्द्रापीड तारापीठ मुक्तापीड । सबसे प्रतापीय ललितादित्य हुआ कश्मीर को सजाने एवं संवारने का कार्य अधिक किया । ‌ उसने कश्मीर की सीमाओं को ईरान उत्तराखंड और तिब्बत तक पहुंचा दिया था और अब देश के आक्रमण का भीषण प्रतिकार किया थाकश्मीर में सूर्य का मार्तण्ड मंदिर उसी के समय में बना । उसके बाद जयपीड शासक हुआ। उत्पलवंश में अवन्तिवर्मन शंकरवर्मन गोपाल वर्मन  इसी के समय यश्कर नामक व्यक्ति ने शासन सम्हाला उसके बाद रानी दिद्दा का शासन हुआ जो दुराचारी महिला थी ।

जम्मू और कश्मीर के फल फूल जड़ी बूटियां केसर और शिल्प तथा कला अद्भुत हैं और यहां के निवासी भी गोरे चिट्टे ‌ लंबे कद के होते हैं‌ यहां की झीलों में बिहार करना अपने आप में नंदनकानन और स्वर्ग में बिहार करने जैसा है और बाग बगीचे सुगंधित उद्यान अपने आप में एक प्रतिमान है कला साहित्य त्याग तपस्या हर क्षेत्र में कश्मीर पहले सिरमौर और भारत का मुकुट था
 लोहार वंश में संग्राम राज  अनंत कलश  व हर्ष उच्छल सुस्सल भिक्षाक्षर जय सिंह राजतरंगिणी का विवरण जयसिंह के शासन के साथ समाप्त हो जाता है। कश्मीर में 1339 ई में  मुस्लिम शासन की स्थापना होती है। इसके बाद कई कालखंड आए और धीरे-धीरे मुस्लिम जनसंख्या बढ़ती गई और हिंदू अल्पसंख्यक हो गए लेकिन 200 वर्षों के बाद कश्मीर में फिर से सनातनी धर्म का शासन हो गया जो 1947 तक रहा ‌ एक बार फिर से महान सेवा नायक हरि सिंह नलवा ने इसकी सीमाओं को चीन तक फैला दिया था।और महाराजा हरी सिंह के साथ समाप्त हुआ यद्यपि इसके बाद भी वहां पर राजे रजवाड़े बचे हैं ।सम्राट ललितादित्य के बाद से ही यहां पर मुस्लिम घुसपैठ शुरू हुई और आज वहां 99% मुसलमान है।  नेहरू के चलते कश्मीर आज पूरी तरह से मुस्लिम राज्य बन चुका है जिसको फिर से कश्मीरी सनातनी लोगों से बसाने का प्रयास जारी है‌ राजनीति कुर्सी और मुस्लिम देशों की‌ खिचड़ी के चलते कश्मीर आज अधर में झूल रहा है‌ देखना है कब इसको अगले ललितादित्य या हरि सिंह नलवा प्राप्त होते हैं