Friday, 24 April 2026

अर्जुन और कर्ण दोनों में कौन महान था

अर्जुन और कर्ण दोनों में कौन महान था



-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 

मैं बिल्कुल निष्पक्ष और बिल्कुल सही-सही तथ्य रख रहा हूं मेरे करना आपका काम है की महानतम योद्धा अर्जुन थे या कर्ण था 

पहली बात महानतम व्यक्ति के लिए शांत रहना उत्तेजित न होना और अपनी शक्ति का सही प्रयोग करना चाहिए यह अर्जुन में पूरी तरह से था जबकि कारण में इसका अभाव था वह बहुत हठी दुराग्रही एवं स्वयं को महान समझने वाला व्यक्ति था ‌ जो एक चपरासी होकर कलेक्टर की कुर्सी जबरदस्ती हासिल करना चाहता था वह अभी बिना परीक्षा उत्तीर्ण किए हुए 

यदि अस्त्र शस्त्रों की तुलना किया जाए तो भी अर्जुन करण से बहुत आगे थे सभी दिव्यास्त्र को छोड़ दिया जाए तो अकेले पाशुपत अस्त्र है संपूर्ण सृष्टि के विनाश करने के लिए काफी था करण ने अपने समस्त विनाशकारी अस्त्र-शस्त्रों का प्रयोग कर दिया था लेकिन अर्जुन सक्षम होने पर भी पाशुपत अस्त्र का प्रयोग नहीं किया अन्यथा कारण तुरंत समाप्त हो गया होता।

करण में दया और क्षमता तथा मानव गुना का पूर्ण अभाव था एक महान योद्धा होते हुए भी और दानवीर होते हुए भी उसके यह अवगुण उसको साधारण श्रेणी में खड़ा कर देते हैं लेकिन जो लोग कर्ण की तरह हैं रावण की तरह हैं कंस दुर्योधन जरासंध और कालयवन ‌ जैसे हैं वह लोग हमेशा कारण को बढ़ा चढ़ा कर प्रस्तुत करते हैं जैसे एक मदिरा पीने वाला हमेशा मदिरा को सर्वश्रेष्ठ सिद्ध करता है।

करण के पास जन्म जात अवैध कवच और कुंडल था उसको दान करने के बदले उसने अमोघ वासवी शक्ति इंद्र से मांग लिया जिससे उसकी दानवीरता पर प्रश्न चिन्ह लग गया यदि उसने यह शक्ति ठुकरा दी होती तो निश्चित रूप से उसकी महानता सिद्ध होती‌ दान करते समय भी अर्जुन को महान शत्रु और प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखना और करने की शक्ति प्राप्त करना कहीं से भी उचित और महान नहीं कहा जा सकता है। 

यदि मूल महाभारत को अध्ययन करेंगे तो आपको प्राप्त होगा कि दुर्योधन और शकुनि तथा दुशासन की सभी छल कपट विश्वास घाट की योजनाओं में कर्ण सम्मिलित था‌ चाहे अज्ञातवास हो चाहे उनका जलाकर मारने वाली स्थिति हो या वन में जाकर पांडवों की दुर्दशा देखना हो या फिर दुर्वासा को पांडव लोगों के यहां भेज कर उनको श्राप दिलाना हो या विराटनगर में युद्ध करना हो हर जगह कर्ण उपस्थित था यह दुआ चाहता तो बलराम की तरह अलग भी रह सकता था कम से कम इस अधर्म के युद्ध में तो उसे ऐसा ही करना चाहिए था।

अंग राज कर्ण ने ‌ राजकुमारों की हस्तिनापुर में द्रोणाचार्य द्वारा ली जा रही अस्त्र-शस्त्र परीक्षा में बिना किसी पात्रता और प्रवेश पत्र के जबरदस्ती घुसकर वातावरण में प्रदूषण भरकर तनाव पैदा कर दिया यह तो ऐसा ही दृश्य था कि बिना सिविल सेवा की परीक्षा दिए जबरदस्त की उसके साक्षात्कार में घुस जाना और यह कहना कि मैं इसके सर्वथा योग्य हूं ऐसा ही होता है इतना ही नहीं सारी चेष्टा करके भी वह संध्या काल तक अर्जुन को परास्त नहीं कर पाया था। 

कारण यदि चाहता तो वारणावत में किसी के द्वारा युधिष्ठिर को सूचना देकर उन्हें बचा सकता था जबकि वह जानता था कि पांडव उसके सगे भाई हैं और माता कुंती उसकी सगी मां है फिर भी उसने बढ़ाने का कोई प्रयास नहीं किया ‌ इसी तरह उसने भरी सभा में कल वधू द्रौपदी की रक्षा का प्रयास किस लिए नहीं किया क्योंकि स्वयंवर में वह द्रोपदी का वर्णन नहीं कर पाया था इतने निम्न और घटिया स्तर के व्यक्ति को अर्जुन से तुलना करना पूरी तरह मूर्खता है 

अर्जुन की महानता वर्णन से परे है जब इंद्रलोक में गए तो संपूर्ण ब्रह्मांड की सर्वश्रेष्ठ सुंदरी जिसके लिए बड़े-बड़े ब्रह्म ऋषि लालायित रहते हैं उसे उर्वशी को अर्जुन ने तत्काल ही ठुकरा कर एक ब्रह्मांड का कीर्तिमान स्थापित किया जो कोई सोच भी नहीं सकता इतना ही नहीं उत्तरा की शिक्षा देने वाले अर्जुन से जब कृतज्ञता के रूप में विराट राज ने उत्तर का विवाह अर्जुन से करने को कहा तो अर्जुन स्तब्ध रह गए उन्होंने कहा यह तो मेरी बेटी के समान है और ऐसा करने पर हमेशा के लिए गुरु शिष्य परंपरा कलंकित हो जाएगी यह आज के उन शिक्षक गुरु लोगों के लिए एक सर्वश्रेष्ठ शिक्षा है जो अपने बेटी समान छात्राओं से कुकर्म करते हैं इसके बाद अर्जुन की महानता पर कोई? नहीं रह जाता।‌ उत्तर पूरे विश्व की सर्वश्रेष्ठ सुंदरी योग्य कन्या थी और उर्वशी ने तो बड़े-बड़े ब्रह्म ऋषि और ऋषि मुनि सुर नर मुनि साहब की तपस्या भंग ही कर दिया था‌।

करण को अच्छी तरह मालूम था कि द्रौपदी पांडव अभिमन्यु माता कुंती सब उसके अपने हैं जबकि पांडव पक्ष को अज्ञात नहीं था अन्यथा वे कर्ण को राजा बनाकर स्वयं जंगल में चले गए होते ‌ करण के सामने ही धर्म युद्ध में 16 वर्ष के अभिमन्यु का निर्माण हत्याकांड हुआ और करण ने ही इसमें सबसे प्रमुख भूमिका निभाई अभिमन्यु का कवच कोई नहीं काट सकता था जिसे कर्ण ने काटा था फिर वह कैसे महान हो सकता था 

अर्जुन और पांडव इतने महान थे कि जैसे ही उनको पता लगा कि कर्ण उनके बड़े भाई थे उनके दुख क्रोध और शोक की कोई सीमा ही नहीं रही और युधिष्ठिर ने तो माता कुंती को श्राप दे दिया की है मां आज से स्त्रियों को कोई भी बात उनके हृदय में पच नहीं पाएगी और उन्होंने पूरे सम्मान से कर्ण का अंतिम संस्कार करके उसको जलांजलि दिया था आप स्वयं समझ सकते हैं कि कौन अधिक महान था।

कर्ण ने धोखे और छल कपट से स्वयं भगवान परशुराम से अस्त्र-शस्त्र विद्या सीखी और स्वयं को ब्राह्मण बताया‌ बाद में जब उसका भांडा फूटा तो भगवान परशुराम के क्रोध की कोई सीमा न रही गुरु से छल कपट और झूठ बोलने से बड़ा पाप दुनिया में कोई नहीं हो सकता यह कारण की महानता पर प्रश्न चिन्ह लगता है इसके अतिरिक्त गाय का का वध और ब्राह्मण का श्राप उसको मिला जबकि अर्जुन के साथ ऐसा कुछ नहीं था।‌ अर्जुन नेटवर्क ब्राह्मण पुत्र और गुरु सांदीपनी के लिए साक्षात यमलोक में जाकर यमराज से युद्ध किया और उन्हें परास्त किया था अर्जुन ने स्वयं सृष्टि के आदि देव भगवान शिव को भी युद्ध करके संतुष्ट कर दिया था जबकि कर्ण के साथ ऐसा कुछ नहीं था।

कारण यह जानता था कि भगवान श्री कृष्ण साक्षात भगवान श्री हरि विष्णु के अवतार हैं लेकिन उनके भी शिक्षा का कारण के अभिमानी और मूर्ख हृदय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा वह केवल अंग्रेज बना दिए जाने की कृतज्ञता के कारण पूरी तरह से अधर्मी और अत्याचारी दुर्योधन के साथ बना रहा जबकि कृष्ण ने उसको यह भी बता दिया कि तुम पांडवों के सबसे बड़े भाई हो और कुंती तुम्हारी सगी मां है और यह भी कहा कि कम से कम तुम युद्ध से अलग हो जाओ तो यह संपूर्ण धरती का विनाश करने वाला युद्ध रुक जाएगा परंतु उसने स्वयं भगवान की भी एक नहीं सुनी एक समय तो उसने भगवान श्री कृष्ण से लड़ाई करके उनका चक्र ही जीने का प्रयास किया था इतना दुस्साहसी व्यक्ति महान कैसे हो सकता है।

कर्ण के सामने महाभारत के सारे अधर्म अत्याचार अन्याय घटित हुई लेकिन कभी भी वह धर्म न्याय और सच्चाई के पक्ष में नहीं दिखा‌‌। अर्जुन से प्रतिस्पर्धा करना ठीक था लेकिन उसे अर्जुन के अन्य महान गुणों को भी अपनाना चाहिए था उसकी सारी शक्तियां उनके कवच कुंडल और दिव्यास्त्रों में छिपी हुई थी ‌ जबकि अर्जुन ने अकेले ही दिग्विजय के समय सारी धरती को जीत लिया था। 

अब सीधे-सीधे कारण और अर्जुन की युद्ध संबंधी महानता और अस्त्र-शस्त्र कुशलता पर आ जाते हैं जब त्रिगर्तराज सुशर्मा ने दुर्योधन को बुरी तरह पराजित करके राशियों में बांधकर अपमानित किया तब कर्ण पराजित होकर भाग आया जो काम करने सहित सारी कौरव सुना नहीं कर पाई उसी को अर्जुन ने अकेले बुरी तरह हार कर दुर्योधन सहित सारी कौरव सी को मुक्त किया था अब आप खुद अनुमान लगा लीजिए कि कौन परम अतिरथी योद्धा था।

करण को अर्जुन को करने और हारने के अनेक मौके मिले लेकिन वह कभी भी सफल नहीं हो पाया जबकि उसे समय तक उसके पास सारे दिव्यास्त्र के साथ इंद्र की दी हुई अमोघ शक्ति भी थी और कवच कुंडल भी था जब रंगभूम में कौरव पांडवों की शस्त्र परीक्षा हो रही थी तो कारण जबरदस्ती अर्जुन से युद्ध नियमों को तक पर रखकर किया फिर भी अर्जुन को हरा नहीं पाया 

इसी तरह जब विराटनगर में विराट कौरव सेना महान अतिरथी योद्धाओं द्रोणाचार्य भीष्म पितामह कृपाचार्य कारण दुर्योधन अश्वत्थामा दुशासन के साथ गई थी तब अकेले ही अर्जुन ने संपूर्ण कौरव सी को हराकर विश्व कीर्तिमान स्थापित किया था चाहते तो सबको मार कर उसी दिन संपूर्ण राज्य पथ ले सकते थे लेकिन दया और करुणा से भरे अर्जुन ने छोड़ दिया और उसे दिन एक नहीं दो दो बार कारण को अर्जुन ने बुरी तरह से घायल करके छोड़ दिया चाहते तो उसका उसी दिन अंत कर सकते थे यदि कारण उनकी जगह होता तो अभिमन्यु की तरह अर्जुन को मार देता इससे स्पष्ट है कि करण अर्जुन का वध करने में सक्षम नहीं था 

महाभारत युद्ध में भीष्म पितामह के पराजय के बाद कारण लगातार 7 दिन तक कौरव सेवा में अर्जुन से लड़ता रहा लेकिन अर्जुन को मार नहीं पाया इस बीच अर्जुन ने उसे कई बार पराजित करके भगा दिया था कारण के जीवित रहते ही दुर्योधन के 100 भाई दुशासन शकुनी सहित द्रोणाचार्य और सभी महान योद्धा मारे गए वह किसी को बचा नहीं पाया जब किसी भी तरह वह घटोत्कच से युद्ध में नहीं जीत सका तब उसने अमोघ शक्ति से उसका वध कर दिया इस प्रकार कारण महान नहीं था बल्कि उसके दिव्य अस्त्र-शस्त्र महान थे चक्रव्यूह निर्माण के दिन अभिमन्यु ने उसको दो बार परास्त किया था और उसके देखते-देखते दुर्योधन के पुत्र लक्ष्मण का वध कर दिया था कर्ण कुछ भी नहीं कर सकता था जबकि अर्जुन के सामने उनके एक भी योद्धा का वध कोई भी महारथी योद्धा नहीं कर पाया था सात्यकि को उन्होंने मृत्यु के मुंह से बचाया था।

वास्तव में लोग फिल्म टीवी चैनल सोशल मीडिया और मीडिया तथा धारावाहिक देखकर कारण को बहुत महान समझने की भूल करते हैं इसीलिए उनका यह सोचना है कि कर्ण बहुत महान योद्धा था जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं था ‌ कुछ महा मूर्ख विद्वान तो यहां तक कहते हैं कि अर्जुन ने हत्या कर्ण का  वध किया था जो पूरी तरह से झूठ है‌ मूल महाभारत पढ़ कर देखो जब कर्ण का पहिया रस में धंस गया तब दयालु अर्जुन ने अपना गांडू धनुष रख दिया और श्री कृष्ण के बहुत समझाने पर ही कारण से लड़ने को तैयार हुए और कारण रस का पहिया निकलते हुए भी अर्जुन से लगातार युद्ध करता रहा इस क्रम में उसने ब्रह्मास्त्र सहित अनेक दिव्य अस्त्र शस्त्रों का प्रयोग किया जिसे अर्जुन ने काटकर उसको दबा दिया और जी अंजलि अस्त्र का प्रयोग अर्जुन ने रौद्रास्त्र भर कर किया था उसे अस्त्र का कर्ण के पास कोई भी उत्तर नहीं था इसलिए वह मारा गया।‌ करण इतना बड़ा मूर्ख और अभिमानी था कि रंगभूमि में केवल अर्जुन को पराजित करने के लिए उसने भार्गव अस्त्र का प्रयोग करना चाहा था जो सूर्यास्त होने के कारण नहीं कर पाया यदि अर्जुन ने पाशुपत अस्त्र उठा लिया होता तो कर्ण का वही वध हो गया होता। 

‌‌ अर्जुन के अलावा सात्यकी कर्ण को चार बार अभिमन्यु ने चार बार सुशर्मा ने एक बार भीम ने चार बार और प्रद्युम्न ने एक बार हराया था ‌ और सबसे बड़ी बात है कि हारने के बाद कारण हर बार युद्ध भूमि छोड़कर भाग जाता था इस प्रकार कर्ण के अजेय योद्धा होने का भ्रम अपने आप टूट जाता है वैसे कारण को बेचारा बनाकर अनुचित लाभ लेने के लिए फिल्म और धारावाहिक वालों ने उसको इतना बड़ा चढ़ा कर दिखा दिया है की असली सच ही छप गया है उसे तो झूठ-मूठ में पहाड़ पर चढ़कर इंद्र पर आक्रमण करके इंद्र को परास्त होते हुए दिखाया गया है जो पूरी तरह से सत्य और अनुचित है। वास्तव में कर्ण प्राचीन काल में एक राक्षस था जिसका नाम दंभोद्भव था उसने ब्रह्मा जी से कठिन वरदान प्राप्त किया जिसके कारण भगवान विष्णु को चार बार अवतार लेना पड़ा जिसमें नर नारायण और कृष्ण अर्जुन भी सम्मिलित हैं

उपर्युक्त बिल्कुल सही तथ्य मूल महाभारत से लिए गए हैं अब आप लोग यह चुनने के लिए स्वतंत्र हैं की कर्ण एक महानतम योद्धा था या परमवीर अर्जुन अपने समय के सबसे महान योद्धा थे ‌ एक बात और है कि अर्जुन के पास भगवान शिव का पाशुपत अस्त्र था जो तीनों लोकों को नष्ट कर सकता था परंतु कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अर्जुन ने उसका प्रयोग नहीं किया क्योंकि वह धरती और मानवता को नष्ट नहीं करना चाहते थे ‌ जबकि कारण बहुत ही क्रोधी अहंकार पूर्ण और उतावला होने वाला योद्धा था जिसे हर प्रकार के उपलब्ध है दिव्या स्टारों का प्रयोग कर लिया था -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

धरती पर पतिव्रता धर्म का प्रतिमान स्थापित करने वाली भगवती सीता मां का जन्मदिन (24 अप्रैल वैशाख शुक्ल पक्ष नवमी)-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

धरती पर पतिव्रता धर्म का प्रतिमान स्थापित करने वाली भगवती सीता मां का जन्मदिन (24 अप्रैल वैशाख शुक्ल पक्ष नवमी)-,



डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 

अपने पति का अनुसरण करने के लिए माता और पिता दोनों के राजपाट को छोड़कर जंगल जंगल भटकने वाली और हर कष्ट सहन करने वाली जीवन भर दुख सहन करने वाली भगवती सीता मां का वैशाख महीने की नवमी की तिथि को जयंती मनाई जाती है । त्रेता युग में जब महाराजा जनक के राज में  चारों तरफ महान अकाल और सूखा पड़ा था तब विद्वान और ज्योतिषी लोगों की सलाह पर राजा जनक ने अपनी पत्नी के साथ सोने का हल खेत में चलाया था और वह हल एक घड़े से टकरा गया था।

 जिसको  निकालने पर घड़े से एक अद्भुत अलौकिक कन्या रत्न की प्राप्ति हुई और हल की फॉर से बने सीतों के कारण उनका नाम सीता रखा गया‌ जो बाद में जनक नंदिनी मिथिलेश नंदिनी वैदेही जैसे अनगिनत नामों से विख्यात हुई उनके जन्म लेते ही अर्थात घड़े के मिलते ही आसमान में घनघोर घटाएं छा गई और मूसलाधार वर्षा से सारा अकाल और सूखा मिट गया था।‌ और धरती पर हर दिशा में हरियाली छा गई थी सबसे अद्भुत बातें है कि सर्वप्रथम भगवान श्री राम चैत्र माह की नवमी को पैदा हुए उसके बाद हनुमान जी चैत्र माह की पूर्णिमा और फिर सीता मां भी नवमी तिथि को लेकिन वैशाख माह में पैदा हुई इस प्रकार वह जन्म में भी भगवान श्री राम से छोटी थी।

भगवती सीता के पिता महाराज जनक के भाई सीरध्वज के तीन और पुत्रियां थी । जिनके नाम मांडवी उर्मिला श्रुति कीर्ति थे बचपन में ही सीता जी ने भगवान शिव के उसे प्रचंड धनुष को बगीचे से उठाकर पूजा गृह में रख दिया था जिसको रावण जैसा तथा कथित तीनों लोकों का विजेता भी उठा नहीं पाया था।‌ यह देखकर इस अद्भुत असाधारण करने के लिए जनक जी ने प्रतिज्ञा किया कि इसका विवाह उसी से होगा जो यह धनुष उठाकर उसकी प्रत्यंचा चढ़ा देगा 

सीता जी के बाद होने पर उनका स्वयंवर आयोजित किया गया जिसमें देव दनुज किन्नर नर राक्षस सहित तीनों लोक के महान वीर योद्धा उपस्थित हुए रावण और बाणासुर भी इसमें सम्मिलित थे।‌ लेकिन तीनों लोकों में कोई उसे धनुष को हिला भी नहीं पाया तब भगवान श्री राम जो साक्षात श्री हरि विष्णु के अवतार थे ने धनुष के प्रत्यंचा चढ़कर उसे तोड़ दिया परशुराम का गुरूर चूर-चूर किया और देवी सीता जी के साथ अयोध्या आए इसी क्रम में मांडवी का भरत से ‌ उर्मिला का लक्ष्मण से और श्रुति कीर्ति का शत्रुघ्न से विवाह हुआ।

विवाह के बाद कुछ वर्ष आनंद से बीतने के बाद जब भगवान श्री राम को वनवास हुआ तो भगवती सीता ने राजपाट ससुराल और मायका सब छोड़ और भगवान श्री राम और लक्ष्मण के साथ वन को निकल गई ‌ वहां पर निषाद राज केवट और चित्रकूट में महासती अनसूया और अत्रि ऋषि से मिलकर गहन दंडक वन से होते हुए पंचवटी में चली गई जहां पर हम तेजस्वी मारकंडे और अगस्त ऋषि से उन लोगों को दिशा निर्देश मिले।

कालांतर में खरदूषण भीम के वध और सूर्पनखा की नाक काटने पर ‌ भीषण संग्राम में खरदूषण उसकी सेवा मारी गई तब रावण मरीज की सहायता से साधुवेश धारण कर सीता जी का हरण कर लिया अपार कष्ट और परेशानी जय कर भी माता-पिता अशोक वाटिका में अपने अटल पतिव्रत धर्म पर अधिग रही ‌ और तीनों लोगों के विजेता रावण उनकी सेवा आती कार्य कुंभकरण मेघनाथ के मारे जाने पर लंका विजय के पश्चात अग्नि परीक्षा में अपनी छाया रूपी सीता को जलाकर असली सीता के रूप में श्री राम लक्ष्मण वानर सेवा के साथ निषाद राज से मिलते हुए अयोध्या लौटकर पटरानी बनी 

कालांतर में एक जनता के परिवार के  प्रवाद के कारण भगवान श्री राम की मर्यादा को समझते हुए उन्होंने इससे अच्छा से गर्भवती होने के बाद भी खुद को जंगल में छोड़ने को कहा और ब्रह्म ऋषि वाल्मीकि के आश्रम में रही जहां उनके लव और कुश नाम के दो परम अतिरथी पुत्र पैदा हुए‌ जिन्हें भगवती सीता ने इतना वीर बनाया कि तीनों लोकों की विजेता सी और रावण को मारने वाली राम की सेवा भारत लक्ष्मण शास्त्रों में हनुमान अंगद सुग्रीव विभीषण सभी को इन्होंने परास्त कर दिया 

कालांतर में भगवती सीता अयोध्या आई और भगवान श्री राम ने उनको सादर पत्नी रूप में स्वीकार किया लेकिन अपना बैकुंठ जाने का समय पूरा हुआ जानकर धरती से उत्पन्न सीता माता धरती में समा गई और बैकुंठ में अपना आसन लक्ष्मी के रूप में ग्रहण किया। इसके बाद भगवान श्री राम भी लव और पुष्प को सारा राज पाठ सौंप कर और अमेरिका यूरोप ऑस्ट्रेलिया अफ्रीका लक्ष्मण शत्रुघ्न के पुत्रों को बताकर सारी जनता के साथ सर्दियों में समाहित होकर बैकुंठ लोक चले गए 

भगवती सीता का चरित्र इतना पवित्र और विराट है जिसको लिखने के लिए एक महाकाव्य भी काम हो जाएगा इसलिए वह अनुसूया नर्मदा सती लक्ष्मी और सरस्वती ‌ उर्मिला सुलोचना के समान महा सती मानी जाती हैं ‌ उनका चरित्र रखना केवल अनुकरणीय है बल्कि प्रातः स्मरणीय भी है‌ उनके शराब से शापित होने के कारण अयोध्यावासी कभी विकास नहीं कर पाए और अभिशप्त अयोध्या भी फिर से वह गौरव नहीं प्राप्त कर पाई अयोध्या की रक्षा और उसे पूर्ण बीना से बचने के लिए अमर योद्धा हनुमान जी को नियुक्त करके सब अवतारी लोग अपने-अपने धाम चले गए 

आज के लोग धारावाहिक और चलचित्र देखकर तथा विभिन्न प्रकार के सनातन द्रोही लोगों की रचनाओं को पढ़कर अपने धर्म और देवी देवताओं तथा अवतारी पुरुषों पर जो टिप्पणी करते हैं वह न केवल मोर खाता पूर्ण है बल्कि धर्म विरुद्ध है और विनाश करने वाली है जैसे कुछ लोग भगवान श्री कृष्ण को 1600 रानियां का होना बताते हैं लेकिन उनका मूल पुस्तक में पढ़ने से या भ्रम होता है जब नरकासुर के द्वारा त्याग दी गई रानियां को अपनाने का साहस किसी में नहीं हुआ तब उन्होंने अपने नगर में उन सभी को सम्मान पूर्वक रखा था पहले श्री कृष्ण की तरह एक अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर फिर उसे पर टिकट टिप्पणी करना चाहिए 

इसी तरह भगवान श्री राम पर टीका टिप्पणी करने वाले को पहले भगवान श्री राम बनकर दिखाना चाहिए जो एक बार से ही प्रशांत हिंद अटलांटिक उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव महासागर को सुखा सकते थे जिन्होंने जयंत को एक ही तीर मारा जिसको बचाने पूरे तीनों लोकों में कोई आगे नहीं आया कुंभकरण और रावण जैसे तीनों लोगों के  विजेता को उन्होंने खेल-खेल में मार गिराया। इसीलिए लाखों करोड़ों वर्ष बीत जाने पर भी भगवती सीता और उन जैसे अमर और पवित्र चरित्र के लोग आज भी ‌ अनंत कोटि सूर्य की भांति तीनों लोकों में चमक रहे हैं।

Thursday, 23 April 2026

देश के सभी ‌ दलों चाटुकार उनके के समर्थक लोगों और उनके चापलूस चाटुकार दलाल चमचे मक्खनबाज और 420 ‌ लोगों को एक महीने का मौका देता हूं कि 1947 से एक भी ऐसा प्रधानमंत्री राष्ट्रपति देश के सामने लेकर आए और अपने पार्टी की वास्तविकता दिखाएं-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

जिसे वास्तव में अपने को भारतीय होने का अभिमान हो और जो मन वचन कर्म से देश के लिए समर्पित हो 


जो प्राचीन भारत के गौरव को फिर से स्थापित कर सात महाद्वीप और पांच महासागरों पर सतयुग द्वापर त्रेता की तरह भारत का झंडा लहरा सके 

जो देश में हर प्रकार के मदिरापान नशा और बुरी कृतियों को समाप्त करके देशवासियों में स्वाभिमान और देश प्रेम भर सके 

जिसे देखकर वास्तव में देश की सारी जनता गर्व करें और जो 22 करोड़ विदेशी घुसपैठियों के रूप में भारत में घुस चुके आतंकी रोहिंग्या विदेशी एजेंट बांग्लादेशी पाकिस्तान और गद्दारों को देश से बाहर उनके मूल स्थान पर भेज सके 

जो यूरोप अमेरिका का एजेंट और अरब देशों की कठपुतली ना हो और केवल सनातन धर्म और स्वदेशी का विकास करें 

जिसके दो रूप हाथी के दांत की तरह ना हो और जो अपने चुनावी घोषणा पत्र को वास्तव में लागू करें 


जो ममता बनर्जी लालू मुलायम अखिलेश केजरीवाल तथा इस तरह के अन्य सनातन विरोधी देश विरोधी लोगों को जेल में डाल सके 


जिसे पाकिस्तान के स्वादिष्ट रस भरे आम पसंद ना हो और जो मुस्लिम देशों के हाथों में ना खेलते हो जो ट्रंप की दहाड़ सुनकर डर ना जाए 


जो भारत को सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति खेल शक्ति सैन्य शक्ति अंतरिक्ष शक्ति और सबसे बड़ा देश बना सके 

देश के सभी ‌ दलों चाटुकार  उनके के समर्थक लोगों और उनके चापलूस चाटुकार दलाल चमचे मक्खनबाज और 420 ‌ लोगों को एक महीने का मौका देता हूं कि 1947 से एक भी ऐसा प्रधानमंत्री राष्ट्रपति देश के सामने लेकर आए और अपने पार्टी की वास्तविकता दिखाएं-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

Wednesday, 22 April 2026

आखिर क्यों प्रचंड और विकराल हो रही है गर्मी

आखिर क्यों प्रचंड और विकराल हो रही है गर्मी -
डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 

भारत सहित संपूर्ण दुनिया में गर्मी की तीव्रता और उसकी अवधि दोनों लगातार बढ़ रही है जिस पर बहुत गहराई से विचार मंथन करने के बाद निम्नलिखित तथ्य सामने आते हैं -

सबसे पहला कारण है लगातार धरती पर हरित क्षेत्र का ‌ हरियाली पेड़ पौधों और वनस्पतियों का कम होते जाना और सीमेंट तथा कंक्रीट  ईंट पत्थर के जंगलों का लगातार बढ़ते चला जाना है ‌‌ इसके कारण धरती सूर्य की गर्मी को शक कर धडधकने लगती है जैसा की पथरी इलाकों और सीमेंट की सड़क पर आपने देखा होगा।

इन सब कारणों से जहां धरती पर ऑक्सीजन की कमी हो रही है वहीं पर वायु गुणवत्ता सूचकांक लगातार खराब होता जा रहा है और पराबैंगनी किरणों की तीव्रता भी बहुत तेजी से बढ़ रही है इसलिए गर्मी जलाने और झुलसाने वाली बन गई है ।

जितना ही अधिक धरती की सतह पर सीमेंट कंक्रीट और ईंट पत्थर बढ़ते चले जाएंगे उतना ही गर्मी और ऊष्मा का परावर्तन और अवशोषण बढ़ेगा और यह एक कच्चे मकान और पक्के मकान में रहकर आसानी से देखा जा सकता है
[4/21, 6:05 PM] Dr  Dileep Kumar singh: लगातार गर्मी बढ़ने का दूसरा कारण लगातार सूखी पछुआ तेज हवाएं चलना और किसी भी विक्षोभ के जन्म न लेने का कारण है ‌ जिसके कारण गर्म हवाएं शुष्क जमीन और भट्ठी हुई धरती लगातार गर्म होती चली जाती है और इस समय भारत का 90% भूभाग आज की धरती बन गया है और अधिकांश भागों का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से लेकर 47 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया है जब ‌ लगातार आंधी तूफान और विक्षोभ का जन्म होता है तब तापमान नियंत्रित हो जाता है जो कि इस बार 15 अप्रैल से 25 अप्रैल तक बिल्कुल नहीं होना है‌ जिसके कारण पूरे देश में जम्मू कश्मीर हिमाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर भारत को छोड़कर हर जगह ताप लहर अर्थात लू चल रही हैं।

तीसरा प्रमुख कारण है सूर्य के सतह पर लगातार प्रचंड विस्फोट सौर कलंक और सौर ज्वालामुखी उत्पन्न होना जो सूर्य के चारों ओर लाखों किलोमीटर प्रति घंटे की गति से दौड़ती है और इनमें भयंकर विकिरण पैदा होता है जिससे कभी-कभी धरती पर रेडियो तरंग और संचार में बाधा आ जाती है इस समय सूर्य पर या प्रक्रिया चरम पर है जिससे गर्मी और भी भयंकर हो रही उत्तरी गोलार्ध में यह प्रक्रिया अप्रैल से जून तक और दक्षिणी गोलार्ध में नवंबर से जनवरी तक चलती है जहां सूर्य की किरणें प्रभावी होती हैं । इसके अलावा तेरी गोलार्ध में सूर्य का पृथ्वी के सीधे ऊपर आना भी भयंकर गर्मी का कारण बन जाता है।

लगातार प्रचंड गर्मी और तप लहर तथा ल बहने का चौथा कारण ‌ धरती पर लगातार बढ़ रहे उद्योग धंधे और कल कारखाने हैं जो धरती की सतह लगातार गर्म करते चले जा रहे हैं इसके कारण धरती पर गर्मी बढ़ती चली जा रही है ।

पांचवा कारण विराट संख्या में बढ़ रहे दो पहिया चार पहिया और अन्य प्रकार के चलने वाले वाहन ट्रेन हवाई जहाज रॉकेट और अंतरिक्ष यान से उत्पन्न गर्मी है आज से 100 साल पहले जिन सड़कों पर 10 या 20 वाहन दौड़ते थे आज वहां लाखों करोड़ों की संख्या में दिन-रात वहां ट्रेन हवाई जहाज जलयान चलते हुए भयानक गर्मी और प्रदूषण तथा जहरीली गैसें पैदा कर रहे हैं यदि आप कभी सड़क पर चलते हुए किसी बड़े ट्रक या बस या वहां के बगल से गुजरते हैं तो आपको खुद उसके गर्म हवा का झोंका अनुभव हुआ होगा ।

छठ कारण धरती पर लगातार हो रहे युद्ध और हथियारों का प्रयोग आतिशबाजी और पटाखा और इसके साथ-साथ इससे उत्पन्न गर्मी और ऊर्जा है इसमें भूमिगत परमाणु परीक्षण भी शामिल है यह सभी धरती को निरंतर गम करते चले जा रहे हैं ‌ तापमान उतना ही रहता है लेकिन खुले धूप और पेड़ के छाया में तापमान का 10 डिग्री सेल्सियस और कमरे में 5 डिग्री सेल्सियस का अंतर होता है यदि पहले की तरह आज भी धरती 95 प्रतिशत पेड़ पौधे हरियाली से आच्छादित हो जाए तो औसत तापमान अपने आप 10 डिग्री सेल्सियस कम हो जाएगा ।

सातवां कारण हर जगह फैल रहे वातानुलित यंत्र बड़े-बड़े सेट ग्रह बिजली के और गैस के चूल्हे और उसके साथ-साथ उपयोग की जाने वाली प्रसाधन सामग्री भी है जो लगातार जहरीली गैस और कार्बन डाइऑक्साइड तथा गर्मी छोड़ती रहती है ।

आठवां कारण अलादीन का प्रभाव है जो एक बहुत बड़े भूभाग पर होने वाली प्राकृतिक घटना है जिसके कारण समुद्र की सतह का तापमान अचानक बहुत बढ़ जाता है या भयंकर गर्मी और सुख पैदा करता है दुर्भाग्य से इस बार भारत अफ्रीका और अमेरिका के भूभाग अलनीनो से प्रभावित हो रहे हैं जिसके कारण गर्मी का बढ़ना और कम वर्षा का होना भी निश्चित है 

इसके अतिरिक्त और भी बहुत से कारण है जिसमें मोबाइल और अन्य टावरों की बढ़ाते हुए संख्या बैटरी का अधिक से अधिक प्रयोग प्रदूषण और गंदगी का लगातार बढ़ता धरती और आकाश तथा जल का लगातार प्रदूषित होते जाना आभूषण बनाने वाले दुकानों से जहरीला और गंदा पानी बह कर नदी नालों में मिल जाना जिनकी रासायनिक क्रिया से भीषण गर्मी पैदा होती है साथ-साथ कागजों पर ‌ और भाषणों में वृक्षारोपण और हरियाली इसके अन्य कारण है ‌ इसके कारण मनुष्य की प्रतिरोधक क्षमता लगातार कम होती चली जा रही है सीमेंट कंक्रीट और ईंट पत्थर धरती पर बढ़ते चले जाने के कारण धरती के जल सूखने की क्षमता भी कम हो जाती है और जल की कमी भयंकर गर्मी पैदा करती है संक्षेप में आधुनिक विज्ञान टेक्नोलॉजी और मानव सभ्यता वह हर काम कर रही है जिससे भयानक गर्मी लगातार बढ़ रही है जो समस्त सृष्टि के लिए एक भयंकर खतरा है।

Sunday, 19 April 2026

पूरे वर्ष भर दुनिया युद्ध हिंसा तनाव से जूझती रहेगी-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 7017713978

पूरे वर्ष भर दुनिया युद्ध हिंसा तनाव से जूझती रहेगी-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 7017713978

जनवरी 2026 और फिर मार्च 2026 में हमारे केंद्र के द्वारा ग्रह नक्षत्र ज्योतिष और पंचांग के आधार पर एवं रौद्र नामक संवत्सर के प्रभाव के विस्तृत विवेचना करते हुए संपूर्ण संसार की विवेचना की गई थी और कहा गया था कि पूरे वर्ष भर रूस चीन अमेरिका पहन के अंदर से मिली मार और नूरा कुश्ती करके अपना प्रभाव सारी दुनिया पर स्थापित कर लेंगे ‌ यह तीनों देश ऊपर से एक दूसरे का विरोधी होने का दिखावा करेंगे लेकिन अंदर से तीनों एक होंगे और पूरी दुनिया में युद्ध की आग भड़का कर अपने अस्त्र-शस्त्र और अन्य सामान बेचकर तेल सहित दुनिया के ऊर्जा संसाधनों पर नियंत्रण करेंगे और बिल्कुल वैसा ही हो रहा है 


पहले हमारे केंद्र के द्वारा यह भविष्यवाणी की गई थी कि अमेरिका इजरायल मिलकर ईरान पर विध्वंसक आक्रमण करेंगे जिसमें ईरान का भीषण नुकसान होगा चीन और रूस पहन के पीछे ईरान को अपने हथियार बेचकर प्रचुर धन संपत्ति अर्जित करेंगे और 10 अप्रैल के आसपास अमेरिका और ईरान की सलाह हो जाएगी जो अधिक दिन नहीं चलेगी 

इसी क्रम में अब अमेरिका रूस और चीन मिलकर ताइवान को लेकर पूरी दुनिया में युद्ध कब वातावरण पैदा करेंगे जिसमें अमेरिका अपने हथियार ताइवान को इस तरह बचकर अपार संपत्ति अर्जित करेगा जैसे ईरान से रूस और चीन ने अर्जित किया था और 20 अप्रैल के आसपास चीन ताइवान का संघर्ष शुरू होने की स्थिति बन सकती है जिसमें चीन ताइवान पर कब्जा करने की पूरी कोशिश करेगा लेकिन लगभग सफलता के कगार से उसे वापस लौटना पड़ेगा इस युद्ध में कोरिया और जापान तथा अन्य देश भी सम्मिलित होंगे ‌ यद्यपि विनाशकारी युद्ध टल जाएगा और विश्व युद्ध की कोई आशंका नहीं रहेगी।

इसके बाद ठंड पड़ चुका रूस और यूक्रेन का युद्ध फिर से प्रारंभ हो जाएगा और इस युद्ध में अमेरिका और चीन अपने हथियार और अन्य संसाधन बेचकर काफी धन संपत्ति अर्जित करेंगे यह तीनों देश मिलकर भारत को पाकिस्तान और अन्य देशों की सहायता से काफी नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे लेकिन ग्रह नक्षत्र और पंचांग की मजबूत स्थिति के कारण भारत को अधिक नुकसान नहीं होगा मैंने पहले भी कहा और फिर कह रहा हूं इन सभी परिस्थितियों में मोदी जी की स्थिति बहुत कमजोर हो जाएगी देश के अंदर और बाहर उनकी लोकप्रियता बहुत तेजी से घट जाएगी 

अप्रैल के अंतिम सप्ताह में खड़ी का युद्ध फिर से भड़क सकता है और इजरायल लेबनान के अंदर काफी जमीन कब्जा कर लेगा और वेस्ट बैंक तथा गोलन पहाड़ियों का काफी भूभाग कब्जा करके वहां से मूल निवासियों को भगा देगा इस प्रकार वर्ष के अंत में एक वृहत्तर इजरायल की नींव पड़ जाएगी।

यह सभी होना निश्चित है इसके अलावा पूरी दुनिया में तोड़फोड़ हिंसा आतंकवाद एवं दुर्घटनाओं तथा अपराध का बोलबाला रहेगा मैं और जून में भीषण प्राकृतिक आपदाएं और दुर्घटनाएं घटित होगी और दुनिया के समीकरण तेजी से बदल जाएंगे जो हाल लीबिया इराक का हुआ है उससे भी बुरा हाल ईरान का होगा और अंत में अरब देशों की सहायता से अमेरिका ईरान को कुचल देगा भूकंप ज्वालामुखी विस्फोट सुनामी लहरों और भौगोलिक परिवर्तन की बर्फीले तूफान और ग्लेशियरों से व्यापक विनाश होगा 

तेल और हथियारों की खरीद में दुनिया की आर्थिक शक्ति पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ेगा और सभी देशों को अपनी आधी आमदनी इन दोनों चीजों पर खत्म करनी पड़ेगी अनेक नए-नए हथियारों का आविष्कार होगा और द्रोण युद्ध से भी आगे की युद्ध की प्रणाली का प्रयोग किया जाएगा सभी अनुमान के विपरीत पाकिस्तान में विभाजन सफल नहीं होगा इस प्रकार दुनिया को अनेक आश्चर्यजनक स्थितियों से गुजरना पड़ेगा और सब का मूल ईरान चीन और अमेरिका ही होंगे आश्चर्यजनक रूप से कोरिया इन सभी प्रकरण पर बिल्कुल चुपचाप तमाशा देखता रहेगा

अक्षय तृतीया और भगवान परशुराम -डॉ दिलीप कुमार सिंह

अक्षय तृतीया और भगवान परशुराम -डॉ दिलीप कुमार सिंह 
अक्षय तृतीया एक ऐतिहासिक दिन है जो इस वर्ष 19/20 अप्रैल को मनाया जाएगा यह पर्व विशेष रूप से इस समय भगवान परशुराम से जुड़ गया है जो भगवान श्री हरि विष्णु के अवतार थे लेकिन अक्षय तृतीया कई महत्वपूर्ण महापुरुषों और कथाओं से ही जुड़ा हुआ है अक्षय तृतीया प्रति वर्ष वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन पड़ता है और इस वर्ष तिथि19/ 20 अप्रैल को पड़ रही है 

सबसे पहले तो अक्षय तृतीया पवित्र दिन है और यह आदि देव ऋषभदेव के साथ जुड़ा हुआ है जिन्होंने घनघोर तपस्या करके तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया था और पूरे 400 दिन के बाद गन्ने के रस से अपना व्रत पूरा किया था इसलिए जैन पंथ के लोग इसे बहुत ही उत्साह से मनाया करते हैं इसके अलावा इसी दिन भगवान श्री हरि विष्णु के अवतार भागवत परशुराम जी का जन्म धरती पर महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के यहां हुआ था जिनकी तपोस्थली जमदग्निपुरम जमैथा गांव में है उन्हीं के नाम से जौनपुर का नाम पहले जमदग्निपुरम रखा गया था जो कालांतर में जौनपुर हो गया।

अक्षय तृतीया के दिन ही द्रौपदी को भगवान सूर्य के द्वारा उनके कष्टों को देखते हुए अक्षय पात्र दिया गया था जो तब तक खाली नहीं होता था जब तक भोजन बनाने वाला उसको खा नहीं लेता था। दुर्योधन के कहने पर जब दुर्वासा ऋषि ‌ पांडवों के यहां गए तब उनको अक्षय पात्र द्वारा ही तृप्त किया गया था एक अन्य घटनाक्रम में सदानीरा सरस्वती नदी के किनारे आज के दिन ही ब्रह्म ऋषि वेद व्यास ने महाभारत की कथा भगवान गणेश जी को बोलकर लिखाना शुरू किया था भगवान वेदव्यास ‌ का ज्ञान सरस्वती नदी की तेज ध्वनि से भंग होता था विनय करने पर भी उन्होंने ध्यान नहीं दिया तब वेदव्यास जी के के श्राप के कारण ही सरस्वती जमीन के अंदर चली गई। और अदृश्य रूप में बह रहीहैं।

एक अन्य घटनाक्रम में इसी दिन परम पवित्र देव नदी गंगा मां का "धरती पर हुआ था जिससे समस्त भारत का और सगर पुत्रों का कल्याण हुआ था और ‌ देव नदी गंगा को पृथ्वी पर लाने वाले भागीरथ के नाम पर गंगा मां का नाम भागीरथी पड़ा सगर पुत्रों के नाम पर ही समुद्र का नाम सागर पड़ा। आज के दिन ही विप्र सुदामा अपने बाल सखा भगवान श्री कृष्ण से मिलने द्वारका गए थे और भगवान श्री कृष्ण ने सुदामा के पूरे गांव को ही द्वारका जैसा बना दिया था।‌ और उनको आदर्श मित्र मानकर उन्हें धन-धान्य से भर दिया था।

इस वर्ष वैसे तो अक्षय तृतीया दिन में 11 ‌ बजे के आसपास 19 अप्रैल को ही लग जाएगी जो 20 अप्रैल को 8:37 तक रहेगी लेकिन उदया तिथि के अनुसार 30 अप्रैल के दिन ही भगवान परशुराम जयंती और अक्षय तृतीया मनाया जाएगी ।

20 अप्रैल को सुबह से 9 बजे तक अक्षय तृतीया का पूजा पाठ व्रत अनुष्ठान करने का सर्वश्रेष्ठ समय है इस दिन भगवान विष्णु माता लक्ष्मी को प्रतिमा रखकर उसे लाल वस्त्र से ढक कर लाल या पीले रंग के कपड़े बिस हुए चौकी पर रखा जाता है और उनको सत्तू खीर चना मौसमी फल और मिठाई का भोग लगाया जाता है और पूजा करने के पहले प्रतिमा को गंगाजल से धोया जाता है। 

भगवान परशुराम किसी धर्म और जाति विशेष के नहीं थे यह संपूर्ण पृथ्वी पर फैले हुए पाप और अत्याचार और निरंकुश राजाओं को सही मार्ग पर लाने के लिए कटिबद्ध थे इसी क्रम में उन्हें अनेकों महायुद्ध करने पड़े इसलिए उन्होंने भयंकर तपस्या करके भगवान शिव से अद्वितीय फरसा और धनुष बाण प्राप्त किया जिसके सामने बड़े से बड़ा महान योद्धा भी पराजित हो जाता था ।

भगवान परशुराम अद्वितीय पितृ भक्त थे पिता के कहने पर उन्होंने माता रेणुका का गर्दन काट लिया लेकिन जब पिता ने वर मांगने को कहा तो उन्होंने वर मांग कर माता को जीवित कर दिया जिससे परम प्रसन्न हुए परशुराम जी को उनके पूज्य पिता जमदग्नि ऋषि ने इच्छा मृत्यु का वरदान दिया और परशुराम आज भी धरती पर विभीषण ब्रह्म ऋषि मार्कंडेय हनुमान जी आल्हा कृपाचार्य अश्वत्थामा और हनुमान जी के साथ अमर हैं 

अक्षय तृतीया पर बहुत से दुष्प्रचार किया जाते हैं जैसे कि इस दिन आभूषण खरीदना वाहन खरीदना मकान  ‌ कपड़ा जमीन संपत्ति इत्यादि खरीदना बहुत शुभ माना जाता है लेकिन मैं बहुत प्रामाणिक रूप से बता दूं कि इसका भगवान परशुराम या अक्षय तृतीया पर खरीदारी से कोई संबंध ही नहीं यह बड़े-बड़े धन कुबेर सेठ महाजन की मीडिया वालों की चाल है कि इसी दिन नई चीजों को खरीदना चाहिए जबकि ऐसा कुछ नहीं है ‌ इस दिन केवल नमक या अस्त्र-शस्त्र खरीदनाचाहिए। ऐसा ही जनप्रतवाद और झूठा समाचार धनतेरस के दिन फैलाया जाता है जहां वैद्यनाथ धनवंतरी से खरीदारी से कोई संबंध ही नहीं है इसलिए आप चाहे जो भी खरीदारी करें या निर्माण करें उसका ‌  अक्षय तृतीय से कुछ भी लेना देना नहीं है विज्ञापन और टीवी तथा रेडियो के चक्कर में पढ़कर अपने पैसे बर्बाद करने का कोई अर्थ नहीं है ।

भगवान परशुराम का बड़े-बड़े परम वीरों से युद्ध हुआ जिसमें सहस्त्रार्जुन को उन्होंने मार कर  21 बार उसके वंश का विनाश किया। लेकिन सनातन धर्म को तोड़ने वाले लोगों ने इसे यह कह कर प्रसारित किया कि उन्होंने 21 बार धरती से सभी क्षत्रियों का विनाश कर दिया था जो कि बिल्कुल झूठ है नहीं तो उन्हीं के समय में राम लक्ष्मण और राजा दशरथ जनक ‌ और स्वयंवर में आए हुए सैकड़ो क्षत्रिय य राजा और अन्य लोग कहां से होते । उन्होंने रावण को भी मुक्त कराया‌ भगवान परशुराम केवल श्री राम लक्ष्मण और भीष्म पितामह से ही पराजित हुए थे। था और भगवान श्री राम से उनका आखिरी युद्ध हुआ था जिसमें उनके पराजित होना पड़ा और उनके तेज का भगवान श्री राम ने हरण कर लिया जिसका अर्थ यह भी है कि जब एक अवतार आ गया तो पीछे के अवतार की प्रासंगिकता समाप्त हो गई भगवान परशुराम ने अनंत गति से चलने का अपना वरदान सुरक्षित रखा और आज ‌ विवाह अनंत वेग से विसरण करते हैं।भारत की धरती को ऐसे ही परम बुद्धिमान महा तेजस्वी परशुराम जी की आवश्यकता है जो शैतान राक्षस और विधर्मी लोगों का संघर्ष करके देश में राम राज्य का मार्ग प्रशस्त करें।

Thursday, 16 April 2026

देश में अति पिछड़ी मुस्लिम महिलाओं को तैंतीस में से तीन प्रतिशत मिले आरक्षण मुस्लिम महासंघ*

*देश में अति पिछड़ी मुस्लिम महिलाओं को तैंतीस में से तीन प्रतिशत मिले आरक्षण मुस्लिम महासंघ* 
अखिल भारतीय मुस्लिम महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष फ़रहत अली खान ने कहा देश में सबसे ज्यादा दबी कुचली ज़िंदगी गुजार रही हैं मुस्लिम महिलाएं।
अगर मुस्लिम महिलाएं सांसद और विधायक बनकर लोकसभा,राज्य सभा एवं विधानसभा में जाएंगी तभी अपनी समस्याओं को देश के संवैधानिक पटल पर रख सकती हैं।

महिला आरक्षण बिल सराहनीय और स्वागत योग्य बिल है जिसकी समय के अनुसार बहुत आवश्यकता है । 

जहां तक महिला आरक्षण बिल का सवाल है हम सभी देशवासी स्वागत करते हैं।

मगर हम अपने देश के मुखिया से अपना सुझाव निवेदन पूर्वक रख रहे हैं।
तैंतीस प्रतिशत में से कुल तीन प्रतिशत परिसीमन के बाद मुस्लिम महिला को भी आरक्षण दिया जाए

जो समय के अनुसार बहुत ज़रूरी है।
हमारे सुझाव पर गंभीरता से विचार करने की कृपा करें।
फ़रहत अली खान 
राष्ट्रीय अध्यक्ष मुस्लिम महासंघ