नवरात्रि और आपका भोजन -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि
नया भारतीय वर्ष विक्रम संवत 2083 अंग्रेजी महीने के 19 मार्च 2026 के बृहस्पतिवार के दिन से प्रारंभ हो रहा है इसी दिन परम पावन भगवती देवी मां की नवरात्रि भी प्रारंभ हो रही हैं प्रातः काल 6:52 से प्रातः काल 7:53 तक कलश स्थापना और पूजा पाठ का समय रहेगा इसके पश्चात यदि किसी की कलश स्थापना ना हो तो उसके लिए अभिजीत मुहूर्त में यह काम किया जा सकता है जिसका समय 12:05 से 12:53 दोपहर है यह परम पावन नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च 2026 को शुक्रवार के दिन समाप्त हो रहे हैं और 27 मार्च को ही दिन में 11:00 बजे के बाद व्रत का पारण होगा इसी दिन भगवान श्री राम की श्री रामनवमी भी मनाई जाएगी । इस वर्ष देवी मां का आगमन डोली अर्थात पालकी से और प्रस्थान हाथी से होगा अर्थात आदि नवरात्रि हलचल और उथल-पुथल वाली और अंतिम शानदार और भव्य होगी।
यह दिव्य और भव्य नवरात्रि और पावन नववर्ष बहुत ही महत्वपूर्ण है यह बहुत ही उथल-पुथल हलचल वाला रहेगा क्योंकि रौद्र नाम का संवत्सर पूरे वर्ष में प्रभावी रहेगा और राजा बृहस्पति और मंत्री मंगल होंगे इसलिए धर्म कर्म आक्रमण और सुरक्षा में संतुलन समन्वय बना रहेगा यह नवरात्रि आठ दिन की होगी अष्टमी और नवमी दोनों 26 को पड़ रही हैं सरल भाव से देवी जी की केवल स्तुति करते हुए भी उत्तम फल पाया जा सकता है और उनके किसी एक मंत्र को भी 9 दिन जपा जा सकता है इतना अवश्य है कि व्यक्ति को इन दिनों अपने रहन-सहन और खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए और अच्छे काम करते हुए नैतिक और सदाचारी रहने का प्रयास करना चाहिए तभी राक्षसी और शैतानी शक्तियों का अंत होगा और दिव्य शक्तियों का विकास होगा ।
जटिल और गूढ़ नियम केवल साधु संत महंत लोगों पुजारी और अनुष्ठान करने वाले एवं तंत्र-मंत्र का अनुष्ठान करने वालों पर लागू होता है एक दिन का व्रत आप रख सकते हैं 9 दिन का भी रख सकते हैं देखा केवल यह जाएगा कि आप की भावना कैसी रही है यदि आपने सच्चे मन से नवरात्रि में देवी जी का ध्यान पूजन किया है तो निश्चित रूप से स्वप्न में आपको अच्छी चीजों चमकदार प्रकाश और देवी मां के दर्शन होते हैं और कुछ लोगों को प्रत्यक्ष भी दर्शन हो सकते हैं और हुए भी हैं छल कपट के भाव से किया गया कोई भी पूजा पाठ अनुष्ठान व्रत और हवन कभी सिद्ध नहीं होता इसके लिए सरलता सादगी नैतिकता सदाचारी एवं कृतज्ञता का भाव होना चाहिए।
जहां तक 9 दिन के व्रत की बात है तो व्यक्ति को क्या ग्रहण करना चाहिए और क्या नहीं ग्रहण करना चाहिए इस पर ध्यान देना आवश्यक है सामान्य लोगों और गृहस्थी में लगे लोगों के लिए किसी भी नियम की आवश्यकता नहीं है केवल नाम स्मरण करते हुए हर चीज खाते पीते रहे परिश्रम करते रहें लेकिन जो व्रत रख रहे हैं उनको भोजन में सात्विक और हल्की चीजें लेना चाहिए ताकि शरीर नई ऊर्जा स्फूर्ति और उमंग से भर सके और शरीर में खतरनाक रसायन और विषैले तत्व दूर हो सके व्रत पूजा पाठ हवन यज्ञ अनुष्ठान का सबसे बड़ा यही पक्ष है ।
इस समय आप साबूदाना सिंघाड़े का आटा सांवरिया चीनी चावल आलू लौकी शकरकंद अरबी खीर किला सेब पपीता चीकू अनार अंगूर मूंगफली मखाना काजू अखरोट नारियल दूध मट्ठा घर पर विविध रूपों में बनाकर उसका प्रयोग कर सकते हैं जीरा और काली मिर्च का भी प्रयोग आप आराम से कर सकते हैं यद्यपि कुछ लोग इसे दूर रहते हैं लेकिन ऐसी कोई बात नहीं है आप हरी धनिया का प्रयोग कर सकते हैं और अधिक से अधिक रसदार चीजों का सेवन करना चाहिए मूंगफली का सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए क्योंकि यह काफी गरिष्ठ होता है चीनी और गुड़ से बनी चीजें और उसका रस आप ग्रहण कर सकते हैं चाय भी पी सकते हैं सेंधा नमक का प्रयोग किया जा सकता है नारियल का पानी पिया जा सकता है।
जिन चीजों का प्रयोग करने से बचाना है उसमें नमक के प्रयोग में सावधानी रखें गेहूं चावल और अन्नकी चीजें ना खाएं मैदा और बेसन तथा हींग का प्रयोग भी ना करें सरसों का तेल और अनेक अन्य तेल भी आप ग्रहण न करें मेथी दाना खाने से प्याज लहसुन ग्रहण करने से दूर रहे और सबसे बड़ी बात किसी भी प्रकार के नशा का मांस मद्य का मछली का सेवन न करें पराई स्त्री और पराया पुरुष का सेवन इस काल में करने पर सारा व्रत खंडित हो जाता है और महा पाप लगता है।
इस प्रकार दिव्या और भव्य तथा परम पवित्र नवरात्रि में आप धर्म अध्यात्म और भगवती दुर्गा और भगवती पार्वती और अन्य देवी देवताओं का चिंतन करते हुए भोजन सामग्री खाद्य और प्राय सामग्री पर नियंत्रण रखते हुए उनकी 9 शक्तियों का आवाहन अवश्य करते रहे जिस दिन जिस देवी का व्रत हो उसका अलग से आवाहन अवश्य करें पहले दिन देवी शैलपुत्री दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा चौथे दिन देवी कुष्मांडा पांचवें दिन देवी स्कंदमाता छठे दिन देवी कात्यायनी सातवें दिन देवी महाकाल रात्रि आठवें दिन देवी महागौरी और 9वे दिन देवी सिद्धिदात्री का दिन होता है इन सभी का अलग-अलग चिंतन ध्यान और पूजा करने से अलग-अलग प्रकार की शक्ति ऊर्जा एवं सिद्धियां प्राप्त होती
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