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Tuesday, 11 November 2025

यादों के झरोखे से: #एक पुराने मित्र से मुलाकात मुलाकात*

भाग्य का विचित्र खेल और समय चक्र का अजीब घूमता पहिया 
1978 से आज तक कितने वर्ष बीत चुकेहैं‌ 10:/20 नहीं पूरे 37 वर्ष 

और 37 वर्ष बाद हमारे गांव के कॉलेज जनता जनार्दन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गैरवाह जौनपुर में कक्षा 8 तक के सहपाठी और हमारे साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा करके दूसरे स्थान पर रहने वाले असैथा ग्राम के देवेंद्र कुमार मिश्रा पुत्र जमुना प्रसाद मिश्र का शुभ आगमन हमारे जनपद न्यायालय जौनपुर स्थित लीगल एड डिफेंस सिस्टम कार्यालय में आगमन हुआ।

देवेंद्र कुमार मिश्रा हमेशा दूसरी और मैं प्रथम पोजीशन पर कॉलेज में रहते थे वह एक प्रतिभाशाली और सदाचारी छात्र भेजें आज पुणे में उनका बहुत अच्छा व्यवसाय और पेट्रोल पंप है और अरबपति हैं उनसे मिलकर बहुत ही अच्छा  लगा और तमाम बातें हुई और यह अच्छा-अच्छा चित्र हमारे कार्यालय  का है । उनसे तत्कालीन समय के हमारे परम आदरणीय गुण श्री राम दयाल सिंह राम अनुज तिवारी इंद्रसेन सिंह विजय बहादुर सिंह राम नारायण सिंह राधेश्याम बिना दुर्ग विजय सिंह स्वराज बहादुर सिंह ‌ रामधारी सिंह ‌ कामता प्रसाद सिंह और लिपिक अध्याय प्रसाद सिंह और तत्कालीन मित्र कमलेश राम नवल सिंह राम शिरोमणि सिंह योगेंद्र सिंह लाल जी सिंह ओम प्रकाश सिंह मोहर्रम गुप्ता जिला अजीत वर्मा भोलेनाथ सिंह धर्मेंद्र सिंह हरीश हनीफ हदीस ‌ उमाशंकर सिंह राम लावत यादव हरिओम सिंह लालचंद रजक राम आशीष महेंद्र प्रताप श्याम जी अमर बहादुर मटर छात्रगुल्लर इत्यादि के ‌ बारे में भी वार्ता हुई ‌ समय धीरे-धीरे प्रत्येक वस्तु को धुंधला करके मिटा देता है

पृथ्वी ब्रह्मांड और संपूर्ण परम विश्व गोल है और इस गोल घूमती वस्तु में हर अपनी परिचित चीज कहीं ना कहीं कभी न कभी किसी न किसी मोड़ पर आकर अवश्य ही मिलते हैं यही भाग्य का खेल और समय चक्र का घूमता पहिया है।