Thursday, 30 April 2026

दिन महीना और समय के साथ एक-एक अक्षर सत्य हुए भविष्यवाणी 49 वर्षों की तरह और लगातार 49 वर्षों की तरह मित्र के वश में छिपे शत्रु केवल आलोचना करने वाले लोग प्रशंसा से हमेशा दूर रहने वाले आस्तीन के सांप और ईर्ष्या द्वेष जलन से भरे हुए लोग चारों खाने चित्र धड़ाम हो गए

दिन महीना और समय के साथ एक-एक अक्षर सत्य हुए भविष्यवाणी 49 वर्षों की तरह और लगातार 49 वर्षों की तरह मित्र के वश में छिपे शत्रु केवल आलोचना करने वाले लोग प्रशंसा से हमेशा दूर रहने वाले आस्तीन के सांप और ईर्ष्या द्वेष जलन से भरे हुए लोग चारों खाने चित्र धड़ाम हो गए

 आज और कल के मौसम की भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 

‌‌ आज तेज पूर्वी हवाओं के साथ चलेगा तेज आंधी तूफान अंधड़ छा जाएंगे घने बादल और आज से एक सप्ताह तक मौसम बादल बरसा वाला रहेगा अधिकतम तापमान में 8 से 10 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान में 4 से 5 डिग्री सेल्सियस की आएगी कमी 

आज जौनपुर और आसपास का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के साथ ‌‌ कल से थोड़ा कम तापमान होगा ‌ लेकिन भयानक गर्मी और उमस आज भी जारी रहेगी। ‌‌ दोपहर के बाद तेज हवाओं झंझावात बिजली की चमक गरज के साथ बूंदाबांदी कहीं-कहीं वर्षा जौनपुर सहित  ‌ संपूर्ण उत्तर भारत और पूर्वांचल और आसपास पर होने की प्रबल संभावना है ‌ आज और कल झंझा झकोर घन गर्जन तड़ित और वारिदमाला का दृश्य पैदा होगा ‌ बहुत ही भयंकर उमश पसीना के कारण लोग पसीने से तर तर हो जाएंगे।‌ लेकिन शाम होते होते सबको भयंकर राहत मिलेगी एक बार फिर से बता देना चाहता हूं कि भीषण गर्मी के कारण अचानक चक्रवर्ती लंगडी आंधी आने की संभावना है सावधान रहें आशा से अधिक विनाशकारी हो गया वज्रपात वर्षा आंधी तूफान

न्यूनतम तापमान भी 28 डिग्री सेल्सियस होगा हवा की दिशा  पूर्वी रहेगी‌ बहुत तेज हवाएं चलने आंधी तूफान अंधड़ आने की संभावना है ।

कल का न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस और उच्चतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस होने की प्रबल संभावना है। 
नमी की मात्रा बढ़ेगी हवाओं की दिशा पूर्वी उत्तर पूर्वी बनी रहेगी। ‌ आज की तरह कल भी तेज हवा आंधी तूफान अंधड़ झंझा झकोर घन गर्जन वज्रपात वारिदमाला ‌ आंखों को चकाचौंध कर देने वाली विद्युत का दृश्य पैदा होगा।

वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 से 100 के बीच पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 5से 7 के बीच रहेगी ‌ दोपहर के बाद और साघ्यंकाल ‌ के बीच तेज हवा आंधी तूफान के साथ कहीं-कहीं बूंदाबादी तो कहीं-कहीं हल्की वर्षा होगी।

सापेक्षिक आर्द्रता अर्थात हवा जल की मात्रा 35 प्रतिशत से 80% के बीच रहेगी। 

आज वर्षा ‌ बूंदाबांदी की प्रबल संभावना है ‌ सुबह मौसम शांत रहेगा लेकिन बाद में ‌ बादलों के साथबहुत तेज हवा चलेगी लेकिन आज बहुत तेज हवा से लेकर आंधी तूफान अंधड़ जौनपुर और आसपास के जिलों में झंझा झकोर घन गर्जन वज्रपात वारिदमाला  ‌ वर्षा के साथलंबे क्षेत्र में ‌ कसंपूर्णउत्तर भारत मेंआ सकते हैं। कल अर्थात 29 अप्रैल को दूर-दूर तक झंझा झकोर घन गर्जन वज्रपात वारिदमाला के साथ हल्की सामान्य वर्षा होगी

 भीषण गर्मी के पश्चात कल से गर्मी में  कमी होने उमस और आर्द्रता बढ़ने और 28 अप्रैल से 2 मई के बीच हल्की वर्षा का मौसम रहने की ‌ तापमान के 7-10 डिग्री सेल्सियस गिरने की प्रबल संभावना है।
: जो लोग यह कह रहे हैं कि आपकी भविष्यवाणी के अनुसार आज आंधी तूफान वर्षा नहीं हुई तो उनको मैं बता दूं कि दोपहर से शाम के बीच जो हमारी भविष्यवाणी है आंधी तूफान वर्ष की वह निश्चित रूप से सही होगी सावधान रहें

सारे चुनावी एग्जिट पोल चाहे जो कहीं लेकिन मैं दो महीने पहले की अपनी भविष्यवाणी फिर से दोहरा रहा हूं बंगाल में भाजपा 140 प्लस माइनस 25 सीट प्राप्त करेगी ‌ जबकि असम में हेमंत विश्व शर्मा एक बार फिर बहुमत पा जाएंगे‌ तमिलनाडु में विभाजित जनादेश प्राप्त होगा केरल में स्थिति वामपंथी के पक्ष में और पुडुचेरी में भाजपा गठबंधन को सत्ता प्राप्तहोंगे

‌ इस प्रकार 2 महीने पहले की बिल्कुल सटीक निष्पक्ष चमत्कार पूर्ण भविष्यवाणी के अनुसार दो राज्यों में भाजपा दो राज्यों में विपक्षी दल और एक में कांटे की टक्कर होगी। तमिलनाडु और केरल में मोदी अमित शाह का प्रयास बहुत ही बुरी तरह फेल होगा-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर  01/03/1926

Wednesday, 29 April 2026

आज और कल के मौसम की भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

 आज और कल के मौसम की भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 

‌‌ आज तेज पूर्वी हवाओं के साथ चलेगा तेज आंधी तूफान अंधड़ छा जाएंगे घने बादल और आज से एक सप्ताह तक मौसम बादल बरसा वाला रहेगा अधिकतम तापमान में 8 से 10 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान में 4 से 5 डिग्री सेल्सियस की आएगी कमी 
डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 


आज जौनपुर और आसपास का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के साथ ‌‌ कल से थोड़ा कम तापमान होगा ‌ लेकिन भयानक गर्मी और उमस आज भी जारी रहेगी। ‌‌ दोपहर के बाद तेज हवाओं झंझावात बिजली की चमक गरज के साथ बूंदाबांदी कहीं-कहीं वर्षा जौनपुर सहित राजस्थान पर होने की प्रबल संभावना है ‌ आज और कल झंझा झकोर घन गर्जन तड़ित और वारिदमाला का दृश्य पैदा होगा ‌ बहुत ही भयंकर उमेश पसीना के कारण लोग पसीने से तर तर हो जाएंगे।

न्यूनतम तापमान भी 28 डिग्री सेल्सियस होगा हवा की दिशा  पूर्वी रहेगी‌ बहुत तेज हवाएं चलने आंधी तूफान अंधड़ आने की संभावना है ।

कल का न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस और उच्चतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस होने की प्रबल संभावना है। 
नमी की मात्रा बढ़ेगी हवाओं की दिशा पूर्वी उत्तर पूर्वी बनी रहेगी। ‌ आज की तरह कल भी तेज हवा आंधी तूफान अंधड़ झंझा झकोर घन गर्जन वज्रपात वारिदमाला ‌ आंखों को चकाचौंध कर देने वाली विद्युत का दृश्य पैदा होगा।

वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 से 100 के बीच पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 5से 7 के बीच रहेगी ‌ दोपहर के बाद और साघ्यंकाल ‌ के बीच तेज हवा आंधी तूफान के साथ कहीं-कहीं बूंदाबादी तो कहीं-कहीं हल्की वर्षा होगी।

सापेक्षिक आर्द्रता अर्थात हवा जल की मात्रा 35 प्रतिशत से 80% के बीच रहेगी। 

आज वर्षा ‌ बूंदाबांदी की प्रबल संभावना है ‌ सुबह मौसम शांत रहेगा लेकिन बाद में ‌ बादलों के साथबहुत तेज हवा चलेगी लेकिन आज बहुत तेज हवा से लेकर आंधी तूफान अंधड़ जौनपुर और आसपास के जिलों में झंझा झकोर घन गर्जन वज्रपात वारिदमाला  ‌ वर्षा के साथलंबे क्षेत्र में ‌ कसंपूर्णउत्तर भारत मेंआ सकते हैं। कल अर्थात 29 अप्रैल को दूर-दूर तक झंझा झकोर घन गर्जन वज्रपात वारिदमाला के साथ हल्की सामान्य वर्षा होगी

 भीषण गर्मी के पश्चात कल से गर्मी में  कमी होने उमस और आर्द्रता बढ़ने और 28 अप्रैल से 2 मई के बीच हल्की वर्षा का मौसम रहने की ‌ तापमान के 7-10 डिग्री सेल्सियस गिरने की प्रबल संभावना है।
[4/29, 2:51 PM] Dr  Dileep Kumar singh: जो लोग यह कह रहे हैं कि आपकी भविष्यवाणी के अनुसार आज आंधी तूफान वर्षा नहीं हुई तो उनको मैं बता दूं कि दोपहर से शाम के बीच जो हमारी भविष्यवाणी है आंधी तूफान वर्ष की वह निश्चित रूप से सही होगी सावधान रहें
[4/29, 5:52 PM] Dr  Dileep Kumar singh: हॉट मिलियन कर नगर पालिका परिषद के बीच स्थित इमली वाली मस्जिद की नीम का पेड़ टूट कर आधा गिर गया है जो तारों पर लटकते हुए सड़क पूरी तरह रोक दिया है आवागमन पूरी तरह बंद है यह डाइट के पूर्व सटा हुआ है
[4/29, 5:54 PM] Dr  Dileep Kumar singh: हमारे केंद्र की कल की भविष्यवाणी के अनुसार आज जौनपुर में प्रचंड आंधी तूफान चक्रवात और वर्षा एक साथ हुए और भयंकर वज्रपात ने सबका दिल दहला कर रख दिया भयंकर आंधी की अधिकतम गति 6065 किलोमीटर प्रति घंटे रही जो 5 साल में सर्वाधिक थी जौनपुर न्यायालय में कई पेड़ टूट कर गिर गए पीपा पुल के ऊपर अचला देवी मंदिर में स्थित नेम और अन्य चार पांच पेड़ गिर गए जिससे रास्ता पूरी तरह बंद है ‌ भविष्यवाणी के अनुसार झंझा झकोर घन गर्जन वज्रपात वारिदमाला ‌ और आंखों को चक्कर चंद कर देने वाली विद्युत का भयंकर दृश्य प्रलय काल के समान उपस्थित हुआ काफी विनाशकारी आंधी तूफान रहा सबसे बड़ी संख्या में 56 और 3 से जुड़ गए और कई मकान भी क्षतिग्रस्त हो गए सौभाग्य ही रहा की मनुष्यों की कोई हानि नहीं हुई
[4/29, 6:03 PM] Dr  Dileep Kumar singh: जौनपुर नगर क्षेत्र में 20 से 30 मिलीलीटर और कई पश्चिमी क्षेत्र में 40 से 50 मिलीलीटर वर्षा हुई है बिजली की आपूर्ति बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं सभी नालियां जाम हो चुके हैं और बचाव कार्य के लिए कोई दिख नहीं रहा है ‌ विवाह का मुहूर्त होने से सड़क जाम है और प्रदूषण तथा पराबैंगनी किरणों में कमी हुई है वायु गुणवत्ता सूचकांक ‌ 100 से 50 तक आ गया है ‌ इस मध्यम श्रेणी के चक्रवात ने सभी सरकारी दावों की पोल खोल दी है
[4/29, 6:05 PM] Dr  Dileep Kumar singh: भयंकर वज्रपात के साथ  ‌ जबरदस्त ओलावृष्टि हुई जौनपुर के अनेक भागों में तथा पड़ोसी जिलों में हुई है
[4/29, 6:43 PM] Dr  Dileep Kumar singh: 22 अप्रैल से लेकर कल 28 अप्रैल तक लगातार हमने इस भयानक आंधी तूफान चक्रवात की बार-बार चेतावनी और सूचना दिया था जिससे काफी लोग सतर्क हो गए थे और उनका काफी लाभ भी हुआ

भगवान बुद्ध और बुद्ध पूर्णिमा -

: भगवान बुद्ध और बुद्ध पूर्णिमा -डॉ दिलीप कुमार सिंह को 
भगवान बुद्ध मानवता के सर्वोच्च प्रतिमान बन चुके हैं भगवान श्री राम और भगवान श्री कृष्ण ‌‌ और भगवान बुद्ध के अतिरिक्त संपूर्ण संसार में लोकप्रिय कोई नहीं हुआ जितना भगवान बुद्ध है सच्चे अर्थों में उन्हें विश्व का और ज्ञान का प्रकाश स्तंभ कहा जा सकता है कम से कम 50 देशों में भगवान बुद्ध के मत के अनुयाई रहते हैं इनकी संख्या 180 करोड़ से भी ज्यादा है यह इस बात का प्रमाण है कि ढाई हजार से अधिक वर्ष बीत जाने के बाद भी भगवान बुद्ध  ‌ और उनके उपदेश तथा शिक्षाएं इस धरती पर जागृत है ।

भगवान बुद्ध का जन्म लुंबिनी नामक स्थान पर हुआ था जो पहले भारत का एक गणराज्य था और वर्तमान में यह नेपाल में है इस बात से स्पष्ट है कि प्राचीन काल में नेपाल भी भारत का एक अंग था यह भी ध्यान देने वाली बात है कि भगवती सीता देवी के पिता महाराज जनक जो ब्रह्म ऋषियों से बड़े ज्ञानी थे इसी मिथिला के थे जो तक भारत का अंग था और वर्तमान में यह नेपाल में  है। भगवान बुद्ध श्री राम के वश में ही उत्पन्न हुए लेकिन इक्ष्वाकु वंश बिगड़ कर शाक्य वंश हो गया।

भगवान बुद्ध के बचपन का नाम सिद्धार्थ गौतम था ।जन्म देने के कुछ समय बाद ही उनकी मां महामाया देवी का स्वर्गवास हो गया था लेकिन ‌ सौतेली माता प्रजापति गौतमी ने उनका पालन पोषण किया इससे उनके नाम के आगे गौतम लग गया जिन्होंने भगवान बुद्ध को असली मां से भी अधिक में और प्रेम दियाऔर अंत तक  रहा। भगवान बुद्ध के जन्म के समय बड़े-बड़े ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी किया  या तो यह बालक चक्रवर्ती सम्राट होगा और सारे पृथ्वी को जीत लेगा या ऐसा महानतम सन्यासी होगा जिसका ज्ञान सारी धरती को जीत लेगा इसलिए उनके पिता शुद्धोधन ने हर संभव प्रयास किया की बालक दुनिया के दुखों से कष्ट से पीड़ा से बिल्कुल अनजान रहें लेकिन नियति को तो कुछ और स्वीकार था।

भगवान बुद्ध को सांसारिक सुख में लिप्त रहने के लिए उनके पिता ने उनके लिए सर्दी गर्मी और वर्षा ऋतु के लिए तीन अलग-अलग शानदार महल सुंदर से सुंदर बाग बगीचा और वाटिका लगाया और उसे समय की सबसे सुंदर स्त्री यशोधरा से उनका विवाह भी कर दिया लेकिन भगवान बुद्ध को ईश्वरीय संदेश स्वप्न में आते ही रहते थे उनका सारथी छंदक बहुत ही बुद्धिमान था और वह भगवान बुद्ध को राजा के वचनों के अनुसार दुख और परेशानी ‌ वृद्धावस्था रोग और मृत्यु के दृश्यों से दूर रखता था।

सिद्धार्थ बचपन से ही बहुत शक्तिशाली और मेधावी थे खेलकूद में सबसे आगे रहते थे उनका चचेरा भाई देवदत्त उनका सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी था ।एक बार उसने हंस को तीर मार दिया भगवान बुद्ध ने उसकी सेवा किया दोनों में विवाद हुआ की हंस किसका है और राजा ने निर्णय दिया कि बचाने वाले का अधिकार करने वाले से अधिक होता है इसलिए हंस सिद्धार्थ का है एक बार उनके राज्य में युद्ध की प्रतियोगिता हुई सिद्धार्थ गौतम सब प्रतियोगिता में सबसे आगे रहे लेकिन उड़ते हुए पक्षी को अपने करुणा के कारण मारना अस्वीकार दिया उनका लक्ष्य वेध अचूक होता था।

भगवान बुद्ध एक बार महल से बाहर जनता के बीच घूमने निकले वहां पर उन्होंने वास्तविक जीवन को देखा उन्होंने एक भिखारी को देखा एक मरे हुए व्यक्ति को देखा और एक संन्यासी को देखा ‌ कंकाल मात्रा हुए रोगी व्यक्ति कोऔर भी अनेक दृश्य देख जिससे वह बहुत विचलित हो गए सारथी ही के द्वारा सब कुछ ज्ञात होने पर और यह ज्ञात होने पर की सभी को अंत में मर जाना है और भी अधिक विचलित हो गए लेकिन सन्यासी के तेज से बहुत प्रभावित हुए और अंत में निश्चय किया की पुत्र और पत्नी राजपाट धन-धान्य को छोड़कर उन्हें सन्यासी बनना है ‌ और जरा जीर्णता मृत्यु पर खोज करना है।

एक दिन संकल्प करके आधी रात को हुए भवन से बाहर निकल पड़े सारथी के साथ नदी के किनारे आए और अपना वस्त्र आभूषण की समान देकर सारथी को विदा किया अपने बाल उतार दिए और ज्ञान की खोज में निकल पड़े वहां उन्होंने गुरु अलार कलाम और उद्रक राम पुत्र से गंभीर ज्ञान प्राप्त हुआ लेकिन मन को संतोष नहीं हुआ और भी बड़े-बड़े ज्ञानी ऋषि मुनि से मिले पर वह नहीं मिला जो वह खोजने गए थे अर्थात् जरा जीर्णता और मृत्यु से छुटकारा पाने का परम ज्ञान इसलिए वे आगे बढ़ते चले गए इसी क्रम में उन्हें सारनाथ में छः तेजस्वी शिष्य मिले जिनके साथ उन्होंने धनघोर तपस्या किया और सूख कर बिल्कुल कांटा हो गए फिर भी उन्हें उनके परम ज्ञान प्राप्त नहीं हुआ।

इसी अवस्था में सुजाता नाम की कन्या पुत्र जन्म की खुशी में खीर लेकर वृक्ष देवता को चढ़ाने आई और कंकाल मात्र भगवान बुद्ध को देखकर समझी कि यही साक्षात वृक्ष देवता हैं और खीर अर्पित कर दिया भगवान बुद्ध ने बड़े प्रेम से खीर खाया यह देखकर उनके छह शिष्य भगवान बुद्ध की तपस्या खंडित हो गई ।‌ यही ब्रह्म लोगों में नगरवधू आम्रपाली को लेकर भी फैला था जो संपूर्ण संसार में सबसे सुंदर स्त्री थी जो समय के साथ स्वयं ही दूर हो गया।

इसके बाद भगवान बुद्ध बोधगया में नदी के किनारे विराट पीपल के वृक्ष के नीचे बैठे और यह सोचकर अखंड समाधि लगाए कि या तो मेरा महाप्रयाण हो जाएगा या परम ज्ञान प्राप्त हो जाएगा इस दशा में पूरे 1 महीने तक ध्यान मग्न समाधि में लीन रहे। और अंत में 1 सप्ताह के बाद उन्हें परम ज्ञान प्राप्त हुआ इस क्रिया को बुद्धत्व की प्राप्ति कहा जाता है तब से वह भगवान बुद्ध कह गए बाद में उनके शिष्यों को पश्चाताप हुआ और उन्होंने क्षमा याचना किया इसके बाद संपूर्ण जीवन भगवान बुद्ध ने पूरे विश्व में दया परोपकार करुणा शांति अहिंसा का संदेश फैलाया ।

आज भले लोग बौद्ध धर्म को अलग धर्म मान रहे हैं लेकिन भगवान बुद्ध ने इसे अलग धर्म नहीं माना उन्होंने केवल सनातन धर्म में आई कमी अंधविश्वास और रूढ़ियों को हटाकर परम दिव्य ज्ञान का प्रकाश फैलाया और पूरी दुनिया में उनके ज्ञान का प्रकाश फैल गया उन्होंने अंगुलिमाल जैसे शैतानी डाकू को भी अपने बश में करके अपने महान शक्ति का प्रदर्शन किया और अंत में 80 वर्ष की अवस्था में 483 ईसा पूर्व में उन्होंने कुशीनगर में महापरिनिर्वाण प्राप्त किया। उनका जन्म मृत्यु और ज्ञान प्राप्ति तीनों एक ही दिन हुआ था यह बहुत ही विलक्षण घटना थी भगवान बुद्ध एक ऐसे महान विभूति हैं जिनके ज्ञान का प्रकाश दिग्दिगंत में फैल रहा है ईश्वर को लेकर वे नास्तिक नहीं थे लेकिन उसकी गलत व्याख्या की गई है ईश्वर के बारे में उन्होंने अपने विचार कभी व्यक्त नहीं किया आज भगवानपुर और उनकी शिक्षाओं की पूरे विश्व को आवश्यकता है।

भगवान बुद्ध की जयंती वैशाख पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है इसको बुद्ध जयंती वैसाख वेसाक विशाख बुन सागा दाव फो दैन फैट दैन जैसे नाम से भी जाना जाता है भगवान बुद्ध की जयंती वैसाख पूर्णिमा समस्त सनातनी मानते हैं क्योंकि भगवान बुद्ध भगवान विष्णु के नवें अवतार माने जाते हैं दसवां और अंतिम अवतार भगवान कल्कि चुका है जो कलयुग के अंत में जन्म लेंगे। यहां पर बड़ी ही धूमधाम से भगवान बुद्ध के धर्मस्थली  उनके जन्म स्थान लुंबिनी और महापरिनिर्वाण स्थान कुशीनगर में मनाया जाता है इस अवसर पर भगवान बुद्ध को याद करते हुए उनकी शिक्षाओं का प्रचार प्रसार किया जाता है जो पहली बार सम्राट अशोक के द्वारा देश-विदेश में की गई थी।

और अंत में इतना कहना चाहूंगा कि दया परोपकार क्षमता करुणा शक्ति सत्य अहिंसा के साक्षात मूर्तिमान स्वरूप भगवान बुद्ध का अनुयाई या भिक्षुक या भंते अगर सुख सुविधाओं के साथ विलासी जीवन व्यतीत करता है धन कम कर कोठी बंगले गाड़ी में रहता है हवाई जहाज और प्रथम श्रेणी के लोग पाठयम में यात्रा करता है तो वह न केवल धूर्त है बल्कि भगवान बुद्ध की शिक्षाओं के बिल्कुल उल्टा करके उनके धर्म पंथ को बर्बाद करता है यही कारण था कि बौद्ध धर्म भारत से लगभग नष्ट हो गया और आज भी जो तथा कथित भगवान बुद्ध के अनुयाई हैं उसमें 99% लोग भोग विलास का जीवन बिताकर उनके शिक्षाओं को खंड-खंड करते हुए बौद्ध धर्म का विनाश कर रहे हैं।

डॉ दिलीप कुमार सिंह 

Tuesday, 28 April 2026

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नालसा नई दिल्ली एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के दिशा निर्देश पर एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर के तत्वावधान में जनपद न्यायाधीश सुशील कुमार शशि के नेतृत्व में ‌एवं ‌ सिविल जज सीनियर डिवीजन सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुशील कुमार सिंह की देखरेख में आज एक विधिक साक्षरता जागरूकता शिविर का और आयोजन बदलापुर तहसील जौनपुर में आयोजित किया गया जिसका विषय बच्ची देवी प्रति उत्तर प्रदेश राज्य एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर के द्वारा किए गए कार्यों का विवरण सम्मिलित रहा ।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नालसा नई दिल्ली एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के दिशा निर्देश पर एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर के तत्वावधान में जनपद न्यायाधीश सुशील कुमार शशि के नेतृत्व में ‌एवं ‌ सिविल जज सीनियर डिवीजन सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुशील कुमार सिंह की देखरेख में आज एक विधिक साक्षरता जागरूकता शिविर का और आयोजन बदलापुर तहसील जौनपुर में आयोजित किया गया जिसका विषय बच्ची देवी प्रति उत्तर प्रदेश राज्य एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर के द्वारा किए गए कार्यों का विवरण सम्मिलित रहा ।

इस अवसर पर सुशील कुमार सिंह सचिव ‌ सिविल जज सीनियर डिवीजन ‌ ‌ आशुतोष खरवार सिविल जज जूनियर डिवीजन ‌ जज ग्राम न्यायालय ‌ डॉ दिलीप कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल जनपद न्यायालय जौनपुर ‌ तहसीलदार ‌मध्यस्थ ‌ पैनल लायर ‌  पी‌एलवी ‌‌ विद्वान अधिवक्ता गण और कर्मचारी गण बड़ी संख्या में वादकारीगण एवं प्राधिकरण के कर्मचारी सुनील कुमार मौर्य और  उपस्थित रहे।

इस अवसर पर सिविल ज़ज सीनियर डिवीजन सचिव सुशील कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह तहसीलदार एवं तहसीलदार तहसील ‌ बदलापुर ग्राम न्यायालय के न्यायाधिकारी के द्वारा बच्ची देवी के मुकदमे में पारित न्यायपालिका के निर्णय को विस्तार से समझाते हुए कहा गया कि हर एक नागरिक को जब तक वह दोषी सिद्ध न हो जाए संविधान और न्याय के द्वारा प्रदत्त तथा संपूर्ण विधिक अधिकार सुनिश्चित करना राज्य सरकार और केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है यदि कोई व्यक्ति जेल में निरुद्ध है ‌ और जमानत हो जाने पर जमानत दर्द प्रस्तुत नहीं कर पा रहा है तो इसकी सूचना जेल अधीक्षक सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को देगा इसके पश्चात उसकी सामाजिक आर्थिक रिपोर्ट मंगा कर एक महीने का समय देखकर व्यक्तिगत बंध  पत्र पर जेल में बंद बंदी को छोड़ दिया जाएगा और उसे न्यायालय द्वारा दिए गए समय सीमा के अंदर अपने जमानत दर एवं कागजात प्रस्तुत करना होगा ।

विद्वान वक्ताओं ने कहा कि किसी भी व्यक्ति का जीवन और उसकी स्वतंत्रता तथा अधिकार केवल विधि के द्वारा स्थापित सिद्धांतों के अतिरिक्त कम नहीं किया जा सकता है ‌ इस अवसर पर सचिव महोदय एवं डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल के द्वारा विधिक साक्षरता जागरूकता के बारे में बताते हुए मध्यस्थता ‌ लीगल एड डिफेंस सिस्टम पैनल लायर जेल विजिटर ‌ एवं फ्रंट ऑफिस तथा पैरेलल लीगल वालंटियर के बारे में संपूर्ण जानकारी देते हुए बताया गया की कोई भी पीड़ित प्रताड़ित महिला चाहे वह जिस वर्ग जाति धर्म की हो धनी हो या निधन हो प्राधिकरण की सेवाएं बिल्कुल मुफ्त में दी जाती हैं यदि पीड़ित और प्रताड़ित व्यक्ति अनुसूचित जाति जनजाति पिछड़ी जाति का है तो भी उसकी सारी सेवाएं निशुल्क दी जाती है इस अवसर पर लोक अदालत एवं स्थाई लोक अदालत एवं वैवाहिक प्री लिटिगेशन के बारे में भी विस्तार से बताया गया। 

इस सेमिनार का संचालन डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल डॉ दिलीप कुमार सिंह के द्वारा किया गया और धन्यवाद तथा आभार अध्यक्ष अधिवक्ता संघ तहसील बदलापुर के द्वारा दिया गया

सनातन धर्म तंत्र मंत्र मठ मंदिर आश्रम शक्तिपीठ धाम और तीर्थ स्थान का निष्पक्ष मौलिक विवेचन -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक

सनातन धर्म तंत्र मंत्र मठ मंदिर आश्रम शक्तिपीठ धाम और तीर्थ स्थान का निष्पक्ष मौलिक विवेचन -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक 

कालचक्र के प्रभाव और कलयुग के आगमन के कारण आज हर अच्छी चीज बुरी और बुरी चीज अच्छी दिखाई दे रही है तमराज किलविश का साम्राज्य बढ़ रहा है और अंधेरा दिनों दिन उजाले को निकल रहा है सत्य सत्य से हर रहा है सदाचार दुराचार के आगे नतमस्तक है और अज्ञान के आगे ज्ञान हर रहा है तभी तो धर्म ग्रंथो की मौलिक बातों को उल्टा सीधा करके सच को दबाकर सत्य को दिखाई जा रहा है एक प्रसंग में जो आजकल बहुत टीवी चैनल और इंटरनेट पर चल रहा है  ‌ कारण के द्वारा इंद्र की पराजय का है जो कि कभी हुआ ही नहीं था इसलिए आज हम सनातन धर्म ‌ स्थल मठ मंदिर आश्रम धाम शक्तिपीठ और तीर्थ स्थान का बिल्कुल स्पष्ट मौलिक और निष्पक्ष विवेचन करेंगे 

सबसे पहले यह आप सभी निश्चित रूप से जानने की हमारा सनातन धर्म जो मूल रूप से है वह बिल्कुल सत्य ज्ञान और उजाले का प्रतीक है पूरी तरह प्रकृति पर्यावरण विज्ञान धाम दर्शन के अनुकूल है और सारे संसार का हर व्यक्ति इसमें समाहित हो सकता है इसी प्रकार आज के 100 वर्ष पहले तक बने हुए सभी तीर्थ स्थान धाम मठ मंदिर शक्तिपीठ एवं आश्रम बिल्कुल ही सही और सच्चे हैं और यहां पर सकारात्मक ऊर्जा और दिव्य शक्तियों का निवास है ‌ लेकिन आजकल तमाम नकली साइन मंदिर मैहर देवी और वैष्णो माता के मंदिर शीतला धाम ‌ विंध्यवासिनी देवी और तमाम देवी देवताओं भगवान का नकली मंदिर बनाकर विज्ञापन और मीडिया में उसकी जोर-शोर से प्रशंसा करके लूटने का काम किया जा रहा है इससे आपको सावधान रहने की आवश्यकता है। 

यह संसार कर्म स्थल है अपने कर्म का फल सबको भोगना पड़ता है या निश्चित और अटल है यहां तक की देवी देवता और ईश्वर भी यदि धरती पर आ जाते हैं तो उनको भी कम का भोग भोगना पड़ता है भले ही वह भगवान श्री राम श्री कृष्णा अष्ट पशु अप्सराय देवी देवता भगवान श्री कृष्णा महावीर स्वामी भगवान बुद्ध नानक या कोई भी महापुरुष रहे हो उनका इतिहास चरित्र आपको पता है की किस तरह से पूर्व जन्म के कृत्य के कारण भगवान श्री कृष्ण अंत में जरा नाम के ब्याध के द्वारा बैकुंठ धाम गमन किये।

‌ यदि आप 100 वर्ष पहले स्थापित मठ मंदिर शक्तिपीठ धाम धर्म के केंद्र एवं अन्य धार्मिक सांस्कृतिक और दार्शनिक तथा वैज्ञानिक शक्तिपीठों का अध्ययन करेंगे तो पाएंगे कि यह धरती के अति विशिष्ट स्थान है जैसे कि महाकाल उज्जैन जो भारत का केंद्र भाग है और यहां पर जब भी भारत की राजधानी बनी भारत उन्नति के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचा और दिल्ली में जब भी राजधानी बनाई गई देश टुकड़े-टुकड़े होकर बर्बाद हुआ भीषण युद्ध हुए और धन जन संस्कृति सभ्यता एवं प्रकृति पर्यावरण का अभूतपूर्व नुकसान हुआ। 

इतना स्पष्ट जान लीजिए कि जब भगवान श्री कृष्णा पर लोग चले गए उसी दिन से कलयुग धरती पर उतर आया अपने अनुचर और तमराज किलविश के साथ वह धरती पर घूमता रहा लेकिन पांडव श्री कृष्णा और उनके परम शक्तिशाली विश्व विजेता परीक्षित का इतना बड़ा प्रताप था कि उसकी धरती पर कहीं रुकने की जगह नहीं मिल रही थी। सम्राट परीक्षित स्वयं प्रवेश बदलकर संपूर्ण धरती का अवलोकन अपने पवन गति वाले अश्व से किया करते थे। 

एक बार उनके साम्राज्य में एक अद्भुत पाप कर्म घटित हो गया तब उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ कि यह कैसे हुआ इसके बाद जब वह अपने अश्व पर कारण जानने के लिए निकले तब उन्होंने देखा एक भयंकर काला बहुत लंबा चौड़ा पुरुष इस धर्म और पाप का केंद्र है ‌ जो बहुत ही भयंकर था और उसकी आंखें अंगारे बरसा रहे थे।

यह देखकर परम तेजस्वी परीक्षित ने बिना डरे पलक झपकते ही अश्व से कूद कर उसकी गर्दन दबोच कर धरती पर गिरा दिया और पूछा तू कौन है जो सम्राट परीक्षित के राज्य में धर्म और पाप कर्म करने की चेष्टा कर रहा है और इस तरह कुमार स्वरूप गौ माता और उसके बछड़े को पीड़ा दे रहा है मृत्यु के भाई से थर-थर कांपते हुए कलयुग ने कहा है प्रभु यह कलयुग है और हमें साक्षात श्री हरि विष्णु के द्वारा इस युग का प्रधान नियुक्त करके धरती पर पाप अन्याय अत्याचार अधर्म अज्ञान अनाचार दुराचार बढ़ाने के लिए भेजा गया है।

इस पर क्रोध से लाल पीले परीक्षित ने अपनी भयंकर तलवार उसकी गर्दन काटने के लिए उठा लिया तब वह उनके पैरों पर गिरकर शरणागत हो गया और अपने रहने के लिए केवल पांच जगह मांगा तब सम्राट परीक्षित ने उससे कहा तुम हुए के स्थान पर सोने में वेश्याओं के घर जहां पाप कर्म होते हैं और जहां धर्म होता है वहां पर निवास करो इस पर कलयुग तत्काल ही गायब होकर उनके मुकुट में समा गया इसके बाद उन्होंने कलयुग के प्रभाव से तपस्यारत ऋषि के गले में एक मरा हुआ सांप डाल दिया और उसके पुत्र के श्राप देने के कारण तक्षक नाग के काटने के कारण स्वर्ग धाम सिद्धार्थ गए। 

इसलिए आप ‌ मठ मंदिर धर्म स्थान तीर्थ आश्रम हर जगह यात्रा कीजिए लेकिन ध्यान रखें की 95 प्रतिशत से अधिक कलयुग के साधु संत ऋषि मुनि मनुष्य पुरोहित पांडे कथा वाचक धर्म गुरु और इन स्थानों से जुड़े हुए नौकर चाकर सब के सब दुराचारी मानस मंदिर महिला का सेवन करने वाले और पंचमाकर संयुक्त होते हैं सावधानी रखनी आवश्यक है वरना आपका भी शोषण हो जाएगा चौकिया धाम में जाकर आप पुरोहित पंडितों की अश्लीलता पैसों की लालच और महिलाओं के प्रति गंदे व्यवहार को अपनी आंखों से देख सकते हैं।

एक बात और भी कहना चाहता हूं कि कलयुग का प्रभाव स्त्रियों और लड़कियों पर भी है जितने भी कांड हो रहे हैं 99% उनकी सहमति और रजामंदी से हो रहे हैं ‌ लेकिन जब उनका काम हो जाता है कुकर्मे पूरा हो जाता है ‌ या जब संबंधित व्यक्ति से लाभ या पैसा मिलना बंद हो जाता है या जब वह पकड़ी जाती हैं तो सर आप पुरुषों पर लगाकर खुद दूर है जाती हैं इसलिए सभी को सावधानी रखना आवश्यकहै। 

यदि कोई भी महिला किसी साधु संत महात्मा ज्योति धर्मगुरु के पास अपने पति माता-पिता या परिवार की चोरी से आती है कोई भी स्त्री या लड़की विनाशकारी मंत्र या सम्मोहन विद्या सिखाती है कोई भी स्त्री या लड़की अकेले में बार-बार उनसे मिलने जाती है तो वह स्वयं ही उनको गलत काम का आमंत्रण देती है ऐसे में इन वर्ग से जुड़े लोगों को सावधान रहना चाहिए और किसी भी महिला या लड़की को अकेले अपने आश्रम मठ मंदिर में आने नहीं देना चाहिए यदि वे ऐसा करते हैं तो राम रहीम आसाराम बापू संत रामपाल और अशोक खैरात की तरह उनका पतन निश्चित है। 


एक बात और इस समय कलयुग में कम से कम 60 से 90% साधु संत महंत धर्म गुरु मुस्लिम या क्रिश्चियन होते हैं जो सनातन धर्म को भगवा वस्त्र पहनकर बदनाम करते हैं और स्त्रियों लड़कियों का जमकर शोषण करते हैं और पैसा भी वसूली करते हैं धर्म स्थान में टीका लगाने से लेकर फल फूल माला बेचने का अधिकतर काम यही करते हैं जो उसे दूषित करके बेचते हैं ‌ कितने तो पुजारी पांडे मुस्लिम बन गए हैं जिन्हें पहचान पाना बहुत मुश्किल है सलीम वास्तविक जैसे लोगों का उदाहरण अभी-अभी सामने आया है इसलिए पहले जांच परख कर तभी किसी पर विश्वास करना चाहिए 


इस प्रकार यह निष्कर्ष निकलता है कि सनातन धर्म मूल रूप से जो है वह दुनिया का सबसे सुंदर सबसे श्रेष्ठ सबसे उदार सबसे कल्याणकारी सबसे वैज्ञानिक प्रकृति और पर्यावरण के अनुकूल धरती के हर मनुष्य का धर्म है इसी तरह 100 वर्ष पहले बने हुए सारे मठ मंदिर आश्रम धर्म स्थान तीर्थ और सभी धार्मिक केंद्र बिल्कुल सही है जितने नए बने हुए हैं वह सब प्रचार और विज्ञापन के सहारे बने हुए हैं यदि व्यक्ति जांच पर रखकर इस धरती पर रहकर काम करता है तो वह न कभी धोखा खाता है और ना कभी उसको भयादोहन किया जा सकता है

Sunday, 26 April 2026

अप्रैल के अंतिम सप्ताह और मई के प्रथम सप्ताह के मौसम की प्रामाणिक भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर

अप्रैल के अंतिम सप्ताह और मई के प्रथम सप्ताह के मौसम की प्रामाणिक भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 

अप्रैल महीने में 14 अप्रैल से लगातार अग्निवर्ष हो रही है और इस कालखंड में लगातार उच्चतम तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 से 30 डिग्री सेल्सियस बना हुआ है और हवा लगातार पश्चिम और उत्तर पश्चिमी बनी हुई है ‌ सापेक्षिक आर्द्रता के भयंकर रूप से सात प्रतिशत तक गिर जाने से चारों तरफ अग्नि वर्षा और शरीर सुख जाने का मौसम लगातार बना हुआ है अधिकतम आद्रता इस बीच 40 से 50% बनी हुई है हवा की गति लगातार 15 से 25 किलोमीटर प्रति घंटा और हवा के झोंके 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा अंधड़ ‌ और कहीं कहीं आंधी तूफान में बदलते चले जा रहे हैं ‌ अप्रैल महीने में लगभग 100 वर्ष में 45 डिग्री सेल्सियस पर कभी पार नहीं हुआ था लेकिन इस बार कई पारा 45 डिग्री सेल्सियस पार कर चुका है और अभी अप्रैल के अंतिम सप्ताह में इसके 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाने की आशा है।

अब सभी को यह उत्सुकता है की आने वाला अंतिम अप्रैल का सप्ताह कैसा रहेगा सबसे पहले दवाओं की गति देखा जाता है अभी लगातार पश्चिम और उत्तर पश्चिमी हवा 2 दिन तक इसी तरह कायम रहेगी और इसकी गतिविधि 15 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी तापमान 2 दिनों तक चरम पर पहुंच जाने की आशा है विशेष करके 26 और 27 अप्रैल को इसके 46 डिग्री सेल्सियस छू लेने की संभावना है न्यूनतम तापमान भी 30 से 31 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाएगा जिससे सबको बहुत अधिक परेशानी होगी ‌ दो-तीन दिनों के बाद हवा की दिशा उत्तर उत्तर पूर्वी और फिर पूर्वी हो जाएगी कल अर्थात 26 अप्रैल को आंधी तूफान के साथ मध्यम घने बादल होंगे लेकिन वर्षा नहीं होगी‌।

28 से 30 अप्रैल के बीच एक बार फिर से मौसम तेजी से बदल जाएगा जब मध्य घने बादल घने बादलों में परिवर्तित हो जाएंगे और विशेष कर 29 और 30 अप्रैल को हल्की वर्षा गरज चमक और तूफान तथा वज्रपात के साथ जौनपुर ही नहीं दूर-दूर तक होने की आशा बन रही है इन सभी घटनाओं में एक दिन आगे पीछे हो सकता है तो वायु गुणवत्ता सूचकांक लगातार 50 से 100 के बीच अच्छा बना रहेगा पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 8 से 10 के बीच बहुत भयानक रहेगी ‌ इसके बाद 30 अप्रैल से तापमान गिरेगा और इसके अधिकतम तापमान में 10 से 12 डिग्री तक गिरने की संभावना है‌ न्यूनतम तापमान में भी 4 से 6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आएगी और ऐसी संभावना है कि एक में से 7 में के बीच अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 से 25 डिग्री सेल्सियस रहेगा इस प्रकार में का प्रथम सप्ताह अपेक्षाकृत कम गर्म रहेगा और दूसरे सप्ताह से फिर भयंकर गर्मी शुरू हो जाएगी गर्मी का प्रचंड प्रहार मैं और जून में भी आंधी पानी वज्रपात झंझा झकोर घन गर्जन वज्रपात वारिदमाला आंखों को चकाचौंध ‌ कर देने वाली विद्युत के साथ जारी रहेगा मैं और जून में भयंकर चक्रवार्ती आंधी आ सकती है। 

इस प्रकार मौसम का प्रमाणिक वर्णन अप्रैल के अंतिम सप्ताह और मैं के प्रथम सप्ताह के लिए ज्योतिष पंचांग गणित और विज्ञान तथा उपग्रह से प्राप्त आंकड़े और भारत की देसी कहावत और पशु पक्षियों कीट पतंगों  ‌ की चाल और व्यवहार के अध्ययन के बाद 49 वर्षों की तरह आप सभी के जनहित के लिए प्रकाशित किया जा रहा है।

24 से लेकर 27 अप्रैल तक भयंकर गर्मी के जौनपुर और भारत के सारे कीर्तिमान टूटेंगे सभी लोग सावधान रहो हमेशा की तरह 49 वर्षों से लाखों भविष्यवाणियों की तरह यह सुझाव और चेतावनी भी दे रहा हूं

मौसम की भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक  अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 
24 से लेकर 27 अप्रैल तक भयंकर गर्मी के जौनपुर और भारत के सारे कीर्तिमान टूटेंगे सभी लोग सावधान रहो हमेशा की तरह 49 वर्षों से लाखों भविष्यवाणियों की तरह यह सुझाव और चेतावनी भी दे रहा हूं

  प्रचंड हवाओं भीषण गर्मी के साथ आज से ‌‌ बरसेगी आग चलेगी लू अर्थात तापलहर ‌ मच जाएगा हाहाकार ‌ एक सप्ताह तक होगी अग्नि वर्षा तापमान हो जाएगा 45 डिग्री सेल्सियस के पार  बिल्कुल सूखा भयंकर गर्मी तेज हवा वाला मौसम 

आज का अधिकतम तापमान 45  डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के साथ बहुत ही भीषण गर्म होगा और भीषण गर्मी की शुरुआत ‌ आज सुबह से ही हो जाएगी ।‌ दिन तेज चटक शीशे जैसी धूप  हल्के बादल वाला रहेगा।‌‌ सापेक्षिक आर्द्रता 9 प्रतिशत तक गिर जाने और भयंकर गर्मी पैदा करने वाले बादलों के कारण दिन भयंकर गरम और असह्य होगा।‌ अधिकतम सापेक्षिक आर्द्रता भी गिरकर 30% हो जाएगी आज और 3 दिन तक बाहर निकालने योग्य मौसम नहीं रहेगा

कल अधिकतम तापमान 46डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस रहेगा हल्के बादल रहेंगे भयंकर तापलहर  लू के साथ आंधी अंधड़ तूफान  ‌‌तेज हवा  रहेगी और हवा की गति तेज होगी ‌ शरीर को जलाने वाली और सुखा देने वाली गर्मी सबको झुलसा कर रख देगी ‌ चारों हाहाकार मच जाएगा।

इस बीच चार-पांच दिनों तक जौनपुर  सहित संपूर्ण भारत    आंधी तूफान बहुत तेज हवा और अंधड़ ‌ लगातार विद्यमान रहेगा हवा की दिशा पश्चिम और हवा की गति 15 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा होगी सापेक्षिक आद्रता  9% से लेकर 40% के बीच और वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 से लेकर 100 के बीच रहेगा पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 9 से 11 के बीच रहेगी 

हमारे अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर ‌ द्वारा ‌ चेतावनी दी जाती है कि 10 से 15 दिन अर्थात 9 से  27 अप्रैल तक मौसम बिल्कुल साफ और सूखा भयानक रहेगा इसी बीच किसान अपना खेती किसानी का सारा काम समाप्त कर ले इसके बाद मौसम फिर से भयानक रूप से बिगड़ेगा ।‌‌ 27 अप्रैल के आसपास एक दो  दिन आगे पीछे हल्की वर्षा का योग बन रहा है किसान सावधान रहे‌ 27 अप्रैल से  1 मई के बीच कभी भी वर्षा हो सकती है इसके बाद थोड़ा बहुत एक-दो दिन आराम रहेगा।

मौसम आंधी तूफान अंधड़ तेज़ हवा भयंकर गर्मी का यह खेल अप्रैल और मई दोनों महीना में चलता रहेगा और सभी सरकारी गैर सरकारी मौसम विभागों के विपरीत इस बार का मौसम बहुत ही गर्म ‌ औरभयंकर रहेगा और वर्षा भी कम और अनियमित होगी जिससे सूखा जैसी स्थितियां बनेंगी

 कभी बहुत भयानक वर्षा होगी तो कभी बीच-बीच में सूखा रहेगा। दक्षिण भारत के केरल कर्नाटक महाराष्ट्र आंध्र और उड़ीसा के कई भागों में  ‌ पूर्वोत्तर भारत और हिमालय क्षेत्र में  ‌ 20 से 23 अप्रैल के बीच और मध्य प्रदेश के दक्षिण में छिटपुट वर्षा होगी ‌ अप्रैल के बिल्कुल अंतिम भाग में मौसम में परिवर्तन संभव है।

मानसून के केरल में प्रवेश करने की संभावना 29 में से 5 जून के बीच बन रही है संपूर्ण दुनिया में गर्मी बहुत भयंकर रूप से बढ़ेगी। अकाल महामारी फैलने की संभावना है 

मौसम के आकस्मिक परिवर्तन और उतार-चढ़ाव के कारण रोग बीमारियां बहुत तेजी से फैलेंगे और पक्षियों और पशुओं से रोग फैलेगा । 20 से 30 अप्रैल के बीच दुनिया में भयंकर आंधी तूफान भूकंप ज्वालामुखी विस्फोट विशेष कर जापान और दक्षिण पूर्वी एशिया में आने की और भारत में भी आने की संभावना है

इसलिए सभी लोग भयंकर गर्मी के लिए तैयार रहे चार-पांच दिन तक भयानक लू चलने लगेगी और तापमान 44-47 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाएगा‌ उत्तर पश्चिम उत्तर और मध्य भारत गुजरात और महाराष्ट्र उड़ीसा में यह तापमान 47 डिग्री सेल्सियस को भी पार कर जाएगा।
भयंकर गर्मी और प्रचंड आप लहर का कारण 

पहला कारण 

बुद्धिमान मानव जाति के द्वारा पेड़ पौधे हरियाली और जंगल काटकर उसकी जगह सीमेंट कंक्रीट और एक पत्थर के जंगल बढ़ा देना आप सभी को पता है की एक पत्थर सीमेंट और कंक्रीट दिन पर गर्मी शक कर जमीन गर्म करते हैं और रात को वह गर्मी वापस वायुमंडल में छोड़ते हैं जिससे रातें भयंकर गर्म हो रही है पहले ऐसा नहीं होता था रात ठंडी हो जाती थी क्योंकि जमीन कच्ची हरी-भरी पेड़ पौधों और पानी से युक्त होती थी

[4/20, 5:42 PM] Dr  Dileep Kumar singh: दूसरा कारण किसी भी प्रकार के पश्चिमी विक्षोभ का ना बनना और साफ स्वच्छ आसमान 

तीसरा कारण है तेज सूखी हवाओं का चलना और नमी का भयंकर रूप से गिरकर सात  प्रतिशत तक पहुंच जाना

चौथा कारण है जल के स्रोत तालाब कुएं ए बावली का सूख जाना और जमीन की मिट्टी की जगह कंक्रीट और सीमेंट की सड़क ‌ कच्चे मकान और छप्पर की जगह सीमेंट और कंक्रीट के मकान का जाल विछ जाना

और सबसे बड़ा कारण है परम बुद्धिमान मानव जाति के द्वारा भाषणों में और कागजों पर हरियाली और वृक्षारोपण करके तालाब कुआ बावली को केवल भाषण से भर देना मौके पर पूरे जमीन बंजर उसर वृक्ष विभिन्न और जल विहीन होना
 और अंतिम कारण है सूर्य पर उत्पन्न होने वाले प्रचंड विस्फोट के कारण और सौर कलंक जिससे लाखों किलोमीटर लंबी ज्वाला धरती समेत पूरे सौरमंडल तक फैल जाती हैं
[4/20, 5:44 PM] Dr  Dileep Kumar singh: बाकी हरियाली का लगातार पेड़ पौधों के साथ कम होना सीमेंट और कंक्रीट के जंगल का बढ़ना जो ग्रीन हाउस प्रभाव उत्पन्न करताहै

भारत की सभी सनातनी जनता से निवेदन है कि एक साल के लिए सारे तीरथ व्रत मंदिर जाना छोड़कर अपने धर्म के लिए काम करें।

भारत की सभी सनातनी जनता से निवेदन है कि एक साल के लिए सारे तीरथ व्रत मंदिर जाना छोड़कर अपने धर्म के लिए काम करें।

 हराम के पैसे खाकर पुलिस प्रशासन और सरकार जो इनको धूप में 10-10 घंटे खड़ा करती है ‌ गुंडागर्दी करते हैं लूट मार करते हैं और विशिष्ट लोग उनके आगे ही दर्शन करके चले जाते हैं।

 और इन्हीं ‌ करोड़ों श्रद्धालु जनता के के दान दक्षिणा और पैसे के चढ़ाने से 2 से 5 कुंतल तक के साधु संत महंत कथा वाचक गुरु योगाचार्य गाल गुलाबी नैन शराबी हैं और पंचमकार का भोग करते हुए सादा जीवन उच्च विचार को उपदेश देते हैं अपने आप ही जमीन पर आ जाएंगे 

और 1 साल में जब जनता के पैसे भोजन सामग्री सोना चांदी आभूषण समाप्त हो जाएंगे तबऔर गांव-गांव में घूम कर माइक से प्रचार करेंगे की हे सनातनी श्रद्धालु जनता आओ अब हम आपका स्वागत करेंगे और सीधे-सीधे दर्शन दिया जाएगा।

 लेकिन जब इसको मूर्ख सनातनी जनता समझ पाए तब तो 100 साल 200 साल तक यह लोग भोग करते हुए सोना चांदी हीरे मोती जवाहरात मंदिरों में धर्म स्थान पर छिपा कर रखेंगे और एक झटके में बाहर का आक्रमणकारी सब कुछ लूट ले जाएगा ।

कत्लेआम नरसंहार भी होगा वह भी निर्दोष सनातनी जनता का अलग से यदि यह बात आप लोगों को समझ में आ जाए तो ठीक है नहीं आ जाए तो जाकर खुली धूप में बरसते हुए पानी में और कड़कड़ाती ठंड में ठोकर खाईए लाठी गोली खाईए हमारा क्या जाता है ।

जिस तरह तीर्थ स्थान में तीर्थ यात्रियों के साथ बदसलूकी की होती है लाठी चार्ज होता है उसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता और तो और हर कदम पर उनसे लूटमार की जाती है कहीं धर्म के नाम पर तो कहीं गुंडागर्दी करके शीतला चौकिया से लेकर हर धाम में यही हाल है ‌ और हराम का खाकर गर्म हुई या पुजारी पांडा कुछ अपवाद छोड़कर महिलाओं से अश्लीलता और छेड़खानी करने से भी बाज नहीं आते हैं धर्म स्थान में रहते हुए इनका यह हाल है तो यह धर्म की और सनातन जनता की क्या सेवा करेंगे ‌ अभी केदारनाथ में जो भयानक लाठी चार्ज श्रद्धालु तीर्थ यात्रियों पर हुआ वह किसी भी प्रकार से स्वीकार करने योग्य नहीं है-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

Friday, 24 April 2026

अर्जुन और कर्ण दोनों में कौन महान था

अर्जुन और कर्ण दोनों में कौन महान था



-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 

मैं बिल्कुल निष्पक्ष और बिल्कुल सही-सही तथ्य रख रहा हूं मेरे करना आपका काम है की महानतम योद्धा अर्जुन थे या कर्ण था 

पहली बात महानतम व्यक्ति के लिए शांत रहना उत्तेजित न होना और अपनी शक्ति का सही प्रयोग करना चाहिए यह अर्जुन में पूरी तरह से था जबकि कारण में इसका अभाव था वह बहुत हठी दुराग्रही एवं स्वयं को महान समझने वाला व्यक्ति था ‌ जो एक चपरासी होकर कलेक्टर की कुर्सी जबरदस्ती हासिल करना चाहता था वह अभी बिना परीक्षा उत्तीर्ण किए हुए 

यदि अस्त्र शस्त्रों की तुलना किया जाए तो भी अर्जुन करण से बहुत आगे थे सभी दिव्यास्त्र को छोड़ दिया जाए तो अकेले पाशुपत अस्त्र है संपूर्ण सृष्टि के विनाश करने के लिए काफी था करण ने अपने समस्त विनाशकारी अस्त्र-शस्त्रों का प्रयोग कर दिया था लेकिन अर्जुन सक्षम होने पर भी पाशुपत अस्त्र का प्रयोग नहीं किया अन्यथा कारण तुरंत समाप्त हो गया होता।

करण में दया और क्षमता तथा मानव गुना का पूर्ण अभाव था एक महान योद्धा होते हुए भी और दानवीर होते हुए भी उसके यह अवगुण उसको साधारण श्रेणी में खड़ा कर देते हैं लेकिन जो लोग कर्ण की तरह हैं रावण की तरह हैं कंस दुर्योधन जरासंध और कालयवन ‌ जैसे हैं वह लोग हमेशा कारण को बढ़ा चढ़ा कर प्रस्तुत करते हैं जैसे एक मदिरा पीने वाला हमेशा मदिरा को सर्वश्रेष्ठ सिद्ध करता है।

करण के पास जन्म जात अवैध कवच और कुंडल था उसको दान करने के बदले उसने अमोघ वासवी शक्ति इंद्र से मांग लिया जिससे उसकी दानवीरता पर प्रश्न चिन्ह लग गया यदि उसने यह शक्ति ठुकरा दी होती तो निश्चित रूप से उसकी महानता सिद्ध होती‌ दान करते समय भी अर्जुन को महान शत्रु और प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखना और करने की शक्ति प्राप्त करना कहीं से भी उचित और महान नहीं कहा जा सकता है। 

यदि मूल महाभारत को अध्ययन करेंगे तो आपको प्राप्त होगा कि दुर्योधन और शकुनि तथा दुशासन की सभी छल कपट विश्वास घाट की योजनाओं में कर्ण सम्मिलित था‌ चाहे अज्ञातवास हो चाहे उनका जलाकर मारने वाली स्थिति हो या वन में जाकर पांडवों की दुर्दशा देखना हो या फिर दुर्वासा को पांडव लोगों के यहां भेज कर उनको श्राप दिलाना हो या विराटनगर में युद्ध करना हो हर जगह कर्ण उपस्थित था यह दुआ चाहता तो बलराम की तरह अलग भी रह सकता था कम से कम इस अधर्म के युद्ध में तो उसे ऐसा ही करना चाहिए था।

अंग राज कर्ण ने ‌ राजकुमारों की हस्तिनापुर में द्रोणाचार्य द्वारा ली जा रही अस्त्र-शस्त्र परीक्षा में बिना किसी पात्रता और प्रवेश पत्र के जबरदस्ती घुसकर वातावरण में प्रदूषण भरकर तनाव पैदा कर दिया यह तो ऐसा ही दृश्य था कि बिना सिविल सेवा की परीक्षा दिए जबरदस्त की उसके साक्षात्कार में घुस जाना और यह कहना कि मैं इसके सर्वथा योग्य हूं ऐसा ही होता है इतना ही नहीं सारी चेष्टा करके भी वह संध्या काल तक अर्जुन को परास्त नहीं कर पाया था। 

कारण यदि चाहता तो वारणावत में किसी के द्वारा युधिष्ठिर को सूचना देकर उन्हें बचा सकता था जबकि वह जानता था कि पांडव उसके सगे भाई हैं और माता कुंती उसकी सगी मां है फिर भी उसने बढ़ाने का कोई प्रयास नहीं किया ‌ इसी तरह उसने भरी सभा में कल वधू द्रौपदी की रक्षा का प्रयास किस लिए नहीं किया क्योंकि स्वयंवर में वह द्रोपदी का वर्णन नहीं कर पाया था इतने निम्न और घटिया स्तर के व्यक्ति को अर्जुन से तुलना करना पूरी तरह मूर्खता है 

अर्जुन की महानता वर्णन से परे है जब इंद्रलोक में गए तो संपूर्ण ब्रह्मांड की सर्वश्रेष्ठ सुंदरी जिसके लिए बड़े-बड़े ब्रह्म ऋषि लालायित रहते हैं उसे उर्वशी को अर्जुन ने तत्काल ही ठुकरा कर एक ब्रह्मांड का कीर्तिमान स्थापित किया जो कोई सोच भी नहीं सकता इतना ही नहीं उत्तरा की शिक्षा देने वाले अर्जुन से जब कृतज्ञता के रूप में विराट राज ने उत्तर का विवाह अर्जुन से करने को कहा तो अर्जुन स्तब्ध रह गए उन्होंने कहा यह तो मेरी बेटी के समान है और ऐसा करने पर हमेशा के लिए गुरु शिष्य परंपरा कलंकित हो जाएगी यह आज के उन शिक्षक गुरु लोगों के लिए एक सर्वश्रेष्ठ शिक्षा है जो अपने बेटी समान छात्राओं से कुकर्म करते हैं इसके बाद अर्जुन की महानता पर कोई? नहीं रह जाता।‌ उत्तर पूरे विश्व की सर्वश्रेष्ठ सुंदरी योग्य कन्या थी और उर्वशी ने तो बड़े-बड़े ब्रह्म ऋषि और ऋषि मुनि सुर नर मुनि साहब की तपस्या भंग ही कर दिया था‌।

करण को अच्छी तरह मालूम था कि द्रौपदी पांडव अभिमन्यु माता कुंती सब उसके अपने हैं जबकि पांडव पक्ष को अज्ञात नहीं था अन्यथा वे कर्ण को राजा बनाकर स्वयं जंगल में चले गए होते ‌ करण के सामने ही धर्म युद्ध में 16 वर्ष के अभिमन्यु का निर्माण हत्याकांड हुआ और करण ने ही इसमें सबसे प्रमुख भूमिका निभाई अभिमन्यु का कवच कोई नहीं काट सकता था जिसे कर्ण ने काटा था फिर वह कैसे महान हो सकता था 

अर्जुन और पांडव इतने महान थे कि जैसे ही उनको पता लगा कि कर्ण उनके बड़े भाई थे उनके दुख क्रोध और शोक की कोई सीमा ही नहीं रही और युधिष्ठिर ने तो माता कुंती को श्राप दे दिया की है मां आज से स्त्रियों को कोई भी बात उनके हृदय में पच नहीं पाएगी और उन्होंने पूरे सम्मान से कर्ण का अंतिम संस्कार करके उसको जलांजलि दिया था आप स्वयं समझ सकते हैं कि कौन अधिक महान था।

कर्ण ने धोखे और छल कपट से स्वयं भगवान परशुराम से अस्त्र-शस्त्र विद्या सीखी और स्वयं को ब्राह्मण बताया‌ बाद में जब उसका भांडा फूटा तो भगवान परशुराम के क्रोध की कोई सीमा न रही गुरु से छल कपट और झूठ बोलने से बड़ा पाप दुनिया में कोई नहीं हो सकता यह कारण की महानता पर प्रश्न चिन्ह लगता है इसके अतिरिक्त गाय का का वध और ब्राह्मण का श्राप उसको मिला जबकि अर्जुन के साथ ऐसा कुछ नहीं था।‌ अर्जुन नेटवर्क ब्राह्मण पुत्र और गुरु सांदीपनी के लिए साक्षात यमलोक में जाकर यमराज से युद्ध किया और उन्हें परास्त किया था अर्जुन ने स्वयं सृष्टि के आदि देव भगवान शिव को भी युद्ध करके संतुष्ट कर दिया था जबकि कर्ण के साथ ऐसा कुछ नहीं था।

कारण यह जानता था कि भगवान श्री कृष्ण साक्षात भगवान श्री हरि विष्णु के अवतार हैं लेकिन उनके भी शिक्षा का कारण के अभिमानी और मूर्ख हृदय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा वह केवल अंग्रेज बना दिए जाने की कृतज्ञता के कारण पूरी तरह से अधर्मी और अत्याचारी दुर्योधन के साथ बना रहा जबकि कृष्ण ने उसको यह भी बता दिया कि तुम पांडवों के सबसे बड़े भाई हो और कुंती तुम्हारी सगी मां है और यह भी कहा कि कम से कम तुम युद्ध से अलग हो जाओ तो यह संपूर्ण धरती का विनाश करने वाला युद्ध रुक जाएगा परंतु उसने स्वयं भगवान की भी एक नहीं सुनी एक समय तो उसने भगवान श्री कृष्ण से लड़ाई करके उनका चक्र ही जीने का प्रयास किया था इतना दुस्साहसी व्यक्ति महान कैसे हो सकता है।

कर्ण के सामने महाभारत के सारे अधर्म अत्याचार अन्याय घटित हुई लेकिन कभी भी वह धर्म न्याय और सच्चाई के पक्ष में नहीं दिखा‌‌। अर्जुन से प्रतिस्पर्धा करना ठीक था लेकिन उसे अर्जुन के अन्य महान गुणों को भी अपनाना चाहिए था उसकी सारी शक्तियां उनके कवच कुंडल और दिव्यास्त्रों में छिपी हुई थी ‌ जबकि अर्जुन ने अकेले ही दिग्विजय के समय सारी धरती को जीत लिया था। 

अब सीधे-सीधे कारण और अर्जुन की युद्ध संबंधी महानता और अस्त्र-शस्त्र कुशलता पर आ जाते हैं जब त्रिगर्तराज सुशर्मा ने दुर्योधन को बुरी तरह पराजित करके राशियों में बांधकर अपमानित किया तब कर्ण पराजित होकर भाग आया जो काम करने सहित सारी कौरव सुना नहीं कर पाई उसी को अर्जुन ने अकेले बुरी तरह हार कर दुर्योधन सहित सारी कौरव सी को मुक्त किया था अब आप खुद अनुमान लगा लीजिए कि कौन परम अतिरथी योद्धा था।

करण को अर्जुन को करने और हारने के अनेक मौके मिले लेकिन वह कभी भी सफल नहीं हो पाया जबकि उसे समय तक उसके पास सारे दिव्यास्त्र के साथ इंद्र की दी हुई अमोघ शक्ति भी थी और कवच कुंडल भी था जब रंगभूम में कौरव पांडवों की शस्त्र परीक्षा हो रही थी तो कारण जबरदस्ती अर्जुन से युद्ध नियमों को तक पर रखकर किया फिर भी अर्जुन को हरा नहीं पाया 

इसी तरह जब विराटनगर में विराट कौरव सेना महान अतिरथी योद्धाओं द्रोणाचार्य भीष्म पितामह कृपाचार्य कारण दुर्योधन अश्वत्थामा दुशासन के साथ गई थी तब अकेले ही अर्जुन ने संपूर्ण कौरव सी को हराकर विश्व कीर्तिमान स्थापित किया था चाहते तो सबको मार कर उसी दिन संपूर्ण राज्य पथ ले सकते थे लेकिन दया और करुणा से भरे अर्जुन ने छोड़ दिया और उसे दिन एक नहीं दो दो बार कारण को अर्जुन ने बुरी तरह से घायल करके छोड़ दिया चाहते तो उसका उसी दिन अंत कर सकते थे यदि कारण उनकी जगह होता तो अभिमन्यु की तरह अर्जुन को मार देता इससे स्पष्ट है कि करण अर्जुन का वध करने में सक्षम नहीं था 

महाभारत युद्ध में भीष्म पितामह के पराजय के बाद कारण लगातार 7 दिन तक कौरव सेवा में अर्जुन से लड़ता रहा लेकिन अर्जुन को मार नहीं पाया इस बीच अर्जुन ने उसे कई बार पराजित करके भगा दिया था कारण के जीवित रहते ही दुर्योधन के 100 भाई दुशासन शकुनी सहित द्रोणाचार्य और सभी महान योद्धा मारे गए वह किसी को बचा नहीं पाया जब किसी भी तरह वह घटोत्कच से युद्ध में नहीं जीत सका तब उसने अमोघ शक्ति से उसका वध कर दिया इस प्रकार कारण महान नहीं था बल्कि उसके दिव्य अस्त्र-शस्त्र महान थे चक्रव्यूह निर्माण के दिन अभिमन्यु ने उसको दो बार परास्त किया था और उसके देखते-देखते दुर्योधन के पुत्र लक्ष्मण का वध कर दिया था कर्ण कुछ भी नहीं कर सकता था जबकि अर्जुन के सामने उनके एक भी योद्धा का वध कोई भी महारथी योद्धा नहीं कर पाया था सात्यकि को उन्होंने मृत्यु के मुंह से बचाया था।

वास्तव में लोग फिल्म टीवी चैनल सोशल मीडिया और मीडिया तथा धारावाहिक देखकर कारण को बहुत महान समझने की भूल करते हैं इसीलिए उनका यह सोचना है कि कर्ण बहुत महान योद्धा था जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं था ‌ कुछ महा मूर्ख विद्वान तो यहां तक कहते हैं कि अर्जुन ने हत्या कर्ण का  वध किया था जो पूरी तरह से झूठ है‌ मूल महाभारत पढ़ कर देखो जब कर्ण का पहिया रस में धंस गया तब दयालु अर्जुन ने अपना गांडू धनुष रख दिया और श्री कृष्ण के बहुत समझाने पर ही कारण से लड़ने को तैयार हुए और कारण रस का पहिया निकलते हुए भी अर्जुन से लगातार युद्ध करता रहा इस क्रम में उसने ब्रह्मास्त्र सहित अनेक दिव्य अस्त्र शस्त्रों का प्रयोग किया जिसे अर्जुन ने काटकर उसको दबा दिया और जी अंजलि अस्त्र का प्रयोग अर्जुन ने रौद्रास्त्र भर कर किया था उसे अस्त्र का कर्ण के पास कोई भी उत्तर नहीं था इसलिए वह मारा गया।‌ करण इतना बड़ा मूर्ख और अभिमानी था कि रंगभूमि में केवल अर्जुन को पराजित करने के लिए उसने भार्गव अस्त्र का प्रयोग करना चाहा था जो सूर्यास्त होने के कारण नहीं कर पाया यदि अर्जुन ने पाशुपत अस्त्र उठा लिया होता तो कर्ण का वही वध हो गया होता। 

‌‌ अर्जुन के अलावा सात्यकी कर्ण को चार बार अभिमन्यु ने चार बार सुशर्मा ने एक बार भीम ने चार बार और प्रद्युम्न ने एक बार हराया था ‌ और सबसे बड़ी बात है कि हारने के बाद कारण हर बार युद्ध भूमि छोड़कर भाग जाता था इस प्रकार कर्ण के अजेय योद्धा होने का भ्रम अपने आप टूट जाता है वैसे कारण को बेचारा बनाकर अनुचित लाभ लेने के लिए फिल्म और धारावाहिक वालों ने उसको इतना बड़ा चढ़ा कर दिखा दिया है की असली सच ही छप गया है उसे तो झूठ-मूठ में पहाड़ पर चढ़कर इंद्र पर आक्रमण करके इंद्र को परास्त होते हुए दिखाया गया है जो पूरी तरह से सत्य और अनुचित है। वास्तव में कर्ण प्राचीन काल में एक राक्षस था जिसका नाम दंभोद्भव था उसने ब्रह्मा जी से कठिन वरदान प्राप्त किया जिसके कारण भगवान विष्णु को चार बार अवतार लेना पड़ा जिसमें नर नारायण और कृष्ण अर्जुन भी सम्मिलित हैं

उपर्युक्त बिल्कुल सही तथ्य मूल महाभारत से लिए गए हैं अब आप लोग यह चुनने के लिए स्वतंत्र हैं की कर्ण एक महानतम योद्धा था या परमवीर अर्जुन अपने समय के सबसे महान योद्धा थे ‌ एक बात और है कि अर्जुन के पास भगवान शिव का पाशुपत अस्त्र था जो तीनों लोकों को नष्ट कर सकता था परंतु कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अर्जुन ने उसका प्रयोग नहीं किया क्योंकि वह धरती और मानवता को नष्ट नहीं करना चाहते थे ‌ जबकि कारण बहुत ही क्रोधी अहंकार पूर्ण और उतावला होने वाला योद्धा था जिसे हर प्रकार के उपलब्ध है दिव्या स्टारों का प्रयोग कर लिया था -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

धरती पर पतिव्रता धर्म का प्रतिमान स्थापित करने वाली भगवती सीता मां का जन्मदिन (24 अप्रैल वैशाख शुक्ल पक्ष नवमी)-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

धरती पर पतिव्रता धर्म का प्रतिमान स्थापित करने वाली भगवती सीता मां का जन्मदिन (24 अप्रैल वैशाख शुक्ल पक्ष नवमी)-,



डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 

अपने पति का अनुसरण करने के लिए माता और पिता दोनों के राजपाट को छोड़कर जंगल जंगल भटकने वाली और हर कष्ट सहन करने वाली जीवन भर दुख सहन करने वाली भगवती सीता मां का वैशाख महीने की नवमी की तिथि को जयंती मनाई जाती है । त्रेता युग में जब महाराजा जनक के राज में  चारों तरफ महान अकाल और सूखा पड़ा था तब विद्वान और ज्योतिषी लोगों की सलाह पर राजा जनक ने अपनी पत्नी के साथ सोने का हल खेत में चलाया था और वह हल एक घड़े से टकरा गया था।

 जिसको  निकालने पर घड़े से एक अद्भुत अलौकिक कन्या रत्न की प्राप्ति हुई और हल की फॉर से बने सीतों के कारण उनका नाम सीता रखा गया‌ जो बाद में जनक नंदिनी मिथिलेश नंदिनी वैदेही जैसे अनगिनत नामों से विख्यात हुई उनके जन्म लेते ही अर्थात घड़े के मिलते ही आसमान में घनघोर घटाएं छा गई और मूसलाधार वर्षा से सारा अकाल और सूखा मिट गया था।‌ और धरती पर हर दिशा में हरियाली छा गई थी सबसे अद्भुत बातें है कि सर्वप्रथम भगवान श्री राम चैत्र माह की नवमी को पैदा हुए उसके बाद हनुमान जी चैत्र माह की पूर्णिमा और फिर सीता मां भी नवमी तिथि को लेकिन वैशाख माह में पैदा हुई इस प्रकार वह जन्म में भी भगवान श्री राम से छोटी थी।

भगवती सीता के पिता महाराज जनक के भाई सीरध्वज के तीन और पुत्रियां थी । जिनके नाम मांडवी उर्मिला श्रुति कीर्ति थे बचपन में ही सीता जी ने भगवान शिव के उसे प्रचंड धनुष को बगीचे से उठाकर पूजा गृह में रख दिया था जिसको रावण जैसा तथा कथित तीनों लोकों का विजेता भी उठा नहीं पाया था।‌ यह देखकर इस अद्भुत असाधारण करने के लिए जनक जी ने प्रतिज्ञा किया कि इसका विवाह उसी से होगा जो यह धनुष उठाकर उसकी प्रत्यंचा चढ़ा देगा 

सीता जी के बाद होने पर उनका स्वयंवर आयोजित किया गया जिसमें देव दनुज किन्नर नर राक्षस सहित तीनों लोक के महान वीर योद्धा उपस्थित हुए रावण और बाणासुर भी इसमें सम्मिलित थे।‌ लेकिन तीनों लोकों में कोई उसे धनुष को हिला भी नहीं पाया तब भगवान श्री राम जो साक्षात श्री हरि विष्णु के अवतार थे ने धनुष के प्रत्यंचा चढ़कर उसे तोड़ दिया परशुराम का गुरूर चूर-चूर किया और देवी सीता जी के साथ अयोध्या आए इसी क्रम में मांडवी का भरत से ‌ उर्मिला का लक्ष्मण से और श्रुति कीर्ति का शत्रुघ्न से विवाह हुआ।

विवाह के बाद कुछ वर्ष आनंद से बीतने के बाद जब भगवान श्री राम को वनवास हुआ तो भगवती सीता ने राजपाट ससुराल और मायका सब छोड़ और भगवान श्री राम और लक्ष्मण के साथ वन को निकल गई ‌ वहां पर निषाद राज केवट और चित्रकूट में महासती अनसूया और अत्रि ऋषि से मिलकर गहन दंडक वन से होते हुए पंचवटी में चली गई जहां पर हम तेजस्वी मारकंडे और अगस्त ऋषि से उन लोगों को दिशा निर्देश मिले।

कालांतर में खरदूषण भीम के वध और सूर्पनखा की नाक काटने पर ‌ भीषण संग्राम में खरदूषण उसकी सेवा मारी गई तब रावण मरीज की सहायता से साधुवेश धारण कर सीता जी का हरण कर लिया अपार कष्ट और परेशानी जय कर भी माता-पिता अशोक वाटिका में अपने अटल पतिव्रत धर्म पर अधिग रही ‌ और तीनों लोगों के विजेता रावण उनकी सेवा आती कार्य कुंभकरण मेघनाथ के मारे जाने पर लंका विजय के पश्चात अग्नि परीक्षा में अपनी छाया रूपी सीता को जलाकर असली सीता के रूप में श्री राम लक्ष्मण वानर सेवा के साथ निषाद राज से मिलते हुए अयोध्या लौटकर पटरानी बनी 

कालांतर में एक जनता के परिवार के  प्रवाद के कारण भगवान श्री राम की मर्यादा को समझते हुए उन्होंने इससे अच्छा से गर्भवती होने के बाद भी खुद को जंगल में छोड़ने को कहा और ब्रह्म ऋषि वाल्मीकि के आश्रम में रही जहां उनके लव और कुश नाम के दो परम अतिरथी पुत्र पैदा हुए‌ जिन्हें भगवती सीता ने इतना वीर बनाया कि तीनों लोकों की विजेता सी और रावण को मारने वाली राम की सेवा भारत लक्ष्मण शास्त्रों में हनुमान अंगद सुग्रीव विभीषण सभी को इन्होंने परास्त कर दिया 

कालांतर में भगवती सीता अयोध्या आई और भगवान श्री राम ने उनको सादर पत्नी रूप में स्वीकार किया लेकिन अपना बैकुंठ जाने का समय पूरा हुआ जानकर धरती से उत्पन्न सीता माता धरती में समा गई और बैकुंठ में अपना आसन लक्ष्मी के रूप में ग्रहण किया। इसके बाद भगवान श्री राम भी लव और पुष्प को सारा राज पाठ सौंप कर और अमेरिका यूरोप ऑस्ट्रेलिया अफ्रीका लक्ष्मण शत्रुघ्न के पुत्रों को बताकर सारी जनता के साथ सर्दियों में समाहित होकर बैकुंठ लोक चले गए 

भगवती सीता का चरित्र इतना पवित्र और विराट है जिसको लिखने के लिए एक महाकाव्य भी काम हो जाएगा इसलिए वह अनुसूया नर्मदा सती लक्ष्मी और सरस्वती ‌ उर्मिला सुलोचना के समान महा सती मानी जाती हैं ‌ उनका चरित्र रखना केवल अनुकरणीय है बल्कि प्रातः स्मरणीय भी है‌ उनके शराब से शापित होने के कारण अयोध्यावासी कभी विकास नहीं कर पाए और अभिशप्त अयोध्या भी फिर से वह गौरव नहीं प्राप्त कर पाई अयोध्या की रक्षा और उसे पूर्ण बीना से बचने के लिए अमर योद्धा हनुमान जी को नियुक्त करके सब अवतारी लोग अपने-अपने धाम चले गए 

आज के लोग धारावाहिक और चलचित्र देखकर तथा विभिन्न प्रकार के सनातन द्रोही लोगों की रचनाओं को पढ़कर अपने धर्म और देवी देवताओं तथा अवतारी पुरुषों पर जो टिप्पणी करते हैं वह न केवल मोर खाता पूर्ण है बल्कि धर्म विरुद्ध है और विनाश करने वाली है जैसे कुछ लोग भगवान श्री कृष्ण को 1600 रानियां का होना बताते हैं लेकिन उनका मूल पुस्तक में पढ़ने से या भ्रम होता है जब नरकासुर के द्वारा त्याग दी गई रानियां को अपनाने का साहस किसी में नहीं हुआ तब उन्होंने अपने नगर में उन सभी को सम्मान पूर्वक रखा था पहले श्री कृष्ण की तरह एक अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर फिर उसे पर टिकट टिप्पणी करना चाहिए 

इसी तरह भगवान श्री राम पर टीका टिप्पणी करने वाले को पहले भगवान श्री राम बनकर दिखाना चाहिए जो एक बार से ही प्रशांत हिंद अटलांटिक उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव महासागर को सुखा सकते थे जिन्होंने जयंत को एक ही तीर मारा जिसको बचाने पूरे तीनों लोकों में कोई आगे नहीं आया कुंभकरण और रावण जैसे तीनों लोगों के  विजेता को उन्होंने खेल-खेल में मार गिराया। इसीलिए लाखों करोड़ों वर्ष बीत जाने पर भी भगवती सीता और उन जैसे अमर और पवित्र चरित्र के लोग आज भी ‌ अनंत कोटि सूर्य की भांति तीनों लोकों में चमक रहे हैं।

Thursday, 23 April 2026

देश के सभी ‌ दलों चाटुकार उनके के समर्थक लोगों और उनके चापलूस चाटुकार दलाल चमचे मक्खनबाज और 420 ‌ लोगों को एक महीने का मौका देता हूं कि 1947 से एक भी ऐसा प्रधानमंत्री राष्ट्रपति देश के सामने लेकर आए और अपने पार्टी की वास्तविकता दिखाएं-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

जिसे वास्तव में अपने को भारतीय होने का अभिमान हो और जो मन वचन कर्म से देश के लिए समर्पित हो 


जो प्राचीन भारत के गौरव को फिर से स्थापित कर सात महाद्वीप और पांच महासागरों पर सतयुग द्वापर त्रेता की तरह भारत का झंडा लहरा सके 

जो देश में हर प्रकार के मदिरापान नशा और बुरी कृतियों को समाप्त करके देशवासियों में स्वाभिमान और देश प्रेम भर सके 

जिसे देखकर वास्तव में देश की सारी जनता गर्व करें और जो 22 करोड़ विदेशी घुसपैठियों के रूप में भारत में घुस चुके आतंकी रोहिंग्या विदेशी एजेंट बांग्लादेशी पाकिस्तान और गद्दारों को देश से बाहर उनके मूल स्थान पर भेज सके 

जो यूरोप अमेरिका का एजेंट और अरब देशों की कठपुतली ना हो और केवल सनातन धर्म और स्वदेशी का विकास करें 

जिसके दो रूप हाथी के दांत की तरह ना हो और जो अपने चुनावी घोषणा पत्र को वास्तव में लागू करें 


जो ममता बनर्जी लालू मुलायम अखिलेश केजरीवाल तथा इस तरह के अन्य सनातन विरोधी देश विरोधी लोगों को जेल में डाल सके 


जिसे पाकिस्तान के स्वादिष्ट रस भरे आम पसंद ना हो और जो मुस्लिम देशों के हाथों में ना खेलते हो जो ट्रंप की दहाड़ सुनकर डर ना जाए 


जो भारत को सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति खेल शक्ति सैन्य शक्ति अंतरिक्ष शक्ति और सबसे बड़ा देश बना सके 

देश के सभी ‌ दलों चाटुकार  उनके के समर्थक लोगों और उनके चापलूस चाटुकार दलाल चमचे मक्खनबाज और 420 ‌ लोगों को एक महीने का मौका देता हूं कि 1947 से एक भी ऐसा प्रधानमंत्री राष्ट्रपति देश के सामने लेकर आए और अपने पार्टी की वास्तविकता दिखाएं-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

Wednesday, 22 April 2026

आखिर क्यों प्रचंड और विकराल हो रही है गर्मी

आखिर क्यों प्रचंड और विकराल हो रही है गर्मी -
डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 

भारत सहित संपूर्ण दुनिया में गर्मी की तीव्रता और उसकी अवधि दोनों लगातार बढ़ रही है जिस पर बहुत गहराई से विचार मंथन करने के बाद निम्नलिखित तथ्य सामने आते हैं -

सबसे पहला कारण है लगातार धरती पर हरित क्षेत्र का ‌ हरियाली पेड़ पौधों और वनस्पतियों का कम होते जाना और सीमेंट तथा कंक्रीट  ईंट पत्थर के जंगलों का लगातार बढ़ते चला जाना है ‌‌ इसके कारण धरती सूर्य की गर्मी को शक कर धडधकने लगती है जैसा की पथरी इलाकों और सीमेंट की सड़क पर आपने देखा होगा।

इन सब कारणों से जहां धरती पर ऑक्सीजन की कमी हो रही है वहीं पर वायु गुणवत्ता सूचकांक लगातार खराब होता जा रहा है और पराबैंगनी किरणों की तीव्रता भी बहुत तेजी से बढ़ रही है इसलिए गर्मी जलाने और झुलसाने वाली बन गई है ।

जितना ही अधिक धरती की सतह पर सीमेंट कंक्रीट और ईंट पत्थर बढ़ते चले जाएंगे उतना ही गर्मी और ऊष्मा का परावर्तन और अवशोषण बढ़ेगा और यह एक कच्चे मकान और पक्के मकान में रहकर आसानी से देखा जा सकता है
[4/21, 6:05 PM] Dr  Dileep Kumar singh: लगातार गर्मी बढ़ने का दूसरा कारण लगातार सूखी पछुआ तेज हवाएं चलना और किसी भी विक्षोभ के जन्म न लेने का कारण है ‌ जिसके कारण गर्म हवाएं शुष्क जमीन और भट्ठी हुई धरती लगातार गर्म होती चली जाती है और इस समय भारत का 90% भूभाग आज की धरती बन गया है और अधिकांश भागों का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से लेकर 47 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया है जब ‌ लगातार आंधी तूफान और विक्षोभ का जन्म होता है तब तापमान नियंत्रित हो जाता है जो कि इस बार 15 अप्रैल से 25 अप्रैल तक बिल्कुल नहीं होना है‌ जिसके कारण पूरे देश में जम्मू कश्मीर हिमाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर भारत को छोड़कर हर जगह ताप लहर अर्थात लू चल रही हैं।

तीसरा प्रमुख कारण है सूर्य के सतह पर लगातार प्रचंड विस्फोट सौर कलंक और सौर ज्वालामुखी उत्पन्न होना जो सूर्य के चारों ओर लाखों किलोमीटर प्रति घंटे की गति से दौड़ती है और इनमें भयंकर विकिरण पैदा होता है जिससे कभी-कभी धरती पर रेडियो तरंग और संचार में बाधा आ जाती है इस समय सूर्य पर या प्रक्रिया चरम पर है जिससे गर्मी और भी भयंकर हो रही उत्तरी गोलार्ध में यह प्रक्रिया अप्रैल से जून तक और दक्षिणी गोलार्ध में नवंबर से जनवरी तक चलती है जहां सूर्य की किरणें प्रभावी होती हैं । इसके अलावा तेरी गोलार्ध में सूर्य का पृथ्वी के सीधे ऊपर आना भी भयंकर गर्मी का कारण बन जाता है।

लगातार प्रचंड गर्मी और तप लहर तथा ल बहने का चौथा कारण ‌ धरती पर लगातार बढ़ रहे उद्योग धंधे और कल कारखाने हैं जो धरती की सतह लगातार गर्म करते चले जा रहे हैं इसके कारण धरती पर गर्मी बढ़ती चली जा रही है ।

पांचवा कारण विराट संख्या में बढ़ रहे दो पहिया चार पहिया और अन्य प्रकार के चलने वाले वाहन ट्रेन हवाई जहाज रॉकेट और अंतरिक्ष यान से उत्पन्न गर्मी है आज से 100 साल पहले जिन सड़कों पर 10 या 20 वाहन दौड़ते थे आज वहां लाखों करोड़ों की संख्या में दिन-रात वहां ट्रेन हवाई जहाज जलयान चलते हुए भयानक गर्मी और प्रदूषण तथा जहरीली गैसें पैदा कर रहे हैं यदि आप कभी सड़क पर चलते हुए किसी बड़े ट्रक या बस या वहां के बगल से गुजरते हैं तो आपको खुद उसके गर्म हवा का झोंका अनुभव हुआ होगा ।

छठ कारण धरती पर लगातार हो रहे युद्ध और हथियारों का प्रयोग आतिशबाजी और पटाखा और इसके साथ-साथ इससे उत्पन्न गर्मी और ऊर्जा है इसमें भूमिगत परमाणु परीक्षण भी शामिल है यह सभी धरती को निरंतर गम करते चले जा रहे हैं ‌ तापमान उतना ही रहता है लेकिन खुले धूप और पेड़ के छाया में तापमान का 10 डिग्री सेल्सियस और कमरे में 5 डिग्री सेल्सियस का अंतर होता है यदि पहले की तरह आज भी धरती 95 प्रतिशत पेड़ पौधे हरियाली से आच्छादित हो जाए तो औसत तापमान अपने आप 10 डिग्री सेल्सियस कम हो जाएगा ।

सातवां कारण हर जगह फैल रहे वातानुलित यंत्र बड़े-बड़े सेट ग्रह बिजली के और गैस के चूल्हे और उसके साथ-साथ उपयोग की जाने वाली प्रसाधन सामग्री भी है जो लगातार जहरीली गैस और कार्बन डाइऑक्साइड तथा गर्मी छोड़ती रहती है ।

आठवां कारण अलादीन का प्रभाव है जो एक बहुत बड़े भूभाग पर होने वाली प्राकृतिक घटना है जिसके कारण समुद्र की सतह का तापमान अचानक बहुत बढ़ जाता है या भयंकर गर्मी और सुख पैदा करता है दुर्भाग्य से इस बार भारत अफ्रीका और अमेरिका के भूभाग अलनीनो से प्रभावित हो रहे हैं जिसके कारण गर्मी का बढ़ना और कम वर्षा का होना भी निश्चित है 

इसके अतिरिक्त और भी बहुत से कारण है जिसमें मोबाइल और अन्य टावरों की बढ़ाते हुए संख्या बैटरी का अधिक से अधिक प्रयोग प्रदूषण और गंदगी का लगातार बढ़ता धरती और आकाश तथा जल का लगातार प्रदूषित होते जाना आभूषण बनाने वाले दुकानों से जहरीला और गंदा पानी बह कर नदी नालों में मिल जाना जिनकी रासायनिक क्रिया से भीषण गर्मी पैदा होती है साथ-साथ कागजों पर ‌ और भाषणों में वृक्षारोपण और हरियाली इसके अन्य कारण है ‌ इसके कारण मनुष्य की प्रतिरोधक क्षमता लगातार कम होती चली जा रही है सीमेंट कंक्रीट और ईंट पत्थर धरती पर बढ़ते चले जाने के कारण धरती के जल सूखने की क्षमता भी कम हो जाती है और जल की कमी भयंकर गर्मी पैदा करती है संक्षेप में आधुनिक विज्ञान टेक्नोलॉजी और मानव सभ्यता वह हर काम कर रही है जिससे भयानक गर्मी लगातार बढ़ रही है जो समस्त सृष्टि के लिए एक भयंकर खतरा है।

Sunday, 19 April 2026

पूरे वर्ष भर दुनिया युद्ध हिंसा तनाव से जूझती रहेगी-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 7017713978

पूरे वर्ष भर दुनिया युद्ध हिंसा तनाव से जूझती रहेगी-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 7017713978

जनवरी 2026 और फिर मार्च 2026 में हमारे केंद्र के द्वारा ग्रह नक्षत्र ज्योतिष और पंचांग के आधार पर एवं रौद्र नामक संवत्सर के प्रभाव के विस्तृत विवेचना करते हुए संपूर्ण संसार की विवेचना की गई थी और कहा गया था कि पूरे वर्ष भर रूस चीन अमेरिका पहन के अंदर से मिली मार और नूरा कुश्ती करके अपना प्रभाव सारी दुनिया पर स्थापित कर लेंगे ‌ यह तीनों देश ऊपर से एक दूसरे का विरोधी होने का दिखावा करेंगे लेकिन अंदर से तीनों एक होंगे और पूरी दुनिया में युद्ध की आग भड़का कर अपने अस्त्र-शस्त्र और अन्य सामान बेचकर तेल सहित दुनिया के ऊर्जा संसाधनों पर नियंत्रण करेंगे और बिल्कुल वैसा ही हो रहा है 


पहले हमारे केंद्र के द्वारा यह भविष्यवाणी की गई थी कि अमेरिका इजरायल मिलकर ईरान पर विध्वंसक आक्रमण करेंगे जिसमें ईरान का भीषण नुकसान होगा चीन और रूस पहन के पीछे ईरान को अपने हथियार बेचकर प्रचुर धन संपत्ति अर्जित करेंगे और 10 अप्रैल के आसपास अमेरिका और ईरान की सलाह हो जाएगी जो अधिक दिन नहीं चलेगी 

इसी क्रम में अब अमेरिका रूस और चीन मिलकर ताइवान को लेकर पूरी दुनिया में युद्ध कब वातावरण पैदा करेंगे जिसमें अमेरिका अपने हथियार ताइवान को इस तरह बचकर अपार संपत्ति अर्जित करेगा जैसे ईरान से रूस और चीन ने अर्जित किया था और 20 अप्रैल के आसपास चीन ताइवान का संघर्ष शुरू होने की स्थिति बन सकती है जिसमें चीन ताइवान पर कब्जा करने की पूरी कोशिश करेगा लेकिन लगभग सफलता के कगार से उसे वापस लौटना पड़ेगा इस युद्ध में कोरिया और जापान तथा अन्य देश भी सम्मिलित होंगे ‌ यद्यपि विनाशकारी युद्ध टल जाएगा और विश्व युद्ध की कोई आशंका नहीं रहेगी।

इसके बाद ठंड पड़ चुका रूस और यूक्रेन का युद्ध फिर से प्रारंभ हो जाएगा और इस युद्ध में अमेरिका और चीन अपने हथियार और अन्य संसाधन बेचकर काफी धन संपत्ति अर्जित करेंगे यह तीनों देश मिलकर भारत को पाकिस्तान और अन्य देशों की सहायता से काफी नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे लेकिन ग्रह नक्षत्र और पंचांग की मजबूत स्थिति के कारण भारत को अधिक नुकसान नहीं होगा मैंने पहले भी कहा और फिर कह रहा हूं इन सभी परिस्थितियों में मोदी जी की स्थिति बहुत कमजोर हो जाएगी देश के अंदर और बाहर उनकी लोकप्रियता बहुत तेजी से घट जाएगी 

अप्रैल के अंतिम सप्ताह में खड़ी का युद्ध फिर से भड़क सकता है और इजरायल लेबनान के अंदर काफी जमीन कब्जा कर लेगा और वेस्ट बैंक तथा गोलन पहाड़ियों का काफी भूभाग कब्जा करके वहां से मूल निवासियों को भगा देगा इस प्रकार वर्ष के अंत में एक वृहत्तर इजरायल की नींव पड़ जाएगी।

यह सभी होना निश्चित है इसके अलावा पूरी दुनिया में तोड़फोड़ हिंसा आतंकवाद एवं दुर्घटनाओं तथा अपराध का बोलबाला रहेगा मैं और जून में भीषण प्राकृतिक आपदाएं और दुर्घटनाएं घटित होगी और दुनिया के समीकरण तेजी से बदल जाएंगे जो हाल लीबिया इराक का हुआ है उससे भी बुरा हाल ईरान का होगा और अंत में अरब देशों की सहायता से अमेरिका ईरान को कुचल देगा भूकंप ज्वालामुखी विस्फोट सुनामी लहरों और भौगोलिक परिवर्तन की बर्फीले तूफान और ग्लेशियरों से व्यापक विनाश होगा 

तेल और हथियारों की खरीद में दुनिया की आर्थिक शक्ति पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ेगा और सभी देशों को अपनी आधी आमदनी इन दोनों चीजों पर खत्म करनी पड़ेगी अनेक नए-नए हथियारों का आविष्कार होगा और द्रोण युद्ध से भी आगे की युद्ध की प्रणाली का प्रयोग किया जाएगा सभी अनुमान के विपरीत पाकिस्तान में विभाजन सफल नहीं होगा इस प्रकार दुनिया को अनेक आश्चर्यजनक स्थितियों से गुजरना पड़ेगा और सब का मूल ईरान चीन और अमेरिका ही होंगे आश्चर्यजनक रूप से कोरिया इन सभी प्रकरण पर बिल्कुल चुपचाप तमाशा देखता रहेगा

अक्षय तृतीया और भगवान परशुराम -डॉ दिलीप कुमार सिंह

अक्षय तृतीया और भगवान परशुराम -डॉ दिलीप कुमार सिंह 
अक्षय तृतीया एक ऐतिहासिक दिन है जो इस वर्ष 19/20 अप्रैल को मनाया जाएगा यह पर्व विशेष रूप से इस समय भगवान परशुराम से जुड़ गया है जो भगवान श्री हरि विष्णु के अवतार थे लेकिन अक्षय तृतीया कई महत्वपूर्ण महापुरुषों और कथाओं से ही जुड़ा हुआ है अक्षय तृतीया प्रति वर्ष वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन पड़ता है और इस वर्ष तिथि19/ 20 अप्रैल को पड़ रही है 

सबसे पहले तो अक्षय तृतीया पवित्र दिन है और यह आदि देव ऋषभदेव के साथ जुड़ा हुआ है जिन्होंने घनघोर तपस्या करके तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया था और पूरे 400 दिन के बाद गन्ने के रस से अपना व्रत पूरा किया था इसलिए जैन पंथ के लोग इसे बहुत ही उत्साह से मनाया करते हैं इसके अलावा इसी दिन भगवान श्री हरि विष्णु के अवतार भागवत परशुराम जी का जन्म धरती पर महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के यहां हुआ था जिनकी तपोस्थली जमदग्निपुरम जमैथा गांव में है उन्हीं के नाम से जौनपुर का नाम पहले जमदग्निपुरम रखा गया था जो कालांतर में जौनपुर हो गया।

अक्षय तृतीया के दिन ही द्रौपदी को भगवान सूर्य के द्वारा उनके कष्टों को देखते हुए अक्षय पात्र दिया गया था जो तब तक खाली नहीं होता था जब तक भोजन बनाने वाला उसको खा नहीं लेता था। दुर्योधन के कहने पर जब दुर्वासा ऋषि ‌ पांडवों के यहां गए तब उनको अक्षय पात्र द्वारा ही तृप्त किया गया था एक अन्य घटनाक्रम में सदानीरा सरस्वती नदी के किनारे आज के दिन ही ब्रह्म ऋषि वेद व्यास ने महाभारत की कथा भगवान गणेश जी को बोलकर लिखाना शुरू किया था भगवान वेदव्यास ‌ का ज्ञान सरस्वती नदी की तेज ध्वनि से भंग होता था विनय करने पर भी उन्होंने ध्यान नहीं दिया तब वेदव्यास जी के के श्राप के कारण ही सरस्वती जमीन के अंदर चली गई। और अदृश्य रूप में बह रहीहैं।

एक अन्य घटनाक्रम में इसी दिन परम पवित्र देव नदी गंगा मां का "धरती पर हुआ था जिससे समस्त भारत का और सगर पुत्रों का कल्याण हुआ था और ‌ देव नदी गंगा को पृथ्वी पर लाने वाले भागीरथ के नाम पर गंगा मां का नाम भागीरथी पड़ा सगर पुत्रों के नाम पर ही समुद्र का नाम सागर पड़ा। आज के दिन ही विप्र सुदामा अपने बाल सखा भगवान श्री कृष्ण से मिलने द्वारका गए थे और भगवान श्री कृष्ण ने सुदामा के पूरे गांव को ही द्वारका जैसा बना दिया था।‌ और उनको आदर्श मित्र मानकर उन्हें धन-धान्य से भर दिया था।

इस वर्ष वैसे तो अक्षय तृतीया दिन में 11 ‌ बजे के आसपास 19 अप्रैल को ही लग जाएगी जो 20 अप्रैल को 8:37 तक रहेगी लेकिन उदया तिथि के अनुसार 30 अप्रैल के दिन ही भगवान परशुराम जयंती और अक्षय तृतीया मनाया जाएगी ।

20 अप्रैल को सुबह से 9 बजे तक अक्षय तृतीया का पूजा पाठ व्रत अनुष्ठान करने का सर्वश्रेष्ठ समय है इस दिन भगवान विष्णु माता लक्ष्मी को प्रतिमा रखकर उसे लाल वस्त्र से ढक कर लाल या पीले रंग के कपड़े बिस हुए चौकी पर रखा जाता है और उनको सत्तू खीर चना मौसमी फल और मिठाई का भोग लगाया जाता है और पूजा करने के पहले प्रतिमा को गंगाजल से धोया जाता है। 

भगवान परशुराम किसी धर्म और जाति विशेष के नहीं थे यह संपूर्ण पृथ्वी पर फैले हुए पाप और अत्याचार और निरंकुश राजाओं को सही मार्ग पर लाने के लिए कटिबद्ध थे इसी क्रम में उन्हें अनेकों महायुद्ध करने पड़े इसलिए उन्होंने भयंकर तपस्या करके भगवान शिव से अद्वितीय फरसा और धनुष बाण प्राप्त किया जिसके सामने बड़े से बड़ा महान योद्धा भी पराजित हो जाता था ।

भगवान परशुराम अद्वितीय पितृ भक्त थे पिता के कहने पर उन्होंने माता रेणुका का गर्दन काट लिया लेकिन जब पिता ने वर मांगने को कहा तो उन्होंने वर मांग कर माता को जीवित कर दिया जिससे परम प्रसन्न हुए परशुराम जी को उनके पूज्य पिता जमदग्नि ऋषि ने इच्छा मृत्यु का वरदान दिया और परशुराम आज भी धरती पर विभीषण ब्रह्म ऋषि मार्कंडेय हनुमान जी आल्हा कृपाचार्य अश्वत्थामा और हनुमान जी के साथ अमर हैं 

अक्षय तृतीया पर बहुत से दुष्प्रचार किया जाते हैं जैसे कि इस दिन आभूषण खरीदना वाहन खरीदना मकान  ‌ कपड़ा जमीन संपत्ति इत्यादि खरीदना बहुत शुभ माना जाता है लेकिन मैं बहुत प्रामाणिक रूप से बता दूं कि इसका भगवान परशुराम या अक्षय तृतीया पर खरीदारी से कोई संबंध ही नहीं यह बड़े-बड़े धन कुबेर सेठ महाजन की मीडिया वालों की चाल है कि इसी दिन नई चीजों को खरीदना चाहिए जबकि ऐसा कुछ नहीं है ‌ इस दिन केवल नमक या अस्त्र-शस्त्र खरीदनाचाहिए। ऐसा ही जनप्रतवाद और झूठा समाचार धनतेरस के दिन फैलाया जाता है जहां वैद्यनाथ धनवंतरी से खरीदारी से कोई संबंध ही नहीं है इसलिए आप चाहे जो भी खरीदारी करें या निर्माण करें उसका ‌  अक्षय तृतीय से कुछ भी लेना देना नहीं है विज्ञापन और टीवी तथा रेडियो के चक्कर में पढ़कर अपने पैसे बर्बाद करने का कोई अर्थ नहीं है ।

भगवान परशुराम का बड़े-बड़े परम वीरों से युद्ध हुआ जिसमें सहस्त्रार्जुन को उन्होंने मार कर  21 बार उसके वंश का विनाश किया। लेकिन सनातन धर्म को तोड़ने वाले लोगों ने इसे यह कह कर प्रसारित किया कि उन्होंने 21 बार धरती से सभी क्षत्रियों का विनाश कर दिया था जो कि बिल्कुल झूठ है नहीं तो उन्हीं के समय में राम लक्ष्मण और राजा दशरथ जनक ‌ और स्वयंवर में आए हुए सैकड़ो क्षत्रिय य राजा और अन्य लोग कहां से होते । उन्होंने रावण को भी मुक्त कराया‌ भगवान परशुराम केवल श्री राम लक्ष्मण और भीष्म पितामह से ही पराजित हुए थे। था और भगवान श्री राम से उनका आखिरी युद्ध हुआ था जिसमें उनके पराजित होना पड़ा और उनके तेज का भगवान श्री राम ने हरण कर लिया जिसका अर्थ यह भी है कि जब एक अवतार आ गया तो पीछे के अवतार की प्रासंगिकता समाप्त हो गई भगवान परशुराम ने अनंत गति से चलने का अपना वरदान सुरक्षित रखा और आज ‌ विवाह अनंत वेग से विसरण करते हैं।भारत की धरती को ऐसे ही परम बुद्धिमान महा तेजस्वी परशुराम जी की आवश्यकता है जो शैतान राक्षस और विधर्मी लोगों का संघर्ष करके देश में राम राज्य का मार्ग प्रशस्त करें।

Thursday, 16 April 2026

देश में अति पिछड़ी मुस्लिम महिलाओं को तैंतीस में से तीन प्रतिशत मिले आरक्षण मुस्लिम महासंघ*

*देश में अति पिछड़ी मुस्लिम महिलाओं को तैंतीस में से तीन प्रतिशत मिले आरक्षण मुस्लिम महासंघ* 
अखिल भारतीय मुस्लिम महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष फ़रहत अली खान ने कहा देश में सबसे ज्यादा दबी कुचली ज़िंदगी गुजार रही हैं मुस्लिम महिलाएं।
अगर मुस्लिम महिलाएं सांसद और विधायक बनकर लोकसभा,राज्य सभा एवं विधानसभा में जाएंगी तभी अपनी समस्याओं को देश के संवैधानिक पटल पर रख सकती हैं।

महिला आरक्षण बिल सराहनीय और स्वागत योग्य बिल है जिसकी समय के अनुसार बहुत आवश्यकता है । 

जहां तक महिला आरक्षण बिल का सवाल है हम सभी देशवासी स्वागत करते हैं।

मगर हम अपने देश के मुखिया से अपना सुझाव निवेदन पूर्वक रख रहे हैं।
तैंतीस प्रतिशत में से कुल तीन प्रतिशत परिसीमन के बाद मुस्लिम महिला को भी आरक्षण दिया जाए

जो समय के अनुसार बहुत ज़रूरी है।
हमारे सुझाव पर गंभीरता से विचार करने की कृपा करें।
फ़रहत अली खान 
राष्ट्रीय अध्यक्ष मुस्लिम महासंघ

Wednesday, 15 April 2026

बर्बरीक दुनिया के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर थे। बर्बरीक के लिए तीन बाण ही काफी थे जिसके बल पर वे कौरवों और पांडवों की पूरी सेना को समाप्त कर सकते थे। युद्ध के मैदान में भीम पौत्र बर्बरीक दोनों खेमों के मध्य बिन्दु एक पीपल के वृक्ष के नीचे खड़े हो गए और यह घोषणा कर डाली कि मैं उस पक्ष की तरफ से लडूंगा जो हार रहा होगा। बर्बरीक की इस घोषणा से कृष्ण चिंतित हो गए।

बर्बरीक दुनिया के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर थे। बर्बरीक के लिए तीन बाण ही काफी थे जिसके बल पर वे कौरवों और पांडवों की पूरी सेना को समाप्त कर सकते थे। युद्ध के मैदान में भीम पौत्र बर्बरीक दोनों खेमों के मध्य बिन्दु एक पीपल के वृक्ष के नीचे खड़े हो गए और यह घोषणा कर डाली कि मैं उस पक्ष की तरफ से लडूंगा जो हार रहा होगा। बर्बरीक की इस घोषणा से कृष्ण चिंतित हो गए।

भीम के पौत्र बर्बरीक के समक्ष जब अर्जुन तथा भगवान श्रीकृष्ण उसकी वीरता का चमत्कार देखने के लिए उपस्थित हुए तब बर्बरीक ने अपनी वीरता का छोटा-सा नमूना मात्र ही दिखाया। कृष्ण ने कहा कि यह जो वृक्ष है ‍इसके सारे पत्तों को एक ही तीर से छेद दो तो मैं मान जाऊंगा। बर्बरीक ने आज्ञा लेकर तीर को वृक्ष की ओर छोड़ दिया।

जब तीर एक-एक कर सारे पत्तों को छेदता जा रहा था उसी दौरान एक पत्ता टूटकर नीचे गिर पड़ा। कृष्ण ने उस पत्ते पर यह सोचकर पैर रखकर उसे छुपा लिया की यह छेद होने से बच जाएगा, लेकिन सभी पत्तों को छेदता हुआ वह तीर कृष्ण के पैरों के पास आकर रुक गया। तब बर्बरीक ने कहा कि प्रभु आपके पैर के नीचे एक पत्ता दबा है कृपया पैर हटा लीजिए, क्योंकि मैंने तीर को सिर्फ पत्तों को छेदने की आज्ञा दे रखी है आपके पैर को छेदने की नहीं।

उसके इस चमत्कार को देखकर कृष्ण चिंतित हो गए। भगवान श्रीकृष्ण यह बात जानते थे कि बर्बरीक प्रतिज्ञावश हारने वाले का साथ देगा। यदि कौरव हारते हुए नजर आए तो फिर पांडवों के लिए संकट खड़ा हो जाएगा और यदि जब पांडव बर्बरीक के सामने हारते नजर आए तो फिर वह पांडवों का साथ देगा। इस तरह वह दोनों ओर की सेना को एक ही तीर से खत्म कर देगा।

तब भगवान श्रीकृष्ण ब्राह्मण का भेष बनाकर सुबह बर्बरीक के शिविर के द्वार पर पहुंच गए और दान मांगने लगे। बर्बरीक ने कहा- मांगो ब्राह्मण! क्या चाहिए? ब्राह्मणरूपी कृष्ण ने कहा कि तुम दे न सकोगे। लेकिन बर्बरीक कृष्ण के जाल में फंस गए और कृष्ण ने उससे उसका शीश मांग लिया।

बर्बरीक द्वारा अपने पितामह पांडवों की विजय हेतु स्वेच्छा के साथ शीशदान कर दिया गया। बर्बरीक के इस बलिदान को देखकर दान के पश्चात श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को कलियुग में स्वयं के नाम से पूजित होने का वर दिया। आज बर्बरीक को खाटू श्याम के नाम से पूजा जाता है। जहां कृष्ण ने उसका शीश रखा था उस स्थान का नाम खाटू है।

अनजाने रहस्य :

1. खाटू श्याम अर्थात मां सैव्यम पराजित:। अर्थात जो हारे हुए और निराश लोगों को संबल प्रदान करता है।

2. खाटू श्याम बाबा दुनिया के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर हैं उनसे बड़े सिर्फ श्रीराम ही माने गए हैं।

3. खाटूश्याम जी का जन्मोत्सव हर साल कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।

4. खाटू का श्याम मंदिर बहुत ही प्राचीन है, लेकिन वर्तमान मं‍दिर की आधारशिला सन 1720 में रखी गई थी। इतिहासकार पंडित झाबरमल्ल शर्मा के मुताबिक सन 1679 में औरंगजेब की सेना ने इस मंदिर को नष्ट कर दिया था। मंदिर की रक्षा के लिए उस समय अनेक राजपूतों ने अपना प्राणोत्सर्ग किया था।

5. खाटू श्‍याम मंदिर परिसर में लगता है बाबा खाटू श्याम का प्रसिद्ध मेला। हिन्दू मास फाल्गुन माह शुक्ल षष्ठी से बारस तक यह मेला चलता है। ग्यारस के दिन मेले का खास दिन रहता है।

6. बर्बरीक देवी के उपासक थे। देवी के वरदान से उसे तीन दिव्य बाण मिले थे जो अपने लक्ष्य को भेदकर वापस उनके पास आ जाते थे। इसकी वजय से बर्बरिक अजेय थे।

7. बर्बरीक अपने पिता घटोत्कच से भी ज्यादा शक्तिशाली और मायावी था।

8. कहते हैं कि जब बर्बरिक से श्रीकृष्ण ने शीश मांगा तो बर्बरिक ने रातभर भजन किया और फाल्गुन शुक्ल द्वादशी को स्नान करके पूजा की और अपने हाथ से अपना शीश काटकर श्रीकृष्ण को दान कर दिया।

9. शीश दान से पहले बर्बरिक ने महाभारत का युद्ध देखने की इच्‍छा जताई तब श्रीकृष्‍ण ने उनके शीश को एक ऊंचे स्थान पर स्थापित करके उन्हें अवलोकन की दृष्टि प्रदान की।

10. युद्ध समाप्ति के बाद जब पांडव विजयश्री का श्रेय देने के लिए वाद विवाद कर रहे थे तब श्रीकृष्ण कहा कि इसका निर्णय तो बर्बरिक का शीश ही कर सकता है। तब बर्बरिक ने कहा कि युद्ध में दोनों ओर श्रीकृष्ण का ही सुदर्शन चल रहा था और द्रौपदी महाकाली बन रक्तपान कर रही थी।

11. अंत में श्रीकृष्ण ने वरदान दिया की कलियुग में मेरे नाम से तुम्हें पूजा जाएगा और तुम्हारे स्मरण मात्र से ही भक्तों का कल्याण होगा।

जय श्री श्याम ,जय खाटूश्याम जी बाबा 🚩🙏🏻

सनातन धर्म एक ऐसा प्राचीनतम ब्रह्मांड व्यापी धर्म है जिसमें वह सब कुछ है जिसको अन्य कहीं नहीं पाया जा सकता ।

एक बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति 

सनातन धर्म एक ऐसा प्राचीनतम ब्रह्मांड व्यापी धर्म है जिसमें वह सब कुछ है जिसको अन्य कहीं नहीं पाया जा सकता ।
दुनिया में कोई भी वस्तु एक जैसी नहीं है दो सगे भाई बहन भी नहीं इसलिए दुनिया की कोई भी वस्तु पूरे वास्तु के समान नहीं हो सकते ।

लेकिन हमारे ‌ देश के बिके बुद्धिजीवी और मकर राजनेता विदेशी हाथों में खेलते हुए दुनिया भर का नकली उच्च नीच और असमानता जैसा जहर वह दिए और सनातन धर्म चिन्ह भिन्न होने लगा ‌

यहां तक की सनातन धर्म को सुधार करने के लिए जो ईश्वरीय महामानव अवतार के रूप में आए जैसे भगवान बुद्ध महावीर स्वामी गुरु नानक देव चार्वाक इनके पथ को अलग धर्म का नाम देकर आदिवासी वनवासी जंगल वासी और असभ्य कबीलाई लोगों को सनातन धर्म से अलग घोषित कर इसको दुनिया में केवल अब से इंडोनेशिया मलेशिया और कजाकिस्तान से श्रीलंका में और बाद में केवल भारत में सीमित कर दिया गया। 

इस अंधकार में भारत लगभग 1000 वर्ष पड़ा रहा लेकिन यहां के बड़े-बड़े ऋषि मुनि जिसमें सभी वर्ण और जातियों के लोग शामिल थे उन्होंने सनातन धर्म की पहचान मिटने नहीं दिया ।

यदि आपके पद प्रतिष्ठा तन संपत्ति है तो घर और बाहर का हर व्यक्ति आपका मान सम्मान करेगा और याद नहीं है तो अपनी जात बिरादरी तो छोड़ो घर के लोग ही आपको उठकर बाहर फेंक देंगे ।

ऐसे में दुनिया भर की गलत धारणा सनातन धर्म के बारे में फैलाई गईं जबकि यहां कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार से आस्तिक या नास्तिक रूप से आराम से रहते हुए सारा जीवन अपने ढंग से जी सकता है बशर्ते कि वह अन्य के जीवन में हस्तक्षेप ना करें ।

जो सनातन धर्म मिलेच शैतान विधर्मी लोगों को भी अपने बीच जीने का अवसर देता है वह अपने ही सनातनी भाइयों के बीच उच्च नीच का भेद कैसे कर सकता है यही समझाने की बात है लेकिन हर जाति के मठाधीश और स्वयंभू नेता अपने घर परिवार साथ वीडियो को मालामाल करने के लिए अपने जाति वालों को इसे समझना नहीं दे रहे हैं और अधिकांश धर्म गुरु संत महंत पुजारी पांडे कथावाचक सरकार सरकारी तंत्र धन कुबेर लोगों और विदेशी हाथों में बिक चुके हैं इसलिए सच समझने में लोगों को परेशानी हो रही है ।‌ इसमें से अधिकांश सरकार के पालतू और विदेशी लोगों के द्वारा खरीदे गए लोग हैं जो संस्कृत हिंदी की जगह अंग्रेजी बोलकर देश में पापा मम्मी डैडी हाय हेलो खाना मुबारक शुक्रिया गुड मॉर्निंग शादी शहर जैसी चीज फैलाना चाहते हैं।


आप सनातनी हो चाहे जो हो जिस जाति के हो लेकिन इतना याद रखो कि जिस दिन‌ मलिक्छ विधर्मी शैतान राक्षस काटना शुरु करेंगे जैसे कि वह उत्तरी दक्षिणी अमेरिका यूरोप अरब प्रायद्वीप अफगानिस्तान पाकिस्तान बांग्लादेश कश्मीर में कटे हैं उसे दिन या नहीं पूछेंगे कि तुम स्वर्ण हो छतरी हो ब्राह्मण हो श्रीवास्तव हो हरिजन हो या मौर्य हो या कुछ भी हो घास भूसा गाजर मूली साग भाजी की तरह एक तरफ से काट डालेंगे ।

धीरे-धीरे अब बात लोग समझ रहे हैं लेकिन अभी भी कुछ उनके नेता यह समझना नहीं दे रहे हैं जो इनके किसी काम के नहीं है इसी तरह जितने समाज है उनके अध्यक्ष उनकी सीन सब की सब फालतू हैं धीरे-धीरे सब लोग सनातन धर्म में आ रहे हैं क्योंकि वह जान चुके हैं कि यह नेता कल को क्रिश्चियन या फिर मुस्लिम हो जाएंगे और हम मझधार में फंस जाएंगे ।

जल्दी ही आप देखेंगे कि इन सब की दुकान बंद हो जाएगी सारे उच्च और निम्न वर्ग के लोग एक होकर अपने सनातन धर्म का पालन करेंगे और एक साथ मिलकर इन सभी लोगों को इस तरह मिटा देंगे जैसे कभी वीर शिवाजी महाराणा प्रताप सुहेलदेव हमीर राजा की तरह देश की हर जाति वर्ण की जनता ने विदेशी शैतानों म्लैच्छों का समूल नाश किया था ।

यह समय आ चुका है जल्दी ही धीरे-धीरे यह सबको दिखाने लगेगा इतना सब समझ चुके हैं कि एक  मां के दो सगे बेटे जो एक कलेक्टर और एक चपरासी है एक समान मान सम्मान इज्जत नहीं पा सकते तो बाकी की बात ही क्या है भगवान राम और कृष्णा शबरी और विदुर का झूठा खा सकते हैं लेकिन किसी भी अनुसूचित जाति जनजाति पिछड़े वर्ग के किसी नेता ने अपने ही  जाति वर्ग के किसी व्यक्ति के घर उसकी झूठी खाली और झूठा भोजन खाया है क्या बस इतना ही समझना है और पूरी दुनिया यह सुन ले 

जूनागढ़ टूटा किंतु खड़ा गिरनार है होते ही रहेंगे सिंह यहां की गुफाओं में।

हमारा दुर्भाग्य केवल यही है कि हमने धोखा अपनों से खाया अपनों से हार गए दुनिया में यह दम नहीं था जो भी सनातनी कट्टर अगुवा बनकर आता है वह अंत में गांधी और फिर विदेशी हाथों में बिका सिद्ध हो जाता है। ‌ और तब काला धन भ्रष्टाचार भूख महंगाई बेरोजगारी घूसखोरी चीन पाकिस्तान द्वारा छीना गया भूभाग हिंदी भाषा राम राज्य स्वदेशी हिंदी हिंदू हिंदुस्तान सब कुछ खो जाता है इन गद्दार और देशद्रोही लोगों के कारण।

हमें तो अपनों ने लूटा गैरों में कहां दम था हमारी किश्ती वहीं टूटी जहां पानी कम था लेकिन 

यदा यदा ही धर्मस्य वाली कहावत अंत में सही सिद्ध होगी -डॉ दिलीप कुमार सिंह

Monday, 13 April 2026

परम पवित्र शीतला चौकिया धाम को अपवित्र कर रहे हैं यहां के भ्रष्ट घूसखोर और दुराचारी पंडे पुरोहित -डॉ दिलीप कुमार सिंह

परम पवित्र शीतला चौकिया धाम को अपवित्र कर रहे हैं यहां के भ्रष्ट घूसखोर और दुराचारी पंडे पुरोहित -डॉ दिलीप कुमार सिंह 
जौनपुर में माता शीतला देवी का परम पवित्र चौकिया धाम है जिसमें लोगों की अटूट आस्था और विश्वास है और बहुत दूर-दूर से लोग दर्शन करने यहां आते हैं पर्व त्यौहार और नवरात्रि एवं अन्य मंगल शुभ अवसर पर यहां बहुत लंबी चौड़ी भीड़ होती है लेकिन यहां की सड़क और गलियों को कब्जा करके इतना तंग और शंकर बना दिया गया है कि लोग 1 किलोमीटर पहले से ही पैदल चलने को विवश होते हैं मैंने चौकिया के पांडे पुरोहितों को कई बार मना किया कि अपनी गंदगी दुराचार घूसखोरी भ्रष्टाचार और जबरदस्ती वसूली की आदत छोड़कर सदाचारी पवित्र होकर कम करो लेकिन जब 25 वर्षों के प्रयास के बाद भी यह नहीं सुधरे तब यह नंगा सच इन लोगों की काली करतूत का लिखना पड़ रहा है और बड़े दुर्भाग्य की बात है कि यही सच भारत के अधिकांश धर्म स्थान और मंदिरों तथा शक्तिपीठों का है जिसके कारण सनातन धर्म से लोगों की आस्था बहुत तेजी से घट रही है और लोग क्रिश्चियन मुस्लिम या नए बौद्ध इत्यादि बना रहे हैं 

अभी भी कर या पांच प्रतिशत पांडे पुरोहित पुजारी ठीक-ठाक और अच्छे चरित्र के हैं जैसे कि चौकिया मंदिर के पीछे तालाब पर स्थित भैरव बाबा का मंदिर है जिसके दोनों पुजारी बहुत ही लोकप्रिय व्यावहारिक और अच्छे चरित्र के हैं ना कभी जबरदस्ती पैसा वसूलते हैं और ना अति विशिष्ट कतार में पैसा लेकर लोगों को अंदर जाने देते हैं और बहुत ही सौम्य तथा मृदु व्यवहार भी करते हैं ‌ लेकिन शीतला चौकिया मंदिर की बात कितनी अधिक गंदी हो चुकी है कि यदि आप सभी इस पर अपने विचार व्यक्त नहीं करेंगे और इस पोस्ट को लाइक कमेंट शेयर करके अधिक से अधिक प्रसारित नहीं करेंगे तो यह लोग सुधरने वाले नहीं है। 

चौकिया सहित सभी तीर्थ स्थान का यही हाल है कि एक साधारण कतर भक्तों की लगती है और एक वीआईपी कतर पैसे और पद प्रतिष्ठा को लेकर बनाई जाती है जिसमें ढेर सारा पैसा पुरोहित और वहां ड्यूटी देने वाले पुलिस और दलालों की सहायता से वसूल लिया जाता है और यह लोग मिलकर के मिली मर नूरा कुश्ती करके लाइन को और लंबी करते हैं जिससे कतार में खड़े हुए परिवार के लोग बच्चे लोग या जिन्हें तुरंत दर्शन की आदत होती है बगल होकर इन पुजारी पांडे पुरोहित लोगों से संपर्क करते हैं और यह लोग पीछे के दरवाजे से उनका प्रवेश कर देते हैं इस कारण से भीड़ इतनी हो जाती है कि लोगों की सांस फूलने लगती है कई लोग चौकिया में गिरकर बेहोश हो चुके हैं और कई लोग मर भी चुके हैं जिनको बड़ी चतुराई से पुलिस की सहायता से छिपा दिया गया है क्योंकि अंदर जगह नहीं है और गर्मी के मौसम में वहां पर 5 मिनट खड़े रहना अपनी मृत्यु को दावत देना है जब घंटे से कतार में खड़ा व्यक्ति देखा है कि उसके आगे पैसे देकर लोग आ जाते हैं तो वह बहुत क्रोधित और उत्तेजित हो जाता है और इसीलिए बर्दाश्त से बाहर हो जाने पर पांडा पुरोहित और पुलिस वालों से मारपीट चौकिया में होती रहती है अन्य स्थानों का भी लगभग यही हाल है। 

मैं सनातनी जनता से अनुरोध करूंगा कि यदि ईश्वर के घर पर भी यह हाल है और मंदिरों में भी लोग एक समान नहीं है तो ऐसी जगह जाने का दर्शन पूजन करने का क्या लाभ है ऐसी जगह जाना ही नहीं चाहिए चार या पांच प्रतिशत लोग आज भी शीतला चौकिया में ऐसे पंडित पुरोहित और पुजारी हैं जो बहुत अच्छे स्वभाव के और सदाचारी हैं लेकिन बाकी सब के सब महाभ्ष्ट घूसखोर और चरित्रहीन कुकर्मी हैं ‌ इनमें से अधिकांश तो विभिन्न प्रकार का नशा और मदिरापान करते हैं और मुफ्त में तीर्थ यात्रियों का हराम का पैसा खाकर इतने मोटे ताजे हो जाते हैं कि पुलिस की लाठी टूट सकती है लेकिन इन्हें चोट लगने का कोई प्रश्न नहीं होता यह लोग गाल गुलाबी नैन शराबी और हराम का खाकर गर्मी से भरपूर होकर विभिन्न प्रकार के कुकर्म में भी करते हैं।

और सबसे बड़ी बात इसमें जो रसिक रंगीन स्वभाव के पंड व पूरोहित पुजारी और पुलिस वाले होते हैं वह मंदिर के गर्भ गृह से लेकर निकास स्थान तक खड़े रहते हैं और महिलाओं को बड़े-बड़े ढंग से उनके संवेदनशील स्थानों को पकड़ कर बाहर भीतर करते रहते हैं यदि कोई विरोध करने का साहस करता है तो सभी लोग एक होकर उस पर टूट पड़ते हैं और पुलिस चुपचाप तमाशा देखती रहती हैं लेकिन यदि कोई बड़े पद प्रतिष्ठा वाला व्यक्ति गलती से सामान्य लोगों की कतार में खड़ा है या कोई इन जैसे दुष्ट पंडे पुरोहित पुजारी से जबर  व्यक्ति होता है तब यह इनको मार मार कर कचूमर निकाल देता है और वहां भगदड़ मच जाती है।

पहले यहां केवल शीतल जी की मूर्ति ही थी लेकिन बाद में इन भ्रष्ट पंडा व पुरोहित पुजारी और दलाल लोगों ने मिलकर इसके हर कोने पर एक दर्जन से अधिक मूर्तियां बनाकर छोटे-छोटे मंदिर बना दिए हैं जहां पर खड़े हुए सबसे भ्रष्ट और चरित्रहीन मोटे ताजे लोग जबरदस्ती टीका लगाकर और पूजा करा कर लोगों से पैसा वसूली करते हैं और न देने पर गंदी गालियां भी बकते हैं यह लोग इतने बेहद निर्लज्ज बेशर्म है कि इनको लात घूंसा और गालियां खाने का भी कोई डर या भय नहीं है बस इन्हें पैसा चाहिए किसी भी कीमत पर चाहिए जिसके लिए यह कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। पुलिस प्रशासन का इन्हें कोई भी डर नहीं है क्योंकि वह लोग भी इनके लूट में शामिल होते हैं और पहुंचने पर दर्शन विशिष्ट ढंग से करा दिया जाता है। इनकी गंदगी इतनी अधिक है कि सब कुछ लिखना भी बहुत कठिन है इनमें से अधिकांश लोग गांजा भांग शराब नशे का सेवन करके कुकर्म करते हैं इसीलिए चौकिया के आसपास बसे हुए पांडव पुरोहित उनसे मिले पुलिस और दलाल के घर में ज्यादातर लोग अपंग और अपाहिज अंधे लंगड़े लूले पैदा होते हैं किसी के घर जाकर आप देख सकते हैं तब भी यह लोग अपने को सुधार कर पवित्र और ईश्वर भक्त नहीं बनते हैं।

दर्शन करने वाले जनता विशेष कर स्त्रियां भी कम नहीं होती हैं जब तक वह एक दर्जन देवी देवताओं के आगे मत्था ना टेक लें और सबको पैसा ना दे दें सब पर फूल माला ना चढ़ा ले तब तक उन्हें संतुष्टि ही नहीं होती है यह तो ऐसी ही बात है कि कामधेनु गाय को पाने के बाद बकरी और छेड़ी को दुहना होता है। औरतों की ऐसी मूर्खता और अंधविश्वास का लाभ है चरित्रह दुराचारी गंदे स्वभाव के पंडे पुजारी वसूलकर अशोक खैरात और राम रहीम जैसा कांड कर जाते हैं और लोक लाज के नाच उसको लोग प्रदर्शित नहीं करते हैं। 

यदि आप लोग शीतला चौकिया दर्शन करने गए हैं तो मेरी लिखी हुई बातें एक-एक अक्षर आपको सही लगेगी और यदि नहीं गए हैं तो विश्वास करना कठिन होगा की धर्म स्थान पर क्या सच में जितने गंदे दुश्चरित्र रसिक रंगीन और निर्लज्ज लोग पंडा पुरोहित पुजारी बनकर ऐसा कांड करते हैं और भी ऐसी बहुत सी चीज हैं जो लिखने लायक भी नहीं है ।

अंत में मैं आप सभी से शासन प्रशासन और पुलिस से कहना चाहूंगा की इस पर तुरंत ध्यान देते हुए ऐसे पंडित पुरोहित पुजारी लोगों पर लगाम लगाइए और आप सबसे निवेदन है कि वहां केवल दर्शन करें फूल माला पैसा कुछ भी ना चढ़ाएं क्योंकि वहां आप ईश्वर और माता शीतला देवी का दर्शन करने जाते हैं फूल माला पैसा चढ़ाने नहीं जाते हैं यदि आपको पैसा सोना चांदी या अन्य सामान देना ही है तो शीतला माता को मत दो जिनके पास संपूर्ण ब्रह्मांड की संपत्ति है और जिसे मांगने आप जाते हो बल्कि यह धन और पैसा अपने समाज और धर्म के अच्छे लोगों की पढ़ाई लिखाई और उनकी उन्नत के काम में लगा दो तो विश्वास रखो या पंडे पुरोहित पुजारी दलाल और ड्यूटी देने वाले पुलिसकर्मी अपने आप सुधर जाएंगे नहीं तो यह चरित्रहीन गंदे और रसिक रंगीन स्वभाव के एक कुंतल से दो कुंतल भर वाले हरामखोर लोग इसी तरह अपनी गंदी हरकत करते हुए जनता को लूटते रहेंगे और धीरे-धीरे सारे हिंदू तीर्थ और धर्म स्थान कलंकित हो जाएंगे और लोग वहां जाना छोड़ देंगे मैंने जो भी बात लिखा है उसे पर निष्पक्ष राय दीजिए कि क्या इसमें से एक भी बात गलत है ‌ महिलाओं से भी निवेदन है कि यदि वे दर्शन करने जाती हैं और यह पांडे पुरोहित पुलिस वाले या मा उपस्थित  लंपट कामुक छिनरे कुपंथी दुराचारी और मैथुनिक ‌ पंडित पुरोहित पुजारी पुलिस वाले या उनके सहयोगी आपको गलत ढंग से छूते हैं या अश्लील हरकत करते हैं तो पहले जूते चप्पल से उनकी धुनाई करें और तुरंत 1098 1090 पर फोन करके पुलिस बुलाकर इनको उनके हवाले कर दे या फिर 15100 नंबर पर डायल करें ऐसा करने पड़े लोग कुछ दिन बस सुधर जाएंगे और शीतला माता चौकिया की पवित्रता विद्यमान रहेगी - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि
[4/1, 10:15 PM] +91 94511 61205: Sahi baat kaha hai ap ne