Showing posts with label # परीक्षाओं की शुचिता. Show all posts
Showing posts with label # परीक्षाओं की शुचिता. Show all posts

Monday, 10 August 2026

देश के सामने सबसे गंभीर प्रश्न परीक्षाओं की शुचिता और नकल

 देश के सामने सबसे गंभीर प्रश्न परीक्षाओं की शुचिता और नकल
  जिन परीक्षाओं से देश बनता है चपरासी से लेकर सबसे बड़े अधिकारी बनते हैं वह सभी परीक्षाएं स्वयं ही पूरी तरह से दूषित हो चुकी हैं और उन्हें दूषित करने वाला कोई अन्य नहीं उसमें बैठे जिम्मेदार नेता अधिकारी और सरकार है जब देश में 95% अपात्र और कुपात्र जबरदस्ती चुने जाएंगे तो देश का कल्याण कैसे होगा और मजे की बात यह है कि आजकल अपने को सही दिखाने के लिए परीक्षाएं इस प्रकार से ली जाते हैं मानो कहीं युद्ध चल रहा है परीक्षा के बहाने सनातन धर्म का घनघोर अपमान किया जाता है लड़कों के जूते चप्पल की जांच होती है मोजे उतार लिए जाते हैं और यहां तक की रक्षा सूत्र भी काट दिया जाता है कुर्ता  कुर्ता पजामा कैंची से काटना पड़ता है और लड़कियों के नाक कान के आभूषण घड़ी अंगूठी और मंगलसूत्र तक उतार लिए जाते हैं इसके बाद भी भयंकर पैमाने पर नकल होकर इस सारे तंत्र को खुद ही नंगा कर देते हैं और आश्चर्य है कि इसके बाद भी लोग परीक्षा देते हैं विरोध नहीं करते हैं भला मंगलसूत्र से नल का क्या संबंध हो सकता है और रक्षा सूत्र किस प्रकार नकल में सहायक हो सकता है वही मुस्लिम महिलाएं नकाब हिजाब बुर्का नहीं उतरती हैं और परीक्षा ही छोड़ देती हैं या बिना उतारे ही परीक्षा देती हैं । 

जबकि असली समस्या बच्चों की नहीं है बल्कि ऊपर बैठे लोगों की है चारों तरफ कक्ष निरीक्षक लगे हैं सीसीटीवी कैमरा लगा है दरवाजे पर सघन जांच होती है इसके पश्चात बिना ऊपर बैठे सबसे बड़े लोगों के इशारे पर किसी भी परीक्षा में नकल होना पूरी तरह से संभव है इसलिए सारे देशवासी आगे आकर इस परीक्षा प्रणाली का विरोध करें पहले ऐसा कुछ नहीं होता था तब नकल बिल्कुल नहीं होती थी और आज सब कुछ दिखावा के लिए हो रहा है। 

सच यही है कि कोई भी पद निकलता है भर्ती होती है तो पहले ही धन कुबेर माफिया राजनेता अधिकारी और अन्य सक्षम तंत्र अपने-अपने हिस्से का बंदर बांट करके नियुक्तियां कर लेते हैं और सब कुछ दिखावा हो जाता है इतना ही नहीं हमारे आपके बीच रहने वाले निहायत ही अयोग्य और सामान्य दर्जे के छात्र जज कलेक्टर कप्तान और बड़े-बड़े पदों पर सुशोभित हो जाते हैं विश्वास ना हो तो इनका संपूर्ण बायोडाटा आप खुद ही जांच कर लीजिए। दिन-रात पढ़कर शरीर स्वस्थ पैसा सब कुछ लुटा देने वाला अंत में अपने को लुटा पिटा ठगा महसूस करता है लेकिन वातावरण इस तरह बना दिया गया है कि सक्षम और मेधावी प्रतिभाशाली छात्र-छात्राएं अपने को ही गलत समझने लगते हैं और निराशा में अनेक आत्महत्या जैसा घातक कदम उठा लेते हैं। 

यही कारण है कि देश का सारा तंत्र पूरी तरह से भ्रष्ट हो चुका है और इसमें सुधार की कोई भी संभावना नहीं है जितने संसाधन हैं जितने पद हैं और जितनी चीज हैं उसमें 95 प्रतिशत इन्हीं लोगों का कब्जा हो चुका है पांच प्रतिशत प्रखर मेधावी लोगों को डर के कारण चुन लिया जाता है जिससे इस परीक्षा व्यवस्था की पोल पट्टी ना खुल जाए फिर भी कभी-कभी जब रिट याचिका न्यायालय में दाखिल होती है तो सब के सब नंगे हो जाते हैं अभी नीट में हुई परीक्षा और 1990 में भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा इसका उदाहरण है एक बात और बता दे जब उपयुक्त लोगों के बच्चे उचित अनुपात में नहीं चुने जाते तो जानबूझकर प्रश्न पत्र आउट होने और नकल का नाटक फैलाया जाता है और यही लोग याचिका दाखिल करते हैं और जब उनके लोग समायोजित हो जाते हैं तो सब कुछ ठीक हो जाता है आप सब कुछ देख सकते हैं लेकिन भारत में बोल नहीं सकते व्यवस्था पर प्रश्न नहीं उठा सकते और प्रश्न उठाने वाला ही अंत में शिकार बन जाता है और जेल में चला जाता है इसका एक उदाहरण है हर नगर गली मोहल्ला अतिक्रमण से बुरी तरह से प्रभावित है और सड़के जाम हैं लेकिन इसको करने वाले पुलिस और प्रशासन  राजनेता है दिन-रात सड़कों पर देखते समय क्या उनकी आंखें बंद हो जाती हैं बिल्कुल नहीं रात को वसूली होती है और पैसा हर जगह बंट जाता है इसलिए जाम और अतिक्रमण कभी समाप्त नहीं हो सकता और परीक्षा व्यवस्था भी शुद्ध होना असंभव है
[8/10, 7:11 AM] Dileep Singh Rajput Jounpur: दिन महीने साल भर फालतू और निठल्ले घूमने वाले लोगों के लिए विवाह और मांगलिक कार्यों का निमंत्रण पत्र बांटना इतना जटिल लगता है कि वह उसे सोशल मीडिया पर भेजने लगते हैं जबकि निमंत्रण पत्र घर-घर जाकर देने से आपसी संबंध और खून के रिश्ते मजबूत होते हैं जितनी कम की चीज हैं वह सभी खत्म करके आज का मनुष्य अपना सारा समय मोबाइल और मीडिया पर दे रहा है। 

इस बारे में एक बहुत सुंदर लेकिन असली कहानी सुना रहा हूं एक बार एक निमंत्रण पत्र व्हाट्सएप पर आया और उन्होंने लिखा कि अत्यधिक व्यस्त होने के कारण मैं आपको व्हाट्सएप पर ही निमंत्रण दे रहा हूं कृपया आने की कृपा कीजिएगा पानी वाला भी अत्यधिक चालक और इस जैसा मक्कार था उसने भी ₹2000 के नोट की फोटो कॉपी कर दिया और बोला प्रिय महोदय मैं अत्यधिक व्यस्त हूं और ए नहीं सकता इसलिए ₹2000 निमंत्रण भेज रहा हूं कृपया स्वीकार कर लेना यह आज की सबसे भयानक सच्चाई है और आज वर्ष में एक या दो वर्ष भी कहीं कोई आता जाता नहीं है 


और हालात तो यह है कि घर की महिलाओं और छोटे बच्चों को कोई पहचानता भी नहीं बस केवल नए विवाह में दामाद 2-4 साल आते हैं वह भी संबंध बना रहा तो यह पढ़ा लिखा वैज्ञानिक व्यक्ति नाली और गटर में क्यों कूद रहा है समझ के बाहर है 

और क्यों स्वास्थ्यवर्धक चीज दूध भी दही हरी सब्जियां समय के फल फूल छोड़कर कुरकुरे धकाधक चटपटे फटाफट चाऊमीन मैगी बर्गर हैमबर्गर सड़े गले बिस्कुट और पाव रोटी नकली मक्खन लगा अशुद्ध आटे से बना रोटी और प्लास्टिक के लंबे चावल क्यों खा रहा है और रोगी होकर डॉक्टर के यहां क्यों जा रहा है बाहर का जहरीला तेल खाकर हार्ट अटैक का शिकार क्यों हो रहा है


 क्या सचमुच मनुष्य पढ़ा लिखा शब्द है या जंगल युग में जाकर जंगली लोगों से भी अधिक मूर्ख बनता चला जा रहा है जो फोटो स्त्री पुरुष मोबाइल में देखते हैं उसकी जिंदा फोटो पति-पत्नी और बच्चों के रूप में उपस्थित हैं लेकिन उनको उसमें रुचि नहीं है और दुनिया भर के अश्लील पूर्ण और गंदे वीडियो और चित्रों में ही रुचि है 


नई पीढ़ी पर माता-पिता ध्यान नहीं देते क्योंकि उनके यहां जाने का कम मौका मिलता है और मौका मिलता है तो एक-दो दिन में चले आते हैं उन्हें क्या मालूम कि उनका लौंडा बीयर और शराब पी रहा है या तो  गलत लड़कियों के साथ संबंध बनाकर रखा है या कृत्रिम और अप्राकृतिक संबंध बनाकर अपना जीवन नर्क कर चुका है मेरी बातों पर विश्वास ना हो तो पढ़ रहे और नौकरी कर रहे अपने लड़के लड़कियों की गहराई से जांच करो और 90% से अधिक बात सही ना हो तो मुझे फोन करके बोलो कि मैं गलत कह रहा हूं

बहुत से लोग सच्चाई नहीं जानते बहुत से लोग सच्चाई देखते और जानते हैं लेकिन लिखने की हिम्मत नहीं होती ऐसे लोगों का देश समाज और धर्म तथा घर परिवार के लिए कोई मूल्य नहीं होता जो सच्चाई देखे उसे लिखे पड़े और गलत काम रोकने का प्रयास करें वही स्त्री पुरुष देश समाज धर्म के काम आता है एक और दुखद और भयानक सच्चाई आप सबको बताना चाहता हूं कि भारत में ज्यादातर लड़के लड़कियों का यौन शोषण उनके अपने निकट के लोग ही करते हैं प्रारंभ में लोग ध्यान नहीं देते और जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती है तब हाहाकार मच जाता है यदि आपके घर का कोई भी बच्चा या बच्ची किसी के बहुत अधिक नजदीक है और कोई व्यक्ति बार-बार उसके साथ आता जाता है या घर आता है तो उसे पर बहुत ही सतर्क निगाह रखें सब कुछ समझ में आ जाएगा इसी का फल है कि लोग मानी और मौसी तक से विवाह कर ले रहे हैं 

 आप मुंगेरीलाल के हसीन सपने देख रहे हैं बच्चों को लेकर और बच्चे हवा हवाई मार्ग से आकाश की यात्रा पर उड़ रहे हैं। 

जैसे विनाश करने वाला हमेशा विनाश करता है वैसे हम जैसे निर्माण करने वाले सदैव प्रयास करते हैं की मानवता और सच्चाई सदाचार आचार विचार और अच्छाई बची रहे । यदि 200 साल में हमारे साथ करोड़ बलिदानी अन्य लोगों की तरह यही सोचते कि हमें अपना जान देश की स्वतंत्रता के लिए देने की क्या आवश्यकता है तो आज भी हम अंग्रेजों के गुलाम होते। 


स्थितियां इतनी खराब हो चुकी हैं कि यदि बच्चों के हाथ में मोबाइल है और आप जरूरी बात किसी से करना चाहते हैं तो बच्चे बार-बार फोन काट देते हैं और कुछ चालक बच्चे तो आपका फोन ही ब्लॉक कर देते हैं इस बुरी स्थिति और क्या होगी 😔 


और आप सोचते हैं की कमी नई पीढ़ी के लड़के लड़कियों की है तो आप गलत हैं गलती आपकी है और बच्चों को दोषी बना रहे हो संसार में कोई ऐसा बच्चा नहीं है जो मोबाइल या कागज से खेले यह जिसके साथ खेलने वाला स्त्री या पुरुष उपस्थित है - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक