Sunday, 30 August 2026

मौसम की भविष्यवाणी - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर

मौसम की भविष्यवाणी  - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर
20 अगस्त से 31 अगस्त तक अंतराल के साथ भारी वर्षा की भविष्यवाणी जौनपुर सहित पूरे देश के लिए हुई सच आगे भी 10 सितंबर तक वर्षा का क्रम जारी रहेगा
आज जौनपुर और आसपास के जनपदों का अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहेगा

जबकि कल का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और 26 डिग्री सेल्सियस रहेगा इसी बीच सापेक्षिक आर्द्रता की मात्रा न्यूनतम 85 प्रतिशत और अधिकतम 100% रहेगी हवा की दिशा मुख्य रूप से  पूर्वी उत्तर पूर्वी और वेग 10 से 20 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगा

वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद अच्छा 20 से लेकर 60 के बीच रहेगा और अल्ट्रावायलेट किरणों की तीव्रता 1 से 4 के बीच रहेगी। धूप छांव के बीच बूंदाबांदी और  हल्की मध्यम कहीं-कहीं तेज और कहीं-कहीं बहुत तेज वर्षा जौनपुर और आसपास के सभी जनपदों में होने की संभावना  है 

  कल भी अधिकांश स्थानों में बूंदाबांदी और बाकी स्थानों में हल्की मध्यम और कहीं-कहीं तेज वर्षा जारी रहेगी और यह वर्षा से धीरे-धीरे कमजोर होगी और 31 अगस्त तक चलेगी

 उसके बाद भी छिटपुट वर्षा का दौर सितंबर के प्रथम स्थान सप्ताह में जारी रह सकता है।  इसका कारण यह है कि मानसून एक चक्र के रूप में दिल्ली पंजाब शिमला बरेली नेपाल बिहार बंगाल उड़ीसा मध्य प्रदेश महाराष्ट्र के उत्तरी गुजरात के पश्चिमी भाग और राजस्थान के पूर्वी भागों में घूम कर वर्षा करता रहेगा ।

 इसलिए 10 सितंबर तक इन सभी भागों में और देश के अधिकांश भागों में वर्षा होगी इसके बाद लानिनो का प्रभाव तेज होगा और 15 सितंबर से वर्षा समाप्त हो जाएगी हल्की-फुल्की वर्षा सितंबर के आखिरी अक्टूबर के प्रथम भाग में हो सकती है 

अभी तक जौनपुर और आसपास के क्षेत्र में 800 मिलीलीटर वर्ष के मुकाबले 630 मिलीमीटर वर्षा हुई है जबकि यहां पर वार्षिक वर्षा का औसत 900 मिमी से 1000 मिली मीटर के बीच होता है पिछले वर्ष यहां पर 1000 मिलीलीटर वर्षा हुई थी

 ऐसी संभावना है कि सितंबर के अंत तक यहां पर 700 मिमी वर्षा हो सकती है और दिसंबर तक वर्षा की यह मात्रा 800 मिलीलीटर तक जा सकती है फिर भी सामान्य वर्षा में 15 से 20% की कमी होना निश्चित है पूरे देश का यही हाल रहेगा केवल एक चौथाई भारत में सामान्य से अधिक वर्षा होगी ।

मानसून के प्रचंड ऊर्जा और वेग पर अल नीनो का प्रभाव 1 अगस्त से 10 सितंबर तक प्रभावहीन होने से ही वर्षा हो रही है इसमें 25 अगस्त से 5 सितंबर तक भारी वार्षिक भी सम्मिलित है

 इसके बाद अलनिनो का प्रभाव फिर से बढ़ेगा जिससे सितंबर में वर्षा की स्थितियां बेहद खराब हो सकती हैं और सूखे जैसी स्थिति आ सकती है। 15 सितंबर के बाद अलनीनो फिर से प्रभावी हो जाएगा यह मत हमारे केंद्र द्वारा महीनों पहले बार-बार कही और लिखीगई थी। ।

 इस प्रकार दो सूखे जैसी स्थितियां जून और जुलाई में बीत चुकी हैं तीसरे की जो भविष्यवाणी हमारे केंद्र ने किया था वह सितंबर में आना लगभग निश्चित है लेकिन इसके बाद एक और चक्र संघनन वाष्पन और विक्षोभ से प्रभावित होगा जिससे सितंबर के अंत में वर्षा होने से खेती बागवानी और सभी लोगों को लाभ हो सकता है। 

इसके अलावा 24 अगस्त से 31 अगस्त तक भारी मूसलाधार वर्षा की हमारे केंद्र की भविष्यवाणी एक बार फिर 49 वर्षों की भांति पूरी तरह सत्य हुई अभी गर्मी वर्षा उमस और पसीने से पीछा 15 अक्टूबर के बाद ही पूरी तरह समाप्त होगा इसके साथ ही 27 अगस्त से वर्षा कमजोर पडने की हमारे केंद्र की भविष्यवाणी भी सही हुई और सितंबर के अंत तक मानसून के वापसी की बात भी बिल्कुल सही होगी। 

और इस वर्ष 3 बार सूखा पडने की भविष्यवाणी भी सही होगी जिसमें दो बार पड़ चुका है जून और जुलाई में अगला सितंबर में आने वाला है  और वर्षा भी पिछले वर्ष से 15 से 20% कम होने के बाद बिल्कुल सही होगी सबसे अच्छी बात ही है कि मानसूनी वर्षा का केंद्र मध्य भारत में एक सप्ताह तक चलता रहेगा जिससे कि उत्तर प्रदेश बिहार छत्तीसगढ़ उड़ीसा मध्य प्रदेश राजस्थान के पूर्वी भाग दिल्ली हिमालय के उत्तरी भागों नेपाल और राजस्थान के पूर्वी महाराष्ट्र के उत्तरी और गुजरात के  पूर्वी भागों में मध्य और तेज वर्षा होगी ।

इन्हीं बातों को तमाम प्रिंट इलेक्ट्रानिक मीडिया नकल करके हमेशा की तरह थोड़ा इधर-उधर बढ़कर छाप देंगे इन सब बातों को आप लोग बाद में पढ़ लीजिएगा कि कैसे चालाकी से दूसरों की चीज को अपना बना लेते हैं और मौसम विभाग जो कमजोर जाडे की बात कह रहा है वह भी उसी तरह पूरी तरह से गलत होगी जैसे कि उसके सामान्य से अधिक वर्षा की भविष्यवाणी पूरी तरह गलत हुई है । 

मानसून 26-31 अगस्त तकउत्तर प्रदेश के पश्चिमी भागों दिल्ली राजस्थान के पूर्वी भागों गुजरात के कुछ भागों महाराष्ट्र के उत्तरी और मध्य प्रदेश तथा उड़ीसा बिहार झारखंड के पश्चिमी भागों में केंद्रित हो जाएगा जहां पर अनेक स्थानों पर मध्यम भारी कहीं-कहीं मूसलाधार वर्षा होगी कितना है वर्षा हो लेकिन संपूर्ण देश में वर्षा का घाटा पूरा नहीं होगा और मैंने पहले भी लिख दिया है कि सितंबर से अल नीनो का प्रभाव तेज होने से वर्षा बहुत ही कमजोर होगी और अगस्त की तरह मानसून का प्रभाव अलनिनो से ऊपर नहीं जा पाएगा इस्कल खंड में चिंता एवं नेपाल अफगानिस्तान अमेरिका और दक्षिण पूर्वी एशिया में भूकंप ज्वालामुखी विस्फोट सुनामी लहरों और ग्लेशियर विस्फोट तथा जिलों के बह जाने से पहले कल जैसा दृश्य उपस्थित होगा

दुर्गा शक्ति नागपाल और सबीना खातून प्रशासनिक सेवा और न्यायिक सेवा में टकराव - डॉ दिलीप कुमार सिंह

 दुर्गा शक्ति नागपाल और सबीना खातून प्रशासनिक सेवा और न्यायिक सेवा में टकराव  - डॉ दिलीप कुमार सिंह
 दुर्गा शक्ति नागपाल हमेशा विवाद और चर्चाओं में रहे हैं बालू खनन को लेकर अखिलेश यादव के समय में वह बहुत बुरी तरह से घिर गई थी जब सारी भारतीय प्रशासनिक सेवा ने उनका साथ दिया और बड़ी मुश्किल से उनकी कुर्सी बची थी अभी ताजा मामला फिर से चर्चाओं में है जब उन्होंने देवीपाटन मंडल के कमिश्नर की हैसियत से सिविल जज सबीना खातून को तथा कथित ढंग से फोन करके पूछताछ किया और उन्हें धमकी दिया जिस पर न्यायपालिका विशेष कर उच्च न्यायालय बहुत कठोर कदम उठाया है हैं और उन्हें अवमानना का प्रथमदृष्टया दोषी पाया है।

वास्तव में भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय न्यायपालिका के बीच यह टकराव आज से नहीं है यह स्वतंत्रता के बाद से ही चला आ रहा है जिसमें दोनों तंत्र एक दूसरे पर हावी होने सोच रखते हैं तो आइए देखते हैं कि आखिर देवीपाटन मंडल की आयुक्त और सिविल से सबीना खातून का मामला इतना चर्चित क्यों हुआ और यह इतना तूल क्यों पकड़ रहा है।

 यहां पर एक बात विशेष रूप से यह भी उल्लेखनीय है कि दुर्गा शक्ति नागपाल का संबंध सीधे-सीधे जौनपुर से है और वह जौनपुर की बहू है क्योंकि उनके पति अभिषेक सिंह भी आई ए एस थे और वर्तमान में त्यागपत्र देकर सोशल मीडिया और समाज सेवा में सक्रिय हैं दोनों का विवाह 2012 ईस्वी में हुआ था यह एक अंतरजातीय विवाह था उनके प्रति अभिषेक सिंह अभिनय की दुनिया और अन्य कर्म के कारण अच्छे खासे चर्चित रहते हैं और श्री राम मंदिर दर्शन के लिए अयोध्या में उन्होंने कई मुफ्त बसें भी चलाई थी।

 दूसरी तरफ सिविल जा सीनियर डिवीजन सबीना खातून भी दुर्गा शक्ति नागपाल की तरह एक अनुशासन पसंद और ईमानदार और कार्य के प्रति समर्पित न्यायिक अधिकारी मानी जाती हैं अनुशासन के मामले में वह बहुत कठोर हैं और उनकी भी अपनी एक अलग छवि है वास्तव में दोनों के मध्य अगस्त 2026 में  हुए टेलिफोनिक विवाद की जड़ 30 साल पहले का एक मुकदमा ज्योति विद्या मंदिर बनाम राज्य उत्तर प्रदेश को लेकर हैं  यह मुकदमा 1997 से चल रहा है और इस पर ज्योति विद्या मंदिर के पक्ष में न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश भी पारित है  राज्य सरकार का मानना है कि यह सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करके बनाया गया है जबकि ज्योति मंदिर विद्यालय के लोगों का कहना है कि यह उनकी अपनी जमीन है वर्तमान समय में इस पर स्थगन आदेश पारित है और यह मुकदमा सबीन खान की अदालत में चल रहा था जो फिलहाल दूसरे न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया है सूत्रों के अनुसार दुर्गा शक्ति नागपाल ने इस पर पूछताछ किया और सबीना खान का व्यक्तिगत नंबर लेकर उनसे बातचीत किया जो उस समय अवकाश पर चल रही थी बताया जाता है कि दुर्गा शक्ति नागपाल के कठोर पूछताछ और धमकी भरे दृष्टिकोण से सबीना खान नाराज हो गई  और उन्होंने जिला जज और उच्च न्यायालय को पत्र लिखकर इस बारे में शिकायत किया और उन पर अनुचित प्रभाव डालने न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला करने और अमर्यादित भाषा बोलने का आरोप लगाया उधर कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल द्वारा भी प्रशासनिक न्यायाधीश को इस मामले में पत्र लिखकर सबीना खान पर अमर्यादित भाषा बोलने उन्हें धमकाए जाने और मुकदमे में ढीला ढाला आरो का बनाए जाने का आरोप लगाया इस मामले में जनपद न्यायालय और उच्च न्यायालय ने प्रथम दृष्टि दुर्गा शक्ति नागपाल आयुक्त के व्यवहार और कार्यशैली पर आपत्ति जताते हुए इसे न्यायपालिका पर सीधा हमला बताया और उन्हें न्यायिक अवमानना का दोषी पाया।

 इस मामले पर न्यायमूर्ति सैयद हसन कमर रिजवी ने बहुत गंभीर दृष्टिकोण अपनाते हुए इस मामले में दुर्गा शक्ति नागपाल पर न्यायिक अवमानना के लिए पर्याप्त कारण का पाया और उनके आचरण को न्यायपालिका पर हमला बताया जबकि दुर्गा शक्ति नागपाल ने सबीना खान पर अप शब्दों और अमर्यादित भाषा का आरोप लगाते हुए कहा था कि उनका मामला केवल पैरवी करके इस दीर्घकालीन मुकदमे को समाप्त करना था उधर सिविल जज सबीना खान ने इस प्रोटोकॉल का उल्लंघन न्यायपालिका की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप मानते हुए यह आप भी लगाया कि दुर्गा शक्ति नागपाल ने उनके संस्कारों पर टिप्पणी किया था यह मामला अत्यंत संवेदनशील चर्चित हो गया है जिसे प्रशासनिक सेवा और न्यायपालिका में सीधे टकराव के रूप में देखा जा रहा है   कहा तो यहां तक गया है कि दुर्गा शक्ति नागपाल ने खुद को सीनियर प्रशासनिक सेवा का अधिकारी बनाते हुए सबीना खान पर रोब डालने की कोशिश किया था बहरहाल सच क्या है यह दोनों के फोन रिकॉर्ड सामने आने पर ही पता चल सकेगा।

[8/30, 12:56 PM] Dr  Dileep Kumar singh: वर्तमान में सिविल जज सीनियर डिवीजन से बिना खान का जन्म 1983 ईस्वी में हुआ था और 2017 में उन्होंने न्यायिक सेवा प्रारंभ किया था यह मामला इतना अधिक तूल पकड़ गया है कि माननीय उच्च न्यायालय ने इसको अवमानना देखने वाली पीठ के सामने संदर्भित कर दिया है इतना ही नहीं न्यायिक सेवा संघ ने एक बैठक कर इस पर कठोर आपत्ति प्रकट किया है और यह कहा है कि यह मामला सरकार की तरफ से सरकारी अधिवक्ता देखते हैं तो दुर्गा शक्ति नागपाल का सीधे-सीधे इस मामले में पूछताछ करने का कोई अधिकार नहीं है

 उच्च न्यायालय ने  सीधे-सीधे  यह कहा की कोई भी प्रशासनिक अधिकारी कितना ही वरिष्ठ क्यों ना हो वह किसी मुकदमे को लेकर जज से सीधे-सीधे बात नहीं कर सकता है इसके लिए उसके अपने राज्य के अधिवक्ता होते हैं वह अपनी वरिष्ठता का हवाला देते हुए न्यायिक अधिकारियों को अनुचित प्रभाव में लेने या अनुचित काम करने की मंशा रखता है तो उसे न्यायिक और मानना माना जाएगा वर्तमान समय में उच्च न्यायालय की अवमान्य पीठ के सम्मुख है और यह देखना है कि इस मामले का अंत कहां और कैसे होता है एक बात अवश्य है कि जिस तरह से पुलिस प्रशासन न्यायपालिका और राज्य तथा केंद्र सरकारी काम कर रही हैं उसे जन सामान्य को तो कोई भी लाभ नहीं पहुंच रहा है जनता दोनों तरफ से चक्की में पिस रही है उसे एक तरफ पुलिस से हमेशा डर लगा रहता है तो दूसरे और प्रशासनिक और न्यायिक कार्रवाई से भी जनता भयभीत रहती है उसकी सुनने वाला कोई नहीं है देश की आजादी से आज तक जितने भी कदम उठाए गए उसमें वर्ग विशेष का अधिकारी और वर्ग विशेष का अधिकारी और राजनेता वर्ग का तथा नए कार्य का चाहे जितना लाभ हुआ हो और उनके वेतन भत्ते सुविधाएं चाहे जितनी बड़ी हो लेकिन सिविल क्रिमिनल राजा सूचक बंदी के करोड़ों करोड़ों लंबित मुकदमे यही दिखाते हैं कि यदि सच्चाई ईमानदारी कर्तव्यनिष्ठा और समर्पित मन से सारे तंत्र काम करते तो आज यह स्थिति नहीं आती वास्तविक धरातल पर तो स्थिति इतनी खराब है जो कहने लायक भी नहीं है लेकिन 99% भारत के लोग पुलिस और प्रशासन के डर से तथा न्यायिक अवमानना की कार्रवाई के चलते कुछ भी कहने सुनने से डरते रहते हैं और बचते रहते हैं और इसीलिए देश और देश की जनता का हाल बेहाल है।

बाकी बहुत कुछ बातें लिखने लायक नहीं है वह स्वच्छ शीशे की तरह पारदर्शी और बिल्कुल साफ है और सच्चाई सारी दुनिया देख रही है एक बड़ा सच यह भी है कि आज के समय में 95% जनता पुलिस प्रशासन और न्यायपालिका में ना तो अपना काम कर सकती है और ना मुकदमे लड़ सकती है इससे अधिक शोचनीय स्थिति एक देश की और क्या हो सकती है  ना तो अपना काम कर सकती है और ना मुकदमे लड़ सकती है इससे अधिक शोचनीय स्थिति एक देश की और क्या हो सकती हैं जहां पर95% जनता को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए पुलिस प्रशासन और न्यायपालिका की शरण में जाने के लिए भ्रष्टाचार से होकर गुजरना पड़े इतना अवश्य है कि आज भी सभी टैटो में न्यायपालिका सबसे अधिक स्वच्छ पारदर्शी है और अधिकांश न्यायाधीश आज भी इमानदारी से अपने कर्तव्य का निर्वहन करना चाहते हैं लेकिन उनकी परेशानी यह है कि उनके अपने लोगों से लेकर घर परिवार सगे संबंधी राजनेता अपराधी सभी 99% अनुचित काम लेकर सिफारिश करने जाते हैं और किसी भी तरह से अपना काम कराना चाहते हैं यह एक ऐसा बिंदु है जहां पर बड़े से बड़े व्यक्ति को सोचना पड़ता है

जौनपुर जनपद की मेधावी और प्रतिभाशाली छात्रा शिप्रा सिंह पुत्री डॉ दिलीप कुमार सिंह एवं श्रीमती पद्मा सिंह ने नेट एवं पीएचडी की संपन्न परीक्षा में 194 अंक प्राप्त करके नेट परीक्षा क्वालीफाई करते हुए सहायक प्राध्यापक और पीएचडी में प्रवेश की पात्रता की उपलब्धि प्राप्त किया है।

जौनपुर जनपद की मेधावी और प्रतिभाशाली छात्रा शिप्रा सिंह पुत्री डॉ दिलीप कुमार सिंह एवं श्रीमती पद्मा सिंह ने नेट एवं पीएचडी की संपन्न परीक्षा में 194 अंक प्राप्त करके नेट परीक्षा क्वालीफाई करते हुए सहायक प्राध्यापक और  पीएचडी में प्रवेश की पात्रता की उपलब्धि प्राप्त किया है। 


प्रारंभ से ही मेधावी और प्रतिभाशाली छात्रा रही प्राथमिक शिक्षा डायट और ब्लॉसम तथा रामेश्वर शिशु विहार और राज कॉलेज से लिया और बाद में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर से एम बी ए  प्रथम श्रेणी अंक में उच्च स्थान के एमबीए की परीक्षा उत्तीर्ण करते हुए बी एड और एम एड की परीक्षाएं भी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण किया है पिछले वर्ष भी इस परीक्षा में शिप्रा सिंह ने पीएचडी के लिए अर्हता प्राप्त की थी लेकिन कुछ अंकों से नेट में अर्हता नहीं प्राप्त कर पाई थी उन्होंने सिद्ध कर दिया कि कर्म और प्रतिभा का कोई विकल्प नहीं होता है और यह सफलता सारे घरेलू काम करते हुए अत्यंत विपरीत परिस्थितियों में प्राप्त की गई है। 

संप्रति प्रतियोगी परीक्षाओं में तैयारी कर रही शिप्रा सिंह को इस उपलब्धि पर उनके परिवार के लोगों   सभी मित्रों परिजनों और प्रेस के लोगों द्वारा शुभाकांक्षी लोगों के द्वारा बधाई और शुभकामनाएं दिया है और उज्जवल भविष्य की कामना किया है।

Thursday, 27 August 2026

मिल-जुलकर रहने और इंसानी सम्मान पर कुरान की सोच*

*मिल-जुलकर रहने और इंसानी सम्मान पर कुरान की सोच*
भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है, जो दुनिया के सबसे ज़्यादा धार्मिक विविधता वाले देशों में से एक है। इस समुदाय के लिए, इंसानी सम्मान और शांति से मिल-जुलकर रहने के बारे में कुरान की सोच कोई काल्पनिक धार्मिक विचार नहीं है। यह कई धर्मों, भाषाओं और परंपराओं वाले देश में रोज़मर्रा की ज़िंदगी के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शक है। ऐसे समय में जब सार्वजनिक चर्चाओं में अक्सर एकता का आधार तलाशा जाता है, यह देखना ज़रूरी है कि कुरान हर इंसान की अहमियत और मिल-जुलकर रहने के कर्तव्य के बारे में क्या कहता है।
कुरान इंसानी अहमियत पर अपनी चर्चा किसी खास समुदाय से नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत से शुरू करता है। सूरह अल-इसरा में, अल्लाह कहता है: "हमने आदम की औलाद को सम्मान दिया है, उन्हें ज़मीन और समुद्र में यात्रा कराई है, उन्हें अच्छी और जायज़ चीज़ें दी हैं, और उन्हें अपनी बहुत सी रचनाओं से कहीं ज़्यादा श्रेष्ठ बनाया है" (17:70)। व्याख्या करने वालों ने लंबे समय से यह माना है कि यह सम्मान हर इंसान को मिलता है, चाहे उसका धर्म, नस्ल या हैसियत कुछ भी हो - सिर्फ़ इंसान होने के नाते। इस नज़रिए से, सम्मान दौलत, खानदान या ताकत से हासिल की जाने वाली चीज़ नहीं है; यह बनाने वाले की तरफ़ से पूरी इंसानियत को जन्मसिद्ध अधिकार के तौर पर दिया गया है। इसका मतलब है कि इंसानी ज़िंदगी और इंसानी अहमियत का सम्मान इस बात को पहचानने से शुरू होता है कि हर व्यक्ति में यह ईश्वर-प्रदत्त सम्मान मौजूद है। इंसानी अहमियत की इस साझा सोच को सूरह अल-हुजरात में और आगे बढ़ाया गया है, जहाँ कुरान सिर्फ़ मुसलमानों को नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत को संबोधित करता है: "हमने तुम्हें एक पुरुष और एक स्त्री से पैदा किया है और तुम्हें अलग-अलग समुदायों और कबीलों में बांटा है ताकि तुम एक-दूसरे को जान सको। सच तो यह है कि अल्लाह की नज़र में तुममें सबसे नेक वही है जो सबसे ज़्यादा नेक-कार है" (49:13)। इब्न कसीर जैसे पारंपरिक व्याख्याकार बताते हैं कि यह आयत खानदान, कबीले, रंग या राष्ट्रीयता पर आधारित घमंड को खत्म करने के लिए आई थी। यह आयत साफ़ करती है कि असली बड़प्पन नेक-कारी और अच्छे व्यवहार में है, न कि जन्म या पृष्ठभूमि में। कुरान दूसरों को विश्वास की आज़ादी देने के बारे में भी उतना ही स्पष्ट है। सूरह अल-बकराह घोषणा करता है: "धर्म के मामले में कोई ज़बरदस्ती नहीं होनी चाहिए, क्योंकि सच झूठ से साफ़ तौर पर अलग है" (2:256)। सदियों से विद्वानों ने इसे एक स्थायी सिद्धांत के रूप में समझा है कि किसी को भी कोई धर्म अपनाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, क्योंकि आस्था दिल और ज़मीर का मामला है। धर्म की आज़ादी के संवैधानिक वादे पर बने देश के लिए, कुरान का यह सिद्धांत भारत की "सर्व धर्म समभाव" यानी सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान की सभ्यतागत प्रतिबद्धता से गहराई से मेल खाता है।
सहिष्णुता से आगे बढ़कर, कुरान मानने वालों को उन लोगों के प्रति सक्रिय दया और न्याय का व्यवहार करने के लिए कहता है जो दूसरे धर्मों के हैं और उनके साथ शांति से रहते हैं। सूरह अल-मुमताहना में कहा गया है: "अल्लाह तुम्हें उन लोगों के साथ अच्छा और न्यायपूर्ण व्यवहार करने से नहीं रोकता जो धर्म के कारण तुमसे लड़ते नहीं हैं और तुम्हें तुम्हारे घरों से निकालते नहीं हैं। सचमुच, अल्लाह न्याय करने वालों से प्यार करता है (60:8)।" यह आयत मानने वाले को केवल साथ रहने से आगे बढ़कर दूसरे धर्मों के पड़ोसियों के साथ अच्छा व्यवहार करने, निष्पक्षता और दया दिखाने की सकारात्मक ज़िम्मेदारी की ओर ले जाती है। यह मूल्य भारत के गांवों, मोहल्लों और मिली-जुली बस्तियों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी अक्सर एक ही गली, एक ही स्कूल और एक ही तरह के सुख-दुख साझा करते हैं।
असल में, भारतीय मुसलमानों ने सदियों से इस कुरानी नैतिकता को देश के साझा सांस्कृतिक जीवन में अपनाया है। पूरे भारत में यात्रा करने वाले सूफी संत - जिनमें अजमेर के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भी शामिल हैं - दया की उस भावना के प्रतीक बन गए जिसने हर पृष्ठभूमि के लोगों का स्वागत किया। अजमेर की दरगाह ख्वाजा साहेब, जिसका प्रबंधन आज अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय द्वारा 'दरगाह ख्वाजा साहेब अधिनियम, 1955' के तहत किया जाता है, इस विरासत को आगे बढ़ा रही है: यह हर साल विभिन्न धर्मों के लाखों श्रद्धालुओं का स्वागत करती है और कई तरह के कल्याणकारी काम करती है, जैसे सामुदायिक भोज, रमज़ान में मुफ़्त भोजन, तीर्थयात्रियों के लिए चिकित्सा सहायता, और विधवाओं, बेसहारा महिलाओं और ज़रूरतमंद छात्रों की मदद। यह एक आधुनिक, सरकारी तौर पर दर्ज उदाहरण है कि कैसे इस्लामी परंपरा पर आधारित सूफी संस्थानों ने खुलेपन, सेवा और धर्म से परे साझा अपनापन की संस्कृति को बढ़ावा दिया है।
यही भावना उस व्यापक परंपरा में भी मिलती है जिसे अक्सर "गंगा-जमुनी तहज़ीब" कहा जाता है - उत्तरी भारत की मिली-जुली संस्कृति जिसमें हिंदू और मुसलमान पीढ़ियों से एक-दूसरे के त्योहार मनाते आए हैं, कव्वाली जैसी कलात्मक परंपराओं को साझा करते आए हैं, और शिष्टाचार और सम्मान की एक साझा भाषा विकसित की है। भारत सरकार का अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय, जिसे भारत के अल्पसंख्यक समुदायों के कल्याण और विकास पर ध्यान केंद्रित करने के लिए बनाया गया था, ऐसे संस्थानों और पहलों का समर्थन करना जारी रखता है। यह एक ऐसे विविध और समावेशी समाज के प्रति संवैधानिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है जिसमें ऊपर बताई गई कुरानी मूल्यों को स्वाभाविक रूप से अपनाया जाता है।
भारतीय मुस्लिम समुदाय के लिए, ये कुरानी शिक्षाएं आस्था का विषय भी हैं और देश के सामूहिक जीवन में योगदान भी। वे हर मानने वाले को यह देखने के लिए प्रेरित करती हैं इंसानी गरिमा को सार्वभौमिक मानना, समुदायों के बीच के अंतर को बंटवारे के बजाय आपसी पहचान और सम्मान का मौका समझना, हर व्यक्ति की अंतरात्मा की स्वतंत्रता का सम्मान करना और हर धर्म के पड़ोसियों के साथ न्याय और दया का व्यवहार करना। विविधता में एकता पर गर्व करने वाले देश में, इन कुरानी सिद्धांतों को अपनाना एक धार्मिक कर्तव्य और नागरिक योगदान, दोनों है—यह इस बात की याद दिलाता है कि सच्चा विश्वास और सच्चा सह-अस्तित्व हमेशा साथ-साथ चलते रहे हैं।

फ़रहत अली खान 
एम ए गोल्ड मेडलिस्ट

Tuesday, 25 August 2026

मौसम की भविष्यवाणी - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर

मौसम की भविष्यवाणी  - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर
आज जौनपुर और आसपास के जनपदों का अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहेगा जबकि कल का अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस और 28 डिग्री सेल्सियस रहेगा इसी बीच सापेक्षिक आर्द्रता की मात्रा न्यूनतम 85 प्रतिशत और अधिकतम 100% रहेगी हवा की दिशा मुख्य रूप से दक्षिणी दक्षिणी पूर्वी और वेग 10 से 20 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगा वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद अच्छा 30 से लेकर 60 के बीच रहेगा और अल्ट्रावायलेट किरणों की तीव्रता 1 से 3 के बीच रहेगी।
 24 और 25 अगस्त की तरह आज भी अधिकांश स्थानों में भारी और बाकी स्थान में मध्यम वर्षा जारी रहेगी और यह वर्षा कल से धीरे-धीरे कमजोर होगी और 31 अगस्त तक चलेगी 

अभी तक जौनपुर और आसपास के क्षेत्र में 800 मिलीलीटर वर्ष के मुकाबले 605 मिलीमीटर वर्षा हुई है जबकि यहां पर वार्षिक वर्षा का औसत 900 मिमी से 1000 मिली मीटर के बीच होता है पिछले वर्ष यहां पर 1000 मिलीलीटर वर्षा हुई थी 


मानसून के प्रचंड ऊर्जा और वेग पर एल नीनो का प्रभाव 1 अगस्त 10 सितंबर तक प्रभावहीन होने से ही वर्षा हो रही है इसके बाद अलनिनो का प्रभाव फिर से बढ़ेगा जिससे सितंबर में वर्षा की स्थितियां बेहद खराब हो सकती हैं और सूखे जैसी स्थिति आ सकती है


 इस प्रकार दो सूखे जैसी स्थितियां जून और जुलाई में बीत चुकी हैं तीसरे की जो भविष्यवाणी हमारे केंद्र ने किया था वह सितंबर में आना लगभग निश्चित है लेकिन इसके बाद एक और चक्कर संघनन वाष्पन और विक्षोभ से प्रभावित होगा जिससे सितंबर के अंत में वर्षा होने से खेती बागवानी और सभी लोगों को लाभ हो सकता है 


इसके अलावा 24 अगस्त से 26 अगस्त तक भारी मूसलाधार वर्षा की हमारे केंद्र की भविष्यवाणी एक बार फिर 49 वर्षों की भांति पूरी तरह सत्य हुई अभी गर्मी वर्षा उमस और पसीने से पीछा 15 अक्टूबर के बाद ही पूरी तरह समाप्त होगा

न्यूज 2:
 जौनपुर और आसपास के जनपदों को विशेष कर जौनपुर के दक्षिणी भागों और वाराणसी से लेकर भदोही मिर्जापुर गाजीपुर अब से 1 घंटे के अंदर कहीं-कहीं बहुत भारी मूसलाधार वर्षा तो बाकी जगह माध्यम से भारी वर्षा दो दिन तक होने वाली है अन्य जनपदों में भी यही स्थिति होने वाली है जो जौनपुर के आसपास हैं अयोध्या प्रयागराज में भी ऐसा ही होने वाला है इसलिए आप सब लोग सावधान रहें डॉ दिलीप कुमार सिंह
 कल शाम 7 बज कर 4 मिनट को हमारे केंद्र के द्वारा किए गए भीषण मूसलाधार वर्षा की भविष्यवाणी जौनपुर प्रतापगढ़ सुल्तानपुर आजमगढ़ गाजीपुर वाराणसी दीनदयाल नगर रावटसगंज और अयोध्या प्रयागराज तथा आसपास के जनपदों के लिए ईश्वर की कृपा से पूरी तरह सही हुई अभी-यह भीषण मूसलाधार मूसलाधार वर्षा आज और मध्यम वर्षा कल भी जारी रहेगी डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर

Monday, 24 August 2026

आज का अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस रहेगा जबकि कल का अधिकतम तापमान 33 और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहेगा जौनपुर नगर क्षेत्र में हल्की वर्षा बूंदाबांदी और कई पडोसी जिलों में हल्की सामान्य मध्यम वर्षा होने की आशा है कल भी लगभग यही मौसम रहेगा गर्मी उमस पसीना जारी रहेगा की कुछ स्थानों पर अच्छी वर्षा हो सकती है।

आज का अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस रहेगा जबकि कल का अधिकतम तापमान 33 और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहेगा जौनपुर नगर क्षेत्र में हल्की वर्षा बूंदाबांदी और कई पडोसी जिलों में हल्की सामान्य मध्यम वर्षा होने की आशा है कल भी लगभग यही मौसम रहेगा गर्मी उमस पसीना जारी रहेगा की कुछ स्थानों पर अच्छी वर्षा हो सकती है। 
वायु गुणवत्ता सूचकांक 40 से 60 के बीच हवा के दिशा मुख्य रूप से पूर्वी दक्षिणी रहेगी और गति 10 से 20 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी

पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 1 से 3 के बीच रहेगी और प्रदूषण की मात्रा न्यूनतम रहेगी यह मौसम 30 अगस्त के बाद फिर से बदल जाएगा

हमारे केंद्र के द्वारा जनवरी से जून तक 35 बार  लिखित भविष्यवाणी की गई थी केवल काम चलाने लायक वर्षा होगी इसलिए खेती और बागवानी मुख्य रूप से सूखी फसलों वाली करें क्योंकि इस वर्ष पिछले साल के अपेक्षा 70 से 80% वर्षा होगी ।
अभी तक 700 मिली लीटर वर्षा होनी चाहिए थी लेकिन आज तक की वर्षा जोड़ने पर केवल 450 मिलीलीटर  वर्षा जौनपुर में हुई है अभी आशा है कि  30 अगस्त तक वर्षा और होगी  मानसूनी बादलों के संघनन वाष्पन और स्थानीय विक्षोभ के कारण जौनपुर और पड़ोसी जनपद पर केंद्रित होने से लगातार कई दिन  वर्षा की स्थिति बनी है आर्य वर्षा मानव पशु पक्षियों खेती-बाड़ी बागवानी के लिए वरदान है - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि और निदेशकअलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र

Sunday, 23 August 2026

सावन की पूर्णिमा और रक्षाबंधन महापर्व - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

सावन की पूर्णिमा और रक्षाबंधन महापर्व - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 
सावन महीना परम पवित्र होता है पूरे सावन महीने में पर्व और त्योहार सबसे अधिक संख्या में मनाये जाते हैं सर्वप्रथम तो संपूर्ण सावन को भगवान शिव का महीना मानकर उनकी पूजा अर्चना की जाती है इसी महीने में 15 अगस्त का राष्ट्रीय स्वतंत्रता का पर्व मनाया जाता है और इसी महीने की अंतिम दिन परम पवित्र रक्षाबंधन या राखी का महापर्व पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है यह हरियाली का महीना है और सारी धरती हरी भरी रहती है और ऑक्सीजन की प्रचुरता होने से सब कुछ करो ताजा दिखता है हरियाली का तीज का महापर्व भी इसी महीने में मनाया जाता है और पुत्रदा एकादशी भी सावन महीने में ही मनाए जाते हैं सावन की हरियाली देखकर ही कहा गया है -

**सावन की तो बात निराली चारों तरफ बिछी हरियाली**

भारत विश्व का सबसे प्राचीन और सबसे पवित्र देश है जो सतयुग त्रेता द्वापर में दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली देश था और यह हर्षवर्धन के कल तक सारी दुनिया का सिरमौर था इसको सोने की चिड़िया भी कहा जाता था लेकिन लगातार 1000 वर्ष के आक्रमण और लूटपाट पहले मुसलमानों और फिर अंग्रेजों के द्वारा किया गया जिससे यह देश कंगाल और निर्धन हो गया और अनेक व्रत पर्व त्यौहार प्रथम परंपराएं दूषित हो गई फिर भी धीरे-धीरे सारी प्रथम परंपराएं फिर से कायम हो रही है और अब सोशल मीडिया और इंटरनेट का समय हो जाने से भारत के सनातनी लोगों को यह पता चल गया है कि हमारा भोजन वस्त्र रहन-सहन आवास की प्रथा और जीवन प्रणाली तथा भोजन प्रणाली व्रत पर्व त्यौहार दुनिया में सर्वश्रेष्ठ हैं जो प्रकृति और पर्यावरण के साथ समस्त जीवधारियों से तादात्म्य स्थापित करके चलते हैं। 

भारत के हर महीने में अनेक व्रत पर्व त्यौहार पडते हैं लेकिन सबसे प्रमुख पर्व में चार हैं जिसमें रक्षाबंधन ब्राह्मणों का अर्थात पठन-पाठन मंत्र वाचन पूजा पाठ करने वालों का दशहरा या विजयदशमी क्षत्रियों का अर्थात शक्तिशाली अस्त्र विद्या में निपुण देश और जनता की रक्षा करने वालों का दीपावली वैश्यों का अर्थात जो भी देश को धन-धन सुख समृद्धि संपन्नता से भर दे उनका और होली का महापर्व शूद्रों का अर्थात जो सेवा भावना से ओत-प्रोत हों और जो सच्चे मन से सब की सेवा करने वाले हों का त्यौहार है। यह ध्यान देना अति आवश्यक है कि प्राचीन काल में वर्ण व्यवस्था थी जाति प्रथा नहीं थी और किसी भी वर्ण का व्यक्ति संबंधित वर्ण का गुण होने पर उसमें आसानी से स्थान पर जाता था जाति प्रथा मुगल और अंग्रेजों की देन थी लेकिन तब भी सनातनी समाज के द्वारा ऐसा कोई बंधन नहीं था की एक जाति का व्यक्ति दूसरी जाति में नहीं जा सकता था। 

उदाहरण के लिए ब्रह्म ऋषि विश्वामित्र चक्रवर्ती सम्राट विश्व रथ थे लेकिन अपने अपार ज्ञान त्याग तपस्या के कारण व ब्रह्म ऋषि हुए और उन्होंने गेहूं नारियल भैंस गायत्री मंत्र एंटीमैटर एंटी एनर्जी एंटी यूनिवर्स का निर्माण और खोज किया द्रोणाचार्य एक ब्राह्मण होते हुए भी परम अतिरथी योद्धा थे और एकलव्य शूद्र होकर भी महान धनुर्धर था कर्ण सूत पुत्र होकर भी महाभारत के सर्वश्रेष्ठ योद्धाओं में एक था हेमचंद्र हेमू विक्रमादित्य और भामाशाह जैसे लोग वैश्य होकर भी महान योद्धा थे इसी प्रकार लोमश ऋषि काग भूसुंडी सूतजी शौनक जी गृत्समद शबरी मतंग ऋषि दादू रविदास गाडगे जैसे अनगिनत लोग दलित और निम्न जातियों से और वर्ण से होकर भी सर्वश्रेष्ठ ऋषि मुनि तपस्वी सन्यासी थे जिनकी पूजा स्वयं ब्राह्मण और बड़े-बड़े सम्राट भी किया करते थे। 

इस वर्ष सावन महीने में 28 अगस्त के दिन रक्षाबंधन का परम पवित्र महापर्व संपूर्ण भारत में मनाया जाएगा इस दिन घी का दीपक रोली हल्दी कुमकुम अक्षत राखी के साथ सजाकर बहनें अपने भाई लोगों को स्नान ध्यान करके बांधती हैं और निम्नलिखित महा वैदिक मंत्र पढ़ती हैं -
"" येन बद्धो बलिः राजा दानवेन्द्र महाबलो
तेन त्वां प्रतिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल""

यदि कोई स्त्री संस्कृत मंत्र ना पढ़ सके तो केवल इतना हिंदी में कहना चाहिए कि जिस राखी ने परम प्रतापी महाबली राजा बाली को बांध दिया मैं वही रखी तुम्हें बांधती हूं यह तुम्हारी हमेशा रक्षा करें यह मंत्र बोले बिना राखी बांधने का कोई अर्थ नहीं होता है

इसटे बाद उन्हें अच्छा भोजन खिलाती हैं बदले में भाई अपनी सामर्थ्य के अनुसार कुछ ना कुछ प्रदान करते हैं लेकिन सबसे बड़ी बात में अपनी बहन को आजीवन रक्षा करने का वचन देते हैं यह जाति धर्म देश काल की सीमाओं से परे हैं और इसे सनातनी गैर सनातनी क्रिश्चियन मुस्लिम में यहूदी शैतान राक्षस देव जातियां सभी मनाते हैं  ध्यान देने योग्य बात है कि यह केवल भाई बहन का ही महापर्व नहीं है छोटे लोग बड़े और सम्मानित लोगों को अपने पिता और गुरु को और सीमा पर तैनात सैनिकों को भी राखी बांधते हैं यदि किसी का भाई ना हो तो वह ईश्वर को ही अपना भाई मानकर उन्हें राखी समर्पित कर सकती हैं यदि भाई ना आ सके तो उनके नाम से मंत्र पढ़कर पूजा गृह में रखी रखने से भी उसका पूरा फल मिलता है। 

रक्षाबंधन का त्यौहार राखी के दिन अर्थात सावन पूर्णिमा के दिन ही प्रारंभ हुआ था इसके बारे में अनेक सामाजिक धार्मिक आध्यात्मिक दार्शनिक और ऐतिहासिक कथाएं हैं सबसे पहले रक्षाबंधन महापर्व का वर्णन भगवती लक्ष्मी द्वारा बलि को राखी बांधने से प्राप्त होता हैरक्षाबंधन का अगला वर्णन इंद्र की परम सती पत्नी शची के द्वारा इंद्र को राखी बांधने से प्राप्त होता है जब देवराज इंद्र और देवता राक्षसों से हार रहे थे तब देवगुरु बृहस्पति के निर्देश पर मंत्रों से पूरित रेशम के रक्षा को देवी शची ने इंद्र की कलाई पर बांधा था जिससे देवताओं की विजय हुई और राक्षस हार गए द्रौपदी जी के द्वारा भगवान कृष्ण को राखी बांधने का प्रसंग विश्व विख्यात है ही जब शिशुपाल के वध बाद के समय उनकी अंगुली में सुदर्शन चक्र से चोट लग गई तो द्रौपदी ने तत्काल अपनी साड़ी फाड़ कर भगवान कृष्ण को बांध दिया था जिसका मूल्य उन्होंने चीर हरण में चुकाया महाभारत में अनेक लोगों के द्वारा राखी बांधने का वर्णन मिलता है राजा महाराजा सामान्य जनता सभी रक्षाबंधन बड़े ही उत्साह से मनाते हैं इस दिन पुरोहित घर-घर जाकर अपने यजमानों को राखी बंद कर बदले में अन्य धन वस्त्र प्राप्त करते हैं यद्यपि यह प्रथा अब धीरे-धीरे लुप्त हो रही हैं इसी दिन शिष्य अपने गुरुजनों को भी राखी बांधते हैं वैसे रानी करमती द्वारा हुमायूं को राखी बांधने की कथा आती है लेकिन यह सही नहीं है क्योंकि हुमायूं रानी कर्मावती की रक्षा करने के स्थान पर बहादुर शाह से मिल गया और मेवाड़ का बुरी तरह से पतन हो गया और 30000 रानियों को कर्मावती के साथ जौहर करना पड़ा था।

इस वर्ष कब बांधी जाएगी राखी

ज्योतिष और पंचांग के अनुसार इस वर्ष शुक्रवार के दिन 28 अगस्त को सुबह 5:57 से 9:48 तक राखी बांधने का योग है क्योंकि पूर्णिमा तिथि 9:49 पर समाप्त हो जा रहे हैं इसलिए इसी कालखंड में जो लगभग 4 घंटे का है नहा धोकर स्वच्छ वस्त्र पहनकर भाई का मुंह पूर्व की तरफ रखकर थाली में अक्षत रोली रक्षाबंधन मिठाई और पुष्प सजाकर घी का दीपक जलाकर राखी बांधना चाहिए भाई को अपने बहन की आज जीवन रक्षक का वचन देकर आशीर्वाद और शक्ति के अनुसार उपहार देना चाहिए इसके बाद भोजन मिष्ठान ग्रहण करके तभी प्रस्थान करना चाहिए सबसे बड़ी बात इस समय भादरा की छाया भी नहीं रहेगी क्योंकि सूर्योदय के पहले ही भद्रा समाप्त हो रही है इस प्रकार उत्साह से विधि विधान के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाना चाहिए

सत्य ज्ञान और प्रकाश एवं कलयुग का प्रभाव डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह

सत्य ज्ञान और प्रकाश एवं कलयुग का प्रभाव डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह 

कलयुग में सबसे कठिन काम है सच को सबसे बताना और समझना सत्य प्रकाश और ज्ञान से लोग दूर रहना चाहते हैं और सत्य अंधकार और अज्ञान पसंद करते हैं किसी को लाख समझो की असली कमल का फूल तो कीचड़ में ही मिलेगा लेकिन 100 में 99 फिर भी संगमरमर के तालाब में कमल का फूल खोजते फिरते हैं 100 में 99 लोग राजनेता और धर्मगुरु स्वदेशी वेद पुराण महाभारत प्राचीन कथाओं और अपनी भाषा तथा संस्कृत का बखान करके सट्टा का सुख धन वैभव ऐश्वर्य कीर्ति प्राप्त करते हैं लेकिन इसमें 99% राजनेता धर्म गुरु और अधिकारी पूरी तरह अंग्रेजी में रचे बसे होते हैं उनके घर की पढ़ाई लिखाई वेशभूषा भाषा रहन-सहन यहां तक की शौचालय भी पश्चिम के ढंग का ही होता है सबसे अच्छा कपड़ा धोखा देने वाले इस मामले में राजनेता और धर्मगुरु होते हैं जिनमें अधिकांश शिष्य भी विदेशी होते हैं उनके ज्ञान के कारण नहीं उनके पास मौजूद धन संपत्ति और भौतिक संसाधनों के कारण जिसका प्रमुख कारण है कि किसी के पास इतना समय नहीं है कि इन अधिकारियों राजनेताओं और धर्मगुरु लोगों में काम से कम एक के यहां जाकर एक सप्ताह उनके छिपे सच को देखना जो साधु के अंदर एक कालनेमि को छुपाए हुए हैं तामसी और राक्षसी भोजन को चोरी से खाने वाले और ऊपर से सदा जीवन उच्च विचार का उपदेश देने वाले इसी वर्ग के कारण देश अनगिनतबर विदेशी लोगों का गुलाम हुआ है सट्टा सूक्त महाराणा प्रताप शिवाजी हमीर आनंदपाल तोमर आल्हा ऊदल जैसन की नाथ राजा और उनके सैनिक भी ले सकते थे लेकिन लेकिन सच्चे वीर और स्वदेशी सच्चे भारतीय होने के कारण उन्होंने रास्ता नहीं चुना बहुत प्रबल है कलयुग का यह समय इसलिए भगवान श्री कृष्णा के अंतर निहित होने के साथ ही अर्जुन की गांड देव की शक्ति और उनके दिव्यास्त्र और समस्त दिव्य शक्तियां दुर्गम और गूढस्थान में जाकर अंतर ध्यान हो गए
जितने भी आसुरी शक्तियों के लोग हैं उनकी भौतिक खोज और उनके द्वारा कहे गए सच का टीवी द्वारा अखबार द्वारा दिए विज्ञापन का ही लोग बिना दिमाग के प्रचार करें गए और बिना दिमाग वाले उसका इस्तेमाल करेंगे भले ही फेयर एंड लवली से एक भी हब्शी अर्थात नीग्रो गोरा ना हुआ हो। 

इसी प्रकार परखनली से सुख सर्वोच्च उदाहरण महाभारत में कौरव लोगों का जन्म उनका भी से भरे जड़ी बूटियां वाले घड़े में रखकर बिल्कुल स्वस्थ पालन पोषण करना लोगों को कम समझ में आएगा लेकिन पर पुरुष के वीर्य से उत्पन्न आईवीएफ को लोग अपना बच्चा मान लेंगे कुंती को दोष देने वाले नहीं समझ पाएंगे कि उनके अंदर पुरुष या स्त्री होने की शक्ति देवताओं के द्वारा ही प्राप्त होती है अग्नि सब चीजों को जलाती है लेकिन अग्नि को दोष या पाप नहीं लगता इसी तरह दैव शक्तियां पाप और पुणे से परे होती हैं और अपना काम करती हैं। 

 जैव रासायनिक परमाणु नाभिकीय अस्त्र-शस्त्र पर विश्वास करने वाले लोग अपने दिव्यास्त्रों पशुपत ब्रह्म श्री ब्रह्मास्त्र नारायण अस्त्र भार्गव वस्त्र इंद्रायम वरुण कुबेर जैसे दिव्यास्त्रों पर विश्वास नहीं रखते क्योंकि कभी इसको ध्यान से उन्होंने पढ़ा ही नहीं है इतने प्रयास के बाद तब लोगों को पता चला कि बौद्ध धर्म का परम है आज हम पाइथागोरस के नाम से पढ़ते थे और आइंस्टीन का सापेक्षता का सिद्धांत आइंस्टीन बस सिद्धांत के नाम से मशहूर है जिसे डॉक्टर सत्येंद्र नाथ बोस के साथ मिलकर आइंस्टीन ने बनाया था

सत्य ज्ञान और प्रकाश धीरे-धीरे प्रयास से फैलते हैं जबकि अज्ञान अंधकार और असत्य को फैलने के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि यह श्रेष्ठ में चारों ओर छाए हुए हैं तमराज किलविस की तरह ।

 भारत  के ऋषि मुनि और वैज्ञानिकों की खोज इतनी प्रबल है की अनंत काल के थपेड़े भी उसको नहीं मिटा पाए जबकि संसार में कोई मानव कृत रचना 1000 वर्ष से पुरानी नहीं मिलती है द्वारका नगरी हो या समुद्र का सेतु हो हजारों लाखों वर्ष से विदेशी लोगों द्वारा फैलाए गए इस भ्रम को निराकृत कर देते हैं कि हम लोग गाय चराने वाले चरवाहे थे जब तक वास्कोडिगामा भारत नहीं आया तब तक यूरोप के लोग केवल मछुआरे और नाविक थे और जब तक अरब के लोग भारत नहीं आए तब तक वह एक पक्की इमारत भी नहीं बना पाए थे गणित विज्ञान की तो बात ही दूर है। 

इसलिए किसी को उपदेश देना छोड़कर प्राचीन काल के ऋषि मुनि और वैज्ञानिकों तथा मनीषी लोगों और बुद्धिजीवी लोगों की तरह अपना काम करते रहो जब दीपक जलता है तो उसे प्रकाश दिखाना नहीं पड़ता लोग उसका प्रकाश खुद ही देख लेते हैं प्राचीन भारत के किसी भी चिकित्सक को आपने महलों वाला नहीं सुना होगा क्योंकि वह सच्चे मानवता की सेवा करने वाले थे यहां तक की वैद्य धनवंतरी और अश्विनी कुमारो का भी खुद का महल नहीं था। 
 इससे अधिक खारा सच और क्या कहा जा सकता है और जो लोग गलत काम करके धन कमा रहे हैं उनकी भी गलती नहीं है क्योंकि समाज में उन्हें का मान सम्मान होता है जिसके पास शानदार महंगी गाड़ी हो महंगे सामान हो संपत्ति हो बाग बगीचे हो बिल्डिंग हो और खेत बारी हो इसलिए किसी को दे दोष देना ठीक नहीं है किसी को गुड खिलाएंगे और किसी को ₹1000 किलो वाली मिठाई तो स्वाभाविक रूप से वह गुड को हीन भावना से देखेगा जबकि अच्छा से अच्छा मिष्ठान शहद के अलावा इस विश्व में गुड़ से अच्छा बना ही नहीं है रही बात करोड़ों साल पहले सतयुग त्रेता लाखों साल पहले द्वापर पर हम कैसे विश्वास करेंगे जब हनुमान और भीम जैसे लोग पर्वत और बड़ी-बड़ी शिलाएं उठा लेते थे जिसे आज के सुपर क्रेन भी नहीं उठा सकते जबकि हमारे बचपन की हरी भरी धरती 50 साल पहले 15 दिन 20 दिन होने वाली भयंकर वर्षा जाड़े में भयंकर कोहरे में हफ्तो नहीं दिखाई देने वाला सूरज विराट आम जामुन नीम बरगद पीपल के पेड़ 50 साल में ही सपना हो गए हैं और दुनिया भर में ऑक्सीजन की भयानक कमी हो गई है उसे समय लोग लाल पोखर में नहाते कपड़े धोते और बर्तन मारते थे कुएं का पानी पीते थे पूर्ण स्वस्थ रहते थे दही दूध माथा की जगह कोल्ड ड्रिंक और सड़े गले बिस्किट पावर रोटी नकली मक्खन पनीर कुरकुरे धकाधक चटपटे फटाफट चाऊमीन बर्गर मैगी हैमबर्गर खाकर लोग बलशाली भीम जैसे दिख रहे हैं आज का आरोप वाटर पीकर सब लोग रोगी हो गए हैं  बड़े बनाना है कम समय में प्रसिद्ध पानी है और करोडो खरबों का काला धन सफेद करना है  वारा न्यारा करना है तो सरकार से मिल जाओ बड़े-बड़े राजनेताओं और विपक्ष के पास चले जाओ धन कुबेर लोगों की चाटुकारी करो और कुछ दिन के बाद जेल में आनंद मनाओ यही आज के तथाकथित बड़े-बड़े लोगों का असली सच है यह कलयुग है इसलिए कहा गया है - **जो नहीं देखा नहीं सुना जो मन हू ना समाय
 सो सब देखिय कलयुगहिं नहीं कुछ भी कहा न जाए।

उससे भी बड़ी बात है सब कुछ झूठ पर चल रहा है और हम खुले आंखों से झूठ को देख रहे हैं विवश है कुछ कर नहीं पा रहे हैं

**झूठइ लेना झूठइ देना
झूठा के भोजन झूठ चबैना

आज का अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस रहेगा जबकि कल का अधिकतम तापमान 32

आज का अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस रहेगा जबकि कल का अधिकतम तापमान 32 और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहेगा जौनपुर नगर क्षेत्र में हल्की वर्षा बूंदाबांदी और कई पडोसीक्षेत्रों में हल्की सामान्य वर्षा होने के आशा है कल भी लगभग यही मौसम रहेगा गर्मी उमस पसीना जारी रहेगा की कुछ स्थानों पर अच्छी वर्षा हो सकती है 

वायु गुणवत्ता सूचकांक 40 से 60 के बीच हवा के दिशा मुख्य रूप से पूर्वी दक्षिणी रहेगी और गति 10 से 20 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी
पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 1 से 3 के बीच रहेगी और प्रदूषण की मात्रा न्यूनतम रहेगी यह मौसम 12 अगस्त के बाद फिर से बदल जाएगा

हमारे केंद्र के द्वारा जनवरी से जून तक 35 बार  लिखित भविष्यवाणी की गई थी केवल काम चलाने लायक वर्षा होगी इसलिए खेती और बागवानी मुख्य रूप से सूखी फसलों वाली करें क्योंकि इस वर्ष पिछले साल के अपेक्षा 60 से 70% वर्षा होगी ।

अभी तक 700 मिली लीटर व नहीं चाहिए थे लेकिन आज तक की वर्षा जोड़ने पर केवल 400 मिलीलीटर  वर्षा जौनपुर में हुई है अभी आशा है कि 11 ज
अगस्त तक वर्षा और होगी  मानसूनी बादलों के संघनन वाष्पन और स्थानीय विक्षोभ के कारण जौनपुर और पड़ोसी जनपद पर केंद्रित होने से लगातार दिन घंटे वर्ष की स्थिति बनी है - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि और निदेशकअलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र

Saturday, 22 August 2026

जौनपुर सहित भारत और देश दुनिया के मौसम की भविष्यवाणी - डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर

जौनपुर सहित भारत और देश दुनिया के मौसम की भविष्यवाणी - डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर
जौनपुर और आसपास के सभी जनपदों में उसका अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस होता जबकि कल या तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और 27 डिग्री सेल्सियस होगा

धूप छांव और तेज हवाओं के बीच आज और कल जौनपुर और आसपास के जनपदों में बूंदाबांदी हल्की वर्षा और कुछ स्थानों में मध्यम वर्षा होने की प्रबल संभावना है जौनपुर एक बार फिर सबसे कम वर्षा वाला क्षेत्र रहेगा फिर भी दोपहर के बाद और कल इन सभी स्थानों में ठीक-ठाक वर्षा हो सकती है जहां तक भारत की बात है तो देश के अधिकतर भागों में हल्की वर्षा का योग है लेकिन दिल्ली भलस्वा राजस्थान के सटे हुए भागों हिमालय के पर्वतीय क्षेत्र पूर्वोत्तर भारत में कहीं-कहीं भारी वर्षा का योग है बाकी स्थान में हल्की सामान्य वर्षा होगी

बंगाल की खाड़ी में बने तेज विक्षोभ के कारण संपूर्ण भारत में विशेष कर वापी बलसाड नालासोपारा मुंबई पणजी कोचीन त्रिवेंद्रम कन्याकुमारी चेन्नई विशाखापट्टनम पुरी कोलकाता में आंधी जैसी तेज हवाएं चलेंगी और कहीं कहीं झंझावात और तड़ित के साथ भयंकर वर्षा भी होगी यह विक्षोभ आगे बढ़कर कुछ दिनों के बाद अच्छी वर्षा कर सकता है

जहां तक पूरी दुनिया की बात है तो फिलीपींस और जापान के बीच एक चक्रवर्ती दबाव से बहुत तूफानी हवाएं चलेंगे मत जियो में पोलैंड से लेकर फिनलैंड के बीच प्रबल आंधी तूफान काफी नुकसान करेगा जब यूरोप के तटीय भागों में भी आंधी तूफान रहेगा अटलांटिक महासागर में हवाई दीपों के आसपास एक प्रबल चक्रवात उठने की संभावना है और इससे भी तेज चक्रवात दक्षिण अमेरिका के पूर्वी तट पर उत्पन्न होगा जिसमें दवाओं की गति सबसे ऊपर होगी दुनिया क्या अधिकतर भाग तेज आंधी तूफान और तेज हवाओं की चपेट में रहेंगे

इन सब का असर एक तेज भूकंप आने में और एक सुनामी लहर पैदा होने में समाप्त होगा वैसे फिर बता दें कि इस बार भारत में किसी भी हाल में सामान्य औसत मानसूनी वर्षा बहुत कम होगी जौनपुर और उससे लगे हुए क्षेत्र में तो स्थिति और खराब रहेगी यह बनाकर चलें कि जौनपुर और आसपास 70 से 80% वर्षा और पूरे भारत को मिलाकर 80 से 90% मानसूनी वर्षा होगी जो बहुत कम है और यह सूखा की श्रेणी में आता है

Monday, 17 August 2026

बुढ़वा मंगल और महावीर हनुमान - डॉ दिलीप कुमार सिंह

बुढ़वा मंगल और महावीर हनुमान - डॉ दिलीप कुमार सिंह 

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हनुमान जी श्री राम और माता सीता के अनन्य भक्त हैं कलयुग में उनसे बड़ा कोई भी नहीं है उन्हें अमर कहा जाता है और सृष्टि के अंत तक श्री राम कथा का प्रचार करने के लिए दुष्टों का संघार करने के लिए और सज्जनों का उद्धार करने के लिए कलयुग में उन्हें विशेष रूप से भगवान श्री राम के द्वारा सहेजा गया है।
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बुढ़वा मंगल की कहानी

बुढ़वा मंगल को बड़ा मंगलवार भी कहते हैं इसकी कथा महाभारत से ली गई है महाबली भीमसेन जिनमें 10000 हाथियों का बल था अपने बल पर बहुत घमंड करते थे और हमेशा उत्पात मचाया करते थे एक बार जब वह बनवास में थे तब हिमालय क्षेत्र में उन्हें एक अद्भुत दिव्य सुगंध की अनुभूति हुई बाद में संत और महात्माओं ने कहा यह तो अद्भुत नीलकमल की सुगंध है जो दूर-दूर तक फैला रहता है द्रोपदी की इच्छा हुई कि इस नीलकमल को धारण करें बस फिर क्या था उन्होंने भीम को कहा और भीम दहाड़ते और गरजते हुए चल पड़े। 


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भीमसेन की दहाड़ से सभी भयभीत हो गए जंगल के शेर चीता बाघ इधर-उधर भागने लगे और हलचल मच गई भीम अपनी गदा जोर-जोर घुमाते हुए नीलकमल की ओर चले जा रहे थे हनुमान जी ने उनको शिक्षा देने और उनके अहंकार को दूर करने के लिए एक वृद्ध बंदर का रूप बनाया और रास्ते में पूछ फैला कर लेट गए थोड़ी ही देर बाद भीम गरजते और दहाड़ते हुए उधर आए और रास्ते पर बंदर की पूंछ देखकर उन्होंने बंदर से अपनी पूंछ हटाने को कहा तब हनुमान रूपी वृद्ध वानर बोला अरे भाई तुम मुझको लांघ कर चले जाओ इस पर भी भीमसेन ने कहा कि किसी को भी लांघ कर जाने का सनातन धर्म में कोई नियम नहीं है इसलिए तुम अपनी पूंछ हटा लो।

हनुमान जी ने कहा ऐसा करो तुम मेरी मूछ हटा दो और चले जाओ क्योंकि मैं तो बुड्ढा हो गया हूं और मुझे उठने बैठने में बहुत परेशानी होती है इस पर भी गर्व से भरकर एक अंगुली से उसकी पुछ उठाकर फेंकने लगे मगर अंगुली में दर्द होने लगा और पूछ जहां की तहां पड़ी रही इस पर उन्होंने एक हाथ से उठाने का प्रयास किया फिर दोनों हाथ से उठाने का प्रयास किया इसके बाद अपनी गदा से हटाने का प्रयास किया लेकिन पसीने पसीने होने पर भी पूंछ हिंली तक नहीं। 

इस पर भीमसेन को बहुत आश्चर्य हुआ 10000 हाथियों का बल रखने वाले भीम एक बंदर की पूंछ नहीं हटा पाए उन्हें अपनी भूल अनुभव हुई और उन्होंने प्रार्थना किया कि हे भगवान आप अपने असली रूप में आ जाइए तब हनुमान अपने विराट असली रूप में आए जो आकाश तक फैले हुए थे भीम ने उनकी पूजा अर्चना किया और हनुमान जी परम प्रसन्न हुए और भीमसेन को अच्छे उपदेश देते हुए अपनी दिव्य शक्तियों को प्रदान किया इसके बाद भीमसेन नीलकमल लेकर द्रौपदी को दे दिए तभी से यह बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल मनाया जाने लगा है। 

इस दिन स्नान करके शुद्ध चित्र से हनुमान जी का ध्यान करना चाहिए उनके मंदिर में जाकर उनसे अपनी मनोकामना कहना चाहिए बेसन के लड्डू सिंदूर और चमेली भी चढ़ा सकते हैं लेकिन ध्यान रखें कि हनुमान जी की पूजा करते समय भगवती सीता और भगवान श्री राम का ध्यान अवश्य करें हनुमान चालीसा का भी पाठ करना चाहिए और हनुमान जी की दिव्या गाथाओं का वर्णन करते हुए रामायण के प्रसंग को भी आपस में कहना और सुनना चाहिए ऐसा करने से हनुमान जी निश्चित प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूरी करते हैं हनुमान जी का ऐसा प्रभाव है कि उनके भक्त को कलयुग का प्रभाव और शनिदेव छू भी नहीं सकते हैं बाकी की बात ही क्या है

नाग पंचमी और सांप प्रजातियां डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह

 नाग पंचमी और सांप प्रजातियां डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह 

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भारत विश्व का सबसे प्राचीन और विश्व व्यापी फैला हुआ देश है और सनातन धर्म सारे संसार का सबसे प्राचीन धर्म है यहां प्रत्येक दिन कोई ना कोई पर्व और उत्सव होता रहता है जिससे जीवन में नीरसता की जगह सरसता फैली रहती है हर एक पर्व उत्सव त्यौहार का अपना एक विशिष्ट महत्व होता है जो मानव जीवन कृषि कार्य धर्म दर्शन अध्यात्म के साथ प्रकृति और पर्यावरण से भी जुड़ा रहता है ऐसा ही एक महान पर्व नाग पंचमी है जो नागों से जुड़ा हुआ है भारत एक ऐसा देश है जहां पर पशु पक्षी ईंट पत्थर आकाश पाताल दिशाओं की ग्राम देवी ग्राम देवता तक की पूजा की जाती है क्योंकि कालांतर में सिद्ध हो गया है कि प्रत्येक वस्तु परमाणु अथवा कोशिका से बनी है और हर एक परमाणु और कोशिका में ईश्वर का ही अंश होता है ।

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नाग पंचमी का महान पर्व सावन महीने के शुक्ल पक्ष में पंचमी के दिन मनाया जाता है जब लोग घर की साफ सफाई करके लीप पोत कर कपड़े पहनकर नाग देवता की पूजा करते हैं और उनका दूध चढ़ाते हैं इस दिन नाग देवता का दर्शन करना शुभ माना जाता है संसार में कोई भी ऐसा धर्म नहीं है जिसके मानने वाले दुनिया में सबसे भयंकर माने जाने वाले नाग और सांपों की पूजा करते हैं जो स्वयं में काल का एक स्वरूप होता है और जिसको देखकर बड़े से बड़े लोगों के मन में भय पैदा हो जाता है और आज इतनी अधिक वैज्ञानिक और चिकित्सा की उन्नति हो जाने के बाद भी प्रतिवर्ष भारत में और दुनिया में सांपों के काटने से लाखों लोग मरते हैं तो प्रश्न उठता है कि आखिर नाग पंचमी का त्यौहार क्यों मनाया गया और इनकी पूजा क्यों की जाती है। 

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सभी प्रकार के सांपों में नाग का विश्व सबसे अधिक विषैला और प्रभावकारी होता है और यह न्यूरोटॉक्सिक होता है नाग अर्थात कोबरा की कई प्रजातियां होती हैं जिसमें शेषनाग सबसे लंबी और घातक प्रजाति है जो हर प्रकार के सांपों को जिंदा ही खा जाता है इसके बाद काला नाग और भूरा नाग होता है और यही सांप की ऐसी प्रजाति है जिसमें बहुत पुराने कुछ नागों में नागमणि पाई जाती है वैसे तो भारत में करैत वाईपर और रसेल वाइपर सांप भी बहुत जहरीले होते हैं लेकिन यह सभी नाग के भय से छिपे रहते हैं। 

वैसे तो कोई भी जहरीला नाग या सांप काट ले तो वर्तमान समय में प्राथमिक चिकित्सा करके अर्थात घाव को साबुन से यह स्वच्छ पानी से अच्छी तरह धोकर उसके ऊपर हल्का दबाव देते हुए पट्टी बांधकर तुरंत ही चिकित्सक के पास जाना चाहिए लेकिन जहां पर चिकित्सा सुविधा न हो या समय बहुत कम हो वहां पर तंत्र-मंत्र जड़ी बूटियां का प्रयोग करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए जिसमें अधिक मात्रा में काली मिर्च और घी को पिलाना नीम की पत्ती खिलाना और कुछ मंत्रों का जाप करना शामिल है ऐसा माना जाता है कि जरत् कारु ऋषि कश्यप ऋषि शंखचूड़ वासुकी का नाम लेने से सांप नहीं काटते हैं और वह रास्ता बदल कर चले जाते हैं और इनका नाम लेने से सांप का विष असर नहीं करता है नाग कुल का भला करने वाले कुछ ऐसे भी वंश हैं जिन पर सांपों के विश्व का असर नहीं पड़ता है यह बात पूरी तरह सच है इसके अलावा **ऊं कुरुकुल्ये हूं फट् स्वाहा**मंत्र का जाप करने से भी सांप के विश्व का असर नहीं होता है 

सांप एक ऐसा प्राणी है जो मनुष्य से सबसे अधिक डरता है इसके अलावा यह नेवला गरुड़ पक्षी बाज प्रजातियां और गिलहरी मोर एवं बिल्ली से भी डरता है नाग पंचमी को जिस प्रकार से पूजा पाठ और सफाई की जाती है और सावन महीने में जिस तरह से महारुद्र अभिषेक किया जाता है उसे सांप मनुष्य का निवास छोड़कर बन बाग खेत और अन्य जगहों पर चले जाते हैं इसीलिए नाग पंचमी त्यौहार मना कर नागों की पूजा की जाती है इसके अलावा यह नाग जाति और मनुष्य जाति के बीच प्राचीन संबंधों का भी स्मरण दिलाता है। नाग एक प्राचीन काल में मानव की जाति थी जो जंगल गुफा कंदराओं में रहते थे और उनका नागों के साथ लंबे समय रहने से उनके बारे में पूरा ज्ञान हो गया था और वह जड़ी बूटियां और सांपों का जहर उतारने और उनको पकड़ने में सिद्धहस्त थे। नागवंश एक प्रसिद्ध राजवंश भी था अर्जुन घटोत्कच सहित अनेक लोगों का नाग कुल में विवाह हुआ था मेघनाथ की पत्नी सुलोचना नागवांश से ही थी इस प्रकार नाग पंचमी को इसलिए भी मनाया जाता है कि धीरे-धीरे नागवंट आर्य वंश में घुल मिल गया था 

सभी प्रकार के जहरीले नागों से मानव जाति को अपार लाभ होता है यह मानव जाति के लिए विनाशकारी चूहे और अनेक जीव जंतुओं को खाकर मानव जाति का असीम कल्याण करते हैं इसके अलावा यह वातावरण में फैले हुए भयंकर विष को धीरे-धीरे पीते रहते हैं इसे जहर पूरी पृथ्वी पर फैल नहीं पाता है। 

जहरीले सांपों से कैंसर इत्यादि की बहुत कीमती दवाएं भी बनती हैं और पूरी दुनिया में सांपों को बड़े चाव से खाया भी जाता है अब रही सांपों के द्वारा मानव को काटने की तो यह स्वाभाविक सी बात है कि अगर सांपों को अपने प्राण संकट में दिखाते हैं तब वह आक्रमण कर देते हैं वैसे सांप का विश्व उनकी सबसे कीमती धरोहर होता है एक बार काट लेने के बाद फिर से जहर बनने में महीनों लग जाते हैं इसलिए सांप जल्दी काटते नहीं और काटते भी हैं तो बहुत ज्यादा विष नहीं उगलते हैं इसके अतिरिक्त सांप भगवान शिव के गले के आभूषण हैं जिनको वह बड़े चाव से अपने गले में पहनते हैं जब उन्होंने हलाहल विष का पान किया था तो उसे कुछ बूंदे धरती पर गिरी और उसी को पीकर सांप बिच्छू और अन्य जीव जहरीले हो गए थे शिव जी का आभूषण होने के कारण और उनके गले की शोभा होने के कारण भी सांपों की पूजा किया जाता है। 

सांप से जुड़ी अनेक कथा कहानी और किंवदन्तियां है लाखों करोड़ों वर्षों से भारतीय जीवन में घुली मिली हैं जिसमें सांपों के द्वारा बदला लेना और कुछ विशेष प्रकार के नागों में नागमणि होना पूरी तरह सत्य है इसके अलावा बहुत भ्रांत धारणाएं भी लोगों के मन में बस गई हैं नाग पंचमी को सांपों के संरक्षण और उनसे सावधान रहने से भी जोड़ कर देखा जाता है क्योंकि वर्षा काल में सांपों के प्रजनन का महीना होता है इसलिए वह बहुत अधिक उग्र होते हैं उनसे बचकर रहना चाहिए और सभी प्राणी एक समान है इस बात की धारणा भी नाग पूजा पूजा दिखती है। 

नाग पंचमी के दिन विधि विधान से नागों की पूजा होती है और उन्हें दूध खीर चढ़ाया जाता है इसके अलावा लोक जीवन में इसे स्थाई बनाने के लिए इस दिन भारत के हर एक गांव शहर गली मोहल्ले में दंगल अर्थात कुश्ती होती है और कूड़ी अर्थात लंबी कूद का आयोजन किया जाता है इसके बाद घरों में भांति-भांति  के सुंदर पकवान बनते हैं इस प्रकार यह महान पर्व शारीरिक स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है नाग पंचमी के दो दिन पहले हरियाली तीज या हरितालिका तीज आती है जिसका अपना विशेष महत्व है यह विशेष रूप से ध्यान देने की बात है कि सावन में चारों तरफ घने पेड़ पौधे हरियाली होने से और पानी भर जाने से सांप उन सब स्थान से मानव निवास की ओर दौड़ते हैं और नाग पंचमी के दिन पूजा से उत्पन्न विभिन्न प्रकार की रासायनिक गंध और सूक्ष्म ऊर्जा नाग और हर प्रकार के सांपों को आवाज से दूर ले जाती है

यही वजह है कि पहले हर तरफ घने जंगल झाड़ झंकाड़ और हरियाली होने के बाद और घनघोर वर्षा होने के बाद भी प्राचीन काल में सांपों के काटने से शायद ही कोई मरा हो अब ज्यादा लोग मर रहे हैं क्योंकि सांप के आवास पर लोग जबरदस्ती कब्जा कर रहे हैं आप आज से 50 वर्ष पहले अपने घर खानदान के लोगों से पता करेंगे तो पता लगेगा कि इतनी भयंकर स्थिति के बाद भी सांप के काटने से बहुत ही कम लोग मरे हैं और नाग तो बिना चेतावनी दिए काटते भी नहीं है सबसे खतरनाक करैत नाम का सांप होता है जो 1 से 2 फीट लंबा काला चित्तीदार होता है और अगर यह सोते समय काट लेता है तो लोग सोते ही रह जाते हैं इसीलिए कहा जाता है कि करैत का काटा हुआ पानी भी नहीं मांगता हैऔर पूजा पाठ भी नहीं करते हैं इसलिए कहा जा सकता है कि नाग पंचमी एक पूर्ण वैज्ञानिक महापर्व है जो प्रकृति पर्यावरण और प्राणी मात्र की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है
[8/17, 1:56 PM] Dr  Dileep Kumar singh: बुढ़वा मंगल और महावीर हनुमान - डॉ दिलीप कुमार सिंह 

हनुमान जी श्री राम राम और माता सीता के अनन्य भक्त हैं कलयुग में उनसे बड़ा कोई भी नहीं है उन्हें अमर कहा जाता है और सृष्टि के अंत तक श्री राम कथा का प्रचार करने के लिए दुष्टों का संघार करने के लिए और सज्जनों का उद्धार करने के लिए कलयुग में उन्हें विशेष रूप से भगवान श्री राम के द्वारा सहेजा गया है
बुढ़वा मंगल की कहानी बुढ़वा मंगल को बड़ा मंगलवार भी कहते हैं इसकी कथा महाभारत से ली गई है महाबली भीमसेन जिनमें 10000 हाथियों का बाल था अपने बल पर बहुत घमंड करते थे और हमेशा उत्पाद मचाया करते थे एक बार जब वह बनवास में थे तब हिमालय क्षेत्र में उन्हें एक अद्भुत दिव्य सुगंध की अनुभूति हुई बाद में संत और महात्माओं ने कहा यह तो अद्भुत नीलकमल की सुगंध है जो दूर-दूर तक फैला रहता है द्रोपदी की इच्छा हुई कि इस नीलकमल को धारण करें बस फिर क्या था उन्होंने भी को कहा और भीम दहाड़ते और गरजते हुए चल पड़े 

भीमसेन की दहाड़ से सभी भयभीत हो गए जंगल के शेर चीता बाघ इधर-उधर भागने लगे और हलचल मच गई भी अपनी गदा जोर-जोर घूमते हुए नीलकमल की ओर चले जा रहे थे हनुमान जी ने उनको शिक्षा देने और उनके अहंकार को दूर करने के लिए एक वृद्ध बंदर का रूप बनाया और रास्ते में पूछ फैला कर लेट गए थोड़ी ही देर बाद भीम भीम गरजते और दहाड़ते हुए उधर आए और रास्ते पर बंदर की पूंछ देखकर उन्होंने बंदर से अपनी पूंछ हटाने को कहा तब हनुमान रूपी वृद्धि वानर बोला अरे भाई तुम मुझको लग कर चले जाओ इस पर भी भीमसेन ने कहा कि किसी को भी लांघ कर जाने का सनातन धर्म में कोई नियम नहीं है इसलिए तुम अपनी पूंछ हटा लो

हनुमान जी ने कहा ऐसा करो तुम मेरी मूछ हटा दो और चले जाओ क्योंकि मैं तो बुड्ढा हो गया हूं और मुझे उठने बैठने में बहुत परेशानी होती है इस पर भी गर्व से भरकर एक अंगुली से उसकी पुछ उठाकर फेंकने लगे मगर अंगुली में दर्द होने लगा और पूछ यहां की कहां पड़ी रही इस पर उन्होंने एक हाथ से उठाने का प्रयास किया फिर दोनों हाथ से उठाने का प्रयास किया इसके बाद अपनी गदा से हटाने का प्रयास किया लेकिन पसीने पसीने होने पर भी पूंछ हिंदी तक नहीं 

इस पर भीमसेन को बहुत आश्चर्य हुआ 10000 हाथियों का बाल रखने वाले भीम एक बंदर की पूछ नहीं हटा पाए उन्हें अपनी भूल अनुभव हुई और उन्होंने प्रार्थना किया कि हे भगवान आप अपने असली रूप में आ जाइए तब हनुमान अपने विराट असली रूप में आए जो आकाश तक फैले हुए थे भी ने उनकी पूजा अर्चना किया और हनुमान जी परम प्रसन्न हुए और भीमसेन को अच्छे उपदेश देते हुए अपनी दिव्य शक्तियों को प्रदान किया इसके बाद भीमसेन नीलकमल लेकर द्रौपदी को दे दिए तभी से यह बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल मनाया जाने लगा है 

इस दिन स्नान करके शुद्ध चित्र से हनुमान जी का ध्यान करना चाहिए उनके मंदिर में जाकर उनसे अपनी मनोकामना कहना चाहिए बेसन के लड्डू सिंदूर और चमेली भी चढ़ा सकते हैं लेकिन ध्यान रखें कि हनुमान जी की पूजा करते समय भगवती सीता और भगवान श्री राम का ध्यान अवश्य करें हनुमान चालीसा का भी पाठ करना चाहिए और हनुमान जी की दिव्या गाथाओं का वर्णन करते हुए रामायण के प्रसंग को भी आपस में कहना और सुनना चाहिए ऐसा करने से हनुमान जी निश्चित प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूरी करते हैं हनुमान जी का ऐसा प्रभाव है कि उनके भक्त को कलयुग का प्रभाव और शनिदेव छू भी नहीं सकते हैं बाकी की बात ही क्या है

Sunday, 16 August 2026

*आने वाला समय कुवांरेपन का युग होगा* एक हालिया अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार अगले छ:वर्षो में विश्व की लगभग 45% लड़कियां अविवाहित रह जाएंगी।

*आने वाला समय कुवांरेपन का युग होगा*
       
     एक हालिया अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार अगले छ:वर्षो में विश्व की लगभग 45% लड़कियां अविवाहित रह जाएंगी।
                                                  विज्ञापन
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यह रिपोर्ट 1 फरवरी 2025 को प्रकाशित लोकमत अखबार में छपी थी, जो मार्गन स्टेनली संस्था द्वारा किए गए एक विस्तृत अध्धयन पर आधारित हैं।।

*सर्वेक्षण में पाये गए प्रमुख कारण:-*

१.आज की लड़कियां उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही है और करियर को प्राथमिकता दे रही हैं।
२.वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है और किसी पर निर्भर रहना नहीं चाहती।
३.उन्हें स्वतंत्रता प्रिय है और वे अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेना चाहती हैं।
४.विवाह, मातृत्व और पारिवारिक बंधनों को वे अक्सर अपनी प्रगति में बाधा मानने लगी हैं।
५.यदि यह प्रवृति बनी रही तो पारंपरिक परिवार प्रणाली और सामाजिक संरचना बिखर सकती हैं।
६.जनसंख्या में गिरावट, कुंवारे लड़को की संख्या में वृद्धि और वृद्धावस्था में अकेलेपन की समस्याएँ सामने आ सकती हैं।
७.प्रश्न यह भी उठता है प्रगति, पद और पैसा किस काम आएंगे, जब जीवन के अंत में साथ देने वाला कोई न होगा?

*कई माता पिता लड़कियों के रिश्ते तो ढूंढ रहे हैं, पर स्वयं लड़की को विवाह में रूचि नहीं होती।जिसके कारण हर रिश्ता नकारा जा रहा है।*
*समाज के एक बड़े वर्ग को इस बदलाव की गंभीरता का अभी मालूम नहीं है,इसलिए यह आवश्यक है कि हम समय रहते चेते।*

*लड़कियों के विवाह के लिए उपयुक्त आयु 23 से 26 वर्ष के बीच हो यदि हो पाएं तो ओर भी जल्दी, इसके लिए सामूहिक स्तर पर जागरूकता ओर पहल जरूरी है।*

*यह विषय किसी के विरोध में नहीं, बल्कि भविष्य की स्थरिता और संतुलन की चिंता के तहत उठाया गया है, समाज, परिवार और व्यक्तिगत जीवन तीनों को संतुलित रखना ही सच्ची प्रगति हैं।*


: *हम सबको इस पर विचार अवश्य करना चाहिए*

   *भविष्य की एक ज्वलंत समस्या*
   
👉🏿   जब बच्चों का विवाह
    20 साल में होता था, तो 
   एक सदी में 5 पीढ़ियाँ होती थीं.

👉🏿 जब बच्चों का विवाह
     25 साल में होता था, तो 
    एक सदी में 4 पीढ़ियाँ होती थीं.

👉🏿 अब बच्चों का विवाह
    30 साल में होता है, तो 
   एक सदी में 3 पीढ़ियाँ होती हैं.

👉🏿  सोचने वाली बात है.
        क्या हमारा समाज 
अगली सदी तक जीवित रहेगा ?
     आज एक अजीब सा 
       अंधेरा फैल रहा है.

🏚️    गली-मोहल्ले वीरान हैं, 
      आस-पास के घर खाली हैं.
आज घरों में बच्चों की आवाज कम 
        पति-पत्नी की आवाज 
         ज्यादा सुनाई देती है.

★  लड़कियाँ 30-35 साल तक 
              कुंवारी हैं.
★  लड़के 35 साल के बाद भी 
         कुँवारें घूम रहे हैं.
★  देर से शादी ...
   फिर सम्बंध विच्छेद (तलाक)

         टूटते परिवार  ...
         दुखी माँ-बाप.
      माता-पिता अकेले..
पूरी पीढ़ी खालीपन अनुभव करती है.

🤷🏻‍♀️   क्या हम इसे 
    "पढ़ा-लिखा समाज" कहें या 
"स्वयं को नुकसान पहुँचाने वाला समाज" 

💁🏻‍♂️  यह तो जनसंख्या कम करने की
           एक खामोश साज़िश है.

★ अगर 50 जोड़ों में 
      सिर्फ़ एक बच्चा हो
      तो अगली पीढ़ी में 
      सिर्फ़ नाममात्र के बच्चे होंगे.

👉  अगर ऐसा ही चलता रहा, 
        तो तीसरी पीढ़ी लगभग 
           गायब हो जाएगी.

👉 मोहल्ले,गलियाँ खाली पड़ी हैं.
         सब लोग रोड़ पर हैं.
        जीवन का आधा समय तो 
          रोड़ पर ही बीत जाता है.

★  गाँव के गाँव खत्म हो रहे हैं.

★ शहरों में ऊँची इमारतें हैं, लेकिन संयुक्त परिवार प्रथा समाप्त हो गयी है.

👉  नई बहुएं
    "सिर्फ़ एक ही बच्चा" चाहती हैं.
    🤷🏻‍♀️  क्या यही समाज है ?
❓ क्या यही हमारे पुरखों की 
             विरासत है ?

👉   सच तो यह है, कि ....
    बच्चे अब प्यार की निशानी नहीं रहे. बल्कि बच्चे पैदा करना ...एक मजबूरी सी है.

⚖️   सबसे बड़ी गलती — 
      लड़की के पिता की है,
        वही पिता जिसने 
     20-22 साल की उम्र में 
             विवाह करके 
          परिवार बसाया था.

अब वही पिता 30 साल की उम्र तक 
     अपनी बेटी का विवाह न करके बहादुरी दिखा रहे हैं.

👉  परिणाम ????

लड़के लड़कियाँ डिप्रेशन में जा रहे हैं.

👉  आज बच्चों का सही समय पर विवाह नहीं हो रहा है, और
 न सही समय पर कोई नौकरी मिल रही है.

👉  समाज धीरे-धीरे 
      समाप्त होता जा रहा है.

👉   इसी कारण बच्चे 
       समाज के साथ नहीं
    अकेले रहना पसंद करते हैं.
         यानी एकल परिवार
  यहाँ तक कि बच्चे भी नहीं चाहिए.

★  देर से शादी करना
★  देर से बच्चा करना, फिर
         एक बच्चे के बाद 
   मेडिकल और लालन-पालन का
             बहाना करना.
💁🏻‍♀️  यह आम बात हो गई है.

   हजारों जवान लड़के लड़किया उम्र के कारण कुंवारे घूम रहे हैं.

      समाज के समझदार लोग 
          चुप्पी साधे हुए हैं

★  विवाह, परिवार, बच्चे – 
इन सब को बोझ समझा जा रहा है.

🎈 विवाह ... कोई दुनियावी बंधन नहीं यह घर परिवार और समाज का स्तम्भ है.

🎈 प्रजाति, सभ्यता और संस्कार कोआगे बढ़ाने का एक तरीका है.

💥 अब हम सब को समझने का समय आ गया है.
🫵   बच्चों को ‘हद से ज्यादा'
      आजादी दे कर हमने उनकी 
             समझ छीन ली.

★ विवाह टलता रहा, और जब हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

        फिर वही अकेलापन

🫵  लड़के लड़कियों के लिए
        विवाह की सही उम्र
🔹  लड़कों के लिए 25 साल से पहले
🔸 लड़कियों की  20 साल से पहले.

🚩 वर्ना इतिहास लिखेगा ...
  “वह हिंदू समाज, जिसने चुपचाप स्वयं को खत्म कर लिया.” 

    सोचो और समझदारी दिखाओ.

        अपने बच्चों का विवाह
           समय पर कीजिये.
🙏

   क्योंकि ... परिवार नहीं बचा, तो समाज को भी देर सवेर  ध्वस्त होते देर नहीं लगनी है.

  यही कारण है ...डेविड सेलबॉर्न, सतीश बंसल और बिल वार्नर जैसे लेखक यह कहने पर मजबूर हो जाते हैं , कि 
       ★   इस्लाम के मज़बूत 
      फैमिली सिस्टम की वजह से  ...
           देर सवेर ... अधिकांश देश भारत में भी हिन्दू परिवार परम्परा का पतन होना प्रारम्भ हो चुका है.

          रक्त के 5 रिश्ते
     समाप्त होने की कगार पर हैं.
       ताऊ, चाचा, बुआ, मामा
        मौसी जैसे रिश्ते
          आने वाले समय में
             देखने-सुनने को
              नहीं मिलने वाले हैं.

      इसे इस तरह  👇🏽
     समझा जा सकता है-

    पुत्र       पुत्री
     2         1        (मौसी X)
     1         2      (चाचा, ताऊ X)
     1         1   (चाचा, ताऊ, मौसी X)
     1         0          X
     0         1          X
  परिणाम
     0         0

       सिंगल चाइल्ड फैमिली को 
    उनका निर्णय तीसरी पीढ़ी याने जिनके आप ... दादा-दादी होंगे बुरी तरह प्रभावित करेगा. जिस दादा को मूल से अधिक ब्याज प्यारा होता है, उसका तो ....मूलधन भी समाप्त हो जाएगा.
     इसके लिए वह स्वयं उत्तरदायी है.

          इसलिए दम्पत्ति को 
      सिंगल चाइल्ड के निर्णय पर गंभीरता से विचार करना होगा.

    यह घटती आबादी के आँकड़े
             बोल रहे हैं.
 यह विश्लेषण सरकारी आँकड़ों के अध्ययन से आ रहा है.

        आपका पौत्र या प्रपौत्र 
               इस संसार में 
           अकेला खड़ा होगा.

       उसे अपने रक्त के रिश्ते की
           आवश्यकता होगी तो 
     इस पूरे ब्रह्मांड में उसका अपना कोई नहीं होगा.

      यह अत्यंत सोचनीय विषय है.

      ये न केवल हमारे बच्चों को
       एकाकी जीवन जीने को 
      मजबूर करेगा बल्कि हमारी 
       हिंदू परिवार सभ्यता को ही नष्ट कर देगा.

 हम जो हिन्दू एकता की बात करते हैं ये तो सभ्यता ही समाप्त हो जाएगी और इन सबके लिए हमारी वर्तमान पीढ़ी उत्तरदायी होगी.

        अगर आप इस विषय को
           गंभीर समझते हैं तो 
     इस समस्या पर विचार करें,

   घर परिवार में, पति पत्नी के बीच, रिश्तेदारों में, दोस्तो में एवं 
     विभिन्न बैठकों एवं आयोजनों में इस विषय पर मंत्रणा करें.

      अपनी सभ्यता, संस्कार औऱ पीढ़ियों को बचाये.

बहुत गंभीर समस्या है.

साभार: सोशल मीडिया

"जय जय सियाराम"
    💐🙏💐🇮🇳

मुझे पता है आपको यह लेख अच्छा लगा है तो कृपया समय निकालकर जरूर विचार-विमर्श करे अपनो से 💐🙏🏻🌹🕉️🌻

Saturday, 15 August 2026

देश की आज़ादी का मूल मंत्र एकता प्रेम और क़ानून का सम्मान राष्ट्रीय अध्यक्ष मुस्लिम महासंघ फ़रहत अली खान*

*देश की आज़ादी का मूल मंत्र एकता प्रेम और क़ानून का सम्मान राष्ट्रीय अध्यक्ष मुस्लिम महासंघ फ़रहत अली खान* 
अस्सी वें यौम ए आज़ादी के मुबारक मौक़े पर मदरसा जमीतुल अंसार नियर थाना गंज में जश्न ने आज़ादी जोश और खरोश से मनाया गया ।
मुस्लिम महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष फ़रहत अली खान ध्वज रोहण किया राष्ट्रगान जोश ओ खरोश के साथ गाया गया।
जहां बच्चों ने देश भक्ति गीत गाये तकरीरे की वही परवेज़ निज़ामी समाज सेवी आज़ाद हिंदुस्तानी एजाज़ क़मर लेखक चिंतकविचारक सैय्यद मज़हर अली मियां मजहरी प्रमुख शायर, डॉ आरिफा खान, आकाशवाणी उद्घोषिका मारिया फ़रहत हसीन जहां ने अपने ओजस्वी विचार रखे।
मुख्य अतिथि मुस्लिम महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष फरहत अली खान ने कहा आज़ादी का मूल मंत्र बुनियादी हक़ीक़त और सच्चाई देश की एकता थी है और हमेशा रहेगी।

आज इसी को हमें अपनाने की जरूरत है।
क़ानून का सम्मान और मौजूदा सरकारों का एहतेराम है।
स्वतंत्रता दिवस की सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर मदरसे के संचालक ओर मुतावल्ली सआदत अली अंसारी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी।
अंत में मदरसे में आयोजित मेघावी छात्रों को मेडल पहनाकर सम्मानित किया।
सभी छात्रों को मिठाई भी तकसीम की गई।
इस अवसर पर मारिया अज़हर फायेजा बुशरा खान ज़ाहिद खान आमिर खान सहित मदरसे के छात्र और अभिभावक उपस्थित रहे।

मौसम संबंधित नवीन भविष्यवाणी हमारे ज्योतिष मौसम और विज्ञान अनुसंधान केंद्र के अनुसार 30 जुलाई से 7 अगस्त

मौसम संबंधित नवीन भविष्यवाणी हमारे ज्योतिष मौसम और विज्ञान अनुसंधान केंद्र के अनुसार 30 जुलाई से 7 अगस्त तक लगातार अच्छी वर्षा होने की भविष्यवाणी बिल्कुल सही हुई 7 से लेकर 12 अगस्त तक सूखे मौसम की भविष्यवाणी भी बिल्कुल सही हुई प्रचंड गर्मी उमस और पसीना की भविष्यवाणी भी बिल्कुल सही हुई 13 अगस्त से 20 अगस्त तक वर्षा की बात भी पूरी तरह सही हो रही है कभी कम कभी हल्की तो कभी बूंदाबादी अभी तक रोज वर्षा हुई है

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आज का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 28 डिग्री सेल्सियस रहेगा जबकि कल का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहेगा।

घनघोर भयंकर गर्मी प्रचंड उमस और पसीना से लोग 11:00 तक बहाल रहेंगे आज 10:00 बजे से मौसम बदलने शुरू होगा और तीन चार बजे के आसपास वर्ष शुरू हो जाएगी जो रात भर चलेगी और आने वाले 5/6 दिनों में ज्यादातर समय मौसम में बरसात का रहेगा मौसम भी ठंडा सुहावना हो जाएगा इस बीच लोगों को भयंकर रूप से हो रही सर्दी खांसी जुखाम बुखार और पेट के रोगों से भी छुटकारा मिलेगा इस समय ठंड वाली चीज फ्रिज में रखी चीज बिल्कुल ना खाएं और हैप्पी बर्थडे केक तो बिल्कुल ना खाएं इसको खाने वाला गारंटी के साथ टाइफाइड रोग और अन्य रोगों का शिकार हो जाता है ।

ताज और नवीन भविष्यवाणी यह है कि आज 15 अगस्त के घनघोर भयंकर गर्मी उमस और पसीने के बाद आधी रात के बाद तीन दिनों तक माध्यम से भरी और कहीं-कहीं बहुत भारी वर्षा जौनपुर सुल्तानपुर प्रतापगढ़ प्रयागराज सोनभद्र मिर्जापुर दीनदयाल नगर वाराणसी गाजीपुर आजमगढ़ अंबेडकर नगर अयोध्या और आसपास होने जा रही है सभी लोगों को आवश्यक सूचना और चेतावनी दी जा रही है इससे मौसम भी अच्छा हो जाएगा और खेती बागवानी भी सुधर जाएगी  - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र दिनांक 15 अगस्त 2026
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