Sunday, 30 August 2026

दुर्गा शक्ति नागपाल और सबीना खातून प्रशासनिक सेवा और न्यायिक सेवा में टकराव - डॉ दिलीप कुमार सिंह

 दुर्गा शक्ति नागपाल और सबीना खातून प्रशासनिक सेवा और न्यायिक सेवा में टकराव  - डॉ दिलीप कुमार सिंह
 दुर्गा शक्ति नागपाल हमेशा विवाद और चर्चाओं में रहे हैं बालू खनन को लेकर अखिलेश यादव के समय में वह बहुत बुरी तरह से घिर गई थी जब सारी भारतीय प्रशासनिक सेवा ने उनका साथ दिया और बड़ी मुश्किल से उनकी कुर्सी बची थी अभी ताजा मामला फिर से चर्चाओं में है जब उन्होंने देवीपाटन मंडल के कमिश्नर की हैसियत से सिविल जज सबीना खातून को तथा कथित ढंग से फोन करके पूछताछ किया और उन्हें धमकी दिया जिस पर न्यायपालिका विशेष कर उच्च न्यायालय बहुत कठोर कदम उठाया है हैं और उन्हें अवमानना का प्रथमदृष्टया दोषी पाया है।

वास्तव में भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय न्यायपालिका के बीच यह टकराव आज से नहीं है यह स्वतंत्रता के बाद से ही चला आ रहा है जिसमें दोनों तंत्र एक दूसरे पर हावी होने सोच रखते हैं तो आइए देखते हैं कि आखिर देवीपाटन मंडल की आयुक्त और सिविल से सबीना खातून का मामला इतना चर्चित क्यों हुआ और यह इतना तूल क्यों पकड़ रहा है।

 यहां पर एक बात विशेष रूप से यह भी उल्लेखनीय है कि दुर्गा शक्ति नागपाल का संबंध सीधे-सीधे जौनपुर से है और वह जौनपुर की बहू है क्योंकि उनके पति अभिषेक सिंह भी आई ए एस थे और वर्तमान में त्यागपत्र देकर सोशल मीडिया और समाज सेवा में सक्रिय हैं दोनों का विवाह 2012 ईस्वी में हुआ था यह एक अंतरजातीय विवाह था उनके प्रति अभिषेक सिंह अभिनय की दुनिया और अन्य कर्म के कारण अच्छे खासे चर्चित रहते हैं और श्री राम मंदिर दर्शन के लिए अयोध्या में उन्होंने कई मुफ्त बसें भी चलाई थी।

 दूसरी तरफ सिविल जा सीनियर डिवीजन सबीना खातून भी दुर्गा शक्ति नागपाल की तरह एक अनुशासन पसंद और ईमानदार और कार्य के प्रति समर्पित न्यायिक अधिकारी मानी जाती हैं अनुशासन के मामले में वह बहुत कठोर हैं और उनकी भी अपनी एक अलग छवि है वास्तव में दोनों के मध्य अगस्त 2026 में  हुए टेलिफोनिक विवाद की जड़ 30 साल पहले का एक मुकदमा ज्योति विद्या मंदिर बनाम राज्य उत्तर प्रदेश को लेकर हैं  यह मुकदमा 1997 से चल रहा है और इस पर ज्योति विद्या मंदिर के पक्ष में न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश भी पारित है  राज्य सरकार का मानना है कि यह सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करके बनाया गया है जबकि ज्योति मंदिर विद्यालय के लोगों का कहना है कि यह उनकी अपनी जमीन है वर्तमान समय में इस पर स्थगन आदेश पारित है और यह मुकदमा सबीन खान की अदालत में चल रहा था जो फिलहाल दूसरे न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया है सूत्रों के अनुसार दुर्गा शक्ति नागपाल ने इस पर पूछताछ किया और सबीना खान का व्यक्तिगत नंबर लेकर उनसे बातचीत किया जो उस समय अवकाश पर चल रही थी बताया जाता है कि दुर्गा शक्ति नागपाल के कठोर पूछताछ और धमकी भरे दृष्टिकोण से सबीना खान नाराज हो गई  और उन्होंने जिला जज और उच्च न्यायालय को पत्र लिखकर इस बारे में शिकायत किया और उन पर अनुचित प्रभाव डालने न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला करने और अमर्यादित भाषा बोलने का आरोप लगाया उधर कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल द्वारा भी प्रशासनिक न्यायाधीश को इस मामले में पत्र लिखकर सबीना खान पर अमर्यादित भाषा बोलने उन्हें धमकाए जाने और मुकदमे में ढीला ढाला आरो का बनाए जाने का आरोप लगाया इस मामले में जनपद न्यायालय और उच्च न्यायालय ने प्रथम दृष्टि दुर्गा शक्ति नागपाल आयुक्त के व्यवहार और कार्यशैली पर आपत्ति जताते हुए इसे न्यायपालिका पर सीधा हमला बताया और उन्हें न्यायिक अवमानना का दोषी पाया।

 इस मामले पर न्यायमूर्ति सैयद हसन कमर रिजवी ने बहुत गंभीर दृष्टिकोण अपनाते हुए इस मामले में दुर्गा शक्ति नागपाल पर न्यायिक अवमानना के लिए पर्याप्त कारण का पाया और उनके आचरण को न्यायपालिका पर हमला बताया जबकि दुर्गा शक्ति नागपाल ने सबीना खान पर अप शब्दों और अमर्यादित भाषा का आरोप लगाते हुए कहा था कि उनका मामला केवल पैरवी करके इस दीर्घकालीन मुकदमे को समाप्त करना था उधर सिविल जज सबीना खान ने इस प्रोटोकॉल का उल्लंघन न्यायपालिका की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप मानते हुए यह आप भी लगाया कि दुर्गा शक्ति नागपाल ने उनके संस्कारों पर टिप्पणी किया था यह मामला अत्यंत संवेदनशील चर्चित हो गया है जिसे प्रशासनिक सेवा और न्यायपालिका में सीधे टकराव के रूप में देखा जा रहा है   कहा तो यहां तक गया है कि दुर्गा शक्ति नागपाल ने खुद को सीनियर प्रशासनिक सेवा का अधिकारी बनाते हुए सबीना खान पर रोब डालने की कोशिश किया था बहरहाल सच क्या है यह दोनों के फोन रिकॉर्ड सामने आने पर ही पता चल सकेगा।

[8/30, 12:56 PM] Dr  Dileep Kumar singh: वर्तमान में सिविल जज सीनियर डिवीजन से बिना खान का जन्म 1983 ईस्वी में हुआ था और 2017 में उन्होंने न्यायिक सेवा प्रारंभ किया था यह मामला इतना अधिक तूल पकड़ गया है कि माननीय उच्च न्यायालय ने इसको अवमानना देखने वाली पीठ के सामने संदर्भित कर दिया है इतना ही नहीं न्यायिक सेवा संघ ने एक बैठक कर इस पर कठोर आपत्ति प्रकट किया है और यह कहा है कि यह मामला सरकार की तरफ से सरकारी अधिवक्ता देखते हैं तो दुर्गा शक्ति नागपाल का सीधे-सीधे इस मामले में पूछताछ करने का कोई अधिकार नहीं है

 उच्च न्यायालय ने  सीधे-सीधे  यह कहा की कोई भी प्रशासनिक अधिकारी कितना ही वरिष्ठ क्यों ना हो वह किसी मुकदमे को लेकर जज से सीधे-सीधे बात नहीं कर सकता है इसके लिए उसके अपने राज्य के अधिवक्ता होते हैं वह अपनी वरिष्ठता का हवाला देते हुए न्यायिक अधिकारियों को अनुचित प्रभाव में लेने या अनुचित काम करने की मंशा रखता है तो उसे न्यायिक और मानना माना जाएगा वर्तमान समय में उच्च न्यायालय की अवमान्य पीठ के सम्मुख है और यह देखना है कि इस मामले का अंत कहां और कैसे होता है एक बात अवश्य है कि जिस तरह से पुलिस प्रशासन न्यायपालिका और राज्य तथा केंद्र सरकारी काम कर रही हैं उसे जन सामान्य को तो कोई भी लाभ नहीं पहुंच रहा है जनता दोनों तरफ से चक्की में पिस रही है उसे एक तरफ पुलिस से हमेशा डर लगा रहता है तो दूसरे और प्रशासनिक और न्यायिक कार्रवाई से भी जनता भयभीत रहती है उसकी सुनने वाला कोई नहीं है देश की आजादी से आज तक जितने भी कदम उठाए गए उसमें वर्ग विशेष का अधिकारी और वर्ग विशेष का अधिकारी और राजनेता वर्ग का तथा नए कार्य का चाहे जितना लाभ हुआ हो और उनके वेतन भत्ते सुविधाएं चाहे जितनी बड़ी हो लेकिन सिविल क्रिमिनल राजा सूचक बंदी के करोड़ों करोड़ों लंबित मुकदमे यही दिखाते हैं कि यदि सच्चाई ईमानदारी कर्तव्यनिष्ठा और समर्पित मन से सारे तंत्र काम करते तो आज यह स्थिति नहीं आती वास्तविक धरातल पर तो स्थिति इतनी खराब है जो कहने लायक भी नहीं है लेकिन 99% भारत के लोग पुलिस और प्रशासन के डर से तथा न्यायिक अवमानना की कार्रवाई के चलते कुछ भी कहने सुनने से डरते रहते हैं और बचते रहते हैं और इसीलिए देश और देश की जनता का हाल बेहाल है।

बाकी बहुत कुछ बातें लिखने लायक नहीं है वह स्वच्छ शीशे की तरह पारदर्शी और बिल्कुल साफ है और सच्चाई सारी दुनिया देख रही है एक बड़ा सच यह भी है कि आज के समय में 95% जनता पुलिस प्रशासन और न्यायपालिका में ना तो अपना काम कर सकती है और ना मुकदमे लड़ सकती है इससे अधिक शोचनीय स्थिति एक देश की और क्या हो सकती है  ना तो अपना काम कर सकती है और ना मुकदमे लड़ सकती है इससे अधिक शोचनीय स्थिति एक देश की और क्या हो सकती हैं जहां पर95% जनता को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए पुलिस प्रशासन और न्यायपालिका की शरण में जाने के लिए भ्रष्टाचार से होकर गुजरना पड़े इतना अवश्य है कि आज भी सभी टैटो में न्यायपालिका सबसे अधिक स्वच्छ पारदर्शी है और अधिकांश न्यायाधीश आज भी इमानदारी से अपने कर्तव्य का निर्वहन करना चाहते हैं लेकिन उनकी परेशानी यह है कि उनके अपने लोगों से लेकर घर परिवार सगे संबंधी राजनेता अपराधी सभी 99% अनुचित काम लेकर सिफारिश करने जाते हैं और किसी भी तरह से अपना काम कराना चाहते हैं यह एक ऐसा बिंदु है जहां पर बड़े से बड़े व्यक्ति को सोचना पड़ता है

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