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Saturday, 16 May 2026

अधिक मास मलमास और क्षय मास में अंतरडॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक

अधिक मास मलमास और क्षय मास में अंतर
डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक 
सनातन धर्म एक संपूर्ण वैज्ञानिक धर्म है जो प्रकृति और पर्यावरण के साथ-साथ संपूर्ण ब्रह्मांड से और सृष्टि के निर्माण से जुड़ा हुआ है वर्ष के 12 महीना में कभी-कभी ऐसा भी समय आता है जब एक महीने अधिक हो जाता है अर्थात एक वर्ष 13 महीने का होता है ‌ इसको पुरुषोत्तम मांस और मलमास भी कहा जाता है मालिन होने के कारण इस पूरे महीने में कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं ‌ यह औसत 32.5 महीने के बाद आता है इस वर्ष से 17 में से प्रारंभ हो रहा है और 15 जून को समाप्त हो रहा है इस प्रकार इस वर्ष 13 महीने होंगे जेठ महीना दो बार पड़ेगा

क्षय मास का अर्थ है कम करना ‌ यह अधिक मास का उल्टा होता है अर्थात जब 6 मास लगता है तब 1 वर्ष में 12 महीने की जगह केवल 11 महीने होते हैं ‌ 6 मार्च में सूर्य का संक्रांति एक ही राशि में दो बार होता है ‌ ऐसा क्यों होता है सरल वैज्ञानिक भाषा में हम इसको आपको समझाने का प्रयास कर रहे हैं 

दुनिया के सभी महीने सूर्य और चंद्रमा पर आधारित होते हैं जो पंचांग सौर वर्ष पर आधारित होता है जैसे भारत का पंचांग और अंग्रेजों का अर्थात इसी पंचांग उसमें 365 दिन होते हैं जबकि चंद्र वर्ष में 354 दिन होते हैं इस प्रकार दोनों में 11 दिन का अंतर होता है इसीलिए आपने देखा होगा कि मुस्लिम त्यौहार हर वर्ष में महीना और दिन के साथ बदलते रहते हैं जबकि अन्य धर्म के त्योहारों में ऐसा नहीं होता है 

अब आपको वैज्ञानिक सत्य बताते हैं ‌ धरती सूर्य की एक परिक्रमा 365 दिन 5 घंटे 41 मिनट 52 सेकंड में करते हैं इस प्रकार सौर पंचांग में भी एक वर्ष में 5 घंटे 41 मिनट 52 सेकंड का अंतर आ जाता है इधर भारत का हिंदी महीना 360 दिन का होता है इसलिए इसमें 5 दिन का अंतर हर एक साल में पड़ता है इस प्रकार से हर तीसरे वर्ष अधिक मास या मलमास लगता है जैसे इस वर्ष सन 2026 विक्रम संवत 2083 में हो रहा है ‌ क्योंकि 11 दिन का अंतर 3 वर्ष में 33 दिन हो जाता है 

इधर 5 घंटे 41 मिनट 52 सेकंड का अंतर 1200 वर्ष में 1 महीने का हो जाता है इसके बाद पंचांग में फिर से सुधार करना पड़ता है लेकिन यह एक लंबा समय होता है इसीलिए इस पर बहुत अधिक ध्यान लोगों का नहीं जाता है विद्वान ज्योतिषी वैज्ञानिक और गणितज्ञ हर 1200 वर्षों में इसको सुधार देते हैं इसीलिए भारत की काल गणना बहुत ही सूक्ष्म और सबसे वैज्ञानिक है जिसमें दो अरब वर्ष का संपूर्ण वर्णन एकदम सही-सही बिना किसी त्रुटि के किया गया है।

यही संक्षेप में मलमास क्षय मास अधिक मास का रहस्य है ‌ एक बार और है कि दुनिया के हर पंचांग में वर्ष का अंतर भले हो लेकिन दिन सभी धर्म के और सभ्यता के पंचांग में सात ही होते हैं ‌ सोमवार मंगलवार बुधवार बृहस्पतिवार शुक्रवार शनिवार और रविवार दिन और हिंदी महीने में चैत्र वैशाख जेठ आषाढ़ सावन भादो क्वार कार्तिक अगहन पूस माघ और फागुन है।

अधिक मास में क्या करना चाहिए 

अधिक मास में शुद्ध चित्र और सदाचार से रहना चाहिए दान पुण्य करना चाहिए अपनी-अपने देश और धर्म की रक्षा को छोड़कर हिंसा नहीं करनी चाहिए हर प्रकार के नशे और नशीली चीजों से दूर रहना चाहिए सत्य अज्ञान और अंधकार पर विजय पाने की चेष्टा करनी चाहिए और भगवान विष्णु का पूजा पाठ तुलसी मां की सेवा और तुलसी मां की पूजा करना चाहिए कम से कम एक अच्छी आदत को अपनाना चाहिए और एक बुरी आदत छोड़ देना चाहिए 

अधिक मास में क्या नहीं करना चाहिए 

अधिक मास की अवधि में कोई भी नया कार्य नहीं करना चाहिए कोई शुभ और मांगलिक कार्य भी नहीं करना चाहिए नया मकान भवन वाहन संपत्ति भी नहीं खरीदना चाहिए वहां आभूषण वस्त्र सहित कोई भी अन्य खरीददारी इस महीने में नहीं करना चाहिए नया भवन निर्माण नहीं करना चाहिए पूजा पाठ तो कर सकते हैं लेकिन बड़े-बड़े यज्ञ हवन इत्यादि नहीं करना चाहिए ‌ इस महीने में अपने आप को अधिक से अधिक जानते हुए परम तत्व को समझने की चेष्टा करनी चाहिए