Friday, 26 June 2026

किसी भी मंदिर और तीर्थ स्थान में घूमने अवश्य जाओ क्योंकि इससे सारे देश की जनता उनकी प्रथम परंपरा की जानकारी और मिलने जुलने तथा देश के हर भाग से जुड़ने और उसकी जानकारी मिलती है लेकिन

किसी भी मंदिर और तीर्थ स्थान में घूमने अवश्य जाओ क्योंकि इससे सारे देश की जनता उनकी प्रथम परंपरा की जानकारी और मिलने जुलने तथा देश के हर भाग से जुड़ने और उसकी जानकारी मिलती है लेकिन 
एक भी पैसा मंदिर में दान मत करो ना तो गहना आभूषण या कोई अन्य कीमती चीज चढ़ाव यदि ऐसा किया तो उसे पुजारी पांडे और वहां रहने वाले दलाल बड़े-बड़े अधिकारी और सरकारी तंत्र के राजनेता मानस मंदिर महिला मिथुन में फूंक देंगे बचा हुआ धन और पैसा विदेशी लूट ले जाएंगे जैसा की ढाई हजार  साल से हो रहा है।

इसका परिणाम होगा कि केवल असली और सच्चे भक्त जो रुखा सुखा खाकर या भूखे पेट रहकर ईश्वर की सेवा कर सकते हैं वही रहेंगे बाकी पुलिस और प्रशासन सरकार के अधिकारी और अति विशिष्ट लोग पुजारी पढ़ने और उनसे जुड़े दलाल और चमचे कुछ दिन बाद भाग खड़े होंगे क्योंकि इनका ध्यान ईश्वर सेवा में नहीं बल्कि रूपए पैसे और सोने चांदी में रहता है और यही देश के विनाश का कारण बनता है यदि देश में मंदिर और धर्म स्थान पर चढ़ने वाले पैसों का उपयोग सनातन धर्म के विकास और शिक्षा दीक्षा पर कल कारखाने पर खर्च हो तो सारी भेजो बेरोजगारी दूर हो जाएगी ।

यह हखल केवल अयोध्या का नहीं है तिरुपति बालाजी से लेकर किसी भी मंदिर का वैष्णो मां का मंदिर हो या कामाख्या मंदिर हो मैहर देवी विंध्याचल धाम या फिर द्वारिका धाम हो असली भगवान के भक्ति दर्द ठोके कहते हैं और सुबह से शाम तक कतर में खड़े रहते हैं जबकि चोर बेईमान धोखेबाज जनता का खून चूसने वाले राजनेता अधिकारी पुजारी पांडे तत्काल ही विशिष्ट कतर से निकाल कर सीधे-सीधे दर्शन करते हैं और भोग लगाकर पैसा बताकर निकल जाते हैं ।

यदि आपको दान पुण्य की इच्छा ही है तो वहां से दर्शन करके अपने गांव आओ वहां पर लोगों को भोज दो गांव में एकता बढ़ेगी और लोग आपकी प्रशंसा भी करेंगे ईश्वर की भक्ति भी बढ़ेगी और हर व्यक्ति लौट कर अपने गांव में भोज भंडारा करेगा इससे सनातन धर्म का विकास होगा। 

इसके अतिरिक्त आप गरीब कन्याओं का विवाह मेधावी छात्रों की सहायता असहाय लोगों की सेवा करो घर में अपने माता-पिता की सेवा करो बड़ों का आदर सम्मान करो यही सच्ची ईश्वर भक्ति है आपने आज से 100 वर्ष पहले किसी को कोई गहना कपड़ा आभूषण चढ़ाते देखा है। क्या भगवान श्री राम देश में मंदिरों में जाकर रूपए पैसे गहने चढ़ाते थे गोस्वामी जी ने लिखा है ।

प्रातः काल उठि के रघुनाथा
 मात पिता गुरु नावहिं माथा। 

एहि से अधिक धर्म नहीं दूजा।
 सादर सास ससुर पद पूजा ।

लेकिन एक तरफ आज की पीढ़ी रहती है हम पढ़े-लिखे बुद्धिमान है दूसरे तरफ महिलाएं अपने पति की सेवा करना पाप समझती हैं और बड़े-बड़े मगरमच्छ घड़ियाल रूपी पापी संत महंत लोगों की चरण वंदना करके उनकी हर प्रकार से सेवा करती है ऐसी महिलाओं को क्या प्राप्त होगा आप समझ सकते हैं ।

इस तरह पुरुष लोग भी इतने गिरे हो चुके हैं कि अपनी पत्नियों को छोड़कर दुनिया भर की औरतों को खोजते हुए नरक में जाते हैं जैसा कि अभी आपने देखा होगा की मां बाप को धोखा देने वाले अपने पति को किस तरह पत्नी ने खाई में धकेल कर मार दिया ।

इसके अलावा भी यदि आपको सेवा करनी है तो मंदिर बनवा दीजिए पानी का पंप लगवा दीजिए ठहरने के लिए यात्री साल बनवा दीजिए सड़क बनवाइए यह सच्ची ईश्वर भक्ति है। 

वरना आपका खून पसीने की गाड़ी कमाई यही धर्म गुरु जो पांच कुंतल से भी भारी होते हैं राजनेताओं माफिया धन कुबेर और उद्योगपति लोगों के साथ बड़े अधिकारी से सांठगांठ करके ईश्वर के नाम का भजन कीर्तन करते हुए डकार जाएंगे और आपको पता भी नहीं लगेगा। 

अयोध्या में जो कुछ हुआ वह भगवान की इच्छा से हुआ उन्होंने दिखा दिया यह धर्म गुरु पुजारी पांडे उनके चेले दलाल बड़े-बड़े अधिकारी बड़े-बड़े राजनेता धन कुबेर माफिया वास्तव में कितने गिरे हुए हैं इसलिए अब भी समझ जाओ और संभल जाओ बाकी तो कुछ कहने की आवश्यकता ही नहीं है। 

यदि दुनिया भर का टोटका ना हो तो कोई विशिष्ट कतर नहीं लगेगी हर व्यक्ति आराम से दर्शन करेगा और चला जाएगा व्यापार नहीं होगा आज भी जहां पर इस प्रकार के महंत और मठाधीश नहीं है वहां लोगों को बिना रोक-टोक दर्शन मिलता है और वही सच्ची सेवा और श्रद्धा है खुद हमारे गांव में हमारे पूर्वजों के द्वारा 500 वर्ष पहले बनाया गया बाबा गंगा दास का अद्भुत आश्रम और बावड़ी है जहां पर दान कुछ नहीं देना पड़ता है उल्टे प्रसाद भी मिलता है ।

तो मंदिर ऐसा होना चाहिए जो जिसका एक-एक पैसा देश और धर्म में अपने सनातन के विकास में लगे वहां रहने वाले साधु संत केवल अपने रहने खाने के लिए पैसे का उपयोग ले सकते हैं ना की चोरी करने के लिए दुराचार करने के लिए मोटे-मोटे सोने की सिकड़ी पहनने के लिए और भोग विलास के लिए और यही हो रहा है और भीड़ में यह पुजारी पंडित क्या-क्या करते हैं कुछ कहने सुनने और लिखने लायक भी नहीं है और विरोध करने पर यह पुजारी पांडे जो वास्तव में गुंडे और चरित्रहीन व्यक्ति हैं एक साथ होकर मारपीट करने लगते हैं जैसा की तमाम वीडियो में आया है यह सबसे अधिक चौकियां जौनपुर में होता है और हर जगह होता है।

याद रखो ईश्वर हर एक जगह है और मंदिर आश्रम धर्मस्थल सनातन धर्म के विकास आपस में मेलजोल और देश को जानने के लिए बनाया गया है आभूषण गाना पैसे चढ़ाने के लिए नहीं एक बार गहराई से सोच कर देखो आप हर जगह स्वयं देवी देवताओं से मांगने जाते हो अपनी इच्छाओं को पूरा करने जाते हो तो क्या भगवान को तुम खुद दे सकते हो जो उन्हें पैसे और गहने देते हो और अगर इतना सक्षम हो तो फिर वहां जाते क्यों हो -डॉ दिलीप कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल

Thursday, 25 June 2026

मौसम की भविष्यवाणी आज से बदल जाएगा जौनपुर और आसपास तथा पूर्वांचल का मौसम और कल तक उत्तर प्रदेश में अधिकांश जगहों का मौसम बदल जाएगा ।

मौसम की भविष्यवाणी आज से बदल जाएगा जौनपुर और आसपास तथा पूर्वांचल का मौसम और कल तक उत्तर प्रदेश में अधिकांश जगहों का मौसम बदल जाएगा ।
लगातार 25 दिनों की अग्निवर्षा और बीच में केवल तीन अच्छे वर्षा वाले दिन और दिल दहला देने वाला पसीने से नहला देने वाला मौसम अब धीरे-धीरे वर्षा वाले मौसम में बदल जाएगा 

आज जौनपुर और आसपास तथा पूर्वांचल और अनेक स्थानों पर सुबह से ही घने काले कपासी बादल छा जाएंगे और दोपहर से संध्या तक जौनपुर सहित कई स्थानों में हल्की वर्षा होने की संभावना है ।

25 जून तक महा भयंकर प्रलयंकारी गर्मी उमस और पसीना होने की और सुख मौसम रहने की हमारे केंद्र की भविष्यवाणी ईश्वर की कृपा से एक-एक अक्षर सही हुई इतना ही नहीं जापान और दक्षिणी अमेरिका में महा भयंकर भूकंप से हजारों के करने और लाखों के घायल होने और भयंकर विनाश की भविष्यवाणी भी चमत्कारिक रूप से सत्य हुई ‌ अभी भारत चीन ईरान तुर्की दक्षिण पूर्व एशिया जापान फिलीपींस अमेरिका और हवाई द्वीप को तथा यूरोप के कुछ भागों सहित अनेक स्थानों में भूकंप ज्वालामुखी विस्फोट और समुद्र में सुनामी लहरों और आंधी तूफान चक्रवात प्रबल रूप से आने की एक सप्ताह में संभावना बनी हुई है ‌

अब महा भयंकर प्रलयंकारी गर्मी का यह केंद्र भारत और दक्षिण पूर्वी एशिया से खिसक कर अब देश यूरोप और मेक्सिको की तरफ चल जाएगा जहां इंग्लैंड फ्रांस पुर्तगाल इटली सहित पूरा यूरोप भैया ने गर्मी से हाहाकार कर उठेगा महा का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस पार हो जाएगा लंदन भी जिसका तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से ऊपर नहीं जाता वहां 35 डिग्री सेल्सियस के साथ लोग त्राहि-त्राहि कर उठेंगे

आज का अधिकतम तापमान भी कल के 43 डिग्री सेल्सियस की जगह 39 डिग्री सेल्सियस और 35 डिग्री न्यूनतम की जगह 32 डिग्री सेल्सियस अधिकतम रहेगा‌ वायु गुणवत्ता सूचकांक 5080 हवा की दिशा पहले उत्तरी पूर्वी फिर पूर्वी और गति 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी जबकि आज दोपहर से शाम के बीच हल्की वर्षा होने की प्रबल संभावना है सापेक्षिक आद्रता न्यूनतम 25 अधिकतम 90% रहेगी जबकि दिन की अवधि 13 घंटे 50 मिनट और रात की और ही 10 घंटे 10 मिनट रहेगी धीरे-धीरे रात बड़ी होने लगेगी और दिन छोटा हो जाएगा 

कल भी हल्की वर्षा होने की पूरी संभावना बनी हुई है अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 29 डिग्री सेल्सियस होने की आशा है मां की स्थितियां आज की तरह रहेंगे 30 जून तक तीन बार वर्षा होगी जिसमें एक बार भारी से बहुत भारी वर्षा होना संभव है और यह चमक गरज वज्रपात के बीच होगी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक

: 25 जून तक भयंकर और प्रचंड गर्मी उमस पसीना ने सबका जीना बेहाल कर दिया जैसा कि हमारे केंद्र ने कहा था

: 25 जून तक भयंकर और प्रचंड गर्मी उमस पसीना ने सबका जीना बेहाल कर दिया जैसा कि हमारे केंद्र ने कहा था 15 जून से प्रारंभ हुई गर्मी ने है हैक कर मचा दिया और हल्की बूंदा वाली के अलावा मानसून का नामोनिशान नहीं है यह बार-बार चेतावनी दी गई थी कि इस बार का मानसून केवल जौनपुर और जौनपुर के आसपास ही नहीं संपूर्ण भारत में अनिश्चित अनियमित विलंबित और पिछले साल से बहुत कम होगा 

बाकी सरकारी और गैर सरकारी मौसम विज्ञानी तो कुछ और ही हवा हवाई बातें और सामान्य मानसून आने की समय घोषणा कर रहे थे अब आगे क्या होने वाला है लिए इसके बारे में प्रामाणिक रूप से बताते हैं 

25 जून के बाद हमारी अत्यंत ही सूक्ष्म और गहन गणना के अनुसार 26 से लेकर 30 जून के बीच दो हल्की और एक भारी वर्षा जौनपुर और आसपास के जनपदों और दूर-दूर तक होने की पूरी संभावना बन चुकी है बाकी मौसम विज्ञानी क्या कहते हैं उसको मैं नहीं जानता लेकिन ईश्वर की कृपा रही तो 26 जून से 30 जून 2026 तक खेती किसानी बागवानी के लिए काम भर की वर्षा और बहुत ही प्रचंड भयानक और प्रलयंकारी गर्मी उमस पसीना में निश्चित रूप से राहत प्राप्त होगी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक ‌ दिनांक 24 जून 2026 समय रात 10:18 मोबाइल नंबर 70 177 13978
[6/25, 8:12 AM] Dileep Singh Rajput Jounpur: मौसम की भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह 

आज का अधिकतम तापमान 40 डिग्री और न्यूनतम 31 डिग्री सेल्सियस होगा लेकिन उसके अनुभूति 43 डिग्री सेल्सियस और 35 डिग्री सेल्सियस के बराबर होने से बहुत ही भयानक उमस और पसीने वाला दिन सिद्ध होगा 

वायु गुणवत्ता सूचकांक 100 के आसपास पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 9 के कारण बहुत ही खतरनाक और हवा की दिशा पश्चिम और गति 10 से 20 किलोमीटर प्रति घंटा होगी 

कल अधिकतम तापमान 41 और न्यूनतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस होगा लेकिन इसकी अनुभूति 44 और 35 डिग्री सेल्सियस के बराबर होगी जो और भी खतरनाक होगा तेज हवाएं आंधी तूफान आने की संभावना बन रही है।


26 से 30 के बीच कभी भी आंधी तूफान तेज हवाओं के बीच वर्षा होने की प्रबल संभावना बन गई है और ऐसी संभावना है कि 27 से मौसम परिवर्तन हो जाएगा

जौनपुर उत्तर प्रदेश भारत और विश्व का 25 जून से 5 जुलाई तक मौसम की भविष्यवाणी डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष

जौनपुर उत्तर प्रदेश भारत और विश्व का 25 जून से 5 जुलाई तक मौसम की भविष्यवाणी डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष 
जौनपुर और जौनपुर के आसपास के जनपदों में 25 जून से 27 जून तक भयंकर गर्मी उमस और पसीने के बीच 26 जून की रात और 27 जून के दिन से मौसम बदल जाने और बादलों के गिरने बूंदाबांदी सहित हल्की वर्षा के योग हैं जबकि इसके पहले 15 जून से 25 जून तक घनघोर गर्मी वर्षा और उमश की भविष्यवाणी पूरी तरह से सिद्ध हो चुकी है ‌ 28 जून से 5 जुलाई के बीच तीन बार हल्के और चार बार सामान्य से मध्यम और तेज वर्षा होने की प्रबल संभावना है 28 जून से तापमान में सुधार होना शुरू हो जाएगा।

जहां तक उत्तर प्रदेश की बात है तो यहां 25 से 27 तक वाराणसी के दक्षिण से गाजीपुर आजमगढ़ बलिया गोरखपुर देवरिया और आसपास हल्की सामान्य वर्षा कहीं-कहीं तेज वर्षा तेज हवाओं के साथ होगी 28 जून से 5 जुलाई तक भारी वर्षा होने की प्रबल संभावना है इस कालखंड में जौनपुर और उत्तर प्रदेश में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 से 100 के बीच हवाओं की दिशा पश्चिम उत्तर पूर्वी कहीं-कहीं दक्षिणी और एक बार बहुत तेज आंधी तूफान वज्रपात वर्ष की संभावना है पहले अधिकतम तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस और बाद में 35 से 40 डिग्री सेल्सियस रहेगा न्यूनतम तापमान भी पहले 30 से 35 और फिर ‌ घटकर 25 से 30 डिग्री सेल्सियस रह जाएगा 

जहां तक देश के मौसम की बात है तो उत्तर प्रदेश जौनपुर की तरह यहां भी मानसून और मानसून की वर्षा 10 दिन विलंबित कमजोर अनिश्चित और अनियमित चल रहा है केरल कर्नाटक तमिलनाडु महाराष्ट्र गोवा पांडिचेरी अंडमान निकोबार गोवा दमन दीव आंध्र प्रदेश उड़ीसा झारखंड बंगाल बिहार नेपाल भूटान बांग्लादेश सिक्किम अरुणाचल प्रदेश असम मेघालय मणिपुर त्रिपुरा मिजोरम में 25 जून से 5 जुलाई तक अधिकांश भारी से बहुत भारी और कहीं-कहीं मूसलाधार वर्षा विद्युत की गलत चमक और तेज हवा आंधी तूफान के साथ होगी यहां पर मौसम भी ठंडा और सुहावना हो जाएगा 

बचे हुए मध्य उत्तर और पश्चिम उत्तर भारत में गुजरात मध्य प्रदेश दक्षिण पूर्वी राजस्थान में मानसून 25 से 30 जून के बीच प्रवेश करेगा और हल्की सामान्य वर्ष बाद में कुछ अच्छी तेज वर्षा होगी जबकि दिल्ली पंजाब हरियाणा राजस्थान के उत्तर पश्चिमी भागों जम्मू कश्मीर लेह लद्दाख में मानसून 5 जुलाई के बाद प्रवेश करेगा इसलिए इस कालखंड में आंधी तूफान और तेज हवाओं के साथ होने वाली वर्षा के अतिरिक्त मौसम सूखा रहेगा 

अब विश्व के मौसम पर आते हैं यूरोप में उत्तरी अफ्रीका में अरब देशों में विश्वत रेखा प्रदेशों में मेक्सिको और दक्षिण पूर्व एशिया में इस कालखंड में घनघोर गर्मी पड़ेगी सबसे अधिक भयानक गर्मी यूरोप में पड़ेगी जहां इटली फ्रांस स्पेन सहित कुछ देशों में तापमान 100 वर्ष का कीर्तिमान तोड़ते हुए 45 डिग्री सेल्सियस को पार करने का और अनेक लोग गर्मी से मर जाएंगे 

अफ्रीका के दक्षिण भाग दक्षिण अमेरिका ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड और अंटार्कटिका में भयंकर ठंडी का मौसम रहेगा और यहां अधिकतर सूखा मौसम रहेगा लेकिन कुछ स्थानों पर वर्षा आंधी तूफान और भयानक भूकंप आ सकते हैं ‌ 25 जून से 27 जून के बीच ज्योतिष और पंचांग के अनुसार दक्षिण अमेरिका के उत्तरी भागों में महा भयंकर भूकंप आने से हजारों लोग मारे जाएंगे और लाखों लोग घायल हो जाएंगे ऐसा अभूतपूर्व दृश्य बड़ा ही दुखद होगा 

बाकी बचे हुए सोवियत संघ चीन जापान कोरिया और उत्तरी अमेरिका में मौसम अधिक गर्म रहेगा ना अधिक ठंडा रहेगा लेकिन यह भूभाग भी ज्वालामुखी भूकंप और आंधी तूफान चक्रवात टॉरनेडो हरि केन की चपेट में रहेगा और यहां भी बड़े पैमाने पर धन-जन की हानि होगी 

ऐसा प्रतीत होता है कि 25 से 27 जून पूरी दुनिया के लिए अभूतपूर्व संकट वाला रहेगा भारत चीन मैक्सिको ईरान अलास्का दक्षिण पूर्वी एशिया में भी दक्षिणी अमेरिका की तरफ भूकंप आएंगे लेकिन जहां दक्षिण अमेरिका में रिएक्टर पर 7 से 8 का भूकंप आएगा वहीं पर भारत और अन्य देशों में इसकी तीव्रता 5 से 7 के बीच रहेगी दक्षिण अमेरिका के किनारे के भागों में सुनामी लहरें भी उठ सकती हैं कुल मिलाकर 25 जून से 5 जुलाई का कालखंड पूरी दुनिया के लिए अत्यंत ही भयानक गरम और हाहाकार मचाने वाला होगा

Wednesday, 24 June 2026

एक शांतिपूर्ण और मज़बूत समाज बनाना: एक्सट्रीमिज़्म की चुनौतियों से निपटना:*

*एक शांतिपूर्ण और मज़बूत समाज बनाना: एक्सट्रीमिज़्म की चुनौतियों से निपटना:*

तेज़ी से हो रहे सामाजिक बदलाव, टेक्नोलॉजी में तरक्की और दुनिया भर में बढ़ते आपसी जुड़ाव के दौर में, एक्सट्रीमिज़्म की चुनौती शांति, सुरक्षा और सामाजिक मेलजोल के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक बनकर उभरी है। भारत, अपने धर्मों, भाषाओं, संस्कृतियों और जातीय समुदायों की बहुत ज़्यादा विविधता के साथ, लंबे समय से यह मानता रहा है कि एक्सट्रीमिज़्म का मुकाबला सिर्फ़ कानून लागू करने और सुरक्षा उपायों से नहीं किया जा सकता। लगातार सफलता उन अंदरूनी वजहों को दूर करने में है जो एक्सट्रीमिस्ट विचारधाराओं को असर और पकड़ बनाने देती हैं। दुनिया भर के अनुभवों ने दिखाया है कि एक्सट्रीमिज़्म को सिर्फ़ रिएक्टिव उपायों से खत्म नहीं किया जा सकता। जबकि सिक्योरिटी ऑपरेशन एक्सट्रीमिस्ट नेटवर्क को रोक सकते हैं और तुरंत खतरों को रोक सकते हैं, एक पूरी तरह से रिएक्शनरी तरीका कभी-कभी अकेलेपन और अविश्वास की भावनाओं को गहरा कर सकता है, जिससे शायद और ज़्यादा रेडिकलाइज़ेशन हो सकता है। इसके उलट, रोकने की स्ट्रेटेजी ऐसी सामाजिक स्थितियाँ बनाने पर फोकस करती हैं जिनमें एक्सट्रीमिस्ट विचारधाराएँ जड़ें जमाने के लिए संघर्ष करती हैं। शिक्षा, जागरूकता, आर्थिक मौके, सबको शामिल करना और कम्युनिटी से जुड़ना एक ऐसा माहौल बनाने में मदद करता है जो रेडिकल बातों का विरोध करता है। जब युवाओं को अच्छी शिक्षा, अच्छा रोज़गार और अपनेपन की गहरी भावना मिलती है, तो उनके ऐसे ग्रुप्स की तरफ़ आकर्षित होने की संभावना कम होती है जो नफ़रत, हिंसा या बंटवारे को बढ़ावा देते हैं। हमेशा रहने वाली शांति सिर्फ़ ताकत से नहीं मिल सकती; इसे सोशल इन्वेस्टमेंट, सबको साथ लेकर चलने वाले शासन और नागरिकों को मज़बूत बनाकर ही पाया जा सकता है। रोकथाम न सिर्फ़ ज़्यादा असरदार है, बल्कि लंबे समय में ज़्यादा किफ़ायती और टिकाऊ भी है।
एक्सट्रीमिज़्म के ख़िलाफ़ ढाल के तौर पर सबको साथ लेकर चलने वाला विकास: एक्सट्रीमिस्ट सोच अक्सर सामाजिक शिकायतों, आर्थिक असमानताओं और अलग-थलग किए जाने और अलग-थलग किए जाने की सोच का फ़ायदा उठाती है। जो समुदाय खुद को नज़रअंदाज़ या नुकसान में महसूस करते हैं, वे उन बातों के शिकार हो सकते हैं जो टकराव या हिंसा के ज़रिए मज़बूती का वादा करती हैं। इसलिए, सबको साथ लेकर चलने वाला विकास एक्सट्रीमिज़्म का मुकाबला करने की कोशिशों का एक ज़रूरी हिस्सा है। हर नागरिक को, चाहे उसका सामाजिक, धार्मिक, भाषाई या क्षेत्रीय बैकग्राउंड कुछ भी हो, तरक्की और तरक्की के मौके मिलने चाहिए। आर्थिक रूप से शामिल करना, पढ़ाई-लिखाई में आसानी, हेल्थकेयर सर्विस और सोशल वेलफ़ेयर प्रोग्राम उन हालात को कम करने में मदद करते हैं जिनका एक्सट्रीमिस्ट ग्रुप फ़ायदा उठाना चाहते हैं। सामाजिक एकता को बढ़ावा देना भी उतना ही ज़रूरी है। डायवर्सिटी हमेशा से भारत की सबसे बड़ी ताकतों में से एक रही है। अलग-अलग संस्कृतियों के बीच बातचीत, आपसी सम्मान और साझा नागरिक मूल्यों को बढ़ावा देने से समुदायों के बीच रिश्ते मज़बूत होते हैं और बांटने वाली विचारधाराओं का आकर्षण कम होता है। जब नागरिक एक-दूसरे को एक आम राष्ट्रीय प्रोजेक्ट में पार्टनर के तौर पर देखते हैं, तो नफ़रत फैलाने और ध्रुवीकरण की कोशिशें बहुत कम असरदार हो जाती हैं।
नेशनल सिक्योरिटी के एक पिलर के तौर पर कम्युनिटी की भागीदारी: नेशनल सिक्योरिटी अब सिर्फ़ सरकार और सिक्योरिटी एजेंसियों की ज़िम्मेदारी नहीं है। आज की सिक्योरिटी चुनौतियों के लिए समुदायों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी की ज़रूरत है। स्थानीय समुदाय अक्सर कट्टरता, सामाजिक तनाव या कमज़ोर लोगों को प्रभावित करने के लिए चरमपंथी ग्रुप्स की कोशिशों के संकेतों को सबसे पहले पहचानते हैं। कम्युनिटी लीडर, शिक्षक, धार्मिक विद्वान, सिविल सोसाइटी संगठन, युवा ग्रुप और परिवार सभी शांति को बढ़ावा देने और चरमपंथी विचारों को फैलने से रोकने में अहम भूमिका निभाते हैं। उनका ज़मीनी ज्ञान और भरोसा उन्हें शुरुआती स्टेज में चिंताओं को पहचानने और अच्छे विकल्प देने में असरदार पार्टनर बनाता है।
भारत का डेमोक्रेटिक ढांचा नागरिकों को शासन और सामाजिक विकास में भाग लेने के मौके देता है। इन भागीदारी वाले तरीकों को मज़बूत करने से नागरिकों में मालिकाना हक और ज़िम्मेदारी की भावना को बढ़ावा मिलता है। जब लोगों को लगता है कि उन्हें सुना जा रहा है, उनका सम्मान किया जा रहा है और फ़ैसले लेने की प्रक्रिया में उन्हें शामिल किया जा रहा है, तो उनके सामाजिक स्थिरता और राष्ट्रीय एकता में अच्छा योगदान देने की संभावना ज़्यादा होती है। समुदाय-आधारित तरीके गलत जानकारी और कट्टरपंथी प्रोपेगैंडा का मुकाबला करने में भी मदद करते हैं। भरोसेमंद स्थानीय आवाज़ें झूठी बातों को चुनौती दे सकती हैं, आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा दे सकती हैं और सहनशीलता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के मूल्यों को मज़बूत कर सकती हैं।
नागरिकों और संस्थाओं के बीच भरोसा: कट्टरपंथ के ख़िलाफ़ सबसे असरदार सुरक्षा उपायों में से एक नागरिकों और सार्वजनिक संस्थाओं के बीच मज़बूत रिश्ता है। भरोसा सहयोग को बढ़ावा देता है और सहयोग सुरक्षा को बढ़ाता है। जब नागरिकों को सार्वजनिक संस्थाओं पर भरोसा होता है, तो उनके सरकारी पहलों में अच्छे से शामिल होने, संभावित खतरों की रिपोर्ट करने और शांति और व्यवस्था बनाए रखने की कोशिशों का समर्थन करने की संभावना ज़्यादा होती है। इस भरोसे को बनाने के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता की ज़रूरत होती है। सार्वजनिक संस्थाओं को नागरिकों की ज़रूरतों के प्रति जवाबदेह रहना चाहिए और न्याय और समान व्यवहार के प्रति प्रतिबद्धता दिखानी चाहिए। अधिकारियों और समुदायों के बीच खुली बातचीत ग़लतफ़हमियों को कम करने में मदद करती है और अलग-थलग किए जाने या अलग-थलग किए जाने की भावनाओं को रोकती है। नाराज़गी या असंतोष को जड़ जमाने से रोकना ज़रूरी है। सकारात्मक जुड़ाव कई तरह से हो सकता है, जैसे कम्युनिटी आउटरीच प्रोग्राम, लोगों से बातचीत, युवाओं को शामिल करने की पहल और मिलकर समस्याओं को सुलझाने की कोशिशें। इस तरह के मेल-जोल से संस्थाओं का मानवीय चेहरा सामने आता है और आपसी सम्मान बढ़ता है। इनसे ऐसे रास्ते भी बनते हैं जिनसे शिकायतों को शांति से सुलझाया जा सके, ताकि वे बड़े झगड़ों या टकराव का रूप न ले लें।
चरमपंथ का मुकाबला करना सिर्फ़ सुरक्षा की चुनौती नहीं है; यह असल में एक सामाजिक चुनौती है। सबसे टिकाऊ समाधान तब निकलते हैं जब सरकारें, समुदाय, शिक्षण संस्थान, सिविल सोसाइटी संगठन और नागरिक शांति, न्याय और विकास के साझा लक्ष्य के लिए मिलकर काम करते हैं। भारत की ताकत उसकी विविधतापूर्ण परंपराओं, लोकतांत्रिक संस्थाओं और समावेशी विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता में है। प्रतिक्रिया देने के बजाय रोकथाम को प्राथमिकता देकर, समान अवसर को बढ़ावा देकर, सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करके और नागरिकों व संस्थाओं के बीच भरोसा मजबूत करके, भारत एक ऐसा समाज बना सकता है जो चरमपंथ का मजबूती से सामना करे और आपसी सद्भाव के लिए प्रतिबद्ध हो।
एक मजबूत और टिकाऊ समाज वह है जिसमें हर नागरिक को अहमियत महसूस हो, हर समुदाय को देश की तरक्की में अपनी भागीदारी दिखे और हर व्यक्ति की देश के भविष्य में हिस्सेदारी हो। ऐसा समाज न सिर्फ़ चरमपंथ का विरोध करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी शांति, सुरक्षा और समृद्धि की नींव भी रखता है।
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फ़रहत अली खान 
एम ए गोल्ड मेडलिस्ट

Sunday, 21 June 2026

मंदिर में दान की चोरी की खबर आई तो कुछ लोग हैरान हो गए। मानो चोर ने सीधे भगवान के घर में हाथ डाल दिया हो। लेकिन सच पूछिए तो हैरानी चोरी पर नहीं, हैरानी इस बात पर होनी चाहिए कि अब भी लोग हैरान हो रहे हैं।

मंदिर में दान की चोरी की खबर आई तो कुछ लोग हैरान हो गए। मानो चोर ने सीधे भगवान के घर में हाथ डाल दिया हो। लेकिन सच पूछिए तो हैरानी चोरी पर नहीं, हैरानी इस बात पर होनी चाहिए कि अब भी लोग हैरान हो रहे हैं।
हम बड़ा दिलचस्प समाज हैं। भगवान को सर्वशक्तिमान भी मानते हैं और उनके घर पर सीसीटीवी, ताले, गार्ड और ऑडिट भी लगाते हैं। यानी श्रद्धा भी पूरी और अविश्वास भी पूरा।
कहते हैं लोग भगवान से डरते हैं। अगर ऐसा होता तो दानपात्र पर ताला नहीं, फूल-माला लगी होती। सच तो यह है कि इंसान भगवान से कम, थाना-पुलिस और कोर्ट-कचहरी से ज्यादा डरता है। जहां एफआईआर का खतरा हो, वहां चरित्र जाग जाता है। जहां सिर्फ भगवान देख रहे हों, वहां आदमी अपने असली रूप में आ जाता है।
मजेदार बात यह है कि चोरी करने वाला भी शायद पूजा-पाठ करता होगा। सुबह आरती, शाम भजन, और बीच में अवसर मिले तो भगवान की गुल्लक पर भी हाथ साफ। हमारे यहां पाप करने और क्षमा मांगने के बीच का अंतराल कई बार चाय के एक कप से भी कम होता है।
धर्म के बाजार में सबसे ज्यादा बिकने वाली चीज़ "भय" है। बचपन से बताया जाता है कि भगवान सब देख रहा है। लेकिन जैसे ही नोटों से भरा दानपात्र सामने आता है, आदमी को भरोसा हो जाता है कि आज शायद भगवान कहीं और देखने में व्यस्त हैं।
असल में भगवान से लोग डरते नहीं, भगवान का नाम लेकर दूसरों को डराते हैं। खुद पर बात आए तो पूरा दर्शन बदल जाता है। यही कारण है कि मंदिरों में दान बढ़ता जाता है और ताले भी मोटे होते जाते हैं। श्रद्धा और सुरक्षा, दोनों साथ-साथ बढ़ रही हैं और शायद यही इस घटनाओं का सबसे बड़ा व्यंग्य है। जिस भगवान के भरोसे लोग अपनी जिंदगी छोड़ देते हैं, उसी भगवान के पैसे की सुरक्षा के लिए उन्हें इंसानों पर भरोसा नहीं होता।

Saturday, 20 June 2026

अंत में वही हुआ जो पिछले 49 साल से होता चला आ रहा है मानसून वर्षा और मौसम की हमारे केंद्र की भविष्यवाणी पूरी तरह सही हुई

अंत में वही हुआ जो पिछले 49 साल से होता चला आ रहा है मानसून वर्षा और मौसम की हमारे केंद्र की भविष्यवाणी पूरी तरह सही हुई 

जनवरी से अब तक 17 बार लिखकर पोस्ट किया जा चुका है और सैकड़ो समाचार पत्र पत्रिकाओं और चैनलों में भी छप चुका है कि इस वर्ष मानसून विलंबित अनियंत्रित और बहुत कमजोर होगा इस वर्ष वर्ष भी बहुत कम होगी और अकाल और सुख या अकाल सूखा जैसी स्थितियां पड़ने से कोई रोक नहीं सकता।

जबकि आज के 15 दिन पहले तक अप्रैल और मैं के सारे मौसम विभाग और प्राइवेट मौसम विभाग जैसे स्काई में स्काई भेजें और समाचार पत्र और विश्वविद्यालय ओके तथा कथित विद्वानों को देख लीजिए सभी ने समय पर मानसून आने और सामान्य से अधिक वर्षा होने की कई कई बार भविष्यवाणी किया है 

इस समय संपूर्ण देश से मानसून और मानसूनी बादल गायब हो जब केरल में मानसून 15 म ई को आया तो उसे किसी ने नहीं माना और 25 म ई तक बरस कर चला गया। अब सभी हमारे हमारी भविष्यवाणी मान लिया है कि मानसून अनियमित है विलंबित है और कम वर्षा करेगा और 25 जून तक इसके कहीं से आने की आशा नहीं है इसी तरह 15 से 25 जून तक महा भयंकर प्रलयंकारी गर्मी उमस पड़ने की हमारे केंद्र की भविष्यवाणी भी सही हुई।

यह सब लिखने और कहने का अर्थ केवल इतना ही है कि सही जानकारी सबको मिले तब सावधान रहें खेती किसानी बागवानी जिस हद तक संभव हो बचा सके और कोई अर्थ नहीं है अभी तीन-चार दिन तक शरीर जलाने वाली गर्मी उमस और पसीना झेलने को तैयार रहे जल्दी ही एक चेक करवाती वर्षा आंधी तूफान के साथ और उसके बाद वर्ष कुछ दिन तो राहत और ठंड प्रदान कर ही देगी 


लेकिन फिर से यही कहना चाहूंगा कि वर्षा के बीच-बीच में कुछ अच्छे सुहावना दिन छोड़कर 25 अक्टूबर तक भीषण गर्मी उमस और पसीना चलने के लिए अपने को तैयार कर लीजिए साथ ही साथ कमजोर मानसून और अकाल तथा सूखा ‌ जैसी स्थितियां के लिए भी तैयार रहें -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक

चरम सीमा तक पहुंच चुकी भी भयंकर प्रलयंकारी गर्मी उमश और पसीना के बीच ‌

चरम सीमा तक पहुंच चुकी भी भयंकर प्रलयंकारी गर्मी उमश और पसीना के बीच ‌ केरल कर्नाटक गोवा तमिलनाडु आंध्र प्रदेश उड़ीसा महाराष्ट्र मुंबई पूना थाने नवी मुंबई नालासोपारा मध्य प्रदेश के दक्षिणी पूर्वी भागों झारखंड बिहार अंडमान निकोबार लक्षद्वीप बंगाल और उत्तर पूर्वी भारतवासियों के लिए प्रसन्नता की बात यह है कि कल से वहां एक सप्ताह तक लगातार हल्की सामान्य और इसके बाद भीषण वर्षा होगी जिससे उनको पूरी तरह से गर्मी और पसीने से मुक्ति मिल जाएगी 

लेकिन जौनपुर और उत्तर भारत में स्थित लोगों मध्य प्रदेश राजस्थान गुजरात दिल्ली नोएडा पंजाब हरियाणा उत्तराखंड जम्मू कश्मीर हिमाचल प्रदेश के लोगों को अभी चार-पांच दिन तक भी भयंकर प्रचंड गर्मी उमस और पसीने में नहाना पड़ेगा एक दो बार इस बीच उनका झंझावात आंधी तूफान के कारण होने वाली वर्षा से अल्पकालिक राहत और प्रसन्नता मिल सकती है-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

योग विज्ञान और योग दिवस-डॉ दिलीप कुमार सिंह

योग विज्ञान और योग दिवस-डॉ दिलीप कुमार सिंह 
योग भारत की विश्व को एक एक अद्भुत और अनुपम देन है जो आज संपूर्ण विश्व में फैल गया है इसका सर्वप्रथम उल्लेख विश्व के सबसे प्राचीनतम पवित्र ग्रंथ ऋग्वेद में किया गया है ‌ प्रत्येक भारती ग्रंथ और महाकाव्य और साहित्य में योग व्यायाम का वर्णन आवश्यक है रामायण महाभारत जैन और बौद्ध ग्रंथ उपनिषद ब्राह्मण आदरणीय और पुराण में इसका वर्णन है विश्व काव्य कामायनी में भी इसका भावपूर्ण वर्णन है। स्वामी विवेकानंद स्वामी रामतीर्थ महेश योगी धीरेंद्र ब्रह्मचारी आचार्य रजनीश ओशो रामदेव जैसे लोगों ने इसके प्रचार प्रसार में पूरे विश्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है इसका मुख्य और वैज्ञानिक स्रोत और ग्रंथ पतंजलि द्वारा किया गया है। 

योग का शाब्दिक अर्थ जोड़ना है यह हमको स्वास्थ्य से आत्मा को परमात्मा से जोड़कर गहरी ज्ञान की अंतिम अवस्था में एक बिंदु पर केंद्रित करें ईश्वर का दर्शन करता है एवं नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्यान और समाधि इसकी आठ सदस्य आए हैं जिनको अष्टांग योग कहा जाता है आजकल इसके आसान अधिक प्रचलित हैं जबकि इसका अंतिम लक्ष्य ध्यान करके स्वयं को जानकारी ईश्वर का दर्शन प्राप्त करके मोक्ष को पाना है इसकी उपयोगिता और विश्व में प्रसार को देखते हुए 14 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा इसको मान्यता दी गई और 21 जून को योग दिवस घोषित किया गया ध्यान रहे की 21 जून को उत्तरी गोलार्ध में सबसे बड़ा दिन और सबसे छोटी रात होती है। 


योग धीरे-धीरे प्राप्त किया जाता है इसमें वह वस्तुओं से धीरे-धीरे ध्यान हटाकर पीएम के बाद नियम अर्थात अनुशासन इत्यादि को ग्रहण करते हुए प्राणायाम अर्थात सांस को अंदर बाहर ले जाने पर नियंत्रण करना होता है और प्रत्याहार में इस पर पूर्ण नियंत्रण करके गहरी ज्ञान की अवस्था में सभी बाहरी चीजों से मन को हटाते हुए अपने चरित्र को एक निश्चित धरना बिंदु पर केंद्रित करके गहन समाधि की अवस्था प्राप्त करके कुंडलिनी शक्ति जागृत करते हुए सहस्त्रार चक्र से झरने वाले अमृत की बूंद का पान करते हुए दिव्य निनाद अर्थात  रसपान किया जाता है।

योग बहुत ही व्यापक है यह आत्मा को परमात्मा से मिलना है व्यक्ति को विभिन्न आसनों के द्वारा शक्तिशाली और स्वस्थ बनाकर उसके जीवन के लक्ष्य की ओर ले जाता है और**जीवेत ‌ शरदं शतं **की सार्थकता स्वीकार करताहै।

‌**योग कर्मसु कौशलम्** ‌ अर्थात कार्य की सर्वोच्च कुशलता को ही योग कहा जाता है यह मानवता को विकसित करके प्रकृति की शक्तियों से साक्षात्कार करते हुए मानव को शक्तिशाली बन कर उसको सृजनात्मक बनता है जबकि पाश्चात्य और अब देश शक्ति और हिंसा को सर्वोच्च मन कर विनाश लीला प्रस्तुत करते हैं और दुनिया को विनाश के कगार पर ले जाते हैं अब यूरोप अमेरिका के अलावा अरब के अधिकांश मुस्लिम देशों ने भी योग को न केवल मान्यता दिया है अपितु इसको अपना लिया है। 

योग का प्रचार प्रसार और विज्ञापन करके अरबों रुपए फूंकने से अच्छा है ‌ कि इस पर धरातल से काम करते हुए लोगों को इसका महत्व समझाते हुए व्यक्ति को कर्म योगी बनाया जाए योग केवल आसान व्यायाम ही नहीं है इसमें कर्म योग भक्ति योग ज्ञान योग सहित सभी योग आ जाते हैं और योग स्वयं भगवान शिव के द्वारा पैदा हुआ है इसलिए वह भी उनका एक रूप है इसलिए विश्व योग दिवस पर विश्व के सभी लोगों को यह संकल्प लेना चाहिए कि वह कोई भी एक योग्य की प्रक्रिया अपना कर स्वस्थ बनाकर स्वयं को जानते हुए ईश्वरी सत्ता की तरफ बढ़ते हुए मोक्ष अर्थात मुक्ति को प्राप्त करेंगे।

Thursday, 18 June 2026

मौसम की भविष्यवाणी - डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 7017713978

मौसम की भविष्यवाणी - डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 7017713978

15 जून से 25 जून तक आसमान से बरसेगी आज सभी दिशाएं हो जाएगी लाल, धरती बन जाएगी तपती हुई भट्टी ,उमस और पसीने से हो जाएंगे लोग बेहाल  ‌‌ एसी कूलर सब कुछ फेल हो जाएगा।केवल हमारे केंद्र की भविष्यवाणी सही होगी बाकी सभी सरकारी और प्राइवेट मौसम विभाग हर वर्ष की तरह इस बार भी मुंह की खाएंगे, अल नीनो और विभिन्न प्रभावों से मानसून रहेगा बहुत कमजोर 25 अक्टूबर तक पड़ेगी घनघोर गर्मी ‌ इसका प्रभाव केवल जौनपुर और जौनपुर के आसपास के जनपदों पूर्वांचल उत्तर प्रदेश में ही नहीं अपितु जम्मू कश्मीर से लेकर केरल कन्याकुमारी गुजरात राजस्थान से लेकर अरुणाचल प्रदेश उड़ीसा हर जगह पड़ेगा शरीर की क्षमता आधी होजाएगी।

इसी बीच हवाओं की दिशा पश्चिम गति 10 से 20 किलोमीटर प्रति घंटा होगी मानसून और मानसून बादलों का दूर-दूर तक कोई नामोनिशान नहीं है जैसा कि हमारे केंद्र द्वारा बार-बार दर्जनों बार कहा गया इस वर्ष का मानसून अनिश्चित अनियमित और विलंबित रहेगा। सूखा और सूखे जैसी स्थितियां पड़ना निश्चित है ‌ क्योंकि मानसून बहुत पहले ही आकर केरल कर्नाटक तक सीमित रहकर 15 म ई से 25 म ई तक समाप्त हो चुका है दूसरा चक्र 4 जून को आया वह बहुत कमजोर था ‌ इस बीच संपूर्ण भारत में अधिकांश स्थानों का तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस अधिकतम और 25 से 35 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम रहेगा जो अत्यंत ही भयानक स्थिति है। ‌ 10 जून से 20 जून तक मानसून स्थिर हो जाएगा और आगे नहीं बढ़ेगा 25 जून से ही है सक्रिय होगा वह भी बहुत तेज नहीं होगा।

प्रदूषण की मात्रा अत्यधिक रहेगी पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 5 से 7 और वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 के आसपास रहेगी इसलिए गर्मी उमस और जलन ‌‌ भी भयंकर प्रलयंकर गर्मीसे अभी ‌ कम से कम एक सप्ताह तक मुक्ति मिलने की संभावना नहीं है वर्षा की दूर-दूर संभावना नहीं है अचानक परिवर्तन के फलस्वरूप कहीं-कहीं तेज हवा बूंदाबादी हो सकती है उसकी भी अधिक संभावना नहीं है।‌ 15 जून से 25 जून के बीच केवल एक बार आंधी तूफान वर्षा चमक गरज और वज्रपात का योग है जिससे थोड़ी सी राहत मिल जाएगी।

जौनपुर और आसपास ही नहीं पूरे देश की यही स्थिति है दो-तीन दिन केरल कर्नाटक और आसपास वर्षा करने के बाद मानसूनी बादल पूरे भारत से अदृश्य हो चुके हैं अब तक मानसून महाराष्ट्र गुजरात मध्य प्रदेश झारखंड बिहार तक पहुंच जाना चाहिए था क्योंकि जौनपुर और उत्तर प्रदेश में 19 -21 जून तक पहुंच जाता है इस बार इसके 27 से 30 जून के बीच आने की संभावना बन रही है‌ इसीलिए हमारे केंद्र द्वारा कृषि बागवानी से संबंधित लोगों को बार-बार सुझाव चेतावनी दिया गया था कि इस वर्ष सूखे वाले फसलों की तैयारी कर ले और 25 अक्टूबर तक प्रचंड गर्मी उमस पसीना झेलने के लिए तैयार रहे -

दिनों दिन इस प्रकार का प्राकृतिक प्रकोप सूखा अकाल महामारी वर्षा बाढ़ अति वृष्टि जैसी स्थितियां बढ़ती जाएंगे ‌ मनुष्य के द्वारा भयानक प्रदूषण और प्रकृति पर्यावरण के साथ किया गया खिलवाड़ अब खुलकर सामने आने लगा है भारत ही नहीं यह पूरी दुनिया को भीषण रूप से प्रभावित करके तरस-नस कर देगा अमेरिका यूरोप में भी पड़ेगी भीषण गर्मी और हजारों लोग मारे जाएंगे।

और बड़े-बड़े वैज्ञानिक मौसम विज्ञानी और पश्चिमी विद्वान और उनकी नकल करके दुनिया भर के विद्वान जो नौटंकी वाले कारण बता रहे हैं उनमें से एक भी कारण नहीं है प्रकृति और पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ के कारण ही ऐसी स्थितियां उत्पन्न हुई है ‌ इसमें से मुख्य हैं वनों और हरियाली का लगातार गायब होना नए पेड़ पौधे ‌ पृथ्वी पर लगाने कीजगह भाषणों कागजों और विज्ञापन में लगाना पौधों का पैसा जेब में रख लेना प्रकृति और पर्यावरण में भयंकर प्रदूषण पैदा करना प्लास्टिक पूरा कचरा इलेक्ट्रॉनिक कचरा रेडिएशन वाला कचरा जल और वायु को गंदा करना सीमेंट कंक्रीट और पत्थर के जंगल पैदा करना जमीन का लगातार मिट्टी की जगह सीमेंट कंक्रीट और पत्थरों से ढकते चले जाना और उद्योग धंधों का लगातार बिना नियंत्रण के बढ़ते चले जाना ‌ इसके मुख्य कारण हैं 

इसके अलावा समुद्र में फैल रहा भीषण प्रदूषण मनुष्य की जनसंख्या का हिसाब बढ़ाना लगातार युद्ध परमाणु परीक्षण और परमाणु केंटो में विस्फोट साबुन डिटर्जेंट पाउडर फ्रिज रेफ्रिजरेटर और बिजली के चूल्हा का भीषण प्रयोग लकड़ी ऊपरी और प्राकृतिक चीजों का लगातार प्रयोग घटना जल के स्रोत कुएं  ‌ तालाब झील पोखर झरने बावली इत्यादि की जगह घर-घर जेट पंप और सबमर्सिबल लगाकर धरती को जल रहित बनाना जैसे आत्मघाती प्रवृत्तियां मानव सभ्यता को विनाश की ओर ले जा रहे हैं और इस वर्ष तो भयंकर अल-नीनो ने इन सबको और भी अधिक बढ़ा दिया है ऊपर से सूर्य में हो रही प्रचंड नाभिकीय क्रियाएं और प्रचंड विस्फोट धरती को और भी गरम और असंतुलित कर रहे हैं।

आज एक विवेक साक्षरता जागरण तस्वीर का आयोजन सिकरारा ब्लॉक में ‌ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर के तत्व अवधान में जनपद न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुशील कुमार शशि के निर्देशन में और सचिव पूर्ण कालिक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुशील कुमार सिंह के देखरेख में किया गया ‌ इस अवसर पर सुशील कुमार सिंह सचिन डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल ‌ खंड विकास अधिकारी पवन कुमार और ऑडियो पंचायत कृष्ण कुमार मिश्रा काउंसलर देवेंद्र कुमार यादव एवं प्राधिकरण के डाटा एंट्री ऑपरेटर सुनील कुमार मौर्य राकेश कुमार यादव और बड़ी संख्या में विकासखंड के कर्मचारी अधिकारी और जनता उपस्थित रहे।

आज एक विवेक साक्षरता जागरण तस्वीर का आयोजन सिकरारा ब्लॉक में ‌ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर के तत्व अवधान में जनपद न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुशील कुमार शशि के निर्देशन में और सचिव पूर्ण कालिक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुशील कुमार सिंह के देखरेख में किया गया ‌ इस अवसर पर सुशील कुमार सिंह सचिन डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल ‌ खंड विकास अधिकारी पवन कुमार और ऑडियो पंचायत कृष्ण कुमार मिश्रा काउंसलर देवेंद्र कुमार यादव एवं प्राधिकरण के डाटा एंट्री ऑपरेटर सुनील कुमार मौर्य राकेश कुमार यादव और बड़ी संख्या में विकासखंड के कर्मचारी अधिकारी और जनता उपस्थित रहे।

इस अवसर पर सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण  ‌ सुशील कुमार सिंह  द्वारा विकसित भारत के संकल्प को पूर्ण करने के लिए और सभी तक न्याय पहुंचने के लिए प्राधिकरण की सहायता लेने का आवाहन किया और कहा कि अंतिम व्यक्ति तक सुविधा और न्याय पहुंचना चाहिए जिसके लिए वैकल्पिक न्याय प्रणाली का जिला प्रदेश और देश स्तर पर विकास किया गया है। देश को आगे बढ़ाने के लिए अंतिम व्यक्ति तक सुविधा पहुंचना और उसको न्याय मिलना आवश्यक है
इसी क्रम में उप मुख्य प्रतिरक्षा सलाहकार डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह विकासखंड अधिकारी पवन कुमार एडीओ कृष्ण कुमार मिश्रा ‌ काउंसलर देवेंद्र कुमार यादव के द्वारा ‌ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं ब्लॉक के द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं का विस्तार से वर्णन करते हुए जन सामान्य को इन सभी सुविधाओं का लाभ लेने और उसकी प्रक्रिया जानने के लिए विस्तार से समझाया गया।

वक्ताओं द्वारा बताया गया कि गरीब कमजोर अनुसूचित जाति जनजाति और पिछड़ी जाति के लोग तथा महिलाएं और लड़कियां चाहे धनी हो या निर्धन प्राधिकरण में फौजदारी और दीवानी के अधिवक्ता मुफ्त में प्राप्त कर सकते हैं इसके अलावा प्राधिकरण तेजाब पीड़ित दुष्कर्म पीड़ित और अन्य पीड़ा और प्रताड़ना वाले लोगों को त्वरित न्याय दिलाता है इस संगोष्ठी का संचालन डॉ दिलीप कुमार सिंह के द्वारा और आभार ज्ञापन खंड विकास अधिकारी पवन कुमार द्वारा किया गया

Tuesday, 16 June 2026

मौसम की भविष्यवाणी - डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 7017713978

मौसम की भविष्यवाणी - डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 7017713978

15 जून से 25 जून तक आसमान से बरसेगी आज सभी दिशाएं हो जाएगी लाल धरती बन जाएगी तपती हुई भट्टी उमस और पसीने से हो जाएंगे लोग बेहाल केवल हमारे केंद्र की भविष्यवाणी सही होनी बाकी सभी सरकारी और प्राइवेट मौसम विभाग हर वर्ष की तरह इस बार भी मुंह की खाएंगे अल नीनो और विभिन्न प्रभावों से मानसून रहेगा बहुत कमजोर 25 अक्टूबर तक पड़ेगी घनघोर गर्मी ‌ इसका प्रभाव केवल जोधपुर और जौनपुर के आसपास के जनपदों पूर्वांचल उत्तर प्रदेश में ही नहीं अपितु जम्मू कश्मीर से लेकर केरल कन्याकुमारी गुजरात राजस्थान से लेकर अरुणाचल प्रदेश उड़ीसा हर जगह पड़ेगा शरीर की क्षमता आधी होजाएगी।

इसी बीच हवाओं की दिशा पश्चिम गति 10 से 20 किलोमीटर प्रति घंटा होगी मानसून और मानसून बादलों का दूर-दूर तक कोई नामोनिशान नहीं है जैसा कि हमारे केंद्र द्वारा बार-बार दर्जनों बार कहा गया इस वर्ष का मानसून अनिश्चित अनियमित और विलंबित रहेगा। सूखा और सूखे जैसी स्थितियां पड़ना निश्चित है ‌ क्योंकि मानसून बहुत पहले ही आकर केरल कर्नाटक तक सीमित रहकर 15 म ई से 25 म ई तक समाप्त हो चुका है दूसरा चक्र 4 जून को आया वह बहुत कमजोर था ‌ इस बीच संपूर्ण भारत में अधिकांश स्थानों का तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस अधिकतम और 25 से 35 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम रहेगा जो अत्यंत ही भयानक स्थिति है।

प्रदूषण की मात्रा अत्यधिक रहेगी पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 5 से 7 और वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 के आसपास रहेगी इसलिए गर्मी उमस और जलन ‌‌ भी भयंकर प्रलयंकर गर्मीसे अभी ‌ कम से कम एक सप्ताह तक मुक्ति मिलने की संभावना नहीं है वर्षा की दूर-दूर संभावना नहीं है अचानक परिवर्तन के फलस्वरूप कहीं-कहीं तेज हवा बूंदाबादी हो सकती है उसकी भी अधिक संभावना नहीं है।‌ 15 जून से 25 जून के बीच केवल एक बार आंधी तूफान वर्षा चमक गरज और वज्रपात का योग है जिससे थोड़ी सी राहत मिल जाएगी।

जौनपुर और आसपास ही नहीं पूरे देश की यही स्थिति है दो-तीन दिन केरल कर्नाटक और आसपास वर्षा करने के बाद मानसूनी बादल पूरे भारत से अदृश्य हो चुके हैं अब तक मानसून महाराष्ट्र गुजरात मध्य प्रदेश झारखंड बिहार तक पहुंच जाना चाहिए था क्योंकि जौनपुर और उत्तर प्रदेश में 19 -21 जून तक पहुंच जाता है इस बार इसके 27 से 30 जून के बीच आने की संभावना बन रही है‌ इसीलिए हमारे केंद्र द्वारा कृषि बागवानी से संबंधित लोगों को बार-बार सुझाव चेतावनी दिया गया था कि इस वर्ष सूखे वाले फसलों की तैयारी कर ले और 25 अक्टूबर तक प्रचंड गर्मी उमस पसीना झेलने के लिए तैयार रहे -

दिनों दिन इस प्रकार का प्राकृतिक प्रकोप सूखा अकाल महामारी वर्षा बाढ़ अति वृष्टि जैसी स्थितियां बढ़ती जाएंगे ‌ मनुष्य के द्वारा भयानक प्रदूषण और प्रकृति पर्यावरण के साथ किया गया खिलवाड़ अब खुलकर सामने आने लगा है भारत ही नहीं यह पूरी दुनिया को भीषण रूप से प्रभावित करके तरस-नस कर देगा अमेरिका यूरोप में भी पड़ेगी भीषण गर्मी और हजारों लोग मारे जाएंगे।

और बड़े-बड़े वैज्ञानिक मौसम विज्ञानी और पश्चिमी विद्वान और उनकी नकल करके दुनिया भर के विद्वान जो नौटंकी वाले कारण बता रहे हैं उनमें से एक भी कारण नहीं है प्रकृति और पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ के कारण ही ऐसी स्थितियां उत्पन्न हुई है ‌ इसमें से मुख्य हैं वनों और हरियाली का लगातार गायब होना नए पेड़ पौधे ‌ पृथ्वी पर लगाने कीजगह भाषणों कागजों और विज्ञापन में लगाना पौधों का पैसा जेब में रख लेना प्रकृति और पर्यावरण में भयंकर प्रदूषण पैदा करना प्लास्टिक पूरा कचरा इलेक्ट्रॉनिक कचरा रेडिएशन वाला कचरा जल और वायु को गंदा करना सीमेंट कंक्रीट और पत्थर के जंगल पैदा करना जमीन का लगातार मिट्टी की जगह सीमेंट कंक्रीट और पत्थरों से ढकते चले जाना और उद्योग धंधों का लगातार बिना नियंत्रण के बढ़ते चले जाना ‌ इसके मुख्य कारण हैं 

इसके अलावा समुद्र में फैल रहा भीषण प्रदूषण मनुष्य की जनसंख्या का हिसाब बढ़ाना लगातार युद्ध परमाणु परीक्षण और परमाणु केंटो में विस्फोट साबुन डिटर्जेंट पाउडर फ्रिज रेफ्रिजरेटर और बिजली के चूल्हा का भीषण प्रयोग लकड़ी ऊपरी और प्राकृतिक चीजों का लगातार प्रयोग घटना जल के स्रोत कुएं  ‌ तालाब झील पोखर झरने बावली इत्यादि की जगह घर-घर जेट पंप और सबमर्सिबल लगाकर धरती को जल रहित बनाना जैसे आत्मघाती प्रवृत्तियां मानव सभ्यता को विनाश की ओर ले जा रहे हैं और इस वर्ष तो भयंकर अल-नीनो ने इन सबको और भी अधिक बढ़ा दिया है ऊपर से सूर्य में हो रही प्रचंड नाभिकीय क्रियाएं और प्रचंड विस्फोट धरती को और भी गरम और असंतुलित कर रहे हैं।

Monday, 15 June 2026

धार्मिक पहचान और देश के जुड़ाव में बैलेंस* :*भारत का आगे का रास्ता*

*धार्मिक पहचान और देश के जुड़ाव में बैलेंस* :
*भारत का आगे का रास्ता*

भारत कभी भी एक जैसी सभ्यता नहीं रहा है। यह एक ऐसी ज़मीन है जहाँ सदियों से अनगिनत धर्म, भाषाएँ, रीति-रिवाज और परंपराएँ एक साथ रही हैं और इसने एक अनोखी सभ्यता की सोच बनाई है जो अलग-थलग करने के बजाय सबको साथ लेकर चलने पर आधारित है। सम्राट अशोक की पुरानी शिक्षाओं से, जिन्होंने कलिंग युद्ध के बाद सभी पंथों का सम्मान करने की वकालत की थी, कबीर और गुरु नानक जैसे संतों की सबको साथ लेकर चलने वाली आध्यात्मिक परंपराओं तक, भारत का इतिहास आस्था और सबकी एकता के बीच लगातार बातचीत को दिखाता है। भारत का आइडिया कभी भी धार्मिक पहचान को मिटाने के लिए नहीं था; बल्कि, इसने एक साझा राष्ट्रीय सोच के अंदर अलग-अलग तरह की चीज़ों में तालमेल बिठाने की कोशिश की।
हालांकि, आज के समय में, धर्म और राष्ट्रवाद से जुड़े सवाल बहुत ज़्यादा सेंसिटिव हो गए हैं। पब्लिक बातचीत अक्सर राजनीतिक बयानबाजी, गलत जानकारी और सोशल मीडिया की कहानियों से बंट जाती है, जो धार्मिक पहचान और देश के प्रति वफादारी को एक-दूसरे के उलट दिखाने की कोशिश करती हैं। ऐसी जोड़ियां उस नींव को ही कमज़ोर कर देती हैं जिस पर आज का भारत बना है। बी. आर. अंबेडकर जैसे दूर की सोचने वालों की लीडरशिप में बने भारतीय संविधान ने जानबूझकर एक राष्ट्र के विचार को खारिज कर दिया और इसके बजाय हर नागरिक को देश के डेमोक्रेटिक ढांचे में बराबर का हिस्सा बने रहते हुए धर्म को मानने, मानने और फैलाने की आज़ादी की गारंटी दी। आज भारत के सामने चुनौती धर्म और राष्ट्र के बीच चुनने की नहीं है, बल्कि यह पक्का करना है कि दोनों एक साथ रहें जिससे सामाजिक मेलजोल, संवैधानिक नैतिकता और राष्ट्रीय एकता मज़बूत हो। भारत की मिली-जुली संस्कृति ठीक यही रास्ता दिखाती है। राष्ट्र के बारे में भारत की समझ ऐतिहासिक रूप से दुनिया के कई हिस्सों में देखी जाने वाली पहचान की सख्त सोच से अलग रही है। भारतीय सभ्यता सांस्कृतिक लेन-देन, माइग्रेशन और आध्यात्मिक मेलजोल से विकसित हुई। पुराने व्यापार के रास्ते यहूदियों, ईसाइयों और पारसियों को कई आधुनिक राष्ट्र-राज्यों के बनने से बहुत पहले भारतीय तटों पर लाए थे। ज़ुल्म के बजाय, इन समुदायों को अपनापन और सुरक्षा मिली। इस्लाम के आने से आर्किटेक्चर, संगीत, साहित्य, भाषा और आध्यात्मिकता के ज़रिए भारत का सांस्कृतिक माहौल और बेहतर हुआ। उत्तर भारत में गंगा-जमुनी तहज़ीब का आना परंपराओं के इस मेल का प्रतीक था, जहाँ अलग-अलग धर्मों के लोग एक-दूसरे की सामाजिक और सांस्कृतिक ज़िंदगी में हिस्सा लेते थे।
भक्ति और सूफ़ी आंदोलनों ने मिलकर रहने की इस भावना को बढ़ावा देने में एक बड़ा रोल निभाया। मोइनुद्दीन चिश्ती, निज़ामुद्दीन औलिया और कबीर जैसे संतों ने कट्टर सांप्रदायिक सीमाओं से परे दया, विनम्रता और भक्ति का उपदेश दिया। उनकी शिक्षाएँ आम भारतीयों के दिलों में उतर गईं क्योंकि उन्होंने बंटवारे के बजाय इंसानियत पर ज़ोर दिया। आज़ादी की लड़ाई के दौरान भी, अलग-अलग धार्मिक बैकग्राउंड के नेता कॉलोनियलिज़्म के खिलाफ़ एक साथ खड़े थे। महात्मा गांधी ने बार-बार कहा कि धर्म को नैतिक आचरण को गाइड करना चाहिए, न कि नफ़रत को बढ़ावा देना चाहिए। इसी तरह, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद जैसे नेताओं ने तर्क दिया कि गहरा मुस्लिम होना और गहरा भारतीय होना एक-दूसरे से अलग पहचान नहीं बल्कि एक-दूसरे को पूरा करने वाली पहचान हैं।
आज़ाद भारत ने संवैधानिक सुरक्षा उपायों के ज़रिए इस नज़रिए को संस्थागत बनाया। संविधान के आर्टिकल 25 से 28 धर्म की आज़ादी की गारंटी देते हैं, जिससे हर नागरिक आज़ादी से अपने धर्म को मान सकता है और उसका पालन कर सकता है। साथ ही, आर्टिकल 14, 15 और 16 कानून के सामने बराबरी पक्का करते हैं और धर्म, जाति, लिंग या जन्म की जगह के आधार पर भेदभाव पर रोक लगाते हैं। इस तरह संविधान एक बैलेंस बनाता है जहाँ धार्मिक पहचान का सम्मान किया जाता है, लेकिन नागरिकता ही आम तौर पर जोड़ने वाली ताकत बनी रहती है। खास बात यह है कि आर्टिकल 32 के तहत संवैधानिक उपाय नागरिकों को यह अधिकार देते हैं कि जब भी बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो वे सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं, जिससे संवैधानिक सुरक्षा सिर्फ़ सिंबॉलिक नहीं बल्कि लागू करने लायक बन जाती है।
फिर भी, सिर्फ़ संवैधानिक गारंटी काफ़ी नहीं हैं जब तक कि समाज मिलकर भरोसा और हमदर्दी न बढ़ाए। आज का भारत डिजिटल गलत जानकारी, चुनिंदा ऐतिहासिक मतलब और राजनीतिक ध्रुवीकरण से बढ़ते सांप्रदायिक शक की चुनौती का सामना कर रहा है। धार्मिक पहचान का इस्तेमाल कभी-कभी चुनावी फ़ायदे के लिए किया जाता है, जिससे नागरिकों को देश की तरक्की में बराबर का हिस्सा मानने के बजाय सांप्रदायिक कैटेगरी में डाल दिया जाता है। ऐसी आदतें उस सामाजिक ताने-बाने के लिए खतरा हैं जिसने ऐतिहासिक रूप से भारत को अलग-थलग करने वाले समाजों से अलग रखा है।
साथ ही, ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं जो भारत के मिले-जुले कल्चर को पक्का करते रहते हैं। पूरे देश में, हिंदू ईद मनाते हैं, मुसलमान गुरुपर्व पर लंगर बांटते हैं, सिख मुश्किल समय में मंदिरों और मस्जिदों की रक्षा करते हैं, और ईसाई धर्म की परवाह किए बिना लोगों की सेवा करने वाले एजुकेशनल और हेल्थकेयर इंस्टीट्यूशन चलाते हैं। प्राकृतिक आपदाओं और देश की इमरजेंसी के दौरान, आम भारतीय बार-बार दिखाते हैं कि दया धर्म की सीमाओं से परे होती है। भारतीय सेना भी विविधता में एकता का एक मज़बूत उदाहरण बनी हुई है, जो  यहाँ विभिन्न धर्मों के सैनिक एक ही तिरंगे की रक्षा समान निष्ठा के साथ करते हैं।
विशेष रूप से भारतीय मुसलमानों के लिए, राष्ट्रीय पहचान से जुड़ी बहस अक्सर कड़ी जाँच-पड़ताल के घेरे में आ जाती है। हालाँकि, भारतीय इतिहास स्वयं ही विभाजनकारी बातों का करारा जवाब देता है। मौलाना आज़ाद और अशफ़ाक उल्ला खान जैसे स्वतंत्रता सेनानियों से लेकर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे वैज्ञानिकों तक, भारतीय मुसलमानों ने राष्ट्र-निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है। शिक्षा, रक्षा, विज्ञान, कला और लोक सेवा के क्षेत्रों में उनकी भागीदारी राष्ट्र के साथ उनके अटूट बंधन को दर्शाती है। भारत में देशभक्ति का अर्थ कभी भी अपनी धार्मिक पहचान को त्यागना नहीं रहा है; बल्कि, इसका अर्थ है संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक सौहार्द और सामूहिक प्रगति के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखना।
भारत की असली ताकत उसकी इस क्षमता में निहित है कि वह एक ही समय में अनेक पहचानों को अपने भीतर समेटे रहता है। कोई भी व्यक्ति एक ही समय में गर्व से धार्मिक और गर्व से भारतीय हो सकता है। संविधान नागरिकों से यह अपेक्षा नहीं करता कि वे अपनी आस्थाओं को मिटा दें; बल्कि वह उनसे न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों को बनाए रखने का आह्वान करता है। ये मूल्य किसी भी आस्था के विरोधी नहीं हैं। वास्तव में, अधिकांश धार्मिक परंपराएँ करुणा, ईमानदारी और सह-अस्तित्व जैसे सिद्धांतों का ही समर्थन करती हैं—ऐसे सिद्धांत जो लोकतंत्र को कमज़ोर करने के बजाय उसे और अधिक सुदृढ़ बनाते हैं।
भारत का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि वह अपनी धार्मिक पहचान और राष्ट्रीय पहचान के बीच के उस नाज़ुक, किंतु अत्यंत शक्तिशाली संतुलन को किस प्रकार बनाए रखता है। देश की गौरवशाली सभ्यता का इतिहास इस बात का साक्षी है कि विविधता कभी भी उसकी कमज़ोरी नहीं रही; बल्कि यह सदैव उसकी सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी है। ऐसे बहुलवादी समाज पर एकरूपता थोपने के किसी भी प्रयास से भारत की मूल भावना को ही आघात पहुँचने का खतरा उत्पन्न हो जाता है। राष्ट्रीय एकता की नींव भय अथवा संदेह पर नहीं रखी जा सकती; बल्कि इसका उद्भव तो आपसी सम्मान, संवैधानिक आस्था और सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना से ही संभव है।
भारतीय संविधान इस सह-अस्तित्व के लिए एक वैधानिक ढाँचा प्रदान करता है, किंतु इसे निरंतर बनाए रखने के लिए नागरिकों में नैतिक साहस, नेताओं में बौद्धिक ईमानदारी और विभिन्न संस्थाओं में संवेदनशीलता का होना नितांत आवश्यक है। विद्यालयों, विभिन्न मीडिया मंचों, धार्मिक गुरुओं और नागरिक समाज से जुड़े संगठनों को चाहिए कि वे विभाजनकारी प्रवृत्तियों को बढ़ावा देने के बजाय आपसी संवाद को प्रोत्साहित करने के लिए एकजुट होकर कार्य करें। आज की सबसे बड़ी आवश्यकता यह नहीं है कि हम 'प्रतिस्पर्धी राष्ट्रवाद' की होड़ में शामिल हों, बल्कि आवश्यकता इस बात की है कि हम संवैधानिक मूल्यों में गहरी आस्था रखने वाले 'करुणापूर्ण नागरिक' बनें।
भारत की वह 'समन्वयवादी संस्कृति'—जो सदियों के सह-अस्तित्व से आकार पाती रही है—आज भी उसकी सबसे मूल्यवान धरोहर बनी हुई है। आज के इस दौर में, जब संपूर्ण विश्व में ध्रुवीकरण की प्रवृत्तियाँ हावी होती जा रही हैं, भारत एक ऐसे आदर्श के रूप में अपनी पहचान बनाए रख सकता है, जहाँ आस्था और राष्ट्रभक्ति एक-दूसरे से टकराते नहीं, बल्कि पूर्ण सौहार्द के साथ सह-अस्तित्व में रहते हैं। सच्चे अर्थों में 'भारतीय' होने का तात्पर्य अपनी धार्मिक पहचान को नकारना नहीं है, बल्कि उस विराट विचार को सहर्ष अंगीकार करना है कि गहन विविधता के मध्य भी एकता को स्थापित करना पूर्णतः संभव है।

फ़रहत अली खान 
एम ए गोल्ड मेडलिस्ट

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर के तत्व अवधान में जनपद न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर सुशील

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर के तत्व अवधान में जनपद न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर सुशील कुमार शशि के नेतृत्व में आज एक विधिक क साक्षरता जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया गया ‌ इस संगोष्ठी में सचिव पूर्ण काली के सुशील कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह नायब तहसीलदार ‌ शीतला प्रसाद सिंह लालचंद गौतम एडवोकेट अध्यक्ष तहसील  अधिवक्ता समिति राजीव कुमार सिंह एडवोकेट महामंत्री‌ प्राधिकरण के सुनील कुमार मौर्य भारत यादव एडवोकेट ‌ कुंवर आजाद सिंह ‌ चंद्रशेखर आजाद एवं बड़ी संख्या में विद्वान अधिवक्तागण वादकारीगण और संभ्रांत बुजुर्ग ‌ महिलाएं पैरालीगल वॉलिंटियर्सएवं अन्य लोग उपस्थित रहे।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए सुशील कुमार सिंह सिविल जज सीनियर डिवीजन सचिव द्वारा वृद्धों के महत्व और उनको प्राप्त अधिकारों का विस्तार से विवेचन करते हुए बताया कि उन्हें विधान और संविधान में हर जगह वरीयता दी गई है अटल और इंदिरा पेंशन योजना रेल यात्रा में उनको दी जाने वाली छूट और सुविधाएं भरण पोषण के अधिकार दवा चिकित्सा में उन्हें प्राप्त अधिकार के बारे में बताते हुए बच्ची देवी बनाम स्टेट में प्रतिपादित सिद्धांतों का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि यदि पुलिस द्वारा विवेचना के दौरान गिरफ्तार नहीं किया जाता है तो चार्ज शीट प्रस्तुत होने के बाद 7 वर्ष तक के मामलों में द्वारा जमानत दे दी जाएगी‌ और अभियुक्त को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा ‌ यदि अभियुक्त जेल में बंद है तो उसे एक निश्चित समय सीमा दी जाएगी जिससे वह अपने जमानतदार प्रस्तुत कर सकें इसके लिए अभियुक्त की आर्थिक सामाजिक रिपोर्ट आना आवश्यक है उन्होंने समाज में वृद्ध लोगों की गिरती स्थिति के बारे में भी सचेत किया। उन्होंने बताया कि द्वारा दुष्कर्म और तेजाब पीड़ित महिलाओं और अन्य मामलों में सहायता राशि प्रदान करने में मदद की जाती है‌‌‌ उन्होंने बताया कि पिछली लोक अदालत में 57000 मुकदमेनिस्तारित किए गए ।

इस विधिक साक्षरता जागरूकता ‌ सेमिनार का संचालन करते हुए डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह ने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जहां के बच्चे सुबह उठकर माता-पिता और गुरु तथा वृद्धों का पैर छूते थे आज स्थितियां कितनी भयानक हो चुकी है जिसके लिए जागरूकता हर स्तर पर फैलाया जाने की आवश्यकता है ‌ उन्होंने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और तहसील विधिक सेवा प्राधिकरण का विस्तार से चर्चा करते हुए बताया यदि अनुसूचित जाति जनजाति पिछड़ी जाति के लोग हैं जेल में बंद लोग हैं महिलाएं हैं या कोई भी ऐसा व्यक्ति जो प्राकृतिक आपदा का शिकार है उसे प्राधिकरण के द्वारा बिल्कुल मुफ्त में सिविल और क्रिमिनल मामलों में हर प्रकार की सहायता और अधिवक्ता उपलब्ध कराए जाएंगे राष्ट्रीय लोक अदालत और सुलह समझौता केंद्र के द्वारा अधिक से अधिक मामले निस्तारित किए जाने की प्रक्रिया का वर्णन किया और कहा कि प्राधिकरण में जनपद के किसी भी प्रकार का शिकायती पत्र संबंधित अधिकारी के विरुद्ध प्रस्तुत किया जा सकता है उन्होंने पैरालीगल वॉलिंटियर्स एवं फ्रंट ऑफिस के बारे में भी विस्तार से बताते  हुए कहा कि वृद्ध स्त्री पुरुष समाज की अनमोल धरोहर हैं कल सभी लोगों को वृद्ध होना है जैसा करेंगे वैसा उनके आगे भी आएगा।

इसी क्रम में एडवोकेट भारत यादव अध्यक्ष लालचंद गौतम एडवोकेट महामंत्री राजीव कुमार सिंह एवं नायब तहसीलदार शीतला प्रसाद सिंह के द्वारा अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा गया कि वृद्ध लोगों की समझ में सेवा करने चाहिए और उनके विधिक अधिकारों के बारे में बताते हुए उन्हें हर प्रकार से सहयोग देना चाहिए और बच्ची देवी बना स्टेट में प्रतिपादित सिद्धांतों का प्रचार प्रसार करते हुए उसका अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिये।

Saturday, 13 June 2026

परीक्षाओं की तानाशाही और निरंकुश्ता परीक्षा देने वाले छात्र-छात्राओं के लिए अभिशाप बनी -डॉ दिलीप कुमार सिंह

‌‌ परीक्षाओं की तानाशाही और निरंकुश्ता परीक्षा देने वाले छात्र-छात्राओं के लिए अभिशाप बनी -डॉ दिलीप कुमार सिंह 

अद्भुत सरकार है और अद्भुत है उसका परीक्षा तंत्र हर बार हर परीक्षा में या तो प्रश्न पत्र आउट हो जाते हैं या लीक हो जाते हैं या कुछ न कुछ तकनीकी कमी के कारण लाखों लाख छात्रों की परीक्षा एक झटके में रद्द हो जाती है और हर एक छात्रा का हजारों रुपए पानी में डूब जाता है ।

इसके अलावा भारत की परीक्षाएं भी धन्य है जो सीधे-सीधे सनातन धर्म पर प्रहार हैं यह देखकर बहुत ही अपमानित महसूस किया जाता है कि इस परीक्षा में सनातनी महिलाओं के हार मंगलसूत्र नाक और कान में पहनने वाले आभूषण यहां तक की पैरों में पहनने वाली पायल और मीना तक निकाल लिया जाता है क्या सचमुच पागल हो गया है हमारा परीक्षा तंत्र इन चीजों से परीक्षा में भला क्या खतरा हो सकता है समझ के बाहर है ।‌ तुम्हें जब नाका भेजो बुर्का की बात आती है तो सारा तंत्र प्रशासन और न्यायपालिका भी चुप हो जाती है।


जहां तक घड़ी और किसी डिजिटल उपकरण को ले जाना है वहां तक तो कुछ बात समझ में भी आती है लेकिन ऐसा सिस्टम क्यों नहीं विकसित करते हैं की छात्राओं के प्रवेश करते समय ही ऐसी मशीन लगा दीजिए जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए लेकिन ऐसा कुछ नहीं होने वाला है ‌ हम लोग तो इतनी परीक्षा दे डाले नल का नामोनिशान नहीं कभी कुछ भी ऐसा नहीं देखने को मिला जैसा आजकल नंगा नाच हो रहा है ‌ कहावत है कि चोर को सब चोर और बेईमान को सब बेईमान‌ दुराचारी को सब दुराचारी ही दिखते हैं।

एक खेल और खेलते हैं हमारे परीक्षा से जुड़े हुए तथाकथित युग पुरुष लोग‌ परीक्षाओं को इतना दूर-दूर कर देते हैं की बस ट्रेन सड़क सब कुछ जाम हो जाता है और अधिकांश परीक्षार्थियों के लिए अपने परीक्षा केंद्र पर पहुंचना बहुत टेढ़ी खीर हो जाती है जिस देश में छल कपट विश्वासघात बेईमानी चोरी घूसखोरी भ्रष्टाचार रग रग में भरा हो वहां पर कुछ भी सफल होने वाला नहीं है हर साल लगभग सभी परीक्षाओं में परीक्षा रद्द होती है बेईमानी होती है भ्रष्टाचार होता है सब कुछ जानकार भी लोग चुपचाप रहते हैं और सफल हो जाने वाले तीस मार खान तुर्रम खान बन जाते हैं ।

यदि सचमुच लोगों में नैतिकता और सदाचार होती तो हर एक विद्यालय में एक परीक्षा आयोजित होती जिसमें प्रारंभिक परीक्षा ले ली जाती यदि विद्यालय का तंत्र ईमानदार है तो एक निश्चित अंक पाने वाले छात्रों को ही मुख्य परीक्षा में स्थानिक स्कूल कॉलेज से परीक्षा लेकर भेजा जा सकता है इससे 90% भीड़ अपने आप समाप्त हो जाएगी और सही और योग्य छात्र छात्राएं आराम से मुख्य परीक्षा देने जाएंगे लेकिन ऐसी कुछ भी चीज करना इन लोगों के बस की बाहर की बात है क्योंकि इसमें भी 95% लोग वही होते हैं जो स्वयं ही छल कपट चोरी बेईमानी पैसों के बल पर नियुक्त हो जाते हैं ।

सुना तो यहां तक गया है कि जब राजनेताओं बड़े-बड़े अधिकारियों माफिया धन कुबेर और दलालों के बच्चे नियत अनुपात में चुने नहीं जाते तो जानबूझकर परीक्षा में प्रश्न पत्र आउट कर दिया जाता है या लीक हो जाता है या परीक्षा होने के बाद भी इन्हीं लोगों में से कोई न्यायालय में चला जाता है और सब कुछ तभी ठीक होता है जब उनके छात्रों का बच्चों का समायोजन हो जाता है 

‌ परीक्षा दे रहे छात्र-छात्राओं को कितना परेशानी कष्ट होता है यह वही जानते हैं या उनके साथ जाने वाले अभिभावक लोग जानते हैं मोटी रकम लेने के बाद भी अधिकांश विद्यालय में परीक्षा सेंटरों पर पानी तक की व्यवस्था नहीं रहती है अनेक स्थानों में तो बिना पंखे की ही परीक्षा आयोजित होती है इसके अलावा परीक्षा के दिन परीक्षा टेंपो वाहन चालक यहां तक की पानी बेचने वाले और जलपान नाश्ता वाले भी खुले आम लूट करते हैं₹10 की चीज ₹20 से ₹50 तक और ₹10 के भाड़े की जगह ₹100 वसूले जाते हैं और उनके साथ गए अभिभावक लोगों को बैठने की भी कोई जगह नहीं दी जाती है बरसात धूप या फिर ठंड में कांपते हुए समय बिताना उनकी मजबूरी है परीक्षा समाप्त होने के बाद इतना जाम और हाहाकार मचता है कि लोगों को वापस घर पहुंचना कठिन हो जाता है इसमें सबसे ज्यादा परेशानी स्त्रियों और लड़कियों को होती है और उनके घर सुरक्षित पहुंचना भी एक चमत्कार होता है।

ईश्वर ही जाने क्या-क्या खेल हो रहा है इस देश में और इस देश को बना पाना बचा पाना संभव नहीं रह गया है पैसा पे हुए चल दलाल और चमचे गुणगान करते हैं असली सच पुलिस छिपा देती है सब कुछ लिप पोर्ट कर साफ कर दिया जाता है और पता चलता है कि कल पान बीड़ी सुरती खाने वाले मदिरा पीने वाले लोग बड़े-बड़े पदों पर चुन लिए जाते हैं और उनके साथी सहयोगी यहां तक की शिक्षक भी मुंह फाड़ कर देखते रह जाते हैं विश्वास ना हो तो देख लीजिए देश के 90% से अधिक लोग ऊंचे पदों पर द्वितीय या तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण है और इसी कारण से तुलसीदास जी ने मंत्र के मुंह से कहां डाला की कोई भी राजा बने हमको कोई हानि नहीं है इसीलिए भारत की जनता एन देशभक्त हो पाती है और नाराज भक्त हो पाती है और यह लंबा खेल नीचे से ऊपर तक चलता रहता है आठवां वेतन प्राप्त लोगों को 95% लोगों की दुख पीड़ा कष्ट महंगाई बेरोजगारी भ्रष्टाचार से क्या लेना देना है वह भी राजनेताओं की तरह सरपट को गाना और घास को गेहूं बोलते रहेंगे

धार्मिक पहचान और देश के जुड़ाव में बैलेंस* :*भारत का आगे का रास्ता*

Friday, 12 June 2026

डॉ. मन्नान ज़ैदी के नेतृत्व में मानव सेवा का महाअभियान, समाजसेवियों का हुआ भव्य सम्मान!

डॉ. मन्नान ज़ैदी के नेतृत्व में मानव सेवा का महाअभियान, समाजसेवियों का हुआ भव्य सम्मान!
     ( सब हेडलाइन)
वरिष्ठ पत्रकार डॉ. उस्मान ज़ैदी के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ गरिमामयी समारोह, शेखचिल्ली की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
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स्योहारा। मानव सेवा, सामाजिक जागरूकता और जनकल्याण के उद्देश्य को लेकर कार्यरत नयी लहर फाउंडेशन द्वारा एक भव्य सम्मान समारोह एवं सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. मन्नान ज़ैदी ने किया, जबकि कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के रूप में प्रसिद्ध कॉमेडी कलाकार शेखचिल्ली अपनी टीम के साथ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में समाज सेवा, रक्तदान, स्वास्थ्य सहायता तथा जरूरतमंद लोगों की मदद के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले समाजसेवियों को नयी लहर फाउंडेशन की ओर से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सभी सम्मानित अतिथियों को शील्ड भेंट कर उनके कार्यों की सराहना की गई।प्रसिद्ध हास्य कलाकार शेखचिल्ली ने अपनी मनोरंजक प्रस्तुतियों से उपस्थित जनसमूह को खूब हँसाया। उनकी प्रस्तुतियों के दौरान पूरा सभागार तालियों और ठहाकों से गूंज उठा। शेखचिल्ली की टीम से रुखसाना, जाहिद, कैफ, अजय, बंटी एवं रिफाकत विशेष रूप से मौजूद रहे।
कार्यक्रम में Arshee,Blood ,Help ,Seva ,की ओर से हाफ़िज़ अथर हुसैन, महबूब शेख, नदीम अख्तर, शमीम अहमद सहित अनेक समाजसेवियों ने सहभागिता कर समाजहित के कार्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
इस अवसर पर नयी लहर फाउंडेशन की टीम के सक्रिय सदस्य जुबैर ज़ैदी, डॉ. रईस अहमद, फैज़ान, नूर चौधरी, फरमान चौधरी, वकार चौधरी, मोहम्मद ज़ैद, रचना देवी एवं दीक्षित सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे और कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।समारोह का आयोजन वरिष्ठ पत्रकार डॉ. उस्मान ज़ैदी के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। अपने संबोधन में डॉ. मन्नान ज़ैदी ने कहा कि नयी लहर फाउंडेशन लगातार स्वास्थ्य, शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य कर रही है। संस्था जरूरतमंद एवं असहाय लोगों को निःशुल्क चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ गंभीर बीमारियों के उपचार एवं ऑपरेशन में भी सहयोग प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि समाज सेवा केवल एक कार्य नहीं, बल्कि मानवता के प्रति हमारी जिम्मेदारी है।डॉ. मन्नान ज़ैदी ने समाजहित में कार्य करने वाले सभी लोगों का सम्मान करते हुए कहा कि ऐसे समर्पित व्यक्तित्व समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।उन्होंने भविष्य में भी जनकल्याण एवं मानव सेवा से जुड़े कार्यक्रमों को निरंतर जारी रखने का संकल्प दोहराया।कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों, समाजसेवियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया गया। नयी लहर फाउंडेशन ने समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुँचाने के अपने संकल्प को दोहराते हुए मानव सेवा के इस मिशन को और अधिक व्यापक बनाने की घोषणा की। वरिष्ठ पत्रकार डॉ. उस्मान ज़ैदी जब समाज में संवेदनशील लोग आगे बढ़कर जरूरतमंदों का हाथ थामते हैं, तभी मानवता का वास्तविक स्वरूप दिखाई देता है। नयी लहर फाउंडेशन द्वारा किया गया यह आयोजन केवल सम्मान समारोह नहीं, बल्कि समाज सेवा और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का एक प्रेरणादायक अभियान है। ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नई ऊर्जा पैदा करते हैं।"डॉ. मन्नान ज़ैदी (संस्थापक, नयी लहर फाउंडेशन)हमारा उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज में सेवा, सहयोग और भाईचारे की भावना को मजबूत करना है। नयी लहर फाउंडेशन शिक्षा, स्वास्थ्य और मानव सेवा के क्षेत्र में निरंतर कार्य करती रहेगी तथा जरूरतमंद लोगों तक हर संभव मदद पहुँचाने का प्रयास जारी रखेगी।"
       ---बॉक्स में ---
"सम्मान, सेवा और संवेदनशीलता का संगम बना नयी लहर फाउंडेशन का भव्य समारोह"
"डॉ. मन्नान ज़ैदी के नेतृत्व में मानवता को मिला नया आयाम"
"शेखचिल्ली की हास्य प्रस्तुति और समाजसेवियों के सम्मान ने जीता सभी का दिल"
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