Sunday, 31 May 2026

मशीयत रोशनी नविता सिमरन का स्पोर्ट्स कॉलेज के फाइनल ट्रायल के लिए चयन*

*मशीयत  रोशनी  नविता  सिमरन का स्पोर्ट्स कॉलेज के फाइनल ट्रायल के लिए चयन* 
क्रीड़ा अधिकारी संतोष कुमार 
मशीयत फातिमा 
रोशनी 
सिमरन 
नविता 
कोच फरहत अली खान

स्पोर्ट्स स्टेडियम रामपुर यूपी की चौदह आयु वर्ग हॉकी बालिकाओं का स्पोर्ट्स कॉलेज का फाइनल ट्रायल के लिए चयन हुआ। फाइनल ट्रायल तीन चार जून को स्पोर्ट्स कॉलेज गोरखपुर में होगा।
मुरादाबाद मंडल स्तर पर हुए चयन में फिजिकल और स्किल में किया टॉप 
चारों बालिकाएँ आइडेंटिटी एजुकेशनल एकेडमी बग़ी की छात्राएं हैं।
क्रीड़ा अधिकारी संतोष कुमार की देखरेख में हॉकी प्रशिक्षक फ़रहत अली खान से प्रशिक्षण ले रही है।
बालिकाएँ बहुत निर्धन परिवार से हैं।
रोशनी राजपूत तेरह वर्ष के पिता किसान हैं जबकी नविता राजपूत तेरह वर्ष के पिता आरा मशीन पर काम करते हैं सिमरन राजपूत दस वर्ष के पिता मजदूरी और मशीयत फातिमा ग्यारह वर्ष के पिता अंशकालिक मानदेय हॉकी प्रशिक्षक हैं।
सभी बालिकाओं का मिशन देश के लिए खेलना है और ओलिंपिक और विश्व स्तर पर गोल्ड मेडल लाना है।
फरहत अली खान ने बताया की उनके पास चालीस खिलाड़ी अभ्यास करते हैं जिनमें चौदह वर्ष आयु वर्ग की अठाईस बालिकाएँ है जो रोज़ दो घंटे सुबह और दो घंटे शाम प्रेक्टिस करती हैं।
फ़रहत अली खान ने कहा यह बालिकाएं एक दिन देश के लिए ज़रूर खेलेंगी ये इनका हाकी के प्रती अभ्यास शौक़ और जुनून बताता है ।
 यह मेरा विश्वास ही नहीं भगवान पर भरोसा भी है।मै अभ्यास के साथ उपरवाले ऊपर वाले से प्रार्थना है।
क्रीड़ा अधिकारी भी इनके खेल और अभ्यास से पूरी तरह संतुष्ट हैं और पूरी सुविधाएं देते हैं।

Friday, 29 May 2026

जब आतंक इस्लाम का नाम ओढ़ लेता है: शास्त्रीय विद्वत्ता वास्तव में क्या कहती है?*

*जब आतंक इस्लाम का नाम ओढ़ लेता है: शास्त्रीय विद्वत्ता वास्तव में क्या कहती है?*

माली में जिहादी समूहों द्वारा किए गए हमलों ने एक बार फिर एक असहज सवाल को सतह पर ला दिया है। क्या इस्लाम के नाम पर किए गए हिंसा के ये कृत्य, किसी भी तरह से उस शिक्षा के अनुरूप हैं जो इस्लाम वास्तव में देता है? इसका उत्तर—जो एक हज़ार से अधिक वर्षों के इस्लामी न्यायशास्त्र और पैगंबर की परंपरा से लिया गया है—स्पष्ट रूप से 'नहीं' है। JNIM, अल-कायदा और ISIS जैसे समूह मुसलमानों को यह विश्वास दिलाना चाहते हैं कि वे एक धर्मयुद्ध लड़ रहे हैं। लेकिन जब उनके कार्यों को कुरान, सुन्नत और महान शास्त्रीय विद्वानों के लेखों की कसौटी पर कसा जाता है, तो जो सामने आता है वह 'जिहाद' नहीं है। यह जिहाद का एक घिनौना विकृत रूप है।
इस्लामी युद्ध में नागरिकों—जिनमें महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और निहत्थे लोग शामिल हैं—की हत्या करना स्पष्ट रूप से वर्जित है। यह कोई आधुनिक पुनर्व्याख्या नहीं है। यह एक स्थापित शास्त्रीय कानून है। पैगंबर ने बार-बार अपने कमांडरों को निर्देश दिया कि वे उन लोगों को न मारें जिनके हाथों में हथियार न हों। अल-नवावी और इब्न कय्यिम जैसे विद्वानों ने इन नियमों को विस्तार से लिपिबद्ध किया है। शास्त्रीय इस्लामी कानून घरों को नष्ट करने, फसलों और संपत्ति को जलाने, और आम लोगों के बीच जान-बूझकर डर फैलाने पर भी रोक लगाता है। स्वयं कुरान भी संयम बरतने का आदेश देता है। सूरह अल-बकरा (2:190) विश्वासियों को निर्देश देता है कि वे युद्ध के दौरान भी सीमाओं का उल्लंघन न करें। सूरह अल-मुमताहना (60:8) आदेश देता है कि शत्रुओं के साथ भी निष्पक्षता से व्यवहार किया जाए, बशर्ते उन्होंने हथियार न उठाए हों। ये कोई गौण आयतें नहीं हैं। ये संघर्ष से संबंधित इस्लामी कानून की नैतिक रीढ़ हैं।
शास्त्रीय विद्वानों ने 'खवारिज' नामक एक खतरनाक संप्रदाय की पहचान की थी; ये ऐसे समूह थे जिन्होंने साथी मुसलमानों को 'धर्मत्यागी' घोषित करने और उसी आधार पर उनकी हत्या करने का जिम्मा खुद उठा लिया था। पैगंबर ने उनके आगमन के प्रति आगाह किया था। उन्होंने उन्हें ऐसे लोगों के रूप में वर्णित किया था जो कुरान का पाठ तो करेंगे, लेकिन जिनका ईमान उनके गले से नीचे नहीं उतरेगा। JNIM, ISIS और उनके सहयोगी ठीक इसी कार्यप्रणाली का पालन करते हैं। 'तकफीर' के सिद्धांत के माध्यम से—जिसमें वे आम मुसलमानों, विद्वानों, सैनिकों और नागरिकों को 'काफ़िर' (अविश्वासी) घोषित कर देते हैं और उन्हें मृत्यु का पात्र मानते हैं—वे ठीक उसी पैटर्न को दोहराते हैं जिसे इस्लामी विद्वत्ता ने चौदह शताब्दियों से लगातार निंदित किया है। उनका नाम या लेबल भले ही अलग हो, लेकिन उनका भटकाव (विचलन) बिल्कुल एक जैसा है।
शास्त्रीय इस्लामी न्यायशास्त्र में, सशस्त्र जिहाद कभी भी कोई 'स्वतंत्र' (freelance) या मनमानी करने वाला उपक्रम नहीं रहा है। यह विचार कि कोई भी व्यक्ति या छोटा-सा गुट युद्ध की घोषणा कर सकता है, सोशल मीडिया के ज़रिए लड़ाकों की भर्ती कर सकता है, और धर्म के नाम पर हत्याएँ शुरू कर सकता है—इस्लामी परंपरा में इसका कोई आधार नहीं है। इस्लाम शांति समझौतों को भी असाधारण महत्व देता है। संधियाँ, युद्धविराम और कूटनीतिक व्यवस्थाएँ इस्लामी चिंतन में कमज़ोरी के संकेत नहीं हैं। वे दायित्व हैं। पैगंबर ने स्वयं हुदैबिया की संधि में कठिन शर्तें स्वीकार की थीं, क्योंकि वे समझते थे कि जीवन और समुदाय की रक्षा युद्ध के मैदान की शान से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
इन गुटों को खत्म करने के लिए यह समझना ज़रूरी है कि वे भर्ती कैसे करते हैं। वे धार्मिक तर्कों से सफल नहीं होते। बल्कि, वे गरीबी, राजनीतिक हताशा, पहचान का संकट, नैतिक तनाव, अशिक्षा आदि जैसी वास्तविक पीड़ाओं का फायदा उठाकर सफल होते हैं। वे हिंसा को एक धार्मिक कर्तव्य के रूप में पेश करते हैं, जबकि बदले में किसी उद्देश्य या इनाम का वादा करते हैं। उन युवा पुरुषों से, जिन्होंने कभी कोई धार्मिक ग्रंथ नहीं पढ़ा है, कहा जाता है कि उनकी शिकायतें धार्मिक प्रकृति की हैं और हिंसा ही उनका एकमात्र समाधान है। मुस्लिम समुदायों, विद्वानों और नागरिक समाज को इस हेरफेर का पर्दाफाश करना चाहिए।
धार्मिक विद्वान, शिक्षक और सामुदायिक नेता, जिनकी जड़ें प्रामाणिक ज्ञान में गहरी जमी हैं, इस क्षेत्र में सबसे विश्वसनीय आवाज़ें हैं। उनका अधिकार उस भरोसे से आता है जो समुदाय उन लोगों पर करते हैं, जिन्होंने वास्तव में इस परंपरा का अध्ययन किया है। इस्लाम के नाम पर, चाहे मुसलमानों के खिलाफ हो या गैर-मुसलमानों के खिलाफ, की गई हिंसा शहादत नहीं है। यह जिहाद नहीं है। उसी परंपरा के अनुसार, जिसका प्रतिनिधित्व करने का दावा ये गुट करते हैं, यह एक गंभीर और दंडनीय भटकाव है। विद्वान यह जानते थे। ग्रंथ स्पष्ट हैं। अब हमारा काम यह सुनिश्चित करना है कि यह स्पष्टता हर उस कोने तक पहुँचे, जहाँ संदेह और निराशा को विनाश में बदला जा रहा है।
फ़रहत अली खान 
एम ए गोल्ड मेडलिस्ट

अंतरराष्ट्रीय एवरेस्ट दिवस******************

अंतरराष्ट्रीय एवरेस्ट दिवस
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माउंट एवरेस्ट दिवस हर साल 29 मई को मनाया जाता है। यह तारीख पर्वतारोहियों सर एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे शेरपा को सम्मानित करने के लिए चुनी गई थी, जिन्होंने 1953 में इसी दिन पर्वत पर चढ़ाई की थी। माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करना एक ऐसी उपलब्धि है जिसका सपना बहुत से लोग देखते हैं, लेकिन कुछ ही लोग इसे हासिल कर पाते हैं। दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत पर चढ़ाई करना जानलेवा जोखिमों से भरा होता है। इसके लिए बेहतरीन शारीरिक क्षमता की आवश्यकता होती है। जो पर्वतारोही इस शिखर तक पहुंचते हैं, वे आमतौर पर सबसे ऊंचे पर्वत पर चढ़ाई करने से पहले कई वर्षों तक प्रशिक्षण लेते हैं। एक कुशल पर्वतारोही को शिखर तक पहुंचने में लगभग दो महीने लग सकते हैं।

माउंट एवरेस्ट दिवस का इतिहास
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माउंट एवरेस्ट समुद्र तल से सबसे ऊँचा पर्वत है। यह हिमालय की महालंगुर हिमालय उप-श्रृंखला में स्थित है। इसकी ऊँचाई लगभग 29,000 फीट है। कई पर्वतारोही, जिनमें अत्यधिक अनुभवी पर्वतारोही भी शामिल हैं, इस पर्वत की ओर आकर्षित होते हैं। पर्वत पर चढ़ने के दो मार्ग हैं। पहला मानक मार्ग है जो नेपाल के दक्षिण-पूर्व से शिखर तक पहुँचता है। दूसरा मार्ग तिब्बत के उत्तर से शिखर तक पहुँचता है। पर्वत पर चढ़ने के लिए उत्कृष्ट तकनीकी कौशल की आवश्यकता होती है। इसमें ऊँचाई पर होने वाली बीमारी, खराब मौसम, तेज़ हवाएँ और हिमस्खलन तथा खुंबू हिमपात जैसे गंभीर जोखिम भी शामिल हैं। कुछ पर्वतारोहियों ने चढ़ाई का प्रयास किया है लेकिन वे वापस नहीं लौट पाए।

माउंट एवरेस्ट दिवस उन साहसी पर्वतारोहियों को सम्मानित करने का अवसर है जो विशाल एवरेस्ट पर चढ़ाई का प्रयास करते हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ संकल्प से कुछ भी संभव है। यह दिवस वीरता और सहनशक्ति का प्रतीक है। माउंट एवरेस्ट जैसी खतरनाक चढ़ाई शुरू करने के लिए बहुत साहस की आवश्यकता होती है। विश्वभर के लोग इससे प्रेरित होकर और अधिक जोखिम उठाने और अपने सपनों को साकार करने के लिए आगे बढ़ सकते हैं। यह दिवस लोगों को दिखाता है कि वे अपने जीवन में आने वाली किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं। यह दिवस इस प्राकृतिक चमत्कार के बारे में जागरूकता बढ़ाता है। इससे अंततः पर्वत के संरक्षण में सहायता मिलती है। पर्यावरण के प्राकृतिक खजानों का संरक्षण हमारे समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण है।

एवरेस्ट का महत्व
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8,848 मीटर (29,029 फीट) की ऊंचाई वाला माउंट एवरेस्ट पृथ्वी का सबसे ऊंचा पर्वत है। पृथ्वी के सबसे ऊंचे पर्वत के रूप में, यह मानव कल्पना को मोहित करता है, मानव साहस को चुनौती देता है और दृढ़ संकल्प की परीक्षा लेता है। एवरेस्ट अन्वेषण की खोज, व्यक्तिगत सीमाओं की खोज और साहसिक भावना का प्रतीक है जो मानवता को असाधारण उपलब्धियां हासिल करने के लिए प्रेरित करती है।

एवरेस्ट सबसे ऊँचा पर्वत है
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एवरेस्ट को सर्वोच्च पर्वत के रूप में मान्यता 19वीं शताब्दी के मध्य में मिली। 1856 में, भारत के महान त्रिकोणमितीय सर्वेक्षण ने इसकी ऊँचाई निर्धारित की और इसे शिखर XV नाम दिया। बाद में, 1865 में, भारत के पूर्व सर्वेयर जनरल सर जॉर्ज एवरेस्ट के सम्मान में इस शिखर का आधिकारिक नाम माउंट एवरेस्ट रखा गया। इस खोज ने भूगोल और अन्वेषण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।

राजेन्द्र गुप्ता,
ज्योतिषी और हस्तरेखाविद
मो. 9116089175
नोट- अगर आप अपना भविष्य जानना चाहते हैं तो ऊपर दिए गए मोबाइल नंबर पर कॉल करके या व्हाट्स एप पर मैसेज भेजकर पहले शर्तें जान लेवें, इसी के बाद अपनी बर्थ डिटेल और हैंडप्रिंट्स भेजें।

कार्यालय, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जौनपुर।

कार्यालय, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जौनपुर।
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              प्रेस विज्ञप्ति         दिनांकः-29.05.2025

जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जौनपुर एवं पेनेसिया वेलफेयर एजुकेशनल सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 29.05.2026 को मधुमेह एवं हृदयाघात मुक्त भारत के सम्बन्ध में जागरुकता एवं निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन दीवानी न्यायालय परिसर, जौनपुर के मीटिंग हाल में किया गया। 
उक्त शिविर में पेनेसिया वेलफेयर एजुकेशनल सोसायटी वाराणसी के डा0 आशुतोष मिश्रा व डा0 पल्लवी मिश्रा तथा पेनेसिया हास्पिटल वाराणसी के मेडिकल स्टाफ द्वारा प्रतिभाग किया गया। डा0 आशुतोष मिश्रा द्वारा मधुमेह के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी देते हुये दैनिक दिनचर्या में परिवर्तन कर किस प्रकार मधुमेह सम्बन्धित बीमारी पर रोक लगायी जा सकती है इसके सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी दी।
डा पल्लवी मिश्रा द्वारा यह बताया गया कि आजकल के खानपान की वजह से कोलेस्ट्राल को बढ़ावा मिल रहा है जिससे हृदयाघात की समस्या बढ़ती जा रही है। उक्त बीमारी अब युवाओं में भी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। उनके द्वारा हृदयाघात की रोकथाम के सम्बन्ध में आवश्यक जानकारी दी गयी।
 इस अवसर पर श्री सुशील कुमार शशि जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, श्री सुशील कुमार सिंह सिविल जज सी0डि0/सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, श्रीमती प्रीति श्रीवास्तव प्रधान न्यायाधीश, श्री अनिल कुमार यादव अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम, श्री रणजीत कुमार सिंह अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय, श्री सुरेन्द्र प्रताप यादव अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं समस्त न्यायिक अधिकारीगण डॉ दिलीप कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल सुबाषचन्द्र यादव बार अध्यक्ष, श्री रण बहादुर यादव एवं समस्त अधिवक्तागण, डिफेंस काउंसिल्स पीएलवीगण एवं  वादकारी आदि ने उपस्थित रहकर इस अवसर का लाभ उठायें।
 मेडिकल कैम्प में 100 से अधिक व्यक्तियों ने अपना स्वास्थ्य परीक्षण कराया।
 
 जिला सूचना अधिकारी, जौनपुर को इस निर्देश के साथ प्रेषित की जनपद जौनपुर के समस्त दैनिक समाचार पत्रों में निःशुल्क प्रकाशित कराकर पेपर कटिंग अधोहस्ताक्षरी कार्यालय में प्रेषित कराया जाना सुनिश्चित करें।

  ( सुशील कुमार सिंह )
     सिविल जज सी0डि0/सचिव 
     जिला विधिक सेवा प्राधिकरण,
  जौनपुर।

धरती पर क्यों बढ़ रही है ‌ प्रलयंकारी गर्मी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

: धरती पर क्यों बढ़ रही है ‌ प्रलयंकारी गर्मी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 

पृथ्वी लगातार गर्म हो रही है और ऐसा हमें प्रत्यक्ष देखने को मिल रहा है इस समय संपूर्ण भारत सहित धरती का बहुत बड़ा भाग प्रचंड गर्मी से जूझ रहा है अमेरिका और यूरोप जैसे ठंडे और सुंदर देश भी 35 से 40 डिग्री सेल्सियस की भयंकर और कल्पना के पार की गर्मी झेल रहे हैं जहां पहले हो वैशाख और जेठ अर्थात मैं और जून ही भयंकर गम महीने होते थे वही या गर्मी बढ़कर अब मार्च से अक्टूबर तक फैल गए हैं जिससे संपूर्ण बर्फ और हिम्मत सूखते जा रहे हैं और पर्वत शिखर बर्फ विहीन होते जा रहे हैं और दुनिया एक ग्रीनहाउस इफेक्ट का घर बन चुकी है और यह एक तपती भट्टी बन चुकी है तो आइए हम देखते हैं कि प्रकृति में ऐसा भयंकर परिवर्तन क्यों हो रहा है 

1-  ‌ हरियाली और पेड़ पौधों का विनाश-

धरती पर लगातार गर्मी बढ़ते चले जाने का सबसे प्रमुख कारण है हरियाली और पेड़ पौधे और वनस्पतियों का बहुत तेजी से विनाश होना मानव सभ्यता के जन्म से आज से 50 वर्ष पूर्व तक धरती का अधिकांश भाग हरा भरा पेड़ पौधों वनस्पतियों से अच्छा अधिक था और इसी हरियाली में मानव सभ्यता और जीव जंतुओं का विकास हुआ था आज से 100 वर्ष पहले धरती का 95% भाग 50 वर्ष पहले 90% भाग पेड़ पौधों हरियाली से ढका था और आज केवल 15% भाग पर बचा हुआ है। जिसके कारण इतना केवल भयंकर गर्मी बड़ी है बल्कि ऑक्सीजन की मात्रा भी बहुत तेजी से कम हुई है और वायु गुणवत्ता सूचकांक जो 100 वर्ष पहले 0 से 5 और 50 वर्ष पहले 10 से 20 तक था आज वह ऑस्टिन 100 के पार हो गया है। दुनिया के सबसे बड़े वन क्षेत्र हरियाली और वनस्पतियों वाले अमेजॉन कांगो असम और दक्षिण भारत और टाइगा तथा स्थिति जैसे प्रदेश वृक्ष और हरियाली से रहित हो गए हैं इसके कारण वर्ष भी बहुत कम हो गए हैं‌ महानगरों और नगरों की हालत तो यह है कि वहां कहीं छायादार स्थान ही नहीं बचे हैं 

2 -सीमेंट कंक्रीट और पत्थर के जंगलों का भयंकर विस्तार 

एक तरफ तो हरियाली हर क्षेत्र पेड़ पौधे वनस्पतियां भयंकर तेजी से घट रहे हैं वहीं दूसरी तरफ सीमेंट और कंक्रीट तथा पत्थर और ईद के जंगल सारी दुनिया में बढ़ते चले जा रहे हैं बड़े-बड़े महानगरों का विस्तार से करो किलोमीटर तक हो चुका है यह जंगल गर्मी को बहुत तेजी से सोखते हैं ‌ लेकिन गर्मी को बाहर निकलने नहीं देते और सूर्य की गर्मी से देखने लगते हैं जिसके कारण रात में भी भयंकर घर भी और भाप फैलती रहती है ‌ आज से 40 50 वर्ष पहले तक दिन चाहे जितने गम होते थे लेकिन रहते ठंडी और सुहावनी होती थी और रात में उत्तरी भारत के मैदाने में भी तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से अधिक नहीं होता था आज या 25 से 35 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया और इन ईद पत्थर सीमेंट कंक्रीट के जंगलों में दूर-दूर तक पेड़ पौधे हरियाली पत्तियों का नाम और निशान नहीं होता है। 

3- ‌ भीषण गति से बढ़ रहे वाहन और औद्योगीकरण 

सबसे पहले औद्योगिक क्रांति आज से 500 वर्ष पहले शुरू हुई और आज हर गली नगर कस्बे में फैल चुकी हैं यह सीधे-सीधे गर्मी धुआ और प्रदूषण बढ़ने वाले सभ्यता है जिस पेड़ पौधे हरियाली और ऑक्सीजन का भयानक विनाश होता है इस तरह आज के 50 वर्ष पहले यदि एक नगर में 10 कर 100 मोटरसाइकिल होती थी तो आज वहां पर लाखों कर और करोड़ों मोटरसाइकिल हो गई बड़े-बड़े चार पहिया से 20 पहिया वाले वाहन भयंकर गर्मी प्रदूषण और जहरीली गैस उत्पादित करते हैं और यह लगातार बढ़ता चला जा रहा है अब तो हालत इतनी खराब है कि लाल बत्तियां भीड़ के कारण जाम लग जाने पर गर्मी और जहरीले हुए से दम घुटने लगता है यह आप सभी ने अनुभव किया होगा 

4- ‌ कागज और भाषण पर कार्यवाही विज्ञापनों में ही हरियाली और वृक्षारोपण का होना 

सरकार और सरकारी तंत्र द्वारा बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं जौनपुर जैसे नगर में हर वर्ष 50 से 60 लाख पौधे लगाने का सरकारी दवा होता है जिसमें 50 पौधे भी नहीं बचते हैं संपूर्ण जौनपुर नगर क्षेत्र में एक भी पेड़ पौधा या छायादार स्थान नहीं बचा है जहां पर लोग छाया में खड़े होकर आराम कर सके इस प्रकार कई हजार करोड़ वृक्ष लगाने का नाटक होता है और इसमें समय पैसे और धन की बर्बादी होती है वृक्ष हरियाली पेड़ पौधों का नाम और निशान नहीं दिखता है यह प्रचंड गर्मी ताप और उमस बढ़ने का एक प्रमुख कारण है 

5- ‌ सड़क रेल मार्ग नहरे और बड़े-बड़े संस्थान बनने में पेड़ पौधे हरियाली का भयानक विनाश 

प्राचीन काल से आज तक राष्ट्रीय राजमार्ग या छोटे बड़े मार्ग के दोनों और घने छायादार उपयोगी पेड़ पौधे वृक्ष जड़ी बूटियां पाई जाती थी लेकिन आज बड़े-बड़े राजमार्ग रेल मार्ग हवाई अड्डे संस्थान बनाए जाते हैं तो पहले काम हरियाली पेड़ पौधे और वनस्पतियों का पूर्ण विनाश कर दिया जाता है और पेड़ पौधे लगाए नहीं जाते हैं जो पेड़ पौधे हैं उनको बुरी तरह से काट दिया जाता है सामान्य रूप से एक सड़क या राजमार्ग बनने में 2 से 5 वर्ष लगते हैं इतने समय में दोनों किनारो पर बड़े आराम से पेड़ पौधे लगाकर सड़कों के साथ उन्हें छायादार बनाया जा सकता है लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया जाता है चारों तरफ केवल पैसे और धन की लूट मची होने के कारण आज किसी भी राज मर गया रेलवे ट्रैक के किनारे छाया का नाम और निशान नहीं है और यह प्रचंड गर्मी से दहकती हुई भट्टी बन जाती है। यहां तक कि जब पुरानी सड़क को चौड़ा किया जाता है तो भी बुद्धि का प्रयोग नहीं किया जाता यदि सरकार और उसका तंत्र चाहे तो इस सड़क के किनारे बिना छेड़छाड़ किया उसको चौड़ा करके दूसरी सड़क बनाई जा सकती है पेड़ पौधों को काटने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता है

6- ‌ मूर्खतापूर्ण सरकारी नीतियां 

जहां एक तरफ सरकार से जुड़े तंत्र और ठेकेदार कल कारखाने वाले भयंकर पेड़ पौधों का विनाश करते हैं वहीं सामान्य जनता पेड़ पौधे लगाकर अपने ही पेड़ पौधों को बिना सरकारी अनुमति और वन विभाग की अनुमति लिए उसे काट नहीं सकती जबकि कृषि पशुपालन मुर्गी पालन दिलीप पालन के साथ बागवानी भी खेती किसानी में आती है और अपने ही लगाए पेड़ पौधों का यदि लोगों को लाभ नहीं मिलेगा और उसे काटने के लिए वन विभाग और सरकारी तंत्र को घूस देना पड़ेगा तो कोई पेड़ पौधा क्यों लगाएगी यह अभी एक बहुत बड़ा कारण है की हरियाली पेड़ पौधे काम होते चले जा रहे हैं यदि सरकार सड़क और मार्ग के किनारे के स्थान ठाणे लोगों को देखकर पेड़ पौधे लगाकर उसका उपयोग करने को प्रेरित करें तो बड़ी मात्रा में हरियाली पेड़ पौधे वनस्पतियां जड़ी बूटियां पैदा होगी और भयंकर उमस गर्मी और पसीने से लोगों को छुटकारा मिलेगा 

7- ‌ युद्ध परमाणु जैव रासायनिक परीक्षण और मोबाइल टावर इत्यादिका लगातार बढ़ता 

आज धरती के हर भाग पर कहीं न कहीं युद्ध छिड़ा हुआ है अनेक जैव रासायनिक परमाणु नाभिकीय परीक्षण प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप में किया जा रहे हैं भयानक प्रक्षेपास्त्र का परीक्षण और मोबाइल टावरों के द्वारा उत्पन्न विकिरण वातावरण को बहुत अधिक गर्म हानिकारक प्रदूषण और जहरीला बना रहा है छोटे-छोटे बम और पटाखों से वातावरण जहर और धुएं तथा प्रदूषण से भर जाता है तो उपयुक्त चीजों का कितना भयानक असर धरती पर पड़ता होगा जिससे जहरीले प्रभाव प्रदूषण के साथ भयानक गर्मी और विकिरण भी फैलता चला जाता है 

8-‌ विमान जलयान ट्रेन लोह पथयान‌ रॉकेट रॉकेट और उपग्रह का लगातार बढ़ता दायरा

‌ विमान जलयान लोह पथ यान ‌ रॉकेट और उपग्रह तथा इसी तरह के ड्रोन और अन्य चीजों के द्वारा बहुत भयानक गर्मी प्रदूषण और विषैला पदार्थ वातावरण में फैल जाते हैं जो गर्मी को सूखने चले जाते हैं और ऊपर जाने नहीं देते इससे सारी धरती पर बहुत भयानक गर्मी बढ़ती चली जाती है 

10-हरित गृह प्रभाव और ओजोन परत का भयानक विस्तार 


धीरे-धीरे धरती ग्रीनहाउस इफेक्ट में बदल रही है जिससे धरती की रक्षा करने वाली ओजोन परत का छेद बढ़ता चला जा रहा है और यह लाखों वर्ग किलोमीटर में हो चुका है ‌ सीधे धरती पर प्रहार करती हैं और यही अल्ट्रावायलेट किरणें लोगों को जानलेवा सिद्ध हो जाती हैं जहां पहले इनकी तीव्रता एक से पांच तक होती थी आज वहां यह 5 से 12 तक बढ़ चुकी है इन सभी पर तत्काल रोक नहीं लगाया गया तो धरती की गर्मी रहने लायक नहीं बचेगी 

11-: 11- ‌ जल स्रोतों का भयानक विनाश प्राचीन जीवन पद्धति का तिरस्कार 

भीषण गर्मी उमस पसीना बढ़ाने का एक प्रमुख कारण परंपरागत जल स्रोतों का विनाश और जल का भयंकर विनाश भी है प्राचीन काल के स्वच्छ जल के स्रोत हुए तालाब बावड़ी पोखरा नदियां झरने धीरे-धीरे समाप्त हो गए और उनका स्थान हैंडपंप जेट पंप सबमर्सिबल इत्यादि ने ले लिया है उपर्युक्त जल स्रोत भयंकर गर्मी में धरती की गर्मी को संतुलित रखते हुए लोगों को भरपूर पानी देते थे यह जल स्रोत शीतकाल में गम और गर्मी में ठंडे रहते थे इनका स्वच्छ और जड़ी बूटियां से मिला अमृत जैसा पानी पेड़ पौधे जीव जंतु और मनुष्य को बलवान बनाकर उन्हें स्वस्थ रखता था जबकि आज के पानी को पीकर मनुष्य पेड़ पौधे वनस्पतियां सभी छोटी बनी और जहरीली होती चली जा रही है बड़े-बड़े पेड़ पौधे वनस्पतियों का लगभग विनाश हो चुका है प्राचीन काल के लोग प्रकृति और पर्यावरण से संतुलन और सहचार्य बनाकर रहते थे आज का मानव उसको नियंत्रित करके नकली जीवन व्यवस्था विकसित कर रहा है इसलिए गर्मी की मात्रा बढ़ती जा रही है पहले घने पेड़ पौधे और बाघ की छाया में लोग बिना पंखा कूलर और एसी के रह लेते थे आज कलर और ए सी से भी गर्मी नहीं जा रही है ‌ आज का मनुष्य रोज कलर में सुबह शाम पानी भर सकता है लेकिन एक पेड़ लगाकर उसे दो-तीन वर्ष तक पानी नहीं दे सकता है जो सैकड़ो वर्ष तक उसे ईंधन लकड़ी छाया और ऑक्सीजन दे सके पढ़ी लिखी वैज्ञानिक पीढ़ी पूरी तरह से अपने विनाश और मूर्खता की तरफ बढ़ रही है 
अन्य कारण-

इन सबके अलावा अनेक अन्य छोटे-मोटे कारक हैं जैसे की पर्वत और पठार क्षेत्र की वनस्पतियां गायब होना बर्फ और हिम्मत समाप्त होना अंटार्कटिका की बर्फ का पिघलना सूर्य के सतह पर हो रहे प्रचंड विस्फोट और सौर ज्वालाओं का निकलना मानव सभ्यता द्वारा भयंकर रूप से डिटर्जेंट पाउडर साबुन तेजाब और अन्य जहरीले वस्तुओं का प्रयोग जिससे भयानक गर्मी पैदा होती है घास पोस्ट छप्पर और कच्चे तथा खपरैल के मकान की जगह सीमेंट और कंक्रीट के दहकने वाले मकान का बनाना ‌ जनमानस में पेड़ पौधे लगाने की रुचि का काम होना संयुक्त परिवार का विघटन जिसके कारण जहां 50 लोग पहले रह लेते थे उससे अधिक मकान में अब केवल पांच लोगों का रहना धरती का सीमेंट कंक्रीट और एट पत्थर से ढक जाना जैसे पानी सूखने की क्षमता बहुत कम हो जाना रसायन और रासायनिक करो का प्रयोग जो भयंकर गर्मी उत्पन्न करती हैं ‌ इसके साथ-साथ अन्य बहुत से छोटे-मोटे कारक हैं जिसमें समुद्र नदियों और अन्य जल स्रोतों का प्रदूषण होना बड़ी मात्रा में कूड़ा कचरा प्लास्टिक का कूड़ा कचरा और इलेक्ट्रॉनिक कचरा जो प्रदूषण के साथ भयानक गर्मी भी पैदा करते हैं इन सब के कारण आज पर्वतीय भाग यूरोप अमेरिका भी गर्मी के कारण जल रहे हैं और भारत तो आग की दहकती हुई भट्टी बन गया है।

Thursday, 28 May 2026

अखिल भारतीय मुस्लिम महासमुंद महासंघ हर धार्मिक और भारतीय पर्वों पर वृक्ष रोपण करते हैं

अखिल भारतीय मुस्लिम महासमुंद महासंघ हर धार्मिक और भारतीय पर्वों पर वृक्ष रोपण करते हैं 
जहां आज ईद पर लाखों जानवरों की कुर्बानी की जा रही है।
वही मुस्लिम महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष फ़रहत अली खान और खिलाड़ियों ने स्पोर्ट्स स्टेडियम में वृक्ष रोपित कर हर इंसान को यह संदेश दिया की वृक्ष लगाना सदका ए जरिया है।
 अपील करते हुए कहा की दुनिया ,देश, प्रदेश और जिले को सरसब्ज़ बनाना है 
अपनों के लिए या जो इस दुनिया से लोग जा चुके हैं उनके नाम से एक वृक्ष जरुर लगाएंगे।
नबी की हदीस है कि अगर कयामत बरपा हो और सूरज सवा नेजे पर हो और मौका मिले तो पेड़ जरूर लगा दें।
यह ऐसा सदक़ा है  जिसका सवाब इस दुनिया के अलावा दूसरी दुनिया में भी बराबर मिलता रहेगा।
तो आज ही अहद करें प्राण ले की एक खाली पड़ी जगह पर वृक्ष जरुर लगाएंगे और उसका पालन पोषण अपने नौजादा बच्चे की तरह करेंगे।

Tuesday, 26 May 2026

*शांति की आर्किटेक्ट के तौर पर महिलाएं: इस्लामिक समाज में शामिल होने को फिर से पाना*

*शांति की आर्किटेक्ट के तौर पर महिलाएं: इस्लामिक समाज में शामिल होने को फिर से पाना*

भारत का सामाजिक ताना-बाना हमेशा से अलग-अलग तरह के लोगों, साथ रहने और मिलकर हिस्सा लेने से बना है। फिर भी, सांप्रदायिक चिंताओं और इमोशनल बिखराव के समय में, शांति और पॉलिसी बनाने से जुड़ी बातचीत में एक ज़रूरी आवाज़ अक्सर अनसुनी रह जाती है, यानी महिलाओं की आवाज़। अलग-अलग समुदायों में, महिलाएं परिवारों और मोहल्लों में शांति के लिए चुपचाप बातचीत करने वालों के तौर पर काम करती रहती हैं, लेकिन फैसले लेने की औपचारिक जगहों पर उनकी भूमिका बहुत सीमित है।
मुस्लिम समाजों में, इस अलग-थलग करने को अक्सर परंपरा के नाम पर सही ठहराया जाता है, भले ही इस्लामिक इतिहास खुद एक बहुत अलग कहानी कहता हो। इस्लाम ने महिलाओं को समाज को चुपचाप देखने वाली नहीं माना; इसने उन्हें ज्ञान, सलाह-मशविरा, व्यापार, भलाई और कम्युनिटी लीडरशिप में योगदान देने वाली के तौर पर माना। शुरुआती इस्लामिक समाज में ऐसी महिलाएं शामिल थीं जिनकी समझदारी ने राजनीतिक फैसलों, सामाजिक सुधारों और दिमागी ज़िंदगी पर असर डाला। उनके उदाहरण इस आज की सोच को चुनौती देते हैं कि सार्वजनिक मामलों में महिलाओं की हिस्सेदारी किसी तरह से धर्म से मेल नहीं खाती। आज के भारत में, जहाँ बातचीत और सामाजिक मेलजोल की ज़रूरत पहले से कहीं ज़्यादा हो गई है, मुस्लिम महिलाएँ शांति बनाने और पॉलिसी में सुधार के लिए ताकतवर एजेंट के तौर पर उभर सकती हैं। उनका शामिल होना सिर्फ़ रिप्रेजेंटेशन के बारे में नहीं है; यह समाज की नैतिक और डेमोक्रेटिक नींव को मज़बूत करने के बारे में है।
इस्लामिक समाज में महिलाओं की भागीदारी की नींव इस्लाम की शुरुआत से ही देखी जा सकती है। खदीजा बिन्त खुवेलिद न सिर्फ़ एक सफल एंटरप्रेन्योर थीं, बल्कि शुरुआती मुस्लिम समुदाय को सपोर्ट करने वाले सबसे मज़बूत पिलर में से एक भी थीं। उनकी समझदारी, फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस और इमोशनल मज़बूती ने बहुत ज़्यादा अनिश्चितता और ज़ुल्म के समय में अहम भूमिका निभाई। उनकी ज़िंदगी इस बात की याद दिलाती है कि इस्लाम में महिलाओं को लीडरशिप और असर से कभी वंचित नहीं रखा गया।
इसी तरह, आयशा बिन्त अबू बक्र इस्लामी इतिहास की सबसे बड़ी इंटेलेक्चुअल हस्तियों में से एक के तौर पर उभरीं। स्कॉलर्स, कानून के जानकारों और साथियों ने कानून, शासन और आस्था के मामलों में उनसे गाइडेंस ली। उनकी स्कॉलरशिप से हज़ारों कहानियों और कानूनी मतलबों को बचाया गया। उनके योगदान से पता चलता है कि मुस्लिम महिलाओं ने ऐतिहासिक रूप से इंटेलेक्चुअल अथॉरिटी और पब्लिक रिस्पेक्ट की जगहों पर कब्ज़ा किया है। इतिहास फातिमा अल-फ़िहरिया को भी याद करता है, जिन्होंने दुनिया की सबसे पुरानी यूनिवर्सिटी में से एक की स्थापना की थी। उनका योगदान उस गहरी बौद्धिक और सभ्यतागत भूमिका की निशानी है जो मुस्लिम महिलाओं ने कभी एजुकेशनल और सोशल संस्थाओं को बनाने में निभाई थी।
फिर भी इस समृद्ध विरासत के बावजूद, आज भी कई मुस्लिम समाज महिलाओं की भागीदारी को सिर्फ़ सिंबॉलिक जगहों तक ही सीमित रखते हैं। भारत में भी, मुस्लिम महिलाएं अक्सर सामाजिक संकट के समय दिखाई देती हैं, लेकिन उन मंचों से गायब रहती हैं जहां फैसले लिए जाते हैं। चाहे लोकल कम्युनिटी कमेटियां हों, एजुकेशनल संस्थाएं हों, सोशल ऑर्गनाइज़ेशन हों, या शांति बनाने की कोशिशें हों, उनका रिप्रेजेंटेशन बहुत कम है।
यह बहिष्कार समाज को कमज़ोर करता है क्योंकि महिलाएं सामाजिक सच्चाइयों को अलग तरह से और अक्सर ज़्यादा करीब से महसूस करती हैं। वे बेरोज़गारी, सांप्रदायिक तनाव, एजुकेशनल पिछड़ेपन, ऑनलाइन कट्टरता और घरों में अस्थिरता के असर को इन मुद्दों पर पब्लिक बहस बनने से बहुत पहले ही देख लेती हैं। उनके अनुभव ऐसी समझ देते हैं जो सही पॉलिसी बनाने और झगड़े सुलझाने के लिए ज़रूरी हैं।
पूरे भारत में, अनगिनत मुस्लिम महिलाएं पहले से ही एजुकेटर, काउंसलर, सोशल वर्कर, लीगल एक्टिविस्ट और अलग-अलग धर्मों के बीच सद्भाव के लिए आवाज़ के तौर पर काम कर रही हैं। अविश्वास और पोलराइजेशन से प्रभावित कई मोहल्लों में, औरतें चुपचाप घरों में नफ़रत को आने से रोकती हैं। वे बच्चों को हमदर्दी सिखाती हैं, कल्चरल कोएग्ज़िस्टेंस बनाए रखती हैं, और अक्सर अशांति के समय इमोशनल सहारा बन जाती हैं। शांति बनाने में उनका योगदान शायद हमेशा टेलीविज़न डिबेट या पॉलिटिकल प्लेटफ़ॉर्म पर न दिखे, लेकिन यह बहुत ज़रूरी है।
ऐसे समय में जब सोशल मीडिया पर गलत जानकारी और बांटने वाली बातें युवा पीढ़ी पर असर डाल रही हैं, लीडरशिप स्पेस में महिलाओं का शामिल होना और भी ज़रूरी हो जाता है। मांएं, टीचर और कम्युनिटी मेंटर नैतिक सोच और सामाजिक नज़रिए को बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए पॉलिसी पर चर्चा से महिलाओं को बाहर रखने का मतलब है समाज के सबसे मज़बूत रिसोर्स में से एक को बाहर रखना जो टकराव को रोकने और बातचीत को बढ़ावा देने के लिए है।
ज़रूरी बात यह है कि मुस्लिम समाज में महिलाओं को मज़बूत बनाने को परंपरा को छोड़ना या बाहरी मॉडल की नकल करना नहीं समझना चाहिए। बल्कि, यह सलाह-मशविरा, न्याय, सम्मान और सामूहिक ज़िम्मेदारी के इस्लाम के असली उसूलों की ओर वापसी को दिखाता है। कुरान बार-बार पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए नैतिक जवाबदेही और सोच-विचार पर ज़ोर देता है। महिलाओं को पब्लिक लाइफ में हिस्सा लेने से रोकना अक्सर धार्मिक शिक्षा से ज़्यादा पुरुष-प्रधान संस्कृति का नतीजा होता है।
भारत का डेमोक्रेटिक ढांचा महिलाओं को शामिल करने की बात को और मज़बूत करता है। एक अलग-अलग तरह का देश आगे नहीं बढ़ सकता। जब समाज की आधी आवाज़ें अनसुनी रह जाती हैं, तो वह प्रगति नहीं कर सकता। स्थायी शांति के लिए समाज के सभी वर्गों की भागीदारी ज़रूरी है, खासकर उन लोगों की जो ज़मीनी स्तर पर समुदायों को संवारते हैं। मुस्लिम महिलाओं में समुदायों, पीढ़ियों और संस्थाओं के बीच सेतु बनने की क्षमता है, लेकिन ऐसा तभी संभव है जब समाज उनके नेतृत्व को पहचानने और उस पर भरोसा करने को तैयार हो।
आज के भारत में, जहाँ सामाजिक सद्भाव के सामने चुनौतियाँ बढ़ती जा रही हैं, उनकी भागीदारी पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। महिलाओं को केवल प्रतीकात्मक भूमिकाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, जबकि शिक्षा, कल्याण, शांति और सामुदायिक सुधार जैसे महत्वपूर्ण निर्णय उनके बिना ही लिए जाते हों। वे केवल बदलाव की लाभार्थी नहीं हैं; वे बदलाव का नेतृत्व करने में भी सक्षम हैं।
सच्ची शांति बहिष्कार या चुप्पी से नहीं बनती। यह तब उभरती है जब समाज संवाद, सहानुभूति और साझा ज़िम्मेदारी के लिए जगह बनाता है। मुस्लिम महिलाओं को नीति-निर्माण और शांति-स्थापना के ढाँचों में शामिल करके, भारत न केवल एक महत्वपूर्ण इस्लामी विरासत को पुनर्जीवित करेगा, बल्कि अपनी लोकतांत्रिक और बहुलवादी भावना को भी मज़बूत करेगा।

फ़रहत अली खान 
एम ए गोल्ड मेडलिस्ट

Monday, 25 May 2026

जौनपुर के लोग दुनिया भर के गरम नगरों को खोजते रहे और खुद जौनपुर में आज दोपहर 2:25 पर 45.8 डिग्री सेल्सियस

जौनपुर के लोग दुनिया भर के गरम नगरों को खोजते रहे और खुद जौनपुर में आज दोपहर 2:25 पर 45.8 डिग्री सेल्सियस और कहीं कहीं कहीं 46 डिग्री सेल्सियस का तापमान दर्ज किया गया जो दुनिया के सबसे गर्म स्थानों में से एक है और इससे हमारे केंद्र की भविष्यवाणी भी सही हुई जिसमें इस वर्ष जौनपुर का अधिकतम तापमान 46 डिग्री सेल्सियस जाने की बात कही गई थी नेट और अन्य गूगल में भी जौनपुर का तापमान 46 डिग्री सेल्सियस दिख रहा है और यह बिल्कुल सही है -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर

Thursday, 21 May 2026

भारत के लोगों की आदत है कि वह किसी चीज की गहराई नहीं देखे और थोड़े में ही हवा में उड़ाना शुरू कर देते हैं बंगाल में भाजपा की कल्पना से परे की जीत अत्यंत ही आनंददायक है

भारत के लोगों की आदत है कि वह किसी चीज की गहराई नहीं देखे और थोड़े में ही हवा में उड़ाना शुरू कर देते हैं बंगाल में भाजपा की कल्पना से परे की जीत अत्यंत ही आनंददायक है 
यह विजय हजारों कत्ल अनगिनत बलात्कार गुंडाराज और ममता की तानाशाही के कारण आया है और अब करोड़ों बांग्लादेशी लोग परेशान हैं की घुस तो गए लेकिन जाए तो जाए कहां।

उससे भी खतरनाक सच कि सच को छुपाया जा रहा है बड़ी संख्या में बांग्लादेशी लोगों को बंगाल से पलायन करते हैं दिखाया जा रहा है जो झुंड के झुंड चारों तरफ भाग रहे हैं और कहा जा रहा है कि वह बांग्लादेश में जा रहे हैं जबकि मुश्किल से एक प्रतिशत बांग्लादेश में जा रहे हैं 

और अब हम बताते हैं सबसे खतरनाक सच यह लोग बांग्लादेश भगाने का नाटक करके भारत के विभिन्न राज्यों में रक्त बीच की तरफ फैलते हुए आगे बढ़ रहे हैं जहां पहले से उनके तैयार शैतान भाई और मस्जिद तथा मुस्लिम धर्म स्थान उन्हें छुपाने खिलाने का पूरा व्यवस्था कर चुके हैं इस बात को ना मीडिया दिख रही है ना सरकार और ना सनातनी और बुद्धिजीवी समझ पा रहे हैं 

यदि उन्हें बांग्लादेश में रहना ही होता तो वह भारत बढ़ाओ को पार करके क्यों आते ‌ सब कुछ गांव पर लगाकर यहां तक की बहन बेटियों को भी दांव पर लगाकर इस्लामी जिहाद  का सबसे बड़ा उदाहरण है बंगाल में प्रवेश और बंगाल से दिखाओ की पलायन

कृपया सावधान रहें सरकारी तंत्र और गुप्तचर तंत्र इस पर विशेष ध्यान दें बांग्लादेश तो इनमें से किसी को घुसने ही नहीं दे रहा है -डॉ दिलीप कुमार सिंह

विशेष लोक अदालत के समाधान समारोह के अवसर पर अधिक से अधिक मुकदमों के निस्तारण की अपील

विशेष लोक अदालत के समाधान समारोह के अवसर पर अधिक से अधिक मुकदमों के निस्तारण की अपील 
जनपद न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ‌ जनपद न्यायालय जौनपुर सुशील कुमार शशि के निर्देशन में दिनांक 21 22 और 23 अगस्त 2026 को ‌ विशेष लोक अदालत** समाधान समारोह** के रूप में ‌ दीवानी न्यायालय परिसर जौनपुर में मनाया जाएगा। इस समाधान दिवस पर समझौते के आधार पर अधिक से अधिक ‌ सुलह योग्य मुक़दमों का निस्तारण किया जाना है

सचिव पूर्णकालिक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर ‌ सिविल जज सीनियर डिवीजन इस अवसर पर विशेष लोक अदालत के समाधान समझ में अधिक से अधिक संख्या में लोगों के उपस्थित होकर सुलह समझौते के आधार पर अपने अधिक से अधिक सुलह योग्य मुकदमों को निपटाने की अपील की गई है।

Wednesday, 20 May 2026

आज जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर के तत्वावधान में ‌ जनपद न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर ‌

आज जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर के तत्वावधान में ‌ जनपद न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर ‌ सुशील कुमार शशि के निर्देशन एवं सचिव पूर्ण कालिक सिविल जज सीनियर डिवीजन सुशील कुमार सिंह ‌ की देखरेख में एक विधिक साक्षरता जागरूकता शिविर वरिष्ठ जनों के अधिकार एवं बच्ची देवी प्रति राज्य के दिशा निर्देशों के बारे में सदर तहसीलदार मछली शहर के सभागार में आयोजित किया गया ‌
इस बैठक में सचिव सुशील कुमार सिंह ‌ डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल ‌ डॉ दिलीप कुमार सिंह काउंसलर देवेंद्र कुमार यादव तहसीलदार मछली शहर ‌ रवि रंजन कश्यप तहसीलदार विवेक श्रीवास्तव लेखपाल परमानंद मिश्रा चंदन राय बाल विकास अधिकारी श्याम सुंदर यादव भूपेंद्र यादव आलोक विश्वकर्मा ‌ सुरेंद्र मनी शुक्ला ललित मोहन तिवारी अशोक श्रीवास्तव हरि नायक तिवारी विकास यादव और अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता वार्ड कारीगर पुलिस प्रशासन के लोग और प्राधिकरण के राकेश कुमार यादव सुनील कुमार मौर्य एवं परमानंद यादव उपस्थित रहे। 
इस अवसर पर बोलते हुए सचिव सुशील कुमार सिंह
 ने ‌ प्राधिकरण राष्ट्रीय लोक अदालत एवं इसके अंगों के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि ‌ वरिष्ठ जनों को विधि के अंतर्गत आने का अधिकार प्राप्त हैं जिसमें भरण पोषण के अधिकार से लेकर सभी योजनाओं में छूट और ब्याज दर में भी छूट शामिल है बच्ची देवी प्रति राज्य के बारे में उन्होंने बताया कि यदि चार्ज शीट प्रस्तुत करते समय तक गिरफ्तारी नहीं हुई है तो उसको जमानत लेने का अधिकार है और गिरफ्तार नहीं किया जा सकता जेल में बंद अभियुक्त लोगों के लिए अपने जमानत की व्यवस्था करने के लिए 30 दिन का समय दिया जाता है उन्होंने आगे कहा कि न्याय व्यवस्था भावना पर नहीं तर्क और साक्षी पर काम करते हैं यह भी देखना आवश्यक है की विधि और अन्य व्यवस्थाओं का दुरुपयोग ना हो यदि किसी वृद्धि के पास बच्चे नहीं है तो उसे भरण पोषण और अन्य अधिकार उन लोगों से मिल सकता है जो उसके संपत्ति के उत्तराधिकारी हैं उन्होंने अधिक से अधिक मुकदमों को सुलह के द्वारा समाप्त करने पर बल दिया।

वक्ताओं के क्रम में देवेंद्र कुमार यादव काउंसलर द्वारा बच्ची देवी बनाम स्टेट एवं वरिष्ठ जनों के बारे में तहसीलदार रवि रंजन कश्यप द्वारा तहसील विधिक सेवा समिति और उसके कार्यों के बारे में चंदन राय के द्वारा वरिष्ठ जनों को प्राप्त सुविधा और बच्चों को प्राप्त सुविधाएं और अधिकार के बारे में ‌ परमानंद मिश्रा लेखपाल द्वारा कल्याणकारी राज्य के बारे में बताया गया इस अवसर पर । भूपेंद्र यादव आलोक विश्वकर्मा ललित तिवारी हरी नायक तिवारी और अन्य वक्ताओं के द्वारा भी संबोधित किया गया 

कार्यक्रम का संचालन करते हुए डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह 
के द्वारा बताया गया कि जी देश में भगवान राम जैसे अवतार पुरुष भी प्रातः काल उठकर माता-पिता और गुरु के पैर छूते थे आज वहां पर वरिष्ठ लोगों की इतनी दुर्दशा है‌ जिसके लिए अपने संस्कार पहले जैसे करने होंगे उन्होंने मध्यस्थता पैनल लाया डिफेंस काउंसिल सिस्टम पैरालीगल वॉलिंटियर्स एवं विवाद पूर्व मुकदमों के बारे में विस्तार से बताएं ‌ आभार का ज्ञापन संघ के महामंत्री ‌ आलोक विश्वकर्मा द्वारा किया गया

Sunday, 17 May 2026

मौसम की विस्तृत भविष्यवाणी - डा दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक

मौसम की विस्तृत भविष्यवाणी - डा दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक 

आज से बदल जाएगी हवा की दिशा पूर्वी हवा पश्चिमी हवा में बदल जाएगी पसीना और आर्द्रता की मात्रा में कमी होगी लेकिन गर्मी और तापमान बहुत बढ़ जाएगा ‌ कल तक केरल में मानसून अप्रत्याशित रूप से पहुंचकर एक सप्ताह वर्षा करेगा 

आज जौनपुर और आसपास ‌ और पूर्वांचल के समस्त जनपदों का न्यूनतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के साथ भीषण गर्म होगा‌ अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा। सापेक्षिक आर्द्रता अर्थात हवा में नमी की मात्रा न्यूनतम 25 प्रतिशत और अधिकतम 50 प्रतिशत रहेगी वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 से 100 के बीच रहेगी जो आज के हिसाब से अच्छा है पराबैंगनी किरणों की तीव्रता अत्यंत भयंकर 9 से 10 के बीच रहेगी ‌ सुबह घने बादलों के बाद मौसम धीरे-धीरे साफ हो जाएगा और बहुत तेज हवाएं कहीं-कहीं आंधी तूफान कहीं अंधड़ आने की संभावना है 

हमारा अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र पिछले 49 वर्षों में लाखों भविष्यवाणी 99% की अद्भुत और कल्पना के पार की सच्चाई के साथ मौसम राजनीति विज्ञान खेल अनंत अंतरिक्ष सहित सत्ता परिवर्तन दुनिया की दिशा और दशा की भविष्यवाणी करता रहा है जिससे करोड़ों लोग लाभान्वित होते हैं 

जहां तक देश के मौसम की बात है तो केवल लेह लद्दाख हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे स्थान सिक्किम और पूर्वोत्तर भारत के आधे भूभाग को छोड़कर पूरा भारत भयंकर गर्म होकर आज की तपती भट्टी बन जाएगा 

इस बार वर्षा अनिश्चित अनियमित और पिछली बार से बहुत कम होगी खेती-बाड़ी किसी बागवानी से जुड़े लोगों को इसका ध्यान अवश्य रखना चाहिए यह हमें जनवरी से 15वीं बार लिख रहा हूं और मानसून केरल में काम से कम 10 दिन पहले कल तक आ जाएगा लेकिन भारत का मौसम विभाग इसे अपने हिसाब से जब चाहेगा तब घोषित करेगा 

इस वर्ष का मानसून कुछ स्थानों पर अधिक से अधिक वर्षा करेगा अधिकतर स्थानों पर सामान्य से कम और बाकी स्थान पर औसत वर्षा करेगा संपूर्ण देश के लोगों को इसका ध्यान रखना चाहिए इसका परिणाम होगा पहले से ही भीषण महंगाई चरम स्तर को पार कर जाएगी क्योंकि कृष्णा उत्पादन फल फैसले बहुत बाधित होंगे कम से कम दो बार सुख या सूखे जैसी स्थितियां देश का अधिकांश भागों में पड़ने की संभावना है।

एल नीनो के प्रभाव सूर्य पर हो रहे प्रचंड विस्फोट भयंकर परमाणु नाभिकीय क्रियाएं सौर कलंक और लाखों किलोमीटर की गति से चलने वाली सौर आंधियां ‌ पामीर के पत्थर और तिब्बत तथा ध्रुव प्रदेशों में ठंड का बहुत ही काम हो जाना पेड़ पौधे हरियाली का लगातार काम होते जाना और सीमेंट कंक्रीट ईद पत्थर के जंगल का बढ़ते जाना प्राचीन जीवन पद्धति और प्रकृति से सामंजस्य की जगह उसे पर विजय पाने की आशा विश्व को भयानक विनाश की ओर ले जा रही है इसके अतिरिक्त लगातार युद्ध परमाणु परीक्षण जल स्थल नाव में बढ़ते वाहन विमान और रेलगाड़िया की संख्या धरती का लगातार कोमल मृदा की जगह एट पत्थर सीमेंट कंक्रीट से ढलते चले जाना सब के सब इस भीषण गर्मी और जलवायु परिवर्तन का कारण है जिस पर अति शीघ्र बहुत बड़े पैमाने पर कागज की जगह वास्तविकता में काम करने की आवश्यकता है अन्यथा पंखा कूलर तो पहले ही बेकार हो चुके हैं ऐसी भी बेकार हो जाएगी




कल के मौसम के बारे में अनुमान है कि न्यूनतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 45 डिग्री सेल्सियस के साथ बहुत ही भयानक खतरनाक और गर्म होगा बाकी दशाएं आज की तरह ही रहेंगे

Saturday, 16 May 2026

अधिक मास मलमास और क्षय मास में अंतरडॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक

अधिक मास मलमास और क्षय मास में अंतर
डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक 
सनातन धर्म एक संपूर्ण वैज्ञानिक धर्म है जो प्रकृति और पर्यावरण के साथ-साथ संपूर्ण ब्रह्मांड से और सृष्टि के निर्माण से जुड़ा हुआ है वर्ष के 12 महीना में कभी-कभी ऐसा भी समय आता है जब एक महीने अधिक हो जाता है अर्थात एक वर्ष 13 महीने का होता है ‌ इसको पुरुषोत्तम मांस और मलमास भी कहा जाता है मालिन होने के कारण इस पूरे महीने में कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं ‌ यह औसत 32.5 महीने के बाद आता है इस वर्ष से 17 में से प्रारंभ हो रहा है और 15 जून को समाप्त हो रहा है इस प्रकार इस वर्ष 13 महीने होंगे जेठ महीना दो बार पड़ेगा

क्षय मास का अर्थ है कम करना ‌ यह अधिक मास का उल्टा होता है अर्थात जब 6 मास लगता है तब 1 वर्ष में 12 महीने की जगह केवल 11 महीने होते हैं ‌ 6 मार्च में सूर्य का संक्रांति एक ही राशि में दो बार होता है ‌ ऐसा क्यों होता है सरल वैज्ञानिक भाषा में हम इसको आपको समझाने का प्रयास कर रहे हैं 

दुनिया के सभी महीने सूर्य और चंद्रमा पर आधारित होते हैं जो पंचांग सौर वर्ष पर आधारित होता है जैसे भारत का पंचांग और अंग्रेजों का अर्थात इसी पंचांग उसमें 365 दिन होते हैं जबकि चंद्र वर्ष में 354 दिन होते हैं इस प्रकार दोनों में 11 दिन का अंतर होता है इसीलिए आपने देखा होगा कि मुस्लिम त्यौहार हर वर्ष में महीना और दिन के साथ बदलते रहते हैं जबकि अन्य धर्म के त्योहारों में ऐसा नहीं होता है 

अब आपको वैज्ञानिक सत्य बताते हैं ‌ धरती सूर्य की एक परिक्रमा 365 दिन 5 घंटे 41 मिनट 52 सेकंड में करते हैं इस प्रकार सौर पंचांग में भी एक वर्ष में 5 घंटे 41 मिनट 52 सेकंड का अंतर आ जाता है इधर भारत का हिंदी महीना 360 दिन का होता है इसलिए इसमें 5 दिन का अंतर हर एक साल में पड़ता है इस प्रकार से हर तीसरे वर्ष अधिक मास या मलमास लगता है जैसे इस वर्ष सन 2026 विक्रम संवत 2083 में हो रहा है ‌ क्योंकि 11 दिन का अंतर 3 वर्ष में 33 दिन हो जाता है 

इधर 5 घंटे 41 मिनट 52 सेकंड का अंतर 1200 वर्ष में 1 महीने का हो जाता है इसके बाद पंचांग में फिर से सुधार करना पड़ता है लेकिन यह एक लंबा समय होता है इसीलिए इस पर बहुत अधिक ध्यान लोगों का नहीं जाता है विद्वान ज्योतिषी वैज्ञानिक और गणितज्ञ हर 1200 वर्षों में इसको सुधार देते हैं इसीलिए भारत की काल गणना बहुत ही सूक्ष्म और सबसे वैज्ञानिक है जिसमें दो अरब वर्ष का संपूर्ण वर्णन एकदम सही-सही बिना किसी त्रुटि के किया गया है।

यही संक्षेप में मलमास क्षय मास अधिक मास का रहस्य है ‌ एक बार और है कि दुनिया के हर पंचांग में वर्ष का अंतर भले हो लेकिन दिन सभी धर्म के और सभ्यता के पंचांग में सात ही होते हैं ‌ सोमवार मंगलवार बुधवार बृहस्पतिवार शुक्रवार शनिवार और रविवार दिन और हिंदी महीने में चैत्र वैशाख जेठ आषाढ़ सावन भादो क्वार कार्तिक अगहन पूस माघ और फागुन है।

अधिक मास में क्या करना चाहिए 

अधिक मास में शुद्ध चित्र और सदाचार से रहना चाहिए दान पुण्य करना चाहिए अपनी-अपने देश और धर्म की रक्षा को छोड़कर हिंसा नहीं करनी चाहिए हर प्रकार के नशे और नशीली चीजों से दूर रहना चाहिए सत्य अज्ञान और अंधकार पर विजय पाने की चेष्टा करनी चाहिए और भगवान विष्णु का पूजा पाठ तुलसी मां की सेवा और तुलसी मां की पूजा करना चाहिए कम से कम एक अच्छी आदत को अपनाना चाहिए और एक बुरी आदत छोड़ देना चाहिए 

अधिक मास में क्या नहीं करना चाहिए 

अधिक मास की अवधि में कोई भी नया कार्य नहीं करना चाहिए कोई शुभ और मांगलिक कार्य भी नहीं करना चाहिए नया मकान भवन वाहन संपत्ति भी नहीं खरीदना चाहिए वहां आभूषण वस्त्र सहित कोई भी अन्य खरीददारी इस महीने में नहीं करना चाहिए नया भवन निर्माण नहीं करना चाहिए पूजा पाठ तो कर सकते हैं लेकिन बड़े-बड़े यज्ञ हवन इत्यादि नहीं करना चाहिए ‌ इस महीने में अपने आप को अधिक से अधिक जानते हुए परम तत्व को समझने की चेष्टा करनी चाहिए

Friday, 15 May 2026

अधिक मास में क्या करना चाहिए

अधिक मास में क्या करना चाहिए 
अधिक मास में शुद्ध चित्र और सदाचार से रहना चाहिए दान पुण्य करना चाहिए अपनी-अपने देश और धर्म की रक्षा को छोड़कर हिंसा नहीं करनी चाहिए हर प्रकार के नशे और नशीली चीजों से दूर रहना चाहिए सत्य अज्ञान और अंधकार पर विजय पाने की चेष्टा करनी चाहिए और भगवान विष्णु का पूजा पाठ तुलसी मां की सेवा और तुलसी मां की पूजा करना चाहिए कम से कम एक अच्छी आदत को अपनाना चाहिए और एक बुरी आदत छोड़ देना चाहिए 

अधिक मास में क्या नहीं करना चाहिए 

अधिक मास की अवधि में कोई भी नया कार्य नहीं करना चाहिए कोई शुभ और मांगलिक कार्य भी नहीं करना चाहिए नया मकान भवन वाहन संपत्ति भी नहीं खरीदना चाहिए वहां आभूषण वस्त्र सहित कोई भी अन्य खरीददारी इस महीने में नहीं करना चाहिए नया भवन निर्माण नहीं करना चाहिए पूजा पाठ तो कर सकते हैं लेकिन बड़े-बड़े यज्ञ हवन इत्यादि नहीं करना चाहिए ‌ इस महीने में अपने आप को अधिक से अधिक जानते हुए परम तत्व को समझने की चेष्टा करनी चाहिए

Wednesday, 13 May 2026

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के आदेश एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के निर्देश पर ...

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के आदेश एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्व वरदान में एक विधिक साक्षरता जागरूकता शिविर का आयोजन जनपद न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर जनक कुमारी इंटरमीडिएट कॉलेज सिविल लाइंस जौनपुर में आयोजित किया गया
 इस अवसर पर सिविल जज सचिव पूर्ण काली के सुशील कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह क्षेत्रीय वन अधिकारी शालिनी चौरसिया ‌ जिला चिकित्सालय की परामर्शदाता सीमा सिंह डाटा परिवार न्यायालय देवेंद्र कुमार यादव प्रधानाचार्य जनक कुमारी इंटर कॉलेज शंकर बहादुर सिंह एवं ‌ पुलिस विभाग के अधिकारी प्राधिकरण के सुनील कुमार मौर्य राकेश कुमार यादव एमपीएलबी शिव शंकर सिंह छात्र-छात्राएं और शिक्षक गण उपस्थित रहे 
विधिक साक्षरता जागरूकता संगोष्ठी को संबोधित करते हुए सचिव पूर्ण कालिक सुशील कुमार सिंह ने प्राधिकरण के कार्य प्राधिकरण के द्वारा दिए जा रही सहायता के बारे में बताते हुए नशा उन्मूलन बच्चों को 18 वर्ष की आयु के बाद ही मोटर वाहन चलाने ड्राइविंग लाइसेंस और इंश्योरेंस बीमा साथ रखने के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि यदि पीड़ित प्रताड़ित लोगों की महिलाओं की लड़कियों की प्रार्थना कहानी सुनी नहीं जाती तो वह वह प्राधिकरण की सहायता ले सकते हैं 

इसी क्रम में डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह शालिनी चौरसिया सीमा सिंह देवेंद्र कुमार यादव के द्वारा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और मध्यस्थता केंद्र फ्रंट ऑफिस लीगल एड डिफेंस सिस्टम ‌ पैनल लाऔर और वॉलिंटियर्स सिस्टम  ‌ प्री लिटिगेशन मुकदमा ‌ जेल विजिटरके बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

सुलहयोग्य कोई भी सिविल क्रिमिनल बैंक बीमा चेक बाउंस किराएदारी बैंक बीमा रिचार्ज मुकदमे मध्यस्थता केंद्र क्या राष्ट्रीय लोक अदालत में सरलता से निस्तारित किए जाते हैं जहां कोर्ट फीस वापस हो जाती है और यह अंतिम निर्णय होता है जिसकी कोई अपील पुनरीक्षण नहीं होता । 

इसके अतिरिक्त लीगल एड डिफेंस सिस्टम के बारे में बताया गया जहां गरीब पीड़ित प्रताड़ित निर्धन और जेल में बंद लोगों को विद्वान अधिवक्तागण के द्वारा निशुल्क सहायता दी जाती है ‌ 15100 101 1098 1912 और 100 जैसे नंबरों को हमेशा याद रखना और आपातकाल में सहायता मांगने के बारे में विस्तार से बताया गया।


इस कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह उपमुख्य  प्रतिरक्षा सलाहकार के द्वारा की गई और आभार प्रधानाचार्य जंग बहादुर सिंह के द्वारा किया गया।

सनातन धर्म का महान हत्यारा सैयद सालार मसूद उपनाम गाजी मियां

सनातन धर्म का महान हत्यारा सैयद सालार मसूद उपनाम गाजी मियां 
*जो भी गैर मुसलमान नीच हत्यारे और दुराचारी गाजी मियां के मेले में शामिल होते हैं चाहे वह मानेछा हो या खेता सराय हो या बहराइच हो उन महामूर्ख लोगों के लिए मैं गाजी मियां का सच्चा ऐतिहासिक तथ्य बताता हूं*

*गाजी मियां का असली नाम सैयद सालार गजनबी था जो शैतान आक्रांता और शूर्पणखा के वंशज महमूद गजनी का भतीजा था उसके पास एक आतताई आतंकवादी सेना थी*

*वह अपने चाचा महमूद गजनवी के अधूरे संकल्प को पूरा करना चाहता था और इसलिए उसने प्रण किया था कि 5000 सनातनी लोगों के धर्म परिवर्तन या हत्या के बाद जलपान और 100000 लोगों की हत्या या धर्म परिवर्तन के बाद में भोजन करूंगा इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उसने अफगानिस्तान से वाराणसी तक विशन लूटमार मचाई*

*हद तो तब हो गई जब उसने जबरदस्ती वाराणसी के तत्कालीन राजा की पुत्री से जबरदस्ती विवाह करने का संदेश राजा के पास भेज दिया डर के मारे कोई प्रतिरोध करने को तैयार नहीं हुआ*

*इसी बीच हुआ राक्षस आतंकी हत्यारा पाकिस्तान पंजाब हरियाणा दिल्ली मथुरा मेरठ को रौंदता हुआ लखनऊ और वाराणसी के पास आ पहुंचा रास्ते में लाखों लोगों का कत्लेआम किया अनगिनत महिलाओं को लूटा भीषण बलात्कार हत्या और लूटपाट से पूरा भारत कांप गया*

*श्रावस्ती के सम्राट वीर सुहेलदेव ने ऐसी विषम परिस्थितियों में उस आतंकी शैतान लुटेरे से लोहा लेने का निश्चय किया और देशभक्त वीर सैनिकों को लेकर सुहेलदेव की सेना से भिड़ गया और पहले ही दिन के भयंकर युद्ध में गजनबी के हजारों सैनिक गाजर मूली की तरह काट डाले गए*

*इस पर उस नाराधम ने अपने आतंकी सैनिकों को भेजकर रात में हजारों गाय चुरा लिया और सेना के आगे खड़ा कर दिया लेकिन परम प्रतापी सुहेलदेव को इसकी सूचना गुप्त चरो से मिल गए और उन्होंने सेना की दो टुकड़ियों बनाई एक को आगे और दूसरे को पीछे खड़ा किया इधर गाजी मियां या सोचकर प्रसन्न था की अब तो सनातनी लोग गायों पर तीर नहीं चलाएंगे और हम आगे बढ़ कर उन्हें आसानी से काट देंगे लेकिन जैसे ही अगले दिन युद्ध शुरू हुआ सुहेलदेव की आधी से अधिक सेना ने इन तुर्कों पर पीछे से भयानक आक्रमण किया और जब तक तुर्क संभाल पाते तब तक हजारों सैनिकों को काटकर गिरा दिया गया इस पर सैयद सालार बौखला कर भागा और वाराणसी जौनपुर होता हुआ मनेछा पहुंचा जहां गाजी मियां की सेना का भयंकर संहार चारों ओर से घेरकर किया गया और इस कार्य में स्थानीय सनातनी लोग शामिल हो गए जिधर भी  गाजी मियां निकलता गांव घर सब लोग गाजी मियां की सेना को काट डालते* 

*सारी सेना के नष्ट हो जाने पर कुछ चुने हुए सैनिकों को लेकर सैयद सालार बहराइच भागा और उस समय प्रसिद्ध मंदिर और उसके पास स्थित लोलार्क कुंड में फिर भयंकर युद्ध हुआ विजय की कोई आसान न देख और अपने सभी सैनिकों के मारे जाने पर गाजी मियां घबराकर लोलार्क कुंड के गहरे पानी में कूद गया लेकिन परम विक्रमशाली सुहेलदेव ने भीम भयंकर लंबा बल्लम मारकर उसके शरीर के आर पार करके उसे उठा लिया और वही दफन कर दिया यही गलती हुई उनसे*

*कालांतर में जब भारत में मुस्लिम राज्य हो गया तो उसे मुस्लिम शासकों ने मजार को पूजा स्थान बनाकर सनातनी लोगों को बाध्य किया कि उसके सामने सिर झुकाये और जत्थे के जत्थे मुसलमान भारत के चारों ओर भेजे जाते  जो लहबर लेकर जाते और जो उनको नीचे झुक कर सलाम नहीं करते उनका सिर काट लेते और महिलाओं को बंदी बना ले जाते इसीलिए जब भी गाजी मियां लहबर लेकर आते थे तो गांव की औरतें डर के कारण नीचे लेट कर उनकी बाकायदा पूजा पाठ करके खूब चढ़ावा देती थी आजाद भारत में कांग्रेस ने सही इतिहास बताने का प्रयास नहीं किया*

*1985 के आसपास भीषण जागृति पैदा हुई और हम लोगों के अथक प्रयासों से गांव-गांव में इन लोगों का आना देशभक्त परमवीर युवकों ने बंद कर दिया और अब कहीं भी गाजी मियां दिखाई नहीं पड़ते फिर भी हजारों लाखों मुर्ख हिंदू अभी भी गाजी मियां के मेले में जाकर अपना सिर झुकाते हैं और भारी-भरकम धनराशि देते हैं दुराचारी औरतें घरवालों को धोखा देकर दुराचार करके आ जाती हैं जैसे शिर्डी के साईं बाबा की असलियत उजागर हो गई वैसे गाजी मियां की असलियत लोग जान गए नतीजा अब केवल नाम मात्र के लोग जाते हैं*

*यही गाजी यही गाजी मियां का असली इतिहास है इसके बाद भी अगर मूर्ख हिंदू स्त्री पुरुष गाजी मियां की पूजा करते हैं या उनके मेले में जाते हैं तो कोई क्या कर सकता है इस सच्चाई को 10 20 50 हजार लाख करोड़ बार नहीं अरबों बार बताया जा चुका है आशा है आप लोग वास्तविक स्थिति समझ गए होंगे* डॉ दिलीप कुमार सिंह

Tuesday, 12 May 2026

इसी को विशुद्ध नौटंकी और जनता के साथ विश्वास घात कहते हैं

कितना बड़ा धोखा देकर कितना बड़ा खेल खेला गया है सरकार और बिजली विभाग के द्वारा उपभोक्ताओं के लिए 

सबसे पहले तो जबरदस्ती सरकार की जिद पूरा करने के लिए सारे पोस्टपेड मी प्रीपेड किए गए और उपभोक्ताओं को अर्बन खरबन रूपों की हानि हुई 

इसी बीच कितने उपभोक्ता बेचारे दौड़ दौड़ कर हर जगह पैसे खर्च किए और कई दिन अंधेरे में रहे कोई शिकायत सुनने वाला नहीं मिला 

इस बारे में मुझे एक उदाहरण रामदायलगंज के नीलू गौड़ का याद आ रहा है जो हर जगह दौड़ा जौनपुर के अधिशासी अभियंता कार्यालय से लेकर मडियाहू के खंड विद्युत अधिकारी सौरभ के पास तक लेकिन उसकी कहीं नहीं सुनी गई और 5000 का बिल अचानक ही बढ़कर ₹50000 कर दिया गया और सभी ने ही कहा कि कुछ नहीं सुनना है पूरा रुपया जमा करो 

ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार और बिजली विभाग मिली मर और नूरा कुश्ती करके जमकर वसूली किया और सारा पैसा शेयर मार्केट में लगा दिए और जब उससे काफी पैसा कमा लिए तब फिर उपभोक्ताओं का प्रीपेड मीटर पोस्ट पेंट कर दिया 


इसी को विशुद्ध नौटंकी और जनता के साथ विश्वास घात कहते हैं सरकार भी मालामाल हो गई और बिजली विभाग भी लेकिन बेचारी जनता कंगाल हो गई और हरामखोरों का एक बार फिर से राज हो गया 

इससे ऊपर से नीचे भ्रष्ट लोगों को कमाई करने में बहुत परेशानी हो रही थी यह दिवस तो में पारदर्शिता के साथ नियम लागू होता तो सबका बहुत अधिक लाभ होता 

ऐसे में सरकार को चाहिए कि पूरे देश में 100 यूनिट बिजली फ्री कर दे क्योंकि देश की 90% जनता 100 यूनिट से कम बिजली का खर्च करती है

सनातन धर्म का महान हत्यारा सैयद सालार मसूद उपनाम गाजी मियां

सनातन धर्म का महान हत्यारा सैयद सालार मसूद उपनाम गाजी मियां 
                       डॉ दिलीप कुमार सिंह


*जो भी गैर मुसलमान नीच हत्यारे और दुराचारी गाजी मियां के मेले में शामिल होते हैं चाहे वह मानेछा हो या खेता सराय हो या बहराइच हो उन महामूर्ख लोगों के लिए मैं गाजी मियां का सच्चा ऐतिहासिक तथ्य बताता हूं*

*गाजी मियां का असली नाम सैयद सालार गजनबी था जो शैतान आक्रांता और शूर्पणखा के वंशज महमूद गजनी का भतीजा था उसके पास एक आतताई आतंकवादी सेना थी*

*वह अपने चाचा महमूद गजनवी के अधूरे संकल्प को पूरा करना चाहता था और इसलिए उसने प्रण किया था कि 5000 सनातनी लोगों के धर्म परिवर्तन या हत्या के बाद जलपान और 100000 लोगों की हत्या या धर्म परिवर्तन के बाद में भोजन करूंगा इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उसने अफगानिस्तान से वाराणसी तक विशन लूटमार मचाई*

*हद तो तब हो गई जब उसने जबरदस्ती वाराणसी के तत्कालीन राजा की पुत्री से जबरदस्ती विवाह करने का संदेश राजा के पास भेज दिया डर के मारे कोई प्रतिरोध करने को तैयार नहीं हुआ*

*इसी बीच हुआ राक्षस आतंकी हत्यारा पाकिस्तान पंजाब हरियाणा दिल्ली मथुरा मेरठ को रौंदता हुआ लखनऊ और वाराणसी के पास आ पहुंचा रास्ते में लाखों लोगों का कत्लेआम किया अनगिनत महिलाओं को लूटा भीषण बलात्कार हत्या और लूटपाट से पूरा भारत कांप गया*

*श्रावस्ती के सम्राट वीर सुहेलदेव ने ऐसी विषम परिस्थितियों में उस आतंकी शैतान लुटेरे से लोहा लेने का निश्चय किया और देशभक्त वीर सैनिकों को लेकर सुहेलदेव की सेना से भिड़ गया और पहले ही दिन के भयंकर युद्ध में गजनबी के हजारों सैनिक गाजर मूली की तरह काट डाले गए*

*इस पर उस नाराधम ने अपने आतंकी सैनिकों को भेजकर रात में हजारों गाय चुरा लिया और सेना के आगे खड़ा कर दिया लेकिन परम प्रतापी सुहेलदेव को इसकी सूचना गुप्त चरो से मिल गए और उन्होंने सेना की दो टुकड़ियों बनाई एक को आगे और दूसरे को पीछे खड़ा किया इधर गाजी मियां या सोचकर प्रसन्न था की अब तो सनातनी लोग गायों पर तीर नहीं चलाएंगे और हम आगे बढ़ कर उन्हें आसानी से काट देंगे लेकिन जैसे ही अगले दिन युद्ध शुरू हुआ सुहेलदेव की आधी से अधिक सेना ने इन तुर्कों पर पीछे से भयानक आक्रमण किया और जब तक तुर्क संभाल पाते तब तक हजारों सैनिकों को काटकर गिरा दिया गया इस पर सैयद सालार बौखला कर भागा और वाराणसी जौनपुर होता हुआ मनेछा पहुंचा जहां गाजी मियां की सेना का भयंकर संहार चारों ओर से घेरकर किया गया और इस कार्य में स्थानीय सनातनी लोग शामिल हो गए जिधर भी  गाजी मियां निकलता गांव घर सब लोग गाजी मियां की सेना को काट डालते* 

*सारी सेना के नष्ट हो जाने पर कुछ चुने हुए सैनिकों को लेकर सैयद सालार बहराइच भागा और उस समय प्रसिद्ध मंदिर और उसके पास स्थित लोलार्क कुंड में फिर भयंकर युद्ध हुआ विजय की कोई आसान न देख और अपने सभी सैनिकों के मारे जाने पर गाजी मियां घबराकर लोलार्क कुंड के गहरे पानी में कूद गया लेकिन परम विक्रमशाली सुहेलदेव ने भीम भयंकर लंबा बल्लम मारकर उसके शरीर के आर पार करके उसे उठा लिया और वही दफन कर दिया यही गलती हुई उनसे*

*कालांतर में जब भारत में मुस्लिम राज्य हो गया तो उसे मुस्लिम शासकों ने मजार को पूजा स्थान बनाकर सनातनी लोगों को बाध्य किया कि उसके सामने सिर झुकाये और जत्थे के जत्थे मुसलमान भारत के चारों ओर भेजे जाते  जो लहबर लेकर जाते और जो उनको नीचे झुक कर सलाम नहीं करते उनका सिर काट लेते और महिलाओं को बंदी बना ले जाते इसीलिए जब भी गाजी मियां लहबर लेकर आते थे तो गांव की औरतें डर के कारण नीचे लेट कर उनकी बाकायदा पूजा पाठ करके खूब चढ़ावा देती थी आजाद भारत में कांग्रेस ने सही इतिहास बताने का प्रयास नहीं किया*

*1985 के आसपास भीषण जागृति पैदा हुई और हम लोगों के अथक प्रयासों से गांव-गांव में इन लोगों का आना देशभक्त परमवीर युवकों ने बंद कर दिया और अब कहीं भी गाजी मियां दिखाई नहीं पड़ते फिर भी हजारों लाखों मुर्ख हिंदू अभी भी गाजी मियां के मेले में जाकर अपना सिर झुकाते हैं और भारी-भरकम धनराशि देते हैं दुराचारी औरतें घरवालों को धोखा देकर दुराचार करके आ जाती हैं जैसे शिर्डी के साईं बाबा की असलियत उजागर हो गई वैसे गाजी मियां की असलियत लोग जान गए नतीजा अब केवल नाम मात्र के लोग जाते हैं*

*यही गाजी यही गाजी मियां का असली इतिहास है इसके बाद भी अगर मूर्ख हिंदू स्त्री पुरुष गाजी मियां की पूजा करते हैं या उनके मेले में जाते हैं तो कोई क्या कर सकता है इस सच्चाई को 10 20 50 हजार लाख करोड़ बार नहीं अरबों बार बताया जा चुका है आशा है आप लोग वास्तविक स्थिति समझ गए होंगे* डॉ दिलीप कुमार सिंह

मस्तिष्कों को सुन कर देने वाले महान सत्य -डा दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

मस्तिष्कों को सुन कर देने वाले महान सत्य-डा दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि
 हुमायूं 1540 में शेरशाह से हार कर ईरान भाग गया और 1555 में वापस आया अकबर का जन्म 1542 में हुआ अमरकोट में बाकी आप खुद समझ लीजिए मैं समझ में आए तो दिमाग पर जोर दीजिए‌ फिर भी ना समझ में आए तो अर्जुन का सबसे बड़ा और गंभीर प्रश्न श्रीमद् भागवत गीता में खोज लीजिए जिसमें उन्होंने भगवान कृष्ण से कहा कि मैं युद्ध किसी डर के कारण या सगे संबंधियों हत्या ‌ से बचने के कारण से नहीं करना चाहता बल्कि इसकी सही वजह है कि मैं केवल इसीलिए इस ब्रह्मांड व्यापी विश्व युद्ध में भाग नहीं लेना चाहता क्योंकि इसमें बहुत बड़ी संख्या में पुरुष मारे जाएंगे जिसके कारण महिलाओं की संख्या पुरुषों से कई गुना बढ़ जाएगी और पूरा विश्व वर्ण शंकर अर्थात दोगला हो जाएगा जो पूरी दुनिया और सृष्टि के लिए एक अभिशाप है 

इसको इस प्रकार भी समझा जा सकता है कि वैज्ञानिक दृष्टि से वर्णन शंकर प्रजातियां बहुत तेज होती हैं और बहुत अधिक उन्नत करती हैं लेकिन दूसरी तीसरी पीढ़ी जाते-जाते यह सब स्वयं भी बर्बाद होते हैं और देश जाति धर्म सब कुछ बर्बाद कर देते हैं यह एक अटल वैज्ञानिक सत्य है जैसे कि अधिक उत्पादन देने वाली प्रजातियों अधिक दूध देने वाली गाय और भैंस बहुत अधिक समय तक उस तरह नहीं रह पाती जर्सी गाय का उदाहरण देखा जा सकता है और सबसे बड़ी बात इनकी लागत इतनी अधिक होती है कि उसे अनुपात में उनका दूध बहुत ही कम होता है और सबसे बड़ी बात वर्णशंकर प्रजातियां की उत्पादकता मात्रा तो अधिक होती है लेकिन स्वास्थ्य वर्धन और पौष्टिकता बहुत ही कम होती है यह सब अकाट्य के वैज्ञानिक सत्य हैं ।

भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को समझाते हुए कहा था कि यदि ऐसा नहीं होगा तो कलयुग धरती पर आएगा कैसे और ईश्वर किया परिकल्पना है कि हर युग को बार बार आना है तब अर्जुन युद्ध करने के लिए तैयार हुए थे और सम्राट परीक्षित ऐसे महान राजा हुए जो कलयुग के सिर पर पैर रखकर स्वर्ग में आए विमान पर चढ़कर चले गए उसके बाद ही कलयुग का धरती पर आगमन संभव हो पाया था ।


कलयुग ने केवल पांच जगह राजा परीक्षित के पैर पकड़कर मांगा था जहां वहां रह सके इस पर राजा ने कहा जहां दुराचार हो जहां मदिरापान हो जहां नशे का वास हो जहां पर सोना हो और जहां परस्पर कलह हो तुमको मैं वहां बस जाने की आज्ञा देता हूं लेकिन वह भूल गए कि उनका मुकुट भी सोने का था बस तत्काल कलयुग को मौका मिला और सबसे पहले उनके सोने के मुकुट में घुस गया ।


सबको अपने भुज के बल से जीत लिया था उनके अंदर पाप बस गया और आगे चलकर गहन तपस्या में लीन ऋषि के गले में मरा हुआ सांप डाल दिया जब उनके पुत्र ने देखा तो शराब दे दिया कि जिस राजा ने ऐसा कर्म किया है उसको आज के सातवें दिन तक्षक नाग काट लेगा और उसकी मृत्यु को कोई बचा नहीं सकता ऐसा कलयुग का प्रभाव है ।


कलयुग से बचने का एक ही उपाय है ईश्वर का नाम और कीर्तन दुराचारी लोगों से दूरी नशापान मदिरापान करने वालों से बहुत अधिक दूरी और वर्ण शंकर प्रजातियों से अत्यधिक दूरी बनाकर रहे और कोई भी उपाय नहीं है क्योंकि चार लाख 32 हजार साल बहुत लंबी अवधि होती है ।

हर युग अपने परवर्ती युग का दुगना होता है कलयुग से दो गुना बड़ा द्वापर द्वापर से दो गुना बड़ा त्रेता और त्रेता से दो गुना बड़ा सतयुग होता है ।

रामायण महाभारत वेद पुराण और अन्य शास्त्रों में लिखा गया है इस सतयुग के मनुष्य 100000 वर्ष जीवित रहते थे उनकी ऊंचाई 32 फिट होती थी त्रेता आते-आते लोग 10000 वर्ष जीवित रहने लगे और उनकी ऊंचाई घटकर केवल 21 फिट रह गए थे द्वापर में मनुष्यों की औसत ऊंचाई 10 से 11 फिट रह गई और जीवनकाल 1000 वर्ष रह गया था कलयुग के लिए कहा गया है कि 5 फीट से  छह फीट लंबी मानव जाति होगी और अधिकतम 100 वर्ष कोई जी पाएगा यह सब वैज्ञानिक सत्य है जिसको जांचों परखा चुका है। 

इसका एक प्रमाण मिलता है जब भगवान श्री कृष्ण ने विश्व के अपराजिता यवन योद्धा जिससे मुस्लिम वंश चला था कालयवन से धरती के भार को मुक्त कराना चाहा जिसको कोई भी पराजित नहीं कर सकता था तब वह छल कपट का प्रयोग करते हुए उसे हिमालय पर्वत स्थित उस गुफा में ले गए जहां  ‌ ईश्वर और देवी देवताओं से वरदान प्राप्त सतयुग में संपूर्ण राक्षसों का विनाश करने वाला देवताओं का रक्षक सम्राट मचकुंद सो रहा था उसे भी का विशाल शरीर पर भगवान कृष्ण ने अपनी चादर फेंक दिया और गुफा में छुप गए कालयवन  जो लगभग 25 फीट लंबा और 10 कुंतल भारी था जब उसने यह देखा तो लात मार कर कहा अरे कर तू कितना देर छुप कर मुझसे रहेगा दौड़ते दौड़ते थक गया तो सो रहा है । या मुझे धोखा देने का प्रयास कर रहा है।

इसके बाद सम्राट मचकुंड उठे और जैसे उन्होंने आंख खोली उस भयंकर अग्नि ज्वाला निकाली और काले वन जलकर राख हो गया तब भगवान श्री कृष्ण के आगे प्रकट हुए और उन्होंने तत्काल पहचान लिया किया कि ‌ श्री कृष्णा भगवान श्री हरि विष्णु के अवतार हैं 

महाभारत और भागवत पुराण के मूल ग्रंथ में लिखा है कि जब सम्राट गुफा से बाहर आए तो अधिकांश पेड़ पौधे उनसे बहुत छोटे थे और मनुष्य तो उनके आगे बहुत ही छोटे दिखाई पड़ते थे आश्चर्यचकित होकर जब भगवान श्री कृष्णा उन्होंने यह सब जानना चाहा तो बोले हे राजन तीन युग बीत चुके और कलयुग आने वाला है इतना सुनने के बाद सम्राट मुचुकुंद विष्णु के धाम में चले गए कोई भी ज्ञान विज्ञान दर्शन शास्त्र और गणित नहीं है जो भारत वालों ने चरम विकास नहीं कर लिया था । और इसीलिए महाभारत काल में दिव्य अस्त्र-सूत्रों के प्रयोग से धरती का बड़ा भाग वीरान हो गया और सैकड़ो करोड़ लोग मारे गए और फिर से सभ्यता विकसित होने में 2000 वर्ष लग गए जिसे अंधकार कल कहा जाता है महाभारत के बाद भारत का इतिहास फिर मौर्य काल के आसपास प्रारंभ होता है।

लोग रामायण महाभारत धारावाहिक फिल्में देखते हैं इसलिए सच नहीं समझ पाते महाभारत में बिल्कुल स्पष्ट लिखा है कि यदि ब्रह्मास्त्र कहीं भी चलाया जाता है तो उसे क्षेत्र की सारी धरती ऊसरबंजर हो जाती है वहां घास का तिनका भी नहीं उग सकता है और 12 वर्ष तक वहां होने वाली सारी संताने पेड़ पौधे सब विकलांग और विषैले होते हैं ‌ नागासाकी हिरोशिमा और चेर्नोबिल का विनाश और परमाणु केदो में रेडिएशन से करने वाले वैज्ञानिक इस बात का जीता जागता प्रमाण है।इस सच को कोई भी पढ़कर जान सकता है ब्रह्मास्त्र की पूरी शक्ति का प्रयोग करने पर यह सारी धरती को नष्ट कर सकता था जबकि नारायण अस्त्र संपूर्ण आकाशगंगा को और भगवान श्री शिव जी का पाशुपतअस्त्र अनंत कोटि ब्रह्मांड को नष्ट कर सकता था।

सर विज्ञान इस सच पर मौन है एक तरफ तो कहते हैं प्रकाश की गति से अधिक कोई चीज नहीं चल सकती लेकिन कोई भी वैज्ञानिक इस महान सत्य को नहीं बता सका कि यदि ब्रह्मांड का जन्म लगभग 14 अरब वर्ष पहले हुआ तो यह 100 अब वर्ष कैसे फैल गया इसका उत्तर किसी गणितज्ञ वैज्ञानिक के पास नहीं इसका अर्थ यह होता है कि ब्रह्मांड का विस्तार प्रकाश की गति से 8 गुना तेजी से हुआ जो असंभव है यदि किसी के पास इसका उत्तर है तो मुझको इसका उत्तर देने की कृपा करें।

Sunday, 10 May 2026

आज जनपद न्यायालय जौनपुर में प्रशासनिक न्यायाधीश न्यायमूर्ति ‌ नीरज तिवारी का आगमन हुआ

आज जनपद न्यायालय जौनपुर में प्रशासनिक न्यायाधीश न्यायमूर्ति ‌ नीरज तिवारी का आगमन हुआ इस अवसर पर जनपद न्यायाधीश सुशील कुमार शशि ‌ प्रधान जज पारिवारिक न्यायालय ‌ ‌ प्रीति श्रीवास्तव न्यायाधीश स्थाई लोक अदालत ‌ लालचंद्र गुप्ता ‌ अध्यक्ष ‌ मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल मनोज कुमार अग्रवाल नोडल अधिकारी अपर जिला जज रंजीत कुमार ‌ सचिव सुशील कुमार सिंह सहित सभी न्यायाधीश ‌ जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक जौनपुर लीगल एड डिफेंस सिस्टम ‌ जनपद न्यायालय जौनपुर के अनिल कुमार सिंह डॉ दिलीप कुमार सिंह अनुराग चौधरी और प्रकाश तिवारी ‌ अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष सुभाष चंद्र यादव एवं मंत्री रण बहादुर यादव ‌बैंक  ‌ सहायक श्रमायुक्तके अधिकारी न्यायालय के कर्मचारीगण और बड़ी संख्या में वादकारीगण ‌ मीडियाकर्मी उपस्थित रहे।

सर्वप्रथम प्रशासनिक  न्यायमूर्ति नीरज तिवारी का स्वागत करके सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्ज्वलन ‌ का कार्यक्रम माननीय न्यामूर्ति के द्वारा किया गया इसी क्रम में नेहरू बालोद्यान की छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। 

प्रशासनिक न्यायमूर्ति ‌ नीरज तिवारीको बैंक के अधिकारियों द्वारा स्मृति चिन्ह और पुष्प गुच्छ शाल  एवं पादप प्रदान ‌ करके उनको सम्मानित किया गया।‌ इसके अतिरिक्त मंचासीन जनपद न्यायाधीश जिलाधिकारी पुलिस अधीक्षक अध्यक्ष अधिवक्ता संघ एवं अध्यक्ष मोटर एक्सीडेंट  क्लेम ट्रिब्यूनल प्रधान जज पारिवारिक न्यायालय को भी पुष्प गुच्छ और पौधे देकर सम्मानित किया गया।इसी क्रम में 5 पैरा लीगल वॉलिंटियर्स ‌ को सम्मानित किया गया और ‌ उल्लेखनीय कार्य करने वाले श्रमिकों एवं विकलांग व्यक्तियों का सम्मानित करके उन्हें व्हील चेयर सिलाई मशीन इत्यादि प्रदान किया गया।
इस अवसर पर सिविल क्रिमिनल बैंक बीमा एन आई एक्ट राजस्व प्रीलिटिगेशन एवं पारिवारिक वादों का हजारों की संख्या में निस्तारण करके करोड़ों रूपयो की क्षतिपूर्ति एवं प्रतिकर पीड़ित पक्षकारों को दिलाया गया। 

जनपद न्यायाधीश जौनपुर के द्वारा लोक अदालत के संबंध में विवरण प्रस्तुत किया गया और इसी क्रम में उपस्थित समस्त लोगों को न्यायमूर्ति नीरज तिवारी द्वारा संबोधित करते हुए आशीर्वचन दिया गया ‌ कार्यक्रम का संचालन पूर्ण कालिक सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण  ‌ सुशील कुमार सिंह के द्वारा किया गया

Tuesday, 5 May 2026

पांच राज्यों में हुए चुनाव का निष्पक्ष विश्लेषण -डॉ दिलीप कुमार सिंह

पांच राज्यों में हुए चुनाव का निष्पक्ष विश्लेषण -डॉ दिलीप कुमार सिंह 
भारत में पांच राज्यों में मतदान सबसे चर्चित विषय रहा जिन पांच राज्यों में चुनाव हुआ उनमें सभी अत्यंत महत्वपूर्ण थे जिसमें से बंगाल और असम सीमा प्रांत होने के कारण बहुत संवेदनशील थे। जबकि तमिलनाडु केरल और पुडुचेरी दक्षिण भारत के राज्य थे बंगाल के अलावा तमिलनाडु और केरल और पंजाब ऐसे राज्य हैं जहां भाजपा ने कभी भी सत्ता में सीधे प्रतिभा नहीं किया इसलिए इस बार के चुनाव में यह सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण था।

मतदान के पूर्व जो सर्वेक्षण आए थे वह इस बार काफी हद तक ठीक-ठाक रहे लेकिन हमारे केंद्र की भविष्यवाणी एक बार फिर 100% सही उतरी लगभग सभी मतदान सर्वेक्षण में असम और पुडुचेरी में भाजपा गठबंधन को और बंगाल में कांटे का मुकाबला दिखाते हुए तमिलनाडु में ग्रामीण मुनेत्र कड़गम और केरल में यूडीएफ को विजय दिखाया गया था। 

जबकि हमारे केंद्र के द्वारा बंगाल असम और पुडुचेरी में भाजपा गठबंधन की सीधी विजय की भविष्यवाणी की गई थी लेकिन बंगाल में 165 सीटों के मुकाबले भी भाजपा ने 286 सिम प्राप्त कर लिया तमिलनाडु में किसी तीसरे गठबंधन की एकमात्र भविष्यवाणी हमारे केंद्र के द्वारा की गई थी जो टीवीके के विजय होने के साथ पूरी तरह सही हुई ‌ केरल में भाजपा गठबंधन का तीन सीट प्राप्त करना काफी महत्वपूर्ण रहा जबकि तमिलनाडु में भाजपा एक बार फिर से असफल रही। ‌ इन समस्त बिंदुओं का निष्पक्ष और सही विश्लेषण आवश्यक है कि ऐसा क्यों रहा। 

सबसे पहले हम चुनाव परिणाम पर आते हैं पश्चिम बंगाल में कुल 294 सीटें थी‌। लेकिन चुनाव 293 सीट पर हुए आवश्यक बहुमत 147 था लेकिन भाजपा गठबंधन ने 46% मत पाकर और 206 सीट पर सबको आश्चर्य में डाल दिया जबकि कांग्रेस का लगातार चौथी बार विजयी होने का सपना चूर-चूर हो गया ‌ उसकी केवल 81 सीटें और 41% वोट प्राप्त हुए यहां पर ध्यान देना आवश्यक है कि पिछली बार त्रृणमूल कांग्रेस को जबरदस्त 216 स्थान और भाजपा को केवल 77 स्थान प्राप्त हुए थे।

भाजपा में ममता की पराजय और भाजपा की विजय के अनेक कारण चुनाव विश्लेषक देते हैं लेकिन इसमें सबसे प्रमुख भूमिका एस आई आर पी रही जिसमें भाजपा विरोधी लाखों मतदाता जो फर्जी थे हट गए। और यह सबसे बड़ा कारण सिद्ध हुआ क्योंकि यहां पर विजय बहुत अधिक अंतर से नहीं हुआ था और हर एक स्थान से हटाए गए मतदाता उतने ही थे लगभग जीतने से अधिकांश प्रत्याशी विजयी हुए ‌ दूसरा सबसे महत्वपूर्ण कारण योगी जी का जबरदस्त चुनाव प्रचार और उनकी लोकप्रियता थी सच पूछा जाए तो उनके आने के बाद ही भगवा रंग बंगाल की जनता के बीच परवान चढ़ा और हर जगह योगी योगी और उनका बुलडोजर मॉडल कानून व्यवस्था प्रमुख मुद्दा रहा। 

इसके अतिरिक्त महिला डॉक्टर के साथ हुए बलात्कार कांड ने और उसे पर ममता सरकार की जबरदस्त लीपा पोती ने जन आक्रोश को भड़का दिया सनातन धर्म पर ममता की तीखी टिप्पणी और 5 साल में हजारों हत्या लूट बलात्कार और मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में अत्याचार में सभी सनातनी लोगों को एकजुट किया वह समझ गए कि इस बार नहीं तो कभी नहीं क्योंकि अगले चुनाव तक मुस्लिम मतदाता हर जगह बहुत संख्या हो जाते‌ इसके अतिरिक्त अमित शाह का डेरा डाल देना बहुत बड़ी संख्या में सेना और अर्धसैनिक बलों की नियुक्ति ‌ ममता समर्थक बेईमान अधिकारियों को हटाना और मोदी योगी अमित शाह की धुआंधार चुनावी सभाएं रही और तमाम रक्त पाठ के बाद भी सनातनी जनता ने अपने जान जोखिम में डालकर भाजपा को प्रचंड विजय देकर उसके सभी बहाने बाजी को हमेशा के लिए बंद कर दिया ‌ इसके अतिरिक्त हजारों की संख्या में हर महीने घुसने वाले भगोड़े और आतंकी कानून व्यवस्था की बहुत ही खराब स्थिति महिलाओं पर अत्याचार और भाजपा सरकार द्वारा लोक लुभावना नारों पर भी इसका खूब असर पड़ा।

इसके बाद हम असम पर आते हैं जो बंगाल की तरह बहुत ही संवेदनशील और घुसपैठियों की सबसे अधिक पीड़ा सहन करने वाला राज्य है इस पर बहुत व्यापक आंदोलन भी चलाएंगे यहां कुल 126 सीटें हैं ‌ बहुमत के लिए ‌ 64 विधायकों की आवश्यकता होती है इस बार भाजपा ने पिछले प्रदर्शन से बहुत ऊपर उठकर 102 सिम प्राप्त किया जबकि पिछली बार उसकी केवल 75 स्थान मिले थे कांग्रेस का यहां लगभग सफाया हो गया पिछली बार 50 सीटों से वह केवल 21 स्थान पर सिमट गई निर्दल भी केवल एक स्थान पर सके

इस चुनाव में हेमंत विश्व शर्मा का अपना स्वयं का कद और आकर्षक तथा देशभक्त और उनके किए गए कार्य ‌ योगी की तरह निडरता पूर्वक सनातन धर्म का पक्ष ग्रहण करना ‌ और बांग्लादेशी घुसपैठियों द्वारा मार्केट बलात्कार जमीनी कब्ज और कांग्रेस द्वारा उसे समर्थन देना सनातन धर्म को एक करने और हिमंत विश्व शर्मा की प्रचंड विजय का कारण बना और अब और भी अधिक तीव्रता के साथ असम में सनातन धर्म का प्रचार प्रसार होगा। उल्लेखनीय है कि भाजपा यहां पर 48 प्रतिशत वोट पाई जो एक विमान है।


सबसे अधिक चर्चा और निगाहें तमिलनाडु के चुनाव पर भी ‌ लगी हुई थी जहां आजादी के बाद से केवल दो पार्टियों के बीच सट्टा बारी-बारी से विभाजित होती रहती थी। इस बार हमारे केंद्र को छोड़कर सभी ने फिर से डीएमके के सत्ता में आने की घोषणा की जबकि मैं तीसरे गठबंधन अर्थात टीवी के लिए जो भविष्यवाणी किया था वह पूरी तरह सही हुई और सारे इतिहास को बदलते हुए अभिनेता विजय तमिलनाडु की जनता में पहले ही प्रयास में छा गए और 107 सिम जीतकर इतिहास रच दिया उन्हें 35% मत प्राप्त हुए जबकि अन्ना धर्म की 51 और प्रमुख 65 सीटों पर ही सिमट गई पिछली बार अन्ना को 75 और डीएमके को 159 सीट मिली थी। यहां पर जनता हिंदी विरोध और दोनों दलों के भ्रष्टाचार से बुरी तरह उठ चुकी थी बढ़ता हुआ मुस्लिम तुष्टिकरण भी इसका एक बहुत बड़ा कारण बना न्यायपालिका के दीप जलाने के निर्णय भी प्रभावकारी रहे बहुत ही फिल्में अंदाज में फिल्म अभिनेता विजय ने तमिलनाडु की राजनीति में प्रवेश किया और सभी पूर्ण धारणाओं को निर्मल सिद्ध कर दिया तमिलनाडु की जनता देश के मुख्य धारा में जुड़कर विकास चाहती है यह अच्छी तरह से विजय समझ चुके थे लेकिन यहां सबसे अधिक निराशा मोदी जी और भाजपा को प्राप्त हुई उनका कोई भी जादू यहां नहीं चल पाया योगी जी को यहां प्रचार नहीं करने दिया गया इसका भी बहुत बड़ा नुकसान हुआ। आशा है कि अगले 5 साल में विजय तमिलनाडु को देश के मुख्य धारा से जोड़कर उसे विकास के रास्ते पर ले आएंगे 

अगला राज्य केरल शाह जहां आजादी के समय से आज तक सत्ता कांग्रेस और वाम दलों के बीच विभाजित होती रहती थी इस बार भी ऐसा ही हुआ लगभग सभी सर्वेक्षण में और हमारे केंद्र के अनुसार भी कांग्रेस समर्थित यूडीएफ के विजई होने की भविष्यवाणी सही हुई जहां पर पंजाब के अलावा दूसरा राज्य केरल बना जहां भाजपा अपना मान सम्मान बढ़ाने में सफल रहे कल 140 सीटों में बहुमत के लिए 71 सीट आवश्यक होती है। लेकिन कांग्रेस गठबंधन ने 102 सिम प्राप्त कर दो तिहाई से अधिक बहुमत प्राप्त कर लिया और वह मॉडल 35 सीटों पर सिमट कर रह गए पिछली बार आम दलों को 99 सीट प्राप्त हुई थी। यहां पर तीन सीट भाजपा गठबंधन ने भी प्राप्त किया और एक इतिहास बनाया। 

केरल में मुस्लिम धर्मांतरण और सनातनी धर्म के मंदिरों पर किया गया प्रहार निर्णायक भूमिका में रहा जिसमें पद्मनाभ मंदिर और सबरी माला मंदिर ने निर्णायक भूमिका निभाई और न्यायपालिका को बताया कि हम अपने धार्मिक बिंदुओं में हस्तक्षेप सहन नहीं कर पाएंगे वाम दलों से लोग बहुत लंबे समय से पूरी तरह ऊब चुके थे।‌ लव जिहाद की अनगिनत घटनाएं हो रही थी खाड़ी देशों में महिलाओं को निर्यात किया जा रहा था केरल के अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित थी महंगाई की मार और कश्मीर फाइल्स ने भी इसमें निर्णायक भूमिका निभाया सबसे अधिक पढ़े लिखे शिक्षित लोगों का प्रदेश केरल इस बार अलग ढंग से सामने आया और यह संदेश आया कि देश की मुख्य धारा से जुड़कर ही चलना चाहते हैं 


अंतिम राज्य पुडुचेरी था जो एक संघ शासित प्रदेश है जहां केवल 30 स्थान हैं इस बार भाजपा गठबंधन ने 18 स्थान पर विजय प्राप्त किया जो पिछली बार से दो अधिक है कल 35% मतदान लोगों ने भाजपा गठबंधन को दिया अन्य लोगों को इस वर्ष स्थान से संतोष करना पड़ा पुडुचेरी में महर्षि रमण और ओशो का आश्रम है यहां लोग पढ़े-लिखे और समझदार हैं और देश की मुख्य धारा के साथ ही रहना चाहते हैं ‌ असम की तरह यहां भी सत्ता में कोई परिवर्तन नहीं हुआ 

इस प्रकार कहा जा सकता है कि सभी राज्यों के आम चुनाव में यह दिखाया कि देश की जनता देश के मुख्य धारा से जुड़कर आगे बढ़ना चाहती है जिसको रोकने वाले राजनेता और परियों बहुत बुरी तरह से हार गई हिंदी विरोध करने वाले और उत्तर भारत का विरोध करने वाले डीएम के और अन्ना डीएमके का हरण बहुत ही सुखद आश्चर्य है देश बढ़ती महंगाई बेरोजगारी से बुरी तरह परेशान है और आने वाले समय में लोग हमेशा आपस में लड़ने वाले लोगों से दूर ही रहना चाहते हैं इस एन मोदी अमित शाह के अलावा योगी जी को सर्वशक्तिमान और लोकप्रिय नेता के रूप में स्थापित करके उन्हें अग्रिम प्रधानमंत्री होने की सुखद सूचना दे दी है यदि इसका अंदर या बाहर विरोध हुआ तो वह लोग भी हसीए पर चले जाएंगे लोग किसी भी हालत में शांति कानून व्यवस्था चाहते हैं अपराधी लोगों और घुसपैठियों तथा आतंकी अराजक तत्वों को दमन करके सच्चा देशभक्त और सनातनी ही देश का लोकप्रिय व्यक्ति होगा इस बात का जनता ने बिल्कुल स्पष्ट रूप से संकेत दे दिया है यह मोदी जी और अमित शाह के लिए भी सीधा-सीधा संदेश है इसके अलावा हर एक राज्य में जनता ने पूर्ण बहुमत के साथ विजय लोगों को शासन सौंप कर उनके सारे किंतु परंतु और बहाने बाजी को दरकिनार कर दिया है

Monday, 4 May 2026

मौसम की भविष्यवाणी जौनपुर और आसपास में महीने में 100 वर्ष का सबसे कम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस अंकित किया गया और आज सुबह की सर्दी ने सबको कंबल ओढ़ने पर विवश कर दिया

मौसम की भविष्यवाणी जौनपुर और आसपास में महीने में 100 वर्ष का सबसे कम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस अंकित किया गया और आज सुबह की सर्दी ने सबको कंबल ओढ़ने पर विवश कर दिया 

अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस रहा और अभी कई दशक का सबसे कम तापमान है वायु गुणवत्ता सूचकांक 40 से 70 के बीच और वायु की दिशा पूर्वी तथा वायु की गति 15 से 25 किलोमीटर प्रति घंटा रहे पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 2 से 5 पर रही।

आज दिन में घने बादलों के साथ कई बार बूंदाबांदी और हल्की वर्षा जौनपुर और आसपास के सभी क्षेत्र में होने की प्रबल संभावना है कल भी मौसम लगभग इसी प्रकार का रहेगा लेकिन इस प्रकार बादल वर्षा धूप छांव और तेज हवाओं आंधी तूफान का क्रम अभी 9 म ई के बाद ही समाप्त होगा।

कल भी कहीं-कहीं बूंदाबांदी और हल्की वर्षा होने की संभावना बनी हुई है बाकी स्थितियां आज की तरह ही रहेगी अधिकतम और न्यूनतम तापमान में 2 से 5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होगी 

कल का अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस होने की प्रबल संभावना है 10 में के बाद एक बार मौसम फिर परसेंट रूप से गर्मी की तरफ बढ़ जाएगा -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक

Sunday, 3 May 2026

आज और कल के मौसम की भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर

आज और कल के मौसम की भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 


आज और कल दोपहर के बाद और रात में भी आंधी पानी तूफान वज्रपात बिजली की चमक और गरज के साथ होगी तेज वर्षा 

शुभ और मांगलिक कार्यों वाले लोग सावधान रहें और तदअनुसार अपनी व्यवस्था करें 


आज का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस रहेगा वायु गुणवत्ता सूचकांक 40 से 60 पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 5 से 7 दिशा पूर्वी उत्तर पूर्वी और गति 15 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे रहेगी 

दोपहर के बाद कभी भी झंझा झकोर घन गर्जन वज्रपात वारिदमाला बिजली ‌ की भयानक चमक और भीषण गरज के साथ जौनपुर मध्यम से भारी कहीं  कहीं बहुत भारी वर्षा होगी।

कल के बारे में अनुमान है कि अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 22 डिग्री के साथ ठंड और सुहावना रहेगा और मैं महीने में फरवरी जैसा दृश्य उत्पन्न होगा यह आगे आने वाले समय के लिए बहुत खराब रहेगा सूचकांक करने की तीव्रता और हवा की गति आज की तरह ही रहेगी 

इस प्रकार हमारे केंद्र की वह भविष्यवाणी बिल्कुल सही होगी जिसमें एक म ई से 9 म ई तक मौसम बहुत सुहावना सुखद और ठंडा रहेगा लेकिन वर्ष कल के लिए यह बहुत दुखद रहेगा। एल नीनो और सौरमंडल के प्रभाव के कारण खंड वर्षा बाढ़ काल सुख भीषण गर्मी आंधी तूफान चक्रवात का सामना वर्षा काल में करना होगा