Tuesday, 12 May 2026

मस्तिष्कों को सुन कर देने वाले महान सत्य -डा दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

मस्तिष्कों को सुन कर देने वाले महान सत्य-डा दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि
 हुमायूं 1540 में शेरशाह से हार कर ईरान भाग गया और 1555 में वापस आया अकबर का जन्म 1542 में हुआ अमरकोट में बाकी आप खुद समझ लीजिए मैं समझ में आए तो दिमाग पर जोर दीजिए‌ फिर भी ना समझ में आए तो अर्जुन का सबसे बड़ा और गंभीर प्रश्न श्रीमद् भागवत गीता में खोज लीजिए जिसमें उन्होंने भगवान कृष्ण से कहा कि मैं युद्ध किसी डर के कारण या सगे संबंधियों हत्या ‌ से बचने के कारण से नहीं करना चाहता बल्कि इसकी सही वजह है कि मैं केवल इसीलिए इस ब्रह्मांड व्यापी विश्व युद्ध में भाग नहीं लेना चाहता क्योंकि इसमें बहुत बड़ी संख्या में पुरुष मारे जाएंगे जिसके कारण महिलाओं की संख्या पुरुषों से कई गुना बढ़ जाएगी और पूरा विश्व वर्ण शंकर अर्थात दोगला हो जाएगा जो पूरी दुनिया और सृष्टि के लिए एक अभिशाप है 

इसको इस प्रकार भी समझा जा सकता है कि वैज्ञानिक दृष्टि से वर्णन शंकर प्रजातियां बहुत तेज होती हैं और बहुत अधिक उन्नत करती हैं लेकिन दूसरी तीसरी पीढ़ी जाते-जाते यह सब स्वयं भी बर्बाद होते हैं और देश जाति धर्म सब कुछ बर्बाद कर देते हैं यह एक अटल वैज्ञानिक सत्य है जैसे कि अधिक उत्पादन देने वाली प्रजातियों अधिक दूध देने वाली गाय और भैंस बहुत अधिक समय तक उस तरह नहीं रह पाती जर्सी गाय का उदाहरण देखा जा सकता है और सबसे बड़ी बात इनकी लागत इतनी अधिक होती है कि उसे अनुपात में उनका दूध बहुत ही कम होता है और सबसे बड़ी बात वर्णशंकर प्रजातियां की उत्पादकता मात्रा तो अधिक होती है लेकिन स्वास्थ्य वर्धन और पौष्टिकता बहुत ही कम होती है यह सब अकाट्य के वैज्ञानिक सत्य हैं ।

भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को समझाते हुए कहा था कि यदि ऐसा नहीं होगा तो कलयुग धरती पर आएगा कैसे और ईश्वर किया परिकल्पना है कि हर युग को बार बार आना है तब अर्जुन युद्ध करने के लिए तैयार हुए थे और सम्राट परीक्षित ऐसे महान राजा हुए जो कलयुग के सिर पर पैर रखकर स्वर्ग में आए विमान पर चढ़कर चले गए उसके बाद ही कलयुग का धरती पर आगमन संभव हो पाया था ।


कलयुग ने केवल पांच जगह राजा परीक्षित के पैर पकड़कर मांगा था जहां वहां रह सके इस पर राजा ने कहा जहां दुराचार हो जहां मदिरापान हो जहां नशे का वास हो जहां पर सोना हो और जहां परस्पर कलह हो तुमको मैं वहां बस जाने की आज्ञा देता हूं लेकिन वह भूल गए कि उनका मुकुट भी सोने का था बस तत्काल कलयुग को मौका मिला और सबसे पहले उनके सोने के मुकुट में घुस गया ।


सबको अपने भुज के बल से जीत लिया था उनके अंदर पाप बस गया और आगे चलकर गहन तपस्या में लीन ऋषि के गले में मरा हुआ सांप डाल दिया जब उनके पुत्र ने देखा तो शराब दे दिया कि जिस राजा ने ऐसा कर्म किया है उसको आज के सातवें दिन तक्षक नाग काट लेगा और उसकी मृत्यु को कोई बचा नहीं सकता ऐसा कलयुग का प्रभाव है ।


कलयुग से बचने का एक ही उपाय है ईश्वर का नाम और कीर्तन दुराचारी लोगों से दूरी नशापान मदिरापान करने वालों से बहुत अधिक दूरी और वर्ण शंकर प्रजातियों से अत्यधिक दूरी बनाकर रहे और कोई भी उपाय नहीं है क्योंकि चार लाख 32 हजार साल बहुत लंबी अवधि होती है ।

हर युग अपने परवर्ती युग का दुगना होता है कलयुग से दो गुना बड़ा द्वापर द्वापर से दो गुना बड़ा त्रेता और त्रेता से दो गुना बड़ा सतयुग होता है ।

रामायण महाभारत वेद पुराण और अन्य शास्त्रों में लिखा गया है इस सतयुग के मनुष्य 100000 वर्ष जीवित रहते थे उनकी ऊंचाई 32 फिट होती थी त्रेता आते-आते लोग 10000 वर्ष जीवित रहने लगे और उनकी ऊंचाई घटकर केवल 21 फिट रह गए थे द्वापर में मनुष्यों की औसत ऊंचाई 10 से 11 फिट रह गई और जीवनकाल 1000 वर्ष रह गया था कलयुग के लिए कहा गया है कि 5 फीट से  छह फीट लंबी मानव जाति होगी और अधिकतम 100 वर्ष कोई जी पाएगा यह सब वैज्ञानिक सत्य है जिसको जांचों परखा चुका है। 

इसका एक प्रमाण मिलता है जब भगवान श्री कृष्ण ने विश्व के अपराजिता यवन योद्धा जिससे मुस्लिम वंश चला था कालयवन से धरती के भार को मुक्त कराना चाहा जिसको कोई भी पराजित नहीं कर सकता था तब वह छल कपट का प्रयोग करते हुए उसे हिमालय पर्वत स्थित उस गुफा में ले गए जहां  ‌ ईश्वर और देवी देवताओं से वरदान प्राप्त सतयुग में संपूर्ण राक्षसों का विनाश करने वाला देवताओं का रक्षक सम्राट मचकुंद सो रहा था उसे भी का विशाल शरीर पर भगवान कृष्ण ने अपनी चादर फेंक दिया और गुफा में छुप गए कालयवन  जो लगभग 25 फीट लंबा और 10 कुंतल भारी था जब उसने यह देखा तो लात मार कर कहा अरे कर तू कितना देर छुप कर मुझसे रहेगा दौड़ते दौड़ते थक गया तो सो रहा है । या मुझे धोखा देने का प्रयास कर रहा है।

इसके बाद सम्राट मचकुंड उठे और जैसे उन्होंने आंख खोली उस भयंकर अग्नि ज्वाला निकाली और काले वन जलकर राख हो गया तब भगवान श्री कृष्ण के आगे प्रकट हुए और उन्होंने तत्काल पहचान लिया किया कि ‌ श्री कृष्णा भगवान श्री हरि विष्णु के अवतार हैं 

महाभारत और भागवत पुराण के मूल ग्रंथ में लिखा है कि जब सम्राट गुफा से बाहर आए तो अधिकांश पेड़ पौधे उनसे बहुत छोटे थे और मनुष्य तो उनके आगे बहुत ही छोटे दिखाई पड़ते थे आश्चर्यचकित होकर जब भगवान श्री कृष्णा उन्होंने यह सब जानना चाहा तो बोले हे राजन तीन युग बीत चुके और कलयुग आने वाला है इतना सुनने के बाद सम्राट मुचुकुंद विष्णु के धाम में चले गए कोई भी ज्ञान विज्ञान दर्शन शास्त्र और गणित नहीं है जो भारत वालों ने चरम विकास नहीं कर लिया था । और इसीलिए महाभारत काल में दिव्य अस्त्र-सूत्रों के प्रयोग से धरती का बड़ा भाग वीरान हो गया और सैकड़ो करोड़ लोग मारे गए और फिर से सभ्यता विकसित होने में 2000 वर्ष लग गए जिसे अंधकार कल कहा जाता है महाभारत के बाद भारत का इतिहास फिर मौर्य काल के आसपास प्रारंभ होता है।

लोग रामायण महाभारत धारावाहिक फिल्में देखते हैं इसलिए सच नहीं समझ पाते महाभारत में बिल्कुल स्पष्ट लिखा है कि यदि ब्रह्मास्त्र कहीं भी चलाया जाता है तो उसे क्षेत्र की सारी धरती ऊसरबंजर हो जाती है वहां घास का तिनका भी नहीं उग सकता है और 12 वर्ष तक वहां होने वाली सारी संताने पेड़ पौधे सब विकलांग और विषैले होते हैं ‌ नागासाकी हिरोशिमा और चेर्नोबिल का विनाश और परमाणु केदो में रेडिएशन से करने वाले वैज्ञानिक इस बात का जीता जागता प्रमाण है।इस सच को कोई भी पढ़कर जान सकता है ब्रह्मास्त्र की पूरी शक्ति का प्रयोग करने पर यह सारी धरती को नष्ट कर सकता था जबकि नारायण अस्त्र संपूर्ण आकाशगंगा को और भगवान श्री शिव जी का पाशुपतअस्त्र अनंत कोटि ब्रह्मांड को नष्ट कर सकता था।

सर विज्ञान इस सच पर मौन है एक तरफ तो कहते हैं प्रकाश की गति से अधिक कोई चीज नहीं चल सकती लेकिन कोई भी वैज्ञानिक इस महान सत्य को नहीं बता सका कि यदि ब्रह्मांड का जन्म लगभग 14 अरब वर्ष पहले हुआ तो यह 100 अब वर्ष कैसे फैल गया इसका उत्तर किसी गणितज्ञ वैज्ञानिक के पास नहीं इसका अर्थ यह होता है कि ब्रह्मांड का विस्तार प्रकाश की गति से 8 गुना तेजी से हुआ जो असंभव है यदि किसी के पास इसका उत्तर है तो मुझको इसका उत्तर देने की कृपा करें।

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