Tuesday, 12 May 2026

सनातन धर्म का महान हत्यारा सैयद सालार मसूद उपनाम गाजी मियां

सनातन धर्म का महान हत्यारा सैयद सालार मसूद उपनाम गाजी मियां 
                       डॉ दिलीप कुमार सिंह


*जो भी गैर मुसलमान नीच हत्यारे और दुराचारी गाजी मियां के मेले में शामिल होते हैं चाहे वह मानेछा हो या खेता सराय हो या बहराइच हो उन महामूर्ख लोगों के लिए मैं गाजी मियां का सच्चा ऐतिहासिक तथ्य बताता हूं*

*गाजी मियां का असली नाम सैयद सालार गजनबी था जो शैतान आक्रांता और शूर्पणखा के वंशज महमूद गजनी का भतीजा था उसके पास एक आतताई आतंकवादी सेना थी*

*वह अपने चाचा महमूद गजनवी के अधूरे संकल्प को पूरा करना चाहता था और इसलिए उसने प्रण किया था कि 5000 सनातनी लोगों के धर्म परिवर्तन या हत्या के बाद जलपान और 100000 लोगों की हत्या या धर्म परिवर्तन के बाद में भोजन करूंगा इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उसने अफगानिस्तान से वाराणसी तक विशन लूटमार मचाई*

*हद तो तब हो गई जब उसने जबरदस्ती वाराणसी के तत्कालीन राजा की पुत्री से जबरदस्ती विवाह करने का संदेश राजा के पास भेज दिया डर के मारे कोई प्रतिरोध करने को तैयार नहीं हुआ*

*इसी बीच हुआ राक्षस आतंकी हत्यारा पाकिस्तान पंजाब हरियाणा दिल्ली मथुरा मेरठ को रौंदता हुआ लखनऊ और वाराणसी के पास आ पहुंचा रास्ते में लाखों लोगों का कत्लेआम किया अनगिनत महिलाओं को लूटा भीषण बलात्कार हत्या और लूटपाट से पूरा भारत कांप गया*

*श्रावस्ती के सम्राट वीर सुहेलदेव ने ऐसी विषम परिस्थितियों में उस आतंकी शैतान लुटेरे से लोहा लेने का निश्चय किया और देशभक्त वीर सैनिकों को लेकर सुहेलदेव की सेना से भिड़ गया और पहले ही दिन के भयंकर युद्ध में गजनबी के हजारों सैनिक गाजर मूली की तरह काट डाले गए*

*इस पर उस नाराधम ने अपने आतंकी सैनिकों को भेजकर रात में हजारों गाय चुरा लिया और सेना के आगे खड़ा कर दिया लेकिन परम प्रतापी सुहेलदेव को इसकी सूचना गुप्त चरो से मिल गए और उन्होंने सेना की दो टुकड़ियों बनाई एक को आगे और दूसरे को पीछे खड़ा किया इधर गाजी मियां या सोचकर प्रसन्न था की अब तो सनातनी लोग गायों पर तीर नहीं चलाएंगे और हम आगे बढ़ कर उन्हें आसानी से काट देंगे लेकिन जैसे ही अगले दिन युद्ध शुरू हुआ सुहेलदेव की आधी से अधिक सेना ने इन तुर्कों पर पीछे से भयानक आक्रमण किया और जब तक तुर्क संभाल पाते तब तक हजारों सैनिकों को काटकर गिरा दिया गया इस पर सैयद सालार बौखला कर भागा और वाराणसी जौनपुर होता हुआ मनेछा पहुंचा जहां गाजी मियां की सेना का भयंकर संहार चारों ओर से घेरकर किया गया और इस कार्य में स्थानीय सनातनी लोग शामिल हो गए जिधर भी  गाजी मियां निकलता गांव घर सब लोग गाजी मियां की सेना को काट डालते* 

*सारी सेना के नष्ट हो जाने पर कुछ चुने हुए सैनिकों को लेकर सैयद सालार बहराइच भागा और उस समय प्रसिद्ध मंदिर और उसके पास स्थित लोलार्क कुंड में फिर भयंकर युद्ध हुआ विजय की कोई आसान न देख और अपने सभी सैनिकों के मारे जाने पर गाजी मियां घबराकर लोलार्क कुंड के गहरे पानी में कूद गया लेकिन परम विक्रमशाली सुहेलदेव ने भीम भयंकर लंबा बल्लम मारकर उसके शरीर के आर पार करके उसे उठा लिया और वही दफन कर दिया यही गलती हुई उनसे*

*कालांतर में जब भारत में मुस्लिम राज्य हो गया तो उसे मुस्लिम शासकों ने मजार को पूजा स्थान बनाकर सनातनी लोगों को बाध्य किया कि उसके सामने सिर झुकाये और जत्थे के जत्थे मुसलमान भारत के चारों ओर भेजे जाते  जो लहबर लेकर जाते और जो उनको नीचे झुक कर सलाम नहीं करते उनका सिर काट लेते और महिलाओं को बंदी बना ले जाते इसीलिए जब भी गाजी मियां लहबर लेकर आते थे तो गांव की औरतें डर के कारण नीचे लेट कर उनकी बाकायदा पूजा पाठ करके खूब चढ़ावा देती थी आजाद भारत में कांग्रेस ने सही इतिहास बताने का प्रयास नहीं किया*

*1985 के आसपास भीषण जागृति पैदा हुई और हम लोगों के अथक प्रयासों से गांव-गांव में इन लोगों का आना देशभक्त परमवीर युवकों ने बंद कर दिया और अब कहीं भी गाजी मियां दिखाई नहीं पड़ते फिर भी हजारों लाखों मुर्ख हिंदू अभी भी गाजी मियां के मेले में जाकर अपना सिर झुकाते हैं और भारी-भरकम धनराशि देते हैं दुराचारी औरतें घरवालों को धोखा देकर दुराचार करके आ जाती हैं जैसे शिर्डी के साईं बाबा की असलियत उजागर हो गई वैसे गाजी मियां की असलियत लोग जान गए नतीजा अब केवल नाम मात्र के लोग जाते हैं*

*यही गाजी यही गाजी मियां का असली इतिहास है इसके बाद भी अगर मूर्ख हिंदू स्त्री पुरुष गाजी मियां की पूजा करते हैं या उनके मेले में जाते हैं तो कोई क्या कर सकता है इस सच्चाई को 10 20 50 हजार लाख करोड़ बार नहीं अरबों बार बताया जा चुका है आशा है आप लोग वास्तविक स्थिति समझ गए होंगे* डॉ दिलीप कुमार सिंह

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