Friday, 29 May 2026

धरती पर क्यों बढ़ रही है ‌ प्रलयंकारी गर्मी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

: धरती पर क्यों बढ़ रही है ‌ प्रलयंकारी गर्मी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 

पृथ्वी लगातार गर्म हो रही है और ऐसा हमें प्रत्यक्ष देखने को मिल रहा है इस समय संपूर्ण भारत सहित धरती का बहुत बड़ा भाग प्रचंड गर्मी से जूझ रहा है अमेरिका और यूरोप जैसे ठंडे और सुंदर देश भी 35 से 40 डिग्री सेल्सियस की भयंकर और कल्पना के पार की गर्मी झेल रहे हैं जहां पहले हो वैशाख और जेठ अर्थात मैं और जून ही भयंकर गम महीने होते थे वही या गर्मी बढ़कर अब मार्च से अक्टूबर तक फैल गए हैं जिससे संपूर्ण बर्फ और हिम्मत सूखते जा रहे हैं और पर्वत शिखर बर्फ विहीन होते जा रहे हैं और दुनिया एक ग्रीनहाउस इफेक्ट का घर बन चुकी है और यह एक तपती भट्टी बन चुकी है तो आइए हम देखते हैं कि प्रकृति में ऐसा भयंकर परिवर्तन क्यों हो रहा है 

1-  ‌ हरियाली और पेड़ पौधों का विनाश-

धरती पर लगातार गर्मी बढ़ते चले जाने का सबसे प्रमुख कारण है हरियाली और पेड़ पौधे और वनस्पतियों का बहुत तेजी से विनाश होना मानव सभ्यता के जन्म से आज से 50 वर्ष पूर्व तक धरती का अधिकांश भाग हरा भरा पेड़ पौधों वनस्पतियों से अच्छा अधिक था और इसी हरियाली में मानव सभ्यता और जीव जंतुओं का विकास हुआ था आज से 100 वर्ष पहले धरती का 95% भाग 50 वर्ष पहले 90% भाग पेड़ पौधों हरियाली से ढका था और आज केवल 15% भाग पर बचा हुआ है। जिसके कारण इतना केवल भयंकर गर्मी बड़ी है बल्कि ऑक्सीजन की मात्रा भी बहुत तेजी से कम हुई है और वायु गुणवत्ता सूचकांक जो 100 वर्ष पहले 0 से 5 और 50 वर्ष पहले 10 से 20 तक था आज वह ऑस्टिन 100 के पार हो गया है। दुनिया के सबसे बड़े वन क्षेत्र हरियाली और वनस्पतियों वाले अमेजॉन कांगो असम और दक्षिण भारत और टाइगा तथा स्थिति जैसे प्रदेश वृक्ष और हरियाली से रहित हो गए हैं इसके कारण वर्ष भी बहुत कम हो गए हैं‌ महानगरों और नगरों की हालत तो यह है कि वहां कहीं छायादार स्थान ही नहीं बचे हैं 

2 -सीमेंट कंक्रीट और पत्थर के जंगलों का भयंकर विस्तार 

एक तरफ तो हरियाली हर क्षेत्र पेड़ पौधे वनस्पतियां भयंकर तेजी से घट रहे हैं वहीं दूसरी तरफ सीमेंट और कंक्रीट तथा पत्थर और ईद के जंगल सारी दुनिया में बढ़ते चले जा रहे हैं बड़े-बड़े महानगरों का विस्तार से करो किलोमीटर तक हो चुका है यह जंगल गर्मी को बहुत तेजी से सोखते हैं ‌ लेकिन गर्मी को बाहर निकलने नहीं देते और सूर्य की गर्मी से देखने लगते हैं जिसके कारण रात में भी भयंकर घर भी और भाप फैलती रहती है ‌ आज से 40 50 वर्ष पहले तक दिन चाहे जितने गम होते थे लेकिन रहते ठंडी और सुहावनी होती थी और रात में उत्तरी भारत के मैदाने में भी तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से अधिक नहीं होता था आज या 25 से 35 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया और इन ईद पत्थर सीमेंट कंक्रीट के जंगलों में दूर-दूर तक पेड़ पौधे हरियाली पत्तियों का नाम और निशान नहीं होता है। 

3- ‌ भीषण गति से बढ़ रहे वाहन और औद्योगीकरण 

सबसे पहले औद्योगिक क्रांति आज से 500 वर्ष पहले शुरू हुई और आज हर गली नगर कस्बे में फैल चुकी हैं यह सीधे-सीधे गर्मी धुआ और प्रदूषण बढ़ने वाले सभ्यता है जिस पेड़ पौधे हरियाली और ऑक्सीजन का भयानक विनाश होता है इस तरह आज के 50 वर्ष पहले यदि एक नगर में 10 कर 100 मोटरसाइकिल होती थी तो आज वहां पर लाखों कर और करोड़ों मोटरसाइकिल हो गई बड़े-बड़े चार पहिया से 20 पहिया वाले वाहन भयंकर गर्मी प्रदूषण और जहरीली गैस उत्पादित करते हैं और यह लगातार बढ़ता चला जा रहा है अब तो हालत इतनी खराब है कि लाल बत्तियां भीड़ के कारण जाम लग जाने पर गर्मी और जहरीले हुए से दम घुटने लगता है यह आप सभी ने अनुभव किया होगा 

4- ‌ कागज और भाषण पर कार्यवाही विज्ञापनों में ही हरियाली और वृक्षारोपण का होना 

सरकार और सरकारी तंत्र द्वारा बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं जौनपुर जैसे नगर में हर वर्ष 50 से 60 लाख पौधे लगाने का सरकारी दवा होता है जिसमें 50 पौधे भी नहीं बचते हैं संपूर्ण जौनपुर नगर क्षेत्र में एक भी पेड़ पौधा या छायादार स्थान नहीं बचा है जहां पर लोग छाया में खड़े होकर आराम कर सके इस प्रकार कई हजार करोड़ वृक्ष लगाने का नाटक होता है और इसमें समय पैसे और धन की बर्बादी होती है वृक्ष हरियाली पेड़ पौधों का नाम और निशान नहीं दिखता है यह प्रचंड गर्मी ताप और उमस बढ़ने का एक प्रमुख कारण है 

5- ‌ सड़क रेल मार्ग नहरे और बड़े-बड़े संस्थान बनने में पेड़ पौधे हरियाली का भयानक विनाश 

प्राचीन काल से आज तक राष्ट्रीय राजमार्ग या छोटे बड़े मार्ग के दोनों और घने छायादार उपयोगी पेड़ पौधे वृक्ष जड़ी बूटियां पाई जाती थी लेकिन आज बड़े-बड़े राजमार्ग रेल मार्ग हवाई अड्डे संस्थान बनाए जाते हैं तो पहले काम हरियाली पेड़ पौधे और वनस्पतियों का पूर्ण विनाश कर दिया जाता है और पेड़ पौधे लगाए नहीं जाते हैं जो पेड़ पौधे हैं उनको बुरी तरह से काट दिया जाता है सामान्य रूप से एक सड़क या राजमार्ग बनने में 2 से 5 वर्ष लगते हैं इतने समय में दोनों किनारो पर बड़े आराम से पेड़ पौधे लगाकर सड़कों के साथ उन्हें छायादार बनाया जा सकता है लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया जाता है चारों तरफ केवल पैसे और धन की लूट मची होने के कारण आज किसी भी राज मर गया रेलवे ट्रैक के किनारे छाया का नाम और निशान नहीं है और यह प्रचंड गर्मी से दहकती हुई भट्टी बन जाती है। यहां तक कि जब पुरानी सड़क को चौड़ा किया जाता है तो भी बुद्धि का प्रयोग नहीं किया जाता यदि सरकार और उसका तंत्र चाहे तो इस सड़क के किनारे बिना छेड़छाड़ किया उसको चौड़ा करके दूसरी सड़क बनाई जा सकती है पेड़ पौधों को काटने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता है

6- ‌ मूर्खतापूर्ण सरकारी नीतियां 

जहां एक तरफ सरकार से जुड़े तंत्र और ठेकेदार कल कारखाने वाले भयंकर पेड़ पौधों का विनाश करते हैं वहीं सामान्य जनता पेड़ पौधे लगाकर अपने ही पेड़ पौधों को बिना सरकारी अनुमति और वन विभाग की अनुमति लिए उसे काट नहीं सकती जबकि कृषि पशुपालन मुर्गी पालन दिलीप पालन के साथ बागवानी भी खेती किसानी में आती है और अपने ही लगाए पेड़ पौधों का यदि लोगों को लाभ नहीं मिलेगा और उसे काटने के लिए वन विभाग और सरकारी तंत्र को घूस देना पड़ेगा तो कोई पेड़ पौधा क्यों लगाएगी यह अभी एक बहुत बड़ा कारण है की हरियाली पेड़ पौधे काम होते चले जा रहे हैं यदि सरकार सड़क और मार्ग के किनारे के स्थान ठाणे लोगों को देखकर पेड़ पौधे लगाकर उसका उपयोग करने को प्रेरित करें तो बड़ी मात्रा में हरियाली पेड़ पौधे वनस्पतियां जड़ी बूटियां पैदा होगी और भयंकर उमस गर्मी और पसीने से लोगों को छुटकारा मिलेगा 

7- ‌ युद्ध परमाणु जैव रासायनिक परीक्षण और मोबाइल टावर इत्यादिका लगातार बढ़ता 

आज धरती के हर भाग पर कहीं न कहीं युद्ध छिड़ा हुआ है अनेक जैव रासायनिक परमाणु नाभिकीय परीक्षण प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप में किया जा रहे हैं भयानक प्रक्षेपास्त्र का परीक्षण और मोबाइल टावरों के द्वारा उत्पन्न विकिरण वातावरण को बहुत अधिक गर्म हानिकारक प्रदूषण और जहरीला बना रहा है छोटे-छोटे बम और पटाखों से वातावरण जहर और धुएं तथा प्रदूषण से भर जाता है तो उपयुक्त चीजों का कितना भयानक असर धरती पर पड़ता होगा जिससे जहरीले प्रभाव प्रदूषण के साथ भयानक गर्मी और विकिरण भी फैलता चला जाता है 

8-‌ विमान जलयान ट्रेन लोह पथयान‌ रॉकेट रॉकेट और उपग्रह का लगातार बढ़ता दायरा

‌ विमान जलयान लोह पथ यान ‌ रॉकेट और उपग्रह तथा इसी तरह के ड्रोन और अन्य चीजों के द्वारा बहुत भयानक गर्मी प्रदूषण और विषैला पदार्थ वातावरण में फैल जाते हैं जो गर्मी को सूखने चले जाते हैं और ऊपर जाने नहीं देते इससे सारी धरती पर बहुत भयानक गर्मी बढ़ती चली जाती है 

10-हरित गृह प्रभाव और ओजोन परत का भयानक विस्तार 


धीरे-धीरे धरती ग्रीनहाउस इफेक्ट में बदल रही है जिससे धरती की रक्षा करने वाली ओजोन परत का छेद बढ़ता चला जा रहा है और यह लाखों वर्ग किलोमीटर में हो चुका है ‌ सीधे धरती पर प्रहार करती हैं और यही अल्ट्रावायलेट किरणें लोगों को जानलेवा सिद्ध हो जाती हैं जहां पहले इनकी तीव्रता एक से पांच तक होती थी आज वहां यह 5 से 12 तक बढ़ चुकी है इन सभी पर तत्काल रोक नहीं लगाया गया तो धरती की गर्मी रहने लायक नहीं बचेगी 

11-: 11- ‌ जल स्रोतों का भयानक विनाश प्राचीन जीवन पद्धति का तिरस्कार 

भीषण गर्मी उमस पसीना बढ़ाने का एक प्रमुख कारण परंपरागत जल स्रोतों का विनाश और जल का भयंकर विनाश भी है प्राचीन काल के स्वच्छ जल के स्रोत हुए तालाब बावड़ी पोखरा नदियां झरने धीरे-धीरे समाप्त हो गए और उनका स्थान हैंडपंप जेट पंप सबमर्सिबल इत्यादि ने ले लिया है उपर्युक्त जल स्रोत भयंकर गर्मी में धरती की गर्मी को संतुलित रखते हुए लोगों को भरपूर पानी देते थे यह जल स्रोत शीतकाल में गम और गर्मी में ठंडे रहते थे इनका स्वच्छ और जड़ी बूटियां से मिला अमृत जैसा पानी पेड़ पौधे जीव जंतु और मनुष्य को बलवान बनाकर उन्हें स्वस्थ रखता था जबकि आज के पानी को पीकर मनुष्य पेड़ पौधे वनस्पतियां सभी छोटी बनी और जहरीली होती चली जा रही है बड़े-बड़े पेड़ पौधे वनस्पतियों का लगभग विनाश हो चुका है प्राचीन काल के लोग प्रकृति और पर्यावरण से संतुलन और सहचार्य बनाकर रहते थे आज का मानव उसको नियंत्रित करके नकली जीवन व्यवस्था विकसित कर रहा है इसलिए गर्मी की मात्रा बढ़ती जा रही है पहले घने पेड़ पौधे और बाघ की छाया में लोग बिना पंखा कूलर और एसी के रह लेते थे आज कलर और ए सी से भी गर्मी नहीं जा रही है ‌ आज का मनुष्य रोज कलर में सुबह शाम पानी भर सकता है लेकिन एक पेड़ लगाकर उसे दो-तीन वर्ष तक पानी नहीं दे सकता है जो सैकड़ो वर्ष तक उसे ईंधन लकड़ी छाया और ऑक्सीजन दे सके पढ़ी लिखी वैज्ञानिक पीढ़ी पूरी तरह से अपने विनाश और मूर्खता की तरफ बढ़ रही है 
अन्य कारण-

इन सबके अलावा अनेक अन्य छोटे-मोटे कारक हैं जैसे की पर्वत और पठार क्षेत्र की वनस्पतियां गायब होना बर्फ और हिम्मत समाप्त होना अंटार्कटिका की बर्फ का पिघलना सूर्य के सतह पर हो रहे प्रचंड विस्फोट और सौर ज्वालाओं का निकलना मानव सभ्यता द्वारा भयंकर रूप से डिटर्जेंट पाउडर साबुन तेजाब और अन्य जहरीले वस्तुओं का प्रयोग जिससे भयानक गर्मी पैदा होती है घास पोस्ट छप्पर और कच्चे तथा खपरैल के मकान की जगह सीमेंट और कंक्रीट के दहकने वाले मकान का बनाना ‌ जनमानस में पेड़ पौधे लगाने की रुचि का काम होना संयुक्त परिवार का विघटन जिसके कारण जहां 50 लोग पहले रह लेते थे उससे अधिक मकान में अब केवल पांच लोगों का रहना धरती का सीमेंट कंक्रीट और एट पत्थर से ढक जाना जैसे पानी सूखने की क्षमता बहुत कम हो जाना रसायन और रासायनिक करो का प्रयोग जो भयंकर गर्मी उत्पन्न करती हैं ‌ इसके साथ-साथ अन्य बहुत से छोटे-मोटे कारक हैं जिसमें समुद्र नदियों और अन्य जल स्रोतों का प्रदूषण होना बड़ी मात्रा में कूड़ा कचरा प्लास्टिक का कूड़ा कचरा और इलेक्ट्रॉनिक कचरा जो प्रदूषण के साथ भयानक गर्मी भी पैदा करते हैं इन सब के कारण आज पर्वतीय भाग यूरोप अमेरिका भी गर्मी के कारण जल रहे हैं और भारत तो आग की दहकती हुई भट्टी बन गया है।

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