पांच राज्यों में हुए चुनाव का निष्पक्ष विश्लेषण -डॉ दिलीप कुमार सिंह
भारत में पांच राज्यों में मतदान सबसे चर्चित विषय रहा जिन पांच राज्यों में चुनाव हुआ उनमें सभी अत्यंत महत्वपूर्ण थे जिसमें से बंगाल और असम सीमा प्रांत होने के कारण बहुत संवेदनशील थे। जबकि तमिलनाडु केरल और पुडुचेरी दक्षिण भारत के राज्य थे बंगाल के अलावा तमिलनाडु और केरल और पंजाब ऐसे राज्य हैं जहां भाजपा ने कभी भी सत्ता में सीधे प्रतिभा नहीं किया इसलिए इस बार के चुनाव में यह सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण था।
मतदान के पूर्व जो सर्वेक्षण आए थे वह इस बार काफी हद तक ठीक-ठाक रहे लेकिन हमारे केंद्र की भविष्यवाणी एक बार फिर 100% सही उतरी लगभग सभी मतदान सर्वेक्षण में असम और पुडुचेरी में भाजपा गठबंधन को और बंगाल में कांटे का मुकाबला दिखाते हुए तमिलनाडु में ग्रामीण मुनेत्र कड़गम और केरल में यूडीएफ को विजय दिखाया गया था।
जबकि हमारे केंद्र के द्वारा बंगाल असम और पुडुचेरी में भाजपा गठबंधन की सीधी विजय की भविष्यवाणी की गई थी लेकिन बंगाल में 165 सीटों के मुकाबले भी भाजपा ने 286 सिम प्राप्त कर लिया तमिलनाडु में किसी तीसरे गठबंधन की एकमात्र भविष्यवाणी हमारे केंद्र के द्वारा की गई थी जो टीवीके के विजय होने के साथ पूरी तरह सही हुई केरल में भाजपा गठबंधन का तीन सीट प्राप्त करना काफी महत्वपूर्ण रहा जबकि तमिलनाडु में भाजपा एक बार फिर से असफल रही। इन समस्त बिंदुओं का निष्पक्ष और सही विश्लेषण आवश्यक है कि ऐसा क्यों रहा।
सबसे पहले हम चुनाव परिणाम पर आते हैं पश्चिम बंगाल में कुल 294 सीटें थी। लेकिन चुनाव 293 सीट पर हुए आवश्यक बहुमत 147 था लेकिन भाजपा गठबंधन ने 46% मत पाकर और 206 सीट पर सबको आश्चर्य में डाल दिया जबकि कांग्रेस का लगातार चौथी बार विजयी होने का सपना चूर-चूर हो गया उसकी केवल 81 सीटें और 41% वोट प्राप्त हुए यहां पर ध्यान देना आवश्यक है कि पिछली बार त्रृणमूल कांग्रेस को जबरदस्त 216 स्थान और भाजपा को केवल 77 स्थान प्राप्त हुए थे।
भाजपा में ममता की पराजय और भाजपा की विजय के अनेक कारण चुनाव विश्लेषक देते हैं लेकिन इसमें सबसे प्रमुख भूमिका एस आई आर पी रही जिसमें भाजपा विरोधी लाखों मतदाता जो फर्जी थे हट गए। और यह सबसे बड़ा कारण सिद्ध हुआ क्योंकि यहां पर विजय बहुत अधिक अंतर से नहीं हुआ था और हर एक स्थान से हटाए गए मतदाता उतने ही थे लगभग जीतने से अधिकांश प्रत्याशी विजयी हुए दूसरा सबसे महत्वपूर्ण कारण योगी जी का जबरदस्त चुनाव प्रचार और उनकी लोकप्रियता थी सच पूछा जाए तो उनके आने के बाद ही भगवा रंग बंगाल की जनता के बीच परवान चढ़ा और हर जगह योगी योगी और उनका बुलडोजर मॉडल कानून व्यवस्था प्रमुख मुद्दा रहा।
इसके अतिरिक्त महिला डॉक्टर के साथ हुए बलात्कार कांड ने और उसे पर ममता सरकार की जबरदस्त लीपा पोती ने जन आक्रोश को भड़का दिया सनातन धर्म पर ममता की तीखी टिप्पणी और 5 साल में हजारों हत्या लूट बलात्कार और मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में अत्याचार में सभी सनातनी लोगों को एकजुट किया वह समझ गए कि इस बार नहीं तो कभी नहीं क्योंकि अगले चुनाव तक मुस्लिम मतदाता हर जगह बहुत संख्या हो जाते इसके अतिरिक्त अमित शाह का डेरा डाल देना बहुत बड़ी संख्या में सेना और अर्धसैनिक बलों की नियुक्ति ममता समर्थक बेईमान अधिकारियों को हटाना और मोदी योगी अमित शाह की धुआंधार चुनावी सभाएं रही और तमाम रक्त पाठ के बाद भी सनातनी जनता ने अपने जान जोखिम में डालकर भाजपा को प्रचंड विजय देकर उसके सभी बहाने बाजी को हमेशा के लिए बंद कर दिया इसके अतिरिक्त हजारों की संख्या में हर महीने घुसने वाले भगोड़े और आतंकी कानून व्यवस्था की बहुत ही खराब स्थिति महिलाओं पर अत्याचार और भाजपा सरकार द्वारा लोक लुभावना नारों पर भी इसका खूब असर पड़ा।
इसके बाद हम असम पर आते हैं जो बंगाल की तरह बहुत ही संवेदनशील और घुसपैठियों की सबसे अधिक पीड़ा सहन करने वाला राज्य है इस पर बहुत व्यापक आंदोलन भी चलाएंगे यहां कुल 126 सीटें हैं बहुमत के लिए 64 विधायकों की आवश्यकता होती है इस बार भाजपा ने पिछले प्रदर्शन से बहुत ऊपर उठकर 102 सिम प्राप्त किया जबकि पिछली बार उसकी केवल 75 स्थान मिले थे कांग्रेस का यहां लगभग सफाया हो गया पिछली बार 50 सीटों से वह केवल 21 स्थान पर सिमट गई निर्दल भी केवल एक स्थान पर सके
इस चुनाव में हेमंत विश्व शर्मा का अपना स्वयं का कद और आकर्षक तथा देशभक्त और उनके किए गए कार्य योगी की तरह निडरता पूर्वक सनातन धर्म का पक्ष ग्रहण करना और बांग्लादेशी घुसपैठियों द्वारा मार्केट बलात्कार जमीनी कब्ज और कांग्रेस द्वारा उसे समर्थन देना सनातन धर्म को एक करने और हिमंत विश्व शर्मा की प्रचंड विजय का कारण बना और अब और भी अधिक तीव्रता के साथ असम में सनातन धर्म का प्रचार प्रसार होगा। उल्लेखनीय है कि भाजपा यहां पर 48 प्रतिशत वोट पाई जो एक विमान है।
सबसे अधिक चर्चा और निगाहें तमिलनाडु के चुनाव पर भी लगी हुई थी जहां आजादी के बाद से केवल दो पार्टियों के बीच सट्टा बारी-बारी से विभाजित होती रहती थी। इस बार हमारे केंद्र को छोड़कर सभी ने फिर से डीएमके के सत्ता में आने की घोषणा की जबकि मैं तीसरे गठबंधन अर्थात टीवी के लिए जो भविष्यवाणी किया था वह पूरी तरह सही हुई और सारे इतिहास को बदलते हुए अभिनेता विजय तमिलनाडु की जनता में पहले ही प्रयास में छा गए और 107 सिम जीतकर इतिहास रच दिया उन्हें 35% मत प्राप्त हुए जबकि अन्ना धर्म की 51 और प्रमुख 65 सीटों पर ही सिमट गई पिछली बार अन्ना को 75 और डीएमके को 159 सीट मिली थी। यहां पर जनता हिंदी विरोध और दोनों दलों के भ्रष्टाचार से बुरी तरह उठ चुकी थी बढ़ता हुआ मुस्लिम तुष्टिकरण भी इसका एक बहुत बड़ा कारण बना न्यायपालिका के दीप जलाने के निर्णय भी प्रभावकारी रहे बहुत ही फिल्में अंदाज में फिल्म अभिनेता विजय ने तमिलनाडु की राजनीति में प्रवेश किया और सभी पूर्ण धारणाओं को निर्मल सिद्ध कर दिया तमिलनाडु की जनता देश के मुख्य धारा में जुड़कर विकास चाहती है यह अच्छी तरह से विजय समझ चुके थे लेकिन यहां सबसे अधिक निराशा मोदी जी और भाजपा को प्राप्त हुई उनका कोई भी जादू यहां नहीं चल पाया योगी जी को यहां प्रचार नहीं करने दिया गया इसका भी बहुत बड़ा नुकसान हुआ। आशा है कि अगले 5 साल में विजय तमिलनाडु को देश के मुख्य धारा से जोड़कर उसे विकास के रास्ते पर ले आएंगे
अगला राज्य केरल शाह जहां आजादी के समय से आज तक सत्ता कांग्रेस और वाम दलों के बीच विभाजित होती रहती थी इस बार भी ऐसा ही हुआ लगभग सभी सर्वेक्षण में और हमारे केंद्र के अनुसार भी कांग्रेस समर्थित यूडीएफ के विजई होने की भविष्यवाणी सही हुई जहां पर पंजाब के अलावा दूसरा राज्य केरल बना जहां भाजपा अपना मान सम्मान बढ़ाने में सफल रहे कल 140 सीटों में बहुमत के लिए 71 सीट आवश्यक होती है। लेकिन कांग्रेस गठबंधन ने 102 सिम प्राप्त कर दो तिहाई से अधिक बहुमत प्राप्त कर लिया और वह मॉडल 35 सीटों पर सिमट कर रह गए पिछली बार आम दलों को 99 सीट प्राप्त हुई थी। यहां पर तीन सीट भाजपा गठबंधन ने भी प्राप्त किया और एक इतिहास बनाया।
केरल में मुस्लिम धर्मांतरण और सनातनी धर्म के मंदिरों पर किया गया प्रहार निर्णायक भूमिका में रहा जिसमें पद्मनाभ मंदिर और सबरी माला मंदिर ने निर्णायक भूमिका निभाई और न्यायपालिका को बताया कि हम अपने धार्मिक बिंदुओं में हस्तक्षेप सहन नहीं कर पाएंगे वाम दलों से लोग बहुत लंबे समय से पूरी तरह ऊब चुके थे। लव जिहाद की अनगिनत घटनाएं हो रही थी खाड़ी देशों में महिलाओं को निर्यात किया जा रहा था केरल के अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित थी महंगाई की मार और कश्मीर फाइल्स ने भी इसमें निर्णायक भूमिका निभाया सबसे अधिक पढ़े लिखे शिक्षित लोगों का प्रदेश केरल इस बार अलग ढंग से सामने आया और यह संदेश आया कि देश की मुख्य धारा से जुड़कर ही चलना चाहते हैं
अंतिम राज्य पुडुचेरी था जो एक संघ शासित प्रदेश है जहां केवल 30 स्थान हैं इस बार भाजपा गठबंधन ने 18 स्थान पर विजय प्राप्त किया जो पिछली बार से दो अधिक है कल 35% मतदान लोगों ने भाजपा गठबंधन को दिया अन्य लोगों को इस वर्ष स्थान से संतोष करना पड़ा पुडुचेरी में महर्षि रमण और ओशो का आश्रम है यहां लोग पढ़े-लिखे और समझदार हैं और देश की मुख्य धारा के साथ ही रहना चाहते हैं असम की तरह यहां भी सत्ता में कोई परिवर्तन नहीं हुआ
इस प्रकार कहा जा सकता है कि सभी राज्यों के आम चुनाव में यह दिखाया कि देश की जनता देश के मुख्य धारा से जुड़कर आगे बढ़ना चाहती है जिसको रोकने वाले राजनेता और परियों बहुत बुरी तरह से हार गई हिंदी विरोध करने वाले और उत्तर भारत का विरोध करने वाले डीएम के और अन्ना डीएमके का हरण बहुत ही सुखद आश्चर्य है देश बढ़ती महंगाई बेरोजगारी से बुरी तरह परेशान है और आने वाले समय में लोग हमेशा आपस में लड़ने वाले लोगों से दूर ही रहना चाहते हैं इस एन मोदी अमित शाह के अलावा योगी जी को सर्वशक्तिमान और लोकप्रिय नेता के रूप में स्थापित करके उन्हें अग्रिम प्रधानमंत्री होने की सुखद सूचना दे दी है यदि इसका अंदर या बाहर विरोध हुआ तो वह लोग भी हसीए पर चले जाएंगे लोग किसी भी हालत में शांति कानून व्यवस्था चाहते हैं अपराधी लोगों और घुसपैठियों तथा आतंकी अराजक तत्वों को दमन करके सच्चा देशभक्त और सनातनी ही देश का लोकप्रिय व्यक्ति होगा इस बात का जनता ने बिल्कुल स्पष्ट रूप से संकेत दे दिया है यह मोदी जी और अमित शाह के लिए भी सीधा-सीधा संदेश है इसके अलावा हर एक राज्य में जनता ने पूर्ण बहुमत के साथ विजय लोगों को शासन सौंप कर उनके सारे किंतु परंतु और बहाने बाजी को दरकिनार कर दिया है
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