महा रुद्राभिषेक की संपूर्ण जानकारी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि
महा रुद्राभिषेक सनातन धर्म का सबसे महान और अंतिम अनुष्ठान है जो वैदिक काल से आज तक चला आ रहा है और जिसका वर्णन सभी वेदों में मिलता है जब इसका अंतिम और सबसे जटिल रूप होता है तब इस महा रुद्राभिषेक कहा जाता है रुद्राभिषेक एक सिद्ध अनुष्ठान है जो पवित्र होकर करने पर और पुरोहित के शुद्ध चरित्र होने पर पूरा-पूरा फल देता है इसमें कोई संदेह नहीं है यह शिव को समर्पित सबसे बड़ा अनुष्ठान है
रुद्राभिषेक के लिए आवश्यक सामग्री रुद्राभिषेक शुद्ध और स्वच्छ जमीन पर कमरे या घर के ईशान कोण पर या वायव्य कोण पर करना चाहिए आवश्यक सामग्री में शुद्ध और स्वच्छ जल कच्चा गाय का दूध दही मधु या शहद घी गन्ने का रस नारियल और नारियल का पानी पंचामृत गंगाजल काली मिर्च और सरसों का तेल अक्षत श्वेत पुष्प और माला सुपारी खड़ी इलायची छोटी बेल का पत्र भांग और धतूरा मदार का फूल दूब और कुश श्रृंगी यंत्र हवन का पात्र और हवन की सामग्री मिट्टी का या धातु का शिवलिंग एक बड़ा थाल या थाली जो पीतल या स्टील का बना हो पान का पत्ता रक्षा सूत्र सफेद चंदन अष्टगंध और सफेद रंग के लोटा गिलास पीतल या स्टील के बने हुए धूप और दीप कपूर इत्यादि आवश्यक होते हैं।
रुद्राभिषेक करने की सामान्य विधि रुद्राभिषेक के लिए सर्वप्रथम स्वच्छ स्थान करके शुद्ध जल या गंगाजल छिड़क लें वहां पर थाल या बड़ी थाली स्थापित करें पूजा करते समय रखना चाहिए संकल्प करते हुए पुष्प अक्षत और जल लेकर उसे कुश या घास के द्वारा स्थान और सभी सामग्री और अपने ऊपर छिड़ककर पवित्र कर लेना चाहिए इसके बाद गणेश गौरी और नवग्रह का कलश का और सभी स्थापित देवताओं का पूजन करना चाहिए इसके बाद शिवलिंग स्थापित करना चाहिए।
इसके पश्चात शिवजी का माता पार्वती के साथ आवाहन और ध्यान करना चाहिए आयुर्वेद में वर्णित नमक चमक नामक पाठ के अनुसार कार्यवाही आगे बढ़ना चाहिए और क्रम से बेल के पत्र मधु गन्ने का रस पंचामृत घी दूध सरसों के तेल लौंग और इलायची छोटी भांग और धतूरे के जल नारियल के जल और रात भर काली मिर्च में रखे हुआ जल से शमी के पत्र से रुद्राभिषेक करना चाहिए खड़ी काली मिर्च से अभिषेक नहीं करना चाहिए अभिषेक करते हुए ओम नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करते हुए भगवान शिव भगवती मां पार्वती का ध्यान करते रहना चाहिए और अंत में स्वच्छ जल या गंगाजल मिले हुए जल से शिवलिंग को साफ करना चाहिए।
तत्पश्चात समस्त वस्तुओं को भगवान शिव माता पार्वती को अर्पित करने के बाद पूजा स्थान की गोलाई में आधी परिक्रमा करके वापस आना चाहिए और शिवजी की आरती का पाठ करना चाहिए और धूप दीप कपूर के साथ आरती संपन्न करके हवन करना चाहिए और हवन समाप्त करके प्रसाद का वितरण करना चाहिए।
किस चीज के रुद्राभिषेक से क्या फल प्राप्त होता है शुद्ध और स्वच्छ जल से अभिषेक करने पर अच्छी वर्षा होती है और शांति मिलती है उसके पानी से रुद्राभिषेक करने पर असाध्य रोग दूर होते हैं दही से रुद्राभिषेक करने पर भवन और वाहन की प्राप्ति होती है गाने के रस से लक्ष्मी जी की मधु और घी से धन की वृद्धि प्राप्त होती है विभिन्न तीर्थ के जल का अभिषेक करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है इत्र मिले हुए जल या केवल इत्र से रुद्राभिषेक करने पर रोक बीमारी दूर होती है गाय के दूध से रुद्राभिषेक करने पर पुत्र और संतान की प्राप्ति होती है जल और गंगाजल से रुद्राभिषेक करने पर असाध्य रोग और जड़ शांत होता है और घी से अभिषेक करने पर वंश की वृद्धि होती है जबकि सरसों के तेल और काली मिर्च से रुद्राभिषेक करने पर लक्ष्मण जैसे रोग विभिन्न प्रकार के तंत्र मंत्र का असर समाप्त होता है और शत्रु का नस मुकदमे में विजय प्राप्त होती हैं
रुद्राभिषेक का महत्व और लाभ
वेद पुराण और दिव्य ग्रंथो में वर्णन है कि रुद्राभिषेक करते हुए व्यक्ति को असीमित फल की प्राप्ति होती है इससे मानसिक शांति प्राप्त होती है और विभिन्न दैहिकदैविक भौतिक ताप भी ठीक होते हैं। शत्रुओं का नाश होता है और विवाद में विजय मिलती है और भगवान शिव माता पार्वती का आशीर्वाद मिलता है
रुद्राअभिषेक या महा रुद्राभिषेक करने का समय
रुद्राभिषेक के लिए सावन महीना सर्वोत्तम माना जाता है पूरे महीने आप किसी भी दिन यह अनुष्ठान कर सकते हैं नाग पंचमी प्रदोष के दिन और महाशिवरात्रि के दिन भी इसको बिना देशकाल स्थिति के किया जा सकता है लेकिन कुछ ऐसे वर्जित काल होते हैं जब रुद्राभिषेक नहीं करना चाहिए जब शिवजी पार्वती के साथ रहें जब वह सो रहे होते हैं जब भोजन कर रहे होते हैं या जब वह मकान में वास करते हैं या एकांतवास में रहते हैं उस समय रुद्राभिषेक नहीं करना चाहिए और दिन में 12:00 बजे से लेकर 3:00 बजे तक रुद्राभिषेक नहीं करना चाहिए सावन महीने प्रदोष के दिन और महाशिवरात्रि तथा नाग पंचमी को छोड़कर कृष्ण पक्ष की 3 6 7 9 10 और अमावस्या को तथा शुक्ल पक्ष में 3 4 7 11 14 15 की तिथि को भी रुद्राभिषेक करने से बचना चाहिए वैसे तो सारांश रूप में भगवान शिव इतने उदार हैं कि किसी भी रूप में अपनी पूजा पाठ स्वीकार कर लेते हैं।
उपसंहार-
सब के अंत में सबसे आवश्यक कार्य है कि आप सदाचारी होकर निर्मल मन से और स्वच्छ चित्त से भगवान शिव की पूजा पाठ और रुद्राभिषेक करें तो निश्चित रूप से वह सफल होगा छल कपट से दूर रहकर सदाचारी प्रवृत्ति अपना कर केवल जल से ही रुद्राभिषेक करने पर भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं जितना ही सामग्री बढ़ाई जाएगी उतना ही उसका फल बढ़ता जाएगा सावन के दिन अगर रुद्राभिषेक है तो उसका महत्व सबसे अधिक होता है इसलिए निर्मल मन और छल कपट रहित होकर सावन महीने में एक साधारण रुद्राभिषेक बेलपत्र भांग धतूरा मदार और जल तथा दुग्ध से अवश्य करना चाहिए
[8/1, 4:03 PM] Dileep Singh Rajput Jounpur: रुद्राभिषेक के बाद सामग्री का क्या करें
रुद्राभिषेक करने के बाद समस्त सामग्री तत्काल या कुछ घंटे के अंदर नदी में या बहते हुए जल में या झील तालाब इत्यादि में विसर्जित करने इसका थोड़ा सा पानी अपने पूजा गृह में रख सकते हैं और एकत्र हुआ पानी बहुत गुणकारी होता है उसको मुंह से लगा सकते हैं और लगाना भी चाहिए यह जल इतना प्रबल होता है कि जहां पर विसर्जित होता है वहां से 500 मीटर दूर तक खतरनाक तत्व जीवाणु विषाणु कीटाणु रोगाणु को समाप्त कर देता है और उससे निकलने वाली गंध जहरीले जीव जंतुओं को दूर भगा देती है इसके कुछ बेलपत्र आप रख भी सकते हैं
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