Wednesday, 30 September 2026

पाक्सो अधिनियम 2012 के तीन दिवसीय कार्यक्रम पर जागरूकता अभियान का तीसरा और अंतिम चरण संपन्न

पाक्सो अधिनियम 2012 के तीन दिवसीय कार्यक्रम पर जागरूकता अभियान का तीसरा और अंतिम चरण संपन्न 
आज दिनांक 30/9/2026 को एक विधिक जागरूकता सहायता विशेष अभियान विद्यालयों के किशोरों को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के विषय पर सरल और सही विधिक जानकारी देने के लिए जनपद न्यायाधीश सुशील कुमार शशि के निर्देशन और प्रभारी सचिव अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रशांत कुमार सिंह की देखरेख में राज इंटर कॉलेज जौनपुर में आयोजित किया गया। 
 इस अवसर पर विशेष जागरूकता सहायता अभियान की अध्यक्षता करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र प्रसाद यादव  ने कहा कि संसद द्वारा लैंगिक अपराध से बालकों के संरक्षण के लिए विशेष अधिनियम 2012 बनाया गया है प्रत्येक 18 वर्ष से कम  बालक या बालिका को किसी भी प्रकार के यौन अपराध यौन आचरण या प्राकृतिक एवं अपराध से संरक्षण प्रदान किया गया है अज्ञानता के कारण कोई किशोर बालक और बालिका न कोई गंभीर अपराध करें न उसका शिकार बने उन्होंने बताया कि 18 वर्ष के नीचे के किशोर किशोरियों और बच्चों के प्रति किसी भी लैंगिक अपराध के लिए कठोर कानून है और इसमें पीड़ित प्रताड़ित के लिए विशेष सुविधा दिया गया है इन अपराधों की गंभीरता के आधार पर 3 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास की सजा दी जाती है  और विशेष परिस्थितियों में यह मृत्युदंड तक विस्तृत हो सकती है। और 7 वर्ष तक के बच्चों के लिए गवाही देने का विशेष प्रावधान किया गया है इसके अतिरिक्त 7 से 12 वर्ष की आयु के अपराधी किशोरों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है  और उनका परीक्षण  किशोर न्याय बोर्ड में किया जाता है उन्होंने किशोर बालक बालिकाओं को विशेष रूप से सजग रहने और अपराधों के प्रति माता-पिता और घर वालों को तत्काल सूचना देने के बारे में अवगत कराया । उन्होंने आगे बताया की सही मामलों पर तत्काल ही प्राथमिक की लिखने में परहेज नहीं करना चाहिए लेकिन अनावश्यक और गलत मामलों में शत्रुता के कारण किसी को गलत फंसाना भी नहीं चाहिए। किशोर बालक बालिकाओं को अपने माता-पिता और घर परिवार से ऐसी कोई भी बात नहीं छुपाना चाहिए जो इससे संबंधित हो। 

इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल जनपद न्यायालय जौनपुर डॉ दिलीप कुमार सिंह  ने गलत और सही स्पर्श के बारे में बताते हुए हेल्पलाइन नंबर 1090  1098 15100   112 नंबरों के बारे में बताया और कहा कि किसी का भी चित्र खींचने उसे अश्लील फोटो उसकी इच्छा के बिना दिखाना छेड़छाड़ करना पाक्सो अधिनियम के अंतर्गत आता है और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा निशुल्क सहायता और विधिक पैरवी की सुविधाओं के बारे में बताया और सोशल मीडिया पर सावधान रहने और साइबर क्राइम से बचने के बारे में विस्तार से बताते हुए अकेले और अलग स्थान पर जाने और अपरिचित लोगों से बचने की सलाह दिया उन्होंने यौन उत्पीड़न यौन अपराध यौन शोषण और अश्लीलता और पोर्नोग्राफी के बारे में सरल भाषा में विस्तार से समझाया। उन्होंने यह भी कहा कि यह अधिनियम 18 वर्ष से कम आयु के लड़के लड़कियों दोनों पर लागू होता है और इसमें पुलिस सादे कपड़ों में जाकर घर पर पीड़ित बच्चों का बयान लेती है  7 वर्ष से नीचे के बालकों को अपराधिकृत के लिए कोई सजा नहीं दी जाती जबकि साथ से 12 वर्ष के बालकों का परीक्षण किशोर न्याय बोर्ड में होता है 12 वर्ष के ऊपर के बालकों का परीक्षण यह मन कर किया जाता है कि उनके अंदर सही और गलत समझने की क्षमता है ।

प्रधानाचार्य  डॉ सुबाष चौबे एवं  डॉ अखिलेश्वर शुक्ला ने बालिकाओं को उचित कानूनी और पुलिस की सहायता लेने और परिवार से कुछ छुपाने की सलाह देते हुए आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर उपस्थित हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की छात्राओं द्वारा विभिन्न प्रश्न पूछे गए और जानकारी ली गई जिसका निराकरण अपर जिला जज सुरेंद्र प्रसाद  और डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह  के द्वारा किया गया। संचालन डॉक्टर बृजभूषण यादव द्वारा किया गया। 

इस अवसर पर प्राधिकरण के  प्रकाश तिवारी असिस्टेंट अरविंद कुमार चौबे पैरा लीगल वालंटियर शिव शंकर सिंह प्रेमचंद विनय ओझा आनंद तिवारी अनिल कुमार यादव पूजा सिंह रंजना चौरसिया रंजन प्रजापति समस्त विद्यालय परिवार के समस्त शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं उपस्थित रही।

Tuesday, 29 September 2026

पाक्सो अधिनियम 2012 के तीन दिवसीय कार्यक्रम पर जागरूकता अभियान का दूसरा चरण संपन्न

प्रेस विज्ञप्ति

पाक्सो अधिनियम 2012 के तीन दिवसीय कार्यक्रम पर जागरूकता अभियान का दूसरा चरण संपन्न 

आज दिनांक 29/9/2026 को एक विधिक जागरूकता सहायता विशेष अभियान ** विद्यालयों के किशोरों को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के विषय पर सरल और सही जानकारी देने के लिए** जनपद न्यायाधीश सुशील कुमार शशि के निर्देशन और प्रभारी सचिव अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रशांत कुमार सिंह की देखरेख में बी आर पी इंटर कॉलेज जौनपुर  एवं मोहम्मद हसन इंटर कॉलेज जौनपुर में एक साथ  आयोजित किया गया। 

 इस अवसर पर विशेष जागरूकता सहायता अभियान की अध्यक्षता करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र प्रसाद यादव एवं  उमेश कुमार ने कहा कि लैंगिक अपराध से बालकों के संरक्षण के लिए विशेष अधिनियम 2012 बनाया गया है प्रत्येक 18 वर्ष से कम  बालक या बालिका को किसी भी प्रकार के यौन अपराध यौन आचरण या प्राकृतिक एवं अपराध से संरक्षण प्रदान किया गया है अज्ञानता के कारण कोई किशोर बालक और बालिका न कोई गंभीर अपराध करें न उसका शिकार बने उन्होंने बताया कि 18 वर्ष के नीचे के किशोर किशोरियों और बच्चों के प्रति किसी भी लैंगिक अपराध के लिए कठोर कानून है और इसमें पीड़ित प्रताड़ित के लिए विशेष सुविधा दिया गया है इन अपराधों की गंभीरता के आधार पर 3 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास की सजा दी जाती है  और विशेष परिस्थितियों में यह मृत्युदंड तक विस्तृत हो सकती है। और 7 वर्ष तक के बच्चों के लिए गवाही देने का विशेष प्रावधान किया गया है इसके अतिरिक्त 7 से 12 वर्ष की आयु के अपराधी किशोरों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है  और उनका परीक्षण  किशोर न्याय बोर्ड में किया जाता है उन्होंने किशोर बालक बालिकाओं को विशेष रूप से सजग रहने और अपराधों के प्रति माता-पिता और घर वालों को तत्काल सूचना देने के बारे में अवगत कराया । उन्होंने आगे बताया की सही मामलों पर तत्काल ही प्राथमिक की लिखने में परहेज नहीं करना चाहिए लेकिन अनावश्यक और गलत मामलों में शत्रुता के कारण किसी को गलत फंसाना भी नहीं चाहिए। किशोर बालक बालिकाओं को अपने माता-पिता और घर परिवार से ऐसी कोई भी बात नहीं छुपाना चाहिए जो इससे संबंधित हो 
इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल जनपद न्यायालय जौनपुर डॉ दिलीप कुमार सिंह  एवं चीफ डिफेंस काउंसिल अनिल कुमार सिंह ने गलत और सही स्पर्श के बारे में बताते हुए हेल्पलाइन नंबर 1098 15100   112 नंबरों के बारे में बताएं और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा निशुल्क सहायता और विधिक पैरवी की सुविधाओं के बारे में बताया और सोशल मीडिया पर सावधान रहने और साइबर क्राइम से बचने के बारे में विस्तार से बताते हुए अकेले और अलग स्थान पर जाने और अपरिचित लोगों से बचने की सलाह दिया उन्होंने यौन उत्पीड़न यौन अपराध यौन शोषण और अश्लीलता और पोर्नोग्राफी के बारे में सरल भाषा में विस्तार से समझाया। उन्होंने यह भी कहा कि यह अधिनियम 18 वर्ष से कम आयु के लड़के लड़कियों दोनों पर लागू होता है और इसमें पुलिस सादे कपड़ों में जाकर घर पर पीड़ित बच्चों का बयान लेती है  7 वर्ष से नीचे के बालकों को अपराधिकृत के लिए कोई सजा नहीं दी जाती जबकि साथ से 12 वर्ष के बालकों का परीक्षण किशोर न्याय बोर्ड में होता है 12 वर्ष के ऊपर के बालकों का परीक्षण यह मन कर किया जाता है कि उनके अंदर सही और गलत समझने की क्षमता है 

प्रधानाचार्य एवं नसीर अहमद ने बालिकाओं को उचित कानूनी और पुलिस की सहायता लेने और परिवार से कुछ छुपाने की सलाह देते हुए आभार व्यक्त किया  और सम्मान चिन्ह अपर जिला जज सुरेंद्र प्रसाद यादव उमेश कुमार एवं डॉ दिलीप कुमार सिंह और अनिल कुमार सिंह कप्तान को दिया गया इस अवसर पर उपस्थित हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की छात्राओं द्वारा विभिन्न प्रश्न पूछे गए और जानकारी ली गई जिसका निराकरण अपर जिला जज सुरेंद्र प्रसाद उमेश कुमार यादव और डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह एवं अनिल कुमार सिंह के द्वारा किया गया। 

इस अवसर पर प्राधिकरण के  प्रकाश तिवारी असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल अरविंद कुमार चौबे पैरा लीगल वालंटियर शिव शंकर सिंह सुनील कुमार गौतम अरुण कुमार  सुनील कुमार सुभाष यादव समस्त विद्यालय परिवार के समस्त शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं उपस्थित रही।

Monday, 28 September 2026

*नाम एसीआर का, गला जूनियर का—यूपी की बिजली फाइल से चलती है, खंभे से नहीं*/न्यूज2:#बोर्ड प्रस्ताव नहीं, फिर भी उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन लिमिटेड ने डिस्कॉमों के नाम पर छूट माँग ली। संख्या घटी, नेता डेढ़ लाख बताते हैं। चुनाव से पहले आक्रोश की आशंका।*

*नाम एसीआर का, गला जूनियर का—यूपी की बिजली फाइल से चलती है, खंभे से नहीं*

लखनऊ। शक्ति भवन का पोस्टर कहता है—मॉनिटरिंग जारी है। बारिश कहती है—खंभा गिर गया। दोनों के बीच दो फाइलें हैं। एक का नाम एसीआर है। दूसरी का नाम बजट है। पहली फाइल जुबान बंद करती है। दूसरी फाइल पूछती है—हजारों करोड़ गए, नेटवर्क कहां गया?
एसीआर यानी एनुअल कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट—वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट। सरकारी सेवा में यही कागज अधिकारी का भविष्य लिखता है। प्रमोशन, अच्छी पोस्टिंग, अगली कुर्सी—सब इसी पर टिकते हैं। खराब रिपोर्ट लगे तो सालों कुर्सी पड़ी रह सकती है। अच्छी लगे तो रास्ता खुलता है। इसलिए सवाल सीधा है: जूनियर अपना एसीआर सीनियर से खराब करवाएगा?
ऊपर रणवीर प्रसाद हैं। 2000 बैच के आईएएस, प्रमुख सचिव ऊर्जा, अध्यक्ष यूपीपीसीएल। सेवा के पच्चीस-छब्बीस साल। उनके नीचे यूपीपीसीएल के प्रबंध निदेशक नितीश कुमार, 2010 बैच—लगभग दस साल जूनियर। फिर पाँच वितरण कंपनियाँ।
मध्यांचल के एमडी संदीप भागिया 2018 बैच—रणवीर से करीब अठारह साल छोटे। पूर्वांचल के एमडी संदीप कुमार 2014 बैच—चौदह साल छोटे। पश्चिमांचल के एमडी रवीश गुप्ता 2012 बैच—बारह साल छोटे। दक्षिणांचल की एमडी श्रुति 2011 बैच—ग्यारह साल छोटी। केस्को की एमडी नेहा जैन 2014 बैच—फिर चौदह साल छोटी।
हर साल वरिष्ठ अधिकारी कनिष्ठ के काम, आचरण और ‘निष्ठा’ पर गुप्त टिप्पणी लिखता है। अच्छी रिपोर्ट मिले तो स्केल बढ़े। खराब या ‘औसत’ लिख दी जाए तो फाइल अटके, तबादला सजा बने, जुबान बैठ जाए। बिजली के एमडी के हाथ में अभियंता हैं, संविदा कर्मी हैं, करोड़ों का ठेका है। अगर वही एमडी जानता है कि उसकी रिपोर्ट शक्ति भवन से गुजरेगी, तो वह वरिष्ठ के आदेश के खिलाफ कितना खड़ा होगा? नाम लेते ही गला बैठ जाए, तो तोता क्या बोलेगा? जूनियर अक्सर यहीं कांप जाते हैं। जान उनकी, दम सीनियर का।
इसी रेखा पर 2010 का लाइसेंस कागज पर डिस्कॉम के नाम है, हिम्मत अक्सर लखनऊ की कुर्सी की है। होल्डिंग कंपनी समन्वय के लिए होती है, स्वायत्तता छीनने के लिए नहीं। यहां होल्डिंग मुखौटा है। मुखौटे के पीछे केंद्रीय निविदा है, रबर स्टांप निदेशक हैं, और एसीआर की डोर है। निजी 51 प्रतिशत हिस्सेदारी में आईएएस यह मनमानी नहीं चला सकता। वहां कुर्सी और सजा एक घर में नहीं होती। यहां एक घर है।
तीन-चार दिन की बारिश ने यही घर दिखा दिया। 11 केवी के 716 फीडर, 33 केवी के 173 सब-स्टेशन, करीब 15 लाख उपभोक्ता। लखनऊ-हरदोई-बलिया के टूटे पोल और ट्रांसफार्मर। मांग 28–29 हजार मेगावाट से गिरकर 13–14 हजार पर आ गई। बिजली की कमी नहीं थी। कमी अनुरक्षण की थी, संविदा कर्मियों की थी। उन्नीस बारह हाँफने लगा। शिकायत दर्ज हुई, लाइन नहीं आई। विभाग बोला—निगरानी हो रही है। उपभोक्ता बोला—खंभा कहां है।
यहीं दूसरी फाइल खुलती है।
हजारों करोड़ गए। नेटवर्क कहां गया?
पिछले पाँच वर्षों में केंद्र की आरडीएसएस—रेवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम—अकेली योजना यूपी के लिए सबसे बड़ी थाली लेकर आई। संसद में बिजली मंत्रालय ने बताया—यूपी को करीब 40,739 करोड़ के प्रोजेक्ट मंजूर। इसमें स्मार्ट मीटरिंग करीब 18,956 करोड़, लॉस रिडक्शन इंफ्रा करीब 21,782 करोड़। केंद्र की ग्रॉस बजटीय सहायता करीब 16,570 करोड़ मंजूर बताई गई, जिसमें से करीब 7,028 करोड़ जारी और लगभग 6,989 करोड़ उपयोग बताए गए। राज्य की बिजनेस प्लान, ओ एंड एम और पुरानी डीडीयूजीजेवाई-आईपीडीएस जैसी योजनाएं इसमें अलग परत हैं।​
आंकड़ा छोटा नहीं है। सवाल छोटा और कठोर है: इतना पैसा अनुरक्षण और नए कामों के नाम पर आया, तो चार दिन की बारिश में सैकड़ों फीडर क्यों ढह गए? पैसा खाते में घुसा, खंभे में नहीं घुसा—यह निष्कर्ष जांच का विषय है। लेकिन उपभोक्ता को खाता नहीं चाहिए, लाइन चाहिए। लाइन नहीं आई, तो पैसा कहां गया—यह पूछना भ्रष्टाचार का नारा नहीं, हिसाब मांगना है।
सीएजी पहले भी यूपी के डिस्कॉम-यूपीपीसीएल ढांचे से चली केंद्र योजनाओं में फीडर पृथक्करण अधूरा रहने, ठेकेदारों को अतिरिक्त भुगतान जैसी गड़बड़ियां रेखांकित कर चुका है। यानी संदेह नया नहीं है। नया सिर्फ इतना है कि इस बार संदेह अंधेरे घर में बैठा है।
यूपीपीसीएल खुद थर्ड पार्टी बैठाता है—आरआईटीईएस, एनपीटीआई, ईआरडीए, क्यूसीआई। रिपोर्ट लगे, तब पेमेंट। तूफान ने एक वाक्य में पूछ लिया: मुहर साफ थी तो पोल क्यों गिरा? काम घटिया था तो क्लीन चिट किसने दी? ठेकेदार अकेला नहीं। फाइल चलाने वाला भी पूछा जाना चाहिए। और फाइल तब नहीं खुलती, जब लिखने वाला और चलाने वाला एक ही छत के नीचे हों। एसीआर उसी छत की चाबी है।
आलोचक बीएसएनएल वाली तैयारी देख रहे हैं। पहले निवेश दिखाओ, संस्था लंगड़ी करो, फिर कहो—निजी हाथ ही बचाएगा। पूर्वांचल-दक्षिणांचल सालों से थाली में हैं। घाटा एक सचाई है। दूसरी सचाई—केंद्रीकृत ठेका, अधूरी गैंग, मुहर वाली रिपोर्ट। निजीकरण खंभे को लोहा नहीं बनाता। कमजोर किसने किया, यह सवाल होल्डिंग के दफ्तर में अटक जाता है।
एसीआर अच्छी हो तो अधिकारी ‘टीम प्लेयर’ कहलाता है। खराब हो तो ‘असहयोगी’। बिजली में टीम प्लेयर का मतलब अक्सर यह निकलता है कि शक्ति भवन से आया ठेका बिना सवाल के चले। असहयोगी वह भी हो सकता है जो कह दे—अनुरक्षण के पैसे खंभे तक नहीं पहुंचे, संविदा कर्मी कम हैं, केंद्रीय टेंडर से काम नहीं संभलेगा। ऐसी बात रिपोर्ट में ‘नकारात्मक प्रवृत्ति’ बन सकती है। इसलिए डमरू ऊपर बजता है, गुलाटी नीचे बंटती है।
जूनियर एमडी काबिल भी हों—भागिया आईआईटी दिल्ली के इलेक्ट्रिकल हैं, संदीप कुमार आईआईटी कानपुर के मैकेनिकल—रेखा नहीं मिटती। रेखा यह है कि वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट लिखने वाला और निविदा निकालने वाला एक ही तंत्र में बैठता है। स्वायत्तता तब झूठ हो जाती है। दीपक रायजादा वाली कॉर्पोरेट प्लानिंग आलोचकों के लिए उसी रीति की मिसाल है—तकनीकी कुर्सी, मनचाहा चेहरा।
अगर यह पूर्व तैयारी नहीं है, तो रास्ता साफ है। एमडी की रिपोर्ट मैदान से लिखो—कितने फीडर बचे, कितने कर्मी खेत में थे, कितना पैसा खंभे तक पहुंचा। टेंडर डिस्कॉम के खाते में उतारो। संविदा कर्मी पूरे करो। थर्ड पार्टी की मुहर पर कार्रवाई खोलो। नहीं तो अध्याय लिखा जाएगा: घाटा पाला, नेटवर्क गिराया, निजी थाली सजाई। बीएसएनएल पहला पाठ था। बिजली को दूसरा मत बनाओ।
अभी रात है। एसीआर बंद होगी। बजट की फाइल भी बंद होगी। कंट्रोल रूम जल रहा होगा। उन्नीस बारह हाँफ रहा होगा। याद रखने लायक बात दो ही हैं। एक—एसीआर यानी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट; अच्छी हो तो कुर्सी चमकती है, खराब हो तो जुबान बंद होती है। दो—हजारों करोड़ मंजूर हुए, जारी भी हुए, उपयोग भी बताए गए; फिर भी चार दिन की बारिश ने पूछ लिया—नेटवर्क कहां गया। जब तक दोनों फाइलें खंभे से न खुलें, बिजली फाइल से चलती रहेगी, घर अंधेरे से। खैर 

        *युद्ध अभी शेष है*


*अविजित आनन्द संपादक समय का उपभोक्ता राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र लखनऊ और विस्पर आफ अन्टोल्ड हिन्दी अंग्रेजी मासिक पत्रिका साथ में चन्द्रशेखर सिंह प्रबंध संपादक समय का उपभोक्ता राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र लखनऊ*

न्यूज2

*बोर्ड प्रस्ताव नहीं, फिर भी उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन लिमिटेड ने डिस्कॉमों के नाम पर छूट माँग ली। संख्या घटी, नेता डेढ़ लाख बताते हैं। चुनाव से पहले आक्रोश की आशंका।*

लखनऊ। *कुर्सी बदली, चिट्ठी नहीं बदली। जैसे फाइल का कार्बन कॉपी निकाल लिया हो*। *उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन के दो प्रबंध निदेशकों ने आउटसोर्स सेवा निगम से छूट तीन बार माँगी, और हर बार संख्या थोड़ी और काट दी। पंकज कुमार ने 19 दिसंबर 2025 को करीब 78,000 लिखे, 31 मार्च 2026 को करीब 75,000। नितीश कुमार ने 11 सितंबर 2026 को करीब 73,500। तीनों पत्र 33/11 केवी उपकेंद्रों के 839 अनुबंधों पर टिके हैं*। *डिस्कॉम बोर्ड का एक भी प्रस्ताव साथ नहीं है। शायद बोर्ड को पूछना बेअदबी समझा गया। कर्मचारी नेता कहते हैं कि उपकेंद्र, मीटर रीडिंग, ट्रांसफॉर्मर वर्कशॉप और शक्तिभवन से क्षेत्रीय दफ्तरों तक मिलाकर बिजली के आउटसोर्स कर्मी करीब डेढ़ लाख हैं*। 
*प्रबंधन सिर्फ उपकेंद्र के 73,500 गिना रहा है। बाकी आदमी शायद बिजली के खंभे पर नहीं, कागज के हाशिये पर खड़े हैं।*
*रास्ता और भी सुंदर है। कार्पोरेशन का अध्यक्ष और ऊर्जा विभाग का प्रमुख एक ही व्यक्ति है। 21 सितंबर 2026 के स्थानांतरण के बाद दोनों कुर्सियाँ प्रमुख सचिव (ऊर्जा एवं अपर ऊर्जा स्रोत) रणवीर प्रसाद के पास हैं। वे उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन लिमिटेड, उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कार्पोरेशन लिमिटेड, उत्तर प्रदेश राज्य भार प्रेषण केंद्र और उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के अध्यक्ष भी हैं। एक तरफ अध्यक्ष बनकर प्रस्ताव बनता है। दूसरी तरफ विभाग का प्रमुख बनकर वही प्रस्ताव आगे बढ़ सकता है*। 
*खुद से खुद को चिट्ठी लिखने का शिष्ट तरीका*। 
नितीश कुमार का पत्र संख्या 1/64660/2026 सीधे ऊर्जा विभाग के प्रमुख को है। पंकज कुमार के दोनों पत्रों की प्रतिलिपि भी उसी मेज पर गई। आपत्ति कौन लिखे, जब सुनने वाला और भेजने वाला एक ही कुर्सी से जुड़ा हो।
*इलाहाबाद हाईकोर्ट 18 जनवरी 2010 को यही द्वंद्व रोक चुका है। जस्टिस वी.एम. सहाय और जस्टिस वी.के. दीक्षित की खंडपीठ ने कार्यकारी अभियंता प्रदीप कुमार जैन की याचिका पर सरकार को आदेश दिया कि ऊर्जा सचिव और कार्पोरेशन के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक दो अलग अधिकारी हों। तब दोनों कुर्सियाँ आईएएस नवनीत सहगल के पास थीं। अदालत ने स्थानांतरण पर रोक लगाई और कहा कि मामला नई स्वतंत्र समिति के बाद गुण-दोष पर देखा जाए।* 
*आज फिर प्रबंध निदेशक अलग हैं, नितीश कुमार। अध्यक्ष और ऊर्जा विभाग के प्रमुख फिर एक हैं। 2010 का आदेश शायद फाइल में कहीं दब गया। वैसे अवमानना का फैसला अदालत करेगी। पत्रकार पूछ सकता है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी उस आदेश से आँख क्यों चुरा रहे हैं।*
नितीश कुमार 2010 बैच के हैं। अप्रैल 2026 में पंकज कुमार के केंद्र प्रतिनियुक्ति पर जाने के बाद इस कुर्सी पर आए। पंकज कुमार 2002 बैच के हैं, अब ऊर्जा मंत्रालय में संयुक्त सचिव हैं। पत्र में श्रम विभाग के 17 अप्रैल 2026 के आदेश के बाद वेतन पर सालाना खर्च करीब 1,769 करोड़ लिखा है। निगम की दरों पर, कुशल को 22,000 और अकुशल को 20,000 रुपये, यह करीब 2,549 करोड़ हो सकता है। अंतर लगभग 780 करोड़ है। *स्नातक योग्यता से अनुभवी आईटीआई और आरपीएल कर्मियों के हटने, औद्योगिक अशांति और दुर्घटना का खतरा भी लिखा है। मीटर रीडर, कंप्यूटर ऑपरेटर, चपरासी और वर्कशॉप इस खाते में नहीं हैं। 28 सितंबर 2026 की खबर में करीब 60,000 मीटर रीडरों का जिक्र है। शक्तिभवन के संविदा कर्मी सार्वजनिक खबर में 114 हैं। अकेले मीटर रीडर कार्पोरेशन के पूरे आँकड़े के पास पहुँच जाते हैं। गिनती ऐसी कि छूट सस्ती पड़े और 780 करोड़ का भार भी छोटा दिखे।*
मंत्री एक बात कह रहे हैं, पत्र दूसरी। 2 जून 2026 को *ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने समीक्षा बैठक में कहा कि हजारों आउटसोर्स कर्मियों की छँटनी के बाद बड़ी कमी हो गई है, एक कर्मचारी पर चार के बराबर भार है, दुर्घटनाएँ बढ़ रही हैं, और बिना उचित कारण किसी संविदा कर्मी को न हटाया जाए। विधानसभा में स्थायी करने का सवाल उठ चुका है। विधायक फील्ड की कमी बताते रहे हैं। पत्र उलटी दिशा में हैं। छूट माँगी गई है, ताकि पुरानी एजेंसी व्यवस्था जारी रहे। जमीन पर आदमी कम है। कागज पर आदमी और कम कर दिया गया।*
*सवाल यहीं से तीखा होता है। पुरानी व्यवस्था बची रही, तो पुराने ठेकेदार भी बचे रहेंगे। 149 वितरण मंडलों में जेम से जो एजेंसियाँ चुनी गई हैं, वही अनुबंध खत्म होने पर फिर से अपने स्तर पर चलाने की इजाजत माँगी गई है। नया निगम एजेंसी खुद सूचीबद्ध करता। छूट मिलते ही वह दरवाजा बंद रहता है।* आशंका है कि चहेती एजेंसियों के टेंडर इसी देरी में जिंदा रखे जा रहे हैं। वक्त पर टेंडर क्यों नहीं निकलते। अनुबंध खत्म होने देते क्यों हैं, फिर तत्काल जरूरत का हवाला देकर पुरानी एजेंसी को बढ़ा देते क्यों हैं। पत्र में लिखा है कि जनशक्ति की कमी से अनुबंध कम समय में पूरे करने पड़ते हैं। देरी अगर व्यवस्था की आदत है, तो छूट उसी आदत की ढाल बन सकती है। यह आशंका है। चिट्ठी में किसी ठेकेदार का नाम नहीं है। वैसे नाम न लिखना भी एक कला है।
*उम्र का नियम और भी सुंदर है*। *नियमित कर्मी 60 पर रिटायर होते हैं। कार्पोरेशन आउटसोर्स को 55 पर हटा रहा है*। 
*फरवरी 2025 में मध्यांचल के प्रबंध निदेशक भवानी सिंह खंगारौत के आदेश का हवाला खबरों में है: सबस्टेशन और एचटी-एलटी लाइन पर अधिकतम उम्र 55, उसके बाद काम न लिया जाए। मार्च 2025 में पूर्वांचल की ओर से भी 55 से ऊपर के आउटसोर्स कर्मियों को हटाने का निर्देश छपा । संघ करीब 10,000 ऐसे लोगों की बात करता है, जो 15–20 साल से काम कर रहे थे। जून 2024 में ऊर्जा विभाग ने रबर स्टैम्प निदेशकों का कार्यकाल 62 से 65 तक कर दिया। खंभे पर चढ़ने वाला 55 पर जाए। कुर्सी पर बैठने वाला 65 तक रहे। कंपनी अधिनियम में प्रबंध निदेशक की सामान्य छत 70 है। उम्र भी पद के हिसाब से बढ़ती है।*
*डिस्कॉम इस चिट्ठी में कहीं नहीं बोलते। पूर्वांचल, मध्यांचल, पश्चिमांचल, दक्षिणांचल और केस्को अलग कंपनी हैं अनुबंध मंडल स्तर पर उनके नाम से होते हैं। निजीकरण के वक्त बोर्ड प्रस्ताव पास कराया गया था। यहाँ वह कागज इसमें नहीं है।* 

*आशंका अब पत्रों से मजबूत होती है कि डिस्कॉमों के भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी अपनी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट देखते हैं, और अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक जो चाहें लिख देते हैं। जैसा चाहेंगे, वैसी मुहर लग जाएगी। ये रबर स्टैम्प बनकर रह गए हैं। स्याही अध्यक्ष के पास है, छाप डिस्कॉम के पास*। 
*तीन पत्रों में बोर्ड का प्रस्ताव न होना, और अध्यक्ष व ऊर्जा विभाग के प्रमुख का एक होना, इस सवाल को टालने नहीं देता।*
*संघ छूट नहीं, शामिल करना चाहता है। प्रदेश महामंत्री देवेंद्र कुमार पांडेय ने 16 फरवरी को प्रमुख सचिव (सचिवालय प्रशासन) को और *3 अप्रैल को महानिदेशक, आउटसोर्स सेवा निगम को लिखा। आरोप हैं कि सुरक्षा उपकरण नहीं मिलते, दुर्घटना पर कार्रवाई नहीं होती, 15 मई 2017 के आसपास करीब 15,000 कर्मी हटाए गए, और ईपीएफ जमा नहीं होता। *जून 2026 की खबर में अक्टूबर 2024 की कटौती में हटाए गए करीब 25,000 की बहाली की माँग दर्ज है। उसी महीने 49 दिनों में 56 दुर्घटनाएँ और 30 मौतों का आँकड़ा छपा।* 
*मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2 सितंबर 2026 को आउटसोर्स सेवा निगम खोला था। मानदेय 20 से 40 हजार और सीधे खाते में वेतन का वादा था। कार्पोरेशन उसी व्यवस्था से बाहर रहना चाहता है। निगम कर्मियों के लिए खुला। कार्पोरेशन अपने लिए बंद रखना चाहता है।*

*पैसा भी एक सिरे से नहीं जाता ।1,769 करोड़ उपकेंद्र-लाइन के वेतन का बताया गया है*। *बिलिंग एजेंसी को बिल बनाने और वसूली के प्रतिशत पर भुगतान होता है। मीटर रीडर की मजदूरी एजेंसी अपने बिल में से काटती है*। *दफ्तर और वर्कशॉप तीसरी मद हैं। ये सब डिस्कॉम के राजस्व से निकलते हैं, जो उपभोक्ता के बिल और सरकारी सब्सिडी से बनता है*। *हो सकता है कि अधूरी गिनती शोषण ढक रही हो। हो सकता है कि एजेंसी के बिल और मजदूरी का फर्क किसी रिसाव को छुपा रहा हो*। *हो सकता है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संविदा कर्मियों का आक्रोश सत्ताधारी दल को नुकसान पहुँचाए। पत्रों में न पार्टी है, न घोटाले का आँकड़ा*। *दोनों लेखक उसी सरकार के नियुक्त प्रबंध निदेशक हैं।*
*सवाल अब सीधे हैं। 2010 में अदालत ने ऊर्जा सचिव और कार्पोरेशन प्रमुख को अलग किया था। आज दोनों फिर एक हैं। मंत्री कमी मानते हैं, पत्र छूट माँगते हैं। 73,500 में मीटर रीडर, वर्कशॉप और दफ्तर क्यों नहीं। 55 और 65 एक ही निगम में कैसे चल रहे हैं। डिस्कॉम बोर्ड चुप क्यों है।* 

अधिकारी वक्त पर टेंडर  निकलने से क्यों बचे रहते हैं। आशंका जाहिर की जा सकती है। अवमानना का फैसला अदालत का है। जवाब कार्पोरेशन और ऊर्जा विभाग को देना है। जवाब आए, तब मजा और बढ़ेगा। खैर 
    
     *युद्ध अभी शेष है।*


*अविजित आनन्द, संपादक, समय का उपभोक्ता, राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र, लखनऊ, और विस्पर आफ अन्टोल्ड, हिंदी-अंग्रेजी मासिक पत्रिका। चन्द्रशेखर सिंह, प्रबंध संपादक, समय का उपभोक्ता, राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र, लखनऊ*


Sunday, 27 September 2026

आज दिनांक 28/9/2026 को एक विधिक जागरूकता सहायता विशेष अभियान *

प्रेस विज्ञप्ति 

आज दिनांक 28/9/2026 को एक विधिक जागरूकता सहायता विशेष अभियान ** 

विद्यालयों के किशोरों को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के विषय पर सरल और सही जानकारी देने के लिए** जनपद न्यायाधीश सुशील कुमार शशि के निर्देशन और प्रभारी सचिव अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रशांत कुमार सिंह की देखरेख में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज जौनपुर में आयोजित किया गया। 

 इस अवसर पर विशेष जागरूकता सहायता अभियान की अध्यक्षता करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र प्रताप यादव ने कहा कि अज्ञानता के कारण कोई किशोर बालक और बालिका ना कोई गंभीर अपराध करें ना उसका शिकार बने उन्होंने बताया कि 18 वर्ष के नीचे के किशोर किशोरियों और बच्चों के प्रति किसी भी लैंगिक अपराध के लिए कठोर कानून है और इसमें पीड़ित प्रताड़ित के लिए विशेष सुविधा दिया गया है इन अपराधों की गंभीरता के आधार पर 3 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास की सजा दी जाती है और 7 वर्ष तक के बच्चों के लिए गवाही देने का विशेष प्रावधान किया गया है इसके अतिरिक्त 7 से 12 वर्ष की आयु के अपराधी किशोरों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है  और उनका परीक्षण  किशोर न्याय बोर्ड में किया जाता है उन्होंने किशोर बालक बालिकाओं को विशेष रूप से सजग रहने और अपराधों के प्रति माता-पिता और घर वालों को तत्काल सूचना देने के बारे में अवगत कराया । उन्होंने आगे बताया की सही मामलों पर तत्काल ही प्राथमिक की लिखने में परहेज नहीं करना चाहिए लेकिन अनावश्यक और गलत मामलों में शत्रुता के कारण किसी को गलत फंसाना भी नहीं चाहिए। 

इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल जनपद न्यायालय जौनपुर डॉ दिलीप कुमार सिंह ने गलत और सही स्पर्श के बारे में बताते हुए हेल्पलाइन नंबर 1098 15100   112 नंबरों के बारे में बताएं और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा निशुल्क सहायता और विधिक पैरवी की सुविधाओं के बारे में बताया और सोशल मीडिया पर सावधान रहने और साइबर क्राइम से बचने के बारे में विस्तार से बताते हुए अकेले और अलग स्थान पर जाने और अपरिचित लोगों से बचने की सलाह दिया उन्होंने यौन उत्पीड़न यौन अपराध यौन शोषण और अश्लीलता और पोर्नोग्राफी के बारे में सरल भाषा में विस्तार से समझाया। उन्होंने यह भी कहा कि यह अधिनियम 18 वर्ष से कम आयु के लड़के लड़कियों दोनों पर लागू होता है और इसमें पुलिस सादे कपड़ों में जाकर घर पर पीड़ित बच्चों का बयान लेती है 

प्रधान श्रीमती मंजू लता वर्मा ने बालिकाओं को उचित कानूनी और पुलिस की सहायता लेने और परिवार से कुछ छुपाने की सलाह देते हुए आभार व्यक्त किया संचालन श्रीमती आदर्श वर्मा द्वारा किया गया इस अवसर पर उपस्थित हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की छात्राओं द्वारा विभिन्न प्रश्न पूछे गए और जानकारी ली गई जिसका निराकरण अपर जिला जज सुरेंद्र प्रसाद यादव और डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह के द्वारा किया गया। 


इस अवसर पर प्राधिकरण के अरविंद कुमार चौबे पैरा लीगल वालंटियर शिव शंकर सिंह अरुण कुमार श्रीमती माला सिंह रूमाना अफरोज अक्सीर फातिमा रीना सिंह रंजन उपाध्याय बतूल अजरा नेहा श्रीवास्तव गरिमा सिंह ज्योति मौर्य स्मृति पांडे नीलम सिंह सीमा सिंह और रेखा यादव सहित समस्त विद्यालय परिवार और बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रही।

गरुड़ पुराण और धर्म दर्शन के आधार पर पितृपक्ष का संपूर्ण विवेचन - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक 9415623583

गरुड़ पुराण और धर्म दर्शन के आधार पर पितृपक्ष का संपूर्ण विवेचन  - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक 9415623583
क्या पितृपक्ष के कालखंड किसी के घर अन्न-जल क्यों नहीं ग्रहण करना चाहिए

वैज्ञानिक धार्मिक और आध्यात्मिक विवेचन 

सनातन हिन्दू धर्म में 16 दिन का पितृपक्ष, सबसे संवेदनशील, सबसे सूक्ष्म दिनों का समय माना गया है। जैसा कि आप जानते हैं कि जीवन और मृत्यु दोनों आज तक विज्ञान के लिए भी सबसे जटिल पहेली है जिसे भारत के लोगों ने लाखों वर्ष पहले ही सुलझा लिया था गरुड़ पुराण, जो मृत्यु और मृत्यु के बाद के विज्ञान का ग्रंथ है, वह स्पष्ट कहता है - इन 16 दिनों में आपका शरीर केवल आपका नहीं रहता, आप अपने पितरों के लिए एक "पात्र" बन जाते हैं।

इसलिए इस दौरान भोजन का नियम सबसे कठोर है।

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भाग 1 - गरुड़ पुराण क्या कहता है - अन्न ही शरीर नहीं, अन्न ही मन है

गरुड़ पुराण, प्रेत कल्प, अध्याय 17 और 33 में भगवान विष्णु, गरुड़ जी को समझाते हैं -

*"अन्नं ब्रह्म रसं विष्णुः भोक्ता देवो महेश्वरः।"*
अन्न ब्रह्मा है, उसका रस विष्णु है, और उसे खाने वाला जीव, स्वयं महेश है। इसलिए अन्न को कभी सामान्य मत समझो।

और दूसरा श्लोक -
*"जैसा अन्न वैसा मन, जैसा पाणी वैसी वाणी।"*

गरुड़ पुराण कहता है, अन्न के 3 दोष होते हैं, जो खाने वाले के अंदर चले जाते हैं -

*1. जाति दोष -* अन्न किसने उगाया? किस भाव से उगाया? अगर किसान ने लोभ, क्रोध से उगाया, तो वह भाव अन्न में आएगा।

*2. निमित्त दोष -* अन्न बनाते समय, बनाने वाले के मन में क्या था? अगर रसोई में झगड़ा हो रहा है, गाली दी जा रही है, तो वह अन्न विष बन जाता है। इसलिए कहा - रसोई में कभी अशुद्ध मन से भोजन मत बनाओ।

*3. आश्रय दोष -* अन्न किसके घर का है? किसके पैसे से आया? अगर वह पैसा पाप से, चोरी से, ब्याज से, धोखे से आया है, तो उस अन्न में पाप का अंश आ जाता है।

पितृपक्ष में यही तीसरा दोष, सबसे खतरनाक हो जाता है।

भाग 2 - पितृपक्ष में आपके साथ कौन रहता है? - सूक्ष्म विज्ञान

गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद जीव के 2 शरीर बचते हैं - सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर। पितृपक्ष में यमराज, पितरों को 16 दिन के लिए, पितृलोक से मुक्त करते हैं, वे अपने पुत्र-पौत्रों के घर आते हैं, उनके द्वार पर, उनकी रसोई में, उनकी छाया में रहते हैं।

वे कुछ खाते नहीं, वे केवल *गंध और भाव* ग्रहण करते हैं।

आप जो भी खाते हो, जो भी सोचते हो, उसका सूक्ष्म अंश, आपके पितरों को जाता है।

अब सोचो, आप किसी और के घर खाते हो -

- उस घर में मांस-मदिरा बनता हो, तो उसका दोष आपके पितरों को जाएगा।
- उस घर में पितरों का श्राद्ध न होता हो, पितर अतृप्त हों, तो उनकी अतृप्ति, ईर्ष्या, आपके पितरों से टकराएगी।
- उस घर का पैसा, अगर अधर्म से आया है, तो आपके पितर भी उस पाप के भागी बनेंगे।

इसलिए गरुड़ पुराण कहता है - *पितृपक्ष में पुत्र, पितरों के लिए एक "पवित्र घड़ा" है, अगर घड़ा गंदा हो गया, तो पितर जल कैसे पिएंगे?*

आपका शरीर ही वह घड़ा है, और अन्न-जल ही उस घड़े का जल है।

भाग 3 - 5 कारण - क्यों नहीं खाना चाहिए दूसरों के घर - गरुड़ पुराण के अनुसार

*कारण 1 - आपका शरीर पितरों के लिए यज्ञशाला बन जाता है*

इन 16 दिनों में, जब आप तर्पण करते हो, पिंडदान करते हो, ब्राह्मण को भोजन कराते हो, तो आपके पितर, आपके माध्यम से ही तृप्त होते हैं। गरुड़ पुराण कहता है - पुत्र की नाभि से, एक सूक्ष्म नाड़ी, पितरों तक जाती है। जो पुत्र खाता है, वही पितरों को सूक्ष्म रूप में मिलता है।

अगर आप बाहर का, अपवित्र, रजोगुणी, तामसिक अन्न खाओगे, तो आपके पितरों को भी वही मिलेगा, वे तृप्त होने की जगह, और अशांत हो जाएंगे। इसलिए कहा - *"स्वगृहे भोजनं कुर्यात्"* - अपने घर का ही भोजन करो।

*कारण 2 - दूसरे के घर का अन्न, आपके व्रत को तोड़ देता है*

पितृपक्ष, एक व्रत है, 16 दिन का महाव्रत। जैसे नवरात्रि में 9 दिन व्रत में, आप बाहर का नहीं खाते, क्योंकि आप देवी के लिए पवित्र हो, वैसे ही पितृपक्ष में आप पितरों के लिए पवित्र हो।

गरुड़ पुराण कहता है - जो व्यक्ति पितृपक्ष में दूसरे के घर अन्न खाता है, उसका श्राद्ध, पितर ग्रहण नहीं करते, उसके पिंड, कौवे भी नहीं खाते, क्योंकि उसके पिंड में, दूसरे के घर की अशुद्धि आ जाती है।

श्लोक है - *"परान्नं च परवस्त्रं परशय्या परस्त्रियः, पितृपक्षे विवर्जयेत्।"* पितृपक्ष में दूसरे का अन्न, दूसरे का वस्त्र, दूसरे की शय्या, और परस्त्री का संग, त्याग देना चाहिए।

*कारण 3 - कर्ज का सिद्धांत - अन्न का कर्ज सबसे बड़ा कर्ज*

सनातन धर्म में, अन्न का कर्ज, कभी न उतरने वाला कर्ज माना गया है। आपने किसी के घर खाया, तो आप उसके कर्जदार हो गए, सूक्ष्म रूप से।

पितृपक्ष में, आपको केवल 3 के कर्जदार रहना है - देव कर्ज, ऋषि कर्ज, पितृ कर्ज। अगर आपने चौथा कर्ज - मनुष्य का कर्ज - ले लिया, दूसरे के घर खाकर, तो आपके पितृ, आपको श्राप देकर जाएंगे, क्योंकि आपने उनका हिस्सा, दूसरे को दे दिया।

गरुड़ पुराण में कथा है - एक ब्राह्मण ने पितृपक्ष में अपने मित्र के घर खीर खाई, उसके पितर, भूखे ही पितृलोक लौट गए, क्योंकि उस खीर पर, मित्र की कामना थी - "मेरा काम हो जाए", पितरों ने कहा - "तूने हमारा अन्न, दूसरे की कामना को दे दिया, जा, तुझे पितृदोष लगेगा।"

*कारण 4 - प्रेत और पिशाच बाधा से बचाव*

गरुड़ पुराण, प्रेत कल्प में, प्रेतों के 18 प्रकार बताता है - जो पितृपक्ष में सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं, क्योंकि इस दौरान यमलोक के द्वार खुले होते हैं।

जब आप किसी अनजान घर, होटल, ढाबे, या ऐसे घर में खाते हो, जहाँ का शुद्ध-अशुद्ध पता नहीं, जहाँ लहसुन-प्याज, मांस-मदिरा बनता हो, तो उस अन्न के साथ, प्रेतों की सूक्ष्म ऊर्जा, आपके शरीर में प्रवेश कर जाती है।

और जब आपके शरीर में पितर भी हैं, और बाहर से प्रेत भी आ गया, तो दोनों में युद्ध होता है, इसी को पितृदोष, नजर दोष, घर में क्लेश कहा जाता है।

इसलिए पुराने लोग कहते थे - पितृपक्ष में होटल का मत खाओ, बाहर का मत खाओ, अपने हाथ से बना, सादा, सात्विक खाओ।

*कारण 5 - आपके पुण्य का अंतरण हो जाता है*

गरुड़ पुराण का सबसे गुप्त सिद्धांत - *अन्न दान, पुण्य का अंतरण है।*

जब आप किसी के घर खाते हो, तो अनजाने में, आपका 1 दिन का श्राद्ध-पुण्य, उस घर के पितरों को चला जाता है, और आपके पितर खाली हाथ रह जाते हैं।

जैसे मोबाइल से पैसा स्थानान्तरित होता है, वैसे ही अन्न से पुण्य स्थानांतरित होता है, इसलिए पितृपक्ष में केवल उसी के घर खाना चाहिए, जिसके पितर, आपके पितरों के मित्र हों, यानी आपका अपना परिवार, आपका अपना घर।

भाग 4 - किन-किन जगहों पर बिल्कुल नहीं खाना चाहिए - गरुड़ पुराण की सूची

गरुड़ पुराण में, 8 जगहों का अन्न, पितृपक्ष में महापाप बताया गया है -

1.  *शूद्र या अपवित्र व्यक्ति के घर -* जहाँ शौच-अशौच का ध्यान न हो।
2.  *शराबी, मांसाहारी के घर -* जहाँ जीव हत्या होती हो।
3.  *पुत्रहीन, श्राद्धहीन घर में -* जहाँ कभी पितरों के नाम पर दीया भी न जलता हो, वहाँ के पितर अतृप्त हैं, वे आपका पुण्य छीन लेंगे।
4.  *वेश्या, परस्त्रीगामी के घर -* जहाँ काम वासना का वास हो।
5.  *ब्याज, चोरी, रिश्वत से कमाने वाले के घर -* उसका पैसा अपवित्र है।
6.  *श्राद्ध के दिन, निमंत्रण के बिना, दूसरे के घर -* जो श्राद्ध में बिना बुलाए जाता है, वह पाप खाता है।
7.  *होटल, ढाबा, बाजार का भोजन -* जहाँ बनाने वाले का पता नहीं, वहाँ 100 लोगों की वासना, उस अन्न में होती है।
8.  *दूसरे के श्राद्ध का बचा हुआ अन्न -* अगर किसी और ने अपने पितरों के नाम पर ब्राह्मण को खिलाया, और वह बच गया, उसे कभी मत खाओ, वह सीधे पितरों का अन्न है, उसे खाने से पितृदोष लगता है।

भाग 5 - क्या खाना चाहिए, कैसे खाना चाहिए - पितृपक्ष का आहार विधान

तो फिर खाना क्या चाहिए? गरुड़ पुराण, अध्याय 21 में आहार विधान देता है -

*खाने योग्य -*
- अपने घर में, अपने हाथ से, या पत्नी, माता, पुत्री के हाथ से बना, गाय के घी में बना, सादा भोजन।
- बिना लहसुन-प्याज का, बिना मसूर, उड़द, चना, हींग का - क्योंकि ये तामसिक हैं, पितरों को उत्तेजित करते हैं।
- जौ, चावल, गेहूं, मूंग, गाय का दूध, दही, घी, शहद, फल, कंद-मूल।
- एक बार भोजन, ब्रह्म मुहूर्त में नहीं, दिन में एक बार, सात्विक।
- भोजन से पहले, अपने पितरों के नाम पर, गाय, कौवा, कुत्ता, चींटी के लिए, थोड़ा निकालना, जिसे पंचबलि कहते हैं।

*न खाने योग्य -*
- 16 दिन - मांस, मछली, अंडा, शराब, लहसुन, प्याज, मसूर, चना, उड़द, बैंगन, लौकी (कुछ जगह), पान, तंबाकू।
- बासी, जूठा, दोबारा गर्म किया हुआ भोजन।

*जल का नियम -*
पितृपक्ष में पानी भी, किसी के घर का नहीं पीना चाहिए, खासकर जो तामसिक हो। अपना पानी, अपने घर का, या गंगा जल, या कुएं का साफ पानी। क्योंकि जल भी, अन्न की तरह, भाव ग्रहण करता है।

कहा गया है - *"जलं पीत्वा परगृहे, पितृणां तृप्ति नश्यति।"* दूसरे के घर जल पीने से, पितरों की तृप्ति नष्ट हो जाती है।

भाग 6 - अपवाद - कब दूसरे के घर खा सकते हैं?

गरुड़ पुराण, कठोर है, पर करुण भी है, 3 अपवाद देता है -

*1. गुरु के घर -* अपने गुरु, आचार्य, ज्ञानी ब्राह्मण के घर, पितृपक्ष में खा सकते हैं, क्योंकि गुरु का अन्न, अमृत है, वह आपके पितरों को भी तृप्त करता है।

*2. पुत्री के घर -* पिता, अपनी विवाहित पुत्री के घर, पितृपक्ष में अन्न नहीं खाता, यह नियम है, पर पुत्री, अपने पिता के घर खा सकती है, क्योंकि पुत्री का संबंध, पिता के पितरों से भी है।

*3. आपातकाल में -* अगर आप यात्रा में हो, बीमार हो, और अपना भोजन संभव नहीं, तो फल, दूध, गंगा जल लेकर, *"पितृभ्यो नमः"* कहकर, भगवान विष्णु को अर्पण करके, खा सकते हैं, दोष नहीं लगेगा, क्योंकि भाव शुद्ध है।

पर होटल, मित्र के घर पार्टी, शादी, बर्थडे में, पितृपक्ष में जाना, और वहां खाना, गरुड़ पुराण में महादोष कहा गया है, इससे पितृ नाराज होकर, *पितृदोष* देते हैं - घर में क्लेश, संतान बाधा, धन हानि, बीमारी।

भाग 7 - आज के जीवन में कैसे पालन करें - प्रायोगिक उपाय

आज तो नौकरी है, बाहर रहना पड़ता है, तो कैसे करें? 5 उपाय -

*1. टिफिन ले जाओ -* 16 दिन, अपने घर से टिफिन ले जाओ, कार्यालय में भी अपना ही खाओ।

*2. फलाहार करो -* अगर बाहर हो, तो केवल फल, दूध, मूंगफली, गंगा जल, तुलसी दल लो, यह पवित्र है।

*3. मानसिक क्षमा मांगो -* अगर गलती से, बाहर खा लिया, तो रात को, दक्षिण दिशा में मुंह करके, हाथ में जल लेकर, कहो - "हे मेरे पितरो, आज मैंने अज्ञान में, दूसरे का वर्जित अन्न ग्रहण किया, मुझे क्षमा करो, मैं कल से ध्यान रखूंगा, और इसके प्रायश्चित में, मैं एक ब्राह्मण को भोजन कराऊंगा, या गाय को चारा दूंगा।"

*4. गायत्री मंत्र से शुद्धि -* भोजन से पहले, 3 बार गायत्री मंत्र पढ़कर, भोजन पर फूंक मारो, तो उसका दोष 50% कम हो जाता है, यह गरुड़ पुराण का ही उपाय है।

*5. तुलसी दल डालो -* कोई भी भोजन, जल, अगर बाहर का लेना ही पड़े, तो उसमें तुलसी का पत्ता डाल दो, तुलसी, विष्णु प्रिया है, वह हर अन्न को पवित्र कर देती है, प्रेत बाधा नहीं आने देती।

अंतिम - पितृपक्ष, भूखे रहने का नहीं, पवित्र रहने का पर्व है

पितृपक्ष, डरने का पर्व नहीं, प्रेम का पर्व है, 16 दिन, आपके पितर, आपके मेहमान हैं, जैसे घर में मेहमान आए तो आप घर साफ रखते हो, बाहर का गंदा नहीं खाते, वैसे ही।

गरुड़ पुराण का सार, एक ही लाइन में -

*"पितृपक्षे परान्नं यस्तु भुंक्ते मोहात् नराधमः, तस्य पितरो निराशा वै प्रयान्ति यममंदिरम्।"*
जो मनुष्य, मोहवश, पितृपक्ष में दूसरे का अन्न खाता है, उसके पितर निराश होकर, यमलोक लौट जाते हैं, और उसे श्राप देकर जाते हैं।

और जो व्यक्ति, 16 दिन, अपने घर का, पवित्र, सात्विक अन्न, पितरों को याद करके खाता है, उसके पितर, उसे आशीर्वाद देते हैं - *"धनं धान्यं संतानं, सुखं समृद्धि वर्धताम्।"*

इसलिए इस पितृपक्ष, प्रण लो - बाहर का नहीं, अपना खाऊंगा, पवित्र खाऊंगा, पितरों को तृप्त करूंगा।

क्योंकि अन्न ही मन है, और मन ही पितरों तक जाता है।

*।। इति गरुड़ पुराणोक्त पितृपक्ष परान्न निषेध कथा संपूर्णा ।।*

Saturday, 26 September 2026

मुझे स्वयं ही विश्वास नहीं होता दूसरों को क्या कहा जाए 50 वर्ष से ज्योतिष मौसम खेल राजनीति अनंत ब्रह्मांड और दुनिया भर की अनगिनत घटनाओं की भविष्यवाणी जब मैं खुद पढ़ता हूं तो मुझे स्वयं ही विश्वास नहीं होता तो दूसरे कैसे करेंगे 50 वर्ष बहुत लंबा समय होता है ।

मुझे स्वयं ही विश्वास नहीं होता दूसरों को क्या कहा जाए 50 वर्ष से ज्योतिष मौसम खेल राजनीति अनंत ब्रह्मांड और दुनिया भर की अनगिनत घटनाओं की भविष्यवाणी जब मैं खुद पढ़ता हूं तो मुझे स्वयं ही विश्वास नहीं होता तो दूसरे कैसे करेंगे 50 वर्ष बहुत लंबा समय होता है ।

 लेकिन यह सभी लाखों भविष्यवाणी समाचार पत्र पत्रिकाओं प्रिंट इलेक्ट्रानिक और सोशल मीडिया में और विभिन्न चैनलों में लिखित रूप से 50 वर्ष से विद्यमान है इसलिए विश्वास न करने का कोई कारण भी नहीं होता इसमें कई भविष्यवाणी है तो 1975 से 1990 की संभव जैसी लगती है लेकिन संजोग से वह टीडी कॉलेज की बल्लरी और मंथन पत्रिकाओं में सुरक्षित हैं जैसे कि अमेरिका रूस का झूठ बोलने की चंद्रमा पर हवा और पानी नहीं है सौरमंडल में कई जगह जल जीवन और वनस्पतियां तथा जीव प्रकार विद्यमान है स्काई लैब से दुनिया की क्षति ना होना 1999 2012 और 2020 में धरती पर कोई प्रलय नहीं होना 2030 के पहले कोई परमाणु युद्ध नहीं होना और धरती पर अंधेरा नहीं छा जाना जैसी और विश्व कप में भारत की विजय जैसी महान भविष्यवाणियां सम्मिलित हैं

मौसम संबंधित सुनामी लहर के 2004 की भविष्यवाणी जहां में स्वयं चेन्नई समुद्र तट पर था और हजारों लोगों को बचाया भारत के चंद्रयान मंगलयान के बारे में सुनामी और भूकंप के बारे में बीजेपी मोदी कांग्रेस ट्रंप इत्यादि के बारे में सब की सब भविष्यवाणी बिल्कुल सही हुई है

 इसी तरह मौसम की गहन विवेचन करते समय 15 अगस्त को जब मैं अगस्त के अंतिम सप्ताह में बंगाल की खाड़ी में मध्य चक्रवात और उसके द्वारा विराट मात्रा में जल की वर्षा और 50 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार की हवाएं और 70% भारत के प्रभावित होने की भविष्यवाणी की तो नासा इसरो और दुनिया भर के मौसम वैज्ञानिक तो छोड़ दो हमारे अपने लोग भी हंसी में उड़ा दिए थे लेकिन कुछ अपने लोगों को पूर्ण विश्वास था किया बिल्कुल सही होगा

इसी तरह 23 सितंबर से वृषभ प्रारंभ होकर उसके 27 तक चलने और 24 25 और 26 दिसंबर को लगातार तीन दिन तीन रात तूफानी वर्षा आंधी तूफान के साथ लगातार जौनपुर और भारत तथा आसपास होने की बातें एक-एक अक्षर ईश्वर की कृपा से सही हुई यहां तक मुझे विश्वास था कि लोगों को अपने खेतों की सिंचाई करने से भी मना कर दिया था और आज जबकि आंधी पानी तूफान वर्षा जौनपुर और पूर्वांचल में चरम पर है तब मैंने सुबह से शाम तक तीन बार कल मौसम साफ हो जाने की लगभग असंभव सी भविष्यवाणी किया है 

इसी तरह खेलो इंडिया का नारा सुपर फ्लॉप होना एशियाई खेलों में अधिकतम इस बार 11 स्वर्ण पदक के साथ 5 से 8 में स्थान के बीच रहना ओलंपिक और विश्व प्रतियोगिताओं में भारत की घनघोर दुर्गति होना और 2028 तक योगी जी के प्रधानमंत्री होने और मोदी जी का पतन होना जैसी असंभव सी भविष्यवाणियां भी शामिल हैं। चीन भारत ब्राजील का शक्तिशाली होना और एक दशक के अंदर अमेरिका यूरोप अरब देशों का पतन होना जैसी आश्चर्यजनक भविष्यवाणी अभी से कर दे रहा हूं 

हमारे अपने घर परिवार सभी संबंधी और मित्रों के अलावा डॉक्टर मनोज मिश्रा जनसंचार विभाग के अध्यक्ष पूर्वांचल विश्वविद्यालय मुकेश श्रीवास्तव डॉक्टर प्रणव  मिश्रा एवं पूर्व कुलपति डॉक्टर वंदना सिंह आरपी सिंह संजय कुमार उपाध्याय भूपेश सिंह वशिष्ठ नारायण शुक्ला पूर्व अध्यक्ष सुभाष चंद्र यादव  सुधा सिंह डॉक्टर वंदना दुबे  डॉ सरोज सिंह  जज वशिष्ठ नारायण सिंह ध्रुवेश यादव के के मौर्य प्रकाश चंद्र शुक्ला डॉक्टर एक शर्मा डॉक्टर विनोद कनौजिया डॉक्टर बृजेश कुमार ठाकुर अंजनी सिंह  शिवकुमार यादव कंचन सिंह सचिन अमर सिंह अनिल कुमार सिंह कप्तान डॉक्टर एलपी संध्या सिंह संतोष कुमार श्रीवास्तव मौर्य सतना यादव  प्रशांत सिंह प्रमोद चंद्रगुप्त सुनील कुमार गुप्ता कमलेश अग्रहरि जैसे अनगिनत जाने माने लोग पूर्ण विश्वास करते हुए हमें प्रोत्साहित करके अपनी शुभकामनाएं देते रहते हैं जौनपुर की प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में विशेष कर राम जी जायसवाल मारकंडे मिश्रा दीपक श्रीवास्तव दीपक मिश्रा मनीष श्रीवास्तव शुभांशु जयसवाल डॉक्टर प्रमोद वॉचेस पति आदर्श गुरु गणपत सहाय स्वर्गीय और दम्मूजी ओमप्रकाश जायसवाल उनके पुत्र स्वर्गीय विवेक जायसवाल अखिलेश सिंह गुरुजी राजेश श्रीवास्तव बच्चा भैया विनोद कुमार प्रजापति  ओम वेबसाइट चैनल सहित अन्य लोगों का भी में बहुत आभारी हूं जानबूझकर न छापने के लिए दैनिक जागरण  और अमर उजाला परिवार का और भी आभारी हूं 

इन सभी हर क्षेत्र की भविष्यवाणियों का समय पूर्व लिख देने से सबका बहुत लाभ होता है और लोग समय रहते काफी कुछ अपना बचाव कर लेते हैं इसमें व्यक्तिगत रूप से यश कीर्ति प्रतिष्ठा पाना मेरा बिल्कुल लक्ष्य नहीं है राजनीति राजनेताओं और बड़े लोगों से बिल्कुल दूर रहना मेरा सबसे बड़ा लक्ष्य है।

मौसम की भविष्यवाणी और पूर्व की भविष्यवाणी का आकलन - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 7017713978 15

मौसम की भविष्यवाणी और पूर्व की भविष्यवाणी का आकलन - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 7017713978 15
आज जौनपुर और संपूर्ण पूर्वांचल में और समस्त आसपास के जनपदों में अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान24 डिग्री सेल्सियस और स्वच्छ हवा वाला रहेगा यह बहुत आश्चर्य की बात है क्योंकि तापमान में केवल एक डिग्री सेल्सियस का अंतर साल में केवल दो-तीन बार होता है और इतना ठंडा मौसम अगहन अर्थात नवंबर के अंतिम भाग में ही होता है दिन भर रात भर लगातार अनवरत तूफानी वर्षा 40 से 70 किलोमीटर की भयानक तेज  हवाओं आंधी तूफान झंझा झकोर गर्जन तड़ित वारिदमाला और प्रचंड चक्रवार्ती हवाओं के भारी से भारी मूसलाधार वर्षा आंधी के साथ होगी। 

कल अर्थात 27 सितंबर के बारे में हमारे केंद्र की भविष्यवाणी है कि आंधी तूफान और वर्षा का वेग लगभग पूरी तरह थम जाएगा और 5-6 दिन के बाद धूप होगी लेकिन ठंड कायम रहेगी और न्यूनतम तापमान गिरकर तेज डिग्री सेल्सियस हो जाएगा और पंखा चलाने पर एक से भी अधिक ठंड होगी इसके बाद धीरे-धीरे 28 सितंबर तक पूरे देश से अर्नब नाम के इस चक्रवात का असर पूरी तरह समाप्त होगा आंधी तूफान वर्षा भी समाप्त हो जाएगी और तापमान गिरकर न्यूनतम 23 और अधिकतम 30 डिग्री सेल्सियस तक आ जाएगा और ठंड और भी बढ़ जाएगी झंझा झकॊर घन तड़ित वारिदमाला और प्रचंड चक्रवार्ती हवाओं का क्रम बहुत कमजोर पड़ जाएगा और 28 अक्टूबर तक मौसम साफ हो जाएगा जौनपुर और आसपास इस 4 दिन के कालखंड में 100 से 160 मिली मीटर वर्षा होने की भविष्यवाणी है और अभी तक 100 मिलीमीटर वर्षा आज 26 सितंबर की सुबह तक हो चुकी है 

  यह भविष्यवाणी आप सबको 15 अगस्त से आज तक बार-बार 15 दिन से भेजी जा चुकी है और सभी को फसलों की सिंचाई करने से मना किया गया था ताकि सबके हजारों लाखों रुपए बच सके जहां तक संपूर्ण भारत की बात है तो उड़ीसा आंध्र प्रदेश बिहार झारखंड बंगाल बांग्लादेश नेपाल भूटान सिक्किम असम अरुणाचल प्रदेश मिजोरम त्रिपुरा नागालैंड मेघालय में भारी से बहुत भारी मूसलाधार वर्षा 60 से 100 किलोमीटर वेग वाली प्रचंड तूफानी हवाओं के साथ होगा जो कल तक समाप्त हो जाएगा इसके बाद लखनऊ से मध्य प्रदेश महाराष्ट्र राजस्थान दिल्ली उत्तराखंड पश्चिमी उत्तर प्रदेश पंजाब हरियाणा के कुछ भागों में आजकल और परसों यह चक्रवाती वर्षा 25 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे वाली तूफानी हवाओं के साथ होगी और वहां भी मौसम 29 सितंबर को साफ हो जाएगा अर्थात पूरे भारत से इस चक्रवर्ती वर्ष का 29 सितंबर तक समापन हो जाएगा और इसी के साथ संपूर्ण भारत का मौसम बदल जाएगा और आश्चर्यजनक रूप से 25 सितंबर से ठंड  25 सितंबर से ठंड कब प्रारंभ हो जाएगा जो अगले वर्ष 15 मार्च तक चलता रहेगा इस वर्ष की ठंड बहुत विकराल होगी और सभी सीमाओं और कीर्तिमान को तोड़ देगी इसीलिए ठंड के मौसम की अभी से भविष्यवाणी कर दे रहा हूं जो प्रमाण रहेगा इस बार ठंड के मौसम में जौनपुर पूर्वांचल सहित 80% भारत में बहुत ही कठिन विकराल ठंड कोर पाल पोस्ट तुषार मा ठंड के साथ पड़ेगी और कई कई दिनों तक धूप नहीं होगी बीच-बीच में झंझा झकॊर घन गर्जन के साथ वर्षा होगी जिससे ठंड और भी विकराल हो जाएगी ध्रुव प्रदेशों से आने वाली हवाएं जबरदस्त ठंड की वृद्धि करके हाहाकार मचा देंगी यह ठंड इस बार मध्य प्रदेश गुजरात उड़ीसा को पार कर आंध्र प्रदेश कर्नाटक और महाराष्ट्र मुंबई तक आहा कर मचा देगी इन इस पोस्ट को परिवार के तौर पर हमेशा की तरह रखा जा सकता है  25 सितंबर 2026  द्वारा डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह

Friday, 25 September 2026

*जब आपका पड़ोसी सुरक्षित महसूस करे: अच्छे पड़ोस का इस्लामी मतलब*

*जब आपका पड़ोसी सुरक्षित महसूस करे: अच्छे पड़ोस का इस्लामी मतलब*

एक शांतिपूर्ण समाज की शुरुआत बड़े-बड़े भाषणों से नहीं होती। इसकी शुरुआत घर के बहुत करीब से होती है: क्या बगल में रहने वाला व्यक्ति सुरक्षित, सम्मानित और महत्वपूर्ण महसूस करता है? यह सरल लेकिन गहरा सिद्धांत पैगंबर मुहम्मद की एक शक्तिशाली बात के केंद्र में है, जो सहीह अल-बुखारी 6016 में दर्ज है। अबू शुराइह ने बताया कि पैगंबर ने तीन बार कहा, "अल्लाह की कसम, वह ईमान वाला नहीं है!" जब साथियों ने पूछा कि उनका क्या मतलब है, तो पैगंबर ने समझाया कि वह व्यक्ति जिसका पड़ोसी उसके नुकसान से सुरक्षित महसूस नहीं करता।
बात को दोहराना महत्वपूर्ण है। पैगंबर अपनी बात एक बार भी कह सकते थे, लेकिन उन्होंने इसे तीन बार दोहराया। यह दिखाता है कि इस्लाम पड़ोसियों के अधिकारों और भावनात्मक सुरक्षा को कितनी गंभीरता से लेता है। यह घटना किसी खास झगड़े या किसी खास पड़ोसी का ज़िक्र नहीं करती जिसे नुकसान पहुँचाया गया हो। बल्कि, यह एक सामान्य नैतिक सिद्धांत स्थापित करती है। किसी व्यक्ति की धार्मिक प्रतिबद्धता को उसके आस-पास रहने वाले लोगों के साथ उसके व्यवहार से अलग नहीं किया जा सकता।
शब्दों का चयन भी महत्वपूर्ण है। पैगंबर ने सिर्फ़ यह नहीं कहा कि किसी व्यक्ति को अपने पड़ोसी पर शारीरिक हमला नहीं करना चाहिए। उन्होंने पड़ोसी के उसके नुकसान से सुरक्षित महसूस न करने के बारे में बात की। इससे यह शिक्षा और व्यापक हो जाती है। सुरक्षा में शारीरिक हिंसा, डराना-धमकाना, धमकियाँ, परेशान करना, संपत्ति को नुकसान पहुँचाना, लगातार परेशान करना और जानबूझकर नुकसान पहुँचाने के अन्य तरीकों से आज़ादी शामिल है। पड़ोसी के सुरक्षित महसूस करने का मतलब है कि वह बिना इस डर के रह सके कि बगल में रहने वाला व्यक्ति क्या कर सकता है।
यह सिद्धांत तब और भी शक्तिशाली हो जाता है जब हम सोचते हैं कि पड़ोसी का धर्म, भाषा, जाति, राजनीतिक विचार या सामाजिक पृष्ठभूमि हमसे अलग हो सकती है। इस्लाम अच्छे पड़ोस के रिश्ते को पूरी समानता पर निर्भर नहीं बनाता। कुरान पड़ोसी को उन लोगों में शामिल करता है जिनके साथ मुसलमान को अच्छा व्यवहार करना चाहिए। सूरह अन-निसा 4:36 में, अल्लाह की इबादत का आदेश देने के बाद, आयत मानने वालों को माता-पिता, रिश्तेदारों, अनाथों, ज़रूरतमंदों और पास और दूर के पड़ोसियों के साथ दयालुता दिखाने का निर्देश देती है। इस सूची में पड़ोसियों को शामिल करना इस्लामी नैतिकता में सामाजिक ज़िम्मेदारी के महत्व को दर्शाता है।
इसका मतलब यह नहीं है कि पड़ोसियों के बीच हर असहमति ईमान की कमी है। इंसानों के बीच असहमति तो होगी ही। पड़ोसियों की जीवनशैली, राय और उम्मीदें अलग-अलग हो सकती हैं। इस्लामी सिद्धांत यह नहीं कहता कि कभी झगड़ा नहीं हो सकता। इसके बजाय, असहमति को क्रूरता, अपमान या जान-बूझकर नुकसान पहुँचाने का बहाना नहीं बनना चाहिए। यह फ़र्क आज के घनी आबादी वाले शहरी समाजों में खास तौर पर अहम है। अपार्टमेंट बिल्डिंग, पड़ोस और मिली-जुली कम्युनिटी में अलग-अलग बैकग्राउंड के लोग एक-दूसरे के करीब आते हैं। शोर, पार्किंग, प्रॉपर्टी की सीमा, बच्चों का खेलना, पालतू जानवर, कंस्ट्रक्शन का काम या निजी असहमति कभी-कभी तनाव पैदा कर सकती है।
इस्लाम का नज़रिया यह है कि हर असहमति को लड़ाई न बनने दिया जाए। यह सब्र, बातचीत, निष्पक्षता और संयम को बढ़ावा देता है। बुखारी 6016 के ठीक बाद दर्ज एक और बात इसी सिद्धांत को पुख्ता करती है। पैगंबर ने कहा कि जो कोई अल्लाह पर यकीन रखता है, उसे अपने पड़ोसी को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए, अपने मेहमान का सम्मान करना चाहिए और अच्छी बात कहनी चाहिए या चुप रहना चाहिए। यह आस्था, व्यवहार और सामाजिक सद्भाव के बीच एक खूबसूरत रिश्ता बनाता है। आस्था सिर्फ़ निजी इबादत से नहीं दिखाई जाती। यह इसमें भी झलकती है कि जब लोग हमसे मिलते हैं तो उन्हें कैसा अनुभव होता है।
यह कम्युनिटी के लिए खास तौर पर अहम है। जब पड़ोसी एक-दूसरे पर भरोसा करते हैं, तो छोटी-मोटी असहमति को गंभीर झगड़े बनने से पहले ही सुलझाया जा सकता है। जो व्यक्ति जानता है कि उसका पड़ोसी तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय उसकी बात सुनेगा, उसके शांति से बात करने की संभावना ज़्यादा होती है। अच्छा पड़ोस दयालुता के मौके भी बनाता है। किसी बुज़ुर्ग पड़ोसी का हाल-चाल पूछना, बीमारी में किसी की मदद करना, इमरजेंसी में किसी परिवार की सहायता करना या बस लोगों का सम्मानपूर्वक अभिवादन करना छोटी बातें लग सकती हैं, लेकिन ऐसे काम सामाजिक भरोसा पैदा करते हैं।
भारत जैसे विविध समाजों में इस सिद्धांत का बहुत महत्व है। एक अच्छे मुसलमान को डर के बजाय सुरक्षा का ज़रिया, चिंता के बजाय भरोसा दिलाने वाला और दुश्मनी के बजाय दयालु बनने की कोशिश करनी चाहिए। पड़ोसी यह कह सके: "हो सकता है कि मैं इस व्यक्ति की हर बात से सहमत न होऊँ, लेकिन मुझे पता है कि वह मुझे जान-बूझकर नुकसान नहीं पहुँचाएगा।" यही पैगंबर की शिक्षा की खूबसूरती है। यह एक महान धार्मिक सिद्धांत को रोज़मर्रा की ज़िंदगी में लाता है। इस्लाम का जवाब साफ़ है; एक मानने वाले को कोशिश करनी चाहिए कि उसके आस-पास के लोग उससे सुरक्षित महसूस करें और उसके चरित्र पर भरोसा करें।

फ़रहत अली खान 
एम ए गोल्ड मेडलिस्ट

भारत के गैर मुसलमानों का बहुत ही भयानक कड़वा लेकिन नंगा सच यह है कि गैर मुसलमानों की 70% औरतें और 60% पुरुष मुसलमानों के इसलिए गुलाम है क्योंकि इन सभी का मैथुनी वीडियो मुसलमानों के पास सुरक्षित है।

 भारत के गैर मुसलमानों का बहुत ही भयानक कड़वा लेकिन नंगा सच यह है कि गैर मुसलमानों की 70% औरतें और 60% पुरुष मुसलमानों के इसलिए गुलाम है क्योंकि इन सभी का मैथुनी वीडियो मुसलमानों के पास सुरक्षित है। 

विशेष कर सांसद विधायक मंत्री और उससे ऊपर के लोग तथा सरकारी अधिकारी और प्रभावशाली कर्मचारी लोगों के लिए यह बिल्कुल सत्य है आप भी इस पर थोड़ा गहराई से खोज कीजिए अपने आप नंग3सच सामने आ जाएगा तब आप खुद समझ जाएंगे कि आखिर यह सभी लोग मुसलमानों का विकास क्यों कर रहे हैं 

और क्यों मुसलमानों से डरते हैं और क्यों मुसलमान से डरते हैं क्योंकि अपना काला नंगा मैथुनी सच सबके सामने लाए जाने के डर से वह सब कुछ करते हैं जो उनके वीडियो में कैद सच मुसलमानों के हाथ में सुरक्षित है
। 

मैंने कई लोगों पर खुद जांच करके देखा और सच पाया है हर महत्वपूर्ण स्थान पर लव जिहादी मुस्लिम महिला या पुरुष बहुत चालाकी के साथ घुसे हुए हैं कोई नाच गाने वाला है कोई समस्या भी है कोई एनजीओ वाला है कोई उदारवादी है तो कोई सफाई कर्मी है कोई कबाड़ वाला तो कोई पंचर छाप है कोई सांसद विधायक मंत्री है और यह भी सच है कि यदि आप मुसलमान के घर आते जाते हैं या मुसलमान आपके घर आते जाते हैं तो आप निश्चित रूप से उनके द्वारा बलात्कार के शिकार हैं जो लाज शर्म के नाते आप छिपाते रहते हैं लेकिन अंत में भांडा फूट जाता है
[9/25, 9:28 PM] Dr  Dileep Kumar singh: इसलिए इतनी जल्दी हो सके इन विधर्मी शैतानों से छुटकारा प्राप्त कर लो डरो नहीं सच अपने घर वालों को बता दो वरना यह लोग मरते समय तक ब्लैकमेल करके तुम सबको बार-बार मरते रहेंगे इनका एक ही धर्म है हर जगह फैल कर कब्जा करना और लाभ कमाना बाकी सब उनके लिए धर्म के विरुद्ध हैं लेकिन मूर्ख गैर मुसलमान इनमें भी अच्छा और खराब मुसलमान खोजते हैं या तो ऐसी ही बात हुई कि सांप में आप यह सोचें की नाग करैत ब्लैक मांबा और रसेल वाइपर में कौन काम खतरनाक है क्योंकि सबके काटने से मृत्यु होना निश्चित है और उधर से उधर अच्छे से अच्छा मुसलमान है तब भी उसके लिए कुरान पैगंबर अल्लाह शरीयत हदीस ही सब कुछ है वेद और पुराण भजन कीर्तन मंदिर और गुरुद्वारा नहीं और एक बात ध्यान रखो पूरी दुनिया का मुसलमान किसी भी आफत और विपत्ति में महामारी में दुर्घटना और भयंकर विनाश में मुस्लिम देश में नहीं जाता वह रोग आकर दया के नाम पर सांप की तरह दिल में घुस जाता है और मौका पाते ही काट कर सबको मार कर अपना अधिकार कर लेता है कुछ उदाहरण देखकर भी आपको समझ में नहीं आता जैसे कश्मीर केरल पश्चिम बंगाल बांग्लादेश अफगानिस्तान पाकिस्तान और अन्य मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र को देख लीजिए यूरोप में गोशनिया हरजोविनिया और रूस में 15 मुस्लिम देशों को देख लीजिए सब कुछ विनाश कर डाला पर भी समझ में नहीं आए तो आपको हलाल होना ही है इसे बचाना है तो आपको चीन म्यांमार श्रीलंका इजरायल अमेरिका जैसा बनना होगा

मौसम की भविष्यवाणी और पूर्व की भविष्यवाणी का आकलन - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 7017713978 15आज जौनपुर और संपूर्ण पूर्वांचल में और समस्त आसपास के

मौसम की भविष्यवाणी और पूर्व की भविष्यवाणी का आकलन - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 7017713978 15
आज जौनपुर और संपूर्ण पूर्वांचल में और समस्त आसपास के जनपदों में अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान और स्वच्छ हवा वाला रहेगा दिन भर रात भर लगातार अनवरत तूफानी वर्षा 40 से 60 किलोमीटर की भयानक तेज  हवाओं आंधी तूफान झंझा झकोर गर्जन तड़ित वारिदमाला और प्रचंड चक्रवार्ती हवाओं के साथ होगी। 

कल अर्थात 26 सितंबर के बारे में हमारे केंद्र की भविष्यवाणी है कि आंधी तूफान 40 से 65 किलोमीटर वाले प्रचंड चक्रवर्ती वायु वेग के साथ भारी वर्षा दिन भर रात भर होती रहेगी 

 और तापमान गिरकर न्यूनतम 23 और अधिकतम 27 डिग्री सेल्सियस तक आ जाएगा और ठंड और भी बढ़ जाएगी झंझा झकॊर घन तड़ित वारिदमाला और प्रचंड चक्रवार्ती हवाओं का क्रम अनवरत जारी रहेगा 27 को यह बहुत कमजोर पड़ जाएगा और 28 अक्टूबर तक मौसम साफ हो जाएगा जौनपुर और आसपास इस 4 दिन के कालखंड में 100 से 160 मिली मीटर वर्षा होने की भविष्यवाणी है 

  यह भविष्यवाणी आप सबको बार-बार 15 दिन से भेजी जा चुकी है और सभी को फसलों की सिंचाई करने से मना किया गया था ताकि सबके हजारों लाखों रुपए बच सके जहां तक संपूर्ण भारत की बात है तो उड़ीसा आंध्र प्रदेश बिहार झारखंड बंगाल बांग्लादेश नेपाल भूटान सिक्किम असम अरुणाचल प्रदेश मिजोरम त्रिपुरा नागालैंड मेघालय में भारी से बहुत भारी मूसलाधार वर्षा 60 से 100 किलोमीटर बैग वाली प्रचंड तूफानी हवाओं के साथ होगा जो आज समाप्त हो जाएगा इसके बाद लखनऊ से मध्य प्रदेश महाराष्ट्र राजस्थान दिल्ली उत्तराखंड पश्चिमी उत्तर प्रदेश पंजाब हरियाणा के कुछ भागों में आजकल और परसों यह चक्रवर्ती वर्षा 25 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे वाली तूफानी हवाओं के साथ होगी और वहां भी मौसम 29 सितंबर को साफ हो जाएगा अर्थात पूरे भारत से इस चक्रवर्ती वर्ष का 29 सितंबर तक समापन हो जाएगा और इसी के साथ संपूर्ण भारत का मौसम बदल जाएगा और आश्चर्यजनक रूप से 25 सितंबर से ठंड  25 सितंबर से ठंड कब प्रारंभ हो जाएगा जो अगले वर्ष 15 मार्च तक चलता रहेगा इस वर्ष की ठंड बहुत विकराल होगी और सभी सीमाओं और कीर्तिमान को तोड़ देगी  25 सितंबर 2026 ई द्वारा डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह

विशेष जागरूकता अभियान की विशिष्ट समिति में डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह का चयन

विशेष जागरूकता अभियान की विशिष्ट समिति में डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह का चयन
डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल जनपद न्यायालय जौनपुर का गांधी जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के निर्देशन में विशेष जागरूकता अभियान की विशिष्ट समिति में चयन किया गया है। उनके साथ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र प्रसाद यादव अरविंद कुमार चौबे लिपिक और शिव शंकर सिंह पैरा लीगल वालंटियर इस समिति में है यह समिति विद्यालय के किशोर बालक बालिकाओं को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के विषय पर चुने गए विद्यालयों में जाकर सरल और सही जानकारी देकर 500 एक्ट के प्रावधानों से उनको अवगत कराते हुए इस विषय में जागरूक करने का दायित्व सौंपा गया है इस अवसर पर जनपद के प्रबुद्ध लोगों परिजनों और प्रेस तथा मीडिया से जुड़े लोगों ने डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह को बधाई और शुभकामनाएं दिया है  ज्ञात होगी डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह 35 वर्षों से लगातार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में परामर्शदाता मध्यस्थता अधिकारी स्थाई लोक अदालत पीठ में सदस्य सहित विविध पदों पर कार्य कर चुके हैं

: धर्म दर्शन विज्ञान और पितृविसर्जन का महापर्व -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञान ज्योतिष शिरोमणिप्रस्तावना

: धर्म दर्शन विज्ञान और पितृविसर्जन का महापर्व -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञान ज्योतिष शिरोमणि
प्रस्तावना 
अपने पूर्वजों पितरों के प्रति समर्पित इस बार का 16 दिनों का पितृपक्ष बहुत ही अद्भुत और अनूठा है बहुत वर्षों में एक दो बार ऐसा संजोग बनता है जब पितृपक्ष का आरंभ वर्षा से हो जो बहुत कम होता है  इसका अतिरिक्त इस वर्ष पितृपक्ष के आरंभ से ही ठंडा सुखद शीतल सुहाना मौसम है जो बहुत लंबे समय के बाद ही दिखता है अन्यथा शरद पूर्णिमा से ही ठंड का आरंभ होता है भादो महीने के कोख से ज्यादा निकलता है इस बार यह पूरी तरह सही हो रहा है 

पितृ विसर्जन के दिन क्या करें 

पितृ विसर्जन के दिन भी सामान्य रूप से वही सब किया जाता है जो इसके पहले 15 दिन में किया जाता है लेकिन इसमें एक अंतर है की दर्पण और श्राद्ध दोपहर की बेला में किया जाता है पिंडदान और श्रद्धा सुबह शाम नहीं किया जाता है लेकिन आपातकाल में ऐसा कर भी सकते हैं पितृपक्ष के दिन प्रतिदिन की भांति सुबह उठ कर नित्य क्रिया से निवृत्त होकर शुद्ध और शांत चित्र से स्नान करें इसके बाद प्रतिदिन की तरफ दक्षिण मुंह करके अपने पितरों को पानी गंगाजल दूध मिलकर उसमें अक्षत काला तिल और सफेद हल्के पीले पुष्प तथा कुश के साथ जलांजलि दें तत्पश्चात पिंडदान करें भजन को पिंड बनाकर पूर्वजों को अर्पित करने की क्रिया ही पिंडदान कहलाती है 

पंचबली और अन्य क्रियाएं 

इसके पश्चात भोजन जो श्राद्ध के निमित्त बना है उसको पांच प्राणियों में खिला देते हैं जिसमें गाय कुत्ता कौवा चींटी मछली या देवताओं के नाम पर निकाला गया भोजन होता है और इसी पांच लोगों के नाम पर इसे पंच बली कहा जाता है यह क्रिया संपन्न हो जाने पर पितरों को खीर और पूड़ी का भोग लगाया जाता है जो उन्हें अत्यंत प्रिय होता है फिर विद्वान सदाचारी सुपात्र व्यक्ति को भोजन कर कर अपने समर्थ के अनुसार दान दक्षिणा दे सकते हैं यह काम सबके लिए अनिवार्य नहीं है इच्छा अनुसार किया जा सकता है लेकिन आप पात्र व्यक्ति को भोजन और दक्षिण का दान नहीं करना चाहिए।

इसके पश्चात पीपल की पूजा करके उसमें जल देना चाहिए और दक्षिण दिशा में दीपक जलाना चाहिए विशेष श्राद्ध पूजा करने वालों को 16 बत्तियों वाले दीपक को जलाना चाहिए जो सरसों के तेल का होना चाहिए और यह दीपक दक्षिण दिशा में रखना चाहिए लेकिन यह नियम सबके लिए नहीं है यदि कोई श्रद्धा पूर्वक रोज की तरह तर्पण करके केवल गाय कुत्ते कौवे चींटी मछली को ही भोजन दे देता है तो वही पर्याप्त है। हमारे देवी देवता वैदिक रीति रिवाज के अनुसार शुद्ध विचार और अंतःकरण से अपनी पूजा से ही संतुष्ट हो जाते हैं बहुत अधिक पाखंड बढ़ने से लाभ की जगह हानि होती है जैसे आजकल विवाह संस्कार सहित हर शुभ और मांगलिक तथा दुख के कार्य में में हो रहा है।

पितृ विसर्जन के दिन क्या-क्या वर्जित है 

कुछ और बातों पर ध्यान पितृ विसर्जन के दिन रखना आवश्यक है इस दिन कोई भी नया कार्य शुरू न करें कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य इस दिन करना मना है इसके साथ-साथ कम से काम पूरे दिन गलत आचरण या दूसरों की बुराई करना या किसी के साथ छल कपट करना भी पूरी तरह वर्जित है  यह दिन पितरों को खुशी के साथ विदाई देने का है और विदाई के दिन कोई भी नया काम वैसे भी नहीं किया जाता है सारे सारांश का मूल्य यही है क्योंकि विदाई के बाद व्यक्ति बाहर भीतर से पूरी तरह दुखी होता है ऐसे में शुभ मांगलिक और खुशी का काम वैसे भी नहीं किया जाता है पितर भी हमारे लिए जीवित व्यक्ति के समान है इसीलिए कोई भी नया काम या खुशी का काम इस दिन वर्जित किया जाता है इन 15 दिनों में चोरी बेईमानी झूठ अधूरा कर छल कपट विश्वास घाट जैसी चीज पूरी तरह वर्जित है जो हर एक पर्व त्यौहार पर वर्जित रहता है क्योंकि उन पितरों का दिन है जिन्होंने हमारे भविष्य के लिए अपना वर्तमान बलिदान किया है 

इस वर्ष कब से कब तक है पितृपक्ष

इस वर्ष रविवार 27 सितंबर से पितृपक्ष प्रथम दिन का प्रारंभ हो रहा है जो 10 अक्टूबर शनिवार के दिन समाप्त होगा इस प्रकार यह कालखंड 15 दिन का है इसमें पूर्णिमा तिथि को जोड़ देने पर यह 16 दिन का हो जाता है और पूर्णिमा की तिथि 26 सितंबर रविवार के दिन है पूर्णिमा के श्रद्धा से लेकर अमावस्या के श्राद्ध तक हर तिथि का विधि विधान ऊपर लेख में विस्तार से दिया गया है इतना अवश्य है की धरती के स्वर्ग अखंड कश्मीर से समुद्र के स्वर्ग कन्याकुमारी वर्षा और हरियाली के स्वर्ग आसाम चेरापूंजी की पहाड़ियों से शुष्कता वीरानी त्याग वीरता के स्वर्ग राजस्थान तक  फैले हुए दिव्य भारतवर्ष की पवित्र भूमि पर हम लोग पेड़ पौधे वृक्ष कंकड़ पत्थर पहाड़ नदी समुद्र के साथ पितरों की भी पूजा करते हैं और आज यह अटल ध्रुव वैज्ञानिक सत्य है कि ब्रह्मांड के कण-कण  में जीवन है और जिन पितरों की हम पूजा करते हैं उन्हीं के कारण आज हम जीवित हैं इसलिए आप केवल स्नान करके अपने पूर्वजों को याद करते हुए केवल जल ही दे दे वही उनके लिए पर्याप्त होगा और सनातन धर्म अखंड भारत के लिए बलिदान होने वाले पितरों को भी मेरी तरह तर्पण करें  तो और भी अच्छा रहेगा ।

यह उस संधिकाल की गाथा है जब द्वापर युग अपनी अंतिम सांसें गिन रहा था और काल के गर्त से एक नया, अंधकारमय युग जन्म लेने को तड़प रहा था। महाभारत का भीषण महायुद्ध समाप्त हो चुका था। अधर्मियों के लहू से सिंचित भूमि पर धर्मराज युधिष्ठिर ने न्याय और सत्य के शासन की नींव रखी थी। परंतु, नियति का चक्र कभी थमता नहीं।

यह उस संधिकाल की गाथा है जब द्वापर युग अपनी अंतिम सांसें गिन रहा था और काल के गर्त से एक नया, अंधकारमय युग जन्म लेने को तड़प रहा था। महाभारत का भीषण महायुद्ध समाप्त हो चुका था। अधर्मियों के लहू से सिंचित भूमि पर धर्मराज युधिष्ठिर ने न्याय और सत्य के शासन की नींव रखी थी। परंतु, नियति का चक्र कभी थमता नहीं।

एक दिन द्वारका से आए महाविनाशकारी संदेश ने पांडवों की चेतना को सुन्न कर दिया। लीला पुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण ने अपनी देह लीला समेटकर वैकुंठ प्रस्थान कर लिया था। श्री कृष्ण के जाते ही, इस धरती से सत्य, करुणा, तेज और पवित्रता का अंतिम महान स्तंभ भी ढह गया। पांडव जान गए कि जिस नारायण के साए में उन्होंने धर्म की रक्षा की थी, उनके जाते ही अब अधर्म का साया यानी 'कलयुग' इस पृथ्वी को निगलने आ रहा है।

संसार से विरक्त होकर, शोक में डूबे पांडवों ने राज-पाठ अपने एकमात्र जीवित वंशज, अर्जुन के पौत्र और अभिमन्यु के तेजस्वी पुत्र, राजा परीक्षित को सौंप दिया और स्वयं महाप्रस्थान के लिए हिमालय की ओर चल दिए।

राजा परीक्षित कोई साधारण शासक नहीं थे। वे गर्भाधान के समय ही अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से जल रहे थे, तब भगवान श्री कृष्ण ने सूक्ष्म रूप में उनके गर्भ में प्रवेश कर उनके प्राणों की रक्षा की थी। गर्भ में ही भगवान के दर्शन करने के कारण उनका नाम 'परीक्षित' पड़ा। उनका शासन न्याय, ऐश्वर्य और प्रजा-रक्षण का प्रतीक था। उनके राज्य में चोर-उचक्कों, पाखंडियों और पापियों के लिए कोई स्थान नहीं था। राजा भली-भांति जानते थे कि कलयुग सीमाओं पर घात लगाए बैठा है, इसलिए वे लगातार अपने साम्राज्य का भ्रमण करते थे ताकि प्रजा को किसी भी अधार्मिक शक्ति के प्रभाव से बचा सकें।

एक दिन, राजा परीक्षित अपने दिव्य रथ पर सवार होकर साम्राज्य की सीमाओं का निरीक्षण कर रहे थे। घूमते-घूमते वे सरस्वती नदी के पवित्र तट (कुरुक्षेत्र के समीप) पहुंचे। वहां उन्होंने एक ऐसा दृश्य देखा जिसने चक्रवर्ती सम्राट के हृदय को कंपा दिया।

सामने एक बैल खड़ा था, जो अत्यंत दुर्बल, कांतिहीन और भयभीत था। सबसे वीभत्स बात यह थी कि उस बैल की चार टांगों में से तीन टांगें कटी हुई थीं; वह केवल एक टांग पर बड़ी मुश्किल से अपना संतुलन बनाए खड़ा था और दर्द से कराह रहा था।

उसके ठीक पास एक गाय खड़ी थी। उसकी आंखों से अश्रुओं की अविरल धारा बह रही थी। वह इतनी कमजोर थी कि लग रहा था मानो अभी प्राण त्याग देगी। वह अपनी वात्सल्यमयी दृष्टि से उस बैल को देख रही थी और गहरे विलाप में डूबी हुई थी।

तभी राजा की नजर एक तीसरे पात्र पर पड़ी। वहां एक काले रंग का, भयानक और क्रूर दिखने वाला शूद्र खड़ा था। उसने राजाओं के वैभवशाली वस्त्र और मुकुट पहन रखा था, लेकिन उसके हाथ में एक भारी डंडा था। वह नीच पुरुष उस असहाय बैल और रोती हुई गाय को बेरहमी से पीट रहा था।

राजा परीक्षित का क्षत्रिय लहू खौल उठा। उन्होंने तुरंत अपनी म्यान से चमचमाती तलवार निकाली और मेघ के समान गरजते हुए उस क्रूर पुरुष की ओर बढ़े।

राजा ने दहाड़ते हुए कहा, "अरे पापी! मेरे रहते इस पवित्र भूमि पर असहाय जीवों पर ऐसा अत्याचार करने का दुस्साहस तूने कैसे किया? राजा का भेष धरकर इस धर्मभूमि को कलंकित करने वाले दुष्ट, तू वध के योग्य है! बता, तू कौन है?"

तलवार उठाने से पहले, राजा परीक्षित ने उस पीड़ित बैल और गाय की ओर देखा। अपनी दिव्य बुद्धि से वे समझ गए कि ये कोई साधारण पशु नहीं हैं।

राजा ने बैल से पूछा, "हे दिव्य जीव! तुम कौन हो? किसने तुम्हारी यह दुर्दशा की है? सम्राट शांतनु और अर्जुन के इस वंशज के जीवित रहते तुम्हारे नयनों में आंसू किसने दिए?"

बैल ने उत्तर दिया, "हे राजन! आप जैसे न्यायप्रिय राजा के लिए यह प्रश्न शोभा देता है। परंतु इस संसार में दुखों का कारण कौन है, यह कहना कठिन है। कुछ लोग इसे भाग्य कहते हैं, कुछ कर्म, और कुछ प्रकृति। मैं स्वयं 'धर्म' हूँ।"

राजा परीक्षित चकित रह गए। तब उन्हें ज्ञात हुआ कि सतयुग में धर्म के चार पैर थे—सत्य, तप, पवित्रता और दान। त्रेतायुग में मनुष्य की वासना के कारण 'तप' नष्ट हो गया। द्वापर युग में 'पवि‍त्रता' भी समाप्त हो गई। अब, द्वापर के अंत में 'दान' भी लुप्त हो चुका था। धर्म रूपी यह बैल अब केवल अपने आखिरी पैर—'सत्य'—पर टिका हुआ था, और यह दुष्ट उस आखिरी पैर को भी तोड़ना चाहता था।

फिर राजा ने गाय की ओर देखा, जिसने रोते हुए कहा, "हे चक्रवर्ती सम्राट! मैं साक्षात 'पृथ्वी देवी' हूँ। जब तक जगदीश्वर श्री कृष्ण के चरण मुझ पर पड़ते थे, मैं सर्वगुण संपन्न और सुखी थी। उनके जाने के बाद मैं अनाथ हो गई हूँ। अब यह दुष्ट मुझ पर हावी होना चाहता है और मुझे अपवित्र करना चाहता है।"

राजा परीक्षित ने जैसे ही यह सुना, उनका क्रोध चरम पर पहुंच गया। उन्होंने तलवार उठाई और उस राजा का स्वांग रचे शूद्र की गर्दन पर रख दी।

जैसे ही काल रूपी तलवार उसकी गर्दन से छुई, वह क्रूर पुरुष थर-थर कांपने लगा। उसने तुरंत अपना डंडा फेंक दिया, अपने राजा के वस्त्रों को त्याग दिया और साष्टांग दंडवत होकर राजा परीक्षित के चरणों में गिर गया। वह साक्षात 'कलयुग' था।

कलयुग ने रोते हुए गुहार लगाई, "हे शरणागतवत्सल सम्राट! त्राहि-त्राहि! मुझे क्षमा करें। आप पूरे ब्रह्मांड के स्वामी हैं। पांडवों के वंशज कभी शरणागत पर वार नहीं करते। मैं आपकी शरण में हूँ, मेरे प्राणों की रक्षा करें!"

राजा परीक्षित धर्मसंकट में पड़ गए। शास्त्र कहते हैं कि शरण में आए शत्रु का वध नहीं करना चाहिए। राजा ने तलवार थोड़ी पीछे खींची और कड़ककर कहा, "अरे कलयुग! तू अधर्म, झूठ, चोरी, पाखंड और विनाश का मूल कारण है। तूने मेरे राज्य में कदम रखने की जुर्रत कैसे की? तू तुरंत मेरी सीमाओं से बाहर निकल जा, अन्यथा मेरी यह तलवार तेरे टुकड़े-टुकड़े कर देगी।"

कलयुग ने हाथ जोड़कर अत्यंत चतुरता से संवाद शुरू किया:

कलयुग: "हे महाराज! आप सत्य कह रहे हैं। मैं बुराइयों का प्रतीक हूँ। परंतु कृपा कर ठंडे दिमाग से सोचें। इस ब्रह्मांड की रचना ब्रह्मा जी ने की है। उन्होंने ही कालचक्र बनाया है, जिसके अनुसार सतयुग, त्रेता और द्वापर के बाद मेरा आना अनिवार्य है। यह नियति का नियम है। यदि आप मुझे मार भी देंगे, तो भी काल का यह चक्र नहीं रुकेगा। मैं अपने समय पर आया हूँ। जब आपका राज्य चारों ओर फैला है, तो मैं इस संसार को छोड़कर कहाँ जाऊँ? ईश्वर के विधान के अनुसार मुझे भी जीने का हक है। कृपा कर मुझे इस पृथ्वी पर रहने के लिए कोई निश्चित स्थान दे दें।"

राजा परीक्षित: "ठीक है कलयुग, तू मेरी शरण में है इसलिए मैं तुझे स्थान देता हूँ। सुन! तू आज से इन चार स्थानों पर वास करेगा—

द्यूत (जुआ): जहाँ छल, कपट, सट्टा और चोरी होती है।
मद्यपान (मदिरा/शराब): जहाँ मनुष्य विवेक खो देता है और होश गंवा बैठता है।
स्त्री-संसर्ग (व्यभिचार/अनैतिक संबंध): जहाँ वासना, लज्जाहीनता और अपवित्रता होती है।
सून (हिंसा/पशु वध): जहाँ निर्दोष और मूक जीवों की हत्या कर उनका मांस खाया जाता है।"*

कलयुग मन ही मन मुस्कुराया, लेकिन वह अत्यंत महत्वाकांक्षी था। उसने देखा कि ये चारों स्थान तो समाज के सबसे निचले और घृणित हिस्से हैं। इतने कम स्थानों से वह पूरी पृथ्वी पर अपना साम्राज्य कैसे फैला पाता? उसने अत्यंत दीन बनकर राजा से एक और विनती की।

कलयुग: "हे महादानी सम्राट! आपके द्वारा दिए गए ये चारों स्थान अत्यंत संकुचित और पापी लोगों के हैं। मेरा स्वरूप बहुत बड़ा है। इतने छोटे स्थानों में मेरा निर्वाह कैसे होगा? कृपा करके मुझे कोई एक ऐसा श्रेष्ठ और शक्तिशाली स्थान भी प्रदान करें, जो अत्यंत प्रभावशाली हो, जिसे समाज का हर वर्ग स्वीकार करे और जहाँ बैठकर मैं पूरे संसार के मानस पर शासन कर सकूं।"

राजा परीक्षित उस समय दानवीरता के अति-विश्वास में थे। उन्होंने क्षण भर के लिए सोचा और कलयुग को पांचवां स्थान दे दिया—'सुवर्ण' (सोना, अर्थात अनैतिक और गलत तरीके से कमाया गया धन)।

राजा परीक्षित: "तथास्तु! कलयुग, तू सुवर्ण (सोने) में भी वास करेगा।"

यह सुनते ही कलयुग की आँखें चमक उठीं। उसने देखा कि राजा परीक्षित उसे केवल दोषों की खान समझकर घृणा कर रहे हैं। कलयुग ने तब मुस्कुराते हुए मनुष्य जाति के कल्याण का सबसे बड़ा रहस्य प्रकट किया, जो कलयुग का एकमात्र लेकिन सबसे बड़ा फायदा था।

कलयुग का संवाद:

"हे राजन! आप मुझे केवल बुरा समझ रहे हैं, लेकिन मुझमें एक ऐसा महान गुण (फायदा) भी है, जो सतयुग, त्रेता और द्वापर, तीनों युगों में से किसी के पास नहीं है! मेरे इसी एक गुण के कारण भविष्य में ऋषि-मुनि और देवता भी कलयुग में मनुष्य रूप में जन्म लेने तरसेंगे।

हे राजन! सतयुग में मनुष्यों को भगवान को पाने, मोक्ष प्राप्त करने या अपनी आत्मा को शुद्ध करने के लिए हजारों वर्ष तक कठोर तपस्या, व्रत और कठिन समाधि लगानी पड़ती थी। त्रेतायुग में बड़े-बड़े कठिन यज्ञ, अनुष्ठान और तप करने के बाद भगवान प्रसन्न होते थे। द्वापरयुग में मंदिरों में अत्यधिक विधि-विधान से की जाने वाली पूजा और असीम सेवा-अर्चना से प्रभु मिलते थे।

परंतु, मेरे युग (कलयुग) में मनुष्यों के पास न तो लंबी आयु होगी, न उतनी शारीरिक शक्ति होगी और न ही वैसा शुद्ध वातावरण होगा। इसलिए भगवान ने मेरे लिए नियम बहुत सरल कर दिए हैं—कलयुग में भगवान को पाने के लिए न कठिन तप की आवश्यकता है, न महंगे यज्ञों की और न ही जटिल विधियों की। मेरे युग में केवल 'हरि नाम संकीर्तन' (भगवान के नाम का सच्चे मन से स्मरण और कीर्तन) करने मात्र से ही मनुष्य को वही मोक्ष और परम पद मिल जाएगा, जो सतयुग में दस हजार वर्ष की तपस्या से मिलता था! (कलयुग केवल नाम अधारा। सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा॥)

इसके अलावा, मुझमें एक और बड़ा फायदा यह है कि सतयुग या त्रेता में यदि मनुष्य मन में भी कोई पाप का विचार लाता था, तो उसे उसका पाप-फल भोगना पड़ता था। परंतु कलयुग में मन में सोचे गए पाप का कोई दंड नहीं मिलेगा, दंड तभी मिलेगा जब मनुष्य उसे असल में करेगा। वहीं दूसरी ओर, यदि कोई मनुष्य मन में भी किसी के कल्याण या भगवान के नाम का विचार लाएगा, तो उसे उसका पूरा पुण्य-फल तुरंत मिल जाएगा!"

यह सुनकर राजा परीक्षित चकित रह गए और उन्होंने समझा कि प्रकृति का संतुलन कितना अद्भुत है। कलयुग राजा को प्रणाम कर वहाँ से अंतर्ध्यान हो गया।

कलयुग गायब तो हो गया, लेकिन वह बहुत प्रतिशोधी था। वह जानता था कि जब तक राजा परीक्षित जीवित हैं, तब तक कलयुग इन पांच स्थानों से बाहर नहीं निकल पाएगा। उसने राजा परीक्षित को ही अपना पहला शिकार बनाने की कुटिल योजना बुनी।

एक दिन, राजा परीक्षित वन में शिकार खेलने गए। दोपहर के समय सूर्य की किरणें अत्यंत तेज थीं और राजा बहुत थक चुके थे। उन्हें तीव्र प्यास लगी थी। वन में भटकते हुए वे शमीक ऋषि के पवित्र आश्रम में पहुंचे। शमीक ऋषि उस समय भगवान के ध्यान में लीन थे। वे गहरे ध्यान (समाधि) में थे और उन्होंने मौन व्रत धारण कर रखा था। राजा परीक्षित ने आश्रम में प्रवेश किया और अत्यंत विनम्रता से जल माँगा। परंतु समाधिस्थ होने के कारण ऋषि को राजा की आवाज सुनाई नहीं दी और वे शांत बैठे रहे।

प्यास से व्याकुल राजा को लगा कि ऋषि जानबूझकर उनका अपमान कर रहे हैं। वास्तव में, राजा परीक्षित कभी ऐसा सोच ही नहीं सकते थे। लेकिन नियति का खेल देखिए—उस दिन राजा परीक्षित ने अपने सिर पर एक विशेष सोने का मुकुट पहन रखा था। यह मुकुट महापापी राजा जरासंध का था, जिसे भीमसेन ने युद्ध में जीता था। चूंकि वह मुकुट अधर्म के धन से बना था, इसलिए कलयुग उस सोने के मुकुट के भीतर जाकर बैठ गया था।

मुकुट में बैठे कलयुग ने राजा की बुद्धि को पूरी तरह भ्रष्ट कर दिया। कलयुग के प्रभाव में आकर राजा का विवेक शून्य हो गया। उन्होंने क्रोध और मतिभ्रम के वश में होकर, पास ही पड़ा एक मृत सर्प अपने धनुष की नोक से उठाया और ध्यानमग्न शमीक ऋषि के गले में डाल दिया। इसके बाद वे हस्तिनापुर लौट आए।

जब शमीक ऋषि के परम प्रतापी और क्रोधी पुत्र श्रृंगी ऋषि नदी से स्नान करके आश्रम लौटे, तो उन्होंने अपने परम पूज्य पिता के गले में मरा हुआ सांप देखा। ध्यान लगाने पर उन्हें ज्ञात हुआ कि यह कृत्य राजा परीक्षित का है। क्रोध से कांपते हुए श्रृंगी ऋषि ने कौशिकी नदी का पवित्र जल अपने हाथ में लिया और राजा परीक्षित को घोर शाप दे दिया: "जिस राजा ने मद में अंधा होकर मेरे मौन और समाधिस्थ पिता का ऐसा घोर अपमान किया है, आज से ठीक सातवें दिन तक्षक नाग उसे डसेगा और उसकी मृत्यु हो जाएगी।"

इधर, हस्तिनापुर के महल में कदम रखते ही जब राजा परीक्षित ने अपने सिर से वह सोने का मुकुट उतारा, तो कलयुग का प्रभाव उनके मस्तिष्क से हट गया। मुकुट उतरते ही उनका विवेक वापस आ गया। उन्हें तुरंत अहसास हुआ कि उन्होंने वन में कितना बड़ा पाप किया है। वे पश्चाताप की अग्नि में जलने लगे।

जब उन्हें ऋषि पुत्र के शाप का समाचार मिला, तो उन्होंने इसे अपनी भूल का न्यायसंगत दंड माना। राजा परीक्षित ने अपने जीवन के अंतिम सात दिनों को सार्थक करने के लिए तुरंत राज-पाठ अपने पुत्र जनमेजय को सौंप दिया। वे गंगा के तट पर आसन बिछाकर बैठ गए। वहाँ महान शुकदेव जी महाराज का आगमन हुआ, जिन्होंने राजा परीक्षित को अंतिम सात दिनों में श्रीमद्भागवत पुराण की परम पावन कथा सुनाई, जिससे राजा को मृत्यु का भय छूट गया और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। ठीक सातवें दिन, तक्षक नाग ने आकर राजा परीक्षित को डस लिया और उनके स्थूल शरीर के प्राण पखेरू उड़ गए।

जैसे ही पृथ्वी के रक्षक और न्यायप्रिय चक्रवर्ती सम्राट राजा परीक्षित का अंत हुआ, वैसे ही कलयुग के मार्ग का आखिरी और सबसे बड़ा कांटा हट गया। कलयुग ने पूरी स्वतंत्रता के साथ पूरी पृथ्वी को अपने आगोश में ले लिया। मनुष्यों के दिलों से संतोष, सत्य और त्याग धीरे-धीरे लुप्त होने लगा और इस तरह इस धरती पर 'कलयुग' का पूर्ण और आधिकारिक साम्राज्य स्थापित हो गया।

पुराणों में वर्णित 'कलयुग के प्रत्यक्ष लक्षण'

कलयुग के अंतर्ध्यान होने के बाद, श्रीमद्भागवत पुराण के बारहवें स्कंध में शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को कलयुग के उन भयावह लक्षणों (भविष्यवाणियों) के बारे में बताया, जो आज के समाज में सच होती दिख रही हैं:

धन ही श्रेष्ठता का आधार: कलयुग में मनुष्य के गुण, सदाचार या कुल की कोई महत्ता नहीं रह जाएगी। जिस व्यक्ति के पास जितना अधिक धन होगा, समाज में उसे उतना ही कुलीन, सदाचारी और बुद्धिमान माना जाएगा। न्याय और कानून भी केवल उसी के पक्ष में काम करेंगे जिसके पास पैसा और शक्ति होगी।

रिश्तों और विवाह का पतन: विवाह पवित्र धार्मिक बंधन नहीं, बल्कि स्त्री-पुरुष की केवल क्षणिक शारीरिक रुचि और आपसी समझौते का साधन रह जाएगा। पारिवारिक मूल्य पूरी तरह गिर जाएंगे; संतान अपने माता-पिता का सम्मान करना छोड़ देगी, बूढ़े माता-पिता को बोझ समझा जाएगा और लोग केवल अपने स्वार्थ तक सीमित रहेंगे।

पाखंड ही धर्म बनेगा: कलयुग में जो व्यक्ति जितना बड़ा ढोंगी और कपटी होगा, उसे उतना ही बड़ा संत और व्यवहार-कुशल माना जाएगा। लोग केवल बाहरी वेशभूषा, तिलक या जटा बढ़ाकर खुद को धार्मिक घोषित करेंगे, जबकि उनके भीतर वासना और लालच भरा होगा।

प्रकृति का विकराल रूप और अकाल: मौसम अपना संतुलन खो देगा। कभी भयंकर सूखा पड़ेगा तो कभी बाढ़ आएगी। नदियां सूखने लगेंगी, धरती बंजर हो जाएगी और पेड़ फल देना बंद कर देंगे। जनता भुखमरी, भारी टैक्स (करों) और महामारियों से इतनी त्रस्त हो जाएगी कि लोग आत्महत्या करने को मजबूर होंगे।

शारीरिक और मानसिक पतन: मनुष्यों की आयु, स्मरण शक्ति और शारीरिक बल दिन-प्रतिदिन घटते जाएंगे। कलयुग के अंत तक आते-आते मनुष्य की अधिकतम आयु केवल 20 से 30 वर्ष रह जाएगी और उनका कद घटकर कुछ फीट का हो जाएगा।

स्त्रियों और पुरुषों का स्वभाव: स्त्रियाँ अत्यंत क्रोधी, लोभी और विलासी स्वभाव की हो जाएंगी। लोग बिना स्नान किए भोजन करेंगे, मेहमानों और पितरों का सत्कार बंद हो जाएगा। एक हाथ दूसरे हाथ की जेब से चोरी करेगा और भाई ही भाई के खून का प्यासा बन जाएगा...❤️🌻

सोच लीजिए सारी धरती के एक छात्र सम्राट परीक्षित इतने शक्तिशाली थे जो कलयुग का भी गला काट सकते थे यदि आज भारत के प्रधानमंत्री के सामने कलयुग खड़ा हो जाए तो उनका क्या हाल होगा एक बात और कलयुग सोने में रहता है और कलयुग के लोगों का सबसे बड़ा आकर्षण अर्थात लालच सोने में ही होता है इसलिए जितने लोग सोना पहनते हैं सबके अंदर कलयुग का वास हो जाता है इसलिए मैंने सोना पहनना बहुत लंबे समय से त्याग दिया है और केवल वही कलयुग के प्रभाव से बचकर सच्ची भक्ति ईश्वर का दर्शन देवी देवताओं को देख सकते हैं जो किसी भी रूप में सोने का प्रयोग ना करें लेकिन पापी कलयुग के प्रभाव से कोई बिना सोने के रहने की कल्पना ही नहीं कर सकता विशेष कर स्त्रियां क्योंकि धरती पर सत्य धर्म न्याय सदाचार उनके ही कारण रहता है इसलिए अब ऐसा होना संभव नहीं है

Thursday, 24 September 2026

आनंद चतुर्दशी और भगवान श्री हरि विष्णु - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

आनंद चतुर्दशी और भगवान श्री हरि विष्णु - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि
अनंत चतुर्दशी भगवान श्री हरि विष्णु का व्रत है जो सनातन धर्म के प्रमुख व्रत में गिना जाता है इस दिन क्षीरसागर में सोए हुए श्री हरि विष्णु भगवान अर्थात अनंत की पूजा की जाती है जिनका चरण देवी मां लक्ष्मी दबते रहते हैं और जो शेषनाग के ऊपर आराम से लेते रहते हैं इसका वैज्ञानिक अर्थ है कि संपूर्ण गुरुत्वाकर्षण के केंद्र भाग में भगवान श्री हरि विष्णु अपनी धनात्मक ऊर्जा और देवी लक्ष्मी की रचनात्मक ऊर्जा अर्थात प्रोटॉन इलेक्ट्रॉन के रूप में रहते हैं और न्यूट्रॉन के रूप में संपूर्ण गुरुत्वाकर्षण उनमें समय रहता है  और क्षीरसागर एक ऐसा अनंत समुद्र है जिसमें ऊर्जा द्रव्यमान विद्युत चुंबकत्व और गुरुत्वाकर्षण एकाकार  हो जाता है। 


यह महान व्रत उदया तिथि के अनुसार भादो महीने के शुक्ल पक्ष 14 के दिन मनाया जाता है इस बार यह शुक्रवार को पड़ रहा है क्योंकि 24 सितंबर को चतुर्दशी की तिथि रात में 11:18 पर लग रही है और 25 सितंबर को 11:06 पर समाप्त हो रही इस प्रकार पूजा पाठ का शुभ मुहूर्त सुबह 6:11 से 11:05 तक रहेगा


अनंत चतुर्दशी को 14 गांठ वाला धागा पूजा पाठ के समापन पर पुरुष अपने दाहिने हाथ और महिलाएं बाएं हाथ में बांधती हैं जो धरती आकाश पाताल के 14 लोगों का प्रतीक है जिसमें तल अतल वितल सुतल तलातल रसातल और पाताल एवं जन तप मह  भुव बह्म शिवलोक और सत्यलोक आते हैं

इस व्रत के समापन के पश्चात विष्णु पुराण और नारद पुराण में वर्णित अनंत भगवान की कथा को पढ़ना चाहिए जिसमें अनंत पांच लाख खराब प्रकाश वर्ष में फैले हुए अनंत ब्रह्मांड के गुरुत्वाकर्षण का भगवान श्री हरि विष्णु प्रोटॉन और माता लक्ष्मी इलेक्ट्रॉन एवं बैकुंठ लोग न्यूट्रॉन का प्रतीक है और समग्र द्रव्य और ऊर्जा एवं श्वेत पदार्थ तथा श्याम पदार्थ पदार्थ और प्रति पदार्थ ऊर्जा और प्रतीक ऊर्जा चीयर सागर में समाहित रहती है जिसके एक सिरे पर कृष्ण विवाह और दूसरे सिरे पर श्वेत विवर होता है और अनंत चतुर्दशी के दिन ही अंतिम रूप से गणेश पूजा के बाद भगवान गणेश की प्रतिमाओं का विसर्जन भी किया जाता है

Wednesday, 23 September 2026

आज का भारत जो इंडिया बन चुका है ऐसे नहीं बना है इसमें ईसाई और मुस्लिम धर्म वालों ने दो तरफ आक्रमण किया उन्होंने फिल्म साहित्य धारावाहिक पत्र पत्रिकाएं मीडिया बीते हुए सनातनी बुद्धिजीवी लोगों को वामपंथी और कांग्रेस को और ऐसे नेताओं को

आज का भारत जो इंडिया बन चुका है ऐसे नहीं बना है इसमें ईसाई और मुस्लिम धर्म वालों ने दो तरफ आक्रमण किया उन्होंने फिल्म साहित्य धारावाहिक पत्र पत्रिकाएं मीडिया बीते हुए सनातनी बुद्धिजीवी लोगों को वामपंथी और कांग्रेस को और ऐसे नेताओं को जो केवल कहने को हिंदू थे लेकिन मन वचन कर्म से काले अंग्रेज या फिर मुस्लिम थे या वर्ण शंकर दोगले और मुस्लिम ईसाई वीर्य की औलाद थे इन सबको माध्यम बनाया और अपवाद स्वरूप छोड़कर उपर्युक्त चीजों के द्वारा भारत के सनातनी हिंदुओं को निम्नलिखित चीजेः सिखाया सनातनी धर्म अंधविश्वास है कल्पना है वैज्ञानिक नहीं है और  धर्मगंथों में लिखी हुई बातें स्त्रियों और निम्न वर्ग के विरुद्ध हैं इसका परिणाम हुआ कि लोग गृत्समद सूची वाल्मीकि शबरी मातंग दादू रविदास कागभूसुंडी गरुड़ जैसे लोगों को भूल गए। 

1000 वर्ष तक लगातार इन लोगों ने फिल्म सिनेमा रेडियो धारावाहिक साहित्य नौटंकी नाच गाने के द्वारा कुरान बाइबल का प्रचार करते हुए सनातनी वेद पुराण रामायण महाभारत उपनिषद जैन बौद्ध और सिख धर्म की सर्वश्रेष्ठ बातों को सबसे खराब बताते हुए विशेष कर फिल्म साहित्य रेडियो और अब इंटरनेट तथा मोबाइल के माध्यम से सिखाया की सनातन धर्म में जाति-पाठ उच्च में छुआछूत का भेद है।


 हर जातियों के और धर्म के कुछ लोगों को खरीद लिया और उनकी सहायता से कहीं चांद मियां को साइ बाबा बना दिया कहीं ईसा मसीह को कृष्ण और राम के रूप में मंदिर में बैठ कर दिखाया जाने लगा कि हम लोगों ने पहाड़ के टुकड़े करना चांद को फाड़ देना सूर्य का कीचड़ में डूबना पृथ्वी का चिट्ठी होना और कालीन पर बिना ऑक्सीजन के आसमान में उड़ना जैसी चीज स्वीकार कर लिया और ग्रहण नक्षत्र ग्रहण सूर्य चांद तारे अनंत ब्रह्मांड ब्लैक होल व्हाइट होल दिव्यास्त्र आकाशवाणी महाकाली महाशिव जैसी वैज्ञानिक बातों को भूल गए या उस पर प्रश्न करने लगे जानू को बहुत पहले ही हमारे ऋषि मुनियों वैज्ञानिकों ब्रह्म ऋषियों ने खोज लिया था भास्कर आर्यभट्ट और कारण श्रीधर पंडित ने हजारों हजार साल पहले गुरुत्वाकर्षण शून्य और दशमलव अंग गणित बीजगणित ज्योतिष विज्ञान धाम दर्शन की हर चीज खोज लिया था जिसकी नकल करके अब के बराबर खानाबदोश नर पिशाच और यूरोप के चरवाहे और नाविक भी बड़े-बड़े वैज्ञानिक बन गए। 


इनलोगों के द्वारा सिखाया की माता-पिता की सेवा मत करो चोरी बेईमानी करो कामवासना के नए-नए तरीके अपने देवी देवताओं की हंसी उड़ाना धर्म के विरुद्ध चलना सीखते हुए बताएं कि कैसे हम नर पिशाच होकर देवदूत बनने में संतुष्टीकरण अनुभव करते हैं अपनी सभ्यता संस्कृति भाषा भूलकर हम सभी लोग शिक्षा और पहनाओगे ऐसा रहन-सहन और वेशभूषा भाषा में अंग्रेज बन गए और कौन-कौन में पूरी तरह मुस्लिम बन गए। 


हम घर के बने हुए अनंत प्रकार के भजन पकवान स्वास्थ्य वर्धक चीजे छोड़कर मुस्लिम और क्रिश्चियन धर्म के द्वारा बनाया गया कूडा कचरा बिस्किट मार रोटी मैगी पिज्जा चाऊमीन बर्गर सदी गली ब्रेड और नकली बटर रिफाइंड तेल जैसी चीज खाकर शारीरिक मानसिक और आर्थिक रूप से रोगी और कंगाल बन गए और ऐसे रोगों से गिर गए जिनके बारे में कभी सुना नहीं जाता था सुबह ब्रह्मचर्य की जरूरत 8 से 10:00 बजे उठने लगे रात में देर तक जागने लगे और इस प्रकार के बाद भी ईरान से इंडोनेशिया और कजाकिस्तान तिब्बत से श्रीलंका का 7/8 भारत हो बैठे केवल एक बटे आठ भारत बचा हुआ है  - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 7017713978 15

आगामी मौसम की प्रमुख भविष्यवाणियां -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 7017713978 15

आगामी मौसम की प्रमुख भविष्यवाणियां -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 7017713978 15

कल हमारे केंद्र की भविष्यवाणी के अनुसार दोपहर से शाम के बीच बूंदाबांदी कहीं-कहीं हल्की वर्षा हुई अनेक स्थानों पर दोपहर के बाद से रात में हल्की से मध्यम वर्षा होगी कल अर्थात 24 से लेकर 26 सितंबर तक माध्यम से तेज कहीं-कहीं बहुत तेज  तूफानी चक्रवर्ती वर्षा होने की भविष्यवाणी फिर से दोहराई जा रही है अभी सिंचाई करने वाले लोग और पानी देने वाले लोग अपना पैसा बर्बाद ना करें एक-दो दिन रुक जाएं

आज का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 25 डिग्री सेल्सियस और कल का अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस और 24 डिग्री सेल्सियस होगा आज और कल  से मध्यम से तेज कहीं-कहीं बहुत तेज वर्षा का अनुमान है  आज और कल मौसम ज्यादातर घने काले बादलों का और  माध्यम तेज से बहुत तेज वर्षा वाला रहेगा 24 25 और 26 सितंबर को जौनपुर प्रतापगढ़ अयोध्या अंबेडकर नगर आजमगढ़ गाजीपुर सैदपुर वाराणसी दीनदयाल नगर मिर्जापुर सोनभद्रावत गंज प्रयागराज सुल्तानपुर प्रतापगढ़ और आसपास झंझा झकोर घन गर्जन तड़ित वारिद माला और बिजली के चमक गरज के साथ मध्यम से भारी वर्षा की संभावना है। 

जौनपुर और आसपास के जनपदों में 19 सितंबर से 23 सितंबर तक धूप छांव बादलों के साथ बूंदाबादी हल्की वर्षा कहीं-कहीं मध्यम वर्षा के योग हैं लेकिन 23 सितंबर से मौसम पूरी तरह बदल जाएगा और  29 तक चक्रवार्ती वर्ष का समय रहेगा । मध्य भारत और कुछ समुद्र तटीय  स्थानों पर संपूर्ण पूर्वांचल उड़ीसा बिहार छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश महाराष्ट्र पूर्वोत्तर भारत बंगाल भारी  आपसे बहुत भारी कहानी-कहानी मुसल आधार वर्षा के योग बन रहे हैं इसमें एक-दो दिन का अंतर हो सकता है। 

हवा की दिशा लगातार बदलती रहेगी पहले पूर्व फिर उत्तर पूर्व और फिर पूर्वी दक्षिणी पूर्वी हो जाएगी और हवा का वेग 10 से 25 किलोमीटर प्रति घंटे होगा वायु गुणवत्ता सूचकांक इस समय 15 से लेकर 50 के बीच रहेगी। 

 विशेष कर 24 सितंबर से 30 सितंबर तक यह 10 के आसपास आ जाएगी जो जौनपुर के लिए एक अद्भुत बात है क्योंकि यहां पर वायु गुणवत्ता सूचकांक वर्ष में भी 100 से नीचे कभी-कभी आती है और इस वर्ष पूरे 3 महीने वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 से नीचे रहे हैं सापेक्षिक आर्द्रता इस कालखंड में 50% से 99% के बीच रहेगी इस प्रकार गर्मी उमस और पसीना जारी रहेगा लेकिन केवल 10:00 बजे से 3:00 के बीच पराबैंगनी किरणों की तीव्रता इस कालखंड में 1 से लेकर 6 के बीच रहेगी। 

तापमान इस कालखंड में न्यूनतम 25 से लेकर 27 डिग्री और अधिकतम 35 से लेकर 29 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। इसी वर्ष के बाद से हल्के गुलाबी ठंड का आरंभ हो जाएगा और 15 मार्च तक किसी न किसी तरह चलता रहेगा वर्षा कहानी देश कहीं धीमी कहीं बहुत तेज होगी 

कारण
 
बंगाल की खाड़ी में बनने वाला तीव्र दबाव और उसके फसस्वरूप एक हल्के मध्यम दर्जे का चक्रवात का बनना जो तेज भी हो सकता है जिससे अल नीनो का प्रभाव फिर से घटेगा और पूर्वांचल मध्य भारत दक्षिण भारत से लेकर गुजरात महाराष्ट्र तक माध्यम से भरी और तटीय भागों में भारी मूसलाधार वर्षा होगी और इसी के साथ 5 अक्टूबर से मानसून का समापन हो जाएगा  - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

23 सितंबर 2026 जारी करने का समय: 01:30 PMबजे*

*प्रेस विज्ञप्ति दिनांक:
  23 सितंबर 2026 जारी करने का समय: 01:30 PMबजे* 

विषय: पश्चिम-मध्य एवं उससे सटे उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना गहरा अवदाब (Deep Depression) 23 सितंबर 2026 की रात तक उत्तर आंध्र प्रदेश–दक्षिण ओडिशा तटों को विशाखापत्तनम एवं गोपालपुर के बीच, कलिंगपट्टनम के निकट, पार करने की बहुत अधिक संभावना है। इसके प्रभाव से 23 एवं 24 सितंबर को उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश, दक्षिण आंतरिक ओडिशा तथा दक्षिण छत्तीसगढ़ में, तथा 24 एवं 25 सितंबर को तेलंगाना में भारी से बहुत भारी वर्षा के साथ कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी वर्षा होने की संभावना है।

पिछले 24 घंटों में 0830 बजे IST तक दर्ज मौसम:

❖ दक्षिण ओडिशा में अत्यंत भारी वर्षा (≥21 सेमी) दर्ज की गई।

❖ तटीय आंध्र प्रदेश, तटीय ओडिशा, असम एवं तटीय कर्नाटक में बहुत भारी वर्षा (12–20 सेमी) दर्ज की गई।

❖ पूर्वी उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, मध्य महाराष्ट्र, सौराष्ट्र, तेलंगाना, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, पश्चिम बंगाल तथा मिजोरम में भारी वर्षा (7–11 सेमी) दर्ज की गई।

दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी:

❖ आज, 23 सितंबर 2026 को दक्षिण-पश्चिम मानसून पंजाब, हरियाणा, राजस्थान के अधिकांश हिस्सों, पूरी दिल्ली तथा उत्तर प्रदेश एवं गुजरात के कुछ हिस्सों से आगे वापस लौट गया है।

मौसम प्रणालियां, पूर्वानुमान एवं चेतावनियां:

❖ कल का पश्चिम-मध्य एवं उससे सटे उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना गहरा अवदाब पिछले 6 घंटों में 05 किमी प्रति घंटे की गति से पश्चिम की ओर बढ़ा और आज 23 सितंबर 2026 को 0830 बजे IST पर इसी क्षेत्र में 18.0°N अक्षांश एवं 84.6°E देशांतर के पास केंद्रित था। यह कलिंगपट्टनम (आंध्र प्रदेश) से लगभग 60 किमी दक्षिण-पूर्व, विशाखापत्तनम से 140 किमी पूर्व-उत्तर-पूर्व, गोपालपुर (ओडिशा) से 150 किमी दक्षिण और पुरी (ओडिशा) से 240 किमी दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम में था। इसके पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने और 23 सितंबर की रात तक विशाखापत्तनम एवं गोपालपुर के बीच, कलिंगपट्टनम के निकट गहरे अवदाब के रूप में उत्तर आंध्र प्रदेश–दक्षिण ओडिशा तट को पार करने की बहुत अधिक संभावना है।

❖ पश्चिमी विक्षोभ मध्य क्षोभमंडलीय स्तरों पर पछुआ हवाओं में एक गर्त के रूप में मौजूद है, जिसकी धुरी लगभग 81°E देशांतर के साथ 28°N अक्षांश के उत्तर में है।

❖ निचले क्षोभमंडलीय स्तरों में उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं आसपास के क्षेत्रों के ऊपर एक ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है।

❖ मध्य क्षोभमंडलीय स्तरों में पश्चिम-मध्य एवं उससे सटे उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी में स्थित गहरे अवदाब के केंद्र से थाईलैंड की खाड़ी तक एक गर्त बना हुआ है।

उत्तर-पश्चिम भारत:

❖ जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बाल्टिस्तान-मुजफ्फराबाद में 23–26 सितंबर, हिमाचल प्रदेश में 24–29 सितंबर, उत्तराखंड में 23–25 सितंबर तथा 29 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर छिटपुट से बिखरी वर्षा की संभावना।

❖ हरियाणा, चंडीगढ़ एवं दिल्ली तथा पंजाब में 25–29 सितंबर; पूर्वी एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 28–29 सितंबर; पश्चिमी राजस्थान में 23–29 सितंबर तथा पूर्वी राजस्थान में 23 सितंबर एवं 28–29 सितंबर के दौरान अलग-अलग स्थानों पर छिटपुट से बिखरी वर्षा की संभावना।

❖ जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बाल्टिस्तान-मुजफ्फराबाद में 28–29 सितंबर तथा उत्तराखंड में 26–28 सितंबर के दौरान काफी व्यापक से व्यापक वर्षा की संभावना।

❖ पूर्वी राजस्थान में 24–27 सितंबर के दौरान काफी व्यापक से व्यापक वर्षा की संभावना।

❖ जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बाल्टिस्तान-मुजफ्फराबाद में 28 सितंबर, हिमाचल प्रदेश में 27 सितंबर तथा उत्तराखंड में 25–27 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर गरज-चमक, बिजली एवं तेज हवाएं चलने की संभावना। हवा की गति 40–50 किमी प्रति घंटे, झोंकों के साथ 60 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। हिमाचल प्रदेश में 26 सितंबर को तेज हवाएं 30–40 किमी प्रति घंटे, झोंकों के साथ 50 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं। 

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❖ उत्तराखंड में 28 सितंबर तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में 28–29 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर गरज-चमक एवं बिजली गिरने की संभावना।

❖ उत्तराखंड में 28 सितंबर तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 25–27 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना। 24 सितंबर तथा 27 सितंबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी भारी वर्षा की संभावना। इसके अलावा 26–27 सितंबर को उत्तराखंड तथा 25–26 सितंबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी वर्षा की संभावना।

मध्य भारत:

❖ पश्चिमी मध्य प्रदेश में 23–29 सितंबर, पूर्वी मध्य प्रदेश में 23 सितंबर एवं 29 सितंबर तथा विदर्भ में 29 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर छिटपुट से बिखरी वर्षा की संभावना।

❖ पूर्वी मध्य प्रदेश में 24–28 सितंबर, विदर्भ में 23–28 सितंबर तथा छत्तीसगढ़ में 23–29 सितंबर के दौरान काफी व्यापक से व्यापक वर्षा की संभावना।

❖ पूर्वी एवं पश्चिमी मध्य प्रदेश में 25–27 सितंबर, विदर्भ में 23–25 सितंबर तथा छत्तीसगढ़ में 25–26 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर गरज-चमक, बिजली एवं तेज हवाएं चलने की संभावना। हवा की गति 40–50 किमी प्रति घंटे तथा झोंकों के साथ 60 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। पूर्वी एवं पश्चिमी मध्य प्रदेश में 23–24 सितंबर को तेज हवाएं 30–40 किमी प्रति घंटे तथा झोंकों के साथ 50 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं।

❖ विदर्भ में 26 सितंबर तथा छत्तीसगढ़ में 27 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर गरज-चमक एवं बिजली गिरने की संभावना।

❖ पश्चिमी मध्य प्रदेश में 25–26 सितंबर, छत्तीसगढ़ एवं पूर्वी मध्य प्रदेश में 23–24 सितंबर तथा 27 सितंबर और विदर्भ में 23 सितंबर तथा 26 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना। छत्तीसगढ़ एवं पूर्वी मध्य प्रदेश में 25–26 सितंबर तथा विदर्भ में 24–25 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी वर्षा की भी संभावना।

❖ छत्तीसगढ़ में 23–24 सितंबर को थंडरस्क्वॉल (हवा की गति 50–60 किमी प्रति घंटे, झोंकों के साथ 70 किमी प्रति घंटे तक) की संभावना।

❖ छत्तीसगढ़ में 23 एवं 24 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी वर्षा की संभावना।

पूर्वी भारत:

❖ अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में 23–29 सितंबर, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम में 23–27 सितंबर, गंगीय पश्चिम बंगाल, झारखंड एवं ओडिशा में 23–26 सितंबर तथा बिहार में 24–27 सितंबर के दौरान काफी व्यापक से व्यापक वर्षा की संभावना।

❖ उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम में 28–29 सितंबर, गंगीय पश्चिम बंगाल, झारखंड एवं ओडिशा में 27–29 सितंबर तथा बिहार में 23 सितंबर एवं 28–29 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर छिटपुट से बिखरी वर्षा की संभावना।

❖ अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में 23–29 सितंबर, गंगीय पश्चिम बंगाल एवं झारखंड में 23–25 सितंबर, बिहार में 23–26 सितंबर तथा ओडिशा में 25–26 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर गरज-चमक, बिजली एवं तेज हवाएं चलने की संभावना। हवा की गति 40–50 किमी प्रति घंटे तथा झोंकों के साथ 60 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम में 23–25 सितंबर, झारखंड में 26–29 सितंबर तथा बिहार में 27 सितंबर को तेज हवाएं 30–40 किमी प्रति घंटे तथा झोंकों के साथ 50 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं।

❖ अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में 23–24 सितंबर, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम में 23 एवं 26 सितंबर, गंगीय पश्चिम बंगाल एवं झारखंड में 23 एवं 25 सितंबर, बिहार में 23 सितंबर एवं 25–26 सितंबर तथा ओडिशा में 23–24 सितंबर एवं 27 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम में 24–25 सितंबर तथा बिहार, गंगीय पश्चिम बंगाल एवं झारखंड में 24 सितंबर और ओडिशा में 25–26 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी वर्षा की भी संभावना।

❖ ओडिशा में 23–24 सितंबर को थंडरस्क्वॉल (हवा की गति 50–60 किमी प्रति घंटे, झोंकों के साथ 70 किमी प्रति घंटे तक) की संभावना।

❖ ओडिशा में 23 एवं 24 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी वर्षा की संभावना।

पूर्वोत्तर भारत:

❖ अरुणाचल प्रदेश में 23–24 सितंबर एवं 28 सितंबर, असम एवं मेघालय में 23–28 सितंबर तथा नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम एवं त्रिपुरा में 23–24 सितंबर एवं 27 सितंबर को काफी व्यापक से व्यापक वर्षा की संभावना।

❖ अरुणाचल प्रदेश में 25–27 सितंबर एवं 29 सितंबर, असम एवं मेघालय में 29 सितंबर तथा नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम एवं त्रिपुरा में 25–26 सितंबर एवं 28–29 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर छिटपुट से बिखरी वर्षा की संभावना।

❖ अरुणाचल प्रदेश में 23–25 सितंबर, असम एवं मेघालय में 23–27 सितंबर तथा नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम एवं त्रिपुरा में 23–26 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर गरज-चमक एवं बिजली गिरने की संभावना।

❖ असम एवं मेघालय में 24–28 सितंबर तथा नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम एवं त्रिपुरा में 23 सितंबर एवं 27–28 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना। असम एवं मेघालय में 23 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी वर्षा की भी संभावना।

पश्चिम भारत:

❖ कोंकण एवं गोवा तथा मराठवाड़ा में 23 सितंबर को काफी व्यापक से व्यापक वर्षा की संभावना। 

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❖ कोंकण एवं गोवा तथा मराठवाड़ा में 24–29 सितंबर, गुजरात क्षेत्र एवं मध्य महाराष्ट्र में 23–29 सितंबर तथा सौराष्ट्र एवं कच्छ में 23–25 सितंबर के दौरान अलग-अलग स्थानों पर छिटपुट से बिखरी वर्षा की संभावना।

❖ कोंकण एवं गोवा में 23–24 सितंबर तथा मध्य महाराष्ट्र एवं मराठवाड़ा में 23–26 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर गरज-चमक, बिजली एवं तेज हवाएं चलने की संभावना। हवा की गति 40–50 किमी प्रति घंटे तथा झोंकों के साथ 60 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

❖ गुजरात क्षेत्र में 23 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर गरज-चमक एवं बिजली गिरने की संभावना।

❖ कोंकण एवं गोवा तथा मध्य महाराष्ट्र में 23 सितंबर तथा मराठवाड़ा में 23–24 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना।

❖ मध्य महाराष्ट्र एवं मराठवाड़ा में 24–26 सितंबर के दौरान तेज सतही हवाएं चलने की संभावना।

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत:

❖ तमिलनाडु, पुडुचेरी एवं कराईकल में 23–29 सितंबर; केरल एवं माहे तथा लक्षद्वीप में 27–29 सितंबर; तटीय आंध्र प्रदेश एवं यनम तथा तटीय कर्नाटक में 26–29 सितंबर; उत्तर आंतरिक कर्नाटक, रायलसीमा एवं दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 24–29 सितंबर तथा तेलंगाना में 23 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर छिटपुट से बिखरी वर्षा की संभावना।

❖ केरल एवं माहे तथा लक्षद्वीप में 23–26 सितंबर; तटीय आंध्र प्रदेश एवं यनम तथा तटीय कर्नाटक में 23–25 सितंबर; उत्तर आंतरिक कर्नाटक, रायलसीमा एवं दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 23 सितंबर तथा तेलंगाना में 24–29 सितंबर के दौरान काफी व्यापक से व्यापक वर्षा की संभावना।

❖ तटीय आंध्र प्रदेश एवं यनम तथा तेलंगाना में 25 सितंबर; रायलसीमा में 23–24 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर गरज-चमक, बिजली एवं तेज हवाएं चलने की संभावना। हवा की गति 40–50 किमी प्रति घंटे तथा झोंकों के साथ 60 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। तमिलनाडु, पुडुचेरी एवं कराईकल में 23–24 सितंबर; केरल एवं माहे में 23–26 सितंबर; तटीय कर्नाटक, उत्तर आंतरिक कर्नाटक एवं दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 23–25 सितंबर; तटीय आंध्र प्रदेश एवं यनम में 26–27 सितंबर; रायलसीमा में 25–27 सितंबर तथा तेलंगाना में 26 सितंबर को तेज हवाएं 30–40 किमी प्रति घंटे, झोंकों के साथ 50 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं।

❖ तटीय आंध्र प्रदेश एवं यनम तथा केरल एवं माहे में 23–25 सितंबर, तटीय कर्नाटक में 24 सितंबर, उत्तर आंतरिक एवं दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 23–24 सितंबर, रायलसीमा में 23 सितंबर तथा तेलंगाना में 26 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना। तटीय कर्नाटक में 23 सितंबर तथा तेलंगाना में 23–25 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी वर्षा की भी संभावना।

❖ तटीय आंध्र प्रदेश एवं यनम तथा तेलंगाना में 23–24 सितंबर को थंडरस्क्वॉल (हवा की गति 50–60 किमी प्रति घंटे, झोंकों के साथ 70 किमी प्रति घंटे तक) की संभावना।

❖ तटीय आंध्र प्रदेश एवं यनम तथा रायलसीमा में 23–27 सितंबर और तेलंगाना में 23–26 सितंबर के दौरान तेज सतही हवाएं चलने की संभावना।

❖ तेलंगाना में 24 एवं 25 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी वर्षा की संभावना।

हवा की चेतावनी:

❖ पश्चिम-मध्य एवं उससे सटे उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी में 24 सितंबर की शाम तक 55–65 किमी प्रति घंटे की गति से तेज हवाएं चलने तथा झोंकों के साथ 75 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है। इसके बाद धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है।

❖ दक्षिण ओडिशा–उत्तर आंध्र प्रदेश एवं यनम के तटों के साथ तथा आसपास 24 सितंबर की शाम तक 55–65 किमी प्रति घंटे की गति से तेज हवाएं तथा झोंकों के साथ 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है। इसके बाद धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है।

❖ बंगाल की खाड़ी के उत्तर एवं दक्षिण से सटे क्षेत्रों में 24 सितंबर तक 50–60 किमी प्रति घंटे की गति से तेज हवाएं तथा झोंकों के साथ 70 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है।

❖ पश्चिम बंगाल तथा दक्षिण आंध्र प्रदेश एवं यनम के तटों के साथ एवं आसपास 23 सितंबर की सुबह से 24 सितंबर की शाम तक 45–55 किमी प्रति घंटे की गति से तेज हवाएं तथा झोंकों के साथ 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है।

समुद्र की स्थिति:

❖ पश्चिम-मध्य एवं उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी में 24 सितंबर की शाम तक बहुत अशांत समुद्री स्थिति रहने की संभावना है तथा इसके बाद धीरे-धीरे सुधार होगा।

❖ उत्तर आंध्र प्रदेश–ओडिशा–पश्चिम बंगाल के तटों के साथ एवं आसपास 24 सितंबर की शाम तक समुद्र अशांत से बहुत अशांत रहने की संभावना है और इसके बाद धीरे-धीरे सुधार होगा।

❖ दक्षिण-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी के आसपास के क्षेत्रों में 23 एवं 24 सितंबर को समुद्र अशांत रहने की संभावना है।

मछुआरों के लिए चेतावनी:

❖ मछुआरों को सलाह दी जाती है कि वे 24 सितंबर तक पश्चिम-मध्य एवं उससे सटे उत्तर-पश्चिमी तथा दक्षिण-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी और आंध्र प्रदेश–ओडिशा–पश्चिम बंगाल के तटों के साथ एवं आसपास समुद्र में न जाएं। 

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सर्वाधिक वर्षा दर्ज की गई (≥7 सेमी)

कल 0830 बजे IST से आज 0830 बजे IST तक विभिन्न मौसम उपखंडों में:

❖ ओडिशा: कोरापुट — 23 सेमी
❖ तटीय आंध्र प्रदेश: श्रीकाकुलम (पलासा) — 14 सेमी
❖ असम: चामागुरी — 14 सेमी
❖ तटीय कर्नाटक: अंकोला (जिला उत्तर कन्नड़) — 12 सेमी
❖ गंगीय पश्चिम बंगाल: कांथी/कॉन्टाई — 10 सेमी
❖ गोवा: डाबोलिम — 10 सेमी
❖ अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह: मायाबंदर — 9 सेमी
❖ पूर्वी उत्तर प्रदेश: कानपुर तहसील (कानपुर शहर) — 8 सेमी
❖ मध्य महाराष्ट्र: भिवपुरी–कर्जत (रायगढ़) — 8 सेमी
❖ मिजोरम: आशापारा — 8 सेमी
❖ सौराष्ट्र: ऊना (गिर सोमनाथ) एवं राजुला (अमरेली) — 7 सेमी
❖ उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम: भटकावा टी.ई. — 7 सेमी। 

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