Monday, 26 October 2026

महा चक्रवात अर्नब इसका प्रभाव और जौनपुर में स्थिति - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशकचक्रवात और इसके प्रकार

 महा चक्रवात अर्नब इसका प्रभाव और जौनपुर में स्थिति - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक

चक्रवात और इसके प्रकार 

चक्रवात में चक्करदार अर्थात घूमती हवाएं हैं जिनकी गति 65 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक होती है यह अधिकतर समुद्र में ही उत्पन्न होती है लेकिन धरती पर भी पैदा हो जाती है गति और विनाश लीला के आधार पर इन्हें पांच भागों में बांटा गया है प्रथम श्रेणी का चक्रवात 65 से 100 किलोमीटर का होता है इससे विनाश कम होता इसे कमजोर पेड़ पौधे और छप्पर तथा टिन शेड उड़ जाते हैं है द्वितीय श्रेणी का चक्रवात 90 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाला होता है कमजोर घर और पेड़ों को उखाड़ कर फेंक देता है 120 से 150 किलोमीटर के चक्रवात को तृतीय श्रेणी का चक्रवात माना जाता है यह बहुत विनाशकारी होते हैं और सामने पढ़ने वाले लगभग हर चीजों को पेड़ पौधों को खंबो को उखाड़ कर फेंक देते हैं 

चतुर्थ श्रेणी के चक्रवात बहुत ही भयानक होते हैं और धरती पर कम आते हैं लेकिन उनकी विनाश लीला बहुत अधिक होती है इनकी गति 100 से लेकर 260 किलोमीटर प्रति घंटा होती है और यह रास्ते में पढ़ने वाले सभी पेड़ पौधे बिजली के खंबो कमजोर घरों को उखाड़ कर फेंक देते हैं और सामने पड़ने वाले बस और ट्रक को भी उठाकर फेंक देते हैं कई बार तो ऐसे चलती हुई ट्रेन भी गिरा देते हैं ऐसे चक्रवात भयानक विनाश लीला करते हैं और अरब सागर बंगाल की खाड़ी दक्षिण पूर्वी एशिया और क्यूबा हवाई द्वीप को में बहुत अधिक आते हैं पांचवीं श्रेणी के चक्रवात अत्यंत विनाशकारी और भयानक होते हैं उनकी गति 260 किलोमीटर से लेकर 400 किलोमीटर या उससे भी अधिक होती है अभी तक सबसे भयानक यह चक्रवात 475 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जापान और अमेरिका में आया था जिसने कंक्रीट के मकानों को पल भर में मिट्टी में मिला दिया था बाकी की तो बात ही  और है इन चक्रवातों को महा चक्रवात या सुपर साइक्लोन कहा जाता है यह रास्ते में पड़ने वाले बड़े-बड़े जलयान हवाई जहाज सब कुछ नष्ट कर देते हैं इसके लिए बड़े-बड़े भूमिगत बंकर बनाए गए हैं जिसमें लोग छुप जाते हैं इसी को हरीकेन टाइफून और टॉरनेडो भी कहा जाता है

चक्रवात क्यों बनते हैं आंधी और चक्रवात में अंतर 

चक्रवात तापमान और मौसम में परिवर्तन से उत्पन्न होते हैं जब अचानक समुद्र की सतह गर्म होती है तो बहुत सारी भाप बनकर ऊपर उठती है जो ऊपर की हवा गर्म कर देती है और ठंडी हवा खाली स्थान भरने के लिए इस तरह आती है जैसे किसी जलकुंड से पानी निकालने पर आसपास का पानी आकर तुरंत उसको भर देता है समुद्र की सतह जितना ही अचानक और तेजी से गर्म होगी चक्रवात उतरी ही तेज गति का होगा जिस तरह एक बाल्टी पानी निकालने पर काम परिवर्तन दिखता है लेकिन एक साथ ढेर सारा पानी निकालने पर पानी बहुत तेजी से केंद्र की ओर आता है 1 लाख किलोमीटर से भी अधिक प्रति घंटे की गति से घूमती हवाओं के कारण यह हवाएं चक्करदार हो जाती हैं जैसे पानी की भंवर गोल-गोल घूमते हुए केंद्र की ओर बढ़ती है ठीक वही हाल चक्रवात में होता है आंधी और चक्रवात में अंतर है कि आंधी अधिकतर जमीन पर बनती है और इसकी गति 40 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा होती है कभी-कभी यह 100 किलोमीटर तक पहुंच जाती है जब चेक करवाती आदि आती है जिसे लंगडी आंधी या काली आंधी कहते हैं तब दवाओं की गति 100 से 140 किलोमीटर प्रति घंटा पहुंच जाती है जबकि चक्रवात की गति 65 किलोमीटर से प्रारंभ हुई होती है और यह अधिकतर समुद्र में बनते हैं। 

अर्नब किस श्रेणी का चक्रवात है 

अरब सागर में लक्षद्वीप के पास उत्पन्न हुआ अर्नब चक्रवात पहले प्रथम श्रेणी का था जो इस समय द्वितीय श्रेणी में बदल चुका है और आज शाम तक इसके तृतीय श्रेणी के महा चक्रवात में बदलकर कल 28 अक्टूबर को चौथी श्रेणी के आसपास पहुंचने की संभावना है जब इसकी अधिकतम गति 125 से 150 किलोमीटर प्रति घंटा हो जाएगी तभी यह अपने बिनाश लीला प्रारंभ कर देगा जब यह समुद्र तट से टकराती हैं तब इनकी गति अधिकतम होती है जिसके बाद धीरे-धीरे कम होती चली जाती है इस महा चक्रवात के बारे में बिल्कुल सही और सटीक भविष्यवाणी सबसे पहले हमारे अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर द्वारा सबसे पहले 22 अक्टूबर को ही कर दी गई थी जो प्रकाशित भी हो चुकी है मुझे आश्चर्य हुआ कि 5000 किलोमीटर तक चलने वाला यह चक्रवात किस तरह अरब सागर से हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी होता हुआ उत्तर भारत की ओर बढ़ेगा जबकि अरब सागर के 99% चक्रवात और महा चक्रवात कर्नाटक महाराष्ट्र गुजरात होते हुए मध्य प्रदेश राजस्थान उत्तर भारत से होकर हिमालय की ओर बढ़ते हैं और कभी तिब्बत तो कभी पाकिस्तान की ओर मुड़ जाते हैं सबसे पहले इसका प्रभाव कर्नाटक केरल में पड़ चुका है 25 और 26 अक्टूबर के बाद इसका प्रभाव श्रीलंका और तमिलनाडु पर जारी रहा और इस समय इसका प्रभाव अंडमान निकोबार तेलंगाना पांडिचेरी उड़ीसा कर्नाटक पर पड़ रहा है कल आगे बढ़ते हुए यह पूर्वी महाराष्ट्र पूर्वी मध्य प्रदेश उड़ीसा बंगाल आंध्र प्रदेश में भयंकर बिनाश लीला करेगा और परसों अर्थात 29 अक्टूबर को है बिहार झारखंड और उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर जाएगा जहां जौनपुर वाराणसी आजमगढ़ गाजीपुर गोरखपुर बस्ती देवरिया बलिया कुशीनगर नेपाल भूटान सिक्किम लखनऊ अयोध्या प्रयागराज और आसपास इसका भयानक असर पड़ेगा और हल्का असर दिल्ली मुरादाबाद नूरपुर बरेली तक रहेगा 

जौनपुर और पूर्वांचल एवं आसपास के सभी क्षेत्र प्रयागराज लखनऊ अयोध्या में इस महा चक्रवात का कैसा और कितना प्रभाव पड़ेगा 

इस महा चक्रवात का प्रभाव 28 अक्टूबर को सायं काल दिखना प्रारंभ हो जाएगा वैसे तो आज 27 अक्टूबर को ही शाम तक हल्के बादल दिखेंगे जो कल शाम तक गहरे बादलों में बदल जाएंगे और आधी रात तक घनघोर काले बादल छा जाएंगे 29 अक्टूबर को 9:00 बजे से 12:00 बजे सुबह इसका भयानक असर प्रारंभ होगा जो 30 अक्टूबर को जारी रहेगा लेकिन इसका सबसे विनाशकारी प्रचंड प्रभाव 29 अक्टूबर को दिन में 12:00 बजे दोपहर से लेकर 30 अक्टूबर को संध्याकाल 5:00 बजे तक रहने की आशंका है इन सभी आकलन और अनुमान में 5 से 10 घंटे का अंतर पड़ सकता है। 

जौनपुर पूर्वांचल और आसपास के सभी जनपदों प्रयागराज से लखनऊ तक संभावित महा चक्रवाती हवाओं की गति और वर्षा का अनुमान

 इस महा चक्रवात का असर 29 से 31 अक्टूबर के बीच सर्वाधिक रहेगा हवाओं की गति 40 किलोमीटर प्रति घंटा से 60 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती है या और अधिक गति भी पकड़ सकती है जो देशकाल परिस्थितियों और वातावरण पर निर्भर करेगा और इस कालखंड में होने वाली वर्षा 100 मिलीमीटर से लेकर 160 मिनी या इसके आसपास रह सकती है जिससे पकी हुई फसलों को भयंकर नुकसान होगा और बोए गए फसलों को भी भारी क्षति होगी आलू से लेकर हरी सब्जियां भारी वर्षा से गल जाएंगे और तेज हवाओं से धान की फैसले गिरकर काली हो जाएंगे और भी कई नुकसान होंगे लेकिन यह वर्षा आने वाली रबी की फसल के लिए बहुत प्रभावित होगी कृषि बागवानी करने वालों से मेरा आग्रह है कि वह सभी तैयार फल और फैसले तोड़कर या तो बेच दिया सुरक्षित रख ले। 

मौसम और तापमान में संभावित परिवर्तन

 इस वर्ष के पहले 25 26 27 अक्टूबर को गर्मी और उमस बढ़ेगी लेकिन 31 अक्टूबर से ठंड अचानक बढ़ जाएगी अधिकतम और न्यूनतम तापमान में अचानक थी 5 से 7 डिग्री सेल्सियस कमी होने से ठंड का असर बहुत बढ़ेगा और लोगों को तमाम रोग और बीमारियों तथा मौसम परिवर्तन से होने वाले रोगों से सामना करना पड़ेगा 31 अक्टूबर के बाद मौसम पूरी तरह शांत और सामान्य हो जाएगा 

इस महा चक्रवात का संपूर्ण भारत पर असर अर्थात प्रभाव 

इस महा चक्रवात के कारण लक्षद्वीप  कर्नाटक और केरल के तटीय भाग श्रीलंका में बहुत तेज वर्षा होने से जनजीवन अस्त्र-शस्त्र हो जाएगा लेकिन अधिक नुकसान नहीं होगा लेकिन तमिलनाडु के उत्तरी भाग पांडिचेरी आंध्र प्रदेश तेलंगाना उड़ीसा बंगाल के दक्षिणी भाग महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के बिल्कुल पूर्वी भागों में इसके विनाश लीला बहुत भयंकर रहेगी सबसे अधिक प्रभाव इसका आंध्र प्रदेश में पड़ेगा जहां पर भयंकर बाढ़ आने के साथ अत्यंत तेज हवाओं के कारण पेड़ पौधों घर बिजली के तार खंभों मकान जीव जंतुओं को भीषण परेशानी होगी और समुद्र में 5 से 10 फीट ऊंची लहरें भयानक का रूप ले लेंगी आगे बढ़ते हुए इसका असर कमजोर हो जाएगा फिर भी इसे बिहार के दक्षिणी भागों झारखंड छत्तीसगढ़ के कुछ भागों उत्तर प्रदेश में लखनऊ तक नेपाल भूटान सिक्किम में माध्यम से भारी और अनेक स्थानों पर बहुत भारी वर्षा होगी दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इसका हल्का असर रहेगा
[10/27, 8:15 AM] Dr  Dileep Kumar singh: अक्टूबर और नवंबर में ही क्यों आते हैं अधिकांश चक्रवात और महा चक्रवात 

इसका कारण है कि इस समय उत्तर भारत में तापमान तेजी से कम होता है जबकि दक्षिणी भारत में विषुवत वृत्त के निकट रहने के कारण गर्मी बहुत अधिक होती है यदि आप कभी दिसंबर और जनवरी में मुंबई आंध्र कर्नाटक केरल तमिलनाडु गए हैं तो आपने देखा होगा कि वहां पर भयंकर गर्मी पड़ती है जबकि उत्तर भारत में हाड़ कंपाने वाली ठंड होती है एक बात और है कि इस समय रात में दक्षिण भारत के जमीन बहुत तेजी से ठंडा होता है यह भी चक्रवात बनने का एक प्रमुख कारण है यह वैज्ञानिक तथ्य है कि पानी धीरे-धीरे गर्म होता है और धीरे-धीरे ठंडा होता है जबकि जमीन बहुत तेजी से गर्म होती है और बहुत तेजी से ठंडी भी हो जाती है मौसम के इस भयानक परिवर्तन से तेज चक्रवाती हवाएं समुद्री सतह में परिवर्तन के कारण बनती हैं और 95% चक्रवात और महा चक्रवात अक्टूबर और नवंबर में ही आते हैं इसके पहले हमारे केंद्र के द्वारा 2024 में महा चक्रवात दाना और फंगल का और 2025 में आने वाले महा चक्रवात मोंथा का बिल्कुल सटीक और सही वर्णन और भविष्यवाणी की गई थी जिससे भयंकर नुकसान पूरे भारत में हुआ और जौनपुर पूर्वांचल में भी इनका व्यापक असर रहा 50 वर्ष से लगातार समय पर भविष्यवाणी कर देने से करोड़ों लोगों का लाभ होता है और वह सभी अपनी शक्ति और क्षमता के अनुसार इससे बचने का यथा संभव उपाय कर लेते हैं यही हमारे मौसम विज्ञान केंद्र की उपयोगिता है।

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