खबर का असर : वन विभाग ने सरवा नर्सरी पर पहुचाई लकडी
राकेश मौर्य
जिला संवाददाता
लखीमपुर खीरी। खीरी जनपद की शारदानगर रेंज में वन विभाग के अफसरो के काले कारनामों का सच उजागर हो गया है। आंधी में गिरे पेड़ों की लकड़ी गायब होने की खबर अखबारों में प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद वन विभाग बैकफुट पर नजर आ रहा है। वन विभाग के अफसरो ने छीछालेदारी से बचने के लिए आंधी में गिरे पेड़ों की कुछ लकडी सरवा नर्सरी पर पहुंचा दी है। हालांकि सरवा नर्सरी पर पहुची लकडी नाममात्र की ही है, शेष लकडी को डिप्टी रेंजर संजय आजाद ने पहले ही भिम्मापुरवा के लकडकट्टे विक्रम के हाथों बेच दिया था। लेकिन वन विभाग के इस काले कारनामों की खबरें जब अखबारों की सुर्खियां बन गई तो वन विभाग के अफसर खुद को बचाने में जुट गए।
जानकारी के मुताबिक दक्षिण खीरी वन प्रभाग की शारदानगर रेंज में बीते दिनों आई तेज रफ्तार बारिश व आंधी में सडक किनारे लगे अर्जुन, जंगल जलेबी व अन्य प्रजाति के सरकारी पेड़ धराशाई हो गए थे। इस आंधी में टेढुई पुलिया से फूलबेहड़ व सरवा जाने वाले मार्ग पर सबसे अधिक पेड धराशाई हुए थे। जिसके चलते वन विभाग ने इन गिरे हुए पेड़ों को हटवाने की जिम्मेदारी क्षेत्रीय वन दरोगा व डिप्टी रेंजर संजय आजाद को सौपी गई थी। डिप्टी रेंजर संजय आजाद ने क्षेत्र के ही भिम्मापुरवा गांव के लकडकट्टे विक्रम से सांठगांठ कर अपना खेल खेल दिया। आरोप है कि डिप्टी रेंजर संजय आजाद ने सडक किनारे गिरे इन पेड़ों को काट कर अवैध रूप से बेंच दिया। जबकि दिखावे को कुछ पेड़ों की मुडढी मय तना मौके पर छोड़ दी। इस मामले को लेकर जब मीडिया में चर्चा हुई तो मीडियाकर्मियों ने लकडी के बारे में जानकारी ली, तो पता चला कि सडक किनारे गिरे पेड़ों की लकड़ी न तो रेंज कार्यालय पहुंची है और न ही तेतारपुर नर्सरी में। तब मीडियाकर्मियों ने डिप्टी रेंजर संजय आजाद को मालुमात के लिए फोन किया तो संजय आजाद ने किसी भी मीडियाकर्मी का फोन नहीं उठाया। बारिश व आंधी में सडक पर गिरे पेड़ों के गायब किए जाने के मामले में दक्षिण खीरी वन प्रभाग के डीएफओ तापस मिहिर के भी सुर बदले नजर आये थे। डीएफओ तापस मिहिर ने भी इस मामले में टालमटोल वाला जवाब देते हुए कहा था कि आपका कोई पर्सनल मामला है क्या, अगर ऐसा है तो व्हाट्सएप पर दे, मै दिखवा लूंगा। यह कह कर डीएफओ ने तापस मिहिर फोन काट दिया था। इस मामले को लेकर दैनिक सद्भावना का प्रतीक अखबार समेत सोशल मीडिया पर खबर प्रमुखता से प्रकाशित की गई। तब वन विभाग के अफसरो ने छीछालेदारी से बचने के लिए आनन फानन में आंधी में गिरे कुछ पेड़ों की लकड़ी को सरवा नर्सरी पर पहुंचा दिया, जिससे यह साबित हो सके कि आंधी में गिरे पेड़ों की लकड़ी सरकारी नर्सरी पर रखी गई है।