आनंद चतुर्दशी और भगवान श्री हरि विष्णु - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि
अनंत चतुर्दशी भगवान श्री हरि विष्णु का व्रत है जो सनातन धर्म के प्रमुख व्रत में गिना जाता है इस दिन क्षीरसागर में सोए हुए श्री हरि विष्णु भगवान अर्थात अनंत की पूजा की जाती है जिनका चरण देवी मां लक्ष्मी दबते रहते हैं और जो शेषनाग के ऊपर आराम से लेते रहते हैं इसका वैज्ञानिक अर्थ है कि संपूर्ण गुरुत्वाकर्षण के केंद्र भाग में भगवान श्री हरि विष्णु अपनी धनात्मक ऊर्जा और देवी लक्ष्मी की रचनात्मक ऊर्जा अर्थात प्रोटॉन इलेक्ट्रॉन के रूप में रहते हैं और न्यूट्रॉन के रूप में संपूर्ण गुरुत्वाकर्षण उनमें समय रहता है और क्षीरसागर एक ऐसा अनंत समुद्र है जिसमें ऊर्जा द्रव्यमान विद्युत चुंबकत्व और गुरुत्वाकर्षण एकाकार हो जाता है।
यह महान व्रत उदया तिथि के अनुसार भादो महीने के शुक्ल पक्ष 14 के दिन मनाया जाता है इस बार यह शुक्रवार को पड़ रहा है क्योंकि 24 सितंबर को चतुर्दशी की तिथि रात में 11:18 पर लग रही है और 25 सितंबर को 11:06 पर समाप्त हो रही इस प्रकार पूजा पाठ का शुभ मुहूर्त सुबह 6:11 से 11:05 तक रहेगा
अनंत चतुर्दशी को 14 गांठ वाला धागा पूजा पाठ के समापन पर पुरुष अपने दाहिने हाथ और महिलाएं बाएं हाथ में बांधती हैं जो धरती आकाश पाताल के 14 लोगों का प्रतीक है जिसमें तल अतल वितल सुतल तलातल रसातल और पाताल एवं जन तप मह भुव बह्म शिवलोक और सत्यलोक आते हैं
इस व्रत के समापन के पश्चात विष्णु पुराण और नारद पुराण में वर्णित अनंत भगवान की कथा को पढ़ना चाहिए जिसमें अनंत पांच लाख खराब प्रकाश वर्ष में फैले हुए अनंत ब्रह्मांड के गुरुत्वाकर्षण का भगवान श्री हरि विष्णु प्रोटॉन और माता लक्ष्मी इलेक्ट्रॉन एवं बैकुंठ लोग न्यूट्रॉन का प्रतीक है और समग्र द्रव्य और ऊर्जा एवं श्वेत पदार्थ तथा श्याम पदार्थ पदार्थ और प्रति पदार्थ ऊर्जा और प्रतीक ऊर्जा चीयर सागर में समाहित रहती है जिसके एक सिरे पर कृष्ण विवाह और दूसरे सिरे पर श्वेत विवर होता है और अनंत चतुर्दशी के दिन ही अंतिम रूप से गणेश पूजा के बाद भगवान गणेश की प्रतिमाओं का विसर्जन भी किया जाता है
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