सनातन धर्म तंत्र मंत्र मठ मंदिर आश्रम शक्तिपीठ धाम और तीर्थ स्थान का निष्पक्ष मौलिक विवेचन -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक
कालचक्र के प्रभाव और कलयुग के आगमन के कारण आज हर अच्छी चीज बुरी और बुरी चीज अच्छी दिखाई दे रही है तमराज किलविश का साम्राज्य बढ़ रहा है और अंधेरा दिनों दिन उजाले को निकल रहा है सत्य सत्य से हर रहा है सदाचार दुराचार के आगे नतमस्तक है और अज्ञान के आगे ज्ञान हर रहा है तभी तो धर्म ग्रंथो की मौलिक बातों को उल्टा सीधा करके सच को दबाकर सत्य को दिखाई जा रहा है एक प्रसंग में जो आजकल बहुत टीवी चैनल और इंटरनेट पर चल रहा है कारण के द्वारा इंद्र की पराजय का है जो कि कभी हुआ ही नहीं था इसलिए आज हम सनातन धर्म स्थल मठ मंदिर आश्रम धाम शक्तिपीठ और तीर्थ स्थान का बिल्कुल स्पष्ट मौलिक और निष्पक्ष विवेचन करेंगे
सबसे पहले यह आप सभी निश्चित रूप से जानने की हमारा सनातन धर्म जो मूल रूप से है वह बिल्कुल सत्य ज्ञान और उजाले का प्रतीक है पूरी तरह प्रकृति पर्यावरण विज्ञान धाम दर्शन के अनुकूल है और सारे संसार का हर व्यक्ति इसमें समाहित हो सकता है इसी प्रकार आज के 100 वर्ष पहले तक बने हुए सभी तीर्थ स्थान धाम मठ मंदिर शक्तिपीठ एवं आश्रम बिल्कुल ही सही और सच्चे हैं और यहां पर सकारात्मक ऊर्जा और दिव्य शक्तियों का निवास है लेकिन आजकल तमाम नकली साइन मंदिर मैहर देवी और वैष्णो माता के मंदिर शीतला धाम विंध्यवासिनी देवी और तमाम देवी देवताओं भगवान का नकली मंदिर बनाकर विज्ञापन और मीडिया में उसकी जोर-शोर से प्रशंसा करके लूटने का काम किया जा रहा है इससे आपको सावधान रहने की आवश्यकता है।
यह संसार कर्म स्थल है अपने कर्म का फल सबको भोगना पड़ता है या निश्चित और अटल है यहां तक की देवी देवता और ईश्वर भी यदि धरती पर आ जाते हैं तो उनको भी कम का भोग भोगना पड़ता है भले ही वह भगवान श्री राम श्री कृष्णा अष्ट पशु अप्सराय देवी देवता भगवान श्री कृष्णा महावीर स्वामी भगवान बुद्ध नानक या कोई भी महापुरुष रहे हो उनका इतिहास चरित्र आपको पता है की किस तरह से पूर्व जन्म के कृत्य के कारण भगवान श्री कृष्ण अंत में जरा नाम के ब्याध के द्वारा बैकुंठ धाम गमन किये।
यदि आप 100 वर्ष पहले स्थापित मठ मंदिर शक्तिपीठ धाम धर्म के केंद्र एवं अन्य धार्मिक सांस्कृतिक और दार्शनिक तथा वैज्ञानिक शक्तिपीठों का अध्ययन करेंगे तो पाएंगे कि यह धरती के अति विशिष्ट स्थान है जैसे कि महाकाल उज्जैन जो भारत का केंद्र भाग है और यहां पर जब भी भारत की राजधानी बनी भारत उन्नति के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचा और दिल्ली में जब भी राजधानी बनाई गई देश टुकड़े-टुकड़े होकर बर्बाद हुआ भीषण युद्ध हुए और धन जन संस्कृति सभ्यता एवं प्रकृति पर्यावरण का अभूतपूर्व नुकसान हुआ।
इतना स्पष्ट जान लीजिए कि जब भगवान श्री कृष्णा पर लोग चले गए उसी दिन से कलयुग धरती पर उतर आया अपने अनुचर और तमराज किलविश के साथ वह धरती पर घूमता रहा लेकिन पांडव श्री कृष्णा और उनके परम शक्तिशाली विश्व विजेता परीक्षित का इतना बड़ा प्रताप था कि उसकी धरती पर कहीं रुकने की जगह नहीं मिल रही थी। सम्राट परीक्षित स्वयं प्रवेश बदलकर संपूर्ण धरती का अवलोकन अपने पवन गति वाले अश्व से किया करते थे।
एक बार उनके साम्राज्य में एक अद्भुत पाप कर्म घटित हो गया तब उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ कि यह कैसे हुआ इसके बाद जब वह अपने अश्व पर कारण जानने के लिए निकले तब उन्होंने देखा एक भयंकर काला बहुत लंबा चौड़ा पुरुष इस धर्म और पाप का केंद्र है जो बहुत ही भयंकर था और उसकी आंखें अंगारे बरसा रहे थे।
यह देखकर परम तेजस्वी परीक्षित ने बिना डरे पलक झपकते ही अश्व से कूद कर उसकी गर्दन दबोच कर धरती पर गिरा दिया और पूछा तू कौन है जो सम्राट परीक्षित के राज्य में धर्म और पाप कर्म करने की चेष्टा कर रहा है और इस तरह कुमार स्वरूप गौ माता और उसके बछड़े को पीड़ा दे रहा है मृत्यु के भाई से थर-थर कांपते हुए कलयुग ने कहा है प्रभु यह कलयुग है और हमें साक्षात श्री हरि विष्णु के द्वारा इस युग का प्रधान नियुक्त करके धरती पर पाप अन्याय अत्याचार अधर्म अज्ञान अनाचार दुराचार बढ़ाने के लिए भेजा गया है।
इस पर क्रोध से लाल पीले परीक्षित ने अपनी भयंकर तलवार उसकी गर्दन काटने के लिए उठा लिया तब वह उनके पैरों पर गिरकर शरणागत हो गया और अपने रहने के लिए केवल पांच जगह मांगा तब सम्राट परीक्षित ने उससे कहा तुम हुए के स्थान पर सोने में वेश्याओं के घर जहां पाप कर्म होते हैं और जहां धर्म होता है वहां पर निवास करो इस पर कलयुग तत्काल ही गायब होकर उनके मुकुट में समा गया इसके बाद उन्होंने कलयुग के प्रभाव से तपस्यारत ऋषि के गले में एक मरा हुआ सांप डाल दिया और उसके पुत्र के श्राप देने के कारण तक्षक नाग के काटने के कारण स्वर्ग धाम सिद्धार्थ गए।
इसलिए आप मठ मंदिर धर्म स्थान तीर्थ आश्रम हर जगह यात्रा कीजिए लेकिन ध्यान रखें की 95 प्रतिशत से अधिक कलयुग के साधु संत ऋषि मुनि मनुष्य पुरोहित पांडे कथा वाचक धर्म गुरु और इन स्थानों से जुड़े हुए नौकर चाकर सब के सब दुराचारी मानस मंदिर महिला का सेवन करने वाले और पंचमाकर संयुक्त होते हैं सावधानी रखनी आवश्यक है वरना आपका भी शोषण हो जाएगा चौकिया धाम में जाकर आप पुरोहित पंडितों की अश्लीलता पैसों की लालच और महिलाओं के प्रति गंदे व्यवहार को अपनी आंखों से देख सकते हैं।
एक बात और भी कहना चाहता हूं कि कलयुग का प्रभाव स्त्रियों और लड़कियों पर भी है जितने भी कांड हो रहे हैं 99% उनकी सहमति और रजामंदी से हो रहे हैं लेकिन जब उनका काम हो जाता है कुकर्मे पूरा हो जाता है या जब संबंधित व्यक्ति से लाभ या पैसा मिलना बंद हो जाता है या जब वह पकड़ी जाती हैं तो सर आप पुरुषों पर लगाकर खुद दूर है जाती हैं इसलिए सभी को सावधानी रखना आवश्यकहै।
यदि कोई भी महिला किसी साधु संत महात्मा ज्योति धर्मगुरु के पास अपने पति माता-पिता या परिवार की चोरी से आती है कोई भी स्त्री या लड़की विनाशकारी मंत्र या सम्मोहन विद्या सिखाती है कोई भी स्त्री या लड़की अकेले में बार-बार उनसे मिलने जाती है तो वह स्वयं ही उनको गलत काम का आमंत्रण देती है ऐसे में इन वर्ग से जुड़े लोगों को सावधान रहना चाहिए और किसी भी महिला या लड़की को अकेले अपने आश्रम मठ मंदिर में आने नहीं देना चाहिए यदि वे ऐसा करते हैं तो राम रहीम आसाराम बापू संत रामपाल और अशोक खैरात की तरह उनका पतन निश्चित है।
एक बात और इस समय कलयुग में कम से कम 60 से 90% साधु संत महंत धर्म गुरु मुस्लिम या क्रिश्चियन होते हैं जो सनातन धर्म को भगवा वस्त्र पहनकर बदनाम करते हैं और स्त्रियों लड़कियों का जमकर शोषण करते हैं और पैसा भी वसूली करते हैं धर्म स्थान में टीका लगाने से लेकर फल फूल माला बेचने का अधिकतर काम यही करते हैं जो उसे दूषित करके बेचते हैं कितने तो पुजारी पांडे मुस्लिम बन गए हैं जिन्हें पहचान पाना बहुत मुश्किल है सलीम वास्तविक जैसे लोगों का उदाहरण अभी-अभी सामने आया है इसलिए पहले जांच परख कर तभी किसी पर विश्वास करना चाहिए
इस प्रकार यह निष्कर्ष निकलता है कि सनातन धर्म मूल रूप से जो है वह दुनिया का सबसे सुंदर सबसे श्रेष्ठ सबसे उदार सबसे कल्याणकारी सबसे वैज्ञानिक प्रकृति और पर्यावरण के अनुकूल धरती के हर मनुष्य का धर्म है इसी तरह 100 वर्ष पहले बने हुए सारे मठ मंदिर आश्रम धर्म स्थान तीर्थ और सभी धार्मिक केंद्र बिल्कुल सही है जितने नए बने हुए हैं वह सब प्रचार और विज्ञापन के सहारे बने हुए हैं यदि व्यक्ति जांच पर रखकर इस धरती पर रहकर काम करता है तो वह न कभी धोखा खाता है और ना कभी उसको भयादोहन किया जा सकता है
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