Tuesday, 6 January 2026

रात के दस बज चुके थे। ज्यादातर यात्री सोने की तैयारी में थे , या पहली झपकी ले रहे थे। लेकिन साइड लोवर सीट पर बैठे अल्लाह के बंदे की आंखों में नींद का नामोनिशान नहीं था। वह सुरमा लगी आंखों , सफाचट मूंछ , मेंहदी रंगे बाल और दाढ़ी , ग़मग़ामाता इत्र लगाए अपनी बेडौल काया लिए सीट पर पसरा हुआ था।

रात के दस बज चुके थे। ज्यादातर यात्री सोने की तैयारी में थे , या पहली झपकी ले रहे थे। लेकिन साइड लोवर सीट पर बैठे अल्लाह के बंदे की आंखों में नींद का नामोनिशान नहीं था। वह सुरमा लगी आंखों , सफाचट मूंछ , मेंहदी रंगे बाल और दाढ़ी , ग़मग़ामाता इत्र लगाए अपनी बेडौल काया लिए सीट पर पसरा हुआ था।

हाथों में मोबाइल फोन था। दाएं हाथ से फोन को ऊपर उठाए किसी मौलाना की तकरीर सुन रहा था। उसके रुख पर आध्यात्मिक ऑर्गेज्म के ऐसे भाव आ जा रहे थे कि बिना कयामत आए , उसे इनाम इकराम से नवाज़ा जा चुका था। उसकी सीट शराब की नदी में तैर रही थी , हूरों ने उसे चारों तरफ से घेरा हुआ था।

वे जनाब तो आनंद की परम अवस्था में डूबे हुए थे किंतु मैं चिड़चिड़ाहट के एवरेस्ट पर बैठा उबल रहा था। अगल बगल के यात्रियों परनज़र डाली तो लगा किसी को कोई तकलीफ नहीं थी। अगल , बगल वाले कंपार्टमेंट में भी नज़र डाली वहां भी सब आराम से लेटे हुए थे। एवरेस्ट भी पिघलने लगा था।

मेरी हालत देख पत्नी समझ गई कि यह विघ्न संतोषी आदमी अभी कुछ न कुछ हरकत करेगा, वह फुसफुसा कर बोली - किसी को कोई समस्या नहीं है तो , तुम क्यों अंडे की तरह खड़खड़ा कर उबल रहे हो। तुम भी कान में हेड फोन लगाओ , कुछ अच्छा संगीत सुनते सुनते सो जाओ।

मैने पत्नी को कोई जवाब नहीं दिया।

मैं - आपको समझ नहीं आता , सब लोग सो रहे हैं , रात का समय है , और आप फुल वॉल्यूम में तकरीरें सुन रहे हो ?
अब्दुल - क्या कहा ?
मैं - वही जो तूने सुना।
अब्दुल - किसी को कोई तकलीफ नहीं है तुम्हे क्या समस्या है ?
मैं - मुर्दों को समस्या नहीं होती। उन्हें कुछ फर्क नहीं पड़ता। या तो फोन बंद कर , या हेड फोन लगा कर सुन।
अब्दुल तेज आवाज़ में - ऐसे ही सुनूंगा तो क्या कर लेगा ?

कहना तो चाहता था कि तेरी दाढ़ी नोच लूंगा , तेरा सेल फोन छीनकर तोड़ दूंगा , लेकिन जनता था यह सब करना संभव नहीं था। हमारी बहस सुनकर अगल बगल के सभी लोग अपनी अपनी सीट से बगुलों की तरह गर्दन निकाल कर देखने  लगे किंतु कोई मेरा साथ देने नहीं आया। यह देखकर अब्दुल की हिम्मत और बढ़ गई। वह और फैलने लगा। मैं चाहता तो tt या आरपीएफ वालों को बुला सकता था। पर मैने निश्चय किया कि इस एक बंदे के लिए मैं ही काफी हूं।

मैंने अपना बैग खोला , उसमें एक पोर्टेबल साउंड सिस्टम था।  अपना फोन ऑन किया , साउंड सिस्टम अटैच किया और फुल वॉल्यूम में हनुमान चालीसा लगा दी।

जैसे ही हनुमान चालीसा शुरू हुई सभी हिंदुओं और अब्दुलों को जैसे करेंट लगा। सब टनटना कर उठ बैठे। मुझसे शिकायत करने लगे कि क्यों सबकी नींद खराब कर रहे हो।पत्नी की नजरें भी कहने लगी कि तुम नहीं सुधरोगे।

मैं - ये आदमी तकरीर सुन रहा था , तब तुम लोगों की नींद में खलल नहीं पड़ रहा था। सब सो रहे थे या सोने का नाटक कर  रहे थे, सोच रहे थे कि कुछ देर बाद यह भी सो जाएगा। लेकिन हनुमान चालीसा बजते ही तुम सब लोगों के ऊपर हनुमान जी की गदा का प्रहार होने लगा।

एक सहयात्री - वह जाहिल है , उसे समझ नहीं है तो क्या हम भी वही हरकत करें।

मैं लगभग चिल्लाते हुए - तुम सब लोग सभ्य नहीं डरपोक हो , कीड़े मकोड़े हो , यह एक अकेला निडर होकर तुम्हारी छाती पर मूंग दल रहा था है और तुम्हारी हिम्मत भी नहीं पड़ रही कि उसे टोक दो। यदि यह दस बीस होता तो तुम्हारा सफर कैसा बीतता कल्पना कर देखो । यही मानसिकता है जो दो चार अब्दुल मुहल्ले या सोसायटी में आने के बाद तुम्हे वहां से पलायन करने के लिए उकसाते हैं। तुम सारे लोग नपुसंक हो। पत्नी के साथ संभोग कर बच्चा पैदा करना ही पुरुषत्व का लक्षण नहीं है।

यह बात सुनते ही सबकी कनपटी लाल हो गई। बात आगे बढ़ती उसके पहले ही tt ओर रेलवे पुलिस फोर्स के जवान आ गए। उन्होंने सारा मामला सुना और दोनों को समझाया।

मैं - अगर इसने बिना हेड फोन लगाए कुछ भी देखना , सुनना शुरू किया तो हनुमान चालीसा का पाठ अनवरत चलता रहेगा। यहां जितने नपुंसक हिंदू हैं अपने अपने कानों में पत्थर ठूस लें।

बहरहाल मामला सुलझ गया।

पर पत्नी ने आंखों से ही कहा कि घर चलो , तुम्हारी अच्छे से खबर लूंगी।

‌‌ लेकिन अंदर है अंदर यह संतोष था कितने नपुंसक कर हिजड़ो के बीच अभी एक सनातनी शेर जिंदा है यह उसे देखने से लग रहा था और यही एक कारण है जिसके कारण सनातनी घाटे और विधर्मी शैतान बढ़े और कोई कारण नहीं है सब कारण बनावटी हैं 

जहां यह शैतान वास्तव में ताकतवर हैं वहां पर कोई गैर मुस्लिम जिंदा रह ही नहीं सकता‌ यही दुनिया का सबसे बड़ा सार्वजनिक सच अर्थात भारत के लोगों को समझने के लिए यूनिवर्सल ट्रुथ है 
डॉ दिलीप कुमार सिंह

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