बसंत पंचमी का महापर्व एवं देवी सरस्वती -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि
प्रस्तावना
बसंत पंचमी भारत के सर्व प्रमुख एवं सबसे पवित्र महान पर्व में से एक है घनघोर ठंड कोहरा शीत गलन और पाला ओस तुषार के बाद इस दिन से ही ऋतुराज बसंत का आगमन होता है और चारों ओर फल और फूल लग जाते हैं खेतों में फैसले तैयार होने लगती है सरसों के पीले फूल और गेहूं की सुनहली बालियां सबको मंत्र मुग्ध कर देती हैं आम में भी हल्के पीले नारंगी रंग के बौर की अद्भुत सुगंध हर दिशा में फैल जाती है ऋतुराज बसंत में मनाया जाने वाला यह परम पवित्र पर्व कला कौशल ज्ञान विज्ञान और साहित्य संगीत की महादेव भी सरस्वती को समर्पित है। यह समस्त प्राणियों में जीवन का संचार करता है और कामदेव तथा रति देवी का सब जगह प्रचार प्रसार हो जाता है
बसंत पंचमी मनाए जाने का कारण
वैसे तो भारत का हर एक पाव और त्यौहार एवं शुभ तथा मांगलिक कार्य एवं उत्सव प्रकृति पर्यावरण मौसम सूर्य और चंद्रमा से संबंधित है और यह भी मा ठंड के बाद का और गर्मी प्रारंभ होने के पहले का पर्व है इसको प्रकृति और फसलों का पर्व भी कहा जाए तो गलत नहीं होगा फल और फूलों का पर्व तो यह है चारों तरफ पीले रंग का राज होता है
इसी दिन देवी सरस्वती का जन्म हुआ था और इसके बाद ही सृष्टि का विस्तार और विद्या का आरंभ हुआ इसी दिन सम्राट पृथ्वीराज चौहान तानाजी मालसुरे और बंदा बैरागी जैसे महान वीरों ने देश के हित में अपना बलिदान दिया था इसलिए महान पर्व है यह देवी सरस्वती के महान त्याग के लिए भी समर्पित है जो उन्होंने अपने वीणा की झंकार और वाहन मयूर के साथ सभी मंत्र के साथ सभी विधाओं साहित्य संगीत कला का प्रारंभ किया था
बसंत पंचमी के दिन क्या करना चाहिए
बसंत पंचमी के दिन पीले या सफेद वस्त्र साफ सुथरा धारण करना चाहिए इस दिन गणेश जी और नवग्रह का कलश पूजन करना चाहिए और सरस्वती जी की पूजा करनी चाहिए नए बालकों के विद्या के आरंभ का यह शुभ दिन है पीले रंग के फल फूल और पीले रंग की मिठाई का प्रयोग करना चाहिए प्रकृति पीले हल्के पीले और नारंगी रंग के फूल और पत्तों से ढक जाती है शीतल मंद सुगंधित समीर बहने लगती है तभी तो कहा गया है-
मैं मलय समीर निराला सर सर मर मर।सर सर मर मर।
नभ जल थल में दे दे फेरी, रवि से कहती है गति मेरी।
अब मधु दिन है आने वाला, मैं मलय समीर निराला।
मैं अग जग का प्यारा वसंत
मैं ऋतु में न्यारा वसंत
मेरी पग ध्वनि सुन जग जागा।
नव जीवन में संगीत बहा
सपनों में भर आता दिगंत ,
मैं अब जग का प्यारा वसंत
इसकी अद्भुत हरियाली की छटा और सुरभि अर्थात सुगंध को देखकर ही महान छायावादी कवियित्री महादेवी वर्मा ने लिखा था -
स्वप्न से किसने जगाया मैं सुरभि हूं,
मुग्ध कलियों ने मुझे और में बसाया मैं सुरभि हूं,
छोड़ कोमल फूल का घर खोजती हूं कुंज निर्झर ,
पूछती हूं नव धरा से
क्या नहीं ऋतुराज आया स्वप्न से किसने जगाया।
आई मन भाई हरियाली चहकीं चटकी कलियां,
धरती पर इसकी रंगरलिया ,
नव किसलय में फूटी लाली आई मन भाई हरियाली।
इस वर्ष बसंत पंचमी का पर्व और पूजा पाठविधान
इस वर्ष 23 जनवरी को शुक्रवार के दिन विद्या बुद्धि संगीत की देवी सरस्वती मां का दिवस बसंत पंचमी विक्रम संवत 2082 माघ महीने की पंचमी की तिथि को शुक्ल पक्ष में अर्थात उजाले पाक में मनाया जाएगा पूजा पाठ स्नान दान पुस्तक पाठ का मुहूर्त सुबह 7:13 से दोपहर 12:00 का 33 मिनट पर है जबकि अमित कल का अत्यंत सुंदर योग सुबह 8:45 से सुबह 10:20 तक है इस कालखंड में पठान-पाटन संगीत का अध्ययन या गायन से अद्भुत लाभ होता है इसको अबूझ मुहूर्त कहा जाता है क्योंकि इस दिन कोई भी शुभ और मांगलिक काम बिना पूछे ही किया जा सकता है और स्वाभाविक सी बात है सृष्टि में साहित्य संगीत कला सौंदर्य भरने वाली और सबका कल्याण करने वाली देवी सरस्वती के दिन मुहूर्त बूझने की क्या आवश्यकता है
कैसे करें पूजा पाठ
हर एक पर्व त्यौहार और शुभ कार्यों की बात बसंत पंचमी के दिन भी उठकर नित्य क्रिया से निवृत हो जाए शुद्ध चित्र से गंगाजल मिलाकर स्नान करें थोड़ा सा हल्दी भी डाल ले तो और भी अच्छा होगा पीला या श्वेत वस्त्र धारण करें देवी सरस्वती जी की प्रतिमा या चित्र चौकी पर पीला वस्त्र बेचकर रखें और पूजा के लिए पीले रंग के श्वेत रंग के फूल चंदन और अक्षत तथा श्रृंगार की सभी सामग्री एकत्र कर लें और सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें फिर नौ ग्रहों की पूजा करें यदि ऐसा करना कठिन लगे तो ऊं गं गणपतए नमः मंत्र पढ़े और बुध शुक्र पृथ्वी मंगल बृहस्पति शनि सूर्य चंद्रमा का ध्यान करें ।
इसके बाद श्रृंगार की सामग्री और पीले फूल चंदन अक्षत सफेद फूल श्वेत या पीले वस्त्र पुस्तक और कलम भी अवश्य रखें और देवी सरस्वती जी की पूजा करें निम्नलिखित मंत्र बहुत प्रसिद्ध हैं-
या कुन्देन्दु तुषार हार धवला या शुभ्र वस्त्रावृता
या वीणा वर दण्ड मंडित करा
या श्वेत पद्मासना
या ब्रह्मा च्युत शंकर: प्रभितिविर्देवै सदा वंदिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती नि:शेष जाड्यापहा।
इसके साथ आप शुक्लाम ब्रह्म विचार सार का मंत्र भी पढ़ सकते हैं इसके पश्चात केसरिया रंग के चावल अर्थात भारत एवं लड्डू का भोग लगे सरस्वती जी की आरती करें और सबको प्रसाद बांटे और यह याद रखें कि संसार में सबसे महान वही होता है जो देवी सरस्वती जी की कृपा पता है अर्थात जो शायद संगीत कला विद्या बुद्धि से भरा होता है
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