Saturday, 3 January 2026

जब जी भर कर क्रिसमस और नया अंग्रेजी वर्ष माना लिए तब यह ‌‌ राष्ट्रभक्ति और हिंदी हिंदू हिंदुस्तान राम राज्य जैसी चीज लिखने का क्या अर्थ है जब तक भारत के सनातनी लोग अंग्रेजी से और अंग्रेजी परिधान से अंग्रेजी संस्कृति सभ्यता से और मुस्लिम खान पान से सच्चे मन से अपना मोह और नाता नहीं तोड़ लेंगे तब तक वह आधा मुस्लिम आधा क्रिश्चियन बने रहेंगे बात बहुत कड़वी और बुरी है लेकिन सच है और यही वजह है कि मोदी जैसे नेता और संघ तथा बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद भी सनातन की जगह क्रिश्चियन धर्म और अंग्रेजी सभ्यता का प्रसार प्रचार कर रहे हैं इसीलिए उनके दिए गए नाम भी हिंदी संस्कृत के बजाय अंग्रेजी में होते हैं

जब जी भर कर क्रिसमस और नया अंग्रेजी वर्ष माना लिए तब यह ‌‌ राष्ट्रभक्ति और हिंदी हिंदू हिंदुस्तान राम राज्य जैसी चीज लिखने का क्या अर्थ है जब तक भारत के सनातनी लोग अंग्रेजी से और अंग्रेजी परिधान से अंग्रेजी संस्कृति सभ्यता से और मुस्लिम खान पान से सच्चे मन से अपना मोह और नाता नहीं तोड़ लेंगे तब तक वह आधा मुस्लिम आधा क्रिश्चियन बने रहेंगे बात बहुत कड़वी और बुरी है लेकिन सच है और यही वजह है कि मोदी जैसे नेता और संघ तथा बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद भी सनातन की जगह क्रिश्चियन धर्म और अंग्रेजी सभ्यता का प्रसार प्रचार कर रहे हैं इसीलिए उनके दिए गए नाम भी हिंदी संस्कृत के बजाय अंग्रेजी में होते हैं
 जैसे पड़ेगा तो बढ़ेगा इंडिया खेलेगा इंडिया गुड मॉर्निंग बनारस स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी लोकल फार वोकल ‌ और इसके लिए गुलामी मानसिकता वाला तर्क भी देते हैं की अंग्रेजी भारत के लोग अनेक अच्छा समझ लेते हैं।बाकी तो कुछ कहना बेकार है क्योंकि कुछ कहते ही खुद को काले अंग्रेज समझने वाले विदेशी कृतदासों के हाथ बिके लोग और मैकाले के मानस पुत्र भड़क जाते हैं क्योंकि उनके घर के लोग बच्चे औरतें सब अंग्रेजी संस्कृति सभ्यता और अंग्रेजी भाषा के मानसिक दास हैं और चाह कर भी इस चक्रव्यूह से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं ईश्वर और देवी देवताओं के चित्र और अपने त्यौहार के चित्र छाप कर उसमें गुड मॉर्निंग और गुड इवनिंग जैसे शब्द लिखकर सब चौपट कर देते हैं। 

कभी कहां जाता था-

 निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल ।

 बिन निज भाषा ज्ञान के मिटत  न हिय के सूल। 

और आज क्या हो गया है इसीलिए कहता हूं -

हमको न निज गौरव तथा निज देश  का अभिमान है।
 हम नर नहीं है पशु निरा हैं और मृतक समान 
है ।

आधा तीतर आधा बटेर देसी कुतिया मराठी बोल भारत जैसे तथाकथित सनातनी देश के लिए सच है जहां विकास मुसलमानों विधर्मियों का हो रहा है और सारी सुविधाओं का 50% भाग अकेले यही लोग ले रहे हैं कोई गाजी मियां के दरबार में माथा टेक रहा है तो कोई गद्दार देशद्रोही अजमेर में जाकर चादर भेंट कर रहा है यह तो बहुत बड़े शीर्ष नेताओं की बात कर रहा हूं जो संघ और भाजपा के हैं बाकी की स्थिति क्या होगी भगवान ही जाने ।

कहां गया धनपति कुबेर वह कहां गई उसकी प्रिय  अलका।
 नहीं ठिकाना कालिदास की व्योम वाहिनी गंगा जल का ।

आज स्थिति इतनी खराब हो गई है कि संघ भाजपा बजरंग दल विश्व हिंदू परिषद के बड़े-बड़े नेता बिना अंग्रेजी में भाषण दिया अपने ज्ञान को पूर्ण नहीं मानते हैं इन सबके घरों के बच्चे अंग्रेजी में विदेश में पढ़ रहे हैं जो लोग हिंदी हिंदू हिंदुस्तान के रामराज्य के अखंड भारत के और हिंदी के समर्थक थे या हैं उन सबको भाजपा संघ और अन्य राष्ट्रवादी नेताओं ने किनारे लगा दिया है चाटुकार चापलूस चमचे दलाल मक्खन बज 420 लोगों को चुन चुन कर बड़े-बड़े पुरस्कार और पद दिए जा रहे हैं ‌ और उनसे अपना घर भरा जा रहा है।देश इस स्थिति में पहुंच गया है जहां गांधी ने पाकिस्तान बनाकर हिंदुओं की सामूहिक हत्या करा कर छोड़ा था 90 लाख सनातनी लोगों का कत्लेआम कोई छोटी-मोटी बात नहीं है ।

उस परंपरा को लाल बहादुर शास्त्री जी को छोड़कर भारत के हर प्रधानमंत्री ने कायम रखा और इंदिरा गांधी ने बड़ी चालाक की से एक करोड़ बांग्लादेशी शरणार्थी भारत में बसा लिए और उनसे आज में 12 करोड़ से अधिक हो गए हैं सारे मूल बिंदु खत्म हो गए हैं । और आज 12 करोड़ बांग्लादेशी और 8 करोड़ रोहिंग्या विदेशी मुस्लिम भारत के लिए सबसे बड़ा संकट और खतरा बन गए हैं कभी भी यह गृह युद्ध छेड़ सकते हैं देश में होने वाले दंगे फसाद दुर्घटना और तोड़फोड़ में 90 परीक्षित इन्हीं का हाथ होता है इस पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है और महंगाई बेरोजगारी भ्रष्टाचार गंदगी प्रदूषण ट्रेन बस और हवाई जहाज में जगह ना मिल पाना इन्हीं लोगों के कारण हो रहा है यदि इन 22 करोड लोगों को आज ही हटा दिया जाए तो भारत की 90% समस्याएं अपने आप हल हो जाएंगे और यह छिपे हुए नहीं है हर शहर गली मोहल्ले में झुंड के झुंड कहीं भी मनमाना हजारों लाखों की संख्या में तंबू गडकर अवैध कब्जा करके बस रहे हैं

आज सनातनी लोग और हिंदी के समाचार पत्र भोजन की जगह खाना विवाह की जगह शादी बधाई की जगह मुबारक या ‌ कंग्रॅजुलेशंस धन्यवाद की जगह शुक्रिया शासन की जगह सरकार सभा कक्ष की जगह दरबार वह भी देवी जी और भगवान के लिए उपयोग में लाते हैं । गरीब हवाले दादर से अखबार दिन मजहब जैसे अनगिनत शब्द हिंदी भाषा को बर्बाद कर रहे हैं

बुरा भला तो लगता रहता है लेकिन सच तो सच ही रहता है जो काम भगवान रामकृष्ण गौतम बुद्ध नानक गुरु गोविंद सिंह मांधाता वीर शिवाजी महाराणा प्रताप ने किया उसको भूलकर हम बोलचाल भाषा संस्कृति सभ्यता से पूरे अंग्रेज और खान-पान से पूरे मुस्लिम हो गएहैं ।

भारतेंदु हरिश्चंद्र ने लिखा था -

रोम ग्रीस पुनि निज  बल पायो 
सब विधि भारत दुखी बनायो
अति दुर्बली श्याम जापान
 हाय न भारत तिनहुं समाना । 

किसी देश की उन्नति सरकार शासन प्रधानमंत्री राष्ट्रपति द्वारा नहीं वहां के निवासियों के द्वारा होता है यदि आज ही सनातनी जाग जाए तो मोदी क्या योगी क्या सारे लोग इस तरह पीछे-पीछे चलेंगे जैसे मुसलमान के पीछे सारे नेता दौड़ते हैं गलती हमारी आपकी है ‌ इस बारे में म्यांमार जापान चीन अमेरिका इजराइल रूस के नागरिकों के त्याग बलिदान प्रेरणा और राष्ट्रभक्त से सबक लिया जा सकता है।

चारों ओर चापलूस चालबाज दलाल चमचे मक्खनबाज 420 गली मोहल्ला गांव शहर जिला प्रदेश देश में फैल गए हैं और सरकारी सुविधाओं को प्राप्त कर मालामाल होकर अधिकांश समाचार पत्रों और टीवी चैनलों की तरह शासन प्रशासन का गुणगान कर रहे हैं और स्थिति इतनी खराब है जिसको आप निम्नलिखित पंक्तियों में समझ सकते हैं -

हर दिशा में राक्षसी सेना खाड़ी ब्रह्मास्त्र लेकर कृष्ण गायब है सुदर्शन चक्र लेकर ।
रुद्र भी गायब सभी दिव्यास्त्र लेकर ।
विष्णु गायब हैं परम दिव्यास्त्र लेकर ‌।
देश का बचना कठिन है ।
धर्म बचाना अति कठिन है ।

मैं इतना ही कहूंगा कि जितने शासक और प्रशासक हैं सब विदेश प्रायोजित हैं गांधी की तरह आप हम समझ नहीं पा रहे हैं और जब तक समझेंगे तब तक बहुत देर हो जाएगी इसलिए ‌ समय रहते जाग जाइए देश की रक्षा और भारतीय संस्कृति सभ्यता बचाने के लिए आगे बढ़िये वरना पीर फकीर सांता क्लास देश बर्बाद कर देंगे। तब आने वाली पीढ़ियां तुम्हारे लिए निम्नलिखित कविता पढ़ेंगी -

तुम आज समय के सैलाबों में मत खेलो खुशहाल हवाओं में खिड़कियां बंद करो
 यदि तूने ऐसा किया सबक यह याद रहे 
इतिहास न तुमको माफ करेगा याद रहे 
पीढ़ियां तुम्हारी करनी पर पछताएगी 
पूरब की लाली में कालिक पट जाएगी ।

इससे अधिक क्या कहें हर जगह अंग्रेजी अंग्रेज अंग्रेजिस्थान का प्रचार प्रसार हो रहा है और दिन रात विधर्मी शैतान राक्षस देश में ‌ चंड मुंड रक्तबीज कीतरह बढ़ते चले जा रहे हैं बाकी आप पोस्ट को पढ़कर गालियां दो चाहे शेयर करो या आपकी इच्छा है‌ ।

देश को आगे ले जाने वाली धर्म संस्कृति सभ्यता अपने अखंड त्याग बलिदान से परतंत्रता कल में भी स्थापित करने वाली नारियां सबसे अधिक विदेशी संस्कृति सभ्यता की गुलाम हो चुकी है तो रास्ता कौन दिखाएगा ‌ उनका स्वयं रास्ता नहीं दिखाई दे रहा है तो वहां अपने बच्चों को क्या रास्ता दिखाएंगे।

जब-जब नर हारा है तब नारी ने उसे सुधाराहै 

अब नारी खुद हार गई है कोई नहीं सहारा है ।

यदि  हम सचमुच हम विश्व गुरु होते हमारा नेता शक्तिशाली होता तो क्या पाकिस्तान बांग्लादेश अफगानिस्तान का वीभत्स कांड होता क्या सनातनी समाप्त हो जाते क्या उनके साथ सामूहिक बलात्कार हत्याकांड होता उनके घर जलाए जाते उन्हें सड़क पर खुलेआम मारा जाता  और क्या मालदीप जैसा दो कौड़ी का देश खुलेआम हमको गालियां देता क्या हम म्यांमार और श्रीलंका जैसा काम ही नहीं कर सकते इसराइल चीन रूस और अमेरिका बनना तो असंभव है हमारे राजनेताओं के लिए और देशवासियों के लिए ‌

यदि आपको अब भी नहीं समझ में आया तो मैं पूछ रहा हूं बताओ क्या हुआ - क्या वक्फ बोर्ड मदरसा बोर्ड समाप्त हुआ उल्टे संशोधन करके उसे संविधान सम्मत बनाया गया क्या अंग्रेजी हटी क्या हिंदी देश की आधिकारिक भाषा हुई क्या हर राज्य में एक अन्य राज्य की भाषा पढ़ाई गई क्या हिंदी हिंदू हिंदुस्तान सार्थक हुआ क्या राम राज्य आया क्या महंगाई बेरोजगारी भ्रष्टाचार घूसखोरी लालफीताशाही संवेदनहीनता समाप्त हुई पूरे देश में। क्या कहीं भी सनातनी हिंदू अर्थात जो क्रिश्चियन और मुस्लिम नहीं है सुरक्षित हैं क्या किसी राजनेता ने हिंदू सिख जैन बौद्ध और अन्य सनातन धर्म की शाखों को एकजुट करने का प्रयास किया क्या हमें वीटो पावर मिला क्या हम संयुक्त राष्ट्र संघ के स्थाई सदस्य बने क्या हम 80 वर्ष में और फिर 2014 से आज तक एक भी इंच जमीन पाकिस्तान से ले पाए चीन से तो खैर सपने देखने जैसा है क्या हम समान नागरिक संहिता और जनसंख्या नियंत्रण बिल् ला पाए  जिसके लिए जनता ने आपको ले आया था।

 क्या बलिदान हुए कार्य सेवकों के परिवार को चिन्हित करके उनको सहायता और सरकारी नौकरी दी गई क्या कल्याण सिंह जैसे नेताओं और बलिदान हुए कारसेवकों की राम पथ के दोनों और प्रतिमाएं लगाई गई हर काम के लिए पैसा है सही काम के लिए कोई पैसा नहीं है क्या सड़क रेल और विमान व्यवस्था सही हुई क्या दलाली समाप्त हुई आप सब लोग निष्पक्ष मन से उत्तर दीजिए पहले जो लोग हमारा जमकर प्रतिवाद मोदी और भाजपा के लिए करते  थे आज वह सब ठंडा हो गए हैं क्योंकि मेरी कहानी बातें अब उनकी समझ में आ रही है क्या समाचार पत्र और टेलीविजन चैनल सच लिखने में स्वतंत्र हैं और सच लिखकर जीवित रह सकते हैं क्या सच लिखने वालों को सरकार या जनता कोई मदद सहायता दे रही है क्यों 90% लोग अपराध करके भी सांसद विधायक मंत्री बन रहे हैं  ‌ ऐसा क्या हुआ जो धीरे-धीरे कल्याण सिनेमा भारती साध्वी ऋतंभरा गोविंदाचार्य नंद अर्णव गोस्वामी नूपुर शर्मा कंगना राणावत विजय राजेश सिंधिया जैसे कट्टर देशभक्त सनातनी नेताओं को धीरे-धीरे समाप्त कर दिया गयाकिसी के पास इसका उत्तर है -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

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