Sunday, 4 January 2026

वेनेजुएला और तीसरा विश्व युद्ध -डॉदिलीप कुमार सिंह

: वेनेजुएला और तीसरा विश्व युद्ध -डॉदिलीप कुमार सिंह 

अमेरिका के बड़बोले राष्ट्रपति ‌ डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा वेनेजुएला पर आक्रमण करते वेनेजुएला के राष्ट्रपति माधुरै को उनकी पत्नी के साथ जानवरों की तरह बंधक बनाकर अमेरिका ले जाया गया और उन्हें आज अमेरिकी न्यायालय में प्रस्तुत किया गया जो न केवल अंतरराष्ट्रीय नियम और विधियों का घनघोर उल्लंघन है बल्कि संयुक्त राष्ट्र के चार्टर और अंतर्राष्ट्रीय ‌ न्यायालय का भी घनघोर उल्लंघन है किसी देश के राष्ट्रपति को इस तरह दूसरे देश के न्यायालय में प्रस्तुत करने की दुनिया की पहली बड़ी घटना है इतनी बड़ी घटना पर भारत चीन रूस जापान ‌ ईरान और पोप सहित कुछ देशों ने निंदा किया है लेकिन अमेरिका 1940 से जो भी चाहता है लगातार अपने मन से ‌ करता चला आया है और फिलहाल उसको रोकने का साहस संसार की किसी भी महाशक्ति में नहीं है इस ‌ प्रकार अमेरिका ने एक बार फिर से खुद को ‌ निर्विवाद रूप से दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति सिद्ध कर दिया है ‌ और इतना करने पर भी अमेरिका का मन नहीं भरा तो उन्होंने एक कठपुतली व्यक्ति को राष्ट्रपति बनाकर सीधे-सीधे वेनेजुएला का शासन अपने हाथों में ले लिया है ‌ क्या दुनिया में कोई ऐसी महाशक्ति है जो अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप को इसी तरह हथकड़ी बेड़ी लगाकर अमेरिका से उठा ले और अपने देश के न्यायालय में प्रस्तुत करें मुझे लगता है कि कोई सोच भी नहीं सकता ऐसा करना तो बहुत दूर की बात है।

अब भारत पर आते हैं जो बिना वजह अपने को दुनिया की एक महाशक्ति मानता है लेकिन जो कुछ उसके आसपास पाकिस्तान अफगानिस्तान बांग्लादेश नेपाल भूटान मालदीप श्रीलंका द्वारा किया जा रहा है क्या भारत इस प्रकार के कार्यवाही की कल्पना भी कर सकता है बांग्लादेश में तो खुलेआम सनातनी लोगों को कत्लेआम किया जा रहा है सामूहिक बलात्कार हो रहे हैं दंगा फसाद हो रहा है घर जलाया जा रहा है लूटा जा रहा है लेकिन मोदी जी में हिम्मत नहीं है कि एक शब्द बोल सकें इसीलिए अमेरिका और भारत में जमीन और आसमान का अंतरहै।

 भारत के पास पड़ोसी देश में तख्ता पलट करने या उनको अपने देश में मिलने के अनगिनत कारण है पाकिस्तान को वह केवल आजाद कश्मीर के नाम पर ‌ या खुलेआम ‌ दाऊद इब्राहिम हाफिज सईद जैसेआतंकवादियों के शरणस्थली होने के नाम परआक्रमण करके अपने देश में मिला सकता है अफगानिस्तान ऐतिहासिक रूप से उसका अंग था यही हाल तिब्बत नेपाल भूटान मालदीव के लिए भी कही जा सकती है मालदीप ने जितना अपमानजनक टिप्पणी मोदी और भारत पर किया जहां सेना पुलिस भी नहीं है उसको आराम से भारत अपने में मिलकर अपनी शक्ति दिखा सकता था ।बांग्लादेश को तो भारत में मिलने के लिए न केवल अनगिनत कारण है बल्कि शेख हसीना और उसकी पार्टी भारत के साथ सहमत है यही हाल म्यांमार का है लेकिन कुल मिलाकर वही हाल की जो अपना कब्जा किया भूभाग वापस नहीं ले सकता वह अमेरिका की तरह दादागिरी दिखाकर इतने बड़े दुस्साहस की कल्पना भी नहीं कर सकता है कुल मिलाकर हमें मानना पड़ेगा की न भारत महाशक्ति है और ना उसके नेताओं में अमेरिका रूस इसराइल और चीन के शासको की तरह फौलादी हिम्मत है।

अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर आक्रमण और उसके राष्ट्रपति तथा उनकी पत्नी को जानवरों की तरह बंदी बनाना बहुत सोची समझी रणनीति है और सारे विश्व को भयाक्रांत करने के लिए काफी है। दुनिया में सबसे बड़ा खेल तेल का खेल है और वेनेजुएला दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है और वहां सबसे बड़ा तेल का भंडार है और आज भी दुनिया में तेल से ही दुनिया की सबसे अधिक ऊर्जा की आपूर्ति होती है ‌ युद्ध के समय तेल निर्णायक खेल आधा करता है और जापान केवल तेल की कमी के कारण ही द्वितीय विश्व युद्ध हार गया था अन्यथा अमेरिका के बमबर्शक नागासाकी और हिरोशिमा में परमाणु बम कभी नहीं गिर सकते थे भारत तेल के खेल में ही कमजोर पड़ता है और कोई निर्णायक कदम नहीं उठा सकता।दूसरे सबसे बड़े उत्पादक सऊदी अरब पर अमेरिका का अप्रत्यक्ष रूप से कब्जा पहले से है अगला कदम ईरान हो सकता है कुवैत पहले ही अमेरिका के कब्जे में चल रहा है किस प्रकार किसी भी आपात स्थिति के लिए तेल के खेल में अमेरिका रूस चीन से बहुत आगे है 

कुल मिलाकर दुनिया में चार ऐसे देश हैं जो जब चाहे जो चाहे कर सकते हैं और उनसे टक्कर लेने का साहस किसी के पास नहीं है अमेरिका के अलावा चीन और रूस तथा इसराइल ऐसे देश हैं जिनका जो मन में आता है वही करते हैं उनका ना कुछ संयुक्त राष्ट्र संघ बिगाड़ पाता है ना दुनिया का कोई देश बस लोग निंदा प्रस्ताव करके अपना कलेजा ठंडा कर लेते हैं और इन चारों महा शक्तियों ने दुनिया के सबसे धनी क्षेत्र को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कब्जा करके रखा है चीन ने पड़ोसी देशों की ढेर सारी भूमि भारत सहित कब्जा किया है रूस खुले आम यूक्रेन को अपने देश में मिलने के लिए लड़ रहा है इजरायल ने एक जिले भर को एक प्रदेश भर का राष्ट्र विस्तृत कर लिया है और जब महा शक्तियों की बात आती है तो संयुक्त राष्ट्र संघ केवल एक खिलौना या मूकदर्शक बनकर देखता है। वर्तमान समय में उत्तर कोरिया भी इस क्लब में शामिल हो चुका है।

दिखाने के लिए ‌ इस मामले को संयुक्त राष्ट्र संघ में ले जाया गया है जिस पर बहस होगी मतदान होगा लेकिन कुछ भी होने वाला नहीं है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र संघ महा शक्तियों के स्वार्थ पूर्ति का अड्डा भर है हम सभी जानते हैं की पूरी दुनिया एक तरफ हो जाए और रूस चीन फ्रांस अमेरिका इंग्लैंड में कोई भी देश यदि प्रस्ताव के विपक्ष में मतदान करता है तो वह प्रस्ताव अपने आप गिर जाएगा अब अमेरिका या रूस या चिन्ह अपने ही गलत कार्य के प्रति प्रस्ताव के पक्ष में मतदान क्यों करेंगे यह सोचने वाली बात है कुल मिलाकर यह दुनिया को मूर्ख बनाने की चाल है जो संयुक्त राष्ट्र संघ के जन्म से होती चली आ रही है खाने को तो इजरायल के राष्ट्रपति को भी इंटरपोल और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय द्वारा रेड नोटिस जारी किया गया है लेकिन उसका कोई असर नहीं है ।

जिस तरह रूस ने यूक्रेन पर खुलेआम हमला करके उसकी एक चौथाई जमीन पर कब्जा कर लिया उसकी निंदा करने के स्थान पर अमेरिका और उसके सहयोगी देश यूक्रेन के संसाधनों का भरपूर दोहन कर रहे हैं और अपने कचरा हुए हथियार यूक्रेन को बेचकर परीक्षण के रूप में देख रहे हैं यही हाल चीन के द्वारा पड़ोसी देशों को कब्जे में लेकर है और इजरायल की हालत तो दुनिया देखी रही है 57 मुस्लिम देश इजराइल से थर-थर कांपते हैं ।

बहुत से तथा कथित अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ मानते हैं कि यह तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत है यह विशेषज्ञ 1945 से लगातार तमाम प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और चैनलों द्वारा इस तरह व्यर्थ की वाहियात भविष्यवाणी करते रहते हैं ‌ ऐसी भविष्यवाणी भारत चीन युद्ध के समय रूस और अमेरिका के शीत युद्ध के समय अर्जेंटीना में पार्कलैंड के समय अमेरिका ईरान अमेरिका इराक युद्ध के समय भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय रूस और यूक्रेन युद्ध के समय अरब इजरायल युद्ध के समय की गई थी जो बुरी तरह से सफल हुई एक विशेषज्ञ के तौर पर मैं बिल्कुल स्पष्ट कह रहा हूं कि कहीं कोई भी युद्ध नहीं होना है यह केवल प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के द्वारा पैसा कमाने की चाल है और बड़ी महाशक्तियों के इशारे पर लिखने की मजबूरी भी है ।

वर्तमान समय में कोई भी विश्व युद्ध होना संभव है क्योंकि अमेरिका आज भी विश्व की सबसे बड़ी महाशक्ति है जो सारी दुनिया को नियंत्रित करता है रूस चीन भारत यदि मिलकर भी चाहे तो अमेरिका का सामना नहीं कर सकते हैं क्योंकि यह तीनों देश अंदर ही अंदर एक दूसरे के विरुद्ध भी हैं उधर अमेरिका का साथ दुनिया की एक और बड़ी महाशक्ति इसराइल दे रहा है और यूरोप के देश तो अमेरिका के पिछले लघु है इसलिए रूस चीन अमेरिका इजरायल मिलकर पूरी दुनिया में कब्जा करने का लक्ष्य बनाकर चल रहे हैं और उसमें सफल भी हो रहे हैं अंदर-अंदर यह चारों देश एक हैं और दुनिया को दिखाने के लिए आपस में लड़ रहे हैं इन देशों के मध्य ना कभी कोई युद्ध हुआ है और ना आगे होने की संभावना है‌ चीन ने निश्चित रूप से बहुत अधिक परिश्रम किया है और वह लगभग अमेरिका के बराबर पहुंच गया है और अगले कुछ वर्ष में अमेरिका को पीछे छोड़ देगा लेकिन फिर भी वह अमेरिका से नहीं लड़ सकता क्योंकि उसका साथ देने वाला पीछे कोई शक्तिशाली देश नहीं है जिस पर वह भरोसा कर सके रूस और उत्तरी कोरिया भले उसके समर्थक हैं लेकिन प्रत्यक्ष युद्ध में क्या उसका साथ देंगे यह कह पाना बड़ा मुश्किल है। 

आज दुनिया भर में परमाणु नाभिकीय जैव रासायनिक हथियारों के अलावा एक से बढ़कर एक भीषण मदर बम और जार बम हैं ‌ जिनकी कीमत नागासाकी और हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से हजारों गुना अधिक है ऐसा कहा जाता है कि 1000 बम जो रूस के पास है वह न्यूयॉर्क की तरह पांच महानगरों को कुछ ही सेकंड में भस्म कर सकता है इस प्रकार अगर यह चारों महा शक्तियों भूल से भी एक दूसरे के विरुद्ध लड़ते हैं तो पूरी दुनिया का विनाश हो जाएगा ऐसे में विश्व युद्ध की संभावना पूरी तरह समाप्त हो जाती है। 

सारांश में यह कहा जा सकता है कि यह चारों देश मिली मार और नूरा कुश्ती के तहत अभी लंबे समय तक पूरी दुनिया को नियंत्रित करते रहेंगे अपने हथियार और अन्य सामान बेचकर भारी मात्रा में पैसा कमाते रहेंगे और समृद्ध बने रहेंगे।‌ यह चारों देश बाहर से एक दूसरे से शत्रुता रखते दिखाई देते हैं पर वास्तव में यह लोग इस तरह एक हैं जैसे भारत के हर दलों के राजनेता अंदर खाने से एक ही हैं अभी यह चारों देश बारी-बारी से दुनिया के हर समृद्धि क्षेत्र और देश को लूटते रहेंगे लड़ते रहेंगे और दुनिया केवल देखने के अलावा कुछ नहीं कर पाएगी भारत की स्थिति और औकात अभी इस योग्य नहीं है कि वह इन महान दादाओ की कतार में आकर खड़ा हो सके इसलिए निश्चित रूप से तीसरे विश्व युद्ध की अभी दूर-दूर तक कहीं कोई आशंका नहीं है।

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