Monday, 26 January 2026

गणतंत्र दिवस के श्वेत श्याम बिंदु -डॉ दिलीप कुमार सिंह

 गणतंत्र दिवस के श्वेत श्याम बिंदु -डॉ दिलीप कुमार सिंह 

भारत देश ‌ अपना 77 वा गणतंत्र दिवस मना रहा है इसलिए आज यह देखना बहुत उचित होगा कि हम इन 77 वर्षों में कहां तक पहुंचे हैं क्योंकि एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न देश के लिए जो कुछ होना चाहिए क्या वह सचमुच हमारे देश के पास है और क्या हम वास्तव में अपने सफलता के उचित मार्ग पर चल रहे हैं इस संदर्भ में भारत के समय काल में स्वतंत्र हुए अन्य देशों के उदाहरण को भी देखना पड़ेगा जिसमें मुख्य रूप से इजरायल और चीन भारत के लगभग ही स्वतंत्र हुए थे 

वैसे तो भारत ‌ आर्यावर्त हिंदुस्तान जंबू दीप ‌ और इंडिया जैसे नाम भारत के लिए बहुत अधिक प्रचलित हैं लेकिन भारत का सबसे प्राचीन और प्रचलित नाम भारत भारत खंड या आर्यावर्त ही है जो लाखों करोड़ों वर्ष पुराना है जंबू दीपे भारत खंडे आर्यावर्त इसी की प्रतिध्वनि है। भारत के बारे में सब कुछ स्पष्ट है लेकिन जानबूझकर इसको पीछे ले जाने की चाल पिछले 1000 वर्ष से मुस्लिम अंग्रेज और उनके साथ मिले हुए देशद्रोही सनातन द्रोही गद्दार विदेशी शक्तियों के इशारे पर करते चले आ रहे हैं 

उदाहरण के रूप में ऋग्वेद से लेकर उपनिषद और पुराण रामायणऔर ‌ महाभारत जैसे विश्व काव्य जातक कथाएं कदंबिनी से लेकर रामचरितमानस और कंबन की रामायण से लेकर कामायनी तक भारत के बारे में पूर्ण रूपेण कहा गया है कि यह क्या है और कहां से कहां तक है 

‌ उत्तरम् यत समुद्रस्य हिमाद्रेचैव  दक्षिणम्, तद्भारतवर्ष नामं भारती यत्र संतति।

अर्थात जो हिंद महासागर के उत्तर और हिमालय पर्वतमाला अर्थात ईरान से लेकर म्यांमार के दक्षिण स्थित है वह भारत है और वहां का हर व्यक्ति भारतीय है चाहे वह किसी भी धर्म जाति वर्ण का हो इस प्रकार भारत के मुख्य भूमि में ईरान अफगानिस्तान आधा अरब का भाग पाकिस्तान कजाकिस्तान चीन का दक्षिणी भाग तिब्बत नेपाल भूटान म्यांमार मालदीव्स श्रीलंका संपूर्ण दक्षिण पूर्वी एशिया सिंगापुर मलेशिया इंडोनेशिया और पापुआ न्यू गिनी आते हैं इसमें कोई भी संदेहनहीं है 

इसी प्रकार यह भारत देश कब से इस धरा पर विद्यमान है इसके बारे में भी बहुत साफ सुथरा कह दिया गया है-

जबकि हवाओं ने सीखा था सबसे पहले हहराना जबकि घटाओं ने सीखा था सबसे पहले घहराना ‌ पक्षीगण जब सीख रहे थे सबसे पहले उड़ जाना जब की जलधि सब सीख रहे थे सबसे पहले लहराना उसी अनादि आदि  क्षणसे यह भारतवर्ष हमारा है हिंदुस्तान हमारा है ‌ प्रिया भारतवर्ष हमारा है 

जयशंकर प्रसाद जी लिखते हैं- अरुण यह मधुमेह देश हमारा जहां पहुंच अनजान क्षितिज को मिलने एक सहारा 

इस प्रकार भारत निश्चित रूप से सबसे प्राचीन धरती का देश है पहले अश्वमेध और राजस्व यज्ञ करके जो चक्रवर्ती सम्राट बनते थे वह सात महाद्वीपों और पांचो महासागरों के एक छात्र महा सम्राट माने जाते थे और सारा भूभाग भारत में आता था आज भी उत्तरी दक्षिणी अमेरिका यूरोप ऑस्ट्रेलिया अंटार्कटिका में भारतीय संस्कृति सभ्यता और धर्म के बड़े-बड़े चिन्ह मिलते हैं अब देश में तो इनका बाहुल्य है रूस और कजाकिस्तान तक में भारत के देवी देवता और मंदिर मिलते हैं। प्राचीन काल में इसका मुख्य भूभाग धरती के स्वर्ग ‌ कश्मीर से ‌ जलधि केस्वर्ग कन्याकुमारी ‌ वर्षा और हरियाली के स्वर्ग असम चेहरा पूंजी की पहाड़ियों से लेकर ‌ त्याग बलिदान शुष्कता के स्वर्ग राजस्थान तक फैला हुआ था लेकिन यह समझ लेना आवश्यक है कि उसे समय का कश्मीर आज के कश्मीर से 10 गुना से भी अधिक बड़ा था और जम्मू कश्मीर ईरान से लगा हुआ था असम चेहरा पूंजी उसे समय म्यांमार और थाईलैंड तक फैला हुआ था 


1947 में भारत को स्वतंत्रता छोटे से देश ब्रिटेन द्वारा हस्तांतरित की गई बहुत से लोग सोचते हैं कि भारत 1000 वर्षों से परतंत्र रहा लेकिन यह बिल्कुल झूठ बात है अकबर और औरंगजेब के राज्य में भी देश का केवल एक तिहाई भूभाग उनके हिस्से में था बाकी सब जगह भारत के राजपूत क्षत्रिय राज करते थे यही हाल अंग्रेजों के समय में और यही हाल मुसलमान के प्रारंभिक आक्रमण तक था और देश की आजादी तक पाकिस्तान अफ़गानिस्तान म्यांमार श्रीलंका और नेपाल भूटान तिब्बत भारत के ही अंग थे और यह सब 1948 के बाद भारत से अलग हुए हैं तिब्बत तो 1954 55 में भारत की वजह से चीन ने कब्जा कर लिया 

भारत स्वतंत्र होने के बाद धीरे-धीरे प्रगति करते हुए आज पांचवीं सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति चौथी सबसे बड़ी सैन्य शक्ति और दूसरी सबसे बड़ी खाद्यान्न उत्पादन शक्ति बन गया है विज्ञान टेक्नोलॉजी में या पांचवी परमाणु टेक्नोलॉजी में दुनिया की तीसरी और खेल के रूप में यह दुनिया की 50वीं शक्ति बना है आज अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में इसरो का नाम नासा और यूरोपीय तथा चीन के अंतरिक्ष केंद्रौ के साथ-साथ सम्मानित है ‌ और बिना उचित सरकारी सहायता के भी यह उनसे काम नहीं है जनसंख्या में भारत विश्व का सबसे बड़ा क्षेत्र है उद्योग धंधों में दुनिया का दसवां बड़ा राष्ट्र बन चुका है और सकल घरेलू उत्पाद में भारत का स्थान चौथा हो चुका है भारत के चंद्रायन मंगलयान सफलतापूर्वक चंद्रमा और मंगल पर जा चुके हैं और अंतरिक्ष केंद्र तथा गगनयान की तैयारी तेजी से चल रही है फलों फसलों और सब्जियों में तथा दुग्ध उत्पादन में भारत दुनिया के सबसे बड़े देशों में से एक है यह भारत का उज्जवल पक्ष दिखता है 

लेकिन प्रति व्यक्ति आमदनी में सुशासन में भारत बहुत पीछे है यहां की वायु गुणवत्ता सूचकांक और जहरीली हवा इस दुनिया के सबसे खराब देश में सम्मिलित करती है गंदगी में तो शायद भारत दुनिया के देशों में सर्वोच्च स्थान पर है और बेतहाशा बढ़ रही जनसंख्या करोड़ विदेशी घुसपैठ है आधे अधूरे भारत के लिए बहुत गंभीर समस्या बन चुके हैं देश का आधा संसाधन और खाद्यान्न फल और सब्जियां यही लोग खा जाते हैं और सरकारी मशीनरी का सबसे अधिक दुरूपयोग यही तंत्र करता है सबसे अधिक बिजली चोरी भारत में होती हैं और सबसे अधिक सरकारी तंत्र कामचोर भारत में ही है भारत का प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विश्व के शीर्ष मीडिया में शामिल नहीं है कोई भी पत्रकार विश्व के चुनिंदा सो पत्रकारों में सम्मिलित नहीं है और यहां के मीडिया को बहुत दबाव में काम करना होता है महंगाई बेरोजगारी भ्रष्टाचार लाल फीता शाही एवं संवेदनहीनता चरम पर है और विश्व में सबसे अधिक गैर जिम्मेदार भारत का शासन प्रशासन और पुलिस व्यवस्था मानी जाती है इस बात में कोई संदेह नहीं है यहां पर प्रतिभा और योग्यता के बजाय चापलूसी चाटुकाररीमक्खन बाजी दलाली चमचागिरी अधिक प्रभावी है जिससे हमारी सर्वोच्च प्रतिभाएं विदेश में भाग जा रही हैं यह भारत के लिए बहुत बड़ा काला अध्याय है।

यदि देखा जाए तो भारत में किसी चीज की कमी नहीं है लेकिन हर चीज का वितरण बहुत ही असमान है ‌ देश की पांच प्रतिशत जनसंख्या जिसमें उच्च कोटि के अधिकारी सांसद विधायक मंत्री बड़े-बड़े राजनेता धन कुबेरमाफिया और उनके दलाल शामिल हैं यह 95 प्रतिशत संसाधनों का उपयोग करते हैं जिसमें हवाई यात्रा से लेकर प्रथम श्रेणी की रेल यात्रा और सबसे अच्छी गाड़ियां शामिल है जबकि 95 प्रतिशत जनता को पांच प्रतिशत संसाधनों पर गुजारा करना होता है उसमें भी 22 करोड़ विदेशी लोगों और घुसपैठियों का भार ढोना पड़ता है और यही भारत की प्रगति की सबसे बड़ी बाधा है ‌ देश का युवा वर्ग बहुत बड़ी संख्या में बेरोजगार है 100 देश से अधिक जनसंख्या हमारे देश में बेरोजगारों की है सरकारी वर्ग का वेतन भत्ते आसमान छू रहा है जबकि निजी क्षेत्र में काम करने वाली 95% जनसंख्या आज भी 5000 से ₹20000 के बीच में गुजर बसर कर रही है ऐसे में देश की प्रगति संभव नहीं है। 

वैसे तो भारत में सच लिखना किसी अपराध से काम नहीं है और कड़वा सच तो बहुत खतरे का काम है लेकिन सच्चाई यही है कि इस देश में संविधान और कानून से अधिक पुलिस और माफिया राज समानांतर रूप से चल रहा है आतंकवादी कहीं भी खुलेआम हमला कर रहे हैं और नक्सली समस्या अभी भी समाप्त नहीं हुई है जम्मू कश्मीर में लाखों लोग आज भी फिर से वापस जाने की प्रतीक्षा में है भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश पाकिस्तान अफ़गानिस्तान कमजोर होते हुए भी भारत के लिए बहुत बड़ा खतरा है और यहां सनातनी जनता पशुओं से भी बुरी दशा में जीवन बिता रहे हैं यह किसी सक्षम और शक्तिशाली देश के लिए काला धब्बा है 

संविधान की प्रस्तावना संविधान की कुंजी और आत्मा मानी जाती है जिसमें संशोधन संभव नहीं है लेकिन उसमें भी जबरदस्ती संशोधन करके समाजवादी धर्मनिरपेक्ष जैसे शब्द जोड़ दिए गए हैं जो आज भारत की प्रगति में हर जगह बाधक बन रहे हैं यहां सत्ता पक्ष और विपक्ष के राजनेता देश और जनता के लिए नहीं अपने स्वार्थ और कुर्सी के प्रति समर्पित हैं यह देश के विकास की सबसे बड़ी बाधा है निजी क्षेत्र आगे बढ़ रहे हैं वहीं हर सरकारी विभाग घाटे में जा रहा है आज भी 99% भारतीय लोगों के लिए हवाई यात्रा करना या रेल के प्रथम श्रेणी के डिब्बे में यात्रा करना एक सपना जैसा है तभी तो आज तो भी हवाई जहाज आसमान में आने पर लोग उसे देखने दौड़ पड़ते हैं भीषण जनसंख्या के दबाव और संसाधनों के लगातार कमी से भारत की प्रगति पर विराम सा लग रहा है 

देश के लाखों वर्ग किलोमीटर भूभाग पर पाकिस्तान और चीन ने जबरदस्ती कब्जा जमा लिया है और जिस बांग्लादेश को भारत ने स्वतंत्र कराया वहीं आज भारत के लिए बहुत बड़ा खतरा है देश का नियम कानून संविधान आज विधार्मिक बाहुल्य क्षेत्र में लगभग समाप्त हो चुका है‌ ‌ यदि इन सब पर बहुत गंभीरता से गणतंत्र दिवस के अवसर पर विचार नहीं किया गया तो देश का कल्याण होने वाला नहीं है इस देश का ना अपना खुद का राष्ट्रगान है ना अपनी राष्ट्रभाषा है और ना अपने देश की संस्कृति सभ्यता है सब कुछ अंग्रेजी मॉडल पर चल रहा है शिक्षा पूरे देश में अनेक रूप में चल रही है और यह सबसे बड़ा खतरा है कम से कम 10 से 12 पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं जिसमें हिंदी और अंग्रेजी सरकारी और गैर सरकारी उत्तर प्रदेश बोर्ड से तमाम प्रदेशों के बोर्ड सहित आईएससी सीबीएसई मदरसा बोर्ड संस्कृत बोर्ड शिशु भारती बोर्ड जैसे अनगिनत शिक्षा व्यवस्थाएं देश की एकता को चिन्ह भिन्न करके देश को भाषा प्रांत और धर्म के आधार पर अलग करती चली जा रही हैं सौभाग्य से भारत के कुछ प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जागरुक है जो इन सब पर खुलकर लिख रहे हैं 

देश की न्याय व्यवस्था वहां की सबसे बड़ी रीढ़ होती है लेकिन यह भारत की सबसे बड़ी कमजोर कड़ी सिद्ध हुई है देश में 5 करोड़ से अधिक मुकदमे लंबित हैं और बाबा के द्वारा प्रस्तुत किए गए मुकदमे पोते के समय में निर्धारित किए जाते हैं ‌ उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश योग्यता के बजाय बड़े-बड़े राजनीतिक घरानों और न्यायाधीशों के घरानों से नियुक्त होते हैं इसलिए इसका स्तर बहुत ही खराब है ‌ प्रतियोगी परीक्षाओं भारतीयों और सरकारी तथा निजी भर्ती में पारदर्शिता और निष्पक्षता का अभाव है इससे अधिक कुछ कहना उचित नहीं होगा। 

संक्षेप में इस गणतंत्र दिवस पर इतना ही कहना है कि देश प्रगति कर रहा है शक्तिशाली बन रहा है और आगे भी बढ़ रहा है लेकिन बिना किसी लक्ष्य के आगे चल रहा है और जब लक्ष्य नहीं है तो संपूर्ण प्रगति होना भी संभव है अंग्रेजों के समय में और उसके पहले भी भारत पूरी दुनिया की एक तिहाई अर्थव्यवस्था उत्पादित करती थी लगभग आज यह स्थिति अमेरिका ने प्राप्त कर लिया है यह भी ध्यान देना आवश्यक है कि भारत अमेरिका और चीन से बहुत पीछे है क्योंकि भारत का सकल घरेलू उत्पाद चीन से पांच गुना और अमेरिका से 8 गुना पीछे हैं और दुर्भाग्य से हमारे यहां के लोग भारत की तुलना हमेशा पाकिस्तान से करते हैं जिसे दुनिया के मानचित्र में कहीं अस्तित्व नहीं है और यह देश को भुलाने और भटकाने का सर्वोत्तम रास्ता है ‌ एकमात्र लाल बहादुर शास्त्री जी को छोड़ दिया जाए तो दूर-दूर तक ऐसा कोई राजनेता नहीं दिखाई देता जो देश के लिए अपने प्राणों का अर्पण कर सके सबसे बड़ा खतरा तो या हो गया है कि भविष्य में भारत में जो कुछ भी होगा उसका देश के अंदर ही विरोध शुरू हो जाएगा इस बारे में देशवासियों को गंभीरता से विचार करना होगा उदाहरण के लिए यदि सरकार या एक वर्ग सरस्वती पूजा करेगा तो दूसरा उसे अपने धर्म के विरुद्ध का कर इसका विरोध करेगा और प्रगति का पहिया यहीं पर आकर थम जाएगा
[1/25, 11:26 AM] Dr  Dileep Kumar singh: गणतंत्र दिवस पर प्रकाशित करने के लिए एक मौलिक लेख

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