Wednesday, 8 June 2022

*2 दिन में 3 बड़े लोग जेल से बाहर, रिटायरमेंट से पहले के फैसले।जस्टिस नागेश्वर राव पर शंका क्यों न होगी -सिबल, आज़म, के साथ राव की क्या कुछ डील थी -ये खुलासा जरूरी है भारतीय नागरिको की ये जोरदार मांग करनी चाहिए।

*2 दिन में 3 बड़े लोग जेल से बाहर, रिटायरमेंट से पहले के फैसले।जस्टिस नागेश्वर राव पर शंका क्यों न होगी -सिबल, आज़म, के साथ राव की क्या कुछ डील थी -ये खुलासा जरूरी है भारतीय नागरिको की ये जोरदार मांग करनी चाहिए।*
*जस्टिस एल नागेश्वर राव की पीठ ने जिसमे जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस बी आर गवई सदस्य थे, 2 दिन में 3 बड़े लोगों को जेल से बाहर करने के फैसले कर दिए।*
*इन तीन फैसलों पर तो कोई भी शंका कर सकता है।*
*सुप्रीम कोर्ट की छुट्टियां 23 मई से शुरू होनी थी और जस्टिस नागेश्वर राव का रिटायरमेंट 7 जून 2022 को होना है। 21, 22 मई कोर्ट में शनिवार रविवार का अवकाश था। रिटायरमेंट से पहले जस्टिस राव के वो आखिरी 2 -3 दिन थे और इसलिए 3 अपराधियों को छोड़ने की उन्हें जल्दी थी वरना तो अधिकांश मुक़दमे सुप्रीम कोर्ट में छुट्टियों के बाद के लिए स्थगित कर दिए गए थे।*
*राजीव के हत्यारों को छोड़ने के लिए तो संविधान के अनुच्छेद 142 में दी शक्तियां उपयोग करके राज्यपालऔर राष्ट्रपति के अधिकारों को भी धत्ता बता कर आदेश कर दिए जो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री द्वारा A G Perarivalan का किया स्वागत शंका पैदा करता है ये आदेश 18 मई को हुए।*
*उसी दिन इन्द्राणी मुख़र्जी को भी नागेश्वर राव की इसी बेंच ने बेल दे दी जबकि वो दिसंबर, 2021 से लंबित थी जिसे नवम्बर में हाई कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया था -क्या इसे भी रिटायरमेंट से पहले निपटाना जरूरी था। जबकि ट्रायल जज छुट्टी बिता कर वापस आ गया था।*
*कपिल सिबल कांग्रेस से इस्तीफा देता है 16 मई को जब वो आज़मखान की जमानत के लिए लड़ रहा था।जस्टिस नागेश्वर की यही बेंच आज़म जिस पर 86 मुक़दमे चल रहे थे, उस अपराधी को बेल देने के लिए 19 मई को फिर से 142 का उपयोग करती है और उसे दे देती है जैसे वो निर्दोष हो।*
*आज़म खान के लिए आदेश भी ऐसा देते हैं कि कोई भी जज उसे नियमित जमानत दिए बिना रह नहीं सकता ।आज़म खान की इस बेल में सबसे बड़ा गोलमाल दिखाई देता है कि कपिल सिबल को 25 मई को आज़म खान की पार्टी सपा राज्यसभा भेजने के लिए समर्थन दे देती है। इसे देख कर लगता है सिबल आज़म और नागेश्वर राव के बीच कुछ डील हुई थी जिसमे पैसे का लेन देन होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता।*
*जजों को पता है, उनकी हरकतों की जांच तो हो नहीं सकती।*
*मेरे जैसे समान्य व्यक्ति का मानना  है रिटायरमेंट से पहले ऐसे प्रमुख केस जजों को नहीं देने चाहियें पर लगता है जानबूझकर दिए जाते है क्योंकि ये कमाई का अच्छा साधन होते हैं*

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