Saturday, 6 August 2022

यह कलयुग है और कभी भी कोई भी काम अपने मन से कर सकते हैं इस लेख को गहराई से पढ़ें वरना समझ में नहीं आएगा 11 अगस्त को भी आप रक्षाबंधन मना कर राखी बांध सकते हैं क्योंकि जब आप धर्म का अध्यात्म का काम करते हुए पूजा-पाठ व्रत-त्योहार करते हुए दुराचार कर सकते हैं झूठ बोल सकते हैं अधर्म कर सकते हैं तो 11 अगस्त या 12 अगस्त में कभी भी रक्षाबंधन मना सकते हैं वैसे भी अगस्त भारतीय वर्ष या महीना नहीं है

कभी भी मनाया जा सकता है रक्षाबंधन अर्थात राखी कहां महापर्व चाहे 111 को मना लो चाहे 12 अगस्त को बना लो धूर्त और ठग तथा ढोंगी लोग इस पोस्ट को पढ़कर पागल हो जाएंगे क्योंकि उनका सारा झूठ सामने आ जाएगा जब भी देशवासियों की इच्छा हो विदेशी वस्त्रों में सज धज कर जैसे अंग्रेजी तिथि के अनुसार केक काटकर सिर पर जो कर जैसी टोपी लगाकर जन्मदिन मनाते हैं वैसे हाय हेलो मम्मी डैडी पापा सिस्टर ब्रदर करते हुए शेकहैंड करते हुए कोर्ट बूट शूज टाइप पहनकर पुरुष और स्त्रियां दोनों शानदार जानदार दमदार ढंग से रक्षाबंधन मनाने और शाम को जमकर मांस मदिरा का सेवन करते हुए नियम कानूनों की धज्जियां उड़ा दें और आने वाले दिनों में तमाम सावन के व्रत करवा चौथ गणेश चौथ मंगलवार का व्रत जमकर भारत के स्त्री पुरुष करें साक्षात देवी देवताओं और ईश्वर का दर्शन हो जाएगा डॉ दिलीप कुमार सिंह

*इस समय दुकान से राखी खरीद कर यह पूछा जा रहा है कि रक्षाबंधन कब मनाया जाएगा साल भर में एक राखी तो अपने हाथ से बहने बना नहीं सकते और भाई से आशा करते हैं कि वह उनके लिए अपनी जान दे देगा मेरा यह कहना है कि जब जिसके मन में आए तभी रक्षाबंधन मना ले क्योंकि धर्म-कर्म और कर्तव्य निभाते हुए पाप कर्म करने से अच्छा है की अपनी इच्छा अनुसार शुद्ध मन से कोई काम कभी भी कर लो मेरा यह निश्चित मत है कि आप जैसे मन में आए हुए से व्रत त्यौहार मना लो पूजा पाठ कर लो व्रत के साथ हवन भी जैसे मन में आए कर लो और इतना ही नहीं विवाह जैसे पवित्र कर्म भी अपने हिसाब से कर लो और जब विवाह वास्तविक रूप से हो तब वहां मंत्र पढ़ने सुनने समझने के लिए 4 लोगों से अधिक कोई ना हो यह कलयुग है भाई यहां पर हंस और कछुए वाली बात हर जगह सही हो रही है इसलिए जब आपकी जो इच्छा आए वही करो वही नियम कानून है*

यह कलयुग है और कभी भी कोई भी काम अपने मन से कर सकते हैं इस लेख को गहराई से पढ़ें वरना समझ में नहीं आएगा 11 अगस्त को भी आप रक्षाबंधन मना कर राखी बांध सकते हैं क्योंकि जब आप धर्म का अध्यात्म का काम करते हुए पूजा-पाठ व्रत-त्योहार करते हुए दुराचार कर सकते हैं झूठ बोल सकते हैं अधर्म कर सकते हैं तो 11 अगस्त या 12 अगस्त में कभी भी रक्षाबंधन मना सकते हैं वैसे भी अगस्त भारतीय वर्ष या महीना नहीं है
*जब देश में मंदिर सुने सुने हैं और मधुशाला भरी है लाज शर्म छोड़कर माताएं बहने पत्नियां सार्वजनिक समाज में अर्धनग्न और नग्न होकर नाच रही हैं तो आप कोई भी चीज कभी भी कर सकते हैं कोई भी व्रत त्योहार कभी भी मना सकते हैं*

*जब पुत्र वधू पुत्री और बहन जैसे पवित्रतम संबंध दुराचार की भेंट चढ़ रहे हैं तो फिर किसी नियम कानून और धर्म ग्रंथों की आवश्यकता ही क्या है जब लज्जा और बड़े छोटे की भावना समाप्त हो गई जब नियम कानून जनता के अनुसार ना बनकर धनकुबेर और राजनेताओं अधिकारियों के अनुसार बन गया तो कोई भी व्रत पर्व त्योहार कभी भी मनाया जा सकता है*

*धर्म-कर्म के आचार्य पंडित और बुद्धिजीवी जब विवाह वैदिक धर्म सेना करके सूट बूट टाई पहन कर बेहद गंदे ढंग से नाचते हुए राजाओं की तरह सिंहासन पर बैठ कर हो सकते हैं तो रक्षाबंधन या कोई भी पर्व त्यौहार कभी भी और कहीं भी अपने मन से मनाया जा सकता है*

*संचार संचार क्रांति के इस युग में जब सारा घर मोबाइल लेकर अपने में व्यस्त है और दूसरे की हाल लेने में भी किसी को कोई रुचि नहीं है और 2 से 5 घंटे फालतू समय बिता रहा है तो उसके लिए शुभ मुहूर्त की अच्छे दिन की क्या आवश्यकता है वैसे भी ज्यादातर लोग अब इंटरनेट के सहारे पोस्ट लिखते हैं और उसी के अनुसार शुभ मुहूर्तनिकालते हैं पूछी पत्र बनाते हैं और स्त्रियां पति से की जगह सारी दुनिया की सेवक करने का थीका लेकर बैठी हैं पति-पत्नी की आंखों में धूल झोंक कर रखैल रखे हुए हैं* 

*तो इन सब ढकोसलोंकीक्याआवश्यकता है
जब बेटा बाप से पत्नी पति से और छोटे बड़ों से जुबान लड़ा रहे हैं और सभ्यता आशीष सदा की सारी सीमाएं पार कर चुके हैं जब छोटे-छोटे बच्चे ब्लू फिल्म और नंगी साइट देख रहे हैं नैतिकता चरित्र नाम की कोई चीज नहीं है तो फिर धर्म ग्रंथों की दुहाई क्यों दी जाती है
जब चारों और काले मन और काले धन का बोलबाला है जिसके हाथ में लाठी है उसकी भैंस है परसों के आगे पुलिस प्रशासन न्यायपालिका के 90% से अधिक लोग बिके हुए हैं तो उसमें इन सब चीजों की क्या आवश्यकता है*

जब आजाद देश में भी कोई राष्ट्रीय वेशभूषा नहीं है अपनी राष्ट्रभाषा नहीं है सब कुछ विदेशी और अंग्रेजी ढंग से चल रहा है सारे संस्कृत सभ्यता ही विदेशी हो गई है और सावन महीने की जगह हिंदी महीनों का त्यौहार अगस्त सितंबर अक्टूबर जैसे अंग्रेजी तारीखों से निश्चित हो रहा है देश की आन देश की स्वतंत्रता तक का निर्धारण 2 अक्टूबर 15 अगस्त 26 जनवरी जैसे अंग्रेजी तिथियों से होता है तो फिर यह नौटंकी करने की क्या आवश्यकता है

जब असली ईश्वर भक्तों को असली धर्म और कर्मकांड लोगों का असली प्रतिभाओं का चरित्रवान और गुणवान लोगों का छल कपट धोखे से नौकरी पाए अधिकारियों और सांसद विधायक मंत्री बने नेताओं के आगे कोई सम्मान ही नहीं तो उस देश में किसी नियम कानून की क्या आवश्यकता है

जब आप अपने घर में बने शुद्ध भोजन और भारतीय परंपरा के अनुसार आराम से पालथी मारकर या आसन लगाकर नहीं खा सकते खड़े-खड़े खा रहे हैं और खड़े खड़े पानी पी रहे हैं खड़े-खड़े भोजन बना रहे हैं और शुद्ध दाल चावल रोटी सब्जी सलाद दूध दही की जगह पिज्जा बर्गर कुरकुरे धकाधक चटपटे मैगी चाऊमीन जैसे बेहद गंदे मसालेदार और नकली तेल से बने भोजन और मिठाइयां तथा नकली दूध दही छेना खोवा पनीर मक्खन भी खा रहे हैं उस देश में धर्म कर्म के लिए नियम मरने की क्या जरूरत है

जब धन और पैसों के लिए आदमी औरतें भी करेंगे मान सम्मान दांव पर लगा दे रहे हैं लज्जा सील रह नहीं गए हैं और अपने देवी-देवताओं की जगह लोग गरासिया मकाबरे और कब रोता था मस्जिदों में जा रहे हैं बड़े-बड़े लोग उन्हीं के बर्तनों में उन्हीं के घर चाट रहे हैं तो फिर बार-बार व्रत त्यौहार के लिए तारीख में पूछने की क्या आवश्यकता है कलयुग है ही मार्ग सोए जाकर जो भावा पंडित सोई जो गाल बजाओ

इसलिए मेरा कहना है कि जिसका जो मन है वही करो कोई नियम कानून चलने वाला नहीं है इस कलयुग में सब लोग एक दूसरे की आंख में धूल झोंक को एक दूसरे से धोखाधड़ी चोरी छल कपट करो और जल्दी ही विनाश के कगार पर पहुंच कर समाप्त हो जाओ अगर हम धर्म कर्म के अनुसार रहे होते अपने धर्म की रक्षा किया होता तो आज भारत में सनातन धर्म क्यों समाप्ति के कगार पर होता क्यों आपने वृहत्तर भारत के ईरान अफगानिस्तान अरब देशों पाकिस्तान बांग्लादेश नेपाल भूटान मालदीव वर्मा लाओस कंबोडिया सिंगापुर ताइवान वियतनाम इंडोनेशिया मलेशिया श्रीलंका जैसे देशों को खोकर खुद भी विनाश के कगार पर पहुंच जाते

इसलिए मेरा कहना है कि फालतू की बकवास तर्क वितर्क मत कीजिए आपको अपने धर्म कर्म संस्कृति सभ्यता नियम कानूनों के प्रति जरा भी प्रेम और लगाओ नहीं रह गया है रहन-सहन बोलचाल वेशभूषा नौकरी के ढंग सब कुछ से हम पूरी तरह विदेशी हो गए हैं एक कहावत है सिर पर लाल टोपी रूसी फिर भी हम हैं हिंदुस्तानी मेरा जूता है जापानी यह पतलून इंग्लिष्टानी

इसलिए अगर आप सबके अंदर जगह भी लज्जा शर्मा भारतीय भावना स्वदेश प्रेम और सनातन धर्म के प्रति सच्चा प्रेम हो तो इस पोस्ट को ध्यान से पढ़ें और सोचे हम कौन थे क्या हो गए हैं और क्या होंगे अभी क्या हमारे पतन की गिरने की कोई सीमा भी हैं क्या लज्जा और शर्म नाम की कोई चीज है भारत के अंदर यह सब बातें सोच कर धर्म ग्रंथों और विधि विधान के अनुसार 

*12 अगस्त को सुबह 5:00 बजे से 8:00 बजे के अंदर रक्षाबंधन मना ले वरना तो कलयुग है जो करें सब अच्छा ही है पोस्ट पढ़कर क्रोध से लाल पीले मत होना दांत मत किटकिटाना अपना सिर दीवाल पर मत दे मारना गुस्से में वर्णन सिर फट जाएगा कुछ मिलेगा भी नहीं झूठ मुठ के स्वदेश प्रेमी होने और सनातनी होने का नौटंकी छोड़ दो अगर ऐसा ही होता तो हमारे धर्म गुरु आचार्य संत महंत सांसद विधायक और मंत्री बड़े-बड़े धनकुबेर और बुद्धिजीवी दुराचार में काले धन में और गलत आचरण में पकड़ कर जेल नहीं जाते वैसे ही सरकार ने सातवें वेतन आयोग से इतना दे दिया है कि दोनों हाथ से धन लूट आओ तब भी नहीं समाप्त होगा इसके बाद भी दिन रात लूटपाट पर जुटे हैं ऊपर से चल रहे हैं धर्म कर्म के अनुसार रक्षाबंधन मनाने धिक्कार है लज्जा शर्म से विहीन लोगों*

कब मनाया जायेगा परम् पवित्र रखी का महापर्व
शास्त्रीय नियम के अनुसार रक्षाबंधन 12 अगस्त को ही मनाया जाएगा. यहीं धर्म ग्रंथों का आदेश है 
धर्म सिंधु के अनुसार अपराह्न या प्रदोष व्यापिनी श्रावण शुक्ल रक्षाबंधन बधाई जाए ।
ऐसा निर्देश है किंतु  शास्त्रीय विधान यह हैं कि उस समय भद्रा नही होनी चाहिए। इसलिए 
उपरोक्त विवरण के अनुसार यह योग 11 अगस्त को बनता है क्योंकि 11 अगस्त को प्रातः 09:38 से पूर्णिमा आ जाएगी। लेकिन उसी समय अर्थात प्रात: 09:38 बजे से रात्रि 8:25 बजे तक भद्रा रहेगी।
यथा-
*पूर्णिमायां भद्रारहितायां त्रिमुहुर्ताधिकोदय व्यापिन्यामपराह्ने प्रदोषे वा कार्यम्।*
जैसा धर्मसिंधु में उल्लेख  है कि
*भद्रायां द्वे न कर्तव्यम् श्रावणी फाल्गुनी वा। श्रावणी नृपतिं हन्ति,ग्रामों दहति फाल्गुनी।*
अर्थात भद्रा काल में दो त्यौहार नहीं मनाने चाहिए ।श्रावणी अर्थात रक्षाबंधन ।फाल्गुनी अर्थात होली।
भद्रा काल में रक्षाबंधन मनेगा तो हानिकारक है।(इदम् भद्रायां न कार्यम्।)
शुभ और कल्याण की इच्छा रखने वाली बहन, बेटियों माताओं को अपने भाइयों की कलाई में भद्राकाल में राखी नहीं बांधनी चाहिए।
लौकिक व्यवहार में रक्षा विधान हमेशा प्रात: समय अथवा दोपहर में होता है इसीलिए इस दिन में उदया तिथि ली जाती है।
12 अगस्त को प्रातः 7:16 बजे तक पूर्णिमा है उसके पश्चात प्रतिपदा आएगी।
उस दिन सूर्य  5:30 उदय  होंगे। पूर्णिमा मात्र 01 घंटा 45 मिनट रहेगी। 12 अगस्त 2022 दिन शुक्रवार में सूर्य उदय के बाद 3 घटी से भी अधिक है । संकल्पादिता तिथि धर्म कृत्योपयोगी  रक्षाबंधन के लिए श्रेष्ठ मानी जाएगी।
कुछ विद्वान 11 अगस्त को रक्षाबंधन का बनाने का निर्णय कर सकते हैं जो शास्त्र के विपरीत है क्योंकि जिस समय पूर्णिमा आएगी उसी समय भद्रा आरंभ हो जाएगी और भद्रा में रक्षाबंधन करना शुभ नहीं होता है।

12 अगस्त 2022 दिन शुक्रवार के दिन धनिष्ठा नक्षत्र रात्रि 03:45 बजे तक रहेगा । जिससे इस दिन धाता और सौभाग्य योग बन रहा है ।जो बहन भाइयों के प्रेम को बढ़ाने वाला और उत्साहवर्धक होता है।

**12 अगस्त को राखी बांधने का शुभ मुहूर्त-**
प्रातः काल 05:30 से 8:09 तक सिंह लग्न रहेगा जो रक्षाबंधन के लिए सर्वोत्तम समय रहेगा ।

रक्षाबंधन का मंत्र:
 *येन बद्धो बलि राजा दानवेंद्रो महाबल:।*
 *तेनत्वां प्रति बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।*


*उपरोक्त शुभ मुहूर्त में बहनें अपने भाइयों की कलाइयों में राखी बांधकर उनके  उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और समृद्धि की कामना करें तो निश्चित ही उनको आपका आशीर्वाद प्राप्त होगा। डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी बाल गोपाल शिवानी ज्योतिष मौसम और विज्ञान अनुसंधान केंद्र*

[8/7, 10:04 AM] Dileep Singh Rajput Jounpur: *इस वर्ष के रक्षाबंधन सभी विद्वानों और ज्योतिषी लोगों तथा पंचांग करो को दुविधा में डाल दिया है*
*जिसका कारण है कि 11 अगस्त को श्रावण माह के चतुर्दशी है अर्थात सूर्य के उदय होने पर उदया तिथि में पूर्णिमा नहीं है पूर्णिमा का प्रारंभ सुबह 9:35 पर और भारत के उत्तरी भागों में 9:40 पर हो रहा है जिस का समापन अगले दिन 8:00 बजे सुबह के लगभग हो रहा है*

*और सबसे बड़ी बात यह है की पूर्णिमा तिथि और भद्र तिथि एक साथ ही 11 अगस्त को 9:35 पर लग रही है अब कुछ विद्वान यह कह कर 11 को रक्षाबंधन का पर्व उचित मान रहे हैं कि भद्रा अंतरिक्ष में और पृथ्वी पर ना होकर पाताल लोक में है उन मूर्खों को यह मालूम नहीं है कि पाताल भी धरती का ही अंश है और सबसे बड़ी बात है कि भद्रा 11 तारीख को रात 8:25 है तब तक सूर्य अस्त हो जाएगा इस समय सूर्य लगभग 6:25 पर अस्त हो रहा है*

*ऐसे में अगर आप महापर्व रक्षाबंधन और श्रावण मास के अन्य क्रिया कर्म करते हैं तो रात 8:25 के बाद ही करना होगा और अगर 12 अगस्त को रक्षाबंधन और श्रावणी क्रिया कर्म करेंगे तो 8:00 बजे के पहले ही करना होगा क्योंकि उसके बाद प्रथम अतिथि लग जा रही हैं*

*ज्योतिष ग्रंथों और निर्णय सिंधु या अन्य सभी ग्रंथ इस बारे में मौन है कि ऐसी स्थितियों में क्या करना चाहिए ठीक वैसे ही जैसे खेल में या सेना में कितना ही प्रशिक्षण लेकर और नियम सीख कर जाए लेकिन वहां पर आप परिस्थितियां बिल्कुल अलग पाते हैं और अगर वह किताब के अनुसार या प्रशिक्षण के अनुसार चलेगा तो बेमौत मारा जायेगा*

*12 अगस्त को उदया तिथि से पूर्णिमा मिल रही है लेकिन उदया तिथि के लिए कम से कम 6 घंटे का समय सामान्य रूप से माना जाता है हालांकि इसके बहुत ठोस प्रमाण नहीं है लेकिन इसका आधा समय ही मिल रहा है इस बारे में आलोचना प्रत्यलोचना और दोष निकालने का कोई मतलब नहीं है इसलिए ऐसे विषयों पर पूरे देश में सनातन धर्म के विद्वान और ज्योतिषि लोगों के द्वारा पहले से ही एक राय एकमत होकर एक नियम निकाल लेना चाहिए क्योंकि इस परम ब्रह्म मेंकोई भी चीज पूरी तरह स्थितियां निश्चित नहीं की जा सकती*/

*ऐसे में दो स्थितियां बन रही हैं और दोनों में आप आराम से रक्षाबंधन का पर्व अपनी सुविधानुसार मना सकते हैं यह तो रात में 8:25 पर 11 अगस्त को आप रक्षाबंधन का और सरावली क्रिया कर्म का पर्व मना सकते हैं या फिर उदया तिथि को भी अर्थात 12 अगस्त को प्रातः 5:00 बजे से लेकर 8:00 बजे के बीच भी मना सकते हैं मेरा तो यही मत है कि लोकमत वेद मत और जनमत तीनों का मिश्रण जैसा हो वैसा ही करना चाहिए इसमें विद्वत्ता दिखाने की आवश्यकता नहीं है बाकी तो कलिकाल चल ही रहा है जो उचित समझ में आए वही कीजिए फिर भी सूर्य के अस्त के बाद और रात में रक्षाबंधन मनाने से तो 12 अगस्त को सूर्योदय के साथ शुभ मुहूर्त में मनाया जाना ही अधिक उचित प्रतीत होता है डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र*

विषय से हटकर में भारत के सभी विद्वान और जोशी तथा पंचांग का लोगों से पूछना चाहता हूं कि जिस ढंग से आपके घर के बच्चे पश्चिमी सभ्यता में रह रहे हैं पढ़ रहे हैं और वेशभूषा वस्त्र पहन रहे हैं उसका उल्लेख भारत के किस वेद पुराण धर्म ग्रंथ में किया है कृपया बताएं किसी भी सनातनी धर्म ग्रंथ वेद पुराण में कहीं भी रात्र में विवाह का उल्लेख नहीं है आवाज सारे विवाह रात में ही किए जा रहे हैं इस पर भी बताएं जो विवाह कर्म किए जा रहे हैं उसमें डीजे आर्केस्ट्रा इत्यादि किस धर्म ग्रंथ के अनुसार है और इतना ही नहीं हमारे घर की संस्कृति सभ्यता जो विकसित हो रही है वह किस धर्म के अनुसार हम अपने बच्चों को दे रहे हैं और किस धर्म के अनुसार हम अंग्रेजी भाषा और अंग्रेजी कानून का पालन कर रहे हैं

 *अपने मन से करना है तो जो भी कीजिए वरना जो हो रहा है होने दीजिए इस पर सनातन धर्म का सनातन धर्म की तथाकथित सरकार का हमारा आपका कोई नियंत्रण नहीं है हमारे आपके बच्चे पापा मम्मी डैडी आंटी अंकल हाय हेलो कह रहे हैं खड़े-खड़े भोजन खा रहे हैं खड़े-खड़े पानी पी रहे हैं खड़े-खड़े रसोई मान रही हैं यह सब किस धर्म ग्रंथ के अनुसार हो रहा है कृपया निष्पक्षता और गहराई से विचार करें जन्मदिन और केक काटना मोमबत्ती ठोकर बुझाना यह सब किस वेद मत लोकमत के अनुसार हैं और सबसे बड़े दुख की बात है कि हम आप विद्वान और ज्योतिषी लोगों और ब्राह्मण तथा छतरी लोगों के घर हो रहा है सामान्य जनता की बात ही छोड़ दीजिए*

*मैं आप सभी लोगों से अब बिल्कुल साफ साफ कहना चाहता हूं कि बिना किसी संदेह भ्रम के 11 अगस्त को रात में 8:30 बजे से लेकर 12 अगस्त को 7:30 बजे सुबह तक आराम से आप रक्षाबंधन कभी भी मना सकते हैं इससे अधिक कुछ कहने सुनने की आवश्यकता नहीं है कोई भी ऐसा कार्य ना करें जिससे सनातन धर्म के रास्ते टकराव की ओर बढ़े अभी तो हमें पहले सभी गैर मुसलमानों गए ईसाई लोगों और गैर यहूदी लोगों के साथ-साथ पंत को धर्म मान रहे सिख जैन बौद्ध और पारसी लोगों को पहले सनातन धर्म में शामिल करना है मैं एक बार फिर सभी से यह कहना चाहूंगा कि शंका या भ्रम में मत पड़े 11 अगस्त को रात में 8:30 बजे से लेकर अपनी सुविधा अनुसार 12 अगस्त को सुबह 7:30 बजे तक आराम से रक्षाबंधन मनाया और श्रावण मास के अन्य कर्म करें सामान्य जनता तो कभी भी रक्षाबंधन मना सकती है लेकिन फिर भी आग्रह है कि जिसे 11 अगस्त को रक्षाबंधन मनाना है या राखी बाजनी है वही 11 अगस्त को रात 8:30 बजे के बाद ही ऐसा करें यही सारे वेद मत लोकमत और जनमत तथा धर्म ग्रंथों और ज्योतिष ग्रंथों का निचोड़ है इसमें विद्वान बनने की या खुद को बड़ा या छोटा साबित करने की कोई आवश्यकता नहीं है वैसे भी सबसे बड़ा नियम यही है कि पूरे श्रद्धा विश्वास और भक्ति के साथ आप कुछ भी कभी भी कर सकते हैंडॉ दिलीप कुमार सिंह*
[8/7, 10:04 AM] Dileep Singh Rajput Jounpur: 🕉️🌹 जज साहब । आपने बिल्कुल हंड्रेड परसेंट सही बात कही वर्तमान के समय में जनमानस के सोच एवं उनके द्वारा किए जा रहे नैतिक अनैतिक कर्मों में भेद को ना मानते हुए अपने मन की मनमानी करते हैं तथा फिर सुखद परिणाम की उम्मीद करते हैं। अनिष्ट कारक परिणाम प्राप्त होने के पश्चात शास्त्रों की गाइडलाइन को ही गलत साबित करने का असफल प्रयास करते हैं। जबकि इतिहास में बुरे कर्मों के परिणाम का साक्ष्य उनके समक्ष उपलब्ध है। हर हर महादेव शंभू।।🌹🕉️
[8/7, 10:04 AM] Dileep Singh Rajput Jounpur: *जी हां बिल्कुल सही कहा है आपने और हमारा आपका और सभी विद्वान तथा जोशी लोगों सच्चा सनातनी देशभक्त और सनातन धर्म के रक्षक लोगों से यही आशा है कि आपस में मिलकर सर्वमान्य तिथि और नियमों को अपनाते हुए इसकी रक्षा करें धर्म और देश की रक्षा न करने का कारण ही है कि हम आज पहले के भारत से 11 गुना छोटा हो गए हैं जो कभी ईरान से इंडोनेशिया और कजाकिस्तान शिनजियांग प्रांत से श्रीलंका और मालदीव तक फैला हुआ था आज बचे हुए भारत में भी आधा भूभाग विधर्मी लोगों के हाथ चला गया है फिर भी हम आपसे अहंकार एक दूसरे से बड़े होने की सोच और खुद को बड़ा विद्वान मानने की भूल की आदत छोड़ नहीं रहे हैं ऐसा करना बिल्कुल उचित नहीं है राक्षस तो नियमों के विपरीत चाहे जो कर सकता है लेकिन देवता ऐसा नहीं कर सकते इसीलिए ईश्वर भी नियम के अधीन रहकर सारा सुख दुख शराब इत्यादि भोंgते हैं और धरती लोक पर उसे भोगने आते हैं*

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