Wednesday, 10 August 2022

खुलेआम अवैध कोचिंग सेन्टर उड़ा रहे शिक्षा विभाग के नियमों की धज्जियां*

*खुलेआम अवैध कोचिंग सेन्टर उड़ा रहे शिक्षा विभाग के नियमों की धज्जियां*

*जिला विद्यालय निरीक्षक चित्रकूट में 5 साल से हैं कार्यरत फिर भी आज तक नही की कोई कार्यवाही*

चित्रकूट': बिना कोचिंग के छात्रों का बेड़ापार होने वाला नहीं है। आज स्कूलों से लेकर मकानों में कोचिंग सेन्टरों का गोरख धन्धा खूब फल-फूल रहा है। आज शहर की गलियों में लगे होर्डिंग जिन पर हाइस्कूल, इंटरमीडिएट, बीएस सी,बीटेक,टेट,सुपर टेट,पेट,टीजीटी,पीजीटी,आदि प्रतियोगी परीक्षाओं में गारन्टी पूर्वक सफलता वाले विज्ञापन शहर में लगाकर छात्र, छात्राओं को बेवकूफ बनाकर उनसे मनमाना पैसा वसूलने का कार्य किया जा रहा है। वही सरकारी अध्यापकों के द्वारा कोचिंग सेंटर खोलकर छात्रों से मनमाने तरीके से पैसे वसूला जा रहा है,लेकिन शिक्षा विभाग चुप्पी साधे हुये है।

*इन जगहों पर चल रही कोचिंग सेंटर*

 कसहाई रोड, चकरेही चौराहा,पुरानी बाजार,एस डी एम कालोनी,काली देवी मंदिर के पास,सोनेपुर रोड , प्रयागराज रोड, भैरोपागा रोड आदि स्थानों पर धडल्लो से अवैध तरीके से कोचिंग सेंटर से संचालित हो रही हैं।

 सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 80 प्रतिशत कोचिंग सेन्टरों के रजिस्ट्रेशन तक नहीं हैं। वही जब जांच अधिकारी ऐसे कोचिंग सेण्टरो व विद्यालयो को चेक करने आते है तो सेण्टर चलाने वाले प्रबन्धक सेण्टर से रफूचक्कर हो जाते हैं औंर अधिकारी के जाने के बाद पुनः वही कार्य करने लगते हैं आखिर कब होगी ऐसा शिक्षा माफियाओ पर कार्यवाही।

*कैसे चालू होता है यह शिक्षा का खेल*
नाम न छापने की शर्त पर एक कोचिंग चलाने वाले व्यक्ति ने बताया कि कोचिंग सेन्टर चलाने के लिये सबसे पहले कमरे का जुगाड़ करो, उसमें फर्नीचर, कुर्सी, मेज आदि की व्यवस्था करों फिर कमरे के बाहर एक रंग विरंगा विज्ञापन वाला बोर्ड लगाकर कम वेतन वाले शिक्षकों की नियुक्ति करना और फिर उन्हीं अध्यापकों के प्रति छात्र के दाखिले पर कमीशन तय करना जिससे अध्यापक कमीशन के चक्कर में छात्रों की संख्या की बढ़ोत्तरी करें। वहीं यह भी जानकारी दी गयी विद्यालयों में जा जाकर अध्यापकों से संपर्क कर छात्रों का जुगाड़ किया जाता है।

*क्या हैं शिक्षा विभाग के नियम*

कोचिंग सेन्टरों को चलाने के लिए यदि शासकीय नियम की बात की जाये तो संचालन से पहले इसका रजिस्ट्रेशन जरूरी है। कोचिंग अधिनियम के तहत होने वाला रजिस्ट्रेशन एक बार कराने पर तीन साल चलता है जो कि छात्रों की संख्या के हिसाब से होता है, तीन साल बाद उसी रजिस्ट्रेशन का पुनः नवीनीकरण कराया जाता है। कोंचिंग अधिनियम के तहत चल रही अवैध कोचिंग सेन्टर संचालन के खिलाफ जिला विद्यालय निरीक्षक मुकदमा दर्ज कर कोचिंग को सीज करें, इतना साफ दिशा निर्देश होने के बावजूद जिला विद्यालय निरीक्षक के लचीलेपन के चलते आज अनेकों कोचिंग सेन्टर व विद्यालय बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रहे हैं। जिसके चलते राजस्व विभाग को लाखों करोड़ो रूपये का चूना लग रहा है लेकिन फिर भी जिम्मेदार अधिकारियों के कान में जूँ नहीं रेगंती।

*अवैध कोचिंग संचालकों पर होगी कार्यवाही*
वहीं जब इस विषय पर जिलाधिकारी अभिषेक आनंद से बात की गयी तब उन्होंने बताया कि जिला विद्यालय निरीक्षक से बात कर बहुत जल्द अवैध कोचिंग संचालकों और अवैध चल रहे विद्यालयों पर कार्यवाही की जाएगी।

*रिपोर्ट-सुरेन्द्र सिंह कछवाह ब्यूरो चित्रकूट*

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