12 जनवरी तक जारी रहेगी प्रचंड शीतलहर ठंड कोहरा और बादलों का क्रम
हमारे अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम और विज्ञान अनुसंधान केंद्र के विद्वानों और मौसम विभाग के अनुसार घनघोर शीतलहर प्रचंड ठंड और विकट को हरा और शीतलहर 9 जनवरी तक जारी रहेगी 12 जनवरी से इसमें सुधार आएगा और मकर संक्रांति के बाद इसमें और भी सुधार आएगा अर्थात प्रकार अंतर से अटेंड मकर संक्रांति तक चलती रहेगी इसी बीच एक अच्छी बात यह है कि प्रत्येक दिन थोड़ी बहुत धूप और सूर्य के दर्शन होते रहेंगे यह आज 7 जनवरी से ही शुरू हो जाएगा और धूप तथा गर्मी की मात्र निरंतर बढ़ती जाएगी इसी बीच 5 से 7 जनवरी के बीच जौनपुर और आसपास का न्यूनतम तापमान 2 डिग्री सेंटीग्रेड से भी नीचे चला आएगा आज जौनपुर का न्यूनतम तापमान भोर में 5:00 बजे 2.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ 20 जनवरी से 30 जनवरी के बीच बादल होने और वर्षा होने की पूरी संभावना है
यही हाल लगभग पूरे उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत का रहेगा 7 जनवरी से 12 जनवरी के बीच भूमध्य सागर से लेकर अफगानिस्तान ईरान पाकिस्तान और भारत के उत्तरी मैदानों में असम मेघालय तक घने कोहरे की चादर छाई रहेगी दिल्ली चंडीगढ़ नोएडा और बरेली तथा आसपास के क्षेत्रों का तापमान नीचे गिरकर शून्य से 2 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम आ सकता है इसी बीच में लेके पहाड़ों पर वर्षा घना कोहरा और बर्फबारी के कारण स्थितियां और बिगड़ेगी और अनेक भाग बर्फीले तूफान के चपेट में आ जाएंगे लेह लद्दाख कारगिल में न्यूनतम तापमान -15 से 30 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाएगा
जहां तक पूरे विश्व के मौसम की बात है तो संपूर्ण अरब देशों में हिमालय पर्वत से लेकर सारे चीन और मंगोलिया जापान उत्तर दक्षिण कोरिया और रूस में तथा पूरे यूरोप में इस दौरान तापमान लगातार गिरता चला जाएगा और यह सारा भाग बर्फ से ढक जाएगा यूरोप में थोड़े समय तापमान स्थिर रहने के बाद एक बार फिर तेजी से गिरेगा
ग्रीनलैंड कनाडा संयुक्त राज्य अमेरिका का सारा भूभाग बर्फ की सफेद चादर से ढक जाएगा यहां पर बाबू का तापमान -20 से -70 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया जाएगा अमेरिका और यूरोप में अनेक बर्फीले तूफानों का जन्म होगा जो जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर देंगे
दक्षिणी अमेरिका और अफ्रीका में भी तापमान थोड़ा कम रहेगा लेकिन यहां पर बसंत जैसे रितु रहेगी और तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा संपूर्ण अंटार्कटिका महाद्वीप और आसपास सारा भूभाग बर्फ से ढका रहेगा पूरी दुनिया में केवल आस्ट्रेलिया ऐसा महाद्वीप होगा जहां का तापमान इस समय 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर होगा
अब प्रश्न यह उठता है किस दुनिया भर में अचानक हो रही है इस भयंकर ताप लहर और शीतलहर और धुआंधार वर्षा का क्या कारण हो सकता है इसके अनेक कारण हैं जैसे दुनिया में लानीना और अलनीना का प्रभाव समुद्र में बहने वाली गर्म और ठंडी धाराएं समुद्र तल से ऊंचाई समुद्र से दूरी अचानक ही उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव में चुंबकीय क्षेत्रों के कारण ठंडी और गर्मी का एकदम से बढ़ जाना वातावरण प्रदूषण के कारण धुआंधार बरसाया बादलों का विस्फोट या बादल का फट जाना हिमालय क्षेत्रों में लगातार हो रहे परिवर्तन और उत्तरी तथा दक्षिणी ध्रुव से दूरी लेकिन इसके प्रमुख कारण स्वयं मानव के द्वारा की जा रही धुआंधार बिना सोचे समझे भौतिक और औद्योगिक प्रगति जबरदस्त रूप से बनो और वृक्षों की कटाई करके हरियाली का विनाश किया जाना और उसकी जगह सीमेंट और कंक्रीट के विशाल शहरों का जंगल तैयार करना जहां पर बिल्कुल अचानक ठंड और गर्मी बढ़ती है और ठंडी में शीतगृह हो जाते हैं तो गर्मी में जलती हुई भट्ठी बन जाते हैं मनुष्य के द्वारा प्रकृति के विरुद्ध फ्रिज कूलर हीटर इत्यादि का प्रयोग जिसके कारण जल थल नभ प्रदूषण और शोर प्रदूषण बढ़ता जा रहा है सड़कों पर दुनिया भर में अरबों खरबों दौड़ रहे वाहन विनाशकारी जाहर और धुआं छोड़ रहे हैं जिससे सारा वायुमंडल प्रदूषित हो गया है आज भी जहां दुनिया में वाहन नहीं है और औद्योगिक कल कारखाने नहीं हैं वहां की वायु सांप शुद्ध है और पानी बिल्कुल साफ है तथा हवा एकदम ऑक्सीजन से भरी है इसलिए आज हमें प्रकृति पर नियंत्रण करने की नहीं बल्कि स्वयं को प्रकृति के अनुकूल करने की आवश्यकता है बाकी जो भी कारण वैज्ञानिक और मौसम विद बताते हैं वह सभी एक तरफा है और उसका कोई कारण नहीं है क्योंकि मनुष्य स्वयं ही प्रकृत की सभी विनाशकारी आपदाओं का कारण हैडॉक्टर दिलीप कुमार सिंह
[1/10, 8:03 AM] Dileep Singh Rajput Jounpur: *कैसा रहेगा आज का मौसम जौनपुर और आसपास के जिलों में भयंकर पूरा हल्के बादल के बाद हल्की धूप होगी और कल के मौसम में थोड़ा सुधार होगा और यह सुधार निरंतर धीरे-धीरे जारी रहेगा जौनपुर में अधिकतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है*
पंजाब हरियाणा जम्मू कश्मीर दिल्ली से होकर बरेली लखनऊ अयोध्या गोरखपुर और उत्तरी बिहार में बादल पंजाब हरियाणा दिल्ली और जम्मू-कश्मीर उत्तराखंड में वर्षा हिमालय के क्षेत्र में जोरदार बर्फबारी होगी यहां का तापमान 6 डिग्री सेल्सियस से लेकर 15 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा
*राजस्थान और मध्य प्रदेश तथा बिहार झारखंड और छत्तीसगढ़ के अधिकांश भागों का तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से 23 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा यहां पर मौसम ठंडा लेकिन उपयुक्त रहेगा जबकि गुजरात महाराष्ट्र उड़ीसा केरल कर्नाटक और तमिलनाडु पांडिचेरी लक्ष्मी मौसम 14 डिग्री सेल्सियस से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच और धूप रहेगा पूर्वोत्तर भारत में मौसम ठंडा और सुहावना रहेगा डॉ दिलीप कुमार सिंह एवं समस्त विद्वान सदस्य गण अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर*
[1/10, 7:45 PM] Dileep Singh Rajput Jounpur: *वर्ष 2023 के मकर संक्रांति पर प्रामाणिक लेख इस वर्ष मकर संक्रांति प्रामाणिक रूप से 15 जनवरी को मनाया जाएगा यद्यपि ग्रहों का अधिपति सूर्य 14 जनवरी 2023 की रात 8:57 पर रख मकर राशि में प्रवेश करेंगे फिर भी उदया तिथि के कारण मकर संक्रांति 15 जनवरी रविवार के दिन मनाई जाएगी*
*मकर संक्रांति शुभ कर्म योग में मनाई जाएगी और इस दौरान तीन ग्रहों का योग चित्र नक्षत्र सहयोग वाशी योग बालवकरण योग भी पड़ रहे हैं मकर संक्रांति का पुण्य काल 15 जनवरी को सुबह 6:47 से शाम 5:40 तक होगा लेकिन सबसे अच्छा समय सुबह 7:15 से सुबह 9:06 तक रहेगा या भगवान सूर्य का महापर्व है और सारी सृष्टि और सौरमंडल सूर्य के बल पर ही चलता है*
*मकर संक्रांति के दिन संभव है तो बहते हुए नदी में या गंगा नदी में या संगम में स्नान करें अन्यथा भगवान सूर्य का नाम लेकर गंगा जल मिलाकर घर में ही स्नान करें और तांबे के लोटे में अक्षत अर्थात बिना टूटा हुआ चावल लाल पुष्प काला तिल मिलाकर स्नान करें यह एक संपूर्ण प्रामाणिक वैज्ञानिक महापर्व है जो सूर्य पर आधारित है इसको मकर संक्रांति उत्तरायण खिचड़ी पोंगल बिहू मकर संक्रांति इत्यादि नामों से जाना जाता है इस काल में सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं इसी दौरान जब तक ध्यान पूजा-पाठ और दान का अत्यधिक महत्व होता है इसी दिन से दिन बड़ा और रात छोटी होने लगते हैं अर्थात या प्रकाश का महापर्व है ज्ञान का और सत्य कभी महापर्व है*
*ऐसा माना जाता है कि भगवान सूर्य से दिन अपने पुत्र शनि देव से मिलने उनके घर जाते हैं शनि मकर राशि के देवता हैं इसलिए से मकर संक्रांति कहा जाता है इसी दिन महा प्रतापी परम शूरवीर गंगापुत्र भीष्म पितामह ने इच्छा मृत्यु के बाद स्वर्गारोहण किया था क्योंकि दक्षिण अंशु रहने पर मरने वाले को स्वर्ग नहीं मिलता इसलिए इसे भीष्मा स्त्री पर्व भी कहते हैं और यह भी माना जाता है कि इसी दिन मकर संक्रांति के दिन गंगा मां का स्वर्ग से अवतरण हुआ था और इसी दिन यशोदा ने भगवान श्री कृष्ण के लिए व्रत रखा था*
*महापर्व में खिचड़ी गुड काला तिल इत्यादि का दान सच्चे मन से किया जाता है काला तिल शनि का प्रतीक तो है ही ऐसा माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति भगवान विष्णु से हुई थी वैसे भी तेल शरीर को स्वस्थ निरोग रखता है और शरीर में गर्मी का संचार करता है यह संपूर्ण भारत वर्ष में मनाया जाता है डॉ दिलीप कुमार सिंह*
*महापर्व मकर संक्रांति का संपूर्ण विवेचनDr. Dileep Singh: *कल पूस महीने की कृष्ण पक्ष के 8वी तिथि तदनुसार 15 जनवरी 2023रविवार को पड़ने वाले सूर्य के महापर्व को संपूर्ण भारत में मनाया जाता है औरअलग-अलग नामों से जाना जाता है किसी धर्म विशेष का नहीं संपूर्ण सृष्टि और प्रकृति का सर्वोत्तम महापर्व है जिस दिन सूर्य भगवान धनु राशि मकर राशि में दक्षिणी गोलार्ध में आते हैं*
संपूर्ण सौरमंडल का स्वामी सूर्य हैं जिन्हें सनातन धर्म में ईश्वर भी कहा जाता है जो सच भी है क्योंकि सारी सृष्टि सूर्य के ऊर्जा और प्रकाश से ही चल रही है और सूर्य का प्रकाश सूर्य के चारों ओर 200 करोड़ किलोमीटर तक फैला हुआ है वैसे तो ग्रहों के अधिपति सूर्य 14 जनवरी 2023 की रात 8:21 पर ही मकर राशि में गोचर करेंगे लेकिन उदया तिथि 15 जनवरी को प्राप्त हो रही है इसलिए बिना किसी संदेह के वर्ष 2023 में विक्रम संवत 2079 ई में मकर संक्रांति रविवार के दिन 15 जनवरी को संपूर्ण भारत में एक साथ मनाई जाएगी सभी विद्वानों से निवेदन है कि 2 दिन का चक्कर छोड़कर सनातन धर्म में एकरूपता लाने के लिए यह घोषित कर दें कि 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति का महापर्व मनाया जाएगा
*सनातन धर्म के सभी पर्व उत्सव त्यौहार और सामाजिक सांस्कृतिक कार्यक्रम पूरी तरह प्राकृतिक पर्यावरण और विज्ञान पर आधारित हैं मकर संक्रांति भी सृष्टि चक्र का एक महान पर्व है जो भगवान सूर्य देव को समर्पित है जिन की कृपा से न केवल पृथ्वी बल्कि सौर मंडल के सभी ग्रह उपग्रह अवांतर ग्रह धूमकेतु इत्यादि का जीवन चक्र चलता है पृथ्वी के अलावा सौरमंडल में बुध शुक्र है मंगल बृहस्पति शनि अरुण वरुण यम और सैकड़ों उपग्रह हैं और सौरमंडल का विस्तार लगभग 1 प्रकाश वर्ष में है मकर संक्रांति नाम क्यों पड़ा है मकर संक्रांति पृथ्वी के परिक्रमण अर्थात सूर्य के चारों ओर घूमने तथा परिभ्रमण अर्थात अपने अक्ष या दूरी पर चारों ओर घूमने से जुड़ा है जब सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हुए धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है तो उसे संक्रांति कहते हैं और मकर में प्रवेश करने के कारण ही इसे मकर संक्रांति कहते हैं*
*मकर संक्रांति कश्मीर से केरल और तमिलनाडु तथा राजस्थान गुजरात से असम अरुणाचल प्रदेश सहित पूरे भारत में मनाया जाता है इसके अलग-अलग नाम है पंजाब में से लोहरी तो कश्मीर में इसे मर संक्रांति उत्तर प्रदेश बिहार में खिचड़ी बंगाल इत्यादि में पौष संक्रांति गुजरात इत्यादि में इसको उत्तरायण और दक्षिण भारत में इसे पोंगल असम और पूर्वोत्तर भारत में बिहू महाराष्ट्र तिलगुल में हरियाणा मे सकरात् हिमाचल में माघी कहते हैं इस वर्ष कब मनाया जाएगा खिचड़ी महापर्व सूर्य का अपने परिवार के साथ अपनी आकाशगंगा की परिक्रमा करने में 22 करोड़ वर्ष लगते हैं*
*और इसलिए प्रत्येक 100 वर्ष के बाद मकर संक्रांति आगे बढ़ जाती है आज से 100 वर्ष पहले 11:00 12 जनवरी को मनाई जाती थी धीरे-धीरे 13 और 14 को मनाई जाने लगी और अब यह 14 या 15 जनवरी को मनाई जाती है और आने वाले 100 वर्षों के बाद यह 16 और 17 जनवरी को मनाई जाएगी इस प्रकार स्थिर नहीं है इसका क्रम बदलता रहता है 12 जनवरी को जब स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ था तब उसी दिन मकर संक्रांति का महापर्व था इस वर्ष 15 जनवरी को शनिवार के दिन मिथुन राशि में और मृगशिरा नक्षत्र में पौष मास शुक्ल पक्ष त्रयोदशी के दिन मनाई जाएगी उसी दिन प्रदोष का व्रत भी रहेगा इस दिन रवि योग आनंद योग है*
*भारतीय विज्ञान और ज्योतिष शास्त्र आकाश को समस्त विश्व की कक्षा मानकर कुल 12 राशियां मानता है हर राशि में सूर्य 1 महीने तक रहता है 2 राशियों के बीच जब सूर्य रहता है तो उसे संक्रांति कहते हैं और इसका समय 24 घंटे से 30 घंटे तक होता है पिछले 22 वर्ष में 12 वर्ष मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को पड़ा है और 10 बार 14 जनवरी को पड़ा है वर्ष 2003 9004 2007 दो हजार आठ दो हजार 11 2012 2014 2015 2018 2019 2020 में 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाया गया*
*इसी दिन से सूर्य उत्तरायण होता है और प्रकाश की मात्रा दिन का समय बढ़ने लगता है अंधकार की मात्रा और रात्रि का समय घटने लगता है जो अंधकार से प्रकाश की ओर और असत्य से सत्य की ओर ले जाने का प्रतीक है बहुत से विद्वान जैसे आचार्य लगध इससे नए युग का आरंभ मानते हैं इसी समय से देवताओं का दिन और दैत्यों की रात शुरू होती हैं आप सबको ज्ञात है कि किस तरह पितामह भीष्म ने अपार कष्ट शरसैया पर रहते हुए भी अपने प्राणों का त्याग सूर्य के उत्तरायण होने अर्थात मकर संक्रांति के दिन ही किया था इसी के साथ ही समस्त मांगलिक कार्य विवाह व्रत पूजन हवन दान भी शुरू हो जाता है*
* *इस दिन नदी समुद्र झील झरने पोखर तालाबों में और कुछ ना मिलने पर घर ही गंगाजल मिलाकर स्नान को परम पवित्र माना गया है और गंगा यमुना अदृश्य सरस्वती के संगम पर स्नान सभी प्रकार के दैहिक दैविक भौतिक ताप को हरण करता है और महा पवित्र विश्व का सबसे बड़ा सम्मेलन महाकुंभ अभी मकर संक्रांति के दिन से ही शुरू होते हैं अयोध्या मथुरा काशी कांची अवंतिका पुरी द्वारका जैसे जगह स्नान करना परम पवित्र माना जाता है इस दिन काले तिल और लाल पुल से सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है भोजन में जल में मिष्ठान में तेल में तिल का प्रयोग करते हुए दान में भी तिल को अवश्य ही शामिल करना चाहिए यह समय फसलों का भी होता है*
*इसको प्रकृति का महापर्व भी कहा जाना उचित होगा इस दिन रात्रि में देवता लोग स्नान करते हैं और भोर में अर्थात आठवें पर हर में 4:00 बजे से लेकर 7:00 बजे तक स्नान मनुष्य लोगों का करना परम पवित्र माना जाता है मकर संक्रांति को मनाने का सबसे अच्छा विधि विधान यह है कि प्रातः काल सूर्योदय से पहले स्नान कर ले संभव हो तो पवित्र नदी के बहते जल में स्नान करें या गंगा जी में स्नान करें अन्यथा गंगा जल के साथ पानी में काला तिल भी मिला लेंमिलाकर स्नानघर भी कर सकते हैं उसने पवित्र मंत्र बोलते हुए स्नान करने के बाद साफ सुथरा कपड़ा पहनकर तांबे के लोटे में पानी भर लो उसमें काला तिल गुड़ का छोटा टुकड़ा गंगाजल लाल चंदन लाल पुष्प अक्षत लेकर सूर्य देव के मंत्र का जाप करते हुए सूर्यदेव को अर्घ्य दीजिए और शनिदेव को भी जल अर्पित करें इसके बाद गरीबों को तिल गुड़ खिचड़ी इत्यादि का दान दें अगर मंत्र ना याद हो तो ओम सूर्याय नमः का जाप करना काफी है*
*नदियों में स्नान सबसे पवित्र माना गया है ऐसा इसलिए भी अनिवार्य बनाया गया था जिससे लोग नदी झील पोखर तालाब समुद्र को गंदा और प्रदूषित ना करें वरना स्नान कैसे करेंगे इसी के कारण आज से 50 वर्ष पहले तक पूरे भारत के नदी ताल पोखर झील झरने और गंगासागर द्वारिका के समुद्र तट परम पवित्र थे और निर्मल थे यह एक प्रकार से विज्ञान का महान पर्व भी है क्योंकि इससे ही निश्चित होता है की दिन बड़ा और रात छोटी होनी शुरू हो जाती है और कहीं भी तिथियों का व्यतिक्रम नहीं होता है*
* *क्योंकि काफी दिनों से मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही मनाई जाती रही है इसीलिए लोगों को यह लगने लगा है कि 14 जनवरी को ही खिचड़ी का महापर्व होता है जबकि यह गलत है हर से 200 वर्षों में यह 1 दिन आगे बढ़ जाता है क्योंकि इस वर्ष सूर्य धनु राशि से मकर राशि में रात्रि को 8:21के आसपास प्रवेश करेंगे इसलिए 14 जनवरी को किसी हाल में मकर संक्रांति मनाया नहीं जा सकता रविवार को दोपहर तक खिचड़ी का पुण्य समय है इस दिन 3 ग्रह योग शश योग सुकर्मयोग वाशी योग बालव करण योग इत्यादि योग बन रहे हैं और शनिवार को ब्रह्मा योगाआदि योग महा और के योग रात्रि योग सूर्य शनि की युति का दुर्लभ योग भी बन रहे हैं इस वर्ष दोपहर तक पुण्य कॉल रहेगा डॉ दिलीप कुमार सिंह ज्योतिष शिरोमणि तथा निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम विज्ञान अनुसंधान केंद्र*
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