बबासीर/ पाइल्स......
बवासीर यानी पाइल्स एक गंभीर बीमारी है, जिसमें व्यक्ति को अपने नित्यकर्म में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
किसी पुरानी कब्ज और टाइट दस्त के कारण बवासीर की समस्या हो सकती है।
मलाशय और मलमार्ग में फोड़ों को बवासीर के रूप में जाना जाता है।
बवासीर (Hemorrhoids) के कई कारण हो सकते हैं ,लेकिन बवासीर में व्यक्ति को मलत्याग में बड़ी समस्या होती है। यह एक आम समस्या है और हर चार में से तीन को कभी न कभी बवासीर की समस्या से गुजरना पड़ता है।
अच्छी बात ये है कि बवासीर का इलाज है और आधुनिक चिकित्सा में इसका ऑपरेशन भी होता है, जबकि आयुर्वेद के जरिए बवासीर की समस्या से निजात मिल सकती है।
आयुर्वेदिक चिकित्सक के द्वारा आप अपनी बबासीर की प्रॉब्लम को खत्म करने के लिए हमें नीचे दिए गए नंबर पर अपनी प्रॉब्लम लिखकर दवा मंगा सकते हो .. हमारी आयुर्वेदिक दवा से आपकी पाइल्स की प्रॉब्लम बिल्कुल खत्म हो जाती है।
आयुर्वेदिक डॉ रोहित गुप्ता
7906873221
आयुर्वेदिक बीपी पाउडर रिजल्ट....
आयुर्वेदिक बीपी पाउडर से आपका बीपी तो कंट्रोल होता ही है साथ ही आप जिंदगी भर के लिए बीपी की अंग्रेजी गोली से भी मुक्त हो जाते हो अब निर्णय आपको करना है कि जिंदगी भर बीपी की गोली खानी है या आयुर्वेदिक बीपी पाउडर से बीपी और बीपी की अंग्रेजी दवाई दोनों से मुक्त होना है.....
हमारे एक और न्यू पेशेंट हारून जी...
जोधपुर राजस्थान से....
जो कि बीपी की प्रॉब्लम से परेशान थे काफी सालों से ..
बीपी की अंग्रेजी दवाइयां को छोड़ने का स्थाई समाधान नहीं मिल रहा था...
आयुर्वेदिक ग्रुप के माध्यम से हम से जुड़े...
ऑनलाइन ही अपनी प्रॉब्लम हम को लिख कर भेजी... बीपी पाउडर को मंगाया..
घर बैठे ही बीपी पाउडर से रिजल्ट भी इनको 100परसेंट... के साथ मिला ..
अगर आप भी अपनी बीपी और बीपी की गोली से हमेशा के लिए मुक्त होना चाहते हो तो आयुर्वेदिक बीपी पाउडर से तो हमें अपनी प्रॉब्लम लिखकर व्हाट्सएप कीजिए....
आयुर्वेदिक डॉ रोहित गुप्ता
7906873221
भूख की कमी, भूख के ना लगना, खाना ना पचना, गैस, कब्ज, acidity का रामबाण इलाज.....
एक छोटा अदरक का टूकड़ा लेके उसको कूट लें।
लगभग बेर की गुठली जितना, उसपे थोड़ा सा निम्बू का रस छिड़क दें फिर दो चुटकी सेंधा नमक छिड़क दें। रोजाना खाना खाने से एक घंटे पहले से सेवन करें। दिन में दो बार सेवन करें।
इसके अलावा रोजाना एक ताजा आवंला खाएं।
अनार का जूस पियें, अमरूद का सेवन करें।
सब्जी में सोंठ के चूर्ण का इस्तेमाल करें।
10 दिन में अद्धभुत रिजल्ट मिलता है.....
अपनी किसी भी प्रॉब्लम की जानकारी के लिए पहले डॉक्टर साहब को अपनी प्रॉब्लम अपने नाम और एड्रेस के साथ व्हाटसएप कर दे। और समय लेकर उनसे बात करें...
आयुर्वेदिक डॉ रोहित गुप्ता
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इन चीज़ों को भिगोकर ही खाएं आस-पास भी नहीं फटकेंगीं बीमारियां......
आयुर्वेद के अनुसार, अगर किसी चीज को रातभर भिगोकर रखा जाए और अगले दिन उसका सेवन किया जाए तो ज्यादा फायदेमंद होता है।
जी हां,अंकुरित होने के बाद कुछ चीजों के पोषक तत्वों की अधिकता हो जाती है साथ ही इन्हें आसानी से पचाया भी जा सकता है। ताउम्र दवाइयों के सेवन से बचे रहना चाहते हैं तो आज हम आपको कुछ चीजों के बारे में बताएंगे जिन्हें भिगोकर ही खाना चाहिए।
अलसी के बीज....
यह ओमेगा- 3 फैटी के अलावा प्रोटीन, आयरन का भी अच्छा स्त्रोत हैं। इसको भिगोकर खाने से शरीर का बैड कोलेस्ट्रोल कम हो जाता है और दिल स्वस्थ रहता है। साथ ही इससे मेनोपॉज के दौरान होने वाली समस्या भी कम होती हैं।
खसखस....
थियामिन और पैंटोथेनिक एसिड से भरपूर खसखस का पूरा फायदा भी तभी मिलेगा जब आप इसे भिगोकर खाएंगे। इससे वजन कंट्रोल में रहता है और कई समस्याओं से भी बचे रहते हैं।
मुनक्का....
यह मैग्नीशियम, पोटेशियम और आयरन का पॉवर हाउस कहा जाता है। इसे भीगा हुआ खाने से शरीर में कैंसर कोशिकाएं नहीं बढ़ती हैं, जिससे आप इस बीमारी से बचे रहते हैं। साथ ही इसका सेवन एनीमिया, किडनी स्टोन, स्किन प्रॉब्लम्स और पेट की दिक्कतों से भी छुटकारा दिलाता है।
मेथी दाना....
फाइबर और फॉस्फोरस से भरपूर मेथी दाना डायबिटीज मरीजों के लिए एक अच्छी औषधी है। साथ ही इससे दांत व हड्डियां मजबूत होती हैं। इसके अलावा नियमित रूप से इसका पानी पीने से किडनी स्टोन भी निकल जाता है। इतनी ही नहीं, इन्हें भिगोकर खाने से महिलाओं में पीरियड्स के दौरान होने वाला दर्द भी कम होता है।
अंकुरित मूंग दाल....
यह प्रोटीन, फाइबर और विटामिन बी से भरपूर होती है। इसे खाने से पेट में बनी कब्ज और गैस की समस्या दूर होती है। इससे हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है। साथ ही यह कोलेस्ट्राल लेवल को भी नियंत्रित करता है।
सौंफ.....
इसको भिगोकर खाने या इसका पानी पीने से यूरिन प्रॉब्लम से बचाव होता है क्योंकि इसमें डाइयूरेटिक प्रॉपर्टीज होती हैं। जिससे पेशाब से जुड़ी समस्याएं दूर रहती हैं। इतना ही नहीं इससे पाचन भी दुरुस्त रहता है और आंखों की रोशनी तेज होती है।
अंजीर.....
रोजाना 3 से 5 भिगी हुई अंजीर खाने से कब्ज की समस्या दूर होती है। साथ ही दिल की बीमारियों की रोकथाम करते हैं। इसके अलावा इसमें कैल्शियम पाया जाता है जो हड्डियों को मजबूत बनाता है।
बादाम.....
इन्हें भिगोकर खाने से eyes की रोशनी और दिमाग तेज होता है। साथ ही इससे कैंसर जैसी कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी कम होता है।
अपनी किसी भी प्रॉब्लम के लिए डॉ साहब को पहले उनके नंबर पर अपनी प्रॉब्लम अपने नाम के साथ व्हाट्सएप कर दे। और समय लेकर उनसे बात करें.....
आयुर्वेदिक डॉ रोहित गुप्ता
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आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट से बाद बीपी + पाइल्स का फीडबैक
नाम - माधव प्रसाद प्रधान की दादी
पता - भूलूमुदा
पोस्ट- लुकापारा
Tah/block - बरमकेला
District - रायगढ़
स्टेट - छत्तीसगढ़
आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट से पहले प्रॉब्लम- बीपी +पाइल्स सालों से
बीपी 180 - 190 तक बढ़ जाना।
आयुर्वेदिक बीपी पॉवडर से - बीपी की प्रॉब्लम खत्म ओर पाइल्स की भी प्रॉब्लम क्योर हुई।
अगर आज भी ये हमसे जुड़े न हो तो न तो इनकी दादी की बीपी की प्रॉब्लम कभी सही होती न ही पाइल्स की ....
इन्होंने सही समय पर हमसे कांटेक्ट किया ...और आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट से अपनी दादी की प्रॉब्लम पूरी तरह से क्योर की घर बैठे ...बिना किसी हॉस्पिटल और डाक्टर के चक्कर काटे....+ जो इलाज में हजारों रुपया खर्च होने से भी बच गए...
अगर आप भी अपनी बीपी की प्रॉब्लम से छुटकारा पाने के लिए कोई स्थाई समाधान ढूंढ रहे हैं तो आयुर्वेदिक बीपी पाउडर से आप अपनी जिंदगी भर के लिए बीपी की गोली से छुटकारा पा सकते हैं....+ आने वाले समय में अपनी किडनी और हार्ट को फेल होने से बचा सकते हैं...
आयुर्वेदिक डॉ रोहित गुप्ता
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वात रोगों में क्या खाएं.....
गेंहूं, तिल, अदरक, लहसुन और गुड़ से बनी चीजों का सेवन करें।
नमकीन छाछ, मक्खन, ताजा पनीर, उबला हुआ गाय के दूध का सेवन करें।
बादाम,कद्दू के बीज, तिल के बीज, सूरजमुखी के बीजों को पानी में भिगोकर खाएं।
खीरा, मूंग दाल, गाजर, चुकंदर, पालक, शकरकंद आदि सब्जियों का नियमित सेवन करें।
क्या ना खाएं......
साबुत अनाज जैसे कि बाजरा, जौ, मक्का, ब्राउन राइस आदि के सेवन से परहेज करें।
किसी भी तरह की गोभी जैसे कि पत्तागोभी, फूलगोभी, ब्रोकली आदि से परहेज करें।
जाड़ों के दिनों में ठंडे पेय पदार्थों जैसे कि कोल्ड कॉफ़ी, ब्लैक टी, ग्रीन टी, फलों के जूस आदि ना पियें।
नाशपाती, कच्चे केले आदि का सेवन ना करें।
आयुर्वेदिक डॉ रोहित गुप्ता
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साइनस मेडिसिन.......
सर्दी +खांसी +जुखाम +छिंके आना कंटिन्यू +नाक ब्लॉक् रहना +नाक की हड्डी बढ़ना या तिरछी हो जाना +डस्ट या किसी दूसरी चीजों से एलर्जी होना + रात मे नाक बन्द होना और सांस लेने मे प्रॉब्लम होना etc. ....
जहां दूसरी पैथी में इन सभी प्रॉब्लम से छुटकारा पाने के लिए कोई इलाज नहीं है या तो जिंदगी भर दवाइयां खाओ या फिर सर्जरी ही लास्ट ऑप्शन है....
इन सभी प्रॉब्लम से छुटकारा पाने के लिए हमने अपने आयुर्वैदिक सेंटर पर एक किट तैयार की है जिसकी एक कोर्स से आप अपनी इन सभी प्रॉब्लम से पूरी तरह से छुटकारा पा लेते हो....
अब तक 10,000 से ज्यादा पेशेंट अपनी साइनस की प्रॉब्लम से मुक्त हो चुके हैं घर बैठे ऑनलाइन ट्रीटमेंट से ....जिनके सभी के फीडबैक हमने आपके साथ शेयर भी किए हैं....
अगर आप भी साइनस या नजले की प्रॉब्लम से परेशान है और दवाइयां से कोई आराम नहीं पड़ रहा है तो हमें अपनी प्रॉब्लम लिखकर व्हाट्सएप कीजिए हम आपको साइनस किट पार्सल के द्वारा आपके घर तक पहुंचाएंगे जिसके एक कोर्स से आप साइनस की प्रॉब्लम से पूरी तरह से ठीक हो जाएंगे....
आयुर्वेदिक डॉक्टर रोहित गुप्ता
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https://kutumbapp.page.link/rXZgLotvFsE9fCTe9 #शक्ति
प्रत्येक जीव के लिए शक्ति का आयाम अलग-अलग होता है।
मनुष्यों के लिए यह 'चेतना' है जिससे उसने अपनी शक्ति का अबाध विस्तार किया है।
शक्ति के विभिन्न आयाम अलग अलग युगों में अलग-अलग रहे हैं जैसे शारीरिक आकार, शारीरिक बल, स्किल से लेकर तकनीक व उपकरणों तक।
लेकिन शक्ति का एक ऐसा आयाम भी है जो प्रत्येक युग में समान रूप से महत्वपूर्ण था, है और रहेगा।
यह है -- 'सूचनाएं'
भारत का इतिहास इस बात का साक्षी है।
कृष्ण की असाधारण दैवीय सफलताओं के पीछे सबसे मुख्य कारण था उनके पास रहने वाला सूचनाओं का भंडार।
- द्वारिका के यदुगणसंघ के इस सदस्य के हाथों में सबसे ज्यादा शक्ति थी और वह सुदर्शन चक्र या शार्ङ्ग धनुष या अभेद्य रथ जैत्र नहीं बल्कि वे सूचनाएं थीं जो उनके गुप्तचर तंत्र द्वारा पश्चिम एशिया के असीरिया से लेकर पूर्व में प्राग्ज्योतिषपुर से मिलती थीं।
-पूरे आर्यावर्त में किसी को नहीं पता था कि धौलपुर के ढूहों व गुफाओं में राजर्षि मुचकुंद गुप्त रूप से उपस्थित हैं लेकिन कृष्ण जानते हैं।
-खांडवप्रस्थ को राजधानी बनाने जा रहे पांडवों को नहीं पता था कि उनका सामना इंद्र-तक्षक गठजोड़ से होने जा रहा है लेकिन कृष्ण को सुदूर देवलोक तक की जानकारी थी कि तत्कालीन इंद्र से अग्नि व वरुण की खटपट चल रही है।
-अर्जुन हरिद्वार में उलूपी के साथ हैं और मणिपुर में चित्रांगदा से विवाह करने जा रहे हैं यह बात उनके भाईयों को नहीं पता थी पर कृष्ण को पता था।
-पूरे भारत को नहीं पता था कि आसाम में नरकासुर ने सोलह हजार स्त्रियों का जीवन नरक बना दिया है लेकिन कृष्ण जानते हैं।
-एकलव्य युधिष्ठिर के आमंत्रण की उपेक्षा करके कौरवों के पक्ष में युद्ध करने आ रहा है, इसका पता न पांडवों को पता था और न कौरवों को लेकिन कृष्ण को न केवल पता था बल्कि जाकर उसका वध करके वापस भी आ गए।
-जयद्रथ का वध करने जा रहे अर्जुन को नही पता कि पर्णाशा व वरुण के पुत्र 'बनास क्षेत्र' के जिस राजा श्रुतायुध का वह सामना कर रहे हैं वह अपने ही शस्त्र प्रहार से मारा जा सकता है लेकिन कृष्ण के पास यह सूचना थी।
-जयद्रथ के पुत्रमोही पिता अपने पुत्र की रक्षा के लिए युद्ध के पास ही मौजूद थे यह बात न कौरवों को पता थी और न पांडवों को लेकिन कृष्ण के पास इसकी पूरी सूचना थी।
-मालवराज इन्द्रवर्मा के हाथी का नाम 'अश्वत्थामा' है इसकी जानकारी कृष्ण को शुरू से ही थी।
-अर्जुन पर भी भारी पड़ रहे भगदत्त की आंखों की पलकें लंबी लटकी होने के कारण उन्हें पट्टी से ऊपर की ओर खींचकर बांधा गया है, यह बात भी कृष्ण ने ही अर्जुन को बताई।
द्वारका के यदु गणसंघ के इस सरदार की दैवीय सफलताओं का असली रहस्य इन्हीं सूचनाओं में था।
बाद में हैंड टू हैंड कॉम्बेट को ही वीरता का प्रतिमान मानने वाले राजपूत राजाओं ने कृष्ण की इस धरोहर को त्याग दिया और उन्हें सदैव आक्रांताओं के विरुद्ध इसकी कीमत चुकानी पड़ी।
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आज भी यही स्थिति है।
अब युद्ध हथियारों से कम सूचनाओं के आधार पर मनोवैज्ञानिक स्तर पर अधिक लड़ा जाता है।
ऐसे में जिसके पास जितनी अधिक सूचनाएं होंगी, वह उतना ही अधिक शक्तिशाली होगा चाहे व्यक्ति हो या राष्ट्र।
इस दृष्टिकोण से सोचें तो विश्व के सर्वाधिक शक्तिशाली व्यक्ति कौन हैं?
जाहिर है - जुकरबर्ग, मस्क आदि कारपोरेट जो सरकारें बदलने तक की शक्ति रखते हैं।
पूरे विश्व में पहले स्थान पर कोरिया, चीन और फिर रूस है जो कारपोरेट के चंगुल में नहीं फंसे हुए हैं।
फिलहाल तो उन्होंने यूक्रेन के माध्यम से रूस को साँसत में डाला हुआ है।
चीन पर उनका बस नहीं चल रहा है लेकिन मनमोहन काल में हाथ में आया भारत भी 2014 से उनकी मुट्ठी से फिसल रहा है।
यही कारण है कि जॉर्ज सेरोस जैसे कारपोरेट भारत में सरकार उलटवाना चाहते हैं।
अभी तक फेसबुक पर राष्ट्रवादी खेमा मजबूत था लेकिन अब फेसबुक ने रीच घटाकर इस पटल को हमसे छीन लिया गया है और उन्हें प्रमोट किया जा रहा है जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मोदी विरोधी हैं।
जैसे जैसे चुनाव समीप आएंगे, राजपूत, ब्राह्मण, जाट, गुर्जर, दलित #पेज बढ़ते जाएंगे और अंततः न केवल आपको निष्क्रिय कर दिया जाएगा बल्कि विखंडनवादियों को स्थापित किया जाएगा।
दुर्भाग्य से इसी पटल पर स्वयं को संघ के कार्यकर्ता कहे जाने वाले ऐसे कई दुर्बुद्धि अधम भी हैं जो इस बात पर प्रसन्न हो रहे हैं।
अस्तु!
2024 का चुनाव पूरी तरह सूचनाओं का युद्ध होगा जिसमें जो भारी पड़ेगा वही जीतेगा और मुझे खेद के साथ स्वीकार करना पड़ेगा कि उन्होंने बढ़त बना ली है।
यही कारण है कि भ्रामक सूचनाएं फैलाने में विशेषज्ञ बिकाऊ मीडिया और अंतरराष्ट्रीय प्रोपेगैंडा ऐसी किसी भी घटना के इंतजार में हैं जिसे वे राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय मंचों पर प्रचारित कर सकें।
इसीलिये संघू बॉर्डर, शाहीन बाग, नूपुर शर्मा आदि के मुद्दों पर सरकार के बैकफुट पर रहने का कारण भी यही प्रतीत होता है।
इसलिये सूचनाओं के इस युद्ध में 'भ्रामक सूचनाओं' से बचिए चाहे वह सूचना मेरे जैसे अदने से फेसबुकिया के बारे में हों या यशस्वी प्रधानमंत्री मोदीजी के 'उद्देश्यों' के विषय में।
यदि सूचनाओं के विषय में स्वयं नीरक्षीर विवेक का अभाव हो तो मुस्लिमों की प्रतिक्रिया जांच लें--
"अगर मुस्लिम जिस चीज, संस्थान, विचार, व्यक्ति व घटना का समर्थन कर रहे हों तो तय मानिए वह आपके हित में, हिन्दु हित में नहीं ही होगी और जिसका विरोध कर रहे हों वह शर्तिया राष्ट्रहित में होगी।
।।जय श्री राम।।
।।जय महाकाल।।
[8/12, 1:26 PM] +91 86304 18182: वेरीकोज वेंस क्या है??.....
वैरिकोज वेन्स को वेरिकोसाइटिस भी कहा जाता है। ये समस्या तब उत्पन्न होती है जब नसें बड़ी, चौड़ी या रक्त से ज्यादा भर जाती हैं। वैरिकोज वेन्स अक्सर सूजी औैर उभरी हुई नसों के रूप में सामने आती हैं और ये नीले या लाल रंग की दिखती हैं जिनमें अक्सर दर्द महसूस होता है।
ये समस्या खासतौर पर महिलाओं में बहुत आम है। लगभग 25 फीसदी वयस्क वैरिकोज वेन्स की समस्या से ग्रस्त हैं और अधिकतर मामलों में वैरिकोज वेन्स टांगों को प्रभावित करती है।
जब नसें ठीक तरह से काम नहीं कर पाती हैं तब वैरिकोज वेन्सकी समस्या उत्पन्न होती है। नसों की एक तरफ की वाॉल्व रक्त प्रवाह को रोक देती है। जब ये वॉल्व काम करना बंद कर देती हैा तो रक्त ह्रदय तक पहुंचने की बजाय नसों में ही इकट्ठा होने लगता है। नसों का आकार बढ़ जाता है। ये समस्या अक्सर टांगों को प्रभावित करती है!
वैरिकोज वेन्स के कारण .....
प्रेग्नेंसी
मेनोपॉज
50 से अधिक उम्र
लंबे समय तक खड़े रहना
मोटापा
लक्षण.....
वैरिकोज वेन्सका सबसे प्रमुख लक्षण है नसों का दिखना। इनमें दर्द, सूजन, भारीपन और ऐंठन भी रहती है।
कुछ मामलों में नसों में सूजन और नसों का रंग बदलने की समस्या भी हो सकती है। वहीं गंभीर मामलों में नसों से खून आ सकता है या अल्सर बन सकता है।
घरेलू उपचार.....
नियमित व्यायाम से टांगों में रक्त प्रवाह बेहतर होता है जिससे खूून नसों में जमता नहीं है। एक्सरसाइज ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने में भी मदद करती है जो कि वैरिकोज वेन्स का अन्य कारण है। आप स्विमिंग, पैदल चलना, साइक्लिंग और योग कर सकते हैं।
मालिश......
प्रभावित हिस्से की मालिश करने से भी राहत मिलती है। तेल या मॉइस्चराइजर से मालिश कर सकते हैं। इसमें नसों पर ज्यादा दबाव न बनांए क्योंकि इससे नाजुक ऊतक क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।
इन घरेलू उपायों की मदद से आप काफी हद तक वेरिकोज वेंस की समस्या को ठीक कर सकते हैं।
फ्लेवेनॉएड.....
वैरिकोज वेन्समें फ्लेवेनोएड युक्त आहार भी मदद करता है। फ्लेवेनोएड रक्त प्रवाह को बेहतर करते हैं। ये धमनियों में ब्लड प्रेशर को कम करते हैं और रक्त वाहिकाओं को आराम पहुंचाते हैं जिससे वैरिकोज वेन्स कम हो सकता है। सब्जियों जैसे कि प्याज, पालक और ब्रोकली, खट्टे फल जैसे कि अंगूर, चैरी और ब्लूबैरी एवं लहसुन में फ्लेनोएड्स होते हैं।
अगर फिर भी आप की प्रॉब्लम ठीक नहीं हो रही है तो हमारे यहां पर वैरिकोज वेंस का आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट मिलता है जिससे आप अपनी इस प्रॉब्लम से हमेशा के लिए छुटकारा पा सकते हो...
आयुर्वैदिक डॉक्टर रोहित गुप्ता
7906873221
[8/12, 5:55 PM] +91 86304 18182: कोलेस्ट्रॉल कम करने के उपाय और इलाज......
कच्चे लहसुन का सेवन करें .....
कच्चा लहसुन कोलेस्ट्रॉल के रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद है| सुबह खाली पेट एक या दो कच्चे लहसुन की कली खाने से धमनियों में जमा कोलेस्ट्रॉल कम होने लगता है| आपको किसी दवाई की जरुरत नहीं है, यह नुस्खा कम से कम 15 से 30 दिन तक इस्तेमाल करें आपको फायदा खुद नजर आने लगेगा|
अखरोट का नियमित सेवन करें .....
अखरोट एनर्जी का भंडार है| रोजाना चार अखरोट खाने से हमारे शरीर को त्वरित एनर्जी मिलती है साथ ही इसमें कैल्शियम, मैंगनीशियम, ओमेगा थ्री, फाइबर, मैंगनीज, कॉपर और फॉसफोरस जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं| रोजाना सुबह चार अखरोट खाने से रक्तवाहनियों में जमा कोलेस्ट्रॉल पिघलने लगता है और यह आपके खराब कोलेस्ट्रॉल को वापस यकृत तक भेजने में बहुत मददगार है इसलिए रोजाना चार अखरोट खाने की आदत डालिये
अलसी के बीज और पाउडर का सेवन करें.....
अलसी के बीज भी बढ़ते कोलेस्ट्रॉल को कम करने में बहुत लाभदायक हैं| आप अलसी के बीजों का सेवन करें, या फिर अलसी के बीजों का पाउडर बनाकर रोजाना इसका सेवन करें| अलसी का थोड़ा पाउडर लेकर उसे एक गिलास छाछ में मिला लें| इसे अच्छी प्रकार से मिलाने के बाद इसका सेवन करें| अलसी को आप अपने सब्जी में भी इस्तेमाल करें|
आंवला और एलोवेरा का जूस .....रोजाना सुबह खाली पेट, एक चम्मच आंवला के रस में एक चम्मच एलोवेरा का रस मिलाकर इसका नियमित सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल का लेवल घटाया जा सकता है| आंवला में विटामिन C और साइट्रिक एसिड उच्च मात्रा में पाया जाता है जो कि कोलेस्ट्रॉल को कम करने में बहुत महत्वपूर्ण है|
विटामिन सी वाले फल खाएं.....
याद रखिये, जितने भी विटामिन सी और साइट्रिक एसिड युक्त फल हैं वो सभी कोलेस्ट्रॉल के रोगियों के लिए बहुत लाभदायक हैं जैसे – आंवला, अनार, नींबू, संतरा, मौसमी आदि जो भी इस प्रकार के खट्टे अर्थात साइट्रिक एसिड युक्त फल और सब्जी हैं वो सभी आपके लिए अच्छी हैं|
काले चने का सेवन करें.....
काला चना अक्सर ही घरों में सब्जी के रूप में खाया जाता है| काले चने में विटामिन ए, बी, सी, डी, कैल्शियम, फाइबर, आयरन, कार्बोहाइड्रेट, मैग्नीशियम और फास्फोरस जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं| जिन लोगों का कोलेस्ट्रॉल उच्च रहता है उन्हें काले चनों का सेवन करना चाहिए| रात को एक मुट्ठी काले चने पानी में भिगोकर छोड़ दें और सुबह इन चनों को खाली पेट खाएं| साथ ही जिस पानी में चने भिगोये थे उसे फेंकें नहीं बल्कि उस पानी को भी पियें|
नींबू और काला नमक का सेवन..... नींबू में साइट्रिक एसिड बहुत प्रचुर मात्रा में होता है जिसकी वजह से यह कोलेस्ट्रॉल को कम करने में चमत्कारी रुप से लाभकारी है| सुबह खाली पेट एक गिलास पानी में एक नींबू का रस निचोड़ें और इसमें अपने स्वादानुसार काला नमक मिला लें| अब इस घोल का सेवन करें|
किशमिश और बादाम का करें सेवन..... रात को पानी में 10 से 12 किशमिश और 6 से 7 बादाम भिगो कर रख दें| सुबह खाली पेट बादाम और किशमिश का सेवन करें इससे भी कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद मिलती है| कोलेस्ट्रॉल के पेशेंट इनका नियमित सेवन करें, ध्यान रहे कि अगर आपको शुगर है तो किशमिश का सेवन ना करें|
अपनी किसी भी प्रॉब्लम की जानकारी के लिए पहले डॉ आपको अपनी प्रॉब्लम अपने नाम और एड्रेस के साथ व्हाट्सएप कर दे और समय लेकर उनसे बात करें।
आयुर्वेदिक डॉ रोहित गुप्ता
7906873221
[8/13, 8:35 AM] +91 86304 18182: जरूर जाने यूरिक एसिड के लक्षण
यूरिक एसिड हमारे जीवन में रोगों का घर ........
यूरिक एसिड हो या न हो जरुर पढे......
तेजी से बढ़ते यूरिक एसिड की समस्या बडी तेजी से बढ़ रही है।
आयु बढ़ने के साथ-साथ यूरिक एसिड " गाउट " आर्थराइटिस समस्या का होना तेजी से आंका गया है। जो कि लाइफ स्टाईल, खान-पान, दिनचर्या के बदलाव से भोजन पाचन प्रक्रिया के दौरान बनने वाले ग्लूकोज प्रोटीन से सीधे यूरिन एसिड में बदलने की प्रक्रिया को यूरिक एसिड कहते हैं।
भोजन पाचन प्रक्रिया दौरान प्रोटीन से ऐमिनो एसिड और प्यूरीन न्यूक्लिओटाइडो से यूरिक एसिड बनता है।
यूरिक एसिड का मतलब है, जो भोजन खाया जाता है, उसमें प्यूरीन पोष्टिकता संतुलन की कमी से रक्त में असंतुलन प्रक्रिया है। जिससे प्यूरीन टूटने से यूरिक एसिड बनता है। यूरिक ऐसिड एक तरह से हड्डियों जोड़ों अंगों के बीच जमने वाली एसिड़ क्रिस्टल है। जोकि चलने फिरने में चुभन जकड़न से दर्द होता है। जिसे यूरिक एसिड कहते हैं।
शोध में यूरिक एसिड को शरीर में जमने वाले कार्बन हाइड्रोजन आक्सीजन नाइट्रोजन सी-5, एच-4, एन-4, ओ-3 का समायोजक माना जाता है।
यूरिक एसिड समय पर नियत्रंण करना अति जरूरी है। यूरिक एसिड बढ़ने पर समय पर उपचार ना करने से जोड़ों - गाठों का दर्द, गठिया रोग, किड़नी स्टोन, डायबिटीज, रक्त विकार होने की संभावनाएं ज्यादा बढ़ जाती है। रक्त में यूरिक एसिड की मात्रा को नियत्रंण करना अति जरूरी है।
यूरिक एसिड के लक्षण.....
पैरो-जोड़ों में दर्द होना।
पैर , एडियों में दर्द रहना।
गांठों में सूजन।
जोड़ों में सुबह शाम तेज दर्द
कम-ज्यादा होना।
एक स्थान पर देर तक बैठने पर उठने में पैरों एड़ियों में असहनीय दर्द, फिर दर्द सामlन्य हो जाना।
पैरों, जोड़ो, उगलियों, गांठों में सूजन होना।
शर्करा लेबल बढ़ना।
इस तरह की कोई भी समस्या होने पर तुरन्त यूरिक एसिड जांच करवायें।
यूरिक एसिड नियत्रंण करने के तरीके .....
1. यूरिक एसिड बढ़ने पर हाई फाइबर युक्त आहार खायें। जिसमें पालक, ब्रोकली, ओट्स, दलिया, इसबगोल भूसी फायदेमंद हैं।
2. आंवला रस और एलोवेरा रस मिश्रण कर सुबह शाम खाने से 10 मिनट पहले पीने से यूरिक एसिड कम करने में सक्षम है।
3. टमाटर और अंगूर का जूस पीने से यूरिक एसिड तेजी से कम करने में सक्षम है।
4. तीनो वक्त खाना खाने के 5 मिनट बाद 1 चम्मच अलसी के बीज का बारीक चबाकर खाने से भोजन पाचन क्रिया में यूरिक ऐसिड नहीं बनता।
5. 1 चम्मच शहद और 1 चम्मच अश्वगन्धा पाउडर को 1 कप गर्म पानी के साथ घोल कर पीने से यूरिक एसिड नियत्रंण में आता है।
6. यूरिक एसिड बढ़ने के दौरान जैतून तेल का इस्तेमाल खाने तड़के-खाना बनाने में करें। जैतून तेल में विटामिन-ई एवं मिनरलस मौजूद हैं। जो कि यूरिक एसिड नियत्रंण करने में सहायक हैं।
7. यूरिक एसिड बढ़ने पर खाने से 15 मिनट पहले अखरोट खाने से पाचन क्रिया शर्करा को ऐमिनो एसिड नियत्रंण करती है। जोकि प्रोटीन को यूरिक एसिड़ में बदलने से रोकने में सहायक है।
8. विटामिन सी युक्त चीजें खाने में सेवन करें। विटामिन सी यूरिक एसिड को मूत्र के रास्ते विसर्जन करने में सहायक है।
9. रोज 2-3 चैरी खाने से यूरिक एसिड नियत्रंण रखने में सक्षम है। चेरी गांठों में एसिड क्रिस्टल नहीं जमने देती।
10. सलाद में आधा नींबू निचोड कर खायें। दिन में 3 बार 2 गिलास पानी में 1 नींबू निचोड कर पीने से यूरिक एसिड मूत्र के माध्यम से निकलने में सक्षम है। चीनी, मीठा न मिलायें।
11. तेजी से यूरिक एसिड घटाने के लिए रोज सुबह शाम 45 - 45 मिनट तेज पैदल चलकर पसीना बहायें। तेज पैदल चलने से एसिड क्रिस्टल जोड़ों गांठों पर जमने से रोकता है। साथ में रक्त संचार को तीब्र कर रक्त संचार सुचारू करने में सक्षम है। पैदल चलना से शरीर में होने वाले सैकड़ों से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है। तेज पैदल चलना एसिड एसिड को शीध्र नियत्रंण करने में सक्षम पाया गया है।
12. बाहर का खाना पूर्ण रूप से बन्द कर दें। घर पर बना सात्विक ताजा भोजन खायें। खाने में ताजे फल, हरी सब्जियां, सलाद, फाइबर युक्त संतुलित पौष्टिक आहर लें।
13. रोज योगा , आसन , व्यायाम करें। योग आसन व्यायाम यूरिक एसिड को घटाने में मददगार है। साथ में योगा-आसान-व्यायाम करने से मोटापा वजन नियत्रंण रहेगा।
14. ज्यादा सूजन दर्द में आराम के लिए गर्म पानी में सूती कपड़ा भिगो कर सेकन करें।
15. यूरिक एसिड समस्या शुरू होने पर तुरन्त जांच उपचार करवायें। यूरिक एसिड ज्यादा दिनों तक रहने से अन्य रोग आसानी से घर बना लेते हैं।
यूरिक ऐसिड बढ़ने पर खान-पान......
यूरिक एसिड बढ़ने पर मीट मछली सेवन तुरन्त बंद कर दें। नॉनवेज खाने से यूरिक एसिड तेजी से बढ़ता है। औषधि दवाईयां असर कम करती है।
यूरिक एसिड बढ़ने पर अण्डा का सेवन पूर्ण रूप से बंद कर दें। अण्डा रिच प्रोटीन वसा से भरपूर है। जोकि यूरिक एसिड को बढ़ता है।
बेकरी से बनी खाद्य सामग्री बंद कर दें। बेकरी फूड प्रीजरवेटिव मिला होता है। जैसे कि पेस्ट्री, केक, पैनकेक, बंन, क्रीम बिस्कुट इत्यादि।
यूरिक एसिड बढ़ने पर तुरन्त जंकफूड, फास्ट फूड, ठंडा सोडा पेय, तली-भुनी चीजें बन्द कर दें। जंकफूड, फास्टफूड, सोडा ठंडा पेय पाचन क्रिया को और भी बिगाड़ती है। जिससे एसिड एसिड तेजी से बढता है।
चावल, आलू, तीखे मिर्चीले, चटपटा, तले पकवानों का पूरी तरह से खाना बन्द कर दें। यह चीजें यूरिक एसिड बढ़ाने में सहायक हैं।
बन्द डिब्बा में मौजूद हर तरह की सामग्री खाना पूरी तरह से बंद कर दें। बन्द डब्बे की खाने पीने की चीजों में भण्डारण के वक्त कैमिकल रसायन मिलाया जाता है। जैसे कि तरह तरह के प्लास्टिक पैक चिप्स, फूड इत्यादि। हजारों तरह के बन्द डिब्बों और पैकेट की खाद्य सामग्री यूरिक एसिड तेजी बढ़ाने में सहायक है।
एल्कोहन का सेवन पूर्ण रूप से बन्द कर दें। बीयर, शराब यूरिक एसिड तेजी से बढ़ती है।
शोध में पाया गया है कि जो लोग लगातार बीयर शराब नशीली चीजों का सेवन करते हैं, 70 प्रतिशत उनको सबसे ज्यादा यूरिक एसिड की समस्या होती है। यूरिक एसिड बढ़ने पर तुरन्त बीयर, शराब पीना बन्द कर दें। बीयर शराब स्वस्थ्य व्यक्ति को भी रोगी बना देती है। बीयर, शराब नशीली चीजें स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
इसके साथ प्रतिदिन चार - पांच लीटर पानी पीने से बहुत अच्छा असर आता है।
किसी भी प्रॉब्लम की जानकारी के लिए पहले डॉक्टर साहब को अपनी प्रॉब्लम अपने नाम और एड्रेस के साथ व्हाट्सएप कर दें और समय लेकर उनसे बात करें.....
आयुर्वेदिक डॉ रोहित गुप्ता
7906873221
[8/13, 8:36 AM] +91 86304 18182: लिकोरिया का नुस्खा.....
सफेद पानी आता है महिलाओं को ......
यह सफेद पानी जो लिकोरिया चार पाच सात 8 साल पुराना हो उस पर अच्छा काम करता है।
और बहुत ही सस्ता और अनुभव में लिया हुआ नुस्खा है ।
पुराने लिकोरिया पर अच्छा काम करता है।
करना कुछ ऐसा है कि.....
आंवले का चूर्ण और केला सिर्फ दो चीज है जिसको भी लिकोरिया है ,
पुराने वाला वह सवेरे उठ कर फ्रेश होकर एक चम्मच आंवला चूर्ण पानी से लें और ऊपर से एक पका हुआ केला खा ले।
एक डेढ़ घंटा फिर कुछ न खाए।
10 से 12 दिन में ही 50 परसेंट रिजल्ट दिखने लग जाता है।
किसी को ज्यादा भी दिखने लग जाता है किसी को कम भी इसको चालू रखें जब तक पूरा लिकोरिया समाप्त ना हो जाए इसे यूज करें और लाभ उठाएं.....
किसी प्रॉब्लम की जानकारी के लिए पहले डॉक्टर साहब को अपनी प्रॉब्लम अपने नाम और एड्रेस के साथ व्हाट्सएप कर दें और समय लेकर उनसे बात करें...
आयुर्वेदिक डॉ रोहित गुप्ता
7906873221
[8/12, 10:46 AM] +91 86304 18182: सरसो का तेल.....
सरसों का तेल खाने के लिए उत्तम है,आयुर्वेद में सरसों के तेल कों तिल के तेल के समान ही उत्तम माना जाता है
सरसों के तेल में कोलैस्ट्राल का स्तर कम होने के कारण ह्रदय रोगों में भी यह लाभदायक बताया जाता है
हाथों की खुश्की-
हाथों में खुशकी और खुदरापन होने की स्थिति में सरसों के तेल से हल्की मालिश करें , त्वचा मुलायम हो जाएगी
शरीर दर्द और थकान-
शीत मौस्म में धूप में बैठकर सभी उम्र के लोगों को तेल की मालिश करनी चाहिए | शिशुओ को धूप में लिटाकर इस तेल से मालिश करने से उनकी थकान दूर होती है , नींद अच्छी आती है, तथा शरीर के दर्द से राहत मिलती है
सरसों का तेल वातनाशक और गर्म होता है । इसी कारण शीतकाल में वातजन्य दर्द को दूर करने के लिए इस तेल की मालिश की जानी चाहिए । जोडों का दर्द , मांसपेशियों का दर्द , गठिया , छाती का दर्द, ब्रोंकाइटिस आदि की पीड़ा भी सरसों के तेल से दूर हो जाती है ।
उबटन-
बेसन में सरसों का तेल मिलाकर उबटन की तरह त्वचा पर मलने से त्वचा गोरी हो जाती है तथा उसमें कमल के समान ताजगी आ जाती है ।
मसूड़ों के रोग-
सरसों के तेल में मधु ( शहद ) मिलाकर दांतों एंव मसूडों पर हल्के हल्के मलते रहने से मसूड़ों के सभी रोग भाग जाते है , तथा दांत भी मजबूत होते है।
जुखाम-
जुकाम होने या नाक के बंद होने पर दो बूंद सरसों तेल नाक के छिद्रों में डाल कर सांस जोर सें खीचने पर बंद नाक खुल जाती है और जुकाम से भी राहत मिलती है
पुरुषो के गुप्तांग-
लिंग में ढीलापन हो या टेढापन हो सरसों के तेल की लगातार मसाज से ठीक हो जाता है
वक्षस्थल का ढीलापन-
महिलाओ के छातियों में ढीलापन आ गया हो तो सरसों तेल में लहसुन की कली जलाकर बनाए तेल से मसाज करें , सुबह खाली पेट लहसुन की चार पाँच कलीयाँ भी खांए , बहुत लाभ होगा।
कान दर्द-
कान में सरसों तेल गर्म करके डालने से कान दर्द ठीक होता है , अगर कोई कीडा वगैरा घुस गया हो तो वो भी बाहर निकल जाता है , अगर सरसों तेल में लहसुन की कली जलाकर ओर नीम का तेल मिलाकर डाला जाय तो बहरापन में बहुत उपयोगी सिद्ध होगा ।
दाँत-
सरसों के तेल में सेंधा नमक मिलाकर सुबह-शाम दांतों पर मलने से दांतों से खून आना , मसूड़ों की सूजन, दांतों के दर्द में आराम मिलता है ,साथ ही दांत चमकीेले ओर सुन्दर भी बनते है ।
आँख-
पैरों के तलवों एव अंगूठों में सरसों का तेल लगाते रहने से नेत्र ज्योति बढ़ती है
नींद-
रात को हाथ पाँवों में तेल लगा कर सोने से मच्छर नही काटते , नींद अच्छी आती है ।
बाल-
बालों में सरसों का तेल लगाते रहने से बाल मजबूत होते है , मोटे घने होते है । सिर दर्द भी नही होता ।
सूजन-
शीतकाल में पैरों की उंगलीयों में सूजन आ जाती है । ऐसी अवस्था में सरसों का तेल में थोड़ा सा पिसा हुआ सेंधा नमक मिलाकर गर्म करलें । ठंडा होने पर उंगलियों पर लेप लगा कर रात में सों जाएं । कुछ ही दिनों मे आराम दिखाई देगा ।
पेट के रोग-
हाने से पूर्व नित्य नाभि में दो बूंद सरसों का तेल लगाने से पेट से संबंधित रोग कम ही होते है । पाचन क्रिया भी अच्छी रहती है , होठ नही फटते ।
अपनी किसी भी प्रॉब्लम के लिए डॉ साहब को पहले उनके नंबर पर अपनी प्रॉब्लम अपने नाम के साथ व्हाट्सएप कर दे। और समय लेकर उनसे बात करें.....
आयुर्वेदिक डॉ रोहित गुप्ता
7906873221
[8/12, 10:46 AM] +91 86304 18182: हृदय की बीमारी आयुर्वेदिक इलाज .....
हमारे देश भारत मे 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे, उनका नाम था महाऋषि वागवट जी !
उन्होने एक पुस्तक लिखी थी, जिसका नाम है अष्टांग हृदयम!
(Astang hrudayam)
इस पुस्तक मे उन्होने
बीमारियो को ठीक करने के लिए 7000 सूत्र लिखे थे !
यह उनमे से ही एक सूत्र है !
वागवट जी लिखते है कि कभी भी हृदय को घात हो रहा है ! मतलब दिल की नलियों मे blockage होना शुरू हो रहा है तो इसका मतलब है कि रक्त (blood) मे acidity (अम्लता) बढ़ी हुई है !
अम्लता आप समझते है !
जिसको अँग्रेजी मे कहते है acidity !
अम्लता दो तरह की होती है !
एक होती है पेट कि अम्लता ! और एक होती है रक्त (blood) की अम्लता...
आपके पेट मे अम्लता जब बढ़ती है तो आप कहेंगे पेट मे जलन सी हो रही है।
खट्टी खट्टी डकार आ रही है ! मुंह से पानी निकल रहा है और अगर ये अम्लता (acidity) और बढ़ जाये तो hyperacidity होगी !
और यही पेट की अम्लता बढ़ते-बढ़ते जब रक्त मे आती है तो रक्त अम्लता (blood acidity) होती hai और जब blood मे acidity बढ़ती है तो ये अम्लीय रक्त दिल की नलियो मे से निकल नहीं पाता और नलिया मे blockage कर देता है !
तभी heart attack होता है ! इसके बिना heart attack नहीं होता और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है जिसको कोई डाक्टर आपको बताता नहीं ! क्योंकि इसका इलाज सबसे सरल है !
इलाज क्या है ??
वागबट जी लिखते है कि जब रक्त (blood) मे अम्लता (acidity) बढ़ गई है ! तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करो जो क्षारीय है !
आप जानते है दो तरह की चीजे होती है !
अम्लीय और क्षारीय !
acidic and alkaline ....
अब अम्ल और क्षार को मिला दो तो क्या होता है ?
acid and alkaline को मिला दो तो क्या होता है ?
neutral होता है सब जानते है !
तो वागबट जी लिखते है
कि रक्त की अम्लता बढ़ी हुई है तो क्षारीय (alkaline) चीजे खाओ !
तो रक्त की अम्लता (acidity) neutral हो जाएगी और रक्त मे अम्लता neutral हो गई ! तो heart attack की जिंदगी मे कभी संभावना ही नहीं !
ये है सारी कहानी !
अब आप पूछोगे जी ऐसे कौन सी चीजे है जो क्षारीय है और हम खाये ? ....
आपके रसोई घर मे ऐसी बहुत सी चीजे है जो क्षारीय है ! जिनहे आप खाये तो कभी heart attack न आए और अगर आ गया है, तो दुबारा न आए !
सबसे ज्यादा आपके घर मे क्षारीय चीज है वह है लौकी ! जिसे दुधी भी कहते है ! English मे इसे कहते है bottle gourd ! जिसे आप सब्जी के रूप मे खाते है !
इससे ज्यादा कोई क्षारीय चीज ही नहीं है तो आप रोज लौकी का रस निकाल-निकाल कर पियो या कच्ची लौकी खायो !
वागवतट जी कहते है रक्त की अम्लता कम करने की सबसे ज्यादा ताकत लौकी मे ही है !
तो आप लौकी के रस का सेवन करे !
कितना सेवन करे?....
रोज 200 से 300 ग्राम पियो !
कब पिये ?....
सुबह खाली पेट (toilet जाने के बाद) पी सकते है।
या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते है !
इस लौकी के रस को आप और ज्यादा क्षारीय बना सकते है ! इसमे 7 से 10 पत्ते के तुलसी के डाल लो ...
तुलसी बहुत क्षारीय है !
इसके साथ आप पुदीने से 7 से 10 पत्ते मिला सकते है. पुदीना बहुत क्षारीय है।
इसके साथ आप काला नमक या सेंधा नमक जरूर डाले !
ये भी बहुत क्षारीय है !
लेकिन याद रखे नमक काला या सेंधा ही डाले !
वो दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी न डाले !
ये आयोडीन युक्त नमक अम्लीय है....
तो मित्रों आप इस लौकी के जूस का सेवन जरूर करे 2 से 3 महीने आपकी सारी heart की blockage ठीक कर देगा।
21 वे दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा !
कोई आपरेशन की आपको जरूरत नहीं पड़ेगी !
घर मे ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा
अपनी किसी भी प्रॉब्लम के लिए डॉ साहब को पहले उनके नंबर पर अपनी प्रॉब्लम अपने नाम के साथ व्हाट्सएप कर दे। और समय लेकर उनसे बात करें.....
आयुर्वेदिक डॉ रोहित गुप्ता
7906873221
[8/12, 11:19 AM] +91 86304 18182: उच्चरक्तचाप.....
आधुनिक युग, मिश्रित दूषित वातावरण, अनियमित खानपान, अनावश्यक तनाव और होड़ा होड़ी नतीजा अनचाहा उच्चरक्तचाप।
हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए घरेलू उपाय....
आयुर्वेद में हाई बीपी को कंट्रोल करने के लिए सबसे अच्छी दवा हैं दालचीनी, इसका प्रयोग मसाले के रूप में भी किया जाता हैं...
दालचीनी केवल इंसान को दिल की बीमारियों से ही नहीं बल्कि डायबटीज से भी बचाता हैं। इसके प्रयोग से शरीर में एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा बढ़ जाती हैं और ब्लड शुगर कम।
नमक का सेवन कम करे हो सके तो सफेद नमक की जगह सेंधा या काला नमक उपयोग करे।
दूध में हल्दी, शिलाजीत और व्यवनप्राश डालकर पिएं।
अर्जुन की छाल और हद्या अमृता का एक साथ सेवन करने से हाई बीपी में लाभ मिलेगा।
बादाम रोगन से पैरों के तलवों की मालिश करें। ...
रोजाना खाली पेट लौकी का जूस पिएं।
अपनी किसी भी प्रॉब्लम के लिए डॉ साहब को पहले उनके नंबर पर अपनी प्रॉब्लम अपने नाम के साथ व्हाट्सएप कर दे। और समय लेकर उनसे बात करें.....
आयुर्वेदिक डॉ रोहित गुप्ता
7906873221
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