फरहत अली खान (हॉकी): *नेताओं को अवाम को गुमराह नहीं करना चाहिए*
राष्ट्रविरोधी ताकतों की शह पर आतंकवादी तत्व हमारे सुन्दर देश में सांप्रदायिक द्वेष व आतंकवाद की घटनाओं को हवा देते रहते है जिसके पीछे उनकी मंशा देश को अस्थिर करने की होती है। जहां देश का कानून घृणा फैलाने वालों के साथ सख्ती से निपट रहा है, वहीं कुछ लोग भेड़ की खाल में भेड़िए बनकर समाज में घृणा फैलाने का काम करते हैं, और कानून के शिकंजे से बचते रहते हैं क्योंकि वे स्वयं को 'राजनैतिक' एवं 'सामाजिक कार्यकर्ता' के तौर पर दर्शाते हैं। एस. क्यू. आर. इलियास जो 'वैलफेयर पार्टी ऑफ इण्डिया' के वर्तमान अध्यक्ष हैं, इस सूची में सबसे ऊपर होंगे।
महाराष्ट्र के नागपुर में पैदा हुए एस.क्यू. आर. इलियास ने नागपुर विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए प्रतिबंधित संगठन- 'स्टूडेण्ट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इण्डिया' (SIMI) की सदस्यता ग्रहण की और इसके 'अंसार' बने। आगे चलकर वे SIMI के महाराष्ट्र क्षेत्र के पहले अध्यक्ष भी बने। क्षेत्रीय अध्यक्ष के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सन् 1989 में नागपुर में होने वाली SIMI की 'अखिल भारतीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। आगे चलकर वे SIMI के अखिल भारतीय अध्यक्ष भी बने और सन 1980 से लेकर सन् 1985 तक इस पर पर बने रहे। यह बताना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि SIMI की हिंसक और षड्यंत्रकारी गतिविधियों के कारण सन् 2001 में उसके ऊपर प्रतिबंध लगा दिया गया । सरकार ने इसे एक 'आतंकवादी संगठन' भी करार दिया। यह प्रतिबंध भारत की आज भी लागू है और इस पर सन् 2024 में पुनर्विचार किया जाएगा। यद्यपि अनेकों SIMI कार्यकर्ता व नेता जेलों में बंद हैं, एस. क्यू आर इलियास जैसे नेता अब भी कानून से बचे हुए हैं क्योिं उन्होंने स्वयं को एक 'राजनैतिक कार्यकर्ता' के तौर पर दिखाया हुआ है।
एस.क्यू. आर. इलियास के SIMI के साथ संबध तो है ही, उसकी ईरान व पाकिस्तान जैसे राष्ट्रों के साथ संदिग्ध दोस्ती के चलते भी कानून लागू करने वाली संस्थाओं द्वारा उससे पूछताछ की गई। डॉ० इलियास ने सन् 1984 में नई दिल्ली स्थित 'ईरानी दूतावास' की सहायता से एक उर्दू मासिक पत्रिका 'अफकार-ए-मिली' शुरू की। सन् 1992 में एक अखबार के संपादकीय कॉलम में भड़काऊ लेख छापने के कारण इसके खिलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा 153-ए के अन्तर्गत FIR दर्ज की गई जिसमें यह आरोप लगाया गया कि उसने धर्म और जाति के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने तथा सांप्रदायिक सद्भावना को प्रभावित करने का कार्य किया। बात यही नहीं रुकी और SIMI के भूतपूर्व अध्यक्ष केम बशीर ने इस संपादकीय के अंशों को पचों के तौर पर छपवाया और पाकिस्तान में स्थित छात्र संगठन - 'इस्लामी जमीयत तलबा' के कहने पर देश के विभिन्न हिस्सों ने इसकी प्रतियां घंटवाई। यह पाकिस्तानी संगठन धर्मनिर्पेक्षवाद का विरोध करता है तथा मुस्लिम-ब्रदरहूड जैसे संगठन की विचारधारा को आगे बढ़ाने का काम करता है। इसके एक कर्मचारी जिसका संबंध प्रतिबंधित SIMI के साथ पाया गया, ने बताया कि डॉ० इलियास हाल के दिनों में SIMI के खिलाफ लगे प्रतिबंध से संबंधित कोर्ट केस में उनके सलाहकार के तौर पर कार्य कर रहे हैं।
बच्चों के चरित्र को देखते हुए उसके मां-बाप की प्रकृति और व्यवहार का पता चलता है। जहां एस. क्यू. आर. इलियास ने SIMI के अभियान को चलाने में नेतृत्व प्रदान किया, वहीं उनका कुख्यात बेटा भी पीछे नहीं रहा। बहुत कम लोगों को यह मालूम होगा कि उमर खालिद जिस पर देश के विरुद्ध साजिश रचने जैसे आरोप के अलावा कई अन्य आरोप लगे हैं, इन केसों से जूझ रहा है। उमर खालिद को राष्ट्र के खिलाफ साजिश रचने के आरोप में सन् 2016 में उसके खिलाफ दिल्ली के वसंतकुंज थाने में दर्ज हुए केस की वजह से गिरफ्तार किया गया। उसे दोबारा दिल्ली पुलिस ने दिल्ली दंगों के मामले मे सितंबर 13, 2020 को गिरफ्तार किया। जहां उसका पिता सरकार के खिलाफ मुसलमानों की भावनाओं को भड़काने का कार्य कर रहा है, वहीं बेटा घृणा फैलाने और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में संलिप्त है।
हजरत मोहम्मद ने इस्लाम में एक दफा नेताओं के बारे में कहा था कि "तुम सभी ग्वाले हो और प्रत्येक ग्वाला अपने-अपने झुण्ड के लिए जिम्मेदार है।" एस. क्यू. आर. इलियास जैसे स्वघोषित नेता में लोगों को बर्बादी की तरफ ले जाने वाले सभी गुण व्याप्त हैं। भारतीय मुसलमानों को एस.क्यू. आर. इलियास जैसे व्यक्ति द्वारा कहे गए प्रत्येक शब्द और उसकी बातों को बिना सोचे-समझे यूं ही नहीं मान लेना चाहिए। भारत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती और निजामुद्दीन औलिया जैसे सूफी-संतो के लिए विख्यात है। आईये ! हम अपना शांतिपूर्ण वर्तमान और खुशियों से भरे भविष्य को एस. क्यू. आर. इलियास जैसे व्यक्ति की विचारधारा से प्रभावित न होने दें।
फरहत अली खान (हॉकी): फरहत अली खान अध्यक्ष मुस्लिम महासंघ
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