Thursday, 26 January 2023

हार्ट ब्लोकेज●●**99 परसेन्ट ब्लॉकेज को भी जड़ से खत्म या रिमूव कर देता है देवतुल्य पीपल का पत्ता...*


*नोनी स्वस्थ पाचन तंत्र के लिए सबसे उपयोगी है*
 *जानिए इसके बारे में...*

L ज़ेरोनिन उचित पाचन को बढ़ावा देने और बनाए रखने में मदद करता है और पेट खराब या नाराज़गी के लक्षणों को दूर कर सकता है।  नोनी के जीवाणुरोधी प्रभाव बैक्टीरिया के कारण होने वाले दस्त को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।
 कई समग्र डॉक्टरों द्वारा क्षारीय खाद्य पदार्थों की सिफारिश अम्लीय शरीर की स्थितियों जैसे कि एसिडोसिस और एसिड रिफ्लक्स के लिए एक मारक के रूप में की जाती है।  नोनी एक क्षारीय फल है।  क्षारीय आहार यह मानता है कि उच्च अम्लता के स्तर के कारण अपने आहार में असंतुलन के कारण कई व्यक्ति अस्वस्थ महसूस करते हैं।  क्षारीय आहार यह मानता है कि पोषक तत्व और भोजन जैसे पशु प्रोटीन, कैफीन, चीनी और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ अम्लीय होते हैं।  इसके विपरीत, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम और सोडियम के उच्च स्तर वाले भोजन में क्षारीय सामग्री अधिक होती है।
 क्षारीय आहार की कुंजी आपके शरीर की अम्लता और क्षारीय स्तरों के बीच संतुलन बनाना है।  इस प्रकार नोनी एक क्षारीय फल के रूप में कार्य करता है जो किसी भी पाचन विकार के मामले में मदद करता है।

नेचर 2 वेलनेस की बनाई हुई नोनी जूस अद्भुत प्रभावी है क्योंकि ये किसी भी बीमारी का इलाज नहीं है लेकिन कोई भी बीमारी इससे बच नहीं सकती सिर्फ किडनी की समस्या को छोड़कर..
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*●●हार्ट ब्लोकेज●●*
*99 परसेन्ट ब्लॉकेज को भी जड़ से खत्म या रिमूव कर देता है देवतुल्य पीपल का पत्ता...*

*बनाने की विधि :*
पीपल के 15 पत्ते लें जो कोमल गुलाबी कोंपलें न हों, बल्कि पत्ते हरे, कोमल व भली प्रकार विकसित हों। प्रत्येक का ऊपर व नीचे का कुछ भाग कैंची से काटकर अलग कर दें। पत्ते का बीच का भाग पानी से साफ कर लें। इन्हें एक गिलास पानी में धीमी आँच पर पकने दें।
जब पानी उबलकर एक तिहाई रह जाए तब ठंडा होने पर साफ कपड़े से छान लें और उसे ठंडे स्थान पर रख दें, दवा तैयार।

इस काढ़े की तीन खुराकें बनाकर प्रत्येक तीन घंटे बाद प्रातः लें।
हार्ट अटैक के बाद कुछ समय हो जाने के पश्चात लगातार पंद्रह दिन तक इसे लेने से हृदय पुनः स्वस्थ हो जाता है और फिर दिल का दौरा पड़ने की संभावना नहीं रहती।

*दिल के रोगी इस नुस्खे का एक बार प्रयोग अवश्य करें...*

पीपल के पत्ते में दिल को बल और शांति देने की अद्भुत क्षमता है।
इस पीपल के काढ़े की तीन खुराकें सवेरे 8 बजे, 11 बजे व 2 बजे ली जा सकती हैं।
खुराक लेने से पहले पेट एक दम खाली नहीं होना चाहिए, बल्कि सुपाच्य व हल्का नाश्ता करने के बाद ही लें। प्रयोगकाल में तली चीजें, चावल आदि न लें।
मांस, मछली, अंडे, शराब, धूम्रपान का प्रयोग बंद कर दें।
समुद्री नमक, चीनी, रिफाइंड तेल, चिकनाई आदि का प्रयोग बंद कर दें।
अनार, पपीता, आंवला, बथुआ, लहसुन, मेथी दाना, सेब का मुरब्बा, मोसंबी, रात में भिगोए काले चने, किशमिश, गुग्गुल, दही, छाछ आदि लें।

*तो अब समझ आया,*
भगवान ने पीपल के पत्तों को हार्टशेप क्यों बनाया।
फिर अगर कोई समस्या है तो तुरंत मुफ्त परामर्श के लिए सम्पर्क करें...
 *टायफायड बीमारी...*
*इस बुखार का कारण साल्मोनेला टाइफी (Salmonella typhi) नामक बैक्टीरिया का संक्रमण होता है।*

इस बीमारी में तेज बुखार आता है जो कई दिनों तक बना रहता है।
यह बुखार कम ज्यादा होता रहता है लेकिन कभी सामान्य नहीं होता।

यह बैक्टीरिया छोटी आंत में स्थापित हो जाता है लेकिन कभी कभी यह पित्ताशय या गाल ब्लैडर में भी स्थापित रहता है यह वहीं अपनी संख्या बढ़ाकर विष फैलाता है और रक्त में मिलकर इस बीमारी का कारण बनता है।

मोतीझरा या टाइफाइड का इन्फेक्शन होने के एक सप्ताह बाद रोग के लक्षण नजर आने लगते हैं।
कई बार दो-दो महीने बाद तक इसके लक्षण दिखते हैं।
यह सब संक्रमण की शक्ति पर निर्भर करता है।

*पारंपरिक उपचार की विधि  है...*
1. 10ml तुलसी की पत्तियों का रस, 10 मी.ली. अदरक का रस, 5 कालीमिर्च के दाने इन सभी को 1 चम्मच शहद के साथ टाइफाइड से पीड़ित रोगी को पिलाए और चादर ओढाकर सुला दें- इससे मोतीझरा के बुखार में लाभ मिलता है।

2. 10ml तुलसी की पत्तियों का रस, 10 ग्राम दालचीनी, 10 ग्राम जावित्री को 1 लीटर पानी में उबालें और जब ¼भाग पानी शेष बचे तो इसे मोतीझरा के रोगी को थोड़े थोड़े अंतराल में पिलाएं इससे टायफॉइड में लाभ मिलता है।

आयुर्वेद या प्राकृतिक चिकित्सा इस युग की ज़रूरत जरूरत और मजबूरी भी बन चुका है।
आयुर्वेद में सभी जीर्ण रोगों का निवारण हैं।

आयुर्वेद एक जीवनशैली है।
हमारे साधु, संत, ऋषि, मुनियों का दिया हुआ मंत्र आयुर्वेद है।

चिकित्सकीय सलाह अवश्य लें....



*पूरे शरीर की नसों को खोलने का अद्भुत 10 रुपये के देसी नुस्खा....*

दिन में सिर्फ़ एक बार यह साधारण सा उपाय करके देखिए।
सिर के बाल से पैर की उंगली तक सारी नसें खुलने या मुक्त होने का आपको अनुभव होगा।
यह स्पष्ट अनुभव होगा कि सिर से पैर तक एक तरह से करंट का अनुभव होगा।
आपके शरीर की नसे मुक्त होने का स्पष्ट अनुभव होगा।

हाथ–पैर में होने वाली झंझनाहट (खाली चढ़ना) तुरंत बंद हो जाती हैं।
पुराना घुटनों का दर्द और कमर, गर्दन या रीड की हड्डी (मनके) में कोई नस दबी या अकड़ गई है तो वह पुरी तरह से ठीक हो जाएगी।  पुराना एड़ी का दर्द भी ठीक हो जाएगा। 

बहुत से लोगों के लाखों रुपए इस उपाय से बच सकते हैं।
पैर में फटी एड़ियां और डेड स्किन रिमूव हो जाती है और पैर कोमल हो जाते हैं।

*यह उपाय करने के लिए हमें घर में ही उपलब्ध कपूर और नींबू ये दो चीजें चाहिए।*
*इस उपाय को करने के लिए डेढ़ से दो लीटर गुनगुना पानी लें जिसका तापमान पैर को सहन होने जितना गरम हो,*
*उसमे आधे नींबू का रस निचोड़े और फिर नींबू को भी उस पानी में डाल दें।*
*फिर दूसरी चीज कपूर है, कोई भी कपूर चलेगा। कपूर की तीन गोली बारीक पीसकर उसका पाउडर बना लें। यह भी उस पानी में मिला लें।*
*फिर पांच से दस मिनट तक पैरों को इस पानी में डाल कर रखें।*

जैसे ही आप पैरों को पानी में डालेंगे तो आपको इससे सिर से पैर तक एक तरह से करंट का अनुभव होगा। आपके सिर के बालों से पैर तक की सारी नसे मुक्त होने का स्पष्ट रूप से अनुभव होगा। इसका कारण यह है कि हमारे पैरों में 64 एकुप्रेशर पॉइंट होते हैं जो हमारे शरीर की सभी नसों के साथ जुडे होते हैं।

*यह नींबू और कपूर वाला गुनगुना पानी इन 64  एक्यूप्रेशर पॉइंट्स को खोल देता है और इससे शरीर की सारी नसें एकदम से री–एक्टिवेट हो जाती हैं और पूरी तरह से खुल जाती हैं ऐसा अनुभव होता है।*

इस उपाय में सिर्फ पांच से दस मिनट तक इस पानी में पैर डालकर रखने है। और यह दिन में कभी भी सुबह या शाम को कर सकते है।

*इससे हाथ पैर में होने वाली झंझनाहट (खाली चढ़ना) बंद हो जाती हैं।*
*और*
*कोई नस दबी या अकड़ गई है तो वह खुल जाएगी। और सिरदर्द भी इस उपाय से बंद हो जाता है।*
*जिन लोगों को माइग्रेन की तकलीफ हो वह भी बंद हो जाएगी, पानी में पैर रखने के साथ ही।*
*अगर स्नायु अकड़ गये हो या शरीर दर्द कर रहा हो तो यह उपाय करके देखिए।* 

इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है और यह सरल रूप से किया जा सकता है। 
पांच दिन यह उपाय करना है। यह उपाय दिखने में तो सरल लगता है मगर इस का रिज़ल्ट बहुत ही अच्छा और असरदार होता है।


*जीवन का आधार, आयुर्वेद एवं नेचुरोपैथी...*

*एलोपैथी 20% स्वस्थ रहने के लिये और 80% लगातार इलाज के लिये यानी कंट्रोल करने के लिए होती हैं.!*

WHO के अनुसार, भारत में ज्यादा से ज्यादा केवल 350 दवाओं की आवश्यकता है और हमारे देश में बिक रही है 95000 दवाएं।
यानी जिन दवाओं कि जरूरत ही नहीं है वो डॉक्टर हमे खिलाते है क्यों कि बिकेगी तो कमिशन।
एक बात साफ़ तौर पर साबित होती है कि भारत में एलोपेथी का इलाज कारगर नहीं हुवा है। इतना पैसा खर्च करने के बाद भी बीमारियाँ कम नहीं बल्कि और बढ़ गई है।
यानी हम बीमारी को ठीक करने के लिए जो एलोपेथी दवा खाते है उससे और नई तरह की बीमारियाँ सामने आने लगी है।
कम्पनियां डॉक्टरों को बिकवाने के लिये कमिशन देती है।
डॉक्टर कमिशनखोर हो या यूँ कहे की डॉक्टर दवा कम्पनियों के एजेंट हो गए है।
सारांश में यदि हम कहे कि मौत का खुला व्यापार धड़ल्ले से पूरे भारत में चल रहा है तो कोई गलत नहीं होगा।
फिर सवाल आता है कि अगर इन एलोपेथी दवाओं का सहारा न लिया जाये तो क्या करे ?
इन बामारियों से कैसे निपटा जाये ?
..तो इसका एक ही जवाब है आयुर्वेद.!

*एलोपेथी के मुकाबले आयुर्वेद श्रेष्ठ क्यों है ?*
(1) आयुर्वेद या नेचुरोपैथी की दवाएं किसी भी बीमारी को जड़ से समाप्त करती है, जबकि एलोपेथी की दवाएं किसी भी बीमारी को केवल कंट्रोल में रखती है।

(2) आयुर्वेद का इलाज लाखों वर्षो पुराना है, जबकि एलोपेथी दवाओं की खोज कुछ शताब्दियों पहले हुआ|

(3) और सबसे बड़ा कारण है कि आयुर्वेद या नेचुरोपैथी की दवाएं घर में, पड़ोस में या जंगल में आसानी से उपलब्ध हो जाती है, जबकि एलोपेथी दवाओं के लिये गाँव से शहर आकर डॉक्टर से लिखवाना पड़ेगा।

(4) आयुर्वेदिक दवाएं बहुत ही सस्ती है या कहे कि मुफ्त की है, जबकि एलोपेथी दवायें बहुत महंगी है।
एक अनुमान, एक आदमी की जिंदगी की कमाई का लगभग 40% हिस्सा बीमारी और इलाज में ही खर्च होता है।

(5) आयुर्वेदिक या प्राकृतिक दवाओं का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है,
जबकि एलोपेथी दवा को एक बीमारी में इस्तेमाल करो तो उसके साथ दूसरी बीमारी अपनी जड़े मजबूत करने लगती है|

(6) आयुर्वेद या प्रकृति का सिद्धांत, कि इंसान कभी बीमार ही न हो और इसके छोटे छोटे उपाय है जो बहुत ही आसान है, स्वस्थ रहने के लिये। एलोपेथी के पास इसका कोई सिद्दांत नहीं है|

*(7) आयुर्वेद या नेचुरोपैथी का 80% हिस्सा स्वस्थ रहने के लिए है और केवल 20% हिस्सा में कंट्रोल करने के लिए होता है,*
*जबकि एलोपेथी का 20% हिस्सा स्वस्थ रहने के लिए है और 80% हिस्सा इलाज या कंट्रोल के लिए होता है।*


 *अमेरिका में रसोई में भोजन बनाना छोड़ने का दुष्परिणाम....*
*उन्मुक्त परन्तु विघटित होता समाज भी और परिवार भी...*
*सच्चाई बहुत डरावनी है....*
अमेरिका में क्या हुआ जब घर में खाना बनाना बंद हो गया? 
*1980 के दशक के प्रसिद्ध अमेरिकी अर्थशास्त्रियों ने अमेरिकी लोगों को चेतावनी कि यदि वे परिवार में आर्डर देकर बाहर से भोजन मंगवाऐंगे तो परिवार व्यवस्था धीरे धीरे समाप्त हो जाएगी।*
साथ ही दूसरी चेतावनी ये भी दी कि यदि उन्होंने बच्चों का पालन पोषण घर के बुजुर्गों के स्थान पर बाहर से पालन पोषण की व्यवस्था की तो यह भी परिवार व्यवस्था के लिए घातक होगा।
लेकिन बहुत कम लोगों ने उनकी सलाह मानी।

घर में खाना बनाना लगभग बंद हो गया है,
और बाहर से खाना मंगवाने की आदत (यह अब नॉर्मल है), अमेरिकी परिवारों के विलुप्त होने का कारण बनी है जैसा कि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी।

प्यार से खाना बनाना मतलब परिवार के सदस्यों के साथ प्यार से जुड़ना।

*पाक कला अकेले खाना बनाना नहीं है। केंद्र बिंदु है, पारिवारिक संस्कृति का।*

अगर कोई किचन नहीं है, तो बस एक बेडरूम है, यह परिवार नहीं है, यह एक हॉस्टल है।

*उन अमेरिकी परिवारों के बारे में जाने...*
*जिन्होंने अपनी रसोई बंद कर दी और सोचा कि अकेले बेडरूम ही काफी है?*

*(1)- 1971 में, लगभग 72% अमेरिकी परिवारों में एक पति और पत्नी थे, जो अपने बच्चों के साथ रह रहे थे।*
*2020 तक, यह आंकडा 22% पर आ गया।*

*(2)- पहले साथ रहने वाले परिवार अब नर्सिंग होम (वृद्धाश्रम) में रहने लगे हैं।*

*(3)- अमेरिका में, 15% महिलाएं एकल महिला परिवार के रुप में रहती हैं।*

*(4)- 12% पुरुष भी एकल परिवार के रूप में रहते हैं।*

*(5)- अमेरिका में 19% घर या तो अकेले रहने वाले पिता या माता के स्वामित्व में हैं।*

*(6)- अमेरिका में आज पैदा होने वाले सभी बच्चों में से 38% अविवाहित महिलाओं से पैदा होते हैं।*
*उनमें से आधी लड़कियां हैं, जो अमेरिका के स्कूलों में जा रही हैं।*

*(7)- संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 52% पहली शादियां  तलाक में परिवर्तित होती हैं।*

*(8)- 67% दूसरी शादियां भी  समस्याग्रस्त हैं।*

*अगर किचन नहीं है और सिर्फ बेडरूम है तो वह पूरा घर नहीं है।*

*संयुक्त राज्य अमेरिका विवाह की संस्था के टूटने का एक जीता जागता उदाहरण है।*
*हमारे आधुनिकतावादी भी अमेरिका की तरह दुकानों से या आनलाईन भोजन ख़रीद रहे हैं और खुश हो रहे हैं कि भोजन बनाने की समस्या से हम मुक्त हो गए हैं। इस कारण भारत में परिवार धीरे धीरे अमेरिका में परिवारों की तरह नष्ट हो रहे हैं।*

*जब परिवार नष्ट होते हैं तो मानसिक और शारीरिक दोनों ही स्वास्थ्य बिगड़ते हैं।*
*बाहर का खाना खाने से अनावश्यक खर्च के अलावा शरीर मोटा और संक्रमण के प्रति संवेदनशील हो सकता है।*

*इसलिए घर पर खाना पकाना, परिवार के सुखी रहने का एकमात्र कारण नहीं है।*
*बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी आवश्यक है।*

*इसलिए हमारे घर के बड़े-बूढ़े लोग, हमें बाहर के खाने से बचने की सलाह देते थे लेकिन...*
*आज हम अपने परिवार के साथ रेस्टोरेंट में खाना खाते हैं...",*
*स्विगी और ज़ोमैटो के माध्यम से अजनबियों द्वारा पकाए गए भोजन को ऑनलाइन ऑर्डर करना और खाना, उच्च शिक्षित, मध्यवर्गीय लोगों के बीच भी फैशन बनता जा रहा है।*

*दीर्घकालिक आपदा होगी ये आदत...*
*अगर वो ऑनलाइन कंपनियां जो मनोवैज्ञानिक रूप से तय करती हैं कि हमें क्या खाना चाहिए...*

*हमारे पूर्वज किसी भी यात्रा पर जाने से पहले घर का बना खाना बनाकर ही ले जाते थे.!*

*इसलिए घर में ही बनाएं,* *मिल-जुलकर खाएं और खुशी से रहें।*
*पौष्टिक भोजन के अलावा, इसमें प्रेम और स्नेह निहित है।*



 *तुलसी मुख्यतः रूप से पांच प्रकार की पायी जाती है...*
*श्याम तुलसी,*
*राम तुलसी,*
*श्वेत/विष्णु तुलसी,*
*वन तुलसी और*
*नींबू तुलसी।*

*इन पांच प्रकार की तुलसी का अर्क निकाल कर पंचतुलसी का निर्माण किया जाता है।*

*तुलसी संसार की एक बेहतरीन*
*एंटी-ऑक्सीडेंट,*
*एंटी- बैक्टीरियल,*
*एंटी- वायरल,*
*एंटी- फ्लू,*
*एंटी-बायोटिक,*
*एंटी-इफ्लेमेन्ट्री व*
*एंटी–डिजीज है।*

*(1). पंच तुलसी अर्क के एक बून्द एक ग्लास पानी में या दो बून्द एक लीटर पानी में डाल कर पांच मिनट के बाद उस जल को पीना चाहिए। इससे पेयजल विष और रोगाणुओं से मुक्त होकर स्वास्थवर्धक पेय हो जाता है।*

*(2). पंच तुलसी अर्क 200 से अधिक रोगो में लाभदायक है जैसे के फ्लू, स्वाइन फ्लू, डेंगू, जुखाम, खासी, प्लेग, मलेरिया, जोड़ो का दर्द, मोटापा, ब्लड प्रेशर, शुगर, एलर्जी, पेट के कीड़ो, हेपेटाइटिस, जलन, मूत्र सम्बन्धी रोग, गठिया, दमा, मरोड़, बवासीर, अतिसार, दाद, खाज, खुजली, सर दर्द, पायरिया, नकसीर, फेफड़ो सूजन, अल्सर, हार्ट ब्लोकेज आदि।*

*(3). पंच तुलसी एक बेहतरीन विष नाशक है और शरीर से विष (toxins) को बाहर निकालती है।*

*(4). पंच तुलसी स्मरण शक्ति को बढ़ाता है और साथ ही साथ शरीर के लाल रक्त सेल्स (Haemoglobin) को बढ़ने में अत्यंत सहायक है।*

*(5). पंच तुलसी भोजन के बाद एक बूँद सेवन करने से पेट सम्बन्धी बीमारियां बहुत काम लगाती है।* 

*(6). पंच तुलसी के 4–5 बूँदे पीने से महिलाओ को गर्भावस्था में बार बार होने वाली उलटी के शिकायत ठीक हो जाती है।*

*(7). आग के जलने व किसी जहरीले कीड़े के कांटने से पंच तुलसी को लगाने से विशेष रहत मिलती है।* 

*(8). दमा व खाँसी में पंच तुलसी अर्क की दो बुँदे थोड़े से अदरक के रस और शहद के साथ मिलाकर सुबह– दोपहर– शाम सेवन करे।*

*(9). यदि मुँह में से किसी प्रकार की दुर्गन्ध आती हो तो पंच तुलसी की एक बूँद मुँह में डाल ले दुर्गन्ध तुरंत दूर हो जाएगी।*

*(10). दांत का दर्द, दांत में कीड़ा लगना, मसूड़ों में खून आना आदि में पंचतुलसी की  4–5 बूँदे पानी में डालकर कुल्ला करने से तुरन्त आराम मिलता है।*

*(11). सर दर्द, बालो का झड़ना  बाल सफ़ेद होना व सिकरी आदि समस्याओं में पंचतुलसी की 8–10 बूंदे  हर्बल हेयर आयल के साथ मिलाकर सर, माथे तथा कनपटियों पर लगाये।*

*(12). पंच तुलसी के 8–10 बूँदे नारियल तेल में  मिलाकर शरीर पर मलकर रात्रि में सोये , मच्छर नहीं काटेंगे।*

*(13). कूलर के पानी में पंचतुलसी की 8–10 बूँदे डालने से सारा घर विषाणु और रोगाणु से मुक्त हो जाता है तथा मक्खी, मच्छर भी घर से भाग जाते है।*

*(14). पंचतुलसी में सुन्दर और निरोग बनाने की शक्ति है। यह त्वचा का कायाकल्प कर देती है। यह शरीर के खून को साफ करके शरीर को चमकीला बनती है।*

*(15). पंचतुलसी की दो बूँदे एलोवेरा जैल में मिलाकर चेहरे पर सुबह व रात को सोते समय लगाने पर त्वचा सुन्दर व कोमल हो जाती है तथा चेहरे से प्रत्येक प्रकार के काले धेरे, झाइयां, कील मुँहासे व झुरिया नष्ट हो जाती है।*

*(16). पंचतुलसी के नियमित उपयोग से कोलेस्ट्रोल का स्तर कम होने लगता है, रक्त के थक्के जमने कम हो जाते है व हार्ट अटैक और कोलैस्ट्रोल की रोकथाम हो जाती है।*

*(17). पंचतुलसी को एलोवेरा जेल में  मिला कर लगाने से प्रसव के बाद पेट पर बनने वाले लाइने (स्ट्रेच मार्क्स) दूर हो जाते है।*

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