अमेरिका लैंड ऑफ़ डाइवर्सिटी है। ओरिजिनल अमेरिकन तो हैं ही नहीं। हाँ ब्रिटिश, जर्मन, स्पैनिश, फ़्रेंच आदि के लोगों के साथ भारतीय, चाइनीज़, जापानीज सभी मूल के लोग वहाँ हैं और यह सब अमेरिकन कहलाते हैं। मुख्य भाषा अंग्रेजी है पर वह बोलने का तरीक़ा और वोकब इंग्लैंड से इतना अलग है कि वह इंग्लैंड वाली अंग्रेज़ी को भी फ़ोरेन लैंग्वेज कहते हैं।
अब चूँकि इतनी तरह के लोग और भाषाएँ हैं तो अपने को श्रेष्ठ कहना, दूसरों का मजाक उड़ाने की कोशिश करना स्वाभाविक है। पर वहाँ विद्यालयों में अच्छे अध्यापक / पैरेंट्स यह बात बच्चों को समझाते हैं कि यदि किसी का अंग्रेज़ी बोलने का तरीक़ा तुमसे अलग दिखे तो ध्यान रखना वह तुमसे ज्यादा समझदार है उसे तुमसे कम से कम एक भाषा एक्स्ट्रा आती है। और सच भी है, यदि एक भाषा, एक जैसा भोजन, एक जैसे कपड़े सर्वश्रेष्ठ होते तो ईश्वर सबको वही भाषा बोलते हुवे, वही भोजन खाते हुवे और वही कपड़े पहने पैदा करता। ईश्वर ने सबको बग़ैर कपड़े के, हंसने / रोने की भाषा और माँ का दूध पीने की क्षमता देकर भेजा, एकमात्र यही चीज सारे मनुष्यों में कॉमन है बाक़ी सब क्षेत्र / परिस्थिति का बनाया है।
भारत विविधता में अमेरिका का बाप है। वहाँ जितने देशों की भाषाएँ हैं भारत देश में ही उससे ज्यादा भाषाएँ हैं। वहाँ जितने देशों का भोजन है, भारत में हर ज़िले का अलग भोजन है। वहाँ बस दो तीन तरह के कपड़े पहने जाते हैं, यहाँ कश्मीर से कन्याकुमारी और अरुणांचल से गोवा तक हर प्रदेश का अलग फैशन है, अलग कपड़े हैं।
बस जहां हम फेल होते हैं वह यह कि हम यूनिटी इन डाइवर्सिटी अर्थात् विविधता में एकता नहीं समझ पाते। तमिल भाषा वालों की समस्या हिन्दी से होती है तो हिन्दी वालों को लगता है जो हिन्दी बोले वही हिन्दू। नार्थ ईस्ट वालों को लगता है कि उत्तर भारतीय उन्हें भारत का हिस्सा नहीं मानते तो उत्तर भारतीयों को लगता है कि जो दाल चावल रोटी सब्ज़ी खाये वही हिन्दू और वही भारतीय। यहाँ तक कि जो भारत से बाहर NRI हैं, उन्हें लगता है कि भारत देश को पैसे तो हमारे चाहिए लेकिन भेद भाव ज़बरदस्त तो भारत के गाँव में रहने वाले व्यक्ति को लगता है पैसे भेजना NRI की मजबूरी है, असली भारतीय है तो गाँव में रह कर मच्छर से ख़ुद को कटवाये तो जाने।
जिस दिन पूरा भारत यह बात समझ जाएगा कि ये सब माइनर बातें हैं, फ़र्क़ नहीं पड़ता कौन क्या पहनता है कौन क्या खाता है कौन क्या भाषा बोलता है एज लाँग एज वह भारतीय है उस दिन भारत ऐसी ग्रोथ करेगा कि दुनिया देखती रहेगी।
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