"" दहलीज "" पार करके एक औरत,
जब अपनी मर्यादा को लांघकर,
एक पुरुष के प्रेम में पड़ती है!
तो वो चरित्रहीन कहलाती है!!
ता उम्र एक जायज से रिश्ते में,
जब उसे प्रेम नही मिलता।
जिसकी उसे तलाश थी हरदम
तब थाम लेती है वो,
उस अनजान पुरुष का हाथ और
वो अनायास ही दौड़ पड़ती है
उस अनछुए पहलू के पास
और... सिमट जाती है उसमें
जो उसे मुस्कुराना सिखाता है,
उसे जीना सिखाता है और ..
खुद से मोहब्बत करना सिखाता है!!
अपनी हर जिम्मेदारी को निभाते हुए
अगर वो खुद से प्रेम करती है।
तो वो चरित्रहीन कैसे हुई ?
अगर हक है पुरुष को
मोहब्बत करने का तो
औरत को क्यों नहीं?
अगर खुश रहना ?
चरित्रहीनता की निशानी है
तो होने दो उसे चरित्रहीन!
हक है उसे जीने का
क्योंकि उसके पास भी है जीवन अधिकार!!
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