फूल ऐसे भी हैं जो
खिले ही नहीं।
जिन्हें खिलने से पहले ही
फ़िज़ा खा गई।।
आशाओं के तिनके चुन-चुनकर सपनों के महल बनाए थे। सोचा था, तुम बड़े होकर मेरे जीवन का सहारा बनोगे। पर तुम तो मुझे छोड़कर चले गए, सपनों का महल तोड़कर चले गए। ऐसा तूफ़ान आया मेरी ज़िंदगी में कि मेरे सब सपने बिखर गए। अभी कुछ दिन पहले ही तुमने अपना छठवाँ जन्मदिन मनाया था। मैंने तुमसे वादा किया था कि अगले जन्मदिन पर तुम्हें साइकिल ज़रूर दिलाऊँगा। लेकिन तुम तो छोड़कर चले गए। तुम्हारे जाने की खबर सुनकर मेरा दिल टुकड़े-टुकड़े हो गया। मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई। बहते हुए आँसू थम न सके। बस तुम मेरी ज़िंदगी में दो कदम ही साथ चले और फिर हमेशा-हमेशा के लिए छोड़ गए।
मैंने तुम्हारी उंगली थामकर तुम्हें चलना सिखाया था। मैंने सोचा था, कल तुम मेरा हाथ पकड़कर मेरे साथ चलोगे। जब मैं बूढ़ा हो जाऊँगा तो तुम मेरा सहारा बनोगे, मेरा नाम रोशन करोगे। मेरे बाद भी इस दुनिया में मेरा नाम ज़िंदा रखोगे। जब भी लोग तुम्हें देखेंगे, तुम्हें मेरा लाल कहेंगे। लेकिन तुमने मेरे सारे सपने तोड़ दिए। क्यों चले गए? कहाँ चले गए?
उस दिन जल्दी-जल्दी में मैं तुम्हारे लंच बॉक्स में तुम्हारा मनपसंद नाश्ता नहीं रख पाई थी। सोचा था, जब तुम स्कूल से लौटोगे तो तुम्हारे लिए तुम्हारा मनपसंद भोजन बनाऊँगी और अपने हाथों से खिलाऊँगी। पर अफ़सोस, तुम कभी लौटकर नहीं आए। तुम्हारे दुनिया छोड़कर जाने की खबर आई।
यह व्यथा उन माँ-बाप की है जिन्होंने अपने मासूम बच्चों को खोया है।
हमारे देश भारत में हाल के वर्षों में बच्चों और युवाओं में हार्ट अटैक से मौत की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि हुई है। बच्चों की मौत का सबसे बड़ा कारण पढ़ाई का अत्यधिक तनाव है। जितना उनका वज़न नहीं होता, उससे ज़्यादा वज़न उनके स्कूल बैग का होता है। फास्ट फूड की लत, मिलावटी खाद्य पदार्थ, नकली दूध, नकली मक्खन-घी, रसायनयुक्त सब्ज़ियाँ—यही कुछ ऐसे कारण हैं, जिनकी वजह से मासूम बच्चे अकाल मृत्यु की गोद में समा जाते हैं।
कुछ घटनाएँ सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। हाल ही में 11 वर्षीय छात्रा लक्षिता पटेल की स्कूल में खेलते-खेलते साँसें थम गईं। यह घटना इंदौर के बेटमा क्षेत्र की है। डॉक्टरों के अनुसार बच्ची की मौत कार्डियक अरेस्ट से हुई। ऐसी ही घटना राजस्थान के सीकर ज़िले में हुई, जहाँ 9 वर्षीय बच्ची अपने स्कूल में लंच टाइम पर टिफ़िन बॉक्स खोलते ही दिल का दौरा पड़ने से वहीं चल बसी। वहीं मध्य प्रदेश के ओरछा में 7 वर्षीय बालक साइकिल चलाकर घर पहुँचा, अचानक सीने में दर्द उठा और उसने माँ से कहा—“माँ, सीने में दर्द हो रहा है।” माँ ने बेटे को गोद में लिटाया, पानी पिलाया, लेकिन मासूम ने माँ की गोद में ही दम तोड़ दिया।
सोशल मीडिया पर भी कई वीडियो सामने आए हैं, जहाँ लोग स्टेज पर मौज-मस्ती और नाच-गाना कर रहे थे और अचानक हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई। वहीं बहुत से युवाओं की जिम में कसरत करते समय दिल का दौरा पड़ने से जान चली गई।
यह बात बिल्कुल सच है कि बाहर का खाना अब ज़हर बन चुका है। डॉक्टर भी मानते हैं कि फ्राइड फूड, पिज़्ज़ा, मोमोज़, बर्गर, कोल्ड ड्रिंक्स और चीनी से भरपूर चीज़ें आपके और आपके बच्चों एवं परिवार के लिए बेहद हानिकारक हैं।
जाने चले जाते हैं कहाँ,
दुनिया से जाने वाले।
कैसे ढूँढे कोई उनको,
नहीं कदमों के भी निशाँ।।
✍️ मोहम्मद जावेद खान
No comments:
Post a Comment