बिल्कुल कड़वा खराब और नंगा सच है बस शर्तें गहराई से और निष्पक्ष होकर सोच विज्ञान और वैज्ञानिक अभिशाप बन चुके हैं हमारे लिएहजारों सालों से अनपढ़ नाई बच्चे का खतना करते आ रहे हैं।किसी ने बच्चे का अंग नहीं काटा
हजारों सालों से अनपढ़ दाइयाँ जचगी से करोड़ों बच्चे नॉर्मल पैदा करवा चुकी हैं ?
फिर पढ़ी-लिखी डॉक्टरें आईं और औरतों का पेट चीरकर बच्चे पैदा करने लगीं?
हजारों सालों से अनपढ़ जर्राह (पहलवान) टूटी हड्डियों को ठीक करते और जोड़ते आ रहे हैं?
फिर ऑर्थोपेडिक सर्जन आ गए. और लोगों की टांगें और पैर काटने शुरू कर दिए??
हजारों सालों से लोग सुरमा लगाते आ रहे थे और 90 साल तक बिना चश्मे के देखते थे??
फिर पढ़े-लिखे डॉक्टर आए स्पेशलिस्ट आ गए और 5 साल के बच्चों को चश्मा लग गया।
हजारों साल से लोग मनों के हिसाब से गुड़ खाते आ रहे हैं और फुटपाथ पर बैठे अनपढ़ बंदे से दांत लगवाते रहते थे। किसी को कैंसर नहीं हुआ।
आज लाखों रुपये लगाकर आधुनिक मशीनरी से इलाज होता है. और फिर भी दांतों का कैंसर बन जाता है।
हजारों सालों से गुर्दे और पित्त की पथरी को हकीम एक पुड़िया से निकाल लेते थे??
अब सबसे आधुनिक तकनीक से पथरी के साथ गुर्दा और पित्त ही निकाल लिया जाता है.
हजारों सालों से बच्चे माँ का दूध या ऊपर वाला गाय भेंस बकरियों का दूध पीते आए हैं और बिना डिब्बे के सेहतमंद रहे हैं?
लेकिन अब डिब्बा लगा दिया गया है. जो माता-पिता के लिए बोझ बन चुका है. और कंपनियों के लिए चाँदी ही चांदी??
अब मेडिकल साइंस ने क्या तरक्की की है.? समझ से परे है हर सरकारी व प्राइवेट हॉस्पिटल में पाँव रखने की जगह नहीं 1 साल के बच्चे से लेकर 90 साल तक सब मरीज बने हुए हैं...
सोचिए हम जितना आधुनिक हुए है उतना ही जीवन कष्टकारी बन गया है।
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