महाशिवरात्रि पर बनने वाले राजयोग और पूजा पाठ विधान -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि
इस बार महाशिवरात्रि 15 फरवरी को रविवार के दिन पड़ रहा है उसे दिन उत्तराखंड नक्षत्र वनिज और शकुनी करण और चंद्रमा मकर राशि में रहेगा इसलिए सर्वार्थ सिद्ध योग बन रहा है पंचग्रही योग भी बन रहा है क्योंकि सूर्य चंद्र बुध शुक्र राहु एक साथ कुंभ राशि में रहेंगे इस बार बुध आदित्य योग लक्ष्मी नारायण धन और शुक्र आदित्य राज्यों बन रहा है फाल्गुन माह की चतुर्दशी तिथि बहुत विशेष होती है।
इस दिन पूजा का समय रात्रि में 11:49 से रात्रि में 12:40 तक रहेगा इस दिन भगवान शिव माता पार्वती का पूजा पाठ और रुद्राभिषेक करने से मां और आत्म शांति होती है और कार्य पूरे होते हैं भगवान शिव और माता पार्वती ही अनंत कोटि ब्रह्मांडों के निर्माता है और उन्हें में समग्र विश्व समाया हुआ है इस दिन पूजा पाठ करने से अनिष्ट ग्रहों की शांति भी होती है और मृत्यु का भय तथा कालसर्प दोष दूर होते हैं पूजा पाठ करते समय अपना नाम पिता का नाम और गोत्र बोलने पर पूजा और प्रभावी हो जाते हैं शिवरात्रि के दिन प्रथम पहर में अर्थात सुबह 6 से 9 बजे एक बार पूजा पाठ करना विशेष फलदाई होता है।
हिमवान पर्वत जो हिमालय में स्थित है वहीं पर माता पार्वती का जन्म हुआ था इसीलिए उन्हें पर्वत पुत्री पार्वती कहा जाता है भगवती पार्वती की मां मैना देवी और पिता हिमवान थे जो सती के रूप में पुनर्जन्म ली थी ऐसा माना जाता है कि रुद्रप्रयाग में त्रियुगीनारायण गांव में गंगा और मंदाकिनी नदी के संगम पर भगवान से और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था इसलिए यहां पर शिव पार्वती और भगवान नारायण की पूजा होती है यह बसंत की ऋतु होती है और मौसम बहुत ही शानदार रहता है वैसे तो भगवान शिव केवल नाम लेने से ही प्रसन्न हो जाते हैं बशर्ते मन और आत्मा शुद्ध हो यदि उन्हें अर्पित करना चाहे तो जल से रुद्राभिषेक कर सकते हैं जल के अलावा दूध दही मक्खन शहर घी से भी रुद्राभिषेक किया जाता है बेलपत्र बेल के फल भांग और धतूरा जैसे फल और श्वेत पुष्प तथा माता पार्वती के लिए लाल या पीले रंग के पुष्प चढ़ाना फलदाई होता है
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