Monday, 11 April 2022

हारी हुई रक्षात्मक लड़ाई लड़ने से क्या फायदा है इससे नदी का प्रवाह रुकने वाला नहीं है कुछ क्षण के लिए उसे बाधित किया जा सकता है बहुत से लोग बड़ी-बड़ी बातें करते हैं लेकिन आज जब प्रबल बहुमत की भाजपा की मोदी सरकार और 18 राज्यों में भाजपा

*हारी हुई रक्षात्मक लड़ाई लड़ने से क्या फायदा है इससे नदी का प्रवाह रुकने वाला नहीं है कुछ क्षण के लिए उसे बाधित किया जा सकता है बहुत से लोग बड़ी-बड़ी बातें करते हैं लेकिन आज जब प्रबल बहुमत की भाजपा की मोदी सरकार और 18 राज्यों में भाजपा या उसके समर्थक दलों के मुख्यमंत्री हैं तब भी किसी भी सनातनी जुलूस या तो हार पर दंगे हो रहे हैं अभी हाल में श्री राम नवमी में जो दंगे हुए उसमें तीन भाजपा शासित प्रदेश के थे मस्जिदों इमामबाड़ा पर लाउडस्पीकर नमाज अजान का समय और उसका शोर बढ़ता ही जा रहा है पालघर कैरोली कैराना जैसे अनगिनत कांड अब भी हो रहे हैं हरे रंग के सपनों की जनसंख्या और आतंक के फरिश्तों का बेशुमार जुल्म बढ़ता ही जा रहा है अभी विदेश की कोई अपनी खुद की वेशभूषा राष्ट्रभाषा नहीं है कहीं से भी दूर दूर तक दीर्घकालिक अरे सांपों का विनाश और केसरिया ध्वज का विकास दिख नहीं रहा है अब जबकि भगवा रंग अपने चरम पर पहुंच चुका है तब यह देश की हालत है कि अपना नया वर्ष भी नहीं है और न कोई एक शिक्षा नीति है और ना देश का अपना राष्ट्रगान है और ना ही देश का कोई अपना नववर्ष है जो है विवाह सब कुछ विदेशी हैं हिंदी संस्कृत को अनिवार्य करने को कौन कहे कक्षा से अंग्रेजी पढ़ाई जाती थी अब वह कक्षा एक से ही अनिवार्य कर दी गई हैं जगतगुरु धोखा विश्व की महाशक्ति बनने का दम मत पालिए एक ही झटके में कश्मीर की तरह टूट कर बिखर जाएगा हो सकता है हम आप इस प्रचंड आक्रमण की बाढ़ से आगे आने वाले समय को अगर नहीं देख रहे हैं तो फिर झूठा नारा लगाने से तलवार बुझने से या प्रति ग्रुप में कुछ भी करने का कोई फायदा नहीं है सबसे बड़ी बात जो सनातनी धर्म आपस में हिंदू बौद्ध जैन सिख पारसी इत्यादि में बट गया है उससे वह आपस में ही लड़ रहा है* 

*और सरकार एक तरफ तो समानता और बराबरी का नारा दे रही है दूसरी और केवल और केवल सनातन धर्म में जाट आरक्षण का जहर घोल रही हैं न्यायपालिका अलग से बेलगाम है ऐसी स्थिति में हम तो केवल यही कहेंगे कि आपस में वाद प्रतिवाद और विवाद करने से लाख गुना बेहतर है कि सारे देश के और विश्व के सनातनी लोग अर्थात हिंदू सिख जैन बौद्ध पारसी लोग संभल जाओ एक हो जाओ वरना वहीं कश्मीर की जतरा अफगानिस्तान ईरान अरब की तरह पाकिस्तान तिब्बत नेपाल भूटान में अमर थाईलैंड श्रीलंका मालदीव इंडोनेशिया मलेशिया हांगकांग सिंगापुर की तरह कहीं कोई सनातन धर्म का नाम लेने वाला नहीं बचेगा और यूनान मिस्र रोम हड़प्पा मोहनजोदड़ो माया इनका आदि सभ्यताओं की तरह केवल इतिहास में अतीत की वस्तु बनकर सनातन धर्म रह जाएगा व्यक्ति विशेष को धर्म और देश से ज्यादा महत्व देने का ही फल है 75 वर्ष में सनातनी हिंदू 11 देशों से सिमट कर केवल दो देश में बचे हैं और उनकी जनसंख्या 95% से घटकर 65% हो गई है और जल्दी ही असंतुलन और बिगड़ जाएगा सुखी 2021 की जनगणना हुई ही नहीं इसलिए कुछ कहा जाना संभव नहीं है मुझे तो लगता है कि जिसे हम अपना रक्षक समझकर प्रचंड मोहम्मद सारी सुख सुविधाएं और कुर्सी दे रहे हैं वह सभी बारी बारी से हमारे साथ विश्वासघात करेंगे नेहरू इंदिरा गांधी मोरारजी देसाई अटल बिहारी बाजपेई नरसिंह राव मनमोहन सिंह आखिर किसी ने सनातन धर्म के लिए क्या किया है ज्यादा कुछ ना लिख कर मैं यह बात भविष्य के लिए सोचता हूं और अगले 5 वर्ष में हम कहां पहुंचेंगे वह देखकर अगली बात कहेंगे स्थिति उससे अधिक गंभीर है जितना सोची जा रही है सारे शांतिदूत आतंक के फरिश्ते हरे रंग के विषैले सांप निर्बाध रूप से बढ़ते चले जा रहे हैं और हम झूठी वाहवाही कर रहे हैं डॉ दिलीप कुमार सिंह*

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