*क्या सचमुच जौनपुर में अतिक्रमण हट गया है या फिर मीडिया और सोशल मीडिया में कुछ चुने हुए शातिर लोगों के द्वारा जानबूझकर इसका हवा खड़ा किया गया है लेख के अंत में मैं कुछ चित्र दूंगा जिससे आपको समझ में आ जाएगा कि वास्तव में अगर एक पैसे का अतिक्रमण हटा रहा है तो 99 पैसे का जानबूझकर खूब प्रचार-प्रसार किया जा रहा है जिससे लोग समझे कि पुलिस और प्रशासन वाले सचमुच ही अवैध निर्माण अतिक्रमण हटा रहे हैं*
*जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है जैसी चौराहे से लेकर प्रसाद होटल तक तो बड़े जोर शोर से अतिक्रमण हटाया गया लेकिन उसके आगे सब वैसे का वैसा पड़ा हुआ है इतना ही नहीं जबकि मुख्य अतिक्रमन प्रसाद होटल से लेकर ओलांदगंज होता हुआ शाहीपुर सासु चौराहा और कोतवाली तक स्टेशन तक चला गया है वहां तो कुछ भी छुआ तक नहीं गया है मैंने आज खुद उसका निष्पक्ष रुप से गहराई से अध्ययन किया और अतिक्रमण हटाने में पक्षपात भी हुआ है यह भी सत्य है ओलांदगंज में तो उचित पत्थर हटाकर खुर्जा गया है*
*सबसे भयंकर अतिक्रमण तो कोतवाली के चारों तरफ नवाब युसूफ रोड नखास वाली गली में और नगर पालिका परिषद से हॉट मिलियंस और इसी तरह की तमाम जगहों पर है जहां बुलडोजर गया ही नहीं इस समय जबकि 5:30 बज रहे हैं सद्भावना फूल के उत्तरी भाग में घनघोर जाम लगा हुआ है अतिक्रमण तभी सफल हो सकता है जबकि अतिक्रमण हटाकर सभी दुकानदारों से पैसा वसूल किया जाए और पूरे शहर में रेलिंग लगा दिया जाए और इसका पैसा दुकानदारों से ही वसूला जाए*
*दूसरा रेलिंग लग जाने से जो पटरी खोमचा थेला लग जाता है और उसके बाद लोक साइकिल मोटरसाइकिल दो पहिया चार पहिया तीन पहिया सड़क पर खड़ा कर देते हैं वह अपने आप समाप्त हो जाएगा सबसे बड़ा जाम तो इसीलिए लगता है कि लोग सड़क के दोनों और दो पहिया तीन पहिया चार पहिया वाहन अपने बाप की सड़क समझ कर खड़ा कर देते हैं और खुद ही जाम में फस कर शासन को कोसते भी हैं कुल मिलाकर वास्तविक रुप से पहली बार जौनपुर में योगी जी के शासनकाल में ही अतिक्रमण हटाया गया है लेकिन वह केवल ऊंट के मुंह में जीरा के बराबर हैं जब तक झील खाता सहित सारे अतिक्रमण हटा नहीं जाते और लोग सड़कों पर वाहन खड़ा करना बंद नहीं करते तब तक अतिक्रमण हटाओ अभियान का कोई फायदा नहीं है सच यही है बाकी प्रिंट इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया के लोग सरकार के इशारों पर चाहे जो कहते रहे डॉ दिलीप कुमार सिंह*
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