*श्री दक्ष उत्तम प्रकृति संस्थान द्वारा *प्रकृति बचाओ महा अभियान* के राष्ट्रीय अध्यक्ष *डॉ उत्तम सिंह प्रजापति* के द्वारा:
कुदरत का उपहार –
शरीर, प्रकृति, धरती मां और मोसमी फल।
कुदरत ने इंसान को जीवन जीने का सबसे सरल और वैज्ञानिक तरीका दिया है। यह नियम है कि जैसे ही सूरज उगता है, वैसे ही शरीर को जागकर अपने जीवन का आरंभ करना चाहिए। “कुदरत लेकर आए, सूरज के साथ खाएं” यह पंक्ति केवल एक सुंदर विचार नहीं बल्कि एक पूर्ण जीवन-दर्शन है।
शरीर के अनुसार :
मानव शरीर प्रकृति की धड़कन से जुड़ा हुआ है। सूर्योदय के समय वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होती है और यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। सुबह-सुबह उठकर हल्का भोजन, फल और जल ग्रहण करने से पाचन क्रिया उत्तम रहती है। शरीर का जैविक घड़ी (biological clock) सूरज की रोशनी के साथ जुड़ी होती है। यदि हम सूर्य के साथ जागें और सूर्यास्त के बाद विश्राम लें, तो शरीर रोगों से दूर, तन-मन से स्वस्थ और आत्मा से प्रसन्न रहता है।
प्रकृति के अनुसार :
प्रकृति ने हर ऋतु में अलग-अलग प्रकार के फल, फूल और अनाज दिए हैं। ग्रीष्म में तरबूज, खरबूजा, आम जैसे फल शरीर को शीतलता देते हैं। वर्षा ऋतु में हरे पत्तेदार सब्जियां प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती हैं। शरद ऋतु में अमरूद, अनार और आंवला शरीर को ताकत देते हैं। यही नहीं, सर्दियों में गाजर, मूली और संतरा शरीर को ऊष्मा और विटामिन प्रदान करते हैं। प्रकृति अपने समय पर ही आवश्यक पोषण उपलब्ध कराती है, बस हमें उसके अनुसार जीवन जीना चाहिए।
धरती मां के अनुसार :
धरती मां केवल भोजन ही नहीं देती बल्कि जीवन जीने का संपूर्ण आधार भी है। मिट्टी में जो भी पैदा होता है, वह मनुष्य के लिए अमृत है। जैविक खेती से उत्पन्न अन्न, सब्जी और फल न केवल स्वादिष्ट होते हैं बल्कि उनमें औषधीय गुण भी निहित होते हैं। रासायनिक खाद और प्रदूषण से दूर रहकर जब हम धरती मां की गोद में उगे फल खाते हैं, तो शरीर में प्राकृतिक ऊर्जा और दिव्यता का संचार होता है।
पर्यावरण के अनुसार :
यदि हम पर्यावरण को सुरक्षित रखेंगे तो हमें शुद्ध जल, शुद्ध वायु और शुद्ध भोजन मिलेगा। आज प्लास्टिक, प्रदूषण और रसायनों ने हमारी जीवनशैली को बिगाड़ा है। पर्यावरण के अनुरूप जीवन जीना, पेड़-पौधे लगाना और जल को बचाना हमारे कर्तव्य हैं। जब पर्यावरण शुद्ध होगा तभी शरीर स्वस्थ रहेगा और मन आनंदित रहेगा।
फलों के अनुसार :
फल प्रकृति का सबसे बड़ा उपहार हैं। केले में ऊर्जा, आम में स्वाद और विटामिन, सेब में आयरन, संतरे में विटामिन-सी, अनार में रक्तवर्धक शक्ति और आंवला में अमृत तुल्य गुण छिपे हैं। फलों को सूरज की पहली किरणों के साथ लेना शरीर को दिनभर ऊर्जावान रखता है। कुदरत का नियम है कि “सुबह फल, दोपहर अनाज और रात को हल्का आहार”—यही जीवन को लंबा और रोगमुक्त बनाता है।
निष्कर्ष :
यदि हम अपने जीवन को कुदरत के अनुसार ढाल लें, सूरज के साथ उठें, धरती मां के उपहारों का सम्मान करें, पर्यावरण को सुरक्षित रखें और फलों को अपने भोजन में स्थान दें, तो जीवन न केवल स्वस्थ होगा बल्कि सुख, शांति और संतोष से भरा होगा। वास्तव में, “कुदरत लेकर आए, सूरज के साथ खाएं” यह पंक्ति हमें बताती है कि स्वस्थ जीवनशैली का रहस्य प्रकृति की गोद में ही छिपा है।
*प्रकृति बचाओ महा अभियान से जुड़े और राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित रहे*
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