आज भारत को दास बनाने वाले अंग्रेजों के पंचांग से 11 नवंबर के दिन विश्व हिंदी दिवस है लेकिन देश के 99% लोग विशेष कर हिंदी भाषा भारतीय लोग इसको नहीं जानते हैं
क्रिसमस और अंग्रेजी नए वर्ष पर महीना पहले से बधाई शुभकामनाएं देने वाले लोग और विशेष कर हिंदी पत्रकारिता जगत आज बिल्कुल चुपचाप है।
प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति और सभी दलों के सांसद विधायक मंत्री पूरी तरह अंग्रेजी रंग-ढंग में रंग चुके हैं और कोई भी बधाई शुभकामनाएं कल से नहीं दिया है
इसी को कहते हैं दीपक तले अंधेरा घर की मूली सांग बराबर घर का जोगी जोगड़ा आन गांव का सिद्ध इसलिए भारत गणगौर दुर्गति को प्राप्त हो रहा है
भारत के लोग पूरी तरह काले अंग्रेज विदेशीक्रीत दास और मंत्रालय के मानस पुत्र बन चुके हैं केवल पांच प्रतिशत लोग अपवाद बचे हैं।
दुनिया भर की भाषण बाजी वह भी अंग्रेजी में देने का चलन हो गया है वह तो भला है कि राजनेताओं को और नई पीढ़ी को दिन-रात प्रयास करने पर भी अच्छी तरह लिखना पढ़ना बोलना नहीं आता है वरना यह लोग हिंदी भाषा को छूते ही नहीं।
हिंदी संस्कृत की उत्तराधिकारी है विश्व की सबसे बड़ी और वैज्ञानिक भाषा है इसमें जो कहते हैं वही लिखते हैं वही बोलते हैं इसका इतिहास 1500 वर्ष पुराना है जिसको 1000 वर्ष सिद्ध करने का प्रयास सत्ता पक्ष विपक्ष और विदेश द्वारा खरीदे गए विद्वानों से हो रहा है
हिंदी का व्याकरण सर्वश्रेष्ठ है इसका शब्द को सबसे बड़ा है इसमें दुनिया की हर भाषा को समाहित करने की शक्ति है और विज्ञान टेक्नोलॉजी सहित आम बोलचाल की भाषा इससे अच्छी कोई भाषा नहीं हो सकती है । बंद हो चुका है कि हिंदी से सुंदर सरल वैज्ञानिक और व्याकरण की भाषा दुनिया में कोई नहीं है।
भारत के काले अंग्रेज और शतक पर आसीन लोग वामपंथी और कांग्रेसी लोगों के सहारे से यह अफवाह और भ्रम फ्लेट हैं कि बिना अंग्रेजी के विज्ञान टेक्नोलॉजी और आज की भाषा में प्रगति नहीं की जा सकती इन काले अंग्रेजों को मैं बता देना चाहता हूं कि चीन जापान जर्मनी फ्रांस और रूस जैसी महान शक्तियां अपने भाषा और साहित्य के सहारे पूरी दुनिया में सर्वश्रेष्ठ हैं और सर्वोच्च शिखर पर विद्वान है यदि 1947 में अंग्रेजी हटाकर हिंदी अपना ली गई होती तो आज भारत सोने की चिड़िया और विज्ञान टेक्नोलॉजी साहित्य का सर्वश्रेष्ठ देश और जगतगुरु बन गया होगा लेकिन यह अंग्रेजी भाषा बोलकर प्रधानमंत्री रामराज ला रहे हैं और हिंदी हिंदू हिंदुस्तान का मुंगेरीलाल का हसीन सपना दिखा रहे हैं।
सही अपनी हीन भावना के चलते और देश तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री की अपेक्षा के चलते हिंदी के एक दर्जन लेखन और रचनाओं को आज तक नोबेल पुरस्कार नहीं मिला जिसमें जयशंकर प्रसाद सुमित्रानंदन पंत सूर्यकांत त्रिपाठी निराला महादेवी वर्मा अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध मुंशी प्रेमचंद जैसे एक दर्जन लोग बहुत आराम से नोबेल पुरस्कार पढ़ सकते थे लेकिन इनको आज तक भारत रत्न नहीं दिया गया तो नोबेल पुरस्कार क्यों मिलेगा।
यह चीनी और अंग्रेजी भाषा से अधिक बोली जाती है और 100 करोड़ से अधिक लोग बोलते हैं लेकिन भारत का सरकार या कड़ाई से तीसरे नंबर पर जबरदस्ती ले आता है भारत के 90 प्रेस से लोग हिंदी बोलने पढ़ने और समझते हैं और दुनिया के करोड़ों लोग भारत के बाहर हिंदी बोल रहे हैं सीख रहे हैं । यह भारत सरकार ने चाहा होता तो आज दुनिया के हर देश के लोग हिंदी भाषा पर लिख बोल और सीख रहे होते लेकिन वह तो काले अंग्रेजों की नई फसल दिन रात तैयार कर रहे हैं
ऐसा कहा जाता है कि अमेरिका इंग्लैंड के सारे पर भारत की सरकारी से संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा जानबूझकर नहीं बना रही है वरना कब किया अंतर्राष्ट्रीय भाषा बन गए होती अभी तो हिंदी को राष्ट्रीय भाषा भी नहीं घोषित किया गया है कामकाज करना तो दूर की बात है बची खुची भाषा वर्तमान सरकार अंग्रेजी लाज कर पूरा कर देरही है।
जब तक हिंदी के साथ अंग्रेजी का गोल नहीं पिलाया जाए तब तक अच्छे से अच्छा हिंदी का वक्त खुद को अच्छा वक्त नहीं समझता है दूसरों की तो बात ही छोड़ दो प्रधानमंत्री तो 10 वाक्य में पांच वाक्य अंग्रेजी जानबूझकर बोलते हैं और गुड मॉर्निंग बनारस पड़ेगा तो बढ़ेगा इंडिया खेलेगा इंडिया इंडिया राइजिंग लोकल फार वोकल डबल इंजन सरकार जैसे अनर्गल शब्द जानबूझकर गढ़े जा रहे हैं।
आज हिंदी के पत्र पत्रिका समाचार पत्रों में देख लो अधिकांश के मुख्य पृष्ठ पर उल्टा सीधा लिखा हुआ है और किसी में इस विषय पर अच्छा लेख प्रकाशित करने और हिंदी भाषी लोगों की रचनाओं को सम्मानित करने की आवश्यकता नहीं समझे
हर प्रकार की उपेक्षा अन्याय अत्याचार और देशवासियों का भेदभाव सहकर भी हिंदी दिन-रात प्रगति करते हुए अघोषित त रूप से राष्ट्रभाषा और विश्व भाषा के पद पर आरूढ़ है और जैसे ही कोई सच्चा देशभक्त
प्रधानमंत्री बनेगा या विश्व भाषा हो जाएगी और पूरे देश में अनिवार्य कर दी जाएगी अंग्रेजी को हटा दिया जाएगा।
निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल
बिन निज भाषा ज्ञान के मिटे न हिय को शूल।
इसलिए कहा गया है कि भारत के लोगों को
हमको ना निज गौरव तथा निज र्देश का अभियान है
हम नर नहीं है पशु निरा हैं और मृतक समान है।
हिंदी को मिटाने के लिए ही ज़बरदस्ती मुसलमान ने देशभक्त लोगों को मिटाने के लिए देशद्रोही गद्दारों को मिलकर उर्दू भाषा का जबर्दस्ती आविष्कार किया है जो पूरी दुनिया में कहीं नहीं है केवल भारत में है।
तो क्या हिंदी भाषा और साहित्य समाप्त हो जाएगा बिल्कुल नहीं होगा देश के गद्दार देशद्रोही छिपे हुए लोग विदेशी शेरों पर कितना ही प्रयास कर ले हिंदी निरंतर बढ़ती जाएगी और एक दिन पूरे विश्व में हिंदी का राज होगा हिंदी भाषा में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ कवि साहित्यकार उपन्यासकार एकांकी लेखक नाटककार कवि और विश्व कवि महाकाव्य लेखक हैं जितना विश्व में कहीं नहीं है। विश्व कवि तुलसीदास विश्व कवि जयशंकर प्रसाद सूर्यकांत त्रिपाठी निराला नंदन पंत महादेवी वर्मा चंद्रवरदाई प्रेमचंद अयोध्या सिंह उपाध्याय भारतेंदु हरिश्चंद्र जैसे लाखों लाख लेखक पड़े हुए हैं जिनकी तुलना विश्व में कोई नहीं कर सकता सच तो यही है कि अभी हिंदी साहित्य में एक से बढ़कर एक कवि लेखक साहित्यकार रचनाकार पड़े हैं जिनका अध्ययन ही नहीं किया गया है
यदि जरा भी देश प्रेम है आत्मबोध है अपना गौरव है तो मेरी निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़कर देशभक्ति हिंदी भक्त बन जाइए इसे मैं आपका देश का और सनातन धर्म का उद्धार है
हे देशद्रोहियों गद्दारों हे मैकाले के मानस पुत्रों
हे काले अंग्रेजों हे बिके बुद्धिजीवी लोगों हे नकली राजनेता लोगों
हे हिंदी की खाने वालों अंग्रेजी की गाने वालों
तुम याद रखो याद तूने हिंदी से गद्दारी करके अंग्रेजी को पकड़ा तो याद रहे इतिहास में तुमको क्षमता करेगा ज्ञात रहे पीढ़ियां तुम्हारी करनी पर पछताएंगे भारत की लाली में काली पुत्र जाएगी
हिंदी साहित्य में एक से बढ़कर एक महान रचनाएं हैं जिसमें से केवल एक ही रचना पूरे विश्व के हर साहित्य के बराबर है।रामचरितमानस सूरसागर कबीर की साखी सरहपा का सिद्ध काव्य चंद्रवरदाई का पृथ्वीराज रासो जगनिक का ऑल्ह खंड विश्व काव्य कामायनी हरिऔध का प्रिय प्रकाश सुमित्रानंदन पंत का चिदंबरम महादेवी वर्मा के गीत सुभद्रा कुमारी चौहान और श्याम नारायण पांडे की वीर रस से भरी कविताएं पर्दा बेगम का तकिया पुरस्कार जैसी कहानी मलिक मोहम्मद जायसी की पद्मावत जैसे अनंत ग्रंथ और कभी रात तुलसी मीरा बिहारी रसखान और रचनाएं हिंदी साहित्य में भारी पड़ी है अकेले रामचरितमानस और कामायनी पूरी दुनिया के समस्त साहित्य से बढ़कर हैं।
विश्व भाषा हिंदी का बिल्कुल सही भविष्य विश्व कवि सुमित्रानंदन पंत ने बहुत पहले ही कर दिया था और यही सत्य होगा -
++ अरे ये पल्लव बाल अभी तो हैं यह नवल प्रवाल
नहीं फूटी इसमें तरु डाल विश्व पर विस्मित चितवन लाल
हिलाते अधर प्रवाल।
आज पल्लवित हुई है डाल
खिलेगा कल गुंजित मधुमास
मुग्ध होंगे मुझे मधु से मधु बाल सुरभि से अस्थिर मरुताकास।
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