Tuesday, 12 April 2022

*ए थॉट्स ऑन पाकिस्तान डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की वापस सिद्ध पुस्तक जिसमें मुसलमान धर्म और मुसलमानों की असलियत बहुत ही सुंदर रूप में उजागर हुई है इंटरनेट पर इस पुस्तक को पढ़ने से कई ऐसी बातें आती है जो भारत वासियों को हर एक गैर मुस्लिम और अंबेडकरवादी लोगों को जरुर अपनाना चाहिए इंटरनेट पर उपलब्ध इस पुस्तक का सारांश मैंने आनंद रंगनाथन द्वारा अनुवाद किए गए सारांश को दिया है जिसे पढ़कर अंबेडकर की महानता और मुस्लिम धर्म की असलियत मालूम होती है *

*ए थॉट्स ऑन पाकिस्तान डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की वापस सिद्ध पुस्तक जिसमें मुसलमान धर्म और मुसलमानों की असलियत बहुत ही सुंदर रूप में उजागर हुई है इंटरनेट पर इस पुस्तक को पढ़ने से कई ऐसी बातें आती है जो भारत वासियों को हर एक गैर मुस्लिम और अंबेडकरवादी लोगों को जरुर अपनाना चाहिए इंटरनेट पर उपलब्ध इस पुस्तक का सारांश  मैंने आनंद रंगनाथन  द्वारा अनुवाद किए गए  सारांश को दिया है जिसे पढ़कर अंबेडकर की महानता और मुस्लिम धर्म की असलियत मालूम होती है * 


*जैसे सबसे पहले उन्होंने इस्लाम या ईसाई धर्म इसलिए नहीं अपना उसे अपनाने से दलित वर्ग का राष्ट्रीयकरण हो जाएगा और उनकी जनसंख्या दोगुनी हो जाएगी और भारत में मुस्लिम वर्चस्व भारत को बर्बाद कर देगा मुस्लिम धर्म में जात पात की व्यवस्था हिंदुओं से भी बहुत अधिक हैं और भारत में फैली बाल विवाह असहिष्णुता आस्था के कट्टर पालन महिलाओं की स्थिति व विवाह इत्यादि के लिए मुस्लिम ही जिम्मेदार हैं डॉक्टर अंबेडकर अपने इस पुस्तक में बिल्कुल साफ साफ लिखते हैं कि इस्लामिक सच्चे मुसलमान को कभी भी भारत को इसी तरह डॉ आंबेडकर बहुत ही खरी खरी बात करते हैं राजनीतिक जीवन में भी मुसलमानों में एक ठहराव है मुसलमानों की राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है और वह केवल अपने मुस्लिम प्रत्याशियों को या ऐसे प्रत्याशी को विजय बनाना चाहते हैं जो मस्जिद के बारे में मस्जिद को दान देने में और लोगों को मुस्लिम बनाने में रुचि रखते आनंद रंगनाथन अनुवाद करते हुए आगे लिखा है अपनी मातृभूमि के रूप में अपनाने और हिंदुओं को अपने परिजन और रिश्तेदार के रूप में मनाने की अनुमति नहीं दे सकता आनंद रंगनाथन के अनुसार 14 अध्याय वाली पुस्तक में मुसलमान मुस्लिम मानस और मुस्लिम स्थिति का आकलन करते हुए कहा गया है इस्लाम का भाईचारा मानव का सार्वभौम भाईचारा नहीं है बल्कि सारे संसार के मुसलमानों का भाईचारा है जिसमें भाईचारा का लाभ केवल उन्हीं लोगों को मिलता है जो मुसलमान हैं जो लोग मुस्लिम नहीं हैं उनके अलावा सबके लिए है भाईचारा आप मानना और दुश्मनी के अलावा कुछ नहीं धर्म सामाजिक स्वशासन की एक प्रणाली है और स्थानीय स्वशासन के साथ उसका कोई मेल नहीं है वह किसी देश को नहीं केवल मक्का मदीना को देखता है दुनिया में कहीं भी मुसलमानों का राज है तो मुसलमान का वह अपना देश हैं ना कि वह देश जहां वे रह रहे हैं खा पी रहे हैं और सारी सुविधाएं ले रहे ह*ैं 




*गांधी पर तीखी टिप्पणी करते हुए उन्होंने लिखा है कि गांधी ने कभी भी मुसलमानों को जवाब देने के लिए नहीं बुलाया भले वह हिंदुओं के खिलाफ घोर अपराधों के दोषी रहे हो जैसे राजपाल ने रंगीला रसूल को लिखा जो शैतानी वर्सेज के बराबर था जिन्ना ने उनकी वकालत किया और मूर्ख भारतीयों द्वारा अल्लामा इकबाल की प्रशंसा की जाती है उन्होंने हत्यारे की स्तुति में गीत रचा और उनसे भी आगे बढ़ते हुए ममता बनर्जी ने उन्हें तराना ए हिंद की उपाधि दिया जिसे मूर्ख हिंदुओं ने जीता या अंबेडकर के अनुसार हिंदू मुस्लिम भाईचारा जैसा कि गांधी सोचते थे हिंदुओं की कत्ल से ही पैदा हो सकता था मोपला दंगों में गांधी की घनघोर आलोचना करते हुए अंबेडकर ने कहा कि गांधी कितने स्तर हीन व्यक्ति थे मोपला नरसंहार गांधी पर एक अमित धब्बा है कलंक है 


*अंबेडकर ने लिखा है कि इस्लामी सिद्धांतों के अनुसार मुसलमान कभी देशभक्त नहीं हो सकता और अगर गैर मुस्लिम देश में रह रहे मुसलमान के देश पर कोई मुस्लिम देश आक्रमण करता है तो मुसलमान अपने देश से गद्दारी करते हुए मुस्लिम देश का साथ देते हैं और उस देश के नियम कानून संविधान और व्यवस्था के बजाय अल्लाह कुरान पैगंबर शरीयत को सर्वोच्चता देते हैं दारुल हरब जहां पर मुसलमान नागरिक होते हैं लेकिन राजा गैर मुस्लिम होता है वहां के मुसलमान दारुल इस्लाम अर्थात जहां का राजा मुस्लिम होता है उसकी सहायता करते हैं कश्मीर सहित 57 देश इसके प्रमाण हैं जब महाराजा हरि सिंह ने इसको जिला हिजरत और जिहाद मुस्लिम धर्म का मुख्य अंग है अंबेडकर ने स्पष्ट लिखा कि सविनय अवज्ञा में विश्वास करना अराजकता में विश्वास करना है और उनसे दारुल हरब में स्वामी भक्त की आशा करना आत्महत्या जैसा है मुसलमान चाहे पंचर वाला हो या इंजीनियर हो वह हमेशा कुरान को ही सर्वोच्च मानता है मुसलमान कभी भी गैर मुस्लिम शासक के प्रति स्वामी भक्त और देश के प्रति देशभक्त नहीं हो सकते खिलाफत आंदोलन में मुसलमानों के लिए जी जान से लगे हिंदुओं को मुसलमान एक निम्न जाति मानते थे एक मुसलमान मुसलमान से कितना भी पीड़ित प्रताड़ित हो फिर भी समय आने पर वह उन्हें हिंदुओं से गद्दारी करेगा जिन्होंने उसकी मदद किया ह*ै 

*उदाहरण के लिए अगर किसी मजदूर संघ में मुसलमान हैं और उनकी लड़ाई एक मुस्लिम पूंजीवादी से हैं तो वह कभी भी हिंदुओं के साथ उस मुस्लिम पूंजीवादी के खिलाफ नहीं लड़ेंगे कश्मीर और हैदराबाद का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि सारी सुविधाएं पाने के बाद भी मुस्लिम बहुल कश्मीर में मुसलमानों ने अपने ही राजा से गद्दारी किया जबकि हैदराबाद में अल्पसंख्यक होने के बावजूद उन्होंने केवल निजाम का साथ इसलिए दिया कि वह मुसलमान था मतलब साफ है कि वह कभी भी गैर मुसलमानों का साथ दे ही नहीं सकते और यह आज तक भारत के चुनाव में और पूरी दुनिया में देखा जा रहा है उन्होंने राजस्थान में कहां है कि वह ऐसे चिकित्सक है जो प्रत्येक लकवा ग्रस्त अंग में महत्वपूर्ण सिद्धांत को क्रियान्वित करने के लिए उसे कार्य करने के लिए आश्चर्यचकित करता है मेरा निवेदन है कि सभी गैर मुसलमानों को पूरे दुनिया में यह पुस्तक पढ़नी चाहिए दुनिया भर को निगल जाने वाले मुसलमानों पर इतनी सुंदर पुस्तक आज तक तस्लीमा नसरीन और सलमान रशदी भी नहीं लिख पाए*

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