Thursday, 7 April 2022

योगी सरकार और उनके जिम्मेदार विभागीय मंत्री ध्यान दें क्या ऐसे होती है सरकारी कर्मचारियों अधिकारियों की कार्यप्रणाली इसीलिए जनता सरकार के अच्छे कामों को ध्यान नहीं देती

*योगी सरकार और उनके जिम्मेदार विभागीय मंत्री ध्यान दें क्या ऐसे होती है सरकारी कर्मचारियों अधिकारियों की कार्यप्रणाली इसीलिए जनता सरकार के अच्छे कामों को ध्यान नहीं देती 
और उनके बुरे कार्यों को याद रखती हैं इसका एक उदाहरण में प्रदेश भर में बिजली विभाग की कार्यवाही को दे रहा हूं कि कैसे हर रोज 150 कनेक्शन काटने का हवाला देकर खुद पैसा कमाते हैं और सरकार को बदनाम बेईजजत करते हैं जौनपुर शहर में भी इस समय बिजली विभाग खूब छापामारी कर रहा है लेकिन आश्चर्य की बात है कि एक भी अवैध कनेक्शन न तो कट रहा है और ना ही बिजली चोरी करने वाले घट रहे हैं बल्कि और भी बढ़ रहे हैं जिस तरह रेलवे टिकट बढ़ाती है तो उससे केवल उन लोगों को परेशानी होती है जो हमेशा टिकट लेकर चलते हैं और जो भी बिना टिकट वाले हैं वे T T को थोड़ा बहुत पैसा पकड़ा कर मजे से रोज लंबी लंबी यात्राएं करते हैं मैं आपको मोहल्ला रिजवी का राज होटल में हुई बिजली की छापेमारी का विस्तृत विवरण आंखों देखी बता रहा हूं आज सुबह कोतवाली क्षेत्र जौनपुर के जूनियर इंजीनियर अमर जो खुद को योगी जी का बहुत खास और गोरखपुर निवासी बताते हैं अफजाल नामक कर्मचारीअपने दलबल के साथ इसमें लगभग सभी आउटसाइडर या संविदा पर काम करने वाले कर्मचारी थे को लेकर रिजवी खान राज होटल और आसपास बिजली चोरी और अवैध कनेक्शन के बारे में छापामारी किया और आश्चर्य की बात जिनका अवैध कनेक्शन था उनका उन्होंने कुछ नहीं किया जबकि जिन के वैध कनेक्शन और बिजली बिल पूरी तरह अपडेट थी और बिल भी सही था उन्हीं को परेशान किए और दिखाने के लिए जो गलत कनेक्शन काटे भी तो उन्हीं के साथ रहने वाले आउटसाइडर शाम को पैसा लेकर जोड़ दिए*

*इस बात की चेकिंग अभी भी की जा सकती हैं कि कैसे ही 4:00 बजे बिजली काटी गई और 6:00 बजे तक सब का कनेक्शन जुड़ गया अगर सभी ने बिजली चोरी का पैसा जमा कर दिया तो वह सारा पैसा कहां गया और अगर जमा नहीं किया तो फिर कनेक्शन कैसे जुड़ गया जबकि हमारे यहां मुझको छोड़कर बाकी लगभग सभी चोरी से बिजली जलाते हैं और उसमें भी ऊदही और संतोष नाम के आउटसाइडर अहियापुर कारखाने में काम करते हैं वहीं बिजली विभाग वालों को बुलाकर छापामारी कर आते हैं और उन्हें भी कुछ हिस्सा मिल जाता है जबकि वह कभी भी बिल नहीं दिए पूछने पर कहते हैं कि बिजली विभाग में काम करने वाले को बिजली का बिल नहीं देना पड़ता है जिस हिसाब से बिजली की छापामारी हो रही है उस हिसाब से हर शहर से कम से कम सौ करोड़ बिजली चोरी वसूली होनी चाहिए लेकिन छापामारी कदमों से दिखाकर पैसा खुद धनकुबेर बने हुए हैं बिजली विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की भी संपत्ति की गहन जांच होनी चाहिए कि यह लोग कैसे इतना अधिक धन संपत्ति पैसे और प्रॉपर्टी वाले हो तो जनता बेहद नाराज हो जाएगी और योगी सरकार को उखाड़ फेंक देगी जिसमें गलती इन्हीं घूसखोर भ्रष्ट और लुटेरे कर्मचारियों अधिकारियों की है*

*मुझे एक घटना याद आ रही है जब मनोज सिंहा गाज़ीपुर से जीते थे और मंत्री थे तब मैं दिल्ली सुहेलदेव ट्रेन सेजा रहा था ट्रेन के जितने भी कर्मचारी की थी कोच कंडक्टर मिलते थे उनसे कुछ भी कहा जाता था तो सीधे कहते थे कि हम तो मनोज सिन्हा के आदमी हैं हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता यात्रा करना है तो करो वरना मत करो इसकी शिकायत मैंने तत्काल संबंधित रेलवे के नंबरों पर दिया था लेकिन कुछ नहीं हुआ जिसका परिणाम है कि गाजीपुर से तो मनोज सिन्हा हारेगी आजतक गाजीपुर में भाजपा का खाता नहीं खुला यही हाल जौनपुर सहित पूरे प्रदेश का हो सकता है जांच करना छापेमारी करना अवैध बिजली चोरी करना बहुत अच्छी बात है लेकिन सही लोगों को परेशान करना और गलत लोगों से पैसे लेकर उन्हें गलती के लिए प्रोत्साहित करना या उत्तर प्रदेश के कर्मचारी अधिकारी 75 वर्षों से करते आ रहे हैं उनको आप पैसा फेंकते जाओ चाहे जो करो अगर विश्वास ना हो तो बिजली विभाग का जौनपुर का बिल देख लो 90% लोगों का बिल ₹150 से ₹400 के बीच है क्या यह संभव हो सकता है हमारे कॉलोनी में ऐसे भी लोग हैं जो एक घर में चार या पांच ऐसी तक रखे हैं लेकिन उनका बिल ₹400 से ₹500 आता है और अधिकांश लोग तो अभी भी बिजली में मीटर तक नहीं लगवाए हैं इस तरह से तो सरकार डूब सकती है सरकार को सचेत करना उसके शुभचिंतक लोगों को काम होता है प्रदेश के अन्य जिलों की क्या हाल है मुझे नहीं मालूम कि वहां पर सरकारी कर्मचारी अधिकारी कैसा काम कर रहे हैं लेकिन जौनपुर में तो लगता है इन्हें सरकारी लाइसेंस प्राप्त है लूटने कोर्ट ने जनता को पीड़ित प्रताड़ित करने और अपार संपत्ति जमा करने का जिस तरह जनता की जिम्मेदारी है कि निश्चित तारीख पर बिजली का बिल पानी का बिल सहित तमाम बिल जमा करने पर उसके खिलाफ कार्रवाई होती है उसी तरह सरकारी कर्मचारियों अधिकारियों के विरुद्ध भी कार्यवाही होनी चाहिए अगर वह पैसा देने वाली जनता का काम एक निश्चित समय के अंदर नहीं कर देते हैं लेकिन सरकार और उसके कर्मचारियों अधिकारियों से 95% जनता कैसे लड़ सकती है जो सुबह से शाम तक इसी तरह 2 जून की रोटी का जुगाड़ करने में लगी रहती है*

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