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🌷करो योग रहो निरोग 🌷
🌸 *आयुर्वेद में प्राकृतिक चिकित्सा का महत्व*🌺
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परिचय- आयुर्वेद के अनुसार किसी भी तरह के रोग होने के 3 कारण होते हैं-
1. वात:- शरीर में गैस बनना।
2. पित्त:- शरीर की गर्मी बढ़ना।
3. कफ:- शरीर में बलगम बनना।
नोट:- किसी भी रोग के होने का कारण एक भी हो सकता है और दो भी हो सकता है या दोनों का मिश्रण भी हो सकता है या तीनों दोषों के कारण भी रोग हो सकता है।
1. वात होने का कारण - गलत भोजन, बेसन, मैदा, बारीक आटा तथा अधिक दालों का सेवन करने से शरीर में वात दोष उत्पन्न हो जाता है।
दूषित भोजन, अधिक मांस का सेवन तथा बर्फ का सेवन करने के कारण वात दोष उत्पन्न हो जाता है।
आलसी जीवन, सूर्यस्नान, तथा व्यायाम की कमी के कारण पाचन क्रिया कमजोर हो जाती है जिसके कारण वात दोष उत्पन्न हो जाता है।
इन सभी कारणों से पेट में कब्ज (गंदी वायु) बनने लगती है और यही वायु शरीर में जहां भी रुकती है, फंसती है या टकराती है, वहां दर्द होता है। यही दर्द वात दोष कहलाता है।
2. पित्त होने का कारण - पित्त दोष होने का कारण मूल रुप से गलत आहार है जैसे- चीनी, नमक तथा मिर्चमसाले का अधिक सेवन करना।
नशीली चीजों तथा दवाईयों का अधिक सेवन करने के कारण पित्त दोष उत्पन्न होता है।
दूषित भोजन तथा केवल पके हुए भोजन का सेवन करने से पित्त दोष उत्पन्न होता है।
भोजन में कम से कम 75 से 80 प्रतिशत क्षारीय पदार्थ (फल, सब्जियां इत्यादि अपक्वाहार) तथा 20 से 25 प्रतिशत अम्लीय पक्वाहार पदार्थ होने चाहिए। जब इसके विपरीत स्थिति होती है तो शरीर में अम्लता बढ़ जाती हैं और पित्त दोष उत्पन्न हो जाता है।
3. कफ होने का कारण - तेल, मक्खन तथा घी आदि चिकनाई वाली चीजों को हजम करने के लिए बहुत अधिक कार्य करने तथा व्यायाम की आवश्यकता होती है और जब इसका अभाव होता है तो पाचनक्रिया कम हो जाती है और पाचनक्रिया की क्षमता से अधिक मात्रा में चिकनाई वाली वस्तुएं सेवन करते है तो कफ दोष उत्पन्न हो जाता है।
रात के समय में दूध या दही का सेवन करने से कफ दोष उत्पन्न हो जाता है।
वात, पित्त और कफ के कारण होने वाले रोग निम्नलिखित हैं-
वात के कारण होने वाले रोग - अफारा, टांगों में दर्द, पेट में वायु बनना, जोड़ों में दर्द, लकवा, साइटिका, शरीर के अंगों का सुन्न हो जाना, शिथिल होना, कांपना, फड़कना, टेढ़ा हो जाना, दर्द, नाड़ियों में खिंचाव, कम सुनना, वात ज्वर तथा शरीर के किसी भी भाग में अचानक दर्द हो जाना आदि।
पित्त के कारण होने वाले रोग - पेट, छाती, शरीर आदि में जलन होना, खट्टी डकारें आना, पित्ती उछलना (एलर्जी), रक्ताल्पता (खून की कमी), चर्म रोग (खुजली, फोड़े तथा फुन्सियां आदि), कुष्ठरोग, जिगर के रोग, तिल्ली की वृद्धि हो जाना, शरीर में कमजोरी आना, गुर्दे तथा हृदय के रोग आदि।
कफ के कारण होने वाले रोग - बार-बार बलगम निकलना, सर्दी लगना, श्वसन संस्थान सम्बंधी रोग (खांसी, दमा आदि), शरीर का फूलना, मोटापा बढ़ना, जुकाम होना तथा फेफड़ों की टी.बी. आदि।
वात से पीड़ित रोगी का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार-
आहार चिकित्सा-
■ वात से पीड़ित रोगी को अपने भोजन में रेशेदार भोजन (बिना पकाया हुआ भोजन) फल, सलाद तथा पत्तेदार सब्जियों का अधिक प्रयोग करना चाहिए।
■ मुनक्का अंजीर, बेर, अदरक, तुलसी, गाजर, सोयाबीन, सौंफ तथा छोटी इलायची का भोजन में अधिक उपयोग करना चाहिए जिसके फलस्वरूप रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
■ रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन सुबह के समय में लहसुन की 2-4 कलियां खानी चाहिए तथा अपने भोजन में मक्खन का उपयोग करना चाहिए इसके फलस्वरूप वात रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
उपवास - वात रोग से पीड़ित रोगी को सबसे पहले कुछ दिनों तक सब्जियों या फलों का रस पीकर उपवास रखना चाहिए तथा इसके बाद अन्य चिकित्सा करनी चाहिए।
पित्त से पीड़ित रोगी का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार-
आहार चिकित्सा
🌞पतंजलि परिवार,
■ पित्त रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन सब्जियों तथा फलों का रस पीना चाहिए।
■ पित्त रोग से पीड़ित रोगी को भूख न लग रही हो तो केवल फलों का रस तथा सब्जियों का रस पीना चाहिए और सलाद का अपने भोजन में उपयोग करना चाहिए। इसके फलस्वरूप उसका रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
■ रोगी व्यक्ति को पूरी तरह स्वस्थ होने तक बिना पका हुआ भोजन करना चाहिए।
■ पित्त रोग से पीड़ित रोगी को खट्टी, मसालेदार, नमकीन चीजें तथा मिठाईयां नहीं खानी चाहिए क्योंकि इन चीजों के सेवन से पित्त रोग और बिगड़ जाता है।
■ पित्त के रोगी के लिए गाजर का रस पीना बहुत ही लाभकारी होता है, इसलिए रोगी को प्रतिदिन सुबह तथा शाम के समय में कम से कम 1 गिलास गाजर का रस पीना चाहिए।
*उल्टी और दस्त के घरेलु उपचार*
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*घर के किसी भी छोटे बड़े सदस्य को उल्टी एवँ दस्त किसी भी वजह से हो सकते हैं जिनमें से बदहजमी सबसे मुख्य है। कभी-कभी सर्दी या गर्मी लगने, दूषित खानपान से भी उल्टी और दस्त की समस्या हो जाती है ।*
*👉 उल्टी होने पर नीँबू का रस पानी में घोल कर लेने से शीघ्र ही फायदा होता है ।*
*👉 आप एक दो लौंग, दालचीनी या इलायची मुहँ में रखकर चूसिये यह मसाले उल्टियाँ विरोधक औषधियों होने के कारण उल्टियाँ रोकने में बहुत ही मददगार साबित होते है।*
*👉 तुलसी के पत्तों का एक चम्मच रस शहद के साथ लेने से उल्टी में लाभ मिलता है ।*
*👉 एक चम्मच प्याज का रस पीने से भी उल्टी में लाभ मिलता है ।*
*👉 गर्मियों में यदि बार बार उल्टियाँ आती है तो बर्फ चूसनी चाहिए ।*
*👉 पुदीने के रस को लेने से भी उल्टी में लाभ मिलता है ।*
*👉 धनिये के पत्तों और अनार के रस को थोड़ी थोड़ी देर के बाद बारी-बारी से पीने से भी उल्टी रुक जाती है ।*
*👉 1/4 चम्मच सोंठ एक चम्मच शहद के साथ लेने से उल्टी में शीघ्र आराम मिलता है ।*
*👉 नींबू का टुकड़ा काले नमक के साथ अपने मुंह में रखने से आपको उल्टी महसूस नहीं होती है, रुक जाती है ।*
*👉 आधा चम्मच पिसे हुए जीरे का पानी के साथ सेवन करने से उल्टियों से शीघ्र छुटकारा मिलता है ।*
*👉 एक गिलास पानी में एक चम्मच एप्पल का सिरका डालकर पियें उल्टी में तुरंत आराम मिलेगा ।*
*👉 उल्टियाँ होने से 12 घंटो बाद तक ठोस आहार का सेवन न करें, लेकिन भरपूर मात्रा में पानी और फलों के रस का सेवन करते रहें।*
*👉 तैलीय, मसालेदार, भारी और मुश्किल से पचनेवाले खाद्द्य पदार्थों का सेवन न करें इससे भी उल्टियाँ आती है ।*
*👉 पित्त की उल्टी होने पर शहद और दालचीनी मिलाकर चाटें ।*
*👉 हरर को पीसकर शहद के साथ मिलाकर चाटने से उल्टी बंद होती है|*
*👉 खाना खाने के तुरंत बाद न सोयें। खाने के बाद टहलने की आदत डालें । जब भी सोयें तो अपनी दाहिनी बाज़ू पर सोयें। इससे आपके पेट के पदार्थ मुंह तक नहीं आयेंगे ।*
*👉 दही, भात, को मिश्री के साथ खाने से दस्त में आराम आता है।*
*👉 एक एक चम्मच अदरक , नीबूं का रस काली मिर्च के साथ लेने पर भी दस्त में आराम मिलता है ।*
*👉 सौंफ और जीरे को बराबर-बराबर मिला कर भून कर पीस लें । इसे आधा-आधा चम्मच पानी के साथ दिन में तीन बार लेने से दस्तों में फायदा मिलता है ।*
*👉 केले, सेब का मुरब्बा और पके केले का सेवन करें दस्त में तुरंत आराम मिलेगा ।*
*👉 दस्त आने पर अदरक के टुकड़े को चूसे या अदरक की चाय पियें पेट की मरोड़ भी शांत होती है और दस्त में भी आराम मिलता है ।*
*👉 दस्त रोकने के लिए चावल के माड़ में हल्का नमक और काली मिर्च डालकर उसका सेवन करें दस्त रुक जायेंगे ।**
*👉 जामुन के पेड़ की पत्तियाँ पीस कर उसमें सेंधा नमक मिला कर 1/4 चम्मच दिन में दो बार लेने से दस्त रुक जाते है ।*
*👉 दस्त आने पर दूध और उससे बनी हुई चीजों का सेवन कतई भी ना करें ।*
*👉 दस्त आने पर दस्त के साथ शरीर के खनिज वा तरल पदार्थ बाहर निकलते है इनकी कमी पूरी करने के लिए O.R.S का घोल पियें ।*
*जब सर्दी बढ़ जाए, तो पिएं लौंग की चाय, जरूर जानिए ये 5 फायदे*
1 सर्दी से बचाने के लिए लौंग की चाय बेहद लाभकारी है। लौंग की तासीर गर्म होती है, इसलिए ठंड के दिन में दिन में 2 से 3 बार पीने पर आप सर्दी से बचे रह सकते हैं साथ ही खांसी और जुकाम से भी।
2 अगर आप बुखार से पीड़ित हैं, तो लौंग की चाय पीना आपके लिए काफी फायदेमंद होगा। इसका प्रयोग करने से आपका बुखार अधिक समय तक नहीं टिक पाएगा और नेचुरल तरीके से ठीक हो जाएगा।
3 शरीर के अंगों और मांस पेशियों में होने वाले दर्द से निजात पाना चाहते हैं, तो लौंग की चाय जरूर पिएं। इसके अलावा अगर आप चाहें तो लौंग की चाय से दर्द वाले स्थान की सिकाई कर सकते हैं। इससे आपको काफी फायदा होगा।
4 पाचन संबंधी समस्याओं में लौंग की चाय असरकारक है। पेट में एसिडिटी होने और पाचन तंत्र की धीमी गति होने पर लौंग की चाय पीना काफी फायदेमंद होता है। इससे पाचन तंत्र बेहतर तरीके से कार्य करता है।
5 दांतों में दर्द होने पर अक्सर लौंग के तेल का प्रयोग किया जाता है। लेकिन लौंग की चाय भी इसके लिए फायदेमंद हो सकती है। इसके अलावा कफ और गले के विकारों के लिए भी लौंग काफ़ी फ़ायदेमंद है
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*जोड़ो का दर्द ठीक करने का उपाय*
• यदि घुटने की गद्दी घिस जाना, कैल्शियम कम होना,घुटने के हड्डियों के बीच अंतर कम या ज्यादा हों जाना इत्यादि
*• अपथ्य भोजन :-* (तीन से 6 माह तक क्या न खायें)
केला,सब खट्टे फल,खट्टे पदार्थ,ठंडे पदार्थ,सब सूखे मेवे, उड़द की दाल । जोड़ो के दर्द में कब्ज की मुख्य भूमिका होती है इसलिये पेट का साफ रहना अतिआवश्यक है।
*पथ्य :-* दोपहर से पहले चने के दाने के बराबर चुना थोड़े से गुड़ व देशी गाय के घी के साथ खाएं। कम से कम 20 मिंट हल्के कपड़े पहन कर धूप में बैठे।
*तेल लगाने हेतु आवश्यक सामग्री व बनाने की विधि :-*
1 लीटर सरसो तेल
4 लहसुन की गांठे ( कुचली हुई)
4 बड़े चमच्च मेथी दाना चूर्ण
4 चम्मच सौठ चूर्ण
4 चम्मच अजवायन चूर्ण
1 लीटर सरसो तेल में कुचला हुया लहसुन डालकर भूरे होने तक धीमी आंच पर गर्म करें
उसके बाद सभी चूर्ण डालकर काला होने तक गर्म करें व ठंडा होने पर बिना छाने किसी काँच या स्टेन्स स्टील के बर्तन में सुरक्षित रखें व इसे घुटने या दर्द वाले जोड़ो पर व 2 से 3 इंच ऊपर नीचे तक लगाए । ( मालिश न करें)
*घुटने हेतु विशेष व्यायाम :-*
• पैर के पंजे व अँगुली में तेल लगाएं व पैर और घुटने के तनाव कम करने हेतु अँगुली को बारी बारी से उल्टा सीधा घुमाए।
• एक पैर के अंगूठे को हाथ से पकड़कर जमीन से 6 इंच ऊपर उठाएं व एक झटका देकर धीरे से जमीन पर रख दे।
• पैरो के दोनों पंजो को जोड़कर ज्यादा से ज्यादा जमीन,मुह,दाएं व बाएं घड़ी के विपरीत दिशा में ले जाएं।
• दोनो पैरो की एड़ियों एक साथ उठाकर पंजो के बल खड़े हो जाइए व दोनो घुटनो को जांघो की ओर खिंचे परिणामस्वरूप दोनो पैरों की पिंडलियां व जांघे सख्त हो जाएगी।
*💐 घुटनों के दर्द को ठीक करने में कब्ज को दूर करना आवश्यक है इसके लिये निम्न उपयो को करें:-*
• सबेरे उठकर दो ग्लास गुनगुना पानी घुट घुट कर पियें
• कब्ज रहने तक छिलके वाली मूंग की दाल खाये
• भोजन चबा चबा कर करें
• एक भोजन पूणतः पचने के बाद ही दूसरा भोजन करें
• भोजन के दौरान पानी न पिएं भोजन के बाद एक या दो घुट ही पानी पिये उसके डेढ़ घण्टे बाद पानी जरूर पियें
• पानी हमेशा बैठकर व घुट घुट भर कर पियें
*कब्ज से बचने हेतु निम्न उपयोग कर सकते हैं*
• भोजन के पश्चात बेल की कैंडी जरूर खाये
या
• 2 चम्मच त्रिफला (1:2:3) वाला गर्म दूध या गर्म पानी के साथ
या
• रात्रि भोजन में चुकन्दर की सब्जी जरूर खाएं
या
• रात्रि भोजन के बाद 10 मुनक्के एक गिलास दूध में उबालकर मुनक्के खा ले व दूध पी जाएं
या
• 2 अंजीर 10 मुंनके बीज निकालकर रात को पानी मे भिगो दें दोपहर भोजन के बाद एक अंजीर 5 मुंनके खाये बचे एक अंजीर 5 मुंनके शाम
या
• छोटी हरड़ को अरण्ड के तेल में भूनकर मसलकर रख ले सुबह 4 बजे आधा चम्मच इसे सेवन कर एक गिलास पानी पी पुनः सो जाएं
या
• 2 चम्मच अरण्ड का तेल गरम पानी या दूध के साथ
3 से 6 माह उपर्योक्त नियम का पालन कर आप अपना स्वास्थ्य व समृद्धि बचा सकते हैं
*जब घुटने बदलने की नौबत आये उससे पहले यह प्रयोग जरूर अपनाये विनती है :-* हरसिंगार एक पौधा है जिसके सफेद रंग के फूल होते है ये फूल रात को खिलकर सुबह गिर जाते है इस पौधे के 6 से 7 पत्तों को सिल बट्टे पर पीसकर इसकी चटनी बना ले और एक गलास पानी में उबाले। उबलते उबलते जब यह आधा रहा जाये तो इसको गुनगुना करके रात को रख दे सुबह प्रतिदिन खाली पेट पीये। ऐसा करने से जोड़ो के दर्द से आपको मुक्ति मिलेगी। इस औषधि के साथ कोई अन्य दवा नहीं लेनी है। यह उपाय सबसे ज्यादा कारगर और सफल है।
*कनेर के पत्तों को उबालकर* उसको उसके पत्तों की चटनी बना ले और तिल के तेल में मिलाकर घुटनों पर मालिश करे ऐसा करने से आपको दर्द से मुक्ति मिलेगी।
*आपके घुटनों में दर्द रहता है तो* रोज रात को 2 चम्मच मैथी को एक ग्लास पानी में भिगो कर रख दे। और प्रात: काल खाली पेट मेथी को चबा चबा कर खाने से और मेथी का पानी पीने से आपको कभी भी घुटनो का दर्द नही होगा।
एक ग्लास दूध में 4-5 लहसुन की कलियाँ डाल कर अच्छी तरह से उबाले और गुनगुना पीने से भी घुटनों के दर्द में आराम मिलता है।
हर रोज आधा कच्चा नारियल खाने से बुढ़ापे में भी कभी आपको घुटनों के दर्द का परेशानी नही होगी।
5 अखरोट प्रतिदिन खाली पेट खाने से आपके घुटने में कभी कष्ट नही होगा।
रोज रात को सोने से पहले एक ग्लास दूध ने हल्दी डाल कर पीने से आपको हड्डियों में दर्द की समस्या से मुक्ति मिलेगी।
एक दाल के दाने के बराबर थोड़ा सा चूना (जो आप पान में लगा कर खाते है) को दही में या पानी में मिला कर पीने से आपको हड्डियों में कभी दर्द नही होगा। चूने के पानी को हमेशा सीधे बैठकर ही पिए इससे आपको जल्दी आराम होगा। यह औषधि सिर्फ 1 महीने पीने से ही शरीर की किसी भी हड्डी में दर्द हो तो वो जल्दी ठीक हो जाएगा।
*सुबह और शाम को भद्र आसन करने से आपको लाभ मिलेगा।*
हड्डियों के दर्द से बचने के लिए आप अपने भोजन में 25% फल और सब्जियों को शामिल करेगे तो आपको कभी भी हड्डियों के दर्द का सामना नहीं करना पड़ेगा।
नारियल, सेब, संतरे, मौसमी, केले, नाशपति, तरबूज और खरबूजे आदि फलों का सेवन हर रोज जरुर करे।
गोभी, सोयाबीन, हरी पत्तेदार सब्जियों के साथ खीरे, ककड़ी, गाजर, और मेथी को अवश्य शामिल करे।
दूध और दूध से बनी चीजे भरपूर मात्रा में खाए और कच्चा पनीर भी भोजन में शामिल करे, ऐसा करने से आपके जोड़ों के दर्द में कमी आएगी।
मोटा अनाज, मकई, बाजरा, चोकर वाले आटे की रोटियों का जरुर उपयोग करे। क्योंकि इनमे वो सभी तत्व होता है जो आपकी हड्डियों और जोड़ो के दर्द से मुक्ति दिलाता है।
अगर अत्यधिक सर्दी की वजह से घुटनों में बहुत अधिक पीड़ा है तो सरसों के तेल में लहसुन और अजवायन को पकाये और फिर जब यह तेल गुनगुना हो जाये तो घुटनों पर मालिश करे, उनका दर्द छू मंतर हो जायेगा।
*नीचे बताई गयी सामग्री को मिला कर हल्दी का एक दर्द निवारक पेस्ट बना लीजिये :*
1 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
1 छोटा चम्मच पीसी हुई चीनी, या बूरा या शहद या चीनी
1 चुटकी चूना (जो पान में लगा कर खाया जाता है) और आवश्यकतानुसार पानी।
इन सभी को अच्छी तरह मिला लीजिये। एक लाल रंग का गाढ़ा पेस्ट बन जाएगा। सोने से पहले यह पेस्ट अपने घुटनों पे लगाइए। इसे सारी रात घुटनों पे लगा रहने दीजिये। सुबह साधारण पानी से धो लीजिये। कुछ दिनों तक प्रतिदिन इसका इस्तेमाल करने से सूजन, खिंचाव, चोट आदि के कारण होने वाला घुटनों का दर्द पूरी तरह ठीक हो जाएगा।
21 छोटा चम्मच सोंठ का पाउडर लीजिये और इसमें थोडा सरसों का तेल मिलाइए। इसे अच्छी तरह मिला कर गाड़ा पेस्ट बना लीजिये। इसे अपने घुटनों पर मलिए। इसका प्रयोग आप दिन या रात कभी भी कर सकते हैं। कुछ घंटों बाद इसे धो लीजिये। यह प्रयोग करने से आपको घुटनों के दर्द में बहुत जल्दी आराम मिलेगा।
4-5 बादाम,5 6 काली मिर्च,10 मुनक्का,5 6 अखरोट प्रतिदिन सुबह खाये
खजूर विटामिन ए, बी, सी, आयरन व फोस्फोरस का एक अच्छा प्राकृतिक स्रोत है. इसलिए, खजूर घुटनों के दर्द सहित सभी प्रकार के जोड़ों के दर्द के लिए बहुत असरकारक है.
एक कप पानी में 7-8 खजूर रात भर भिगोयें। सुबह खाली पेट ये खजूर खाएं और जिस पानी में खजूर भिगोये थे, वो पानी भी पीयें। ऐसा करने से घुटनों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, और घुटनों के दर्द में बहुत लाभ मिलता है।
*नारियल भी घुटनों के दर्द के लिए बहुत अच्छी औषधी है।* रोजाना सूखा नारियल खाएं। नारियल का दूध पीयें। घुटनों पर दिन में दो बार नारियल के तेल की मालिश करें इससे घुटनों के दर्द में अद्भुत लाभ होता है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि आपको इन आसान और कारगर उपायो से लाभ मिले।
*होमओपैथी के द्वारा*
जोड़ के दर्द दो तरह के होते हैं l छोटे जोड़ों के दर्दो को गठिया कहते हैं, इन जोड़ों का दर्द जब काफी पुराना हो जाता है तब जोड़ विकृत यानि टेढ़े – मेढ़े हो जाते हैं तब इसे पुराना संधि प्रदाह (arthritis deformans) कहते हैं l बड़े जोड़ों तथा पुट्ठे के दर्दो को वात रोग (rheumatism) कहते हैं l वात रोग (gout) में जोड़ों की गांठें सूज जाती है, बुखार हो जाता है, बेहद दर्द और बेचैनी होती है l *कारण :* ओस या सर्दी लगना, देर तक भीगना, अधिक मांस, खटाई या ठंडी वस्तुएं खाना, शराब का अधिक सेवन करना व विलासिता, आदि l
*● मुख्य दवा l* जब पेशाब में यूरिक एसिड व युरेट्स काफी मात्रा में आये – (अर्टिका युरेन्स Q, 10 बूंद दिन में 3 बार)
● छोटे जोडों में दर्द व सुजन, दर्द कटने या चुभने जैसा; रात में या चलने फिरने से बढ़े – (कोल्चिकम 6 या 30, दिन में 3 बार)
● जब दर्द एक जोड़ से दुसरे जोड़ में चलता-फिरता रहे – (पल्साटिला 30, दिन में 4 बार)
*● रोग खासकर पैर के अंगूठे में सूजन के साथ l* ठण्ड या बर्फ की पट्टी से रोग घटे l दर्द नीचे से ऊपर की ओर जाये – (लीडम पाल 6 या 30, दिन में 4 बार)
*● जब रोग अचानक ठंड के कारण शुरू हो –* (एकोनाइट 6 या 30, दिन में 4 बार)
*● जब गठिया रोग चर्म रोगों के साथ शुरू हो –* (सल्फर 30, दिन में 3 बार)
*● जब रोग ठण्ड से बढ़े l* सेकने व चलने फिरने से आराम आये – (रस टक्स 30 या 200, दिन में 3 बार)
*● मौसम बदलने के साथ रोग की पुनरावृत्ति –* (कल्केरिया कार्ब 30 या 200, दिन में 3 बार)
*● हाथ पैर के छोटे छोटे जोड़ों में दर्द व सूजन –* (स्टेफिसेगिरिया 30 या 200, दिन में 3 बार)
*● शराबियों में जोड़ों का दर्द – (नक्स वोमिका 30 या 200, दिन में 3 बार)*
● जब दर्द स्थान बदलता रहे l हिलने डुलने से रोग बढ़े – (स्टैलेरिया मीडिया Q, दिन में 3 बार)
*● अंगुलियों के जोडों का दर्द –* (लाइकोपोडियम 30, दिन में 3 बार)
*दिनभर रहती है सुस्ती और थकान तो खाएं ये 6 मजेदार चीजें*
1. दही - दही में प्रोटीन व कार्बोहाइड्रेट्स होते है, मलाई रहीत दही का सेवन करने से आपकी थकान और सुस्ती दूर हो जाएगी।
2. ग्रीन टी- जब ज्यादा थकान व तनाव हो तब ग्रीन टी पीने से आपको फायदा होगा। यह आपकी बॉडी को ऊर्जा देती है और एकाग्रता बढ़ाने में भी मदद करती है।
3. सौंफ- सौंफ केवल माउथ फ्रेशनर ही नहीं है, इसमें और भी कई गुण होते है। इसमें कैल्श्यम, सोडियम, आयरन और पोटैशियम पाया जाता है जो कि आपके शरीर की सुस्ती को भगाने में मदद करता है।
4. चॉकलेट- यह तो आप जानते ही होंगे कि चॉकलेट खाने से मूड ठीक हो जाता है। इसमें मौजूद कोको आपके शरीर की मसल्स को रिलेक्स करता है, इस कारण चॉकलेट खाने के बाद आप तरोताजा फील करने लगते हैं।
5. दलिया- दलिया में मौजूद कार्बोहाइड्रेट, ग्लाइकोजन के रूप में आपके शरीर में जमा हो जाता हैं। यह जमा ग्लाइकोजन धीरे-धीरे आपको पूरे दिन ऊर्जा देता रहता है।
6. पानी- कई बार शरीर में पानी की कमी होने से भी सुस्ती आने लगती है। ऐसे में आप ध्यान दें कि दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी व तरल पदार्थ जैसे जूस आदि पीते रहें।
कैसे बनें विद्यार्थी शक्तिमान ?🔸*
*🔹 रात्रि में एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़कर उसमें दो किशमिश भिगो दें । सुबह पानी छानकर पी जायें व किशमिश चबाकर खा लें । इससे शरीर पुष्ट होता है ।*
*🔹 आँवले के रस में 15 ग्राम गाय का घी व 10 ग्राम शहद मिलाकर सेवन करने से ओज, तेज, बुद्धि व नेत्रज्योति की वृद्धि होती है । शरीर हृष्ट-पुष्ट होता है ।*
*🔹 सॉफ व मिश्री 1-1 चम्मच मिलाकर रात को सोते समय खायें। यह प्रयोग नियमित रूप से 5-6 माह तक करें । इससे नेत्रज्योति बढ़ती है। देशी गाय का दूध पियें। यह बुद्धिवर्धक, बलवर्धक, खून और ओज बढ़ानेवाला होता है।*
*🔹 कद बढ़ाने हेतु : प्रातःकाल दौड़ लगायें, पुल-अप्स व ताड़ासन करें तथा 2 काली मिर्च के टुकड़े करके मक्खन में मिलाकर निगल जायें। गाजर का रस पियें (बीच का पीला हिस्सा निकाल दें)। यह शरीर को पुष्टि देता है।*
*🔹 तुलसी हमारी रक्षक और पोषक है🔹*
*🔹 तुलसी आयु, आरोग्य, पुष्टि देती है। दर्शनमात्र से पाप समुदाय का नाश करती है। स्पर्श करने मात्र से यह शरीर को पवित्र बनाती है और जल देकर प्रणाम करने से रोग निवृत्त करती है तथा नरकों से रक्षा करती है । इसके सेवन से स्मृति व रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ती है।*
*🔹 जिसके गले में तुलसी लकड़ी की माला हो या तुलसी का पौधा निकट हो तो उसे यमदूत नहीं छू सकते। तुलसी माला धारण करने से जीवन में ओज तेज बना रहता है।*
*🔹 वैज्ञानिक बोलते हैं कि जो तुलसी का सेवन करता है उसका मलेरिया मिट जाता है अथवा होता नहीं है, कैंसर नहीं होता ।*
*टीबी की बीमारी का घरेलू उपचार*
*(1). लहसुन*
यह कीटाणुओं का नाश करती है। इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं साथ ही यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। इसे कच्चा या पका कर खाना चाहिये। इसे खाने का एक तरीका है कि 10 लहुसन की कलियों को एक कप दूध में उबाल लें। फिर उबली हुई कलियों को चबा कर खा लें और ऊपर से दूध पी लें। ऐसा कुछ दिनों के लिये करें। पानी ना पियें नहीं तो यह असर नहीं करेगी।
*(2). केला*
केले में अच्छी मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है जिससे टीबी के रोगियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यह कफ और बुखार को दूर भगाता है। रोगी को 1 गिलास कच्चे केले का जूरोजाना पीना चाहिये।
*(3). काली मिर्च*
काली मिर्च फेफड़े की सफाई करती है और टीबी की वजह से होने वाले दर्द को दूर करती है। 10 काली मिर्च के दाने को घी के साथ फ्राई कर लें। फिर उसमें एक चुटकी हींग पावडर डाल कर मिक्स कर के ठंडा कर लें। मिश्रण को 3 भाग में बांटें और एक डोस को हर एक घंटे में चबाएं।
*(4). आंवला*
यह शरीर को कई तरह के पोषण पहुंचा कर उसे मजबूती प्रदान करता है। इसका जूस निकाल कर उसमें एक चम्मच शहद मिला कर रोजाना खाली पेट पीन से यह बीमारी दूर होती है।
*(5). संतरा*
एक गिलास ताजे संतरे के रस में एक चुटकी नमक और एक चम्मच शहद मिक्स कर के पियें। इसे दिन में दो बार पियें।
50 की उम्र के बाद
मैथी दाना,अलसी,अजवायन,काली जीरी बराबर मात्रा में लेकर हल्का सेककर ,ठंडा करके पावडर कर लीजिए,,एक छोटी चम्मच दिन में दो बार भोजन के बाद गुनगुने पानी से लीजिए,,तीन महीने लेकर,,एक महीने बंद,फिर तीन महीने
लेकर ,,एक महीने बन्द
लाभ,,जोड़ो का दर्द,,यूरिक एसिड,शुगर,,ब्लॉकेज,,पाचन शक्ति का कमजोर होना,,दूर होंगे
वैद्य रामकुमार वर्मा (वैद्य जी)मुख्य चिकत्सक जन सेवा कल्याण चिकित्सा केंद्र
झबरेड़ा हरिद्वार
097195 46268
सोमवार अवकाश
बाकी दिन सुबह दस से शाम चार तक
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