: अनिद्रा ( नींद न आना )
रात को नींद ठीक से आए, समय से आए व सोते समय किसी प्रकार का मानसिक तनाव न रहे, इस बात का विशेष प्रयास करना चाहिए।
यदि नींद आने में परेशानी हो, प्रयत्न करने पर भी न आती हो तो कुछ घरेलू आयुर्वेदिक उपाय यहाँ दिए जा रहे हैं, उनका प्रयोग करें-
अश्वगंधा, ब्राह्मी, शंखपुष्पी, शतावरी, मुलहठी, आँवला, जटामासी, असली खुरासानी, अजवायन प्रत्येक का 50-50 ग्राम बारीक चूर्ण बना लें।
रात को सोने के पूर्व 3 से 5 ग्राम मात्रा में दूध के साथ सेवन करें। एक सप्ताह बाद इसका प्रभाव देखें।
अनिद्रा नष्ट होकर गहरी स्वाभाविक नींद आने लगती है, स्वप्न भी नहीं आते व उच्च रक्तचाप में भी आराम होता है।
नींद की गोली की तरह बेहोशी नहीं आती, बल्कि प्रातः उठते ही ताजगी महसूस होती है।
सर्पगंधा, अश्वगंधा और भाँग तीनों सममात्रा में मिलाकर रख लें। इस चूर्ण को रात को सोते समय 3 से 5 ग्राम मात्रा में जल के साथ लें, यह औषधि निरापद है।
*बच्चों के विभिन्न रोगों की पहचान*
सिर का दर्द : अगर बच्चे के सिर में दर्द होता है तो बच्चा बार-बार अपनी आंखें बंद कर लेता है। इसके अलावा वह अपने सिर को एक जगह टिकाकर नहीं रखता, उसकी गर्दन नीचे की तरफ ही झुकी रहती है वह सिर को धुनता रहता है और जगह-जगह टक्करें मारता रहता है। सिर में दर्द होने से सिर की चमड़ी बिल्कुल सिकुड़ सी जाती है। बच्चे का हाथ बार-बार सिर में ही जाता रहता है और वह अपने कान भी खींचता रहता है।
मूत्राशय की परेशानी : अगर बच्चे के मूत्राशय में दर्द होता है तो बच्चा पेशाब रुकने से बहुत दुखी रहता है और इसी कारण कुछ खाता-पीता भी नहीं है।
दर्द : बच्चे के कम या ज्यादा रोने से उसके तकलीफ (दर्द) समझा जा सकती है। अगर बच्चा कम रोता है तो समझ लेना चाहिए कि बच्चे को तकलीफ (दर्द) कम है और अगर बच्चा रोता ही रहे और जोर-जोर से चिल्लाए तो समझ जाना चाहिए कि बच्चे को तकलीफ (दर्द) ज्यादा है।
दिल का रोग : अगर बच्चा अपने होंठ और जीभ को दांतों से काटे और मुटि्ठयों को भींचे तो समझ जाना चाहिए कि बच्चे के हृदय (दिल) में दर्द है।
पेडू का दर्द :
अगर बच्चे का पाखाना-पेशाब (टट्टी-पेशाब) बंद हो तथा वह उल्टी दिशाओं को देखें तो उसकी वस्ति, पेडू और गुदा में दर्द समझ लेना चाहिए।
अगर बच्चे को पेशाब न आ रहा हो और बार-बार प्यास लगे और बच्चे को बेहोशी छा रही हो तो बच्चे के पेड़ू में दर्द समझ लेना चाहिए। पेट का दर्द : अगर अच्छा स्वस्थ बालक रह-रहकर बार-बार रो उठे, तो समझो उसके पेट में दर्द हो रहा है।
प्यास का रोग : दूध पीने वाले बच्चे को जब प्यास लगती है, तब वह अपनी जीभ बाहर निकलता है।
जुकाम : जब बच्चे को जुकाम होता है और उसकी नाक बंद हो जाती है, तो वह मुंह से सांस लेने के लिए, दूध पीते-पीते बार-बार स्तन को छोड़ देता है और सांस लेकर फिर दूध पीने लगता है।
सांस की परेशानी : अगर सांस लेते समय बच्चे की नाक का छेद बड़ा हो जायें और नाक हिले, तो समझना चाहिए कि बच्चे को सांस लेने में बड़ी परेशानी हो रही है और उसको खांसी से बड़ी तकलीफ है।
बुखार : अगर पता करना है कि बच्चे को कितना बुखार है तो बच्चे के मुंह में थर्मामीटर लगाना चाहिए। बालक की नाड़ी (नब्ज) स्वभाव से ही बहुत तेज चला करती है, इसलिए नाड़ी की चाल (नब्ज चलने की रफ्तार) से धोखा होने का डर रहता है जो जानने वाले अनुभवी वैद्य होते हैं, वह तो धोखा नहीं खाते, पर जो नौसिखिये (न जानने वाले) होते हैं वे धोखा खा जाते हैं। थर्मामीटर से किसी तरह का धोखा नहीं हो सकता है।
जिगर का रोग : बच्चों का पेट स्वभाव से ही कुछ बड़ा होता है। अगर पेट कुछ ज्यादा ही बड़ा हो तो समझ लेना चाहिए कि बच्चे को यकृत (जिगर) या प्लीहा का रोग है अथवा अजीर्ण है। कुछ भी रोग हो पहले अच्छी तरह पता करके कि बच्चे को रोग क्या है फिर दवा देनी चाहिए।
*त्योहारी सीजन में स्वादिष्ट लजीज भोजन के बाद खाएं सौंफ, होंगे ये फायदे*
1 भोजन के बाद रोजाना 30 मिनट बाद सौंफ लेने से कॉलेस्ट्रोल काबू में रहता है।
2 पांच छ ग्राम सौंफ लेने से लीवर और आंखों की रोशनी ठीक रहती है। अपच संबंधी विकारों में सौंफ बेहद उपयोगी है। बिना तेल के तवे पर सिकी हुई सौंफ और बिना तली सौंफ के मिक्चर से अपच होने पर बहुत लाभ होता है।
3 दो कप पानी में उबली हुई एक चम्मच सौंफ को दो या तीन बार लेने से अपच और कफ की समस्या समाप्त होने में मदद मिलती है।
4 अस्थमा और खांसी के उपचार में भी सौंफ का सेवन सहायक है।
5 कफ और खांसी होने पर भी सौंफ खाना फायदेमंद होता है।
6 गुड़ के साथ सौंफ खाने से मासिक धर्म नियमित होने लगते है।
7 यह शिशुओं के पेट और उनके पेट के अफारे को दूर करने में बहुत उपयोगी है।
*खांसी होने पर राहत देंगे आजमाए हुए देसी नुस्खे*
1. गर्म पानी का सेवन आपको सर्दी-खांसी में राहत पहुंचाएगा। जितना हो सके गर्म पानी पिएं। इससे आपका गले में जमा कफ खुलेगा। और आपको राहत मिलेगी।
2. हल्दी वाला दूध जुकाम के लिए काफी फायदेमंद होता है, क्योंकि हल्दी में एंटी ऑक्सीडेंट्स गुण पाएं जाते है। जो कीटाणु से हमारी रक्षा करते हैं। यदि इसका नियमित सोने से पहले सेवन किया जाएं तो सर्दी खांसी की समस्या से निजात मिलता है।
3. आधा चम्मच शहद में एक चुटकी इलायची पाउडर और कुछ बूंदे नींबू के रस की डालिए। इस सिरप का दिन में 2 बार सेवन करें। आपको खांसी-जुकाम से काफी राहत मिलेगी।
4. अदरक, तुलसी, काली मिर्च की मसाले वाली चाय आपको ठंड से तो राहत दिलाएंगी ही साथ ही सर्दी-जुकाम की समस्या को भी ठीक करेगी।
5. आंवला यह सेहत के लिहाज से काफी फायदेमंद होता है। इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन-सी पाया जाता है जो खून के संचार को बेहतर करता है और इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट्स भी होते हैं यह आपकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते है।
6. अदरक बेहद लाभकारी होता है। यदि आप सर्दी खासी से परेशान है, तो आप अदरक के रस में तुलसी मिलाएं और इसका सेवन करें। आप चाहे तो इसमें शहद भी मिला सकते है।
7. अदरक और नमक को खाने से भी आपकी सर्दी गायब हो जाएंगी। बस आपको अदरक को छोटे टुकड़ों में काटना है फिर इसमें नमक लगाकर इसका सेवन करना है।
8. रोज सुबह आप लहसुन की कली का सेवन करें।
*दूध बादाम साथ में लेने से क्या होता है?*
सामग्री :
1 लीटर गाढ़ा दूध, 25 भीगे हुए बादाम, 100 ग्राम शकर, 1/2 चम्मच इलायची पाउडर, केसर के लच्छे।
विधि :
सबसे पहले सोने से पूर्व रात्रि में बादाम भिगो दें। सुबह भिगोए हुए बादाम का छिलका निकाल कर मिक्सी में महीन पीस लें।
अब 1 कटोरी में थोड़ासा दूध लेकर केसर को भिगो दें। दूध को अच्छी तरह उबालें और फिर उसमें बादाम का पेस्ट मिला दें। अब दूध को धीरे-धीरे निरंतर चलाते रहें ताकि वो तले पर चिपके नहीं। इस तरह बादामयुक्त दूध को 20 से 25 मिनट तक उबालने दें, फिर उसमें शकर डालकर थोडी देर तक और पकाएं।
अब केसर को घोंट लें तथा उबलते दूध में मिलाएं, साथ ही इलायची डाल दें। जब दूध अच्छी तरह गाढ़ा हो जाए तो गरमा-गरम दूध गिलास में भरें और स्वादिष्ट तथा पौष्टिक बादाम का दूध पेश करें।
अब जानते हैं दूध-बादाम साथ लेने से क्या फायदा होगा।
1. यह दूध शरीर के साथ-साथ दिमाग के लिए भी फायदेमंद है।
2. यह दूध प्रचुर मात्रा में आयरन और कैल्शियम वाला होने से आपके शरीर के लिए बेहद फायदेमंद है।
3. दूध बादाम का सेवन आपको स्ट्रेस, डिप्रेशन से बचाएगा तथा दिमागी क्षमता में भी बढ़ोतरी करेगा।
4. इस दूध में मौजूद कई पोषक तत्व, जैसे कैल्शियम, ओमेगा 3, प्रोटीन, फाइबर, मैंगनीज, थायमिन आदि आपको एकसाथ प्राप्त होंगे, जो शरीर के लिए लाभदायी होते हैं।
5. सर्दी में होने वाली कब्ज की समस्या के लिए दूध बादाम पीना एक बढ़िया उपाय है, इससे पाचन तंत्र बेहतर कार्य करता है।
6. बादाम का दूध ब्लडप्रेशर रोगियों के एक अच्छा विकल्प है, क्योंकि इसमें मौजूद पोटेशियम ब्लडप्रेशर कंट्रोन करने में मददगार है।
*शहद और दूध का पैक*
शहद न सिर्फ प्राकृतिक मॉइश्चराइजर है, बल्कि कील और मुहांसे के इलाज के लिए एक कारगर कुदरती उपचार भी है। वहीं दूध त्वचा के लिए क्लींजिंग एजेंट का काम करता है जिससे स्किन की टोनिंग भी होती है। दूध में शहद मिला कर बनाए गए फेस पैक को लगाने से त्वचा में कुदरती चमक आती है।
फेस पैक बनाने और लगाने की विधि: थोड़ा सा शहद लें और उसे एक कटोरी दूध में मिला लें। इसे चेहरे पर लगाएं। लेप लगाने के बाद चेहरे की दो मिनट तक मसाज करें। चेहरे पर लेप को 15 मिनट तक छोड़ दें। पंद्रह मिनट के बाद चेहरे को पानी से धो लें।
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*हींग का पानी' पीने के ऐसे असरदार फायदे जो आपने कभी नहीं सुने होंगे*
1 कब्ज की शिकायत होने पर हींग का प्रयोग लाभ देगा। रात को सोने से पहले हींग के चूर्ण को पानी में मिलाकर पिएं और सुबह देखें असर। सुबह पेट पूरी तरह से साफ हो जाएगा।
2 अगर भूख नहीं लगती या भूख लगना कम हो गया है, तो भोजन करने से पहले हींग को घी में भूनकर अदरक और मक्खन के साथ लेने से फायदा होगा और भूख खुलकर लगेगी।
3 त्वचा में कांच, कांटा या कोई नुकीली चीज चुभ जाए और निकालने में परेशानी आ रही हो, तो उस स्थान पर हींग का पानी या लेप लगाएं। चुभी हुई चीज अपने आप ही बाहर निकल आएगी।
4 अगर कान में दर्द हो रहा हो, तो तिल के तेल में हींग को गर्म करके, उस तेल की एक-दो बूंद कान में डालने से कान का दर्द पूरी तरह से ठीक हो जाएगा।
5 दांतों में कैविटी होने पर भी हींग आपके लिए काम की चीज साबित हो सकता है। अगर दांतों में कीड़े हैं, तो रात को दांतों में हींग लगाकर या दबार सो जाएं। कीड़े अपनेआप निकल आएंगे।
*हड्डियों को बनाना है बलवान और कब्ज को करना है साफ, तो जानिए घी के अनमोल नुस्खे*
1 एक चम्मच शुद्ध घी, एक चम्मच पिसी शकर, चौथाई चम्मच पिसी कालीमिर्च तीनों को मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय चाटकर गर्म मीठा दूध पीने से आंखों की ज्योति बढ़ती है।
2 रात को सोते समय एक गिलास मीठे दूध में एक चम्मच घी डालकर पीने से शरीर की खुश्की और दुर्बलता दूर होती है, नींद गहरी आती है, हड्डी बलवान होती है और सुबह शौच साफ आता है।
3 शीतकाल के दिनों में यह प्रयोग करने से शरीर में बलवीर्य बढ़ता है और दुबलापन दूर होता है।
4 घी, छिलका सहित पिसा हुआ काला चना और पिसी शकर (बूरा) तीनों को समान मात्रा में मिलाकर लड्डू बांध लें। प्रातः खाली पेट एक लड्डू खूब चबा-चबाकर खाते हुए एक गिलास मीठा कुनकुना दूध घूंट-घूंट करके पीने से स्त्रियों के प्रदर रोग में आराम होता है, पुरुषों का शरीर मोटा ताजा यानी सुडौल और बलवान बनता है।
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