Wednesday, 18 January 2023

स्वास्थ्य जागरूकता निरोगी जीवन के लिए, पीने के पानी द्वारा...**टी डी एस क्या है..?**टोटल डिसॉल्व्ड सॉलिड**(1). टी.डी.एस. का मतलब हमारे पानी में कुल घुलित ठोस से है।*पानी में मिट्टी में उपस्थित खनिज घुले रहते हैं।भूमिगत जल में ये छन जाते हैं।सतह के पानी में खनिज उस मिट्टी में रहते हैं

*अद्भुत, अजूबा नोनी फल...*
 "एक ही फल में प्रकृति की प्रचुरता"
 ● नोनी एक शक्तिशाली, स्वास्थ्य प्रदान करने वाला भोजन है जो प्रकृति से अधिक स्वास्थ्य, अधिक ऊर्जा, जीवन शक्ति, शरीर के संतुलन और कल्याण के लिए तैयार है।

 ● नोनी को कोशिकाओं और मुद्दों को पुनर्जीवित करने में मदद करने के लिए जाना जाता है, प्रतिरक्षा को बढ़ाता है, बेहतर ताक़त और जीवन शक्ति प्रदान करता है और मानसिक और शारीरिक ऊर्जा को बढ़ाता है।

 ● नोनी एक चमत्कारी फल है जो मानव के सेलुलर स्तर पर कार्य करता है।

 ● नोनी की अच्छाई अब नोनी नेचुरल केंद्रित पाउडर या जूस के रूप में उपलब्ध है।

 ● व्यापक अनुसंधान और विकास टीम ने विशेष रूप से खरीदे गए प्रीमियम नोनी फलों से प्राकृतिक प्रक्रिया द्वारा अद्वितीय उत्पादन विकसित किया है।

 ● नोनी अद्भुत स्वास्थ्य लाभ के साथ चमत्कार फल के रूप में जाना जाता है

 ● नोनी वास्तव में सबसे रोमांचक और आशाजनक प्राकृतिक स्वास्थ्य वर्धक है।
 यह एक पोषण आहार है जो शरीर की कोशिकाओं का समर्थन करता है और स्वस्थ शरीर की ओर जाता है।
 ● यह 45 से अधिक विश्वविद्यालयों द्वारा शोध किया गया है और दस से अधिक देशों में दुनिया भर में और इलाहाबाद विश्वविद्यालय उनमें से एक है।
 ● इसका उपयोग दुनिया भर में लाखों लोग जीवन बदलने वाले परिणामों के साथ करते हैं।
 ● नोनी एक प्राकृतिक आहार अनुपूरक है जो बीमार कोशिका को सामान्य होने में मदद करता है।
 यह हमारे शरीर को विटामिन ए, सी, ई, बी कॉम्प्लेक्स, कैल्शियम, आयरन, नियासिन, फोलिक एसिड, पैंटोथेनिक एसिड, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, जस्ता, तांबा और क्रोमियम, मैंगनीज, मोलिब्डेनम, सोडियम, पोटेशियम और कार्बोहाइड्रेट जैसे खनिजों के साथ समृद्ध करता है।

 ● इसमें स्वास्थ्य वर्धक गुण होते हैं
 जीवाणुरोधी,
 सूजनरोधी,
 एनाल्जेसिक और
 एंटीऑक्सिडेंट और अमीनो एसिड के साथ विरोधी भीड़।

*नोनी के सेवन से बेमिसाल स्वास्थ्य फायदे:*
 ● कोशिकाओं को पुनर्जीवित करता है,
 ● प्रतिरक्षा में सुधार,
 ● ऊर्जा और सहनशक्ति को बढ़ावा देना,
 ● शरीर को डेटॉक्सिफाई करता है,
 ● शुद्ध रक्त,
 ● संक्रमण और बीमारियों से लड़ता है,
 ● याददाश्त और एकाग्रता में सुधार,
 ● पाचन को जोड़ता है और मल त्याग को नियंत्रित करता है,
 ● स्वस्थ जिगर,
 स्वस्थ त्वचा और स्वस्थ बाल बनाए रखें,
 ● स्वस्थ दिल और कोलेस्ट्रॉल के स्तर का समर्थन करें,
 ● वजन प्रबंधन।,
 ● एलर्जी को कम करता है।
 ● मधुमेह का खतरा कम करें,
 ● तनाव और थकान से राहत देता है,
 ● जोड़ों में दर्द और सूजन से राहत दिलाता है,
 ● अति अम्लता से राहत,
 ● अवसाद,
 ● चिंता,
 ● वैरिकाज़ नसों,
 ● बांझपन,
 ● गर्भावस्था,
 ● प्रतिरक्षा विकार,
 ● कैंसर और स्वास्थ्य संबंधी अन्य समस्याएं।

 ● सुरक्षात्मक खाद्य अनुपूरक  अंक।

 ● 100% शाकाहारी और पूरी तरह से हर्बल।

 ● कोई साइड इफेक्ट नहीं।

 ● सभी आयु समूहों के लिए सुरक्षित।

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100 ग्राम    तुलसी की पत्तियां
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तीनो को 2 लीटर पानी में उबालें, उबलने के बाद थोड़ा सहन करने लायक स्थिति में इसमें दोनों पैरों को डुबो कर रखें।

एक बार के प्रयोग से ही जलन और सूजन ठीक हो जाएगी।

कोशिश कर के देखें।

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: *हार्ट अटैक और एंजियोप्लास्टी (स्टंट) का सफल एवं सर्वोत्तम घरेलू उपचार...*
भारत मैं सबसे ज्यादा मौते कोलस्ट्रोल बढ़ने के कारण हार्ट अटैक से होती हैं।
आप खुद अपने ही घर मैं ऐसे बहुत से लोगो को जानते होंगे जिनका वजन व कोलस्ट्रोल बढ़ा हुआ हे।
अमेरिका की कईं बड़ी बड़ी कंपनिया भारत मैं दिल के रोगियों को अरबों की दवाई बेच रही हैं।
लेकिन अगर आपको कोई तकलीफ हुई तो डॉक्टर कहेगा angioplasty (एन्जीओप्लास्टी) करवाओ।
इस ऑपरेशन मे डॉक्टर दिल की नली में एक स्प्रिंग डालते हैं जिसे स्टंट कहते हैं। यह स्टंट अमेरिका में बनता है और इसकी बनने की लागत सिर्फ 3 डॉलर (लगभग 150-180₹) है। इसी स्टंट को भारत मे लाकर 3-5 लाख रूपए मे बेचा जाता है व आपको लूटा जाता है।
डॉक्टरों को लाखों रूपए का कमीशन मिलता है इसलिए वो आपसे बार बार कहता है कि एंजियोप्लास्टी करवाओ।
कोलेस्ट्रॉल, बीपी या हार्ट अटैक आने की मुख्य वजह है, एंजियोप्लास्टी ऑपरेशन।
यह कभी किसी का शायद 100% सफल नहीं होता।
क्यूंकि डॉक्टर, जो स्प्रिंग दिल की नली मे डालता है वह बिलकुल पेन की स्प्रिंग की तरह होती है।
कुछ ही महीनो में उस स्प्रिंग के दोनों साइडों पर आगे व पीछे ब्लॉकेज अर्थात कोलेस्ट्रॉल और चर्बी जमा होना शुरू हो जाती है। इसके बाद फिर आ सकता है दूसरा हार्ट अटैक और डॉक्टर कहता कहता है कि फिर से एंजियोप्लास्टी करवाओ। आपको लाखो रूपए देना पड़ता है, बस आपकी जिंदगी इसी में निकल जाती हैं।

*अब जानिये उसका सर्वोत्तम और सफल घरेलू उपचार...*
■ अदरक (Ginger juice)–
यह खून को पतला करता है।

यह दर्द को प्राकृतिक तरीके से 90% तक कम करता हें।

■ लहसुन (Garlic juice)–
इसमें मौजूद Allicin तत्व कोलेस्ट्रॉल व बीपी को कम करता है।
हार्ट ब्लॉकेज को खोलता है।

■ नींबू (Lemon Juice)–
इसमें मौजूद Antioxidants, Vitamin-C व Potassium खून को साफ़ करते हैं।

ये रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाते हैं।

■ एप्पल साइडर सिरका (सेव का सिरका) (Apple Cider Vinegar) –

इसमें 90 प्रकार के तत्व हैं जो शरीर की सारी नसों को खोलते है, पेट साफ़ करते हैं व थकान को मिटाते हैं।

*इन देशी दवाओं को इस तरह उपयोग में लें:-*
● एक कप नींबू का रस लें;
● एक कप अदरक का रस लें;
● एक कप लहसुन का रस लें;
● एक कप एप्पल का सिरका लें;
चारों को मिला कर धीमीं आंच पर गरम करें,
जब 3 कप रह जाए तो उसे ठण्डा कर लें,
उसमें 3 कप शहद मिला लें,
रोज इस दवा के 3 चम्मच सुबह खाली पेट लें, इससे सारी ब्लॉकेज खत्म हो जाएंगी।

■ इसके साथ ही अर्जुन की छाल जो कि हृदय रोगियों के लिए अमृत सामान हैं, और हृदय की सभी भयंकर बीमारियो के लिए शत प्रतिशत परिणाम देती हैं, इसका एक चम्मच और एक चौथाई चम्मच दाल चीनी का 2 गिलास पानी में या (एक गिलास गाय का दूध और एक गिलास पानी मिक्स कर के) इसमें डाले, और इसको आधा रहने तक उबाले, फिर इसको छान कर रात को सोते समय पी लें।

■ अगर लौकी का मौसम है तो सुबह खाली पेट लौकी का जूस निकालें, 5-5 पत्ते तुलसी और पोदीना के डाल कर इसमें स्वादानुसार सेंधा नमक डाल सकते हैं, इसको पीजिये।

तो ये तीनो प्रयोग हृदय रोगियों के सर्वोत्तम हैं।

आगे आपकी मर्जी, मानो या न मानो क्योंकि दिल भी आपका और शरीर भी आपका।




*नहाने का वैज्ञानिक तरीका-  (Must read to have Scientific knowledge about proper way of taking bath)*


*अपने बच्चों, बुजुर्गों एवं खुद के स्वस्थ एवं सुरक्षित जीवन के लिये इस पोस्ट को अवश्य पढे और पढ़ायें.!*

*क्या आपने कभी अपने आस पास ध्यान से देखा या सुना है कि नहाते समय बुजुर्ग को लकवा लग गया?*

*दिमाग की नस फट गई ( ब्रेन हेमरेज), हार्ट अटैक आ गया |*

*छोटे बच्चे को नहलाते समय वो बहुत कांपता रहता है, डरता है और माता समझती है की नहाने से डर रहा है,*

*लेकिन ऐसा नहीँ है; असल मे ये सब गलत तरीके से नहाने से होता है ।*

*दरअसल हमारे शरीर में गुप्त विद्युत् शक्ति रुधिर (खून) के निरंतर प्रवाह के कारण पैदा होते रहती है, जिसकी स्वास्थ्यवर्धक प्राकृतिक दिशा ऊपर से आरम्भ होकर नीचे पैरो की तरफ आती है।*

*सर में बहुत महीन रक्त् नालिकाये होती है जो दिमाग को रक्त पहुँचाती है।*

*यदि कोई व्यक्ति निरंतर सीधे सर में ठंडा पानी डालकर नहाता है तो ये नलिकाएं सिकुड़ने या रक्त के थक्के जमने लग जाते हैं*

*और जब शरीर इनको सहन नहीं कर पाता तो ऊपर लिखी घटनाएं वर्षो बीतने के बाद बुजुर्गो के साथ होती है।*

*सर पर सीधे पानी डालने से हमारा सर ठंडा होने लगता है, जिससे हृदय को सिर की तरफ ज्यादा तेजी से रक्त भेजना पड़ता है, जिससे या तो बुजुर्ग में हार्ट अटैक या दिमाग की नस फटने की अवस्था हो सकती है।*

*ठीक इसी तरह बच्चे का     नियंत्रण तंत्र भी तुरंत प्रतिक्रिया देता है जिससे बच्चे के काम्पने से शरीर में गर्मी उत्पन्न होती है , और माँ समझती है की बच्चा डर रहा है ।*

*गलत तरीके से नहाने से बच्चे की हृदय की धड़कन अत्यधिक बढ़ जाती है स्वयं परीक्षण करिये।*
.
*तो आईये हम आपको नहाने का सबसे सही तरीका बताते है |*

*बाथरूम में आराम से बैठकर या खड़े होकर सबसे पहले पैर के पंजो पर पानी डालिये , रगड़िये, फिर पिंडलियों पर, फिर घुटनो पर, फिर जांघो पर पानी डालिये और हाथों से मालिश करिये|*

*फिर हाथो से पानी लेकर पेट को रगड़िये | फिर कंधो पर पानी डालिये, फिर अंजुली में पानी लेकर मुँह पर मलिए | हाथों से पानी लेकर सर पर मलिए।*

*इसके बाद आप शावर के नीचे खड़े होकर या बाल्टी सर पर उड़ेलकर नहा सकते है।*

*इस प्रक्रिया में केवल 1 मिनट लगता है लेकिन इससे आपके जीवन की रक्षा होती है। और इस 1 मिनट में शरीर की विद्युत प्राकृतिक दिशा में ऊपर से नीचे ही बहती रहती है क्योंकि विद्युत् को आकर्षित करने वाला पानी सबसे पहले पैरो पर डाला गया है।*

*बच्चे को इसी तरीके से नहलाने पर वो बिलकुल कांपता डरता नहीं है।*

*इस प्रक्रिया में शरीर की गर्मी पेशाब के रास्ते बाहर आ जाती है आप कितनी भी सर्दी में नहाये कभी जुखाम बुखार नहीं होगा*

*कृपया इस पोस्ट को आगे भेजें ,यह छोटे बच्चों ,बुज़ुर्गों के लिये बहुत उपयोगी है ।*
                                                                *विन्रम विनती:*
*आप सब से विनती है कि इस मैसेज को ज्यादा से ज्यादा प्रसारित करें।*

: *अगर आप भी करते हैं रिफाइंड आयल का सेवन तो इस लेख को पढ़ने के बाद आप भी हो जाएंगे सावधान...*

हर कोई आजकल अपनी फिटनेस को लेकर चिंतित रहता ह्यें और इसके लिए कई जतन करते हैं, इसी के चलते लोग आजकल रिफाइंड आयल को खाना ज़्याद प्रेफर कर रहे हैं, क्यूकी इसमें फैट कम होता हैं, आजकल रिफाइंड आयल के बेनिफिट्स और उनकी मार्केटिंग को ले कर बहुत विज्ञापन आते हैं, उन विज्ञापनों में ऐसा बोला जाता हैं की यह सेहत के लिए अच्छा हैं, दिल के लिए अच्छा हैं, इसे खाने से आप मोटे नहीं होंगे आदि और आप कही ना कही आज सरसो के तेल से ज़्यादा रिफाइंड खाना पसंद करते होंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं रिफाइंड तेल के खाने के भी कई नुक्सान हैं जो इस प्रकार से हैं.!

*रिफाइंड तेल खाने के जानलेवा नुक्सान:*
*किस प्रकार तेल किया जाता हैं रिफाइंड:*
रिफाइंड आयल बनाने के लिए तिलहन में इसे 200 से 500 डिग्री सेल्सियस तक गरम किया जाता हैं, इसके साथ ही बीजो से तेल निकालने के लिए खतरनाक पेट्रोलियम तत्व हेग्जेन का प्रयोग भी किया जाता हैं! जो की सेहत के लिए अच्छा नहीं हैं.!

*डायबिटीज होने का होता हैं खतरा:*
हलवाई और भोजनालय में भी आजकल वनस्पति घी या रिफाइन्ड तेल का प्रयोग चलन में हैं और व्यंजनों को तलने के लिए तेल को बार-बार गर्म करते हैं!
*इस तरह से अगर तेल को बार-बार गरम किया जाता हैं तो यह जहर से भी बदतर हो जाता है,* शोधकर्ता इन्ही को डायबिटीज का प्रमुख कारण मानते हैं.!
इस प्रकार आप इस तरह मधुमेह के शिकार भी हो सकते हैं.!

*ऊतकों को पहुँचती हैं क्षति:*
शोधकर्ताओं की माने तो इसको इतने ज़्यादा डिग्री पर गरम करने के कारण इसमें हने नामक टॉक्सिक पदार्थ सृजित होता हैं, यह घातक तत्व शरीर में ऊतकों को प्रोटीन वा अन्य आवश्यक तत्व को छति पहुँचाते हैं, इसके कारण स्ट्रोक, अल्जाईमर, पार्किसन जैसे घातक रोग होने का खतरा बढ़ जाता हैं.!

*इस तरह से नुक्सान पहुचाये हमारा प्यारा रिफाइंड आयल:*
रिफाइंड आयल के कारण शरीर में ओमेगा-3 वा ओमेगा-6 का अनुपात पूरी तरह से बिगड़ जाता हैं जिसके कारण बहुत से रोह होने की आशंका बढ़ जाती हैं, जो सेहत के लिए सही नहीं हैं. जब शरीर में इनका अनुपात बिगड़ जाता हैं तो हमारी कोशिकाएं इन्फ्लेम हो जाती हैं, सुलगने लगती हैं और यहीं से ब्लडप्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, डिप्रेशन, आर्थ्राइटिस और कैंसर आदि रोगों की शुरूवात हो जाती है.!

*केमिकल और केमिकल का होता हैं इस्तेमाल:*
किसी भी तेल को रिफाइंड करने में 6 से 7 केमिकल का प्रयोग किया जाता है और डबल रिफाइन करने में ये संख्या 12 -13 हो जाती है, तो आप यहाँ से समझ लें की यह आपको कितना नुक्सान पहुँचा सकता हैं।
तेल को साफ़ करने के लिए जितने केमिकल इस्तेमाल किये जाते हैं सब इनऑर्गेनिक हैं और इनऑर्गेनिक केमिकल ही दुनिया में जहर बनाते हैं और उनका कॉम्बिनेशन जहर के तरफ ही ले जाता है, इसीलिए रिफाइंड तेल वा दुबले रिफाइंड तेल को गलती से भी ना खाएं।
प्रोटीन वाला घटक गायब हो जाता है:
पड़तीं शरीर के विकास के लिए ज़रूरी हैं,
सभी तेलों में कम से कम 4 -5 तरह के प्रोटीन हैं,
रिफाइंड आयल बनाने के लिए आप जैसे ही तेल की बास निकालेंगे,
उसका प्रोटीन वाला घटक गायब हो जाता है और चिपचिपापन निकाल दिया तो उसका फैटी एसिड गायब।
अब ये दोनों ही चीजें निकल गयी तो वो तेल नहीं पानी है जैसा हो जाता हैं।
इस प्रकार ऐसे रिफाइंड तेल के खाने से कई प्रकार की बीमारियाँ होती हैं,
जो कि इस प्रकार से हैं...
घुटने का दुखना,
कमर का दुखना,
हड्डियों में दर्द,
हृदयघात के संभावना का बढ़ना,
पैरालिसिस का होना,
ब्रेन का डैमेज हो जाना...
आदि बीमारियां होने का खतरा बहुत ज़्यादा बढ़ जाता हैं , जिन-जिन घरों में पूरे मनोयोग से रिफाइंड तेल खाया जाता है उन्ही घरों में ये समस्या आप पाएंगे, जिनके यहाँ रिफाइंड तेल इस्तेमाल हो रहा है उन्ही के यहाँ हार्ट ब्लॉकेज और हार्ट अटैक की समस्याएं हो रही है।

in this article we are providing you whole information about refined oil, and its disadvantages to health, how bad it effects on our body.

Rest up to you whether you use or stop using.

 *स्वास्थ्य जागरूकता निरोगी जीवन के लिए, पीने के पानी द्वारा...*
*टी डी एस क्या है..?*
*टोटल डिसॉल्व्ड सॉलिड*
*(1). टी.डी.एस. का मतलब हमारे पानी में कुल घुलित ठोस से है।*
पानी में मिट्टी में उपस्थित खनिज घुले रहते हैं।
भूमिगत जल में ये छन जाते हैं।
सतह के पानी में खनिज उस मिट्टी में रहते हैं जिस पर पानी का प्रवाह होता है (नदी/धारा) या जहां पानी ठहरा रहता है जैसे झील/ तालाब/ जलाशय)।
पानी में घुले खनिज को आम तौर पर कुल घुलित ठोस, टीडीएस कहा जाता है।
पानी में टी.डी.एस. की मात्रा को मिलीग्राम/लीटर (एमजी/ली) या प्रति मिलियन टुकड़े (पी.पी.एम. पार्टिकल्स पर मिलियन) से मापा जा सकता है।
ये इकाइयां एक समान हैं।
खनिज मूलतः कैल्शियम (Ca), मैग्नीशियम (Mg) और सोडियम (Na) के विभिन्न अवयव होते हैं।
पानी में खारापन सीए और एमजी के विभिन्न अवयव मसलन कैल्शियम या मैग्नीशियम क्लोराइड, कैल्शियम और मैग्नीशियम सल्फेट (CaSo4, MgCl etc) के कारण होता है।
कम मात्रा के बावजूद कुछ घुले हुए ठोस पदार्थ ख़तरनाक होते हैं।
मसलन आर्सेनिक, फ्लोराइड और नाइट्रेट।
पानी में इन पदार्थों की स्वीकृत स्तर के कुछ तय मानक हैं।
हालांकि फ्लोराइड के सुरक्षित मात्रा के बारे में कुछ असहमतियां भी हैं।
फ्लूराइड और आर्सेनिक जैसे नुकसानदायक रसायनों को छोड़ दिया जाए तो पीने के पानी में कुछ मात्रा में खनिज (टीडीएस) रहने चाहिए लेकिन इनकी मात्रा ज़रूरत से अधिक न हो।

*(2). टीडीएस के मानक क्या हैं ?*
भारत में बी.आई.एस. 10500-1991 मानक लागू हैं।
यह मानक विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यू.एच.ओ. के मानक के आधार पर बना है।
हालांकि इसमें समय समय पर काफी संसोधन किए गए हैं।
इसका कारण है कि हमारे यहां आपूर्ति किया जाने वाले पीने का पानी इतना दूषित हो गया है कि इसमें टीडीएस, कठोरता, क्लोराइड जैसे पदार्थों की मात्रा तय मानक से बहुत अधिक हो चुकी है।
ऐसे में इनकी उपस्थिति की स्वीकार्य सीमा बढाई गई।
आमतौर पर अगर पीने के पानी में टीडीएस की मात्रा 500 एमजी/लीटर से अधिक हो जाती है तो यह अरुचिकर हो जाता है।
लेकिन पानी को कोई अन्य बेहतर स्रोत नहीं होने के कारण लोग इस पानी के आदी हो जाते हैं।
बी.आई.एस. मानक मानव के लिए पीने के पानी की स्वीकार्य गुणवत्ता तय करता है।
व्यावहारिक तौर पर सभी औद्योगिक और कुछ पेशेवर इस्तेमाल के लिए पानी का शुद्धता स्तर काफी अधिक होना चाहिए।
अधिकतर मामलों में एक तरह से कोई भी ठोस घुला नहीं होना चाहिए।
बी.आई.एस. मानक कहता है कि अधिकतम इच्छित टीडीएस की मात्रा 500 एमजी/लीटर और पानी के किसी बेहतर स्रोत के अभाव में अधिकतर अनुमन्य स्तर 2000 एमजी/लीटर है।
इसी तरह कठोरता यानि कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO3) का अधिकतम इच्छित स्तर 300 एमजी/लीटर और अधिकतम अनुमन्य स्तर 600 एमजी/लीटर है।

*संदर्भ*
*डब्ल्यू.एच.ओ. मानक:*
1000 एमजी/लीटर से कम टीडीएस सघनता के स्तर का पानी आमतौर पर पीने के लिए उचित है।
हालांकि इस स्वीकार्यता में परिस्थितियों के अनुसार फर्क हो सकता है।
पानी, टीडीएस के उच्च स्तरीय स्वाद के कारण पीने योग्य नहीं होता।
साथ ही इससे पाइपों, हीटरों, बॉयलरों और घरेलू उपकरणों के ख़राब होने का ख़तरा बढ़ जाता है।
(कठोरता का खंड भी देखें)
बेहद कम टीडीएस सघनता वाला पानी भी अपने फीके स्वाद की वजह से पीने लायक नहीं होता है।
साथ ही यह अक्सर यग जलापूर्ति प्रणाली के लिए नुकसानदायक भी होता है।

*संदर्भ*
*यू.एस. / ई.पी.ए. मानक:*
अमेरिका की पर्यावरणीय संरक्षण एजेंसी (ईपीए) मोटे तौर पर पीने के पानी के दो मानक स्वीकार करती है।
इन्हें अधिकतम प्रदूषण स्तर लक्ष्य (एम.सी.एल.जी.) और द्वितीयक अधिकतम प्रदूषण स्तर (एस.एम.सी.एल.) कहा जाता है।
एम.सी.एल.जी. सघनता का एक ऐसा स्तर है जिसका मानव स्वास्थ्य पर बुरा असर नहीं पड़ता।इसमें सुरक्षा का पर्याप्त ध्यान रखा जाता है।
दूसरी ओर एस.एम.सी.एल. का स्तर एक स्वैच्छिक दिशानिर्देश है जिससे मानव स्वास्थ्य पर कोई ख़तरा नहीं है।
ई.पी.ए. ने जहां एम.सी.एल.जी. के तहत कोई सीमा नहीं तय की है वहीं एसएमसीएल के लिए ऊपरी सीमा 500 एमजी/लीटर है।
यह सीमा इसलिए तय की गई है ताकि पानी की गंध, स्वाद और रंग में ऐसा प्रभाव न पड़े कि वह मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो या पानी की पाइपलाइन या अन्य उपकरणों में जंग, काई, क्षरण जैसी कोई समस्या न पैदा हो।
हालांकि एम.सी.एल.जी. के तहत टीडीएस की कोई सीमा तय नहीं की गई है लेकिन अधिक टीडीएस वाले पानी में कई हानिकारक पदार्थ हो सकते हैं जिनका स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।

*बेहद कम टीडीएसः*
फीके या बेस्वाद और उपयोगी खनिज की कमी के कारण बहुत कम टीडीएस स्तर वाला पानी भी कई तरह की समस्याएं खड़ी करता है।
80 एमजी/लीटर से कम स्तर वाले पानी को आमतौर पर उपयोग के लिए ठीक नहीं समझा जाता।

(3). मापन:
एक सस्ते उपकरण टी.डी.एस. मीटर की मदद से बहुत आसानी से पानी के टी.डी.एस. स्तर को मापा जा सकता है।
इसकी कीमत बमुश्किलन 2000 रुपये है और बाद में केवल बैटरी बदलने का ख़र्च आता है।
इसका इस्तेमाल कुएं, पाइप या पैकेज्ड पानी और बारिश के पानी के टी.डी.एस. स्तर को मापने में किया जा सकता है।
ध्यान रहे कि बारिश के पानी का टी.डी.एस. बेहद कम होता है।
पानी के टी.डी.एस. में अचानक आया बदलाव संकेत देता है कि पानी उच्च टीडीएस वाले पानी से प्रदूषित हो रहा है।

(4). शुद्धिकरण
पानी की अशुद्धता को दूर करने के यू.वी., यू.एफ. और अन्य पारंपरिक तरीकों का टीडीएस पर असर नहीं पड़ेगा।
इसके लिए केवल रिवर्स ऑसमोसिस ही कारगर होता है।

*रिवर्स ऑसमोसिस..*
रिवर्स ऑसमोसिस यानी आर.ओ. घरों में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली पानी को स्वच्छ करने की एक मात्र ऐसी प्रणाली है जो घुली हुई अशुद्धता को खत्म कर देती है।
अगर टी.डी.एस. की मात्रा एक ख़ास स्तर से बढ़ जाती है तो आर.ओ. की ज़रूरत होती है। (टी.डी.एस. का ऊपरी स्तर क्या है ?
इस पर आई.डब्ल्यू.पी. पर हुई चर्चा देखें)
अगर आपको लगता है कि सीवेज़, कीटनाशक,भारी धातु या औद्योगिक उत्सर्जन से आपका पानी दूषित हो गया है तब भी आरओ का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
आर.ओ. के साथ एक परेशानी यह है कि इसके लिए काफी पानी की ज़रूरत होती है।
यह गंदे पानी को दो भागों में बांटता है और घुले हुए ठोस पदार्थों को एक हिस्से से दूसरे हिस्से में फेंकता है।
ऐसे में आर.ओ. से पानी की दो धाराएं निकलती हैं।
एक ‘साफ़’ पानी की जिसमें कम टीडीएस और अन्य अशुद्धियां होती हैं।
दूसरी गंदे पानी की जो पहले से भी कहीं अधिक गंदा होता है।
आमतौर पर आरओ में डाले गए 3 लीटर पानी में एक लीटर साफ़ और दो लीटर गंदा पानी बाहर निकलता है।
वैसे आर.ओ. से निकले गंदे पानी का इस्तेमाल फर्श पर पोछा लगाने में किया जा सकता है।
लेकिन बहुत कम लोग ही ऐसा करते हैं।
टी.डी.एस. की कमी से पानी का स्वाद और पी.एच. बदल जाता है।
टी.डी.एस. बहुत कम कर देना भी अच्छा नहीं है।
कुछ कंपनियां एक मिश्रित मशीन बनाते हैं जिसमें आर.ओ. के साथ-साथ यू.एफ. या यू.वी. के गुण भी होते हैं।
पानी की भारी मात्रा से घुले ठोस पदार्थों को निकालने के लिए आरओ का इस्तेमाल किया जाता है।
इसके अलावा सूक्ष्म जीवाणुओं को मारने के लिए यूएफ या यूवी का इस्तेमाल किया जाता है लिए इसे घुले ठोस पदार्थ रह जाते हैं।
इन दोनों प्रणालियों के मिश्रण से घुले ठोस पदार्थों का निम्न स्तर बनाए रखा जा सकता है।
इन दोनों के अनुपात को नियंत्रित किया जा सकता है।
आर.ओ. की कीमत 10,000 से 15,000 रुपये के बीच होती है।
आरओ दबाव के साथ काम करता है जिसे एक आंतरिक पंप से पैदा किया जाता है।
ऐसे में आर.ओ. के लिए बिजली की ज़रूरत होती है।
अगर पानी में टी.डी.एस. का स्तर 1000 से अधिक हो तो पारंपरिक घरेलू आरओ उतने प्रभावी नहीं भी होते हैं।
ऐसे में बारिश के पानी का संरक्षण यानी रेन हार्वेस्टिंग एक स्थायी विकल्प है।
ख़ासकर जहां पानी में टीडीएस या कठोरता की मात्रा बहुत ज़्यादा हो।
बारिश के पानी में टी.डी.एस. केवल 10-50 मिग्रा/लीटर होता है।
पानी को मृदु बनाने से उसके टी.डी.एस. नहीं कम होते।
पानी को मृदु बनाने की प्रक्रिया में घुले हुए ठोस में सोडियम का स्थान कैल्शियम या मैग्नीशियम ले लेते हैं जिससे टीडीएस की मात्रा में मामूली कमी होती है।

अतः आर.ओ. की खरीदारी करते समय, अपने पैसे का नही बल्कि विवेक का इस्तेमाल करें।

*अगर ये आर्टिकल आपको स्वास्थ्यवर्धक एवं जीवन रक्षक लगता है तो इसे लोगों तक पहुंचाएं क्योंकि ये नेक काम है।*

: *100% नेचुरल, नैसर्गिक प्राकृतिक शक्तियों से भरपूर पूरे परिवार के लिए "बी-पोलेन"...*
*प्रोडक्ट कोड 7/10/Bee*

*अधिकांश लोगों से अनजान अद्भुत अमृतमय मधुमक्खियों द्वारा निर्मित धरती का अमृत "पराग" या "बी-पॉलन".!*

*क्या आप मात्र एक चम्मच से 5 किलो गाय का दूध, 5 किलो हरी सब्जियां, 5 किलो फल और बहुत सारे एन्टी ऑक्सीडेंट्स चाहते हैं.?*

*बी-पॉलन में फूलों का पराग, रस, एन्ज़ाइम्स, शहद और बी सीक्रेशन का मिक्सचर होता है!*
*मधुमक्खी जब अपने छत्ते पर शहद इकठ्ठा करती है तो शहद के साथ साथ उस छत्ते पर कुछ पराग कण भी इकठ्ठा हो जाते हैं और फिर ये दानों का आकार ले लेते हैं यही दाने सूखकर बी-पॉलन (Bee-Pollen) कहलाते हैं।*

जो लोग डायबिटीज, हाइपरटेंशन, ऑटो इम्यून या कैंसर जैसी बीमारियों से ग्रसित हैं उन्हें बी-पॉलन का सेवन ज़रूर करना चाहिये।

बी-पॉलन और उसके फायदों के बारे में अभी भी बहुत कम लोग जानते हैं।
आपको बता दें कि यह मधुमक्खियों द्वारा इकठ्ठा किया गया फूलों के परागकण का ढेर होता है जो उनके आहार के रूप में काम आता है।
इसमें लगभग 40% प्रोटीन पाया जाता है और इसके अलावा इसमें पोषक तत्वों की मात्रा भी काफी ज्यादा होती है। इसका सेवन इंसानों के लिए भी बहुत फायदेमंद है।

काफी समय पहले से ही बी-पॉलन को न्यूट्रीशनल सप्लीमेंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
ताजे बी-पॉलन में प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स, कार्बोहाइड्रेट के अलावा लैक्टिक एसिड और फ्लेवेनॉयड जैसे यौगिक भी होते हैं।
चायनीज मेडिसन में इसके फायदों को देखते हुए जर्मन फेडरेल बोर्ड ऑफ़ हेल्थ द्वारा इसे ऑफिशियल मेडिसिन घोषित किया है।

*इन्फ्लेमेशन (सूजन) कम करने में मदद :*
साल 2010 में फार्मसूटिकल बायोलॉजी जर्नल के अनुसार बी-पॉलन में ऐसे एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जिस वजह से ये जोड़ों के दर्द, एक्ने और कई इंफ्लेमेटरी डिजीज से राहत दिलाने में मदद करती है।

*मांसपेशियों की मजबूती :*
फ्रेश बी पॉलन मसल्स रिकवरी रेट को बढ़ाने में बहुत मदद करते हैं।

साल 2014 में किये शोध के अनुसार जो लोग पोषक तत्वों की कमी से होने वाले रोगों से परेशान रहते हैं उनके लिए यह बहुत ही फायदेमंद है।

अगर आप वजन कम करने की सोच रहे हैं तो आपको बी-पोलन का सेवन बढ़ा देना चाहिये।
जो लोग डायबिटीज, हाइपरटेंशन या कैंसर जैसी बीमारियों से ग्रसित हैं उन्हें बी-पोलन का सेवन ज़रूर करना चाहिये।

*एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर :*
आप कैफीन युक्त ड्रिंक पीने की बजाय बी-पॉलन से निर्मित चाय का सेवन कर सकते हैं।
इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट की मात्रा बहुत ज्यादा होती है और इसी वजह से जो लोग कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों, डायबिटीज, हाइपरटेंशन या कैंसर जैसी बीमारियों से ग्रसित हैं उनके लिए बी-पॉलन बहुत ज्यादा फायदेमंद है।

*इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार :*
साल 2014 में एक शोध में बताया गया कि बी-पॉलन में पर्याप्त मात्रा में एंटी-माइक्रोबियल, एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी क्षमताएं होती हैं और इसके सेवन से कैंडिडा और स्टाफ इन्फेक्शन जैसी बीमारियों से बचाव होता है।

निरोगी काया के लिये बी-पॉलन की बिक्री मैं किलो में ही करता हूं क्योंकि ये महंगाई के अनुसार तो महंगा है परन्तु स्वास्थ्य की दृष्टि से एकदम सस्ता या मुफ्त जैसा है।

ये ग्रेन्युल के रूप में आता है।
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*निःशुल्क परामर्श*
 1- शुगर (मधुमेह)
 2- ब्लड प्रेशर (हाई/लो)
 3- हृदय रोग
 4- कोलेस्ट्रॉल
 5- दमा (अस्थमा)
 6- लकवा (पैरालिसिस)
 7- स्वाइन फ्लू
 8- थाइराॅयड
 9- माइग्रेन
10- थकान
11- अर्थराइटिस
12- गठिया
13- जोड़ों का दर्द
14- कमर में दर्द
15- बदन दर्द
16- एकाग्रता की कमी      
17- मोटापा
18- त्वचा/चर्म रोग
19- सोराइसिस
20- बवासीर
21- एसिडिटी
22- श्वसन सम्बन्धी
23- पाचन सम्बंधित 
24- लीवर से जुडी कोई भी परेशानी
25- अनिद्रा
26- अनीमिया (खून की कमी)
27- मानसिक तनाव
28- खांसी 
29- साईनस
30- पेट में गैस बनना
31- पैरो-हाथो मे जलन
32- आखों से संबंधित
33- स्वेद प्रदर (सफेद या गाढ़ा द्रव)
34- अनियमित मासिक धर्म 
35- बांझपन 
36- नपुंसकता   
37- पथरी
38- एलर्जी 
39- किसी भी प्रकार का नशा 
40- बच्चेदानी में रसोली
41- कैंसर 
42- भूख न लगना 
43- नसों की बलौकेज
44- टी बी/ क्षयरोग
45- दांतों की कोई भी समस्या
46- फाइलेरिया
47- सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस
48 - फ्रोज़न शोल्डर
49 - टेनिस एल्बो
50 - डिप्रेशन


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