ऐ,धूप तुम मेरे आंगन में फुर्सत से आना,
तुम्हारी गर्माहट में बैठ कुछ बातें करेंगे,
कुछ मन का तो कुछ टोपी मफलर उतार कर तन का बोझ हल्का करेंगे ।
ऐ,धूप तुम मेरे आंगन में फुर्सत से आना,
तुम्हें आते देख ,दादी माॅ आचार की गाजर मूली सुखाने ले आयेंगी,
और मेरी माँ गीले कपड़ो को रस्सी पर सुखाती हुई, तुम्हे खरी खोटी सुनाएगी,
पर तुम बुरा मत मानना ।
ऐ धूप तुम मेरे आंगन में फुर्सत से आना,
तुम्हे आते देख, कुछ मेरी सखियाँ भी चली आयेंगी,
गर्म चाय के साथ गर्मागर्म पकौड़ौ का लुत्फ भी उठाएंगी,
कुछ तुम से पर्दा कर, अपना मुंह ढक कर तुम्हे पीठ दिखाएगी,
पर तुम बुरा मत मानना,
ऐ धूप तुम मेरे आंगन मे फुर्सत से आना ।
तुम्हे आते देख, पूरा परिवार आंगन मे आयेगा,
जिसे जहां जगह मिलेगी, वहीं बैठ जायेगा,
मूंगफलियां खाकर छिलकें ईधर उधर फैलायेगा,
बहुत दिनो के बाद निकली आज धूप, फिर यही तानें दोहरायेगा,
पर तुम बुरा मत मानना ।
ऐ धूप तुम मेरे ऑगन मे फुर्सत से आना ,
क्योंकि, तुम हो तो मेरे आंगन की तुलसी हरी है ,
तुम हो तो मेरी थाली दादी माॅ के आचार से सजी है,
तुम हो तो मेरा परिवार साथ समय बिताता है ,
तुम हो तो मेरे ऑगन मे सखियों के ठहाके हैं ,
तुम हो तो मेरे आंगन मे जीवन की चहल पहल है,
ऐ , धूप तुम मेरे आंगन मे फुर्सत से आना,
फुर्सत से आना ।
🙏🙏🌹🌹i
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